samacharsecretary.com

राहत मिलेगी या बढ़ेंगी मुश्किलें? संजीव अरोड़ा मामले में आज कोर्ट में अहम सुनवाई

लुधियाना प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए गए पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा है। वहीं, मंत्री के समर्थकों, पार्टी नेताओं और परिजनों की नजरें भी अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। सुनवाई से एक दिन पहले रविवार को संजीव अरोड़ा के करीबी समर्थकों और पार्टी नेताओं ने गुरुद्वारा साहिब में विशेष अरदास करवाई। उन्होंने मंत्री की जल्द रिहाई और न्यायिक राहत की कामना की। पिछले कई दिनों से उनके समर्थक लगातार सकारात्मक फैसले की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गौरतलब है कि 9 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने कथित 100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि एक रियल एस्टेट कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से संपत्तियों की खरीद-बिक्री तथा वस्तु एवं सेवा कर संबंधी कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इसी मामले में जांच के दौरान एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए अरोड़ा को चंडीगढ़ से हिरासत में लिया था। न्यायिक हिरासत में हैं मंत्री अरोड़ा गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत से उनका रिमांड प्राप्त कर पूछताछ की थी। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी इस मामले की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही है। बीते कुछ सप्ताह के दौरान अरोड़ा से जुड़े कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा हाल ही में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के आवास पर भी एजेंसी ने कार्रवाई की थी। हालांकि एजेंसी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी नई जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है। आज राहत मिलने के संकेत राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सोमवार की सुनवाई इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यदि अदालत से राहत मिलती है तो यह संजीव अरोड़ा और उनके समर्थकों के लिए बड़ी राहत होगी। वहीं यदि जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा जाता है या याचिका खारिज होती है तो उनकी कानूनी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें अदालत की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय की जांच भी लगातार जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पायलट बनने की लागत 34.31 लाख रुपये, पांच किस्तों में होगा पूरा भुगतान

रांची  झारखंड में 15 छात्रों को भुगतान के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चालू हो चुका है और इन्हें अभी ग्राउंड एक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है। यहां सभी ट्रेनी पायलट कागजी पढ़ाई को पूरा करेंगे, जिसके बाद हवा में प्रशिक्षण शुरू होगा। छात्रों को छात्रावास शुल्क के अलावा पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पांच किस्तों में 34.31 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अलावा परीक्षा के आधार पर 15 और छात्रों का चयन किया जाएगा जिन्हें अलग से प्रशिक्षण दिया जाएगा। झारखंड कमर्शियल पायलट के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम एक जून से शुरू हाे चुका है। इसके लिए चयनित छात्रों को दुमका स्थित स्टेट हैंगर में रखा गया है, जहां प्रारंभ में ग्राउंड एक्टिविटी के बारे में बताया जाएगा। प्रशिक्षण की शुरुआत हो चुकी है। छात्रों को इसके लिए पांच चरणों में पूरा भुगतान करना होगा जो कि 34.31 लाख रुपये है। सभी छात्रों को निबंधन के समय 3.5 लाख रुपये देने होंगे जिसके बाद भुगतान के लिए अलग-अलग तारीख और शर्तें निर्धारित की जा चुकी हैं। इसके अलावा अन्य 15 प्रतिभाशाली छात्रों को सरकार की ओर से मुफ्त प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। कैसे-कैसे करना है भुगतान चरण                          लागत (लाख रुपये) निबंधन के समय                    3.50 उड़ान शुरू करने से पहले        3.90 20 घंटे उड़ान के पूर्व               7.00 50 घंटे उड़ान के पूर्व                  7.00 100 घंटे उड़ान के पूर्व                7.00 150 घंटे उड़ान के पूर्व                   5.91 कुल लागत     34.31 परीक्षा पर्षद ने कुछ बिंदुओं को स्पष्ट करने का आग्रह किया छात्रों के चयन को लेकर परीक्षा के लिए अधिकृत एजेंसी झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद ने छात्रों के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए पर्षद को ही अधिकृत करने की बात कही है। ऐसा होने से कहीं काेई भ्रम नहीं रह जाएगा। फिलहाल सिर्फ परीक्षा कराने का दायित्व पर्षद के पास है। पर्षद का तर्क है कि प्रमाणपत्रों की जांच पर्षद के जिम्मे होने से बेहतर परिणाम मिलेंगे।  

राज्य में 100 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर लाने का लक्ष्य, निवेश को मिलेगा बढ़ावा

 चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य को वैश्विक सेवा एवं अनुसंधान केंद्रों का प्रमुख स्थल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 तैयार की है। इस नीति का उद्देश्य गुरुग्राम को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर कैपिटल” के रूप में स्थापित करना है। नई नीति के तहत अगले कुछ वर्षों में 100 से अधिक नए वैश्विक क्षमता केंद्रों को हरियाणा में आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दूसरे देशों में स्थापित की गई अपनी ही पूर्ण स्वामित्व वाली रणनीतिक इकाइयां या केंद्र हैं। ये मुख्य रूप से तकनीकी सहायता, अनुसंधान एवं विकास, डेटा एनालिटिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य वैश्विक परिचालन कार्यों का प्रबंधन करते हैं। वैश्विक कंपनियां अब केवल बैक-आफिस संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं और उत्पाद विकास जैसे उच्च मूल्य वाले कार्य भी भारत स्थित जीसीसी के माध्यम से संचालित कर रही हैं। ऐसे में हरियाणा की यह नीति राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थिति दिला सकती है। नई नीति मौजूदा ताकत को और विस्तार देने का प्रयास भारत में वर्तमान में करीब 1,700 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। हरियाणा विशेष रूप से गुरुग्राम, इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन चुका है और राज्य में पहले से 270 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) काम कर रहे हैं। नई नीति इस मौजूदा ताकत को और विस्तार देने का प्रयास है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हाल ही में इस नीति को मंजूरी प्रदान की गई है। उद्योग विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की देखरेख में तैयार हुई इस नीति के तहत गुरुग्राम में समर्पित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मिशन स्थापित किया जाएगा। इसके अंतर्गत निवेशकों को सभी अनुमतियों और सेवाओं के लिए सिंगल विंडो डेस्क उपलब्ध होगी। साथ ही इन्वेस्टर मैचमेकिंग प्लेटफार्म और एडवाइजरी काउंसिल का गठन किया जाएगा, जिससे उद्योग, सरकार और विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना मुख्य उद्येश्य हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ाव, उत्कृष्ट सड़क एवं हवाई संपर्क, कारपोरेट इकोसिस्टम, उच्च गुणवत्ता वाली कार्यालय सुविधाएं और कुशल मानव संसाधन हरियाणा को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) निवेश के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाने के लिए पर्याप्त हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना और कंपनियों को त्वरित निर्णय एवं सहायता प्रदान करना है। हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 की विशेषता यह है कि इसमें केवल गुरुग्राम ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी जीसीसी निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन प्रविधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य आर्थिक गतिविधियों को कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रखने की बजाय पूरे राज्य में फैलाना है। इससे फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत, करनाल, हिसार और अन्य उभरते शहरी केंद्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। पांच से नौ वर्ष तक अधिकत 15 करोड़ की वित्तीय सहायता नई नीति के तहत कंपनियों को पांच से नौ वर्षों तक परिचालन सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है। सरकार का मानना है कि शुरुआती वर्षों में मिलने वाला यह सहयोग कंपनियों को हरियाणा में दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके अतिरिक्त डीएसआइआर/सीएसआइआर मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्रों को भी पूंजीगत और परिचालन सहायता देने का प्रविधान रखा गया है। इससे राज्य में नवाचार, शोध और तकनीकी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। जीसीसी क्षेत्र में होने वाला निवेश केवल कार्यालय खोलने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे उच्च वेतन वाली नौकरियां, स्टार्टअप सहयोग, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय सेवा क्षेत्र का विस्तार भी होता है। नई नीति के जरिए आइटी, इंजीनियरिंग, वित्त, डेटा साइंस, एआइ और अनुसंधान क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026 की प्रमुख बातें     – गुरुग्राम को वैश्विक क्षमता केंद्रों की राजधानी बनाने का लक्ष्य     – हरियाणा में 100 से अधिक नए जीसीसी आकर्षित करने की योजना     – राज्य में पहले से 270 से अधिक जीसीसी संचालित     – सिंगल विंडो डेस्क, निवेशक मंच और सलाहकार परिषद का गठन     – पांच से नौ वर्ष तक परिचालन सहायता में अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तक सहायता     – डीएसआइआर/सीएसआइआर मान्यता प्राप्त आरएंडडी केंद्रों को विशेष प्रोत्साहन     – उच्च कौशल रोजगार और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा     – गुरुग्राम के साथ अन्य जिलों में भी निवेश विस्तार पर जोर।  

योगी सरकार का उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी खेल केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश खेल और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी क्रम में मेरठ स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न स्नातक, परास्नातक और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभ्यर्थी 10 जुलाई तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह पहल प्रदेश के खिलाड़ियों और खेल क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आई है। बीएससी योग और एमएससी योग में प्रवेश शुरू इस वर्ष से विश्वविद्यालय में तीन वर्षीय बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (बीपीईएस) और बीएससी योग पाठ्यक्रम में प्रवेश दिए जाएंगे। इसके साथ ही दो वर्षीय एमएससी योग कार्यक्रम में भी दाखिले होंगे। खेल क्षेत्र में नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किया है। विवि में बीपीईएस कोर्स 2025-26 से शुरू हो चुका है। प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत प्रॉस्पेक्टस वेबसाइट https://sportsuniup.com/ पर उपलब्ध कर दिया गया है। खिलाड़ियों और छात्रों को आवेदन के लिए लगभग एक महीने का समय दिया गया है। कई खेलों में पीजी डिप्लोमा कोर्स भी हो रहा शुरू अगर सीटों की बात करें तो बीपीईएस में 50, बीएससी योग में 40, एमएससी योग में 20 और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में 15 सीटों पर प्रवेश होंगे। इसके अलावा इस सत्र से स्कूल ऑफ कोचिंग के अंतर्गत एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, हॉकी, कबड्डी, कुश्ती और योग जैसे खेलों में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी शुरू हो रहा है। इन सभी में पीजी डिप्लोमा के लिए 15-15 सीट पर प्रवेश होगा। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को रोजगारोन्मुख और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा प्रदान की गई है। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई चैंपियनशिप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा खेलो इंडिया, एसजीएफआई राष्ट्रीय खेल, सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी विशेष अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए आरक्षित रखने का निर्णय लिया है। ये सीटें स्वीकृत क्षमता के अतिरिक्त होंगी। कुल 12 कोर्सों में होगा प्रवेश मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालय में 9 डिप्लोमा, 2 स्नातक और 1 परास्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कुल 12 नए कोर्सों में प्रवेश फिटनेस टेस्ट के आधार पर होगा। कक्षा 12वीं के अंकों और फिटनेस टेस्ट के प्रदर्शन को मिलाकर मेरिट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा दी जाएगी। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों का समग्र विकास करना है। साथ ही इसका विजन उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी खेल केंद्र बनाना है।

सोमवती अमावस्या पर रेलवे की खास तैयारी, श्रद्धालुओं के लिए स्पेशल ट्रेन सेवा शुरू

 बरेली  रेलवे ने सोमवती अमावस्या मेले के दौरान हरिद्वार जाने-आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चार स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। इसमें से दो ट्रेनें बरेली होकर गुजरेंगी। मुरादाबाद मंडल के सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि 04326 हरिद्वार-लखनऊ स्पेशल अनारक्षित ट्रेन 15, 16 और 17 जून को चलेगी। ट्रेन हरिद्वार से 18:35 बजे चलकर मुरादाबाद से 22:50 बजे, रामपुर से 23:21 बजे, बरेली से 00:06 बजे, शाहजहांपुर से 01:10 बजे और लखनऊ 3:30 बजे पहुंचेगी। इसके अलावा 04325 लखनऊ-हरिद्वार स्पेशल अनारक्षित 16, 17 और 18 जून को लखनऊ से 05:30 बजे चलकर शाहजहांपुर से 08:05 बजे, बरेली से 09:24 बजे और हरिद्वार 16:15 बजे पहुंचेगी। 04327 हरिद्वार-बठिंडा स्पेशल अनारक्षित 15 जून को हरिद्वार से बठिंडा और 16 जून को 04328 बठिंडा से हरिद्वार के लिए चलेगी। वंदेभारत एक्सप्रेस अब ऐशबाग तक जाएगी रेलवे ने सहारनपुर-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस का विस्तार गोमतीनगर से आगे ऐशबाग तक करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा भी कई ट्रेनों का विस्तार ऐशबाग तक होगा। पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार के मुताबिक 15 जून से 26504/26503 गोमती नगर-सहारनपुर-गोमती नगर एक्सप्रेस का मार्ग विस्तार ऐशबाग तक होगा। इसके अलावा 55055 का नकहा जंगल तक, 55061 का ऐशबाग तक, 55062 का गोरखपु तक विस्तार होगा। लखनऊ में ब्लॉक से त्रिवेणी सहित 10 ट्रेनें परिवर्तित मार्ग से चलेंगी उत्तर रेलवे के लखनऊ स्टेशन पर कानकोर्स के लाचिंग कार्य की वजह से ट्रैफिक और पावर ब्लाक लिया जाएगा। इसकी वजह से 14 से 23 जून तक 15075 शक्तिनगर-टनकपुर एक्सप्रेस, 15073 सिंगरौली-टनकपुर एक्सप्रेस, 15074 टनकपुर-सिंगरौली एक्सप्रेस, 15076 टनकपुर-शक्तिनगर एक्सप्रेस, 15, 18 एवं 22 जून को 14523 बरौनी-अम्बाला एक्सप्रेस, 16, 20 एवं 23 जून को 14524 अम्बाला-बरौनी एक्सप्रेस, 14 से 23 जून तक 15127 बनारस-नई दिल्ली एक्सप्रेस, 15128 नई दिल्ली-बनारस एक्सप्रेस, 15119 बनारस-देहरादून एक्सप्रेस और 15120 देहरादून-बनारस एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग आलमनगर-ट्रांसपोर्ट नगर-उतरेटिया के रास्ते चलाई जाएगी।  

एफएलएन और एनसीईआरटी आधारित शिक्षण होगा मजबूत, यूपी के 232 शैक्षणिक संदर्भदाता लेंगे विशेष ट्रेनिंग

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को विद्यालय स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) तथा एनसीईआरटी आधारित पाठ्यपुस्तकों पर आधारित शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश के 58 जनपदों से 232 शैक्षणिक संदर्भदाताओं को राज्य स्तरीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन चरणों में 22 जून से 10 जुलाई तक राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (एसआईएचएफडब्ल्यू), लखनऊ में आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण के माध्यम से एआरपी और डायट मेंटरों की ऐसी प्रशिक्षित टीम तैयार की जाएगी, जो आगे चलकर ब्लॉक स्तर पर हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षित कर निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को कक्षा-कक्ष तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएगी। योगी सरकार की यह पहल बुनियादी शिक्षा में गुणवत्ता, सीखने के परिणामों और निपुण लक्ष्यों की प्राप्ति को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। योगी सरकार का फोकस केवल विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि कक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने पर भी है। इसी उद्देश्य से शैक्षणिक सत्र 2026-27 में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन और एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों पर आधारित प्राथमिक विद्यालयों के सभी शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों के लिए प्रस्तावित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने हेतु जिला स्तरीय संदर्भदाताओं का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण, 232 प्रतिभागी होंगे शामिल राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन एसआईएचएफडब्ल्यू, सेक्टर-18, इंदिरा नगर, लखनऊ में तीन चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण 22 जून से 26 जून, द्वितीय चरण 29 जून से 3 जुलाई तथा तृतीय चरण 6 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक आयोजित होगा। इन तीनों चरणों में कुल 58 जनपदों से 232 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रत्येक जनपद से चार संदर्भदाता नामित किए जाएंगे, जिनमें दो एआरपी और दो डायट मेंटर शामिल होंगे। हिंदी, गणित और अंग्रेजी शिक्षण पर विशेष फोकस प्रशिक्षण के लिए चयनित चार संदर्भदाताओं में कम से कम एक-एक प्रतिभागी हिंदी, गणित और अंग्रेजी विषय से संबंधित होना अनिवार्य किया गया है। जिन जनपदों में एआरपी की संख्या दो से कम होगी, वहां अतिरिक्त डायट मेंटरों को नामित किया जाएगा। विषय की गहरी समझ और प्रशिक्षण संचालन की क्षमता रखने वाले एआरपी एवं डायट मेंटरों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। प्रशिक्षित संदर्भदाता बनेंगे परिवर्तन के वाहक राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किए जाने वाले ये संदर्भदाता आगे ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाएंगे। इनके माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षा मित्रों तक एफएलएन आधारित शिक्षण पद्धति, एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों की अवधारणाएं और निपुण लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। इससे प्रदेशभर में शिक्षण की गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सीखने के परिणामों में सुधार को मिलेगी नई गति निपुण भारत मिशन का मूल उद्देश्य बच्चों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करना है। योगी सरकार द्वारा लगातार शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक अनुश्रवण, निपुण मूल्यांकन और गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। संदर्भदाताओं का यह विशेष प्रशिक्षण उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार, कक्षा-कक्ष शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना और निपुण लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना लक्ष्य है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन पर लगातार कार्य किया जा रहा है। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत आयोजित यह राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की क्षमता वृद्धि, अकादमिक नेतृत्व को मजबूत बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर अधिगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रशिक्षित संदर्भदाताओं के माध्यम से प्रदेशभर में निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा, जिससे बुनियादी शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

70 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी-बारिश का अलर्ट, कई जिलों में येलो वॉर्निंग

पटना  बिहार के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल बिहार के मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 4 से 5 दिनों में मानसून बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल स्थिति में है। आंधी-बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, पटना, नवादा, गया, औरंगाबाद, सिवान, भोजपुर, शेखपुरा, लखीसराय, बक्सर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, भागलपुर और मुंगेर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, कल यानी 15 जून को पटना का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मौसम? बीते 24 घंटों में बिहार के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) दर्ज की गई है । मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के गया में सबसे ज्यादा 16 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके साथ ही राजगीर में 61 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज और झोंकेदार हवाएं चलीं। मौसम विभाग की अपील मौसम विभाग ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आकाशीय बिजली कड़कने के समय खुले खेतों, पेड़ों के नीचे या कंक्रीट के फर्श/दीवारों के सहारे न रहें। आंधी-तूफान के समय सुरक्षित स्थानों पर शरण लें और गैर-जरूरी यात्रा से बचें। बिजली कड़कने के दौरान घर के सभी कीमती इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल सामानों के प्लग निकाल दें।

किसानों को डिजिटल क्रॉप सर्वे और आधुनिक कृषि तकनीकों की दी जाएगी जानकारी: मुख्यमंत्री

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सीएम आवास 01 अणे मार्ग से किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 से संबंधित 2 कृषि ज्ञान वाहन सहित सभी जिलों के लिए किसान जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। किसानों को क‍िया जाएगा जागरूक इस किसान जागरुकता वाहन द्वारा किसानों को खरीफ मौसम से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक किया जाएगा। किसानों को खरीफ फसलों की तकनीकी जानकारी दी जाएगी। शारदीय (खरीफ) मौसम में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं तथा खरीफ में अनुदानित दर पर उपादान वितरण की जानकारी दी जाएगी गृहमंत्री। किसानों का आय बढ़ाने, डिजिटल क्रॉप सर्वे/फार्मर रजिस्ट्री के बारे में अवगत कराने के साथ-साथ कृषि उपकरण की भी जानकारी दी जाएगी। सीएम ने कहा-उत्‍पादकता में होगी वृद्ध‍ि प्रशिक्षण एवं विस्तार सेवाओं के बारे में किसानों को अवगत कराया जाएगा। साथ ही खेत बचाओ अभियान, प्रकृति तथा संतुलित उर्वरक की जानकारी एवं फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरुकता किया जाएगा। मुख्‍यमंत्री ने अपने एक्‍स हैंडल पर लिखा है, क‍ि आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, फसल प्रबंधन तथा कृषि योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के लिए हेतु जागरूकता वाहनों को रवाना किया गया। यह अभियान किसानों तक कृषि संबंधी नवीनतम जानकारियां पहुंचाकर उनकी उत्पादकता एवं आय में वृद्धि के साथ-साथ राज्य में कृषि विकास को नई गति प्रदान करेगा। कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय सिन्हा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत एवं कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल के अतिरिक्त अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मंडलीय बैठकों में सड़क-पुल परियोजनाओं की प्राथमिकता तय

लखनऊ  अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार विकास कार्यों को रफ्तार देने में जुट गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलीय दौरे शुरू कर दिए हैं। इन दौरों में वे जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर सड़कें व पुल पुलियों के निर्माण कार्यों के संबंध में उनकी प्राथमिकताएं समझ रहे हैं। लोक निर्माण विभाग जुलाई से ही नई योजनाओं के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल में जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक मंडलीय दौरे की शुरूआत कर दी है। रविवार को वे गोरखपुर में गोरखपुर मंडल के जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री का मंडलीय दौरा इस महीने के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। इन बैठकों के माध्यम से चालू वित्तीय वर्ष में विभागीय बजट से नई सड़कें व पुल-पुलियों के निर्माण कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। जिसके आधार पर पीडब्ल्यूडी नए निर्माण कार्यों को तेजी से शुरू कराएगा। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव अजय चौहान के मुताबिक जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर सभी जिलों की कार्ययोजना आ गई है। मुख्यमंत्री की मंडलीय बैठकें पूरी हो जाने के बाद चयनित कार्यों का काम तेजी से शुरू कराया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि जुलाई से ही विभाग चयनित कार्यों के लिए बजट स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया का काम शुरू कर देगा, ताकि सितंबर से धरातल पर युद्धस्तर पर काम शुरू कराया जा सके। इस वित्तीय वर्ष में पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्यो के लिए 35,156 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जिसमें से 11,718 करोड़ रुपये से नए कार्यों के लिए है। शेष बजट पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर खर्च किया जाना है। चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई सड़कें व पुल-पुलियों का काम शुरू किया जाना है। विभाग ने तय किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली योजनाओं को 50 प्रतिशत तथा इससे बड़ी योजनाओं के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक बजट जारी किया जाएगा।

जाट सिख, ओबीसी और एससी वोट बैंक पर नजर, BJP से लेकर कांग्रेस तक ने बनाई नई रणनीति

 चंडीगढ़  पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की कवायद तेज कर दी है। राज्य की चारों प्रमुख पार्टियां—भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिरोमणि अकाली दल (शिअद), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस अपने पारंपरिक जनाधार को बचाने के साथ-साथ नए सामाजिक समूहों में पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। जाट सिख, ओबीसी, एससी-बीसी, व्यापारी, महिला और युवा वर्ग अब सभी दलों की राजनीतिक रणनीति के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा ने पिछले कुछ समय में अपने सामाजिक विस्तार पर विशेष जोर दिया है। पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व में जाट सिख चेहरे को आगे किया है और साथ ही ओबीसी, सैनी तथा अन्य पिछड़े वर्गों के बीच लगातार कार्यक्रम और संवाद अभियान चला रही है। पार्टी का प्रयास शहरी और व्यापारी दल की पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर ग्रामीण और कृषि प्रधान वर्गों तक पहुंच बढ़ाने का है। अकाली दल बढ़ा रहा सामाजिक दायरा शिरोमणि अकाली दल भी बदलते राजनीतिक हालात के बीच अपना सामाजिक दायरा बढ़ाने में जुटा है। पार्टी पहले ही 70 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में एससी-बीसी, महिला और यूथ विंग को सक्रिय कर चुकी है। इसके अलावा हाल ही में 67 विधानसभा हलकों में उद्योग एवं व्यापार विंग के हलका प्रधान नियुक्त किए गए हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि संगठन में विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ाकर शहरी और गैर-पारंपरिक वोट बैंक में पकड़ मजबूत की जा सकती है। आप ने कल्याण बोर्ड गठित किए उधर, आम आदमी पार्टी सरकार ने भी विभिन्न समुदायों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए जिला और विधानसभा स्तर पर कल्याण बोर्ड गठित करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार पहले ही 21 राज्य स्तरीय कल्याण बोर्ड बना चुकी है और अब इनका विस्तार सभी जिलों और 117 विधानसभा क्षेत्रों तक करने की योजना पर काम चल रहा है। आधिकारिक तौर पर इन बोर्डों का उद्देश्य समुदायों से जुड़े मुद्दों और सुझावों को सरकार तक पहुंचाना बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। कांग्रेस सामाजिक संतुलन बनाने में जुटी वहीं, कांग्रेस भी संगठन के पुनर्गठन के साथ सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी ने हाल के महीनों में जिला और हलका स्तर पर नियुक्तियों में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया है। इसके अलावा कांग्रेस के एससी विभाग, ओबीसी विभाग, किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस और व्यापार प्रकोष्ठ को फिर से सक्रिय करने की कवायद चल रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रदेश नेतृत्व को सभी फ्रंटल संगठनों और विभागों को विधानसभा स्तर तक सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चुनाव से पहले हर सामाजिक वर्ग के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जा सके। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी जिला और विधानसभा स्तर पर सामाजिक समूहों के प्रभावशाली प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें शुरू करने की तैयारी में है। इसका मकसद उन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करना है, जहां पिछले चुनावों में पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ था। सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक फेरबदल में भी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है। पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़ी राजनीति राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब की राजनीति अब केवल पारंपरिक वोट बैंक के इर्द-गिर्द नहीं घूम रही। सभी प्रमुख दल अपने पुराने आधार को बरकरार रखते हुए नए सामाजिक समूहों में स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। संगठनात्मक नियुक्तियों, अलग-अलग विंगों की सक्रियता और समुदाय आधारित संपर्क अभियानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।