samacharsecretary.com

संसद में उठी विरासत बचाने की आवाज, धरोहरों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिंता जाहिर

नई दिल्ली राज्यसभा सदस्य मीनाक्षी जैन ने शुक्रवार को देश की अमूल्य धरोहरों की रक्षा का महत्वपूर्ण विषय सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि सदन का ध्यान देश की अमूल्य धरोहर स्थलों पर बढ़ती हुई तोड़फोड़ और अपवित्रता के गंभीर खतरे की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है, जो अत्यंत चिंताजनक है। मीनाक्षी जैन ने कहा कि हम्पी, जो 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच शासन करने वाले महान विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था, हमारी समृद्ध सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। लगभग 16 वर्ग मील में फैला यह नगर मध्यकालीन विश्व के सबसे बड़े नगरों में से एक माना जाता था। अनेक विदेशी यात्रियों ने हम्पी की भव्यता और समृद्धि का वर्णन किया है। इस स्थल पर अनेक मंदिर, किले, मंडप, स्तंभयुक्त सभागार और अन्य भव्य संरचनाएं स्थित हैं। वर्ष 1986 में हम्पी को यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। उन्होंने बताया कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ पर्यटक, इस स्थल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से अनभिज्ञ होकर, गैर-जिम्मेदाराना और विनाशकारी कृत्य कर रहे हैं। हाल ही में कुछ व्यक्तियों ने एक मंदिर के बाहर स्थित एक विशाल स्तंभ को तोड़ दिया, जबकि उनका एक साथी इस घटना का वीडियो बना रहा था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने घोषणा की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिरों के स्तंभों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। यद्यपि संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण आवश्यक है, किंतु जागरूकता और संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। राज्यसभा सांसद ने एक और उदाहरण देते हुए कहा, "इसी प्रकार की घटनाएं अन्य स्थानों से भी सामने आई हैं। मध्य प्रदेश स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन धरोहर हैं। यहां भगवान विष्णु के वराह अवतार की देश की सबसे बड़ी एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिस पर अत्यंत सूक्ष्म और सुंदर नक्काशी की गई है। यह प्रतिमा 5वीं-6वीं शताब्दी की मानी जाती है। हाल ही में एक पर्यटक जूते पहनकर प्रतिमा के चबूतरे पर चढ़ गया और अपने मित्रों से फोटो खिंचवाई। उसने प्रतिमा पर चढ़ने का भी प्रयास किया। पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस स्थल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की जानकारी नहीं थी। वे इसे केवल घूमने-फिरने का स्थान समझ रहे थे।" मीनाक्षी जैन ने कहा कि ऐसी घटनाएं स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि पर्यटकों के बीच जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी है। यह जरूरी है कि आगंतुकों को उन स्थलों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में उचित जानकारी दी जाए। हमारी धरोहर का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यह विचार किया जा सकता है कि इन स्थलों पर तैनात सुरक्षाकर्मी और प्रशिक्षित गाइड आगंतुकों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही, स्पष्ट सूचना-पट्ट, प्रारंभिक मार्गदर्शन और तोड़फोड़ के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान भी प्रभावी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने सदन में कहा कि हमारे ये धरोहर स्थल केवल पत्थर और संरचनाएं नहीं हैं, वे हमारे इतिहास, संस्कृति और पहचान के जीवंत प्रमाण हैं। इन्हें भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

भोपाल नगर निगम की अपील पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा—सिर्फ नियम नहीं, जमीन पर दिखे सुधार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के हिसाब से वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करते। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने भोपाल नगर निगम द्वारा दायर उन अपीलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिनमें राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरणीय मुआवजे को चुनौती दी गई थी। ग्रीन ट्रिब्युनल ने अपने 31 जुलाई 2023 और 11 अगस्त 2023 के विवादित आदेशों के माध्यम से, नगर निकाय को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपए और 121 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा देने का निर्देश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नगरपालिका अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाली विकसित हो रही वैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कहा कि नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2000 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिसे अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, हालांकि जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में मौजूद कमियों पर चिंता व्यक्त की। आदेश में कहा गया है, "अदालत का मानना है कि जमीनी स्तर पर कई कारकों के कारण वैधानिक तंत्र वांछित परिणाम नहीं दे रहा है।" नए नियमों की शुरुआत को "स्वागत योग्य कदम" बताते हुए शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जब तक समय पर प्रारंभिक कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए नियमों की मात्र अधिसूचना पर्याप्त नहीं होगी। पीठ ने टिप्पणी की, "नए नियमों की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रभावी तिथि से पहले आवश्यक कार्य पूरा कर लें, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं ला पाएंगे।" पीठ ने पक्षकारों के वकीलों की बातों को विस्‍तार से सुनने के बाद अपीलकर्ता निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही के दायरे को व्यापक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसमें निर्देश दिया गया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश के शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मध्य प्रदेश के आवास और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, "अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह संशोधन करे और सुनवाई के अगले दिन या उससे पहले संशोधित कारण शीर्षक प्रस्तुत करे।" अपीलकर्ता के वकील को भारत संघ के केंद्रीय एजेंसी अनुभाग को अपील की प्रतियां सौंपने की अनुमति भी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।"

दुनिया से व्यापार का तरीका बदल रहे एफटीए, भारत की बढ़ती ताकत: गोयल

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत के हाल में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) खासकर अमेरिका के साथ हुआ अंतरिम व्यापार समझौता, देश के दुनिया के साथ व्यापार करने के तरीके में संरचनात्मक बदलाव को दिखाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी में 'ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट (जीबीएस) 2026' में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के हितों की पूरी तरीके से रक्षा की है। उन्होंने संबोधन में कहा कि जब हम अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए बातचीत कर रहे थे, उसमें हम एक चीज को लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे कि हमें अपने किसानों के हितों की रक्षा करनी है। गोयल ने कहा, "जिन क्षेत्रों में हमारे देश में उत्पादन सबसे अधिक है और हमारा देश आत्मनिर्भर है, उन क्षेत्रों को इस डील से बाहर रखा गया है।" उन्होंने आगे कहा,"हमने किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की है, संभवतः स्थानीय कृषि उत्पादों के 95 प्रतिशत से अधिक हिस्से की।" गोयल ने आगे कहा कि वे लंबे समय से इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत का कपड़ा क्षेत्र विकास क्यों नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से भी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे थे। अब, कपड़ा क्षेत्र यूरोप के लिए बिना किसी शुल्क के खुला है और संयुक्त राज्य अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, इसलिए हम बाकी दुनिया से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।" उन्होंने पहले कहा था कि भारत को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत वस्त्र निर्यात पर वही लाभ मिलेंगे जो बांग्लादेश को अपने समझौते के माध्यम से मिले थे। वस्त्र निर्यातकों को बांग्लादेश के समान व्यवहार का आश्वासन दिया गया था। इस कार्यक्रम में गोयल ने इस बात पर भी जोर दिया कि एफटीए एक स्पष्ट ढांचे पर आधारित होते हैं, जिसमें विश्वास, पारदर्शिता और समयबद्ध निश्चितता शामिल है।" केंद्रीय मंत्री ने भारत-ईएफटीए समझौते का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नई दिल्ली व्यापार साझेदारी के स्वरूप को फिर से परिभाषित कर रही है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'रिफॉर्म एक्सप्रेस'को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।" आगे कहा, "आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और आने वाले वर्षों में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी।"

DGCA का बड़ा एक्शन: सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर एयर इंडिया पर एक करोड़ का फाइन

नई दिल्ली  एयर इंडिया पर डीजीसीए ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया की एयरबस ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। सुरक्षा में लापरवाही को लेकर एयर इंडिया पर चला डंडा, DGCA ने ठोका एक करोड़ रुपए का जुर्माना एयर इंडिया पर डीजीसीए ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया की एयरबस ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। डीजीसीए ने इसको बहुत गंभीर किस्म का उल्लंघन माना है। साथ ही लापरवाही के लिए टॉप लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया है। डीजीसीए ने जुर्माना लगाते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एयरबस ए320 विमान ने कई सेक्टर्स में उड़ान भरी। इसमें नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल हैं। ऐसा पिछले साल 24 से 25 नवंबर के बीच हुआ। इन उड़ानों के लिए एयर इंडिया ने अनिवार्य एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) नहीं लिया था। एआरसी एक बेहद अहम सर्टिफिकेट है जो सालाना तौर पर डीजीसीए द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए विमान को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। बिना एआरसी के उड़ान भरना उड़ान के सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। डीजीसीए ने माना बेहद गंभीर डीजीसीए ने एयर इंडिया के इस उल्लंघन को बेहद गंभीर माना है। एनडीटीवी के मुताबिक इसे एयरलाइन की कैजुअल अप्रोच बताया गया है। जानकारी के मुताबिक डीजीसीए ने कहाकि इस तरह के उल्लंघन को लेकर हम बहुत कड़ी कार्रवाई करते हैं। इसलिए जितनी ज्यादा संभव हो सकती थी, उतनी पेनाल्टी लगाई गई है। जब किसी संस्था पर जुर्माना लगाया जाता है तो जिम्मेदार मैनेजर को नोटिस दी जाती है। डीजीसीए ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की है, और एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन को इस चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया है। एयर इंडिया ने क्या कहा डीजीसीए के आदेश का जवाब देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहाकि एयर इंडिया ने 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट किए गए एक घटना से संबंधित डीजीसीए आदेश की प्राप्ति को स्वीकार किया है। सभी पहचाने गए गैप्स को तब से संतोषजनक रूप से संबोधित किया गया है, साथ ही प्राधिकरण के साथ साझा किया गया है। एयर इंडिया अपने संचालन की निष्पक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में अडिग है।  

प्यार या जाल? Valentine’s Day पर बढ़े AI रोमांस फ्रॉड, ‘लैला-मजनू’ स्टाइल ठगी से बचें

नई दिल्ली वैलेंटाइन डे (Valentine's Day) के नजदीक आते ही जहां चारों तरफ प्यार की चर्चा है वहीं साइबर अपराधी भी हनी ट्रैप का जाल बिछाकर सक्रिय हो गए हैं। इस साल सबसे बड़ी चुनौती AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) बनकर उभरी है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि स्कैमर्स अब AI की मदद से इतने असली दिखने वाले प्रोफाइल बना रहे हैं कि एक आम यूजर के लिए धोखे को पहचानना लगभग नामुमकिन हो गया है। AI के जरिए कैसे बुना जा रहा है इश्क का जाल? अब स्कैमर्स केवल फोटो ही नहीं बल्कि आपकी भावनाओं से खेलने के लिए एडवांस्ड तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं: नेचुरल चैटिंग: टेक्स्ट-जनरेशन टूल्स (जैसे ChatGPT) का उपयोग कर स्कैमर्स आपकी भाषा और पसंद-नापसंद के हिसाब से बिल्कुल इंसानी लहजे में बात करते हैं। वॉइस क्लोनिंग: स्कैमर्स सिर्फ एक छोटे ऑडियो सैंपल से किसी की भी आवाज कॉपी कर लेते हैं। आपको लगेगा कि आप अपने पार्टनर से फोन पर बात कर रहे हैं लेकिन वह एक मशीन होगी। डीपफेक वीडियो: वीडियो कॉल पर भी अब भरोसा करना मुश्किल है। डीपफेक के जरिए स्कैमर्स किसी और का चेहरा लगाकर आपसे बात कर सकते हैं। स्कैम पहचानने के Red Flags साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार रोमांस स्कैम में अक्सर ये पैटर्न देखे जाते हैं। इनकी तस्वीरें किसी मॉडल जैसी दिखेंगी और प्रोफाइल एकदम परफेक्ट लगेगा। ये लोग बहुत जल्दी इमोशनल बातें शुरू कर देते हैं और शादी या गहरे रिश्ते के सपने दिखाने लगते हैं। जब भी आप आमने-सामने मिलने की बात करेंगे ये कोई न कोई बहाना (जैसे- दूसरे शहर में नौकरी या विदेश यात्रा) बनाकर टाल देंगे। अंत में बात हमेशा किसी इमरजेंसी, बीमारी या शानदार इन्वेस्टमेंट स्कीम पर आकर रुकेगी। वर्चुअल प्यार के इस दौर में इन तरीकों से अपनी सुरक्षा करें: वीडियो कॉल पर हेड टेस्ट: अगर आपको वीडियो कॉल पर शक हो, तो सामने वाले को अपना सिर चारों तरफ घुमाने या चेहरे के आगे हाथ हिलाने को कहें। अगर वह डीपफेक होगा, तो वीडियो के पिक्सल फट जाएंगे या चेहरा अजीब दिखने लगेगा। निजी जानकारी न दें: अपनी बैंक डिटेल्स, ओटीपी या प्राइवेट फोटोज किसी अजनबी के साथ शेयर न करें। पैसे भेजने से बचें: चाहे कितनी भी बड़ी इमरजेंसी बताई जाए जिस व्यक्ति से आप कभी मिले नहीं हैं उसे एक रुपया भी न भेजें। रिवर्स इमेज सर्च: पार्टनर की फोटो को गूगल पर 'रिवर्स इमेज सर्च' करके देखें कि कहीं वह फोटो इंटरनेट से चुराई गई तो नहीं है।  

पंचशील समझौते के पीछे क्या थी रणनीति? CDS चौहान ने तिब्बत पर खोला राज

बीजिंग चीफ और डिफेंस स्टॉप जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के बीच हुए पंचशील समझौते को लेकर अपनी राय रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1954 में किए गए इस समझौते के तहत भारत ने आधिकारिक रूप से तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार कर लिया था। सीडीएस ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत को लगा कि उत्तरी सीमा के विवाद का निपटारा हो गया है, लेकिन चीन ने इसे केवल एक व्यापारिक समझौता माना। देहरादून में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस अनिल चौहान ने उस समय की परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी चीन का रुख यही था कि यह समझौता केवल व्यापारिक रास्तों के लिए है, इसका सीमा से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद से ही एलएसी आज तक संवेदनशील बनी हुई है। गौरतलब है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और तत्तकालीन चीनी प्रीमीयर झोउ एनलाई के बीच में पंचशील समझौता हुआ था। इसके पांच सिद्धांत थे, जो शांति पूर्ण सहअस्तित्व पर आधारित थे। सीडीएस ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "ब्रिटिश चले गए, उन्हें एक दिन जाना ही था। वह अपने पीछे छोड़ गए यह सीमाएं, अब भारत को तय करना था कि हमारी सीमा कहां है? नेहरू शायद जानते थे कि पूर्व में हमारे पास मैकमोहन जैसी व्यवस्था है, इसके अलावा लद्दाख के कुछ क्षेत्र पर भी हमारा दावा है, लेकिन यहां इन पहाड़ों और दर्रों के बीच में स्तिथि स्पष्ट नहीं थी, इसलिए शायद उन्होंने पंचशील सिद्धांत का रास्ता चुना। तिब्बत हथियाने के बाद क्षेत्र में शांति चाहता था चीन 1950 के दशक का चीन आज के जितना मजबूत नहीं था। लगातार युद्धों के वजह से उसकी हालत भी कमजोर थी। हालांकि इसके बाद भी उसने तिब्बत को हथिया लिया, लेकिन इसके आगे आने की उसकी हिम्मत नहीं थी। ऐसे में वह भी शांति चाहता था। सीडीएस चौहान ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा, "चीनियों के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने हाल ही में तिब्बत को 'मुक्त' किया था। वे ल्हासा और शिनजियांग तक पहुंच चुके थे। यह क्षेत्र उनकी पहुंच से काफी दूर थे। ऐसे में यहाँ स्थिरता बनाए रखना मुश्किल था, ऐसे में वह भी यहां पर शांति चाहते थे।" सीडीएस चौहान ने बताया कि स्वतंत्र भारत भी चीन के रूप में एक मजबूत दोस्त को देख रहा था, और उसके साथ मजबूत संबंध चाहता था। ऐसे में यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बन गया।

तारिक रहमान के सत्ता में आने से बदलेगा भारत-बांग्लादेश समीकरण, हिन्दुओं पर क्या असर?

ढाका पड़ोसी देश की कमान संभालने जा रहे नए नेतृत्व ने 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति की बात कही है, जो काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से प्रेरित बताई जा रही है। पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक दिन पहले (12 फरवरी को) हुए संसदीय चुनावों में तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल की है। कुल 299 में से 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है। इन नतीजों से स्पष्ट है कि तारिक रहमान अब बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। तारिक रहमान ने इन चुनावों में जमात-ए-इस्लामी और छात्रों की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी के गठबंधन को करारी शिकस्त दी है। इस राजनीतिक बदलाव का असर केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पड़ोसी भारत और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भी इसका साफ असर पड़ सकता है। भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद भारत ने चुनाव परिणाम आने से पहले ही बांग्लादेश के नए नेतृत्व को बधाई देकर यह संकेत दिया कि वह संबंधों को फिर से मजबूत करना चाहता है। यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में ठंडापन आ गया था। भारत की नजर में BNP को अक्सर कट्टरपंथी विचारधारा वाली जमात-ए-इस्लामी के मुकाबले ज्यादा लोकतांत्रिक विकल्प माना जाता रहा है। बांग्लादेश फर्स्ट नीति और संतुलन की रणनीति पड़ोसी देश की कमान संभालने जा रहे नए नेतृत्व ने 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति की बात कही है, जो काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से प्रेरित बताई जा रही है। इसका मतलब यह हो सकता है कि बांग्लादेश भारत, चीन और पाकिस्तान, तीनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करेगा। यह भारत के लिए राहत की बात हो सकती है क्योंकि अंतरिम सरकार के दौरान मोहम्मद यूनुस प्रशासन का जोर पाकिस्तान और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाने पर रहा था। ऐतिहासिक तनाव बनाम व्यावहारिक मजबूरी भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4000 किलोमीटर लंबी सीमा, व्यापार, बिजली आपूर्ति और कनेक्टिविटी जैसे मजबूत संबंध हैं। इसलिए दोनों देशों के लिए सहयोग जरूरी माना जाता है, चाहे दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद क्यों न हों। हालांकि बांग्लादेश की नई युवा पीढ़ी में भारत को लेकर संदेह भी बढ़ा है, खासकर तब से जब शेख हसीना भारत में शरण लेकर रह रही हैं। भारत की कूटनीतिक सक्रियता दूसरी तरफ, भारत ने पिछले एक साल में BNP नेतृत्व के साथ संबंध सुधारने की कोशिश तेज की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बीमारी के समय समर्थन जताया था। पिछले साल, जब तारिक की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रही थीं, तो प्रधानमंत्री मोदी ने सबके सामने चिंता जताई और भारत का सपोर्ट ऑफर किया। BNP ने तुरंत शुक्रिया अदा करते हुए इसका जवाब दिया था। कुछ दिनों बाद, खालिदा ज़िया की मौत के बाद, विदेश मंत्री एस जयशंकर 2024 की अशांति के बाद ढाका जाने वाले पहले भारतीय नेता बने और तारिक रहमान से मिले। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पर्सनल लेटर भी उन्हें सौंपा था। PM मोदी ने भेजा बधाई संदेश शुक्रवार को PM मोदी तारिक रहमान को बधाई देने वाले पहले नेताओं में से एक थे। उन्होंने ट्वीट किया, "मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूँ।" साफ है कि पीएम मोदी ने पुराने कड़वे अतीत को पीछे छोड़ते हुए, सावधानी से द्विपक्षीय संबंधों को तेजी से आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए क्या संकेत? हाल के वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं को लेकर चिंता रही है। ऐसे में ये अटलें लगना स्वाभाविक है कि नए नेतृत्व को लेकर हिन्दुओं के लिए क्या संकेत हैं। दरअसल, रहमान ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि धर्म व्यक्तिगत है लेकिन राज्य सभी नागरिकों का है। अगर तारिक रहमान की यह नीति जमीन पर लागू होती है, तो बांग्लादेश के लगभग 8% हिंदू समुदाय के लिए सुरक्षा और भरोसा बढ़ सकता है।

SC का बड़ा आदेश: हिमाचल में इस तारीख तक हर हाल में होंगे पंचायत और निकाय चुनाव

हिमाचल सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को आंशिक राहत देते हुए राज्य में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की अंतिम समय-सीमा 31 मई 2026 तय कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार पूरी चुनाव प्रक्रिया हर हाल में 31 मई तक पूरी की जाए और इसमें किसी तरह की अनिश्चित देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी। इसमें 30 अप्रैल 2026 तक चुनाव संपन्न कराने की समय-सीमा तय की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए चुनाव की अंतिम तारीख 31 मई कर दी, लेकिन यह भी साफ किया कि आरक्षण रोस्टर 31 मार्च 2026 तक हर हाल में अंतिम रूप देकर लागू किया जाए। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अनिश्चित काल तक टाला नहीं जा सकता और प्रशासनिक कठिनाइयों के बावजूद तय समय-सीमा के भीतर चुनाव कराना राज्य की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार ने क्या दलील दीं? सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि इस बार कड़ी सर्दी, भारी बर्फबारी, कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने और दूरदराज जनजातीय इलाकों में आवागमन बाधित रहने के कारण जमीनी स्तर पर चुनाव की तैयारियां समय पर पूरी करना मुश्किल हो रहा था। सरकार ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा तय समय-सीमा में आरक्षण की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं था। राज्य सरकार ने यह भी प्रश्न उठाया कि आपदा जैसी परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों के तहत चुनाव प्रक्रिया को सीमित अवधि के लिए स्थगित करने की कितनी अनुमति है। हालांकि अदालत ने राज्य की दलीलों को सीमित रूप से स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव तय समय के भीतर कराना अनिवार्य है और इन्हें अनिश्चित काल तक टालना उचित नहीं है।अदालत के इस आदेश के बाद अब ध्यान राज्य निर्वाचन आयोग पर रहेगा, जिसे संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 31 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करनी होगी और 31 मई 2026 तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव संपन्न कराने होंगे। जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है। इसके बाद प्रदेश की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके अनुसार एक फरवरी से पंचायतों की सभी शक्तियां प्रशासकों के पास हैं। कार्यकाल पूरा हो चुका है सरकार की अधिसूचना के अनुसार अधिकांश पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो गया है, हालांकि लाहौल-स्पीति जिले के केलांग उपमंडल की पंचायतों, चंबा जिले के पांगी उपमंडल की पंचायतों और कुल्लू जिले की चार ग्राम पंचायतों को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। समय पर चुनाव न हो पाने के कारण यह अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई है। समितियों का गठन किया गया है राज्य सरकार ने पंचायतों के संचालन के लिए समितियों का गठन किया है। इनमें ग्राम पंचायत स्तर पर खंड विकास अधिकारी को अध्यक्ष और पंचायत सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है। पंचायत समितियों और जिला परिषदों में भी संबंधित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों को सदस्य और सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक और वित्तीय कार्य बिना बाधा जारी रह सकें।

‘PMO बने सेवा तीर्थ?’ AAP नेता का हमला, बोले– अब पूजा ही बाकी रह गई है

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर उनकी पूजा करें, PM ऑफिस का नाम सेवा तीर्थ करने पर AAP नेता का तंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ करने पर आप नेता संजय सिंह ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 साल में कोई काम तो नहीं किया है, लेकिन अब अपने कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखकर उन्होंने बता दिया कि वह भगवान का अवतार हैं। लोग नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं और उनकी पूजा करें। आप सांसद ने कहा कि पिछले 12 साल में देश की जनता को ना महंगाई से राहत मिली और ना ही युवाओं को रोजगार मिला है। मोदी जी सिर्फ इमारतें बनवा रहे हैं, लेकिन उन इमारतों में कोई काम नहीं हो रहा है। वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे आप नेता ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि सेवा तीर्थ का मतलब है कि वे भगवान का अवतार हैं, आम इंसान तो हैं नहीं। वो जहां बैठेंगे वहां लोग तीर्थ के रूप में जाएंगे। काम-धाम तो कुछ होना नहीं है। 12 साल हो गया ना 24 करोड़ रोजगार मिला नौजवानों को, ना काला धन आया, ना 15 लाख मिला और ना 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिला। आप सांसद ने कहा कि मोदी जी किस प्रकार से देश की सेवा कर रहे हैं, यह एक बड़ा सवालिया निशान है। बाकी वो अपने आप को अवतार मानते हैं। नॉन बाइलॉजिकल हैं। जहां वो बैठेंगे वह तीर्थ स्थान ही माना जाएगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो समझता हूं कि लोग नारियल लेकर जाएं उनके पास। 12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं सारे मंत्रालयों के लिए एक ही कर्तव्य भवन बनाने के सवाल पर संजय सिंह ने कहा कि कर्तव्य क्या हो रहा है। कर्तव्य भवन बना लीजिए, सेवा तीर्थ बना लीजिए, लोगों से कहिए कि नारियल-अगरबत्ती लेकर आएं, लेकिन काम क्या हो रहा है। काम तो बताइए। आपने हर साल 2 करोड़ नौकरी देने को कहा था, किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कही थी, काला धन आएगा और 15 लाख मिलेगा, आपने कहा था कि 15 अगस्त 2022 तक सबको पक्का मकान मिलेगा। आप नेता ने कहा कि काम क्या हो रहा है। सेवा क्या हो रहा है आपके माध्यम से। क्या कर रहे हैं आप। आप पूंजीपतियों की सेवा कर रहे हैं। बड़े-बड़े लोगों को, अंबानी और अडाणी को करोड़ों कमवा रहे हैं। इमारते बनवाने से थोड़े ही न काम होगा। 12 साल में तो हमें कुछ दिखता नहीं है कि काम हो रहा है। वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं वंदे मातरम् पर उन्होंने कहा कि इससे उनका लेना-देना क्या है। क्या इनके पुरखों ने कभी वंदे मातरम् गाकर जेल काटी है। क्या अंग्रेजों ने कभी उन पर धारा लगाई है। मैंने आरएसएस के चार लोगों के नाम पूछे थे जो वंदे मातरम् गाकर जेल गए थे, आज तक वे नहीं बता सके। वंदे मातरम् से इनका कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, एक नई चीज परोसी जा रही है, ताकि लोग पुरानी चीजें भूल जाएं। वंदे मातरम् आप दिनभर गाते रहिए, हमें कोई परेशानी नहीं है। आप नेता ने सवाल किया कि वंदे मातरम् देश के कितने लोगों को आती है। उन्होंने कहा कि इस देश के 99 प्रतिशत लोगों को पूरा वंदे मातरम् नहीं आती, तो क्या वे देशभक्त नहीं हैं। जो हमारा मजदूर है, रिक्शे वाला है, ऑटो वाला है, क्या वो देशभक्त नहीं है। ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा संजय सिंह ने कहा कि भाजपा का एक काला इतिहास है जो देश के लोगों को जानना चाहिए। भाजपा ने नागपुर के मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा झंडा नहीं फहराया, जो इनकी मातृ संस्था है आरएसएस। दूसरा इनका काला इतिहास है कि 28 दिसंबर 1949 में पांचजन्य में एक लेख छपा है जिसमें राष्ट्र गान जन-मन-गण को मनोरंजन का एक चीज बताया गया है। तो क्या भाजपा अपने पूर्वजों के इन गुनाहों के लिए देश से माफी मांगेगी। आप नेता ने कहा कि ये सब सिर्फ बंगाल के चुनाव के लिए हो रहा है, जिसे देश की जनता को समझ जाना चाहिए।

कश्मीर पर भारत का स्टैंड देख तिलमिलाया पाकिस्तान, US से लगाई मदद की गुहार

इस्लामाबाद संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए भारत के एक मानचित्र ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस मानचित्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारतीय क्षेत्र के भीतर दिखाया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से संपर्क कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। यह घटना पाकिस्तान के लिए भारी शर्मिंदगी का कारण बनी है। मैप के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत हरकत में आते हुए अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक ब्रीफिंग में कहा कि यह चित्रण गलत है और संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के अनुरूप नहीं है। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा, "मैप कुछ हैंडल्स द्वारा लगाया गया था। हमने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया। उन्हें एहसास हुआ कि नक्शा गलत था।" पाकिस्तान का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय मानचित्र, जो पाकिस्तानी और भारतीय क्षेत्रों को अलग करता है, संयुक्त राष्ट्र द्वारा कानूनी रूप से स्वीकृत है। अमेरिका ने हटाया पोस्ट विवाद बढ़ने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने उस पोस्ट को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पूरी तरह से हटा दिया। पाकिस्तान ने इस बात पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका ने आवश्यक सुधार किए। अंद्राबी ने कहा, "हम संतोष व्यक्त करते हैं कि अमेरिकी पक्ष ने हमारे क्षेत्र के कानूनी UN-स्वीकृत मानचित्र को उजागर करने के लिए आवश्यक सुधार किए, जो स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र के रूप में चित्रित करता है, जिसका निपटारा UNSC प्रस्तावों के अनुसार UN-प्रशासित जनमत संग्रह के माध्यम से किया जाना है।" व्यापार समझौते के बीच आया मानचित्र यह घटना तब घटी जब भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले सप्ताह एक व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की, जिसमें टैरिफ को कम स्तर पर रीसेट किया गया। समझौते के विवरण जारी करते समय, USTR कार्यालय ने भारत का एक मानचित्र प्रकाशित किया था जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) सहित पूरे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र को देश का हिस्सा दिखाया गया था। मानचित्र में अक्साई चिन भी शामिल था, जिस पर चीन दावा करता है।