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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश रायपुर,  मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के क्रियान्वयन के संबंध में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गहन चर्चा की गई।         बैठक में जानकारी दी गई कि इस एक्ट के शेड्यूल-1 के अंतर्गत 43 सेवाएं, 9 शासकीय अधिनियम और 8 प्रशासनिक विभाग शामिल किए गए हैं। इसके क्रियान्वयन के लिए 27 अगस्त 2026 से 90 दिनों की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। एक्ट के तहत तीन-स्तरीय निगरानी और समीक्षा प्रणाली निर्धारित की गई है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एपेक्स काउंसिल, कार्यकारी स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति, जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला सशक्त समिति बनाई गई है।      मुख्य सचिव ने एक्ट का प्रथम प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार कर संबंधित विभागों से जल्द सुझाव प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यक संशोधन प्रस्ताव तैयार रखकर प्राप्त सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप देने को कहा गया है। डीम्ड अप्रूवल और पेनाल्टी        बैठक में डीम्ड अप्रूवल प्रमाण-पत्र के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रमाण-पत्र जारी न होने के मामलों की समीक्षा करने, आवश्यक कार्रवाई करने और विलंब की स्थिति में नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने एक्ट का चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, नोडल विभागों का निर्धारण करने और आवश्यक मानक कार्यप्रणाली (SOP) अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विभागवार सेवाओं की नियमित समीक्षा और त्रैमासिक (क्वार्टरली) मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया है।       बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव मनीष कुमार ठाकुर, माननीय मुख्यमंत्री के सचिव एवं वाणिज्यिक कर तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्रिटिकल मिनरल्स की खोज तेज करने की तैयारी, GSI और RSMET के बीच जल्द होगा करार

जयपुर अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने कहा है कि क्रिटिकल मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन और क्वार्टज फेल्सपार के सेंपलिंग व विश्लेषण कार्य में गति लाने के लिए माइंस विभाग आरएसएमईटी और जीएसआई परस्पर सहयोग व समन्वय से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्दी ही जीएसआई व आरएसएमईटी के बीच करार किया जाएगा। इसी तरह से महत्वपूर्ण खनिजों के दोहन के बाद बचे खनिज मलबे की भी आरएण्डडी करवाने की आवश्यकता प्रतिपादित की ताकि मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण या मलबे में भी उपलब्ध खनिजों का पता लगाया जा सके। एसीएस माइंस अपर्णा अरोरा गुरूवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में राज्य में खान विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए भारतीय खान ब्यूरो, जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया व माइंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंथन कर रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का फोकस प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा का बेहतर दोहन, खनिज खोज कार्य को और अधिक गति देने, अकार्यशील खानों में खनन कार्य शुरु कराने और रोजगार व राजस्व अवसर विकसित करना है। क्वार्टज फेल्सपार को माइनर मिनरल से मेजर मिनरल घोषित करने के बाद की स्थिति पर चर्चा पर उन्होंने क्वार्टज फेल्सपार की सभी शेष लीजों का आईबीएम से समन्वय बनाते हुए 15 दिवस में पंजीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने आईबीएम से क्वार्टज फेल्सपार के सेंपलिंग और विश्लेषण कार्य में तेजी लाने और भारत सरकार के निर्देशानुसार क्वार्टज फेल्सपार ब्लॉकों के प्राथमिकता से जी 3 एक्सप्लोरेशन के निर्देश दिए।    भारतीय खान ब्यूरो उदयपुर के नियंत्रक अभय अग्रवाल ने पीपीटी के माध्यम से विस्तार से प्रस्तुति देते हुए बताया कि राजस्थान में माइनिंग सेक्टर में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। खान ब्यूरो स्तर पर मेजर मिनरल लीज धारकों के माइनिंग प्लान का अनुमोदन प्राथमिकता से किया जा रहा है और केन्द्र सरकार द्वारा भी अब माइनिंग प्लान अनुमोदन की समयसीमा तय करते हुए 30 दिवस का समय निर्धारित कर दिया है। अग्रवाल ने विस्तार से राजस्थान में मिनरलों के खनन और डिपोजिट्स की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार के माइनिंग मंत्रालय में बेहतर तालमेल के साथ ही केन्द्र सरकार की राजस्थान में कार्यरत संस्थाओं और खान निदेशालय के बीच बेहतर समन्वय से राजस्थान में अच्छा कार्य हो रहा है। बैठक में विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि, निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा व अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।  

श्रमिकों का सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और उनके परिवारों का उज्ज्वल भविष्य हमारी सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें – इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है। श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं मुख्यमंत्री  साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है। मुख्यमंत्री  साय ने असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे परंपरागत रिक्शा चालकों को आधुनिक साधन अपनाने, अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर एक सशक्त श्रमिक परिवार का निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है। 1.43 लाख से अधिक श्रमिकों को 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात महासम्मेलन में मुख्यमंत्री  साय ने श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों द्वारा संचालित 26 योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 43 हजार से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। उन्होंने विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं सामग्री का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर उनके बच्चों की शिक्षा, विवाह सहायता और आर्थिक सशक्तीकरण तक जीवन के विभिन्न चरणों में ये योजनाएं श्रमिक परिवारों का संबल बन रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीयन कराने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र के साथ श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र को साकार करते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संसाधनों की कमी किसी श्रमिक परिवार के प्रतिभावान बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बने। श्रमिक का बच्चा भी देश के श्रेष्ठ विद्यालय में पढ़े, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में ऊंची उड़ान भरे – सरकार इसी संकल्प के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के पहले वर्ष 100 बच्चों को इसका लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने में भी सरकार सहयोग कर रही है। मनिंदर की सफलता बनी श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों की मिसाल महासम्मेलन में एक प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री  साय ने श्रमिक परिवार की प्रतिभाशाली बेटी मनिंदर कौर को लैपटॉप और एक लाख 75 हजार रुपए का चेक प्रदान किया। मनिंदर ने अपनी प्रतिभा और कठिन … Read more

विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 और टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा जयंती पर कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान समारोह में पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास सबसे बड़ी आबादी, उर्वरा भूमि, भरपूर जल संसाधन और युवा जनशक्ति थी। मुख्यमंत्री ने कहा, बीमारू यूपी नहीं था, बीमारू तो यूपी को संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता थी, जो हमारे हस्तशिल्प और कारीगरों का अपमान करते थे।   विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 और टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले परंपरागत कारीगर हताशा और निराशा के साये में जीने को मजबूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन व्यवस्था के अधिकारी और गुर्गे कारीगरों से वसूली करते और उनका शोषण करते थे।   सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी पर हमला मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, जिन्हें सैफई में महोत्सव कराकर वहां मुंबई से लोगों को लाकर डांस कराने से फुर्सत न हो और बर्मिंघम की बग्घी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत हो, वे कारीगरों के बारे में कब सोचते। वे स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में कब सोचते। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कारीगरों के लिए योजना लागू की तो वे लोग हंसते थे।   मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना लागू की गई। इसके बाद 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। इसका उद्देश्य परंपरागत कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और बैंक ऋण से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना था।   कारीगर श्रमिक नहीं, उद्यमी बने मुख्यमंत्री योगी ने कहा, हमारा कारीगर और हमारा हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि कारीगर रोज काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान उसकी आय प्रभावित न हो, इसकी भी व्यवस्था की गई है।   योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान पांच हजार रुपये मानदेय और इसके बाद 15 हजार रुपये तक की आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। कारीगरों को बैंक से जोड़कर अपना उद्यम स्थापित करने में भी सहयोग दिया जा रहा है।   कारीगरों को 10 लाख तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम युवा उद्यमी योजना में पांच लाख रुपये तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण की सुविधा है। कारीगरों के लिए इसकी सीमा 10 लाख रुपये तक की गई है। इसमें 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की भी व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कहा, गारंटी हमारा कारीगर नहीं देगा, ब्याज भी वह नहीं देगा, ब्याज हम देंगे, बस उसको आप लोन दीजिए।   उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पूंजी की कमी किसी कारीगर के उद्यमी बनने की राह में बाधा न बने।   अब 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड लिए गए थे। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे पारंपरिक ट्रेड शामिल थे। अब मूर्तिकार, दुधिया, माला बनाने वाले माली, भड़भूजा और मछुआरा जैसे नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े गए हैं।   युवाओं की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत, प्लंबरिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे आधुनिक ट्रेड को भी योजना में जगह दी गई है। अब कुल 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाएगा।   बॉटम फाइव से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में यूपी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश देश के बॉटम फाइव राज्यों में आता था। आज देश की दो या तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा होती है तो उसमें उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को सम्मान और सहयोग देने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयां स्थापित कराई गई हैं और इनमें 3.25 करोड़ लोग काम कर रहे हैं। प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ रहा है।   ट्रेड शो में 12 से 15 हजार करोड़ के ऑर्डर की उम्मीद मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में यूपी ट्रेड शो आयोजित होगा। इसमें प्रदेश में बने उत्पादों को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रेड शो में 2,500 से अधिक प्रदर्शक और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल होंगे।   उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन से 12 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार और ऑर्डर मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका पैसा सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों की जेब में जाएगा।   छह लाख से अधिक कारीगरों को मिला लाभ एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी के माध्यम से छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को लाभ मिला है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में नए ट्रेड जोड़कर युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।   उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के तहत 14 जिलों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि प्लेज पार्कों के लिए स्वीकृत की गई है। महिला उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज उपादान सहायता की व्यवस्था भी की गई है। टूलकिट बांटी, मार्जिन मनी ऋण पोर्टल शुरू मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण कर उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने उन्हें भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा भेंट की। मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ भी किया।   मुख्यमंत्री ने अयोध्या के श्रवण कुमार को हलवाई और रामतीर्थ को कुम्हार की टूलकिट दी। बाराबंकी की रमा जायसवाल व वंदना को दर्जी, उन्नाव के रणजीत को नाई, हरदोई के बाबूराम को मोची, कानपुर के शिवसेवक को लोहार, अवधेश को सुनार, रायबरेली के शाहिद को बढ़ई, इटावा के विजयपाल को राजमिस्त्री और लखनऊ के मनीष को धोबी के … Read more

सीवर समस्या निराकरण के लिए शहर का करें सर्वे : निगमायुक्त ,हर गली की चौड़ाई की करें जांच

ग्वालियर शहर की सीवर समस्या के निराकरण के लिए नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने वार्ड क्रमांक 18, 17 का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने दीनदयाल नगर में सीवर लाइनों की सफाई करने वाली मशीनों को बुलाकर उनका प्रेजेंटेशन देखा। इसके बाद निगमायुक्त ने निर्देश  दिए हैं कि शहर की गलियों का सर्वे करें जिससे पता चल सके कि कौन सी मशीन खरीदी जाए। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त मुकेश बंसल, कार्यपालन यंत्री महेंद्र प्रसाद अग्रवाल, शिशिर श्रीवास्तव, सहायक यंत्री सिद्धार्थ सोनी आदि उपस्थित थे। नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने माधौनगर के सामने स्थित गाटर वाली पुलिया का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि गाटर वाली पुलिया के नीचे सीवर की समस्या का समाधान कर दिया गया है, जिससे अब पानी नहीं भर रहा है। इसके बाद नगर निगम आयुक्त ने बस स्टैण्ड के पास निरीक्षण किया। यहां पर नाला सीवर लाइन में मिल रहा था, जिसके कारण सीवर लाइन सडक पर बह रही थी, निगमायुक्त ने नाले निर्माण के निर्देष दिए हैं। इसके बाद नगर निगम आयुक्त ने वार्ड क्रमांक 18 स्थित दीनदयाल नगर निगम का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सीवर समस्या को देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने मौके पर सीवर सक्षन कम जेटिंग मशीन, डी सिल्टिंग मशीन, डी सिंल्टिम कम जेटिंग मशीनों  को मंगाया। निगमायुक्त ने मौके पर खडे होकर सीवर लाइनों को खुलवाया। साथ ही अधिकारियों को निर्देश   दिए कि शहर की सभी गलियों का सर्वे किया जाए, साथ ही उन क्षेत्रों की प्रत्येक गली का सर्वे किया जाए जहां सीवर लाइन की सबसे अधिक समस्या आ रही है, वहां पर गलियों की चौड़ाई के अनुपात के हिसाब से मशीनों के क्रय करने की रूपरेखा बनाई जाए।  

एअर इंडिया AI-171 हादसा: जांच में पारदर्शिता पर FAS के सवाल, AAIB ने आरोपों को नकारा

नई दिल्ली एअर इंडिया की उड़ान AI-171 हादसे की जांच को लेकर विमानन सुरक्षा संगठन फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस) ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। एफएएस के कार्यकारी निदेशक एड पियर्सन ने AAIB के महानिदेशक जीवीजी. युगंधर को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि हादसे से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और तकनीकी खराबी से संबंधित आंकड़ों को जांच में सामने नहीं लाया गया। जांच की पारदर्शिता पर एफएएस के सवाल पत्र में कहा गया है कि हादसे के बाद एफएएस ने यूके AAIB एक्सपर्ट के माध्यम से भारतीय जांच एजेंसी को सैकड़ों आधिकारिक गैर-सार्वजनिक दस्तावेज सौंपे थे। संगठन के अनुसार, इन दस्तावेजों में दुर्घटनाग्रस्त बोइंग 787 विमान के सिस्टम में चल रही कई तरह की खराबियों से संबंधित जानकारी थी। एफएएस का कहना है कि विमान के एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशंस एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम और एयरक्राफ्ट हेल्थ मैनेजमेंट डेटा स्ट्रीम से भी ऐसी जानकारियां मिलीं, जो हादसे से ठीक पहले हुई तकनीकी विफलताओं और उनके सटीक समय की ओर इशारा करती हैं। तकनीकी दस्तावेजों को दबाने का आरोप पियर्सन ने पत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आइसीएओ) के नियमों के तहत जांच एजेंसी का दायित्व है कि हादसे से जुड़े सभी प्रासंगिक तथ्यों को एकत्र करे, दर्ज करे और उनका पारदर्शी विश्लेषण करे। एफएएस का आरोप है कि AAIB ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इन दस्तावेजों का जिक्र तक नहीं किया। संगठन के अनुसार, जांच एजेंसी का रुख पायलटों पर दोष मढ़ने जैसा दिख रहा है, जबकि तकनीकी खामियों को दरकिनार किया जा रहा है। जांच एजेंसी ने आरोपों का किया खंडन AAIB ने एफएएस के आरोपों का खंडन करते हुए जांच में निष्पक्षता का दावा किया है। ब्यूरो के जवाब के अनुसार, एफएएस की ओर से दिए गए सभी तकनीकी इनपुट और दस्तावेज 10 जून 2026 को प्राप्त हो चुके थे और जांच टीम उनका गहराई से अध्ययन कर रही है। AAIB ने कहा कि पूरी जांच 'एयरक्राफ्ट (इ इन्वेस्टिगेशन आफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025' और आइसीएओ प्रविधानों के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। एफएएस ने दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग AAIB के स्पष्टीकरण के बावजूद एफएएस ने जांच से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तुरंत सार्वजनिक रिकाॅर्ड में शामिल करने की मांग की है। संगठन ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि समय रहते सुरक्षा चेतावनियां जारी क्यों नहीं की गईं। एफएएस का कहना है कि विमानन सुरक्षा में गोपनीयता के बजाय समय पर दी गई पारदर्शी जानकारी भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने में मदद कर सकती है। क्या है AI-171 हादसा जून 2025 में एअर इंडिया की उड़ान AI-171 (बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर) अहमदाबाद से लंदन जाते समय टेकआफ के ठीक 32 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी।

5 मेडिकल कॉलेज से 33 तक: मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का विस्तृत होता नेटवर्क

भोपाल  मध्यप्रदेश में पिछले दो दशकों में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। वर्ष 2002 में प्रदेश में जहां केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई है। चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें भी 620 से बढ़कर 8,675 हो गई हैं। वर्ष 2023 के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नए मेडिकल कॉलेज, विशेषज्ञ विभाग, आवश्यक मानव संसाधन और आधुनिक उपचार सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसका प्रभाव प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों के साथ-साथ विशेषज्ञ एवं उच्च स्तरीय उपचार की उपलब्धता बढ़ने के रूप में भी दिखाई दे रहा है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से बढ़ी चिकित्सा शिक्षा की क्षमता प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ चिकित्सा शिक्षा की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2002 में 5 मेडिकल कॉलेजों से शुरू हुआ यह नेटवर्क वर्ष 2026 में 33 मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच गया है। इसी अवधि में चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें 620 से बढ़कर 8,675 हो गई हैं। वर्ष 2023 के बाद चिकित्सा शिक्षा को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नए मेडिकल कॉलेजों, विशेषज्ञ विभागों और आवश्यक मानव संसाधन के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों के विस्तार के साथ नागरिकों को बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यों को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञ एवं सुपर स्पेशियलिटी उपचार का विस्तार मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ प्रदेश में उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं का दायरा भी बढ़ा है। वर्ष 2002 में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 4 हो गई है। पैथोलॉजी सेवाओं की उपलब्धता भी 45 से बढ़कर 134 हुई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने तथा आधुनिक जांच एवं उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में वर्ष 2023–26 के दौरान विशेष प्रयास किए गए हैं। प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में ऑन्को सर्जरी विभाग और कैथ लैब जैसी सुविधाओं के विस्तार की कार्ययोजना पर भी जोर दिया गया है।  स्वास्थ्य अधोसंरचना का हुआ व्यापक विस्तार वर्ष 2002 की तुलना में वर्ष 2026 में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थाओं के नेटवर्क का भी विस्तार हुआ है। जिला अस्पतालों की संख्या 36 से बढ़कर 55, सिविल अस्पताल 58 से बढ़कर 158, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 229 से बढ़कर 348 और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 1,194 से बढ़कर 1,442 हो गए हैं। उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या भी 8,835 से बढ़कर 10,256 हुई है। सामान्य बेड की संख्या 21,234 से बढ़कर 61,817 तथा आईसीयू बेड 277 से बढ़कर 3,395 हो गए हैं। 2023 के बाद मानव संसाधन का हुआ सशक्तीकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में स्वास्थ्य अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन को भी प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2024 में स्वास्थ्य संस्थाओं में 46,491 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई। इनमें नियमित, संविदा और आउटसोर्स पद शामिल हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में भी निर्णय लिए गए। नर्सिंग संवर्ग की भर्ती, मेडिकल कॉलेजों में आवश्यक मैनपावर और विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में लगातार सुधार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का प्रभाव मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतकों में भी दिखाई देता है। वर्ष 2002 में मातृ मृत्यु अनुपात 379 था, जो वर्ष 2026 में घटकर 135 रह गया है। इसी अवधि में शिशु मृत्यु दर 82 से घटकर 35 हुई है। संस्थागत प्रसव की दर वर्ष 2002 के 35 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2026 में 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है। गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीयन, प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान जैसी सेवाओं पर निरंतर जोर दिया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री जनमन अभियान के अंतर्गत 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की गईं। ये यूनिट 21 जिलों के 87 विकासखंडों के 1,268 गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संचालित की गईं। इनमें चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं तथा विभिन्न रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। आपातकालीन सेवाओं को मिली मजबूती आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन व्यवस्था का भी विस्तार हुआ है। प्रदेश में एम्बुलेंस सेवाओं की संख्या वर्ष 2002 के 256 से बढ़कर वर्ष 2026 में 2,052 हो गई है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूती मिली है। आवश्यक दवाओं की उपलब्धता वाले संस्थानों की संख्या भी वर्ष 2002 के 214 से बढ़कर 2026 में 650 हो गई है।  आयुष्मान भारत से उपचार की आर्थिक पहुंच स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ उपचार की आर्थिक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2023–26 के दौरान अधिकाधिक अस्पतालों और चिकित्सकों को योजना से जोड़ने, इसकी पहुंच बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों को उपचार सुविधा उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य से मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी तक विकसित हुआ नेटवर्क मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र का विस्तार अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक एक व्यापक व्यवस्था के रूप में दिखाई देता है। वर्ष 2002 से 2026 के बीच मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की क्षमता में हुई वृद्धि ने प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों और उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं के विस्तार का आधार तैयार किया है। वहीं वर्ष 2023 के बाद स्वास्थ्य अधोसंरचना, मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक, मोबाइल स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक उपचार की पहुंच को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया गया है। 

जयपुर को मिलेंगी 450 ई-बसें, राजस्थान में पीएम ई-बस सेवा का विस्तार तेज

जयपुर  राजस्थान के शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में पीएम ई-बस सेवा योजना के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। योजना के तहत राजस्थान को दो चरणों में कुल 1150 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इनमें से 229 ई-बसें राज्य को प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं, बसों के संचालन के लिए आठ जिलों में 65 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा करने पर फोकस कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ई-बसों का संचालन शुरू किया जा सके। योजना की प्रगति को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ई-बस सेवा संचालित करने वाले जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा और अलवर जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े। बैठक में शासन सचिव रवि जैन ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजना की अब तक की प्रगति और क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद मुख्य सचिव ने अधिकारियों से ई-बसों के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की और जरूरी निर्देश दिए। चार्जिंग स्टेशन बनाना सबसे अहम कड़ी ई-बसों के संचालन में चार्जिंग नेटवर्क को महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और स्थापना तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बसों के संचालन से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रहनी चाहिए, ताकि यात्रियों को नियमित और निर्बाध सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और योजना से जुड़े सभी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। इससे आने वाले समय में प्राप्त होने वाली नई ई-बसों को भी बिना किसी बड़ी बाधा के संचालन में लाया जा सकेगा। एसी बसों में डिजिटल टिकटिंग की सुविधा पीएम ई-बस सेवा के तहत राजस्थान में संचालित होने वाली बसें वातानुकूलित इलेक्ट्रिक सिटी बसें हैं। इनमें पारंपरिक ईंधन वाली बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए इन बसों में डिजिटल टिकटिंग और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। सरकार की योजना के तहत 1150 ई-बसों का पूरा बेड़ा तैयार होने के बाद राज्य के प्रमुख शहरों में शहरी परिवहन नेटवर्क को इससे बड़ा विस्तार मिलने की संभावना है। फिलहाल आठ शहरों में बसों और चार्जिंग स्टेशनों की व्यवस्था तैयार की जा रही है। आगामी चरण में जैसे-जैसे नई बसें उपलब्ध होंगी, उनके संचालन के लिए चार्जिंग और अन्य बुनियादी ढांचे को समय पर तैयार करना सरकार के सामने प्रमुख चुनौती रहेगी। जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित योजना के तहत जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। इसके अलावा जोधपुर और बीकानेर को 125-125 बसें मिलेंगी। अजमेर, अलवर और कोटा में 100-100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जबकि उदयपुर, सीकर और भीलवाड़ा को 50-50 बसें आवंटित की गई हैं। इन बसों के संचालन से शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री ने काशी में किया ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ

वाराणसी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री सभी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी ‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष’ का अवलोकन किया। रक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री ने पीएम की कर्मभूमि वाराणसी से उनकी जन्मभूमि वडनगर जाने वाली ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ को झंडी दिखाकर रवाना किया। 250 बाइकों पर सवार 500 युवा इस यात्रा को पूरा करेंगे। यात्रा शुरू होने पर इन युवाओं पर पुष्पवर्षा की गई। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में आए सकारात्मक परिवर्तन पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने काशी के लोकप्रिय सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने बाबा विश्वनाथ, मां गंगा व मां अन्नपूर्णा से पीएम मोदी के स्वस्थ दीर्घायु जीवन की कामना के साथ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर व विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करने की प्रार्थना की। पीएम मोदी के सेवा संकल्प के 25 वर्ष सीएम ने इस वर्ष को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के सेवा संकल्प के 25 वर्ष 7 अक्टूबर 2026 को पूरे होने जा रहे हैं। 7 अक्टूबर 2001 को मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने बिना रुके, झुके, डिगे ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र के साथ इस यात्रा को बढ़ाया। तप, परिश्रम, साधना के साथ प्रधानमंत्री के रूप में उनकी गौरवशाली यात्रा का दर्शन कर देशवासी नए भारत पर गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। मोदी जी के नेतृत्व में सुरक्षित भारत अब दुनिया से आंख से आंख मिलाकर बात करता है। आज से दो यात्राओं का प्रारंभ सीएम योगी ने पीएम मोदी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज से दो यात्राएं प्रारंभ हो रही है। 75 वर्ष पहले मोदी जी का जन्म गुजरात के पौराणिक गांव वडनगर में हुआ था। गुजरात की पावन नदियों के जल को लेकर 25-25 बाइक पर वहां से 10 यात्राएं चलेंगी। इसी क्रम में यूपी की 10 पावन नदियों का जल लेकर काशी से 10 यात्राएं विभिन्न मार्गों से होते हुए वडनगर को प्रस्थान करेंगी। ये यात्राएं काशी व वडनगर के महत्व को 10 राज्यों तक पहुंचाएंगी। यूपी की पवित्र नदियों का जल वडनगर में भगवान हाटकेश्वर को अर्पित होगा और गुजरात की नदियों का जल बाबा विश्वनाथ को समर्पित होगा। सीएम ने युवाओं का किया अभिनंदन मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा के प्रतीक युवा इस यात्रा के सहभागी बने हैं। 20 दिन की बाइक यात्रा में समय देने वाले युवाओं का अभिनंदन करते हुए सीएम ने कहा कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ को बढ़ाने वाली इस यात्रा में युवाओं को प्रतिदिन 100 किलोमीटर की दूरी तय कर चार बड़े कार्यक्रमों से जुड़ना है। रोमांच से भरी इस यात्रा के जरिए युवाओं का अलग-अलग राज्यों में संवाद व सेवा के कार्यक्रमों से भी जुड़ाव होगा। आज से 7 अक्टूबर तक चलने वाली यह यात्रा हमेशा स्मरणीय रहेगी। पीएम की सेवा संकल्प यात्रा में सहभागी हैं भारतवासी सीएम ने कहा कि आज से 75 वर्ष पहले वडनगर से भी एक यात्रा प्रारंभ हुई थी। वहां के सामान्य परिवार में जन्म लेकर भारत के प्रधानमंत्री और विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता के रूप में मोदी जी की यात्रा देश-दुनियावासी देख रहे हैं। 25 वर्ष पहले सेवा की जो यात्रा मोदी जी ने गुजरात से प्रारंभ की थी, उसमें भारत का हर नागरिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहभागी रहा है। गांव, गरीब, नारी, युवा समेत सबके जीवन में बदलाव सीएम ने प्रधानमंत्री की 25 वर्ष की शानदार यात्रा में आए बदलाव की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि गांव अपनी बदलती कहानी को सुनाते हुए आत्मनिर्भर हो गए हैं। आजादी के बाद दशकों तक गरीबों को आवास नहीं मिला, लेकिन पीएम मोदी जी ने 12 वर्ष में 4 करोड़ लोगों को आवास उपलब्ध कराया। नारी गरिमा का जिक्र करते हुए सीएम ने परिवर्तन की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि घर में शौचालय न होने के कारण नारी को अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता था, किंतु आज 12 करोड़ घरों में बने शौचालय नारी गरिमा के प्रतीक हैं। गांव-गांव में इंटरनेट व बैंकिंग सेवा मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी जी के 25 वर्ष के सेवा संकल्प की यह यात्रा बिना किसी सिफारिश, लेनदेन के योग्यतानुसार युवाओं को नौकरी मिलने की कहानी सुनाती है। यह यात्रा 11 करोड़ परिवारों में उज्जवला योजना के तहत हर माता के जीवन में आए बदलाव की कहानी भी सुना रही है। जिन गांवों ने आजादी के बाद दशकों तक बिजली नहीं देखी, अब वहां हर घर में दूधिया प्रकाश चमकता है। गांव-गांव में इंटरनेट व बैंकिंग सेवा मिल रही है। यह कहानी उस गरीब की भी है, जिसे पीएम मोदी ने अपने विजन से सामान्य परिवार के रूप में स्थापित करने के लिए स्वस्थ माहौल उपलब्ध कराया। इस यात्रा में आयुष्मान भारत के तहत वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर के कारण 60 करोड़ लोगों के जीवन में आए बदलाव की कहानी भी है। *युवाओं के जीवन में भी आया परिवर्त

सत्ता के लिए व्याकुल हैं अखिलेश, मोदी-योगी का विकास नहीं दिख रहा… राजभर का सपा पर तीखा हमला

लखनऊ एक्सप्रेसवे, ऑनलाइन पेमेंट, वक्फ संपत्ति, सरकारी नौकरियों और कानून-व्यवस्था को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तीखा पलटवार किया। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता पाने के लिए व्याकुल हैं, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास के काम पसंद नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि सड़कें बनती हैं तो टूटती भी हैं और टूटने पर ठेकेदार उन्हें दोबारा बनाता है। अगर अखिलेश को सड़कों की चिंता है तो उन्हें अपने कार्यकाल की सड़कों को भी झांककर देखना चाहिए। ‘ऑनलाइन पेमेंट पर चुंगी की बात कर गुमराह कर रहे अखिलेश’ ऑनलाइन पेमेंट पर चुंगी लगाए जाने के अखिलेश यादव के आरोप पर राजभर ने कहा कि उन्हें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 95 प्रतिशत लोगों पर इसका कोई भार नहीं है, जबकि 5 प्रतिशत सक्षम लोगों पर भार है। राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष इसी तरह की बातों से लोगों को गुमराह कर रहा है। सीए-एनआरसी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसके विरोध में विपक्षी दलों ने आंदोलन किया और दिल्ली का शाहीन बाग पूरे देश में चर्चा का विषय बना, लेकिन कानून लागू हुआ। राजभर ने दावा किया कि लागू होने के तीन साल से ज्यादा समय बाद भी एक भी मुसलमान देश से नहीं निकाला गया। ‘वक्फ की संपत्ति का हिसाब होने लगा तो विपक्ष परेशान’ वक्फ बोर्ड की संपत्ति के मुद्दे पर राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून आने के बाद विपक्षी दल रोना-रोने लगे कि अब क्या होगा। उन्होंने कहा कि संपत्ति ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज होने के बाद चोरी नहीं की जा सकेगी। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा, बसपा और कांग्रेस की सरकारों के दौरान वक्फ की करोड़ों की संपत्ति को हजारों में लेकर किसी ने होटल बनाया, किसी ने मॉल बनाया और किसी ने बेच दिया। उन्होंने कहा कि अब रिकॉर्ड दर्ज होने की व्यवस्था से ऐसे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ‘अखिलेश के कार्यकाल में नौकरी बिकती थी’ सरकारी नौकरियों को लेकर अखिलेश यादव के दावों पर राजभर ने कहा कि उन्हें सही जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार अपने कार्यकाल में 9.5 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां दे चुकी है। वहीं, अखिलेश सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में नौकरियां बिकती थीं। राजभर ने दावा किया कि नौकरी का विज्ञापन निकलते ही शिवपाल यादव और उनके लोग सक्रिय हो जाते थे। उनके मुताबिक पांच, दस और पंद्रह लाख रुपये तक की बोली लगती थी। पैसा लेने के बाद सूची बनती थी, शिवपाल यादव सूची तैयार करते थे, अखिलेश यादव उस पर दस्तखत करते थे और संबंधित विभाग उसी सूची को जारी करता था। ‘नौकरियां बिना पैसे मिल रही हैं, इसलिए परेशान हैं’ राजभर ने कहा कि अब योगी सरकार बिना पैसे के नौकरियां दे रही है, इसलिए अखिलेश यादव परेशान हैं। अखिलेश के सत्ता में आने पर नौकरी देने के दावे पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा, ‘कहां से देंगे, अपने घर से?’ उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश खुलकर नहीं कह पा रहे कि सरकार बनने पर अपनी जाति को नौकरी देंगे। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने अपने पांच साल के कार्यकाल में अपनी बिरादरी को आगे बढ़ाने का काम किया और अब उन्हें चिंता है कि योगी सरकार नौकरियां देती गई तो सत्ता में लौटने पर उनके लोगों को नौकरी कैसे मिलेगी। ‘सपा सरकार में गुंडों की सरकार कही जाती थी’ इबर और महिला अपराध को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर राजभर ने उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार को गुंडों की सरकार कहा जाता था। मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र करते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि जब मुजफ्फरनगर जल रहा था और लोग मारे जा रहे थे, तब सैफई में नाच देखा जा रहा था। राजभर ने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान एक हजार दंगे हुए, कर्फ्यू लगा और 1,200 लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि उस दौर में हर जिले में एक माफिया होता था, गैंगवार चलता था और लोग असलहे लहराते हुए सड़कों पर घूमते थे। राजभर ने सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव उसी तरह का राज चाहते हैं। उन्होंने योगी सरकार को कानून के राज वाली सरकार बताते हुए कहा कि आज अपराध करने वाला 48 घंटे के भीतर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच जाता है। ‘मंदिर भी बनाएंगे और मौलाना के साथ नमाज भी पढ़ेंगे?’ अखिलेश यादव के मंदिर बनवाने के बयान पर भी राजभर ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो मंदिर बनवाने की बात करते हैं, वही मौलाना के साथ जाकर नमाज भी पढ़ते हैं। राजभर ने सवाल किया कि मंदिर बनाकर वहां पूजा भी करेंगे और टीका लगाकर नमाज पढ़ने भी जाएंगे?