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तिहाड़ जेल में बवाल! सांसद इंजीनियर रशीद को किन्नरों ने बनाया निशाना

नई दिल्ली टेरर फंडिंग केस में जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के सांसद इंजीनियर रशीद पर तिहाड़ में हमले का आरोप लगाया गया है। इंजीनियर रशीद का दावा है कि जेल में किन्नरों के एक गुट ने उन पर घातक हमला कर दिया। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक सांसद को मामूली चोटें आईं। बारामूला के सांसद इंजीनियर रशीद 2019 से ही तिहाड़ जेल में बंद हैं। तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। इंजीनियर रशीद की पार्टी आवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) ने सांसद पर हमले को लेकर चिंता और आक्रोश जाहिर किया है। पार्टी का कहना है कि इंजीनियर रशीद ने अपने वकील जावेद हूब्बी से मुलाकात के दौरान उन पर हुए हमले की बात कही है। वकील के मुताबिक रशीद ने बताया कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने कश्मीरी कैदियों को प्रताड़ित करने के लिए नए तरीके अपनाए हैं। जानबूझकर किन्नरों को उनके साथ बंद कर दिया गया है। उन्हें हमले के लिए उकसाया जाता है। वकील ने रशीद के हवाले से आरोप लगाया कि पुरुष किन्नरों के एक हमले में रशीद बाल-बाल बच गए। दावा किया गया कि रशीद को किन्नरों के एक समूह ने धक्का दिया और एक गेट उनके ऊपर फेंका। यह एक चमत्कारिक बचाव था। अगर यह सीधा लगता तो जानलेवा हो सकता था। इंजीनियर रशीद का आरोप है कि उनसे पहले कश्मीरी कैदियों अयूब पठान, बिलाल मीर और अमीर गोजरी पर भी किन्नर हमला कर चुके हैं। रशीद का कहना है कि ये किन्नर एचआईवी पॉजिटिव घोषित हैं और जानबूझकर उन्हें कश्मीरी कैदियों के साथ रखा गया है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान इंजीनियर रशीद ने जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सज्जाद गनी लोन को बारामूला सीट पर हराया। 2 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने वाले सांसद को हाल ही में मॉनसून सत्र में हिस्सा लेने के कस्टडी पेरोल पर भेजा गया था। इंजीनियर रशीद पर आरोप है कि उन्होंने आतंकियों और अलगाववादियों के लिए धन जुटाया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पंच परिवर्तन सहित आरएसएस की समन्वय बैठक का दूसरा दिन

जोधपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक जोधपुर में जारी है। आज बैठक के दूसरे दिन विभिन्न अहम विषयों पर चर्चा होनी है। गौरतलब है कि कल से शुरू हुई बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजातीय क्षेत्रों में सामाजिक विकास और पंच परिवर्तन पर विशेष सत्र आयोजित किए गए थे। बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के साथ विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राष्ट्र सेविका समिति, सक्षम, पूर्व सैनिक सेवा परिषद, वनवासी कल्याण आश्रम और सीमा जागरण मंच सहित 32 संगठनों के अखिल भारतीय पदाधिकारी भाग ले रहे हैं। कल उद्घाटन सत्र में भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ था। परिसर में रानी अबक्का द्वार और हल्दीघाटी द्वार की ऐतिहासिक झलकियों के साथ सभागार का निर्माण किया गया है। मीरा बाई और अमृता देवी बिश्नोई के बलिदान को रंगोली और चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। बैठक के पहले दिन संघ ने जाति, भाषा और प्रांत के नाम पर भेदभाव की प्रवृत्तियों को देश की एकता के लिए खतरनाक बताते हुए समाज से इनसे दूर रहने का आह्वान किया। यह समन्वय बैठक 7 सितंबर को अनुभवों के आदान-प्रदान और आगामी कार्ययोजना तय करने के साथ संपन्न होगी।

सियासी पारा बढ़ा, मोहन भागवत की वसुंधरा ‘वन’ वापसी पर उठे सवाल

जयपुर राजस्थान बीजेपी की सियासत इस वक्त ठहरे हुए पानी जैसी लग रही है, लेकिन भीतर बहुत कुछ खदबदा रहा है। कई किरदार सियासत के रंगमंच पर अपनी भूमिका के इंतजार में हैं और नजर एक ही चेहरे पर टिकी है. वो चेहरा है वसुंधरा राजे। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार फिर से भाजपा और संघ की सक्रिय राजनीति के केंद्र में आती दिख रही हैं। बुधवार को जोधपुर प्रवास के दौरान राजे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मुलाकात की, जो करीब 20 मिनट तक चली। इस मुलाकात की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि करीब एक सप्ताह पहले धौलपुर में एक धार्मिक मंच से वसुंधरा राजे ने बयान दिया कि -जीवन में हर किसी का वनवास होता है, लेकिन वह स्थायी नहीं होता। वनवास आएगा तो जाएगा भी। पिछले महीने वसुंधरा राजे ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से संसद में मुलाकात कर हाई कमान से अपने बदलते रिश्तों के संकेत भी दिए थे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी में इन दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कई चेहरों के नाम चल रहे हैं। बीजेपी जिस तरह पिछली बार संसद में महिला आरक्षण का विधेयक लाई थी उसे देखते हुए पार्टी को अहम पदों पर मजबूत महिला नेत्रियों की जरूरत भी होगी।  हालांकि, संघ प्रमुख सार्वजनिक मंच से हाल में यह बयान दे चुके हैं कि आरएसएस बीजेपी के मामलों में दखल नहीं देती। उन्होंने हाल में बयान दिया था- RSS कुछ नहीं तय करता। हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन वो सरकार चलाने में एक्सपर्ट है और हम अपने काम में एक्सपर्ट है। आपको क्या लगता है कि यदि हम तय करते तो इतनी देर होती क्या? 'कहीं न कहीं संघ का वीटो जरूर होता है' हालांकि, राजनीति के जानकार कहते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का मसला सिर्फ बीजेपी को ही तय करना होता.. तो अब तक तय हो चुका होता। कहीं न कहीं संघ का वीटो जरूर होता है। इसलिए इस अहम पद पर किसकी तैनाती होगी, इसका रास्ता नागपुर से होकर निकलता है। वसुंधरा की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भाजपा में नेतृत्व को लेकर भीतरखाने कई चर्चाएं चल रही हैं और संघ की भूमिका फिर से महत्वपूर्ण हो रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के भीतर एक वर्ग लगातार यह चाहता रहा है कि राजे को एक बार फिर से राजस्थान की राजनीति में नेतृत्व की भूमिका दी जाए। वसुंधरा राजे के साथ उनके खेमें के विधायक और सांसद भी भीतर से उम्मीद लगाए बैठे हैं। 'प्रमुख दावेदार के तौर पर राजे के नाम की चर्चा' राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार मनीष गोधा  का मानना है कि वसुंधरा राजे और मोहन भागवत की मुलाकात तो महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- वसुंधरा राजे को उन्होंने समय दिया तो निश्चित रूप से कोई अहम विषय रहा होगा। जब तक परिणाम नहीं आते तब तक सिर्फ कयास लगाए जा सकते हैं क्योंकि दोनों के बीच वन टू वन मुलाकात हुई है। लेकिन बीजेपी में इन दिनों जो घटनाक्रम चल रहे हैं। उससे इसे जोड़ा जा सकता है। इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव और उसमें प्रमुख दावेदार के तौर पर वसुंधरा राजे के नाम की चर्चा है। अब सवाल यह है कि यह मुलाकात क्या उस संदर्भ में थी ? जहां तक राजस्थान की बात है मुझे नहीं लगता कि भागवत लोकल राजनीति में किसी तरह का इंटरेस्ट लेंगे। इसलिए यह मुलाकात राष्ट्रीय मुद्दे पर ही होना लग रहा है। हां इस मुलाकात की चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि पिछले दिनों वनवास वापसी को लेकर जिस तरह से राजे ने बयान दिए उसके कई तरह के निहितार्थ निकाले जा सकते हैं। मुलाकात निश्चित रूप से महत्पपूर्ण है। '…विषपान करके अपने आपको धर्यवान रखा' राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन पूरे घटनाक्रम पर बेहद सटीक बात करते हैं। उनका कहना है कि हाई कमान मजबूत होता है, तो स्टेट लीडरशिप के साथ उनके रिश्ते बदल जाते हैं। जैसे आप देखेंगे कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, उसमें हाई कमान और स्टेट लीडरशिप के रिश्तों में स्टेट लीडरशिप भारी पड़ती थी। इसलिए कांग्रेस हाई कमान चाहकर भी वह काम नहीं करवा पाई जो वह करवाना चाहती थी। बीजेपी में भी अतीत में यही पॉजिशन रही थी। लेकिन बीजेपी की सेंट्रल लीडरशिप बहुत ज्यादा मजबूत है। उन्होंने शायद यह समझा कि राजे का राजस्थान में काम करना शायद उतना सरल नहीं है। इसलिए उन्होंने बाकी राज्यों की तरह यहां भी लीडरशिप को चेंज किया ताकि वे अपने तरीके से काम कर सकें। वह तरीका अच्छा है या खराब है वह अलग बात है। इस सूरत में वसुंधरा राजे ने अब तक, खास तौर पर जब से ऐसा लग रहा है कि वे थोड़ा उपेक्षित की गई हैं। तब उन्होंने कहीं न तो फ्रस्ट्रेशन जाहिर किया और न कभी गुस्सा दिखाया। जैस उनके बारे में प्रचारित किया जाता था, उस स्वभाव के बिल्कुल प्रतिकूल उन्होंने बिना कोई गुस्सा या नाराजगी दिखाए वे अपने आपको उपस्थित रखे हुए हैं। इस सूरत में मुझे लगता है कि उन्होंने बेहद शालीनता और गरिमा के साथ पूरा विषपान करके अपने आपको धर्यवान रखा है। मुलाकात एक निर्णायक संकेत दे सकती है हर राजनेता सोचता है कि उनकी भूमिका हो और इनकी होनी चाहिए। खासकर मोदी सरकार ने पिछली बार महिला आरक्षण विधेयक लाई उसमें उन्हें बेहद ताकतवर महिलाओं की जरूरत भी पड़ेगी। मुझे लगता है कि वसुंधरा राजे बीजेपी के बड़े एसेट्स में हैं और हो सकता है कि यह खुद भी प्रयास कर रही हैं कि उनकी भूमिका निर्णायक रहे। हम जानते हैं कि संघ लोगों की भूमिका तय करने में मुख्य भागीदार होता है तो मोहन भागवत के साथ उनकी मुलाकात एक निर्णायक बात हो सकती है। राजे की दावेदारी मजबूत क्यों?     मजबूत जनाधार और जमीनी पकड़ वाली छवि      राजस्थान में बीजेपी में जातिगत संतुलन वाला फार्मूला वसुंधरा राजे की ही देन रही। उन्होंने खुद को“राजपूतों की बेटी, जाटों की बहू और गूर्जरों की संबंधन”बताया।     संगठन और सरकार दोनों का अनुभव     उनके पास संगठन और सरकार चलाने का अनुभव रहा है। उन्होंने – 14 नवम्बर 2002 से 14 दिसम्बर 2003 तथा 2 फरवरी … Read more

मुख्यमंत्री ने किया परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं का शुभारंभ, डिजिटल लोकार्पण एवं शिलान्यास

परिवहन विभाग बनेगा विकसित उत्तर प्रदेश का सारथीः सीएम योगी  मुख्यमंत्री ने किया परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं का शुभारंभ, डिजिटल लोकार्पण एवं शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी बोले – समय की गति से पीछे जाना मतलब हमेशा पीछे रह जाना परिवहन विभाग ने 2019 कुंभ और कोरोना काल में प्रवासियों को सुरक्षित पहुंचायाः सीएम  हर साल सड़क हादसों में कोरोना से ज्यादा जानें जाती हैं, यह बड़ी चुनौती: मुख्यमंत्री बस चालकों की हर 3 महीने में मेडिकल और फिटनेस जांच अनिवार्य होः सीएम योगी  आईआईटी खड़गपुर और पुलिस के सहयोग से सड़क सुरक्षा को बनाया जाए उपयोगीः मुख्यमंत्री  प्रधानमंत्री के नेट ज़ीरो एमिशन लक्ष्य के लिए इलेक्ट्रिक बसें होंगी महत्वपूर्ण: योगी गांव-गांव कनेक्टिविटी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से 3 लाख रोजगार सृजित हो सकते हैंः सीएम  विश्वस्तरीय बस स्टेशन बनाने और पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर मुख्यमंत्री ने दिया जोर शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म प्लानिंग से विभाग को आगे बढ़ना होगाः मुख्यमंत्री  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं का शुभारंभ और डिजिटल लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि परिवहन विभाग प्रदेश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे बड़ा माध्यम है और इसे विकसित भारत की परिकल्पना का सारथी बनना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के पास देश में सबसे बड़ा बेड़ा है। इतनी बड़ी संख्या में सेवाएं देना अपने आप में एक उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन्होंने रक्षाबंधन पर बहनों को तीन दिनों तक मुफ्त बस यात्रा उपलब्ध कराने की पहल को सराहनीय बताया और कहा कि विभाग भविष्य में इस तरह की सेवाओं का प्रचार-प्रसार और प्रभावी तरीके से करे। समय की रफ्तार से कदम मिलाना जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, समाज या राष्ट्र यदि समय की गति से पीछे जाता है तो हमेशा के लिए पीछे रह जाता है। लेकिन यदि वह समय की गति से दो कदम आगे चलने की क्षमता रखता है, तो विजयश्री का ध्वज फहराता है।  उन्होंने परिवहन विभाग से अल्पकालिक (3 वर्ष), मध्यम अवधि (10 वर्ष) और दीर्घकालिक (22 वर्ष) योजनाएं तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने सख्त निर्देश दिया कि फाइल को लटकाने की आदत बंद करनी पड़ेगी। जनसुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाना पड़ेगा। विभाग में टीम वर्क को और सशक्त बनाना पड़ेगा तो परिणाम आने में देर नहीं लगेगी।  संकट काल में भी परिवहन विभाग रहा भरोसेमंद साथी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवहन विभाग ने समय-समय पर अपनी सेवाओं से मिसाल पेश की है। 2019 के प्रयागराज कुंभ और 2020 की वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान जब करोड़ों कामगार और श्रमिक अपने-अपने राज्यों और गांवों की ओर लौट रहे थे, तब विभाग ने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड तक प्रवासियों को सुरक्षित पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसी वर्ष आयोजित प्रयागराज महाकुंभ में भी विभाग ने रेलवे स्टेशनों और अन्य स्थानों पर उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करते हुए करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित ढंग से उनके गंतव्य तक पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर संकट की घड़ी में परिवहन विभाग ने समय का सच्चा साथी बनकर प्रदेश और समाज की सेवा की है। सड़क सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रदेश के लिए एक गंभीर चुनौती है। कोरोना काल के तीन वर्षों में जितनी जानें नहीं गईं, उससे अधिक लोग हर साल सड़क हादसों में मारे जाते हैं। इनमें अधिकतर युवा होते हैं, जिससे परिवार उजड़ जाते हैं। यह समाज और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी यात्री की जान बचती है तो यह विभाग की सकारात्मक छवि बनाता है, लेकिन लापरवाही से जान जाने पर न केवल विभाग की बदनामी होती है, बल्कि आर्थिक क्षति भी होती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बस चालकों का नियमित मेडिकल और फिजिकल फिटनेस टेस्ट हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से कराया जाए। विशेष रूप से आंखों की जांच जरूरी है ताकि दृष्टि दोष के कारण दुर्घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि सड़क पर अंदाजे से गाड़ी चलाने की छूट नहीं दी जा सकती। जागरूकता और समन्वय से ही समाधान मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना होगा। इसके लिए IIT खड़गपुर जैसी संस्थाओं की तकनीकी मदद, पुलिस और अन्य विभागों का समन्वय, साथ ही स्कूलों में ट्रैफिक नियमों पर शिक्षा जरूरी है। उन्होंने हेलमेट, सीट बेल्ट, नशे में ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग जैसी स्थितियों पर कड़े नियम लागू करने और मीडिया—डिजिटल, प्रिंट, सोशल व विजुअल—के माध्यम से प्रचार-प्रसार बढ़ाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून कभी-कभी कठोर लगता है, लेकिन यही कानून अंततः आपकी सुरक्षा और जीवन की गारंटी है। प्रकृति के अनुरूप विकास और सड़क सुरक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या विभाग की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग—गांव-शहर, युवा-बुजुर्ग, महिला-पुरुष—की साझा जिम्मेदारी है। जब सभी लोग इसमें जुड़ेंगे तो सड़क हादसों को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकसित एक ऐप के जरिए अत्यधिक दुर्घटना वाले क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे कई स्थानों पर हादसों की संख्या घटकर महीने में 18 से घटकर 3 तक हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के साथ-साथ हमें प्रकृति के अनुरूप विकास करना होगा। प्रधानमंत्री के नेट ज़ीरो एमिशन लक्ष्य को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल महत्वपूर्ण माध्यम हैं। परिवहन और नगर विकास विभाग गांव-गांव कनेक्टिविटी और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए न सिर्फ प्रदूषण कम कर सकते हैं, बल्कि 3 लाख तक नए रोजगार भी सृजित कर सकते हैं। आधुनिक बस स्टेशन, इलेक्ट्रिक बसें और स्क्रैपिंग नीति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवहन विभाग को समय की मांग के अनुसार अपनी सेवाओं को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। बस स्टेशन विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस हों, बसें सड़कों पर अव्यवस्थित खड़ी न रहें और यात्रियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित माहौल मिले—इसके लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बस सेवा से पर्यावरण … Read more

पूर्व प्रांत प्रचारक श्रद्धेय शांताराम जी को मुख्यमंत्री साय ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित जागृति मंडल, पंडरी पहुँचकर छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रांत प्रचारक श्रद्धेय शांताराम जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रद्धेय शांताराम जी संघ के वरिष्ठ प्रचारक थे और उनका मेरे साथ गहरा आत्मीय संबंध रहा है। वे सदैव अभिभावक के समान स्नेह और मार्गदर्शन प्रदान करते रहे। उनका निधन संघ परिवार, समाज और प्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि मेरे लिए भी व्यक्तिगत क्षति है। मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा सभी शुभचिंतकों को यह गहन दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने श्रद्धेय शांताराम जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे हमारे लिए पिता तुल्य थे। उन्होंने मदकूदीप को पुनर्जीवित कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी विनम्रता तथा जीवन मूल्यों से सभी के आदर्श बने। संघ के वरिष्ठ प्रचारक के रूप में उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता और स्वयंसेवकों को परिवार मानकर निरंतर मार्गदर्शन किया। मुख्यमंत्री रहते हुए भी मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहा। उनके निधन से पूरा प्रदेश शोकाकुल है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे, विधायक सर्वश्री अनुज शर्मा एवं मोतीलाल साहू, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, कृषि कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं आमजन उपस्थित थे।

हिंदू महिलाओं के साथ धोखा: UP में चांद का लव जिहाद पकड़ा गया

रामपुर यूपी के रामपुर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। एक युवक ने हिंदू बनकर कई महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाए और सभी को अपना गलत नाम बताया। इसके बाद उन महिलाओं को छोड़ दिया और फरार हो गया। केमरी क्षेत्र में प्रेमजाल में फंसाने के बाद शारीरिक संबंध बनाने के साथ धर्मान्तरण कराने के आरोप में पुलिस ने शुक्रवार को एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इसके पास से छह फर्जी आधार कार्ड भी बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह हिन्दू बनकर मोबाइल पर बात करता था और उसके बाद महिलाओं के साथ संबंध बनाता था। गो रक्षा सेवा समिति के जिलाध्यक्ष अमित गंगवार के साथ अन्य लोगों ने तहरीर दी थी, जिसमें कहा था कि केमरी निवासी चाचा-भतीजे सोशल मीडिया के माध्यम से हिन्दू बनकर महिलाओं और युवतियों को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं। तहरीर में लव जिहाद फैलाने के लिये विदेशों से फंडिंग, गिरोह का लिंक धर्मान्तरण में शामिल छांगुर बाबा के गिरोह से होने की प्रबल संभावना जताई थी। थानाध्यक्ष हिमांशु चौहान ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी चांद ने बताया कि वह काफी दिनों से अपना नाम बदलकर महिलाओं व लड़कियों से मोबाइल पर बातें करता था। वाट्सऐप काल करके अश्लील बातें कर उन्हें कभी भी अपने पास बुलाकर शारिरिक संबंध बनाता था। इसके बाद वो वहां से फरार हो जाता या मोबाइल नंबर बदल लेता था। सभी को अलग-अलग नाम बताता था। इसके लिए उसने कई आधार कार्ड भी बनवा रखे थे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और कहा कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

‘सर तन से जुदा’ के नारे पर बवाल, मंत्री सारंग का सख्त बयान

भोपाल  मध्य प्रदेश के सागर जिले में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान लगाए गए विवादित नारों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. बताया जा रहा है कि शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के तीन बत्ती इलाके में यह जुलूस कांग्रेस नेता फिरदौस कुरैशी और पम्मा कुरैशी के नेतृत्व में निकाला गया था. इसी दौरान 'सर तन से जुदा' जैसे भड़काऊ नारे लगाए गए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज घटना के सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आ गई. अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपियों की पहचान की जा रही है. पुलिस ने कहा कि किसी भी सूरत में शहर की अमन-शांति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी. इस पूरे मामले पर प्रदेश सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है. राज्य के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया. उन्होंने कहा कि जब-जब समाज में विघटनकारी गतिविधियां होती हैं, उसका तार कांग्रेस से ही जुड़ जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में लव जिहाद का आरोपी पार्षद अनवर कादरी भी कांग्रेस से जुड़ा हुआ है और अब सागर में भड़काऊ नारों में कांग्रेस नेताओं का नाम सामने आ रहा है. ऐसे कृत्य बर्दाश्त से बाहर: सारंग सारंग ने चेतावनी दी कि मध्य प्रदेश में ऐसे कृत्यों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा, 'यह बेहद गंभीर मामला है, एफआईआर दर्ज हो चुकी है, इसमें जो नाम सामने आए हैं, उनका कांग्रेस से जुड़ाव चिंता का विषय है. प्रदेश में समाज को बांटने और माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो नज़ीर बनेगी.' 'माहौल बिगाड़ने की कोशिश' स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन बत्ती क्षेत्र शहर का मुख्य इलाका है और यहां इस तरह की नारेबाजी जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश है. फिलहाल पुलिस ने वीडियो को प्रमाण के तौर पर जब्त कर लिया है और संबंधित लोगों की तलाश जारी है. इस घटना से सागर में तनाव का माहौल बन गया है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

सरल और सहज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का दिखा अपनत्व, नन्हे इवान को गोद में लेकर किया दुलार

रायपुर, रायगढ़ के खरसिया पहुँचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सहजता, सरलता और अपनेपन ने आज सभी को गहरे तक प्रभावित किया। खरसिया हेलीपैड पर जब उनकी नज़र ढाई साल के इवान पर पड़ी तो वे बच्चे को दुलारे बिना नहीं रह सके। आत्मीय मुस्कान के साथ मुख्यमंत्री श्री साय ने नन्हे इवान को अपनी गोद में उठाया और बड़े स्नेह से दुलार किया। नर्सरी में पढ़ने वाला इवान अपने पिता के साथ बड़े उत्साह से हेलीपैड पर मुख्यमंत्री को देखने आया था। बच्चे को अचानक मुख्यमंत्री  साय की गोद में देखकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक और आश्चर्यचकित रह गए। यह दृश्य मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सहजता, आत्मीयता और संवेदनशील व्यवहार का सजीव उदाहरण बन गया। इसे देखकर लोगों के मन में यह भाव सहज ही उमड़ पड़ा कि मुख्यमंत्री के दिलो-दिमाग में केवल प्रदेश की प्रगति और जनकल्याण का ही संकल्प नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के प्रति उनका गहरा अनुराग भी है। इवान के पिता  अमन गर्ग ने कहा कि अपने बेटे को मुख्यमंत्री की गोद में देखना उनके परिवार के लिए भावुक, अनमोल और अविस्मरणीय क्षण है। उन्होंने कहा कि यह स्मृति जीवन भर उनके साथ रहेगी।  गर्ग ने बताया कि इवान बड़े उत्साह से मुख्यमंत्री और हेलीकॉप्टर को देखने उनके साथ हेलीपैड आया था। मुख्यमंत्री की गोद में जाते ही उसकी खुशी दोगुनी हो गई। आज एक बार फिर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनत्व और बच्चों के प्रति उनका अनुराग सबके सामने आया। उनके इस आत्मीय व्यवहार ने न केवल अमन गर्ग के परिवार का दिल जीत लिया, बल्कि वहां मौजूद सभी लोगों के हृदय में भी अमिट छाप छोड़ दी।

सीएम पंजाब की तबीयत खराब, कैबिनेट मीटिंग रद्द—सिसोदिया और मां पहुंचे अस्पताल

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान लो पल्स रेट (LOw Pulse Rate) की वजह से शुक्रवार मोहाली के फोर्टिस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था. ताजा हेल्थ अपडेट के अनुसार, उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है. अस्पताल प्रशासन ने शनिवार को बयान जारी करते हुए कहा कि 51 वर्षीय मुख्यमंत्री की पल्स रेट में सुधार हुआ है. उनकी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को स्थिर करने के बाद मेडिकल टीमें उनकी लगातार निगरानी कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, मान पिछले दो दिनों से वायरल बुखार और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) के हवाले से खबर आ रही है कि वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया फोर्टिस अस्पताल पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे. इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को मान के आधिकारिक आवास पर उनकी सेहत का जायजा लिया था. पंजाब में बाढ़ संकट के बीच मान की तबीयत बिगड़ने के कारण कैबिनेट बैठक स्थगित कर दी गई थी. CM की सेहत में अब सुधार है। उनकी पल्स रेट पहले से बेहतर हुई है। मेडिकल टीमें लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रही हैं। मेडिकल टीमें लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मुख्यमंत्री को धड़कन धीमी होने और कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। यहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका चेकअप किया और निगरानी के लिए भर्ती करने की सलाह दी थी। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें एडमिट कर लिया गया था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर अस्पताल लाए गए जानकारी के मुताबिक भगवंत मान पिछले दो दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। इसी वजह से उनका AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के साथ बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा भी टल गया था। तब से वह चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर ही आराम कर रहे थे और वहीं पर इलाज चल रहा था। लेकिन शुक्रवार शाम उनकी तबीयत और बिगड़ गई। मुख्यमंत्री की तबीयत खराब होने के चलते शुक्रवार शाम को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक भी स्थगित करनी पड़ी। पिछले साल भी सितंबर माह में तबीयत खराब हुई थी CM भगवंत मान की तबीयत पिछले साल भी बिगड़ी थी। 26 सितंबर 2024 को उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रूटीन चेकअप में पता चला कि उनके फेफड़ों की धमनी में सूजन थी, जिससे दिल पर दबाव बढ़ रहा था और ब्लड प्रेशर अस्थिर हो रहा था। बाद में सामने आया कि मान को लैप्टोस्पायरोसिस नामक संक्रमण है। यह एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो बरसात और गंदे पानी के संपर्क से फैलता है और शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। लगातार देखरेख और दवाओं के असर से उनकी तबीयत में सुधार आया। तीन दिन बाद 29 सितंबर 2024 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान के बारे में जानिए….     कॉमेडी से राजनीति में आए: भगवंत मान का जन्म 17 अक्टूबर 1973 को पंजाब के संगरूर जिले के सतोज गांव में हुआ था। उन्होंने संगरूर के SUS कॉलेज से बीकॉम किया। कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी या बिजनेस करने की बजाय कॉमेडियन बन गए। उन्होंने कई स्टेज शो और फिल्मों में काम करके नाम कमाया। अपने चुटकुलों से उन्होंने करोड़ों लोगों का दिल जीता।     पंजाब पीपल्स पार्टी से शुरुआत, पहला चुनाव हारे: भगवंत सिंह मान शुरू से आम आदमी पार्टी में नहीं थे। उन्होंने राजनीति की शुरुआत मनप्रीत सिंह बादल की पंजाब पीपल्स पार्टी से की थी। 2012 में वे लहरागागा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इसके बाद मनप्रीत कांग्रेस में शामिल हो गए।     2014 में सांसद, 2022 में CM बने: 2014 में भगवंत मान आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और संगरूर लोकसभा सीट से सांसद बने। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ जलालाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2019 में वे फिर संगरूर सीट से सांसद बने। 2022 विधानसभा चुनाव में AAP की जीत हुई। उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।     CM बनने के बाद दूसरी शादी की: भगवंत मान ने CM बनने के बाद हरियाणा के पिहोवा की रहने वाली डॉ. गुरप्रीत कौर से दूसरी शादी की थी। 2019 में उनकी मुलाकात भगवंत मान से हुई। भगवंत मान तब संगरूर से सांसद थे। इसके बाद वह सीएम मान के विशेष कार्यक्रमों में शामिल होती रहीं। CM पद के शपथ ग्रहण समारोह में भी गुरप्रीत कौर मौजूद थीं। स्थिति में सुधार अस्पताल द्वारा जारी एक बयान में बताया गया कि सीएम मान के पहुंचने पर उनकी हेल्थ जांच की गई. अब उनकी हालत स्थिर है. अस्पताल ने एक बयान में कहा, ‘वह फिलहाल कुशल डॉक्टरों निगरानी में हैं. उनकी पल्स की गति में सुधार हुआ है.’ अस्पताल के कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मुख्यमंत्री की हालत स्थिर है. डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं. भगवंत मान की बीमारी के कारण शुक्रवार शाम को होने वाली पंजाब कैबिनेट की बैठक रद्द कर दी गई. रद्द करनी पड़ गई थी कैबिनेट की बैठक शुक्रवार को देर शाम मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति पर चर्चा करने और राज्य में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा के लिए शाम 4 बजे बैठक बुलाई थी. सूत्रों ने बताया कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति में कोई सुधार नहीं होने के कारण बैठक रद्द करनी पड़ी. कथित तौर पर वायरल बुखार से पीड़ित मान गुरुवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ सुल्तानपुर लोधी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा नहीं कर पाए. बाढ़ क्षेत्र का दौरा करने के दौरान हुए बीमार मान इस हफ्ते की शुरुआत में बीमार पड़ने से पहले बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे थे. वे बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात कर रहे थे. गुरुवार को पंजाब सरकार ने बचाव और राहत कार्यों की प्रभावी निगरानी के लिए हर बाढ़ग्रस्त गांव में राजपत्रित अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए.

साजिश और सनसनीखेज कत्ल… राजा रघुवंशी केस में पुलिस ने पेश की 790 पन्नों की चार्जशीट

इंदौर मेघालय पुलिस ने इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. इस बहुचर्चित हनीमून मर्डर केस में पुलिस की एसआईटी ने लंबी जांच के बाद शुक्रवार को अदालत में 790 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. चार्जशीट में राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और उनके तीन साथी आकाश राजपूत, आनंद कुरमी और विशाल सिंह चौहान को आरोपी बनाया गया है. ये सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. हनीमून मर्डर केस में दाखिल चार्जशीट कितने पन्नों की है? पुलिस ने यह चार्जशीट सोहरा सब-डिवीजन के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में दाखिल की है. इसमें 790 पन्नों में घटनाक्रम, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और तकनीकी सबूतों का ब्योरा दर्ज किया गया है. हनीमून मर्डर केस में मुख्य आरोपी कौन है? चार्जशीट के अनुसार, सोनम और उसके प्रेमी राज कुशवाहा ने मिलकर राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची थी. आरोप है कि शादी के बाद हनीमून ट्रिप के दौरान ही पति की हत्या की प्लानिंग की गई थी. अन्य तीन आरोपियों ने इस साजिश को अंजाम देने में मदद की. हनीमून मर्डर चार्जशीट में कौन से सबूतों का जिक्र है? चार्जशीट में हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं. आरोपियों पर धारा 103(1) BNS (हत्या), धारा 238(a) BNS (सबूत मिटाना), और धारा 61(2) BNS (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज है. इसके अलावा कॉल रिकॉर्ड्स, मोबाइल डेटा और गवाहों के बयान भी इसमें शामिल किए गए हैं. क्या सोनम ने हनीमून मर्डर केस में अपनी भूमिका स्वीकार की है? बता दें कि क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान सोनम रघुवंशी ने स्वीकार किया था कि हत्या के समय वह मौके पर मौजूद थी. जांच टीम को दिए बयान में उसने बताया था कि पार्किंग लॉट में ही उसने किलर्स को इशारा कर दिया था. अब चार्जशीट में सोनम को मुख्य आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है. ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सियेम ने बताया कि इस मामले में तीन और सह-आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जाएगी, जैसे ही अतिरिक्त फॉरेंसिक रिपोर्ट मिल जाती है. ये तीन सह आरोपी हैं, जिनमें प्रॉपर्टी डीलर सिलोमे जेम्स, लोकेन्द्र तोमर (वह बिल्डिंग मालिक जहां हत्या के बाद सोनम छिपी थी) और बलबीर अहिरवार (सिक्योरिटी गार्ड) शामिल हैं. इन तीनों को सबूत नष्ट करने और छिपाने के आरोप में पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन फिलहाल ये जमानत पर बाहर हैं. हनीमून मर्डर केस में ट्रायल कब शुरू होगा? अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब ट्रायल प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है. हत्या का यह मामला बेहद चर्चा में रहा, यह घटना शादी के तुरंत बाद हनीमून ट्रिप के दौरान हुई थी. चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल केस की अदालत में सुनवाई तेज होने की उम्मीद है.