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रेल यात्रियों को बड़ी राहत: वेटिंग टिकट होने पर भी सफर के दौरान मिल सकेगी कन्फर्म सीट

नई दिल्ली ट्रेन में वेटिंग टिकट लेकर सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की ओर से एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अब यात्री चलती ट्रेन में भी अपने लिए कंफर्म बर्थ बुक करा सकेंगे। बता दें कि अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना हो चुकी है, अगर ट्रेन के भीतर कोई सीट खाली है, तो यात्री उसे सफर के दौरान ही तुरंत बुक कर सकेंगे। रेलवे का यह नया नियम आने वाले दिनों में वेटिंग और आरएसी (RAC) के झंझट से जूझने वाले यात्रियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं साबित होने वाला है। CRIS अपग्रेड कर रहा है टीटीई का हैंड हेल्ड टर्मिनल दरअसल, भारतीय रेलवे आने वाले दिनों में टिकट बुकिंग से आरएसी (RAC) की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की एक बहुत बड़ी तैयारी कर रहा है। इसके लिए रेलवे का टेक्निकल विंग यानी रेल सूचना प्रणाली केंद्र टीटीई को दिए गए हैंड हेल्ड टर्मिनल सॉफ्टवेयर को नए फीचर्स के साथ अपग्रेड कर रहा है। इस अपग्रेडेशन के तहत टीटीई के इस डिवाइस में 'कंफर्म बर्थ बुकिंग' का एक नया और सीधा ऑप्शन जोड़ने की तैयारी चल रही है। इस नई और हाईटेक व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए रेलवे प्रशासन ने अपने वाणिज्य विभाग के आला अधिकारियों और कई टीटीई को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दे दिया है, ताकि जमीन पर काम शुरू करने में कोई दिक्कत न आए। यात्री के न आने पर तुरंत वेबसाइट पर दिखने लगेगी सीट इस पूरी व्यवस्था को समझाते हुए एक सीनियर टीटीई ने बताया कि मान लीजिए अगर सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस में कंफर्म टिकट होने के बावजूद कोई यात्री अपनी सीट पर नहीं आता है, तो टीटीई चेकिंग के दौरान उस बर्थ को अपने एचएचटी डिवाइस में तुरंत खाली दिखाएगा। टीटीई द्वारा यह जानकारी भरते ही वह बर्थ सीधे रेलवे के बुकिंग पोर्टल और आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर लाइव दिखने लगेगी। इसके बाद अगर कोई अन्य यात्री बेतिया, नरकटियागंज या रास्ते के किसी भी अन्य स्टेशन से सप्तक्रांति में सीट बुक कराना चाहता है, तो वह आसानी से ऑनलाइन बुकिंग कर सकता है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में ऐसी खाली सीटों को टीटीई केवल ट्रेन के भीतर ही बुक कर पाते हैं और ये वेबसाइट पर नहीं दिखती हैं, लेकिन इस नए बदलाव के बाद पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी।

भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार! इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल रोकने की क्षमता से बढ़ी सैन्य ताकत

 नई दिल्ली भारत की सामरिक सुरक्षा और सैन्य इतिहास में 10 और 11 जून, 2026 की तारीखें सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO ने लगातार तीन ऐतिहासिक फ्लाइट-टेस्ट करके देश की 'नेक्स्ट-जेनरेशन' की रक्षा क्षमताओं का लोहा मनवाया है।  इन सफल परीक्षणों के माध्यम से भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' और समुद्र में मध्यम दूरी की एंटी-शिप मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा 'एलीट' देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी हवा में नष्ट करने की तकनीक मौजूद है।  इसके साथ ही, भारत ने पहली बार अपनी स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला परीक्षण किया है, जो देश की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।  क्या है मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता? मिसाइल डिफेंस की भाषा में 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' का मतलब एक ऐसे अभेद्य सुरक्षा चक्र से है, जो दुश्मन की मिसाइल को आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों पर ही ढूंढकर पूरी तरह नष्ट कर देता है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन देश ने भारत पर कोई लंबी दूरी की घातक मिसाइल दागी है, तो भारत का यह नया डिफेंस सिस्टम उसे दो स्तरों पर निशाना बनाएगा…     एक्सो-एटमॉस्फेरिक: इसके तहत इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष की सीमा पर) ही मार गिराती है।      एंडो-एटमॉस्फेरिक: यदि कोई मिसाइल पहले सुरक्षा चक्र को पार कर जाती है, तो वायुमंडल के भीतर मौजूद दूसरा इंटरसेप्टर उसे धरती पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ा देता है।  DRDO द्वारा 10 और 11 जून को किए गए इन लगातार तीन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों (टारगेट्स) को बेहद सटीकता के साथ एंगेज किया और उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया. ये डिफेंस सिस्टम्स उभरते हुए आधुनिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सबसे लेटेस्ट और स्वदेशी तकनीकों के आधार पर डिजाइन की गई हैं।  ICBM को रोकने वाला 'एलीट क्लब': भारत की बड़ी वैश्विक छलांग इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों को निष्क्रिय करने की तकनीक है. ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक (5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी) मार कर सकती हैं और इनकी स्पीड बहुत तेज होती है।  अब तक ऐसी मिसाइलों को रोकने और हवा में ही मार गिराने की तकनीक केवल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसी महाशक्तियों के पास ही प्रमुख रूप से मानी जाती थी. भारत ने इस परीक्षण के जरिए साबित कर दिया है कि उसका 'बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस'सुरक्षा कवच अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. यह तकनीक आने वाले समय में देश के प्रमुख महानगरों, परमाणु प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों को दुश्मन के किसी भी अचानक होने वाले मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।     नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण इन तीन परीक्षणों की कड़ी में भारत को एक और बड़ी कामयाबी समुद्र में मिली. DRDO ने अपनी अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का 'मेडन फ्लाइट-टेस्ट' यानी पहला आधिकारिक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।    यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तथा हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए तैयार किया गया है. मध्यम दूरी की इस एंटी-शिप मिसाइल का मुख्य काम समुद्र में भारतीय सीमाओं की तरफ बढ़ रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को पलक झपकते ही नष्ट करना है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है।  वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग की साझी कूटनीतिक जीत इन बेहद जटिल और संवेदनशील परीक्षणों की कमान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के हाथों में थी. उन्होंने खुद इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और इसे देश की रक्षा सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़े बदलाव वाला मोड़ बताया।  इन परीक्षणों को भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायुसेना और नौसेना) के शीर्ष अधिकारियों ने भी अपनी आंखों से देखा और इसकी मारक क्षमता को देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी बताया।   भले ही भारत के पड़ोसी देश अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण कर रहे हों, लेकिन DRDO के इस नेक्स्ट-जेन सुरक्षा कवच ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी आसमानी या समुद्री खतरे को सीमा पार ही ढेर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

अगले थल सेना अध्यक्ष की दौड़ में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जानिए उनका सैन्य सफर और उपलब्धियां

नई दिल्ली लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय थल सेना के अगले अध्यक्ष होंगे. सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी है. जनरल के स्थायी रैंक के साथ वो 30 जून को पदभार ग्रहण करेंगे. वो वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का कार्यकाल 31 अगस्त, 2028 तक होगा।  महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित खड़कवासला के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व-छात्र धीरज सेठ दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त हुए थे. लगभग चार दशकों के अपने कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न भू-भागों और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण संचालन अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियान भी शामिल हैं।  लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी बल की कमान संभाली है. लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में काम किया, जहां उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया. सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया और पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का दुर्लभ गौरव हासिल किया।  लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ संचालन अधिकारी, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह और कल्याण के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर काम किया।  क्षमता विकास और आधुनिकीकरण में एक विशिष्ट योगदानकर्ता के रूप में, उन्होंने सामरिक योजना और क्षमता विकास निदेशालयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।  करीब 40 साल का सैन्य अनुभव, कई अहम कमानों का नेतृत्व किया दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन हासिल करने वाले धीरज सेठ को करीब 40 साल का सैन्य अनुभव है। उन्होंने रेगिस्तान, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी मोर्चे सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में कमान संभाली है। धीरज सेठ दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जीओसी-इन-सी भी रह चुके हैं। वे पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन (अंगोला), सेना मुख्यालय और क्षमता विकास से जुड़े कई अहम पदों पर भी काम किया है। जूनियर कमांड कोर्स में टॉपर, कई सम्मान हासिल किए वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला, इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), DSSC वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वे जूनियर कमांड कोर्स में फर्स्ट रैंक और DSSC में बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल हासिल कर चुके हैं। उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया जा चुका है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका-पेरिस में किया कोर्स लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में मोंटेरी स्थित नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स,, पेरिस में मिलिट्री कॉलेज में डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड जनरल स्टाफ कोर्स, महू में हायर कमांड कोर्स और नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ली है। इसके अलावा, उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, विकसित इलाके में एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक काउंटर-इंसरजेंसी फोर्स की कमान भी संभाली है। सेना के आधुनिकीकरण के लिए जाने जाते हैं लेफ्टिनेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ हमेशा एक कुशल सैन्य अधिकारी रहे हैं और पेशेवर सैन्य शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह सेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले जनरल ऑफिसर हैं। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में अहम पदों पर काम किया है। सेना के आधुनिकीकरण की दिशा, क्षमता विकास के रोडमैप और लंबे समय के लिए सेना से जुड़ी पहलों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, जुलाई में वेतन वृद्धि की उम्मीद; 8वें वेतन आयोग पर नजरें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है। आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी। फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा। क्या होता है वेतन आयोग ? केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है। आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

वायुसेना को बड़ा झटका: विमान दुर्घटना में 5 जवानों की मौत, कारणों की जांच शुरू

नईदिल्ली /जोरहाट  असम के जोरहाट एयरबेस के पास भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई, जबकि विमान का सह-पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल अधिकारी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।वायुसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी सैन्यकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे। दुर्घटना में बलिदान होने वालों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम शामिल हैं। भारतीय वायुसेना ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बलिदान जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। वायुसेना ने कहा कि इस कठिन समय में पूरा संगठन शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा है और उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।  इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और  अग्निवीरवायु दानिश आलम शहीद हो गए है। वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारतीय वायुसेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है। दुख की इस घड़ी में पूरी वायुसेना शहीदों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई। जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित की गई है। बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे। दुर्घटना के बाद वायुसेना मुख्यालय ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है, जो हादसे के सभी पहलुओं की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी संभावित समस्या, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन कारणों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। हादसे में जीवित बचे सह-पायलट से भी जांच टीम पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि दुर्घटना से ठीक पहले विमान की स्थिति और कॉकपिट में हुई घटनाओं के बारे में उनकी जानकारी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। वायुसेना की जांच टीम विभिन्न तकनीकी और परिचालन तथ्यों का विश्लेषण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।  जांच के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' के आदेश हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई. जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है. बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे। 

आर्यभट्ट पर टिप्पणी से घिरा Amazon, विज्ञापन के खिलाफ हिंदू संगठन ने उठाई कानूनी कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली  ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन (Amazon) के एक विज्ञापन को लेकर हिंदू संगठन ने आपत्ति जताई है. हिंदू संगठन का कहना है कि अमेजन के एक एड में प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का आपत्तिजनक ढंग से उपहास उड़ाया गया. इस मामले में कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा गया है. सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत और हिंदू जनजागृति समिति की अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा भेजी गई इस नोटिस में मांग की गई है कि अमेजन 48 घंटे के भीतर भारतीय जनता से सार्वजनिक माफी मांगे और इस विवादित विज्ञापन को तुरंत वापस ले. मांग पूरी न होने पर अमेजन के विरुद्ध फौजदारी और दीवानी मुकदमा दर्ज किया जाएगा, ऐसा स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है।  हिंदू संगठन के मुताबिक इस विज्ञापन को लेकर देश भर के राष्ट्रप्रेमी नागरिकों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर ‘अमेज़न का बहिष्कार करो' (#Boycott_Amazon) अभियान तेजी से ट्रेंड कर रहा है।  आयभट्ट जैसी वेशभूषा में मजाकिया तंज यह विवाद ‘अमेज़न नाऊ' (Amazon Now) के प्रचार अभियान से जुड़ा है. जिसमें आर्यभट्ट की वेशभूषा में एक व्यक्ति को ‘‘जीरो डिलीवरी चार्ज खोजने वाले वैज्ञानिक'' के रूप में बेहद मजाकिया और व्यंग्यात्मक ढंग से पेश किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि जिस महान ऋषि-तुल्य वैज्ञानिक ने दुनिया को ‘शून्य' की अमूल्य अवधारणा दी और वैश्विक स्तर पर भारत का वैज्ञानिक परचम लहराया, उन्हें केवल व्यावसायिक लाभ के लिए एक ‘कॉर्पोरेट मस्कट' बनाकर उनकी क्रूर थट्टा उड़ाना भारत की महान ज्ञान-विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता का जानबूझकर किया गया अपमान है।  पहले भी अमेजन के एड विवादों में आए नोटिस में ध्यान दिलाया गया है कि व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय संस्कृति और हिंदू प्रतीकों का अपमान करने का अमेजन का यह पुराना इतिहास रहा है. इससे पहले भी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर हिंदू देवी-देवताओं (भगवान गणेश और माता लक्ष्मी) के चित्रों वाले पायदान, टॉयलेट सीट कवर बेचे जाने और ‘तांडव' वेब सीरीज के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके लिए भारी विरोध के बाद कंपनी को माफी मांगनी पड़ी थी।  केवल व्यावसायिक मुनाफे के लिए भारतीय महापुरुषों का जानबूझकर अपमान करने का यह कृत्य संशोधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), धारा 196 व 197 (वैमनस्य फैलाना और राष्ट्रीय अखंडता को बाधित करना) तथा धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा) के तहत सीधे आपराधिक और दीवानी कार्रवाई के योग्य है।  48 घंटे में विज्ञापन हटाकर मांगे माफी नहीं तो केस इस पृष्ठभूमि में हिंदू जनजागृति समिति ने अमेज़न को अपनी शर्तें पूरी करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है. इसके तहत ‘आर्यभट्ट – अमेज़न नाऊ' विज्ञापन को यु-ट्यूब, इन्स्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और टीवी सहित सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्थाई रूप से हटाना होगा. साथ ही, कंपनी को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल, वेबसाइट के होमपेज और देश के अग्रणी समाचार पत्रों में हिंदू समाज और भारतीय संस्कृति से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगनी होगी, तथा भविष्य में राष्ट्रीय प्रतीकों या महापुरुषों का अपमान न करने का एक लिखित वचन पत्र भी देना होगा. अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दी गई अवधि में कार्रवाई न होने पर अदालत में मुकदमा दायर किया जाएगा। 

अमेरिकी कार्रवाई का असर: AI से जुड़ी इस सेवा पर लगा ताला, वैश्विक यूजर्स प्रभावित

वाशिंगटन अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है. अब अमेरिका ने AI कंपनी एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. नए नियम के तहत विदेशी नागरिकस, कर्मचारियों और किसी भी गैर- अमेरिकी संस्था को एंथ्रोपिक के एडवांस्ड AI प्रोग्राम तक के एक्सेस देने पर रोक लगा दी गई है।  अमेरिका ने निर्यात नियंत्रण के तहत एंथ्रोपिक के लिए नए नियम जारी किए हैं. इसके बाद एंथ्रोपिक का बयान भी सामने आया है. साथ ही कंपनी ने बताया है किन मॉडल को नए नियम के दायरे में रखा है. कंपनी ने बताया है कि आगे गलतफहमी को दूर करके दोबारा सर्विस शुरू करेंगे।  एंथ्रोपिक ने अपना बयान जारी किया  एंथ्रोपिक ने कहा है कि अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश जारी किए हैं।  नए निर्देश के तहत अमेरिका के भीतर और बाहर मौजूद किसी भी विदेशी नागरिक के लिए Fable 5 और Mythos 5 के एक्सेस को सस्पेंड करने का ऑर्डर दिया है. फिर चाहें वह एंथ्रोपिक के विदेशी नागरिक कर्मचारी ही क्यों ना हो।  कंपनी ने आगे बताया है कि अमेरिकी सरकार के आदेश का सीधा असर यह है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए Fable 5 और Mythos 5 की सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद करनी पड़ रही हैं।  अन्य सर्विस पर कोई असर नहीं  अमेरिकी आदेश के तहत Claude के अन्य सभी मॉडल्स की पहुंच पर कोई असर नहीं होगा. कंपनी ने आगे बताया है कि इस आदेश की वजह से प्रभावित होने वाली परेशानी के लिए अपने कस्टमर से माफी चाहते हैं।  कंपनी का अनुमान है कि यह किसी प्रकार की गलतफहमी है और जल्द से जल्द अपनी सर्विस को दोबारा शुरू करने की कोशिश करेंगे।  एंथ्रोपिक का मिथोस चर्चा में क्यों?  एंथ्रोपिक ने हाल ही में मिथोस AI लेवल का AI मॉडल लॉन्च किया है, जिसका एक्सेस आम लोगों को भी मिलेगा. कंपनी ने इसको Fable 5 नाम दिया है. मिथोस की लॉन्चिंग के समय कंपनी ने बताया था कि इसको खासतौर से सरकारी और चुनिंदा कंपनियों के लिए तैयार किया है. मिथोस को विशेष रूप से साइबर सिक्योरिटी और जटिल सॉफ्टवेयर कोड का पता करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

असम के जोरहाट एयरबेस पर बड़ा हादसा: भारतीय वायुसेना के विमान में लैंडिंग के बाद आग लगी

जोरहाट  असम के जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायु सेना के एक विमान के क्रैश होने की खबर है. बताया जा रहा कि विमान में लैंडिंग के बाद आग लग गई. जो विमान क्रैश हुआ है वह वायु सेना का AN-31 विमान बताया जा रहा है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, असम के जोरहाट स्थित वायुसेना स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. दुर्घटनाग्रस्त विमान AN-31 श्रेणी का मालवाहक विमान था, जिसका उपयोग आपूर्ति परिवहन के लिए किया जाता है. यह दुर्घटना विमान के वायुसेना बेस पर लैंडिंग के दौरान हुई. हादसे में पायलट के मारे जाने की आशंका है. हालांकि अभी तक किसी  के हताहत होने की वायु सेना ने पुष्टि नहीं की है।  जानकारी के मुताबिक विमान लैंडिंग स्ट्रिप पर नहीं लैंड कर सका था, बल्कि एयरसबेस के उबड़-खाबड़ और घास वाले हिस्से में उसकी लैंडिंग हुई. बता दें कि असम के जोरहाट स्थित ​रौरिया एयर फोर्स स्टेशन (Rowriah Air Force Station) पूर्वोत्तर भारत में भारतीय वायु सेना के प्रमुख सैन्य ठिकानों में से एक है. यह एयरबेस असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में वायु अभियानों, सैन्य रसद आपूर्ति और रणनीतिक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान बीच से दो हिस्सों में बंट गया. इसमें सवार क्रू और अन्य वायु सैन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।  AN-32 अब तक 22 दुर्घटनाओं का शिकार वर्ष 1986 से अब तक AN-32 विमान भारत में लगभग 22 दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका है. इसकी सबसे हालिया दुर्घटना वर्ष 2025 में दर्ज की गई थी. दुर्घटनाओं के इतिहास के बावजूद AN-32 भारतीय वायु सेना के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले परिवहन विमानों में शामिल है और देशभर में लॉजिस्टिक सपोर्ट, सैनिकों की आवाजाही तथा विभिन्न ऑपरेशनल मिशनों में आज भी इसकी अहम भूमिका बनी हुई है।  इसी साल मार्च में भारतीय वायु सेना का एक सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत हो गई थी. विमान ने जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी. यह हादसा असम के कार्बी आंगलोंग जिले के बोकाजन सब-डिवीजन स्थित इंगलोंग एकोपी पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था, जो जोरहाट एयरबेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है।  IAF का भरोसेमंद कार्गो विमान है AN-32 भारतीय वायु सेना का Antonov AN-32 एक दो इंजन वाला कार्गो प्लेन है, जिसे मूल रूप से सोवियत संघ की एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो ने डेवलप किया था. यह विमान AN-26 का अपग्रेडेड वर्जन है और विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों, गर्म मौसम और कठिन परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया है. भारतीय वायु सेना ने 1980 के दशक से AN-32 को अपने कार्गो फ्लीट का अहम हिस्सा बनाया हुआ है।  भारतीय वायु सेना AN-32 का उपयोग सैनिकों, हथियारों, सैन्य उपकरणों और राहत सामग्री के परिवहन के लिए करती है. यह विमान हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में रसद आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह छोटे रनवे पर भी टेक ऑफ और लैंडिंग करने में सक्षम है. विमान लगभग 6.7 टन तक का भार ले जा सकता है और इसमें 40 से अधिक सैनिकों को एक साथ ले जाने की क्षमता है।  भारतीय वायु सेना के पास लंबे समय तक 100 से अधिक AN-32 विमान रहे हैं. समय-समय पर इनका अपग्रेडेशन भी किया गया है. इसमें मॉडर्न एवियोनिक्स, नेविगेशन और सिक्योरिटी सिस्टम का अपग्रेडेशन शामिल है. हालांकि, लंबे समय से सेवा में रहने के कारण इन विमानों को चरणबद्ध तरीके से नए परिवहन विमानों से बदलने की योजना पर भी काम चल रहा है. इसके बावजूद AN-32 आज भी भारतीय वायु सेना के सबसे भरोसेमंद परिवहन विमानों में गिना जाता है और आपदा राहत, सैन्य अभियानों और मानवीय सहायता मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  शुरुआती जानकारी के​ विमान, विमान की लैंडिंग के बाद उसमें आग लग गई. सूत्रों के मुताबिक, घटना जोरहाट एयरबेस के भीतर हुई. एयरबेस पर मौजूद फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए।  फिलहाल हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है. जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान में सवार क्रू और अन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. भारतीय वायुसेना घटना की जांच में जुट गई हैं. इस घटना को लेकर वायुसेना की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने का इंतजार है। 

चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन: भारत ने सफलतापूर्वक टेस्ट किया एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली डिफेंस सेक्टर में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में आज सुबह-सुबह एक बड़ी खबर तब सामने आई, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर बताया कि DRDO ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा का प्रदर्शन करने के लिए लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक किए गए. रक्षा मंत्री ने इस पोस्ट के साथ तीन मिसाइलों के परीक्षण की तस्वीरें भी साझा की है. रक्षा मंत्री के पोस्ट ने पोस्ट में यह भी लिखा कि DRDO के इस सफल परीक्षण से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिसके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को रोकने की क्षमता है. रक्षा मंत्री ने इस सफलता के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को बधाई दी है।  डीआरडीओ को मिली यह सफलता पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ाने वाला है. इन दोनों देशों के साथ भारत के सीमा सहित कई मुद्दों पर विवाद लंबे समय से है. ऐसे में डीआरडीओ को मिली यह सफलता न केवल दुश्मनों के ठिकानों को तबाह करने वाला है. बल्कि दुश्मन देशों की ओर से होने वाले खतरनाक हमलों को भी रोकने वाला है।  भारत की रक्षा अनुसंधान एंव विकास संगठन (DRDO) को मिली इस सफलता के बारे में एक्स पोस्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा- DRDO ने देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक टेस्ट किया है, जो दुश्मन के अलग-अलग तरह के खतरों से निपटने में मदद करेंगी।  उन्होंने आगे लिखा लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस वाले तीन फ़्लाइटों का टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए गए।  रक्षा मंत्री ने लिखा कि इस टेस्ट में मल्टी-लेयर्ड BMD क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया. इंटरसेप्टर ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया. इन सिस्टम को नई मिसाइल चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों से डिजाइन और विकसित किया गया है।  चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हुआ भारत इन सफल परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों में ला खड़ा किया है जिनके पास ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) तक की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता है. 'नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज' के पहले फ़्लाइट-टेस्ट के दौरान मध्यम दूरी की एंटी-शिप सुरक्षा का प्रदर्शन किया गया. इन अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने के लिए DRDO को बधाई। 

मिडिल ईस्ट में संकट गहराया: होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन अटैक, निशाने पर थे व्यापारिक जहाज

 नई दिल्ली भारतीय जहाजों पर हमलों के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कई ड्रोन दागे हैं. अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए कई ईरानी "वन-वे अटैक ड्रोन" मार गिराए. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने ही होर्मुज स्ट्रेट से निकल रहे भारतीय जहाजों पर भी ड्रोन अटैक की कोशिश की थी।  अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने के लिए कई अटैक ड्रोन लॉन्च किए थे. CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने इन सभी ड्रोन को मार गिराया. बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह अहम समुद्री गलियारा पूरी तरह खुला हुआ है और जहाजों की आवाजाही जारी है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने कई ईरानी ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया. अधिकारी के मुताबिक, ये ड्रोन कॉमर्शियल समुद्री यातायात के लिए खतरा बन सकते थे।  ईरान कर रहा भारतीय जहाजों पर हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं के बीच अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान पर भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. ट्रंप ने लिखा कि होर्मुज स्ट्रेट से निकल रहे भारतीय जहाजों पर किया गया ड्रोन हमला "पूरी तरह अस्वीकार्य" है. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे जल्द अपने रवैये में बदलाव करना होगा।  हालांकि, भारत या ईरान की तरफ से गुरुवार रात या उसके बाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास किसी भारतीय ध्वज वाले जहाज पर ड्रोन हमले की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. दोनों देशों की तरफ से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।  भारतीय जहाजों पर हमला और US राजनयिक तलब यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ने इसी सप्ताह दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया. भारत ने ओमान की खाड़ी में भारतीय क्रू वाले तीन व्यापारी जहाजों पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया है, इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. इसको लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात भी की है और विरोध दर्ज किया है।