samacharsecretary.com

ट्रंप की बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत की तरफ से शामिल हुईं नामग्या खंपा

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत ने भी हिस्सा लिया। भारत की ऑब्जर्वर के तौर पर इसमें नामग्या शोदेन खांपा ने हिस्सा लिया जो कि वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक हैं। अमेरिका के शांति भवन में 'बोर्ड ऑफ पीस' की यह बैठक आयोजित की गई थी। 'डोनाल्ड जे ट्रंप इंस्टिट्यूट ऑफ पीस' में आयोजित इस बैठक में भारत की निरीक्षक के दौर पर नामग्या खम्पा ने हिस्सा लिया। भारत ने सीधे तौर पर इस बोर्ड में शामिल नहीं हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि इस बैठक में 40 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। कई देशों के राष्टराध्यक्ष भी उद्घाटन बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खुद बैठक में गए थे। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका इस बोर्ड के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर देगा, जिसके सदस्यों में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे 27 देश शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम की आलोचना की संयुक्त राष्ट्र की उच्चस्तरीय बैठक न्यूयॉर्क में गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन जब ट्रंप ने उसी दिन बोर्ड की बैठक की घोषणा कर दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे राजनयिकों की यात्रा प्रभावित हो सकती है, तो सुरक्षा परिषद की बैठक एक दिन पहले आयोजित कर दी गई। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था और ट्रंप की नई पहल के बीच एजेंडे के टकराव और समानांतर प्रयासों की संभावना है। वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करने की इस नई पहल की व्यापक महत्वाकांक्षाओं को लेकर कुछ देशों में चिंता है कि कहीं यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका को चुनौती देने या उसके समकक्ष बनने की कोशिश न करे। संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में शामिल पाकिस्तान एकमात्र ऐसा सदस्य है जिसने 'बोर्ड आफ पीस' की बैठक में शामिल होने का न्यौता स्वीकार किया है। ब्रिटेन, इजराइल, जॉर्डन, मिस्र और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों ने भी सुरक्षा परिषद की इस बैठक में हिस्सा लिया। पिछले सप्ताह कई अरब और इस्लामी देशों ने अनुरोध किया था कि इनमें से कुछ देशों के अधिकारियों के वाशिंगटन रवाना होने से पहले गाजा और वेस्ट बैंक के मुद्दे पर चर्चा की जाए। संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर ने कहा, ''अधिग्रहण संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। यह राष्ट्रपति ट्रंप की योजना का भी उल्लंघन है और जारी शांति प्रयासों के लिए खतरा पैदा करता है।"

नए पीएम तारिक रहमान पर भड़के यूनुस के समर्थक?

ढाका. बांग्लादेश में हुए आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान को कुर्सी संभाले अभी तीन दिन ही बीते हैं कि उनपर मोहम्मद यूनुस के ही समर्थक आरोप लगाने लगे हैं। अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाने वाले यूनुस के समर्थक नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान पर शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग और भारत के साथ मिलीभगत के आरोप लगा दिए हैं। दरअसल प्रधानमंत्री बनते ही तारिक रहमान ने भारत से रिश्ते दुरुस्त करने की कवायद की है। इसके अलावा बांग्लादेश में कई जगहों पर आवामी लीग के दफ्तर फिर से खुले हैं। यह बात मोहम्मद यूनुस के समर्थकों को रास नहीं आ रही है। बता दें कि नाहिद इस्लाम नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोक हैं। उनकी पार्टी ने ही जुलाई 2024 में शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए थे। इसी का फायदा उठाकर बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरा दी गई और फिर अंतरिम सरकार गठित कर दी गई। मोहम्मद यूनुस की अगुआई वाली अंतरिम सरकार में भारत के खिलाफ खूब अजेंडे चलाए गए। इसके अलावा अल्पसंख्यकों पर हमले भी आम हो गए। मोहम्मद यूनुस ने खुलकर पाकिस्तान के साथ करीबी बढ़ाई और भारत की आलोचना भी की। शेख हसीना से करने लगे तारिक रहमान की तुलना अब तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदलने लगे तो यूनुस के समर्थकों में खलबली मची हुई है। नाहिद इस्लाम ने कहा कि इस चुनाव में भारत, आवामी लीग और बीएनपी मिले हुए थे। उन्होंने कहा कि अगर बीएनपी भी आवामी लीग वाली राजनीति फिर से लाने की कोशिश करेगी तो उसका भी विरोध होगा। नाहित इस्लाम ने कहा कि आखिर देश में आवामी लीग के कार्यालय फिर कैसे खुल रहे हैं। इसपर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार को चाहिए कि आवामी लीग के सारे दफ्तर तुंरत बंद करवाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह काम उनकी पार्टी करेगी। उन्होंने शेख हसीना को फासीवादी बताते हुए कहा कि उन्हें अब बांग्लादेश में कभी पैर जमाने का मौका नहीं मिलेगा। भारत के साथ संबंध सुधारना चाहता है बांग्लादेश मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध हद दर्जे तक खराब हो गए थे। हालांकिअब बांग्लादेश के नए खेल मेंत्री ने भी बीसीसीआई से संबंध सुधारने की इच्छा जताई है। वहीं बांग्लादेश की अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट प्रथम आलो के मुताबिक बीएनपी के आने के बाद कई जिलों में आवामी लीग के दफ्तर खोले गए हैं। मोहम्मद यूनुस की सरकार ने आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया था। ऐसे में इस चुनाव में पार्टी चुनाव ही नहीं लड़ पाई।

भक्तों के लिए सुविधा: वैष्णो देवी-शिवखोड़ी हेलीकॉप्टर सेवा से 20 मिनट में यात्रा संभव

कटरा जम्मू कश्मीर का कटरा स्थित माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह श्रद्धालु अब केवल 20 मिनट में वैष्णो देवी से शिवखोड़ी पहुंच सकेंगे। हेलीकॉप्टर द्वारा कम समय में दोनों तीर्थ स्थल की यात्रा संभव होगी। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के मुताबिक अगले 3 महीने में ये प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के बारे में जो जानकारी मिलती है उसके मुताबिक आरसीसी ग्रेफ द्वारा हैलीपेड से गुफा तक यात्रा मार्ग और पुल निर्माण का काम किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य की लागत तकरीबन 6 करोड रुपए बताई जा रही है। वैष्णो देवी से शिवखोड़ी की यात्रा उप राज्यपाल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 3 महीने के भीतर कटरा से शिवखोड़ी तक की हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा एक अंतरराष्ट्रीय म्यूजियम भी विकसित किया जा रहा है। कटरा में हेलीपैड बनाने का काम अंतिम चरण में और शिवखोड़ी में भी ऐसे ही सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। जब दोनों जगह का काम पूरा हो जाएगा तो तीर्थ यात्री आसानी से दोनों मंदिर आना-जाना कर सकेंगे। वाहनों के जरिए जम्मू या फिर कटरा से शिवखोड़ी पहुंचने में ढाई से 3 घंटे का समय लगता है। हेलीकॉप्टर से इन दोनों तीर्थ स्थलों के बीच की दूरी केवल 20 मिनट रह जाती है। कितना होगा किराया श्रद्धालुओं के लिए 13 अक्टूबर 2010 को कटरा से शिवखोड़ी के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई थी। उस समय यात्रियों को आने जाने के लिए प्रति श्रद्धालु 8500 किराया देना पड़ता था। अब किराया 8 से 10 हजार के बीच होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बनेगा श्री शंकराचार्य मंदिर माता वैष्णो देवी साइन क्षेत्र में श्री शंकराचार्य मंदिर के निर्माण की तैयारी भी चल रही है। छेड़ शक्ति लंबे इंतजार के बाद इस प्रतिष्ठित मंदिर के निर्माण का सपना सच होता दिखाई दे रहा है। 1967 में इसकी अवधारणा तैयार की गई थी लेकिन कुछ कर्म से ही पूरा नहीं हो पाया था। मंदिर निर्माण में वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड 31.51 करोड़ रुपए की अनुमानित राशि खर्च करने वाला है। मंदिर निर्माण से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी ज्यादा होगा। जो श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन करने पहुंचेंगे उन्हें शंकराचार्य मंदिर के दर्शन का मौका भी मिलेगा। साल के अंत तक मंदिर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

घरेलू हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय बहस: अफगानिस्तान बनाम भारत के कानून कितने अलग?

काबुल  अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. अफगानिस्तान को चलाने वाले तालिबान ने एक नया कानून लागू किया है, जो महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को कानूनी रूप से मान्यता देता है. इस कानून के तहत पति अपनी पत्नी और बच्चों को उस हद तक शारीरिक सजा दे सकता है, जब तक उससे हड्डी न टूटे या खुला घाव न बने. यानी हड्डी नहीं टूटी तो पीटना गलत नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार यह दंड संहिता तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्ताक्षर से लागू हुई है. यह कानून एक तरह की नई जाति व्यवस्था बनाता है, जिसमें सजा इस बात पर निर्भर करती है कि अपराध करने वाला व्यक्ति “आजाद” है या “गुलाम”. अफगानिस्तान का नया क्रिमिनल कोड  तालिबान एडमिनिस्ट्रेशन के लगाए गए नए क्रिमिनल कोड के तहत शादी के अंदर घरेलू व्यवहार को विवादित तरीके से देखा गया है. बताए गए नियमों से यह पता चलता है कि पति अपनी पत्नी या बच्चों को शारीरिक सजा दे सकता है. बशर्ते इससे हड्डियां ना टूटे या फिर खुले घाव ना हों. यह असरदार तरीके से घरों के अंदर घरेलू हिंसा के लिए कानूनी कवर देता है. यहां तक की ऐसे मामलों में भी जहां ज्यादा जोर लगाने से हड्डियां टूट जाती हैं, सिर्फ ज्यादा से ज्यादा सजा कथित तौर पर 15 दिन की जेल तय की गई है. न्याय पाने के लिए एक महिला को जज के सामने अपनी चोट दिखानी होती है और वह भी पूरी तरह से ढके हुए रहकर और अपने पति या किसी पुरुष संरक्षक के साथ आकर. इतना ही नहीं बल्कि कानून में यह भी कहा गया है कि अगर कोई शादीशुदा महिला अपने पति की इजाजत के बिना रिश्तेदारों से मिलने जाती है तो उसे 3 महीने तक की जेल हो सकती है.  भारत में घरेलू हिंसा कानून  भारतीय न्याय संहिता के मुताबिक पति या फिर उसके रिश्तेदारों द्वारा की गई  क्रूरता को एक गंभीर अपराध माना जाता है. शारीरिक का मानसिक क्रूरता के लिए 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. यह एक नॉन बेलेबल अपराध है. जिसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और जमानत भी अपने आप नहीं मिलती. घरेलू हिंसा से महिलाओं का प्रोटेक्शन एक्ट  भारत का घरेलू हिंसा से महिलाओं का प्रोटेक्शन एक्ट शारीरिक हमले तक ही सीमित नहीं है. इसमें आर्थिक, भावनात्मक, बोलकर किया गया और मानसिक शोषण भी शामिल है. एक महिला प्रोटेक्शन ऑर्डर के लिए मजिस्ट्रेट के पास जा सकती है. उसे साझा घर में रहने का भी अधिकार है. ऐसे कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन करने पर 1 साल तक की जेल हो सकती है. दहेज हत्याओं के लिए कड़ी सजा  शादी के 7 साल के अंदर दहेज हत्या या फिर संदिग्ध मौत जैसे गंभीर मामलों में कानून में काफी कड़ी सजा का प्रावधान है. भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत पति या ससुराल वालों को कम से कम 7 साल तक की जेल हो सकती है. इतना ही नहीं बल्कि दोषी पाए जाने पर उम्र कैद तक बढ़ सकती है. लोग बोलने से डर रहे द इंडिपेंडेंट के अनुसार, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि लोग इस कानून के खिलाफ गुप्त रूप से भी बोलने से डर रहे हैं. इसकी वजह यह है कि तालिबान ने नया आदेश जारी किया है, जिसमें इस कानून पर चर्चा करना भी अपराध बताया गया है. अफगानिस्तान का मानवाधिकार संगठन रवादारी, जो देश से बाहर रहकर काम करता है, ने एक बयान में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि इस आपराधिक प्रक्रिया संहिता को तुरंत लागू करने से रोका जाए और इसे रोकने के लिए सभी कानूनी उपाय अपनाए जाएं. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि रीम अलसालेम ने एक्स पर लिखा कि इस नए कानून का महिलाओं और लड़कियों पर असर बेहद डरावना है. तालिबान यह अच्छी तरह समझ चुका है कि उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है. सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें गलत साबित करेगा, और अगर करेगा तो कब.

नया हथियार ‘स्टील्थ’ क्रूज मिसाइल, रेंज 700 KM, आयरन डोम और अन्य डिफेंस सिस्टम भी हैं दुविधा में

बेंगलुरु   21वीं सदी का युद्ध 20वीं सदी के मुकाबले काफी बदल चुका है. अब दुश्‍मन की सरजमीन पर कदम रखे बिना उसे मिट्टी में मिलाया जा सकता है. लॉन्‍ग रेंज मिसाइल किसी भी देश में तबाही लाने में सक्षम है. इसके अलावा स्‍टील्‍थ यानी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान मॉडर्न रडार सिस्‍टम को धोखा देकर टार्गेट को खत्‍म कर सकता है. अमेरिका के स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर ने ईरान में जमकर तबाही मचाई थी, पर तेहरान का रडार सिस्‍टम उसे कैच नहीं कर सका था. इसे देखते हुए तमाम पावरफुल देश टेक्‍नोलॉजिकली एडवांस्‍ड एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप कर रहा है, ताकि किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से निपटा जा सके. अब जरा सोचिए स्‍टील्‍थ फाइटर जेट के साथ ‘स्‍टील्‍थ’ लॉन्‍ग रेंज क्रूज मिसाइल को पेयर किया जाए तो फिर क्‍या होगा? भारत इसी प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है. भारत ने पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसके तहत रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा देने वाला स्‍टील्‍थ फाइटर जेट डेवलप किया जा रहा है. साल 2030 के बाद पांचवीं पीढ़ी का देसी लड़ाकू विमान इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल किए जाने की संभावना है. अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्‍टील्‍थ ऑप्‍टीमाइज्‍ड लॉन्‍ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) डेवलप करने में जुटा है. इस क्रूज मिसाइल को AMCA के तहत डेवलप किए जा रहे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है. 600 से 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम यह मिसाइल S-400, THAAD, आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा दे सकती है. भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई कॉम्पैक्ट और स्टील्थ-ऑप्टिमाइज्ड क्रूज मिसाइल विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट का उद्देश्य केवल किसी मौजूदा हथियार को नए विमान से जोड़ना नहीं, बल्कि AMCA की स्टील्थ क्षमता को बरकरार रखते हुए उसे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम बनाना है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत की स्वदेशी सैन्य तकनीक को नई ऊंचाई देने के साथ भविष्य के हवाई युद्ध में रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित कर सकती है. यह मिसाइल विशेष रूप से AMCA के आंतरिक हथियार कक्ष (इंटरनल वेपन बे) में फिट होने के लिए तैयार की जा रही है, जिससे विमान की रडार से बचने की क्षमता प्रभावित न हो. स्‍टील्‍थ क्रूज मिसाइल इतना खास क्‍यों?     मिसाइल का वेट: 1000 किलोग्राम (संभावित)     मिसाइल का रेंज: 600 से 700 किलोमीटर     मिसाइल वर्जन: एयर टू लैंड अटैक     AMCA के लिए खासतौर पर किया जाएगा डेवलप     आकार में छोटा, पर बेहतरीन होगी टेक्‍नोलॉजी स्टील्थ डिजाइन और वेपन सिस्‍टम AMCA Aeronautical Development Agency (ADA) द्वारा विकसित किया जा रहा है. यह शुरू से ही स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी पर आधारित है. इसमें इंटरनल वेपन बे की व्यवस्था है, जिससे बाहरी यानी आउटर पायलन पर हथियार फिट की जरूरत नहीं पड़ती और विमान की रडार क्रॉस सेक्शन बेहद कम रहती है. इससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए विमान का पता लगाना कठिन हो जाता है. रडार क्रॉस सेक्‍शन कम होने की वजह से उन्‍नत रडार के साथा ही S-400, THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए भी इस मिसाइल को इंटरसेप्‍ट कर पाना कठिन होगा. लंबी दूरी की पारंपरिक क्रूज़ मिसाइलें आकार और वजन में बड़ी होती हैं, जिससे उन्हें इंटरनल बे में रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. मौजूदा लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों का वजन लगभग 1500 किलोग्राम या उससे अधिक होता है, जो AMCA के डिजाइन और वेपन इंटीग्रेशन में बाधा पैदा कर सकता है. इसी चुनौती से निपटने के लिए DRDO एक छोटे आकार की नई मिसाइल पर काम कर रहा है, जिसका वजन लगभग 1000 किलोग्राम रखने का लक्ष्य है. हल्के वजन के कारण AMCA अपने प्रत्येक इंटरनल वेपन बे में दो मिसाइल तक ले जा सकेगा. साथ ही हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को भी साथ रखने की क्षमता बनाए रखेगा. 600 से 700 किलोमीटर रेंज नई कॉम्पैक्ट क्रूज मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 600 से 700 किलोमीटर तक होगी. भले ही यह दूरी पारंपरिक लंबी दूरी की मिसाइलों से कम हो, लेकिन सामरिक दृष्टि से यह थिएटर लेवल के ऑपरेशन के लिए पर्याप्त मानी जा रही है. इस मिसाइल का उपयोग दुश्मन के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली और लॉजिस्टिक ठिकानों जैसे हाई वैल्‍यू के लक्ष्यों पर सटीक हमला करने के लिए किया जा सकेगा. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह रेंज AMCA के लगभग 1500 किलोमीटर के कॉम्बैट रेडियस के साथ संतुलन बनाती है, जिससे विमान बिना दुश्मन की सीमा में गहराई तक प्रवेश किए भी प्रभावी हमला कर सकेगा. कम रडार सिग्नेचर इस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्टील्थ सेंट्रिक डिजाइन होगा. इसमें रडार पर कम दिखाई देने वाली संरचना, उन्नत कंपोजिट सामग्री और विशेष आकार का उपयोग किया जा सकता है, जिससे लॉन्च के दौरान भी विमान की स्टील्थ क्षमता प्रभावित न हो. वेपन बे खुलने के दौरान भी मिनिमम रडार सिग्नेचर बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके अलावा मिसाइल में स्वदेशी छोटे टर्बोफैन इंजन तकनीक, अत्याधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता जैसे फीचर शामिल होने की संभावना है. यह तकनीक दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक लक्ष्य भेदन सुनिश्चित करेगी. स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा यह परियोजना फिलहाल कॉन्‍सेप्‍ट और डिजाइन चरण में है, लेकिन इसका उद्देश्य स्पष्ट है. 2030 के दशक के मध्य तक AMCA को पूरी तरह स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली से लैस करना. इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि AMCA और नई स्टील्थ क्रूज मिसाइल का यह संयोजन भारत की वायु शक्ति को नई रणनीतिक क्षमता प्रदान करेगा. यह न केवल देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा तकनीक की प्रतिष्ठा भी बढ़ाएगा. कुल मिलाकर DRDO का यह प्रयास भारत … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सबको फ्री सुविधाएं बांटना गलत, विकास के लिए रोजगार जरूरी

चेन्नई सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु बिजली बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, तमिलनाडु बिजली बोर्ड उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहा है। वहीं एक मुकदमे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी की है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्यों में अपनाई गई मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति आर्थिक विकास में बाधा डालती है।  कोर्ट ने क्या-क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत समेत जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा ज्यादातर राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी विकास को छोड़कर मुफ्त सुविधाएं बांट रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा- जो लोग भुगतान नहीं कर सकते, उन्हें सहायता देना समझ में आता है। लेकिन अमीर-गरीब में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना गलत नीति है। इस दौरान कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा अगर सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली मिलती रही तो लोगों में काम करने की भावना कम हो जाएगी। कोर्ट का राज्यों को दी सलाह और पूछा सवाल वहीं कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी कि मुफ्त चीजें बांटने के बजाय, रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा, भारत में हम कैसी संस्कृति बना रहे हैं? क्या यह वोट पाने की नीति नहीं बन जाएगी? फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब अगली सुनवाई में तय होगा कि ऐसे मुफ्त बिजली योजनाओं पर क्या नियम लागू होंगे। क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा? यह मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि कई राज्यों में चुनाव से पहले मुफ्त योजनाएं घोषित होती हैं और इससे सरकारी खर्च बढ़ता है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि गरीबों की मदद जरूरी है, लेकिन बिना सोच-समझ सबको मुफ्त सुविधाएं देना देश के विकास के लिए सही नहीं है।  

होली पर रेलवे का तोहफा, 15 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, 6 ट्रेनों की अवधि बढ़ी

नई दिल्ली होली पर्व पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के रास्ते कई स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इसके अलावा रेलवे ने पटना-चर्लपल्ली (हैदराबाद) के बीच चलने वाली तीन स्पेशल ट्रेनों को भी मंजूरी दी है। गया स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के कारण ट्रेनें कोडरमा, तिलैया, राजगीर, नालंदा, बिहार शरीफ, बख्तियारपुर, फतुहा व राजेंद्रनगर होकर चलेंगी। मार्च में चलेगी ये होली स्पेशल ट्रेन     हावड़ा-रक्सौल-हावड़ा स्पेशल : गाड़ी संख्या 03045 हावड़ा-रक्सौल स्पेशल 1 एवं 2 मार्च 2026 रविवार एवं सोमवार को हावड़ा से 23.05 बजे खुलकर अगले दिन सोमवार को 16.15 बजे रक्सौल पहुंचेगी। वापसी में 03046 रक्सौल-हावड़ा स्पेशल दिनांक 02 एवं 03 मार्च, 2026 सोमवार एवं मंगलवार को रक्सौल से 17.45 बजे खुलकर अगले दिन 10.50 बजे हावड़ा पहुंचेगी।     कोलकाता-मधुबनी-कोलकाता स्पेशल: गाड़ी संख्या 03187 कोलकाता-मधुबनी स्पेशल दिनांक 03 मार्च, 2026 मंगलवार को कोलकाता से 23.50 बजे खुलकर अगले दिन बुधवार को 14.30 बजे मधुबनी पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 03188 मधुबनी-कोलकाता स्पेशल दिनांक 04 मार्च, 2026 बुधवार को मधुबनी से 15.30 बजे खुलकर अगले दिन 06.25 बजे कोलकाता पहुंचेगी।     रक्सौल-लोकमान्य तिलक-रक्सौल स्पेशल: गाड़ी संख्या 05557 रक्सौल-लोकमान्य तिलक स्पेशल 10 से 31 मार्च, 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को रक्सौल से 19.15 बजे खुलकर तीसरे दिन 05.50 बजे लोकमान्य तिलक पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 05558 लोकमान्य तिलक-रक्सौल स्पेशल 12 से 2 अप्रैल, 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को लोकमान्य तिलक से 07.55 बजे खुलकर अगले दिन 16.50 बजे रक्सौल पहुंचेगी।     पुणे–दानापुर-पुणे स्पेशल: गाड़ी संख्या 01481 23 फरवरी से 06 मार्च 2026 तक प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को पुणे से शाम 7:55 बजे प्रस्थान कर डीडीयू, बक्सर और आरा में रुकते हुए सुबह 8:00 बजे दानापुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01482 वापसी में 25 फरवरी से 08 मार्च 2026 तक बुधवार और रविवार को दानापुर से सुबह 10:00 बजे रवाना होकर अगले दिन शाम 6:15 बजे पुणे पहुंचेगी।     सहरसा-लोकमान्य तिलक-सहरसा स्पेशल: गाड़ी संख्या 05585 सहरसा-लोकमान्य तिलक स्पेशल 6 से 27 मार्च तक प्रत्येक शुक्रवार को सहरसा से 17.45 बजे खुलकर तीसरे दिन 05.30 बजे लोकमान्य तिलक पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 05586 लोकमान्य तिलक-सहरसा स्पेशल 8 से 29 मार्च तक प्रत्येक रविवार को लोकमान्य तिलक से 16.35 बजे खुलकर अगले दिन 9.00 बजे सहरसा पहुंचेगी।     श्रीगंगानगर-समस्तीपुर-श्रीगंगानगर स्पेशल: गाड़ी संख्या 04731 श्रीगंगानगर-समस्तीपुर स्पेशल 1 से 3 मार्च तक प्रत्येक रविवार को श्रीगंगानगर से 13.25 बजे खुलकर अगले दिन 23.30 बजे समस्तीपुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 04732 समस्तीपुर-श्रीगंगानगर स्पेशल 3 से 31 मार्च, 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को समस्तीपुर से 02.10 बजे खुलकर अगले दिन 12.20 बजे श्रीगंगानगर पहुंचेगी।     कटिहार-अमृतसर-कटिहार स्पेशल: गाड़ी संख्या 05736 हर बुधवार को 25 फरवरी से 25 मार्च तक रात 9 बजे कटिहार जंक्शन से चलकर तीसरे दिन सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर अमृतसर जंक्शन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 05735 हर शुक्रवार दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर 27 फरवरी से 27 मार्च तक अमृतसर जंक्शन से चलेगी और दूसरे दिन रात 11 बजकर 45 मिनट पर कटिहार जंक्शन पहुंचेगी। पटना-चर्लपल्ली स्पेशल ट्रेनों का रूट-शेड्यूल     गाड़ी संख्या 03253 पटना-चर्लपल्ली स्पेशल प्रत्येक सोमवार व बुधवार को 9 से 30 मार्च तक चलेगी। पटना से दोपहर 1:30 पर खुल कर तड़के 3:30 पर चर्लपल्ली पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 03254 चर्लपल्ली-पटना स्पेशल प्रत्येक बुधवार 11 मार्च से एक अप्रैल तक चर्लपल्ली से रात 11:00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन दोपहर 2:15 पटना पहुंचेगी।     गाड़ी संख्या 03255 चर्लपल्ली-पटना स्पेशल प्रत्येक शुक्रवार को 13 से 27 मार्च तक चलेगी। चर्लपल्ली से रात 9:00 बजे रवाना होकर तीसरे दिन दोपहर 12:00 बजे पटना पहुंचेगी। इन ट्रेनों की अवधि बढ़ी उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने होली स्पेशल छह ट्रेनों के संचालन की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत अब गाड़ी 03257 दानापुर-आनंदविहार टर्मिनल होली स्पेशल 8 मार्च, 03258 आनंदविहार-दानापुर 9 मार्च, 0559 रक्सौल-उधना साप्ताहिक 7 मार्च, 05560 उधना-रक्सौल साप्ताहिक होली स्पेशल 8 मार्च, 03309 धनबाद- दिल्ली द्विसाप्ताहिक होली स्पेशल ट्रेन 7 से 10 मार्च, 03310 दिल्ली-धनबाद द्विसाप्ताहिक होली स्पेशल 8 व 11 मार्च को भी चलाई जाएगी।

विधानसभा से पास हुआ संशोधन, गुजरात में बढ़े काम के घंटे, महिलाओं को रात की ड्यूटी की इजाजत

अहमदाबाद  गुजरात विधानसभा (Gujarat Budget Session) में बजट सेशन जारी है। मुख्यमंत्री भूपेश पटेल की मौजूदगी में बजट 2026- 27 पेश किया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को विधानसभा में  गुजरात दुकानें और प्रतिष्ठान रोजगार विनियमन और सेवा की शर्तें (संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। इस बिल को श्रम एवं रोजगार मंत्री कुनवरजी भाई बावलिया ने सदन में पेश किया था। कानून लागू होने पर व्यापार और रोजगार सेवा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह कानून 10 या इससे अधिक वर्कर वाली दुकानों और स्थान पर लागू होगा। जबकि पहले यह कानून 20 या उससे ज्यादा स्टाफ वाले दुकानों या स्थान पर लागू होता था। रोजाना काम करने के रोजाना काम करने के घंटे के लिए में 9 से बढ़कर 10 कर दिया गया है। इन नए नियमों को भी जान लें महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी। हालांकि दुकानदारों और कंपनियों को महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।  इसके अलावा 3 महीने के कम समय में ओवर टाइम काम की ज्यादा से ज्यादा लिमिट 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है। इस संशोधन बिल को आज के दौर के डिमांड और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत पेश किया गया है। श्रम और रोजगार मंत्री का कहना है कि यह वर्कर, ट्रेडर्स मालिकों और नागरिकों सभी के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। कृषि भूमि ट्रांसफर के नियम भी बदले  विधानसभा में सौराष्ट्र घरखेड़ एडमिनिस्ट्रेशन सेटलमेंट एंड एग्रीकल्चरल लैंड ऑर्डिनेशन 1949 अमेंडमेंट बिल भी पास हो चुका है। इसे रिवेन्यू स्टेट मिनिस्टर संजय सिंह माहिडा ने पेश किया था। गैर कानूनी ट्रांसफर के मामलों में एक साफ और सिस्टमैटिक प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। जिसके अनुसार कलेक्टर या तो अपनी पहल पर या जमीन में दिलचस्पी रखने वाले किसी व्यक्ति के एप्लीकेशन के आधार पर कार्रवाई शुरू कर सकेंगे। अगर ट्रांसफर गैर कानूनी पाया जाता है, तो कलेक्टर जमीन बेचने वाले से 3 महीने के अंदर जमीन वापस करने को कहेंगे। जिसके बाद खरीदने वाले को जमीन वापस करनी होगी। ऐसा न होंने पर कलेक्टर ट्रांसफर को गैर कानूनी घोषित कर देंगे और ऐसी जमीन सभी तरह के बोझ से मुक्त होकर सरकार के पास चली जाएगी। फिर इसे सरकार बंजर  जमीन के तौर पर बेच देगी। ओइस बदलाव से पेनल्टी लगने पर जो व्यक्ति या संस्थान किसान नहीं है, उसे एक महीने के अंदर जमीन की मौजूद मार्केट वैल्यू का 3 गुना अमाउंट देना होगा। नई परियोजना को मंजूरी मिली  बनासकांठा जिले में पालनपुर और लक्ष्मीपुरा रोड पर मॉडर्न रेलवे ओवर ब्रिज के लिए 46 करोड़ रुपये मंसूर किए गए हैं। 1212.19 मीटर लंबे रेलवे ओवरब्रिज से शहर के लगभग 1.81 लाख लोगों को लाभ होगा। रेलवे ब्रिज के बन जाने से ड्राइवर का समय और ईंधन बचेगा। यह प्रस्ताव मंत्री ऋषिकेश भाई पटेल द्वारा विधानसभा में पेश किया गया था।

भारत पर रूस का भरोसा कायम, पुतिन के देश ने कहा- ऐसा नहीं हो सकता

नई दिल्ली भारत-रूस की दोस्ती बहुत पुरानी है. दोनों देशों के बीच का रिश्ता केवल तेल और हथियारों तक सीमित नहीं है. यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि रूस से भारत पर तेल नहीं खरीदेगा, मगर रूस को उनकी बातों पर जरा भी यकीन नहीं है. दुनिया चाहे कुछ भी कह रही हो, मगर रूस को अपने पुराने दोस्त भारत पर अब भी यकीन है. यही कारण है कि व्लादिमीर पुतिन का विदेश मंत्रालय कह रहा है कि ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. बता दें कि अमेरिका ट्रेड डील में रूस से तेल न खरीदने वाला दावा कर रहा है. हालांकि, भारत सरकार की ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है. दरअसल, रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को उन बातों को खारिज कर दिया कि भारत रूसी तेल की अपनी खरीद कम कर सकता है. रूस ने कहा कि मॉस्को को नई दिल्ली के रुख में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिख रहा है. साथ ही इस व्यापार को ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए आपसी फायदे वाला और स्थिर करने वाला बताया. यह टिप्पणी वाशिंगटन के इस दावे के बाद आई है कि भारत रूसी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट बंद करने पर सहमत हो गया है. जबकि भारत ने अब तक तेल पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं. हालांकि, इतना साफ कहा है कि जहां से सस्ता तेल मिलेगा, भारत वहीं से खरीदेगा. रूस ने अब क्या कहा? पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा, ‘हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने पर अपना रुख बदला है. भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने से दोनों देशों को फायदा होता है और इससे इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है.’ पुतिन के देश की प्रवक्ता जखारोवा ने कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दावों में कुछ भी नया नहीं है.’ आखिर हुआ क्या है? रूस की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई फोन पर बातचीत के बाद आई है, जिसके बाद भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील पर सहमति जताई है. पीएम मोदी से फोन पर बातचीत करने के बाद अमेरिका ने भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है. अमेरिका ने 25 फीसदी वाला एडिशनल टैरिफ भी हटाया है, जो रूसी तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने हटाया था. खुद डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गया है. अमेरिका का क्या दावा पिछले हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने का वादा किया है, जबकि कुछ दिनों पहले नई दिल्ली ने दोहराया था कि उसके एनर्जी खरीदने के फैसलों में राष्ट्रीय हित ही गाइडिंग फैक्टर रहेगा. यानी भारत ने साफ कर दिया है कि उसे जहां से सस्ता तेल मिलेगा, वहां से खरीदेगा. इसके लिए वह स्वतंत्र है और अपने हितों को ध्यान में रखकर ही फैसला लेगा. भारत का क्या स्टैंड भारत ने आधिकारिक तौर पर वाशिंगटन के इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है कि उसने रूसी तेल का इंपोर्ट रोकने का वादा किया है. मॉस्को ने पहले अमेरिका पर भारत और दूसरे देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया था, और आरोप लगाया था कि वाशिंगटन टैरिफ और सैंक्शन जैसे दबाव वाले तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है. अपने बयान में रूसी विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों की भी आलोचना की और कहा कि वे शांतिपूर्ण समाधान नहीं चाहते हैं.

कर्मचारियों के लिए जरूरी अपडेट, EPFO FY26 की ब्याज दरों पर मार्च में अहम बैठक

नई दिल्ली होली से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को लेकर अहम फैसला ले सकता है। खबर है कि 2 मार्च 2026 को केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक होना है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ (PF) जमा पर मिलने वाली ब्याज दर पर अहम निर्णय लिया जा सकता है। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। वर्तमान में EPF पर 8.25% ब्याज मिलता है। चर्चा है कि आगामी महीनों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों को देखते हुए ब्याज दर को 8.25% पर बरकरार रख सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह लगातार तीसरा साल होगा जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।  हालांकि यह सब अनुमान हैं, अंतिम फैसला वित्त और श्रम और रोज़गार मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही माना जाएगा। फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इन मुद्दों पर भी हो सकती है चर्चा ईपीएफओ कवरेज के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। पीएफ से आंशिक निकासी की प्रक्रियाओं को और सरल बनाने के लिए नए पोर्टल और नियमों की घोषणा की जा सकती है। इनमें EPFO वेबसाइट को अपग्रेड करने के साथ विद्ड्रॉल और क्लेम सेटलमेंट में तेजी जैसे उपाय शामिल हो सकता हैं। हालांकि, अभी तक ईपीएफओ की ओर से अगली बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया गया है। इससे पहले सीबीटी की आखिरी बैठक बीते साल 15 अक्तूबर 2025 को हुई थी। क्या है पूरी प्रक्रिया ? सबसे पहले निवेश और लेखा परीक्षा समिति (FIAC) वित्तीय वर्ष के लिए EPFO निवेश पर ब्याज दर तय करने के लिए बैठक करती है और फिर ​CBT बैठक में ब्याज दर की सिफारिश की जाती है। इसके बाद प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है। मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही इसे आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया जाता है और वित्तीय वर्ष के अंत तक ब्याज की राशि सदस्यों के खातों में जमा होनी शुरू हो जाती है। EPFO : कब कितनी रही है ब्याज दर     वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ब्याज दर 8.25 फीसदी तय की थी। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ब्याज दर 8.25 प्रतिशत निर्धारित की गई थी, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत से अधिक है।     इससे पहले 2021-22 में 8.10% 2020-21 EPF दर 8.5 फीसदी (PF Interest Rate), 2018-19 में 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत थी।     EPFO ने साल 2023-24 के लिए 1,07,000 करोड़ की इनकम पर 8.25% ब्याज दिया, जो लगभग 13 लाख करोड़ की मूल राशि के आधार पर इसका हाईएस्ट रिटर्न है, जबकि साल 2022-23 में 91,151.66 करोड़ की इनकम पर दिए गए 8.15% से बढ़ोतरी थी।