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एक ही हमले की धमक: लाहौर-इस्लामाबाद-कराची तक मुनीर का कुनबा खतरे में, चीन पर भी दबाव

नई दिल्ली भारत ने पिछले दिनों ओडिशा के तट पर एक विनाशकारी मिसाइल का सफल ट्रायल किया है. इससे पहले डीआरडीओ की तरफ से तीन हजार किलोमीटर से भी ज्‍यादा के क्षेत्र के लिए हवाई कर्फ्यू यानी NOTAM जारी किया था. अब इसको लेकर विस्‍तृत जानकारी सामने आई है. दरअसल, भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया है, जो 5000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. खास बात यह है कि इस मिसाइल में ऐसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जो एक साथ अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग टार्गेट को एक साथ तबाह करने में सक्षम है. इस मिसाइल की जद में पूरा पाकिस्‍तान है, ज‍बकि उसके यार चीन के कई महत्‍वपूर्ण ठिकाने भी इस मिसाइल की नोंक पर होंगे. इसका मतलब यह हुआ कि इस मिसाइल से लाहौर से लेकर इस्‍लामाबाद, रावलपिंडी, कराची, पेशावर जैसे शहरों को कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्‍दील किया जा सकता है।  दरअसल, डीआरडीओ ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल यानी MIRV टेक्‍नोलॉजी से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया है. हालांकि, डीआरडीओ की तरफ से अग्नि मिसाइल के इस वैरिएंट के बारे में कुछ नहीं बताया गया है, लेकिन मुद्दे की बात यह है कि यह मिसाइल MIRV तकनीक से लैस है. MIRV टेक्‍नोलॉजी की मदद से एक ही मिसाइल से कई टार्गेट पर निशाना साधा जा सकता है. इस तकनीक से लैस मिसाइल को इसी वजह से ‘मिसाइल बस’ भी कहा जाता है. भारत ने 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर सामरिक मोर्चे पर बड़ा संदेश दिया है. इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की MIRV क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं।  हिन्‍द महासागर में बादशाहत! रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 9 मई को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परीक्षण की सफलता की पुष्टि की. बाद में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग स्टेशनों से प्राप्त टेलीमेट्री डेटा ने मिसाइल की पूरी ऑपरेशनल ट्रैजेक्टरी को सफल बताया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण को भारत की बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि देश बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रहा है. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि परीक्षण अग्नि-5 का था या अग्नि-6 संस्करण का, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अग्नि-5 परिवार का एडवांस MIRV अपग्रेड मान रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है. माना जा रहा है कि यह मिसाइल हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग लक्ष्यों को साधने में सक्षम है, जिससे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और ‘सेकेंड स्ट्राइक’ क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं।  MIRV से लैस मिसाइल इस वजह से खास     भारत ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल किया.     रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल में MIRV (Multiple Independently Targeted Reentry Vehicle) तकनीक का इस्तेमाल किया गया.     इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है.     परीक्षण में मिसाइल ने कई पेलोड को अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया.     सभी लक्ष्यों को हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक दायरे में चुना गया था.     मिसाइल की पूरी उड़ान पर ग्राउंड और जहाज आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई.     रक्षा मंत्रालय ने कहा कि लॉन्च से लेकर सभी पेलोड के लक्ष्य पर पहुंचने तक मिशन सफल रहा.     इस परीक्षण के साथ भारत ने फिर साबित किया कि वह एक मिसाइल से कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है.     मिसाइल का विकास DRDO की लैब्स ने देश की विभिन्न इंडस्ट्रीज के सहयोग से किया है.     परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौजूद रहे.     इससे पहले 11 मार्च 2024 को भारत ने पहली बार स्वदेशी अग्नि-5 मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ सफल परीक्षण किया था.     हालांकि सरकार ने मिसाइल की आधिकारिक रेंज नहीं बताई, लेकिन NOTMAR नोटिस के आधार पर इसकी मारक क्षमता करीब 3,600 किलोमीटर मानी जा रही है. MIRV टेक्‍नोलॉजी के क्‍या फायदे? MIRV तकनीक रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल जहां एक वारहेड ले जाती है, वहीं MIRV तकनीक वाली मिसाइल एक साथ कई वारहेड लेकर अलग-अलग दिशाओं में हमला कर सकती है. इसमें डिकॉय और पेनिट्रेशन एड्स का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो जाता है. यही वजह है कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने इस तकनीक को अपनी रणनीतिक क्षमता का अहम हिस्सा बनाया हुआ है. अब भारत भी इस श्रेणी में मजबूती से शामिल होता दिखाई दे रहा है. यह परीक्षण मुख्य रूप से चीन को रणनीतिक संदेश देने वाला है. हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम में तेजी लाई है. शिनजियांग क्षेत्र में मिसाइल साइलो निर्माण, DF-41 जैसी MIRV मिसाइलों की तैनाती, हाइपरसोनिक हथियारों का विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं. ऐसे में भारत का यह परीक्षण सामरिक संतुलन कायम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. MIRV तकनीक आखिर होती क्या है? MIRV यानी Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle ऐसी मिसाइल तकनीक है, जिसमें एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु वारहेड लेकर जाती है. अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद ये वारहेड अलग-अलग दिशाओं में जाकर अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं. यानी एक मिसाइल से कई ठिकानों पर हमला संभव हो जाता है. भारत के हालिया परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत क्या रही? भारत ने उन्नत अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए MIRV तकनीक का सफल परीक्षण किया है. इस परीक्षण ने दिखाया कि भारत अब लंबी दूरी तक कई लक्ष्यों पर एक साथ सटीक हमला करने की क्षमता हासिल कर चुका है. इसे भारत की सामरिक ताकत में बड़ा इजाफा माना जा रहा है. चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में … Read more

डोरेमॉन के नोबिता का असली शहर जापान में मिला, फैंस ने की भावनाओं की झलक

टोक्यो   आप सभी अपने घर में कभी न कभी डोरेमॉन कार्टून तो देखा ही होगा। वही डोरेमॉन जो अपने गैजेट्स के लिए काफी फेमस है और उनसे अपने दोस्त नोबिता की मदद करता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है जिसमें डोरेमॉन के असली शहर को जिसमें स्कूल और बिल्डिंगों को हूबहू वैसा ही दिखाया गया है जैसा वे कार्टून की काल्पनिक दुनिया में हैं। एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने सार्थक सचदेवा ने जापान की लगभग 6,000 किलोमीटर की यात्रा करके ये जगह ढूंढ़ी है। वीडियो में जापान के एक शांत आवासीय इलाके की उनकी यात्रा को दिखाया गया है, जो लोकप्रिय कार्टून के नोबिता और डोरेमोन की दुनिया से काफी मिलता-जुलता है।   इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो  इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @sarthaksachdevva नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें सार्थक कैमरा अपनी ओर घुमाते हुए उत्साह से कहा कि वह इस घर को देखने के लिए भारत से जापान तक का लंबा सफर तय करके आए हैं। इसके बाद वीडियो में संकरी गलियों, छोटे घरों और शांत सड़कों के मनोरम दृश्य दिखाए गए, जिन्हें देखकर दर्शकों को तुरंत डोरेमॉन के जाने-पहचाने दृश्यों की याद आ गई।मोहल्ले से गुज़रते हुए, सार्थक ने उन बारीकियों की ओर इशारा किया जिन्हें पुराने प्रशंसक तुरंत पहचान गए। एक सड़क की ओर इशारा करते हुए उन्होंने समझाया कि दर्शकों ने नोबिता को श्रृंखला में अनगिनत बार "ठीक इसी सड़क" से स्कूल जाते, दोस्तों से मिलते या खेल के मैदान की ओर भागते हुए देखा है। हूबहू वैस ही दिखा नजारा  मोहल्ले का शांत वातावरण, साफ-सुथरी सड़कें और सादगीपूर्ण घर उस सौम्य, रोजमर्रा की सुंदरता को दर्शाते थे जिसने डोरेमॉन को पीढ़ियों से दर्शकों के लिए इतना सुकून भरा बना दिया था। वीडियो के कई दृश्य कार्टून के दृश्यों से हूबहू मिलते-जुलते थे, जिससे यह दौरा पर्यटन की बजाय बचपन की यादों में खो जाने जैसा महसूस हुआ। वीडियो के कैप्शन में लिखा था, "वास्तविक जीवन में डोरेमोन के ठिकाने।" हालांकि डोरेमॉन की कहानी टोक्यो में घटित होती है, लेकिन कई प्रशंसक इसकी दृश्य शैली को श्रृंखला की निर्माता फुजिको एफ. फुजियो से जुड़े वास्तविक जीवन के स्थानों से जोड़ते हैं, जिनका जन्म ताकाओका में हुआ था। यूजर्स को भी पसंद आया वीडियो  यह वीडियो स्कूल के बाद डोरेमॉन देखते हुए बड़े हुए लोगों के बीच तेज़ी से ऑनलाइन वायरल हो गया। कई दर्शकों ने माना कि मोहल्ले को असल ज़िंदगी में देखकर वे भावुक हो गए, और कई लोगों ने इसे बचपन का सपना सच होने जैसा बताया। कई लोगों ने कहा कि यह क्लिप उन्हें डोरेमोन के गैजेट्स, नोबिता के कारनामों और उस दुनिया की सादगी भरे एहसास की याद दिलाती है जो आज भी सालों बाद भी बेहद जानी-पहचानी लगती है। एक यूजर ने सिर्फ "रोंगटे खड़े हो गए" लिखा, जबकि दूसरे ने कहा, "सुनहरे दिन।" एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, "डोरेमॉन से जुड़ी हमारी बचपन की भावनाएं," जबकि चौथे व्यक्ति ने कहा, "इस वीडियो ने मेरा दिन बना दिया।"

2024 की राह में बीजेपी की भरपाई: बंगाल की सफलता और राष्ट्रपति चुनाव

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2024 लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत नहीं ला पाई थी, इसके बाद माना जा रहा था कि उसका दबदबा घटने लगेगा. लेकिन अब हालात फिर बदले हैं. पश्चिम बंगाल में दो-तिहाई से ज्यादा सीटों पर जीतना हो, या फिर दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव, सब में बीजेपी का प्रदर्शन दमदार रहा. ऐसे में अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी को अपर हैंड मिलेगा।  महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सहयोगी दलों के साथ बीजेपी ने चुनाव जीते. ये तीनों राज्य राष्ट्रपति चुनाव में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक महत्व वाले माने जाते हैं।  तीनों में NDA की जीत ने मानो लोकसभा में हुए नुकसान की भरपाई कर दी है. क्योंकि विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन से सहयोगियों के साथ भी शर्तों को तय करने की उसकी शक्ति कमजोर हो सकती थी।  बता दें कि 2024 में बीजेपी की सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 हो गई थी. इस गिरावट से 2022 में 10,86,431 की कुल संख्या वाले निर्वाचक मंडल (राष्ट्रपति चुनने वाले) में बीजेपी के वोटों को 44,100 का झटका लगा था. तब बीजेपी बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा पार करने के लिए टीडीपी और जेडीयू पर निर्भर थी, तब विपक्ष ने दावा किया था कि सरकार जल्द ही गिर जाएगी।  हालांकि, दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत है. कैसे मिलेगा फायदा राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद और विधानसभाओं के सभी निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल बनाते हैं. इसमें हर एक सांसद के वोट की वैल्यू बराबर (2022 में 700 थी) होती है. लेकिन विधायक के वोट का महत्व उसकी विधानसभा की जनसंख्या (1971 की जनगणना के अनुसार) के आकार पर निर्भर करता है।  जैसे, 2022 में उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट की वैल्यू 208 थी, जो सिक्किम के एक विधायक के वोट की वैल्यू (7) से लगभग 30 गुना अधिक थी. 2027 राष्ट्रपति चुनाव में भी यह नंबर कमोबेश उतना ही रहने के आसार हैं. ऐसे में बड़े राज्यों में जीत से बीजेपी को सीधा फायदा होगा।  जैसे, हरियाणा में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल. महाराष्ट्र विधानसभा में एनडीए की संख्या, जो 288 सदस्यों वाली है, पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 150 से अधिक से बढ़कर 237 विधायक हो गई है. बिहार विधानसभा में भी उसकी संख्या 125 से बढ़कर 202 हो गई है. पश्चिम बंगाल में अब उसके पास 77 विधायकों के मुकाबले 207 विधायक हैं।  ऐसे में अगले साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले, उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्वाचक मंडल में उसके 83,800 से अधिक वोटों का भारी दबदबा है।   

वर्क फ्रॉम होम से खजाना भरेगा: 1 करोड़ लोगों की 3-दिन की आदत से होगी ₹70,000 करोड़ की बचत

मुंबई  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. देश अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम आदमी की जेब पर पड़ता है. इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील बेहद अहम मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन की बचत के लिए कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम अपनाने की बात कही।  प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ एक अस्थायी सलाह नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा बचत और शहरी ट्रैफिक संकट से जुड़ा बड़ा आर्थिक संदेश है. अगर देश में बड़े पैमाने पर कंपनियां हफ्ते में 2 से 3 दिन वर्क फ्रॉम होम लागू कर दें, तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हो सकता है।  दरअसल भारत के बड़े शहरों- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम में करोड़ों लोग रोज ऑफिस आने-जाने के लिए निजी वाहन इस्तेमाल करते हैं. एक औसत कर्मचारी रोज 20 से 40 किलोमीटर तक सफर करता है. अगर सिर्फ एक करोड़ कर्मचारी भी हफ्ते में 3 दिन घर से काम करें और रोज औसतन 30 किलोमीटर की यात्रा बच जाए तो हर दिन करीब 30 करोड़ किलोमीटर की वाहन आवाजाही कम हो सकती है. सामान्य माइलेज के हिसाब से यह रोज लगभग दो करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत के बराबर बैठता है।  70,000 करोड़ रुपये की बचत इसी गणना को सालभर के स्तर पर देखें तो करीब 700 से 750 करोड़ लीटर ईंधन की बचत संभव है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी आर्थिक वैल्यू 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह रकम कई राज्यों के सालाना बजट के बराबर है. यानी सिर्फ काम करने के तरीके में बदलाव से भारत हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।  प्रधानमंत्री मोदी ने बीती रात देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल संयम के साथ करना समय की जरूरत है. उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां कंपनियां और संस्थान घर से काम करने की व्यवस्था पर फिर से विचार करें. पीएम का संकेत साफ था कि ऊर्जा बचत अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।  कोरोना काल में हो चुका है सफल प्रयोग कोरोना काल में भारत ने पहली बार बड़े स्तर पर देखा कि डिजिटल इकोनॉमी और रिमोट वर्किंग मॉडल कैसे लाखों लोगों के लिए प्रभावी साबित हो सकते हैं. आईटी, मीडिया, बैंकिंग, कंसल्टिंग और कई सर्विस सेक्टर कंपनियों ने बिना ऑफिस आए भी कामकाज जारी रखा. उस दौर में शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक कम हुआ, प्रदूषण घटा और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी. अब सरकार उसी अनुभव को सीमित लेकिन रणनीतिक रूप में फिर अपनाने की बात कर रही है।  वर्क फ्रॉम होम का सबसे बड़ा फायदा केवल ईंधन बचत नहीं है. इससे ट्रैफिक जाम कम होंगे, सार्वजनिक परिवहन पर दबाव घटेगा और शहरों में प्रदूषण का स्तर नीचे आएगा. कर्मचारी रोज के सफर में खर्च होने वाला समय परिवार या उत्पादक काम में लगा सकेंगे. कंपनियों के लिए भी ऑफिस स्पेस, बिजली और ऑपरेशन कॉस्ट में कमी संभव है।  हाइब्रिड मॉडल में हो सकती करोड़ों नौकरियां हालांकि, यह मॉडल हर सेक्टर में लागू नहीं हो सकता. मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन, रिटेल, हेल्थकेयर और फिजिकल सर्विस सेक्टर में कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी रहती है. लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में करोड़ों नौकरियां ऐसी हैं जिन्हें हाइब्रिड मॉडल में आसानी से चलाया जा सकता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन दे, राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन वर्क पॉलिसी जैसी पहल शुरू करे और बड़े शहरों में हाइब्रिड ऑफिस संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए, तो भारत अपने तेल आयात बिल में बड़ी कमी ला सकता है. इससे चालू खाते के घाटे पर दबाव घटेगा और रुपया भी मजबूत हो सकता है। 

NEET UG 2026 विवाद: पेपर लीक के शक में 14 गिरफ्तार, 30 लाख से 30 हजार में बिके सवाल, 120 प्रश्न मैच

 नईदिल्ली / जयपुर  देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर राजस्थान में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा में कथित गड़बड़ी, गेस पेपर और संभावित पेपर लीक की आशंका के बीच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और एंटी टेरर स्क्वॉड (ATS) लगातार जांच में जुटी हैं। मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि कई लोगों से पूछताछ जारी है। जांच के केंद्र में राजस्थान का सीकर जिला है, जहां परीक्षा से पहले छात्रों के बीच एक कथित “गेस पेपर” वायरल हुआ था।  हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शुरुआती स्तर पर पेपर लीक से इनकार किया है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने आए तथ्यों ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि वायरल गेस पेपर के 100 से अधिक सवाल वास्तविक NEET UG 2026 परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या करीब 125 बताई गई है। 2 मई की रात वायरल हुआ गेस पेपर जानकारी के अनुसार, नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यानी 2 मई की रात कुछ छात्रों तक एक गेस पेपर पहुंचा। यह गेस पेपर व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए साझा किया गया था और बाद में इसकी फोटोकॉपी भी कई जगहों पर बांटी गई। राजस्थान एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने खुद इस बात की पुष्टि की कि “गेस पेपर आया था। यह व्हाट्सएप पर आया और फोटोकॉपी की दुकान पर मिला। इसकी जांच चल रही है।” पहले 5-5 लाख तो परीक्षा से एक दिन पहले 30 हजार में बिका गेस पेपर जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआत में यह गेस पेपर कथित तौर पर 2 से 5 लाख रुपये में कुछ छात्रों तक पहुंचाया गया था। बाद में यही सामग्री 30 हजार रुपये तक में बेचे जाने की बात सामने आई। हालांकि, एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रकम किस स्तर पर और किन लोगों के बीच ली गई। केरल से आया था सैंपल पेपर: रिपोर्ट्स कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राजस्थान एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि केरल से एक सैंपल पेपर सीकर आया था, जिसमें करीब 150 प्रश्न वही थे जो परीक्षा में पूछे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 मई को राकेश मंडारिया नाम के काउंसलर के पास केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक चुरू के लड़के ने गेस पेपर भेजा। लड़के ने बताया कि दक्षिण भारत में ये गेस पेपर बिक रहे हैं। इस प्रकार यह पेपर कोचिंग संस्थानों, फॉटो कॉपी की दुकानों तक और छात्रों तक पहुंचा। हालांकि, मामले की जांच जारी है और एनटीए के आधिकारिक बयान के बाद ही स्थिति साफ होगी।   जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के सवाल सबसे ज्यादा मैच जांच में सामने आया कि वायरल गेस पेपर में शामिल बड़ी संख्या में सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। खासकर बायोलॉजी और केमिस्ट्री विषयों में समानता अधिक पाई गई। सूत्रों के मुताबिक, 400 से अधिक प्रश्नों के एक सेट में से करीब 125 प्रश्न वास्तविक परीक्षा में आए सवालों जैसे थे। यही वजह है कि मामला सामान्य “गेस पेपर” से आगे बढ़कर संभावित पेपर लीक और संगठित रैकेट की दिशा में जांच का विषय बन गया। एनटीए ने कहा- परीक्षा पूरी सुरक्षा के बीच हुई नीट यूजी 2026 विवाद बढ़ने के बाद एनटीए ने आधिकारिक बयान जारी किया। एजेंसी ने कहा कि 3 मई को परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार और पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आयोजित हुई थी। एनटीए ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए यह नोटिस जारी किया: एनटीए के मुताबिक, प्रश्नपत्र जीपीएस ट्रैकिंग वाले वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे। प्रश्नपत्रों पर यूनिक वॉटरमार्क लगाए गए थे। परीक्षा केंद्रों की निगरानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से की गई और उम्मीदवारों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी कराया गया। केंद्रों पर 5G जैमर भी सक्रिय थे। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्वीकार किया कि 7 मई को उसे अनियमितताओं से जुड़े इनपुट मिले थे, जिन्हें जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को भेजा गया। सीकर के हॉस्टलों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए एसओजी की टीमें सीकर पहुंचीं। यहां कई हॉस्टलों में छात्रों और युवकों से पूछताछ की गई। जांच अधिकारियों ने मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले हैं। एसओजी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह गेस पेपर आखिर कहां से आया, इसे किसने तैयार किया और इतनी बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक परीक्षा से कैसे मेल खा गए। क्या 600 नंबर के सवाल पहले ही पहुंच गए एसओजी की जांच में ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं जिन्होंने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नीट यूजी के 720 नंबर में से 600 नंबर के सवाल कुछ छात्रों तक पहले ही पहुंच गए थे। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) विशाल बंसल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'नीट यूजी परीक्षा को लेकर फैली तरह-तरह की भ्रांतियों के बारे में मैं आपको बताऊं, तो एक गेस पेपर है, जिसमें करीब 410 सवाल हैं। उन 410 सवालों में से तकरीबन 120 सवाल केमिस्ट्री में आए हुए बताए जाते हैं। बताया जा रहा है कि यह गेस पेपर स्टूडेंट्स के बीच काफी पहले से सर्कुलेट हो रहा था। यह असली एग्जाम से 15 दिन पहले, एक महीने पहले ही उन तक पहुंचना शुरू हो गया था। इसलिए, हमारी इन्वेस्टिगेशन का अभी इस बात पर फोकस है कि क्या इस गेस पेपर के आधार पर कोई चीटिंग या क्रिमिनल एक्टिविटी हुई है। हम इस मामले की एक्टिवली जांच कर रहे हैं और अभी इन्वेस्टिगेशन प्रोसेस में लगे हुए हैं।' क्या गेस पेपर 5-5 लाख रुपये में बिका? इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि गेस पेपर परीक्षा से दो दिन पहले 5-5 लाख रुपये में बिका लेकिन परीक्षा से एक रात पहले इसकी 30-30 हजार रुपये में बिक्री हुई। एसओजी ने यह भी बताया है कि हिरासत में लिए गए लोगों … Read more

मदर्स डे पर चीन: गलवान में मारे गए सैनिकों की प्रतिमाओं के सामने माताओं की आंसुओं भरी श्रद्धांजलि

बीजिंग  चीनी सेना में भ्रष्टाचार पर बढ़ते गुस्से के बीच बीजिंग ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एक भावनात्मक पैंतरा आजमाया है। मदर्स डे (10 मई) के मौके पर सरकारी मीडिया ने गलवान घाटी की झड़प में मारे गए सैनिकों की शोकाकुल माताओं के वीडियो दिखाए और एक राष्ट्रवादी माहौल बनाने की कोशिश की, जिससे भ्रष्टाचार की खबरों से लोगों का ध्यान हट जाए। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, मदर्स डे की पूर्व संध्या पर जून 2020 में गलवान घाटी सीमा संघर्ष में मारे गए जवानों- चेन शियांगरोंग, शियाओ सियुआन और वांग झूओरान की माताओं ने 'चीनी जन क्रांति के सैन्य संग्रहालय' का दौरा किया। ये महिलाएं यहां अपने बेटों की प्रतिमाओं को देखकर फूट पड़ीं और खूर रोईं। ये वीडियो चीन में खूब वायरल हो रहा है। मिलिट्री स्कैंडल के बीच गलवान का संदेश 'गलवान घाटी के शहीदों की मांएं, मदर्स डे से पहले अपने बेटों को दिल से याद कर रही हैं' शीर्षक वाले एक वीडियो में तीन मांओं के एक मिलिट्री म्यूजियम के दौरे को दिखाया गया गै। म्यूजियम में गलवान घाटी में मारे गए उनके बेटों की मूर्तियां थीं। वीडियो में दिखाया गया कि सात साल बीत जाने के बाद भी उनका दुख कम नहीं हुआ है। दुनियाभर में मदर्स डे को मातृत्व और परिवार के जश्न के तौर पर मनाया गया। वहीं चीन के सरकारी मीडिया ने दुख, बलिदान और मिलिट्री से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल करके सीमा विवाद से जुड़ी राष्ट्रवादी भावनाओं और देशभक्ति के किस्सों को मजबूत किया। यह चीनी मिलिट्री के एजेंडे को भी दिखाता है। 15 जून 2020 को गलवान में क्या हुआ था? दरअसल, 15 जून 2020 की रात लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। पूर्व समझौता के बावजूद चीनी सैनिकों द्वारा एलएसी पर निर्माण गतिविधियां बढ़ाने और तैनाती बदलने के प्रयास के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया। भारतीय सैनिकों ने चीनी हमले का जमकर मुकाबला किया। इस संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए, जबकि अन्य रिपोर्ट्स और खुफिया आंकड़ों के अनुसार चीन को 40 से ज्यादा सैनिकों के हताहत होने का सामना करना पड़ा था। भारतीय सेना के मुताबिक, कर्नल बी. संतोष बाबू के नेतृत्व में भारतीय जवान बातचीत के लिए चीनी पक्ष के पास गए थे, लेकिन चीनी सैनिकों ने विश्वासघात कर हमला बोल दिया। दोनों पक्षों के सैनिक पत्थर, लोहे की रॉड्स और कांटेदार डंडों से लैस होकर घंटों तक भिड़े। भारत ने हमेशा कहा कि उसके सैनिकों ने अदम्य बहादुरी से दुश्मन का सामना किया और सीमा की संप्रभुता की रक्षा की। जून 2020 में, लद्दाख के भारतीय इलाके में मौजूद गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हो गई थी. यह इलाका इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यह अक्साई चिन की ओर जाता है जिस पर भारत अपना दावा करता है और अभी यह चीन के कब्जे में है. 1975 के बाद से ये पहला मौका था जब भारत और चीन के बीच हुई सैन्य झड़प में सैनिकों की जान गई।  यह झड़प भारतीय क्षेत्र के पास चीन की अवैध गतिविधियों को लेकर शुरू हुई थी. चीन ने गलवान के इलाके में टेंट और निगरानी टावर लगाने शुरू किए थे. जब मना करने के बाद भी चीन नहीं माना तो भारतीय सैनिकों ने इसे नष्ट कर दिया. इसके कुछ दिन बाद जब एक भारतीय गश्ती दल इस इलाके में गया तो घात लगातर बैठे चीनी सैनिकों ने नुकीले हथियारों से हमला कर दिया. इसके बाद पीछे की चौकियों से भी भारतीय सैनिक पहुंच गए और दोनों पक्षों में भीषण संघर्ष हुआ. हालांकि इस दौरान किसी भी पक्ष ने बंदूकों का इस्तेमाल नहीं किया था. इस संघर्ष में ज्यादातर सैनिक ऊंचाई से श्योक नदी के ठंडे में पानी गिरने के कारण शहीद हुए थे।  चीन का एकतरफा नैरेटिव चीन ने इस घटना को लेकर कभी पूरा सच स्वीकार नहीं किया। लंबे समय तक अपने सैनिकों के नुकसान को छिपाए रखने के बाद उसने केवल चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी। अब मदर्स डे के बहाने जारी किए गए वीडियो में चीन केवल तीन सैनिकों की मौत का जिक्र कर एकतरफा कथा पेश कर रहा है। यहां बताना जरूरी है कि गलवान घाटी संघर्ष 1975 के बाद भारत-चीन सीमा पर सबसे घातक टकराव था। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कई महीनों तक तनाव रहा, हालांकि समय के साथ संबंधों में सुधार की प्रक्रिया जारी है। पांच साल बाद चीनी मीडिया द्वारा इस घटना को फिर से हाइलाइट करना और केवल अपने तीन सैनिकों का जिक्र करना प्रोपगैंडा की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कई रिपोर्ट्स चीनी पक्ष के ज्यादा नुकसान की पुष्टि करती हैं। चीन का रवैया उजागर इस वीडियो ने चीन की प्रोपेगैंडा मशीनरी के चुनिंदा रवैये को एक बार फिर उजागर किया है। चीन अक्सर ऐसे त्योहारों को पश्चिमी प्रभाव कहकर आलोचना करता है। हालांकि जब उनका इस्तेमाल सरकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने और देशभक्ति की भावना जगाने के लिए किया जा सकता है तो उन्हें अपना लिया जाता है। गलवान के सैनिकों की यह वीडियो चीन में ऐसे समय वायरल हो रही है, जब पीएलए के भ्रष्टाचार को लेकर ऑनलाइ बहस छिड़ी हुई है। इसकी वजह वे रिपोर्टें हैं, जिनमें बताया गया है कि 7 मई 2026 को पूर्व रक्षा मंत्रियों वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई लेकिन फिर इसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया। चीनियों में चर्चा चीनी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इन सजाओं की बात कर रहे हैं और इस ओर ध्यान दिला रहे हैं कि सशस्त्र बलों के भीतर करप्शन किस तरह से गहरी जड़ें जमा चुका है। कई लोगों का कहना है कि मिलिट्री के आला अधिकारी भाई-भतीजावाद, हथियारों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता की कमी और सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं।  

शपथ ग्रहण से रोकी गई तमिलनाडु की महिला मंत्री एस कीर्तना, कारण सामने आया

चेन्नई  तमिलनाडु की इकलौती महिला और सबसे युवा मंत्री एस कीर्तना सोमवार को विधानसभा में विधायक के रूप में शपथ ही नहीं ले पाईं। जानकारी के मुताबिक वह अपना इलेक्शन सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर पाईं और इसलिए उन्हें शपथ लेने से रोक दिया गया। विधानसभा के मुख्य सचिव के श्रीनिवासन ने उन्हें पहले शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया। वह पोडियम तक पहुंच गईं लेकिन जब श्रीनिवासन ने पूछा कि उन्होंने अपना इलेक्शन सर्टिफिके प्राप्त कर लिया है। इसपर कीर्तना ने इनकार कर दिया। शपथ लेने से क्यों रोका गया विधानसभा की कार्यवाही के सीधे प्रसारण में देखा गया कि जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष) की ओर मुख करके खड़े होते हैं जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाणपत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाणपत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है। पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, "ऐसा लगता है कि उनके पास उस समय निर्वाचन प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था। प्रमाणपत्र जमा नहीं कर पाने के कारण, वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें शपथ लेने की अनुमति देने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। अब वह निर्वाचन प्रमाणपत्र जमा करने के बाद किसी भी समय शपथ ले सकती हैं।" अधिकारी ने बताया कि सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे अपना प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से साथ लाएं। सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए भी यह बात साफ कर दी थी। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सहित सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने पहले अपने प्रमाणपत्र जमा किए और उसके बाद अधिकारियों के निर्देशानुसार संविधान के तहत पद की शपथ ली। कैबिनेट में नौवें स्थान पर काबिज कीर्तना, शपथ लेने के लिए आमंत्रित की जाने वाली अंतिम मंत्री थीं। शिवकाशी से चुनी गई हैं कीर्तना एस. कीर्तना शिवकाशी विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अशोकन जी. को 11,670 मतों के अंतर से हराया है। इस चुनाव में पूर्व मंत्री और अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेता के.टी. राजेंद्र बालाजी तीसरे स्थान पर रहे। तमिलनाडु विधानसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 233 है। मुख्यमंत्री विजय ने पेरम्बलुर और तिरुचि पूर्व दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, जिसमें से उन्होंने तिरुचि पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से इस्तीफा दे दिया है।

बंगाल में डबल इंजन सरकार की रफ्तार: सीएम की पहली कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले, बॉर्डर एरियाज की जमीन BSF को 45 दिनों में ट्रांसफर

कोलकाता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार अस्तित्व में आ गई है. शुभेंदु सरकार सत्ता में आते ही फॉर्म में आ गई. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 5 मंत्रियों के साथ अपनी पहली कैबिनेट बैठक की, जिसमें बॉर्डर पर फेंसिंग करने और बीजेपी के मारे गए 321 कार्यकर्ताओं को सम्मान देने समेत 6 अहम फैसले लिए गए। पहली कैबिनेट बैठक के बाद सीएम शुभेंदु ने बताया कि उनकी पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेश के साथ सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों में नौकरी के आवेदकों की आयु सीमा पांच साल बढ़ाने की मंजूरी दी गई. यह वादा गृह मंत्री अमित शाह ने किया था।  पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक की. इसमें पांच बड़े फैसले किए गए. मीटिंग में शुभेंदु के साथ सभी पांच कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का रोडमैप इस सरकार की प्राथमिकता होगी।  पहली कैबिनेट बैठक में राज्य के मतदाताओं, चुनाव आयोग और इस विशाल चुनाव प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया गया।  शुभेंदु सरकार के पहले पांच बड़े ऐलान 1. आयुष्मान भारत योजना को लागू किया जाएगा. राज्य और केंद्र सरकार मिलकर राज्य में इसे लागू करने के लिए काम करेंगे।  2. नियमों के मुताबिक, आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।  3. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार (ममता सरकार) ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।  4. बॉर्डर एरियाज में जमीन ट्रांसफर का काम आज से शुरू होगा. 45 दिनों के अंदर जमीन BSF को ट्रांसफर की जाएगी।   5. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बता दें कि बीजेपी का ऐसा दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।  नौकरी की सुरक्षा में विस्तार: कैबिनेट की बैठक में छठा अहम फैसला राज्य सरकार की सभी नौकरियों के लिए 5 साल का विस्तार दिया गया है. इस तरह से ये कदम पश्चिम बंगाल में शासन, सुरक्षा और कल्याण की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देते हैं. पश्चिम बंगाल में साल 2015 से कोई भर्ती नहीं हुई है, इसी वजह से सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा में 5 साल की वृद्धि की गई है आयुष्मान भारत लागू बीजेपी ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्‍ता में आने पर राज्‍य में आयुष्‍मान भारत स्‍कीम को लागू किया जाएगा. अब ये वादा पूरा होने जा रहा है. शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य ने आधिकारिक तौर पर केंद्र की स्वास्थ्य योजना 'आयुष्मान भारत' से जुड़ने का फैसला किया है. CM ने कहा कि अब PM की सभी योजनाएं बंगाल में लागू की जाएंगी।  नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और BNS लागू सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पिछली CM ममता बनर्जी द्वारा रोकी गई नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और तैनाती को मंजूरी दे दी गई है. साथ ही, बंगाल में अब तक लागू न हुई भारतीय न्याय संहिता यानी BNS आज से प्रभावी हो गई है. अब सभी नए केस नए कानून के तहत दर्ज होंगे।  2015 से बंद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सरकार ने माना कि 2015 से राज्य में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई. CM ने वादे के मुताबिक नई भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने का ऐलान किया.कैबिनेट बैठक के बाद CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ये फैसले "नए बंगाल" की दिशा तय करेंगे. विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।  आयुष्मान भारत योजना से गरीब और कमजोर परिवारों को इलाज मिलता है. इसमें हर साल पांच लाख रुपये तक सालाना कवरेज मिलता है. ये इलाज कैशलेस होता है. कैबिनेट बैठक के बारे में और जानकारी देते हुए सीएम शुभेंदु ने कहा, 'बंगाल के सीमावर्ती जिलों में लगातार बदलती जनसंख्या को देखते हुए, हमारे मंत्रिमंडल ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है. मुख्य सचिव और राज्य के भूमि एवं भू-राजस्व विभाग के सचिव को अगले 45 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है।  अधिकारी ने आगे बताया कि टीएमसी सरकार ने संविधान और जनता के साथ विश्वासघात किया और जानबूझकर बंगाल में जनगणना प्रक्रिया को रोके रखा ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण को रोका जा सके. लेकिन अब मंत्रिमंडल ने राज्य में परिपत्र को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दे दी है।  मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) मतलब नया आपराधिक कानून, जो पूर्ववर्ती आईपीसी और सीआरपीसी की जगह ले रहा है, राज्य में टीएमसी सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया था और कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में नए कानून को लागू करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।  बता दें कि बंगाल (293 सीट) में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है. इस चुनाव में बीजेपी को 207 सीट मिली हैं. वहीं सत्ताधारी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई।  चुनावी जीत के बाद शुभेंदु को सीएम बनाया गया. उन्होंने ही भवानीपुर विधानसभा से ममता बनर्जी को हराया है. भवानीपुर में शुभेंदु को 73,917 वोट मिले. वहीं ममता 58,812 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. उनको 15105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। 

सोमनाथ अमृत महोत्सव: पीएम मोदी ने हिस्सा लिया और जताई खुशी

सोमनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यहां पर आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जय सोमनाथ! यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। हम इस पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं।" उन्होंने आगे लिखा कि पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर पावनधाम सोमनाथ आकर दिव्य अनुभूति हुई है। इस अवसर पर मंदिर मार्ग पर भगवान सोमनाथ के भक्तों के जोश और प्रचंड उत्साह को देखकर मन अभिभूत और भावविभोर है! मैं आज यहां उस क्षण को जी रहा हूं, जिसका अनुभव भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर किया होगा। सोमनाथ अमृत महोत्सव का भक्तिमय वातावरण हर तरफ अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को गुजरात पहुंचे, जहां सोमनाथ में एक रोडशो किया। यह रोडशो सोमनाथ अमृत महोत्सव से पहले आयोजित किया गया था। गुजरात के गिर सोमनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। आज सुबह गुजरात के प्रभास पाटन में श्री सोमनाथ महादेव ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष महा पूजा में शामिल हुए, इसके बाद कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह संपन्न हुए, जो मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण की रीतियों के प्रतीक हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 11 तीर्थ स्थलों से लाए गए जल को मंदिर के शिखर पर अर्पित किया गया। 90 मीटर ऊंची क्रेन की सहायता से, मंदिर के शीर्ष पर कलश स्थापित किया गया। पीएम ने लिखा कि सोमनाथ में, हर कोने में भक्ति का अनुभव किया जा सकता है। पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अनगिनत लोग एक साथ एकत्रित हुए हैं। वह दिन वास्तव में भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक मील का पत्थर था। वहीं, भारतीय वायु सेना की 'सूर्य किरण' एरोबेटिक्स टीम ने बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के दौरान हवाई करतब दिखाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में एक 'विशेष महापूजा' में भी हिस्सा लिया। बता दें कि ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आयोजित समारोहों में मंदिर के जीर्णोद्धार और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1951 में इसके उद्घाटन की स्मृति को याद किया गया। धार्मिक समारोहों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जामनगर से सोमनाथ पहुंचने के बाद वहां रोड शो किया। वह रविवार रात गुजरात पहुंचने के बाद जामनगर में रुके थे। रोड शो में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे। इस दौरान प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए मंदिर के पास स्थित वीर हमीरजी सर्कल तक हेलीपैड से लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हजारों लोग जमा हो गए। जब उनका काफिला इलाके से गुजरा तो समर्थकों ने झंडे लहराए और नारे लगाए, जबकि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के कलाकारों ने मार्ग में निर्धारित स्थानों पर पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए।   अस्तित्व की गवाही और सनातन के गौरव की गौरवगाथा  यह नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में गर्व और श्रद्धा का भाव जाग उठता है. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अटूट आस्था, भारतीय सभ्यता की जीवटता, भारत भूमि के आत्मसम्मान और राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रतीक है. गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर केवल पत्थरों से बना एक देवालय नहीं है, बल्कि सनातन धर्म के कभी न हारने वाले संकल्प का सजीव तथ्य है. ‘सोमनाथ हमारा स्वाभिमान’… यह उस सत्य की घोषणा है जिसने सदियों के आक्रमणों, लूट और विध्वंस के बाद भी अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने दी. एक हजार साल पहले 1026 में महमूद गजनवी के हमले से लेकर आज तक सोमनाथ हमें बताता है कि आस्था को तोड़ा जा सकता है, लेकिन उसके विश्वास को मिटाया नहीं जा सकता।  सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर के किनारे स्थित है. यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है. पुराणों के अनुसार चंद्रदेव ने सबसे पहले सोने का मंदिर बनवाया था. बाद में रावण ने चांदी का, भगवान कृष्ण ने चंदन का और कई राजाओं ने पत्थर का मंदिर बनाया. यह स्थान केवल पूजा और अराधना का केंद्र नहीं थी, यहां व्यापार, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम होता था. लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते थे. मंदिर की भव्यता और धन-दौलत की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी।  विनाश का काला अध्याय और सनातन का धैर्य सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्षों की लंबी गाथा है. विदेशी आक्रांताओं ने इस मंदिर की अकूत संपदा और हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाने के लिए इसे बार-बार निशाना बनाया. महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक, हर बार मंदिर को तोड़ा गया, लूटा गया और अपवित्र करने का प्रयास किया गया. लेकिन हर विनाश के बाद, सनातनियों का संकल्प और भी मजबूत होकर उभरा।  1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया. उसने मंदिर लूटा, तोड़ा और लाखों श्रद्धालुओं की हत्या की. लेकिन यह पहला हमला नहीं था और आखिरी भी नहीं. अलाउद्दीन खिलजी, औरंगजेब समेत कई आक्रमणकारियों ने मंदिर को निशाना बनाया. इतिहासकार बताते हैं कि मंदिर को 16-17 बार तोड़ा गया. हर बार तोड़ने के बाद भारतीयों ने आत्मबल और आस्था के विश्वास से अपने स्वाभिमान को फिर से खड़ा किया. आक्रांताओं ने मंदिर की दीवारें तो ढहाईं, लेकिन वे लोगों के हृदय में बसे महादेव को नहीं निकाल सके. दरअसल, यह सिर्फ ईंट-पत्थर का खेल नहीं था, यह सनातन की अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण था।  लौह पुरुष का संकल्प और आधुनिक मंदिर का उदय स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ का आधुनिक पुनरुद्धार आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे बड़ी सांस्कृतिक घटना के रूप में वर्णित है. जूनागढ़ की आजादी के बाद, जब लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रभास पाटन की धरती पर पैर रखा तो उन्होंने समुद्र का जल हाथ में लेकर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया. उन्होंने निर्णय किया कि सोमनाथ मंदिर को फिर से भव्य रूप में खड़ा किया जाएगा. उनके इस … Read more

इंडेन, HPCL और भारत गैस का एलपीजी डिलीवरी पर ताजा अपडेट, जानें क्या बदला

नई दिल्ली एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी अब 100 पर्सेंट DAC कोड के जरिए होने लगी है। इससे एक भी सिलेंडर का दाएं-बाएं होना अब मुश्किल है। LPG सिलेंडर के डिस्ट्रीब्यूशन और सही उपभोक्ता तक उसकी पहुंच के लिए यह सिस्टम बेहद सुरक्षित है। हालांकि, फेक DAC कोड के जरिए लोगों को लूटने के लिए साइबर फ्रॉड भी सक्रिय हो गए हैं। LPG सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनियों ने DAC को लेकर अपडेट जारी की हैं। आइए देखें किसने क्या कहा और आगे खबर में यह भी जानेंगे कि असली और फेक DAC की पहचान कैसे करें? असली और फेक DAC कोड की कैसे करें पहचान LPG डिलीवरी मैसेज की पहचान को लेकर एचपीसीएल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि स्कैमर्स LPG डिलीवरी के नाम पर फर्जी मैसेज भेज सकते हैं, लेकिन असली HP Gas मैसेज की पहचान जानकर आप सुरक्षित रह सकते हैं। Delivery Authentication Code साझा करने से पहले हमेशा जांच करें। इस पोस्ट में कंपनी ने आगे लिखा है, "मैसेज आधिकारिक sender name “VM-HPGASc-S” से आया हो। उसमें 4 अंकों का OTP हो और OTP केवल सिलेंडर डिलीवरी के समय ही इस्तेमाल किया जाए। ध्यान रखें, HP Gas के कर्मचारी कभी भी फोन कॉल, WhatsApp या किसी संदिग्ध लिंक के जरिए OTP नहीं मांगते। अगर मैसेज जल्दबाजी में कार्रवाई करने को कहे, अजीब लगे या अलग फॉर्मेट में हो, तो उस पर भरोसा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। HP Gas के साथ साइबर फ्रॉड से बचें।" इसी तरह की अपील भारत गैस ने भी की है। इंडेन के उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह बताते हैं कि इंडेन के मैसेज को उदाहरण के साथ बताते हैं कि सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने सिलेंडर बुक कराया था या नहीं। अगर बिना बुक कराए कोई डिलीवरी मैसेज है तो उसपर ध्यान न दें। अगर बुक कराया तो यह देखें कि मैसेज किसी आधिकारिक सेंडर ID (जैसे VK-INDANE, VM-INDANE आदि) से आया हैं कि नहीं। इसके बाद यह देखें कि मैसेज में बुकिंग या इनवायस नंबर दिया गया है या नहीं और 6 अंकों का DAC Code है और इसे केवल डिलीवरी बॉय को शेयर करने की बात कही गई है या नहीं। अंत में Indane का नाम है या नहीं। DAC/OTP केवल तब शेयर करें जब डिलीवरी बॉय आपके घर सिलेंडर लेकर पहुंच जाए। उससे पहले कभी साझा न करें। एलपीजी सिलेंडर के क्या हैं आज के रेट इंडेन के मुताबिक बेंगलुरु में घरेलू ₹915.50 और कमर्शियल ₹3152 में बिक रहा है। हैदराबाद में घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट ₹965 और कमर्शियल ₹3315 है। इंदौर में घरेलू सिलेंडर 941 रुपये का है और कमर्शियल 3176.5 रुपये का। रायपुर में घरेलू सिलेंडर 984.5 रुपये और कमर्शियल 3294.5 रुपये में है। पटना में आज घरेलू सिलेंडर ₹1002.50 और कमर्शियल ₹3346.5 का है। जयपुर में एलपीजी घरेलू सिलेंडर ₹916.5 और 19 किलो वाला कमर्शियल ₹3099 में बिक रहा है। देहरादून में घरेलू सिलेंडर ₹932 और कमर्शियल ₹3129 का है। अंडमान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट ₹989 हैं तो कमर्शियल के ₹3490 है।