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निकाय चुनावों में NDA का दबदबा, महाराष्ट्र में BJP-शिवसेना-NCP गठबंधन 200 से ज्यादा सीटों पर आगे

मुंबई  महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों के अब तक रुझानों में सत्तारूढ़ महायुति 214 स्थानीय निकायों में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है। इसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 118 निकायों में, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 59 निकायों में और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) 37 निकायों में आगे चल रही है। वहीं, विपक्षी महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) वर्तमान में केवल 49 निकायों में आगे है, जबकि कांग्रेस 32 निकायों में बढ़त बनाए हुए है। बता दें कि 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में से 253 में मतगणना जारी है। गौरतलब है कि भाजपा ने पहले ही तीन सीटें निर्विरोध जीत ली हैं, जिनमें डोंडाईचा नगर परिषद (धुले) और अंगार नगर पंचायत (सोलापुर) के सदस्य व अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए हैं। साथ ही जामनेर नगर पालिका के अध्यक्ष चुनाव में भी कोई विपक्ष नहीं था।   महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में महायुति की 'सफलता' भाजपा संगठन और सरकार के संयुक्त प्रयास का नतीजा है। उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें संगठन और सरकार दोनों शामिल हैं। हमने विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। मैंने सकारात्मक विकास एजेंडे पर आधारित अभियान चलाया और कभी भी किसी राजनीतिक नेता या पार्टी की आलोचना नहीं की। फडणवीस ने आगे कहा कि उन्होंने विकास एजेंडे, अब तक किए गए कार्यों और भविष्य की योजनाओं के आधार पर ही वोट मांगे। लातूर में भाजपा ने 5 में से 4 सीटों पर अध्यक्ष पद जीता महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। लातूर जिले में नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम घोषित हो रहे हैं। यहां भाजपा ने पांच में से चार स्थानीय निकायों में अध्यक्ष पद पर विजय हासिल की है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने उदगीर, अहमदपुर, निलंगा और रेनापुर के स्थानीय निकायों में अध्यक्ष पद जीते, जबकि उसके सहयोगी अजीत पवार की एनसीपी ने औसा की सीट पर कब्जा किया है। इस तरह लातूर जिले में सभी पांच सीटों पर महायुति ने कब्जा कर लिया है। नतीजे और महायुति की जीत तो बस ट्रेलर है उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों में आगे क्या होने वाला है, इसका एक ट्रेलर हैं। शिवसेना के नेता शिंदे ने अपनी सेना के 'स्ट्राइक रेट' की भी सराहना की और कहा कि ये परिणाम हमारी पार्टी द्वारा किए गए अच्छे काम की पुष्टि करते हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ये परिणाम जनता की उस प्रवृत्ति को दर्शाते हैं जो राजनीति से ऊपर विकास को प्राथमिकता देती है। महायुति की जीत महज एक ट्रेलर है। महायुति आगामी नगर निगम चुनावों में भी यही शानदार प्रदर्शन दोहराएगी निकाय चुनाव में पार्टी की जीत पर बधाई महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव 2025 के नतीजों पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी की जीत पर बधाई दी। गडकरी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि भारतीय जनता पार्टी को उसकी शानदार जीत पर हार्दिक बधाई। राज्य भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सभी समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई। उन्होंने आगे कहा कि यह जीत पार्टी कार्यकर्ताओं की है। भाजपा और उसके विकासोन्मुखी कार्यों पर भरोसा जताने के लिए जनता का तहे दिल से धन्यवाद। विपक्ष के 'झूठे प्रचार' को मतदाताओं ने किया खारिज महाराष्ट्र में रविवार को स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने दावा किया कि उनकी पार्टी को निर्णायक जनादेश मिला है। चव्हाण ने कहा कि मतदाताओं ने विपक्ष के 'झूठे प्रचार' को खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि महायुति ने 288 में से 250 से अधिक परिषदों, नगर पंचायतों और नगर परिषदों में जीत हासिल की है। भाजपा के उम्मीदवारों ने 236 में से 134 पार्षद पदों और 3,000 से अधिक पार्षद सीटों पर जीत हासिल की है। चव्हाण ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने तरह-तरह के आरोप लगाए, लेकिन जनता ने उनकी पोल खोल दी। उद्धव ठाकरे ने खुद कहा कि उनके पास जनता को देने के लिए कुछ नहीं था और इसीलिए उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उनकी पार्टी विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए भी दो अंकों में जीत हासिल नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि परिषद, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में मतदाताओं ने विपक्ष के झूठे दावों को खारिज कर दिया है। अब मुंबईवासी भी आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के चुनावों में विपक्ष के दावों को खारिज कर देंगे। दोपहर 3 बजे के मुताबिक रायगढ़ जिले की नगरपालिकाओं में मेयर पद के नतीजे घोषित हो गए हैं। रोहा सीट पर एनसीपी के वनश्री शेगडे मेयर चुनी गई हैं। कर्जत सीट पर एनसीपी की पुष्पा डागड़े और मुरुड सीट पर एनसीपी की आराधना दांडेकर ने जीत हासिल की है। माथेरान सीट पर शिवसेना उम्मीदवार चंद्रकांत चौधरी, महाड से शिवसेना के सुनील कविस्कर, खोपोली में शिवसेना के कुलदीप शिंदे मेयर चुने गए हैं। श्रीवर्धन में शिवसेना यूबीटी के अतुल चोगले, पेण में बीजेपी की श्रीमती प्रीतम पाटिल, अलीबाग में शेतकरी कामगार पक्ष के अक्षया नाइक और उरण सीट पर एनसीपी शरद गुट की भावना घाणेकर ने जीत हासिल की है।  

सोशल मीडिया पर मचा बवाल: क्या अरावली के खत्म होते ही भारत बढ़ेगा रेगिस्तान की ओर? तथ्य बनाम दावा

नई दिल्ली  अरावली को लेकर इस समय काफी बवाल मचा हुआ है, सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोग इसको बचाने की मुहीम चला रहे हैं। इसको लेकर मुहीम चलाने वाले लोगों का कहना है कि पर्वत बोल ही नहीं रहे, बल्कि रो रहे हैं और इंसान से गुहार लगा रहे हैं हमें बचा लो। खनन, अवैध निर्माण और अंधाधुंध विकास ने अरावली को गहरे जख्म दिए हैं। यही वजह है कि आज Save Aravalli, Save Future, अरावली नहीं तो पानी नहीं और रेगिस्तान रोको, अरावली बचाओ जैसे नारे सड़कों से सोशल मीडिया तक गूंज रहे हैं। ये सिर्फ स्लोगन नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों और सैकड़ों जीव-जंतुओं की आवाज़ हैं, जिनका जीवन हवा, पानी और हरियाली के लिए अरावली पर निर्भर है।   अरावली पर्वतमाला चर्चा में क्यों है? ‘ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ अरावली’ के नाम से जानी जाने वाली यह पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसकी कानूनी व्याख्या को लेकर बहस छेड़ दी है। फैसले के अनुसार अब केवल 100 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली के अंतर्गत माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि पहले जो छोटी पहाड़ियां और जंगल इस श्रेणी में आते थे, वे अब इससे बाहर हो सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जमीन का वर्गीकरण केवल ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि रिकॉर्ड, अधिसूचना और जमीनी स्थिति को देखकर तय किया जाएगा। अरावली को लेकर विवाद क्या है? विवाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर नहीं, बल्कि उसके संभावित उपयोग को लेकर है। अदालत का आदेश कानूनी स्पष्टता देता है, लेकिन इसके अमल की जिम्मेदारी अब राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन पर है। इस फैसले से जमीन की व्याख्या करने की ताकत राज्यों के हाथ में आ गई है। आशंका यह है कि जिन क्षेत्रों को पहले जंगल जैसा माना जाता था, उन्हें अब राजस्व भूमि या गैर-वन क्षेत्र घोषित किया जा सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकारें रिकॉर्ड तय करने में कितनी पारदर्शिता और पर्यावरणीय सख्ती अपनाती हैं। अरावली कहां-कहां फैली है? अरावली पर्वतमाला पश्चिमी भारत की एक प्राचीन श्रृंखला है, जो गुजरात के कच्छ से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है। दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में इसकी लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है। यह दो अरब वर्ष से भी अधिक पुरानी मानी जाती है और आज भी कई राज्यों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है। क्या अरावली में वन्य जीव भी रहते हैं? अरावली जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र है। यहां भेड़िया, बंगाल लोमड़ी, कैराकल, धारीदार लकड़बग्घा, सियार सहित कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं। ये पहाड़ियां न केवल इन जीवों का प्राकृतिक आवास हैं, बल्कि भूजल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण और स्थानीय जलवायु संतुलन में भी अहम भूमिका निभाती हैं। दिल्ली-NCR के लिए अरावली क्यों जरूरी है? अरावली भूजल रिचार्ज की प्राकृतिक प्रणाली की तरह काम करती है। शोध के अनुसार, यह हर साल प्रति हेक्टेयर लगभग 20 लाख लीटर भूजल रिचार्ज करने में मदद करती है। इसके अलावा यह थार रेगिस्तान को दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है। यदि अरावली कमजोर होती है, तो दिल्ली-NCR में पानी की कमी बढ़ेगी, कुएं-तालाब सूखेंगे और वायु प्रदूषण व गर्मी का स्तर और बढ़ जाएगा। यह क्षेत्र का प्राकृतिक डस्ट बैरियर और कूलिंग सिस्टम भी है, जिसके बिना ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ और गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों की राय Green Pencil Foundation के संस्थापक सैंडी खांडा के अनुसार, अगर अरावली को नुकसान पहुंचा तो दिल्ली-NCR का भूजल संकट बेहद गंभीर हो जाएगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद और दक्षिण दिल्ली पहले से ही अत्यधिक दोहन झेल रहे हैं। अरावली के खत्म होने से यमुना और अन्य जल स्रोतों पर दबाव और बढ़ेगा। वहीं ‘सेव अरावली ट्रस्ट’ के पदाधिकारी जितेंद्र भड़ाना का कहना है कि नई परिभाषा से अरावली के बड़े हिस्से के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। स्वच्छ हवा, जल संतुलन और पर्यावरण सुरक्षा के लिए इस फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है। दिल्ली का कितना हिस्सा अरावली पर स्थित है? दिल्ली का लगभग 20 से 25 प्रतिशत क्षेत्र अरावली की चट्टानों पर बसा है। दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के महरौली, साकेत, वसंत कुंज और द्वारका के कुछ हिस्से इसी पर्वतमाला का हिस्सा हैं। NCR में गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर और दक्षिण सोनीपत के इलाके भी अरावली से जुड़े हैं। विरोध भी तेज नई परिभाषा को लेकर गुरुग्राम, राजस्थान और उदयपुर में विरोध देखने को मिला है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बेहद प्राचीन पर्वत श्रृंखला है और इसमें किया गया कोई भी बदलाव भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी को लेकर गुरुग्राम में मंत्री राव नरबीर सिंह के आवास पर भी प्रदर्शन हुआ।

भजन पर पाबंदी की कोशिश पड़ी भारी, सिंगर लगनाजिता चक्रवर्ती को रोकने वाला आरोपी गिरफ्तार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की सिंगर लगनाजिता चक्रवर्ती को परेशान करने के आरोप में एक आदमी को गिरफ्तार किया गया है। सिंगर ने आरोप लगाया कि आरोपी महबूब मलिक ने ईस्ट मिदनापुर के भगवानपुर के एक प्राइवेट स्कूल में उनके लाइव शो के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की और उन पर हमला करने की कोशिश की। बंगाली गाने ‘बसंतो एशे गेछे’ से मशहूर हुईं लगनाजिता चक्रवर्ती ने बताया कि वह एक बंगाली धार्मिक गाना, ‘जागो मां’गा रही थीं, तभी मलिक स्टेज पर आया और उसने उन पर शारीरिक हमला करने की कोशिश की। लगनाजिता चक्रवर्ती ने पुलिस शिकायत में कहा, “वह मुझे मारना चाहता था। ” उन्होंने बताया कि वह उन पर चिल्ला रहा था और कह रहा था, “बहुत हो गया जागो मां, अब कुछ सेक्युलर गाना गाओ।” पश्चिम बंगाल के कोलकाता में माता के भजन को लेकर विवाद हो गया। आयोजक ने आपत्ति जताई और कहा कि ‘ई ना चोलबे’। पुलिस ने आरोपी महबूब मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद इलाके में तनाव है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आयोजक का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई है। सीनियर पुलिस अधिकारी मिथुन डे ने बताया कि महबूब मलिक इस इवेंट का मुख्य आयोजक और स्कूल का मालिक था। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि मलिक सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य हैं। BJP के शंकुदेब पांडा ने कहा, “पश्चिम बंगाल जिहादियों के हाथ में है। वे सिंगर को बता रहे हैं कि उसे कौन सा गाना गाना चाहिए। यह हिंदू विरोधी रवैया था।” उन्होंने आरोप लगाया, “जब वह (लगनाजिता चक्रवर्ती) पुलिस स्टेशन गई थीं, तो ममता बनर्जी की पुलिस ने पुलिस शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया।” हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सिंगर ने यह भी आरोप लगाया कि भगवानपुर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अधिकारी ने केस दर्ज करने से मना कर दिया। बाद में केस दर्ज किया गया और मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारी मिथुन डे ने कहा, “भगवानपुर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज और एक और अधिकारी के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच शुरू की गई है। हम उनकी लापरवाही के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”

डिब्रूगढ़ से पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला: असम में बांग्लादेशी घुसपैठ पर कही बड़ी बात, यूरिया प्लांट का लोकार्पण

गुवाहाटी पीएम नरेंद्र मोदी दो दिवसीय असम के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुवाहाटी स्थित ‘स्वाहिद स्मारक क्षेत्र’ में असम आंदोलन के शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद डिब्रूगढ़ में अमोनिया-यूरिया प्लांट का उद्घाटन किया, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 12.7 लाख टन होगी। यह यूनिट 2030 तक चालू हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को खाद के लिए लाठियां खानी पड़ती थीं। जो काम कांग्रेस को उस समय करना था, उसने नहीं किया। इसलिए मुझे एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ रही है। बांग्लादेशी घुसपैठियों को कांग्रेस ने ही बसाया है और कांग्रेस ही उन्हें बचा रही है। SIR का विरोध कर रही है। तुष्टिकरण और वोट बैंक के इस कहर से हमें असम को बचाकर रखना है। मैं आपको गारंटी देता हूं कि असम की पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए भाजपा फौलाद बनकर खड़ी है। इससे पहले पीएम ने गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी में क्रूज पर 25 बच्चों के साथ करीब 45 मिनट परीक्षा पे चर्चा भी की। मोदी ने नामरूप में ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्प लिमिटेड (BVFCL) के मौजूदा परिसर में नए फर्टिलाइजर यूनिट की आधारशिला रखी। ANI के मुताबिक गुवाहाटी दौरे पर परीक्षा पर चर्च कार्यक्रम में भाग लेंगे, जिसमें प्रधानमंत्री ने असम के 25 प्रतिभाशाली छात्रों से बात करेंगे. यह बातचीत ब्रह्मपुत्र नदी में चल रहे एक क्रूज पर आयोजित की जाएगी. असम आंदोलन (1979-1985) ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और ऑल असम गण संग्राम परिषद के नेतृत्व में चला था. इसका मुख्य उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान कर उन्हें राज्य से बाहर करना था. इस आंदोलन के दौरान व्यापक प्रदर्शन, हड़तालें और पुलिस कार्रवाई हुईं, जिसमें सैकड़ों लोग शहीद हो गए. आंदोलन का समापन 1985 में असम समझौते के साथ हुआ, जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हस्ताक्षर किए थे.

ट्रेन से सफर हुआ महंगा! रेलवे ने बढ़ाया किराया, स्लीपर और एसी टिकट के नए दाम देखें

नई दिल्ली  रेल यात्रा करने वालों की जेब अब ज्यादा ढीली होने वाली है। भारतीय रेलवे ने किराए के ढांचे में बदलाव करने का फैसला किया है। ऐसे में जनरल, स्लीपर और एसी श्रेणी में टिकट महंगे हो जाएंगे। रेलवे ने बताया है कि किराये की नई दरें 26 दिसंबर से लागू हो जाएंगी। जानकारी के मुताबिक पैसेंजर ट्रेनों के टिकट के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। मेल, एक्सप्रेस और नॉन एसी कैटिगरी में 2 पैसा प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाया गया है। इस हिसाब से 500 किलोमीटर पर 10 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे।   अनुमान है कि इस बढ़े हुए किराए से रेलवे को 600 करोड़ रुपये का फायदा होगा। जानकारी के मुताबिक 215 किलोमीटर से ज्यादा के सफर के लिए यात्रियों के जनरल ट्रेन में एक पैसा प्रति किलोमीटर ज्यादा देना होगा। वहीं मेल/एक्सप्रेस, स्लीपर और एसी ट्रेन में सफर के लिए 215 किलोमीटर से ज्यादा के सफर पर दो पैसे प्रति किलोमीटर ज्यादा देने होंगे। नॉन एसी कोच में सफर के लिए 500 किलोमीटर के सफर पर 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। रेलवे का कहना है कि निम्न आय वाले परिवारों का ध्यान रखते हुए लोकल ट्रेनों के किराए में बढ़ोतरी नहीं की गई है। रेलवे के मुताबिक पिछले 10 सालों में ट्रेनों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसके अलावा ट्रैक का भी विस्तार किया गया है। सुरक्षा और अच्छे संचालन के लिए ज्यादा कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है। ऐसे में रेलवे पर सैलरी का बोझ भी बढ़ा है। रेलवे का कहना है कि अब मानव संसाधन पर 1.15 लाख करोड़ का खर्च है। इसके अलावा पेंशन का बोझ पहले से है। ऐसे में संतुलन के लिए किराए में वृद्धि जरूरी थी।  

दिव्यांग छात्राओं के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला, कोर्ट ने स्पेशल स्कूल के प्राचार्य को ठहराया दोषी

मुंबई  महाराष्ट्र की एक स्पेशल कोर्ट ने एक दिव्यांग छात्रों के लिए बनाए गए एक स्कूल के पूर्व प्राचार्य और शिक्षक को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई है। प्राचार्य और शिक्षक के ऊपर आरोप थे कि पद पर रहते हुए वह बोलने और सुनने में असमर्थ छात्राओं को अपने ऑफिस में बुलाते थे और फिर उनके साथ यौन उत्पीड़न करते थे। कोर्ट ने शिक्षकों को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए इसे बहुत बड़ा विश्वासघात करार दिया, और आरोपियों के 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई।   विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने फैसला सुनाने के पहले कहा, "स्कूल एक पवित्र संस्था होती है। बच्चे अपने शिक्षक पर भरोसा करते हैं और उन्हें जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं। यदि इस विश्वास के साथ विश्वासघात किया जाए और जब बच्चे के लिए भगवान समान व्यक्ति ही यौन उत्पीड़न करे तो इसमें कोई संदेह नहीं कि पीड़ित जीवन भर के लिए मानसिक आघात झेलेंगे। अदालत ने कहा कि उस स्कूल में सभी नाबालिग लड़कियां थीं, वह सुनने और बोलने में अक्षम थीं। स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों को ही उनके संरक्षण की जिम्मेदारी मिली हुई थी। आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बच्चों की शारीरिक अक्षमता का अनुचित लाभ उठाया। इसके बाद अदालत ने आरोपी 62 वर्षीय लॉर्डु पापी गाड़े रेड्डी (पूर्व प्राचार्य) और 61 साल के दत्तकुमार भास्कर पाटिल को पॉस्को अधिनियम की धारा 10 और भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत दोषी ठहराया। क्या था पूरा मामला? यह पूरा मामला 2013 और 2014 के बीच का था। इसी बीच रेड्डी और भास्कर यहां पर प्राचार्य और शिक्षक के रूप में पदस्थ थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार वह छात्राओं को अपने कक्ष में बुलाते और फिर उन्हें गले लगाकर चूमते थे, जबकि दूसरा शिक्षक उनकी अश्लील तस्वीरें खींचता था और उनके साथ अनुचित तरीके से छेड़छाड़ करता था। इनके यह काले कारनामे करीब दो सालों तक चलते रहे। इसके बाद एक पीड़ित ने इसके बारे में अपने परिजनों को बताया, जिससे यह मामला खुला। एक के सामने आने के बाद बाकी छात्राओं ने भी अपने साथ हुई आपबीती को बताया। क्योंकि यह सभी छात्राओं बोलने में असमर्थ थीं और नाबालिग थीं इसलिए इनके बयान लेते समय भाषा विशेषज्ञों की भी मदद ली गई, जिन्हें अदालत ने ठोस माना। मामले के शुरू होने के कुछ समय के बाद मुख्य शिकायतकर्ता और उसका परिवार अपनी शिकायत से मुकर गया। हालांकि अदालत ने दूसरी छात्राओं के आधार पर इस मुकदमे को जारी रखा। अदालत ने अभिभावकों की भी की आलोचना अदालत ने अपने इस फैसले में माता-पिता और संस्थानों की इस प्रवृ्त्ति की भी आलोचना की कि वह छात्राओं की शिकायतों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर तब जब शिक्षक समाज में ऊंचा दर्जा रखते हों। इस फैसले में अदालत ने प्रत्येक दोषी को पांच साल की सजा के अलावा 25 हजार रुपए का जुर्माना भी भरने का आदेश दिया। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया कि पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए, क्योंकि जुर्माने की राशि पीड़ितों की पीड़ा की भरपाई करने के लिए अपर्याप्त है।  

एक जयशंकर बनाम पूरी दुनिया? सवाल पर विदेश मंत्री का मोदी से जुड़ा जवाब

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते हैं। पुणे में एक कार्यक्रम वैश्विक राजनीति और रणनीति पर बात करते हुए जयशंकर ने भगवान श्री कृष्ण और भगवान हनुमान को दुनिया का सबसे महान रजानयिक बताया। इसी कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत के लिए एक जयशंकर काफी है या फिर हमें और जयशंकर की जरूरत है? इस सवाल का जवाब मुस्कराकर देते हुए जयशंकर ने कहा कि आपका सवाल ही गलत है। विदेश मंत्री ने कहा, "आपका सवाल यह होना चाहिए कि एक मोदी हैं। क्योंकि असली फर्क नेता और उसके विजन, आत्मविश्वास से पड़ता है। देश अपने नेताओं के विजन से पहचाने जाते हैं। उनके उस विजन को अमल में लाने वाले कई लोग होते हैं, लेकिन आखिरकार नेता ही मुख्य होता है।" पुणे बुक फेस्टिवल में पश्चिमी राजनयिकों पर अपनी बात रखते हुए जयशंकर ने महाभारत और रामायण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "ज्यादातर किताबें पश्चिमी लोगों के द्वारा लिखी गई हैं… मैं यह पढ़-पढ़कर थक गया हूं कि वह बहुत रणनीतिक हैं, जबकि भारत के पास रणनीति और राजकौशल की कोई परंपरा नहीं है। हम अपनी आस्थाओं और संस्कृतियों के साथ बड़े हुए हैं लेकिन हम अपने ही शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते… इसलिए दुनिया भी उन्हें नहीं जानती है।" उन्होंने कहा, "आम तौर पर हम महाभारत और रामायण को सत्ता, संघर्ष और परिवार की कहानी मानते हैं। हम इनकी रणनीति, युक्ति और गेम प्लान के बारे में स्पष्ट रूप से सोच नहीं पाते। दरअसल, एक बार जब मुझसे किसी ने पूछा था कि आपके हिसाब से सबसे महान राजनियक कौन हैं, तो मैंने कहा था कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान। इनमें से एक महाभारत के महान राजनयिक हैं, तो दूसरे रामायण के।" गठबंधन के दौर में है दुनिया: जयशंकर वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल को लेकर अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया गठबंधन की राजनीति जैसी है। उन्होंने कहा, "आज किसी के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है। किसी गठबंधन के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं ह। ऐसे में रोज नए समीकरण बनते हैं, सौदे होते हैं, कोई ऊपर होता है, कोई नीचे, हर दिन कोई नया मुद्दा उभरकर सामने आता है। बहुध्रवीय दुनिया कई पार्टियों के जैसी है। कभी आप एक के साथ होते हैं, तो कभी दूसरे मुद्दे पर दूसरे के साथ… लेकिन इस सब बातों के बीच बस एक ही सिद्धांत है… मेरे देश की मदद करना, जो भी मेरे देश के हित में हो, मदद कर रहा हो… बस वही मेरा विकल्प है।"

‘इस्लाम की विचारधारा अमेरिका की स्वतंत्रता के खिलाफ’—तुलसी गबार्ड का बड़ा दावा

एरिजोना अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने इस्लाम की विचारधारा को अमेरिका की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कोई धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा है, जिसका उद्देश्य शरीयत कानून के तहत वैश्विक खिलाफत स्थापित करना है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पश्चिमी लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है। एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए के अमेरिका फेस्ट को संबोधित करते हुए गबार्ड ने कहा कि यह खतरा अब केवल विदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी जड़ें जमा चुका है। उन्होंने कहा, “यह इस्लाम की विचारधारा हमारी आजादी के लिए सीधा खतरा है। यह एक राजनीतिक एजेंडा है, जिसका मकसद वैश्विक खिलाफत और शरीयत आधारित शासन स्थापित करना है।” यूरोप जैसी स्थिति की चेतावनी तुलसी गबार्ड ने चेताया कि यदि अमेरिका ने समय रहते इस विचारधारा को पहचानकर उसके खिलाफ कदम नहीं उठाए, तो देश को यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। तुलसी ने कहा, “अगर हम कार्रवाई नहीं करते और इसे उसके असली रूप में पहचान कर चुनौती नहीं देते हैं तो अमेरिका भी उन देशों की राह पर चला जाएगा। वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लग चुके हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी में क्रिसमस मार्केट्स रद्द किए जा रहे हैं, जबकि ब्रिटेन में लोग सड़क किनारे चुपचाप प्रार्थना करने पर भी गिरफ्तार किए जा रहे हैं। अमेरिका के भीतर कट्टरपंथ के आरोप तुलसी गबार्ड ने दावा किया कि अमेरिका के कई शहरों में कट्टर इस्लाम की मौलवी खुलेआम युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “डियरबॉर्न (मिशिगन) और मिनियापोलिस (मिनेसोटा) जैसे इलाकों में इस्लाम की मौलवी खुलकर इस विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं और युवाओं की भर्ती कर रहे हैं।” उन्होंने पैटरसन (न्यू जर्सी) और ह्यूस्टन (टेक्सास) का भी उल्लेख किया। तुलसी गबार्ड ने कहा कि इस विचारधारा से जुड़े लोग असहमति की आवाजों को दबाने के लिए केवल सेंसरशिप नहीं, बल्कि हिंसा और धमकी का भी सहारा लेते हैं। तुलसी में कहा, “अगर आप अपने ईश्वर-प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हैं, तो वे आपको चुप कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैंष” उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट तक के लिए लोगों को धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने सरकार और समाज से कट्टरपंथी विचारधाराओं के खिलाफ सख्त और स्पष्ट कार्रवाई की अपील की।  

भाजपा के जिक्र के साथ मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘हमें सिर्फ सेवा संगठन समझना भारी भूल’

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों पश्चिम बंगाल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उत्तर बंगाल से कोलकाता पहुंचे भागवत ने साइंस सिटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर आप संघ को समझना चाहते हैं, तो तुलना करने से गलतफहमियां पैदा होंगी। अगर आप संघ को केवल एक अन्य सेवा संगठन मानते हैं, तो आप गलत होंगे। आरसएस प्रमुख ने कहा कि कई लोगों में 'संघ' को भाजपा के नजरिए से समझने की प्रवृत्ति होती है, जो एक बहुत बड़ी गलती है। संघ की स्थापना का सार एक ही वाक्य में है 'भारत माता की जय'। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि अपनी खास संस्कृति, परंपरा और स्वभाव का नाम है। संघ का लक्ष्य इन मूल्यों को बनाए रखते हुए भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए समाज को तैयार करना है। 'संघ को समझाने के लिए इतिहास उदाहरण' भागवत ने साफ किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म किसी राजनीतिक मकसद, प्रतिस्पर्धा या विरोध के लिए नहीं हुआ। उनका कहना था कि संघ पूरी तरह हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए समर्पित है। संघ की भूमिका समझाने के लिए भागवत ने इतिहास का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष भले ही थम गया, लेकिन राजा राम मोहन राय के समय से शुरू हुई समाज सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रही। उन्होंने इसे समुद्र के बीच एक ऐसे द्वीप की तरह बताया, जो समय के साथ मजबूती से कायम रहा। हमें अपने समाज को मजबूत करना है- आरएसएस प्रमुख अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने समाज को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक महान विरासत वाला देश है और उसे वैश्विक नेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि अतीत में हम अंग्रेजों से युद्ध हार गए थे, लेकिन अब वक्त है कि हम अपने समाज को संगठित और सशक्त बनाएं। उनका पूरा भाषण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की सोच और एकजुट हिंदू समाज के साथ समृद्ध भारत के लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

सांस लेना हुआ मुश्किल: जहरीली हवा का कहर जारी, फिलहाल राहत नहीं

नई दिल्ली राजधानी में स्थानीय कारकों के चलते प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में हवा की गति धीमी होने के चलते लगातार छठे दिन भी हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, रविवार सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 393 दर्ज किया गया है। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इससे पहले शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 398 दर्ज किया गया। रविवार को यानी आज हवा के गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुबह आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अलीपुर में एक्यूआई 375, आनंद विहार में एक्यूआई 426, अशोक विहार में 425, आया नगर में 309, बवाना में 439, बुराड़ी में 378, चांदनी चौक इलाके में 448 एक्यूआई दर्ज किया गया है। वहीं, डीटीयू में 433, द्वारका सेक्टर 8 इलाके में 408, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 इलाके में 332, आईटीओ में 393, जहांगीरपुरी में 438, लोधी रोड 357, मुंडका 433, नजफगढ़ में 371, पंजाबी बाग में 420,  आरकेपुरम 394, रोहिणी 433, सोनिया विहार 410, विवेक विहार 413,  वजीरपुर में 443 दर्ज किया गया है। बीते आठ साल में सबसे प्रदूषित रहा दिसंबर दिल्ली में दिसंबर की ठंड के साथ इस बार जहरीली हवा ने भी लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि राजधानी में सांस लेना भी चुनौती जैसा महसूस हो रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि दिसंबर की शुरुआत से ही दिल्ली की हवा लगातार खराब बनी हुई है और पहले 18 दिनों में ही इसने बीते आठ साल की सबसे खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दर्ज किया। महीने की शुरुआत से ही हालात ऐसे रहे कि ज्यादातर दिनों में हवा बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में बनी रही। दिसंबर के पहले आठ दिनों तक लगातार एक्यूआई 300 से ऊपर रहा जिससे पूरे महीने का औसत एक्यूआई करीब 343 तक पहुंच गया। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 14 दिसंबर को एक्यूआई 461 दर्ज किया गया, जो बीते आठ वर्षों में दिसंबर महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। हवा के बिगड़ते हालात को देखते हुए 13 दिसंबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का सबसे सख्त चरण, यानी स्टेज-चार लागू करना पड़ा।