samacharsecretary.com

एमटी सेलेस्टियल जहाज पर भारतीय क्रू मेंबर की मेडिकल वजहों से मौत

 नई दिल्ली मस्कट में भारतीय दूतावास ने शनिवार देर रात बताया कि ओमान के डुक्म पोर्ट पर खड़े जहाज 'एमटी सेलेस्टियल' पर एक भारतीय नागरिक की मेडिकल दिक्कतों के कारण मौत हो गई। दूतावास ने मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के तौर पर की है। दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "मृतक के शव को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।" साथ ही यह भी बताया गया कि उनका शव अभी डुक्म पोर्ट पर मौजूद जहाज पर ही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर के शिपिंग बेड़े में 3,00,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम करते हैं। देश के शिपिंग मंत्रालय के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते बताया था कि मिडिल ईस्ट में 18,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। अमेरिकी हमले में मारे गए थे तीन भारतीय नाविक यह मौत ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही ओमान के पास एक टैंकर पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, जिसकी वजह से जनता और विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की थी। विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे इस हफ्ते के आखिर में होने वाले 'ग्रुप ऑफ सेवन' (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने यह मुद्दा उठाएं। विदेश मंत्रालय ने क्या बताया? भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने "नागरिक शिपिंग के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल पर अपनी गहरी चिंता" जाहिर करने के लिए अमेरिका के 'चार्ज डी'अफेयर्स' (राजनयिक प्रतिनिधि) को तलब किया था। 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बताया कि 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन की 11 जून को मौत हो गई थी। उनका शव बिना सही रेफ्रिजरेशन के दो दिन से ज्यादा समय तक जहाज पर ही रखा रहा। यूनियन ने कहा, "क्रू सदस्य शव को सड़ने से बचाने की कोशिश में ठंडे पानी की बोतलों का इस्तेमाल कर रहे हैं यह एक डरावनी और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी स्थिति है।"

होर्मुज विवाद पर जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से जताई कड़ी आपत्ति

नई दिल्ली ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले कमर्शल शिप को निशाना बनाए जाने और तीन भारतीयों की मौत के बाद अमेरिका के साथ एक बार फिर कहासुनी शुरू हो गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि उन्होंने फोन पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात करके कड़ी आपत्ति जताई है। तो दूसरे ही दिन रूबियो का बयान आ गया कि होर्मुज में नाकेबंदी का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी बीच ईरान में फंसे कुछ नाविकों ने वीडियो जारी करके सवाल किया है कि आखिर भारतीय शिप को ही क्यो निशाना बनाया जा रहा है। भारतीय नाविक क्यों निशाने पर? वीडियो में एक नाविक कहता है, भारतीय नाविकों पर हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, हम लोग ईरान में हैं। सिर्फ भारतीय जहाजों पर हमला हो रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है। हम लोग किसी सेना से तो हैं नहीं। हमें लड़ने की ट्रेनिंग नहीं मिली है। हम केवल देश का बिजनेस बढ़ा रहे हैं। हम कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे हैं। हमारी क्या गलती है। कल एक शिप पर अटैक हुआ। उस शिप पर मैंने काम किया था। कैप्टन साहब से बात की तो उन्होंने बताया कि एक वॉर्निंग दी गई और फिर तुरंत मिसाइल से हमला कर दिया गया। आखिर उनकी क्या गलती थी।   उन्होंने कहा, हम लोगों को बीच में क्यों घसीटा जा रहा है। हम 13 लाख सीफेरर्स हैं। हम एक दूसरे की आवाज उठा सकते हैं। सवाल यह है कि सिर्फ भारतीय नाविकों को ही क्यो निशाना बनाया जा रहा है। बता दें कि अमेरिका ने 24 भारतीय चालक दल वाले एक जहाज पर ओमान तट पर हमला कर दिया था। इसमें तीन नाविकों की मौत हो गई थी और 21 को सुरक्षित निकाला जा सका था। कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला कांग्रेस का कहना है कि भारतीय नाविकों की मौत पर सरकार की प्रतिक्रिया शर्मनाक है। राहुल गांधी ने कहा कि मार्को रूबियो अफसोस जताने की बजाय आदेश देने वाली भाषा बोल रहे हैं। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि अमेरिकी कृत्य को अवैध एवं अस्वीकार्य कहा जाना चाहिए था और उससे माफी की मांग की जानी चाहिए थी। इसको लेकर खेड़ा ने 'एक्स' पर लिखा, "भारत को अमेरिकी सैन्य हमले में तीन युवा भारतीय नाविकों की हत्या के लिए बिना शर्त माफ़ी की मांग करनी चाहिए थी। इसके बजाय, अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कथित तौर पर एक चेतावनी जारी करने का फैसला किया, जिसमें घोषणा की गई कि अमेरिकी सेना के आदेशों का पालन न करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

डील से पहले ईरान में बढ़ता विरोध आखिर क्या संकेत दे रहा है?

तेहरान  अमेरिका से शांति समझौता करने के खिलाफ ईरानी लोगों का एक वर्ग सड़क पर उतर गया है। ईरान के कई शहरों में डील के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरानी हितों के खिलाफ जाकर डील की जा रही है, जो नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर खासतौर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हैं। अमेरिका से समझौते में ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार गालिबाफ और अराघची के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई है। तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर में शनिवार को रैली हुई है। मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के सामने भी दर्जनों लोग अब्बास अराघची के विरोध में जमा हुए। फार्स न्यूज एजेंसी ने वीडियो जारी किया है, जिसमें मशहद में प्रदर्शनकारी अराघची के खिलाफ नारे लगाते दिख रहे हैं। विरोध करने वालों का मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव कमजोर होगा। अराघची और गालिबाफ निशाने पर मशहद में महिलाओं को झंडे लहराते हुए और 'बेईमान घुसपैठिए अराघची मुर्दाबाद और अराघची हाय हाय' के नारे लगाते हुए देखा गया है। एक और वीडियो में प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि अराघची का समझौता ईरान को बेइज्जत करने वला है। उन्होंने उस समझौते में अमेरिका को बहुत ज्यादा और गैरजरूरी रियायतें दी हैं। ऐसे में गालिबाफ और अराघची इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समझौते से ईरान के हितों की रक्षा नहीं होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश अपनी पकड़ खो देगा। शुक्रवार को एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा था कि प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की बात कही गई है। साथ ही समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का दावा भी किया जा रहा है। ईरान अमेरिका समझौता ईरान लोग ऐसे समय प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे हैं, जब अमेरिका से उनके देश का समझौता बेहद करीब है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर रविवार को दस्तखत हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों पक्ष रविवार को डील साइन कर सकते हैं। ईरानी नेताओं ने रविवार को समझौते पर दस्तखत होने की बात नहीं कही है लेकिन माना है कि अमेरिका के साथ समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है। ईरान ने संकेत दिया है कि डील में अभी कुछ समय लग सकता है। ईरानी पक्ष के बयानों से रविवार को समझौता होना मुश्किल नजर आ रहा है लेकिन जल्दी ही डील होने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि 24 घंटे के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। उन्होंने इशारा किया कि रविवार को दस्तखत हो सकते हैं।  

‘झुकना बंद करो’अमेरिका से डील पर ईरान में बवाल, अराघची और गालिबाफ बने निशाने पर

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी जंग सुलझती नजर आ रही है, लेकिन अब ईरान में अमेरिका के साथ शांति समझौते के खिलाफ विरोध के सुर फूट रहे हैं। कट्टरपंथी ईरानियों का गुस्सा इस डील में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सांसद गालिबाफ के खिलाफ निकल रहा है। शनिवार को ईरान के कई शहरों में इन दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हई और शांति समझौते का विरोध किया गया। ईरान में यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर शेखी बघार रहा है। ट्रंप ने यहां तक कहा है कि ईरान के साथ समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने इससे इनकार किया है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में शांति समझौते को लेकर दो पक्ष बंटे हुए हैं। एक तरफ कुछ लोग शांति समझौते के लिए राजी हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस युद्ध में शहीद सुप्रीम लीडर और तमाम साथियों का बदला चाहते हैं। शनिवार को जब विदेश मंत्री अराघची मसहद शहर में एक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। उसी दौरान सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने नारे बाजी शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों में कई महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने काले चाहत पहने हुए थे और वह लाल झंडे लिए नारे लगा रही थीं। इस प्रदर्शन की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें प्रदर्शन कारी डेथ टू अराघची, अराघची शर्म करो, झुकना बंद करो और अराघची इस्तीफा दो' जैसे नारे लगाती सुनी जा सकती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मसहद के एक निवासी ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी लगातार अराघची का विरोध कर रहे थे। अराघची के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा एएफपी की रिपोर्ट के मताबिक, ईरान में इस शांति समझौते को लेकर लगातार गुस्सा बढ़ रहा है। दरअसल, प्रदर्शनकारियों का तर्क यह है कि जब युद्ध हो ही चुका है और अमेरिका झुक गया है तो फिर ट्रंप की शर्तों के आधार पर समझौता करने की जरूरत क्या है। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अराघची और गालिबाफ जिस समझौते को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं, वह ईरान के हितों को नहीं साधता। इससे होर्मुज पर भी ईरान की पकड़ कमजोर हो सकती है। भले ही प्रदर्शनकारी अराघची के ऊपर ईरान के साथ धोखेबाजी का आरोप लगा रहे हों लेकिन अराघची लगातार ईरान के पक्ष में बातचीत करने का दावा कर रहे हैं। अराघची और गालिबेफ के खिलाफ यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब दोनों ही पक्षों की तरफ से शांति समझौते को लेकर आम राय बन रही है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि जल्दी ही अमेरिका के साथ 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं, इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि जल्दी ही समझौता हो सकता है। ट्रंप ने भी अपने 80वें जन्मदिन के दिन समझौता करने दावा किया है।

बैरागीवाला गांव में दो समुदायों की झड़प का CCTV आया सामने, एक की मौत से बढ़ा तनाव

उत्तराखंड उत्तराखंड के विकासनगर स्थित बैरागीवाला गांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में युवक की मौत के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है. यहां आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घरों पर ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में पत्थराव कर दिया. आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया गया. वहीं प्रशासन ने मामले को देखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया है. अब इस मामले को लेकर 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. वहीं इस घटना के बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कई लोग लाठी-डंडों के साथ एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं. बैरागीवाला गांव से सामने आए CCTV फुटेज ने घटना के खौफनाक मंजर को कैमरे में कैद कर लिया है. वीडियो में लाठी-डंडों से लैस लोग सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, तो कहीं चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है. इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया. पुलिस का कहना है कि विवाद की शुरुआत खेत में पानी लगाने को लेकर हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में मामूली कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई. अब सामने आए CCTV फुटेज में वो हिंसा दिखाई दे रही है. वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव की गलियों में अचानक हलचल बढ़ जाती है. कुछ लोग हाथों में लाठियां लेकर दौड़ते नजर आते हैं. इसके बाद हमला शुरू हो जाता है. लोग इधर-उधर भागने लगते हैं. महिलाएं और बच्चे भी डर के साये में सुरक्षित जगह तलाशते दिखाई देते हैं. इस हिंसक झड़प में एक हिंदू युवक की मौत हो गई, जबकि महिला समेत तीन लोग घायल हुए हैं. युवक की मौत की खबर फैलते ही गांव का माहौल और ज्यादा गर्म हो गया. देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए. घटना के बाद गुस्साए हिंदूवादी संगठन के लोगों ने गांव में पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के एनकाउंटर समेत उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन की मांग की और हाइवे जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समुदाय विशेष देवभूमि को कश्मीर बनाना चाहता है. यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है कि यह एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की गई. गुस्साए लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया. कई घंटों तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा. लोगों का कहना था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को पूरे इलाके को छावनी में बदलना पड़ा. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी. प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा विधायक घटना के बाद भाजपा विधायक मुन्ना चौहान पहले घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे. फिर वहां से सीधे बैरागीवाला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मौके पर मौजूद पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त एक्शन के निर्देश दिए. विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया. इस मामले में सहसपुर कोतवाली पुलिस के मौजूदा थाना प्रभारी को सख्त लहजे में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया. अब इस पूरे मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बन गया है. वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. हालांकि गांव में माहौल अब भी संवेदनशील बना हुआ है. एक तरफ परिवार अपने बेटे की मौत का इंसाफ मांग रहा है, दूसरी तरफ पूरा गांव CCTV में कैद उस हिंसा को देखकर सहमा हुआ है. घटना को लेकर एसपी ग्रामीण ने क्या कहा? इस घटना को लेकर एसपी देहात पंकज गैरोला ने कहा कि खेत में पानी लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुए मामूली विवाद के बाद कुछ युवकों ने विनोद नाम के युवक को पीट-पीटकर मार डाला. वहीं तीन लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रदर्शनकारियों से बात की जा रही है, आरोपियों की धड़पकड़ के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है. जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

PF Interest 2026: 8.25% ब्याज कब होगा खाते में क्रेडिट, EPFO सदस्यों के लिए अहम खबर

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के सदस्य अपने पीए खाते में ब्याज का पैसा जमा होने का इंतजार कर रहे हैं. FY2025-26 के लिए पीएफ की ब्याज दर (PF Interest Rate) को यथावत रखा गया है, जो 8.25% है. इसे स्थिर रखने का फैसला लिए गए दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पैसा ईपीएफओ सदस्यों के खाते में जमा नहीं हुआ है. अब इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।  बीते मार्च 2026 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर 8.25% की वार्षिक ब्याज दर की सिफारिश की. श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 2 मार्च को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीटी ने सिफारिश की कि ब्याज को सदस्यों के ईपीएफ खाते में वित्तीय वर्ष के लिए जमा किया जाए।    कब तक PF खाते में जमा होगा पैसा?  EPFO Interest के खाते में जमा करने का इंतजार कर रहे सदस्यों के लिए बता दें कि अभी तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है और न ही कोई संभावित तारीख घोषित की गई है. लेकिन अगर, पीएफ में ब्याज का पैसा आने के पिछले रुझानों पर नजर डालें, तो संकेत मिल रहा है कि ये जून और सितंबर के बीच किसी भी समय डाला जा सकता है।  ब्याज की राशि ईपीएफओ सदस्यों के खातों में तभी जमा की जाती है जब केंद्र सरकार से सिफारिश को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है और इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया जाता है. ऐसे में इस प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, इसलिए राशि जमा करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।  पिछले वर्ष, कई ग्राहकों को जून और जुलाई में खाते में ब्याज मिला था. हालांकि, इसे लेकर सटीक समय अलग-अलग हो सकता है. सदस्यों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि पीएफ ब्याज की जानकारी सभी ईपीएफ पासबुक में एक साथ दिखाई नहीं देती है, मतलब कुछ सदस्यों को यह अपडेट दूसरों की तुलना में पहले दिखाई दे सकता है और कुछ को बाद में।  क्या देरी से ब्याज पर असर पड़ेगा? इस उत्तर है नहीं, पासबुक अपडेट में देरी होने पर भी, ग्राहकों को उनका पूरा ब्याज मिलता है. EPF Scheme 1952 के अनुच्छेद 60 के तहत पीएफ खाते पर ब्याज की गणना मासिक चालू शेष पर होती है, जिसपर सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाता है. इसलिए, पासबुक में ब्याज दर्शाने में किसी भी प्रशासनिक देरी से सदस्यों को मिलने वाली रकम पर कोई असर नहीं पड़ता है।  PF खाते में आया ब्याज, ऐके करें चेक EPFO द्वारा अपने सदस्यों को कई ऑप्शन दिए गए हैं, जिनके जरिए वे अपने पीएफ खाते में ब्याज की रकम आने पर इसे आसानी से चेक कर सकते हैं. इसके लिए उमंग ऐप (Umang App), ईपीएफओ सदस्य ई-सेवा पोर्टल (EPFO E-Service Portal), मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service) या एसएमएस सुविधाएं (EPFO SMS Service) के जरिए स्टेटस जांच सकते हैं।   

चौंकाने वाले आंकड़े! शादी के बाद पुरुषों की आत्महत्या के मामले ज्यादा, NCRB रिपोर्ट में कई कारण उजागर

नई दिल्ली देश में शादीशुदा पुरुषों की खुदकुशी के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 से अब तक यह आंकड़ा करीब दोगुना हो गया है। 10 साल पहले 2015 में एक साल में 2497 पुरुषों ने शादी से संबंधित मामलों या फिर पत्नी से विवाद को लेकर खुदकुशी की थी। वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 4536 हो गया। इस रेट में 82 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। 2022 में पलट गए आंकड़े रिकॉर्ड के मुताबिक पहले पुरुषों की तुलना में शादी संबंधित मामलों को लेकर महिलाएं ज्यादा खुदकुशी करती थीं। वहीं 2022 में यह आंकड़ा ही पलट गया। 2024 में लगातार ऐसा देखा गया कि शादीशुदा जीवन में कलह को लेकर पुरुष महिलाओँ की तुलना में ज्यादा खुदकुशी कर रहे हैं। 2024 की बात करें तो शादी संबंधित मामलों में कुल 8524 लोगों ने खुदकुशी की। इनमें से 4536 यानी करीब 53 फीसदी पुरुष थे औ 3986 यानी करीब 46 फीसदी महिलाएं थीं। 2015 में खुदकुशी करने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में 61 फीसदी थी। हालांकि 2023 की तुलना में 2024 में शादी से जुड़े विवादों को लेकर खुदकुशी का आंकड़ा कम हुआ है। 2024 में खुदकुसी करने वाली महिलओं में से करीब दो तिहाई 30 साल से कम उम्र की थीं। वहीं पुरुषों की बात करें तो आधे से ज्यादा लोग 30 से ज्यादा की उम्र के थे। 40 फीसदी खुदकुशी करने वाले लोग 30 से 45 की उम्र के थे। कम उम्र में महिलाएं ज्यादा करती हैं खुदकुशी रिपोर्ट के मुताबिक 18 से 30 की उम्र में खुदकुशी करने के मामले में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। वहीं 30 से 40 की उम्र में पुरुष ज्यादा खुदकुशी करते हैं। रोज 24 लोग कर लेते हैं खुदकुशी रिपोर्ट के मुताबिक शादी या फिर पति-पत्नी के बीच विवाद को लेकर रोज करीब 23 लोग खुदकुशी करते हैं। इनमें से 12 पुरुष और 11 महिलाएं होती हैं। रोज होने वाली मौतों के औसत पर गौर करें तो रोज 30 से कम की उम्र के 5 पुरुष और 30 से ज्यादा उम्र वाले 6 पुरुष खुदकुशी करते हैं। 2019 से 2024 तक पांच साल में ऐसे खुदकुशी करने वालों की कुल संख्या 24335 थी। क्यों खुदकुशी करते हैं शादीशुदा लोग शादी या पति-पत्नी के बीच विवाद और खुदकुशी की मुख्य वजहों में दहेज, विवाहेतर संबंध, तलाक जैसे मुद्दे शामिल हैं। 2019 से 2024 तक कुल खुदकुशी के आंकड़ों को देखों तो करीब 18359 पुरुषों और 20485 महिलाओं ने खुदकुशी की है। 2024 में खुदकुशी के 8534 मामलों में से 3052 ऐसे थे जिनमें शादी के बाद सामंजस्य नहीं बन पाया। उत्तर प्रदेश में होती हैं सबसे ज्यादा ऐसी खुदकुशी उत्तर प्रदेश में लोग शादी संबंधित मामलों को लेकर सबसे ज्यादा खुदकुशी करतेहैं। 2024 में उत्तर प्रदेश में शादी के बाद सामंजस्य ना बनने की वजह से कुल 764 लोगों ने खुदकुशी की थी और इनमें से 394 पुरुष और 370 महिलाएं थीं। उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा नंबर महाराष्ट्र का आता है जहां 421 लोगों ने खुदकुशी की थी। विवाहेतर संबंधों को लेकर होने वाली खुदकुशी की दर काफी बढ़ गई है। 2014 में ऐसे मामले को लेकर 1624 लोगों ने खुदकुशी की थी।

क्या आपका भी है इस बैंक में खाता? RBI ने लगाई 6 महीने की रोक, जानें क्या होगा असर

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, आरबीआई ने मोगावीरा सहकारी बैंक, मुंबई की वित्तीय स्थिति में गिरावट को देखते हुए इसपर कई पाबंदियां लगा दी हैं। यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने किसी सहकारी बैंक पर पाबंदियां लगाई हैं। इससे पहले मई में भी एक सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया गया था। मोगावीरा सहकारी बैंक पर क्या एक्शन? मोगावीरा सहकारी बैंक पर लगी पाबंदियों के तहत खाताधारकों के लिए पैसे निकालने की अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। ये पाबंदियां 12 जून को कारोबार बंद होने के बाद से लागू हुईं, जो छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी होंगी। हालांकि, इनकी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। क्या-क्या नहीं कर पाएगा बैंक? आरबीआई ने कहा, ''सहकारी बैंक अब कोई भी लोन और उधार को मंजूर नहीं दे सकेगा और न ही मौजूदा लोन को रिन्यू कर पाएगा। इसके अलावा, बैंक किसी प्रकार का निवेश नहीं कर सकेगा, कोई नई देनदारी नहीं ले सकेगा और उधार लेने, नए जमा स्वीकार करने पर भी रोक रहेगी। बैंक की वर्तमान नकदी स्थिति को देखते हुए उसे निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी जमाकर्ता को उसके बचत, चालू अथवा अन्य किसी खाते से अधिकतम एक लाख रुपये तक की निकासी की अनुमति दे।'' भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक के कामकाज में सुधार के लिए वह लगातार उसके निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ संपर्क में था। हालांकि, बैंक ने निगरानी संबंधी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। इसी कारण ये निर्देश जारी करना जरूर हो गया। आरबीआई ने इस बैंक का किया लाइसेंस रद्द बता दें कि बीते महीने केंद्रीय रिजर्व बैंक ने महाराष्ट्र के फलटन स्थित 'द यशवंत सहकारी बैंक' के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं होने के आधार पर लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह सहकारी बैंक, बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कुछ प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा है और मौजूदा वित्तीय स्थिति में वह अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है। इसके साथ ही आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक से बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया है। आरबीआई ने कहा कि परिसमापन पर बैंक के जमाकर्ताओं को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा राशि मिलेगी। आरबीआई के अनुसार, बैंक के 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि मिलने की पात्रता है।

जुलाई में बढ़ सकती है कर्मचारियों की सैलरी, DA 63% पहुंचने की संभावना; जानिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी बातें

नईदिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. जल्‍द ही इन कर्मचारियों को लेकर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है. इनकी सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है और केंद्रीय कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में जुलाई से बढ़ी हुई सैलरी आ सकती है।  महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट       दरअसल, केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की करीबी नजरें 8वें वेतन आयोग पर लगी हैं. कर्मचारी संघों द्वारा ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर रखने और मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाने को कह रहे हैं. इस बीच, महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट आया है।  किस आधार पर होगा डीए कैलकुलेशन         कहा जा रहा है कि जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ सकता है. जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ने की उम्‍मीद की वजह इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) है. डीए का कैलकुलेशन इसी इंडेक्स के आधार पर किया जाता है. यह इंडेक्स इस साल मार्च में 149.1 था, जो अप्रैल में बढ़कर 149.9 हो गया।  रिटेल महंगाई में इजाफा इंडस्‍ट्रियल वर्कर्स के लिए रिटेल महंगाई दर भी बढ़ा है. यह 4.27 से बढ़कर 4.46 फीसदी हो गया है. अप्रैल 2026 तक उपलब्ध  AICPI-IW डेटा के आधार पर 12 महीने का एवरेज 147.51 है।  3 फीसदी बढ़ सकता है डीए  ऐसे में 2016 की बेस सीरीज को 2001 के बेस में कनवर्ट करने के लिए 2.88 लिंकिंग फैक्टर का यूज करते हैं तो डीए कैलकुलेशन के बाद करीब 62.51 फीसदी हो जाएगा. इसी कारण डीए में 3 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद की जा रही है।  जुलाई की सैलरी में हो सकती है बढ़ोतरी  साल में दो बार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी की जाती है. सरकार ने जनवरी के महंगाई भत्ता को बढ़ा दिया है और अब जुलाई में होने वाले डीए में बढ़ोतरी की उम्‍मीद की जा रही है. अगर जुलाई से ही इसमें बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई महीने की सैलरी के साथ ही बढ़े हुए महंगाई भत्ता भी भेजा जा सकता है।  अभी 60 फीसदी महंगाई भत्ता अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी का महंगाई भत्ता 60 फीसदी है. ऐसे में अगर सरकार जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला करती है तो यह बढ़कर 63 फीसदी तक पहुंच सकता है।  केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब … Read more

चौंकाने वाला खुलासा! हेलमेट-सीटबेल्ट की अनदेखी बनी हजारों मौतों की वजह, रिपोर्ट में बड़ा दावा

 नई दिल्ली  केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट से 2024 में हजारों जानें बचाई जा सकती थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में सड़क हादसों में मारे गए लोगों में से 40 हजार से अधिक जिंदगियों को केवल स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट के इस्तेमाल से बचाया जा सकता था। साल 2024 में सड़क हादसों में मारे गए 81,780 टू-व्हीलर सवारों में से 40% से ज्यादा अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनकर बच सकते थे, जबकि सीटबेल्ट कार में सवार लोगों की 21,988 मौतों में से लगभग आधी मौतों को रोक सकती थी। यानी दोपहिया वाहनों पर जान गंवाने वाले 40% से ज्यादा लोग और कार हादसों में मारे गए करीब आधे लोग सुरक्षा उपकरणों के अभाव का शिकार हुए। बाइक सवारों के मरने की संभावना सबसे अधिक संयुक्त राष्ट्र (UN) की मोटरसाइकिल हेलमेट स्टडी के अनुसार, कार चालकों की तुलना में मोटरसाइकिल सवारों के सड़क हादसों में मरने की संभावना 26 गुना ज्यादा होती है, और अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनने से उनके बचने की संभावना 42% बढ़ जाती है और बाइक सवारों को होने वाली 69% चोटों से बचा जा सकता है।" इसी तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि सीटबेल्ट उन हादसों में मौत को रोकने में लगभग 50% असरदार हैं, जिनमें सीटबेल्ट न होने पर ड्राइवर या यात्री की मौत हो सकती थी। किन-किन राज्यों में हुईं सबसे अधिक मौतें? राज्य पुलिस विभागों से मिले डेटा पर आधारित सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि हेलमेट न पहनने के कारण तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 7,744 मौतें हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र (5,946) और मध्य प्रदेश (5,543) का नंबर आता है। सीटबेल्ट न पहनने के कारण हुई मौतों के मामले में, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,816 मौतें हुईं, इसके बाद मध्य प्रदेश (1,929) और महाराष्ट्र (1,427) का स्थान रहा। हालांकि. सेफ्टी गियर न पहनना और तेज रफ्तार या गलत साइड से गाड़ी चलाने जैसे जानलेवा हादसों के अन्य कारण सड़क इस्तेमाल करने वालों के व्यवहार से जुड़े हैं, लेकिन सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट यह भी बताती है कि सड़क बनाने और देखरेख करने वाली एजेंसियों की बढ़ती लापरवाही ने भी कुल मौतों की संख्या बढ़ाई है। उदाहरण के लिए, 2024 में गड्ढों के कारण होने वाली मौतें बढ़कर 2,384 हो गईं, जो 2023 की तुलना में 10.4% ज़्यादा हैं, और निर्माणाधीन साइटों पर मौतों की संख्या 5,389 रही, जो पिछले साल की तुलना में 19.4% ज़्यादा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024 में भारतीय सड़कों पर मारे गए लोगों में से लगभग 67% टू-व्हीलर सवार या पैदल चलने वाले थे। सड़क हादसों में कुल 1.28 लाख दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की जान चली गई। टक्कर रोकने वाली तकनीक के लिए रेडियो स्पेक्ट्रम लाइसेंस-मुक्त केंद्र सरकार ने सड़क हादसों को रोकने और वाहन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और 'व्हीकल-टू-एवरीथिंग' (V2X) कम्युनिकेशन में इस्तेमाल होने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम को पूरी तरह लाइसेंस-मुक्त (Delicensed) कर दिया है। इस कदम से देश में उन्नत सड़क सुरक्षा तकनीकों और टक्कर रोधी प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने जारी की अधिसूचना इस संबंध में दूरसंचार विभाग (DoT) ने दो महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं जारी की है- 77-81 GHz बैंड- इसे ऑटोमोटिव रडार सिस्टम के लिए लाइसेंस-मुक्त किया गया है। 5.9 GHz बैंड- इसे V2X कम्युनिकेशन के लिए मुक्त किया गया है। V2X (Vehicle-to-Everything) एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से गाड़ियां न सिर्फ आपस में संपर्क साध सकती हैं, बल्कि सड़क के किनारे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैफिक सिग्नल और स्मार्ट पोल्स) के साथ भी डिजिटल संवाद कर सकती हैं। इससे ड्राइवर को संभावित दुर्घटनाओं, ट्रैफिक जाम और सड़क की स्थिति की जानकारी पहले ही मिल जाएगी, जिससे सड़क हादसों में भारी कमी आने की उम्मीद है।