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Ashwagandha पर नया नियम: पत्तियों के इस्तेमाल पर बैन, क्या जड़ है सुरक्षित? पूरी जानकारी

नई दिल्ली फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने खाने-पीने की चीजों में अपनी निगरानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से कई मिलावटी चीजों को पकड़ने के बाद अब FSSAI ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर सीधी रोक लगाई है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए है कि अश्वगंधा का इस्तेमाल सिर्फ उसकी जड़ और एक्सट्रैक्ट तक ही सीमित रखा जाए, पत्तियों के इस्तेमाल पर कंपनियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने साफ कर दिया है कि अश्वगंधा का इस्तेमाल फिर चाहे कच्चा हो या उसका एक्सट्रैक्ट उसकी अनुमति नहीं है। FSSAI के साथ आयुष मंत्रालय ने भी दवा और प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को यही निर्देश जारी किए हैं। एडवाइजरी जारी करते हुए सरकार ने सभी हेल्थ सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने खाद्य उत्पादों पर साफ-साफ लेबल के साथ लिखेंगे कि उनमें अश्वगंधा का कितने प्रतिशत इस्तेमाल किया गया है। क्या है अश्वगंधा अश्वगंधा (Ashwagandha) आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध जड़ी-बूटियों में से एक है। इसे पुराने समय से लोग दवाइयों के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। 'अश्वगंधा' शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है, अश्व (घोड़ा) और गंध (महक)। ऐसा कहा जाता है कि इससे घोड़े के पसीने जैसी महक आती है और इसे खाने से उसके जैसी ताकत। इसका पौधा छोटा और झाड़ीदार होता है, जिसमें पीले फूल और लाल फल निकलते हैं। आयुर्वेद में सालों से इसकी जड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे फायदेमंद माना जाता है। पत्तियों पर क्यों लगाई रोक? अश्वगंधा की पत्तियों में रिएक्टिव विथानोलाइड्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर के लिए टॉक्सिक माने जाता है। इसका सेवन करने से लिवर, पेट और नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। सेहत को मद्देनजर यूरोपीय कंट्री पोलैंड और हंगरी ने पहले से ही इन पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। दवा बनाने वाली कंपनियां सस्ते होने की वजह से इसकी पत्तियों का इस्तेमाल कर रही थी क्योंकि जड़ काफी महंगी मिलती है। अश्वगंधा की जड़ खाने के फायदे अश्वगंधा की जड़ खाने से सेहत को कई तरह के फायदे मिलते हैं लेकिन इसके सेवन का तरीका भी सही होना चाहिए। ज्यादा खाने से ये खतरनाक भी हो सकता है। चलिए आपको इसके फायदे और नुकसान बताते हैं। फायदे-     तनाव कम करना- रिसर्च के मुताबिक, अश्वगंधा शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) के स्तर को कम करता है, जो कि एक स्ट्रेस हार्मोन है। इससे दिमाग शांत रहता है और स्ट्रेस लेवल कंट्रोल में रहता है।     मांसपेशियां होंगी मजबूत- एथलीट और जिम जाने वाले लोग ताकत बढ़ाने के लिए इसे खाते हैं। इसे खाने से मसल्स मजबूत हो जाती है।     नींद की कमी- अश्वगंधा की जड़ का सेवन करने से अनिद्रा की समस्या नहीं रहती। अगर आपको कम नींद आती है, तो ये ठीक कर देगा।     स्पर्म क्वालिटी- अश्वंगधा पुरुषों के लिए काफी फायदेमंद होती है। यह टेस्टोस्टेरोन लेवल को बढ़ाकर प्रजनन क्षमता को बेहतर करती है। साथ ही स्पर्म क्वालिटी को सुधारती है। नुकसान-     हड्डियों में दर्द- ज्यादा अश्वगंधा खाने से हड्डियों में दर्द या थायरॉइड की समस्या हो सकती है।     ब्लड प्रेशर के मरीज- अश्वगंधा बीपी वाले मरीजों को बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। इसे खाने से ब्लड प्रेशर घट या बढ़ सकता है, जो जानलेवा हो सकता है।     लिवर पर असर- ज्यादा अश्वगंधा का सेवन आपके लिवर पर असर डाल सकता है। साथ ही पेट संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

चुनाव से पहले बंगाल में बैन: बाइक रैली और डबल राइडिंग पर रोक, जानें वजह

कोलकाता पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने मोटरसाइकिल के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाये हैं। आयोग द्वारा 20 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार की बाइक रैली की अनुमति नहीं होगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह देखा गया है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक दल बाइक रैलियां निकालते हैं, जिनके जरिए कई मामलों में मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs), पुलिस कमिश्नरों और पुलिस अधीक्षकों को संबोधित एक आदेश में CEO ने कहा कि मोटरसाइकिल रैलियों पर पूरी तरह से बैन है, इसमें कोई छूट नहीं है। एक चुनाव अधिकारी ने कहा, "आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा, इसलिए बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।" इसके अलावा, इस अवधि में शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक मोटरसाइकिलों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, सिवाय आपात स्थितियों जैसे चिकित्सा या जरूरी पारिवारिक कारणों के। बाइक पर पीछे बैठने पर भी रोक इस आदेश में कहा गया है कि सुबह छह बजे से शाम छह बजे के बीच भी पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) पर रोक रहेगी, हालांकि चिकित्सा आपात स्थिति या आवश्यक कार्य जैसे स्कूल बच्चों को ले जाने की स्थिति में छूट दी जा सकती है। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, हालांकि, मतदान के दिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक सीमित छूट दी जाएगी, जिसमें परिवार के सदस्यों को मतदान और आवश्यक कार्यों के लिए दोपहिया वाहन पर यात्रा की अनुमति होगी। संकरी गलियों से कैश या शराब ले जाने पर लगेगी रोक CEO के दफ़्तर के एक अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक पार्टियां कभी-कभी संकरी गलियों और उप-गलियों से कैश या शराब ले जाने के लिए मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करती हैं, जहाँ आमतौर पर मुख्य सड़कों पर चार-पहिया वाहनों पर नजर रखने वाली चौकियाँ नहीं होतीं। उनके अनुसार, "इन पाबंदियों का मकसद मतदाताओं को प्रलोभन देने के इस तरीके को खत्म करना और बिना किसी हिंसा के चुनाव का माहौल सुनिश्चित करना है।" अधिकारियों को इन निर्देशों का व्यापक प्रचार करने और जिला पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिये गये हैं। यह कदम मतदान से पहले के 48 घंटे के मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने की गतिविधियों, अवैध जुटान और चुनाव प्रक्रिया में बाधा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों के लिए मुश्किल चुनाव आयोग के इस आदेश से ऐप-आधारित डिलीवरी करने वालों पर इसके लागू होने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इनमें से कई लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए मोटरसाइकिलों पर निर्भर हैं और पूरी रात काम करते हैं। इस निर्देश में बाइक चलाने वालों की इस श्रेणी का कोई खास ज़िक्र नहीं है। आदेश में DEOs और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के साथ-साथ ज़िला और ब्लॉक-स्तर के प्रचार तंत्र के ज़रिए इन पाबंदियों का व्यापक प्रचार करें, और इनके सख़्त पालन और निगरानी के लिए आपस में तालमेल बिठाएँ। आदेश में कहा गया है, "किसी भी ऐसे उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में कोई रुकावट या बाधा पैदा हो।"

रॉबर्ट पेप ने समझाई ईरान की मजबूती, ‘चौथी सबसे बड़ी ताकत’ बनने की वजह

तेहरान  क्या दुनिया अब तक ईरान को समझने में बहुत बड़ी भूल कर रही थी? क्या पश्चिमी देश जिस ईरान को एक ‘कमजोर’ देश मान रहे थे, वह असल में दुनिया का एक नया पावर सेंटर बन चुका है? मशहूर अमेरिकी रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने कहा, दुनिया का नजरिया अब ईरान को लेकर पूरी तरह से बदल रहा है. उन्‍होंने एक्‍स पर ल‍िखा, ईरान अब वो नहीं, जो हम उसे समझ रहे थे।  ज‍िस वक्‍त ईरान अमेर‍िका के सामने सीना ठोककर खड़ा है, ठीक उसी वक्‍त रॉबर्ट पेप ने यह बातें कहीं. अमेरिकी टीवी शो ‘मॉर्निंग जो’ की एक चर्चा का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि अब तक पश्चिमी मीडिया में इस बात पर बहस होती थी कि ईरान कितना कमजोर हो चुका है. लेकिन अब अचानक पूरी बहस का रुख बदल गया है. अब वहां चर्चा इस बात पर हो रही है कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का क्या होगा और ईरान के साथ नेगोशिएशन कैसे किया जाए. पेप के मुताबिक, अब दुनिया समझ गई है कि ईरान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  बहुत बड़ा चेंज आ गया     पेप का कहना है कि यह वैश्विक नजरिए में एक बहुत बड़ा और गहरा बदलाव है. दुनिया अब ईरान को ‘सुलझाई जाने वाली एक समस्या’ के रूप में नहीं देख रही है. बल्कि अब उसे एक ऐसी ‘बड़ी ताकत’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लोहा मानना ही पड़ेगा. पेप के मुताबिक, दुनिया में नए ‘पावर सेंटर’ यानी शक्ति के केंद्र इसी तरह से उभरते हैं. उन्होंने बताया कि दो हफ्ते पहले ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अपने लेख में उन्होंने ठीक यही बात कही थी।      तब पेप ने लिखा था कि ईरान बिखर नहीं रहा है, बल्कि ‘होर्मुज’ का इस्तेमाल करके वह एक टिकाऊ ताकत बन रहा है. तब लोगों को उनकी बात अजीब लगी थी, लेकिन आज वही बात एक सच्चाई बन चुकी है. रॉबर्ट पेप ने समझाया कि आखिर ईरान के हाथ में ऐसी कौन सी चाबी है. इसका जवाब है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’. यह दुनिया का वो संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है. यह पूरी दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 25 फीसदी है।      एशिया से लेकर खाड़ी देशों की पूरी अर्थव्यवस्था इसी एक समुद्री रास्ते पर टिकी हुई है. पेप कहते हैं कि जो भी देश इस ‘चोकपॉइंट’ को कंट्रोल करेगा, वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की ताकत रखेगा. ईरान की इस नई ताकत के पीछे उसकी एक बेहद स्मार्ट रणनीति है. पेप इसे ‘दबदबा’ नहीं, बल्कि ‘डिनायल’ की नीति कहते हैं।      ईरान को इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की कोई जरूरत नहीं है. वह सिर्फ अपनी मिसाइलों, ड्रोन्स, समुद्री सुरंगों और अपनी शानदार भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल करके वहां एक लगातार बना रहने वाला ‘खतरा’ पैदा कर रहा है. इस रास्ते पर सिर्फ ‘अनिश्चितता’ का खौफ पैदा करना ही दुनिया का व्यवहार बदलने के लिए काफी है. ईरान बिना रास्ता ब्लॉक किए ही अपना काम निकाल रहा है।  वेस्‍ट के ल‍िए यह कड़वी सच्‍चाई रॉबर्ट पेप ने पश्चिमी देशों और अमेरिका के सामने एक बहुत बड़ी सच्चाई रखी है. उनका कहना है कि इस स्थिति ने दुनिया के सामने एक गहरी चुनौती पेश कर दी है. अब दो ही विकल्प बचे हैं. या तो पूरी दुनिया ईरान को ग्लोबल पावर के ‘चौथे केंद्र’ के रूप में स्वीकार कर ले, या फिर ईरान के इस दबदबे को तोड़ने के लिए एक ऐसी जंग छेड़े, जिसकी भयंकर कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ेगी. पेप इसे ‘द एस्केलेशन ट्रैप’ यानी बढ़ते तनाव का जाल कहते हैं। 

चिप मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने की प्लानिंग, सरकार ला सकती है ISM 2.0

नई दिल्ली केंद्र सरकार देश में तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार के लिए मई तक इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 'आईएसएम 2.0' लाने की तैयारी कर रही है। इसका प्रस्तावित परिव्यय एक लाख करोड़ रुपए से 1.2 लाख करोड़ रुपए के बीच रहने का अनुमान है। एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसएम 2.0 को लेकर मंत्रालयों के बीच बातचीत चल रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वित्त मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि आईएसएम 2.0 में प्रस्तावित परिव्यय पहले चरण से काफी अधिक होने का अनुमान है, जो कि पहले 76,000 करोड़ रुपए था। सूत्रों ने आगे बताया कि आईएसएम 2.0 के तहत, सरकार का लक्ष्य कार्यक्रम के दायरे को चिप निर्माण और डिजाइन से आगे बढ़ाकर सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और अन्य महत्वपूर्ण इनपुट के लिए समर्थन को शामिल करना है, साथ ही पूर्ण-स्टैक बौद्धिक संपदा के निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलता को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित करना है। सरकार यह कदम ऐसे समय पर उठा रही है, जब वैश्विक अस्थिरता के कारण ग्लोबल आपूर्ति श्रृंखलाओं में लगातार व्यवधान देखने को मिल रहे हैं। गैस आपूर्तिकर्ता, विशेष रसायन निर्माता, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्य इकोसिस्टम के भागीदार जैसे सहायक खिलाड़ी इस संशोधित ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। दूसरे चरण की एक प्रमुख विशेषता संशोधित डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई 2.0) योजना है, जिसके तहत विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ देश के भीतर सेमीकंडक्टर रिसर्च और डेवलपमेंट में साझेदारी करने की अनुमति मिलने की संभावना है। इस पहल से इनोवेशन को गति मिलने और आने वाले वर्षों में 50 तक फैबलेस सेमीकंडक्टर डिजाइन फर्मों के उदय को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। मार्च 2025 में भारत के पहले 'नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रोडशो' में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा था कि घरेलू सेमीकंडक्टर मांग बाजार 2030 तक 110 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है।

मोहन भागवत की Z प्लस सिक्योरिटी का खर्च RSS उठा रहा, हाई कोर्ट में याचिका दाखिल, जज ने किया ये बयान

नागपुर  RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को मिली Z प्लस सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। इस याचिका के जरिए मांग की गई थी कि सुरक्षा पर हो रहे खर्च का भुगतान संघ की तरफ से ही किया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। 40 से 45 लाख रुपये महीने का खर्च उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि सुरक्षा कवर की लागत कथित तौर पर 40 लाख से 45 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और राज्य के खजाने का नुकसान है क्योंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है। याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने याचिका दायर करने के पीछे याचिकाकर्ता के मकसद और इरादे पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी। याचिका में क्या नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा अपने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग ऐसे व्यक्ति को 'जेड-प्लस' श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है, जिसका संगठन 'पंजीकृत' नहीं है। याचिकाकर्ता ने सरकार की तरफ से भागवत को दी गई उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए उनसे शुल्क की भरपाई का अनुरोध किया था। मुकेश अंबानी केस का दिया हवाला उन्होंने 2023 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उद्योगपति मुकेश अंबानी से संबंधित एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने भारत सरकार की नीति के अनुसार उन्हें 'जेड-प्लस' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। साथ ही इसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा उठाया जाना था। मोहन भागवत को कब मिली थी जेड प्लस सिक्योरिटी जून 2015 में संघ प्रमुख भागवत की सुरक्षा को बढ़ाकर जेड प्लस श्रेणी का कर दिया गया था। इसके साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को संभालने का जिम्मा CISF यानी सेंट्रल आर्म्ड इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्सेज के पास आ गया था। इससे पहले उनकी सुरक्षा में महाराष्ट्र पुलिस की टुकड़ियां तैनात थीं। खास बात है कि पहली बार साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान भागवत को जेड प्लस सिक्योरिटी देने के आदेश दिए गए थे। तब सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमंत्री थे।

अमित शाह ने बंगाल में किया आह्वान, ‘कमल का बटन दबाओ, भाजपा सरकार बनाओ, घुसपैठियों को भगाओ’

कलकत्ता पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी जंग गरमाई हुई है. दोनों राज्यों में सत्ता बचाने और हासिल करने की कोशिशें तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जिसमें पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. सभी राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को आएंगे।  पश्चिम बर्धमान में बोले अमित शाह- बंगाल से हर घुसपैठिए को निकाल देंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बर्धमान में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ भाजपा के उम्मीदवार को विधायक बनाने या अपने कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं है.  शाह ने कहा, “ये चुनाव पूरे बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त करने के लिए है. उन्होंने जनता से वादा किया कि 23 तारीख को कमल के निशान पर बटन दबाकर 5 तारीख को भाजपा की सरकार बना दो. फिर हम बंगाल से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाल देंगे. अमित शाह ने कहा कि भाजपा बंगाल में कानून का राज कायम करेगी और राज्य को अवैध घुसपैठ से पूरी तरह मुक्त करेगी।  आसनसोल में बोलीं दिल्ली की सीएम- अब डर से आगे निकले बंगाल दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आसनसोल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए लोगों से अपील की कि अब बंगाल को डर और आतंक से आगे निकलना चाहिए.  रेखा गुप्ता ने कहा कि बंगाल अब टीएमसी के गुंडों की पक्षपात वाली राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगा।  गुंडों व माफिया को चुन- चुन कर जेल में डालेंगे लोगों से बेखौफ मतदान करने की अपील करते हुए शाह ने कहा कि 23 मई को ममता का कोई भी गुंडा आपका बाल बांका नहीं कर पाएगा। टीएमसी के किसी भी गुंडे से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। भाजपा सरकार बनते ही टीएमसी के गुंडों व माफिया को चुन- चुन कर जेल में डालेंगे। शाह ने कहा कि यह चुनाव घुसपैठियों को निकालने का चुनाव है। उन्होंने पूछा कि क्या ममता बनर्जी और उनका भतीजा ऐसा कर सकती है। घुसपैठियों को चुन-चुन कर बाहर निकलेंगे उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने बीएसएफ को भारत- बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन तक नहीं दी। शाह ने पार्टी के संकल्प पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने तय किया है कि भाजपा सरकार बनने के 45 दिनों के अंदर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना तारबंदी वाले हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए जरूरी भूमि बीएसएफ को सौंप दी जाएगी। उन्होंने फिर दोहराया कि भाजपा का वादा है कि न सिर्फ बंगाल से बल्कि पूरे देश से हम घुसपैठियों को चुन- चुन कर बाहर निकलेंगे। बंगाल की अस्मिता की रक्षा टीएमसी नहीं कर सकती उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की अस्मिता की रक्षा टीएमसी नहीं कर सकती। कविगुरु रवींद्र नाथ टैगोर की विरासत को यूनेस्को के धरोहर में शामिल करने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का काम मोदी सरकार ने किया।शाह ने आरोप लगाया कि ममता दीदी बहुसंख्यक समाज को डरा रही है। दीदी कह रही हैं कि टीएमसी नहीं रहेगी तो बहुसंख्यक समाज का अस्तित्व नहीं रहेगा। यह कहने वाली आप कौन होती है। बहुसंख्यक समाज का अस्तित्व आपकी वजह से नहीं है। शाह ने सवाल किया कि आपके शासनकाल में मुर्शिदाबाद में हिंसा हुई, हिंदुओं को निशाना बनाया गया। रामनवमी त्योहार के दौरान शोभायात्राओं पर हमले हुए, सरस्वती पूजा करने की अनुमति नहीं दी गई, तब आप कहां थी। भ्रष्टाचारियों से घोटाले का पाई-पाई का हिसाब लेंगे शाह ने बंगाल में शिक्षक भर्ती से लेकर नगर निगम में हुए नियुक्तियों में हुए घोटाले, गाय तस्करी, राशन, मनरेगा, पीएम आवास घोटालों आदि का जिक्र करते हुए कड़ी चेतावनी दी। शाह ने कहा कि सारे भ्रष्टाचारियों को कह कर जाता हूं कि भाजपा की सरकार बनने पर घोटाले का पाई-पाई का हिसाब जनता को देना पड़ेगा। जिन्होंने गरीब जनता का हक लूटा है उनसे वापस वसूला जाएगा। भाजपा सरकार में बेखौफ घूम पाएंगी बच्चियां  महिला सुरक्षा पर घेरते हुए शाह ने कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी माताओं- बहनों की सुरक्षा नहीं कर सकीं। महिलाओं से उन्होंने आह्वान किया कि भाजपा की सरकार बना दीजिए, बच्चियां रात में एक बजे भी स्कूटी से बाहर बेखौफ घूम सकेंगी। कोई गुंडे- बदमाश उन्हें नहीं छेड़ पाएंगे। उन्होंने महिलाओं को भरोसा दिया कि भाजपा की सरकार बनने पर राज्य में न संदेशखाली न आरजी कर, न ला कालेज और न मेडिकल कालेज में दुष्कर्म जैसी घटनाएं होगी। बंगाल में बोले सचिन पायलट- कांग्रेस पूरे राज्य की हर सीट पर चुनाव लड़ रही है कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुर्शिदाबाद में कहा कि बंगाल की जनता ने राज्य सरकार को भी तीन मौके दिए और केंद्र सरकार को भी. लेकिन दोनों सरकारों के बीच लगातार झगड़े की वजह से आम लोगों को बिना वजह बहुत परेशानी झेलनी पड़ी. सचिन पायलट ने कहा, पहली बार कांग्रेस पूरे राज्य की हर सीट पर चुनाव लड़ रही है. कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है. उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत बेहतर होगा. कांग्रेस अब बंगाल में मजबूती से वापसी कर रही है और लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी।  असम-केरल-पुडुचेरी में बंपर हुई थी वोटिंग असम में 75.91%, केरल में लगभग 78% और पुडुचेरी में 72% के आसपास वोटिंग दर्ज की गई थी।  तमिलनाडु में स्टालिन बनाम पलानीस्वामी तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए एक चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा.मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की डीएमके सत्ता में है.2021 में डीएमके गठबंधन ने 133 सीटें जीती थीं. मुख्य मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के बीच है.एआईएडीएमके के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) का बीजेपी के साथ गठबंधन है, जो डीएमके के लिए चुनौती बन रहा है।   बंगाल में ममता बनाम सुवेंदु-बीजेपी की टक्कर पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं. पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे … Read more

चुनाव आयोग ने बंगाल के 8 हजार पोलिंग बूथों को किया सुपर सेंसेटिव घोषित, 135 दबंग गिरफ्तार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होना है। 23 अप्रैल को पहले राउंड की वोटिंग होने जा रही है और 29 को दूसरे चरण में मतदान होगा। उससे पहले कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह सख्त है। इस बीच बंगाल के कुल 8000 पोलिंग बूथ को आयोग ने सुपर सेंसेटिव घोषित किया है। ये उन इलाकों के ही बूथ हैं, जहां पहले चरण में ही मतदान होना है। इसका अर्थ है कि यहां हिंसा, बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है। चुनाव आयोग ने इस बीच 135 ऐसे लोगों को पकड़ा है, जो दबंग प्रवृत्ति के माने जाते हैं और उनका अराजकता फैलाने का इतिहास रहा है। चुनाव संपन्न होने तक इन लोगों को हिरासत में रखा जाएगा। पुलिस ने जिन 135 लोगों को उठाया है, उनमें से ज्यादातर मुर्शिदाबाद, मालदा, बलूरघाट, उत्तर और दक्षिण 24 परगना के रहने वाले हैं। दरअसल पहले के चुनावों में भी ऐसे करीब 200 स्थान हैं, जहां पहले हिंसा होती रही है। ऐसे में चुनाव ने इन इलाकों से जुड़े पोलिंग बूथ को सुपर सेंसेटिव की कैटिगरी में डाला है। फिलहाल चुनाव आयोग के निर्देश पर इन सभी इलाकों में डीएम और एसपी भी दौरे कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके। इसके अलावा जनता के बीच साफ-सुथरे चुनाव होने और डर से परे रहने का भरोसा जगाया जा सके। प्रशासन का कहना है कि कई दबंगों ने तो एक नोटिस मिलते ही खुद सरेंडर कर दिया। कुछ लोगों को पकड़ना पड़ा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक बार फिर से कहा है कि हम बंगाल में भयमुक्त और अपराध मुक्त चुनाव कराएंगे। उनका कहना है कि इसके लिए हरसंभव तैयारी हमने की है। इस चुनाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी चुनाव आयोग खूब सहारा ले रहा है। चुनाव में सुरक्षा के लिए AI का इस्तेमाल, गड़बड़ी पर करेगा अलर्ट बूथ के अंदर या फिर बाहर किसी तरह की गड़बड़ी होने पर यह सिस्टम तुरंत अलर्ट करेगा। इसके अलावा एक एआई से लैस कंट्रोल कमांड सेंटर भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तरों में भी कंट्रोल सेंटर होंगे। यहां से संबंधित जिलों की निगरानी की जाएगी। कुल मिलाकर निगरानी के लिए थ्री-टियर सिस्टम स्थापित किया जाएगा। बता दें कि चुनाव आयोग ने प्रदेश की कुल 55 विधानसभाओं को भी खर्च के लिहाज से संवेदनशील माना है। इन सीटों में ममता बनर्जी की भबानीपुर विधानसभा भी शामिल है। यहां से उन्हें भाजपा के सीनियर नेता शुभेंदु अधिकारी चुनौती दे रहे हैं।

अमित शाह का बड़ा बयान—बंगाल में सत्ता मिली तो घुसपैठियों की होगी छुट्टी

आसनसोल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का प्रचार करने पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री ने कुल्टी विधानसभा क्षेत्र से जनसभा को संबोधित करते हुए जनता से अपनी पार्टी के वादों को दोहराया। इसके साथ ही टीएमसी सरकार पर जुबानी हमला बोला। अमित शाह ने कहा, "कुल्टी की जमीन का इस्तेमाल कभी ब्लास्ट फर्नेस के लिए किया जाता था। यहां से लोहा पूरे भारत में भेजा जाता था और दुनिया के कई देशों में निर्यात भी किया जाता था। ममता बनर्जी के कुशासन के कारण कुल्टी के वे फर्नेस बंद हो गए हैं। हम 'आयरन सिटी' का दर्जा एक बार फिर बहाल करने के लिए काम करेंगे। अवैध खनन को रोका जाएगा।" उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल का चुनाव बंगाल को घुसपैठिया मुक्त बनाने का चुनाव है। भाजपा सरकार बना दीजिए, बंगाल से एक-एक घुसपैठियों को निकालने का काम करेंगे। ममता के गुंडे कान खोलकर सुन लें, 23 अप्रैल को मतदान में जरा भी खलल डाला, तो 4 मई के बाद उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम करेंगे। ममता के गुंडों की बंगाल की जनता के सामने कोई मजाल नहीं है। ममता को बंगाल के युवाओं की चिंता नहीं है, वो अपनी जगह भतीजे को बैठाना चाहती हैं, लेकिन उनका सपना पूरा नहीं होगा। यह झूठ फैलाती हैं कि बंगाल में बाहर का मुख्यमंत्री आएगा। बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाल में जन्मा, बंगाली बोलने वाला ही होगा। अमित शाह ने कहा, एसआईआर प्रक्रिया में ममता दीदी और उनके प्रशासन ने कुछ गोरखाओं के नाम भी काट दिए हैं। कोई बात नहीं। सीटें तो वैसे भी हमारे पास ही आ रही हैं। जैसे ही चुनाव खत्म होंगे, भारतीय जनता पार्टी धीरे-धीरे हर एक गोरखा को वापस मतदाता सूची में शामिल कर लेगी।" उन्होंने कहा, "चाय बागानों में स्कूल खोलना, चाय बागान श्रमिकों को उनकी ज़मीन का मालिकाना हक देना, आवास पट्टे उपलब्ध कराना और दो वर्षों के भीतर चाय बागान श्रमिकों की मज़दूरी में 500 रुपये से अधिक की वृद्धि भारतीय जनता पार्टी द्वारा की जाएगी। उत्तरी बंगाल में हम चार नए औद्योगिक शहर स्थापित करेंगे। भारतीय जनता पार्टी यह भी सुनिश्चित करेगी कि सभी सरकारी कर्मचारियों को 45 दिनों के भीतर 7वें वेतन आयोग के लाभ मिलेंगे। अगर आप भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाते हैं, तो हम यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लाएंगे।" उन्होंने कहा, " भाजपा सरकार महिलाओं और बेरोजगारों को प्रतिमाह 3000 रुपये, गर्भवती माताओं को 21 हजार रुपये और महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33 फीसद आरक्षण देगी। इसके साथ ही महिलाओं को मुफ्त बस सफर कराएगी। किसानों की धान की फसल की एमएसपी 3100 रुपये प्रति क्विंटल करेगी। साथ ही किसान सम्मान निधि को 6000 रुपये की जगह 9000 रुपये सालाना करेगी।" उन्होंने कहा, "दार्जिलिंग और उत्तरी बंगाल में हो रहे अन्याय को भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से खत्म करेगी। यह चुनाव सिर्फ़ हमारे दो उम्मीदवारों को विधायक बनाने के लिए नहीं है। यह चुनाव दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर गंगा सागर तक, और गंगा सागर से लेकर बंगाल की राजधानी कोलकाता तक, हमारी माताओं और बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। यह चुनाव उत्तरी बंगाल पर सालों-साल से हो रहे अन्याय और उपेक्षा का जवाब है। ममता दीदी को शर्म आनी चाहिए कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद, साल-दर-साल संदेशखाली में घुसपैठियों ने हमारी माताओं और बहनों पर अत्याचार किए हैं। ममता दीदी के शासन में नौकरियां बेची गई हैं। हम हर साल एक लाख युवक-युवतियों को एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से, बिना किसी पैसे या सिफारिश के नौकरियां देंगे।"

भारत की अर्थव्यवस्था 2026 तक 6.4% बढ़ेगी, अमेरिकी टैरिफ और टैक्स के बावजूद UN रिपोर्ट में आ रहा है सकारात्मक आकलन

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट 'इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026' के अनुसार, भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2026 में 6.4 प्रतिशत और साल 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से विकास करेगी।  विकास के मुख्य कारक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रही थी. इस वृद्धि के पीछे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, मजबूत घरेलू खपत और वस्तु एवं सेवा कर की दरों में कटौती जैसे प्रमुख कारण रहे. साथ ही, अमेरिकी टैरिफ लागू होने से पहले निर्यात में आई तेजी ने भी इसे समर्थन दिया. रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र को भारतीय विकास का मुख्य इंजन बताया गया है।  वैश्विक व्यापार तनाव और चुनौतियां भविष्य के लिए सकारात्मक अनुमानों के बीच रिपोर्ट ने कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी इशारा किया है. अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद, 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई।  एक और बड़ी चिंता प्रेषण को लेकर है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता देश है, जिसे 2024 में 137 अरब डॉलर मिले थे. हालांकि, जनवरी 2026 से अमेरिका द्वारा सभी प्रेषणों पर लगाए गए 1 प्रतिशत टैक्स के कारण भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. भारत में प्रेषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर पड़ सकता है।  निवेश और हरित अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश (FDI) के मामले में भारत का प्रदर्शन सराहनीय रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों में भारत ने 50 अरब डॉलर का ग्रीनफील्ड एफडीआई आकर्षित किया, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है।  रिपोर्ट में भारत की 'उत्पादन आधारित प्रोत्साहन' (PLI) योजना की भी प्रशंसा की गई है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सोलर मॉड्यूल, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली यह योजना आयात पर निर्भरता कम करने और हरित औद्योगिक विकास के लिए एक बेहतरीन मॉडल है. वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 1.66 करोड़ हरित नौकरियों में से भारत की हिस्सेदारी 13 लाख है, जिसे और बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।  कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है. हालांकि, मुद्रास्फीति के 2026 में 4.4% और 2027 में 4.3% रहने का अनुमान है. यदि भारत बाहरी व्यापारिक बाधाओं और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करता है, तो वह अपनी विकास यात्रा को स्थिर रख सकता है। 

ईरान युद्ध का असर: बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर पड़ी मार, इंटरनेट ठप होने का खतरा

ढाका  ईरान युद्ध की वजह से कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच अब भी संघर्ष चल रहा है और हाल फिलहाल में कोई राहत भी मिलती नहीं दिख रही है। ऐसे में कई देशों में हालात बाद से बदतर होते जा रहे हैं। भारत के पड़ोस में बांग्लादेश में तो अब इंटरनेट ठप पड़ने के हालात बन पड़े हैं। ईंधन की भारी कमी के चलते बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर बड़े स्तर पर बंद होने के खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि करीब 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश के लिए हालात इसीलिए बिगड़ गए हैं क्योंकि वह अपनी तेल और गैस जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसमें से ज्यादातर तेल मिडिल ईस्ट से ही आता है। अब होर्मुज में शिपिंग रूट बाधित होने से बांग्लादेश में हाहाकार मच गया है। गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित ढाका समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर 12-12 घंटे लंबी कतारें लग रही हैं। हालात को संभालने के लिए सरकार ने हाल ही में डीजल की कीमतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की है। बिजली संकट के कारण गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित हो चुका है, जहां उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। अब इसकी आंच इंटरनेट तक पहुंच गई है। डेटा सेंटर के लिए चाहिए डीजल रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते सोमवार को बांग्लादेश के मोबाइल टेलीकॉम ऑपरेटर्स के संगठन (AMTOB) ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो मौजूदा हालात में सेवाओं को जारी रखना संभव नहीं रह जाएगा। बता दें कि टेलीकॉम कंपनियां बिजली कटौती के दौरान अपने डेटा सेंटर और नेटवर्क टावर (BTS) चलाने के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर रहती हैं। लेकिन अब रोजाना 5 से 8 घंटे की बिजली कटौती हो रही है, जिससे स्थिति बिगड़ गई है। SMS-बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो जाएंगी AMTOB के अनुसार, केवल डेटा सेंटर ही हर घंटे करीब 500 से 600 लीटर डीजल खपत करते हैं। संगठन के महासचिव मोहम्मद जुल्फिकार ने कहा, “डेटा सेंटर ऑपरेटर का दिमाग होता है। अगर यह बंद हो गया, तो पूरा नेटवर्क ठप हो जाएगा।” अगर नेटवर्क बंद हुआ, तो सिर्फ कॉल और इंटरनेट ही नहीं, बल्कि SMS और बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो सकती हैं। इसका असर आम लोगों से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक पड़ेगा। बांग्लादेश में मोबाइल फाइनेंशियल सर्विसेज (MFS) रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा हैं, और रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।