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एलन मस्क का बड़ा कदम: धोखाधड़ी के आरोप में ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट से 134 अरब डॉलर हर्जाना

नई दिल्ली   टेस्ला के सीईओ और एआई कंपनी एक्सएआई के फाउंडर एलन मस्क ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दायर किया है। मस्क ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने गैर-लाभकारी उद्देश्य को छोड़ दिया और माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी करके उनके साथ धोखा किया। एलन मस्क ने इस मामले में 79 अरब डॉलर से लेकर 134 अरब डॉलर तक के हर्जाने की मांग की है। मस्क के वकील ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में इस हर्जाने की जानकारी दी। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब एक संघीय न्यायाधीश ने ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें वे अप्रैल के अंत में होने वाले जूरी ट्रायल से बचना चाहते थे। यह मुकदमा अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के ऑकलैंड शहर में चलेगा। अदालत में दाखिल दस्तावेज के अनुसार, मस्क ने साल 2015 में ओपनएआई की स्थापना में मदद की थी और उस समय 38 लाख डॉलर की शुरुआती राशि दी थी। मस्क का कहना है कि आज ओपनएआई की कीमत करीब 500 अरब डॉलर हो चुकी है और उन्हें इस मूल्य का हिस्सा मिलना चाहिए। मस्क के वकील स्टीवन मोलो ने कहा कि जैसे किसी स्टार्टअप में शुरुआती निवेश करने वाला व्यक्ति बाद में बहुत बड़ा मुनाफा कमा सकता है, उसी तरह ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने जो गलत फायदा कमाया है, उस पर अब एलन मस्क का भी हक बनता है। एलन मस्क ने साल 2018 में ओपनएआई के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में अपनी खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी शुरू की। साल 2024 में उन्होंने ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की। मस्क का आरोप है कि सैम ऑल्टमैन ने ओपनएआई को गैर-लाभकारी संस्था से मुनाफे वाली कंपनी में बदलने की योजना बनाई, जो गलत है। हालांकि, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट ने एलन मस्क के सभी आरोपों को गलत बताया है। ओपनएआई ने अपने बयान में कहा कि एलन मस्क का मुकदमा बेबुनियाद है और यह सिर्फ कंपनी को परेशान करने की कोशिश है। कंपनी ने कहा कि वह अदालत में सच साबित करने के लिए तैयार है। ओपनएआई ने निवेशकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, एलन मस्क इस तरह के चौंकाने वाले दावे करते रहेंगे। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। चैटजीपीटी निर्माता ओपनएआई ने अक्टूबर में अपनी कंपनी की संरचना में बदलाव की घोषणा की थी। इसके तहत माइक्रोसॉफ्ट को कंपनी में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई, लेकिन गैर-लाभकारी संस्था का नियंत्रण अभी भी बना रहेगा। सैम ऑल्टमैन ने एलन मस्क के मुकदमे को कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल बताया और कहा कि इसका मकसद सिर्फ एक प्रतिस्पर्धी कंपनी की रफ्तार को धीमा करना है। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई ने गलत तरीके से 65.50 अरब से 109.43 अरब डॉलर तक का फायदा कमाया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट को 13.30 अरब से 25.06 अरब डॉलर तक का लाभ हुआ। एलन मस्क ने यह भी कहा है कि वे सिर्फ नुकसान की भरपाई ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त जुर्माने की मांग भी करेंगे।

सिगरेट-बीड़ी पैकेट पर दिखता है ये नंबर, 1 करोड़ लोग कर चुके हैं कॉल, जानिए क्विट-लाइन का क्या काम है

नई दिल्ली Tobacco Quitline Number: अगर आपने ध्यान से सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू और इससे बने उत्पादों के पैकेट देखा हो तो मालूम होगा कि इन सभी पैकेट्स पर एक नंबर लिखा होता है और इसके पास लिखा होता है क्विट लाइन नंबर. क्या कभी आपने सोचा है कि यह नंबर इन पैकेट्स पर क्यों लिखा होता है और क्या कभी कोई व्यक्ति इस नंबर पर कॉल भी करता है, और अगर कॉल करता भी है तो उसका क्या फायदा होता है? नहीं! तो आइए जानते हैं.. दिल्ली के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (VPCI) के डायरेक्टर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर दर्ज यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत नेशनल टोबैको क्विट हेल्पलाइन (1800-112-356) नंबर है जो तंबाकू छोड़ने में लोगों की मदद करता है. यह टोल फ्री नंबर है, जिस पर अगर कोई व्यक्ति कॉल करता है तो वह कॉल तुरंत काउंसलर्स के पास जाती है और फिर आगे का काम ये काउंसलर्स करते हैं. ये लोग तंबाकू छोड़ने का मन बना चुके लोगों की लगातार काउंसलिंग करते हैं और 9 महीने तक फॉलोअप करते हैं. वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट डे के मौके पर प्रोफेसर राजकुमार ने बताया कि अस्पताल की इस हेल्पलाइन पर अभी तक 1 करोड़ लोग फोन कर चुके हैं. इनमें से 6 लाख लोग ऐसे थे, जिन्हें तंबाकू छोड़ने के लिए काउंसलिंग दी गई और इनमें से करीब 35 फीसदी लोग तंबाकू छोड़ पाए. तंबाकू छोड़ने वाले लोगों में बीड़ी-सिगरेट या बिना धुएं वाला तंबाकू छोड़ने वाले सभी लोग शामिल हैं. वे कहते हैं कि यह देश की सबसे प्रभावी तंबाकू क्विट हेल्पलाइन है लेकिन लोगों को इसके बारे में नहीं पता. सबसे बड़ी बात है कि यह हर उस उत्पाद पर मौजूद है जिसमें तंबाकू है. शुरुआत में यह सेवा VPCI से शुरू की गई थी, लेकिन इसकी सफलता के बाद इसके तीन आउटरीच सेंटर बेंगलुरु के निमहांस, मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट और गुवाहाटी के रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट में खोले गए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को और कई भाषाओं में मदद मिल सके. कब से कब तक काम करता है यह क्विट लाइन नंबर यह हेल्पलाइन नंबर सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक काम करता है. सोमवार को यह बंद रहता है. फिलहाल यह 15 भारतीय भाषाओं में काउंसलिंग की सुविधा देती है.इसकी पहचान बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि हेल्पलाइन नंबर सभी तंबाकू उत्पादों पर छापा जाए. ऐसे में जब भी कोई व्यक्ति तंबाकू का पैकेट उठाता है और छोड़ने के बारे में सोचता है, तो मदद का नंबर उसे वहीं मिल जाता है. कब शुरू हुई क्विटलाइन प्रोफेसर कुमार ने बताया कि यह क्विटलाइन 2016 में शुरू की गई थी. इसमें सिर्फ फोन पर काउंसलिंग ही नहीं दी जाती बल्कि बल्कि यह व्यक्ति के तंबाकू छोड़ने के पूरे सफर में उसके साथ रहती है और लगातार 7 दिन, 1 महीना, 3 महीने और 9 महीने तक फॉलोअप करती है और यही चीज इसे सफल बनाती है.

किसानों के लिए सरकार का बड़ा कदम, 2024-25 वित्त वर्ष में 834.64 लाख टन उर्वरक की उपलब्धता

नई दिल्ली   सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश में उर्वरकों की जरूरत लगभग 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) आंकी गई थी, जिसके मुकाबले सरकार ने करीब 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरक उपलब्ध कराए।  सरकार ने कहा कि किसानों की खेती से जुड़ी जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए 2024-25 में रिकॉर्ड मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि यह अतिरिक्त उपलब्धता किसानों की मदद करने और देशभर में खेती का काम बिना रुकावट चलाने के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाती है। सरकार के मुताबिक, यह सफलता रेलवे, बंदरगाह प्राधिकरण, राज्य सरकारों और उर्वरक कंपनियों के आपसी तालमेल से संभव हो पाई।सरकारी बयान में कहा गया कि भारतीय रेलवे ने उर्वरक ढुलाई को प्राथमिकता दी, जिससे उर्वरक तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सके। वहीं, बंदरगाहों पर आयात किए गए उर्वरकों को जल्दी उतारा गया और आगे भेजने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही सरकार ने भंडारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया, ताकि उर्वरक सही समय पर किसानों तक पहुंच सकें।सरकार ने उर्वरक कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कीं, मांग और आपूर्ति पर लगातार नजर रखी और जहां भी समस्या आई, उसे तुरंत दूर किया। इन पहले से की गई तैयारियों की वजह से देश के किसी भी हिस्से में उर्वरकों की कमी नहीं हुई। सरकार के अनुसार, इसी निरंतर और मिलकर किए गए प्रयासों से पूरे देश में 2024-25 के दौरान रिकॉर्ड उर्वरक उपलब्धता हासिल हुई। इसी बीच, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सर्दी के मौसम में रबी फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल इसी समय 626.64 लाख हेक्टेयर था। इस तरह रबी फसलों की बुवाई में 17.65 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुवाई क्षेत्र बढ़ने से फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। आंकड़ों के अनुसार, दलहनी फसलों का क्षेत्र 3.74 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि चना की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

8वां वेतन आयोग: जानें, लेवल 1 से 18 तक कर्मचारियों की सैलरी में क्या बढ़ोतरी हो सकती है

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग की मंजरी मिलने के बाद कमर्चारी यह जानने की उत्‍सुक हैं कि उनकी सैलरी कितनी बढ़ जाएगी. हालांकि अभी तक 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी स्‍ट्रक्चर या सैलरी बढ़ोतरी के बारे में कोई अधिकार‍िक जानकारी सामने नहीं आई है, सिर्फ एक्‍सपर्ट्स कैलकुलेशन के माध्‍यम से अनुमान लगाया जा रहा है कि कि 8वां वेतन आयोग के तहत कितनी सैलरी बढ़ सकती है. आइए जानते हैं ग्रुप A, B, C और D लेवल के कर्मचारियों की कितनी सैलरी बढ़ सकती है .  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति इसे तय करेगी. इसे बाद केंद्र सरकार इसकी समीक्षा करेगी और यह पूरी प्रक्रिया 2027 की दूसरी छमाही तक पूरा होने की उम्‍मीद है.  कितनी रह सकता है फिटमेंट फैक्‍टर?  एक्‍सपर्ट्स की राय है कि 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्‍टर 1.70 से 2.86 के बीच रह सकता है और इसे सभी लेवल के कर्मचारियों पर एक समान तौर पर लागू किया जा सकता है. उनका कहना है कि समान फिटमेंट फैक्टर से सभी कर्मचारियों को बराबर लाभ मिलता है, लेकिन उच्च पदों पर रुपये में बढ़ोतरी अधिक होती है.  किसकी कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?  2.15 फिटमेंट फैक्टर पर सैलरी बढ़ोतरी      लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए ₹18,000 से ₹38,700 यानी कि कुल ₹20,700 की बढ़ोतरी हो सकती है.     लेवल 10 के कर्मचारियों के लिए ₹56,100 से  ₹1,20,615 यानी कि ₹64,515 की बढ़ोतरी हो सकती है.      लेवल 18 के कर्मचारियों के लिए ₹2,50,000 से ₹5,37,500  यानी कि ₹2,87,500 की बढ़ोतरी हो सकती है.  2.86 फिटमेंट फैक्टर पर संभावित सैलरी      लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए ₹18,000 से ₹51,480 यानी ₹33,480 का इजाफा होगा.      लेवल 3 के कर्मचारियों के लिए ₹21,700 से बढ़कर ₹62,062 यानी ₹40,362 का इजाफा होगा.      लेवल 6 के कर्मचारियों के लिए ₹35,400 से बढ़कर  ₹1,01,244 यानी ₹65,844 का इजाफा होगा.      लेवल 10 के कर्मचारियों के लिए ₹65,844 से बढ़कर ₹1,60,446 यानी ₹1,04,346 का इजाफा होगा.  1.7 फिटमेंट फैक्टर पर निचले कर्मचारियों की सैलरी     लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹30,600      लेवल 3 के कर्मचारियों के लिए सैलरी ₹21,700 से बढ़कर ₹36,890     लेवल 6 के कर्मचारियों के लिए सैलरी ₹35,400 से बढ़कर ₹60,000  

बांग्लादेश चुनाव प्रचार में विवाद: ‘हिंदुओं को वोट देना जायज नहीं’, कट्टरपंथियों के उकसाने वाले बयान

ढाका  बांग्लादेश पिछले साल 11 दिसंबर को चुनाव का ऐलान होने के बाद से ही हिंसा का एक नया चरण शुरू हो गया है. उस्मान हादी नाम के एक युवा नेता के ऊपर हमले और 18 दिसंबर को उसकी मौत के बाद से यह और भी बढ़ गया. यह 2024 में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद नए प्रकार का वायलेंस है, जिसमें अल्पसंख्यक खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 45 दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की 15 घटनाएं हो चुकी हैं. शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से यह देश में पहला चुनाव है, जो 12 फरवरी को होगा. इसे लेकर कट्टरपंथी बयान भी सामने आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बांग्लादेश के कुछ मौलवी और सार्वजनिक वक्ता हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हुए दिखाई दे रहे हैं.  देश के आम चुनावों से पहले मतदाताओं से हिंदू या गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों का समर्थन न करने की अपील कर रहे हैं. ऐसे ही एक वीडियो में, कोई मौलवी, किसी टॉक शो के दौरान किसी सवाल का जवाब दे रहा है, जिसमें उससे पूछा जाता है कि क्या हिंदू को वोट दिया जा सकता है. इस पर मौलवी कहता है कि हिंदू को वोट देना जायज नहीं है. किसी भी काफिर को वोट देना इस्लाम में हराम है. ऐसा करना कुफ्र को बढ़ावा देना है.   एक और क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें, मौलवियों को हिंदू धार्मिक स्थलों और संस्थानों के खिलाफ खुली धमकियां देते हुए सुना जा सकता है. वह मंच पर खड़े होकर कहता है, “बांग्लादेश में मंदिरों का नष्ट होना तय है, उनकी मूर्तियों का नष्ट होना तय है. कोई भी हिंदू बांग्लादेश में नहीं रह सकता, कोई भी इस्कॉन (ISKCON) नहीं रह सकता. दिल्ली के दलालों को दिल्ली वापस चले जाना चाहिए.” बांग्लादेश में इस्कॉन की बांग्लादेश में अच्छी खासी मौजूदगी है. शेख हसीना की सरकार जाने के बाद, इसके मंदिरों पर हमला किया गया था और पुजारियों को भी निशाना बनाया गया था.  प्रभात खबर इस वीडियो की पहचान या प्रसारण की तारीख की पुष्टि नहीं कर सका कि ये कब के हैं. क्या यह चुनाव के समय के हैं, या पहले के. हालांकि ये वायरल अभी ही हो रहे हैं. ये वीडियो ऐसे समय सामने आए हैं जब हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की गई हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला सामने आई है, जिस पर नई दिल्ली और मानवाधिकार संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं. बांग्लादेश में पिछले लगभग 1 महीनें 5 हिंदुओं की मौत बांग्लादेश में चुनावों की घोषणा के बाद से बीते कुछ हफ्तों में कम से कम पांच हिंदू पुरुषों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हत्या हुई है. हालिया घटनाओं में, उत्तर-पश्चिमी बांग्लादेश के नाओगांव जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार की मौत हो गई, जब वह चोरी का आरोप लगाने वाली भीड़ से बचने के लिए एक नहर में कूद गया. 5 जनवरी को पलाश उपजिला में हत्या किए गए 40 वर्षीय किराना दुकानदार मणि चक्रवर्ती. उसी दिन जेसोर में गोली मारकर हत्या किए गए 38 वर्षीय आइस फैक्ट्री मालिक और दैनिक बीडी खबर के कार्यवाहक संपादक राणा प्रताप बैरागी. अमृत मंडल नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई, जिस पर उगाही करने का आरोप लगाया गया था. 50 वर्षीय खोकन चंद्र दास, जिन्हें 31 दिसंबर को काटकर मार डाला गया और आग लगा दी गई थी, बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई. वहीं इससे पहले, 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की बेरहमी से लिंचिंग की गई थी. इन मौतों के अलावा कई घरों को आग भी लगाई गई. भारत ने सख्ती से निपटने की की मांग की भारत ने इन हत्याओं के बाद बांग्लादेश से देश में सांप्रदायिक घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने का आग्रह किया है. नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा किए जा रहे बार-बार के हमलों के एक बेहद चिंताजनक पैटर्न को लगातार देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से तेजी और सख्ती से निपटा जाना चाहिए. जायसवाल ने इस महीने यह भी कहा कि इन मामलों की उपेक्षा केवल अपराधियों को और साहस देती है तथा अल्पसंख्यकों के बीच भय और असुरक्षा की भावना को गहरा करती है. इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है. ब्रिटेन में भी उठी कार्रवाई की मांग ब्रिटेन सरकार ने बांग्लादेश में हो रही हर प्रकार की हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए वहां शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और भरोसेमंद चुनाव कराने की अपील की है. बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की हत्याओं का मुद्दा ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में उठाया गया. विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने गुरुवार को संसद में बयान देते हुए लेबर पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करे और यह सुनिश्चित करे कि फरवरी में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों. ब्रिटिश हिंदुओं के लिए बने सर्वदलीय संसदीय समूह (APPG) के अध्यक्ष ब्लैकमैन ने सांसदों से कहा कि हिंदुओं की हत्याओं और उनके मंदिरों को जलाए जाने की “डरावनी और भयावह स्थिति” ने उन्हें गहरे तौर पर झकझोर दिया है. उन्होंने कहा कि सड़कों पर खुलेआम हिंदुओं की हत्या की जा रही है, उनके घरों को आग के हवाले किया जा रहा है, मंदिरों को जलाया जा रहा है और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार हो रहा है. जनमत संग्रह पर भी उठाए सवाल ब्लैकमैन ने यह भी कहा कि अगले महीने तथाकथित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की बात कही जा रही है, जबकि बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी अवामी लीग को इन चुनावों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार उसे लगभग 30 प्रतिशत जनता का समर्थन हासिल है. उन्होंने आगे कहा कि इसी दौरान इस्लामी चरमपंथी समूहों ने एक जनमत संग्रह कराने का आह्वान किया है, जिससे बांग्लादेश के संविधान में स्थायी और … Read more

बांग्लादेश में हिंदू रिपन साहा की गाड़ी से रौंदकर हत्या, हत्यारा तारिक रहमान की पार्टी से जुड़ा

ढाका   बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या का सिलसिला रुक ही नहीं रहा है. शुक्रवार को राजबाड़ी जिले के सदर उपजिले में एक हिंदू युवक को फिर धर्म आधारित हत्या का शिकार होना पड़ा. वो पेट्रोल पंप पर काम करता था और उसने जब फ्यूल के पैसे मांगे तो एक कार चालक ने जानबूझकर उसे कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान 30 वर्षीय रिपन साहा के रूप में हुई है. रिपन साहा राजबाड़ी के गोलांदा मोड़ के पास स्थित करीम फिलिंग स्टेशन में काम करता था. बताया जा रहा है कि एक काली लैंड क्रूजर कार ने पेट्रोल भरवाने के बाद पैसे दिए बिना वहां से निकलने की कोशिश की. जब रिपन साहा ने कार को रोककर पेट्रोल के पैसे मांगे, तो चालक ने जानबूझकर गाड़ी आगे बढ़ा दी और उसे कुचल दिया. इस हमले में रिपन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आरोपी वाहन लेकर फरार हो गए. जान-बूझकर हिंदू को कुचला राजबाड़ी सदर थाने के प्रभारी अधिकारी खोंदकार जियाउर रहमान ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हत्या है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और उसके मालिक अबुल हाशेम को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की राजबाड़ी जिला इकाई का पूर्व कोषाध्यक्ष बताया जा रहा है. वहीं, वाहन चालक कमाल हुसैन को भी हिरासत में ले लिया गया है. पुलिस अधिकारी ने कहा कि पीड़ित कार के सामने खड़ा था क्योंकि पेट्रोल का भुगतान नहीं किया गया था. उसी दौरान उसे कुचल दिया गया और आरोपी फरार हो गए. इस मामले में हत्या का केस दर्ज किया जाएगा. BNP के राज में भी होगी हिंदुओं की हत्या? यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की एक और कड़ी मानी जा रही है.पिछले एक महीने में यह ऐसी दसवीं हत्या है. इससे पहले इसी सप्ताह फेनी जिले के डागनभुइयां उपजिला में एक अन्य हिंदू युवक समीर दास की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी. 27 साल के ऑटो-रिक्शा चालक का शव सोमवार को एक खेत से बरामद किया गया था. इन घटनाओं को लेकर भारत ने 9 जनवरी को गहरी चिंता जताई थी और कहा था कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर नजर बनाए हुए है. भारत ने उम्मीद जताई थी कि बांग्लादेश सरकार इस तरह की साम्प्रदायिक हिंसा पर सख्त कार्रवाई करेगी. हालांकि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरम सरकार इस पर कोई कदम नहीं उठा रही है. अब रिपन दास की हत्या में बीएनपी के नेता का हाथ होने के बाद सवाल ये भी उठ रहा है कि बांग्लादेश की आने वाली सरकारों में भी हिंदुओं का यही हाल रहेगा?

पाकिस्तान में दर्दनाक सड़क हादसे: बलूचिस्तान और पंजाब में 23 की मौत, कई घायल

इस्लामाबाद   पाकिस्तान के बलूचिस्तान और पंजाब प्रांत में दो अलग-अलग हादसों में कम से कम 23 लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं ने पूरे पाकिस्तान में सड़क सुरक्षा, तेज रफ्तार और खराब विजिबिलिटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पहला हादसा बलूचिस्तान में ग्वादर के पास हुआ। मकरान कोस्टल हाईवे पर एक पैसेंजर गाड़ी के पलट जाने से नौ लोगों की जान चली गई और 36 दूसरे घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, यह हादसा ओरमारा के हुद गोथ इलाके के पास हुआ। जिवानी से कराची जा रही पैसेंजर कोच का कंट्रोल खो गया और गाड़ी पलट गई। गाड़ी एक प्राइवेट ट्रांसपोर्ट कंपनी अल उस्मान की थी। कोस्टल हाईवे पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि हादसे की मुख्य वजह तेज रफ्तार थी। एसपी असलम बंगुलजई ने कहा कि ड्राइवर बहुत ज्यादा रफ्तार के कारण गाड़ी पर नियंत्रण नहीं रख पाया, जिसकी वजह से यह जानलेवा हादसा हुआ। घटना के तुरंत बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और घायलों को ओरमारा तहसील हॉस्पिटल पहुंचाया। हॉस्पिटल के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस घटना में कई घायल यात्रियों की हालत गंभीर है। इसकी वजह से अनुमान लगाया जा रहा है कि मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है। पुलिस ने कहा कि आगे की जांच चल रही है और ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट कंपनी के बारे में जानकारी इकट्ठा की जा रही है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती ने जानमाल के नुकसान पर गहरा दुख जताया और दुखी परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने ग्वादर के डिप्टी कमिश्नर को घायलों को सबसे अच्छा मेडिकल इलाज दिलाने का निर्देश दिया और शवों को पीड़ितों के इलाकों तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सेवा देने का आदेश दिया। एक अन्य मामले में पंजाब के सरगोधा जिले में घने कोहरे के बीच एक मिनी-ट्रक के सूखी नहर में गिरने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा कोट मोमिन तहसील में घालापुर बांग्ला के पास हुआ, जहां बहुत कम विजिबिलिटी के कारण गाड़ी सड़क से उतर गई। बचाव अधिकारियों ने कहा कि सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बाकी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सात ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के समय 23 लोग ट्रक में इस्लामाबाद से फैसलाबाद एक अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे। कोहरे की वजह से मोटरवे बंद होने के कारण, ड्राइवर ने लोकल रास्ता चुना था। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जो सभी इस्लामाबाद के रहने वाले थे। रेस्क्यू टीम ने राहत अभियान चलाया और शवों और घायलों को टीएचक्यू अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद अधिकारियों ने खराब मौसम में सावधानी बरतने और ट्रैफिक सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने की बात दोहराई। –

रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत, पांच नई अमृत भारत ट्रेनों का शेड्यूल जारी, इन सुविधाओं का मिलेगा फायदा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने नए साल के अवसर पर आम जनता को आधुनिक और किफायती यात्रा का बड़ा उपहार दिया है। पूर्व मध्य रेलवे के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीडीडीयू) जंक्शन के रास्ते चलने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के रूट और शेड्यूल गुरुवार रात जारी कर दिए गए। कुल पांच नई ट्रेनों में से तीन इस महत्वपूर्ण जंक्शन से होकर गुजरेंगी, जबकि दो अन्य को अलग रूटों पर चलाया जाएगा। 17 और 18 जनवरी को होगा उद्घाटन इन ट्रेनों का औपचारिक उद्घाटन 17 और 18 जनवरी को प्रस्तावित है। यह पहल विशेष रूप से त्योहारों और छुट्टियों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए की गई है। इससे पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के बीच कनेक्टिविटी न केवल सुगम होगी, बल्कि काफी मजबूत भी हो जाएगी। क्या है अमृत भारत की खासियत? अमृत भारत एक्सप्रेस को 'आम आदमी की ट्रेन' कहा जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसमें इस्तेमाल की गई 'पुश-पुल' तकनीक है। ट्रेन के आगे और पीछे दोनों तरफ इंजन होने के कारण इसकी स्पीड (Acceleration) बेहतर होता है, जिससे समय की बचत होती है। यह एक गैर-वातानुकूलित (Non-AC) ट्रेन है, लेकिन इसमें दी गई कई सुविधाएं इसे खास बनाती हैं। इस पर एक नजर डालते हैं।     झटका मुक्त यात्रा और आरामदायक सीटें।     हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग पॉइंट।     सुरक्षा के लिए आधुनिक सीसीटीवी कैमरे।     स्वच्छ और आधुनिक डिजाइन के शौचालय। इन रूटों व स्टेशनों से होगी अमृत भारत ट्रेन की शुरुआत     1. हावड़ा-आनंद विहार अमृत भारत एक्सप्रेस     2. सियालदह-बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस     3. पनवेल-अलीपुरद्वार अमृत भारत एक्सप्रेस     4. डिब्रूगढ़-गोमतीनगर अमृत भारत एक्सप्रेस     5. कामाख्या-रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस (इसका उद्घाटन 18 जनवरी को होगा)  

प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा बयान: भाजपा सरकार बनते ही घुसपैठियों पर होगा कड़ा एक्शन

मालदा  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदा टाउन से कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीएम ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर जोरदार हमला बोला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "…देश के प्रधान सेवक के रूप में मैं बंगाल के लोगों की पूरी ईमानदारी से सेवा का प्रयास कर रहा हूं, मैं चाहता हूं कि बंगाल के हर बेघर के पास अपना पक्का घर हो… लेकिन ऐसा नहीं हो रहा, यहां की TMC सरकार बहुत ही निर्दयी है, केंद्र सरकार गरीबों के लिए जो पैसा भेजती है उसे यहां TMC के लोग लूट लेते हैं। TMC के लोग बंगाल के गरीबों के दुश्मन हैं, उन्हें आपकी तकलीफों की चिंता नहीं है, वे अपनी तिजोरी भरने में जुटे हैं।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं चाहता हूं कि देश के बाकी राज्यों की तरह बंगाल के लोगों को भी 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिले यहां आयुष्मान भारत योजना लागू हो लेकिन आज बंगाल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां यह योजना लागू नहीं होने दी गई… ऐसी पत्थर दिल सरकार, ऐसी निर्मम सरकार, ऐसी सरकार की बंगाल से विदाई जरूरी है।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भाजपा ने पूरे देश में सुशासन और विकास का नया मॉडल विकसित किया है, आज पूरे देश में जनता इसे अपना आशीर्वाद दे रही है। कल ही महाराष्ट्र में शहरी निकाय चुनाव के नतीजे आए हैं जिसमें भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है, खासतौर पर महाराष्ट्र की राजधानी और दुनिया के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक BMC में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड विजय मिली है। कुछ दिन पहले तिरुवनंतपुरम में भी पहली बार भाजपा के मेयर बने हैं यानि जहां कभी भाजपा के लिए चुनाव जीतना असंभव माना जाता था वहां भी आज भाजपा को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है, यह दिखाता है कि देश का वोटर, देश की जेन Z भाजपा के विकास मॉडल पर कितना विश्वास करती है। मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि इस बार बंगाल के लोग भी भाजपा को भारी बहुमत से विजय बनाएंगे।" मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "आज हमारा देश 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। विकसित भारत के निर्माण के लिए पूर्वी भारत का विकास बहुत जरूरी है। पूर्वी भारत को दशकों तक नफरत की राजनीति करने वालों ने जकड़ कर रखा था। भाजपा ने इन राज्यों को नफरत की राजनीति करने वालों के चंगुल से मुक्त किया है… पूर्वी भारत के राज्यों का विश्वास अगर किसी के साथ है तो उस पार्टी का नाम है भाजपा।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "ओडिशा में पहली बार भाजपा ने सरकार बनाई है, त्रिपुरा ने भाजपा पर विश्वास किया है, असम ने भी बीते चुनाव में भाजपा को ही समर्थन दिया है और कुछ दिन पहले बिहार में भी एक बार फिर भाजपा-NDA की सरकार बनी है यानि बंगाल की हर दिशा में भाजपा के सुशासन की सरकार है। अब बंगाल में सुशासन की बारी है, इसलिए मैंने बिहार चुनाव की जीत के बाद ही कह दिया था कि अब बंगाल में भी विकास की गंगा बहेगी और भाजपा यह काम करके रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कुछ देर पहले पश्चिम बंगाल से जुड़े कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ है, नई रेल सेवाएं पश्चिम बंगाल को मिली है, इन परियोजनाओं से यहां के लोगों के लिए यात्रा आसान होगी और व्यापार-कारोबार में भी आसानी होगी…आज से भारत में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत हो रही है। यह नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रा को और आरामदायक बनाएगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "मालदा वह जगह है जहां प्राचीन ज्ञान की गूंज है, राजनीति और संस्कृति की चेतना है, मालदा बंगाल की समृद्धि का एक बड़ा केंद्र रहा है। मैं सबसे पहले बंगाल के महान सपूत सुवेंदु शेखर रॉय को नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही। आज भी मालदा अपने रेशम, लोक संगीत और बौद्धिक चेतना की वजह से जाना जाता है। 

इंडोनेशिया का रक्षा पैंतरा: भारत से ब्रह्मोस और पाकिस्तान से JF-17, मुस्लिम देशों में डिमांड में तेजी

नई दिल्ली हाल के दिनों में पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट्स की मांग मुस्लिम देशों में तेजी से बढ़ रही है. यह जेट पाकिस्तान और चीन द्वारा मिलकर बनाया गया है। लीबिया के साथ 4 अरब डॉलर का सौदा, सूडान के साथ 1.5 अरब डॉलर का करार और सऊदी अरब के साथ 4 अरब डॉलर की बातचीत चल रही है. इसके अलावा बांग्लादेश, अजरबैजान और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि इतनी जल्दी क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का प्रभाव कम हो रहा है और यह उसका असर है.  JF-17 जेट की क्यों हो रही है इसकी बिक्री? JF-17 थंडर एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान की पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) और चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री ग्रुप ने साथ मिलकर विकसित किया है. यह जेट सस्ता, रखरखाव में आसान और आधुनिक हथियारों से लैस है. पाकिस्तान इसे 'मुस्लिम दुनिया' के आधे हिस्से को बेचने की कोशिश कर रहा है.     लीबिया का सौदा: 4 अरब डॉलर में JF-17 जेट्स खरीदने का समझौता.     सूडान का करार: 1.5 अरब डॉलर का डील.     सऊदी अरब की बातचीत: 4 अरब डॉलर की संभावित डील.     अन्य देशों की रुचि: बांग्लादेश, अजरबैजान और इंडोनेशिया भी JF-17 खरीदने पर विचार कर रहे हैं. ये सौदे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हैं. चीन की हथियार निर्यात रणनीति को मजबूत करते हैं. अमेरिका का प्रभाव क्यों कम हो रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार, ये सौदे अमेरिका के घटते प्रभाव को दिखाते हैं. पहले सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश अमेरिकी सुरक्षा प्रणाली पर निर्भर थे. लेकिन अब वे विकल्प तलाश रहे हैं. चीनी जेट्स, पाकिस्तानी उत्पादन लाइन और वैकल्पिक हथियार सप्लाई चेन से अमेरिका के दबाव के पॉइंट कम हो जाते हैं. अगर अमेरिका सख्त कदम उठाता है, तो ये देश चीन और पाकिस्तान की तरफ और ज्यादा झुक सकते हैं. इसी वजह से अमेरिका संयम बरत रहा है. कूटनीति पर जोर दे रहा है. एक उदाहरण है ट्रंप प्रशासन का ईरान पर हमला न करने का फैसला, जिसमें खाड़ी देशों का दबाव काम आया. यह पूर्व और पश्चिम के बीच क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई का हिस्सा है. इंडोनेशिया का मामला: JF-17 की रुचि और ब्रह्मोस सौदा भारत के लिए सबसे चिंता की बात इंडोनेशिया है. इंडोनेशिया भारत से 450 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा अंतिम चरण में है, लेकिन साथ ही वह पाकिस्तान से JF-17 जेट्स खरीदने पर विचार कर रहा है. पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री सजाफरी सजामसोद्दीन और पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू के बीच बैठक हुई. पाकिस्तान ने 40 JF-17 जेट्स की पेशकश की. इंडोनेशिया पाकिस्तानी कॉम्बैट ड्रोन भी खरीदने पर सोच रहा है. भारत इंडोनेशिया को दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ महत्वपूर्ण साझेदार मानता है. ऐसे में पाकिस्तान और चीन से जुड़े प्लेटफॉर्म खरीदना भारत के लिए चिंता का विषय है. इससे द्विपक्षीय विश्वास कम हो सकता है. क्षेत्रीय सुरक्षा जटिल हो सकती है. बांग्लादेश भी पाकिस्तान से JF-17 पर बात कर रहा है, जो क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती पहुंच दिखाता है. ब्रह्मोस मिसाइल क्यों है महत्वपूर्ण? ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है. इसकी रेंज 300 किमी है. स्पीड मैक 3 से ज्यादा. यह रैमजेट इंजन से चलती है. फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम है, मतलब लॉन्च करने के बाद खुद टारगेट को हिट करती है. पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ब्रह्मोस ने अहम भूमिका निभाई. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI जेट्स से 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं. इनसे पाकिस्तान के 12 में से 11 प्रमुख एयरबेस (जैसे चकलाला, रफिकी, सरगोधा आदि) को नुकसान पहुंचा. रडार, कमांड सेंटर, गोला-बारूद डिपो और रनवे तबाह हो गए. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने माना कि हमला अप्रत्याशित था. यह मिसाइल भारत की आक्रामक रणनीति का गेम-चेंजर है. इंडोनेशिया इसे खरीदकर अपनी समुद्री रक्षा मजबूत करना चाहता है, खासकर नतुना सागर में. फिलीपींस ने 2022 में 375 मिलियन डॉलर में ब्रह्मोस खरीदा और इससे दक्षिण चीन सागर में अपनी स्थिति मजबूत की. भारत की चिंता और आगे क्या? भारत के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडोनेशिया का JF-17 पर विचार ब्रह्मोस सौदे के बीच में गलत संकेत देता है. इससे साझेदारी पर असर पड़ सकता है. नवंबर 2023 में भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों की बैठक में ब्रह्मोस पर प्रगति हुई. सौदा लगभग पूरा है, सिर्फ रूस की मंजूरी बाकी है (रूस की ब्रह्मोस में 49.5% हिस्सेदारी है). इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो 2025 के गणतंत्र दिवस पर भारत आए थे, तब ब्रह्मोस पर चर्चा हुई. इंडोनेशिया को ब्रह्मोस से अपनी सैन्य आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. लेकिन JF-17 की खरीद भारत को सतर्क कर रही है. क्या इंडोनेशिया ब्रह्मोस सौदे पर पीछे हटेगा? या दोनों सौदे साथ चलेंगे? यह समय बताएगा. कुल मिलाकर, यह वैश्विक हथियार बाजार में बदलते संतुलन को दिखाता है, जहां चीन और पाकिस्तान नए विकल्प दे रहे हैं. अमेरिका का एकाधिकार टूट रहा है.