samacharsecretary.com

ट्रंप के रूस प्रतिबंध कानून से भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, जानें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  ऐतिहासिक 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर कर इसे कानूनी रूप दे दिया है। इस कानून के सामने आते ही वैश्विक शेयर और कमोडिटी बाजारों में हलचल मच गई है। मीडिया में यह सुर्खियां तैर रही हैं कि वॉशिंगटन अब रूस से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम दंडात्मक टैरिफ लगाने जा रहा है। हालांकि, अगर इस नए कानून की बारीकियों और कानूनी प्रावधानों को समझें, तो तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है। 'अधिकार मिलना' और 'लागू करना'- दो अलग बातें अमेरिकी संसद ने व्हाइट हाउस को रूसी ऊर्जा खरीदारों पर लगाम कसने के लिए नया कानूनी अधिकार दे दिया है। लेकिन कानून में इसका प्रावधान ऐसा रखा गया है जो राष्ट्रपति को तुरंत फैसला लेने के बजाय कूटनीतिक सौदेबाजी की पूरी छूट देता है। 0 से 100% की फ्लेक्सिबल रेट: कानून में यह अनिवार्य नहीं है कि ट्रंप तुरंत 100% ही टैरिफ थोप दें। यह दर शून्य से लेकर 100 प्रतिशत के बीच कुछ भी रखी जा सकती है। 30 दिनों की मोहलत: कानून लागू होने के बाद व्हाइट हाउस के पास 30 दिनों का समय होगा, जिसके बाद ही यह समीक्षा की जाएगी कि किन देशों ने रूसी ऊर्जा की नई खरीद की है। 'टॉप-5' खरीदारों की समीक्षा: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) हर 180 दिनों में दुनिया के उन 5 सबसे बड़े देशों की लिस्ट की समीक्षा करेगा जो रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस आयात करते हैं। राष्ट्रपति के पास 'राष्ट्रीय हित' में छूट देने का वीटो अधिकार इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें राष्ट्रपति को असीमित विवेकाधिकार दिए गए हैं। अगर ट्रंप प्रशासन को लगता है कि किसी देश पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था या उसके रणनीतिक गठबंधनों को नुकसान पहुंचेगा, तो राष्ट्रपति इस टैरिफ को टाल या पूरी तरह माफ भी कर सकते हैं। अगर कोई देश धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, तो उस पर टैरिफ की दरों को घटाया भी जा सकता है। अमेरिका की तरफ से भारतीय सामानों पर तुरंत भारी-भरकम टैरिफ न लगाने के पीछे तीन प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: अमेरिका में महंगाई बढ़ने का डर: भारत से अमेरिका जाने वाले उपभोक्ता सामानों पर 100% ड्यूटी लगाने से खुद अमेरिकी जनता के लिए दैनिक चीजें बेहद महंगी हो जाएंगी, जिससे अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो सकती है। द्विपक्षीय व्यापार समझौता: नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच इस समय एक व्यापक व्यापार समझौते पर संवेदनशील बातचीत चल रही है। यह नया कानून अमेरिकी मेज पर बातचीत का पलड़ा भारी करने का एक औजार है, न कि तुरंत चलाया जाने वाला हथौड़ा। वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप: अगर भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता को अचानक विश्व बाजार से काट दिया जाता है, तो पूरे यूरोप और एशिया में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे क्रूड की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। क्या है भारत का रुख? विदेश मंत्रालय ने इस कानून के बनने के बाद दोहराया है कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय का कहना है कि भारत बाजार की स्थितियों के हिसाब से अलग-अलग देशों से तेल खरीदता रहेगा और देश के आर्थिक और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कानूनी और कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे।

दिशा सालियान के पिता का बड़ा कदम, आदित्य ठाकरे को भेजेंगे 500 करोड़ का नोटिस

 मुंबई दिवंगत नेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रही चुकीं दिशा सालियन की मौत केस में हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। दिशा के पिता सतीश सालियन ने उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को आरोपी बताते हुए 500 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। यह नोटिस थमाने वह खुद शनिवार की शीम चार बजे के करीब मातोश्री जाने वाले हैं। आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे अपने बेटे के साथ इसी निजी आवास में रहते हैं। सतीश सालियान ने इसके लिए पुलिस से सुरक्षा भी मांगी है। सुरक्षा की यह मांग मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए की गई है। सालियान ने इस दौरान किसी भी संभावित बाधा, अप्रिय घटना या टकराव की आशंका जताई है। पत्र में कहा गया है कि सालियान और उनकी लीगल टीम को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध करने का अनुरोध किया है ताकि बिना किसी रुकावट या अप्रिय घटना के नोटिस दिया जा सके। मुंबई पुलिस से मौके पर आवश्यक पुलिस कर्मियों को तैनात करने और सालियान एवं उनके कानूनी प्रतिनिधियों को मातोश्री प्रवास के दौरान सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया है। इससे पहले CBI को लिखे एक पत्र में उन्होंने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने FIR में IPC की धारा 409 जोड़ने और बलात्कार, हत्या, सबूत मिटाने और मामले को दबाने के संबंध में चश्मदीदों और अन्य अहम गवाहों के बयान दर्ज करने की भी मांग की है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे दिशा सालियन की मौत के मामले पर तब तक कुछ न बोलें जब तक उनके पास सबूत न हों। रवींद्र चव्हाण ने क्या कहा? BJP ने फिलहाल दिशा सालियन मामले को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया है। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इस संबंध में अपनी पार्टी के सहयोगियों को अहम निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि पार्टी के हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी को अपनी बात का ध्यान रखना चाहिए और बिना सबूत के कभी कुछ नहीं बोलना चाहिए। रवींद्र चव्हाण ने कहा कि जब तक किसी को पूरी जानकारी न हो या ठोस सबूत न हों तब तक ऐसे मामलों पर बात नहीं करनी चाहिए। दिशा सालियन का मामला क्या है? दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की आठ जून 2020 को एक इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने से मौत हो गयी थी। इसके छह दिन बाद ही 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत का भी निधन हो गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आदित्य ठाकरे सहित कई व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। एफआईआर में आदित्य ठाकरे के अलावा डिनो मोरिया, रोहन रॉय, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे और परमबीर सिंह समेत कई लोगों के नाम का जिक्र है।

ईरान में बिना हिजाब महिलाओं ने लगाई दौड़, वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा तेज

तेहरान  ईरान में कानून के तहत हिजाब पहनना अनिवार्य है। लेकिन हाल ही में ईरान की राजधानी तेहरान से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें महिलाएं बिना हिजाब या स्कार्फ पहने ही 10 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लेती नजर आईं। ईरान से सामने आए इस वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा है। शुक्रवार को वेलायत पार्क में हुई 'तेहरान 10K' दौड़ में कई महिलाओं को बिना सिर ढके दौड़ते देखा गया। बिना हिजाब के दौड़ लगाती नजर आईं ईरानी महिलाएं तेहरान में आयोजकों ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग दौड़ का आयोजन किया था, जिसमें महिलाओं की दौड़ में 10 किलोमीटर के कोर्स के दो चक्कर शामिल थे। हालांकि, बिना हिजाब के दौड़ने वाली महिलाओं के कुछ वीडियो सरकार के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी शेयर किए गए। इसने लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि ईरानी कानून के तहत सार्वजनिक जगहों पर बिना हिजाब के दिखना मना है। ईरानी महिलाओं की इस दौड़ ने लोगों का ध्यान इसलिए भी खींचा, क्योंकि इससे पहले किश द्वीप पर महिलाओं की सड़क दौड़ का आयोजन किया गया था, तब अधिकारियों ने उन प्रतिभागियों पर कार्रवाई की थी, जिन्होंने बिना सिर पर स्कार्फ पहने दौड़ में हिस्सा लिया था। ईरान में हिजाब को लेकर कानून 2022 में 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' (Woman, Life, Freedom) विरोध प्रदर्शनों के बाद से कई बार ऐसा देखा गया है कि ईरानी महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर बिना सिर पर स्कार्फ पहने दिखती हैं। ये विरोध प्रदर्शन मोरालिटी पुलिस की हिरासत में महसा 'जीना' अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए थे। हालांकि ईरान की सड़कों और कुछ सार्वजनिक जगहों पर बिना सिर ढके दिखना आम हो गया है, फिर भी अनिवार्य हिजाब ईरानी कानून का हिस्सा बना हुआ है। इसे अलग-अलग तरीकों से लागू किया जाता है। ईरान में सरकारी दफ्तरों और कई आधिकारिक जगहों पर महिलाओं के लिए अंदर जाने के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना अभी भी जरूरी है।

मेडिकल स्टोर्स पर CCTV लगाने की तैयारी, केमिस्ट एसोसिएशन ने जताया विरोध

नई दिल्ली अगर आप अपने घर के पास किसी मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक या कफ सिरप खरीदने जाते हैं, तो बहुत जल्द आपको एक CCTV कैमरे की नजर में खरीदारी करनी पड़ सकती है। भारत की शीर्ष दवा सलाहकार संस्था ने देश भर की हर केमिस्ट दुकान पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करने की सिफारिश की है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर लगाम कसना है, लेकिन इस फैसले ने देश के छोटे दवा दुकानदारों की नींद उड़ा दी है। औषध तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) ने 27 अगस्त को हुई अपनी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। बोर्ड ने बिक्री केंद्र पर सीसीटीवी लगाने और सप्लाई चेन में नारकोटिक व साइकोट्रॉपिक (NDPS) दवाओं के पाई-पाई का हिसाब रखने की सिफारिश की है। अब यह प्रस्ताव अंतिम मुहर और क्रियान्वयन के लिए भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के पास है। क्यों पड़ी सीसीटीवी की जरूरत? केमिस्ट दुकानों पर कैमरों की निगरानी का विचार नया नहीं है। लंबे समय से दवा नियंत्रक अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि नशीली दर्द निवारक गोलियां और आदत डालने वाले कफ सिरप वैध सप्लाई चेन से चोरी-छिपे निकलकर अवैध बाजार तक पहुंच रहे हैं। बच्चों में नशीली दवाओं की लत रोकने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी सख्त निगरानी की मांग की थी। सरकार का मानना है कि सीसीटीवी की फुटेज से एक ऐसा डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा, जिससे यह पता लगाना आसान हो जाएगा कि कौन सा दुकानदार बिना डॉक्टर के पर्चे के नशीली दवाएं बेच रहा है। '50 हजार से 1 लाख का खर्च, कैसे चलाएं दुकान?' सरकार के इस प्रस्ताव के सामने आते ही देश भर के केमिस्टों का गुस्सा फूट पड़ा है। 15 लाख से ज्यादा सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले देश के सबसे बड़े दवा संगठन 'ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' (AIOCD) ने 17 सितंबर को स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को एक आपातकालीन पत्र लिखा है। दवा दुकानदारों का कहना है कि 6 से 8 कैमरे, DVR/NVR सिस्टम, हार्ड डिस्क स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट और मेंटेनेंस मिलाकर प्रति दुकान 50,000 रुपए से 1,00,000 रुपए तक का भारी-भरकम खर्च आएगा। मामूली मार्जिन पर काम करने वाले छोटे दुकानदारों के लिए यह रकम जुटाना बेहद मुश्किल है। उनका कहना है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लगातार बिजली कटौती होती है और इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति खराब है। ऐसे में 24 घंटे लगातार रिकॉर्डिंग करना तकनीकी रूप से नामुमकिन है। बड़े कॉर्पोरेट फार्मेसी ब्रांड्स तो यह खर्च उठा लेंगे, लेकिन गांवों और छोटे कस्बों में 'हेल्थ फॉर ऑल' के दौर से सेवा दे रहे छोटे केमिस्ट भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। 'कैमरे दवा की जांच नहीं कर सकते, फैक्ट्री से ही हो ट्रैकिंग' तमिलनाडु केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (TNCDA) के पूर्व अध्यक्ष रामचंद्रन मन्नारगुडी और अन्य खुदरा दवा विक्रेताओं का तर्क है कि कैमरे यह जांच नहीं कर सकते कि पर्चा असली है या नकली, जिसकी जानकारी पहले से ही बिलिंग रजिस्टर में दर्ज होती है। दुकानदारों ने सरकार से मांग की है कि इस नियम को तुरंत वापस लिया जाए या फिर ग्रामीण दुकानदारों को सरकार खुद पूरी सब्सिडी दे। उनका सुझाव है कि रिटेल दुकानदारों पर नियम थोपने के बजाय सरकार को दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों से ही 'ट्रैक एंड ट्रेस' सिस्टम लागू करना चाहिए ताकि नशे के कारोबार पर असल नकेल कसी जा सके।

AI पर भरोसा पड़ा भारी, गलत रिपोर्ट के बाद US आर्मी ने हमले की तैयारी की

बीजिंग  आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल कई सेक्टर में हो रहा है, जिसमें सेना का भी नाम शामिल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की एक गलती की वजह से अमेरिका और चीन के बीच युद्ध छिड़ सकता था. दरअसल, ईरान और अमेरिका युद्ध के बीच एक खुफिया रिपोर्ट तेजी से सर्कुलेट हुई थी।  सीएनएन की रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में मौजूद एक चीनी जहाज परमाणु हथियार प्रोग्राम से संबंधित सामान लेकर जा रहा है, जो जानकारी गलत थी।   रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना ने चीनी जहाज को रोकने की योजना बनाई थी. साथ ही हथियारबंद जवान जहाज पर चढ़ने की तैयारी में थे और अमेरिका सेना का विमान भी हवा में था।  AI की मदद से रिपोर्ट तैयार की थी  एक्शन लेने से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने रिपोर्ट की गहराई से जांच की, जिसके बाद पता चला कि यह रिपोर्ट स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के एक विश्लेषक ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से तैयार की थी।  AI ने गलत सामान की पहचान कर ली थी  AI ने जहाज में मौजूद सामान की गलत पहचान कर ली थी, जिसके बाद कार्रवाई को तुरंत रोका गया. हालांकि रिपोर्ट्स में यह नहीं बताया है कि वास्तव में जहाज के अंदर क्या सामान था।  फिर पता चला कि वह रिपोर्ट पूरी तरह से गलत थी. अगर अमेरिकी चीनी जहाज के खिलाफ एक्शन लेता तो दोनों देशों के बीच सैन्य युद्ध में तब्दील हो सकता था।  यह घटना युद्ध के दौरान टारगेट तय करने में नए जोखिम सामने ला सकती है. अमेरिका द्वारा चीनी जहाज के सामान को पहचाने में भी यह गलती सामने आई है. एक्सपर्ट भी सलाह दे चुके हैं कि AI पर पूरी तरह से निर्भरता सही नहीं है।  एक्सपर्ट लंबे समय से सलाह दे रहे हैं कि अगर कोई देश गलत या खराब डेटा पर AI की मदद से निर्भर होते हैं तो वह कई गंभीर फैसलों में गलत सलाह दे सकता है।  अमेरकी सेना में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा  रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी अपने काम में AI का काफी इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही सेना द्वारा जुटाई गई जानकारी को एनालाइज करने के लिए भी AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. हमले का लक्ष्य चुनने से लेकर बजट, लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे कामों में भी AI का इस्तेमाल बढ़ा है।  चैटबॉट ने खुफिया जानकारी को गलत तरीके से जोड़ा है  इस मामले में एक्सपर्ट ने हवाई स्थित US स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसिफिक से मिली जहाज की मैनफेस्ट संबंधी खुफिया जानकारी को लेकर चैटबॉट से सवाल किया है. हालांकि चैटबॉट को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. यूएस स्पेशल ऑपरेशन कमांड पेसेफिक और पेंटागन ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है।  अमेरिका AI पर निर्भरता क्यों बढ़ा रही है?   अमेरिका सेना AI को इसलिए तेजी से फॉलो कर रही हैं ताकि युद्ध के मैदान में वे तेजी से फैसले ले सकें. अमेरिका सेना का मानना है कि युद्ध के मैदान में टारगेट करने में और सैन्य संसाधन आदि को कहां भेजना है, जैसे फैसलों में मदद कर सकता है।  AI हैलुसिनेशन बड़ा खतरा  AI की वजह से इंसान गलत और भ्रामक फैसले तक पहुंच सकते हैं. चीन के जहाज वाली घटना सबसे ताजा उदाहरण है. AI पर निर्भरता कई लोगों के लिए जानलेवा तक साबित हो सकती है। 

51 हजार युवाओं को मिली नौकरी की सौगात, नियुक्ति पत्र पाकर खिले चेहरे; PM मोदी ने कही ये बात

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 20वें रोजगार मेले में 51 हजार से अधिक नवनियुक्त युवाओं को सरकारी सेवाओं के नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि वे ऐसे समय में भारत सरकार से जुड़ रहे हैं, जब देश 2047 तक विकसित भारत बनाने के बड़े लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवाओं को सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसे फैसले लेने चाहिए, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को मजबूत करें. उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं से कहा कि इस उपलब्धि के पीछे उनकी मेहनत के साथ-साथ माता-पिता और परिवार के सदस्यों की भी तपस्या और योगदान है।  पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय युवाओं की प्रतिभा और कौशल ने पूरी दुनिया का भरोसा जीता है. दुनिया को भारत के इनोवेटर्स, उद्यमियों और युवा शक्ति से काफी उम्मीदें हैं. उन्होंने हाल में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे, बल्कि उद्यमी, किसान, महिलाएं और युवा भी इसके सक्रिय भागीदार बनें. इसी सोच के तहत ब्रिक्स कनेक्ट और ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल जैसी पहल की गई है।  40 देशों के साथ FTA प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं. उनके मुताबिक, इन समझौतों से भारतीय उद्यमियों के लिए नई साझेदारियों और बाजारों के रास्ते खुल रहे हैं तथा युवाओं के लिए करियर के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने पर लगातार जोर दे रही है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्किल इंडिया मिशन और अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने की पहल इसी दिशा में हैं. प्रधानमंत्री ने पीएम सेतु योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एक हजार सरकारी आईटीआई को आधुनिक बनाया जा रहा है और इसमें उद्योग जगत की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है।  तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और करीब आधे मान्यता प्राप्त स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसके जरिए करीब दो करोड़ युवाओं को पहली बार कार्यबल का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा. पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को 15 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन देने और नए रोजगार पैदा करने वाले नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहित करने की व्यवस्था का उन्होंने जिक्र किया।  जीडीपी और निवेश में वृद्धि प्रधानमंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है और निवेश में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि के पीछे पिछले वर्षों में किए गए सुधारों का बड़ा योगदान है. नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों से उन्होंने सुधारों की गति को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. पीएम मोदी ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों का हर फैसला और फाइल पर किया गया हस्ताक्षर युवाओं की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र का उद्देश्य युवाओं के रास्ते की बाधाएं हटाना, उनके विचारों को अवसर देना और नवाचार के जरिए निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करना होना चाहिए।  स्किल को लगातार बेहतर बनाने की सलाह प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त कर्मचारियों से अपनी स्किल लगातार बेहतर करने और नई तकनीक तथा प्रणालियों को समझने की अपील की. उन्होंने मिशन कर्मयोगी का जिक्र करते हुए कहा कि आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म से 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़ चुके हैं और नए कर्मचारियों के लिए कर्मयोगी प्रारंभ को विशेष रूप से तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार की असली ताकत देश के नागरिकों का विश्वास है. किसी भी मंत्रालय या विभाग में काम करने वाला कर्मचारी किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है. किसी बुजुर्ग की पेंशन, विद्यार्थी की छात्रवृत्ति या किसान को मिलने वाली सुविधा में सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी जुड़ी होती है. प्रधानमंत्री ने युवाओं से इसी जिम्मेदारी को समझते हुए देशसेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। 

अजित डोभाल ने बताया भारत की GDP का भविष्य, 20 साल में 38 ट्रिलियन डॉलर का अनुमान

रुड़की भारत की GDP अगले 20 साल में कितनी हो सकती है, इसका अनुमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने बताया है. IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. मौजूदा GDP 4.015 ट्रिलियन डॉलर है, जो अगले 20 साल में बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. उन्होंने कहा कि छात्र ऐसे दौर में रह रहे हैं, जब उनके भविष्य में काफी संभावनाएं हैं।  दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए अजित डोभाल ने कहा कि छात्र भाग्यशाली हैं कि वे बदलाव के ऐसे दौर में रह रहे हैं. उनके मुताबिक, भारत में बड़े बदलाव हो रहे हैं और देश एक शानदार भविष्य की ओर बढ़ रहा है।  इस दौरान अजित डोभाल ने 2047 तक के समय को 'अमृत काल' कहे जाने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह वाकई एक शानदार अमृत काल है. डोभाल ने बताया कि भारत की मौजूदा GDP 4.015 ट्रिलियन डॉलर है, जो अगले 20 साल में बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।  भगवान राम के साहस की दी मिसाल छात्रों को जिंदगी में साहसी बनने की सलाह देते हुए अजित डोभाल ने भगवान राम का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि ऋषि विश्वामित्र ने राक्षसों का संहार करने के लिए भगवान राम को चुना था. इसकी वजह उनका साहसी स्वभाव था।  सिक्किम के शेरपा से सीखे थे सफलता के 3 मंत्र अपने भाषण में डोभाल ने करियर के शुरुआती दिनों का एक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि जब वह सिक्किम में तैनात थे, तब एक शेरपा से उन्हें जीवन में सफलता के तीन मंत्र मिले थे।  पहला मंत्र था कि आपको पता होना चाहिए कि आप नक्शे पर कहां खड़े हैं. दूसरा यह कि आपको पता होना चाहिए कि आपको जाना कहां है. तीसरा मंत्र था कि वहां पहुंचने का रास्ता क्या है और वापस कैसे आना है. डोभाल ने छात्रों के साथ सफलता के ये तीन मंत्र साझा किए। 

बांग्लादेश में सिलसिलेवार 7 ब्लास्ट से सनसनी, 200 स्थानों पर देसी बमों का खौफ

ढाका  बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक के बाद एक हुए कई धमाकों और आगजनी की घटनाओं ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है. शहर के अलग-अलग 7 प्रमुख इलाकों में देसी बम यानी कॉकटेल बम के धमाके हुए एक बस फूंक दी गई है. इन अचानक हुई वारदातों के बाद ढाका में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने पूरे शहर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. हालात पर काबू पाने और उपद्रवियों को पकड़ने के लिए ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने शहरभर में 200 से भी ज्यादा नाके लगा दिए हैं. पुलिस की गाड़ियां हर सड़क पर गश्त कर रही हैं और आने-जाने वाली गाड़ियों की कड़ी तलाशी ली जा रही है. सुरक्षा के इस कड़े घेरे के बीच पुलिस उन चेहरों की तलाश में जुटी है जिन्होंने इस पूरी वारदात को अंजाम दिया है।  7 अलग-अलग इलाकों में धमाके और दहशत का माहौल ढाका शहर में यह दहशत किसी एक जगह तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक साथ कई इलाकों को निशाना बनाया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहर के कम से कम 7 बड़े और व्यस्त इलाकों में धमाके सुने गए. इनमें मालीबाग, मोहाखाली, अगरगांव, जात्राबारी, मोगबाजार, बाबूबाजार और रामपुरा जैसे इलाके शामिल हैं. इसके अलावा ढाका कॉलेज और साइंस लैबोरेटरी के पास भी एक धमाके की खबर सामने आई है. इन धमाकों में कम से कम तीन लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया. धमाकों की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि काफरुल पुलिस स्टेशन के पास खड़ी एक बस में उपद्रवियों ने आग लगा दी. धुएं के गुबार और जलती बस की तस्वीरों ने लोगों के मन में डर का माहौल पैदा कर दिया।  पूरा शहर बना छावनी, 200 से ज्यादा जगहों पर नाकेबंदी धमाकों और आगजनी की इस श्रृंखला के बाद ढाका पुलिस तुरंत हरकत में आ गई. शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरे ढाका में पुलिस की मौजूदगी अचानक बढ़ा दी गई है. ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) के मीडिया एंड पब्लिक रिलेशंस विंग के अतिरिक्त उप आयुक्त नियाज मेहदी ने बताया कि इन घटनाओं के बाद जनता की सुरक्षा को देखते हुए शहरभर में 200 से अधिक चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं. पुलिस हर छोटी-बड़ी गाड़ी को रोककर उसकी जांच कर रही है. क्या आप जानते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में नाके लगाने का मकसद सिर्फ संदिग्धों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच सुरक्षा का अहसास कायम करना भी है? पुलिस की टीमें चौबीसों घंटे गश्त कर रही हैं और पूरे शहर पर कड़ी नजर रखी जा रही है।  24 घंटे में 515 लोग गिरफ्तार, क्या धमाकों से जुड़ा है कनेक्शन? घटना के बाद पुलिस ने सिर्फ नाकेबंदी ही नहीं की, बल्कि पूरे शहर में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन भी शुरू कर दिया. पिछले 24 घंटों के दौरान (सुबह 10 बजे तक) ढाका पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 515 लोगों को गिरफ्तार किया है और 47 अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. हालांकि पुलिस का स्पष्ट कहना है कि यह आंकड़े पूरे शहर में चलाए गए एक व्यापक पुलिस अभियान के हैं और गिरफ्तार किए गए सभी लोग सीधे तौर पर इन बम धमाकों या आगजनी से जुड़े हों, ऐसा जरूरी नहीं है. लेकिन इस कार्रवाई से यह साफ है कि पुलिस किसी भी कीमत पर शहर का माहौल खराब नहीं होने देना चाहती।  किस इलाके से पकड़े गए कितने आरोपी? देखें पूरा ब्योरा पुलिस की इस विशाल कार्रवाई का ब्योरा देखें तो पता चलता है कि ढाका का कोई भी हिस्सा जांच से अछूता नहीं रहा. अलग-अलग डिवीजनों में हुई गिरफ्तारियों के आंकड़े पुलिस की सख्ती को बयां करते हैं:         मीरपुर डिवीजन: यहां सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई और 120 लोगों को हिरासत में लिया गया.         तेजगांव डिवीजन: दूसरे नंबर पर तेजगांव रहा, जहां से 92 लोगों की गिरफ्तारी हुई.         मोतीझील डिवीजन: इस इलाके से पुलिस ने 76 लोगों को पकड़ा.         वारी डिवीजन: यहां पुलिस ने 64 लोगों को गिरफ्तार किया.         उत्तरा डिवीजन: इस क्षेत्र से 46 संदिग्ध पुलिस की गिरफ्त में आए.         गुल्शन डिवीजन: यहां से 37 लोगों को हिरासत में लिया गया.         लालबाग डिवीजन: इस इलाके से 34 लोगों को पकड़ा गया.         रमना डिवीजन: यहां 30 लोगों की गिरफ्तारी दर्ज की गई.         डिटेक्टिव ब्रांच (DB): इसके अलावा पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने भी अलग से कार्रवाई करते हुए 16 लोगों को गिरफ्तार किया. हथियारों का जखीरा बरामद, 53 लोहे की कीलों से खुला राज इस तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को सिर्फ संदिग्ध ही नहीं मिले, बल्कि भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुआ है. पुलिस ने छापेमारी के दौरान 2 विदेशी पिस्टल, 2 मैगजीन और 10 राउंड जिंदा कारतूस जब्त किए हैं. इसके अलावा 3 बड़े कुल्हाड़े (मछेटे) और 5 चाकू भी बरामद किए गए हैं. लेकिन सबसे चौंकाने वाला खुलासा फटे हुए कॉकटेल बमों के मलबे से हुआ. पुलिस को धमाके की जगहों से 53 लोहे की कीलें मिली हैं. इन कीलों से यह साफ पता चलता है कि इन बमों को बहुत ही देसी और खतरनाक तरीके से तैयार किया गया था ताकि वे फटने पर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकें. हालांकि, पुलिस ने अभी तक इसके फोरेंसिक ब्योरे को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है और न ही यह पुष्टि की है कि ये कीलें सभी 7 धमाकों से जुड़ी हैं या नहीं।  नशीले पदार्थों और नकदी की बड़ी बरामदगी सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस के हाथ सिर्फ हथियार ही नहीं लगे, बल्कि भारी मात्रा में ड्रग्स और अन्य सामान भी जब्त किया गया है. इस दौरान पुलिस ने 94.35 किलोग्राम गांजा, 11,167 याबा गोलियां और 121.3 ग्राम हेरोइन जब्त की. इसके साथ ही विदेशी शराब की 3 बोतलें, बियर के 20 कैन, एक प्राइवेट कार, 5 मोबाइल फोन और 7,200 टका नकद बरामद किए गए हैं. पुलिस की यह व्यापक कार्रवाई यह दर्शाती है कि शहर में आपराधिक तत्वों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छिड़ चुका है।  आरोपियों … Read more

DUSU चुनाव में ABVP का दबदबा, तीन पद जीते; निर्दलीय दीपांशु शौकीन बने उपाध्यक्ष

नई दिल्ली दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने बाजी मार ली है. ABVP ने अध्यक्ष सहित तीन पदों पर जीत हासिल की है. वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की है. शुरुआत में 10 राउंड तक ABVP और NSUI की फाइट देखी गई. अध्यक्ष पद पर शुरू में कभी ABVP तो कभी NSUI आगे चल रही थी. इसके बाद एबीवीपी के यश डबास फिर आगे निकल गए।  मालूम हो कि शुक्रवार को छात्रसंघ चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान हुआ था. चुनाव में RSS समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस समर्थित भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के बीच मुख्य मुकाबला था. भारतीय राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव पर सबकी निगाहें टिकी रहती हैं. इस बार का चुनाव और खास था, क्योंकि यह जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद हो रहा था. चुनाव के दौरान ही सत्य निकेतन में पीजी गिरने का मामला भी खूब सुर्खियों में रहा था, जिसमें कई बच्चों की मौत हुई थी।  यश बने अध्यक्ष अध्यक्ष पद के लिए ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा.  मतगणना के कई राउंड में दोनों उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही. अंतिम नतीजे में यश डबास ने अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया।  यश डबास के साथ ABVP के पैनल से सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने भी जीत दर्ज की। इस तरह ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर कब्जा किया।  अध्यक्ष पद के लिए ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा. मतगणना के कई राउंड में दोनों उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही. अंतिम नतीजे में यश डबास ने अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया।  यश डबास के साथ ABVP के पैनल से सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने भी जीत दर्ज की। इस तरह ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर कब्जा किया।  उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत उपाध्यक्ष पद का नतीजा ABVP और NSUI से अलग रहा. इस पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की है. मतगणना के दौरान शौकीन लगातार मजबूत बढ़त बनाए हुए थे और आखिरकार उन्होंने उपाध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया।  चारों पदों की तस्वीर      अध्यक्ष: यश डबास (ABVP)     उपाध्यक्ष: दीपांशु शौकीन (निर्दलीय)     सचिव: रिया छाबड़ी (ABVP)     संयुक्त सचिव: लक्ष्य राज सिंह (ABVP) अध्यक्ष पद यश डबास (एबीवीपी)- 18786 वोट विजय शंकर मीना (एनएसयूआई)- 18707 वोट उपाध्यक्ष पद ईशू मौर्य (एबीवीपी)- 12739 वोट वीर चतरथ (एनएसयूआई)- 3496 वोट दीपांशु शौकीन (निर्दलीय)- 24943 वोट सचिव पद रिया छावड़ी (एबीवीपी)- 16145 वोट नम्रता चौधरी (एनएसयूआई)- 12223 वोट संयुक्त सचिव पद लक्ष्य राज सिंह (एबीवीपी)- 12435 वोट गोपाल चौधरी (एनएसयूआई)- 12647 वोट विशेष यादव (एससीएस)- 12638 वोट डूसू चुनाव 2026 की मतगणना के 16वें राउंड के नतीजे अध्यक्ष पद यश डबास (एबीवीपी)- 1471 विजय शंकर मीना (एनएसयूआई)- 1686 उपाध्यक्ष पद ईशू मौर्य (एबीवीपी)- 1069 वीर चतरथ (एनएसयूआई)- 223 दीपांशु शौकीन (स्वतंत्र)- 2261 सचिव पद रिया छावड़ी (एबीवीपी)- 1414 नम्रता चौधरी (एनएसयूआई)- 922 संयुक्त सचिव पद लक्ष्य राज सिंह (एबीवीपी)- 1020 गोपाल चौधरी (एनएसयूआई)- 735 विशेष यादव (एससीएस)- 1510  डूसू चुनाव 2026 की मतगणना के 15 राउंड के बाद ABVP के यश डबास निकले आगे कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ मतगणना  DUSU चुनाव की मतगणना आद सुबह 8 बजे शुरू हो गई थी. मिली जानकारियों  के मुताबिक, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2,000 से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती की गई है. मतगणना केंद्र के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के साथ प्रमुख सड़कों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. अलग-अलग जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी और वैलिड आईडी कार्ड के बिना छात्रों को कॉलेज परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। 

तिरुपति लड्डू को लेकर बड़ा खुलासा, घी में पाम ऑयल मिलाने का आरोप

तिरुमला तिरुपति के मशहूर लड्डू प्रसाद को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जिस घी को गाय का शुद्ध घी बताकर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी टीटीडी को सप्लाई किया जाता था, उसके बारे में प्रवर्तन निदेशालय ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं. ED के मुताबिक इस कथित घी में असली दूध की मलाई से निकले घी की जगह रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया. इतना ही नहीं, इसे घी जैसा बनाने के लिए कई रसायन भी मिलाए जाने का आरोप है. मामला 2019 से 2024 के बीच टीटीडी को कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति से जुड़ा है. जांच एजेंसी के अनुसार इस दौरान करीब 230 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी वाली सप्लाई हुई।  मामला तब और गंभीर हो गया जब ED ने इस केस में सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड केप्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया. एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी अवधि में करीब 96 करोड़ रुपए मूल्य का कथित मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की कंपनी ने तैयार किया था. यानी मामला सिर्फ किसी छोटे स्तर की मिलावट का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर आपूर्ति और कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है. हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि ये ED की जांच में सामने आए आरोप हैं. अदालत में इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित मिलावटी घी कैसे तैयार हुआ, किस तरह सप्लाई किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।  घी में क्या-क्या मिलाने का आरोप? ED के मुताबिक कथित मिलावटी घी तैयार करने में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन का इस्तेमाल किया गया. ये सभी वनस्पति तेल हैं और असली गाय के घी से अलग होते हैं. एजेंसी का आरोप है कि इनका इस्तेमाल करके ऐसा पदार्थ तैयार किया गया, जिसे घी के रूप में टीटीडी तक पहुंचाया गया. यही इस मामले का सबसे अहम हिस्सा है. क्योंकि तिरुपति का लड्डू सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद है. हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु तिरुमला मंदिर पहुंचते हैं और लड्डू प्रसाद लेकर जाते हैं. ऐसे में घी की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल सीधे श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता दोनों से जुड़े हैं।  सिर्फ तेल नहीं, केमिकल्स के इस्तेमाल का भी आरोप ED ने अपनी जांच में कुछ खास केमिकल्स के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है. एजेंसी के मुताबिक कथित मिलावटी घी बनाने की प्रक्रिया में एमजी-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवेसिट सॉफ्ट 400 और एसीटिक एसिड एस्टर जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसी का दावा है कि इन चीजों की मदद से वनस्पति तेलों से ऐसा मिश्रण तैयार किया गया, जिसे घी की तरह सप्लाई किया जा सके।  2019 से 2024 तक की सप्लाई पर जांच यह पूरा मामला 2019 से 2024 के बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को कथित तौर पर की गई घी की आपूर्ति से जुड़ा है. ED के अनुसार इस अवधि में कथित फर्जी या मिलावटी घी की सप्लाई का कुल मूल्य करीब 230 करोड़ रुपए था. इनमें से लगभग 96 करोड़ रुपए का कथित मिलावटी घी सुकृति फूड्स से जुड़ा बताया गया है. अब जांच का फोकस सिर्फ एक कंपनी पर नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर भी हो सकता है. किसी बड़े धार्मिक संस्थान तक इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री पहुंचने के लिए खरीद, गुणवत्ता जांच, परिवहन और भुगतान जैसी कई प्रक्रियाएं होती हैं. इसलिए जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि कथित मिलावट किस स्तर पर हुई और निगरानी की व्यवस्था में क्या हुआ।  कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी हलचल ED ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड केप्रमोटर कैलाश चंद मंगला को इस मामले में गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद जांच में कंपनी की भूमिका और कथित आपूर्ति की प्रक्रिया पर ध्यान बढ़ गया है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कंपनी ने कथित तौर पर किस तरह का घी तैयार किया और उसे गाय के घी के तौर पर कैसे सप्लाई किया गया. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित उत्पाद की खरीद और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं. फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि ED ने मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं और गिरफ्तारी जांच का हिस्सा है. अंतिम जिम्मेदारी अदालत में सबूतों के आधार पर तय होगी।  तिरुपति लड्डू से क्यों जुड़ा है इतना बड़ा मामला? तिरुपति बालाजी मंदिर का लड्डू प्रसाद देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. श्रद्धालुओं के लिए इसकी धार्मिक और भावनात्मक अहमियत बहुत ज्यादा है. इसलिए प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कोई भी सवाल सामान्य खाद्य मिलावट के मामले से कहीं बड़ा असर पैदा करता है. अगर जांच में ED के आरोप साबित होते हैं, तो यह सवाल भी उठेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित मिलावटी घी की आपूर्ति लंबे समय तक कैसे चलती रही।  अब जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी? इस मामले में सबसे बड़े सवाल हैं कि कथित मिलावटी घी की असली मात्रा कितनी थी, इसे किस-किस स्तर पर तैयार और सप्लाई किया गया और गुणवत्ता जांच के दौरान यह सामने क्यों नहीं आया. इसके अलावा यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि सप्लाई से जुड़े अन्य कारोबारी या संस्थान किस भूमिका में थे. ED की कार्रवाई के बाद मामले में आगे और गिरफ्तारियां या दस्तावेजी जांच हो सकती है. फिलहाल एजेंसी का दावा है कि 2019 से 2024 के बीच करीब 230 करोड़ रुपए की कथित संदिग्ध सप्लाई हुई और उसमें 96 करोड़ रुपए का कथित मिलावटी घी सुकृति फूड्स से जुड़ा था. इन आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।