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5 साल में सख्त कार्रवाई का ऐलान: अमित शाह बोले- घुसपैठियों की नहीं होगी कोई जगह

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जोर दिया कि अगर भारत नक्सलियों से मुक्त हो सकता है, तो वह घुसपैठियों से भी मुक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में अवैध प्रवासियों को न केवल मतदाता सूची से बल्कि देश से भी निकाल दिया जाएगा। शाह असम पुलिस की 10वीं बटालियन के नए परिसर की आधारशिला रखने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। बटालियन के बारे में उन्होंने कहा कि इसका निर्माण घुसपैठियों के अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर किया जाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता ने एक बार कहा था कि घुसपैठियों को बाहर निकाल दिया जाएगा, लेकिन ''कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि अवैध प्रवासी उसका वोट बैंक हैं।'' उन्होंने कहा, ''अतिक्रमण की गई जमीनों से घुसपैठियों को निकालना ही काफी नहीं है, उन्हें भारत से बाहर भी भेजना होगा।'' शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में असम पूर्व और पूर्वोत्तर भारत का औद्योगिक केंद्र बन जाएगा। असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है।  

मस्जिद के पास बजते संगीत पर बवाल: नेपाल में हिंसा, प्रशासन ने कई क्षेत्रों में लगाया कर्फ्यू

काठमांडू नेपाल के मधेश प्रांत स्थित Rautahat District में प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है। जिला मुख्यालय गौर समेत कई इलाकों में शनिवार दोपहर 1 बजे से अगली सूचना तक आवाजाही और सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। मुख्य जिला अधिकारी दिनेश सागर भुसाल के अनुसार, जिला सुरक्षा समिति के निर्णय के बाद यह कदम उठाया गया। क्या है मामला? दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह कर्फ्यू लगाया गया।  घटना गुरुवार शाम गौर नगरपालिका के सपगधा इलाके में हुई। आरोप है कि एक समुदाय के लोगों ने मस्जिद के सामने से गुजर रहे शादी जुलूस में बज रहे संगीत का विरोध किया, जिसके बाद तनाव बढ़ गया। शुक्रवार शाम दोनों पक्षों के बीच छह बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन शनिवार सुबह फिर पथराव शुरू हो गया। झड़प के दौरान एक वाहन में आग लगा दी गई। इस बारे में The Kathmandu Post ने भी रिपोर्ट प्रकाशित की है।इस हिंसा में कम से कम आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में दंगा नियंत्रण पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।  

Middle East में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने बोइंग के साथ की मेगा डिफेंस डील, GBU-57 बमों की खरीद

ईरान ईरान के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने अपने सबसे ताकतवर गैर-परमाणु बंकर बस्टर बम GBU-57 MOP की दोबारा खरीद का फैसला किया है। अमेरिकी वायुसेना करीब 100 मिलियन डॉलर की सिंगल-सोर्स डील के तहत Boeing से इन बमों की आपूर्ति लेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह बम केवल बोइंग द्वारा निर्मित किया जाता है, इसलिए किसी अन्य कंपनी को ठेका देने से उत्पादन में देरी हो सकती थी। क्या है GBU-57 MOP?     GBU-57 MOP (Massive Ordnance Penetrator) दुनिया के सबसे भारी पारंपरिक बमों में से एक है।     वजन: लगभग 30,000 पाउंड (करीब 13,600 किलोग्राम)     वारहेड: 5,740 पाउंड     क्षमता: 200 फीट गहराई तक मजबूत कंक्रीट को भेदने में सक्षम     इसे विशेष रूप से भूमिगत कमांड सेंटर और परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ऑपरेशन ‘मिडनाइट हैमर’   रिपोर्ट्स के अनुसार, 22 जून 2025 को अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” नाम से कार्रवाई की थी। इस मिशन में सात B-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षकों का इस्तेमाल किया गया और 14 MOP बम गिराए गए। इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी स्टॉक में कमी आई थी, जिसे अब नई डील के जरिए फिर से भरा जाएगा।   स्टॉक फिर से भरने की तैयारी अमेरिकी वायुसेना के दस्तावेजों के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल हुए बमों की भरपाई आवश्यक है। 2015 तक अमेरिका के पास केवल 20 MOP बम थे। नए बमों की डिलीवरी जनवरी 2028 से शुरू होने की संभावना है। अमेरिका भविष्य में “नेक्स्ट जेनरेशन पेनिट्रेटर (NGP)” विकसित करने पर भी काम कर रहा है, जिसे आधुनिक B-21 रेडर स्टेल्थ बमवर्षकों के साथ उपयोग किया जा सकेगा। फिलहाल MOP की नई खरीद को अस्थायी लेकिन आवश्यक सैन्य कदम माना जा रहा है। ट्रंप की चेतावनी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि परमाणु बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन यदि समझौता नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई भी विकल्प हो सकती है। अमेरिका की यह डील स्पष्ट संकेत देती है कि वह अपनी रणनीतिक और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है।  

रूस-यूक्रेन जंग तेज: पुतिन ने एजेंसियों को किया मजबूत, ड्रोन अटैक में 3 लोगों की जान गई

रूस यूक्रेन-रूस युद्ध के ताज़ा घटनाक्रम में एक ओर खार्किव क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमले से नागरिकों की मौत की खबर है, तो दूसरी ओर रूस में आंतरिक सुरक्षा कानूनों को और सख्त किया गया है। युद्ध के मैदान से लेकर कूटनीतिक और डिजिटल मोर्चे तक, हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं। यूक्रेन की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, Kharkiv Oblast में एक नागरिक गोदाम पर रूसी ड्रोन हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। मलबे के नीचे से दो और शव बरामद किए गए। हमले के बाद इमारत में भीषण आग लग गई थी और कई घंटों तक राहत अभियान चलता रहा। हमले के बीच राष्ट्रपति Vladimir Putin ने एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत Federal Security Service (FSB) को किसी भी व्यक्ति की मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कराने का अधिकार मिल गया है। यह कानून यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों में भी लागू होगा, जिससे डिजिटल नियंत्रण और कड़ा हो गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelensky ने जिनेवा में हुई शांति वार्ताओं को “हमेशा आसान नहीं” बताया, लेकिन कहा कि सम्मानजनक समाधान की संभावना अब भी है।  उन्होंने Donald Trump की ओर से कथित क्षेत्रीय रियायतों की मांग को “अनुचित” बताते हुए स्पष्ट किया कि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करेगा।International Paralympic Committee (IPC) द्वारा रूस और बेलारूस के 10 एथलीटों को विंटर पैरालंपिक्स में भाग लेने की अनुमति दिए जाने के बाद, यूक्रेन ने आधिकारिक स्तर पर कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। हालांकि, यूक्रेनी खिलाड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।    

अजित पवार केस में नया ट्विस्ट, रोहित पवार बोले- सच सामने लाने के लिए चाहिए ये कदम

मुंबई   महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का प्लेन क्रैश हादसे में 28 जनवरी को निधन हुआ था। इस  घटना को घटित हुए तीन हफ्ते से ज्यादा का वक्त हो गया है। रोहित पवार ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरे हादसे को गहरी साजिश करार दिया है। इसी के साथ उन्होंने हादसे से जुड़ी तकनीकी खामियों और विमान संचालक कंपनी पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के इस्तीफे की मांग की है। कंपनी को मिल रहा है सत्ता का संरक्षण रोहित पवार ने आरोप लगाया कि दुर्घटनाग्रस्त Learjet 45 विमान का संचालन करने वाली कंपनी 'VSR वेंचर्स' को सत्ताधारी दलों का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि इस कंपनी के तार केंद्र और राज्य के प्रभावशाली नेताओं से जुड़े हैं। रोहित पवार ने सीधे तौर पर कहा कि DGCA के कुछ अधिकारी तथ्यों को दबाने और कंपनी को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।   हादसे के पीछे के कारण? रोहित पवार ने अपनी निजी जांच का हवाला देते हुए कुछ चौंकाने वाले दावे किए:     पेट्रोल के कैन: उन्होंने आरोप लगाया कि विमान में यात्रियों के सामान वाली जगह पर पेट्रोल के अतिरिक्त कैन रखे गए थे, जिसके कारण आग बेकाबू हुई।      विस्फोट का दावा: रोहित पवार के मुताबिक, क्रैश के समय विमान में एक के बाद एक कई धमाके हुए, जिससे ब्लैक बॉक्स की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।     मेंटेनेंस में लापरवाही: उन्होंने आरोप लगाया कि विमान की यांत्रिक स्थिति और रख-रखाव में भारी अनदेखी की गई थी। पीएम मोदी और अमित शाह से न्याय की गुहार रोहित पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा, "अजित पवार को न्याय केवल पीएम और गृहमंत्री ही दिला सकते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि वे प्रधानमंत्री को इस संबंध में ईमेल के जरिए पत्र लिखेंगे। इसके अलावा, उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाने का आग्रह किया। 28 जनवरी को हुआ था हादसा गौरतलब है कि 28 जनवरी, 2026 को बारामती एयरस्ट्रिप पर लैंडिंग के दौरान अजित पवार का चार्टर विमान क्रैश हो गया था। इस भीषण हादसे में अजित पवार समेत चालक दल के सदस्य और सुरक्षा अधिकारी—कुल 5 लोगों की जान चली गई थी।

AI की मदद से खुलासा: हैदराबाद ‘बिरयानी कांड’ से जुड़ी 70,000 करोड़ की टैक्स चोरी

हैदराबाद  आयकर विभाग (Income Tax Department) ने रेस्टोरेंट उद्योग में अब तक के सबसे बड़े टैक्स चोरी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। हैदराबाद की तीन मशहूर बिरयानी चेन से शुरू हुई यह जांच अब एक ऐसे राष्ट्रव्यापी घोटाले में बदल गई है, जिसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये की आय छिपाने का अनुमान है। इस हाई-प्रोफाइल जांच की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टैक्स चोरी के इस "गड़बड़झाले" को पकड़ने के लिए विभाग को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत फोरेंसिक तकनीक का सहारा लेना पड़ा। सॉफ्टवेयर में छिपा था 'बल्क डिलीट' का खुफिया बटन जांच में खुलासा हुआ है कि देशभर के लगभग 1.7 लाख रेस्टोरेंट एक खास किस्म के बिलिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे। इस सॉफ्टवेयर को विशेष रूप से टैक्स चोरी के लिए डिजाइन किया गया था:     रिकॉर्ड मिटाने की तकनीक: सॉफ्टवेयर में एक गुप्त 'बल्क डिलीट' फीचर था। इसकी मदद से रेस्टोरेंट मालिक एक ही क्लिक में पूरे महीने की बिक्री का डेटा गायब कर देते थे।     बिल हेरफेर: पिछले 6 वर्षों में करीब 19,400 करोड़ रुपये के बिलों में संशोधन किया गया, जबकि 13,000 करोड़ रुपये के बिल पूरी तरह डिलीट कर दिए गए।     बिक्री में गिरावट: अनुमान है कि रेस्टोरेंट्स ने अपनी वास्तविक बिक्री को 27% तक कम करके दिखाया ताकि जीएसटी और आयकर देनदारी से बचा जा सके। पूरा सॉफ्टवेयर का खेल बता दें कि यह सॉफ्टवेयर बाजार के लगभग 10% रेस्तरां बिलिंग सॉफ्टवेयर मार्केट को नियंत्रित करता है. अधिकारियों ने इसकी मदद से 1.77 लाख रेस्टोरेंट की आईडी के ट्रांजेक्शन डेटा को खंगाला. इतने बड़े पैमाने पर डाटा का एनलिसिस करना आसान काम नहीं था. तब एआई टूल्स का इस्तेमाल किया गया. रेस्तरां के जीएसटी (GST) नंबरों को ओपन-सोर्स जानकारी और ऑनलाइन उपलब्ध डाटा से मैप किया गया ताकि चोरी का सटीक पता चल सके. घोटाले का राज्य के हिसाब से ब्यौरा अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ₹5,141 करोड़ की बिक्री छिपाई गई. पूरे भारत में कर चोरी के मामले में शीर्ष 5 राज्य इस प्रकार हैं:     कर्नाटक: सबसे अधिक ₹2,000 करोड़ की बिलिंग डिलीट की गई.     तेलंगाना: ₹1,500 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर.     तमिलनाडु: ₹1,200 करोड़ की हेराफेरी.     महाराष्ट्र और गुजरात में भी भारी मात्रा में चोरी पकड़ी गई. 60 टेराबाइट डेटा और AI का 'कमांडो एक्शन' आयकर अधिकारियों ने इस केस में तकनीक का अभूतपूर्व इस्तेमाल किया है। जांच की भयावहता को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:     विशाल डेटा: अधिकारियों ने लगभग 60 टेराबाइट (TB) डिजिटल डेटा और यूपीआई (UPI) लेनदेन का विश्लेषण किया है।     संदिग्ध पैन और जीएसटी: डेटा माइनिंग के दौरान हजारों ऐसे पैन (PAN) और जीएसटी नंबर मिले हैं जिनका इस्तेमाल फर्जी तरीके से रिकॉर्ड छिपाने के लिए किया गया।     AI की भूमिका: एआई ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और जीएसटी डेटा को आपस में जोड़कर उन विसंगतियों को पकड़ा जिन्हें सामान्य ऑडिट में पहचानना नामुमकिन था। घोटाले का रिपोर्ट कार्ड (2019 से अब तक) विवरण – आंकड़े कुल छिपाई गई आय (अनुमानित) – ₹70,000 करोड़ आंध्र और तेलंगाना का हिस्सा – ₹5,000 करोड़ से अधिक सॉफ्टवेयर से दर्ज कुल बिक्री – ₹2.4 लाख करोड़ डिलीट किए गए बिलों का प्रतिशत – 14% तक जांच के दायरे में रेस्टोरेंट – 1.7 लाख (देशभर में) पैन कार्ड्स के जरिए रची गई साजिश सूत्रों का कहना है कि यह केवल बिल डिलीट करने तक सीमित नहीं था। हजारों फर्जी या अनधिकृत पैन कार्ड्स के जरिए बिक्री को अलग-अलग खातों में बांट दिया जाता था ताकि किसी भी एक इकाई (Entity) का टर्नओवर टैक्स सीमा से अधिक न दिखे। फिलहाल, विभाग की आईटी टीम डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटी है ताकि रिकवरी की सटीक राशि तय की जा सके।

दर्दनाक हादसा: गुजरात में मिनीवैन का संतुलन बिगड़ा, डिवाइडर से भिड़कर 5 यात्रियों की गई जान

अहमदाबाद गुजरात के उंझा-मेहसाणा राजमार्ग पर एक मिनीवैन के डिवाइडर से टकराने के बाद एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना तड़के उनावा गांव के निकट तब हुई, जब परिवार राजस्थान के पाली जिले में अपने पैतृक स्थान पर एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद अहमदाबाद लौट रहा था। उनावा पुलिस निरीक्षक पी.डी. दार्जी ने कहा, ''उंझा और मेहसाणा के बीच राजमार्ग पर मिनीवैन के चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई।'' उन्होंने बताया कि चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनकी पहचान रामलाल कुमावत, कोमल कुमावत, कैलाशभाई कुमावत और आयुष कुमावत (04) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि मेहसाणा सिविल अस्पताल में भर्ती कराए गए सात घायल यात्रियों में से मथुरादेवी कुमावत नामक एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। पुलिस ने कहा कि घायलों का सिविल अस्पताल में इलाज  

आर्थिक संकट गहराया! SECP रिपोर्ट के मुताबिक 20 जनवरी 2026 तक 125 विदेशी कंपनियों ने छोड़ा पाकिस्तान

इस्लामाबाद पाकिस्तान के शीर्ष कॉर्पोरेट नियामक Securities and Exchange Commission of Pakistan (SECP) ने खुलासा किया है कि 20 जनवरी 2026 तक 125 विदेशी कंपनियों ने देश में अपने ब्रांच और लायज़न कार्यालय औपचारिक रूप से बंद कर दिए हैं। ये कंपनियां कराची, लाहौर, इस्लामाबाद और पेशावर जैसे प्रमुख शहरों में सक्रिय थीं।   इन देशों की कंपनियां शामिल? SECP द्वारा जारी सूची के अनुसार जिन देशों की कंपनियां पाकिस्तान से बाहर हुई हैं उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, मलेशिया, सिंगापुर, जापान, तुर्किये, ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन, बहरीन, कनाडा, फ्रांस और नीदरलैंड्स आदि शामिल हैं। यह दिखाता है कि पाकिस्तान में विदेशी व्यापारिक उपस्थिति काफी व्यापक थी। रिपोर्ट के अनुसार कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने पाकिस्तान में अपना संचालन समाप्त किया है, जिनमें शामिल हैं: इसके अलावा तेल-गैस, इंजीनियरिंग, निर्माण, बैंकिंग, बीमा, कंसल्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं।इनमें Halliburton Limited, Doosan Heavy Industries and Construction Co., Limited, Mashreq Bank और T.C. Ziraat Bankasi A.S. जैसे नाम प्रमुख हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन भी बाहर हुए हैं, जैसे American Soybean Association और Peace Winds Japan।   SECP ने क्या कहा? SECP ने स्पष्ट किया कि इन कंपनियों ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आधिकारिक तौर पर अपने ब्रांच या लायज़न कार्यालय बंद किए हैं। हालांकि नियामक ने यह नहीं बताया कि कंपनियों के बाहर जाने के पीछे विशेष कारण क्या रहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि 125 विदेशी कंपनियों का बाहर जाना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में विदेशी कॉर्पोरेट उपस्थिति में बड़े बदलाव का संकेत है। यह घटनाक्रम निवेश माहौल, आर्थिक स्थिरता और भविष्य की विदेशी पूंजी प्रवाह पर असर डाल सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार निवेश आकर्षित करने के लिए क्या कदम उठाती है।

बड़ी कार्रवाई! कोरिया सरकार ने फॉरेस्ट सर्विस चीफ को किया बर्खास्त

दक्षिण कोरिया दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung ने कोरिया फॉरेस्ट सर्विस के मंत्री किम इन-हो को पद से हटा दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि किम ने “मौजूदा कानूनों का गंभीर उल्लंघन” किया, जिसके चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। हालांकि शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्होंने कौन-सा कानून तोड़ा। बाद में पुलिस ने पुष्टि की कि किम इन-हो को नशे में गाड़ी चलाने के आरोप में बुक किया गया है। Bundang Police Station के अनुसार, सोमवार रात लगभग 10:50 बजे सोंगनाम के बुंदांग जिले में एक चौराहे पर किम ने शराब के नशे में बस और एक कार को टक्कर मार दी। बताया गया है कि उन्होंने ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी की थी। हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन उनका ब्लड अल्कोहल स्तर इतना था कि लाइसेंस निलंबन की श्रेणी में आता है। राष्ट्रपति कार्यालय ने चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कानून उल्लंघन किए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार सार्वजनिक पदों पर जवाबदेही को लेकर सख्त रुख अपना रही है। किम इन-हो पहले पर्यावरण के प्रोफेसर रह चुके हैं। उन्हें अगस्त में कोरिया फॉरेस्ट सर्विस के प्रमुख पद पर नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी की नीति समिति के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे। पुलिस ने कहा है कि आरोपी को पूछताछ के लिए समन भेजकर घटना की पूरी जांच की जाएगी।  

गुजरात में शादी से पहले माता-पिता को मिलेगा मैसेज, सरकार का नया प्रस्ताव – आप क्या सोचते हैं?

अहमदाबाद  गुजरात सरकार ने राज्य के मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट में एक ऐसा संशोधन प्रस्तावित किया है, जिसने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है. गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने एलान किया कि अब शादी का सर्टिफिकेट लेने के लिए सिर्फ दूल्हा-दुल्हन की मर्जी काफी नहीं होगी. इस प्रक्रिया में अब ‘परिवार’ को भी कानूनी रूप से शामिल किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इससे परिवारों के बीच होने वाले विवादों और धोखाधड़ी की घटनाओं पर लगाम लगेगी. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या बालिग युवाओं के निजी फैसलों में सरकार या परिवार का दखल होना चाहिए? आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या शादी के लिए माता-पिता को जानकारी देना प्राइवेसी का उल्लंघन है? प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब शादी का आवेदन करते समय एक ‘डिक्लेरेशन’ देना होगा. इसमें कपल्स को यह साफ बताना होगा कि उनके माता-पिता को इस शादी के बारे में पता है या नहीं. इसके बाद असिस्टेंट रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी होगी कि वह 10 दिनों के अंदर माता-पिता को व्हाट्सएप या मैसेज के जरिए इसकी जानकारी दे. सरकार इसे पारदर्शिता का नाम दे रही है, लेकिन कई लोग इसे प्राइवेसी में सेंध मान रहे हैं. क्या आपको लगता है कि एक बालिग नागरिक को अपनी शादी की सूचना घर पर देने के लिए कानूनन मजबूर किया जाना चाहिए? 30 दिनों का लंबा इंतजार और डिजिटल वेरिफिकेशन नए सिस्टम में अब शादी का सर्टिफिकेट तुरंत नहीं मिलेगा. आवेदन जमा करने के बाद 30 दिनों का अनिवार्य गैप रखा गया है. इस दौरान शादी की तस्वीरें, इनविटेशन कार्ड और गवाहों का पूरा डेटा सरकारी पोर्टल पर अपलोड होगा. सरकार का तर्क है कि इससे फर्जी शादियों पर रोक लगेगी. लेकिन प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के लिए यह 30 दिन भारी पड़ सकते हैं, क्योंकि इस दौरान उन पर पारिवारिक दबाव बढ़ने की आशंका रहती है. क्या यह लंबी प्रक्रिया सिस्टम को और ज्यादा जटिल नहीं बना देगी? आपकी इस पर क्या राय है? कागजी कार्रवाई का बढ़ता बोझ अब सिर्फ लड़का-लड़की के डॉक्यूमेंट्स से काम नहीं चलेगा. आवेदन के साथ दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट भी मांगे जा सकते हैं. इसके अलावा, शादी की फोटो और गवाहों का वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होगा. यह सब कुछ एक डिजिटल डेटाबेस का हिस्सा बनेगा. कुछ लोगों का कहना है कि इससे क्राइम रेट कम होगा, जबकि कुछ इसे गैर-जरूरी कागजी कार्रवाई बता रहे हैं. क्या आपको लगता है कि इतने ज्यादा दस्तावेजों की मांग करना सही कदम है? क्या इस फैसले से सामाजिक ताना-बाना वाकई मजबूत होगा? सरकार का दावा है कि कई कम्युनिटी ग्रुप्स ने इस बदलाव की मांग की थी ताकि माता-पिता की भावनाओं का सम्मान हो सके. गुजरात सरकार मानती है कि परिवार समाज की सबसे छोटी और अहम इकाई है, इसलिए इसे बचाना जरूरी है. हालांकि, कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का संविधान हर बालिग को अपनी मर्जी से साथी चुनने का हक देता है. ऐसे में क्या यह नया नियम संविधान के मूल अधिकारों से टकराएगा? क्या सामाजिक मूल्यों को बचाने के लिए कानून का सहारा लेना उचित है? गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव पर 30 दिनों के लिए जनता की राय मांगी है. एक तरफ वे लोग हैं जो मानते हैं कि माता-पिता को सूचना देने से भागकर शादी करने के बाद होने वाली अनहोनी कम होगी. दूसरी तरफ वे युवा हैं जो इसे अपनी आजादी पर हमला मान रहे हैं.