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महाराष्ट्र के बारामती में दोबारा विमान दुर्घटना, अजित पवार के प्लेन हादसे वाली जगह पर मचा हड़कंप

बारामती  महाराष्ट्र के बारामती में एक बार फिर बड़े विमान हादसे की खबर सामने आई है. जानकारी के मुताबिक यह ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया गया टू सीटर विमान था, जो बारामती के गोजूबाबी गांव में जा गिरा. इससे पहले अजित पवार का प्लेन भी यहीं क्रैश हुआ था।  शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रेड बर्ड कंपनी का यह दो सीटर ट्रेनिंग विमान तकनीकी खराबी के बाद गोजूबाबी गांव के पास क्रैश लैंड किया. बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई थी. इसके बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को सुरक्षित उतारने की कोशिश की और बारामती के गोजूबाबी इलाके में हार्ड लैंडिंग की गई. शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है।  पुलिस ने क्या बताया? पुणे ग्रामीण पुलिस के एसपी संदीप सिंह गिल ने बताया, ‘आज सुबह करीब 8:50 बजे, रेड बर्ड एविएशन का एक ट्रेनिंग विमान बारामती हवाई अड्डे के पास गोजुबावी गांव में क्रैश लैंड हो गया. मौके पर मौजूद चश्मदीदों से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कम ऊंचाई पर उड़ते समय विमान में कोई तकनीकी खराबी आ गई थी. क्रैश लैंडिंग के दौरान, विमान का एक हिस्सा बिजली के खंभे से टकरा गया और उसके बाद विमान ज़मीन पर जा गिरा. विमान में केवल एक ट्रेनी पायलट सवार था. गनीमत रही कि पायलट को कोई गंभीर चोट नहीं आई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे, और अब ज़रूरी जांच-पड़ताल के साथ-साथ आगे की कार्रवाई भी की जा रही है. जैसे ही कोई और जानकारी मिलेगी, उसे साझा किया जाएगा।  बारामती में इससे पहले इसी साल जनवरी में भी एक विमान क्रैश कर गया. उस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया था. ऐसे में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने विमानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है. शुरुआती तौर पर इंजन फेल होना दुर्घटना की मुख्य वजह माना जा रहा है। 

Varanasi-Kolkata Expressway को बड़ा बूस्ट: बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद 35,000 करोड़ की परियोजना ने पकड़ी रफ्तार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार जो हुआ, उसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सबको चौंका दिया. कभी बंगाल की राजनीति पर पूरी पकड़ रखने वाली ममता बनर्जी की पार्टी TMC को बड़ा झटका लगा और BJP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर दी. अब शुभेंदु अधिकारी सूबे के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं. इस बदलाव का असर सिर्फ सत्ता बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से अटके पड़े बड़े प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ते नजर आ रहे हैं. इन्हीं में सबसे बड़ा नाम है 'वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे'. जिस प्रोजेक्ट की फाइलें सालों से मंजूरियों, रूट बदलाव और पर्यावरणीय अड़चनों में फंसी थीं, अब उसे तेजी से पूरा करने की तैयारी हो रही है। देश के पूर्वी हिस्से में रोड कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार अब वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेसवे को लेकर सरकार काफी गंभीर नजर आ रही है. हालांकि पश्चिम बंगाल में पर्यावरण मंजूरी और रूट बदलाव से जुड़ी दिक्कतों की वजह से परियोजना के कुछ हिस्सों में अभी भी देरी जरूर है. लेकिन केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय पर पूरा करने के प्रयास कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को झारखंड और पश्चिम बंगाल के हिस्सों में 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबे हिस्से के निर्माण की मंजूरी दे दी है. इस क्लियरेंस के बाद एक्सप्रेसवे के रुके हुए हिस्सों पर काम तेज होने की उम्मीद है और इस मेगा प्रोजेक्ट को बड़ा बूस्ट मिला है. माना जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नई रफ्तार देगा, हालांकि इसके लिए पश्चिम बंगाल में 103 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि का डायवर्जन भी करना होगा। 6 घंटे में वाराणसी से कोलकाता! करीब 610 किलोमीटर लंबे इस 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को काशी-बंगाल एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके शुरू होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक का सफर, जो अभी 12 से 14 घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब 6 से 7 घंटे का रह जाएगा. इससे माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। बिजनेस टुडे को सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस परियोजना का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. वहीं बिहार में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और झारखंड में वन विभाग से जरूरी मंजूरियां भी मिल चुकी हैं. इन राज्यों में प्रोजेक्ट की रफ्तार थोड़ी बताई जा रही है। कहां अटक रहा प्रोजेक्ट? दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में यह परियोजना अभी धीमी गति से आगे बढ़ रही है. इसकी बड़ी वजह रूट अलाइनमेंट में बदलाव, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और पर्यावरण मंजूरियों में देरी बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार अगर वन्यजीवों से जुड़ी चिंताओं का जल्द समाधान नहीं निकला तो केंद्र सरकार बंगाल वाले हिस्से के रूट में कुछ बदलाव भी कर सकती है। यह मुद्दा हाल ही में संसद में भी उठाया गया था. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा था कि, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में निर्माण कार्य के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मूल रूट में बदलाव की मांग किए जाने के बाद वहां काम की रफ्तार धीमी पड़ गई. उन्होंने बताया कि वाराणसी-रांची-कोलकाता वाले मूल रूट को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी और 3 जनवरी 2023 को पश्चिम बंगाल सरकार की सहमति भी मिल गई थी. लेकिन राज्य सरकार की ओर से मांगे गए संशोधित रूट को अक्टूबर 2024 में मंजूरी मिली, जिससे आगे की प्रक्रिया में देरी हुई। इन इलाकों में वन्यजीवों के लिए अंडरपास अधिकारियों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा जिलों से गुजरने वाले हिस्सों में वन और वन्यजीवों की सेफ्टी एक बड़ी चिंता है. वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक्सप्रेसवे पर कई वन्यजीव अंडरपास बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि जानवरों की आवाजाही प्रभावित न हो।

बंगाल से बांग्लादेश तक सियासी असर: सुवेंदु अधिकारी के फैसले ने बढ़ाई सरगर्मी

कोलकत्ता पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के एक फैसले ने पूरे बांग्लादेश में हलचल मचा दी है. सोमवार को हुई नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बिना बाड़ वाले इलाकों में कांटेदार तार लगाने के लिए बीएसएफ को 45 दिनों के भीतर जमीन सौंपने का फैसला लिया गया. इस फैसले के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर प्रतिक्रिया तेज हो गई है। सुवेंदु सरकार के फैसले पर क्या बोला बांग्लादेश? सुवेंदु सरकार के इस फैसले पर बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायुं कबीर ने कहा कि ‘बांग्लादेश को कांटेदार तार से डराया नहीं जा सकता.’ उन्होंने कहा कि चुनावी बयानबाजी और शासन चलाना अलग बात है और ढाका अब यह देखना चाहता है कि बंगाल सरकार चुनावी भाषणों को प्रशासनिक फैसलों में कितना बदलती है। हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि अगर भारत वास्तव में लोगों के बीच रिश्ते मजबूत करना चाहता है तो उसे सीमा विवादों और सुरक्षा मामलों को ‘मानवीय दृष्टिकोण’ से देखना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि बांग्लादेश की प्राथमिक बातचीत भारत की केंद्र सरकार से होती है, न कि किसी राज्य सरकार से। सीमा पर बांग्लादेशी गार्ड भी अलर्ट सीमा पर कथित ‘पुश-बैक’ और हिंसा के मुद्दे पर भी बांग्लादेश ने कड़ा रुख दिखाया है. कबीर ने चेतावनी दी कि अगर सीमा पर लोगों की मौतें और जबरन धकेलने की घटनाएं जारी रहीं तो बांग्लादेश चुप नहीं बैठेगा. वहीं बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बल पूरी तरह तैयार है। दरअसल बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि बंगाल-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि नई सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही सीमा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा फैसला लिया जाएगा. सोमवार को कैबिनेट की बैठक में उसी वादे को अमल में लाते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन ट्रांसफर का निर्णय लिया गया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में सरकार बदलने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है. बीजेपी जहां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रही है, वहीं बांग्लादेश इसे कूटनीतिक और मानवीय नजरिए से उठा रहा है।

‘डॉलर’ बचाने की तैयारी में सरकार? विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर बढ़ी चिंता, क्या लग सकता है बड़ा बैन

नई दिल्ली ईरान युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस संकट से बचने के लिए सरकार कुछ इमरजेंसी कदम उठाने पर विचार कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाना है। इसके लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों जैसी गैर-जरूरी चीजों के आयात पर रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जा सकती हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों के बीच इस संभावित संकट को टालने के लिए कई अहम चर्चाएं हुई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर भारत के पास कितने दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) बचा? संकट के बीच कौन से बड़े कदम उठाने की तैयारी में सरकार? ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी चर्चा में सबसे प्रमुख प्रस्तावों में से एक ईंधन की कीमतों में वृद्धि करना है। यदि ऐसा होता है, तो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी आयात पर रोक अधिकारियों की एक बड़ी चिंता बढ़ता चालू खाता घाटा है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी सामानों के आयात पर प्रतिबंध या सख्ती लगाने पर विचार कर रही है। यदि स्थिति नहीं सुधरती है, तो अधिकारी गैर-जरूरी कार्यों, जैसे विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा निकालने पर भी अस्थायी रूप से रोक लगा सकते हैं। भारत पर ईरान युद्ध और तेल संकट का सीधा असर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई रुकने और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से भारत को भारी नुकसान हो रहा है। रुपये पर दबाव महंगे कच्चे तेल को खरीदने के लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर (विदेशी मुद्रा) चुकाना पड़ रहा है। इस कारण भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.6% टूट चुका है, जो इसे प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनाता है। भारत के पास कितना विदेशी मुद्रा भंडार बचा? RBI के आक्रामक कदम रुपये को लगातार गिरने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कई अहम कदम उठा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति: 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 690.7 बिलियन डॉलर रह गया है, जो एक महीने से अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। हालांकि, यह भंडार अभी भी 10 से 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। सट्टेबाजी पर लगाम: RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए बैंकों की दैनिक सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है। भविष्य के नियम: RBI आयातकों के लिए 'करेंसी हेजिंग' के नियम बदल सकता है और निर्यातकों को निर्देश दे सकता है कि उन्हें विदेशी व्यापार से मिलने वाले डॉलर वे तुरंत देश वापस लाएं। प्रधानमंत्री की जनता से अपील रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से इस संकट की घड़ी में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिए कि:     ईंधन बचाने के लिए लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और 'वर्क फ्रॉम होम' करें।     लोग सोना खरीदना बंद करें (क्योंकि सोना भारत के सबसे बड़े आयातों में से एक है)।     गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम की यह चेतावनी भविष्य में किसी भी संभावित कमी से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। वियतनाम और थाइलैंड जैसे अन्य एशियाई देशों ने भी डॉलर और ईंधन बचाने के लिए ऐसे ही 'वर्क फ्रॉम होम' के निर्देश दिए हैं। सख्त फैसले लेने की मजबूत राजनीतिक स्थिति हाल ही में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगी दल अब भारत के दो-तिहाई राज्यों को नियंत्रित करते हैं। इस मजबूत राजनीतिक स्थिति के कारण सरकार के लिए देश हित में इस तरह के सख्त आर्थिक फैसले लेना आसान हो गया है। संक्षेप में कहें तो ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है, जिससे भारत का खजाना (विदेशी मुद्रा) तेजी से खाली हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है। इससे बचने के लिए सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने, सोना व इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात रोकने और जनता से ईंधन व डॉलर बचाने की अपील करने जैसे आपातकालीन उपाय कर रही है।

Census Rules सख्त: संपत्ति की गलत जानकारी देने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

लखनऊ जनगणना में किसी तथ्य को जानबूझकर छिपाने पर जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत एक हजार रुपये जुर्माना एवं तीन साल की सजा का प्रावधान है। इस मामले में उत्तरदाता एवं प्रगणक के लिए दंड का एक समान प्रावधान है, जबकि जनगणना में प्राप्त तथ्यों को कोई प्रगणक बाहर साझा करता है तो आरोप साबित होने पर भी दंड का प्रावधान है। जनगणना में बुधवार  को सातवें दिन भी स्वगणना हुई। स्वगणना के दौरान कुछ लोगों के तथ्यों को छिपाने की चर्चा के बीच प्रगणक एवं पर्यवेक्षक भी सतर्क हो गए हैं। उनमें जनगणना अधिनियम के प्रावधानों की बातें हो रही हैं। यदि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में ज्यादा अनियमितता पाई जाएगी तो प्रगणक जिम्मेदार होंगे। वहीं किसी ब्लॉक में रहने वालों की संख्या बहुत कम होगी तो संदेह के आधार पर फिर पुनरीक्षण कराया जा सकता है। गोरखपुर में चार्ज अधिकारी/एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने बताया कि जनगणना में प्रगणक घर-घर जाएंगे और भौतिक सत्यापन करके ही फीडिंग करेंगे। यदि किसी का बड़ा मकान है और उसने कमरे की संख्या कम बता दी है तो जनगणना कर्मी उसकी जांच करेंगे। यदि किसी के घर में दो या तीन कारें हैं और मकान मालिक उसमें एक ही कार को अपना बता रहा है तो हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट सहित अन्य माध्यम से भी जांच की जाएगी। जनगणना में तथ्य छिपाया तो होगी तीन साल की जेल इसे लेकर जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने बताया कि जनगणना में किसी को चल-अचल संपत्ति छिपाने की आवश्यकता नहीं है। इसके तथ्यों से आयकर एवं अन्य सुविधाओं का कोई सरोकार नहीं है। जनगणना के दौरान किसी विवाद के बाद आरोप साबित होने पर जनगणना अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। जनगणना फॉर्म में हैरान कर देने वाले सवाल वहीं, जनगणना के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में कई सवाल और सही विकल्प हैरान कर देने वाले हैं। 34 सवालों में से एक सवाल यह भी है कि आपकी पत्नी कितनी हैं? अगर पत्नी दो होंगी तो डबल फैमिली यानी दो दंपति का विकल्प भरना होगा। अगर एक महिला के दो पति हों तो सिंगल फैमिली यानी एक दंपति माना जाएगा। किसी भी परिवार में दंपति की गणना पत्नी की संख्या से ही निर्धारित होगी। जितनी पत्नियां, उतने ही दंपति। परिवार में दादा-दादी, पिता-माता और पुत्र-बहू हों तो इसका मतलब यह नहीं कि मुखिया वही होगा जो बड़ा होगा। यानी जरूरी नहीं है कि दादा या पिता ही मुखिया हों, कोई भी हो सकता है। परिवार के सदस्य जिसे मुखिया बताएंगे, वही फॉर्म में भरा जाएगा। जनगणना के लिए फॉर्म पूरी स्टडी से तैयार किया गया है। परिवार में चाहे जितने पुरुष और चाहे जितने उम्रदराज लोग हों, उन्होंने कहा कि बहू, पत्नी, दादी या पुत्री मुखिया है तो उसका ही नाम भरा जाएगा। परिवार की मुखिया उस परिवार की कोई भी महिला हो सकती है। मुखिया के लिए उम्र की सीमा नहीं है।

LPG पर सरकार सख्त: समय पर जवाब नहीं देने वालों की सब्सिडी हो सकती है बंद

LPG सब्सिडी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अगर आप भी LPG सब्सिडी ले रहे हैं और आपकी आय ज्यादा है, तो अपने फोन के इनबॉक्स पर नजर रखें। जी हां, क्योंकि गैस एजेंसियां कभी भी आपकी सब्सिडी खत्म कर सकती हैं। आइए इसको विस्तार से समझते हैं। नईदिल्ली बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ के बीच केंद्र सरकार ने रसोई गैस (LPG) सब्सिडी को लेकर एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी तेल कंपनियां (Oil Marketing Companies) जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) इनकम टैक्स विभाग के डेटा का इस्तेमाल करके उन लोगों की पहचान कर रही हैं, जो सब्सिडी पाने के हकदार नहीं हैं। इन लोगों की पहचान करने के बाद कंपनियां जल्द से जल्द इनकी सब्सिडी बंद करेंगी। अगर ग्राहक को लगता है कि वो सब्सिडी के पात्र हैं, तो उन्हें 7 दिनों का मौका मिलेगा। आइए इसको विस्तार से समझते हैं। क्या है नया नियम और कार्रवाई? 'मिंट' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार उन उपभोक्ताओं की सब्सिडी बंद करने की तैयारी में है, जिनकी सालाना आय ₹10 लाख या उससे ज्यादा है। सरकार का मानना है कि संपन्न परिवारों को सब्सिडी देने के बजाय इस पैसे का इस्तेमाल गरीबों की मदद और देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। इस दिशा में तेल कंपनियों ने नीचे दिए गए कुछ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। SMS के जरिए चेतावनी कंपनियों ने उन ग्राहकों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है जिनके टैक्स रिकॉर्ड बताते हैं कि उनकी या उनके परिवार के किसी सदस्य की ग्रॉस टैक्सेबल इनकम (Gross Taxable Income) निर्धारित सीमा से अधिक है। 7 दिन का अल्टीमेटम मैसेज में साफ कहा गया है कि अगर ग्राहक को लगता है कि डेटा गलत है, तो वह 7 दिनों के अंदर आपत्ति दर्ज करा सकता है। ऐसा न करने पर उनकी गैस सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। शिकायत का मौका उपभोक्ता कंपनियों की टोल-फ्री हेल्पलाइन या उनकी आधिकारिक वेबसाइट (पोर्टल) पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। क्यों सख्त हो रही है सरकार? यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। जहां एक तरफ सब्सिडी का बढ़ता खर्च है, तो वहीं दूसरी तरफ राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) है। इससे पहले भी तेल कंपनियों ने सब्सिडी बचाने के लिए कई कदम उठाए थे, जो नीचे दिए गए हैं।     नए कनेक्शन पर अस्थायी रोक:- फिलहाल नए गैस कनेक्शन देने की रफ्तार धीमी कर दी गई है।     रिफिल बुकिंग की अवधि बढ़ाना:- गैस सिलेंडर दोबारा बुक करने के बीच के समय को बढ़ाया गया है ताकि खपत पर नियंत्रण रहे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए 'इमरजेंसी' तैयारी खबरों की मानें तो प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों के बीच हाल ही में कई बैठकें हुई हैं। सरकार न केवल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, बल्कि सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे 'गैर-जरूरी' सामानों के आयात पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है ताकि डॉलर को बचाया जा सके।

तपती गर्मी के बीच खुशखबरी: आ रहा है मॉनसून, मौसम विभाग ने जताई बारिश की संभावना

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सक्रिय हो गया है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मॉनसून की समय से पहले दस्तक के लिए बेहद अनुकूल बन रही हैं. बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया बन गया है, जो अगले कुछ घंटों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है. इस सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी. साथ ही इस सिस्टम से मॉनसून उत्तरी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में आज आंधी-बारिश का अलर्ट यूपी-बिहार समेत पांच राज्यों में आज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. बिहार और उत्तराखंड के सभी जिलों में जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आंधी-तूफान और बारिश से जनजीवन प्रभावित है. इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए प्रदेश में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 14 से 17 मई के बीच भारी बारिश हो सकती है. वहीं, असम, मेघालय और मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम का असर ओडिशा में भी साफ दिखाई देगा, जहां राज्य के कई हिस्सों में अगले 6 दिनों तक बारिश का अनुमान है. ओडिशा के 20 जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कब होगी मॉनसून की एंट्री? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल होती जा रही हैं. सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में मॉनसून की एंट्री हो सकती है. इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का मिश्रित असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के उत्तरी तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है. इसके चलते अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। उत्तर भारत में मौसम में बदलाव DTE के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में चक्रवाती रूप में बना हुआ है. इसके प्रभाव से 12 से 15 मई तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. गरज-चमक के साथ हवाओं की रफ्तार 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने का भी अंदेशा है। मौसम विभाग ने खराब मौसम में खुले में न निकलने की सलाह दी है.  पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश व बर्फबारी जारी रह सकती है. कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है, जिससे फलों और सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है। पूर्वी भारत में बारिश और तेज हवाएं बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा. बिहार में ओलावृष्टि, झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. सिक्किम और उत्तर बंगाल के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश (64.5-115.5 मिमी) का येलो अलर्ट जारी है। दक्षिण भारत में बारिश और हवाएं तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में भी बारिश व गरज-चमक का दौर रहेगा. कई जगहों पर 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कहां चलेगी लू और भीषण गर्मी? डाउन टू अर्थ की खबर के मुताबिक, एक तरफ जहां कई राज्यों में बारिश से राहत मिल रही है. वहीं, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. पश्चिम राजस्थान और गुजरात में 12 से 17 मई तक लू चलने की संभावना है. पूर्वी राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

राफेल की ताकत होगी और मजबूत: फ्रांस देगा तकनीकी डेटा, भारत में रिपेयर होंगी MICA मिसाइलें

नई दिल्ली  राफेल और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों में लगने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत भारत में ही की जा सकेगी। फ्रांसीसी कंपनी MBDA ने भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ इस बारे में करार किया है। इसके तहत भारत में ही MICA मिसाइलों का आधुनिकीकरण किया जा सकेगा और साथ ही फ्रांस से खरीदे गए राफेल की भी मरम्मत की जा सकेगी। इस समझौते के लिए अरसे से कोशिशें की जा रही थीं। फ्रांसीसी कंपनी भारत में MICA के रखरखाव और मरम्मत केंद्र स्थापित करेगी। राफेल और मिराज में लगने वाले मिसाइलों की भी मरम्मत     OPEXNews की एक खबर के अनुसार, MBDA और IAF के इस नए समझौते में भारतीय डसॉल्ट राफेल लड़ाकू विमानों और आधुनिक मिराज 2000 विमानों द्वारा उपयोग की जाने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत और मध्यम स्तर के आधुनिकीकरण के लिए स्थानीय क्षमताओं की तैनाती का प्रावधान है।     भारत और MBDA ने MICA हवा से हवा मिसाइल के लिए एक नए समर्थन समझौते की घोषणा की है। इस समझौते के तहत भारतीय वायु सेना MICA के लिए एक घरेलू मरम्मत केंद्र स्थापित और संचालित करेगी, जबकि MBDA कलपुर्जे, तकनीकी डेटा और ट्रेनिंग देगी।     दरअसल, मिसाइलें रिपेयर नहीं, ओवरहॉल होती हैं। एक बार लॉन्च होने के बाद मिसाइल नष्ट हो जाती है। मरम्मत का मतलब उसके भंडारण (Storage) के दौरान खराबी को ठीक करना या उसकी उम्र बढ़ाने के लिए उसे सर्विस करना है। मिसाइल भंडार हमेशा भरा रहेगा     भारत वायु सेना ने बताया कि यह सेंटर मिसाइल भंडार को फिर से तैयार करने में लगने वाले समय को कम करेगा और वायु सेना की युद्धक तत्परता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। फ्रांस आवश्यक उपकरण और तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध कराएगा और स्थानीय कर्मियों को प्रशिक्षण देगा।     इस सुविधा की स्थापना का निर्णय ऑपरेशन सिंदूर के बाद लिया गया, जिसके दौरान भारत ने लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और वायु रक्षा प्रणालियों का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया था। MICA मिसाइलें क्या होती हैं, भारत क्यों कर रहा इस्तेमाल     MICA मिसाइल एक बहुमुखी हवा से हवा में मार करने वाला हथियार है। इसे फ्रांसीसी में (MICA:Missile d'Interception, de Combat et d'Auto-défense) कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है-'अवरोधन, युद्ध और आत्मरक्षा के लिए मिसाइल'। यह एक फ्रांसीसी वायुरोधी मल्टीपल टार्गेट्स वाली हर मौसम में दागो और भूल जाओ वाली लघु से मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली है, जिसका निर्माण MBDA फ्रांस द्वारा किया गया है।     MICA दो वर्जन में उपलब्ध है। MICA-RF सक्रिय रडार सीकर, जबकि MICA-IR इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर से लैस है। दोनों को लंबी दूरी (60-80 किमी) और करीबी लड़ाई में लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। मिसाइल का वजन लगभग 112 किलोग्राम है, जिसमें 12 किलोग्राम का उच्च-विस्फोटक वारहेड लगा है और यह लगभग मैक 4 की गति तक पहुंच सकती है। कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुआ जंगी विमानों का आधुनिकीकरण 1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत ने अपने वायुसेना बेड़े का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण शुरू किया और इन्फ्रारेड (MICA IR) और रडार (MICA RF) होमिंग हेड से लैस मिसाइलों के MBDA संस्करणों की मांग की। 2011 में दोनों पक्षों ने 50 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को मिराज 2000I/TI मानक में अपग्रेड करने के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किए, जिसमें इन मिसाइलों के एडवांस संस्करणों का एकीकरण भी शामिल था। इस समझौते की टाइमिंग बेहद अहम     भारत को 2000 के दशक की शुरुआत में मिराज-2000 के आधुनिकीकरण के साथ-साथ MICA मिसाइलें मिलनी शुरू हुईं। यह समझौता ऐसे समय में घोषित किया गया है जब भारत कई और राफेल जेट खरीदने पर विचार कर रहा है। भारत घरेलू रखरखाव क्षमताओं का निर्माण करके MICA मिसाइल भंडार को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।     स्थानीय मरम्मत और पुनर्निर्माण केंद्र होने से दागी गई या खराब मिसाइलों की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित होती है, जो तीव्र गति वाले अभियानों या संकटों के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे विदेशी मरम्मत चक्रों पर निर्भरता कम होती है और विदेशी शिपिंग या निर्यात अनुमोदन में होने वाली देरी से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए, मध्य पूर्व में हाल ही में हुए अभियानों में एमआईसीए राउंड की खपत हुई, जिससे पर्याप्त भंडार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा, नासिक से खरीदकर हरियाणा में ऊंचे दाम पर बेचने वाला आरोपी पकड़ा गया

नासिक NEET परीक्षा 2026 रद्द होने की खबर के बाद देशभर में नाराजगी का माहौल है. पेपर लीक और धांधली के आरोपों के चलते यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. नासिक (महाराष्ट्र) से एक आरोपी शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) के छात्र शुभम खैरनार पेपर लीक करने के आरोप में पकड़ा गया है. बताया जा रहा है कि टेलीग्राम ऐप के माध्यम से एक अन्य आरोपी के जरिए पेपर लीक की सूचना मिली थी, जिसका पुणे में होने का संदेह है. इसके अलावा शुभम खैरनार पर आरोप है कि उसने पेपर 10 लाख रुपये में खरीदा था, जिसे बाद में हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख रुपये में बेच दिया. सीबीआई की चार टीमें नासिक में क्राइम ब्रांच यूनिट-2 के दफ्तर पहुंचीं और आरोपी शुभम खैरनार को अपनी हिरासत में लिया. शुभम खैरनार को नासिक क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था. वहीं, एसओजी ने उन 150 छात्रों और 70 अभिभावकों की सूची सीबीआई को सौंपी है, जिन्हें लीक हुए कथित गेस पेपर (Guess Paper) मिले थे. इसके अलावा, एसओजी की हिरासत में मौजूद 13 एमबीबीएस काउंसलर्स को भी सीबीआई के हवाले किया गया है. NEET काउंसलरों के अनुसार, NEET का अधिकतम कट-ऑफ 600 अंक है और दिलचस्प बात यह है कि लीक हुए गेस पेपर में भी 600 अंकों के प्रश्न थे, जो NEET के प्रश्न पत्र में भी आए थे. 600 अंकों का यह कट-ऑफ देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश सुनिश्चित करता है. गुरुग्राम से एक युवक हिरासत में NEET पेपर लीक मामले में SIT टीम ने गुरुग्राम से यश यादव नाम के युवक को भी हिरासत में लिया है. जानकारी के अनुसार, राजस्थान SIT और गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की टीम ने यश को हिरासत में लिया. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पेपर लीक मामले में यश यादव की भूमिका क्या रही है, लेकिन राजस्थान SIT टीम का गुरुग्राम आना और यश को हिरासत में लेना पेपर लीक मामले में बड़ी साजिश का खुलासा करता हुआ नजर आ रहा है. CBI ने शुरू की जांच पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. सीबीआई ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से मिली लिखित शिकायत के आधार पर NEET UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज की है.  शिकायत में कहा गया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 3 मई को NEET UG परीक्षा आयोजित की थी. इसमें आरोप लगाया गया है कि परीक्षा से पहले एनटीए को NEET (UG) 2026 परीक्षा से संबंधित कुछ दस्तावेजों के प्रसारित होने की शिकायत और सूचना मिली थी. इन आरोपों से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं. मामले को लेकर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. सीबीआई की विशेष टीमें गठित कर जांच के लिए कई जगहों पर भेजी गई हैं.

पाकिस्तान की ‘मानव ढाल’ रणनीति? ब्रह्मोस के बाद हैंगर में छिपे फाइटर जेट, रनवे पर उतारा जेडी वेंस का विमान

चंडीगढ़  पाकिस्तान एक बार फिर अपनी दोहरी नीति का शिकार नजर आ रहा है. भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हमलों से हुए घावों को ढकने के लिए आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने जो रणनीति अपनाई, वह अब उल्टी पड़ रही है. नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को छिपाने की रिपोर्ट्स ने पाकिस्तान को बुरी तरह फंसा दिया है. सोचिए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस का प्लेन उसी रनवे पर उतारा गया, जहां ईरान के जेट छिपे हुए थे. ये रिपोर्ट सच निकली तो यह घटनाक्रम पाकिस्तान को महागद्दार साबित करने वाला है. वैसे पहले भी पाकिस्तान ऐसा ही कर चुका है लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की पुचकार पर पहली बार इस देश ने उन्हें अपनी औकात दिखाई है। CBS न्यूज की हालिया रिपोर्ट के बताती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा के कुछ दिन बाद ही ईरान ने अपने सैन्य विमानों को पाकिस्तान में छिपाया. जिन विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर पार्क करवा दिया, उनमें RC-130 टोही विमान भी शामिल है. ईरान अमेरिकी या इजरायली हमलों से अपने एसेट्स को बचाना चाहता था और इसमें उसका साथ दिया पाकिस्तान ने. ये वही पाकिस्तान है, जो खुद को वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ बता रहा था, वो हौले से ईरानी खेमे में सरक गया। पाकिस्तान की गद्दारी तो देखिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए इसे डेलिगेशन लॉजिस्टिक्स बताया, लेकिन तथ्य कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. इस बीच आसिम मुनीर की दोहरी छवि भी चर्चा में रही. ईरानी डेलिगेशन का स्वागत करते समय वे कॉम्बैट गियर में थे, जबकि जेडी वैंस के आने पर सूट-बूट में. नूर खान एयरबेस, जो पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस हमलों से क्षतिग्रस्त हुआ था, एक बार फिर सुर्खियों में है. मुनीर ने इस बेस को ढाल बनाने की कोशिश की, लेकिन यह अब पाकिस्तान की कमजोरी का प्रतीक बन गया है. ये पाकिस्तान के दोहरे चेहरे का सिंबल बन गया है, जो कभी भी पाला बदल सकता है। अमेरिकी सीनेटर ने उठाए सवाल अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका पर पुनर्विचार की मांग की और कहा कि पाकिस्तान की निष्पक्षता पर संदेह है. ग्राहम की टिप्पणियों ने वाशिंगटन में पाकिस्तान के प्रति बढ़ते अविश्वास को रेखांकित किया. ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं- साझा सीमा, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय संतुलन के नाम पर. साल 1979 की ईरानी क्रांति के बाद भी दोनों देशों ने एक-दूसरे को समर्थन दिया, लेकिन अमेरिका, पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी रहा है. वो उससे अरबों डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद, F-16 जैसे हथियार और आतंकवाद के खिलाफ साझा अभियान चलाता रहा है. बावजूद इसके पाकिस्तान ईरान को शरण दे रहा है. ये उसकी नीयत पर सवाल उठाता है। कूटनीति या दोगलापन?     पाकिस्तान न तो पूर्ण रूप से अमेरिकी ब्लॉक में है और न ही चीनी-ईरानी धुरी में. चीन के साथ CPEC और सैन्य सहयोग और ईरान के साथ गुप्त संबंध बनाए रखना उसे अमेरिका की नजर में अविश्वसनीय बनाता है।     ब्रह्मोस हमलों के बाद पाकिस्तान ने अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने का दावा किया, लेकिन ईरानी जेट छिपाने से उसकी क्षमता और विश्वसनीयता दोनों पर सवाल उठ गए हैं।     पाकिस्तान अब बुरी तरह फंस गया है. एक तरफ अमेरिका से सहायता की उम्मीद, दूसरी तरफ ईरान और चीन के साथ पुराने गठजोड़ उसे कठघरे में खड़ा करता है. जेडी वेंस का प्लेन उसी एयरबेस पर उतरा, जो संकेत देता है कि अमेरिका की भी नजर उसकी हर चाल पर है।     फिलहाल, पाकिस्तान सिर्फ अपना स्वार्थ देख रहा है, यही वजह है कि उसने सऊदी अरब के साथ अपने पैक्ट के तहत सेनाएं न भेजने के लिए ईरान से भी समझौता कर लिया. भले ही इससे वो अमेरिका की आंखों में धूल झोंक रहा है।