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चाय बागानों में महिला कामगारों के कल्याण को लेकर सरकार गंभीर, मांडविया का खुलासा

मांडविया का बयान: सरकार चाय बागानों की महिला कामगारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध चाय बागानों में महिला कामगारों के कल्याण को लेकर सरकार गंभीर, मांडविया का खुलासा मांडविया ने कहा: चाय बागानों में काम करने वाली महिलाओं के लिए सरकार उठाएगी कदम नयी दिल्ली सरकार ने  कहा कि नयी लागू श्रम संहिताओं के माध्यम से बागान मजदूरों खासकर चाय बागानों में काम करने वाली महिला श्रमिकों के कल्याण के कई प्रावधान किये गये हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने लोक सभा में प्रश्न काल के दौरान कांग्रेस के गौरव गोगोई के सवाल के जवाब में कहा कि इन श्रमिकों के न्यूनतम वेतन, मातृ अवकाश, स्वास्थ्य सुविधा, बेहतर शौचालय, बच्चों के लिए पालना घर, उत्पीड़न से बचाव आदि के व्यापक एवं समुचित प्रावधान 21 नवंबर से लागू चार श्रम संहिताओं में किये गये हैं। श्री मांडविया ने कहा कि बागान मालिकों, यूनियन और सरकार के बीच होने वाली वार्ताओं में महिला श्रमिकों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के भी प्रावधान किये गये हैं। महिला श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार गंभीर है और उनके कल्याण के लिए जरूरी कदम उठाये जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की प्रणीति शिंदे के प्रश्न के उत्तर में कहा कि सरकार महाराष्ट्र खास शोलापुर क्षेत्र में महिला बीड़ी कामगारों के कल्याण के लिए भी कई उपाय किये हैं। उनके वेतन और अन्य सुविधाओं में कोई दिक्कत न हो, इस पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनकी बेहतर सेहत सुनिश्चित करने के लिए 40 वर्ष के कामगारों के स्वास्थ्य की नियमित जांच के भी इंतजाम किये गये हैं। 

‘पायजामा टिप्पणी’ को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने जताई कड़ी नाराजगी

नई दिल्ली देश की सर्वोच्च अदालत ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों में अदालतों द्वारा की जाने वाली टिप्पणियों और फैसले लिखने के तरीके पर एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले पर, जिसमें कहा गया था कि ‘पायजामा का नाड़ा तोड़ना और स्तनों को पकड़ना रेप के प्रयास के आरोप के लिए पर्याप्त नहीं है,’ सीजेआई सूर्य कांत ने बेहद सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अदालतों को, विशेषकर उच्च न्यायालयों को, फैसले लिखते समय और सुनवाई के दौरान ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियों से हर हाल में बचना चाहिए. शीर्ष अदालत ने न केवल उस फैसले को खारिज किया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि वह अब देश भर की अदालतों के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करेगी ताकि भविष्य में किसी भी पीड़ित की गरिमा को न्यायिक आदेशों में ठेस न पहुंचे. संवेदनशीलता की कमी पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए गहरी चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने माना कि जिस तरह से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी के कृत्यों को तकनीकी आधार पर “कम गंभीर” बताया, वह न्यायिक औचित्य के खिलाफ है. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, हम व्यापक दिशानिर्देश जारी करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्यायिक प्रक्रिया में कुछ हद तक संवेदनशीलता बनी रहे. अदालतों को, और खास तौर पर हाईकोर्ट्स को ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियों से बचना चाहिए जो समाज में गलत संदेश देती हों और पीड़ित के दर्द को कम करके आंकती हों. यह मामला केवल एक फैसले को पलटने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक नजीर (Precedent) बनाने का फैसला किया है. कोर्ट का मानना है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में अगर जज शारीरिक संपर्क की बारीकियों को लेकर असंवेदनशील व्याख्या करेंगे, तो इसका सीधा असर न्याय प्रणाली पर जनता के भरोसे पर पड़ेगा. क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का विवादित फैसला? इस पूरे विवाद की जड़ इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह फैसला था, जिसने कानूनी जगत और समाज दोनों को हैरान कर दिया था. एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) के तहत लगे आरोपों को हटा दिया था. हाईकोर्ट ने अपने तर्क में कहा था कि यद्यपि आरोपी ने पीड़िता के स्तनों को पकड़ा और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ा, लेकिन उसने शारीरिक संबंध बनाने का कोई और प्रयास नहीं किया.” इस आधार पर हाईकोर्ट ने इसे रेप का प्रयास न मानते हुए केवल ‘छेड़छाड़’ या महिला की गरिमा भंग करने का मामला माना था. हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद आपत्तिजनक माना. शीर्ष अदालत ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया था, जो यह दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को कितना गंभीर मानता है. पीड़ित ऐसी स्थिति से समझौता नहीं कर पाएंगे सुनवाई के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब जस्टिस सूर्य कांत ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि अगर अदालतें इस तरह का दृष्टिकोण अपनाएंगी, तो पीड़ित न्याय की उम्मीद कैसे करेंगे? उन्होंने टिप्पणी की, पीड़ित ऐसी स्थिति से समझौता नहीं कर पाएंगे. इसका अर्थ स्पष्ट था, जब एक महिला यौन हिंसा का सामना करती है, तो वह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक आघात से भी गुजरती है. ऐसे में अगर अदालत यह कहे कि ‘नाड़ा तोड़ना’ रेप की कोशिश नहीं है क्योंकि आरोपी आगे नहीं बढ़ा, तो यह उस मानसिक आघात को नकारने जैसा है जो पीड़िता ने उस क्षण में महसूस किया होगा. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि अपराध की गंभीरता को केवल शारीरिक क्रिया की पूर्णता से नहीं, बल्कि आरोपी के इरादे (Intent) और पीड़िता पर पड़े प्रभाव से मापा जाना चाहिए. दिशानिर्देश बनाने का सही समय सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि इस मुद्दे पर स्पष्ट गाइडलाइन्स बनाई जाएं. कोर्ट ने कहा, दिशानिर्देश बनाने का यही सही समय है, नहीं तो इसका पीड़ितों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. अक्सर देखा गया है कि निचली अदालतें और कई बार हाईकोर्ट्स भी यौन अपराधों के फैसलों में ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं जो पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाती है या जो तकनीकी रूप से इतनी रूखी होती है कि उसमें मानवीय संवेदना खो जाती है. सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य अब एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करना है जो जजों को बताए कि संवेदनशील मामलों में फैसले लिखते समय किन शब्दों का चयन करना है और किन तर्कों से बचना है.

भारत बनेगा C-130J विमान का सबसे बड़ा मेंटेनेंस और सर्विसिंग हब

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद विमान C-130J सुपर हरक्यूलिस की अब भारत में ही भारी मरम्मत, रखरखाव और ओवरहॉल होगा. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) और अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने एक नए डिफेंस MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सेंटर की नींव रखी. यह भारत का सबसे आधुनिक MRO प्लांट होगा जो सिर्फ भारतीय वायुसेना ही नहीं, एशिया-प्रशांत के दूसरे देशों के C-130J विमानों की भी सर्विस करेगा. क्या-क्या होगा इस नए सेंटर में? विमान की पूरी बॉडी की भारी मरम्मत. इंजन, एवियोनिक्स और हथियार सिस्टम की ओवरहॉल. पुराने हिस्सों को नया और अपग्रेड करना. भारतीय इंजीनियरों-टेक्नीशियन की ट्रेनिंग. छोटे-बड़े भारतीय सप्लायरों को मौका. यह सेंटर 2026 के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा. 2027 के शुरू में पहला C-130J विमान मरम्मत के लिए आएगा.  दोनों कंपनियों के बड़े अधिकारी क्या बोले? लॉकहीड मार्टिन के सीओओ फ्रैंक सेंट जॉन ने कहा कि भारत के साथ हमारा रिश्ता 70 साल पुराना है. यह MRO सेंटर भारत को भारत में ही दुनिया की सबसे अच्छी सर्विस देगा. इससे भारतीय वायुसेना का विमान हमेशा तैयार रहेगा और दूसरे देश भी फायदा उठा सकेंगे. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के सीईओ सुकरण सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं, भारत की आत्मनिर्भरता की नई मिसाल है. हजारों नई नौकरियां आएंगी. नया स्किल आएगा और भारत एशिया का सबसे बड़ा C-130J हब बनेगा. भारत-लॉकहीड का पुराना रिश्ता और नया रिकॉर्ड     पिछले हफ्ते ही टाटा-लॉकहीड की कंपनी TLMAL ने 250वां C-130J का पूंछ (एम्पेनेज) बनाकर डिलीवर किया.        भारत ने 2011 में पहला C-130J लिया था. आज 12 विमान हैं.        यही विमान दौलत बेग ओल्डी (दुनिया की सबसे ऊंची एयरस्ट्रिप) पर उतरा था और हाल में न्योमा (लद्दाख) में भी लैंड किया. क्यों है यह खबर बहुत बड़ी? अब C-130J की भारी मरम्मत के लिए विमान को अमेरिका नहीं भेजना पड़ेगा – समय और पैसा बचेगा. भारतीय वायुसेना का फाइट मोड में तैयार रहना बढ़ेगा. हजारों नई हाई-स्किल जॉब्स आएंगी. भारत अब दूसरे देशों को भी C-130J की सर्विस दे सकेगा. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को सबसे बड़ी ताकत मिलेगी. C-130J सुपर हरक्यूलिस को दुनिया का सबसे मजबूत और भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट विमान कहा जाता है. भारत के पहाड़ों से लेकर समुद्र तक, राहत कार्य से लेकर स्पेशल ऑपरेशन तक – हर जगह यह काम आता है. अब उसकी सर्विस भी भारत में ही होगी.

जनवरी 2026 से कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक उत्पादों पर 13% वैट, कीमतें बढ़ेंगी

बीजिंग  चीन में कंडोम के दाम बढ़ने वाले हैं। सरकार ने घोषणा की है कि जनवरी 2026 से कंडोम सहित सभी गर्भनिरोधक उत्पादों पर 13% वैट लगाया जाएगा। जन्म दर में लगातार आ रही गिरावट के बीच यह बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार का तर्क है कि गर्भनिरोधक प्रोडक्ट महंगे होने पर लोग इनका उपयोग कम करेंगे, जिससे जन्मदर बढ़ाने में मदद मिलेगी। करीब 32 साल बाद चीन गर्भनिरोधक उत्पादों पर टैक्स लगाने जा रहा है। 1993 में जब ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू थी और जन्म नियंत्रण को बढ़ावा दिया जा रहा था, तब कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक साधनों को टैक्स फ्री रखा गया था। लेकिन अब नागरिकों को इन उत्पादों की खरीद पर 13% टैक्स चुकाना होगा। क्यों लिया गया यह निर्णय? 2024 में चीन की जनसंख्या तीसरे साल भी घटती हुई दर्ज की गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, 2024 में आबादी 1.409 बिलियन से घटकर 1.408 बिलियन हो गई। वहीं संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि प्रजनन आयु वर्ग (15–49 वर्ष) की चीनी महिलाओं की संख्या सदी के अंत तक दो-तिहाई से अधिक घटकर 100 मिलियन से कम रह जाएगी। इसी गिरती दर को रोकने के लिए सरकार ने नीतिगत बदलाव किया है। इन सेवाओं पर टैक्स में मिलेगी छूट जनसंख्या बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बच्चों की देखभाल और परिवार से जुड़ी कई सेवाओं को टैक्स से मुक्त कर दिया है। इनमें नर्सरी, किंडरगार्टन, बुजुर्गों की देखभाल, दिव्यांगजन सेवाएं और शादी से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।  

रेलवे की नई योजना: MP-दक्षिण भारत रूट की ट्रेनों की गति होगी दोगुनी, शिकायतें होंगी कम

नई दिल्‍ली  ट्रेन से झांसी होकर जाने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी है. अब सफर में समय कम लगेगा, पहले की तुलना में अब आधा समय बचेगा. भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए बड़ा कदम उठाया है. लूप लाइन की स्‍पीड दोगुनी कर दी गयी है. इसका फायदा झांसी डिवीजन से गुजरने वाली तमाम ट्रेनों को होगा. यानी अब सफर सुविधाजनक, पहले से और सुरक्षित होने के साथ ही समय बचाने वाला होगा. भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा और संरक्षा को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है. उत्‍तर मध्‍य रेलवे के झांसी डिवीजन में भी लगातार यही कवायद की जा रही है. डीआरएम अनिरुद्ध कुमार के अनुसार यात्रा में समय बचाने के लिए डिवीजन में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. इसी कड़ी में लूप लाइन की गति 15 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 30 किलोमीटर प्रति घंटे की गई है, जिससे ट्रेनों का ऑपरेशंस तेज और चुस्त-दुरुस्त हो रहा है. किन स्‍टेशनों में बढ़ेगी स्‍पीड झांसी डिवीजन के अनुसार पिछले माह झांसी डिवीजन के कुलपहाड़ स्टेशन के डाउन लूप लाइन पर गति 15 किमी/घंटा से बढ़ाकर 30 किमी/घंटा की गई (वीरांगन लक्ष्मीबाई झाँसी – महोबा खंड के बीच). इसी प्रकार चरखारी रोड स्टेशन के अप और डाउन दोनों लूप लाइनों की गति 15 से 30 किमी/घंटा की गई. टेहरका स्टेशन के डाउन लूप लाइन पर गति 15 से 30 किमी/घंटा की गई. वहीं रानीपुर रोड स्टेशन के डाउन लूप लाइन पर गति 15 से 30 किमी/घंटा की गई. इससे वीरांगन लक्ष्मीबाई झांसी – महोबा खंड के बीच रेल यातायात और भी बेहतर होगा. इससे कैसे होगा फायदा जिन ट्रेनों को संबंधित स्‍टेशनों से होकर जाना होता था, लूप लाइन पर जाते ही उनकी स्‍पीड कम हो जाती है. 15 की स्‍पीड से चलती हैं. इससे स्‍टेशन पहुंचने और छूटने के बाद निकलने में समय लगता था. लेकिन अब तेज स्‍पीड से निकलेंगी. इससे ट्रेन कम समय में पहुंच सकेंगी. और क्‍या होगा फायदा कई बार वंदेभारत, राजधानी समेत तमाम मेल-एक्‍सप्रेस ट्रेनें कई स्‍टेशनों से थ्रू यानी बगैर रुके निकलती हैं. ऐसे ट्रेनें मेल लाइन से गुजरती हैं. इस दौरान अगर कोई साधारण ट्रेन होती है तो उसे लूप लाइन में डाल दिया जाता है. जो अभी तक 15 किमी. की स्‍पीड से लूप लाइन में गुजरती थी. लेकिन अब ये ट्रेनें भी दोगुनी स्‍पीड से दौड़ सकेंगी. तीसरा फायदा भी लूप लाइन में ट्रेन की स्‍पीड धीमी होने की वजह से ट्रेन को गुजरने में समय लगता था. ऐसे में अगर कोई दूसरी लूप लाइन में आने वाली ट्रेन होती थी, तो उसे कई बार मेन लाइन में इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब लूप लाइन भी जल्‍दी खाली होगी, जिससे ट्रेन लूप लाइन में आएगी और मेन लाइन भी जल्‍दी खाली होगी. देशभर में हो रहा है यह काम भारतीय रेलवे के अनुसार ट्रेनों की स्‍पीड बढ़ाने के लिए देशभर के तमाम स्‍टेशनों में लूप लाइन के ट्रैकों को दुरुस्‍त करके स्‍पीड बढ़ाने का काम किया जा रहा है. इस तरह दूसरे स्‍टेशनों पर लूप लाइन की स्‍पीड जल्‍द ही बढ़ जाएगी.

दिन में दो बार चिकन राइस: कर्नाटक में स्ट्रीट डॉग्स के लिए नया फीडिंग प्लान

 बेंगलुरु  BBMP के ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) में बदलते ही, राजधानी के आवारा कुत्तों की किस्मत दोगुनी हो गई है। अब उन्हें दिन में एक बार की जगह दो बार 'चिकन राइस' देने की तैयारी चल रही है। BBMP के समय में, बेंगलुरु के आवारा कुत्तों को दिन में एक बार चिकन राइस देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन, बड़े पैमाने पर विरोध के बाद इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बस, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल, यूनिवर्सिटी, ट्रेनिंग सेंटर, मैदान और स्टेडियम जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें खास Bडॉग शेल्टर्सB में शिफ्ट किया जाए। साथ ही, कुत्तों के काटने से बचाने के लिए परिसरों में बाड़ लगाने का भी निर्देश दिया गया था। इस आदेश का पालन करने के मौके का फायदा उठाते हुए, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के अधिकारियों ने शेल्टर में शिफ्ट किए जाने वाले आवारा कुत्तों को दिन में दो बार चिकन राइस देने का फैसला किया है। 6 महीने में 'चिकन राइस' की कीमत ₹2.58 बढ़ी BBMP के समय में, चिकन राइस की कीमत 22.42 रुपये (17 जून तक) तय की गई थी। अब बाजार में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और समीक्षा के बाद, एक बार के चिकन राइस की कीमत 25 रुपये तय की गई है। इसका मतलब है कि 6 महीने में चिकन राइस की कीमत 2.58 रुपये बढ़ गई है। हर कुत्ते पर दिन में दो बार चिकन राइस के लिए 50 रुपये खर्च करने का फैसला किया गया है। चिकन राइस की रेसिपी चावल-150 ग्राम, चिकन-100 ग्राम, सब्जियां-100 ग्राम, तेल-10 ग्राम, नमक-5 ग्राम, हल्दी-2.5 ग्राम, कुल मिलाकर 367.5 ग्राम होगा। पकाने के बाद यह 600 ग्राम हो जाएगा। BBMP के समय में तैयार की गई रेसिपी की तुलना में, 50 ग्राम चावल बढ़ाया गया है और 50 ग्राम चिकन कम कर दिया गया है। लेकिन, हर चिकन राइस की कीमत 2.58 रुपये बढ़ा दी गई है। बेंगलुरु में हर कुत्ते पर महीने का खर्च 3035 रुपये आवारा कुत्तों को शेल्टर में शिफ्ट करने और उनके रखरखाव का खर्च तय करने के लिए सेंट्रल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कमिश्नर राजेंद्र चोलन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने खाना, स्टाफ की सैलरी, दवाएं, सफाई का सामान और प्रशासनिक खर्च मिलाकर हर महीने 3035 रुपये खर्च करने का फैसला किया है। पहले महीने में एक कुत्ते को पकड़ने, ट्रांसपोर्टेशन और वैक्सीनेशन के लिए 300 रुपये का अतिरिक्त खर्च जोड़ा गया है। टेंडर बुलाकर स्वयंसेवी संस्थाओं को शेल्टर होम्स के रखरखाव का कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए शहरी विकास के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पहले ही पांच नगर निगम आयुक्तों को निर्देश दे दिया है। फिलहाल 2,206 आवारा BBकुत्तों की पहचान अपनी संस्था के परिसर में मौजूद आवारा कुत्तों की जानकारी देने के लिए जारी किए गए नोटिस के जवाब में, अब तक शहर की अलग-अलग संस्थाओं से मिली जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु नॉर्थ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलाके में 1623, बेंगलुरु साउथ में 131, बेंगलुरु सेंट्रल में 222, बेंगलुरु वेस्ट में 37 और बेंगलुरु ईस्ट म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलाके में 193 आवारा कुत्ते हैं। इस संख्या के हिसाब से हर महीने 66.95 लाख रुपये खर्च करने होंगे। सालाना 8.03 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, और अगर आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती है, तो खर्च भी बढ़ेगा। यह खर्च संबंधित नगर निगमों को उठाने का निर्देश दिया गया है। बेंगलुरु में शेल्टर होम्स कहां-कहां? बेंगलुरु नॉर्थ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इलाके में अंबेडकर नगर, बेंगलुरु साउथ में एस. बिंगीपुरा, बेंगलुरु सेंट्रल में कैंटोनमेंट के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल परिसर, बेंगलुरु वेस्ट में कोट्टीगेपाल्या की निराश्रित समिति और बेंगलुरु ईस्ट में सादमंगला और वर्थुर में शेल्टर होम के लिए जगह की पहचान की गई है। हर 100 आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम का मासिक खर्च का ब्यौरा योजना खर्च (रुपये में)     कुत्ते को पकड़ना, ट्रांसपोर्टेशन, वैक्सीनेशन 30,000 (एक बार का खर्च)     खाना 1,50,000 (दिन में 2 बार)     स्टाफ की सैलरी 1,18,483 (एक पैरा-वेट, चार असिस्टेंट)BB     दवाओं का खर्च 15,000     सफाई का सामान 10,000     प्रशासनिक खर्च 10,000     कुल 3,33,483

सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता, बॉर्डर से 37 करोड़ की हेरोइन बरामद

अमृतसर  भारत-पाकिस्तान बॉर्डर अमृतसर के सीमावर्ती गांवो में लगातार ड्रोन की मूवमेंट जारी है। BSF अमृतसर सेक्टर की टीम ने सीमावर्ती गांव दावोके के इलाके में लगभग 6.45 किलो के 2 पैकेट पकड़े हैं जिसमें 12 छोटे-छोटे पैकेट हेरोइन के जब्त किए गए हैं। इसके अलावा सीमावर्ती गांव मुहावा में एक पौनै किलो का पैकेट भी जब्त किया गया है। जिस प्रकार से बड़े पैकेट ड्रोन से फैके जा रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि तस्करों की तरफ से बड़े ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं जो 8 से 10 किलो या इससे भी ज्यादा वजन उठाने में सक्षम है। हालांकि सरकार की तरफ से दावा किया जा रहा है की बॉर्डर के इलाके में एंटी ड्रोन सिस्टम लगाया गया है। लेकिन जिस प्रकार से हेरोइन और हथियारों की ड्रोन के जरिए डिलीवरी की जा रही है। उसे एंट्री ड्रोन सिस्टम बिल्कुल फेल साबित नजर आ रहा है। गत दिवस भी दावोके गांव में ही बीएसएफ ने 7 किलो होरोइन जिसकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कीमत 35 करोड़ रुपए जब्त किए थे।

पुतिन की यात्रा समाप्त, जेलेंस्की के आगमन से पहले भारत की कूटनीति सक्रिय

 नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सफल दिल्ली दौरे के बाद भारत ने कूटनीति की दूसरी सधी हुई चाल चली है. भारत अब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को दिल्ली में होस्ट करने की योजना पर काम कर रहा है. कूटनीतिक हलकों में इसे भारत की विदेश नीति का बैलेंसिंग एक्ट माना जा रहा है. माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में जेलेंस्की का दिल्ली दौरा हो सकता है, हालांकि अभी इस दौरे की तारीख तय नहीं हो सकी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत कई हफ्तों से यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क में है. भारत की य़े कोशिश राष्ट्रपति पुतिन के नई दिल्ली दौरे से पहले से ही चल रही है. इस बाबत भारतीय और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच कई हफ़्तों से बातचीत चल रही है, और पुतिन के भारत आने से पहले ही नई दिल्ली ज़ेलेंस्की के ऑफिस के संपर्क में थी.  जेलेंस्की की यात्रा से भारत को रूस-यूक्रेन युद्ध के दोनों पक्षों के साथ जुड़े रहने की कोशिशों को बल मिलेगा. भारत इस नीति पर कई महीनों से चल रही है. यही वजह है कि जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मॉस्को गए और पुतिन से मिले, तो इसके एक महीने बाद ही अगस्त में पीएम मोदी ने यूक्रेन का दौरा किया था.  यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के प्रस्तावित दौरे का समय और दायरा कई बातों पर निर्भर करेगा. इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना कैसे आगे बढ़ती है और युद्ध के मैदान में क्या होता है.  यूक्रेन की घरेलू राजनीति, जहां ज़ेलेंस्की की सरकार अभी एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले में फंसी होने के कारण दबाव में है. उसका भी इस प्रस्तावित दौरे पर असर पड़ सकता है.  खास बात यह है कि यूक्रेन का राष्ट्रपति अबतक सिर्फ तीन बार भारत आया है. ये मौके थे. 1992, 2002 और 2012.  पुतिन की यात्रा पर यूरोप की कड़ी नजर रही है. कई यूरोपीय दूतों ने भारत से मॉस्को पर युद्ध खत्म करने का दबाव डालने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आग्रह किया है. भारत ने लगातार कहा है कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता है.  इस बार भी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत तटस्थ नहीं है, भारत शांति के पक्ष में है. यूक्रेन युद्ध पर भारत की नीति काफी पहले से रही है.  फरवरी 2022 में यूक्रेन- रूस के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भारत पुतिन और ज़ेलेंस्की दोनों के संपर्क में रहा है. मोदी ने ज़ेलेंस्की से कम से कम आठ बार फोन पर बात की है, दोनों नेता अलग अलग प्लेटफॉर्म पर कम से कम चार बार मिल चुके हैं.  अगस्त 2024 में यूक्रेन दौरे पर गए पीएम मोदी ने ज़ेलेंस्की से कहा था, “हम युद्ध से दूर रहे हैं, लेकिन हम न्यूट्रल नहीं हैं, हम शांति के पक्ष में हैं. हम बुद्ध और गांधी की धरती से शांति का संदेश लेकर आए हैं.” भारत से हजारों सैकड़ों किलोमीटर दूर चल रहे यूक्रेन-रूस की लड़ाई की सीधा असर भारत की इकोनॉमी पर भी पड़ा है.  भारत की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी पेनाल्टी टैरिफ लगा दिया है. 

नासिक में बड़ा सड़क हादसा: गहरी खाई में गिरी कार, एक परिवार के 6 लोगों की दर्दनाक मौत

नासिक महाराष्ट्र के नासिक जिले में रविवार को एक भयावह सड़क दुर्घटना हुई, जब एक इनोवा कार 1000 से 1200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। कार में कुल सात लोग सवार थे, जिनमें से छह की मौके पर ही मौत हो गई। राहत-बचाव दल द्वारा बाद में एक और शव मिलने से मृतकों की कुल संख्या छह की पुष्टि हुई। मरने वाले सभी लोग नासिक के निफाड़ तालुका के पिंपलगांव बसवंत गांव के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है— कीर्ति पटेल (50) रसीला पटेल (50) विट्ठल पटेल (65) लता पटेल (60) पचन पटेल (60) मणिबेन पटेल (60) दर्शन के लिए जाते समय हुआ हादसा हादसा उस समय हुआ जब इनोवा कार (MH 15 BN 0555) में सवार सभी लोग सप्तश्रृंगी किले में माता के दर्शन के लिए जा रहे थे। दोपहर के समय कार अचानक मोड़ पर नियंत्रण खो बैठी और गहरी खाई में जा गिरी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, स्थानीय ग्रामीण और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम खाई से शवों को निकालने में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों ने उठाए सड़क मरम्मत पर सवाल इस दुर्घटना के बाद हादसे की वजह को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि: ➤ घाट के इस हिस्से की सड़क लंबे समय से खराब थी ➤ कई बार शिकायत करने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई ➤ ख़राब और फिसलन भरे मोड़ पर गाड़ी अक्सर असंतुलित हो जाती है

पीएम मोदी बोले, कांग्रेस मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक चुकी, ‘वंदे मातरम’ के संदर्भ में मुस्लिम भड़केंगे

नई दिल्ली  राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा में एक खास चर्चा हो रही है. इसमें भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इसके ऐतिहासिक महत्व और हमेशा रहने वाली विरासत पर रोशनी डाली जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चर्चा की शुरुआत की. इसमें इस मशहूर गीत के कई जरूरी और कम जाने-पहचाने पहलुओं पर भी बात हो रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राज्यसभा में चर्चा शुरू करने की उम्मीद है. बीजेपी के नेतृत्ववाली एनडीए सरकार को लोकसभा में बहस में हिस्सा लेने के लिए तीन घंटे दिए गए हैं, जबकि पूरी चर्चा के लिए कुल 10 घंटे तय किए गए हैं, क्योंकि बहस मंगलवार 9 दिसंबर को राज्यसभा में भी होगी. दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई. कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए थे: पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर कहा, 'पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था कि 'आनंद मठ में वंदे मातरम का बैकग्राउंड मुसलमानों को परेशान कर सकता है.' उन्होंने यह भी कहा, 'मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम का कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया था. मुहम्मद अली जिन्ना ने 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ से वंदे मातरम के खिलाफ नारा लगाया था. मुस्लिम लीग की बेबुनियाद बातों का कड़ा और मुंहतोड़ जवाब देने के बावजूद, नेहरू ने वंदे मातरम की जांच शुरू कर दी. इसके पांच दिन बाद नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना की भावना से सहमति जताई और लिखा, 'आनंद मठ में वंदे मातरम का बैकग्राउंड मुसलमानों को परेशान कर सकता है.' इसके बाद कांग्रेस ने कहा कि 26 अक्टूबर से बंगाल में वंदे मातरम के इस्तेमाल की जांच की जाएगी. दुर्भाग्य से, 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम पर समझौता कर लिया. उन्होंने गाने को दो हिस्सों में बांट दिया. इस फैसले के पीछे सामाजिक सद्भाव का कारण था, लेकिन इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए थे. यह माइनॉरिटीज को खुश करने का उनका तरीका था. बाद में कांग्रेस को घुटने टेकने पड़े और भारत के बंटवारे के लिए राजी होना पड़ा. कांग्रेस की नीजि आज भी वही हैं. इस तरह इंडियन नेशनल कांग्रेस मुस्लिम लीग कांग्रेस (MLC) बन गई है. आज भी कांग्रेस और उसकी साथी पार्टियाँ वंदे मातरम का विरोध करती है और इसके आस-पास विवाद पैदा करने की कोशिश करती है.' लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘जो वंदे मातरम् 1905 में महात्मा गांधी को राष्ट्रगान के रूप में दिखता था… वंदे मातरम् इतना महान था, इसकी भावना इतनी महान थी तो फिर पिछली सदी में इसके साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों हुआ? वंदे मातरम् के साथ विश्वासघात क्यों हुआ? वह कौनसी ताकत थी जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावना पर भारी पड़ गई जिसने वंदे मातरम् जैसी पवित्र भावना को विवादों में घसीट दिया.’ उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग के बयानों का जवाब देने के बजाय नेहरू जी ने सुभाष बाबू को पत्र लिखा और कहा कि मैंने वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि पढ़ी है और मुझे लगता है कि यह मुसलमानों को भड़का सकता है. वंदे मातरम पर पीएम मोदी के संबोधन के बाद लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने सदन में कांग्रेस की बात रखी. उन्होंने पीएम मोदी के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि आप हर बार नेहरू जी और कांग्रेस पर निशाना साधते हैं, लेकिन जितनी कोशिश कर लें, नेहरू जी पर दाग नहीं लगा पाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू महासभा ने भी वंदे मातरम की आलोचना की थी. संसद में वंदे मातरम पर हो रही इस ऐतिहासिक बहस से राष्ट्रीय गीत के बारे में कई महत्वपूर्ण और अज्ञात तथ्यों के सामने आने की उम्मीद है. इस बहस के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया है. पीएम मोदी ने जहां सोमवार को लोकसभा में इस बहस की शुरुआत की, वहीं विपक्ष की ओर से प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों के बहस में हिस्सा लेने की उम्मीद है. लोकसभा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ पर मंगलवार को चर्चा होगी, जहां गृह मंत्री अमित शाह चर्चा की शुरुआत करेंगे और स्वास्थ्य मंत्री तथा राज्यसभा में नेता जेपी नड्डा दूसरे वक्ता होंगे. INC चलते-चलते MMC हो गया है… वंदे मातरम् को लेकर पीएम मोदी का कांग्रेस पर वार लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में कांग्रेस वंदे मातरम् के बंटवारे के लिए झुकी इसलिए कांग्रेस को एक दिन भारत के बंटवारे के लिए झुकना पड़ा… दुर्भाग्य से कांग्रेस की नीतियां वैसी की वैसी हैं, INC चलते-चलते MMC हो गया है.’ यहां MMC से उनका अर्थ माओवादी, मुस्लिम लीग कांग्रेस से माना जा रहा है. वंदे मातरम् बोलने पर भी सज़ा हो जाती थी', लोकसभा में बोले पीएम मोदी ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा, ‘…बंगाल का विभाजन तो हुआ लेकिन बहुत बड़ा स्वदेशी आंदोलन हुआ और तब वंदे मातरम् हर जगह गूंज रहा था. अंग्रेज समझ गए थे कि बंगाल की धरती से निकला बंकिम बाबू का यह भाव सूत्र जो उन्होंने तैयार किया था उसने अंग्रेजों को हिला दिया था. इस गीत की ताकत इतनी थी कि अंग्रेजों को इस गाने पर प्रतिबंध लगाने पर मजबूर होना पड़ा था. गाने और छापने पर ही नहीं वंदे मातरम् शब्द बोलने पर भी सज़ा, इतने कठोर कानून लागू किए थे.’  'बंगाल टूट गया तो देश भी टूट जाएगा' लोकसभा में पीएम मोदी ने बताई अंग्रेजों की मंशा प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर कहा, ‘अंग्रेजों ने बांटों और राज करो, इस रास्ते को चुना और उन्होंने बंगाल को इसकी प्रयोगशाला बनाया क्योंकि वो भी जानते थे कि वो एक वक्त था जब बंगाल का बौद्धिक सामर्थ्य देश को दिशा, ताकत, प्रेरणा देता था और इसलिए अंग्रेज भी जानते थे कि बंगाल का यह जो सामर्थ्य है वो पूरे देश की शक्ति का एक केंद्र बिंदु है और इसलिए अंग्रेजों ने सबसे पहले बंगाल के टुकड़े करने की दिशा में काम किया. अंग्रेजों का मानना … Read more