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कविंद्र गुप्ता बने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, 13 साल में RSS से जुड़कर जेल गए, शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर नियुक्त किया गया

शिमला  लद्दाख के उप-राज्यपाल कविंद्र गुप्ता हिमाचल प्रदेश के नए गवर्नर नियुक्त किए गए। हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर बनाया गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने गुरुवार देर रात इस बाबत आदेश जारी किए। लद्दाख और हिमाचल समेत 9 राज्यों में गवर्नर बदले गए। यह फेरबदल पश्चिम बंगाल के गवर्नर डॉ. सीवी आनंद बोस के इस्तीफा देने के बाद किया गया। हिमाचल के नए गवर्नर कविंद्र गुप्ता जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर और जम्मू के मेयर रह चुके हैं। इसके बाद उन्हें जुलाई 2025 में लद्दाख का उप-राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने पिछले साल 18 जुलाई को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तीसरे उप राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने करीब 9 महीने तक इस पद सेवाएं दी और बीते कल अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दी गई है। 3 बार मेयर रह चुके जम्मू शहर के जानीपुर निवासी 66 वर्षीय कुलविंद्र गुप्ता निरंतर 3 बार जम्मू के महापौर भी रह चुके हैं। उन्होंने BJP की राज्य इकाई के महासचिव के तौर पर भी काम किया था।इसके अलावा 1993 से 1998 तक वह लगातार दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष भी रहे। कविंद्र गुप्ता साल 2014 के विधानसभा चुनाव में गांधी नगर सीट से पहली बार MLA चुने गए थे। इसके बाद, उन्हें विधानसभा स्पीकर चुना गया। उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद के सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए हुई थी और इमरजेंसी के दौरान करीब 13 महीने वह जेल में भी रहे थे। अब तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा संभालेंगे शुक्ल वहीं, हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुल्क को तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा दिया है। शुल्क ने 18 फरवरी 2023 को हिमाचल के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली थी। उन्होंने लगभग 3 साल तक हिमाचल गवर्नर के तौर पर सेवाएं दी। इन प्रदेशों में भी बदले गवर्नर राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार- तरनजीत सिंह संधु को दिल्ली का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिश्नु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव को नगालैंड और लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। तमिलनाडू के राज्यपाल आरएन रवि अब से पश्चिम बंगाल और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल का काम संभालेंगे, जबकि दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना को लद्दाख का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

कर्नाटक बजट में अल्पसंख्यकों पर खास ध्यान, शिक्षा-कल्याण के लिए खोला खजाना

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करते हुए अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई नई योजनाओं की घोषणा की। इन योजनाओं का उद्देश्य अल्पसंख्यक छात्रों के लिए शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार करना, कौशल विकास को बढ़ावा देना और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। अपने बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिक मांग वाले जिलों में 150 क्षमता वाले 25 नए पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास शुरू किए जाएंगे। सीएम ने कहा कि मौजूदा 25 छात्रावासों की क्षमता में 50 और छात्रों की बढ़ोतरी की जाएगी। बजट पेश करते हुए, उन्होंने कहा कि सरकार माइनॉरिटी स्टूडेंट्स और कम्युनिटीज़ के लिए एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सपोर्ट सिस्टम को बढ़ाएगी, साथ ही एंटरप्रेन्योरशिप और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगी। स्कूलों का उन्नयन और उच्च शिक्षा की तैयारी उन्होंने कहा कि 2026-27 में 25 नए संत शिशुनाला शरीफ रेजिडेंशियल स्कूल शुरू किए जाएंगे। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि 117 मौलाना आज़ाद मॉडल स्कूलों और उर्दू स्कूलों को 600 करोड़ रुपये की लागत से कर्नाटक पब्लिक स्कूलों के तौर पर अपग्रेड करने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल, 400 करोड़ रुपये की लागत से इसी मॉडल के तहत और 100 स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स का ऐलान सिद्धारमैया ने कहा कि 25 मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूलों में PUC साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएंगी। इसके अलावा 18 APJ अब्दुल कलाम रेजिडेंशियल स्कूलों में कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएगी। सिद्धारमैया ने कहा कि इसके अलावा, माइनॉरिटी रेजिडेंशियल स्कूलों के चुने हुए काबिल PUC स्टूडेंट्स को K-CET, JEE और NEET एग्जाम के लिए अच्छी कोचिंग देने के लिए सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस के तौर पर चार रेजिडेंशियल स्कूल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच लगातार सीखने को बढ़ावा देने के लिए लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स भी बनाए जाएंगे। चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स बनेंगे उन्होंने कहा कि वर्किंग विमेन हॉस्टल्स की डिमांड ज़्यादा है, इसलिए बेंगलुरु में 100 लोगों की कैपेसिटी वाले चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स शुरू किए जाएंगे। सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार ने जैन, बुद्धिस्ट और सिख कम्युनिटीज़ के बड़े डेवलपमेंट के लिए 100 करोड़ रुपये भी रखे हैं। उन्होंने बुद्धिस्ट कम्युनिटी के धम्मचारियों को 6,000 रुपये महीने का मानदेय देने की घोषणा की। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी अल्पसंख्यक छात्रों में से 5,000 छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए 50,000 रुपये देने का भी उन्होंने ऐलान किया। आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के लिए सरकार फास्ट फूड ट्रक या मोबाइल किचन कियोस्क उपलब्ध कराएगी। इसके तहत परियोजना लागत का 75% या अधिकतम 3 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक महिला सहकारी समितियां भी स्थापित की जाएंगी। अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं जैन, बौद्ध और सिख समुदायों के समग्र विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान। बौद्ध समुदाय के धम्माचारियों को प्रति माह 6,000 रुपये मानदेय। हुब्बली और कलबुर्गी में नए हज भवनों का निर्माण। वक्फ संस्थानों के 31 महिला पीयू कॉलेजों को डिग्री कॉलेज में अपग्रेड किया जाएगा। सवनूर में एक नया महिला पीयू कॉलेज शुरू होगा। व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित वक्फ संपत्तियों का पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकास किया जाएगा। बीजेपी ने किया विरोध इन घोषणाओं पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार “तुष्टिकरण की राजनीति” कर रही है और राज्य के खजाने का बड़ा हिस्सा अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए खर्च कर रही है।  

साइबर वॉर में AI टूल का आगाज, RBI का MuleHunter फर्जी बैंक खातों को करेगा खत्म

 नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक फर्म Reserve Bank Innovation Hub ने एक एडवांस्ड AI टूल तैयार किया है, जो साइबर क्रिमिनल्स, स्कैमर्स और डिजिटल अरेस्ट करने वालों पर नकेल कसेगा. इस AI टूल का नाम MuleHunter.AI है. यह AI टूल हर महीने लगभग 20,000 म्यूल अकाउंट्स का पता लगाकर उन्हें बंद कर रहा है। डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन फर्जीवाड़ों के पीछे के एक विशाल फर्जी बैंक अकाउंट का नेटवर्क होता है, जिसे म्यूल अकाउंट भी कहते हैं। इन फर्जी अकाउंट (म्यूल अकाउंट) का यूज ठगी गई रकम ट्रांसफर को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजने में इस्तेमाल किया जाता है. कई साल से साइबर क्रिमिनल्स म्यूल अकाउंट नेटवर्क का यूज करके भोले-भाले लोगों को शिकार बना रहे हैं। म्यूल अकाउंट को पकड़ना क्यों मुश्किल है म्यूल अकाउंट को पकड़ना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत थोड़े समय के लिए होते हैं. जैसे ही म्यूल अकाउंट को ओपन किया जाता है, उसके कुछ दिन बाद ही बंद कर दिया जाता है. ज्यादातर म्यूल अकाउंट को फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर ओपन किया जाता है। अमित शाह भी कर चुके हैं तारीफ  केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने हाल ही में बढ़ते हुए साइबर अपराधों के खिलाफ इसको एक अहम हथियार बताया है. ये टूल सिर्फ साइबर ठगी को ट्रैक नहीं करता है, बल्कि उसकी धड़कन को समझता है। म्यूल अकाउंट को कर देगा फ्रीज  साइबर ठगी के बाद जैसे ही म्यूल अकाउंट के जरिए रुपये को एक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट और फिर तीसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. यह सिस्टम उसको ट्रैक करता है और ट्रांजैक्शन को रोक देता है. साथ ही बैंक अकाउंट को फ्रीज कर देता है।  कई बैंकों में यूज हो रहा सिस्टम  बताते चलें कि यह टूल अभी करीब दो दर्जन बैंक सिस्टम में यूज जा रहा है. MuleHunter.AI टूल का असली मकसद साइबर ठगों के खातों की पहचान करना और उनको बंद करना है। MuleHunter.AI क्या है     इसे Reserve Bank Innovation Hub ने डेवलप किया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी है.      यह एक स्पेशल सिस्टम है, जो म्यूल अकाउंट्स के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खासतौर से तैयार किया गया है.      अन्य सिस्टम के तहत घटना के बाद धोखाधड़ी पकड़ते हैं. यह टूल गोल्डन ऑवर में ही अपराध पकड़ लेता है.  कैसे काम करता है ये सिस्टम      यह टूल संदिग्ध लेनदेन को पैसा निकलने से पहले ही फ्रीज करने की काबिलियत रखता है.      यह मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है और तुरंत काम होता है.      यह बैंक खातों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को डिटेक्ट करता है.      खास पैटर्न के आधार पर यह खातों के मिसयूज की तुरंत पहचान कर लेता है.  I4C ने कई लाख म्यूल अकाउंट की पहचान की  इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक 26.5 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई थी. करीब 20,000 करोड़ रुपये साइबर क्रिमिमनल्स द्वारा लूटे जाने वाले पैसे में से 8,189 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट कहां मिले हरियाणा के नूंह में 2025 में 1,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट पकड़े जा चुके हैं. वहीं जामताड़ा में 350 से ज्यादा ऐसे खाते पकड़े जा चुके हैं। होम मिनिस्ट्री ने दी है डेडलाइन  होम मिनिस्ट्री ने दिसंबर 2026 तक सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट को MuleHunter प्लेटफॉर्म से कनेक्ट होने की डेडलाइन दी है. इसमें बैंक सरकारी फाइनेंशियल एजेंसियां भी हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द किया फैमिली कोर्ट का आदेश, वॉट्सएप चैट से तलाक नहीं, पत्नी पर क्रूरता के आरोप साबित करने होंगे

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट की ओर से पति को दिया गया तलाक का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल WhatsApp या SMS संदेशों के आधार पर पत्नी पर मानसिक क्रूरता साबित नहीं की जा सकती, खासकर तब जब पत्नी को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया हो। इससे पहले, नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका मंजूर करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति की गवाही और पति-पत्नी के बीच हुई व्हाट्सऐप व एसएमएस बातचीत को सबूत माना था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे में शिफ्ट होने का दबाव डालती थी, उसके परिवार का अपमान करती थी और इन संदेशों से उसे मानसिक क्रूरता का सामना करना पड़ा।  बॉम्बे हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहर फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को रद्द करते हुए कहा कि किसी भी मामले में फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। पत्नी को अपनी सफाई देने का अवसर दिए बिना तलाक देना सही नहीं है। बता दें कि नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए उसे तलाक दे दिया था। कोर्ट ने पति के बयान और पति-पत्नी के बीच हुए व्हाट्सऐप और एसएमएस संदेशों को मुख्य सबूत माना था। पति ने लगाए थे यह आरोप पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उस पर पुणे शिफ्ट होने का दबाव बना रही थी। उसने कोर्ट में पत्नी के साथ की गई व्हाट्सऐप चैट भी साझा की थी। साथ ही उसने आरोप लगाया था कि उसके ससुराल वालों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इससे उसे मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नासिक फैमिली कोर्ट ने पति के हक में फैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक दे दिया था। अगर पत्नी पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है और ससुराल वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। हाई कोर्ट ने फैसले नासिक कोर्ट के फैसल पर जताई आपत्ति नासिक कोर्ट के इस फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने असहमति जताई। हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी को इन मैसेजों के बारे में अपनी बात रखने या उन्हें चुनौती देने का कोई मौका नहीं दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सऐप चैट को आधार बनाकर तलाक का फैसला नहीं दिया जा सकता। जब तक दोनों पक्षों की बात नहीं सुनी जाती ऐसा निर्णय उचित नहीं माना जाएगा। हाई कोर्ट ने मामले को फिर से नासिक फैमिली कोर्ट को भेज दिया है। अब पत्नी को भी अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का पूरा अवसर दिया जाएगा।  

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: अमेरिका-इजरायल के बाद एक और देश की ईरान पर अटैक की तैयारी

इजरायल अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहे ईरान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। खबर है कि अब अजरबैजान ने ड्रोन हमले की बदला लेने की कसम खाई है। साथ ही मुल्क के राष्ट्रपति ने अटैक का जवाब देने के निर्देश अपनी सेना को दे दिए हैं। खबर है कि अजरबैजान ने ईरान से सफाई देने की भी मांग की है। ईरान ने कतर, कुवैत, सऊदी अरब समेत कई मुल्कों में हमले किए हैं। भड़क गया अजरबैजान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने ईरान पर 'आतंकवाद और आक्रामकता का निराधार कृत्य' करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि उनकी सेना को जवाबी कार्रवाई की तैयारी और उसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने नखचिवान की ओर चार ड्रोन भेजे थे, जिनमें से एक को अजरबैजानी सेना ने निष्क्रिय कर दिया, जबकि अन्य ने नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाया, जिनमें एक स्कूल भी शामिल था जहां कक्षाएं चल रही थीं। बड़ी बैठक हुई रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति अलीयेव ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा, 'हम अजरबैजान के खिलाफ इस बगैर उकसावे के किए गए आतंकवादी कृत्य और आक्रमण को सहन नहीं करेंगे। हमारे सशस्त्र बलों से तैयारी करने और उचित जवाबी कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं।' उन्होंने कहा, 'हम किसी भी दुश्मन ताकत के खिलाफ अपनी शक्ति दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्हें ईरान में ये नहीं भूलना चाहिए।' बातचीत की मांग एक्सियोस से बातचीत में अजरबैजान के अमेरिका में राजदूत खजार इब्राहिम ने कहा कि उनका मुल्क उचित उपाय कर रहा है। जब पूछा गया कि क्या वह अगले हमले को लेकर चिंतित हैं। इसपर उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात नहीं है। उन्होंने कहा, 'इसके बजाय हम हिसाब लगा रहे हैं, तथ्य जुटा रहे हैं और हम फैसले ले रहे हैं।' एजेंसी वार्ता के अनुसार, अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि ईरान की ओर से दागे गए कई ड्रोन उनके क्षेत्र में गिरे हैं। इनमें से एक ड्रोन ने हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग को क्षतिग्रस्त किया है, जबकि दूसरा एक स्कूल भवन के पास जाकर गिरा। मंत्रालय ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जतायी और साथ ही ईरान से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो। साथ ही मंत्रालय ने अजरबैजान में ईरान के राजदूत को अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करने के लिए तलब किया। ईरान क्या बोला ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने अजरबैजान की ओर ड्रोन भेजने से इनकार किया है। ईरान ने बार-बार युद्ध में तेल और अन्य नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से इनकार किया है, हालांकि उसके ड्रोन और मिसाइल हमलों ने इन स्थलों को निशाना बनाया है।  

बॉम्बे हाई कोर्ट का अहम आदेश: कहीं भी नमाज पढ़ने का नहीं है अधिकार, समझें क्या है मामला

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को रमजान के दौरान नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि रमजान इस्लाम का महत्वपूर्ण धार्मिक महीना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ने का अधिकार मांग सकता है। खासकर एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुरक्षा को धर्म से ऊपर बताया     जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।     कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील होता है, जहां किसी भी तरह की भीड़ या अस्थायी व्यवस्था सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म चाहे जो भी हो, सुरक्षा सबसे पहले है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अस्थायी शेड हटाए जाने के बाद दाखिल हुई थी याचिका     यह मामला टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेंस यूनियन द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज अदा करते थे। हालांकि, पिछले वर्ष अधिकारियों ने उस शेड को हटा दिया था।     यूनियन ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें उसी स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या फिर आसपास किसी अन्य स्थान को इसके लिए निर्धारित किया जाए। एयरपोर्ट की सुरक्षा का दिया हवाला अदालत ने बार-बार एयरपोर्ट सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सावधानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछली सुनवाई में अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे यह देखें कि याचिकाकर्ताओं को कहीं और स्थान दिया जा सकता है या नहीं। प्राधिकरणों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। सात अन्य स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़भाड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट विकास योजना के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। मदरसे में जाकर अदा करें नमाज   रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामला सीधे एयरपोर्ट की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित स्थान से एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। पीठ ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास प्रार्थना स्थल बनाने का सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने टिप्पणी की कि सुरक्षा सबसे पहले आती है और इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं। जरूरी नहीं कि किसी जगह पर नमाज पढ़ी जाए हाईकोर्ट ने कहा कि दुनिया में कहीं भी एयरपोर्ट के इतने करीब इस तरह की व्यवस्था नहीं देखी गई है। याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कल यह कहे कि वह ओवल मैदान के बीच में खड़े होकर नमाज पढ़ना चाहता है, तो यह संभव नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति दिन में पांच बार नमाज अदा कर सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह किसी भी जगह पर ही की जाए। वैकल्पिक स्थानों का सर्वे, लेकिन नहीं मिली उपयुक्त जगह     इससे पहले अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कर यह देखें कि क्या नमाज के लिए कोई अन्य स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।     गुरुवार को अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सात अलग-अलग स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट के विकास कार्यों के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। कोर्ट ने मदरसे में नमाज पढ़ने की दी सलाह     रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कोई राहत नहीं दे सकती। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों का उपयोग करें।     कोर्ट ने बताया कि प्रस्तावित स्थान से करीब एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान यदि संभव हुआ तो याचिकाकर्ता अपनी मांग एयरपोर्ट प्राधिकरण के सामने रख सकते हैं। सर्वे में नमाज के लिए कोई जगह नहीं मिली कोर्ट ने पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारियों से यह जांच करने को कहा था कि क्या याचिकाकर्ताओं को कोई वैकल्पिक जगह दी जा सकती है। गुरुवार को पेश की गई रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि सात जगहों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट डेवलपमेंट प्लान के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह तय करना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा- धर्म हो या कुछ और सुरक्षा सबसे पहले आती है। इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं, इसलिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट बोला- आप नमाज की जगह तय नहीं कर सकते कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता खुद यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई किसी सार्वजनिक स्थान के बीच में नमाज पढ़ने की मांग करे तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे किसी दूसरी जगह की तलाश करें। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित इलाके से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज पढ़ी जा सकती है।  

चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू, यहां जानें पूरा प्रक्रिया

नई दिल्ली चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आज सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है, जबकि 17 अप्रैल से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा. उत्तराखंड सरकार ने यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in और मोबाइल ऐप टूरिस्ट केयर उत्तराखंड से कर सकते हैं. 19 अप्रैल को खुलेंगे कपाट उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे. 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. श्रीहेमकुण्ड साहिब की आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी. आधार कार्ड के माध्यम से पंजीकरण उत्तराखंड सरकार की ओर से बताया गया है कि चारधाम यात्रा 2026 में आने के लिए भारतीय श्रद्धालु अपना पंजीकरण आधार कार्ड के माध्यम से कर सकेंगे, जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. आधार कार्ड नहीं है तो ऐसे होगा रजिस्ट्रेशन जिन श्रद्धालुओं के पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, उनके लिए पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी पंजीकरण काउंटरों की व्यवस्था की गई है. इन काउंटरों पर रजिस्ट्रेशन कपाट खुलने से दो दिन पूर्व, 17 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ की जाएगी. पंजीकरण केन्द्र एवं ट्रांजिट कैंप ऋषिकेश, पंजीकरण केन्द्र ऋषिकुल ग्राउंड हरिद्वार और पंजीकरण केंद्र विकास नगर देहरादून में खुलेंगे. टोल फ्री नंबर पर मिलेगी जानकारी श्रद्धालु किसी भी प्रकार की जानकारी या असुविधा होने पर टोल फ्री नंबर 0135-1364 पर कॉल कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा में आने वाले सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि यात्रा को सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए यात्रा से पूर्व अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से करवा लें. चार धाम यात्रा का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुनोत्री से यात्रा शुरू करने पर चारधाम यात्रा में किसी भी प्रकार की रुकावट भक्तों को नहीं आती है.     यमुनोत्री, यमुना नदी का उद्गम स्थल है. यमुना जी यमराज की बहन हैं और उन्हें वरदान प्राप्त है कि वह अपने जल के माध्यम से सभी का दुख दूर करेंगी.     मान्यता है कि जो श्रद्धालु यमुनोत्री में स्नान करता है, उसे मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है. हर साल की तरह इस बार भी बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है.  

ट्रंप की करारी शिकस्त, अमेरिका को ₹16 लाख करोड़ का फटका, भारत को मिल रही राहत

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को एक और झटका लगा है। न्यूयॉर्क के एक फेडरल जज ने फैसला सुनाया है कि जो कंपनियां सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ का पेमेंट कर चुकी हैं, उन्हें रिफंड मिलना चाहिए। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, U.S. कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने फैसले में लिखा है कि रिकॉर्ड में दर्ज सभी इंपोर्टर्स सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फायदा पाने के हकदार हैं। ट्रंप की तरफ से पिछले साल भारत समेत करीब 60 देशों के खिलाफ जारी किए गए टैरिफ ऑर्डर्स को इस साल फरवरी महीने में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द घोषित कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़े लेवी लगाकर अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया। कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA), 1977 को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी घोषित किया है। इसी के तहत ट्रंप ने पिछले साल टैरिफ लगाए थे। ट्रंप को 16 लाख करोड़ रुपये का झटका   कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को 175 अरब डॉलर का रिफंड चुकाना पड़ सकता है. न्यूयॉर्क के फेडरल जज रिचर्ड ईटन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार ने जिन भी कंपनियों से अवैध टैरिफ वसूला है, उन्हें अब रिफंड करना होगा. ये कंपनियां अपना पैसा वापस पाने की हकदार हैं. जज ईटन ने कहा कि रिफंड का दायरा सिर्फ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा,उन आयातकों पर भी लागू होगा, जिन्होंने टैक्स चुकाया है.  कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी खजाने पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.बता दें कि अमेरिका ने दिसंबर दिसंबर 2025 तक टैरिफ से 130 अरब डॉलर की कमाई की। अमेरिका के लिए डबल झटका क्यों ?  टैरिफ पर अमेरिकी कोर्ट से मिली हार अमेरिका और ट्रंप के लिए डबल झटका है. ट्रंप प्रशासन को भारी भरकम शुल्क चुकाना होगा. पहले से ही अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा हुआ है. ऐसे  में 16 लाख करोड़ का रिफंड आसान नहीं है. वहीं युद्ध की वजह से खर्च पहले से बढ़ा है. कोर्ट के फैसले ने ट्रंप को दोहरा झटका दे दिया है.  हालांकि ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि वो टैरिफ को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर देंगे. ट्रंप दावा कर रहे हैं 150 दिनों के बाद वो टैरिफ को वहीं पहुंचा देंगे, जहां वो पहले था.  कुल मिलाकर टैरिफ पर ट्रंप हार मानने को तैयार नहीं हैं.   क्या भारत को इस फैसले से फायदा मिलेगा ?  टैरिफ हटने के बाद अमेरिका की ओर से कुल इंपोर्ट टैक्स 10 फीसदी का है. जिसका फायदा भारतीय निर्यातकों को मिला. अगर रिफंड की बात करें तो भारत को सीधे तौर पर इसका फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि भारतीय निर्यातकों ने टैरिफ का भुगतान नहीं किया, बल्कि अमेरिकी आयातकों ने भारत पर लगाए गए टैरिफ का भुगतान अमेरिकी सरकार को किया था. इस शुल्क का बोझ आयातकों ने ग्राहकों पर डाला. अमेरिकी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए प्रतिस्पर्धा कड़ी हो गई. भारतीय सामान महंगे हो गए . इस टैरिफ के हटने और रिफंड का फायदा भी उन आयातकों को मिलेगा, जिन्होंने शुल्क चुकाया था.  हालांकि अप्रत्यक्ष लाभ भारत को मिलेगा, क्योंकि टैरिफ कम होने से भारत से सामान खरीदना सस्ता और आसान हो जाएगा, अमेरिकी बाजार में भारत के सामान सस्ते हो जाएंगे.  भारतीय कंपनियों को इस फैसले से लाभ मिलेगा, उनका निर्यात बढ़ेगा ईटन खास तौर पर एटमस फिल्ट्रेशन के एक केस पर फैसला सुना रहे थे। यह नैशविले, टेनेसी की एक कंपनी है, जो फिल्टर और दूसरे फिल्ट्रेशन प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी टैरिफ रिफंड के अधिकार का दावा कर रही है।इस सप्ताह की शुरुआत में एक और फेडरल कोर्ट ने रिफंड प्रोसेस को धीमा करने की ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की कोशिश को खारिज कर दिया। U.S. कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने रिफंड प्रोसेस का अगला फेज शुरू किया और इसे न्यूयॉर्क ट्रेड कोर्ट में भेजकर इसे सुलझाने के लिए कहा। अब U.S. कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी को रिफंड प्रोसेस करने का कोई तरीका निकालना होगा। अमेरिका के लिए डबल झटका क्यों ?  टैरिफ पर अमेरिकी कोर्ट से मिली हार अमेरिका और ट्रंप के लिए डबल झटका है. ट्रंप प्रशासन को भारी भरकम शुल्क चुकाना होगा. पहले से ही अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ा हुआ है. ऐसे  में 16 लाख करोड़ का रिफंड आसान नहीं है. वहीं युद्ध की वजह से खर्च पहले से बढ़ा है. कोर्ट के फैसले ने ट्रंप को दोहरा झटका दे दिया है.  हालांकि ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि वो टैरिफ को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर देंगे. ट्रंप दावा कर रहे हैं 150 दिनों के बाद वो टैरिफ को वहीं पहुंचा देंगे, जहां वो पहले था.  कुल मिलाकर टैरिफ पर ट्रंप हार मानने को तैयार नहीं हैं.  

ईरान ने अमेरिका के प्रमुख वार्निंग सिस्टम को तबाह किया, युद्ध के बीच ‘आंख’ फोड़ने से हुआ बड़ा नुकसान

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद युद्ध ने भयावह मोड़ के लिया है। जहां एक तरफ ईरान ने खाड़ी देशों पर लगातार हमले जारी रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया है, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस बीच अब यह खबर सामने आई है कि ईरान ने अमेरिका को एक गहरा जख्म दे दिया है। जानकारी के मुताबिक ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। इसे इस क्षेत्र में अमेरिका का आंख भी कहा जाता था। जानकारी के मुताबिक करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत वाला यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था। हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है और इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दी हैं। यह रडार सिस्टम मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़ा मिसाइल चेतावनी रडार माना जाता है। ईरान ने कैसे फोड़ी आंख? ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे सटीक मिसाइल हमला बताया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला संभवत: कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से किया गया होगा, जो शायद शाहेद प्रकार का था। रिपोर्ट्स के अनुसार मिसाइलों और ड्रोन के एक साथ बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा। क्यों है बड़ा नुकसान? इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत बनाया था। यह प्रणाली 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की निगरानी कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर सिर्फ एक सैन्य ठिकाने को नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। उनके अनुसार यह सिस्टम अमेरिकी मिसाइल रक्षा तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन ने कहा कि इस हमले के रणनीतिक असर भी हो सकते हैं। बदलने में लग जाएगा समय सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े रडार सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता, इसलिए इससे कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर हो सकती है। यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग मौजूद हैं।

अमेरिका की छूट: भारत अब 30 दिन तक खरीद सकेगा रूस का कच्चा तेल

 नई दिल्ली ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट के बीच अमेरिका ने अहम फैसला लिया है. उसने रूस को 30 दिन तक भारत को तेल बेचने की अस्थायी छूट दी है. इससे महीनों से समंदर में भटक रहे रूसी तेल जहाजों के साथ-साथ भारत को भी राहत मिलेगी। बताया गया कि अमेरिका ने ईरान जंग के बीच ग्लोबल ऑयल मार्केट पर दबाव कम करने के लिए समुद्र में फंसे रूसी तेल को भारत को बेचने की इजाजत दी है. ये 30 दिन की टेम्पररी छूट है। ईरान से जंग शुरू होने के बाद आशंका थी कि भारत में भी तेल संकट हो सकता है. तब सरकार ने बताया था कि भारत के पास अभी करीब 50 दिन का तेल रिजर्व है। रॉयटर्स के मुताबिक, दो सीनियर अमेरिकी अधिकारियों ने गुरुवार को रॉयटर्स को बताया कि वाशिंगटन ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों से जुड़ी मौजूदा पाबंदियों के बावजूद शिपमेंट को आगे बढ़ने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की छूट को मंजूरी दे दी है। बता दें कि, अमेरिका ने यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद विभिन्न देशों को रूसी तेल नहीं खरीदने की धमकी दी थी. पश्चिमी देशों ने भी मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए थे. लेकिन भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा था. ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा था. साथ ही साफ संदेश दिया था कि तेल कहां से खरीदना है, इसका फैसला भारत खुद करेगा। रूस के तेल टैंकर समुद्र में क्यों खड़े थे दरअसल, रूस के तेल टैंकर समुद्र में इसलिए खड़े थे क्योंकि नए अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान/बीमा की अनिश्चितता की वजह से उनका तेल तुरंत उतारा नहीं जा रहा था. यूएस ने रूसी तेल से जुड़ी कुछ शिपिंग कंपनियों और टैंकरों पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे. इससे कई जहाजों के बीमा, भुगतान और पोर्ट एंट्री पर सवाल खड़े हो गए। भारत के रिफाइनर्स भी इंतजार करने लगे कि कहीं तेल खरीदना नियमों के खिलाफ तो नहीं होगा. इसलिए जहाजों को कुछ समय समुद्र में ही रोक दिया गया। ताजा जानकारी के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड – जल्द डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए व्यापारियों के साथ पहले से ही बातचीत कर रही हैं। बताया गया कि भारतीय सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों ने व्यापारियों से पहले ही लगभग 20 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद लिया है। कुछ रिफाइनरियों के लिए, यह कदम रूसी आपूर्ति की वापसी का संकेत है. रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, एचपीसीएल और एमआरपीएल को आखिरी बार नवंबर में रूसी कच्चे तेल की खेप मिली थी।