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संपत्ति रजिस्ट्री में अब नहीं होगी परेशानी, Sampada 2.0 के नए नियम लागू

भोपाल  संपदा 2.0 पोर्टल में घर बैठे रजिस्ट्री (online registry) को सुरक्षित करने बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। खासतौर पर वीडियो केवाईसी सॉल्यूशन को अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाने यूजर लाइवनेस प्रयास, नॉन इंटरएक्टिव वीडियो में डॉक्यूमेंट कैप्चर करने जैसे नियमों को बदला गया है, ताकि वास्तविक व्यक्ति ही पंजीयन में शामिल हो। इसके लिए बकायदा एक एजेंसी को हायर किया जा रहा है। अगले दो से तीन माह में नए बदलाव के साथ संपदा 2.0 में घर बैठे पंजीयन की सुविधा में बेहतर तरीके से नजर आएगी। गौरतलब है कि पोर्टल (property Registry) से नागरिक घर बैठे ऑनलाइन भुगतान, ई-स्टांपिंग और संपत्तियों का पंजीकरण आसानी से कर सकते हैं। इस नए सिस्टम में लॉग-इन, डिजिलॉकर एकीकरण, दस्तावेज ड्राफ्टिंग, और वीडियो केवाईसी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। दस्तावेज के सत्यापन और बेहतर होंगे (Sampada 2.0) -यूजर लाइवेनेस के अधिकतम प्रयासों को तीन से घटाकर 2 कर दिया है।  समय बचाने नॉन-इंटरैक्टिव वीडियो केवाईसी वर्क फ्लो से सीधे डॉक्यूमेंट कैप्चर (Sampada 2.0) करने के एक स्टेप को हटा दिया गया है। – धोखाधड़ी रोकने के लिए सिस्टम यूजर की लाइव फोटो का मिलान, अपलोड किए गए दस्तावेज और डेटाबेस में मौजूद इमेज के साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर करेगा। -चेहरे से सिस्टम दिए गए आधार दस्तावेज और रिकॉर्ड में दर्ज आधार दस्तावेज (Sampada 2.0) का मिलान कर यूजर की पहचान सुनिश्चित कर लेगा। -नए नियमों के तहत डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और आधार नियमों का कड़ाई से पालन करने अब किसी भी यूजर के बायोमेट्रिक डेटा या चेहरे की पहचान से जुड़े डेटा का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। – तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद मध्य प्रदेश के नागरिकों को जमीनों और संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया बेहद सुरक्षित और उंगलियों पर उपलब्ध होगी। अधिक सुरक्षित और सरल संपदा 2.0 (Sampada 2.0) में वीडियो ई-केवायसी (e-KYC)को अधिक सुरक्षित और सरल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स टीम तय की जा रही है। -स्वप्रेश शर्मा, जिला पंजीयक

Higher Education Reform: AI और डिजिटल जांच पर फोकस, छात्रों के मूल्यांकन में होंगे बड़े बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आने वाले समय में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का फोकस अब एआई आधारित शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान पर है। हालही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन बदलावों की रूपरेखा पर मंथन किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में देखने को मिल सकता है। विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में काम कर रहा है। इसके लागू होने के बाद कॉपियों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय होने की उम्मीद है। इससे परिणामों में देरी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आ सकती है।  परीक्षा पैटर्न में बदलाव के संकेत उच्च शिक्षा विभाग वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा भी कर रहा है। अभी 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा का प्रावधान है, लेकिन इसे 40:60 करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य और कक्षा में सहभागिता को अधिक महत्व मिलेगा। कॉलेजों में बढ़ेगा एआई का दायरा विभाग एआई को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। महाविद्यालयों में  एआईसे जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी नई तकनीकों को समझ सकें और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। साथ ही एआई टूल्स के जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। हर विद्यार्थी की बनेगी डिजिटल पहचान विद्यार्थियों के लिए  अपार आईडी तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके जरिए छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे प्रवेश, अंकसूची, प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं आसान हो सकेंगी। मोबाइल ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे कॉलेजों में उपस्थिति की निगरानी आसान होगी और कक्षाओं में नियमित सहभागिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारतीय भाषाओं में भी मिलेगा पढ़ाई का विकल्प नई शिक्षा नीति के तहत तेलुगु, तमिल, मराठी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रयास उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का भी सशक्त साधन है। विभाग का लक्ष्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाई जा सके। 

अबोहर में 13 जून को होगा बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन, नायब सैनी की रैली की तैयारियां तेज

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक गतिविधियाें को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 13 जून को अबोहर की नई अनाज मंडी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा इस कार्यक्रम को पंजाब में संगठन को मजबूत करने और चुनावी माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने के लिए हरियाणा सरकार के लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा गत दिवस अबोहर पहुंचे। उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया और नई अनाज मंडी को जनसभा के लिए उपयुक्त स्थान बताया।  उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां लगातार जारी हैं तथा जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम और अन्य नेताओं की सूची सार्वजनिक की जाएगी। अबोहर पहुंचने पर भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण माहर के निवास पर मंत्री गंगवा का स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर सम्मेलन और जनसभाएं आयोजित कर रही है। राजनीतिक दृष्टि से यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नायब सिंह सैनी पहले ऑल इंडिया ओबीसी मोर्चा के उपाध्यक्ष और पंजाब ओबीसी मोर्चा के प्रभारी रह चुके हैं। पंजाब में संगठनात्मक कार्य के दौरान उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया था, जिससे उनकी क्षेत्र में अच्छी पहचान बनी हुई है। इसके अलावा अबोहर क्षेत्र से उनका पारिवारिक जुड़ाव भी माना जाता है। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी लोकप्रियता देखने को मिलती है। भाजपा कार्यकर्ताओं और युवाओं में कार्यक्रम को लेकर उत्साह है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जनसभा पंजाब में भाजपा के चुनावी अभियान का शुरुआती शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकती है और पार्टी को नए सिरे से मजबूती देने का संदेश देगी।

पथरीली जमीन बनी Indore Metro प्रोजेक्ट की बाधा, एयरपोर्ट क्षेत्र में शुरू हुई ब्लास्टिंग

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड हिस्से का काम फिलहाल एयरपोर्ट के समीप चल रहा है। यहां मेट्रो स्टेशन भूमिगत होगा और करीब डेढ़ किलोमीटर आगे जाकर ट्रैक एलिवेटेड हिस्से से जुड़ेगा। लगभग आठ माह पहले इस हिस्से में मेट्रो के लिए खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन 20 फीट की खुदाई के बाद चट्टानें मिलने के कारण अब नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए खुदाई की जा रही है।  बीते दो दिनों से पूरे इलाके में विस्फोटों की गूंज सुनाई दे रही है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की टीम नियंत्रित ब्लास्टिंग के माध्यम से चट्टानों को तोड़कर आगे का काम कर रही है। माना जा रहा है कि सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट क्षेत्र में अंडरग्राउंड मेट्रो के हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। 10 किमी अंडरग्राउंड ट्रैक बनेगा इंदौर में कुल 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण होना है। फिलहाल 20 किलोमीटर लंबे मेट्रो ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है और उस पर संचालन कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन अभी तक इसकी अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। खजराना से एयरपोर्ट रोड तक 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण प्रस्तावित है, हालांकि इस हिस्से में अभी तक व्यापक स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इस रूट में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हस्तक्षेप के बाद बदलाव किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग दो किलोमीटर अतिरिक्त अंडरग्राउंड मेट्रो रूट जोड़ा गया। इससे परियोजना की लागत में करीब 2,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। 15,000 करोड़ रुपये है लागत इंदौर मेट्रो परियोजना पर कुल लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्तमान में छह किलोमीटर लंबे हिस्से में मेट्रो का संचालन और परीक्षण कार्य जारी है। गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न गति स्तरों पर मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अभी तक किराए की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि अधिकतम किराया लगभग 80 रुपये तक होने की संभावना जताई जा रही है। 

लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए पैसा आया या नहीं

भोपाल   लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की वो योजना है जो प्रदेश की जरुरतमंद महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है, इस महत्वाकांक्षी स्कीम ने बहनों के जीवन को काफी लाभ पहुंचाया है। बहनें हर महीने सरकार की ओर से आने वाली किस्त का बेसब्री से इंतजार करती है और जब ये राशि आ जाती है तो अपनी जरुरत को पूरा करती हैं।  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की करोड़ों पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना चलाती है. इस योजना के तहत प्रदेश की पात्र महिलाओं को हर महीना 1500-1500 रुपये की राशि दी जाती है। इस योजना के तहत अब तक जब से ये योजना शुरू हुई कुल 36 किस्त जारी हो चुकी है. प्रदेश की महिलाओं को अब 37वीं किस्त का इंतजार है।  इस योजना की 37वीं किस्त 10 जून के बाद जारी होनी संभावना है. 37वीं किस्त के रूप में प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के जरिए राशि ट्रांसफर की जाएगी. बता दें कि शुरूआत में महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर 1,500 रुपये किया जा चुका है. हालांकि अच्छी बात ये है कि भविष्य में इस योजना की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये तक किया जाएगा. सीएम मोहन यादव पहले ही इसके बारे में संकेत दे चुके हैं।  लाडली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने की थी. शुरुआत में लाडली बहनों के खातों में 1000 रुपये अंतरित किए जाते थे. इस राशि को अक्तूबर 2023 में बढ़ाकर 1250 रुपये कर दिया गया. नवंबर 2025 में योजना की राशि में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई और इसे 1500 रुपये कर दिया गया. अब तक इस योजना की 36 किस्ते जारी हो चुकी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार (13 मई 2026) को नरसिंहपुर के गोटेगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में लाडली बहना योजना की 36वीं किस्त जारी की थी।  पिछले महीने की किस्त लाडली बहनों के खाते में आ चुकी है अब फिर से राज्य की 1.25 करोड़ महिलाएं 37वीं किस्त का इंतजार कर रही है। सरकार हितग्राही महिलाओं के खातों में 1500-1500 रुपये राशि ट्रांसफर करती है, अब तक इस योजना की 36 किस्तें अंतरित की जा चुकी हैं और इस जून महीने में 37वीं किस्त बहनो के खाते में आएगी। नरसिंहपुर से हुई थी योजना कि 36वीं किस्त जारी लाडली बहनों की 36वीं किस्त मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले महीने 13 मई को नरसिंहपुर के मुंगवानी से जारी की थी। 1 करोड़ 25 लाख 542 महिलाओं के खातों में करीब 1835 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई थी लाडली बहना की 37वीं किस्त कब आएगी? वैसे आमतौर पर हर महीने लाडली बहना योजना की किस्त 10 से 20 तारीख के बीच जारी होती है, जानकारी ये है कि इस बार भी  लाडली बहनो की 37वीं किस्त इन्हीं तारीखों के बीच जारी होगी। हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक इसका आधिकारिक ऐलान तो नहीं किया है लेकिन इन्हीं तारीखों के बीच ये किस्त आ सकती है। DBT को कैसे एक्टिवेट करें? वैसे तो लाडली बहना योजना की किस्त सीधे महिलाओं के खातों में भेजी जाती है लेकिन कई बार आधार कार्ड तो बैंक अकाउंट से लिंक रहता है लेकिन डीबीटी सक्रिय नहीं होता है, अगर ऐसा हो तो नीचे दिए प्रोसेस को अपनाकर  प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. ऑफलाइन ऐसा करें.. जिस बैंक में आपका अकाउंट है उसकी शाखा में जाएं. आधार सीडिंग फॉर्म में अपनी जानकारी भरें. इस फॉर्म के साथ बैंक खाता पासबुक और आधारकार्ड की फोटोकॉपी लगाएं. बैंक से DBT एक्टिवेशन के लिए रिक्वेस्ट करें लिहाजा लाडली बहनों के खाते में कुछ ही दिनों में योजना की 37वीं किस्त आने वाली है।

​सुशासन तिहार: मौके पर ही दूर हो रही हैं जनता की तकलीफें

​रायपुर         छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश की जनता की समस्याओं के त्वरित और मौके पर ही निराकरण के लिए 'सुशासन तिहार' के तहत समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को ग्राम छेरकापुर में एक विशाल समाधान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरी शंकर अग्रवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।       ​ शिविर के दौरान राजस्व मंत्री  वर्मा ने क्षेत्र के विकास को गति देते हुए 55 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। साथ ही, विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री और प्रमाण पत्र वितरित किए।          राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच सीधे पहुंचकर शासकीय योजनाओं का फीडबैक लेना और समस्याओं का मौके पर समाधान करना है। हमारा प्रयास है कि युवा, गरीब, बच्चे और किसान,समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़े। ​ छेरकापुर और सेमरिया को मिलीं ये प्रमुख विकास सौगातें     ​ राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने क्षेत्र के अधोसंरचना विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सेमरिया में सीसी रोड निर्माण के लिए 30 लाख रुपये और गोड़ा सरस्वती शिशु मंदिर के विकास हेतु 12 लाख रुपये की स्वीकृति दी। इसके साथ ही, छेरकापुर उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, छेरकापुर में मुक्तिधाम निर्माण और सीसी रोड निर्माण के लिए 5-5 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। ​ 'विष्णु के सुशासन और मोदी की गारंटी' से मिल रहा सीधा लाभ      ​ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य आम जनता की तकलीफों का जमीनी स्तर पर समाधान करना है। 'विष्णु के सुशासन और मोदी की गारंटी' के तहत राज्य सरकार समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे जनता के द्वार तक पहुँच रहा है। ​ 'मोर गाँव मोर पानी 2.0' और 'हम होंगे कामयाब 2.0' की सफलता    ​ कलेक्टर  कुलदीप शर्मा ने जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और अभियानों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 'मोर गाँव मोर पानी अभियान 2.0' के तहत जल संचयन दीदियों और ग्राम पंचायतों के साझा प्रयासों से महज ढाई महीने के भीतर ढाई लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा जारी 'हम होंगे कामयाब 2.0' वेब पोर्टल की भी जानकारी दी, जिसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से मिल रही हैं। हितग्राहियों को मौके पर ही सामग्री, प्रमाण पत्र और स्पोर्ट्स किट का वितरण      ​ इस समाधान शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया और बड़ी संख्या में हितग्राहियों को सीधे लाभान्वित किया गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श देने के साथ ही आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल बांटी गई।       इसके अलावा, 'हम होंगे कामयाब' अभियान 2.0 के तहत युवाओं को जॉब सर्टिफिकेट सौंपे गए। खेल विभाग द्वारा स्थानीय खेल प्रतिभाओं को स्पोर्ट्स किट का वितरण किया गया और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। वहीं, राजस्व विभाग द्वारा ग्रामीणों को स्वामित्व कार्ड और डिजिटल किसान किताब का वितरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

रसिंहपुर के डायल-112 हीरोज ट्रेन से गिरकर घायल हुए व्यक्ति को त्वरित सहायता पहुँचाकर कराया अस्पताल में भर्ती

भोपाल  नरसिंहपुर जिले के थाना गाडरवारा अंतर्गत चौकी सालीचौका क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, सूझबूझ एवं संवेदनशील कार्रवाई से ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए एक व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। त्वरित सहायता मिलने से घायल को समय रहते चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी। 03 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि चौकी सालीचौका क्षेत्र अंतर्गत दूधी नदी रेलवे पुल के पास एक व्यक्ति ट्रेन से गिरकर घायल हो गया है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल सालीचौका क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री राजेंद्र धाकड़ एवं पायलट श्री शुभम वर्मा ने मौके पर पहुंचकर पाया कि एक व्यक्ति ट्रेन से गिरकर घायल हो गया था और रेलवे ट्रेक पर पड़ा हुआ था। उसके सिर एवं हाथ में गंभीर चोटें थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए घायल व्यक्ति को सुरक्षित ट्रैक से बाहर निकाला और तत्काल डायल 112 वाहन से शासकीय अस्पताल सालीचौका पहुँचाया। अस्पताल पहुँचने पर प्रधान आरक्षक श्री करण सिंह ठाकुर ने घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। प्राथमिक उपचार के उपरांत घायल व्यक्ति को उपचार हेतु शासकीय अस्पताल गाडरवारा रेफर किया गया। डायल-112 जवानों एवं पुलिस स्टाफ की त्वरित कार्यवाही से घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता पहुँचाकर आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। दुर्घटनाओं एवं अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में डायल-112 जवान संवेदनशीलता, साहस एवं सेवा भाव के साथ लोगों की मदद कर रहे हैं।  

सड़क दुर्घटना में चकनाचूर पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का सफल ऑपरेशन, सिम्स में युवक को मिला नया जीवन

रायपुर सड़क दुर्घटना में चकनाचूर पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का सफल ऑपरेशन, सिम्स में युवक को मिला नया जीवन सड़क दुर्घटनाओं में पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाना तथा साथ ही एसीटैबुलम (Acetabulum) का फ्रैक्चर होना अत्यंत गंभीर एवं जटिल चोटों में गिना जाता है। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने पर स्थायी विकलांगता, चलने-फिरने में गंभीर कठिनाई तथा भविष्य में गठिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसी प्रकार के एक चुनौतीपूर्ण मामले में सिम्स बिलासपुर के अस्थि रोग विभाग ने सफल सर्जरी कर 40 वर्षीय अजय पटेल को नया जीवन प्रदान किया। बिलासपुर निवासी अजय पटेल को 19 अप्रैल 2026 को बिल्हा क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आई थीं। दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार हेतु सिम्स बिलासपुर लाया गया, जहां जांच में उनकी दाहिनी पेल्विस में सेंट्रल हिप डिसलोकेशन (Right Central Hip Dislocation) के साथ एसीटैबुलम फ्रैक्चर (Acetabular Fracture) पाया गया। यह चोट अत्यंत जटिल मानी जाती है क्योंकि इसमें हिप जॉइंट अपनी सामान्य स्थिति से हट जाता है तथा उसे घेरने वाली पेल्विस की हड्डी भी क्षतिग्रस्त हो जाती है। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ठाकुर की देखरेख में मरीज का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। चोट की गंभीरता एवं भविष्य में जोड़ की कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. बेन के मार्गदर्शन में विशेष सर्जिकल योजना तैयार की गई। दिनांक 28 अप्रैल 2026 को विशेषज्ञ टीम द्वारा सफलतापूर्वक ओपन रिडक्शन एंड इंटरनल फिक्सेशन (ORIF) विद राइट एसीटैबुलर रिपेयर एवं ओपन रिडक्शन ऑफ हिप जॉइंट की जटिल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान आधुनिक सी-आर्म (C-Arm) फ्लोरोस्कोपी मशीन की सहायता से हड्डियों की स्थिति का लगातार मूल्यांकन किया गया, जिससे फ्रैक्चर के टुकड़ों को शारीरिक संरचना के अनुरूप सटीक रूप से स्थापित किया जा सका। सी-आर्म तकनीक के उपयोग से इम्प्लांट की सही स्थिति सुनिश्चित की गई तथा हिप जॉइंट का पूर्ण एनाटॉमिकल रिडक्शन प्राप्त किया गया। टूटे हुए एसीटैबुलम की मरम्मत कर उसे स्थिर किया गया तथा जोड़ को पुनः उसकी सामान्य स्थिति में स्थापित किया गया। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है और इसके लिए उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल एवं आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ तथा मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही। सर्जरी के बाद मरीज को विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास कार्यक्रम के अंतर्गत रखा गया, जिससे वह धीरे-धीरे पुनः सामान्य गतिविधियों की ओर अग्रसर हो सका। चिकित्सकों के अनुसार समय पर किए गए ऑपरेशन एवं सटीक एनाटॉमिकल रिडक्शन से भविष्य में जोड़ की कार्यक्षमता बेहतर रहने तथा दीर्घकालिक जटिलताओं की संभावना कम होने की उम्मीद है। इस सफलता पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि सिम्स बिलासपुर में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, सी-आर्म आधारित उन्नत ट्रॉमा सर्जरी एवं अनुभवी चिकित्सकों की संयुक्त कार्यप्रणाली के कारण जटिल से जटिल पेल्विस एवं एसीटैबुलर चोटों का सफल उपचार संभव हो रहा है। यह संस्थान की उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं, टीमवर्क और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति मती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली मती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री  मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ विकसित मध्यप्रदेश @2047 के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।  

असाधारण वीरता, साहस एवं उत्कृष्ट पुलिस कार्य के लिएअधिकारी-कर्मचारी होंगे सम्मानित

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना द्वारा वर्ष 2022-23एवं वर्ष 2023-24 के लिए प्रतिष्ठितके.एफ. रुस्तम जी पुरस्कारप्रदान किए जाने की घोषणा की है। यह पुरस्कार मध्यप्रदेश पुलिस का एक महत्वपूर्ण सम्मान है, जो उन पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने दस्यु उन्मूलन अभियान, नक्सल विरोधी अभियान, सांप्रदायिक दंगों एवं कानून-व्यवस्था की गंभीर परिस्थितियों के नियंत्रण में असाधारण कार्य करते हुए उच्चकोटि की वीरता, साहस, नेतृत्व क्षमता तथा कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो। के.एफ. रुस्तम जी पुरस्कार तीन श्रेणियों—परम विशिष्ट, अति विशिष्ट एवं विशिष्ट श्रेणी में प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना तथा पुलिस बल में उत्कृष्टता एवं साहस की भावना को प्रोत्साहित करना है। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश पुलिस की व्यावसायिक दक्षता, समर्पण एवं जनसेवा की भावना का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पुरस्कार प्राप्त अधिकारी एवं कर्मचारी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट कार्यों से पुलिस संगठन की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। वर्ष 2022-23के लिए के.एफ.रूस्‍तम जी पुरस्‍कार से सम्‍मानित पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अति विशिष्ट श्रेणी :- एक बारह बोर गन एवं प्रमाण पत्र 1. सु निधि सक्‍सेना, सहायक पुलिस आयुक्‍त, महिला सुरक्षा, जिला भोपाल हाल सहायक पुलिस आयुक्‍त, इंदौर। 2.  गौरव सिंह बुन्‍देला, उप निरीक्षक (कार्यवाहक निरीक्षक) जिला नर्मदापुरम। विशिष्ट श्रेणी :- रु.50,000/- एवं प्रमाण पत्र 1.  आशीष खरे, जोनल पुलिस अधीक्षक, विशेष शाखा, जिला जबलपुर हाल पुलिस अधीक्षक जिला डिंडौरी। 2.  रत्‍नेश तोमर, नगर पुलिस अधीक्षक, जिला ग्‍वालियर हाल सहायक सेनानी 14वीं वाहिनी विसबलग्‍वालियर। 3.  समर वर्मा, अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक अपराध, जिला जबलपुर हाल पुलिस अधीक्षक ई.ओ.डब्‍ल्‍यूउज्‍जैन। 4. मती ऋचा राय चौबे, अतिरिक्‍त पुलिस उपायुक्‍त महिला सुरक्षा अजाक, नगरीय पुलिस भोपाल हाल सहायक पुलिस महानिरीक्षक रा.अ.अ.ब्‍यूरोपु.मु. भोपाल। 5.  अक्षय चौधरी, सहायक पुलिस आयुक्त, एम.पी.नगर. जिला – भोपाल। 6.  दामोदर गुप्ता, निरीक्षक थाना प्रभारी हुजरात कोतवाली, जिला – ग्वालियर हाल कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक जिला सीहोर। 7.  जितेन्द्र कुमार पाठक, निरीक्षक थाना प्रभारी यशोधर्मन नगर, जिला मंदसौर हाल जिला नर्मदापुरम। 8.  अखिलेश चौकसे, निरीक्षक, फिंगर प्रिंट, जबलपुर। 9. मती इन्द्रा नामदेव, निरीक्षक, रा.अ.अ.ब्यूरो पुलिस मुख्यालय भोपाल। 10.  अजय तुरकई, निरीक्षक, विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल। 11. मती आकांक्षा शर्मा, कार्यवाहक निरीक्षक, थाना प्रभारी अजाक, जिला भोपाल हाल जिला राजगढ। 12.  राजेन्द्र सिंह चौहान, उप निरीक्षक, थाना प्रभारी धरनावदा, जिला गुना। 13. सु श्वेता सोमकुंवर, उप निरीक्षक, शासकीय रेलवे पुलिस थाना, जिला – भोपाल। 14.  राजा तिवारी, उप निरीक्षक रेडियो, जिला – बुरहानपुर हाल जिला रतलाम। 15.  शशिकांतअम्बाडकर, उप निरीक्षक, विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल। 16.  कृष्ण कुमार तिवारी, कार्यवाहक उप निरीक्षक, विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल। 17.  ऋतुराज वारिवा, सूबेदार, रक्षित केन्द्र जिला भोपाल। 18.  राजेश राय, कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक, नक्सल सेल, पुलिस अधीक्षक कार्यालय बालाघाट। 19.  नरवीर सिंह राना, कार्यवाहक प्रआर 2617 थाना अपराध शाखा, जिला ग्वालियर। 20.  सौरभ टंडन, कार्यवाहक प्रआर 353 रक्षित केन्द्र, जिला दमोह। 21.  अर्शदीप सिंह, प्रधान आरक्षक (कम्प्यूटर) रा.अ.अ.ब्यूरो पुलिस मुख्यालय भोपाल। 22.  आदित्य साहू, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक, सायबरक्राईम, भोपाल। 23.  आशीष कुमार वास, प्रधान आरक्षक 229 थाना अयोध्या नगर, जोन – 2 भोपाल। 24.  आशुतोष शर्मा, आरक्षक 1262 नक्सल कमाण्ड एण्ड कंट्रोल रूम, जिला बालाघाट। वर्ष 2023-24के लिए के.एफ.रूस्‍तम जी पुरस्‍कार से सम्‍मानित पुलिस अधिकारी और कर्मचारी परम विशिष्ट श्रेणी :-एक रिवाल्वर एवं प्रमाण पत्र 1.  राकेश खाखा, तत्का. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला रतलाम हाल उप सेनानी, 29वीं वाहिनी, वि.स. बल, दतिया। 2.  नागेन्द्र सिंह सिकरवार, तत्का. उप पुलिस अधीक्षक, अपराध-2 ग्वालियर हाल नगर पुलिस अधीक्षक, महराजपुरा जिला ग्वालियर 3. मती कंचन ठाकुर, कार्यवाहक निरीक्षक, जिला नर्मदापुरम। 4.  राजेश कुमार, आरक्षक (विसबल) एटीएस, इकाई भोपाल। 5.  कमलेश सिंह, आरक्षक (विसबल), एटीएस, इकाई भोपाल। अति विशिष्ट श्रेणी :-एक बारह बोर गन एवं प्रमाण पत्र 1.  दुर्गेशआर्मो, तत्का. उप पुलिस अधीक्षक, जिला रतलाम हाल महिला अपराध जिला – बैतूल। 2.  योगेन्द्र साहू, उप निरीक्षक (अं.चि.), शाखा जिला – विदिशा। 3.  भेरू सिंह देवडा, सहायक उप निरीक्षक प्रभारी सायबर शाखा, जिला – धार। 4.  आत्माराम मकवाना, आरक्षक (जी.डी.) 8वीं वाहिनी, विसबल, छिंदवाडा। 5.  वसीम खान, आरक्षक (विसबल) एटीएस, इकाई भोपाल। 6.  विपुल भावसार, आरक्षक 218, सायबर सेल, जिला – रतलाम। विशिष्ट श्रेणी :- रु.50,000/- एवं प्रमाण पत्र 1.  देवेन्द्र कुमार यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नक्सल विरोधी अभियान बालाघाट हाल पुलिस अधीक्षक, ई.ओ.डब्ल्यू सागर। 2.  कमलेश कुमार खरपूसे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला-रायसेन। 3.  लोकेश कुमार सिन्हा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, जिला सागर। 4.  जयदीप सूद, सहायक सेनानी, 25 वीं वाहिनी विसबल, भोपाल। 5.  दीशेष अग्रवाल, नगर पुलिस अधीक्षक, जिला देवास हाल उप पुलिस अधीक्षक, इंदौर। 6.  प्रशांत द्विवेदी, कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक, एटीएस इकाई भोपाल। 7.  शशिकांत चौरसिया, निरीक्षक, थाना औ‌द्योगिक क्षेत्र, देवास। 8.  कमलेश सिंगार, निरीक्षक, थाना प्रभारी टाण्डा, जिला धार हाल प्रशासन शाखा पुलिस मुख्यालय भोपाल। 9.  राजेश यादव, निरीक्षक, थाना प्रभारी कुक्षी, जिला – धार। 10.  रविकांतडेहरिया, निरीक्षक, थाना प्रभारी गंज, जिला बैतूल हाल जिला – पांढुर्णा। 11.  विजेन्द्रमर्सकोले, निरीक्षक थाना कोहेफिजा, जिला भोपाल। 12. मती अंजना दुबे, कार्यवाहक निरीक्षक, एटीएस इकाई, भोपाल हाल नगरीय पुलिस भोपाल। 13.  राजपाल सिंह बघेल, कार्यवाहक निरीक्षक, जिला नरसिंहपुर हाल जिला – जबलपुर। 14.  वेदरामहनोते, कार्यवाहक निरीक्षक, थाना घुघरी, जिला मण्डला। 15. मती इला टंडन, कार्यवाहक निरीक्षक, थाना प्रभारी पडाव, जिला ग्वालियर। 16.  जगदीश यादव, सूबेदार, थाना यातायात, जिलाआगर-मालवा। 17.  लक्ष्मीनारायण गिरी, उप निरीक्षक, जिला रतलाम हाल जिला विदिशा। 18. सु प्रीति वर्मा, उप निरीक्षक, थाना टिकरिया, जिला- मण्डला। 19.  नरेन्द्र उईके, उप निरीक्षक, थाना कोतवाली, जिला बैतूल। 20.  यादवेन्द्रमरावी, उप निरीक्षक, थाना गाडरवाडा, जिला नरसिंहपुर हाल प्रतिनियुक्तिएसटीएफ, भोपाल। 21.  अजय कुमार शर्मा, कार्यवाहक उप निरीक्षक, नारकोटिक्स विंग, इन्दौर। 22.  सुरेश राठौर, कार्यवाहक उप निरीक्षक, रीडर टू.पु.अ. कार्यालय, जिला बडवानी। 23.  प्रीत कुमार, सहायक उप निरीक्षक (कम्प्यूटर) राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, पुलिस मुख्यालय, भोपाल। 24.  रुद्रीचंदजखमोला, प्रधान आरक्षक 1228 (विसबल) हाल सहायक उप निरीक्षक हॉकफोर्स बालाघाट। 25.  रोशन यादव, प्रधान आरक्षक 1210, थाना परदेशीपुरा, इन्दौर। 26.  अमित वास, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक, एटीएस इकाई भोपाल। 27.  नितेश सिंह तोमर, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक, विसबल 424, एसआईबी यूनिट, बालाघाट। 28.  भास्कर पटेल, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक 33, थाना गाडरवाडा, जिला नरसिंहपुर। 29.  वेद प्रकाश उइके, आरक्षक 363 (विसबल), एसआईबी बालाघाट। 30.  … Read more