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मुंबई हुई पानी-पानी! भारी बारिश से जनजीवन ठप, सड़कें जलमग्न, ट्रेनें प्रभावित, स्कूल-कॉलेज बंद

मुंबई  मॉनसून की बारिश ने मायानगरी मुंबई की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने शहर को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है. सड़कें नदियों में तबदील हो गई हैं, घरों और दुकानों में पानी घुस गया है, लोकल ट्रेनें प्रभावित हैं. बारिश की वजह से लोगों की जिंदगी ठप हो गई है।  वसई-विरार, मालाड, अंधेरी, भांडुप, दादर, माटुंगा और नवी मुंबई जैसे इलाकों में कई सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया है. कई जगहों पर गाड़ियां पानी में फंस गई हैं. सड़कों पर सिर्फ कारों की छतें नजर आ रही हैं. इस बीच भारत मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों को बारिश से राहत नहीं मिलने की संभावना जताई है।  वहीं, भांडुप में सड़क का एक हिस्सा धंस गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. तेज हवाओं और बारिश के कारण पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए हैं, जिससे कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुई हैं. कई जगहों पर पेड़ गिरने से तबाही का मंजर सामने आया है. वहीं, मुंबई के उपनगरीय रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से लोकल ट्रेनें प्रभावित हैं. दादर, वडाला और घाटकोपर जैसे स्टेशनों पर रेलवे ट्रैक बारिश के पानी से लबालब हैं।  मुंबई में बीते 5 दिनों से मूसलाधार बारिश का दौर जारी है. पूरा शहर मानों तालाब बन गया है. सड़कों पर पानी जमा है. घरों-दुकानों में पानी भर गया है. गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है. कई जगहों पर तो रेलवे ट्रैक भी पानी में डूब गया है. तेज बारिश के बीच भांडुप इलाके में सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंसने से वहां खड़ी एक गाड़ी गड्ढे में समा गई. हालांकि, गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।  चाहे अंधेरी हो या नालासोपारा, वसई या विरार. हर तरफ मूसलाधार बारिश से हाहाकार मचा है. लगातार हो रही बारिश ने मुंबई के लोगों का जीवन दूभर कर दिया है. तस्वीरें गवाही दे रही हैं कि आखिर मॉनसून की बारिश के बीच मुंबई किस तरह की मुसीबत झेल रही है. गाड़ियां पानी के बीच फंसी हुई हैं. कहीं आना-जाना मुश्किल है. बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. सड़कों पर बढ़ता जलस्तर लोगों का संकट बढ़ा रहा है।  नालासोपारा का रेलवे ट्रैक बारिश के पानी में डूब गया है. जिसका सीधा असर लोकल ट्रेनों की आवाजाही पर पड़ रहा है. वसई इलाके का हाल तो और भी ज्यादा बुरा है. जहां पानी इतना ज्यादा भर गया है कि मानों पूरा इलाका टापू बन गया है. जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. करीब 30 से 40 सोसाइटियां पानी में घिरी हुई हैं. बारिश थम नहीं रही और लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही हैं।  पूरे पालघर में भारी बारिश से हाल बेहाल है. सड़कों पर घुटनों से ऊपर तक पानी है. लोग इसी मॉनसूनी आफत के बीच कहीं आने जाने को मजबूर हैं. मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है.उधर, प्रशासन ने लोगों को बेहद जरूरी यात्रा करने की सलाह दी है ताकि मौसम की मार किसी की जिंदगी पर संकट ना बने. बता दें कि मुंबई में हर साल की यही कहानी है, बारिश हुई और लोगों की जिंदगी आफत के बीच घिर जाती है।  नालासोपारा: स्टेशन परिसर में कमरभर पानी लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नालासोपारा पूर्व रेलवे स्टेशन परिसर में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है. स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क पर कमर तक पानी जमा होने से दफ्तर जाने वाले लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे स्टेशन तक पहुंचना पड़ रहा है.इस बीच, इलाके में एक विशाल होर्डिंग गिरने की घटना भी सामने आई है. गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।  मुंबई के मानखुर्द में भारी बारिश के बीच चार मंजिला चॉल ढही, हादसे में 6 लोगों की मौत मुंबई के मनखुर्द इलाके में भारी बारिश के बीच रविवार रात एक तीन मंजिला चॉल (झोपड़पट्टी जैसी इमारत) ढह गई. इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई है.बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, इस हादसे में चार महिलाओं और 2 पुरुषों की मौत हुई है. वहीं, एक घायल व्यक्ति का इलाज राजावाड़ी अस्पताल में चल रहा है।  स्कूल-कॉलेज बंद, बारिश के कारण परीक्षाएं टलीं भारी बारिश को देखते हुए सोमवार को मुंबई, पुणे, ठाणे और पालघर में सभी सरकारी, निजी और BMC चलित स्कूलों-कॉलेजों को छुट्टी घोषित कर दी गई है. मुंबई में IMD ने 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है तो वहीं पुणे में 'रेड अलर्ट' है. मुंबई विश्वविद्यालय ने 6 जुलाई को होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं. नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल जरूरी काम ने पर ही घर से बाहर निकलें। 

समुद्री सुरक्षा पर संकट गहराया: होदेइदाह के पास जहाज पर हमले से वैश्विक चिंता बढ़ी

नई दिल्ली लाल सागर में एक बार फिर समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिली है। यमन के पश्चिमी तट के निकट एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रविवार को इस घटना की पुष्टि की। हालांकि अभी तक किसी भी संगठन, समूह या गुट ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई है। UKMTO केंद्र ने एक आधिकारिक सूचना में बताया कि हमला तटीय शहर होदेइदाह के पास हुआ। होदेइदाह ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मजबूत नियंत्रण वाले इलाके में स्थित है। जहाज होदेइदाह से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम दिशा में था, जब अज्ञात सशस्त्र हमलावरों ने उस पर हमला किया। UKMTO ने स्पष्ट किया कि जहाज के चालक दल ने तुरंत हमले की सूचना दी। फिलहाल संबंधित अंतरराष्ट्रीय अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। हूती विद्रोहियों की धमकी बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में लाल सागर और अदन की खाड़ी में गुजरने वाले जहाजों पर हमले दोबारा शुरू करने की खुली धमकी दी थी। हालांकि, उन्होंने अभी तक इन धमकियों को अमली जामा नहीं पहनाया है। हूती प्रवक्ता ने इस घटना पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि हूतियों ने अक्टूबर 2023 से गाजा युद्ध के समर्थन में लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित संकरे बाब अल-मंडाब के आसपास अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया था। उन्होंने ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें और अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए। इन हमलों के कारण वैश्विक जहाजरानी कंपनियों को स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (केप ऑफ गुड होप) का लंबा और महंगा रास्ता अपनाना पड़ा। सोमाली समुद्री लुटेरों भी हैं ऐक्टिव लाल सागर संकट के बीच सोमाली समुद्री डाकू भी अदन की खाड़ी और आसपास के दूरवर्ती इलाकों में फिर से सक्रिय हो गए हैं। एक जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित बलहाफ बंदरगाह शहर से 76 समुद्री मील (लगभग 140 किलोमीटर) दक्षिण में एक और घटना हुई थी। UKMTO के अनुसार, चार सशस्त्र व्यक्ति छोटी नाव पर सवार होकर आए और एक जहाज के ब्रिज (नियंत्रण कक्ष) को मामूली नुकसान पहुंचाया। इस घटना को संदिग्ध समुद्री लुटेरों का काम माना जा रहा है। बता दें कि लाल सागर और अदन की खाड़ी विश्व व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यहां से रोजाना लाखों टन तेल, गैस, कंटेनर माल और अन्य सामान गुजरता है। आये दिन हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों के युद्धपोत क्षेत्र में गश्त बढ़ाए हुए हैं, इसके बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं।

सीमा पार संघर्ष तेज: तालिबान ने पाकिस्तान में ISIS नेटवर्क पर कार्रवाई की

नई दिल्ली अफगानिस्तान में ISIS के बढ़ते खतरे ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सेना, ISIS को संरक्षण दे रही हैं। इसी के जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान के भीतर कथित ISIS ठिकानों पर सीमा पार ड्रोन हमले किए हैं। बता दें कि यह भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों की सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। तालिबान सरकार का कहना है कि ISIS उसके शासन और अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। काबुल ने पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पर आरोप लगाया है कि वह ISIS को समर्थन देकर अफगानिस्तान के भीतर आतंकी हमलों को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, पाकिस्तान इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में ड्रोन से किए गए हमले ISIS की बढ़ती गतिविधियों के बीच तालिबान ने इस सप्ताह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सरानान और खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों में सीमा पार कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक, इन अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ऑपरेशन में ISIS और उसके सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें उसने 'बुराई और भ्रष्टाचार के समूहों' का अड्डा बताया। कई आतंकियों के मारे जाने का दावा अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कार्रवाई बेहद सटीक तरीके से की गई, जिसमें कई ISIS लड़ाके मारे गए और उनके ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। मंत्रालय ने दावा किया कि पूरे अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी भी आम नागरिक को नुकसान न पहुंचे। यह कार्रवाई 28 जून को अफगानिस्तान सीमा के पास पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब के रूप में भी देखी जा रही है। चीन की मध्यस्थता भी नहीं कर सकी तनाव कम काबुल और इस्लामाबाद के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस साल यह दोनों देशों के बीच दूसरा बड़ा सैन्य टकराव है। चीन की ओर से दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हो सकी हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवाद और हमलों को बढ़ावा देने के आरोप लगाते रहे हैं। भारत, रूस और मध्य एशिया की बढ़ी चिंता, रक्षा समझौते पर भी नजर विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में ISIS और उसकी कट्टरपंथी विचारधारा का विस्तार भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। आशंका है कि यह संगठन स्थानीय आतंकी समूहों के साथ मिलकर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है। अगले सप्ताह भारत-रूस संयुक्त आतंकवाद कार्य समूह की बैठक में सीमा पार आतंकवाद प्रमुख मुद्दा रहेगा। वहीं, पाकिस्तान भी मॉस्को के साथ काबुल के हालिया रक्षा समझौते के बाद अफगानिस्तान की बढ़ती सैन्य क्षमता को लेकर चिंतित बताया जा रहा है  मई में रूस और तालिबान ने हथियारों के आदान-प्रदान, लाइसेंसिंग, सैन्य तकनीक और संयुक्त विकास परियोजनाओं से जुड़े सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह तालिबान सरकार का किसी भी देश के साथ पहला रक्षा समझौता था, जिसे पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य सहयोग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है  

ब्रिटेन-जापान-इटली की साझेदारी तेज: ‘एजविंग’ को मिला एडवांस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट फंड

लंदन  ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) को आगे बढ़ाने वाले ज्वाइंट वेंचर, 'एजविंग' को छठी पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए 6.1 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह दुनिया के सबसे महत्वकांक्षी अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एविएशन प्रोग्राम में से एक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह कॉन्ट्रैक्ट GCAP एजेंसी ने दिया है, दो UK,जापान और इटली की सरकारों की ओर से इस प्रोग्राम को मैनेज करती है। यह कॉन्ट्रैक्ट फाइटर जेट के डिटेल्ड डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए फंड देगा। उम्मीद है कि यह एयरक्राफ्ट 2035 कर सर्विस में आ जाएगा। ब्रिटेन-इटली और जापान का ज्वॉइंट वेंचर एजविंग, ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स, इटली की लियोनार्डो और जापान एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रियल एन्हांसमेंट कंपनी का एक ज्वॉइंट वेंचर है। यह अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को विकसित करने के लिए तीनों देशों के प्रमुख एयरोस्पेस कंपनियों को एक साथ लाता है। अप्रैल 2026 में हुए शुरुआती £686 मिलियन के समझौते के बाद GCAP एजेंसी द्वारा एजविंग को दिया गया यह दूसरा इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट है। यह नया कॉन्ट्रैक्ट यूके द्वारा अपना डिफेंस इन्वेस्टमेंट प्लान पेश करने के कुछ हफ्ते बाद आया है, जिसमें अगले चार सालों में GCAP प्रोग्राम के लिए अरबों पाउंड का निवेश करने का वादा किया गया है। यह कॉन्ट्रैक्ट तीनों देशों के भरोसे को दर्शाता है- एजविंग एजविंग के सीईओ मार्को जोफ ने कहा, "यह कॉन्ट्रैक्ट तीनों देशों और हमारे GCAP एजेंसी पार्टनर्स द्वारा हम पर दिखाए गए भरोसे को दर्शाता है। यह भरोसा पहले इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट के तरह हुई तेजी से प्रगति से बना है।" उम्मीद है कि इस फंडिंग से डेवलपमेंट में तेजी आएगी, प्रोग्राम को लंबे समय कर फाइनेंशियल निश्चितता मिलेगी और पार्टनर देशों के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूती मिलेगी, क्योंकि एडवांस्ड मिलिट्री एविएशन में कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है। यह समझौता प्रोग्राम के कॉन्सेप्ट फेज से डिटेल्ड इंजीनियरिंग और डिजाइन फेज में जाने का भी संकेत देता है, जिससे यह 2035 में सर्विस में शामिल होने की राह पर बना रहेगा। GCAP छठी पीढ़ी का फाइटर जेट ज्वॉइंट प्रोग्राम GCAP छठी पीढ़ी के फाइटर जेट का एक ज्वॉइंट प्रोग्राम है जिसमें UK, जापान और इटली शामिल हैं। यह ब्रिटेन के 'टेम्पेस्ट' प्रोग्राम और जापान के 'F-X' फाइटर प्रोजेक्ट को मिलाकर एक कॉमन अगली पीढ़ी का कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की कोशिश है। यह विमान रॉयल एयर फोर्स के 'यूरोफाइटर टाइफून' और जापान के 'मित्सुबिशी F-2' की जगह लेगा। F-35 और चीन के J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के उलट, छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट को एक नेटवर्क वाले कॉम्बैट सिस्टम के मुख्य हिस्से के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। 2035 तक छठी पीढ़ी का फाइटर जेट लाने की प्रतिबद्धता GCAP फाइटर में एडवांस्ड स्टील्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मिशन मैनेजमेंट, सेंसर फ्यूजन, लंबी दूरी तक ऑपरेशन, सुरक्षित हाई-स्पीड डेटा शेयरिंग और ऑटोनॉमस लॉयल विंगमैन ड्रोन के साथ मिलकर काम करने की क्षमता जैसी खूबियां होने की उम्मीद है। इसमें ओपन-आर्किटेक्चर डिजाइन भी होगा, जिससे इसके सर्विस के समय के दौरान नए हथियार,सेंसर और सॉफ्टवेयर को तेज से जोड़ा जा सकेगा। 4.6 अरब पाउंड का यह कॉन्ट्रैक्ट GCAP के लिए अब तक के सबसे बड़े डेवलपमेंट माइलस्टोन्स में से एक है। यह 2035 तक छठी पीढ़ी का फाइटर जेट लाने के लिए तीनों पार्टनर देशों की प्रतिबद्धता को दिखाता है, क्योंकि देश अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की होड़ में लगे हैं।

धामी सरकार का विजन 2035: इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और आत्मनिर्भर उत्तराखंड पर फोकस

उत्तराखंड उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के 5 साल पूरे कर लिए हैं. इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर उन्होंने राज्य के लिए एक बड़ा विजन सामने रखा है. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य साल 2035 तक उत्तराखंड को पूरी तरह से एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच साल पहले उन्हें देवभूमि की सेवा का मौका मिला था. तब से उनकी सरकार का सफर जनसेवा, सुशासन और समर्पण के सिद्धांतों पर ही आगे बढ़ रहा है. सीएम धामी ने बताया कि उत्तराखंड को डेवेलप करने के लिए बुनियादी ढांचे, निवेश और चौमुखी विकास पर खास ध्यान दिया जा रहा है. इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश में एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की. इस कार्यक्रम का नाम 'सेवा, सुशासन और समर्पण: जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' रखा गया है. सीएम धामी ने बनाए कई रिकॉर्ड पुष्कर सिंह धामी ने पहली बार 4 जुलाई 2021 को उत्तराखंड के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी. वो राज्य के इतिहास में पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं. उनसे पहले सिर्फ कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी (2002-07) ही अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए थे. इसके साथ ही धामी ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है. वो उत्तराखंड में बीजेपी के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं. इससे पहले बीजेपी का कोई भी मुख्यमंत्री राज्य में पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका था. धामी साल 2021 में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी को दोबारा शानदार जीत दिलाई और दोबारा मुख्यमंत्री बने. हमारा लक्ष्य सिर्फ कार्यकाल पूरा करना नहीं: मुख्यमंत्री इस खास मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जनता का आभार जताया. उन्होंने कहा, 'ये मील का पत्थर सिर्फ उत्सव मनाने का मौका नहीं है. ये उत्तराखंड को देश का बेस्ट स्टेट बनाने के हमारे अटूट संकल्प को और मजबूत करने का क्षण है. हमारा टारगेट सिर्फ सरकार का कार्यकाल पूरा करना नहीं है, बल्कि हमारा मकसद एक आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाना है. हम साल 2035 तक उत्तराखंड को एक पूर्ण विकसित राज्य में बदलने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं.' इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, हेल्थ, पीने के पानी, सड़कें, कृषि, टूरिज्म, इंडस्ट्री, इन्वेस्टमेंट, स्वरोजगार और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर जोर दे रही है. उत्तराखंड को विकास योजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए उनका धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि जनता का प्यार और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. सीएम धामी ने गर्व जताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राजनीति से ऊपर उठकर कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए, जिन्हें लेने का साहस पिछली सरकारें नहीं दिखा पाईं. उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने, मदरसा बोर्ड को खत्म करने, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की नींव रखने और देश के सबसे सख्त धर्मांतरण विरोधी और नकल विरोधी कानूनों को बनाने का जिक्र किया. सीएम धामी ने इस मौके को और यादगार बनाते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने देहरादून जिले के लिए 219 करोड़ रुपये से ज्यादा की 51 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया.

शहरी आसमान में ड्रोन क्रांति: दवाइयों से पार्सल तक तेज और सस्ती डिलीवरी

नई दिल्ली  भारत के शहरी आसमान में अब ड्रोन सिर्फ एक तकनीकी अजूबा नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स का एक विश्वसनीय हिस्सा बन चुके हैं। भारत के शहरी क्षेत्रों में ड्रोन पहले से ही दवाइयां, निदान उपकरण, पार्सल और ई-कॉमर्स शिपमेंट पहुंचा रहे हैं। सरकार के ड्रोन नियम 2021, पीएलआई (PLI) योजना और 'डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म' जैसे कदमों ने इस तकनीक को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे कमर्शियल मार्केट में उतार दिया है। लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का क्विक-कॉमर्स (10 मिनट डिलीवरी) बाजार 10 अरब डॉलर को पार कर चुका है। ऐसे में जमीनी ट्रैफिक और डिलीवरी ड्राइवरों के बढ़ते खर्च (ईंधन, रखरखाव, कमीशन) से निपटने के लिए ड्रोन एक गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। दरअसल, ड्रोन को खराब सड़कों या ट्रैफिक की परवाह नहीं होती, इससे डिलीवरी लागत काफी कम हो जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा टियर-2 शहरों और ग्रामीण भारत को मिल रहा है, जहां बुनियादी ढांचे की कमी के कारण दवाइयां और जरूरी सामान समय पर नहीं पहुंच पाते थे। क्या खतरे में है डिलीवरी राइडर्स की नौकरी? विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन फिलहाल इंसानी कामगारों की जगह नहीं ले सकते। भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर को संभालने वाले लाखों गिग वर्कर्स केवल पैकेज नहीं पहुंचाते, वे पते का सत्यापन करते हैं, कैश-ऑन-डिलीवरी संभालते हैं और ग्राहकों की समस्याओं का तुरंत समाधान करते हैं। ड्रोन के आने से एविएशन सेक्टर में नए रोजगार भी पैदा हो रहे हैं, इससे रिमोट पायलट, मेंटेनेंस इंजीनियर और सॉफ्टवेयर डेवलपर। निष्कर्ष यह है कि ड्रोन मानव श्रम को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उसके पूरक बनेंगे। कुल मिलाकर भारत में ड्रोन डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह अंतिम मील तक सामान पहुंचाने वाले राइडर की जगह ले सकता है? क्या इससे लाखों डिलीवरी कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। इसका जवाब है नहीं, क्योंकि ड्रोन के प्रचलन में आ जाने से सिर्फ आपके नियमित मेडिकल सप्लाई और गोदामों में सामान का ट्रांसफर ही इससे होगा। जबकि आपके दरवाजे तक सामान पहुंचाने का जिम्मा अभी भी डिलीवरी राइडर्स के पास ही रहेगा। उद्योग के हालिया अनुमानों के अनुसार, भारत का लॉजिस्टिक्स बाजार 2033 तक लगभग दोगुना हो सकता है, जिसमें ड्रोन डिलीवरी विशेष अंतिम-मील संचालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की उम्मीद है। एडजिस्टिफाई के सह-संस्थापक और सीईओ उमंग शुक्ला के अनुसार, सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ड्रोन डिलीवरी को अब प्रयोग के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, "भारत में ड्रोन डिलीवरी अब जिज्ञासा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक विश्वसनीय हिस्सा बन गई है।" शुक्ला ने बताया कि नियामकों ने पहले ही चुनिंदा बीवीएलओएस कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है, जबकि वाणिज्यिक ऑपरेटर अलग-थलग प्रदर्शनों के बजाय सार्थक पैमाने पर स्वायत्त डिलीवरी चला रहे हैं।

दिल्ली से तमिलनाडु तक मौसम बिगड़ा: कई राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का खतरा

नई दिल्ली दिल्ली से लेकर तमिलनाडु तक बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बीच मौसम विभाग ने 15 राज्यों में अगले 10 घंटे के अंदर भीषण बारिश, आंधी और तूफान का अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में बारिश के दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिसकी रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। इसलिए लोगों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। इन हवाओं से किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। आइए बताते हैं कि किन 15 राज्यों के लिए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। इन 15 राज्यों में अलर्ट     दिल्ली     उत्तर प्रदेश     बिहार     राजस्थान     महाराष्ट्र     मध्य प्रदेश     पश्चिम बंगाल     तमिलनाडु     हिमाचल प्रदेश     उत्तराखंड     झारखंड     छत्तीसगढ़     ओडिशा     असम     त्रिपुरा दिल्ली-एनसीआर में कल कैसा रहेगा मौसम     दिल्ली-NCR (6 जुलाई- भारी बारिश का अलर्ट): सिविल लाइंस, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) कैंपस क्षेत्र, कमला नगर , मुखर्जी नगर, मॉडल टाउन, आजादपुर , सदर बाजार, कश्मीरी गेट सहित पूरे उत्तरी दिल्ली और ग्रेटर कैलाश, वसंत कुंज, वसंत विहार, डिफेंस कॉलोनी, हौज खास, पंचशील पार्क, आनंद लोक सहित दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में कल यानी 6 जुलाई को बारिश और आंधी तूफान का अलर्ट है। इसके साथ ही लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज, मयूर विहार, प्रीत विहार, आनंद विहार, कृष्णा नगर, गांधी नगर, शाहदरा, सीलमपुर, त्रिलोकपुरी, कोंडली, मंडावली, पांडव नगर, वसुंधरा एन्क्लेव और दिलशाद गार्डन सहित पूर्वी दिल्ली में भी झमाझम की चेतावनी है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में कल अधिकतम तापमान 37 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। उत्तर प्रदेश में कल कैसा रहेगा     यूपी (6 जुलाई- तेज हवाएं, बारिश): देवरिया, मऊ, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, बरेली, पीलीभीत, बहराइच और श्रावस्ती में भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग ने बिजनौर, मेरठ, अमरोहा, हापुड़, मोरादाबाद, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, इटावा, ओरैया, कन्नौज, हरदोई, उन्नाव, कानपुर में भी भीषण बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर, शामली, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, जौनपुर, कौशांबी सहित यूपी के कई जिलों में हल्की बारिश का अलर्ट है। राजधानी लखनऊ में कल अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम     बिहार (6 जुलाई- रेड अलर्ट जारी): गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, जहानाबाद, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, बांका, जमुई, लखीसराय, अरवल में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, पटना, बक्सर, भोजपुर, बेगुसराय, सहरसा, मुंगेर, भागलपुर, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, अररिया, किशनगंज में भी हल्की बारिश की चेतावनी है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। राजधानी पटना में कल अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम     महाराष्ट्र (6 जुलाई- रेड अलर्ट जारी): एक तरफ मुंबई के अंधेरी, मरीन ड्राइव, वसई-विरार, विवा कॉलेज रोड, आचोले रोड, सेंट्रल पार्क, विजय नगर–नागिनदास पाड़ा, गाला नगर, तुलिंज ब्रिज के आसपास भारी बारिश का अलर्ट है तो वहीं महाराष्ट्र के दूसरे जिले सतारा, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, पुणे, अहमदनगर, ठाणे, पालघर, रायगढ़, भिवंडी, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, चंदरपुर, गढ़चिरौली में भी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मुंबई में कल अधिकतम और न्यूनतमा तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा। राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम     राजस्थान (6 से 11 जुलाई- आंधी-बारिश तूफान): अगले 5 से 7 दिनों तक जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्री गंगानगर में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट है। वही, जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनूं, चुरू, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, दौसा, धोलपुर, सवाईं माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सिरोही में भी जमकर बारिश होगी। इन जिलों में 41 से 61 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। राजधानी जयपुर में कल अधिकतम तापमान 36 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मध्य प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम     मध्य प्रदेश (6 से 10 जुलाई- भारी बारिश की संभावना): धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, बुरहानपुर में भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, विदिशा, रायसेन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, गुना, नरसिंहपुर, सागर, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी, डिंडोरी, दमोह, पन्ना, रीवा, सतना में भी झमाझम की चेतावनी है। इन जिलों में 41 से 61 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 30 डिग्री तो वहीं, न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। पश्चिम बंगाल में कल कैसा रहेगा मौसम     पश्चिम बंगाल (6 जुलाई- हल्की बारिश होगी): कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, पूर्व और पश्चिम बर्दवान दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, मालदा, झाड़ग्राम, बांकुरा, पुरुलिया, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार,कूच-बिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, नादिया, पूर्वी बर्धमान, पश्चिमी बर्धमान और हुगली में हल्की बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। कोलकाता में कल न्यूनतम तापमान 28 और अधिकतम तापमान 30 डिग्री रहने का अनुमान है। तमिलनाडु में कल कैसा रहेगा मौसम     तमिलनाडु (6 से 10 जुलाई- भारी बारिश के आसार): तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अगले छह दिनों तक बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा मौसम बुलेटिन में कहा है कि 10 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। चेन्नई के लिए मौसम विभाग ने आंशिक रूप से बादल छाए रहने और शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है। कल चेन्नई का अधिकतम तापमान 37 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

हिंद महासागर तक निगरानी बढ़ी: चीन का नया रडार बना भारत के लिए रणनीतिक चिंता

नई दिल्ली भारत और चीन के बीच तनाव के बीच चीन ने म्यांमार सीमा से लगे अपने यूनान प्रांत में लार्ज फेस्ड एरे रडार (LPAR) चालू कर दिया है. इस रडार की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है. दावा है कि यह भारत के मिसाइल टेस्टों  को ट्रैक करने और हिंद महासागर के बड़े हिस्से पर नजर रखने में सक्षम है. ऐसे में इसे भारत की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. चीन पिछले कुछ वर्षों से अपनी निगरानी व्यवस्था लगातार मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में यूनान में लगाया गया यह नया LPAR रडार भी अहम माना जा रहा है. यह रडार दूर से ही बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगा सकता है, उसकी उड़ान पर नजर रख सकता है और उसकी जानकारी जुटा सकता है. इसकी रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है. चीन भारत के पूर्वी हिस्से, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े इलाके पर नजर रख सकता है. यह रडार ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से होने वाले मिसाइल टेस्टों को भी ट्रैक कर सकता है. भारत यहीं से अग्नि-5, K-4 और दूसरी आधुनिक मिसाइलों का टेस्ट करता है. अगर किसी देश को इन मिसाइलों की उड़ान और दूसरी तकनीकी जानकारी मिल जाए, तो वह अपनी रक्षा तैयारियों को उसी हिसाब से मजबूत कर सकता है. भारत के लिए चिंता की बात क्यों है? रक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिसाइल टेस्ट के दौरान मिलने वाला डेटा किसी भी देश के लिए काफी अहम होता है. इससे मिसाइल की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है और उसके खिलाफ नई रक्षा सिस्टम तैयार करने में मदद मिल सकती है. यही वजह है कि चीन के इस नए रडार को भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है. हिंद महासागर पर भी रख सकेगा नजर यूनान में इस रडार की लोकेशन ऐसी है कि चीन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े हिस्से की निगरानी भी कर सकता है. हिंद महासागर भारत के लिए बेहद अहम है. यहां भारतीय नौसेना की मजबूत मौजूदगी है. दुनिया के कई बड़े समुद्री व्यापार मार्ग भी यहीं से गुजरते हैं. ऐसे में इस इलाके में चीन की बढ़ती निगरानी भारत की चिंता बढ़ा सकती है. चीन का निगरानी नेटवर्क और मजबूत हुआ चीन के पास पहले से ही शिनजियांग और कोरला में ऐसे लंबी दूरी के रडार मौजूद हैं. अब यूनान में नया LPAR रडार चालू होने के बाद उसकी निगरानी क्षमता और बढ़ गई है. हालांकि, इस तैनाती पर भारत और चीन, दोनों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में भारत को अपनी एंटी-सर्विलांस तकनीक और रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना पड़ सकता है.

रहस्यमयी I-52 सबमरीन की कहानी, 50 साल बाद मिला मलबा लेकिन खजाना अब भी रहस्य

टोक्यो  साल 1944 की गर्मियों में एक पनडुब्बी अटलांटिक महासागर में उतरी और फिर किसी जादुई कहानी की तरह गायब हो गई। इसके बाद कई दशक तक इसके सही ठिकाने का पता नहीं चल पाया। I-52 नाम की इस जापानी पनडुब्बी I-52 में क्रू के अलावा जर्मनी भेजा जा रहा सोना, दूसरे सामान और मेडिकल सप्लाई थी। इसमें दो टन सोना लदे होने का अनुमान था। ऐसे में इसे गोल्ड सबमरीन कहा गया। आखिरकार खोजकर्ता 1995 में समुद्र के 3 मील नीचे उस जगह पहुंचे, जहां इसका मलबा था। खोजकर्ताओं ने देखा कि 50 साल से ज्यादा समय बाद पनडुब्बी का ज्यादातर हिस्सा सीधा खड़ा था। इससे दूसरे विश्व युद्ध की सबसे अनोखी समुद्री कहानियों में से एक सुरक्षित रही और अंदर मौजूद खजाने के बारे में बिना जवाब वाले सवाल पीछे छूट गए। हालांकि यह अभी एक रहस्य बना हुआ है कि क्या कीमती सोना आज भी इस मबले के भीतर है या नहीं। I-52 कैसे जापान की कीमती पनडुब्बी द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1944 तक जापान और जर्मनी के बीच व्यापारिक जहाजों का आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया था। दूसरे विश्व युद्ध में मित्र देशों की नौसेना के दबदबे की वजह से सतह पर चलने वाले जहाजों के यूरोप पहुंचने से पहले पकड़े जाने का खतरा था। ऐसे में दोनों देश लंबी दूरी तक जाने वाली पनडुब्बियों पर निर्भर हुए, जो हजारों मील के खतरनाक पानी में कीमती सामान ले जाती थीं। I-52 को बड़ी ट्रांसपोर्ट पनडुब्बी के तौर पर बनाया गया था। यह गायब होने से पहले जापान से निकली और अपना सामान लोड करने के लिए सिंगापुर रुकी। सामान में टिन, टंगस्टन और मोलिब्डेनम जैसी धातुएं, प्राकृतिक रबर, कुनैन और अफीम शामिल थे, जिनका इस्तेमाल सेना के लिए किया जाना था। इसके सबसे कीमती सामान में करीब दो टन सोना था, जिसे 146 बार (ईंटों) में पैक किया गया था। वे मैसेज जिनसे I-52 का पता चला I-52 सबमरीन काअटलांटिक में घुसने से पहले ही ब्रिटिश और अमेरिकी कोडब्रेकर्स जर्मन और जापानी नेवल कम्युनिकेशन को पढ़ने में कामयाब रहे थे। उनको पता चल गया कि I-52 के जर्मन सबमरीन U-530 से कहां मिलेगी और ट्रांसफर कब होगा। 23 जून 1944 की देर शाम I-52 अटलांटिक के बीच में U-530 से मिलने के लिए सतह पर आई इसी दौरान बोग के एयरक्राफ्ट ऊपर पहुंच गए। इसके बाद जापानी सबमरीन पर भीषण हमला हुआ। अगले दिन तक अमेरिकी जहाजों को समुद्र में तैरता हुआ मलबा और बड़ी मात्रा में रबर मिला, जिससे पुष्टि हुई कि सबमरीन नष्ट हो गई थी। U-530 बिना पकड़े गए बच निकला। I-52 पर सवार सभी 109 लोग मारे गए। पनडुब्बी पर बना रहा रहस्य युद्ध के समय यह तो पक्का था कि पनडुब्बी डूब गई है लेकिन किसी को ठीक-ठीक नहीं पता था कि वह कहां है। हमला रात में, खराब मौसम में और किसी भी तट से बहुत दूर हुआ था, जिससे ये पनडुब्बी दुनिया की नजरों से गायब रही। दशकों तक इसे खोजने की कोशिश हुई और आखिर में 2 मई 1995 को पाया गया कि समुद्र की सतह से 17,000 फीट से ज्यादा नीचे समुद्र तल पर सीधी खड़ी एक बड़ी पनडुब्बी का मलबा है। एक रिमोट से चलने वाले कैमरे को मलबे के ऊपर ले जाया गया, जिसने पिछले हिस्से (स्टर्न) के आस-पास की ऐसी डिटेल्स रिकॉर्ड कीं जो जापानी टाइप C3 ट्रांसपोर्ट पनडुब्बियों के खास डिजाइन से मेल खाती थीं। जहाज की हालत ने जांचकर्ताओं को हैरान कर दिया। टॉरपीडो से हुए नुकसान से ढांचा धीरे-धीरे पानी से भरा। इससे उसका बड़ा हिस्सा नीचे जाते समय सही-सलामत रहा। ऐसे में माना गया कि सोना इसके अंदर है। पनडुब्बी खींचती है ध्यान समुद्र की तलहटी से मिले मलबे के टुकड़ों ने कानूनी तौर पर सामान निकालने के अधिकारों का समर्थन किया लेकिन शुरुआती अभियान के दौरान सोना निकालने की कोई कोशिश नहीं की गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कीमती धातु पनडुब्बी के अगले हिस्से में रखी गई थी, जो 1944 से अछूता रहा है। अटलांटिक में I-52 के गायब होने के अस्सी साल से ज्यादा समय बाद भी यह पनडुब्बी ना केवल इसलिए ध्यान खींचती है कि इसमें खजाना होने का अनुमान है। बल्कि इसलिए भी कि इसकी खोज ने दिखाया कि कैसे युद्ध के समय कोड तोड़ने, पुराने रिकॉर्ड की जांच और आधुनिक तकनीक से एक ऐसे रहस्य को सुलझाया जा सकता है जिसे कई पीढ़ियों के जांचकर्ता नहीं सुलझा पाए थे। सोना अभी भी वहीं हो सकता है! एक ऐसे ढांचे के अंदर, जो अस्सी साल से तीन मील पानी के नीचे है और उस दबाव से सुरक्षित है, जिसने उसे कुचल दिया होता। I-52 की कहानी यह दिखाती है कि समुद्र की तलहटी में वह सोना हो सकता है, जो पर दशकों की खोज के बावजूद अभी नहीं मिल पाया है। सोने का रहस्य अभी भी बरकरार है

साबांग पोर्ट से हिंद महासागर में भारत की बढ़ी ताकत? 6-8 जुलाई के दौरे से पहले PM मोदी की बड़ी चाल

जकार्ता  पीएम मोदी  6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर रहेंगे. ये दौरा समंदर सिक्योरिटी सिस्टम के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. उनकी इस यात्रा के पीछे सिर्फ दो देशों के पुराने रिश्ते नहीं हैं, बल्कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का वो सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक है, जिसकी स्क्रिप्ट पिछले कुछ सालों से लिखी जा रही थी. भारत और इंडोनेशिया के बीच वैसे तो कई समझौतों पर बातचीत चल रही है, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स से लेकर चीन तक, हर किसी की नजर सिर्फ एक ही प्रोजेक्ट पर टिकी है और वो है इंडोनेशिया का ‘साबांग पोर्ट’. जिससे समंदर का पूरा खेल ही पलट जाएगा।  साबांग पोर्ट: आखिर क्या है इस बंदरगाह की पूरी कहानी? इंडोनेशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा गहरी हुई है लेकिन इस पूरी पार्टनरशिप का जो सबसे कीमती ‘हीरा’ है, वो है साबांग पोर्ट प्रोजेक्ट. सबांग इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बिल्कुल उत्तरी छोर पर स्थित एक छोटा सा बंदरगाह है. दिखने में ये जगह बहुत शांत और साधारण लग सकती है, लेकिन जब आप इसे दुनिया के नक्शे पर देखेंगे तो आपको समझ आएगा कि ये कोई मामूली बंदरगाह नहीं है. ये ठीक उसी जगह पर मौजूद है जहां से दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता ‘मलक्का स्ट्रेट’ शुरू होता है।  भारत की अंडमान और निकोबार द्वीप श्रृंखला से साबांग पोर्ट की दूरी महज 150 किलोमीटर के आसपास है. यानी भारत के अपने नेवल बेस से ये जगह इतनी पास है कि भारतीय नौसेना बहुत ही कम समय में यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है. पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान साबांग पोर्ट के कमर्शियल और मिलिट्री इस्तेमाल को लेकर जो ब्लूप्रिंट फाइनल हो रहा है, उसने चीन की रातों की नींद उड़ा दी है. भारत यहां केवल पैसे नहीं लगा रहा है, बल्कि वो इस पूरे इलाके की सुरक्षा का जिम्मा अपने हाथों में लेने की तैयारी कर रहा है।  मलक्का स्ट्रेट का वो सच, जिससे चीन को आते हैं बुरे सपने अब सवाल ये उठता है कि आखिर इस साबांग पोर्ट और मलक्का स्ट्रेट से चीन का क्या लेना-देना है और वो इससे इतना क्यों घबरा रहा है? इस बात को समझने के लिए हमें चीन की सबसे बड़ी कमजोरी को जानना होगा. चीन आज भले ही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अपनी सेना के दम पर पूरी दुनिया को आंखें दिखाता है, लेकिन उसकी लाइफलाइन एक बहुत ही संकरे समुद्री रास्ते के भरोसे टिकी है, जिसे मलक्का जलडमरूमध्य या चीन का ‘मलक्का डिलेमा’ कहते हैं. यs इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच स्थित एक बेहद पतली समुद्री पट्टी है।  चीन जितना भी कच्चा तेल खाड़ी देशों और अफ्रीका से खरीदता है, उसका लगभग 80% हिस्सा इसी मलक्का स्ट्रेट से होकर चीन के बंदरगाहों तक पहुंचता है. इसके अलावा चीन दुनिया भर में जो अपना माल एक्सपोर्ट करता है, उसका भी एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर मलक्का स्ट्रेट चीन के लिए एक गले की नली की तरह है, जिसके बिना न तो उसे खाना मिल सकता है और न ही वो सांस ले सकता है. अगर कभी ये रास्ता बंद हो गया, तो चीन की पूरी इंडस्ट्री और उसकी अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी।  चीन का ‘मलक्का डिलेमा’ और साबांग पोर्ट पर भारत का पहरा चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने सालों पहले एक शब्द का इस्तेमाल किया था- ‘मलक्का डिलेमा’ (मलक्का का धर्मसंकट). चीन को हमेशा से ये डर सताता रहा है कि अगर कभी भारत या अमेरिका के साथ उसका कोई बड़ा युद्ध या विवाद होता है तो भारतीय नौसेना अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर मलक्का स्ट्रेट के मुहाने को पूरी तरह ब्लॉक कर देगी. अगर ऐसा हुआ तो चीन का पूरा व्यापार ठप हो जाएगा और उसकी सेना बिना तेल के कमजोर पड़ जाएगी. चीन का यही सबसे बड़ा डर है जिसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा जाता है।  अब सोचिए इसी मलक्का स्ट्रेट के ठीक एंट्री पॉइंट पर स्थित साबांग पोर्ट को जब भारत डेवलप कर रहा है, तो इसका क्या मतलब हुआ? इसका सीधा सा मतलब यह है कि साबांग पोर्ट पर भारत की मजबूत मौजूदगी सीधे तौर पर चीन की इस सबसे बड़ी कमजोरी पर भारत का एक पक्का पहरा बिठा देती है. इस बंदरगाह के पूरी तरह एक्टिव होने के बाद भारतीय नौसेना मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले चीन के हर एक जहाज, हर एक सबमरीन और हर एक हरकत पर चौबीसों घंटे सीधी नजर रख पाएगी. ये चीन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है क्योंकि अब तक वो हिंद महासागर में भारत को घेरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर चीन को उसी के रास्ते पर घेर लिया है।  पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा जियोपॉलिटिक्स की नई स्क्रिप्ट पीएम मोदी की इस इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जब साबांग पोर्ट पर अंतिम मुहर लग रही है तो ये पूरी दुनिया को एक बहुत बड़ा मैसेज दे रहा है. अब तक चीन ये सोचता था कि वो अपनी आर्थिक ताकत के दम पर एशिया के छोटे देशों को डराकर रख सकता है लेकिन इंडोनेशिया जैसे बड़े और प्रभावशाली मुस्लिम बहुल देश ने भारत के साथ हाथ मिलाकर ये साफ कर दिया है कि वो इस इलाके में किसी एक देश की दादागिरी को स्वीकार नहीं करेगा. भारत और इंडोनेशिया का ये साथ ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ की असली ताकत को दिखाता है।  इस यात्रा के जरिए भारत न केवल साबांग पोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है, बल्कि दोनों देशों के बीच मैरीटाइम कोऑपरेशन को एक नए लेवल पर ले जा रहा है. आने वाले समय में अगर भारतीय नौसेना के जहाजों को साबांग पोर्ट पर लॉजिस्टिक सपोर्ट और रीफ्यूलिंग की सुविधा मिल जाती है तो चीन के लिए हिंद महासागर और मलक्का स्ट्रेट के आसपास मनमानी करना नामुमकिन हो जाएगा. पीएम मोदी की ये चाल बताती है कि भारत अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि ऑफेंसिव कूटनीति पर चल रहा है और चीन की हर चाल का जवाब उसके अपने ही इलाके में जाकर दे … Read more