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सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में CM मोहन यादव का पैतृक मकान भी शामिल, भवन पर लगाए लाल निशान

उज्जैन   विकास के लिए अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आ गया है। नगर निगम ने मार्ग चौड़ा करने के लिए उनके, उनकी बहन तथा नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव के मकान सहित 272 मकानों पर लाल निशान लगाया है। बताया कि मार्ग चौड़ा करने के लिए मकान का कितना हिस्सा तोड़ना जरूरी है। खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसकी नपती और मकानों पर निशान लगाने की कार्रवाई काफी हद तक पूरी हो चुकी है। करीब 9.80 करोड़ रुपये की इस परियोजना में सड़क की तय सीमा को आधार बनाया गया है। यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है मुख्यमंत्री परिवार की संपत्ति भी इसी प्रक्रिया में चिह्नित होने से यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है। खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक का यह मार्ग पुराने शहर की महत्वपूर्ण कड़ी है। सिंहस्थ 2028 के दौरान बढ़ने वाले यातायात को देखते हुए इसे चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। निगम की टीम प्रभावित भवनों की नपती और मार्किंग कर रही है। अब अगले चरण में प्रभावित संपत्तियों और उनके हिस्सों को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। 1974 में बना था मुख्यमंत्री का पैतृक मकान मुख्यमंत्री का पैतृक मकान वर्ष 1974 में उनके दादा रामचंद्र यादव ने बनवाया था। इसी मकान में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, निगम अध्यक्ष कलावती यादव, भाई नंदलाल यादव, नारायण यादव और ग्यारसी बाई का बचपन बीता। वर्तमान में मुख्यमंत्री के चाचा शंकरलाल यादव का परिवार यहां निवास करता है। चौड़ीकरण के लिए इस मकान के प्रभावित हिस्से पर भी निगम ने लाल निशान लगाया है। ‘हमारा मकान भी आ रहा, विकास में सहयोग करेंगे’ निगम अध्यक्ष कलावती यादव ने ‘नईदुनिया’ से कहा कि खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक सड़क चौड़ीकरण में उनका पैतृक मकान भी आ रहा है। क्षेत्र के सभी लोग उनके परिवार जैसे हैं। विकास कार्य में किसी के साथ भाजपा-कांग्रेस या हिंदू-मुस्लिम के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रभावित नागरिकों की समस्याओं को अधिकारियों के साथ चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा। 62 सड़कों का चौड़ीकरण, 29 किमी घाट भी सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में 62 प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण की योजना पर काम चल रहा है। शिप्रा के दोनों किनारों पर करीब 29 किलोमीटर घाटों का विकास किया जाएगा। सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी डैम और खान डायवर्जन जैसी बड़ी परियोजनाएं भी इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा हैं। कंठाल, तेलीवाड़ा और सराफा क्षेत्र में चौड़ीकरण का काम पूरा हो चुका है। अब पुराने शहर के इस मार्ग पर 272 भवनों की मार्किंग ने सिंहस्थ की तैयारियों के बीच होने वाले बड़े बदलाव की तस्वीर सामने ला दी है।

ग्रीन गैस बिल के नाम पर APK फाइल भेजकर ठगी, एक महीने में 33 से ज्यादा मामले

लखनऊ साइबर जालसाज ग्रीन गैस का नाम लेकर लखनऊ वालों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। 24 घंटों में जालसाजों ने तीन लोगों के खातों से 11.58 लाख रुपये उड़ा लिए। ये मामले पीजीआई, इंदिरानगर और कृष्णानगर थाना क्षेत्र के हैं। पुलिस ने तीनों मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर जांच साइबर क्राइम सेल को सौंपी है। महज 30 दिनों में पांच करोड़ की ठगी गई है। 24 घंटों में ग्रीन गैस उपभोक्ताओं से ठगी का यह सातवां मामला है। वृंदावन योजना सेक्टर-6 स्थित समीहा मेलरोज एवेन्यू निवासी 70 वर्षीय देशराज सिंह ने बताया कि 20 सितंबर को उनके मोबाइल पर कॉल आई। जालसाज ने खुद को ग्रीन गैस कर्मी बताकर बिल पेंडिंग होने की बात कही। भुगतान के लिए एक एप डाउनलोड कराया। व्हाट्सऐप पर एपीके फाइल भेजकर ठगी इसके बाद उनके यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते से छह बार में 6,02,540 रुपये निकाल लिए गए। रुपये कटने का मैसेज देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बैंक में शिकायत के बाद पीड़ित ने पीजीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। वहीं, इंदिरानगर के तकरोही बाजार सूर्या सिटी निवासी सरिता का खाता इंडियन बैंक और यूनियन बैंक में है। उन्होंने बताया कि साइबर जालसाज ने यूपीआई के माध्यम से उनके खाते से 2.66 लाख रुपये गायब कर दिए। 1930 पर शिकायत के बाद पीड़िता ने इंदिरानगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। तीसरी घटना कृष्णानगर के आशुतोष नगर निवासी आस्था जैन के साथ हुई। उनका खाता एचडीएफसी बैंक में है। उन्होंने बताया कि जालसाज ने 10 सितंबर को व्हाट्सऐप पर एपीके फाइल भेजी। ऐप पर क्लिक करते ही खाते से 2.90 लाख रुपये निकल गए। आंकड़े बता रहे हैं कि ग्रीन गैस बिल के नाम पर एक माह में 33 से अधिक ठगी की घटनाएं हो चुकी हैं। व्हाट्सऐप कॉल कर ठगों ने फंसाया ठाकुरगंज निवासी शीला देवी ने बताया कि चार सितंबर को व्हाट्सऐप काल आई। इसके बाद उनके खाते से 12 ट्रांजेक्शन में 9.29 लाख रुपये निकाल लिए। सरस्वतीपुरम निवासी राजेंद्र राम के खाते से जालसाजों ने 7.38 लाख रुपये उड़ा दिए। इंदिरानगर में रहने वाली रंजना को भी जालसाजों ने फोन कर ग्रीन गैस कनेक्शन काटने की धमकी दी। एपीके फाइल भेजककर खाते से 2.69 लाख रुपये पार कर दिए। रंजना ने गाजीपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। मीटर अपडेट करने के नाम पर रुपये ऐंठे सआदतगंज के रहने वाले राहुल रत्न का मीटर अपडेट करने के नाम पर जालसाजों ने फोन किया। धमकी देकर 1.64 लाख रुपये खाते से उड़ा दिए। एडीसीपी अपराध किरण यादव ने ग्रीन गैस उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की अपली की है। उन्होंने बताया कि अंजान नंबरों से आने वाले लिंक को कतई क्लिक न करें। अन्यथा बैंक खाते खाली हो सकते हैं। इसको लेकर सभी को अलर्ट रहने की जरूरत है। एडीसीपी के मुताबिक साइबर थाने और क्राइमब्रांच की चार टीमें गिरोह का नेटवर्क खंगाल रही हैं। जालसाजों के मोबाइल नंबर के आधार पर कई अहम जानकारियां मिली हैं। जल्द ही गिरोह का राजफाश किया जाएगा।

‘भट्टा सरदार’ के ठिकानों पर छापेमारी में दैहिक शोषण के साक्ष्य मिले, सवा करोड़ रुपये जब्त

 महासमुंद  मानव तस्करी और श्रमिकों के अवैध परिवहन से जुड़े संगठित नेटवर्क के खिलाफ महासमुंद पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में करीब 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इनमें श्रमिक दलाली के मामले में चर्चित अजगर उर्फ जगत कुमार गुप्ता उर्फ भट्टा सरदार के ग्राम बाम्हनडीह स्थित घर, खरियार रोड निवासी लता संवर और ओडिशा के बेलटुकरी निवासी मुकेश चंद्राकर के ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान करीब 1.40 करोड़ रुपये, बड़ी संख्या में कागजी दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में प्रलोभन देकर मानव तस्करी, नाबालिगों को काम के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे दूसरे राज्यों में ले जाने, बाल मजदूरी और नाबालिग बालिकाओं के दैहिक शोषण से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। ठिकानों से हजारों बालिग एवं नाबालिग श्रमिकों के अवैध परिवहन और बंधुआ मजदूरी से संबंधित दस्तावेज व डिजिटल प्रमाण मिलने की बात कही गई है। भट्टा सरदार के नाम से है कुख्यात पुलिस की अलग-अलग टीमें संबंधित ठिकानों पर तलाशी और पूछताछ कर रही हैं। जगत गुप्ता को क्षेत्र में ‘भट्ठा सरदार’ के नाम से जाना जाता है। श्रमिकों को दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में भेजने के मामले में उसका नाम पहले भी सामने आता रहा है। श्रमिक की हत्या मामले में सामने आया था नाम पिछले वर्ष पटेवा थाना क्षेत्र में श्रमिक शत्रुघन खड़िया की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने जगत कुमार गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार मृतक ने उस पर ईंट भट्ठे में काम करने और दूसरे राज्य जाने के लिए दबाव बनाने तथा धमकी देने का आरोप लगाया था। मानव तस्करी की पुरानी फाइलें खोल रही पुलिस पुलिस अब जगत गुप्ता, लता संवर, मुकेश चंद्राकर समेत नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संपर्कों और श्रमिकों के परिवहन से संबंधित मामलों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी दी जाएगी।     कार्रवाई जारी, शुक्रवार को देंगे विस्तृत जानकारी     कार्रवाई अभी जारी है। कार्रवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार को एसपी कार्यालय से मीडिया को मामले की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।     -सुशील नायक, एएसपी महासमुंद  

विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों ने जंगल, अमरावती गंगा और ‘माई का मंडप’ तक किया ट्रैकिंग अनुभव

रायपुर  विश्व पर्यटन सप्ताह 21 से 27 सितंबर के अवसर पर ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को समझने और स्थानीय संस्कृति से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत थाड़पथरा स्थित मडहाउस परिसर में ‘रूरल एंड ट्राइबल टूरिज्म वर्कशॉप एवं फील्ड विजिट’ का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के 90 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रकृति की गोद में विद्यार्थियों ने जाना पर्यटन का नया अनुभव कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण ही नहीं किया, बल्कि थाड़पथरा के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को करीब से समझने का अनुभव प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक परिवेश से होते हुए कमरापथरा मार्ग से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग की। प्रकृति की हरियाली, जंगलों का शांत वातावरण और स्थानीय प्राकृतिक परिवेश विद्यार्थियों के लिए ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की व्यावहारिक समझ विकसित करने का माध्यम बना। फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने जाना कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। बैगा संस्कृति और परंपराओं से हुए रूबरू फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान और गोदना परंपरा को करीब से समझा। प्रकृति के साथ बैगा समुदाय के सामंजस्यपूर्ण जीवन और पारंपरिक ज्ञान ने विद्यार्थियों को जनजातीय संस्कृति की विशिष्टता को समझने का अवसर दिया। विद्यार्थियों ने स्थानीय समुदाय के साथ संवाद करते हुए यह भी जाना कि जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित न रखकर वहां की परंपराओं, लोकजीवन, खान-पान, कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर अधिक समृद्ध अनुभव के रूप में विकसित किया जा सकता है। स्थानीय व्यंजनों से कराया परिचय थाड़पथरा पर्यटन समिति द्वारा आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने विद्यार्थियों को स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली की विशेषताओं को भी समझा। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से विद्यार्थियों को यह अनुभव हुआ कि पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय लोगों की भूमिका केवल आतिथ्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे स्थानीय संस्कृति, भोजन, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से पर्यटन अनुभव को विशिष्ट बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की दी जानकारी कार्यक्रम में पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक श्री अभिषेक जायसवाल एवं पर्यटन समन्वयक श्री हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के विकास के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता महत्वपूर्ण है। समुदाय की भागीदारी से स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। विद्यार्थियों को ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की संभावनाओं, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, सामुदायिक भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। पर्यटन शिक्षा को मिला व्यावहारिक आयाम विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर आयोजित यह फील्ड विजिट विद्यार्थियों के लिए पर्यटन प्रबंधन की पुस्तकीय जानकारी को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर बना। प्राकृतिक परिवेश, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को व्यावहारिक रूप से समझा। कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. रोहित रविंद्र बोरलिकर, डॉ. जयप्रकाश नारायना एवं डॉ. दिनेश कुमार परस्ते के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में थाड़पथरा पर्यटन समिति के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही। थाड़पथरा बना सीखने और अनुभव का केंद्र विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत थाड़पथरा में आयोजित यह आयोजन पर्यटन शिक्षा, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय समुदाय को एक मंच पर जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आया। 90 विद्यार्थियों ने यहां बैगा संस्कृति की विशिष्टता, प्राकृतिक परिवेश की खूबसूरती और समुदाय आधारित पर्यटन की अवधारणा को करीब से समझा। ऐसे आयोजन ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को पहचानने के साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सम्मानपूर्वक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

12 साल पुराने जमीन अधिग्रहण केस में राहत, हाईकोर्ट ने लगाईं 2 शर्तें

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 साल पुराने एक जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता को अपनी गवाही पेश करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड की अदालत ने राहत देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश भी दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर दो शर्तें लगाईं है। जिनमें पहली यह है कि उसे 10 हजार रुपए जमा कराने होंगे। साथ ही दूसरी यह है कि सार्वजनिक स्थल पर 25 छायादार पेड़ लगाने होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाही का यह अंतिम अवसर है। इस आदेश के जरिए अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को भी जोड़ा है। यह पूरा कानूनी विवाद याचिकाकर्ता प्रमिला गुप्ता की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने अपनी जमीन के अधिग्रहण के बाद वर्ष 2014 में जयपुर के सीनियर सिविल जज के समक्ष मुआवजा और अन्य दावों को लेकर रेफरेंस आवेदन (वाद) दायर किया था। सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा उन्हें साक्ष्य और गवाही पेश करने के कई अवसर दिए, लेकिन निर्धारित समय पर वे गवाही दर्ज नहीं करा सकीं। निचली अदालत ने 17 सितंबर 2019 को उनकी गवाही का अधिकार बंद कर दिया था। जिसके खिलाफ दायर याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जिस समय गवाही बंद की गई, वह भारत में नहीं थीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल विदेश में होना ही गवाही न दे पाने का पर्याप्त कारण नहीं है, क्योंकि उन्हें पहले भी कई मौके दिए जा चुके थे। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रमुख शर्तें याचिकाकर्ता को 15 दिन के भीतर 10 हजार रुपए ‘राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर’ के ‘जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड फॉर परचेजिंग ऑफ लॉ बुक्स’ में जमा कराने होंगे। दूसरी शर्त के रूप में कोर्ट ने उन्हें सार्वजनिक जगह पर 25 छायादार पेड़ लगाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि पेड़ लगाने के बाद उनकी तस्वीरें और उनकी देखभाल करने का लिखित आश्वासन निचली अदालत में जमा कराना होगा। इसके अतिरिक्त, मामले की सुनवाई पूरी होने तक हर छह महीने में उन पेड़ों की स्थिति और उनकी ताज़ा तस्वीरों को भी अदालत में पेश करना होगा।  

जौरा में हाईवे जाम कर प्रदर्शन, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग के बीच 5 सस्पेंड

मुरैना जौरा में फॉल-पीको दुकानदार की मौत का मामला दूसरे दिन गुरुवार को और अधिक तूल पकड़ गया। पुलिसकर्मियों की पिटाई से मौत के आरोप लगाते हुए व्यापारी व आमजन सड़कों पर आ गए। बाजार बंद कर नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। इस विरोध में स्थानीय विधायक पंकज उपाध्याय सहित कई पार्टियों के नेता शामिल हुए। हंगामा बढ़ते देख एसपी ने जौरा थाना प्रभारी समेत 5 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया और जांच के बाद आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया। गौरतलब है, कि बुधवार को जौरा पुलिस एक फरार आरोपी की तलाश में पगारा रोड पर दबिश देने गई थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने जेल रोड पर चल रहे हुए के फड़ को देखा और जुआरियों को पकड़ने के लिए भागे। पुलिस को आता देख भगदड़ मची। इसी बीच 37 साल के सूरज उर्फ कल्ला पुत्र मुन्नालाल गुप्ता, खेत में बेसुध हालत में मिला। अस्पताल लाने पर डॉक्टर ने सूरज को मृत घोषित कर दिया। सूरज जौरा के बाजार में फॉल-पीको की दुकान चलाता था। पुलिसकर्मियों ने स्वजनों को सूचना तब दी, जब सूरज के शव को पोस्टमार्टम तक भिजवा दिया। इसी बात पर जौरा में हंगामा हो गया और दुकानदार की मौत के बाद से लोग सड़कों पर उतर आए। मृतक के स्वजन से लेकर अन्य व्यापारियों ने आरोप लगाए कि जुए के फड़ से पकड़ने के बाद पैसा वसूली के लिए सूरज की पुलिसकर्मियों ने मारपीट की, जिससे उसकी मौत हुई है। बुधवार की देर रात तक थाने के घेराव के बाद गुरुवार की सुबह विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया। सुबह से ही बाजार बंद का ऐलान कर दिया गया। हाईवे पर लगा लंबा जाम सैकड़ों लोग थाने के सामने हाईवे पर जुट गए। हाईवे 552 (एसएस रोड) पर एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय के अलावा बसपा, माकपा के नेता भी शामिल हुए। विधायक ने भी पुलिसकर्मियों को दुकानदार की मौत का जिम्मेदार बताया। मामला बढ़ते देख एसपी ने थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मी लाइन अटैच कर दिए। यह विरोध प्रदर्शन दोपहर एक बजे तक चला। दोपहर दो बजे के बाद बाजारों में दुकानें खुलना शुरू हुईं। मृतक के स्वजन को नप में नौकरी का भरोसा प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की मांग की। हेडक्वार्टर डीएसपी विजय भदौरिया व एसडीओपी जौरा नितिन बघेल ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग रखी गई। लोगों ने मृतक के स्वजन को नगर परिषद में नौकरी दिलाने की मांग की, इस पर एसडीएम शुभम शर्मा ने जौरा नप अध्यक्ष से बात की और मृतक के स्वजन को नप में नौकरी का भरोसा दिया गया। मृतक के शव का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल से करवाया गया है। अंत्येष्टि के लिए 10 हजार रुपये की नकद सहायता मृतक के परिवार को एसडीएम द्वारा दी गई, इसके अलावा आर्थिक मदद के लिए प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा जाएगा। यह पुलिसकर्मी हुए लाइनअटैच हंगामा बढ़ने के बाद एसपी धर्मराज मीना ने थाना प्रभारी पंकज यादव सहित पांच पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। लाइन हाजिर हुए पुलिसकर्मियों में प्रधान आरक्षक प्रवेंद्र तोमर, आरक्षक गिरजेश भार्गव, सत्यम उपाध्याय, सोनेंद्र कंसाना और ईसब खान के नाम बताए गए हैं, मृतक के परिवार ने इन्हीं पर पीट-पीटकर हत्या के आरोप लगाए हैं। थाना प्रभारी को हटाने के बाद जौरा थाने की कमान टीआई क्षत्रपाल सिंह वैश्य को दी गई है। नए टीआई ने गुरुवार को ही पदभार संभाल लिया।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस में आग लगने से हुई जनहानि पर व्यक्त किया गहरा शोक

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे पर स्लीपर बस में आग लगने से हुई जनहानि पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस हृदयविदारक दुर्घटना का समाचार अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है।  मुख्यमंत्री  साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान प्रदान करने और शोक संतप्त परिजनों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है। उन्होंने दुर्घटना में घायल सभी लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

106 जिला स्तरीय पोस्ट मेट्रिक छात्रावासों में किया आधुनिक मेस का लोकार्पण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पिछड़ा वर्ग के बालक-बालिकाओं को अब छात्रावास में गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक भोजन प्राप्त होगा। प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों के कल्याण के लिए यह व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत लगभग डेढ़ दशक में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 13 हजार 500 करोड़ रुपए की सहायता राशि खर्च की गई है। इन वर्षों में 5 करोड़ से अधिक पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को योजनाओं का सीधा लाभ मिला है, जो राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश के 106 पोस्ट मेट्रिक छात्रावासों में 9000 विद्यार्थियों के लिए आधुनिक मेस सुविधा का लोकार्पण कर रहे थे। इस व्यवस्था पर 8 करोड़ 61 लाख रुपए की राशि व्यय हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्य की सराहना करते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में छात्रावासों में आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। युवा भारत में मध्यप्रदेश सबसे युवा राज्य है, जहां पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की छात्राओं से चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, देवास, शिवपुरी, सतना और अशोकनगर के पिछड़ा वर्ग छात्रावासों में रहने वाली बेटियों से बात की। छात्राओं ने कहा कि राज्य सरकार ने उन्हें यह उपयोगी सुविधा उपलब्ध करवाई है। अभी गैस सिलेंडर की व्यवस्था अथवा भोजन के लिए अन्यत्र जाने में समय लगता था और खर्च भी अधिक हो जाता था। छात्राओं ने आधुनिक मेस सुविधा प्रारंभ करवाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद दिया। पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण पहल की। उन्होंने विभागीय छात्रावासों के समग्र विकास का संकल्प लिया, जिसे वे पूरा कर रहे हैं। टर्नकी प्रोजेक्ट के तहत छात्रावासों में आधुनिक किचन और डाइनिंग हॉल की व्यवस्था की गई है। अब छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा उपयोगी है, जो अपने परिवार से दूर रहकर पढ़ाई के लिए आते हैं और भोजन जैसी मूलभूत जरूरत की चिंता करते हैं। अब उनके परिवार पर आर्थिक बोझ भी कम होगा। राज्य मंत्री  गौर ने कहा कि नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध होने से विद्यार्थी पढ़ाई के प्रति एकाग्र होंगे और ज्यादा अच्छे परिणाम प्राप्त करेंगे। प्रदेश में अभी लगभग 9000 पिछड़ा वर्ग छात्रावास सीट्स हैं जिनमें 5200 बालकों और 3800 बालिकाओं के लिए रहने की सीट्स की व्यवस्था की गई है। जिला स्तरीय पिछड़ा वर्ग पोस्ट मेट्रिक छात्रावासों के प्रारंभ होने के बाद पहली बार विद्यार्थियों के लिए मेस व्यवस्था शुरू हुई है। यह विभाग के कार्यों में एक ऐतिहासिक कदम भी है। लोकार्पण कार्यक्रम में विभिन्न जिलों में अनेक जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।  

एक माह में WhatsApp बैंकिंग, 3 महीने में मोबाइल बैंकिंग; 4477 पैक्स होंगे डिजिटल

पटना  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बिहार राज्य सहकारी बैंक और भभुआ जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को मोबाइल बैंकिंग सेवा शुरू करने का लाइसेंस जल्द मिलेगा। साथ ही, सहकारी बैंकों की शाखाओं का विस्तार करने पर भी सहमति बनी है। पहले चरण में पटना एम्स की बैंक शाखा के अलावा मगध, आरा, सासाराम, मुंगेर-जमुई, बेगूसराय एवं सुपौल जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में नई शाखाएं खोलने का निर्देश दिया गया। बुधवार को सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने सहकारी बैंकों के कार्यों एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान यह जानकारी दी। थम्ब इम्प्रेशन से ग्राहकों को भुगतान की सुविधा उन्होंने सहकारी बैंकों को पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से आगे बढ़कर आधुनिक, डिजिटल एवं ग्राहक-केंद्रित बैंकिंग सेवा प्रदाता के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया। साथ ही एक माह में व्हाट्सएप बैंकिंग, तीन माह में मोबाइल बैंकिंग और नवंबर तक थम्ब इम्प्रेशन से ग्राहकों को भुगतान की सुविधा देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि सहकारी बैंकों में नए खाताधारकों को जोड़ने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए तथा विशेष कैंप एवं जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों के खाते खोले जाएं। बैठक में 4477 पैक्सों का पूरी तरह डिजिटल करने का भी निर्णय लिया गया। यूवी लैंप एवं बीआईएस मानक के अनुरूप नोर्ट शार्टिंग मशीन नकली भारतीय कैरेंसी की रोकथाम के लिए सीमावर्ती जिलों के सभी जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों तथा बिहार राज्य सहकारी बैंक की सभी संबंधित शाखाओं में यूवी लैंप एवं बीआईएस मानक के अनुरूप नोर्ट शार्टिंग मशीन तत्काल स्थापित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में सचिव धर्मेन्द्र सिंह, संयुक्त निबंधक कामेश्वर ठाकुर, बिहार राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक अरविन्द कुमार पासवान समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

वीबी जीरामजी अंतर्गत जियो-टैगिंग में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन,

रायपुर  विकसित भारत जीरामजी योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिसंपत्तियों की पारदर्शी निगरानी और डिजिटलीकरण के लिए संचालित 'भूग्राम' (स्टेज-III) अभियान में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सुदूर वनांचल अंचलों की भौगोलिक विषमताओं और सीमित नेटवर्क कनेक्टिविटी की चुनौतियों के बावजूद राज्य ने अपनी 99.34 प्रतिशत परिसंपत्तियों का जियो-टैगिंग कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।    केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी 24 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में निर्मित कुल 11,90,327 परिसंपत्तियों में से रिकॉर्ड 11,82,480 परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग पूर्ण की जा चुकी है।  राष्ट्रीय औसत से काफी आगे निकला राज्य जियो-टैगिंग के मामले में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर रहा है। देश भर में सृजित कुल 3,23,91,318 परिसंपत्तियों में से 3,01,49,345 का जियो-टैग पूरा हुआ है, जिसका राष्ट्रीय औसत 93.08 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ ने 99.34 प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर देश के शीर्ष राज्यों में अपना स्थान मजबूत किया है।   चुनौतियों को पछाड़कर हासिल किया लक्ष्य  विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरस्थ वनांचल, पहाड़ी क्षेत्रों तथा खराब नेटवर्क वाले इलाकों में जियो-टैगिंग का कार्य बेहद जटिल था। इसके बावजूद मैदानी कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और तकनीकी अमले के समन्वय से यह सफलता संभव हुई है। भूग्राम के तहत जीआईएस मैपिंग होने से ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को बल मिल रहा है।