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यह सम्मान हमारी सनातन परंपरा, राम के आदर्शों और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘भांचा’ संस्कृति की वैश्विक पहचान है: मंत्री अग्रवाल

रायपुर : संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर प्रदेश एवं देशवासियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं यह सम्मान हमारी सनातन परंपरा, राम के आदर्शों और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘भांचा’ संस्कृति की वैश्विक पहचान है:  मंत्री अग्रवाल रायपुर खुशियों और प्रकाश का पर्व दीपावली अब विश्व स्तर पर भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। यूनेस्को की इंटरगवर्नमेंटल कमेटी ने नई दिल्ली स्थित लाल किला परिसर में चल रही बैठक के दौरान ‘दीपावली, द फेस्टिवल ऑफ लाइट्स’ को प्रतिनिधि सूची में शामिल करने का निर्णय लिया, जिससे यह भारत की 16वीं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर बन गई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों और देशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की है। उन्होंने कहा कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देने वाली दीपावली को वैश्विक मान्यता मिलना भारत की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और साझा उत्सवधर्मिता की स्वीकृति है। संस्कृति मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रभु राम के वनवास का बड़ा हिस्सा आज के छत्तीसगढ़ क्षेत्र के घने वनों और आश्रमों में व्यतीत हुआ, जिससे यह धरती स्वयं राम की पावन चरण-पथ से अभिमंडित है। ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों में छत्तीसगढ़ को प्रभु  राम का ननिहाल माना जाता है, क्योंकि माता कौशल्या की जन्मस्थली मानी जाने वाली चंदखुरी में उनका प्राचीन मंदिर स्थित है, जो  राम-कौशल्या संबंध का सजीव प्रतीक स्थल है। उन्होंने कहा कि इसी भावनात्मक रिश्ते के कारण छत्तीसगढ़ की जनता प्रभु राम को स्नेहपूर्वक ‘भांचा राम’ कहकर संबोधित करती है। भांचा के प्रति विशेष सम्मान की अभिव्यक्ति के रूप में यहां चरण स्पर्श करने की लोकपरंपरा प्रचलित है, जो छत्तीसगढ़ी समाज में राम के प्रति अपनत्व, भक्ति और पारिवारिक निकटता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करती है।  अग्रवाल ने कहा कि दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण है, क्योंकि यह वही त्योहार है जो राम के अयोध्या लौटने की स्मृति में गांव-गांव में लोकोत्सव और पारिवारिक परंपराओं के रूप में यहां विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह मान्यता दीपावली को केवल धार्मिक पर्व न मानकर एक सांस्कृतिक, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मिलन, लोककला, दीप सज्जा, रंगोली, गीत-संगीत और पारंपरिक हस्तशिल्प के व्यापक उत्सव के रूप में स्वीकार करती है। उन्होंने रेखांकित किया कि सूची में शामिल होने के बाद भारत और छत्तीसगढ़ की साझा जिम्मेदारी है कि दीपावली से जुड़ी लोकपरंपराओं, शिल्पकला, पर्यावरण-संवेदनशील आचरण और सामूहिक उत्सव संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और सशक्त रूप से पहुँचाया जाए। संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, त्यौहारों, नृत्यों, गीतों और आस्थाओं की जड़ें गहराई से रामकथा और ग्रामीण जीवन से जुड़ी हैं। दीपावली को मिली वैश्विक मान्यता इस बात की प्रतीक है कि गाँव की चौपाल से लेकर शहरों की सड़कों तक जलने वाला हर दीया अब विश्व विरासत के आलोक में जगमगा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक घरों में सायंकाल दिए जलाकर इस अवसर को उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया।   अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र सद्भाव, सेवा, साझा आनंद और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राम के आदर्शों, माता कौशल्या की करुणा और ‘भांचा राम’ के प्रति छत्तीसगढ़ की आत्मीय श्रद्धा से प्रेरित होकर प्रदेश सामाजिक व आध्यात्मिक प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा।  राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह वर्ष हर घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और नई ऊर्जा लेकर आए। उन्होंने कामना की कि यूनेस्को की यह मान्यता भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नया आयाम दे, विश्व समुदाय में भारतीय त्योहारों के प्रति जिज्ञासा और सम्मान बढ़ाए, तथा छत्तीसगढ़ को राम के वनगमन पथ और कौशल्या धाम के रूप में देखने आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में सकारात्मक वृद्धि हो। उन्होंने अंत में सभी छत्तीसगढ़ वासियों, भारतीयों और प्रवासी भारतीय समुदाय को दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इसे “विश्व को भारत के सांस्कृतिक प्रकाश से आलोकित करने वाला पर्व” बताया।

सिमरजीत बैंस को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा, FIR रद्द करने से किया इनकार

पंजाब  सिमरजीत बैंस को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मिली जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार कर दिया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बरगाड़ी बेअदबी की घटना से जुड़े विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में पूर्व MLA सिमरजीत सिंह बैंस और दूसरों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया है।  IPC कोर्ट को खास अपराधों, खासकर पब्लिक जस्टिस के खिलाफ अपराधों (जैसे झूठी गवाही, कोर्ट में जालसाजी) या कानूनी अथारिटी के अधिकार का संज्ञान लेने से रोकता है, जब तक कि संबंधित पब्लिक सर्वेंट या कोर्ट द्वारा शिकायत दर्ज न की गई हो ताकि फालतू प्राइवेट केस को रोका जा सके और न्यायिक ईमानदारी बनी रहे। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 195 के तहत रोक सिर्फ मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के स्टेज पर लागू होती है, FIR या जांच के स्टेज पर नहीं। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान लेते समय कानून की सही प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और वह स्टेज अभी नहीं आया है। इसलिए, इस सेक्शन के नियमों का कथित उल्लंघन इस स्टेज पर संबंधित FIR को रद्द करने की मांग का आधार नहीं है। 

सरकार की नई पहल: घर-घर किचन फार्मिंग से हरियाणा बनेगा हरा-भरा

चंडीगढ़  हरियाणा बीज विकास निगम द्वारा प्रदेश में जल्द ही अपनी सब्जी-अपना फल' योजना की शुरूआत की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सैनी के कर कमलों द्वारा किया जाएगा। यह निर्णय निगम के चेयरमैन देव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में पंचकूला में आयोजित हरियाणा बीज विकास निगम की 51वीं वार्षिक आम बैठक में लिया गया। बैठक में निगम के प्रबंध निदेशक राज नारायण कौशिक, निदेशक मनोज बबली, निदेशक दारा सिंह, एन.एस.सी. से डायरैक्टर नानू राम यादव, कंपनी सचिव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सबसे पहले बैठक में बड़ी संख्या में पहुंचे शेयर धारकों (किसान) का स्वागत किया गया। अपनी सब्जी-अपना फल योजना के तहत वे लोग भी अपने परिवार के लिए ताजी और शुद्ध सब्जियां व फल उगा सकेंगे, जिनके पास खेत या पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है।

रायपुर: प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत ग्राम पिपलाकछार में आयोजित हुआ शिविर

रायपुर खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के अंतर्गत पाण्डादाह वितरण केंद्र अंतर्गत ग्राम पिपलाकछार में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से  ग्राम स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्राम सरपंच, पंचगण तथा स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।     कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभों, आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता तथा सोलर रूफटॉप प्रणाली की स्थापना से संबंधित तकनीकी जानकारी विस्तारपूर्वक दी गई। साथ ही सब्सिडी एवं वित्तीय सहायता संरचना के बारे में भी बताया गया, जिससे आमजन सही तरीके से योजना का लाभ उठा सकें।     शिविर के दौरान ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और बिजली बचत एवं सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में रुचि प्रकट की। कई ग्रामीणों ने मौके पर ही पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आयोजन के सफल संचालन के साथ कार्यक्रम सकारात्मक संदेश छोड़ते हुए संपन्न हुआ, जिससे गांव में नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

पंजाब कांग्रेस एक्शन मोड में: नवजोत कौर-सिद्धू विवाद की रिपोर्ट पार्टी प्रभारी के पास

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में फिर से तनाव की स्थिति बनती दिख रही है. पंजाब के पूर्व अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री रहे नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर की ओर से प्रदेश कांग्रेस संगठन और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ की जा रही बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है. पंजाब कांग्रेस की ओर से सिद्धू दंपति की बयानबाजी और उससे पार्टी को हो रहे नुकसान की एक रिपोर्ट पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल को भेजी गई है. बघेल को भेजी गई इस रिपोर्ट में हाल ही में डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू की बयानबाजी और पिछले 4 सालों में पार्टी के कार्यक्रमों में सिद्धू दंपति की सक्रियता और पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेने जैसी बातों का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में साल 2022 के तकरार का जिक्र रिपोर्ट में साल 2022 में तत्कालीन प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पार्टी आलाकमान को लिखे गए एक पत्र का भी जिक्र किया गया है. इस पत्र में यह बताया गया था कि उस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच जारी तकरार और भ्रम की स्थिति की वजह से कांग्रेस को तब के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. उस दौरान जो रिपोर्ट और चिट्ठी प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से पार्टी आलाकमान को भेजी गई थी वो भी एक बार फिर से इस ताजा रिपोर्ट का हिस्सा बनाई गई है. ‘सिद्धू दंपति की वजह से हो रहा नुकसान’ पंजाब कांग्रेस की ओर से अब जो रिपोर्ट पार्टी प्रभारी को दी गई है, उसमें सीधे तौर पर लिखा गया है कि सिद्धू की पत्नी डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू के बयानों से पार्टी को खासा नुकसान हुआ है. पिछले कुछ सालों में नवजोत सिंह सिद्धू भी पार्टी लाइन से हटकर या पंजाब कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ बयान देते रहे हैं, उनके इस तरह के बयानों से भी पार्टी को लगातार नुकसान ही हुआ है. रिपोर्ट में यह भी सलाह दी गई है कि बागी तेवर दिखा रहे सिद्धू दंपति को अनुशासन में रखना बेहद आवश्यक है, नहीं तो पंजाब में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की छवि और प्रदेश संगठन की छवि को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ नवजोत ने खोला मोर्चा पंजाब कांग्रेस में पिछले दिनों तब हलचल मची थी, जब नवजोत कौर ने सोशल मीडिया के जरिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बारे में बड़ा आरोप लगाया और कहा कि वह उन्हें पंजाब का कांग्रेस अध्यक्ष नहीं मानती हैं. वह एक बेपरवाह, गैर-जिम्मेदार, नैतिक रूप से बेईमान और भ्रष्ट अध्यक्ष हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं, लेकिन यह पद उसे ही मिलता है जो 500 करोड़ रुपये की अटैची देता है. उनके इस बयान के बाद प्रदेश इकाई ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया.  

रायपुर साहित्य उत्सव 2026: कॉलेज विद्यार्थियों के लिए सभी जिलों में आयोजित होंगी कविता और कहानी प्रतियोगिताएं

रायपुर : रायपुर साहित्य उत्सव 2026 :कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए सभी जिलों में होगीं कविता-कहानी प्रतियोगिताएं पुरस्कार भी मिलेंगे, जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा विद्यार्थियों से 30 दिसंबर तक ली जायेगी स्वरचित कहानियां और कविताएं रायपुर नवा रायपुर में अगले महीने होने वाले साहित्य उत्सव के पहले प्रदेश के सभी जिलों में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कहानी एवं कविता प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। इन दोनों प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर विजेताओं को पुरस्कार भी मिलेंगे। जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल किया जायेगा और सर्वोत्कृष्ठ कहानी तथा कविता को रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जायेगा। इस प्रतियोगिता के लिये जिलेवार नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।  प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेेने के इच्छुक छात्र-छात्राएं अपनी स्वरचित कविता और कहानी 30 दिसंबर 2025 तक जिले के नोडल अधिकारी कार्यालय में जमा करा सकते हैं। 30 दिसंबर के बाद मिली कहानियों-कविताओं को प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जायेगा। प्रदेश की समृद्धशाली साहित्यिक विरासत को लोगों तक पहुंचानें और साहित्य लेखन में युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नवा रायपुर में 23-25 जनवरी 2026 तक रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन होगा।  साहित्य उत्सव के तहत जिलेवार महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए आयोजित होने वाली कविता-कहानी प्रतियोगिताओं में पहले पुरस्कार के रूप में 5,100 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 3,100 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 1,500 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में 1000-1000 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे। जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त कहानी-कविताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा। राज्य स्तर पर पहले पुरस्कार के रूप में 21,000 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 11,000 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 7,000 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर पर 5,100-5,100 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे।  प्रतियोगिता में शामिल की जाने वाली कविता न्यूनतम 8 छंदों की मौलिक, अप्रकाशित तथा टंकित होनी चाहिए। इसी तरह कहानी 1200 शब्दों में मौलिक, अप्रकाशित और टंकित होनी चाहिए।  प्रतिभागी किसी महाविद्यालय-विश्वविद्यालय का विद्यार्थी हो एवं उसकी आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रतिभागी को अपने महाविद्यालय का परिचय पत्र अथवा प्राचार्य का प्रमाणपत्र भी लगाना होगा। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होगा। पुरस्कारों की घोषणा जनवरी 2026 में की जाएगी और पुरस्कृत प्रतिभागियों को 23, 24, 25 जनवरी 2026 को होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जाएगा। प्रविष्टी जमा करते समय कविता-कहानी के प्रारंभ में ऊपर एवं लिफाफे पर “युवा हिंदी कविता-कहानी लेखन प्रतियोगिता“ अवश्य अंकित करना होगा। पुरस्कृत कविताओं-कहानियों  का संकलन कर प्रकाशित किया जाएगा जिसका विमोचन रायपुर साहित्य उत्सव के मंच पर किया जाएगा।

शीतकालीन व बजट सत्र दिल्ली से बाहर करने की मांग तेज, सांसद ने दिए नए विकल्प

नई दिल्ली  बीजू जनता दल के सांसद मानस रंजन मंगराज ने मांग की है कि संसद का सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल बहुत अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में संसद का शीतकालीन सत्र और बजट सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर साल ही हवा खराब हो जाती है और यह आपदा मानव जनित है। शून्य काल के दौरान ओडिशा के सांसद ने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल ही बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए ओडिशा जैसा फॉर्मूला अपनाना चाहिए। मानस मंगराज ने कहा कि ओडिशा में प्राकृतिक आपदाओं से हर साल ही सरकार निपटती है और कभी कोई बड़ा संकट सामने नहीं आता। उन्होंने कहा, 'हम ओडिशा से आते हैं। एक ऐसा राज्य जहां अकसर चक्रवात आते हैं और बाढ़ आती है। इसके अलावा अन्य आपदाएं भी आती हैं। इनसे हम नियमित तौर पर निपटते हैं। इसलिए हम समझते हैं कि दिल्ली में यह कैसा संकट है। लेकिन दिल्ली का संकट हमें परेशान करता है।' उन्होंने कहा कि दिल्ली में सांसदों को पलूशन का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा संसद सदस्यों के साथ लगे कर्मचारियों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इन लोगों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह सामान्य नहीं है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। मानस मंगराज ने कहा कि ऐसे कई शहर हैं, जहां की हवा साफ है। ऐसी स्थिति में वहां पर संसद का सेशन चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर, हैदराबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु, गोवा और देहरादून में सत्र चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि चक्रवात की स्थिति में ओडिशा से कुछ घंटों के अंदर ही लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है तो फिर भारत सरकार भी लोगों की सेहत का ध्यान रखने के लिए सांसदों और अन्य स्टाफ को दूसरी लोकेशन पर ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रस्ताव में किसी तरह की राजनीति नहीं है। यह हमारे जीवन और गरिमा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि संसद से ही यह राह निकलनी चाहिए, जिससे संदेश जाए कि जीवन का अधिकार सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि हर साल ही दिल्ली में सर्दियां ऐसी रहती हैं। इसके लिए कुछ ऐक्शन प्लान बनाना ही होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान: प्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सबसे अधिक, रोजगार और उद्योगों के विकास पर जोर

प्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सर्वाधिक, रोजगार के अवसर और उद्योगों के विकास पर जोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार के सफलतम 2 वर्ष पूर्ण होने पर 13-14 दिसंबर को भोपाल और इंदौर में होंगे विशेष कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के सफलतम 2 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 13 दिसंबर को भोपाल और 14 दिसंबर को इंदौर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रदेश में सरकार बनने के बाद गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कई उल्लेखनीय निर्णय लिए गए। राज्य में कृषि के लिए सिंचाई का रकबा दोगुना करने के उद्देश्य से जल गंगा संवर्धन अभियान और कई बड़ी परियोजनाओं के माध्यम से प्रयास जारी हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। हमारी इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सबसे अधिक है। 'अच्छे कार्य में साथ, लेकिन कुछ गलत होगा तो बर्दाश्त नहीं' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में सुशासन पर आधारित व्यवस्थाएं संचालित हों, इसके लिए अच्छे कार्य में सदैव साथ हैं और अगर कहीं भी कुछ गलत होगा तो उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। मध्यप्रदेश की धरती से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में विगत दिनों उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश में नक्सलियों का सबसे बड़ा सरेंडर बालाघाट में कराया गया है। भविष्य में नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लिये रवाना होने से पहले इंदौर में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर में आंध्र प्रदेश के सत्य साईं जिले के धर्मावरम में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन पर अटल ज्योति संदेश यात्रा कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।  

छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र

रायपुर : विशेष लेख : सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र रायपुर सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रूप से कुटीर उद्योगों को केंद्रीकृत किया गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं तथा बेरोजगार लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 28 जिलों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित होंगे और आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के प्रयासों से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय – विकास को जन-जन तक पहुँचाने वाले नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी सरलता, सहजता, दृढ़ता और ग्रामीण विकास के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनका यह स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ का वास्तविक सामर्थ्य गाँवों में निहित है, जहाँ परंपरा, कौशल और संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वे मानते हैं कि स्व-रोजगार ही आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि स्व-रोजगार योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे और कुटीर, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जाए। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव -ग्रामोद्योग के पुनर्जागरण के निर्माता गजेंद्र यादव अपने ऊर्जा से भरे कार्यशैली, जमीनी समझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि परंपरागत कौशलों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अधिक अवसर मिल सकें। उनकी पहल से कुटीर उद्योगों में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का वातावरण मजबूत हुआ है। उनके नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने कई अभिनव कदम उठाए हैं, जिससे हजारों लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त हुए हैं। कुटीर उद्योगों को नई ऊर्जा देने वाली दो प्रमुख योजनाएँ मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (CMEGP) यह राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को छोटे उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित करना है, जो अपने कौशल के आधार पर सेवा या विनिर्माण क्षेत्रों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं। सेवा क्षेत्र जैसे साइकिल और मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिक मरम्मत, ब्यूटी पार्लर, फोटोकॉपी, वीडियोग्राफी, टेंट हाउस, च्वाइस सेंटर और होटल जैसी गतिविधियों में उद्यम स्थापित करने हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रूपए निर्धारित है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र जैसे दोना-पत्तल निर्माण, फेब्रिकेशन, डेयरी उत्पाद, साबुन, मसाला, दलिया, पशुचारा, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और नूडल्स निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु 3 लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन दोनों ही श्रेणियों में 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, ताकि प्रारंभिक आर्थिक बोझ कम हो सके। योजना के अंतर्गत हितग्राही को केवल 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान करना होता है। यह योजना विशेषकर ग्रामीण युवाओं को उद्यम स्थापना के लिए प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) यह केंद्र शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य विभिन्न वर्गों-अजा, अजजा, ओबीसी तथा सामान्य वर्ग को उद्यमिता के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना में सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रूपए तक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे मध्यम स्तर के उद्यम भी आसानी से शुरू किए जा सकें। अनुदान की दृष्टि से यह योजना अत्यंत सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों के हितग्राहियों को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है, जिसे च्डम्ळच् पोर्टल के माध्यम से सरलता से भरा जा सकता है। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो बड़े पैमाने पर उद्यम शुरू करने की क्षमता रखते हैं लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझते हैं। आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज आवेदन करने वाले आवेदकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं जिनमें पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर अन्य दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। ये दस्तावेज आवेदक की पात्रता और परियोजना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं। आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम छत्तीसगढ़ में CMEGP और PMEGP जैसी योजनाएँ स्वरोजगार को एक संगठित और सशक्त दिशा प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव की दूरदर्शिता, समर्पण और सतत प्रयासों के कारण आज हजारों युवाओं के सपने साकार हो रहे हैं। राज्य सरकार की ये पहल न केवल रोजगार बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक संरचना को मजबूती प्रदान कर रही हैं। कोईे भी व्यक्ति अपना उद्योग शुरू करना चाहता है, उसके लिए यह अत्यंत उपयुक्त समय है। अधिक जानकारी एवं आवेदन हेतु खादी एवं ग्रामोद्योग शाखा, कार्यालय रायपुर से संपर्क किया जा सकता है।                                                                                                                                    • लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

एमपीएसपी के शताब्दी वर्ष तक हो सौ संस्थाओं का संचालन : योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को लेकर तय किए लक्ष्य, दिए दिशानिर्देश शताब्दी वर्ष में सालभर होगा विविध कार्यक्रमों का आयोजन, अभी से तैयारियों में जुटने के निर्देश गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपीएसपी) के लिए इसके शताब्दी वर्ष 2032 तक सौ संस्थाओं के संचालन और इनमें एक लाख विद्यार्थियों को शिक्षा और कौशल से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने शताब्दी वर्ष में पूरे एक साल विविध कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए अभी से रूपरेखा बनाकर तैयारियों में जुट जाने के भी निर्देश दिए हैं। बुधवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 93वां संस्थापक सप्ताह भव्यता से मनाया गया था। दिन में हुए मुख्य महोत्सव के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री ने देर शाम परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर शताब्दी वर्ष 2032 तक संस्थापक युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत लीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सपनों और इच्छाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में श्री योगी ने कहा कि सभी संस्थाओं को अभी से शिक्षा परिषद के शताब्दी महोत्सव की तैयारियों में जुटना होगा। शताब्दी वर्ष 10 दिसंबर 2031 से 10 दिसंबर 2032 तक, पूरे एक साल मनाया जाएगा। सालभर में क्या क्या आयोजन होंगे, इसकी रुपरेखा अभी से तैयार करनी शुरू कर दी जाए। शताब्दी महोत्सव का पूरा साल यादगार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक शिक्षा, चिकित्सा, योग, सेवा और अन्य प्रकल्पों को मिलाकर परिषद के अंतर्गत सौ संस्थाओं का संचालन करने का लक्ष्य तय कर उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाएं संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाने का कार्य करें। इसके लिए बस्तियों को गोद लेकर वहां शिक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता, सेवा, जागरूकता, रोजगार एवं स्वरोजगार आदि के कार्य किए जाएं। सभी तक जनकल्याण की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि थारू और वनटांगिया बस्तियों में परिषद की संस्थाएं पहले से कार्य करती रही हैं। इन बस्तियों के उत्थान के मानक संतृप्ति के स्तर पर होने चाहिए। वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ें, हर संस्था किसी विशिष्टता से जानी जाए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस दिशा में काफी बेहतर कर कर सकता है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक परिषद की सभी संस्थाओं की पहचान उनकी किसी न किसी विशिष्टता से बने, इसके लिए उन्हें किसी विशिष्ट कार्य से जुड़कर आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक हों एक लाख विद्यार्थी, सबके पास हो स्किल गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष तक संस्थाओं में एक लाख विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का भी लक्ष्य दिया। साथ ही कहा कि उस समय तक हर विद्यार्थी को किसी न किसी एक स्किल से जोड़ा जाए। हर संस्था एक-एक विद्यार्थी को अपने स्तर से स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास करे। खुद मानक बनें संस्थाओं के प्रमुख बैठक में श्री योगी ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी शिक्षक और कर्मचारी परिश्रम और ईमानदारी के मानक बनें। इसके लिए संस्थाओं के प्रमुखों को खुद मानक बनकर शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए रोल मॉडल बनना होगा। आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखे परिसर में गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि अनुशासित परिसर संस्कृति शिक्षा परिषद की संस्थाओं की पहचान है। संस्थाओं में आधुनिक युगानुकूल विचारों के साथ पारंपरिक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों का भी संरक्षण होता रहेगा। इन संस्थाओं ने भारत की परंपरा और प्रगति को दर्शाने के साथ लोक कल्याण का भी मॉडल दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं के परिसर में आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखनी चाहिए। संस्थाओं की कार्यपद्धति में आध्यात्मिकता का पुट होना चाहिए। नशा मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने सभी संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे अपनी अपनी संस्थाओं के परिसर को हर प्रकार के नशा से मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें। नशा चाहे ड्रग का हो या फिर स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रभाव का, ये कुप्रवृत्तियां हैं और विद्यार्थियों को इनसे बचाना ही होगा। विकसित भारत के लक्ष्य से खुद को जोड़ें संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा वे खुद और विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ें। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकार के लक्ष्यों के अनुरूप संस्थाएं भी अपने स्तर पर लक्ष्य तय करें जिससे 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी, मेडिकल, पैरामेडिकल, फार्मेसी, कृषि के विद्यार्थियों का ‘विकसित भारत 2047’ में क्या योगदान होगा, इस पर कार्ययोजना बनाकर काम किया जाए। लोक कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हो फोकस श्री योगी ने कहा कि शिक्षा परिषद की संस्थाओं का फोकस लोक कल्याण पर भी हो। संस्थाओं को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाना होगा। सांस्कृतिक पुर्नजागरण के साथ देश को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान देना होगा। समाज के एक-एक पैसे का हो सदुपयोग बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी संस्थाओं को वित्तीय अनुशासन, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते रहना है। शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ हमें समाज के एक-एक पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित करना होगा। बैठक में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी पदाधिकारी, सदस्य और परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित रहे।