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धर्मांतरण केस में बड़ा ऐक्शन, झांगुर बाबा की संपत्ति पर चला योगी सरकार का बुलडोजर

लखनऊ  यूपी में अवेध धर्मांतरण केस में जलालुद्दीन उर्फ झांगुर बाबा पर योगी सरकार ने तगड़ा ऐक्शन लिया है। बलरामपुर में बनी ​​छांगुर बाबा की आलीशान कोठी पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है। बताया रहा यह कोठी अवैध तरीके से बनाई गई थी। झांगुर बाबा यही से अपने सारे काले कारनामे करता था। मुख्य आरोपी जलालुद्दीन उर्फ झांगुर की कोतवाली उतरौला अन्तर्गत मधपुर स्थित कोठी पर मंगलवार सुबह साढ़े 10 बजे बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की गई। यह कोठी अभिलेखों में नीतू नवीन रोहरा उर्फ नसरीन पत्नी नवीन रोहरा के नाम दर्ज है। प्रशासन का मानना है कि भवन निर्माण में झांगुर का पैसा लगा था। भवन को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण कराने की बात कही जा रही है। अतिक्रमण हटाने सम्बन्धित तीन नोटिस नीतू उर्फ नसरीन को पहले ही जारी की जा चुकी है। नीतू, उनके पति व बेटी को झांगुर ने इस्लाम धर्म कुबूल करवा दिया था। वे झांगुर के साथ आकर मधपुर में रहने लगे थे, जहां झांगुर ने नीतू उर्फ नसरीन के लिए विशाल कोठी बनाई थी। झांगुर, उनका बेटा महबूब, नीतू उर्फ नसरीन व नवीन को एटीएस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। राजस्व विभाग को झांगुर के सम्पत्ति की जांच का आदेश मिला था। साथ ही मामले में ईडी को जांच के लिए कहा गया है। मंगलवार प्रातः साढ़े 10 बजे को उतरौला एसडीएम राजेन्द्र बहादुर, तहसीलदार सत्यपाल प्रजापति, एएसपी विशाल पाण्डेय, सीओ राघवेन्द्र प्रताप व एसएचओ अवधेश राज सिंह बुलडोजर लेकर मधपुर पहुंचे। घर का सभी सामान सुरक्षित निकलवाकर सूचीबद्ध किया गया। उसके बाद भवन ढहाना शुरू कर दिया गया। एसडीएम राजेन्द्र बहादुर ने बताया कि भवन ढहाने की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है। मधपुर गांव में धर्मातरण का रैकेट चलाना शुरू किया था झांगुर झांगुर बाबा को यूपी एटीएस ने चार दिन पहले लखनऊ से गिरफ्तार किया था। उसके साथ सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को भी पकड़ा गया था। दोनों लोगों से पूछताछ के दौरान कई खुलासे हुए थे। झांगुर बाबा ने बलरामपुर के उतरौला, मधपुर गांव में धर्मातरण का रैकेट चलाना शुरू किया था। मुम्बई से लेकर लखनऊ तक उसने कई लोगों को अपने जाल में फंसाया और उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने पर मजबूर कर दिया था। कुछ दिन पहले गोमतीनगर में झांगुर के शिकार बने लोगों ने फिर से रीति रिवाज के जरिए हिन्दू धर्म अपना लिया था। इसके लिए उसे फांडिंग की जाती थी। झांगुर की संस्थाओं में आई रकम मुरादाबाद, औरैया और आजमगढ़ के कई लोगों को भेजी गई थी। इनमें से कुछ लेन-देन काफी बड़ी रकम के हुए। विदेशी फंडिंग के जरिए आई इस रकम की बंदरबाट भी खूब हुई। लखनऊ से भी कई बार रकम झांगुर के पास पहुंचाई गई। इतनी बड़ी फंड़िंग और फिर उसे कई लोगों तक पहुंचाने के लिए झांगुर का नेटवर्क देखकर एटीएस के अफसर भी हैरान रह गए। एटीएस को ऐसी ही कई और नई जानकारियां पड़ताल में मिली है। इस आधार पर ही झांगुर के गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश में एटीएस और एसटीएफ लगी हुई है। कल कोठी पर पहुंचे थे तहसीलदार सोमवार देर शाम उतरौला तहसील के तहसीलदार सत्यपाल प्रजापति व उतरौला कोतवाली के इंस्पेक्टर अवधेश राज सिंह भारी पुलिस बल के साथ मधपुर स्थित झांगुर की इस कोठी पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने नीतू के नाम की नोटिस चस्पा की थी। नोटिस चस्पा कराने के बाद पुलिस ने कहा कि झांगुर द्वारा ग्राम सभा मधपुर में स्थित गाटा संख्या: 337/370 के सम्पूर्ण रकबा 0.0060 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर इन लोगों ने अवैध रूप से कोठी बनवा ली है। इनके विरुद्ध बेदखली का आदेश भी पारित कर दिया गया है।  

मुख्यमंत्री यादव ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। इससे बढ़ती नगरीय जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। समृद्ध और विकसित शहर, प्रदेश के समावेशी विकास की आधारशिला बनेंगे। इसे साकार करने के लिए मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। 'नेक्स्ट होराइजन: बिल्डिंग सिटीज ऑफ टुमॉरो' थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के शहरी विकास और निवेश पर देश की रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गज विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लिए शहरी विकास के ब्लूप्रिंट पर चर्चा करेंगे। शहरी क्षेत्रों में विकास की प्रगति मध्यप्रदेश में शहरी अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है। प्रदेश में 4 शहर ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है। साथ ही केन्द्र की स्मार्ट सिटी परियोजना में 7 शहर शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में अधो-संरचाना विकास के संबंधित 72 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ करीब 88 हजार करोड़ रुपये की शहरी क्षेत्र से जुड़ी विकास योजनाएं प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के लिये देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इंदौर देश में पिछले 7 वर्षों से स्वच्छतम शहरों की श्रेणी में पहले नम्बर पर रहा है। भोपाल को देश की दूसरे नंबर की स्वच्छतम राजधानी बनने का गौरव हासिल किया है। प्रदेश के बजट में शहरी क्षेत्र के विकास के लिए 15 हजार 780 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में शहरी क्षेत्र का योगदान 35.55 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में संचालित केन्द्र की फ्लैग शिप योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों शामिल है। नगरीय विकास से जुड़ी योजनाओं की गति तेज बनाए रखने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम की प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। हाउसिंग सेक्टर में बेहतर निवेश की संभावना प्रदेश में हाउसिंग सेक्टर में निवेश की अच्छी संभावना है। अफोर्डेबल हाउसिंग में8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके है। प्रदेश में 10 लाख नए आवास तैयार किये जा रहे है। इनमें 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश होगा। रियल एस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में मानव संसाधन की गुणवत्तापूर्ण वर्क फोर्स उपलब्ध है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 6 हजार किलोमीटर सड़क, 80 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शत् प्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई है। नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाईज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेव्हलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है।  

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए की नई बन रही सड़कों के निर्माण के साथ ही बिजली पोल लगाने का कार्य भी करें

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि सड़कों के निर्माण को तय समय सीमा में पूरा करें। राज्यमंत्री श्रीमती गौर मंगलवार को मंत्रालय में गोविंदपुरा क्षेत्र के सड़कों के निर्माण प्रगति की समीक्षा कर रही थी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए की नई बन रही सड़कों के निर्माण के साथ ही बिजली पोल लगाने का कार्य भी करें, क्योंकि सड़क तो बन जाती है, लेकिन मार्ग पर अंधेरा रहने से जनता को परेशानी होती है। अधिकारियों ने बताया कि जे के रोड का निर्माण कार्य जल्दी पूरा हो जाएगा। सेंट्रल ब्रिज व रेलिंग का कार्य 31 जुलाई तक पूरा हो जाएगा। जेके रोड पर चल रहे निर्माण कार्य में कवर्ड नाली में बड़े-बड़े पत्थर पड़े होने पर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने नाराजगी व्यक्ति की। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने नाली सफाई और सड़क पर से मिट्टी और मलवा को हटाने के निर्देश दिए। बिजली के पोल का कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा। उन्होंने शटडाउन का टाइम बढ़ाकर कार्य को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। आनंद नगर फ्लाईओवर के कार्य में देरी पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। अधिकारियों ने बताया कि फ्लाईओवर का कार्य अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। नाली बन चुकी है, दो स्लैब डल चुके हैं, चार बाकी हैं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि निर्माण कार्य में आ रही बाधा को दूर करे। उन्होंने निर्देश दिए कि बाग सेवानिया रेतघाट में स्विमिंग पूल का काम अभी तक शुरू नहीं होने पर उन्होंने अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द शुरू करने का निर्देश दिए।  

‘श्री रामपुरम’ नामकरण की मुहिम को मिला जनसमर्थन, दिल्ली में 60 हजार साइन जुटे

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद कई इलाकों का नाम बदलने की मांग उठ चुकी है। नजफगढ़ से मुस्तफाबाद तक के विधायक अपने इलाके की 'इस्लामिक पहचान' हटाना चाहते हैं। इस बीच शकूरबस्ती के विधायक करनैल सिंह ने तो एक कदम आगे बढ़ाते हुए जनतमत संग्रह शुरू कर दिया है। वह इस इलाके का नाम बदलकर श्री रामपुरम करना चाहते हैं। करनैल सिंह ने इसे जनता की मांग बताते हुए जनमत संग्रह की शुरुआत की है। करनैल सिंह ने कहा, ‘यह जनता की मांग रही है। पहले इसका नाम बस्ती था। लेकिन अब यहां बड़ी इमारते हैं, अच्छी गलियां और बाजार हैं। लोगों ने इसके लिए मत दिया और चर्चा के बाद हमने इसका नाम श्री रामपुरम करने का फैसला किया है। हमें इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।’ श्री रामपुरम के प्रस्ताव पर 60 हजार लोग कर चुके साइन भाजपा विधायक ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि जनमत संग्रह के लिए एक फॉर्म बनाया गया है। इस पर लोगों के हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक कुल 60 हजार लोग साइन कर चुके हैं और वह क्षेत्र की करीब 90 फीसदी जनता का हस्ताक्षर लेकर सरकार और संगठन से इस बदलाव की मांग करेंगे। भगवान राम से प्यार करते हैं लोग, इसलिए उनका नाम: करनैल सिंह करनैल सिंह ने कहा कि कुछ लोग इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहते हैं जबकि ऐसा है नहीं। यह सिर्फ लोगों की भावना है। लोग भगवान राम से इतना प्यार करते हैं, हमारी विधानसभा भी प्रगति करे और उनके पदचिह्नों पर चले इसलिए हमने शकूरबस्ती का नाम श्री रामपुर करने का फैसला किया है।  

जनसुनवाई में आवेदकों ने कलेक्टर को बताई अपनी समस्याएं

जनसुनवाई में आवेदकों ने कलेक्टर को बताई अपनी समस्याएं कलेक्टर ने जनसुनवाई में आए आवेदनों का त्वरित निराकरण करने के अधिकारियों को दिए निर्देश    अनूपपुर कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली ने कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में मंगलवार को जनसुनवाई की। जनसुनवाई में आवेदकों ने अपने आवेदन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किए। आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निराकरण करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई के दौरान 62 आवेदकों ने अपनी समस्याएं बताई। जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर कलेक्टर श्री दिलीप कुमार पाण्डेय, एसडीएम अनूपपुर श्री कमलेश पुरी, एसडीएम पुष्पराजगढ़ श्री सुधाकर सिंह बघेल सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारीगणों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनी।     जनसुनवाई में वार्ड नं. 04 कोतमा की श्रीमती गुलाब तिवारी ने पट्टे की भूमि का नक्शा तरमीम कराने, ग्राम परसवार तहसील अनूपपुर के श्री कौशल प्रसाद प्रजापति ने विद्युत ट्रांसफार्मर में सुधार किए जाने तथा अन्य आवेदकों ने भूमि का सीमांकन कराने, दिव्यांग पेंशन दिलाए जाने, समग्र आईडी में सुधार कराए जाने आदि के संबंध में आवेदन दिए।

कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी लोगों की समस्याएं

कलेक्टर ने जनदर्शन में सुनी लोगों की समस्याएं अधिकारियों को समस्याओं का त्वरित निराकरण करने दिए निर्देश बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आज साप्ताहिक जनदर्शन में दूर-दराज से आये लोगों की समस्याएं सुनी। कलेक्टर ने सभी की समस्याओं को इत्मीनान से सुना। निराकरण योग्य आवेदनों का मौके पर ही संबंधित अधिकारियों द्वारा निराकरण किया गया। साप्ताहिक जनदर्शन में लोगों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी निजी और सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन दिए। कलेक्टर ने त्वरित निराकरण के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए।         साप्ताहिक जनदर्शन में आज बोदरी तहसील के ग्राम पोड़ी निवासी वृद्ध श्री रामसहाय दिवाकर ने आज कलेक्टर से मिलकर पेंशन राशि दिलाये जाने हेतु आवेदन दिया। 74 वर्षीय वृद्ध श्री दिवाकर ने कहा कि मैं एक उम्रदराज व्यक्ति हूं तथा रोजी मजदूरी कार्य करने में असमर्थ हूँ। शासन के योजनांतर्गत प्राप्त होने वाली पेंशन राशि मुझे नहीं मिल रही है। ग्राम पंचायत सचिव के समक्ष भी पेंशन राशि के लिए आवेदन किया गया, किन्तु आज तक लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। कलेक्टर ने जनपद पंचायत बिल्हा सीईओ को मामले को सौंपते हुए इसके निराकरण के निर्देश दिए। सीपत तहसील के ग्राम जांजी निवासी गरिमा सिंह ने शिक्षा सहायता राशि प्रदान करने हेतु आवेदन दिया। गरिमा ने बताया कि वर्तमान में वह अभी बीपीएड की पढ़ाई कर रही है। पिता जी लकवाग्रस्त होने के कारण शारीरिक रूप से चलने-फिरने में असमर्थ है, जिससे पूरे परिवार का पालन-पोषण उनकी माता मजदूरी करके कर रही है। कलेक्टर ने आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को भेजते हुए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बिल्हा तहसील के ग्राम पत्थरखान निवासी श्री मनोज पांडे ने खाद एवं दवा सोसाइटी से दिलाने की मांग की। उन्होंने बताया कि ग्राम पत्थरखान बिटकुली सोसाइटी के अंतर्गत 6 गांव आते हैं। उनमें से एक गांव पत्थरखान है। सोसाइटी से खाद और दवा मिल नहीं पा रही है। कलेक्टर ने डीएमओ को इस पर तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायत मस्तूरी निवासी श्री मनहरण टण्डन ने कलेक्टर के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा आवास मित्र के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई किये जाने की का निवेदन किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत उनके नाम पर आवास स्वीकृत हुआ है। आवास निर्माण के लिए शासन से आई हुई राशि को आवास मित्र के द्वारा आहरण कर लिया गया। बार-बार राशि मांगने पर भी वह देने से इंकार कर रहा है। कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को इस संबंध में आवश्यक जांच करने के निर्देश दिए है।  रचना/44/1058

कलेक्टर ने जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं

कलेक्टर ने जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं कलेक्टर कार्यालय में आयोजित हुई जनसुनवाई शहडोल  कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने आज कलेक्टर कार्यालय के सोन सभागार में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में शहडोल जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं व शिकायतें सुनी तथा निराकरण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। जनसुनवाई में  शहडोल जिले के ग्राम कुदरी निवासी कुवरिया बैगा ने पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा दिलाने, ग्राम दियापीपर निवासी मो. अब्दुला ने  विद्युत कनेक्शन  राशि की रसीद दिलाने, शहडोल वार्ड नम्बर 28 निवासी  राकेश चक्रधारी ने  आधार अपडेट कराने, शहडोल वार्ड नंम्बर 18 निवासी फिरोज खान ने भगवती इंडिया मोटराइजर शो रूम से किये गए कार्यों का परिश्रमिक भुगतान कराने हेतु आवेदन कलेक्टर डॉ केदार सिंह को दिए। जिस पर कलेक्टर ने प्राप्त आवेदनों के निराकरण हेतु संबंधित विभाग के अधिकारी की ओर आवेदन प्रेषित कर शीघ्रता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में अन्य प्राप्त आवेदनों को कलेक्टर ने संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर प्रेषित कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।   जनसुनवाई में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सोहागपुर श्री अरविंद शाह, डिप्टी कलेक्टर श्री भागीरथी लहरे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय रेल मंत्री श्री वैष्णव के पिताजी के निधन पर शोक व्यक्त किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के पिता श्री दाऊ लाल वैष्णव के निधन पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैष्णव परिवार के प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने बाबा महाकाल से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिजन को यह दु:ख सहन करने का संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है। उल्लेखनीय है कि स्व. वैष्णव बीते कुछ दिनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और उनका जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज चल रहा था।  

राजभवन में गुलाब की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन होगा दोगुना

वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 वैश्विक संवाद और आतिथ्य का अभूतपूर्व अवसर : राज्यपाल आयोजन, विश्व स्तर पर भारत की बढ़ती साख का प्रतिफल: राज्यपाल मंगुभाई पटेल राजभवन में गुलाब की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन होगा दोगुना भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 का भोपाल में आयोजन, भारत के लिए ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण है। यह आयोजन विश्व स्तर पर भारत की बढ़ती साख का प्रतिफल है। भारत को विश्वगुरू के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़ा कदम है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल 21वें वर्ल्ड रोज कन्वेंशन- 2028 संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थें। इस अवसर पर उन्होंने मध्यप्रदेश रोज सोसायटी के मुख्य संरक्षक के रूप में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी द्वारा भारत को 2028 के आयोजन की मेजबानी के लिए मई 2025 में सौंपे गए ध्वज को ग्रहण किया। कन्वेंशन का आयोजन भोपाल में वर्ष 2028 में 7 से 13 जनवरी तक होगा। बैठक का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में इण्डियन रोज फेडरेशन के तत्वावधान में मध्यप्रदेश रोज सोसायटी द्वारा किया गया था। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी के ध्वज को ग्रहण करना देश और प्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का पल है। यह ध्वज 2028 के ऐतिहासिक आयोजन के गौरवपूर्ण कार्यक्रम की जिम्मेदारी, वैश्विक संवाद और आतिथ्य के अभूतपूर्व अवसर का प्रतीक है। राज्यपाल पटेल ने वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी द्वारा भारत को पहली बार आयोजन की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार ज्ञापित किया। उन्होंने वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी के पहले भारतीय अध्यक्ष बनने पर सुशील प्रकाश को सम्मानित किया। इण्डियन रोज फेडरेशन और मध्यप्रदेश रोज सोसायटी को आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 का मध्यप्रदेश के भोपाल में आयोजन, प्रदेश को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाएगा। आयोजन की मेजबानी सम्पूर्ण मध्यप्रदेश और भोपाल शहर के लिए हर्ष और गर्व का विषय है। आयोजन के लिए रोज सोसायटी द्वारा भोपाल को रोज सिटी के रुप में विकसित करने की जानकारी पर राज्यपाल पटेल ने राजभवन में गुलाब की विभिन्न प्रजातियों के वर्तमान उत्पादन को दोगुना करने की पहल करने के लिए कहा है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि गुलाब धार्मिकता और पर्वित्रता का प्रतीक है। यह आत्मीयता और सहृदयता की पहचान है। उन्होंने कहा कि हम सभी आयोजन से जुड़े प्रत्येक कार्य और जिम्मेदारियों को भव्यता और दिव्यता के साथ सम्पन्न करने का संकल्प ले ताकि यह आयोजन दुनियां भर के प्रतिनिधियों के मन में प्रेरणादायी और यादगार अनुभव के रूप में अंकित हो। राज्यपाल पटेल ने मध्यप्रदेश और भोपाल के गुलाब प्रेमियों से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग की अपील भी की। बैठक में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 का आयोजन मध्यप्रदेश टूरिज्म को बढ़ाने में भी मददगार होगा। पर्यटन विभाग द्वारा मेहमानों को मध्यप्रदेश दर्शन कराने की योजना भी तैयार की जाएगी। उन्होंने मध्यप्रदेश में इस आयोजन के लिए वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी को धन्यवाद ज्ञापित किया। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी का स्वागत उच्च शिक्षा, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्ला ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और परिचयात्मक उद्बोधन दिया।बैठक में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी के अध्यक्ष सुशील प्रकाश ने वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 की तैयारी, योजना आदि पर आधारित पी.पी.टी. प्रस्तुतिकरण दिया। आभार मध्यप्रदेश रोज सोसायटी के अध्यक्ष एस.एस. गर्दे ने व्यक्त किया।    

पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता, केवल पूजा और प्रबंधन का होता है अधिकार: हाईकोर्ट

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मंदिर की संपत्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पुजारी केवल देवता की पूजा करने और मंदिर का सीमित प्रबंधन करने के लिए नियुक्त एक प्रतिनिधि होता है, न कि स्वामी। बता दें कि यह फैसला जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जो धमतरी जिले के श्री विंध्यवासिनी मां बिलाईमाता मंदिर के पुजारी परिषद अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा ने दायर की थी। शर्मा ने राजस्व मंडल, बिलासपुर के 3 अक्टूबर 2015 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी। विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुरली मनोहर शर्मा ने तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर अपना नाम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की थी। तहसीलदार ने उनके पक्ष में आदेश जारी किया, लेकिन एसडीओ ने इस आदेश को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ शर्मा ने अपर आयुक्त रायपुर के समक्ष अपील की, जो खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह दलील दी कि तहसीलदार का आदेश न्यायोचित था और अन्य अधिकारियों ने मामले की सही समीक्षा नहीं की। हाईकोर्ट की टिप्पणी हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि विंध्यवासिनी मंदिर ट्रस्ट समिति 23 जनवरी 1974 से विधिवत पंजीकृत संस्था है और वही मंदिर की संपत्ति का वैधानिक प्रबंधन करती है। कोर्ट ने 21 सितंबर 1989 को सिविल जज, वर्ग-2, धमतरी द्वारा पारित एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ट्रस्ट समिति ट्रस्ट की संपत्ति की देखरेख के लिए किसी भी व्यक्ति को प्रबंधक नियुक्त कर सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उस व्यक्ति को संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त हो गया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पुजारी एक “ग्राही” यानी धारक होता है, जो मंदिर की पूजा संबंधी गतिविधियों के लिए नियुक्त होता है। यदि वह अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, तो यह अधिकार वापस भी लिया जा सकता है। इसलिए पुजारी को मंदिर की भूमि या संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। यह निर्णय उन मामलों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है जहां मंदिर की संपत्ति को लेकर पुजारियों और ट्रस्ट के बीच विवाद खड़े होते हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक सेवा का अधिकार और मालिकाना हक अलग-अलग बातें हैं और पुजारी केवल सेवा के लिए नियुक्त व्यक्ति है, स्वामी नहीं।