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UN में शहबाज शरीफ के भाषण के दौरान हंसे भारतीय राजनयिक, वीडियो हुआ वायरल

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी की UN में भारतीय राजनयिक की पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ पर एक प्रतिक्रिया इंटरनेट पर वायरल हो गई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूएन में भाषण दे रहे थे, इस दौरान उन्होंने भारत के खिलाफ झूठा नैरेटिव फैलाने की कोशिश की। शहबाज शरीफ ने झूठ बोलते हुए कहा कि मई 2025 में भारत से टकराव में पाकिस्तान की जीत हुई थी। इस दौरान यूएन का कैमरा भारतीय राजनयिक रेंटला श्रीनिवास की तरफ मुड़ा और वो अपनी सीट पर बैठकर हंसते नजर आए। कौन हैं राजनयिक आर श्रीनिवास आर श्रीनिवास ने अपने राजनयिक करियर की शुरुआत त्रिनिदाद और टोबैगो में भारत के उच्चायोग में अताशे के तौर पर काम किया। बता दें कि दूतावास में अताशे एक खास राजनयिक अधिकारी होता है, जो किसी खास सब्जेक्ट जैसे व्यापार, संस्कृति या रक्षा का विशेषज्ञ होता है। इसके अलावा वह पोर्ट ऑफ स्पेन के भारतीय उच्चायोग में अताशे और इसके साथ ही 'इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम' (ITEC) के कोऑर्डिनेटर रह चुके हैं। किस पद पर हैं आर श्रीनिवास रेंटला श्रीनिवास नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में विदेश सचिव के प्रधान निजी सचिव (PPS) के तौर पर काम कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी मिशन में 'सेकंड सेक्रेटरी' के तौर पर काम करते हुए भारत का प्रतिनिधित्व किया है। बता दें कि पीपीएस का मतलब 'प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी' होता है। यह भारत सरकार के मंत्रालयों में एक वरिष्ठ प्रशासनिक और सेक्रेटेरियल पद है। UN में शहबाज शरीफ ने क्या कहा? शहबाज शरीफ ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान परमाणु हथियार वाले दो देशों के बीच तनाव को रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की तारीफ की। शरीफ ने कहा कि ट्रंप का सही समय पर किया गया दखल एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आया, जब भारत-पाकिस्तान पूर्ण युद्ध के कगार पर खड़े थे। कौन जानता है कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने इस नाजुक क्षण में कदम न उठाया होता तो कितनी तबाही मची होती। शहबाज शरीफ ने इस दौरान सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा भी उठाया।

अमेरिका रोकेगा डीजल निर्यात? मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन के कदम पर दुनिया की नजर

 वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है. दरअसल, अमेरिका में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इससे घरेलू स्तर पर लोगों की परेशानी बढ़ी है. ट्रंप प्रशासन अब कीमतों को कम करने के रास्ते तलाश रहा है।  इसी बीच डीजल निर्यात पर रोक का प्रस्ताव सामने आया है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी कहा है कि प्रशासन निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका दुनिया में डीजल के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल है. वह वैश्विक डीजल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा उपलब्ध कराता है. ऐसे में अमेरिका से डीजल का निर्यात कम होने पर दुनिया के दूसरे देशों में इसकी कीमत बढ़ सकती है।  इस समय वैश्विक ईंधन बाजार पहले से दबाव में है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल सप्लाई भी प्रभावित हुई है. वहीं, रूस के डीजल निर्यात पर रोक और यूक्रेन के रूसी तेल ठिकानों पर हमलों ने भी स्थिति को मुश्किल बनाया है।  ऑस्ट्रेलिया पर क्यों पड़ेगा ज्यादा असर? ऑस्ट्रेलिया विकसित देशों में प्रति व्यक्ति डीजल की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया आम तौर पर अमेरिका से डीजल आयात नहीं करता. मार्च में एक इमरजेंसी खेप जरूर अमेरिका से वहां पहुंची थी।  इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया पर असर पड़ सकता है. इसकी वजह वैश्विक बाजार है. अगर अमेरिका डीजल का निर्यात रोकता है तो दुनिया भर में इसकी कीमत तेजी से बढ़ सकती है. इससे ऑस्ट्रेलिया में भी ईंधन महंगा होगा. हालात ज्यादा बिगड़े तो वहां ईंधन की राशनिंग तक की नौबत आ सकती है।  अमेरिका में भी बढ़ सकती है परेशानी डीजल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है. देश में डीजल की सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो सकती है. इससे घरेलू कीमतें घट सकती हैं. लेकिन ज्यादा सप्लाई होने पर अमेरिकी रिफाइनरियों को उत्पादन कम करना पड़ सकता है. इसी वजह से व्हाइट हाउस ने फिलहाल पूरी तरह निर्यात रोकने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार किया है।  ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार की ओर ज्यादा ईंधन भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. इसके लिए टैक्स में छूट जैसे वित्तीय उपाय किए जा सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका डीजल निर्यात के लिए कोटा भी तय कर सकता है. यानी देश से बाहर जाने वाले डीजल की मात्रा सीमित की जा सकती है. इस फैसले का इस्तेमाल व्यापार वार्ता में भी किया जा सकता है। 

IMF ने पाकिस्तान के सामने रखी 174 शर्तें, बदलाव लागू हुए तभी मिलेगा $7 अरब का कर्ज

नई दिल्‍ली इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने पाकिस्‍तान को बड़ा झटका दिया है. आईएमएफ ने पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान के सामने कुछ ऐसी शर्त रख दी है, जिसे पूरा किए बिना उसे एक भी पैसे नहीं मिलेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ कठिन वार्ता के एक और दौर के लिए तैयार है।  IMF का कहना है कि पाकिस्‍तानी सरकार को 7 अरब डॉलर का कर्ज अनलॉक करने के लिए संसद के सामने 174 विधायी संशोधनों को पेश करना होगा और उसे लागू कराने की कोशिश करनी होगी. प्रस्‍तावित कानूनी बदलावों में टैक्‍सेशन, एनर्जी सेक्‍टर, प्राइवेटाइजेशन और सॉवरेन वेल्‍थ फंड समेत अन्‍य सेक्‍टर शामिल हैं।   इन चर्चाओं के दौरान IMF पाकिस्‍तान के सुधारों और उसकी ग्रोथ की भी जांच कर सकता है, जिसमें 15 संरचनात्‍मक मानदंड, साथ ही राजकोषीय बदलाव, फाइनेंस और अन्‍य उपाय शामिल हैं।  पाकिस्‍तान ने 174 बदलावों पर क्‍या कहा?  विधायी प्रक्रिया का पैमाना राष्ट्रीय सभा की एक समिति के सामने रखा गया है, जहां पाकिस्तान के वित्त सचिव इम्दादुल्लाह बोसल ने कहा कि IMF की शर्तों से जुड़े 174 संशोधनों को संसद के सामने रखना होगा. बोसल ने फाइनेंस और रेवेन्‍यू संबंधी राष्‍ट्रीय सभा की स्‍थायी समिति को बताया कि IMF कुल 174 संशोधनों को पास करवाना चाहता है।  हालांकि, वित्त सचिव ने यह बात बरकरार रखी कि प्रस्तावित संशोधनों पर निर्णय लेने का विशेषाधिकार संसद के पास होगा. ये बदलाव पाकिस्तान के आर्थिक ढांचे के कई क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें टैक्‍सेशन, एनर्जी, प्राइवेटाइजेशन और सॉवरेन वेल्‍थ फंड शामिल हैं।   15 नियम-कायदों की भी होगी जांच ये विधायी बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब पाकिस्तान और आईएमएफ ने चौथी समीक्षा के तहत बातचीत कर रहे हैं. इस समीक्षा में 15 संरचनात्‍मक मापदंडों को शामिल किया जाएगा और अर्थव्‍यवस्‍था के खास सेक्‍टर में सुधारों की ग्रोथ का आकलन किया जाएगा।  ऊर्जा क्षेत्र, सरकारी स्वामित्व वाले कारोबार (SOE) और प्राइवेट से संबंधित उपायों के साथ-साथ टैक्‍स सुधार भी जांच के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में शामिल होंगे. राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, राज्‍य फाइनेंस और मितव्ययिता उपायों पर भी चर्चा होगी।  बिजली वितरण कंपनियां और शुगर पॉलिसी बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण का मुद्दा भी समीक्षा वार्ता में शामिल होने की उम्मीद है, क्योंकि इस्लामाबाद अपने ऊर्जा क्षेत्र और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों से संबंधित प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की कोशिश कर रहा है. इस मुद्दे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर लाभ कमाने वाली डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों का निजीकरण कर दिया जाता है तो घाटे में चल रही डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियों का क्या होगा।  चीनी नीति में बदलाव भी आईएमएफ के मानदंडों में शामिल हैं. पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, संघीय सरकार ने उदारीकरण के लिए एक मसौदा नीति जारी की है, जिस पर तीन प्रांतों ने सहमति जताई है और एक ने आपत्ति जताई है. चर्चा के दायरे में आने वाले अन्य क्षेत्रों में इस्लामी बैंकिंग से संबंधित सुधार और टैक्‍सेशन सिस्‍टम में और बदलाव शामिल हैं। 

त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत, रेलवे चलाएगा 102 फेरे वाली स्पेशल ट्रेन; आज से टिकट बुकिंग

 नई दिल्‍ली अगर आप दशहरा-दिवाली पर घर जाना चाहते हैं तो भारतीय रेलवे आपके लिए कुछ फेस्टिवल स्‍पेशल चलाने जा रहा है. यह ट्रेनें 102 फेरे लगाएंगी और आपको अपने शहर तक छोड़ेंगी. इन ट्रेनों में बुकिंग आज  यानी 27 सितंबर से शुरू हो रही है।  ऐसे में अगर आप त्‍योहारों पर घर जाना चाहते हैं तो आपको टेंशन लेने की आवश्‍यकता नहीं है, बल्कि फटाफट बुकिंग शुरू कर देनी चाहिए. त्‍योहारों के लिए बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने ये फैसला लिया है. 102 फेरे लगाने वाली ट्रेनें  सोलापुर मंडल से गुजरने वाले अलग-अलग रूटों पर चलाई जाएंगी. इन ट्रेनों से मुंबई, चेन्नई, लातूर, कोल्हापुर और कलबुरगी समेत कई प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।  मुंबई-चेन्नई के बीच स्पेशल ट्रेनें CSMT मुंबई-चेन्नई बीच वीकली स्पेशल ट्रेन के 6 फेरे चलाए जाएंगे. यह ट्रेन 14 अक्टूबर से 18 नवंबर तक हर बुधवार को मुंबई से रात 12:35 बजे रवाना होगी और उसी दिन रात 11:30 बजे चेन्‍नई पहुंच जाएगी. वापसी में चेन्नई-CSMT मुंबई स्पेशल 15 अक्टूबर से 19 नवंबर तक हर गुरुवार को सुबह 4 बजे चेन्नई से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 4 बजे मुंबई आ जाएगी।  इसका स्‍टॉपेज- दादर, ठाणे, कल्याण, लोनावला, पुणे, दौंड, कुर्डुवाड़ी, सोलापुर, कलबुरगी, वाडी, रायचूर, मं‍त्रालयम रोड, अडोनी, गुंतकल, गूटी, ताड़ीपत्री, ये‍र्रागुंटला, कडप्पा, रेनिगुंटा, अरक्कोनम और पेरंबूर।  मुंबई-लातूर के बीच 26 फेरे लगाएगी फेस्टिवल स्‍पेशल ट्रेनें  मुंबई और लातूर के बीच यात्रियों के लिए मुंबई-लातूर द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने का ऐलान किया गया है. यह ट्रेन 13 अक्टूबर से 24 नवंबर तक हर मंगलवार और गुरुवार को चलाई जाएगी. इसके कुल 13 फेरे जारी होंगे. CSMT मुंबई से ट्रेन रात 12:35 बजे रवाना होकर उसी दिन सुबह 11:40 बजे लातूर पहुंचेगी।  वापसी में लातूर-सीएसएमटी मुंबई स्‍पेशल भी 13 बार जाएगी. यह ट्रेन 13 अक्‍टूबर से 24 नवंबर तक हर मगंलवार और गुरुवार को शाम 4.30 बजे लातूर से चलेगी और अगले दिन सुबह 4.10 बजे सीएसएमटी मुंबई पहुंचेगी।  इसका स्‍टॉपेज- दादर, ठाणे, कल्याण, लोनावला, पुणे, उरुली, दौंड, भीगवां, जेजुरी, कुर्डुवाड़ी, बार्शी टाउन, धाराशिव और हरंगुल।  कोल्हापुर-कलबुरगी फेस्टिवल स्‍पेशल  रेलवे कोल्हापुर और कलबुरगी के बीच भी 64 फेरे लगाएगी. यह स्पेशल ट्रेन शुक्रवार को छोड़कर हर दिन चलेगी. कोल्हापुर-कलबुरगी स्पेशल 10 अक्टूबर से 15 नवंबर तक हर दिन सुबह 6:10 बजे कोल्हापुर से रवाना होगी और शाम 4:10 बजे कलबुरगी पहुंचेगी. इस दिशा में कुल 32 फेरे होंगे।  कलबुरगी-कोल्हापुर स्पेशल 10 अक्टूबर से 15 नवंबर तक हर दिन, शुक्रवार को छोड़कर, शाम 6:10 बजे कलबुरगी से चलेगी और अगले दिन सुबह 5:40 बजे कोल्हापुर पहुंचेगी. इस दिशा में भी 32 फेरे चलाई जाएंगी।  स्टॉपेज- हाटकनगले, जयसिंगपुर, मिरज जंक्शन, अरग, बेलांकी, सुलगारे, कवठे महांकाल, लंगरपेठ, ढालगांव, म्हसोबा डोंगरगांव, जावले, वासुद, सांगोला, पंढरपुर, मोडनिंब, कुर्डुवाड़ी जंक्शन, सोलापुर और कलबुरगी जंक्शन। 

RBI का बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से FD के नियमों में बदलाव

नई दिल्ली  देश में सबसे सुरक्षित निवेशों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को अहम माना जाता है। इसमें समय के साथ जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी पहले से तय होता है। इस बीच बैंक एफडी में निवेश करने वालों और खासकर के संबंधित बैंक के लिए एक बड़ी खबर है। केंद्रीय बैंक यानी कि आरबीआई ने बीते दिनों बैंक एफडी को लेकर उसके नियमों में संशोधन किया था, जिसे एक अक्टूबर 2026 से लागू किया जाएगा। बैंक एफडी की ब्याज दरों में पारदर्शिता लाने और ग्राहकों के लिए और भी सहूलियत बनाने के लिए 1 अक्टूबर से एफडी के नियमों में बड़ा बदलाव होगा। आइए जानते हैं यह पूरा बदलाव क्या है और इससे क्या असर पड़ेगा। बैंक एफडी के लिए आरबीआई का नया नियम क्या है?     बीते दिनों केंद्रीय बैंक यानी कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक एफडी से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर दिशानिर्देश जारी किया था, जिसे एक 1 अक्टूबर 2026 से लागू कर दिया जाएगा।     इस नियम के तहत बैंक की अलग-अलग ब्रांच में एक ही अवधि (समय) के लिए बनी एफडी योजना और उसपर मिलने वाली सालाना ब्याज दर एक सामान होगी। यह शहर या जगह के आधार पर अलग-अलग नहीं होगी। मतलब कि देश के सभी ब्रांचों में संबंधित बैंक की एफडी दर सामान होगी।     इस नियम के तहत यह भी साफ किया गया है कि बैंकों को एफडी पर दी जाने वाली ब्याज दर को ग्राहकों को मौखिक रूप से नहीं बल्कि अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से ही बताना होगा।  मतलब कि किसी भी बैंक को अपनी एफडी योजना के रेट कार्ड को लोगों के लिए पहले से ही अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा।     बल्क डिपॉजिट के लिए भी नए नियम लागू होंगे। बल्क डिपॉजिट यानी कि 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि की एफडी के लिए बैंकों को हर रोज अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नई दरें अपडेट करनी होगी। इसकी टाइमिंग हर रोज सुबह 10 बजे रहेगी। ग्रेस टाइम के साथ इसे हर हाल में सुबह 10:10 बजे तक अपडेट कर देना ही होगा। 1 अक्टूबर से मौजूदा एफडी पर क्या असर पड़ेगा? मिली जानकारी के अनुसार, एफडी को लेकर यह जो भी नया नियम एक अक्टूबर से लागू होने जा रहा है, इससे मौजूदा एफडी पर कोई बड़ा असर या असर नहीं पड़ेगा। आपकी जो भी एफडी पहले से चल रही है, वह उसी तय ब्याज दर, समय या तय नियमों के साथ जारी रहेगी। इस नए नियम से एफडी को लेकर ग्राहकों और बैंकों के बीच पारदर्शिता पहले से अधिक हो जाएगी। लोगों को एफडी की ब्याज दर जानने के लिए बैंक नहीं जाना होगा, खासकर के बल्क डिपॉजिट की रोजाना तय हो रही ब्याज दर के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि, ग्राहकों को संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर सुबह 10 बजते ही नई रेट की जानकारी मिल जाएगी। बैंक एफडी की ब्याज दरें कैसे तय करता है? बैंक एफडी की ब्याज दरें जमा राशि के आधार पर तय करता है। वह आमतौर पर जमा राशि के आधार पर अलग-अलग एफडी पर ब्याज रेट देता है। बैंक खुदरा जमा (जो 3 करोड़ रुपये से कम होती हैं) पर एक ही ब्याज दर लागू किए हुए होता है, जबकि बल्क डिपॉजिट यानी कि 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि पर ब्याज दरें अलग-अलग होती हैं। मालूम हो कि 22 अक्टूबर 1997 से, आरबीआई ने बैंकों को अलग-अलग अवधि वाली घरेलू मियादी जमाओं (टर्म डिपॉजिट) पर अपनी ब्याज दरें तय करने की आजादी दे दी थी।     एफडी का पूरा नाम क्या है?     एफडी का पूरा नाम फिक्स्ड डिपॉजिट है, जिसे हिंदी में सावधि जमा कहते हैं।     एफडी की विशेषता क्या है?     एफडी की विशेषता में सुरक्षित रिटर्न, तय ब्याज दर और तय समय समेत अन्य शामिल हैं।     FD में कितना पैसा जमा कर सकते हैं?     FD में अधिकतम पैसे जमा करने की कोई सीमा नहीं है। हालांकि, न्यूनतम आप 1000 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं।     सीनियर सिटीजन को FD पर कितना ब्याज मिलता है?     सीनियर सिटीजन को FD पर 8.50% तक का ब्याज मिलता है।     पोस्ट ऑफिस में सीनियर सिटीजन में कितना ब्याज मिलता है?     पोस्ट ऑफिस में सीनियर सिटीजन स्कीम में 8.2 फीसदी का सालाना ब्याज मिलता है।

पुराना PF नए अकाउंट में कैसे ट्रांसफर करें? जानें आसान तरीका

 नई दिल्ली नौकरी बदलते ही PF का पैसा भी आपके साथ नई कंपनी में चला जाता है, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार पुरानी नौकरी का PF पुराने Member ID में पड़ा रहता है और नई नौकरी का PF अलग खाते में जमा होने लगता है. ऐसे में अगर आपने कई कंपनियों में काम किया है, तो आपका PF कई खातों में बंटा हो सकता है. अच्छी बात यह है कि EPFO की ऑनलाइन सुविधा के जरिए पुराने PF खाते का बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है।  PF ट्रांसफर करने से पहले यह देखना जरूरी है कि पुराना और नया PF खाता आपके UAN यानी Universal Account Number से जुड़ा हुआ है या नहीं. UAN के जरिए आपके अलग-अलग PF Member ID को एक ही खाते से जोड़ा जाता है. साथ ही अपनी KYC जानकारी भी जांच लें. खासकर आधार, बैंक खाते और PAN जैसी जानकारी में कोई गलती या कमी है तो उसे पहले ठीक करना बेहतर है।  घर बैठे ऐसे करें PF Transfer EPFO के Member Portal पर UAN और पासवर्ड से लॉगिन करें. इसके बाद Online Services में जाएं. यहां 'One Member – One EPF Account (Transfer Request)' का विकल्प मिलता है. EPFO के आधिकारिक FAQ में इसी विकल्प के जरिए PF ट्रांसफर की प्रक्रिया बताई गई है. इसके बाद पुराने PF खाते की जानकारी और मौजूदा PF खाते से जुड़ी जानकारी को जांचें।  ट्रांसफर के लिए पुराने खाते को चुनकर जरूरी जानकारी भरें और ऑनलाइन क्लेम सबमिट करें. EPFO की मौजूदा Revamped Form 13 व्यवस्था में सदस्य की KYC, उपलब्ध PF बैलेंस, योगदान, ट्रांसफर और ब्याज से जुड़ी जानकारी एक जगह दिखाई जाती है, जिससे ट्रांसफर क्लेम की जानकारी को जांचना आसान हो गया है।  Form 13 क्या है? PF ट्रांसफर के लिए Form 13 इस्तेमाल किया जाता है. इसका उद्देश्य पुराने PF खाते की रकम को मौजूदा PF खाते में ट्रांसफर करना है. आधिकारिक Form 13 में पुराने और मौजूदा दोनों PF खाते की जानकारी मांगी जाती है. ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद Annexure-K में ट्रांसफर से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होती है. EPFO ने नए Form 13 में Annexure-K को भी बेहतर तरीके से शामिल किया है, जिसमें टैक्स योग्य और गैर-टैक्स योग्य हिस्से की जानकारी भी दी जा सकती है।  PF ट्रांसफर करने का फायदा क्या है पुराने PF खाते का पैसा अलग-अलग जगह पड़ा रहने के बजाय मौजूदा खाते में ट्रांसफर होने से आपका PF रिकॉर्ड व्यवस्थित रहता है. इससे भविष्य में PF से जुड़ा क्लेम या निकासी करते समय पुराने खातों को अलग-अलग संभालने की जरूरत कम हो सकती है. यह भी ध्यान रखें कि PF ट्रांसफर अपने आप पेंशन की पात्रता या टैक्स छूट की गारंटी नहीं देता. पेंशन और टैक्स से जुड़े फायदे संबंधित नियमों और आपकी पात्रता पर निर्भर करते हैं।  ट्रांसफर के बाद स्टेटस देख सकते हैं ऑनलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट करने के बाद EPFO पोर्टल पर Track Claim Status विकल्प के जरिए क्लेम की स्थिति देखी जा सकती है. EPFO के आधिकारिक पोर्टल पर Member Login और ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं. इसलिए अगर नौकरी बदलने के बाद आपका PF पुरानी कंपनी के खाते में पड़ा है, तो उसे यूं ही छोड़ने के बजाय पहले UAN और KYC की जानकारी जांचें और जरूरत होने पर ऑनलाइन PF Transfer Request डालें। 

युद्ध अभ्यास 2026 में SkyStriker का सटीक वार, ऑपरेशन सिंदूर वाले ड्रोन को अमेरिका ने किया नोटिस

नई दिल्ली युद्ध अभ्यास 2026 के दौरान महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर स्काईस्ट्राइकर लोइटिरिंग म्यूनिशन ने सटीक हमला किया. इस प्रदर्शन में उसने निर्धारित लक्ष्यों का पता लगाने, उन पर निशाना साधने और सटीक प्रहार करने की अपनी क्षमता साबित की. यह परीक्षण वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में किया गया।  अभ्यास में भारतीय और अमेरिकी सेनाएं शामिल रहीं और स्काईस्ट्राइकर ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को रेखांकित किया. लोइटिरिंग म्यूनिशन एक ऐसा सिस्टम है जो हवा में मंडराते हुए लक्ष्य की तलाश करता है. फिर सटीक हमला करता है. स्काईस्ट्राइकर ने इस क्षमता को महाजन जैसे कठिन मैदानी इलाके में दिखाया. इससे सेनाओं को यह समझने में मदद मिली कि ड्रोन आधारित हथियार ऑपरेशन में कितने प्रभावी हो सकते हैं।  ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल इस ड्रोन के सफल परीक्षण ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के महत्व को फिर से उजागर किया. आज की सेनाएं पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ बिना चालक वाले सिस्टम पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं. स्काईस्ट्राइकर जैसे प्लेटफॉर्म सटीक प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं. इससे अनावश्यक नुकसान कम होता है और लक्ष्य को ज्यादा असरदार तरीके से निपटाया जा सकता है।  युद्ध अभ्यास 2026 का मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है. स्काईस्ट्राइकर के प्रदर्शन ने दिखाया कि स्वदेशी सिस्टम अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में भी अपनी जगह बना रहे हैं. आधुनिक युद्ध अब सिर्फ बड़े हथियारों तक सीमित नहीं रह गया. छोटी लेकिन सटीक प्रणालियां भी फैसला करने वाली साबित हो सकती हैं।  ड्रोन आधारित युद्धक्षेत्र की चुनौतियां आज के युद्धक्षेत्र में ड्रोन और बिना चालक वाले सिस्टम आम होते जा रहे हैं. सेनाएं मल्टी-डोमेन ऑपरेशन यानी जमीन, हवा और अन्य क्षेत्रों में एक साथ काम करने की तैयारी कर रही हैं. स्काईस्ट्राइकर जैसे लोइटिरिंग म्यूनिशन इन जटिल परिस्थितियों में लक्ष्य का पता लगाने और समय पर प्रहार करने में मदद करते हैं।  महाजन रेंज पर हुए परीक्षण ने वास्तविक माहौल में इसकी क्षमता को परखा. यह प्रदर्शन सिर्फ एक हथियार का परीक्षण नहीं बल्कि भविष्य की युद्ध रणनीति की झलक है. सटीक हमले की क्षमता से सैनिकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं. दुश्मन के ठिकानों को दूर से और सुरक्षित दूरी से निशाना बनाया जा सकता है. इससे अपने सैनिकों का जोखिम भी कम होता है।  युद्ध अभ्यास 2026 में स्काईस्ट्राइकर का इस्तेमाल दोनों सेनाओं के लिए सीखने का मौका बना. अमेरिकी और भारतीय जवान एक-दूसरे की तकनीकों और तरीकों को करीब से समझ सके. स्वदेशी सिस्टम का सफल प्रदर्शन भारत की रक्षा क्षमताओं पर भरोसा बढ़ाता है. साथ ही यह दिखाता है कि देश अब आधुनिक और सटीक हथियार विकसित करने में सक्षम है।  महाजन फील्ड फायरिंग रेंज लंबे समय से बड़े अभ्यासों के लिए जानी जाती है. यहां के कठिन हालात में स्काईस्ट्राइकर का काम करना इसकी विश्वसनीयता को साबित करता है. अभ्यास के दौरान लक्ष्य का पता लगाना, ट्रैक करना और फिर सटीक प्रहार करना पूरी प्रक्रिया का हिस्सा था. यह प्रक्रिया आधुनिक युद्ध की जरूरतों से मेल खाती है।  भविष्य की दिशा स्काईस्ट्राइकर जैसे सिस्टम भविष्य के युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं. ड्रोन युद्धक्षेत्र में सटीकता और तेजी सबसे महत्वपूर्ण हो गई है. सेनाएं अब ऐसे हथियारों पर जोर दे रही हैं जो कम लागत में ज्यादा असर डाल सकें. स्वदेशी तकनीक का विकास भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. यह सफल परीक्षण रक्षा अनुसंधान और सेना के सहयोग को भी दर्शाता है।  जब तक नई तकनीक मैदान में साबित नहीं होती तब तक उसका असली मूल्य पता नहीं चलता. स्काईस्ट्राइकर ने महाजन में अपनी उपयोगिता दिखाई है. आने वाले समय में ऐसे और परीक्षण होने की उम्मीद है. कुल मिलाकर युद्ध अभ्यास 2026 में स्काईस्ट्राइकर का प्रदर्शन स्वदेशी क्षमता, सटीक युद्ध और आधुनिक ड्रोन तकनीक की तीनों दिशाओं को मजबूत करता है। 

Smart TV पर FREE चैनल देखने वालों के लिए बड़ी खबर! TRAI कर रहा नए नियम पर विचार

नई दिल्ली TRAI Free Internet TV Regulation Rules: ट्राई एक नया नियम लाने पर विचार कर रहे हैं, जिससे इंटरनेट पर फ्री टीवी देखने वालों को बड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के अनुसार, ट्राई, एप्लीकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री ऐड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सर्विसेस को एक फॉर्मल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के दायरे में लाने की सिफारिश कर सकती है। नए नियम लागू होने से स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल वाली सुविधा थोड़ी सिकुड़ सकती है। हालांकि, यह फाइनल नियम नहीं है, बल्कि अभी केवल सुझाव मांगे जा रहे हैं। इसलिए जब तक नियम लागू नहीं होते, स्मार्ट टीवी पर मुफ्त चैनल चलते रहेंगे और इसका असर फिलहाल ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। यह मुद्दा तब उठा, जब सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ट्राई से यह जांचने को कहा कि क्या FAST और ALTD सर्विसेस को लाइसेंसिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि ट्राई के अपनी इस बात पर कायम रहने की उम्मीद है कि लीनियर, शेड्यूल वाले चैनल देने वाली ओपन-इंटरनेट टेलीविजन सर्विसेस को पूरी तरह से फॉर्मल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। इंडस्ट्री दो गुटों में बंटी मामला सामने आने के बाद टीवी और ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री दो गुटों में बंट गई है। केबल और DTH ऑपरेटर जैसे पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म का तर्क है कि FAST सर्विसेस टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन की नकल कर रही हैं, जबकि वे लाइसेंस प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटरों पर लागू कई शर्तों का पालन किए बिना काम कर रही हैं। हालांकि, टेक्नोलॉजी कंपनियों, OTT प्लेटफॉर्म, स्मार्ट-TV बनाने वाली कंपनियों और FAST ऑपरेटरों का तर्क है कि इंटरनेट पर आधारित सर्विसेस पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग से बिल्कुल अलग हैं और उन पर पुराने लाइसेंसिंग नियम लागू नहीं होने चाहिए। केबल/DTH वाले कह रहे हैं कि मुफ्त इंटरनेट टीवी उनकी सब्सक्रिप्शन घटा रही है, इसलिए नियम चाहिए। डिजिटल/OTT वाले कहते हैं कि इंटरनेट सर्विसेस पर पुराने ब्रॉडकास्ट नियम न थोपो। इसलिए, रेगुलेटरी बहस अब मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित हो रही है कि किसी सर्विस का स्वरूप उस टेक्नोलॉजी से तय होना चाहिए जिसका इस्तेमाल उसे देने के लिए किया जाता है, या फिर उस टेलीविजन जैसे अनुभव से जो वह ग्राहकों को देती है। ये फ्री इंटरनेट TV क्या है?  Samsung TV Plus, LG Channels, Pluto TV, Xiaomi जैसी स्मार्ट टीवी पर आने वाले ऐप्स/प्लेटफॉर्म। इनमें लीनियर टीवी चैनल (जैसे पारंपरिक टीवी की तरह शेड्यूल पर चलने वाले) मुफ्त दिखते हैं। इसका पैसा विज्ञापन से आता है, इसलिए सब्सक्रिप्शन फीस नहीं ली जाती है। ये इंटरनेट के जरिए स्मार्ट टीवी, ऐप या ब्राउजर पर चलते हैं। ये पारंपरिक केबल/DTH/IPTV की तरह काम करते हैं, लेकिन अभी तक लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन के सख्त नियमों में नहीं थे। ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा अगर ट्राई का प्रस्तावित नियम लागू हो जाता है, तो दर्शकों को खराब सर्विस या किसी तरह का फ्रॉड होने पर शिकायत दर्ज कराने का अधिकार मिलेगा। इससे टीवी की तरह ही इंटरनेट पर चलने वाले चैनलों पर भी अश्लील या भ्रामक विज्ञापनों और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने पर लगाम लगेगी। अभी जितने चैनल इंटरनेट पर फ्री में देखे जा सकते हैं, उन पर लाइसेंस फीस लगने के बाद वे कुछ चार्ज यूजर्स से ले सकते हैं। यानी नए नियम लागू होने से स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल वाली सुविधा थोड़ी सिकुड़ सकती है। इससे इंटरनेट पर टीवी देखना मुफ्त नहीं रहेगा।

शराबबंदी के बीच नागालैंड में हड़कंप, संदिग्ध जहरीली शराब से 19 की मौत

कोहिमा नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 19 लोगों की मौत हो गई है. पिछले दो दिनों में अलग-अलग इलाकों से मौत के मामले सामने आए हैं. पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT बनाई है।  पुलिस के मुताबिक, मौतें मोकोकचुंग और तुएनसांग जिलों में हुई हैं. मोकोकचुंग में 8 लोगों की मौत हुई है. वहीं, तुएनसांग में 11 लोगों की जान गई है. आशंका है कि इन लोगों ने मिलावटी या अवैध शराब का सेवन किया था।   शराब की सप्लाई का पता लगाएगी SIT वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि मामले की जांच के लिए SIT बनाई गई है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आई बंगलांग चांग को टीम का प्रमुख बनाया गया है. SIT मौतों की वजह का पता लगाएगी. इसके साथ ही संदिग्ध मिलावटी शराब के स्रोत और उसकी सप्लाई चेन की भी जांच होगी।  पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ सुराग मिले हैं. हालांकि, अभी इनके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है. पुलिस ने संदिग्ध शराब के सैंपल जांच के लिए गुवाहाटी भेजे हैं. इनकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी. इससे मौतों की असली वजह का पता लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने मामले में कई जगह छापेमारी भी की है. कार्रवाई के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया. करीब 3 हजार शराब की बोतलें भी जब्त की गई हैं।  जांच में जुटी पुलिस वहीं घटना के बाद से पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई है और जांच में जुट गई है। जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले पर सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि इन मौतों की जांच करने और मिलावटी शराब के स्रोत और सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) आई. बुंगलांग चांग की अगुवाई में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। इस घटना में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  फोरेंसिंक जांच के लिए भेजे गए सैंपल पुलिस ने बताया कि मौतों की वजह का पता लगाने के लिए सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए गुवाहाटी भेजे गए हैं। पुलिस ने कहा, "हमें कुछ सुराग मिले हैं, लेकिन अभी उनके बारे में जानकारी देना जल्दबाजी होगी।" इन मौतों के बाद, पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की, 19 लोगों को गिरफ्तार किया और लगभग 3,000 शराब की बोतलें ज़ब्त कीं। सावधानी बरतने की अपील इस मामले में, पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे ऐसी शराब न पिएं जिसकी पहचान न हो, जिस पर कोई लेबल न हो या जिस पर अवैध होने का शक हो। साथ ही, पुलिस ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बता दें कि नागालैंड में 1990 से ही शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद इस तरह की घटना होना प्रशासन के रवैये पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। शराबबंदी के बावजूद इलाके में जहरीली शराब किस तरह से बेंची या पहुंचाई जा रही थी, यह जांच का विषय है। 19 लोग गिरफ्तार, करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त मौतों के बाद पुलिस ने प्रभावित इलाकों में कई जगह छापेमारी की. इस कार्रवाई के तहत 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया और शराब की करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त की गईं।  नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. पुलिस ने लोगों को बिना पहचान, बिना लेबल या संदिग्ध अवैध शराब न पीने की सलाह दी है. अधिकारियों ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत मेडिकल मदद लें।  लोगों से सावधान रहने की सलाह दरअसल, नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. इसके बावजूद राज्य में अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई की आशंका सामने आई है. पुलिस अब इस नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है. पुलिस ने लोगों से अज्ञात या बिना लेबल वाली शराब नहीं पीने की अपील की है. संदिग्ध अवैध शराब से भी दूर रहने को कहा गया है।  पुलिस ने बताया कि शराब पीने के बाद चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. शराब की सप्लाई से जुड़े लोगों का पता लगाया जा रहा है। जहरीली शराब त्रासदियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी सख्त इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शुक्रवार को कई उपाय सुझाए। शीर्ष अदालत ने जहरीली शराब के गैर-कानूनी उत्पादन, परिवहन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बिठाकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने महाराष्ट्र विष नियमावली के नियम 18ए और 18बी को रद्द करते हुए कई सुझाव दिए। ये नियम 2011 में मुंबई में जहरीली शराब से हुई एक बड़ी घटना के बाद एक अधिसूचना के जरिए लागू किए गए थे। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने अपने फैसले में लिखा, ''इतिहास इस बात का गवाह है कि शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगाने से अक्सर शराब का कारोबार गैर-कानूनी तरीके से होने लगता है, जिससे बिना नियमन वाली और जानलेवा शराब का चलन बढ़ जाता है।'' न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कई सुझाव भी दिए। इन सुझावों में अवैध शराब की आपूर्ति और मांग शृंखला तोड़ने, राज्य की सीमाओं पर सख्ती बढ़ाने और मेथनॉल के नियमन को कड़ा करने पर जोर दिया गया है। मेथनॉल एक ऐसा रसायन है, जिसका इस्तेमाल नकली शराब बनाने में किया जा सकता है। फैसले में कहा गया, ''चूंकि शराब राज्य में बनती भी है और बाहर से भी लाई जाती है, इसलिए इसे लागू करने के कदमों में राज्य की सीमाओं पर कड़ी निगरानी शामिल होनी चाहिए। इस संबंध में, राज्य परिवहन विभाग का सीमाओं पर सतर्क रहना राज्य में शराब की अवैध ढुलाई को नियंत्रित करने … Read more

मोदी की बड़ी उपलब्धि का ऑस्ट्रेलियाई PM ने किया जिक्र, बोले- ऊर्जा पहुंच के मामले में रचा इतिहास

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत में ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत में जितने लोगों तक एनर्जी की पहुंच बनी है, उतनी किसी भी दशक, क्षेत्र या देश में मानव इतिहास के दौरान नहीं हुई। अल्बनीज ने यह बात एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में कही। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते संबंधों का भी जिक्र किया। अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ अच्छे संबंध हैं और पीएम मोदी ऐसे नेता हैं, जिनके साथ उनके देश ने करीबी रिश्ते विकसित किए हैं। एंथनी अल्बनीज की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका असर कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ा है, जबकि भारत में सप्लाई काफी हद तक स्थिर बनी रही। इस दौरान ईंधन की कीमतों में भी सीमित बढ़ोतरी हुई। अलग-अलग देशों से बढ़ाया आयात पीएम मोदी ने इस साल की शुरुआत में भारत की ऊर्जा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा था कि अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है। मोदी ने मई में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में बताया था कि भारत पहले 27 देशों से ऊर्जा का आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। उन्होंने कहा कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई जारी रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से बचाना पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत की अर्थव्यवस्था, आपूर्ति व्यवस्था और जरूरी सामान पर असर की सरकार ने समीक्षा भी की थी। इस दौरान आम लोगों और कारोबारियों के लिए सप्लाई में रुकावट कम करने के उपायों पर चर्चा हुई थी। पीएम मोदी ने भारत के बढ़े हुए ऊर्जा आयात स्रोतों को देश की स्थिर ऊर्जा आपूर्ति से जोड़ते हुए यह जानकारी दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी अप्रैल में भारत की तेल खरीद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदना जारी रखे हुए है। इस खरीद में 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है।