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केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के सहकारिता विभाग की समीक्षा

प्रदेश में स्थापित होगा राज्य सहकारी महाविद्यालय, सहकारिता में शोध व अध्ययन को मिलेगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के सहकारिता विभाग की समीक्षा सहकारिता के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय: केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहकारिता को युवाओं के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य व सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का द्वार बनाया जाए: मुख्यमंत्री 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक एम-पैक्स सदस्यता महाभियान, हर किसान-परिवार को सहकारिता से जोड़ने का संकल्प सहकारिता क्षेत्र में नवाचारों के मिल रहे अच्छे परिणाम, 16 बंद जिला सहकारी बैंक पुनर्जीवित, ₹306.92 करोड़ की सहायता से सभी बैंक लाभ में, वर्ष 2017 के कुल एनपीए 800 करोड़ से घटकर ₹278 करोड़ एफसीआई द्वारा 35 जनपदों में 96 स्थलों की पहचान, अप्रैल 2026 तक देश की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना पूरी होगी एम-पैक्स को ₹10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण सीमा से बड़ा लाभ, अब तक ₹5,400 करोड़ का टर्नओवर और ₹120 करोड़ मार्जिन मनी 6,101 सोसाइटी में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू, 6443 एम-पैक्स पीएम किसान समृद्धि केंद्र के रूप में हुए हैं अपग्रेड लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में अध्ययन, अध्यापन और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सहकारी महाविद्यालय की स्थापना की तैयारी के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल की उपस्थिति में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक में एम-पैक्स सदस्यता महाभियान पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' मंत्र को आत्मसात करते हुए 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक आयोजित अभियान के माध्यम से हर किसान और हर ग्रामीण परिवार को सहकारिता से जोड़ना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित प्रथम सदस्यता महाअभियान में 30 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े थे, जिनमें 17.33 लाख किसान, 3.92 लाख अकुशल श्रमिक, 1.56 लाख कुशल श्रमिक, 2.20 लाख पशुपालक और 6,411 मत्स्यपालक शामिल थे। इस अभियान से सहकारिता क्षेत्र में ₹70 करोड़ का अंशदान प्राप्त हुआ था। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि द्वितीय महाअभियान को और व्यापक बनाया जाए तथा गाँव-गाँव में कैंप, ऑनलाइन/ऑफलाइन पंजीकरण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय हैं और प्रधानमंत्री जी के विजन को साकार करने में प्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बैठक में सहकारी बैंकिंग सुधारों की समीक्षा करते हुए अवगत कराया गया कि 2017-18 से 2024-25 तक राज्य सरकार द्वारा 16 बंद जिला सहकारी बैंकों को ₹306.92 करोड़ की सहायता से पुनर्जीवित किया गया है। इन बैंकों का एनपीए 2017 में ₹800 करोड़ से घटकर मार्च 2025 में ₹278 करोड़ रह गया। मार्च 2025 तक ₹1000 करोड़ का ऋण व्यवसाय दर्ज हुआ और सभी बैंक लाभ में आ गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान और जमाकर्ताओं का विश्वास ही सहकारिता की असली पूँजी है, इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने कहा कि सहकारिता भारतीय ग्रामीण समाज की प्राचीन परंपरा है। समाज को एकजुट रखने में इसकी बड़ी भूमिका है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सहकारिता क्षेत्र में नए इतिहास रच रहा है। अन्न भंडारण योजना की प्रगति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि एफसीआई ने प्रदेश के 35 जनपदों में 96 स्थलों की पहचान की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 15 नवम्बर 2025 तक वित्तीय समापन प्रक्रिया पूरी कर जनवरी 2026 से निर्माण कार्य प्रारंभ कर अप्रैल 2026 तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि गोदाम निर्माण किसानों की समृद्धि का आधार है, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।  इस अवसर पर एम-पैक्स के गठन और कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से समीक्षा की गई। बताया गया कि 2024-25 में 266 एम-पैक्स के सापेक्ष चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 457 नये एम-पैक्स गठित हो चुके हैं, जबकि सितम्बर माह में 1,088 ग्राम पंचायतों में संगठन प्रक्रिया चल रही है। एम-पैक्स को उर्वरक वितरण हेतु ₹10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण सीमा दी गई है, जिससे अब तक ₹5,400 करोड़ का टर्नओवर और ₹120 करोड़ की मार्जिन मनी प्राप्त हुई है। इसी प्रकार, 757 नवगठित एम-पैक्स के उन्नयन के लिए राज्य सरकार ₹1 लाख मार्जिन मनी तथा ₹1 लाख आधारभूत अवसंरचना विकास के लिए उपलब्ध करा रही है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तहत 6,101 सोसाइटी में क्यूआर/यूपीआई आधारित प्रणाली लागू हो चुकी है। साथ ही, व्यवसाय विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए 5170 एम-पैक्स में सीएससी सेवाएं, 6443 एम-पैक्स को पीएम किसान समृद्धि केंद्र तथा 161 एम-पैक्स में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन औषधि केंद्र अस्पतालों के निकट स्थापित किए जाएं और सहकारिता को युवाओं के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य व सेवा क्षेत्रों में रोजगारमूलक अवसरों का द्वार बनाया जाए। बैठक में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रकाश शाही, धर्मपाल सिंह, संजय निषाद, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर, भारत सरकार के सचिव सहकारिता डॉ. आशीष कुमार भूटानी, नाबार्ड के डीजीएम एनएल साहू तथा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

दुग्ध उत्पादकों के लिए बड़ी खबर: 2 अक्टूबर से प्रदेश में लगने वाला समृद्धि अभियान

प्रमुख सचिव ने ली तैयारियों संबंधी बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप प्रदेश के किसानों की पशुपालन के माध्यम से आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से प्रदेश में 2 अक्टूबर से "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान'' प्रारंभ किया जायेगा। अभियान के अंतर्गत गाँव-गाँव पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा और उन्हें पशुओं में नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में जागरूक किये जाने के साथ आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जायेगा। अभियान 3 चरणों में चलाया जायेगा। इसकी शुरूआत 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं से की जायेगी। अभियान 9 अक्टूबर तक चलेगा। प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास श्री उमाकांत उमराव ने शुक्रवार को मंत्रालय में अभियान की तैयारियों संबंधी बैठक ली। बैठक में सभी संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिये कि अभियान का प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया तथा अन्य संचार माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाये। गाँवों में मुनादी पिटवाकर इसकी जानकारी दी जाये। बैठक में बताया गया कि अभियान में 10 या 10 से अधिक गौ-वंश रखने वाले पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा। अभियान के द्वितीय चरण में 5 या अधिक गौ-वंश रखने वाले पशुपालकों और तीसरे चरण में 5 या कम गौ-वंश रखने वाले पशुपालकों से सम्पर्क किया जायेगा। अभियान के अंतर्गत सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी/मैत्री द्वारा पशुपालकों से गृह भेंट की जायेगी और उन्हें पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार के संबंध में जागरूक किया जायेगा। साथ ही पशुओं में टैग लगाने संबंधी जानकारी भी एकत्र की जायेगी। इस कार्य के लिये मैत्री को प्रति पशुपालक 5 रुपये का मानदेय भी दिया जायेगा। दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान संबंधी प्रशिक्षण प्रत्येक जिले के मास्टर ट्रेनर को राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान, भोपाल में दिया जायेगा।  

26 सितंबर को सुनाई जाएगी अहम तारीख, सिद्धू मूसेवाला मामले में कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

मानसा पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में अदालत ने जेल प्रशासन को आरोपियों को फिजिकल तौर पर पेश करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने 26 सितंबर को मामले के 6 आरोपियों को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, आज मानसा की सेशन कोर्ट में इस केस की सुनवाई हुई, जिसमें सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह की गवाही शुरू हुई। इस दौरान वे थोड़े भावुक भी हो गए। हत्याकांड के आरोपियों की पहचान के बारे में बात करते हुए बलकौर सिंह ने कहा कि उनकी नजर कमजोर है और वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपियों की पहचान नहीं कर सकते। उन्होंने आरोपियों को अदालत में सामने पेश करने की अपील की। इस अपील को स्वीकार करते हुए अदालत ने आदेश दिया कि आरोपियों को फिजिकली पेश किया जाए। इसके लिए 26 सितंबर की तारीख तय की गई है। इस दौरान संदीप केकड़ा, अंकित सिरसा और दीपक मुंडी समेत 6 आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

सहायक पुलिसकर्मियों के लिए CM हेमंत का ऐतिहासिक आदेश, अब सेवा अवधि 1 साल लंबी

रांची झारखंड में कार्यरत सहायक पुलिसकर्मियों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने सहायक पुलिसकर्मियों की सेवा अवधि को एक वर्ष तक अनुबंध के आधार पर बढ़ाने का आदेश दिया है। यह निर्णय उनके लिए राहत और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संबंध में झारखंड सरकार प्रस्ताव तैयार करेगी और उसे मंत्रिपरिषद के समक्ष स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करेगा। अधिकारियों का कहना है कि आने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना लगभग तय है। मान्यता मिलने के बाद हजारों सहायक पुलिसकर्मी अपनी सेवाएं एक साल अतिरिक्त दे सकेंगे। सहायक पुलिसकर्मियों का काम राज्य स्तर पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।   

ग्वालियर नगर निगम का बड़ा फैसला, एनर्जी ऑडिट से बिजली खर्च में आएगी कटौती

ग्वालियर  नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नवाचारों पर फोकस करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में नगरीय निकायों के बिजली का खर्च कम कराने के लिए एनर्जी आडिट कराया जा रहा है। रीवा के बाद ग्वालियर नगर निगम दूसरा शहर है, जिसने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए एनर्जी ऑडिट की टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। ग्वालियर नगर निगम इस कार्य के लिए 1.67 करोड़ रुपये खर्च करेगा, जिसमें स्ट्रीट लाइट के साथ ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, बोरिंग, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, सुलभ काम्प्लेक्स, निगम के कार्यालयों में आने वाले हर माह के सात से आठ करोड़ रुपये के बिल को कम कराने की दिशा में कार्य कराया जाएगा।

मिशन कर्मयोगी: स्कूल शिक्षा विभाग ने 2.30 लाख शिक्षकों का किया पंजीयन, मिलेगा दक्षता प्रशिक्षण

पंजीकृत शिक्षकों को दक्षता के लिये दिया जायेगा प्रशिक्षण भोपाल  स्कूल‍ शिक्षा विभाग ने कार्यरत कर्मचारियों की संख्या के आधार पर पंजीकरण कर मिशन कर्मयोगी में 55 विभागों में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में 2 लाख 30 हजार शिक्षकों का igot पोर्टल पर प्रशिक्षण देने के लिये पंजीकरण किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने केन्द्र सरकार के मिशन कर्मयोगी योजना में सरकारी शिक्षकों की कार्य क्षमता प्रशिक्षण के माध्यम से बढ़ाने के लिये मुहिम शुरू की है। देश में इस कार्यक्रम की शुरूआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर मिशन कर्मयोगी के नाम पर की गई है। मिशन कर्मयोगी में यह निर्णय लिया गया है कि देश में सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को 3 प्रकार से प्रशिक्षण दिया जाए, इसमें 70 प्रतिशत प्रशिक्षण डिजिटल माध्यम से दिया जायेगा। योजना में 20 प्रतिशत प्रशिक्षण ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से और 10 प्रतिशत प्रशिक्षण प्रत्यक्ष मोड से होंगे। 15 सितम्बर से शुरू होगा 'कर्मयोगी igot पर सीखें सप्ताह' केन्द्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश में 15 से 19 सितम्बर 2025 तक कर्मयोगी igot पर सीखें सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इस सप्ताह के दौरान राज्य सरकार के प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को न्यूनतम 2 प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य किया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने व्यापक निर्देश जारी किये है। इस कार्य के लिये विभाग ने प्रत्येक जिले में जिला परियोजना समन्वयक और अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक को नोडल अधिकारी बनाया है। इस संबंध में आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी ने भी सभी जिला कलेक्टर्स को इस संबंध में निर्देश जारी किये है।  

प्रधानमंत्री मोदी देंगे मध्यप्रदेश को 8 मेगा गिफ्ट्स, लाखों किसानों को मिलेगा फायदा

इंदौर  मप्र के प्रवास पर 17 सितंबर को आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीधे इंदौर आएंगे। यहां से चॉपर के जरिए धार के भैसोला स्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। वह करीब 4 घंटे से अधिक समय तक मध्यप्रदेश में रहेंगे। इस दौरान प्रदेश व देश को 8 बड़ी सौगात देंगे। बता दें, पीएम दूसरी बार अपने जन्मदिन के अवसर पर मप्र में होंगे। इससे पहले वे 2022 में शिवपुरी के कूनो नेशनल पार्क आए थे। यहां उन्होंने भारत से लुप्त हो चुके चीतों को बसाया था। अब पीएम मप्र में पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। बता दें, यह पार्क देश में सबसे पहले बनकर तैयार होगा, जो कॉटन उद्योगों को गति देगा। कार्यक्रम की तैयारियां तेज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उक्त कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर चर्चा की। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में अधिकारियों के साथ संवाद किया और सुधार के निर्देश दिए। बता दें कि पीएमएमवीवाई के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले बच्चे के लिए वित्तीय सहायता के लिए प्रोत्साहन राशि मिलेगी, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों के पोषण को बढ़ावा मिले। आदि कर्मयोगी अभियान के जनजातीय बाहुल क्षेत्रों में 'आदि सेवा पर्व' के तहत जन चर्चाओं का आयोजन होगा। क्षेत्र व प्रदेश के विकास में आम लोगों की सहभागिता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पीएम मोदी देंगे ये बड़ी सौगातें धार जिले में पीएम मित्रा पार्क के शिलान्यास के साथ पीएम मोदी 8 बड़ी सौगातें देंगे। इसके अलावा वे मप्र से देश में पोषण माह का शुभारंभ करेंगे और लाभार्थियों महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) की किस्त ट्रांसफर करेंगे। वहीं स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान. सुमन सखी चैटबॉट सेवा, आदि कर्मयोगी अभियान के तहत आदि सेवा पर्व का शुभारंभ, सेवा पखवाड़ा पर्व, एक बगिया मां के नाम अभियान के रूप में महिला लाभार्थियों को पौधों का वितरण और सिकल सेल स्क्रीनिंग कार्ड का वितरण भी करेंगे। सीएम ने कहा, पीएम मेगा पार्क में कॉटन आधारित उद्योग लगेंगे। इससे 6 लाख किसानों को होगा लाभ। सीएम ने कहा, प्रधानमंत्री जब भी आते हैं, मध्य प्रदेश के लिए नया इतिहास रचते हैं। उन्होंने बताया कि इस पार्क से धार सहित रतलाम, झाबुआ. आलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी जैसे जिलों के कपास उत्पादक किसानों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। सीएम ने कहा- दुनिया में जैविक कपास की सप्लाई का केंद्र बनेगा धार प्रदेश के धार जिले के बदनावर में पीएम मेगा मित्र टेक्सटाइल पार्क से कॉटन उद्योग की नई इबारत लिखी जाएगी। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भैंसोला पहुंचेंगे। यहां आयोजन की युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तैयारियों का जायजा लेने धार पहुंचे। सीएम के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, संगठन मंत्री हितानंद सहित अन्य नेता मौजूद रहे। सीएम ने कहा कि देश में सात पीएम मेत्र पार्क में सबसे पहले मप्र को सौगात मिली है। दुनिया में जैविक कपास की बड़ी मांग है. इस लिहाज से मप्र का बदनावर क्षेत्र इसका केंद्र होगा। केवल वोट लिए विकास नहीं किया सीएम ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में कांग्रेस ने आदिवासी समाज की राजनीति करते हुए केवल वोट ही लिए, कभी उनका विकास नहीं किया। भाजपा इस क्षेत्र को विकास की नई पहचान दे रही है। टेक्सटाइल पार्क से कॉटन उद्योग को लाभ सीएम डॉ. यादव ने लोगों को बताया कि टेक्सटाइल पार्क कॉटन उद्योगों को नई ऊंचाई पर पहुंचाएगा। इससे मालवांचल के कपास उत्पादक किसान और नए उद्यमियों को अवसर मिलेंगे।

सैंपल रजिस्ट्रेशन रिपोर्ट 2023: मध्य प्रदेश में हर दूसरा युवक अविवाहित, बिहार टॉप पर

भोपाल  मध्य प्रदेश में अविवाहित रहने वाले युवक-युवतियों का आंकड़ा चौंकाने वाला है. प्रदेश में कुल 50.9 फीसदी महिलाएं पुरुष ऐसे हैं, जिन्होंने शादी ही नहीं की. इसमें पुरुषों का आंकड़ा 54.7 फीसदी है, जबकि अविवाहित रहने वाली महिलाएं 46.8 फीसदी हैं. चौंकाने वाला यह आंकड़ा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2023 के हैं. बता दें कि भारत में जन्म और मृत्यु से संबंधित डाटा जुटाने के लिए 1969-70 में सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम यानी एसआरएस की शुरूआत हुई थी, ताकि सरकार को नीतियां बनाने में मदद मिल सके. मध्य प्रदेश में इस सर्वे के लिए 4 लाख लोगों को शामिल किया गया था. देश की कुल आबादी के 50.5 फीसदी लोग अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक देश की कुल आबादी के 50.5 फीसदी लोगों ने कभी विवाह ही नहीं किया. इसमें महिलाओं का प्रतिशत 45.3 फीसदी जबकि पुरुषों का प्रतिशत 55.4 फीसदी है. इसके अलावा 3.6 फीसदी विधवा, तलाकशुदा हैं. देश में बिहार में सबसे ज्यादा अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा बिहार राज्य में 58.3 फीसदी अविवाहित हैं. जम्मू-कश्मीर में अविवाहितों का प्रतिशत 57.5 फीसदी है जबकि तमिलनाड़ु में सबसे कम 41.3 फीसदी अविवाहित महिला-पुरुष हैं. 2022 के मुकाबले 2023 मध्य प्रदेश में घटे अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में विवाहितों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. साल 2022 में प्रदेश में औसतन अविवाहितों का प्रतिशत 51.4 था, जो 2023 में घटकर 50.9 फीसदी आ गया. तलाकशुदा महिलाओं की संख्या बढ़ी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 45.2 फीसदी पुरुष शादीशुदा हैं, जबकि महिलाओं का प्रतिशत 42.9 फीसदी है. हालांकि मध्य प्रदेश में तलाकशुदा, विधवा और अलग होने वालों का प्रतिशत भी बढ़ा है. साल 2022 में ऐसे लोगों का कुल औसत 3.6 फीसदी था, जो 2023 में बढ़कर 3.9 फीसदी पहुंच गया है. इसमें महिलाओं का आंकड़ा पुरुषों से कमोवेश दोगुना है. 100 में से 5.6 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो तलाक ले चुकी हैं या अलग रह रही हैं. 16.8 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल के पहले मध्य प्रदेश के शहरों में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ रही है. मध्य प्रदेश में 18 साल के होने के पहले ही 16.8 फीसदी युवतियों की शादी कर दी जाती है. मध्य प्रदेश में कम उम्र में लड़कियों की शादी करने का आंकड़ा बढ़ा है. 18 से 20 साल की उम्र के दौरान 19.2 फीसदी लड़कियों की शादी हो जाती है. मध्य प्रदेश में 18 से 20 साल के बीच ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में लड़कियों का विवाह का परसेंटेज बढ़ा है. ग्रामीण इलाकों में 19.2 फीसदी लड़कियों की शादी हो जाती है, जबकि शहरी इलाकों में 19.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से 20 साल के बीच हो रही है. शहरों में शादी की औसत उम्र 23.9 साल मध्य प्रदेश में औसत शादी की उम्र 22.1 साल है जबकि शहरी इलाकों में यह प्रतिशत 23.9 साल है. मध्य प्रदेश में 62.5 फीसदी लड़कियों की शादी 21 साल से ज्यादा उम्र में हो जाती है. यह प्रतिशत बढ़ रहा है. शहरी के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी शादी की उम्र बढ़ रही है. 21 साल से ज्यादा उम्र में लड़कियों की शादी का परसेंटेज भी बढ़ा है. 100 में से 23.8 फीसदी लड़कियों की शादी 21 साल के बाद ही हो रही है जो देश के औसत 24.4 फीसदी से भी ज्यादा है.

एमपी में डिजिटल जनगणना की तैयारी, 3 जिलों में प्री टेस्ट और ऐप लॉन्च जल्द

 भोपाल  पिछल कई सालों से देश में जनगणना को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं. लेकिन अब इसकी पूरी तरह से तैयारियां शुरू हो गई है. इस बार साल 2026-27 में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी. इसके लिए जनगणना निदेशालय की तरफ से एक ऐप को लॉन्च किया जाएगा, जो कि एंड्राइड-आईफोन दोनों में उपयोग किया जा सकता है. इस ऐप के माध्यम से हर घर का मुखिया ही अपने घर-परिवार की जानकारी खुद भरेगा. इसके बाद जनगणना अधिकारी, घर-घर जाकर पूरी जानकारी को क्रॉस चेक करेगा, फिर उसे डिजिटल फॉर्म पर डाटा को अपलोड किया जाएगा.  भारत 2027 में अपनी अब तक की सबसे आधुनिक और डिजिटल जनगणना आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार होगा जब जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिसमें लगभग 34 लाख गणनाकर्ता अपने स्वयं के स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप का उपयोग कर आंकड़े एकत्र करेंगे। यह पहल न केवल समयबद्ध और सटीक डेटा एकत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि तकनीक-संचालित प्रशासन की नई मिसाल भी होगी। मोबाइल ऐप्स और स्व-गणना की सुविधा गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) द्वारा तैयार की जा रही मोबाइल एप्लिकेशन, एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और इसे अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपयोग किया जा सकेगा। यदि किसी कारणवश डेटा कागज़ पर एकत्र किया जाता है, तो उसे बाद में एक वेब पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा जिससे अलग से स्कैनिंग या डेटा एंट्री की आवश्यकता नहीं होगी। इस बार नागरिकों को स्वयं भी वेब पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना (self-enumeration) का विकल्प मिलेगा, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। जनगणना से पहले प्री टेस्ट मिली जानकारी के मुताबिक, जनगणना शुरू होने से पहले देशभर में प्री टेस्ट कराया जाएगा. इनमें मध्य प्रदेश के तीन जिलों को चुना गया है. जहां पर जनगणना से पहले प्री टेस्ट होगा, इनमें मध्य प्रदेश के ग्वालियर, रतलाम और सिवनी जिले शामिल हैं. यहां पर अक्टूबर से नवंबर महीने के बीच में 15 दिन का अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के माध्यम से जनगणना और घरों की गणना कि जाएगी. इसका सीधा मकसद यह है कि गड़बड़ी रोकने के लिए किया जाएगा.  दो चरणों में होगा आयोजन जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी:     हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन (अप्रैल से सितंबर 2026): इसमें आवास की स्थिति, सुविधाएं और घरों के पास उपलब्ध संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।     जनसंख्या गणना (फरवरी 2027): भारत के अधिकांश हिस्सों में फरवरी 2027 में यह चरण आरंभ होगा, जबकि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह सितंबर 2026 में होगा। पहली बार होगा जाति-आधारित डेटा संग्रहण इस जनगणना में एक और उल्लेखनीय पहल की जा रही है — घर के सदस्यों की जातियों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। यह कदम सामाजिक-आर्थिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करेगा, जो दशकों से लंबित मांग रही है। खबर से जुड़े जीके तथ्य     2027 की जनगणना भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी।     34 लाख गणनाकर्ता अपने स्मार्टफोन से मोबाइल ऐप के माध्यम से आंकड़े एकत्र करेंगे।     पहली बार सभी भवनों का जियो-टैगिंग किया जाएगा, जिसमें जीआईएस मैप पर भवनों को उनके हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLBs) के साथ जोड़ दिया जाएगा।     RGI ने ₹14,618.95 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। पारदर्शिता और निगरानी के लिए वेबसाइट पूरे अभियान की रीयल-टाइम निगरानी और प्रबंधन के लिए एक समर्पित वेबसाइट भी तैयार की जा रही है। इससे प्रत्येक स्तर पर कार्य की प्रगति का निरीक्षण संभव होगा और पारदर्शिता बनी रहेगी। जनगणना 2027 भारत की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल बदलाव का प्रतीक बनने जा रही है। न केवल आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि नीति निर्माण और योजना निर्धारण के लिए समयबद्ध और व्यापक जानकारी भी उपलब्ध हो सकेगी। यह डिजिटल युग में भारत के प्रशासनिक दृष्टिकोण का एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। ऐसे की जाएगी जनगणना मध्य प्रदेश जनगणना निदेशालय की निदेशक भावना वालिम्बे ने जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना के लिए एप के माध्यम से हर परिवार के सदस्यों की जानकारी अपलोड करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए प्रश्नावली भी तैयारी की जा रही है, जिसमें सी सदस्यों का नाम, पारिवारिक स्थिति, घर संपत्ति का ब्योरा और रोजगार जैसी जानकारी शामिल की जाएगी. इसके अलवा, इसमें कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए क्रॉस चेक करने के लिए अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी की जांच करेंगे. इसके साथ-साथ फील्ड में आने वाली चुनौतियों की रिपोर्ट प्रदेश का जनगणना निदेशालय तैयार करेगा. इसके बाद यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी. मंत्रालय इस आधार पर फाइनल जनगणना शीट तैयार की जाएगी. 

बिहार की राजनीति में बड़े नेताओं का ताबड़तोड़ दौरा, क्या है पार्टी की रणनीति?

पटना   बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब किसी भी वक्त चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान कर सकता है. इसे देखते हुए बीजेपी पूरी ताकत झोंक रही है. पार्टी हर हाल में इस चुनाव में जीत दर्ज करने में जुट गई है. इसी कड़ी में 13 सितंबर को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 17 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार का दौरा करेंगे. इन दौरों को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. पीएम मोदी के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने सम्राट चौधरी 10 सितंबर को पूर्णिया पहुंचे थे. माना जा रहा है कि इसी सप्ताह एनडीए में सीट बंटवारे का भी अंतिम निर्णय हो सकता है. सीएम नीतीश से मुलाकात कर सकते हैं बीजेपी प्रेसिडेंट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 13 सितंबर को पटना पहुंचेंगे. यहां वे बिहार बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों और रणनीति का गहराई से आकलन किया जाएगा. इस दौरे पर उनकी मुलाकात सीएम नीतीश से भी हो सकती है. दोनों नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम रूपरेखा पर चर्चा होने की संभावना है. नड्डा का यह दौरा बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन की मजबूती को और पुख्ता करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी का दौरा बिहार बीजेपी के लिए अहम नड्डा के दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को बिहार आएंगे. यह चुनावी साल में उनका सातवां दौरा होगा. पीएम मोदी अपने हर दौरे पर बिहार को नई परियोजनाओं की सौगात देते रहे हैं और इस बार भी उनके द्वारा करोड़ों रुपये की योजनाओं का ऐलान किए जाने की संभावना है. मोदी की मौजूदगी एनडीए कार्यकर्ताओं में जोश भरने और चुनावी माहौल को बीजेपी के पक्ष में मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी.