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Indus Water Dispute: सिंधु पर PAK की दलीलों का भारत ने दिया जवाब, अमेरिका-रूस-चीन का उदाहरण बना आधार

नई दिल्ली सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान बिलबिला रहा है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. अब पाकिस्तान गीदड भभकियां दे रहा है, और सीधे तौर पर हिंसा का सहारा लेने की बात कर रहा है. लेकिन बड़बोले पाकिस्तान को ये पता नहीं है कि भारत के पास अमेरिका, रूस और चीन द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक तर्क है. इसी तर्क का सहारा लेकर ये तीनों बड़े देश अंतर्राष्ट्रीय समझौते से बाहर निकल गए और अपनी राष्ट्रीय चिंताओं और हित को ज्यादा तवज्जो दी।  अभी हाल ही में पाकिस्तान के मंत्री ने अताउल्लाह तरार ने एक सेमिनार में कहा है कि भारत इंडस वॉटर ट्रीटी (IWT) यानी सिंधु जल समझौते को संशोधित, रद्द या निलंबित नहीं कर सकता है. लेकिन पाकिस्तान ने भारत की चिंता आतंकवाद पर मुंह सिल लिया है।  हालांकि भारतीय रक्षा विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़े देशों द्वारा किए गए समझौतों के उल्लंघन के उदाहरण देकर भारत के वैध अधिकार पर जोर दिया है और कहा है कि भारत को आतंकवाद को लेकर अपनी चिंता दूर करने के लिए हर कदम उठाने का अधिकार है।  पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर (रिटायर्ड) ने एक्स पर ट्वीट कर कहा कि अगर अमेरिका JCPOA से हट सकता है, रूस INF ट्रीटी से दूर जा सकता है और चीन दक्षिण चीन सागर पर हेग के फैसले को खारिज कर सकता है, तो भारत भी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में IWT को अस्थायी रूप से निलंबित कर सकता है।  कहने का अर्थ है कि दुनिया की बड़ी ताकतों ने अंतरराष्ट्रीय समझौतों को तब नज़रअंदाज़ किया या उनसे बाहर निकल गए, जब वे उनके राष्ट्रीय हितों के काम के नहीं रहे. रक्षा विशेषज्ञ पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर (रि) का कहना है कि ताकतवर देश संधियों का सख्ती से पालन करने के बजाय रणनीतिक/राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों को ज़्यादा अहमियत देते हैं, इसलिए भारत भी IWT के मामले में ऐसा कर सकता है।  सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और Pakistan के बीच हुआ एक ऐतिहासिक जल-बंटवारा समझौता है, जिसकी मध्यस्थता विश्व बैंक ने की थी. इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया. रावी, ब्यास और सतलुज का अधिकांश जल भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का मुख्य उपयोग पाकिस्तान को दिया गया।  पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के संदर्भ में भारत लंबे समय से इस समझौते की समीक्षा की मांग कर रहा है।  आइए समझते हैं कि दुनिया की बड़ी ताकतें कब अपने राष्ट्रीय हित में अंतर्राष्ट्रीय समझौते से बाहर निकल गईं।  ईरान डील (JCPOA) से 2018 में अलग हुआ अमेरिका  क्या हुआ: राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका 2015 के 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन' (JCPOA) से 2018 में एकतरफ़ा तौर पर खुद को अलग कर लिया और दूसरे हस्ताक्षरकर्ताओं (UK, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन, EU) के विरोध के बावजूद फिर से ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए।  अमेरिका क्या तर्क दिए: अमेरिका का तर्क था कि यह डील बुनियादी तौर पर खराब थी. ट्रंप ने इसे अबतक का सबसे खराब डील कहा. अमेरिका का कहना है कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी गतिविधियों और "सनसेट क्लॉज़" (समय-सीमा वाली शर्तें) जैसे मुद्दों को ठीक से नहीं सुलझाया गया था, जिनकी वजह से ईरान को आगे चलकर एडवांस्ड न्यूक्लियर काम फिर से शुरू करने की इजाज़त मिल जाती. ट्रंप इसे एक बुरा सौदा मानते थे जिससे ईरान तो मजबूत हुआ, लेकिन उसके न्यूक्लियर इरादों या अमेरिका के सहयोगियों पर कोई खास रोक नहीं लगी. इसे एक राजनीतिक प्रतिबद्धता माना गया जिसका लागू होना अमेरिका की इच्छाशक्ति पर निर्भर था. मौका देखकर अमेरिका इस डील से बाहर निकल गया. 2025-2026 में इसी मुद्दे को लेकर भयंकर युद्ध हुआ है।  INF (Intermediate-Range Nuclear Forces) से बाहर निकला रूस  क्या हुआ: अमेरिका ही नहीं दुनिया के दूसरे देश भी अंतरराष्ट्रीय संधियों का अपनी सुविधा के अनुसार व्याख्या करते रहे हैं. 1987 में अमेरिका और सोवियत संघ (अब रूस) के बीच एक समझौता हुआ. यह एक परमाणु नियंत्रण समझौता था, इसमें 500 से 5500 किलोमीटर रेंज वाली जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया था. यह शीत युद्ध को कम करने वाला ऐतिहासिक समझौता था।  इसके बावजूद दोनों देश अपने मिशन पर गुप्त रूप से लगे रहे. अमेरिका ने 2019 में अपनी ज़िम्मेदारियों से पीछ हट गया. फिर रूस ने भी ऐसा ही किया. इसके बाद'इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस ट्रीटी' खत्म हो गई।  दोनों देशों ने क्या तर्क दिए: अमेरिका ने रूस पर संधि का गंभीर उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि रूस प्रतिबंधित 9M729/SSC-8 मिसाइल बना रहा है।  रूस ने तर्क दिया कि अमेरिका/नाटो की गतिविधियों (जैसे यूरोप में मिसाइल डिफेंस सिस्टम) और सुरक्षा के बदलते माहौल के कारण यह संधि अब पुरानी हो चुकी है. चीन द्वारा बिना किसी रोक-टोक के इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइलें बनाई जा रही हैं. इसलिए अब इस संधि का कोई मतलब नहीं है. यानी कि इस संधि को लेकर किसी देश की प्रतिबद्धता नहीं थी।  दोनों पक्षों ने संधि का पालन करना बंद कर दिया, जिससे यह संधि खत्म हो गई।  UN संधि के फैसले को चीन ने ठुकराया क्या हुआ दुनिया की एक और महाशक्ति चीन भी अपनी सुविधा के अनुसार ही संधियों का पालन किया. फ़िलीपींस की ओर से लाए गए एक मामले में  UNCLOS ने चीन के खिलाफ फैसला सुनाया और दक्षिण चीन सागर में चीन की ओर से कृत्रिम द्वीप बनाने को गलत करार दिया. चीन ने इस फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया. UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) संयुक्त राष्ट्र का समुद्री कानून पर अंतरराष्ट्रीय संधि है।  चीन ने क्या तर्क दिया: चीन ने कभी भी ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया. उसका तर्क था कि इस विवाद में संप्रभुता का मामला शामिल है, जिस पर ट्रिब्यूनल कोई फैसला नहीं दे सकता है. और द्विपक्षीय बातचीत ही सही रास्ता है. उसने इस फैसले को गैर-कानूनी और राजनीतिक मकसद से प्रेरित माना और कहा कि यह उसकी "निर्विवाद" क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों पर बाध्यकारी नहीं है. इसके बावजूद चीन ने अपनी गतिविधियां जारी रखीं।  ये उदाहरण दिखाते … Read more

बेंगलुरु खदान हादसा: ग्रेनाइट चट्टान गिरने से 6 मजदूरों की मौत, मृतकों में MP के 5 और छत्तीसगढ़ का 1 श्रमिक

बेंगलुरु कर्नाटक के बेंगलुरु शहरी जिले में गुरुवार को एक ग्रेनाइट खदान में हुए भीषण हादसे में सात प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। मृतकों में पांच मजदूर मध्य प्रदेश, एक छत्तीसगढ़ और एक कर्नाटक के यादगीर जिले का निवासी था। पुलिस ने शुरुआती जांच में हादसे के पीछे गंभीर लापरवाही की आशंका जताई है। यह हादसा बेंगलुरु शहरी जिले के मडापट्टना क्षेत्र में हुआ, जहां खदान में ऊपर से ग्रेनाइट का विशाल पत्थर खिसककर नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। पत्थर की चपेट में आने से सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय खदान में कुल 16 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें चार मजदूर सुरक्षित बच गए। खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे सेंट्रल रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एस. गिरीश ने बताया कि खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे। ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक एक बड़ा ग्रेनाइट पत्थर नीचे खिसक गया और वहां काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ा। उन्होंने कहा कि इस हादसे में घायल सभी पांच मजदूरों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। शुरुआती जानकारी में हुई थी मृतकों की पहचान में गलती हादसे के तुरंत बाद पुलिस सूत्रों ने बताया था कि अधिकांश मृतक बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन बाद में जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि पांच मृतक मध्य प्रदेश के निवासी थे। वहीं, कुछ समय के लिए मृतकों की संख्या आठ होने की भी चर्चा रही, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। अधिकारियों के अनुसार हादसे में कुल सात लोगों की ही जान गई है। मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अधिकारी रंगप्पा ने बताया कि खदान संचालक ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है। नई खनन गाइडलाइन बनाएगी सरकार हादसे पर शोक जताते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में खनन गतिविधियों के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन लागू करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग से नहीं, बल्कि मिट्टी और चट्टान के खिसकने के कारण हुआ है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता हादसे के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना है। मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी, लेकिन उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि हादसे की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि खदान संचालन की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी। यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्य में अवैध खनन गतिविधियों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार इन्हें रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगी। विपक्ष और केंद्रीय मंत्री ने सरकार को घेरा केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य में खनन माफिया और प्रभावशाली लॉबी मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी कर केवल मुनाफे पर ध्यान दे रही है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की। वहीं, कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने भी राज्य सरकार को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में मजदूरों की जान से खिलवाड़ न हो। घटनास्थल का मंजर था बेहद भयावह हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। विशाल ग्रेनाइट पत्थर के नीचे आने से माल ढोने वाले वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक ट्रैक्टर भी बुरी तरह चकनाचूर हो गया। मृतकों और घायलों के परिजनों के विलाप से पूरे इलाके में मातम पसरा रहा। यादगीर निवासी एक मृतक के परिजन ने बताया कि वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और बेटियों की शादी के बाद कर्ज चुकाने के लिए बेंगलुरु में मजदूरी कर रहा था। उसकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।  

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी, लगातार 7वें साल नहीं बढ़ेंगी बिजली दरें

लखनऊ   उत्तर प्रदेश के करीब 3.70 करोड़ बिजली ग्राहकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने बिजली दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि राज्य में फिलहाल बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी. इसके साथ ही नोएडा के ग्राहकों को मिलने वाली 10 फीसदी बिजली दर छूट भी पहले की तरह जारी रहेगी. आयोग के इस फैसले से घरेलू, कमर्शियल और औद्योगिक ग्राहकों को महंगाई के दौर में बड़ी राहत मिलेगी।  लगातार 7वें साल नहीं बढ़ीं बिजली दरें आयोग के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश लगातार सातवें वर्ष भी बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. बीते 7 वर्षों से प्रदेश में बिजली की टैरिफ दरें स्थिर रखी गई हैं, जिससे करोड़ों ग्राहकों पर एक्‍स्‍ट्रा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कई राज्यों में बिजली दरों में संशोधन किए जा चुके हैं।  नियामक आयोग ने नोएडा क्षेत्र के उपभोक्ताओं को मिलने वाली 10 प्रतिशत बिजली दर छूट को भी जारी रखने का फैसला किया है. इससे नोएडा के लाखों घरेलू और व्यावसायिक ग्राहकों को पहले की तरह रियायती दरों पर बिजली मिलती रहेगी।  EV चार्जिंग स्टेशनों को मिलेगा विशेष लाभ उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के मकसद से आयोग ने ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी अहम फैसला लिया है. अब सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. माना जा रहा है कि इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहन मिलेगा।  उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का आभार व्यक्त किया है. परिषद का कहना है कि बिजली दरों को स्थिर रखने का निर्णय प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में है और इससे आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों को भी राहत मिलेगी। 

Trump New Plan: क्या अमेरिका में गर्भवती विदेशी महिलाओं की एंट्री होगी बैन? Birthright विवाद के बाद नई तैयारी

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई सालों से जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) खत्म करने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन अदालत से उनके इस कदम को बड़ा झटका लगा है. हालांकि फिर भी उन्होंने अपनी कोशिशों को जारी रखा हुआ है. ट्रंप प्रशासन ने इसे लेकर एक नई योजना पर काम करना शुरू किया है. अब इसे उन महिलाओं की तरफ मोड़ा जा रहा है जो बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आती हैं, ताकि उनका बच्चा बर्थराइट सिटिजनशिप के तहत अमेरिका का नागरिक बन सके।  बाहरी प्रेग्नेंट महिलाओं की एंट्री बैन की तैयारी अमेरिकी वेबसाइट एक्सिओस की खबर के मुताबिक, अगर ट्रंप प्रशासन इसके खिलाफ नियम बनाने में कामयाब हुआ तो प्रेग्नेंसी, यात्रा और नागरिकता को लेकर एक नया इमिग्रेशन बैटल शुरू हो जाएगा. इससे बहस अमेरिका में चाइल्ड बर्थ के अधिकारों को चुनौती देने से हटकर दूसरे देशों से अमेरिका आने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं पर बैन लगाने की ओर मुड़ जाएगी. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने के उनके आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की थी. ट्रंप ने अदालत से अमेरिका में जन्मे उन बच्चों को नागरिकता देने से इनकार करने की मांग की थी जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं।  बर्थ राइट सिटीजनशिप पर ट्रंप का नया प्लान कोर्ट से झटका लगने के बाद फेडरलिस्ट पार्टी के संस्थापक शॉन डेविस जैसे MAGA समर्थकों ने सुझाव दिया कि प्रेग्नेंट विदेशी महिलाओं के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए. ट्रंप के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कोर्ट के  फैसले के बाद कहा कि देश को इस बारे में सावधानी से सोचने की जरूरत है, भले ही यह अस्थायी रूप से ही क्यों न हो. उन्होंने कहा कि बर्थ राइट सिटीजनशिप से दूसरे देशों के नागरिकों के बच्चे अमेरिकी नागरिक बनकर सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठा सकते हैं।  उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने एक्सियोस को ईमेल से भेजे एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप बर्थराइट सिटीजनशिप के मूल्य की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, यही वजह है कि अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस को इस मामले पर तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास अमेरिकी नागरिकता की सुरक्षा के लिए कई उपाय हैं।  महिलाओं का अमेरिकी नागरिकता वाला प्लान  उन्होंने इसे बर्थ टूरिज्म बताते हुए कहा कि ये तब होता है जब बाहरी महिलाएं अमेरिका में खात तौर पर बच्चे को जन्म देने के लिए आती हैं, ताकि उनके बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके. न्याय विभाग ने  मंगलवार को एक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें इस बात की जांच करने की अपील की गई है।  सहायक अटॉर्नी जनरल कॉलिन मैकडॉनल्ड ने एक्स को भेजे गए मैमो में कहा कि अमेरिका के आपराधिक कानून पहले से ही इन तथाकथित बर्थ टूरिज्म स्कीम्स को प्रतिबंधित करते हैं. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कई स्कीम्स झूठे वीजा आवेदन से शुरू होती हैं, लोग झूठ बोलकर अमेरिका में रहने का समय और मकसद को छिपाते हैं।  हर साल बाहरी महिलाएं 20,000 से 26,000 बच्चों को देती हैं जन्म उन्होंने कहा कि इनमें से कई मामलों में वीजा धोखाधड़ी के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन  वायर धोखाधड़ी, स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर पहचान चोरी के आरोपों पर भी विचार किया जाना चाहिए. आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी सरकार विदेशी महिलाओं से पैदा हुए बच्चों की संख्या का रिकॉर्ड नहीं रखती है, लेकिन अनुमान के मताबिक, हर साल 20,000 से 26,000 के करीब बच्चे अमेरिका में जन्म लेते हैं। 

‘छोटी बहन’ कहकर PM मोदी ने किया स्वागत, भारत-जापान के बीच फार्मा, डिफेंस और टेक्नोलॉजी पर बड़ी डील

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जापानी समकक्ष सनाए ताकाइची के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने जापानी पीएम को अपनी छोटी बहन और दूरदर्शी नेता बताया। दोनों देशों के बीच कितने करार हुए? दोनों प्रधानमंत्रियों ने किन बातों को खास तौर पर रेखांकित किया?  भारत और जापान के बीच आज अहम द्विपक्षीय समझौते हुए। दोनों देशों के बीच हुए वार्षिक सम्मेलन के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अलावा फार्मा सेक्टर से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस वार्ता भी की। अपनी गर्मजोशी और प्रधानमंत्री पद से इतर इंसानी रिश्ते के लिए दुनियाभर में मशहूर पीएम मोदी ने जापानी समकक्ष को अपनी छोटी बहन बताया। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा 'मेरी छोटी बहन, प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, दोनों प्रतिनिधिमंडलों के सम्मानित सदस्य, मीडिया के सदस्य, नमस्कार और कोनिचिवा (इसका मतलब जापानी भाषा में हैलो होता है)।  उन्होंने आगे कहा कि भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री तकाइची की भारत की पहली यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। इसके  साथ ही एक दूरदर्शी और व्यापक रूप से सम्मानित नेता भी हैं। वे नारा प्रांत से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक प्रमुख केंद्र है।' शिखर वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े फैसलों का ऐलान किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सनाए ताकाइची की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय लिख रही है. उन्होंने ताकाइची को ‘जापान फर्स्ट प्रधानमंत्री’ और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि भारत और जापान मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा विजन पर काम कर रहे हैं. इस दौरान रक्षा, निवेश, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी।  भारत-जापान रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाले बड़े फैसले     16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते एक साल में भारत और जापान के बीच 120 नए कारोबारी समझौते हुए हैं. अब दोनों देशों का लक्ष्य अगले 10 सालों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश को आकर्षित करना है. यह निवेश विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास को नई गति देगा।      रक्षा सहयोग भी इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा. भारत और जापान ने अपने पहले रक्षा सह-विकास (Defence Co-development) प्रोजेक्ट पर साइन किए. इसके तहत दोनों देश संयुक्त रूप से रक्षा तकनीकों का विकास करेंगे. सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है।  आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर बनी नई रणनीति दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर साझा रोडमैप तैयार करने का भी ऐलान किया. इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाया जाएगा. साथ ही दोनों देशों ने मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करने पर भी सहमति जताई, ताकि वैश्विक संकटों के दौरान उद्योगों पर असर कम पड़े।  ग्रीन एनर्जी में नई शुरुआत, बायोगैस मिशन लॉन्च प्रधानमंत्री मोदी ने ‘गोवर्धन पहल’ के तहत भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव की शुरुआत का भी ऐलान किया. इस पहल के जरिए देशभर में आधुनिक बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे. जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की ग्रामीण क्षमता को जोड़ने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।  भारत-जापान में किन मुद्दों पर सहमति बनी? बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सप्लाई चेन, निवेश और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।  प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच सिर्फ आर्थिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों का भी मजबूत रिश्ता है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों के विकास के साथ-साथ पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि में भी अहम भूमिका निभाएगी।  इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे मुक्त, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं. समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान को लेकर दोनों नेताओं ने साझा प्रतिबद्धता दोहराई. रक्षा अभ्यास, समुद्री सहयोग और आधुनिक तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति बनी।  प्रधानमंत्री मोदी ने सनाए ताकाइची को ‘छोटी बहन’ क्यों कहा? प्रधानमंत्री मोदी ने यह संबोधन दोनों देशों के बीच विश्वास, आत्मीयता और मजबूत रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताते हुए दिया. यह भारत-जापान संबंधों की गहराई और व्यक्तिगत नेतृत्व स्तर पर बेहतर तालमेल को भी दर्शाता है।  भारत-जापान शिखर सम्मेलन में सबसे बड़ा समझौता कौन-सा रहा? सबसे अहम समझौता दोनों देशों के पहले रक्षा सह-विकास प्रोजेक्ट पर हुआ. इसके अलावा 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य, आर्थिक सुरक्षा रोडमैप और भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव भी बड़े फैसलों में शामिल रहे।  भारत को इन समझौतों से क्या फायदा होगा? जापानी निवेश बढ़ने से भारत में रोजगार, विनिर्माण, हाई-टेक उद्योग, बुनियादी ढांचे और हरित ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. वहीं रक्षा और तकनीकी सहयोग भारत की रणनीतिक क्षमता को भी बढ़ाएगा।  इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र पर पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'प्रधानमंत्री तकाइची की इस यात्रा के साथ, हम अपनी 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। आज, भारत और जापान दोनों ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। एक स्वतंत्र, समृद्ध और नियमों पर आधारित 'इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र हमारी साझा प्राथमिकता है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर, हमने आज कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। 

ISRO Headquarters Bomb Threat: बेंगलुरु मुख्यालय खाली, धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानीबेंगलुरु में स्थित इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के हेडक्वार्टर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया गया। मौके पर पुलिस और बम स्क्वाड हेडक्वार्टर में जांच-पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के ऑफिस को धमकी भरा ईमेल आया था। इसके बाद इसरो के कैंपस को खाली कराया गया। कई टीमें संदिग्ध वस्तुओं की जांच की। अधिकारियों के अनुसार इसरो को धमकी भरा मेल गाजियाबाद से भेजा गया था। वहां पर उस व्यक्ति का पता लगाकर उसे पकड़ लिया गया है। कैंपस खाली करवाकर सर्च ऑपरेशन पुलिस के मुताबिक एहतियात के तौर पर सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया और इमारत की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली और बाद में धमकी को झूठा करार दिया गया है। पुलिस ने ईमेल भेजने वाले से पूछताछ कर रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में न्यू बीईएल रोड पर स्थित 'अंतरिक्ष भवन' में स्थित है। 29 जून को बम धमकी के फर्जी ईमेल भेजने वाला पकड़ा गया इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कई संगठनों और एक एयर इंडिया की उड़ान को बम की धमकी वाले फर्जी ईमेल भेजने के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़ा है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यह व्यक्ति गाजियाबाद का निवासी है। 36 वर्षीय आरोपी 2008 से मानसिक बीमारी का इलाज करा रहा है। 29 जून को भेजे गए इन ईमेल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय  सहित कई उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों में बम होने का दावा किया गया था। नई दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान के लिए भी एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया। इससे तत्काल सुरक्षा जांच शुरू हुई और कई एजेंसियों को सतर्क किया गया। पुलिस ने बताया कि सभी संबंधित संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया गया था। मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया और धमकियां फर्जी पाई गईं। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें ईमेल के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया गया। तकनीकी जांच के दौरान, पुलिस ने दो मेल खातों का विश्लेषण किया। इन खातों का उपयोग ईमेल भेजने के लिए किया गया था। ईमेल ट्रेल की विस्तृत जांच से जांचकर्ताओं को खातों से जुड़े एक मोबाइल नंबर तक पहुंचने में मदद मिली। तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए, पुलिस दल ने 30 जून को संदिग्ध को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के संयोग नगर में खोज निकाला। पुलिस मौके पर पहुंची और उसके निवास पर संदिग्ध निशांत त्यागी की जांच की। पुलिस के अनुसार, त्यागी ने ओपन स्कूलिंग के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी की थी। उसने 2010 में स्नातक डिग्री कार्यक्रम में दाखिला लिया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया। मानसिक स्वास्थ्य और आगे की जांच प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह कथित तौर पर 2008 से मानसिक बीमारी से पीड़ित है। वह वर्षों से विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में इलाज करा रहा है। उसके परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस को उसके लंबे चिकित्सा इतिहास के बारे में बताया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई। ईमेल भेजने के पीछे के मकसद और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है, जिसके परिणाम के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसरो का गतिविधियों का होता है प्रबंधन इसरो का मुख्यालय होने के कारण इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक चौबंद रहती है। बेंगलुर से इसरो की सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष गतिविधियों का प्रबंधन किया जाता है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। मूल इकाई (INCOSPAR) के रूप में यह 1962 में अस्तित्व में आया था और 1972 में इसे अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत लाया गया। अंतरिक्ष भवन जो कि इसरो का प्रशासनिक केंद्र है। यह लगभग 4.3 एकड़ (17,400 वर्ग मीटर) के परिसर में फैला हुआ है। इसरो के मुख्यालय को उड़ाने की धमकी देने वाले शख्स की गिरफ्तारी के बाद बेंगलुरु पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस के संपर्क में है। अरेस्ट किए गए शख्स से पूछताछ करने के साथ उसका बैकग्राउंड खंगाला जा रहा है। 

रूस में ईंधन संकट के बीच भारत बना सहारा, पेट्रोल-डीजल सप्लाई शुरू होने की खबर

नई दिल्ली भारत ने रूस के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का फर्ज एक बार फिर से निभाया है. जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस का कच्चा तेल खरीदने से ज्यादातर देश पीछे हट गए थे, तब भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदकर उसका साथ दिया था. अब एक बार फिर भारत मुश्किल वक्त में रूस के काम आया है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीद रहा, बल्कि उसकी ईंधन की कमी दूर करने के लिए उसे गैसोलीन यानी पेट्रोल की सप्लाई कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों से पैदा हुए फ्यूल संकट के बीच रूस ने भारत से समुद्री रास्ते के जरिए गैसोलीन का आयात शुरू कर दिया है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों की वजह से रूस की कई ऑयल रिफाइनरियां प्रभावित हुई हैं. इसके चलते देश में पेट्रोल की भारी कमी हो गई है. कई इलाकों में राशनिंग करनी पड़ रही है, पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और गैसोलीन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. ऐसे हालात में रूस ने भारत से समुद्री रास्ते के जरिए गैसोलीन मंगाना शुरू कर दिया है।  भारत से रवाना हुए पहले टैंकर रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अब तक कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन गैसोलीन रूस के लिए भेजा जा चुका है. दो टैंकरों में करीब 30 हजार से 40 हजार टन तक का फ्यूल लोड किया गया है. हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि भारत की कौन सी रिफाइनरी इस सप्लाई को पूरा कर रही है।  हर महीने 4 लाख टन फ्यूल आयात करेगा रूस रूस की योजना सिर्फ भारत पर निर्भर रहने की नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक वह भारत के अलावा बेलारूस समेत दूसरे देशों से भी हर महीने करीब 4 लाख टन गैसोलीन आयात करना चाहता है. बेलारूस पहले ही अपनी सप्लाई बढ़ा चुका है और जून के पहले पखवाड़े में उसने रूस को रेल मार्ग से भेजे जाने वाले गैसोलीन की मात्रा लगभग तीन गुना कर दी है।  यूक्रेन के हमलों से बढ़ा संकट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भी मान चुके हैं कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने देश की रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया है. गर्मियों में रूस में रोजाना करीब 1.10 लाख टन गैसोलीन की खपत होती है. ऐसे में घरेलू उत्पादन कम होने से सरकार को आयात का सहारा लेना पड़ रहा है. रूस की संसद ने हाल ही में टैक्स नियमों में बदलाव कर फ्यूल आयात को बढ़ावा देने और सब्सिडी देने का भी फैसला किया है।  रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बना भारत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ भारत रूस को गैसोलीन भेज रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी बना हुआ है. शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक जून में भारत ने रूस से रोजाना करीब 27 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रही. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बने तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी है। 

उत्तराखंड में भारी बारिश से बिगड़े हालात, चारधाम यात्रा प्रभावित; बदरीनाथ हाईवे बंद

रुद्रप्रयाग उत्तराखंड में मॉनसून की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। राज्य के सभी हिस्सों में बारिश हो रही है। खासकर पहाड़ी जिलों में तेज बारिश का सिलसिला जारी है। चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ाव रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश हो रही है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यहां अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। उधर, बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने और सड़क धसने के कारण बंद हो गया है। गुरुवार को रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DDMO) नंदन सिंह राजवार ने बताया कि ऊपरी हिमालयी इलाकों में बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ रहा है और इलाके में जलस्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है। राजवार ने कहा कि अभी जलस्तर समुद्र तल से 622 मीटर ऊपर है, जबकि चेतावनी का स्तर 626 मीटर और खतरे का स्तर 627 मीटर है। वाट्सएप पर भेजे जाएंगे अलर्ट उन्होंने कहा कि जैसे ही जलस्तर चेतावनी के निशान तक पहुंचेगा, WhatsApp ग्रुप के ज़रिए अलर्ट जारी किए जाएंगे, गाड़ियों से सार्वजनिक घोषणाएँ की जाएँगी और निवासियों को आगाह करने के लिए ज़मीनी टीमें तैनात की जाएँगी। रुद्रप्रयाग में बुधवार से लगातार बारिश हो रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहती है, तो दोनों नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है और खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। बदलती स्थिति को देखते हुए, जिला आपदा नियंत्रण कक्ष नदियों के जलस्तर पर कड़ी नज़र रख रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले निवासियों और तीर्थयात्रियों से सतर्क रहने और ज़रूरत न होने पर नदी के किनारे या अन्य जोखिम वाले इलाकों में न जाने की अपील की है। मौसम विभाग ने 4 जुलाई तक जारी किया है अलर्ट देहरादून में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रुद्रप्रयाग जिले में 4 जुलाई तक के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और ज़िला प्रशासन ने निवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। रुद्रप्रयाग के अलावा आज देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' है। वहीं, हरिद्वार, उत्तरकाशी और चमोली के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। बदरीनाथ नेशनल हाईवे बंद भारी बारिश के कारण बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने से बंद हो गया है। यहां पर संबंधित विभागों ने सड़क खोलने का काम सुचारु कर दिया है, लेकिन अभी भी रुक रुक कर बारिश जारी है। बता दें कि बुधवार देररात्रि लगभग 2 के बाद पगनो गांव की ओर से भारी बरसाती नाला आने के कारण मलबा व बोल्डर आने से बदरीनाथ नेशनल हाईवे में 50 मीटर से अधिक सड़क में मालबा फैला हुआ है। सड़क पर काफी बोलडर भी आ रखे हैं। जिस कारण से अभी तक सड़क सुचारू नहीं हो पाई है। सड़क खोलने का काम जारी है।

‘पाकिस्तान से आए लोग शरणार्थी नहीं थे’, मोहन भागवत ने बंटवारे पर दिया बड़ा बयान

नागपुर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 1947 के बंटवारे के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं थे, बल्कि संघर्ष करने वाले योद्धा थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम के कारण भारी कठिनाइयों और दर्द का सामना किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने नए बने पाकिस्तान में कई पीढ़ियों से बनाई और बढ़ाई गई अपनी संपत्ति, जमीन और कारोबार को पीछे छोड़ दिया और भारत आना चुना।  भागवत  नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संगठन 'सिंधु एजुकेशन सोसाइटी' के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने कहा कि बंटवारे के बाद, लोगों ने सोच-समझकर दूसरी तरफ से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे उस जमीन पर रहना चाहते थे जो भारत है, जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन के बाद लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे भारत भूमि में रहना चाहते थे, जहां वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन वे शरणार्थी नहीं थे, उस समय उनके लिए ‘शरणार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करना गलत था। वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। वे उस लड़ाई में केवल अपनी गलतियों के कारण नहीं हारे थे। 'उन्होंने करियर चुना, न ही संपत्ति' मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी भारत को एकजुट बनाए रखने की वह लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने देश और अपने धर्म को चुना। आरएसएस प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पड़ाव किसी भी संस्था को अपने कार्यों की समीक्षा करने और अपने उद्देश्यों को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं। जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दोबारा उठ खड़े होने का प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों या भाग्य के सामने स्वयं को असहाय नहीं समझना चाहिए। कठिन समय से निकलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अंततः सफल होता है, जबकि कठिनाइयों से भागने वाला पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुका होता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए। भागवत ने कहा कि सही और गलत में अंतर करने की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और विद्यार्थियों में उनके द्वारा विकसित किए जाने वाले मूल्यों से भी मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना और ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज के कल्याण के प्रति सजग हो। उन्होंने बताया कि वे शरणार्थी नहीं थे, हालांकि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन उस समय उनके लिए यह शब्द गलत इस्तेमाल किया गया था. वे संघर्षरत योद्धा थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष किय।  भागवत ने कहा कि हम सभी, भारत को एकजुट रखने की वह लड़ाई हार गए. लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने करियर नहीं चुना, उन्होंने धन नहीं चुना. उन्होंने देश को चुना, उन्होंने अपने धर्म को चुना।  RSS प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 साल की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का मौका देते हैं।  वहीं, जीवन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से उठने की कोशिश करनी चाहिए। 

‘बम बम भोले’ से गूंजा जम्मू, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना, श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

 जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा। अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’ पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।  जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है।  कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया।  ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं।  हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़ प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं।  उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की। जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है। इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है। भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया … Read more