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WhatsApp Username Feature बना चिंता का कारण, बढ़ते साइबर फ्रॉड के डर से सरकार करेगी समीक्षा

 नई दिल्ली WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर की मदद से अब लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी दूसरे यूजर से बात कर सकेंगे।  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन भारत सरकार इस फीचर को लेकर सतर्क हो गई है. सरकार को आशंका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी पहचान वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स के लिए फायदेमंद तो नहीं? सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार वॉट्सऐप नए यूजरनेम फीचर के गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने की तैयारी में है. सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई सुविधा तो नहीं बन जाएगा।  अगर जांच में कोई गंभीर खामी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस भी भेजा जा सकता है। वॉट्सऐप का यह फीचर टेलीग्राम की तरह काम करता है. पहले किसी नए शख्स से वॉट्सऐप पर बात करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता था. अब यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू कर सकता है।  इसका फायदा यह होगा कि आपका मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को नहीं दिखेगा. कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी बेहतर होगी और अनजान लोगों के साथ नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  किसी के नाम से यूजरनेम बना कर लोगों के साथ हो सकती है ठगी हालांकि सरकार की चिंता दूसरी भी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई शख्स किसी दूसरे के नाम जैसा यूजरनेम बना ले या अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करे, तो ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं।  टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम और नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को धोखा देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इसी वजह से सरकार वॉट्सऐप के नए फीचर को लेकर एक्स्ट्रा सावधानी बरत रही है।  सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्राइवेसी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर पहचान छिपाना आसान हो गया तो स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. खासकर ऐसे यूजरनेम जो किसी कंपनी, सेलिब्रिटी या दूसरे व्यक्ति से मिलते-जुलते हों, वे लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं।  वॉट्सऐप अपनी ओर से कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं. कंपनी का कहना है कि हर यूजरनेम यूनिक होगा और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके।  इसके अलावा वॉट्सऐप किसी तरह की पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी भी नहीं बना रहा है. यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह आपको पहले से पता हो। 

18% आबादी, लेकिन सिर्फ 4% जल संसाधन! क्या बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है भारत?

 नई दिल्ली भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. आबादी और पानी के संसाधनों के बीच का असंतुलन देश के भविष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. दुनिया की लगभग 18% आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास दुनिया के कुल पीने वाले पानी का सिर्फ 4% हिस्सा ही मौजूद है।  तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव के कारण मौजूदा संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिसके लिए आने वाले दशक में भारी निवेश की ज़रूरत होगी।  PL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में लगभग ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  आर्थिक उतार-चढ़ाव के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, पानी की सुरक्षा में निवेश मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल कारणों से बढ़ रहा है. बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार, औद्योगिक विकास, भूजल में कमी और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।  PL Capital में एडवाइजरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात ने कहा, "भारत में पानी एक अहम रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दूसरे ट्रेंड्स, जो आर्थिक चक्रों से जुड़े हो सकते हैं, उनके उलट पानी की सुरक्षा में निवेश स्ट्रक्चरल और पॉलिसी पर आधारित होता है और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है।  सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता कम  भारत में अभी हर दिन 72,000 मिलियन लीटर से ज़्यादा सीवेज पैदा होता है, लेकिन इसे ट्रीट करने की क्षमता काफी नहीं है. इस वजह से बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ वेस्टवॉटर नदियों और दूसरे जल स्रोतों में बहा दिया जाता है. आने वाले सालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा बनने की उम्मीद है।  रिपोर्ट में पानी की ज्यादा खपत वाले कई उद्योगों के उभरने की ओर भी इशारा किया गया है, जिनसे अच्छी क्वालिटी वाले इंडस्ट्रियल पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट और स्पेशलिटी केमिकल्स इन सभी में बहुत ज़्यादा शुद्ध पानी की ज़रूरत होती है. इससे पानी को शुद्ध करने और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं।  PL Capital की एक नई थीम-बेस्ड रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  इकोनॉमिक साइकल के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, वॉटर सिक्योरिटी में निवेश अब स्ट्रक्चरल वजहों से बढ़ रहा है. आबादी का बढ़ना, शहरों का विस्तार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, ग्राउंडवॉटर का कम होना और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

Electric Vehicle News: EV चार्जिंग के लिए सुरक्षित नहीं 45% भारतीय घर, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. भारत के लगभग 45% घरों को सुरक्षित रूप से EV चार्ज करने के लिए अपने इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है।  यह जानकारी 'द नेट-ज़ीरो ट्रांज़िशन स्टार्ट्स एट होम: इनेबलिंग EV-रेडी रेजिडेंसेस इन इंडिया' नाम की एक नई रिपोर्ट से मिली है. यह रिपोर्ट भारत के टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों के अनुभवों पर आधारित है, इसके लिए स्वतंत्र घरों, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, झुग्गी-बस्तियों और किराए के मकानों में लगे 80,000 से अधिक घरेलू EV चार्जर्स के डेटा का अध्ययन किया गया है।  ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब सरकारें EV को अपनाने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं, जैसे दिल्ली सरकार ने जनवरी 2027 से नए पेट्रोल-सीएनजी तिपहिया वाहनों और अप्रैल 2028 से पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का फैसला किया है।  रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में केवल 55 प्रतिशत संभावित EV खरीदारों के पास ही घरेलू चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, जबकि आवासीय चार्जिंग ही इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने का सबसे प्राथमिक माध्यम है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में EV से जुड़ी बिजली की खपत साल 2024 में कुल राष्ट्रीय मांग के महज 0.2 प्रतिशत से बढ़कर साल 2035 तक लगभग 6 प्रतिशत हो जाएगी।    पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है, लेकिन घरों में चार्जिंग की सुविधा अभी भी बेहद असमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षित और भरोसेमंद चार्जिंग के लिए हर घर को एक न्यूनतम मानक पूरा करना जरूरी है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोग सामान्य पावर सॉकेट, अस्थायी एक्सटेंशन केबल और साझा बिजली कनेक्शन जैसे असुरक्षित तरीकों पर निर्भर हैं।  असुरक्षित चार्जिंग से जुड़े बड़े खतरे शोधकर्ताओं ने कड़ी चेतावनी दी है कि घरेलू स्तर पर किए जाने वाले इस तरह के अनौपचारिक या जुगाड़ू चार्जिंग इंतजामों से आग लगने का भारी खतरा रहता है, साथ ही इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और महंगे उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है. जब इन सामान्य सर्किट्स पर अत्यधिक लोड पड़ता है, तो इससे वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव, तारों का जरूरत से ज्यादा गर्म होना , ट्रांसफार्मर का खराब होना और स्थानीय इलाकों में बिजली गुल होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसके अलावा, असुरक्षित तरीके से की जाने वाली चार्जिंग से न सिर्फ वाहन के चार्ज होने की निरंतरता प्रभावित होती है, बल्कि गाड़ी की बैटरी भी समय से पहले तेजी से खराब हो सकती है। 

AI पर बढ़ा भारतीयों का विश्वास, 85% उपभोक्ताओं ने जताया भरोसा; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली   भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर मजबूत भरोसा जताया है और भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका को लेकर उत्साह दिखाया है। वहीं, 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तकनीक ने उनके जीवन को पहले से बेहतर बनाया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी अश्योरेंट इंक. की एक रिपोर्ट में सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट इंडेक्स में भारत को 74 अंक मिले हैं, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ताओं में नई तकनीकों के प्रति विश्वास मजबूत है और वे अगली पीढ़ी के डिजिटल अनुभवों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब ऐसे एआई-सक्षम उपकरणों को तेजी से अपनाने के लिए तैयार हैं, जो उनकी उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर संचार और रोजमर्रा के कामों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य कनेक्टेड डिवाइस अब काम, मनोरंजन, संचार और वित्तीय लेनदेन जैसी दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि उन्हें हर समय बिना किसी रुकावट के सहज और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलें। अश्योरेंट इंटरनेशनल के अध्यक्ष फेडेरिको बुंगे ने कहा कि दुनिया भर में कनेक्टेड तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकनीकी अनुभव लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार खुद को ढालें, ताकि नवाचार के साथ सरलता, भरोसा और विश्वसनीयता भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि भारत में यह बदलाव बेहद तेजी से हो रहा है, जहां के डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ता एआई-आधारित नवाचारों को तेजी से अपना रहे हैं और ऐसे निर्बाध अनुभव चाहते हैं जो उनके दैनिक जीवन में बिना किसी परेशानी के शामिल हो जाएं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब कनेक्टिविटी या स्टोरेज जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं, तो वे लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे में डिवाइस का भरोसेमंद प्रदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, डिवाइस प्रोटेक्शन प्लान अब उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और कंपनियों के ब्रांड मूल्य को मजबूत करने का अहम माध्यम बन रहे हैं। भारत में 97 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित (कस्टमाइजेबल) प्रोटेक्शन प्लान मिलें, तो वे नया डिवाइस खरीदने और उसके साथ सुरक्षा योजना लेने के लिए अधिक इच्छुक होंगे। अश्योरेंट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर हरिनी कन्नन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे गतिशील और भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने वाले कनेक्टेड उपभोक्ता बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बड़े पैमाने पर नई तकनीकों को अपना रहे हैं और चाहते हैं कि तकनीक बिना किसी परेशानी के उनके जीवन का हिस्सा बने। ऐसे में कंपनियों के लिए बेहतर प्रोटेक्शन और सर्विस अनुभव प्रदान कर खुद को प्रतिस्पर्धियों से अलग साबित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

Indus Water Dispute: सिंधु जल को लेकर भारत का बड़ा संदेश, पाकिस्तान पर सख्त तेवर बरकरार

नई दिल्ली सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया है. केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि 23 अप्रैल 2025 से सिंधु जल संधि को स्थगित (Abeyance) रखा गया है और यह फैसला तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और स्थायी रूप से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता. ऐसे में पाकिस्तान की ओर से लगातार उठाई जा रही आपत्तियों और पत्राचार का भारत की नीति पर फिलहाल कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है।  इसी बीच पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल अप्रैल से अब तक भारत के अपने समकक्ष को चिनाब नदी के जल प्रवाह में उतार-चढ़ाव को लेकर चार पत्र लिखे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला. उनका कहना है कि सबसे हालिया पत्र उन्होंने सोमवार रात भेजा, जिसमें चिनाब के जलस्तर में महत्वपूर्ण बदलाव पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।  डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में शाह ने कहा कि चिनाब नदी के प्रवाह में हो रहा उतार-चढ़ाव केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि रणनीतिक जोखिम है. उनके मुताबिक नदी के जल प्रवाह से जुड़ा डेटा साझा न होने से पाकिस्तान के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि बदलाव प्राकृतिक कारणों से हुआ है या फिर ऊपरी हिस्से में किसी मानवीय गतिविधि के कारण।  हालांकि भारत की घोषित नीति बिल्कुल स्पष्ट है. 23 अप्रैल 2025 को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह फैसला लिया था कि 1960 की सिंधु जल संधि को तब तक स्थगित रखा जाएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से बंद नहीं करता. भारत का कहना है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।  क्या है सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का जल भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया. संधि के तहत दोनों देशों के बीच जल प्रवाह से जुड़ा डेटा साझा करने, निरीक्षण करने और विवादों के समाधान के लिए स्थायी तंत्र भी बनाया गया था. लेकिन संधि स्थगित होने के बाद दोनों देशों के बीच यह संस्थागत संवाद लगभग ठप पड़ गया है।  पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त का कहना है कि पिछले एक वर्ष में उनके देश ने संधि के तहत डेटा साझा करना जारी रखा, बैठकों का प्रस्ताव भेजा, निरीक्षण और परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी मांगी, लेकिन भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. उन्होंने दावा किया कि मई 2022 के बाद दोनों देशों के आयुक्तों की कोई बैठक नहीं हुई और अगस्त 2023 के बाद कई महत्वपूर्ण संधि संबंधी पत्रों का भी जवाब नहीं आया।  शाह ने यह भी कहा कि किसी भी निचले प्रवाह वाले देश (डाउनस्ट्रीम स्टेट) के लिए जल प्रवाह का नियमित डेटा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिचालन आवश्यकता है. उनके अनुसार यदि जानकारी नहीं मिलेगी तो यह तय करना मुश्किल होगा कि नदी के प्रवाह में बदलाव प्राकृतिक है या फिर ऊपरी हिस्से में किसी परियोजना के संचालन का परिणाम।  पाकिस्तान जता रहा चिंता हाल के महीनों में चिनाब नदी के जल प्रवाह में बदलाव को लेकर पाकिस्तान कई बार चिंता जता चुका है. वहीं भारत के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सरकार पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के अधिकतम उपयोग की दिशा में काम कर रही है. भारत लंबे समय से यह भी कहता रहा है कि संधि के तहत उसे पश्चिमी नदियों पर मिलने वाले अधिकारों का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है और अब वह अपने वैध अधिकारों के अनुरूप परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर देगा।  पाकिस्तान लगातार मांग कर रहा है कि भारत एकतरफा तरीके से नदी के प्रवाह में बदलाव न करे और संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाए. साथ ही उसने सिंधु जल आयोग की बैठक दोबारा बुलाने, डेटा साझा करने और संयुक्त निरीक्षण शुरू करने की भी अपील की है।  भारत का रुख हालांकि मौजूदा हालात में भारत का रुख बदलता नहीं दिख रहा. नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर निर्णायक और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था बहाल नहीं होगी. यानी जल सहयोग का भविष्य अब केवल तकनीकी या कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के रवैये से जुड़ गया है। 

भारत-पाक चिट्ठी विवाद गरमाया, PM मोदी और शहबाज को पत्र लिखने वालों पर BJP हुई हमलावर

 नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से शांति और कूटनीतिक संबंध बहाल करने की मांग को लेकर एक नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 100 से अधिक भारतीय और पाकिस्तानी नेताओं व सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है। हालांकि, इस चिट्ठी के सामने आते ही सत्तारूढ़ बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इन नेताओं को 'आतंकी समर्थक' करार दिया है। इस अपील का समन्वय नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' के प्रमुख ओ.पी. शाह ने किया है। चिट्ठी में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से दक्षिण एशिया में शांति, बातचीत और सहयोग की बहाली के लिए सार्थक कदम उठाने का आग्रह किया गया है। चिट्ठी में की गई हैं ये मुख्य मांगें पत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाने की वकालत की गई है।     पूर्ण कूटनीतिक संबंधों को फिर से बहाल करना और नई दिल्ली व इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की दोबारा नियुक्ति करना।     सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करना और जम्मू-कश्मीर समेत सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत शुरू करना।     2004-2007 के कश्मीर फ्रेमवर्क पर पुनर्विचार करते हुए दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए सैन्य वापसी।     साथ ही व्यापार और यात्रा के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर को फिर से खोलना।     श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा, लाहौर-दिल्ली बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस को फिर से शुरू करना।     कारगिल-स्कर्दू मार्ग पर यात्रा की अनुमति देना।     कमर्शियल उड़ानों के लिए दोनों देशों का हवाई क्षेत्र फिर से खोलना और मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस देना।     करतारपुर साहिब कॉरिडोर और नीलम घाटी (पाकिस्तान) स्थित शारदा पीठ को फिर से खोलना। मीडिया और पत्रकारों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना। किन प्रमुख चेहरों ने किए हस्ताक्षर? भारत से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, पूर्व रॉ चीफ ए.एस. दुलत, मणिशंकर अय्यर, हुमायूं कबीर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, प्रो. सैफुद्दीन सोज और प्रो. अपूर्वानंद आदि ने इस पर साइन किए हैं। पाकिस्तान से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी, शिक्षाविद परवेज हुदभॉय, पूर्व सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर, बीना सरवर, सलीमा हाशमी और ए.एच. नय्यर आदि ने साइन किए हैं। ' पहले आतंकियों का समर्थन बंद करे पाकिस्तान' प्रेम शुक्ला ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के 'पाकिस्तान से संवाद' वाले बयान पर साफ कहा, 'पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन करना बंद कर दे तो बातचीत शुरू हो जाएगी.' हाल ही में RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को 'पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिएं.' हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद के प्रति कड़े रुख में कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए।  भारत-पाक के 117 प्रमुख लोगों ने लिखा ओपन लेटर भारत-पाक के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग को लेकर भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख लोगों ने संयुक्त शांति प्रस्ताव के तहत पत्र पर साइन किया है. इसमें भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा और हुमायूं कबीर समेत 61 हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं. डिजिटल फॉर्मेट पर नेताओं ने हस्ताक्षर किया है।  सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखे गए ओपन लेटर में भारत-पाक के बीच बातचीत, पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग की है. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक आवाजाही को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है।  ये रहे 61 भारतीय जिन्होंने लेटर पर साइन किए हैं-  क्रमांक साइन करने वाले भारतीयों के नाम 1. डॉ. फारूक अब्दुल्ला 2. मीरवाइज उमर फारूक 3. महबूबा मुफ्ती 4. मणिशंकर अय्यर 5. प्रो. मनोज झा 6. ए.एस. दुलत 7. जवाहर सरकार 8. मोहम्मद यूसुफ तारिगामी 9. आगा सैयद हसन मोसावी 10. शाहिद सिद्दीकी 11. रीता मनचंदा 12. संदीप पांडे 13. प्रो. सैफुद्दीन सोज़ 14. आगा सैयद मुंतज़िर मेहदी 15. इमरान अहमद हसन 16. डॉ. जॉन दयाल 17. ललिता रामदास 18. हुमायूं कबीर 19. जयंत घोषाल 20. प्रो. अपूर्वानंद 21. मुजफ्फर शाह 22. दया सिंह 23. एम.एम. अंसारी 24. डॉ. फुआद अली हलीम 25. जफर मिन्हास 26. बिलाल गनी लोन 27. अरविंद सहारन 28. आई.डी. खजूरिया 29. बी.एल. सराफ 30. फादर सुनील रोसारियो 31. सैयद इरफान शेर 32. डॉ. मुस्लिम जान 33. गोपा मुखर्जी 34. डॉ. रमेश रैना 35. कुमार प्रशांत 36. एन.डी. पंचोली 37. प्रह्लाद गोयनका 38. सुभाष कालरा 39. रीता चक्रवर्ती 40. रूबी अरुण 41. के.एस. सुब्रमण्यम 42. सज्जाद अजहर 43. बलकार सिंह 44. सैयद सलीम गिलानी 45. बिमल शर्मा 46. मालती सुब्रमण्यम 47. अनिल हेब्बार 48. अमिताव दत्ता 49. डॉ. सुनीलम 50. सलीम इंजीनियर 51. सुजादा बशीर 52. बिन्नी यादव 53. रुमान मेक्की 54. तौसीफ अहमद खान 55. संतोष खजूरिया 56. एडवोकेट यासमीन 57. राकेश यादव 58. कुणाल बनर्जी 59. रोहिणी सिंह 60. सुनील वट्टल 61. ओ.पी. शाह मीरवाइज ने किया बचाव- जब अमेरिका-ईरान बात कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस अपील का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान को भी संवाद करना चाहिए। उनका तर्क है कि युद्ध से विवाद हल नहीं होते, केवल बातचीत ही कश्मीर समेत अन्य लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान कर सकती है।  बीजेपी का करारा प्रहार- 'शहीदों का अपमान कर रहे हैं ये नेता' इस कदम के बाद बीजेपी ने हस्ताक्षरकर्ताओं पर करारा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इन नेताओं को 'आतंक का समर्थक' बताते हुए इनकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब 'पहलगाम आतंकी हमले' के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ बेहद सख्त नीति अपना रहा है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने साफ कर … Read more

एनएमडीसी ने पहली तिमाही की अब तक की सर्वाधिक मात्रा दर्ज की, 60 एमटी लक्ष्य के लिए गति बनाई

हैदराबाद  भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक और जिम्मेदार खनिक एनएमडीसी ने स्थापना के बाद से अपनी पहली तिमाही का अबतक का सर्वोच्च उत्पादन और बिक्री दर्ज करके वित्त वर्ष 27 की शुरुआत की है, जिससे भारत की इस्पात मूल्य-श्रृंखला की रीढ़ के रूप में इसकी स्थिति मजबूत हुई है । कंपनी ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान 15.10 एमटी लौह अयस्क का उत्पादन किया, जो वर्ष-दर-वर्ष 26% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि बिक्री 11.75 एमटी हुई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2% की वृद्धि दर्शाती है । यह रिकॉर्ड तिमाही प्रदर्शन निरंतर घरेलू मांग, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में अपने खनन परिसरों में परिचालन उत्कृष्टता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर कंपनी के निरंतर ध्यान को दर्शाता है । तिमाही को और अधिक गतिशील बनाते हुए एनएमडीसी ने 5.15 एमटी के उत्पादन और 3.98 एमटी की बिक्री के साथ जून माह में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया, जो वर्ष-दर-वर्ष क्रमशः 44% और 11% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है ।  इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने कहा, "बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र में भारत का निरंतर निवेश लौह अयस्क की मांग को मजबूत करता है, और एनएमडीसी इस आवश्यकता को पैमाने, दक्षता और जिम्मेदारी के साथ पूरा कर रहा है । हमारी अब तक की सबसे मजबूत पहली तिमाही हमारे संचालन की सुस्थिरता, हमारे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और घरेलू इस्पात उद्योग द्वारा हम पर रखे गए विश्वास को दर्शाती है । जैसे-जैसे हम खनन क्षमताओं का विस्तार करते हैं, लॉजिस्टिक्स को मजबूत करते हैं और अपने बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करते हैं, हम एक वैश्विक खनन पावरहाउस बनने की अपनी दीर्घकालिक आकांक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं ।” इस्पात की मजबूत घरेलू मांग और सरकार के बुनियादी ढांचे के प्रोत्साहन से प्रेरित होकर, एनएमडीसी अपने खनन कार्यों के चरणबद्ध संवर्धन, रणनीतिक खदान विकास और आधुनिक निकासी बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से अपनी क्षमता-विस्तार रोडमैप में तेजी ला रहा है । यह पहलें लगातार कंपनी की उत्पादन क्षमताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह अपने महत्वाकांक्षी 100 एमटी क्षमता के दृष्टिकोण पर दृढ़ता से आगे बढ़ रही है, साथ ही भारत के दीर्घकालिक इस्पात विकास का समर्थन करने के लिए लौह अयस्क की एक विश्वसनीय और उच्च-गुणवत्ता वाली आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है ।  रिकॉर्ड तिमाही प्रदर्शन ने वित्त वर्ष 27 के लिए मजबूत गति प्रदान की है, जिससे एनएमडीसी को अपने दीर्घकालिक 100 एमटी विजन की ओर तेजी से आगे बढ़ाते हुए अपने 60 एमटी उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी ।

Xi Jinping का बड़ा संदेश, ताइवान को लेकर चीन का रुख फिर सख्त; भाषण में दी कड़ी चेतावनी

बीजिंग  चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर ताइवान को लेकर अपना सख्त रुख दोहराया है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के 105वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा सुलझाना यानी ताइवान को चीन में शामिल करने का पार्टी का ऐतिहासिक मिशन है. उन्होंने कहा कि यह कम्युनिस्ट पार्टी की अटल प्रतिबद्धता है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।  अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने ताइवान की आजादी की वकालत करने वाले अलगाववादी समूहों को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि चीन ऐसे सभी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा और किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि नई परिस्थितियों में ताइवान मुद्दे को हल करने की पार्टी की रणनीति को पूरी तरह लागू किया जाएगा।  शी जिनपिंग ने कहा कि चीन राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की हर कीमत पर रक्षा करेगा. उन्होंने दोहराया कि नेशनल यूनिफिकेशन का टारगेट हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा और चीन इस दिशा में लगातार कदम उठाता रहेगा।  मजबूत देश के लिए मजबूत सेना जरूरी- जिनपिंग अपने भाषण में राष्ट्रपति जिनपिंग ने सेना को भी मजबूत बनाने पर भी जोर दिया. चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत देश के लिए मजबूत सेना जरूरी है और सिर्फ शक्तिशाली सैन्य बल ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ताइवान स्ट्रेट में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।  चीन के आर्थिक ग्रोथ पर क्या बोले शी जिनपिंग? शी जिनपिंग ने यह भी स्वीकार किया कि चीन इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां अवसरों के साथ-साथ जोखिम और चुनौतियां भी मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि चाहे दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो, रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो या चुनौतियां कितनी भी गंभीर क्यों न हों, चीन पीछे हटने वाला नहीं है।  राष्ट्रपति जिनपिंग ने पार्टी नेताओं से अपील की कि वे संकट की भावना को मजबूत करें, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाएं और उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाएं. साथ ही उन्होंने पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी की शुद्धता और मजबूती को नुकसान पहुंचाने वाले हर तत्व को खत्म किया जाएगा। 

GST Collection June: सरकार के खजाने में आए ₹1.94 लाख करोड़, टैक्स संग्रह में शानदार बढ़ोतरी

नई दिल्ली  सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने के जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी पिछले 13 महीनों में सबसे तेज है।  कहां से सरकार को हुई कितनी कमाई?  कमाई में सबसे ज्यादा उछाल आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स से आया है, जो 34.6% बढ़कर 60,038 करोड़ हो गया, जो पिछले साल जून में 44,608 करोड़ रुपये था. जून में घरेलू व्यापार से होने वाली वसूली सालाना आधार पर 6.5% बढ़कर 1,34,774 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,26,505 करोड़ रुपये था. जून में नेट GST रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,45,984 करोड़ रुपये था. वहीं, जून में टोटल रिफंड 29.1% बढ़कर 32,436 करोड़ हो गए।  GST रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी आंकड़ों के मुताबिक जून में GST रिफंड में भी 29.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार का GST रिफंड ₹32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इस अवधि में ₹25,121 करोड़ था। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी का कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में ₹5,82,542 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रह गया है। सबसे अधिक GST कलेक्शन वाले राज्य जून में जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़), गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का नाम शामिल था। बता दें कि 9 साल पहले 1 जुलाई, 2017 को GST को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया। घरेलू खपत और विदेशी व्यापार की ताकत टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जालान ने कहा है कि जून 2026 में भारत का GST रेवेन्यू घरेलू खपत की मजबूती और विदेशी व्यापार की ताकत, दोनों को दिखाता है। नेट GST कलेक्शन में 11.2% की बढ़ोतरी हुई। GST 2.0 में दरों में कटौती और स्टॉक पर जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लगातार असर (जिसके 9-12 महीने तक रहने की उम्मीद है) के बावजूद घरेलू रेवेन्यू में 2.6% की वृद्धि हुई। यह दिखाता है कि स्ट्रक्चरल बदलावों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर ITC जमा होने जैसी चुनौतियों के बावजूद खपत मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि जून में इंपोर्ट रेवेन्यू में 34.6% और साल-दर-साल आधार पर 26.2% की भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैपिटल गुड्स और रॉ मटीरियल की मजबूत मांग को दिखाता है, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस तेजी को GSTAT अपीलों के लिए किए गए प्री-डिपॉजिट और अगस्त 2026 की समय-सीमा (टाइम बार) से पहले FY 2020-21 के लिए सेक्शन 74 के तहत SCN जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों से भी सहारा मिला। राज्यवार किसका कैसा रहा प्रदर्शन?     महाराष्ट्र 30,714 करोड़ के जीएसटी कलेक्शन के साथ टॉप पर है.     कर्नाटक और गुजरात ने भी क्रमशः ₹12,937 करोड़ और 11,743 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया है।      बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. यहां का GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़कर 9,165 करोड़ तक पहुंच गया।      तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रमशः 2%, 5% और 5% की गिरावट दर्ज की गई।  कुल मिलाकर इस साल जीएसटी में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन विदेशी सामानों का आयात रहा. इसके अलावा, देश में वस्तुओं व सामानों की मजबूत मांग के कारण भी जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया है. ऊपर से डिजिटल इकोसिस्टम और टैक्स प्रशासन में बेहतरी के लिए भी जीएसटी कलेक्शन मजबूत हुआ है। 

Bilawal Bhutto का बड़ा बयान, सिंधु के पानी को लेकर भारत को दी न्यूक्लियर धमकी; बढ़ा तनाव

इस्लामाबाद सिंधु जल संधि (इंडस वॉटर्स ट्रीटी) को लेकर भारत और पाकिस्तान में तनाव के बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की है. पाकिस्तान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में बिलावल ने कहा कि अगर पाकिस्तान के पानी को रोकने की कोशिश की गई तो इसे सिर्फ पर्यावरण या कूटनीतिक विवाद नहीं, बल्कि देश के अस्तित्व पर हमला माना जाएग।  बिलावल ने कहा कि पाकिस्तान के परमाणु सिद्धांत (न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन) में कुछ ऐसी परिस्थितियां तय की गई हैं, जिनमें देश की अर्थव्यवस्था या जल संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंचाने की कोशिश राष्ट्रीय अस्तित्व के लिए खतरा मानी जाती है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के पानी को रोकना "न्यूक्लियर आर्मागेडन" जैसी स्थिति बनाता है, तो इसका जवाब भी उसी गंभीरता से दिया जाएगा।  जरदारी ने आरोप लगाया कि भारत पानी को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है. बिलावल ने कहा कि सिंधु नदी पाकिस्तान के लिए कोई सौदेबाजी का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जीवनरेखा है. इसलिए पाकिस्तान अपने पानी, अपनी संधि, अपनी संप्रभुता और अपने भविष्य की रक्षा हर हाल में करेगा।  बिलावल भुट्टो जरदारी ने आगे और क्या कहा? बिलावल ने कहा, "हम शांति चाहते हैं, लेकिन सम्मान के साथ. हम बातचीत चाहते हैं, लेकिन कानून के दायरे में. हम साथ रहना चाहते हैं, लेकिन किसी के सामने झुककर नहीं." उन्होंने दावा किया कि अगर कोई यह सोचता है कि पाकिस्तान अपने पानी के अधिकार छोड़ देगा, तो वह पाकिस्तान की जनता को नहीं जानता।  पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था एक्शन भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित (अबेयंस) कर दिया था. इसके बाद से पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है. पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत कृषि सिंधु नदी के पानी पर निर्भर है, इसलिए इस संधि को वहां बेहद अहम माना जाता है।  यह पहली बार नहीं है जब बिलावल ने इस मुद्दे पर धमकियों भरा बयान दिया है. 2025 में भी उन्होंने कहा था कि "या तो सिंधु में हमारा पानी बहेगा या उनका खून." अब एक बार फिर उन्होंने परमाणु सिद्धांत का हवाला देकर संकेत दिया है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व से जोड़कर देख रहा है।