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UAE का OPEC से अलगााव, पश्चिमी एशिया की जियोपॉलिटिक्स में आया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली फारस की खाड़ी की चमकती सतह पर सब कुछ हमेशा शांत दिखता है- ऊपर से. लेकिन उसी पानी के नीचे कई परतों में तनाव, शक और रणनीतिक करंट बहते रहते हैं. संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बाहर से यह दुनिया का सबसे चमकदार बिजनेस हब लगता है, लेकिन इसके भीतर एक बड़ा फैसला पक रहा था- OPEC (तेल निर्यातक देशों का संगठन) से बाहर निकलने का।  पहली नजर में यह फैसला एक छोटे से विवाद जैसा लगता है कि, UAE पांच मिलियन बैरल रोज़ तेल बेचना चाहता था, जबकि उसे करीब साढ़े तीन मिलियन बैरल का कोटा दिया गया था. लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है, खत्म नहीं. यह डेढ़ मिलियन बैरल का झगड़ा नहीं, बल्कि दशकों पुरानी रीजनल लीडरशिप को चुनौती देने का एलान है. जिसमें बताया गया है कि यूएई महज कोई छोटा-सा खाड़ी देश नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर सेंटर है।  UAE का फैसला, अमेरिकी चाहत भी! अबू धाबी में जब OPEC से बाहर होने का फैसला लिया जा रहा था, तब इसकी गूंज सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं थी. वॉशिंगटन भी इसे ध्यान से देख रहा था. अमेरिका लंबे समय से OPEC को एक “कार्टेल” मानता रहा है. एक ऐसा समूह जो तेल की कीमतों को अपने हिसाब से नियंत्रित करता है और कई बार रूस जैसे देशों के साथ मिलकर ग्लोबल ऑयल मार्केट को प्रभावित करता है।  ऐसे में UAE का OPEC से बाहर निकलना अमेरिका के लिए एक रणनीतिक मौका है. इससे OPEC की सामूहिक ताकत कमजोर होगी, अरब-रूस की तेल साझेदारी में दरार आएगी और तेल को “पॉलिटिकल वेपन” की तरह इस्तेमाल करने की क्षमता घटेगी. इसलिए भले ही यह फैसला UAE का हो, लेकिन इसकी गूंज अमेरिकी विदेश नीति की जीत के तौर पर भी सुनाई देती है।  विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई के इस बड़े कदम के पीछे अमेरिका के साथ हुआ एक खास समझौता भी है, जिसे 'डॉलर-दिरहम स्वैप एग्रीमेंट' कहा जा रहा है. आसान शब्दों में कहें तो इस समझौते के तहत अमेरिका ने यूएई को जरूरत पड़ने पर सीधे और तुरंत अमेरिकी डॉलर मुहैया कराने की गारंटी दी है. जब ईरान के साथ युद्ध जैसे हालात बने, तो यूएई की मुद्रा 'दिरहम' पर खतरा मंडराने लगा था. ऐसे में अमेरिका के साथ हुए इस स्वैप डील ने यूएई की तिजोरी को एक सुरक्षा कवच दे दिया. अभी तक यूएई ओपेक के कड़े नियमों से बंधा था, जिसकी वजह से वह अपनी मर्जी से तेल उत्पादन नहीं बढ़ा पा रहा था. अमेरिका से मिली 'डॉलर की गारंटी' ने यूएई को यह भरोसा दिलाया कि अगर वह ओपेक से अलग होता है और तेल बाजार में कोई उतार-चढ़ाव आता है, तो भी उसकी अर्थव्यवस्था नहीं डगमगाएगी. यदि यूएई की करेंसी डॉलर के समकक्ष रहती है, तो इससे वहां बिजनेस करने वालों को भी भरोसा रहेगा. इसी भरोसे के दम पर यूएई ने ओपेक की बंदिशों को अलविदा कह दिया और अपनी स्वतंत्र आर्थिक राह चुन ली।  ’UAE एप’ का हैंग होना UAE को अगर आप सिर्फ एक देश समझते हैं, तो आप उसकी असली ताकत को मिस कर रहे हैं. यह एक “एप” है- एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां दुनिया के कारोबार बिना ज्यादा सवालों के चलते हैं।  ईरान पर प्रतिबंध लगे, तो उसका व्यापार यहीं से घूमकर दुनिया तक पहुंचा. भारत और पाकिस्तान के बीच कई बिजनेस डील्स UAE के रास्ते पूरी होती रहीं. यहां तक कि प्रतिबंधित रूसी तेल भी “शैडो टैंकर” के जरिए यहीं से बाजार तक पहुंचा।  दुबई और अबू धाबी ने खुद को न्यूट्रल, स्थिर और सुरक्षित हब के रूप में स्थापित किया था. यही वजह थी कि यूरोप और अमेरिका की बड़ी कंपनियां यहां से ऑपरेट करती थीं. रियल एस्टेट बूम पर था, टूरिज्म चरम पर था और UAE एक “परफेक्ट बिजनेस मशीन” बन चुका था।  लेकिन फिर ईरान के साथ संघर्ष ने इस मशीन में झटका दे दिया. हमलों ने सिर्फ तेल ठिकानों को नहीं, बल्कि उस भरोसे को भी चोट पहुंचाई जिस पर UAE की पूरी ब्रांडिंग टिकी थी. अचानक कॉर्पोरेट्स ने अपने विकल्प तलाशने शुरू कर दिए-सिंगापुर, हांगकांग और कुछ मामलों में यूरोप वापसी।  जो UAE खुद को न्यूट्रल बताता था, वह अब अमेरिकी-इजरायली खेमे में दिखने लगा. और यहीं से उसकी सबसे बड़ी चुनौती शुरू हुई-“क्या वह अब भी उतना ही सुरक्षित और स्थिर है?” सऊदी विजन 2030 का पिछड़ना इस कहानी में एक और किरदार है- सऊदी अरब. कभी UAE का सबसे करीबी सहयोगी, अब उसका सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी।  सऊदी अरब का पूरा दांव उसके महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ पर लगा है. इस प्रोजेक्ट को फंड करने के लिए उसे तेल की ऊंची कीमतें चाहिए. इसलिए वह उत्पादन कम रखकर कीमतें ऊपर बनाए रखने की रणनीति पर चलता है।  दूसरी ओर UAE का मॉडल अलग है. उसने अपनी इकोनॉमी को डायवर्सिफाई किया हुआ है. प्रोडक्शन कॉस्ट यहां बेहद कम है, और उसने 2030 तक 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन क्षमता हासिल करने के लिए 122 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश किया है. लेकिन OPEC के कोटे उसे 2.6 से 3.1 मिलियन बैरल के बीच सीमित रखते रहे।  अबू धाबी के लिए यह “अंडरग्राउंड पड़ा तेल” एक जोखिम है-क्योंकि 2040 तक फॉसिल फ्यूल की डिमांड घटने की आशंका है. यानी अगर अभी नहीं बेचा, तो बाद में शायद बेचना ही संभव न हो. यही सोच सऊदी और UAE के बीच की दूरी को टकराव में बदल देती है।  यमन, सोमालीलैंड में बिल्डअप तेल का विवाद तो सिर्फ एक हिस्सा है. असली दरार कई मोर्चों पर एक साथ बनी. यमन में UAE ने सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल का समर्थन किया-एक अलगाववादी गुट, जो सऊदी के सहयोगियों के खिलाफ खड़ा था. हालात इतने बिगड़े कि सऊदी अरब ने UAE समर्थित ठिकानों और सैन्य संसाधनों पर एयरस्ट्राइक तक कर दी, खासकर मुकल्ला पोर्ट के आसपास।  उधर सोमालीलैंड को लेकर भी तनाव बढ़ा. जब इजरायल ने उसे मान्यता दी, तो सऊदी को यह कदम अस्थिरता फैलाने वाला लगा-और उसे UAE की भूमिका पर भी शक हुआ।  इसके बाद दोनों देशों के बीच दो महीने तक सोशल मीडिया, कूटनीतिक चैनलों और वॉशिंगटन में लॉबिंग के जरिए आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।  ईरान वॉर में सऊदी ‘मांडवाली’ फिर … Read more

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सरकार को कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते

नईदिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने  हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कुछ बेहद अहम टिप्पणियां की हैं। SC ने कहा है कि कोर्ट सरकार को इस मामले में कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। उच्चतम न्यायालय ने इस दौरान देश भर में नफरती भाषण पर रोक लगाने के लिए कोई भी नई दिशा-निर्देश जारी करने से मना कर दिया। SC ने कहा कि अदालतें संसद या राज्य विधानसभाओं को नए कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकतीं। वे ज्यादा से ज्यादा सुधार की जरूरत की ओर ध्यान आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन कानून बनाने का फैसला सरकार का ही होगा। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई चल रही थी। इनमें केंद्र सरकार को हेट स्पीच के लिए लागू मौजूदा कानून की जांच करने और इन्हें और ज्यादा असरदार बनाने का निर्देश देने की मांग वाली याचिकाएं भी थीं। याचिका खारिज करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा, "हालांकि अदालत कार्रवाई की जरूरत की ओर ध्यान दिला सकती है, लेकिन वह विधायिका को कानून बनाने का काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।” पीठ ने आगे इस बात पर जोर दिया कि कानून बनाना और उसे लागू करना पूरी तरह से लेजिस्लेचर के अधिकार क्षेत्र में आता है। बेंच ने कहा, “ज्यादा से ज्यादा, कोर्ट विधायिका का ध्यान बढ़ती हुई चिंता की ओर दिला सकती है और यह सिफारिश कर सकती है कि उचित उपायों पर विचार किया जाए। लेकिन सरकार इन टिप्पणियों पर कार्रवाई करती है या नहीं, और किस तरीके से करती है, यह पूरी तरह से उनके विवेक पर निर्भर करता है।” हेट स्पीच पर पहले से कानून कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि हेट स्पीच की समस्या से निपटने के लिए कोई कानून नहीं है या मौजूदा कानूनी ढांचे में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कोई सिस्टम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असली चिंता कानून का अभाव नहीं, बल्कि उसे लागू करने को लेकर है। पीठ ने कहा कि कई स्तरों पर कानन बनाए गए हैं। अगर पुलिस एफआईआर नहीं दर्ज करती है, तो पीड़ित व्यक्ति वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकता है और उसके बाद मजिस्ट्रेट के पास गुहार लगा सकता है। पीठ ने आगे कहा कि समस्या कानूनी प्रावधानों की कमी से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके लागू न होने से पैदा होती है।

सुपर अल नीनो’ के कारण 140 साल का गर्मी का रिकॉर्ड टूटेगा! क्या होगा इस बार अलग?

नई दिल्ली गर्मियों का मौसम आते ही हम सभी चिलचिलाती धूप और पसीने से परेशान होने लगते हैं। लेकिन, इस बार की गर्मी कोई आम गर्मी नहीं होने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार 'सुपर अल नीनो' के कारण गर्मी अपने पिछले 140 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है और दुनिया के कई हिस्सों में चरम मौसम की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। आखिर यह 'सुपर अल नीनो' कैसे असर करता है? यह इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है? और भारत सहित पूरी दुनिया पर इसका क्या असर पड़ने वाला है? आइए समझते हैं। अल नीनो (El Niño) क्या है?     स्पेनिश भाषा में 'अल नीनो' का मतलब 'छोटा लड़का' होता है, लेकिन मौसम विज्ञान में इसका असर बहुत विशाल है।     यह प्रशांत महासागर से जुड़ी एक मौसमी घटना है।     सामान्य परिस्थितियों में, समुद्र की सतह का गर्म पानी एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ बहता है।     लेकिन, अल नीनो के दौरान यह चक्र उलटा या कमजोर पड़ जाता है। भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है और यह गर्म पानी दक्षिण अमेरिका की तरफ बहने लगता है।     समुद्र के इस बढ़ते तापमान का असर पूरी दुनिया के मौसम चक्र (हवाओं, बारिश और तापमान) पर पड़ता है। फिर यह 'सुपर अल नीनो' क्या है? जब प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से थोड़ा बढ़ता है, तो उसे 'अल नीनो' कहते हैं। लेकिन जब यह तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह घटना बेहद उग्र हो जाती है। इसे ही वैज्ञानिकों ने 'सुपर अल नीनो' का नाम दिया है। मुख्य कारण: जब ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस गैसों के कारण लगातार बढ़ती पृथ्वी की गर्मी) और अल नीनो दोनों आपस में मिल जाते हैं, तो यह एक 'डबल अटैक' बन जाता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक 140 साल से भी ज्यादा समय के बाद ऐसी भयंकर गर्मी की भविष्यवाणी कर रहे हैं। यह स्थिति बेहद दुर्लभ होती है- 1950 के बाद केवल कुछ बार ही ऐसा हुआ है। जैसे 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में भी कुछ असर देखने को मिला था। इस बार वैज्ञानिकों का अनुमान है कि नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान वृद्धि 2°C से ज्यादा पहुंच सकती है। न्यूयॉर्क के एट अल्बानी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पॉल राउंडी का कहना है कि 'पिछले 140 साल में सबसे मजबूत एल नीनो बनने की वास्तविक संभावना है।' 140 साल पुराना खतरा? तापमान जितना ज्यादा बढ़ता है, अल नीनो के असर के और भी ज्यादा तेज होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। अल्बानी में स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क में वायुमंडलीय और पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. पॉल राउंडी ने लिखा कि '140 सालों में सबसे मजबूत अल नीनो घटना होने की वास्तविक संभावना है।' मियामी विश्वविद्यालय के एसोसिएट वैज्ञानिक डॉ. एंडी हेजल्टन ने लिखा कि सभी मॉडल और अवलोकन एक ही दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं: इस साल एक बहुत मजबूत अल नीनो आएगा, जिसका वैश्विक जलवायु पर काफी असर पड़ेगा। इस बार ऐसा क्या होने वाला है? सुपर अल नीनो का असर सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं है; यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है। इसके मुख्य प्रभाव इस प्रकार होंगे- रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और भीषण लू ग्लोबल वार्मिंग पहले से ही धरती को गर्म कर रही है। 'सुपर अल नीनो' इस आग में घी का काम करेगा। भारत के कई हिस्सों, खासकर उत्तर और मध्य भारत में, दिन का तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर जा सकता है। भीषण लू (हीटवेव) का दौर लंबा और ज्यादा जानलेवा हो सकता है। मॉनसून पर ब्रेक- सूखे का खतरा भारत की पूरी कृषि व्यवस्था मॉनसून पर निर्भर है। अल नीनो का भारतीय मानसून से सीधा और उल्टा रिश्ता है।     जब भी अल नीनो मजबूत होता है, भारत में मॉनसून कमजोर पड़ जाता है।     इस साल बारिश कम होने और कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की गहरी आशंका है। खेती और महंगाई पर सीधा असर बारिश कम होने और भयंकर गर्मी पड़ने से:     धान और गन्ने जैसी फसलों की पैदावार गिर सकती है।     खाद्य पदार्थों की कमी के कारण महंगाई आसमान छू सकती है।     पीने के पानी का संकट गहरा सकता है क्योंकि नदियां और डैम सूखने लगेंगे। दुनिया भर में चरम मौसम अल नीनो सिर्फ भारत को नहीं रुलाएगा। इसके कारण:     दक्षिण अमेरिका में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।     ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में भयंकर सूखा और जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ने की आशंका है। क्यों इस बार ‘सुपर’ एल नीनो की बात हो रही है? अप्रैल 2026 तक स्थिति ENSO-neutral यानी न तो एल नीनो, न ला नीना वाली है, लेकिन प्रशांत महासागर के नीचे के पानी में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। यूरोपीय मॉडल NOAA, ECMWF और अन्य संस्थानों के पूर्वानुमान बताते हैं कि मई-जुलाई 2026 से एल नीनो उभर सकता है और सर्दियों (2026-27) तक मजबूत रहेगा। कुछ मॉडल बहुत मजबूत या सुपर स्तर का संकेत दे रहे हैं। 2024 पहले ही रिकॉर्ड गर्म साल था। मजबूत एल नीनो के साथ 2026 या 2027 नए रिकॉर्ड बना सकते हैं। कुछ अनुमान कहते हैं कि तापमान अस्थायी रूप से 1.5°C या उससे भी ज्यादा (कुछ मामलों में 2°C तक) पूर्व-औद्योगिक स्तर से ऊपर जा सकता है।

1 मई से देश में लागू होंगे 5 बड़े बदलाव, LPG से लेकर Credit Card तक के नियम बदलेंगे!

नई दिल्ली  शुक्रवार 1 मई से नए महीने की शुरुआत हो रही है. नई तारीख के साथ ही देश में तमाम नए फायनेंशियल बदलाव (New Rule Changes From 1st May 2026) भी लागू होते हैं. ये बदलाव आमजन के जीवन और जेब दोनों पर असर डालते हैं. जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक जो 5 नए नियम लागू हो रहे हैं, उनमें एलपीजी सिलेंडर के दाम, क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम भी शामिल हैं. आइये नए नियमों पर डालते हैं एक नजर।  पहला नियम: एलपीजी सिलेंडर के नए रेट होंगे लागू सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को गैस सिलेंडर के दाम अपडेट करती हैं. इस बार भी 1 मई को ऑयल कंपनियां गैस सिलेंडर के रेट्स में संशोधन करेंगी. अगर दाम बदलते हैं तो उसका साफ असर घर की रसोई से लेकर रेस्टोरेंट-होटलों तक दिखाई देगा. बता दें, इस महीने घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में वृद्धि की गई थी. जानकारी मिली है कि सरकार अब OTP बेस्ड एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी का फैसला ले सकती है।  दूसरा नियम: क्रेडिट कार्ड से संबंधित देश का सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक ने क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव करने जा रहा है. नए नियम शुक्रवार 1 मई से लागू हैं. बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार बैंक ने लेट पेमेंट चार्ज से लेकर सालाना फीस में बदलाव किया है. शुक्रवार 1 मई से बैंक 100 रुपये से ज्यादा और 500 रुपये तके की बकाए राशि को पर लेट पेमेंट चार्ज को 100 रुपये करने जा रहा है. वहीं, 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की बकाए राशि पर यह चार्ज करीब 500 रुपये हो जाएगा. इसके साथ-साथ कुछ कार्डों पर 499 रुपये की सालाना फीस, जो अभी तक 50 हजार रुपये है, उसे 1 लाख रुपये के सालाना खर्च पर वापस किया जाएगा।  तीसरा नियम: CNG-PNG के दामों में भी बदलाव एलपीजी सिलेंडर के दाम सीएनजी-पीएनजी के दामों में संशोधन किया जाता है. तेल कंपनियां महीने की पहली तारीख को नए रेट्स जारी करती हैं. इस महीने की शुरुआत में इनके दाम दोगुने कर दिए गए थे, लेकिन बाद में इन्हें वापस लेना पड़ा. अगर दाम बढ़ते हैं तो वाहन स्वामियों की जेब को झटका लग सकता है।  चौथा नियम: बैंकों की छुट्टियां भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक आने वाले नए महीने मई में बंपर हॉलिडे हैं. दूसरे और चौथे शनिवार के साथ-साथ हर रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है. इनके अलावा 1 मई शुक्रवार को लेबर-डे/ महाराष्ट्र दिवस, बकरीद की छुट्टियां रहेंगी. हालांकि अलग-अलग राज्यों में ये छुट्टियां अलग-अलग हो सकती हैं. अगर बैंक किसी काम से जाना है को पहले वेबसाइट पर एक नजर जरूर डाल लें, वैसे, सभी बैंकों की ऑनलाइन सेवाएं 24 घंटों चालू रहती हैं।  पांचवा नियम: ऑनलाइन गेम से संबंधित बदलाव मई महीने की पहली तारीख से ऑनलाइन गेम से जुड़े नियम भी बदल जाएंगे. सरकार Online Gaming Rules 2026 को लागू करने जा रही है. इन नए नियमों के तहत ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया का गठन किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक ऑनलाइन गेम्स को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा, इनमें Online Money Games, Online Social Games और E-Sports शामिल हैं. इनके लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा. जो गेम खेलेगा उसके लेनदेन पर सख्ती से नजर रखी जाएगी।  ATM से कैश निकालना अब महंगा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ATM इंटरचेंज फीस बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. अब फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट खत्म होने के बाद हर बार कैश निकालने पर 23 रुपये देने होंगे, जो पहले 21 रुपये था. फ्री लिमिट की बात करें तो-      अपने बैंक के ATM पर हर महीने 5 फ्री ट्रांजैक्शन मिलते हैं.     दूसरे बैंक के ATM पर मेट्रो शहरों में 3 और नॉन-मेट्रो में 5 फ्री ट्रांजैक्शन मिलते हैं।  इसके बाद हर ट्रांजैक्शन पर चार्ज देना होगा. SBI Credit Card के नए नियम SBI Card से जुड़े ग्राहकों के लिए भी 1 मई से नए नियम लागू होंगे. लेट पेमेंट चार्ज में बदलाव किया गया है।      100 से 500 रुपये तक के बकाया पर 100 रुपये चार्ज लगेगा.     500 से 1000 रुपये तक के बकाया पर 500 रुपये शुल्क देना होगा. इसके अलावा BPCL SBI Credit Card की एनुअल फीस से जुड़ा नियम भी बदला है. अब 1 लाख रुपये सालाना खर्च करने पर फीस रिवर्स होगी, जो पहले 50,000 रुपये पर मिलती थी।  ऑनलाइन गेमिंग के नियम हुए सख्त सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए नए नियम लागू किए हैं. इसके तहत एक नई संस्था बनाई जाएगी, जो इस सेक्टर की निगरानी करेगी. अब गेम्स को तीन हिस्सों में बांटा गया है- मनी गेम्स, सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स. खासकर पैसे से जुड़े गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा और यूजर्स के लेनदेन पर नजर रखी जाएगी। 

EVM में गड़बड़ी के आरोपों से सियासत गरम, चुनाव आयोग ने शुरू की पड़ताल

कोलकाता बंगाल में दूसरे चरण के मतदान दौरान डायमंड हार्बर समेत कई केंद्रों पर ईवीएम की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग अब एक्शन मोड में आ गया है। चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए आयोग ने 'हाई-लेवल' जांच शुरू कर दी है। विशेष रूप से डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र की स्थिति पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं, जहां स्पेशल रोल आब्जर्वर सुब्रत गुप्ता स्वयं स्ट्रांग रूम का मुआयना किया। स्ट्रांग रूम में 'स्पेशल स्क्रूटनी' डायमंड हार्बर विमेंस कालेज स्थित स्ट्रांग रूम, जहां ईवीएम मशीनों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है, वहां सुब्रत गुप्ता की मौजूदगी ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार, वे मशीनों की सीलिंग, सुरक्षा मानकों और संरक्षण पद्धति की गहन जांच कर रहे हैं। आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि इस जमीनी जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि क्षेत्र में पुनर्मतदान की आवश्यकता है या नहीं। 77 शिकायतों ने बढ़ाई आयोग की सख्ती केवल डायमंड हार्बर ही नहीं, बल्कि दूसरे चरण के मतदान के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से ईवीएम से छेड़छाड़ और गड़बड़ी की कुल 77 गंभीर शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग ने वेबकास्ट फुटेज और संबंधित बूथ अधिकारियों की रिपोर्ट खंगालना शुरू कर दिया है। बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इस मामले पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि आयोग "जीरो टालरेंस" की नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी ईवीएम के साथ छेड़छाड़ या तकनीकी धांधली की पुष्टि होगी, वहां बिना किसी देरी के पुनर्मतदान कराया जाएगा। राजनीतिक आरोप और प्रशासनिक सक्रियता मतदान के बाद से ही भाजपा ने ईवीएम के बटन पर टेप लगाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का दावा है कि दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर क्षेत्र में कई बूथों पर पारदर्शिता के साथ समझौता किया गया। इन आरोपों के बीच, एक विशेष पर्यवेक्षक को भेजने का निर्णय चुनाव आयोग की सक्रियता और निष्पक्षता के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि सुब्रत गुप्ता की रिपोर्ट ही अब इस चुनावी भविष्य का फैसला करेगी। जब तक स्क्रूटनी की यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और रिपोर्ट जमा नहीं होती, तब तक आयोग किसी भी अंतिम निर्णय पर मुहर नहीं लगाएगा। फिलहाल, पूरी सतर्कता के साथ साक्ष्यों की जांच जारी है।  

अमेरिका ने भारत को दी 657 प्राचीन मूर्तियां, इनकी कुल कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक

 नई दिल्ली अमेरिका ने करीब 120 करोड़ रुपये से भी ज्यादा कीमत की 657 दुर्लभ और प्राचीन कलाकृतियां भारत को लौटाई है. ये सभी आर्टफेक्ट इंटरनेशल तस्कर गिरोह कई सालों तक स्मगल कर अमेरिका ले गए थे. अमेरिका के मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने तस्करी की जांच के बाद इन कलाकृतियों को भारत को वापस करने की घोषणा की थी।   लगभग 14 मिलियन डॉलर मूल्य की 657 चोरी की कलाकृतियां भारत को लौटा दी गई हैं. इन मूर्तियों की वापसी इंटरनेशनल स्मगलिंग नेटवर्क से जुड़ी एक बड़ी सांस्कृतिक चोरी का खुलासा करती है. मैनहट्टन के जिला अटॉर्नी एल्विन एल ब्रैग जूनियर ने न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की काउंसल राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में आयोजित एक समारोह में इस वापसी की घोषणा की।  अमेरिकी अधिकारियों ने  तस्कर सुभाष कपूर और नैन्सी वीनर से जुड़े आपराधिक गिरोहों की चल रही जांच के दौरान इन कलाकृतियों को बरामद किया था. अधिकारियों ने भारत को निशाना बनाकर की जा रही सांस्कृतिक चोरी की भयावहता का खुलासा करते हुए बताया कि इस एक ही अभियान में 600 से अधिक प्राचीन और दुर्लभ आर्टफैक्ट वापस की गईं।  एक बड़े इंटरनेशनल स्मगलिंग नेटवर्क का खुलासा जिला अटॉर्नी ब्रैग ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक धरोहरों को निशाना बनाने वाले तस्करी नेटवर्क बहुत बड़ा है. आज 600 से अधिक कलाकृतियों की वापसी से यह साफ हो गया है. वहीं काउंसल जनरल  बिनय प्रधान ने कहा कि मैं मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निरंतर सहयोग की प्रशंसा करता हूं।  लौटाई गई कलाकृतियों में अवलोकितेश्वर की एक कांस्य प्रतिमा भी शामिल है, जिसकी कीमत 20 लाख डॉलर है.यह प्रतिमा मूल रूप से रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में रखी थी. इसे 1982 में चोरी करके अमेरिका ले जाया गया था. इसे 2025 में न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह से जब्त किया गया था।  भारत में इन मूर्तियों की हुई थी चोरी एक अन्य महत्वपूर्ण बरामदगी में 75 लाख डॉलर मूल्य की लाल बलुआ पत्थर की बुद्ध प्रतिमा शामिल है. तस्कर सुभाष कपूर के नेटवर्क के माध्यम से क्षतिग्रस्त प्रतिमा को न्यूयॉर्क ले गए थे, जहां अधिकारियों ने बाद में इसे एक स्टोर से जब्त कर लिया।  अधिकारियों ने मध्य प्रदेश के एक मंदिर से 2000 में लूटी गई नृत्य करते गणेश की बलुआ पत्थर की प्रतिमा भी लौटा दी. तस्करों ने फर्जी प्रमाण पत्रों के माध्यम से इस प्रतिमा को बेच दिया था और 2012 में क्रिस्टीज न्यूयॉर्क में इसकी नीलामी की गई थी. बाद में इस साल की शुरुआत में एक निजी संग्राहक ने इस कलाकृति को वापस कर दिया था।  एक दशक से अधिक समय से, पुरातत्व तस्करी इकाई (एटीयू), गृह सुरक्षा जांच विभाग के साथ मिलकर, कपूर और उसके सहयोगियों पर दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया में कलाकृतियों की कथित लूट और तस्करी के आरोप में कार्रवाई कर रही है. अधिकारियों ने 2012 में कपूर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया और 2019 में उस पर और सात सहयोगियों पर आरोप लगाया गया था।  महावाणिज्यदूत ने कहा कि चोरी की गई कलाकृतियों को भारत वापस लाने के लिए अभी और काम करना बाकी है. अमेरिका की ओर से भारत को वापस की गई इन कलाकृतियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया है। 

CJI सूर्यकांत का गहरा दर्द, 15 साल की बच्ची के संघर्ष पर भावुक होकर कहा- ‘नागरिकों का सम्मान करिए’

15 साल की बच्ची ने झेला असहनीय दर्द, CJI सूर्यकांत हुए भावुक, बोले- 'मैडम, नागरिकों का सम्मान करिए' CJI सूर्यकांत का गहरा दर्द, 15 साल की बच्ची के संघर्ष पर भावुक होकर कहा- 'नागरिकों का सम्मान करिए' 15 साल की बच्ची ने कितना दर्द झेला', CJI सूर्यकांत ने किया भावुक बयान, 'मैडम, नागरिकों का सम्मान जरूरी है' नईदिल्ली   नाबालिग के गर्भपात मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है. नाबालिग के गर्भपात मामले में में एम्स दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और अपील पर विचार करने की गुहार लगाई थी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को कहा कि 15 साल की रेप पीड़िता की प्रेग्नेंसी खत्म करने का फैसला पीड़िता और उसके माता-पिता का होना चाहिए, जिसमें मेडिकल एक्सपर्ट उन्हें सही फैसला लेने में मदद करें. सीजेआई सूर्यकांत ने बच्ची की पीड़ा को समझते हुए साफ-साफ कहा कि अनचाही प्रेग्नेंसी नहीं थोपी जा सकती है. उन्होंने सरकारी वकील से कहा कि जरा सोचिए इस बच्ची ने कितनी पीड़ा झेली होगी।  मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एम्स (AIIMS) जैसी संस्थाएं परिवार को गाइड कर सकती हैं, ताकि वे सोच-समझकर फैसला ले सकें. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी पीड़िता पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती और इसमें होने वाले इमोशनल और फिजिकल ट्रॉमा को भी हाईलाइट किया. दरअसल, सरकार ने एक 15 साल की बच्ची की 31 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने के पहले के आदेश के खिलाफ एक क्यूरेटिव याचिका दायर की थी. उस बच्ची के साथ रेप हुआ था. महिलाओं के अपने शरीर पर अधिकार की लड़ाई में एक अहम मोड़ साबित हो सकने वाले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांग की कि वह व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करे।  ‘अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती’ सीजेआई यानी चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि किसी नाबालिग को रेप से हुई प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके पहले से सहे जा रहे दुख को और बढ़ा देगा और उसके मन पर ज़िंदगी भर के लिए गहरे ज़ख्म छोड़ सकता है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा, ‘यह 15 साल की बच्ची की अनचाही प्रेग्नेंसी है… किसी भी इंसान पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती. जरा सोचिए, वह अभी बच्ची है. उसे अभी पढ़ाई करनी चाहिए. लेकिन हम उसे मां बनाना चाहते हैं. जरा सोचिए, इस पूरी घटना में उस बच्ची ने कितना दर्द झेला होगा और कितनी बेइज्जती सही होगी।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रेग्नेंसी खत्म करने से मां को कोई परमानेंट डिसेबिलिटी नहीं होती है, तो इस पर विचार किया जा सकता है. सीजेआई की बेंच ने फिर दोहराया कि आखिरी फैसला पीड़िता और उसके माता-पिता का ही होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS को निर्देश दिया कि वह परिवार की काउंसलिंग करे, ताकि वे सोच-समझकर कोई फैसला ले सकें।  कोर्ट ने कानूनी सुधार की जरूरत बताई सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या मौजूदा कानूनों में बदलाव किया जाना चाहिए ताकि रेप पीड़िता के मामलों में प्रेग्नेंसी खत्म करने की मौजूदा 20 हफ्ते की समय सीमा को बढ़ाया जा सके।  ‘कानून को समय के साथ बदलना चाहिए’ अधिक लचीले कानूनी ढांचे की जरूरत पर जोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कोई सख्त समय सीमा नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा, ‘जब रेप की वजह से प्रेग्नेंसी होती है, तो कोई समय सीमा नहीं होनी चाहिए. कानून को लचीला होना चाहिए और बदलते समय के साथ तालमेल बिठाना चाहिए।  AIIMS ने मेडिकल चिंताएं जताईं AIIMS की तरफ से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस स्टेज पर प्रेग्नेंसी खत्म करना शायद मेडिकल तौर पर मुमकिन न हो. उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंसी 30 हफ़्ते तक पहुंच चुकी है और भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि नाबालिग मां को गंभीर शारीरिक विकृतियों और लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है. उन्होंने गोद लेने (Adoption) के विकल्प का भी सुझाव दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि अंतिम फैसला पीड़ित और उसके माता-पिता का ही होगा, जिसमें मेडिकल विशेषज्ञ उनकी मदद करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल के अपने एक पिछले आदेश का भी जिक्र किया, जब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने 30 हफ़्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने की इजाज़त दी थी।  चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में इस पर क्या हुआ, किसने क्या कहा?     सीजेआई यानी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आज यानी गुरुवार सुबह एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को फटकार लगाते हुए कहा, ‘रेप के बाद उस बच्ची (पीड़िता) ने जो तकलीफ झेली है, उसकी भरपाई कोई भी चीज नहीं कर सकती।      उन्होंने सरकार की वकील से कहा, ‘नागरिकों का सम्मान करें, मैडम. आपके पास (कोर्ट के प्रेग्नेंसी खत्म करने के आदेश को) चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है… केवल पीड़िता या उसका परिवार ही इसे चुनौती दे सकता है।      जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, ‘हम व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करते हैं, और आपको भी करना चाहिए…’     सुप्रीम कोर्ट ने यह फटकार तब लगाई जब सरकारी वकील भाटी ने दलील दी कि इस स्टेज पर प्रेग्नेंसी खत्म करना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा कि बच्ची के पास अब केवल एक ही विकल्प बचा है. बच्चे को जन्म देना और उसे गोद देने के लिए सौंप देना।      इससे पहले भाटी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था, बहुत दुख के साथ हमें यह क्यूरेटिव याचिका पेश करनी पड़ रही है. यह AIIMS की रिपोर्ट पर आधारित है. प्रेग्नेंसी खत्म करना मुमकिन नहीं है. पैदा होने वाला बच्चा गंभीर शारीरिक विकृतियों के साथ जीवित होगा… और नाबालिग माँ को ज़िंदगी भर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।   

नागपुर में RSS मुख्यालय और स्मृति मंदिर को ‘रेडिएशन’ अटैक की धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई

नागपुर   महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय और डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर में 'रेडिएशन' की धमकी से हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर को भेजी गई एक गुमनाम चिट्ठी में दावा था कि आरएसएस मुख्यालय और स्मृति मंदिर में रेडियोएक्टिव पदार्थ फैला दिया गया है। यह चिट्ठी कथित तौर पर 'डीएसएस' नाम के एक संगठन ने भेजी है। इस चिट्ठी के मिलने के बाद एक बड़े पैमाने पर जांच शुरू हो गई है, जिसमें एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) और एनडीआरएफ भी शामिल हैं। अंग्रेजी में लिखी यह गुमनाम चिट्ठी 27 अप्रैल को डाक के जरिए पुलिस कमिश्नर रविंद्रकुमार सिंघल के दफ्तर पहुंची। इसमें आरएसएस के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था और एक चेतावनी दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में कहा गया था कि सीजियम-137 नाम का एक बेहद खतरनाक रेडियोएक्टिव पाउडर कई अहम जगहों पर कथित तौर पर रख दिया गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीजियम-137 (137सीएस) धातु सीजियम का एक रेडियोएक्टिव आइसोटोप है। यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता। यह न्यूक्लियर रिएक्टरों और हथियारों में यूरेनियम के न्यूक्लियर विखंडन से बनने वाला एक उप-उत्पाद है। इसकी हाफ-लाइफ (अर्ध-आयु) 30.05 साल होती है, जिसका मतलब है कि इसकी रेडियोएक्टिविटी को आधा होने में तीन दशक लग जाते हैं। इससे बीटा कण और शक्तिशाली गामा किरणें निकलती हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में दावा किया गया है कि यह रेडियोएक्टिव पदार्थ आरएसएस मुख्यालय, रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर, गणेशपेठ स्थित भाजपा दफ्तर, ऑरेंज और एक्वा दोनों लाइनों की मेट्रो ट्रेनों की सीटों पर, और बसों में रखा गया है। दावा किया गया कि उन्हें यह रेडियोएक्टिव पदार्थ एक कैंसर अस्पताल से मिला था। चिट्ठी में आगे अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा गया है, "नागपुर शहर अब पूरी तरह से रेडिएशन के खतरे में है। जब तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन के विशेषज्ञ यहां आकर जांच करेंगे, तब आपको इस बात की सच्चाई का पता चलेगा।" चिट्ठी में हाल ही में हुई एक घटना का भी जिक्र किया गया, जिसमें दोसर भवन मेट्रो स्टेशन के पीछे एक खाली प्लॉट में डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ें मिली थीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 'डीएसएस' ने उन विस्फोटकों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था, "वह तो बस एक चेतावनी थी। असली खेल तो अब शुरू हुआ है।" पत्र मिलने के बाद, एटीएस ने एनडीआरएफ और परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों के साथ मिलकर आरएसएस मुख्यालय, मेट्रो स्टेशनों और बताई गई दूसरी जगहों की पूरी तरह से तलाशी ली। विशेषज्ञों की शुरुआती तलाशी में अभी तक कोई भी रेडियोएक्टिव पदार्थ नहीं मिला है। हालांकि, एटीएस की शिकायत के आधार पर सदर पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस मुख्यालय 150 सीआईएसएफ जवानों और नागपुर पुलिस की 24 घंटे की कई-स्तरीय सुरक्षा घेरे में है।

गर्मी पर राहत का संकेत: अगले 48 घंटों में पारा गिरेगा, दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आंधी-बारिश

नई दिल्ली  अगले 48 घंटे में उत्तर भारत में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि लू और भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने गुरुवार को लखनऊ समेत प्रदेश के 45 जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात और तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है। इन राज्यों में होगी बारिश आईएमडी के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और बिहार समेत कई राज्यों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने के साथ हल्की बारिश, आकाशीय बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मेघ गर्जन, बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। बंगाल-झारखंड में तूफानी हवाएं और बारिश का दौर रहेगा आईएमडी के मुताबिक 30 अप्रैल तक दक्षिण भारत में कमजोर चक्रवाती परिसंचरण के असर से पांच राज्यों में आंधी-तूफान के साथ तेज बारिश हो सकती है। रायलसीमा, महाराष्ट्र के कई हिस्सों और पश्चिमी घाट क्षेत्र में भारी बादल बरस सकते हैं। वहीं पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और झारखंड में गरज-चमक के साथ तूफानी हवाएं और बारिश का दौर रहेगा। हालांकि कुछ इलाकों में हीटवेव अभी भी जारी रह सकती है। उत्तर प्रदेश में आज यानी 30 अप्रैल को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर सहति पंजाब और हरियाणा में आज और फिर 2 से 5 मई के दौरान धूल भरी आंधी और बिजली गिरने के साथ बारिश के आसार हैं। राजस्थान में मौसम के दो रंग दिखेंगे। पूर्वी राजस्थान में 5 मई तक लगातार बारिश और आंधी की स्थिति बनी रहेगी, जबकि पश्चिमी राजस्थान में 2 से 4 मई के बीच तीव्र धूल भरी आंधी चलने का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और भारी बारिश हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तराखंड में आज से 5 मई तक व्यापक स्तर पर बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में 3 से 5 मई के बीच 50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ मौसम बिगड़ने का अनुमान है। पर्यटकों को पहाड़ों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बिहार और झारखंड का कैसा रहेगा मौसम? बिहार में कल की तरह आज भी (30 अप्रैल) भीषण आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की गति 70 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश भी हो सकती है। वहीं, झारखंड के कुछ हिस्सों में आज ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है। 3 मई तक यहां रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहेगा। रेड अलर्ट जैसी स्थिति अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले 5 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। विशेष रूप से आज नागालैंड और मणिपुर में 70 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाएं तबाही मचा सकती हैं। असम और मेघालय में 3 मई तक अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों तक गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। कर्नाटक में आज ओलावृष्टि होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने इस दौरान लोगों को कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। आंधी के समय बिजली के उपकरणों का प्रयोग कम करें और किसानों को कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने का निर्देश दिया गया है। उत्तर प्रदेश में बुधवार को भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ली और कई जिलों में आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई, जिससे लोगों को काफी राहत मिली। यूपी के 50 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया मौसम विभाग ने करीब 50 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर, कौशांबी, प्रयागराज, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, बुलंदशहर, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं समेत कई जिलों में तेज धूल भरी आंधी, बारिश, वज्रपात और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। बिहार के इन जिलों में गरज-चमक के साथ होगी बारिश उत्तर प्रदेश और बिहार में बुधवार को बदले मौसम ने कहर बरपाया। धूलभरी आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं में यूपी में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 घायल हो गए। बिहार में भी तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई। यूपी में सबसे अधिक असर अवध क्षेत्र में देखने को मिला। मौसम विभाग ने गुरुवार को लखनऊ समेत प्रदेश के 45 जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात और तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है। बिहार में आंधी, वर्षा व ओलावृष्टि से हुआ नुकसान बिहार के विभिन्न हिस्सों में बुधवार की शाम आई आंधी, वर्षा व ओलावृष्टि से मक्का, आम व लीची के साथ सब्जी की फसल को काफी क्षति पहुंची। मधुबनी में लगभग सात हजार हेक्टेयर में आम की फसल प्रभावित हो गई। इस दौरान विभिन्न घटनाओं में पटना, मधुबनी व सारण जिले में तीन महिलाओं समेत चार लोगों की जान चली गई।  

‘भारत ने शुरू किया था लंबा ऑपरेशन…’, राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को इस नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. यह ऑपरेशन लगभग एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी।  इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया. रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीति साफ है – किसी भी हालत में आतंकवादी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपना रुख साबित किया है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिर्फ 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे लंबी तैयारी थी. अगर जरूरत पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार था।  आज की दुनिया तेजी से बदल रही है. कई बड़े देश अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रीय हितों को पहले से ज्यादा जोर-शोर से सामने रख रहे हैं. पुराना नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सिस्टम अब सवालों के घेरे में है. संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।   प्रौद्योगिकी, सप्लाई चेन और डिजिटल टूल्स को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में भारत को इस नई दुनिया में और ज्यादा सतर्कता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और विकास की रणनीति को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालना होगा।  आतंकवाद के तीन आयाम और उसकी जड़ें राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को मानवता पर एक काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ एक विकृत मानसिकता है. यह सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं, बल्कि मानव मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है. आतंकवाद को अक्सर धर्म या किसी हिंसक विचारधारा के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, जो दरअसल आतंकियों को कवर फायर देना है।  रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि आतंकवाद सिर्फ राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, बल्कि इसके तीन आयाम हैं – ऑपरेशनल (संचालन संबंधी), आइडियोलॉजिकल (वैचारिक) और पॉलिटिकल (राजनीतिक). आतंकवाद की असली ताकत उसकी वैचारिक और राजनीतिक जड़ों में है. उन्होंने इसे रावण की नाभि से जोड़कर समझाया कि जब तक इस नाभि यानी वैचारिक और राजनीतिक संरक्षण को नहीं सुखाया जाएगा, आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा. इसलिए आतंकवाद को सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि सभी तीन आयामों में लड़ना जरूरी है।  पाकिस्तान पर सीधा हमला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि वह लगातार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान आजादी के समय एक साथ स्वतंत्र हुए, लेकिन आज भारत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान इंटरनेशनल टेररिज्म (International Terrorism) का केंद्र बन गया है।  उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) में कोई फर्क नहीं करता. पीएम मोदी की नीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का रवैया अपनाया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को परमाणु हमले की धमकियां भी मिलीं, लेकिन भारत उनमें नहीं फंसा और राष्ट्रहित में जो जरूरी था, वह किया।  तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत का प्रदर्शन ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति के नए रूप का उदाहरण बना. इसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने एक साथ, एक योजना के तहत काम किया. रक्षा मंत्री ने कहा कि अब भारत की सैन्य शक्ति साइलो में नहीं चलती, बल्कि संयुक्त और एकीकृत रूप में उभरी है. यह एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की छवि को मजबूत करता है।  भारत ने ऑपरेशन अपनी शर्तों और अपने समय पर शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही समाप्त किया. सिर्फ उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया गया जो हमले के जिम्मेदार थे. ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका गया क्योंकि क्षमता कम थी, बल्कि भारत ने अपनी मर्जी से रोका. जरूरत पड़ने पर ज्यादा कुछ भी किया जा सकता था।  स्वदेशी हथियारों की बढ़ती विश्वसनीयता ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम से लेकर निगरानी प्लेटफॉर्म तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खूब इस्तेमाल हुआ. इससे भारत की सटीकता और घातक क्षमता काफी बढ़ गई. रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन के बाद स्वदेशी हथियारों और रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता दुनिया भर में बढ़ी है।  अब कई देश भारत से हथियार और रक्षा सामग्री खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत का मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स अब शांति काल के साथ युद्ध के समय में भी तेज सप्लाई देने के लिए तैयार है. सर्ज कैपेसिटी और स्टोरेज कैपेसिटी मजबूत हुई है. इससे भारत की डिटरेंस बढ़ी है।  भविष्य की तैयारी: AI और टेक्नोलॉजी रक्षा मंत्री ने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है. GPU क्षमता बना रहा है. फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम चला रहा है. AI को 'Augmented Infantry' यानी बढ़ी हुई पैदल सेना के रूप में देखा जा रहा है. सेना ने AI, मशीन लर्निंग और बिग डेटा का इस्तेमाल करके अपनी क्षमताएं मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है. इससे देश न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित बनेगा, बल्कि शक्तिशाली और समृद्ध भी होगा।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इन बयानों से साफ है कि नया भारत आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ बिना किसी समझौते के खड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ आतंकियों को सबक सिखाया, बल्कि दुनिया को भारत की सैन्य तैयारी, संयुक्त ताकत और स्वदेशी क्षमता का संदेश भी दिया. बदलते विश्व में भारत अपनी सुरक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग और तैयार है।