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भोपाल-रामगंजमंडी रेल प्रोजेक्ट में तेजी, 276 KM लंबी नई रेल लाइन 2027 तक होगी तैयार

भोपाल  मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच व्यापार और आवाजाही को नई रफ्तार देने वाली भोपाल-रामगंजमंडी नई रेल लाइन अब अपने मुकाम के करीब है। ₹3,035 करोड़ की लागत वाला यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2027 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा। 276 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के बन जाने से भोपाल, सीहोर और राजगढ़ जैसे जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। 5 जिलों की बदलेगी किस्मत यह रेल लाइन मध्य प्रदेश के भोपाल, सीहोर और राजगढ़ को राजस्थान के झालावाड़ और कोटा जिले से सीधे जोड़ेगी। प्रोजेक्ट का 187 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है। भोपाल रेल मंडल के तहत निशातपुरा डी केबिन से श्यामपुर तक का 42 किमी का काम पूरा है, वहीं कोटा मंडल ने रामगंजमंडी से राजगढ़ तक 145 किमी की पटरी बिछा दी है। अब केवल 89 किमी का पैच (ब्यावरा-सोनकच्छ-नरसिंहगढ़-कुरावर) बाकी है, जिसे 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पहाड़ों के बीच से गुजरेगी ट्रेन यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना है। 276 किमी के इस ट्रैक पर 4 बड़ी सुरंगें, 4 बड़े पुल, 34 मुख्य पुल और 171 अंडरपास बनाए जा रहे हैं। 27 स्टेशनों वाला यह रूट न केवल यात्रियों के लिए आरामदायक होगा, बल्कि मालगाड़ियों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा। यह लाइन कनेक्टिविटी को बढ़ाएगी, माल ढुलाई को सुव्यवस्थित करेगी और क्षेत्र में रोजगार एवं औद्योगिक विकास को गति देगी। सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम समय और पैसा दोनों की होगी भारी बचत इस नई लाइन के शुरू होने से दूरी में भारी कटौती होगी: कोयला परिवहन: झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला ले जाने वाली गाड़ियों को अब 42 किमी कम दूरी तय करनी होगी। लंबी दूरी की ट्रेनें: जयपुर से दक्षिण भारत जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें अब वाया कोटा-रामगंजमंडी-भोपाल होकर जाएंगी, जिससे 115 किलोमीटर की दूरी और करीब 3 घंटे का समय बचेगा।  

राम नगरी की ओर श्रद्धा का कारवां: मनेंद्रगढ़ से 49 श्रद्धालु अयोध्या रवाना

राम नगरी की ओर श्रद्धा का कारवां: मनेंद्रगढ़ से 49 श्रद्धालु अयोध्या रवाना मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी “श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना” के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से चयनित श्रद्धालुओं का दल आज गहरी आस्था और उत्साह के साथ अयोध्या धाम के लिए रवाना हुआ। इस जनकल्याणकारी पहल के माध्यम से आम नागरिकों को भगवान श्रीराम के पावन जन्मस्थल के दर्शन का सुअवसर मिल रहा है। जिले के नगरीय निकायों और जनपद पंचायतों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर 57 श्रद्धालुओं की सूची तैयार कर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड को भेजी गई थी, जिनमें से 49 श्रद्धालु यात्रा पर निकले। मनेंद्रगढ़ से बस द्वारा अंबिकापुर पहुंचने के बाद श्रद्धालु विशेष ट्रेन के माध्यम से अयोध्या धाम के लिए प्रस्थान करेंगे। 21 से 24 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित इस यात्रा के दौरान ठहरने, भोजन, दर्शन, सुरक्षा और चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएं शासन और जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई हैं। यात्रा दल के साथ एक एस्कॉर्ट अधिकारी भी नियुक्त किया गया है, जो पूरी यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। भक्ति और उल्लास से गूंजा वातावरण रवाना होते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और खुशी साफ झलक रही थी। राम धुन, भजन और जयघोषों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने इस अवसर के लिए शासन के प्रति आभार जताते हुए इसे जीवन का एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। संस्कृति से जुड़ाव का सशक्त माध्यम “श्री रामलला दर्शन योजना” केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि लोगों को भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। अयोध्या धाम में श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करेंगे। यह पहल राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।

25 सितम्बर से फिर शुरू होगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो, ग्लोबल सोर्सिंग प्लेटफॉर्म बनने की तैयारी

25 सितम्बर से फिर सजेगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो, ग्लोबल सोर्सिंग प्लेटफॉर्म बनाने की तैयारी यूपीआईटीएस 2026 को ग्लोबल सोर्सिंग प्लेटफॉर्म बनाने की तैयारी   डेयरी, उद्योग, मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण के नवाचार आधारित व्यावसायिक मॉडल बनेंगे आकर्षण का केंद्र प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश सरकार की योजनाओं को विस्तार के साथ किया जाएगा प्रस्तुत लखनऊ  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 को इस बार नए तेवर और बड़े लक्ष्य के साथ आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने लोक भवन में बैठक कर ट्रेड शो की तैयारियों को लेकर मंथन किया। इसमें तय किया गया कि ट्रेड शो का आयोजन 25 से 29 सितम्बर के बीच किया जाएगा, ताकि अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों और विक्रेताओं को बेहतर पूर्व नियोजन का अवसर मिल सके। इसमें डेयरी, उद्योग, मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण के नवाचार आधारित व्यावसायिक मॉडल आकर्षण का केंद्र बनेंगे। इस बैठक में इन्वेस्ट यूपी, कृषि विपणन, विदेश व्यापार व यूपीएलसी समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस बार आयोजन को पारंपरिक प्रदर्शनी से आगे बढ़ाकर सशक्त ग्लोबल सोर्सिंग प्लेटफॉर्म बनाया जाए, जहां विभाग अपनी उपलब्धियों को अधिक प्रभावी और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करें। अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष ट्रेड शो का मुख्य फोकस “जनता तक उपलब्धियों का प्रभावी संप्रेषण” रहेगा। प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश सरकार की योजनाओं को विस्तार के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। निजी क्षेत्र और छोटे कॉरपोरेट्स को भी मिलेंगे पर्याप्त अवसर बैठक में स्टॉल आवंटन और शुल्क संरचना भी तय की गई। स्टॉल दरें 7,500 से 8,000 रुपए के बीच निर्धारित की गई हैं। दो तरफ खुले स्टॉल पर 10 प्रतिशत तथा तीन या चार तरफ खुले स्टॉल पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। साथ ही निजी क्षेत्र और छोटे कॉरपोरेट्स को भी पर्याप्त अवसर देने के निर्देश दिए गए। युवाओं को नए स्टार्टअप शुरू करने की मिलेगी प्रेरणा युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए “सीएम युवा” पवेलियन को और मजबूत किया जाएगा। डेयरी, उद्योग, मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण विभागों को नवाचार आधारित व्यावसायिक मॉडल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे खासकर एनसीआर और गौतम बुद्ध नगर के युवाओं को नए स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी। एक्सपो मार्ट में विभागों को आवंटित हॉल और क्षेत्रफल की जानकारी साझा करते हुए अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

मध्यप्रदेश में सड़कों के कायाकल्प के लिए ‘4 करोड़’ का बजट, अधिकारियों को निर्देश

बड़वानी  शहर के करीब सभी वार्ड में नगर पालिका जल्द ही सड़कों का कायाकल्प करने जा रही है। जहां सडक़ें नहीं है। वहां निर्माण किया जाएगा और जहां स्थिति खराब है। वहां सडक़ों का रिपेयर करने का लक्ष्य रखा है। नपा अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि नगर के सभी वार्ड में स्थिति की समीक्षा करके आम लोगों की परेशानी को दूर करें। इन कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का आवंटन किया गया है। नपा अधिकारियों ने बताया कि 4 करोड़ से अधिक की लागत से नगर की विभिन्न सड़कों का कायाकल्प किया जाएगा। अधिकारियों ने उन सड़कों का चिह्नित करना शुरू कर दिया है, जहां पर रिपेयर किया जाना है। वहीं नगर के विभिन्न वार्डों की गलियों में सडक़ निर्माण होगा। जहां पर अभी तक सडक़ें नहीं बनाई जा सकी। खास बात है कि जिन सडक़ों की स्थिति खराब हो रही है। वहां डामरीकरण का लक्ष्य रखा है। अभिनव कॉलोनी, श्याम बाजार में डामरीकरण की सफलता से अधिकारी उत्साहित है। कार्य के लिए टेंडर नोटिस जारी किए जा चुके है। परिषद की बैठकों में पार्षदों से की थी चर्चा सूत्रों ने बताया कि नपा के पदाधिकारी और अधिकारियों ने विभिन्न वार्ड के पार्षदों से चर्चा कर सडक़ निर्माण के प्रस्ताव बुलाए है। हालांकि अभी ये जानकारी नहीं दी गई है कि किन वार्डों में निर्माण कार्य होना है और किन वार्डों में रिपेयर कार्य किए जाएंगे। हालांकि अधिकारियों को कहना है कि जहां भी कमी होगी उसे पूरा करेंगे।  पिछले वर्ष भी करोड़ों रुपयों के टेंडर निकाल सडक़ों के कायाकल्प का कार्य किया था, जिससे आम लोगों को राहत मिली थी। वर्तमान में पटेल कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, महावीर नगर, मोतीबाग, देवझिरी, पुराना आरटीओ बेड़ी पर सडक़ निर्माण कार्य हुए है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए दीवारों पर पेंटिंग स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 को लेकर नगर पालिका अपनी तैयारी कर रही है विभिन्न कैटेगरी में ज्यादा से ज्यादा अंक प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। खास बात है कि इस वर्ष दीवारों पर पेंटिंग करने को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चल रहा है। पिछले 5 वर्षों में स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सबसे अधिक वॉल पेंटिंग इसी वर्ष की गई है। सूत्रों ने बताया कि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में गंदी गलियों की सफाई कैटेगरी में अंक कम मिले थे, जिससे नपा पिछड़ गई थी, लेकिन इस बार नपा अधिकारी उसी तरह ध्यान दे रहे हैं। पेंटिंग के माध्यम से सफाई, कचरा संग्रहण सहित पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां गंदी दीवारें थी। अब वहां पेंटिंग बनाने से सुंदरता बढ़ी है।

रेलवे ने मंजूरी दी 15 समर स्पेशल ट्रेनों को, भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन में बढ़ेगा यात्री लाभ

भोपाल  गर्मियों के मौसम में बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे ने इस बार पहले से व्यापक तैयारी की है। 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक चलने वाले समर स्पेशल ट्रेनों के प्लान के तहत यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। रेलवे का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और लंबी दूरी की यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। रेलवे द्वारा तैयार योजना के अनुसार कुल 15 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिनके जरिए 288 ट्रिप्स संचालित होंगे। इनमें से पांच ट्रेनों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। भोपाल, जबलपुर और कोटा को बड़ा फायदा इस योजना का सबसे अधिक लाभ भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन के यात्रियों को मिलेगा। इन शहरों से देश के प्रमुख महानगरों और पर्यटन स्थलों के लिए सीधी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। दक्षिण भारत के मैसूर और कोयंबटूर जैसे शहरों के लिए सीधी ट्रेन सुविधा मिलने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। हर दिन हजारों यात्रियों को राहत रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से प्रतिदिन करीब पांच से सात हजार यात्रियों को लाभ मिलेगा। गर्मियों में उत्तर भारत से महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाई गई है। 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव तैयार रेलवे ने 10 नई समर स्पेशल ट्रेनों का प्रस्ताव भी तैयार किया है, जिनके जरिए 158 अतिरिक्त ट्रिप्स संचालित करने की योजना है। इनमें रानी कमलापति से मैसूर, जबलपुर से येलहंका और कोटा से मथुरा व धनबाद के लिए ट्रेनें शामिल हैं। कुछ ट्रेनें साप्ताहिक होंगी, जबकि कुछ सप्ताह में दो बार चलाई जाएंगी। यात्रा होगी आसान और सुविधाजनक रेलवे का मानना है कि इन अतिरिक्त ट्रेनों से यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी और वेटिंग की समस्या कम होगी। इससे सफर अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बन सकेगा।

मध्य प्रदेश में आईपीएस तबादलों का दौर शुरू, मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश जारी होने की उम्मीद, प्रशासनिक हलचल

भोपाल  IAS अधिकारियों के तबादलों के बाद मध्य प्रदेश में IPS अफसरों की ट्रांसफर घड़ी बिल्कुल पास आ चुकी है। अब किसी भी समय ऐलान हो सकता है। काफी समय से ये तबादला लिस्ट तैयार है।   दरअसल मध्य प्रदेश में मोहन सरकार पुलिस विभाग में बड़ी सर्जरी करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय पुलिस सेवा के लगभग 25 अधिकारियों के तबादले की सूची लगभग तैयार है। इस फेरबदल की खास बता ये है कि करीब 20 जिलों के पुलिस अधीक्षकों के बदलने पर सहमति बन चुकी है। वहीं जानकारी सामने आ रही है कि  इस बार तबादलों का आधार कई पहलू हैं , इनमें परफॉर्मेंस से लेकर फीडबैक जैसे अहम फैक्टर्स भी भूमिका निभाएंगे। मतलब की अधिकारियों की परफार्मेंस पर नजर है और यही आधार अगली पोस्टिंग के लिए कारगर होगा। जानकारी ये है कि करीब 8 जिलों के कप्तानों का काम मुख्यमंत्री मोहन यादव की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। वही 6 जिलों के पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ से शिकायतें मिलने की सूचना है। वहीं इसके अलावा 5 जिलों में तैनात आईपीएस अधिकारियों का प्रमोशन हो चुका है, जिसके चलते उन्हें नई जिम्मेदारी मिलेगी। जानकारी के मुताबिक शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, बुरहानपुर, निवाड़ी और नीमच के एसपी को हटाने पर काम हो चुका है। वही दमोह, सिवनी, आगर मालवा, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे जिलों के लिए प्रभावशाली चेहरों की जरुरत है। जिनके नाम फाइनल होने वाले हैं। प्रशासनिक गलियारों में हलचल तबादलों की आहट ने पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक बेचैनी बढ़ गई है। ये सूची किसी भी वक्त मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद जारी हो सकती है। लिहाजा हलचल तेज है।  

मध्यप्रदेश में ‘इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी’ लागू, 6 जिलों और 2510 गांवों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा फोकस रोजगार और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना है। इसके तहत नर्मदापुरम रोड नया आर्थिक क्षेत्र, एमपी नगर मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री, पचमढी-रातापानी में टूरिज्म इंडस्ट्री जैसे प्लान शामिल किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल सहित विदिशा, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम एवं राजगढ़ में ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने का काम सौंपा जहां नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में भोपाल शहर की नर्मदापुरम रोड पर नए आर्थिक क्षेत्र विकसित करने एवं एमपी नगर में मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री बनाने और नर्मदापुरम, रायसेन के पचमढ़ी, रातापानी जैसे पर्यटक स्थलों पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के बिंदु को शामिल किया गया है। भोपाल सहित अन्य जिलों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट के पैटर्न को समझने के बाद विकास की रूपरेखा तय होगी। इन क्षेत्रों पर फोकस रहवासी विकास: सिंगल विंडो के जरिए रेसीडेंशियल अनुमतियां मिल सकेंगी। अभी चार से पांच विभाग के चक्कर काटने होते हैं। औद्योगिक विकास: मंडीदीप, गोविंदपुरा, अचारपुरा, पीलूखेड़ी, कोकता, बंगरसिया के बाद अब नॉलेज हब, मोबाइल हब, स्टार्टअप हब बनाने की योजना है। धार्मिक पर्यटन: सलकनपुर, कंकाली माता मंदिर, नर्मदा नदी धर्म स्थल, सिहोर गणेश मंदिर सहित अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का सर्किट बनाया जाएगा। वन्य पर्यटन: रातापानी, पचमढ़ी, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, वन विहार, केरवा, कलियासोत के जंगलों तक सफारी का दायरा बढ़ाकर नए टूरिस्ट सुविधा वाले उपक्रम स्थापित होंगे। परिवहन सुविधा: मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को सिहोर, मंडीदीप, विदिशा से नर्मदापुरम से कनेक्ट करने, 200 ई बसों को चलाने, रेलवे की मेमू ट्रेन चलाने की प्लानिंग डेटा एनालिसिस का हिस्सा है। शामिल होंगे 2510 गांव भोपाल के मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12, 098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें 6 जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया गया है। भूमि के सबसे कम क्षेत्रफल की बात करें तो इसमें सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम जिले से लिया गया है, जबकि बड़ा हिस्सा यहां तक की भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र से लिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही, अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। 6 जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले की 8 तहसीले आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी और सीहोर रहेंगी।

54 बाघों की मौत के बाद सिस्टम में हड़कंप, रिजर्व के बाहर मिलेगा स्पेशल प्रोटेक्शन, जानें नई TOTR स्कीम

भोपाल  मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव प्रेमियों और सरकार की नींद उड़ा दी है। साल 2025 में रिकॉर्ड 54 बाघों की मौत के मामले में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। इसमें बाघों को बचाने के लिए एक नई और हाईटेक सुरक्षा नीति का खुलासा किया गया है, जो अब रिजर्व की सीमाओं से बाहर भी लागू होगी। रिजर्व के बाहर भी टाइगर की सुरक्षा NTCA ने कोर्ट को बताया कि अब केवल टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि उनसे सटे जंगलों, गलियारों और क्षेत्रीय डिवीजनों में भी वही सुरक्षा मिलेगी जो रिजर्व के अंदर उपलब्ध होती है। इसके लिए टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व योजना शुरू की गई है। सबसे अहम बात यह है कि साल 2025-26 के पहले चरण के लिए मध्य प्रदेश के 8 फॉरेस्ट डिविजन को चुना गया है। AI और आधुनिक हथियारों से होगी घेराबंदी बाघों के अंगों की तस्करी और शिकार रोकने के लिए अब पुराने तरीके नहीं चलेंगे। NTCA ने राज्यों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और वायरलेस संचार को मजबूत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इंटेलिजेंस गैदरिंग, स्ट्राइक फोर्स की तैनाती और अपराध का पता लगाने के लिए आधुनिक हथियारों के उपयोग पर जोर दिया गया है। इन्वायलेट रहेगा कोर एरिया हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38 V (4)(i) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि नेशनल पार्क और अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों को इन्वायलेट रखा जाना अनिवार्य है। यानी बाघों के संरक्षण के लिए इन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रोजेक्ट टाइगर के तहत हम अब उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां बाघ रिजर्व से बाहर निकलकर जा रहे हैं। इन कॉरिडोर क्षेत्रों में सुरक्षा को अभेद्य बनाना और AI का उपयोग करना हमारी प्राथमिकता है। नंदकिशोर काले, सहायक महानिरीक्षक (वन), NTCA गौरतलब है कि भारत फिलहाल दुनिया में बाघों का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां 3,682 बाघ मौजूद हैं। एमपी में बाघों की संख्या 6% सालाना की दर से बढ़ रही है, लेकिन हालिया 54 मौतों ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है।  

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की गति से यात्रा करेंगे वाहन

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगे वाहन   एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक सीधा संपर्क स्थापित होगा 02 मुख्य टोल प्लाजा और 19 रैम्प टोल प्लाजा के माध्यम से सुगम होगा आवागमन परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर और रामगंगा नदी पर 720 मीटर लंबे पुल का निर्माण एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए 09 जन-सुविधा परिसर भी किए गए हैं विकसित शाहजहांपुर के पास एक्सप्रेसवे पर 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी भी, एयरफोर्स कर चुकी है इमरजेंसी लैंडिंग ड्रिल 29 अप्रैल को पीएम मोदी करेंगे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, यूपी को मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी लखनऊ  उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को सीधे जोड़ते हुए आवागमन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली मानी जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे को 120 किमी/घंटा की स्पीड के अनुसार डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि मेरठ से प्रयागराज की लंबी दूरी अब पहले के मुकाबले काफी कम समय में तय की जा सकेगी। जहां पहले यह सफर 10-12 घंटे लेता था,  अब 6-7 घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे आम यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। तकनीकी रूप से आधुनिक और भविष्य उन्मुख उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के एसीईओ हरि प्रताप शाही के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे 6 लेन में तैयार किया गया है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इसकी कुल लंबाई लगभग 594 किमी है और राइट ऑफ-वे 120 मीटर चौड़ा रखा गया है, जिससे यातायात सुगम और सुरक्षित रहेगा। परियोजना को 4 समूहों में बांटकर विकसित किया गया है, जिससे निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सका। इसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और उच्च गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। टोल व यात्री सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन एक्सप्रेसवे पर 2 मुख्य टोल प्लाजा (मेरठ और प्रयागराज) के साथ 19 रैम्प टोल प्लाजा बनाए गए हैं। इससे वाहन चालकों को विभिन्न कट्स पर एंट्री और एग्जिट में आसानी होगी और जाम की स्थिति कम होगी। इसके अलावा यात्रियों के लिए 9 जन-सुविधा परिसरों का निर्माण किया गया है, जहां ईंधन, खानपान, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक बन सकेगी। इस परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर लंबा और रामगंगा नदी पर करीब 720 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। ये पुल न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बाढ़ और जल प्रवाह को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक डिजाइन पर आधारित हैं। रणनीतिक दृष्टि से अहम् एयरस्ट्रिप शाहजहांपुर के पास लगभग 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है, जो इस एक्सप्रेसवे की खास पहचान बन चुकी है। यहां इंडियन एयर फोर्स द्वारा इमरजेंसी लैंडिंग का सफल परीक्षण किया जा चुका है। यह सुविधा किसी भी आपात स्थिति जैसे प्राकृतिक आपदा या सैन्य जरूरत में बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे एक्सप्रेसवे की सामरिक महत्ता भी बढ़ जाती है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बल गंगा एक्सप्रेसवे के चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र और पूर्वी यूपी के कृषि प्रधान क्षेत्रों के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा। किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। उद्योगों को कच्चे माल और तैयार उत्पाद के परिवहन में समय और लागत की बचत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, खासकर धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का इंजन है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा, नए रोजगार सृजित होंगे और प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में और मजबूत होगा।

JDU में बदलाव: नीतीश कुमार ने श्रवण को विधायक दल का नेता बनाया, तीन दिन पहले बढ़ी थी सुरक्षा

पटना. बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत श्रवण कुमार को बिहार विधानसभा में जदयू विधायक दल का नेता चुना गया है। उनके नाम को औपचारिक रूप से विधानसभा भेजे जाने के बाद अधिसूचना भी जारी कर दी गई। यह निर्णय नीतीश कुमार द्वारा लिया गया, जिन्हें हाल ही में जदयू विधायक दल का नेता चुनने के लिए अधिकृत किया गया था। श्रवण कुमार पूर्व मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं और पूर्व सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव का लाभ श्रवण कुमार नालंदा विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1995 से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं। उनका यह अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत आधार माना जा रहा है। कयासों पर लगा विराम 20 अप्रैल को हुई जदयू विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को नेता चयन के लिए अधिकृत किया गया था। इसके बाद कई नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन नीतीश कुमार ने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी। बढ़ाई गई सुरक्षा, बढ़ी जिम्मेदारी गौरतलब है कि हाल ही में श्रवण कुमार की सुरक्षा बढ़ाकर उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। यह निर्णय उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व को दर्शाता है। संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश इससे पहले जदयू के वरिष्ठ नेता व‍िजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया जा चुका है। ऐसे में श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाकर पार्टी ने संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है।