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इंडोनेशिया ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान, विदेशों में मिले अवॉर्ड्स की पूरी लिस्ट

जाकर्ता  पीएम मोदी को एक और देश का सर्वोच्च सम्मान मिला है. जी हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच सम्मान से नवाजा गया है. इस बाबत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने आज यानी मंगलवार को घोषणा की. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ मेडल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया है।  यह सम्मान पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दिया गया. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने बताया कि यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग को मजबूत करने में दिए गए योगदान के लिए दिया जा रहा है।  भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदेगा इंडोनेशिया भारत-इंडोनेशिया के बीच मंगलवार को जकार्ता में 20 समझौते हुए। सबसे अहम ब्रह्मोस डील रही। इसको लेकर दोनों देशों के बीच पिछले 4 महीने से बातचीत चल रही थी। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा। इसी के साथ फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। इंडोनेशिया ने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल भारतीय 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया है। वहीं भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में भी मदद करेगा। ये समझौते पीएम मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय बैठक के दौरान हुए। मंगलवार को पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का दूसरा दिन है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने उन्हें इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान दिया। पीएम शाम को जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। वे बुधवार को इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर 1000 साल से ज्यादा पुराना है। किसे मिलता है इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान? गौरतलब है कि ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ मेडल ऑफ ऑनर इंडोनेशिया गणराज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने इंडोनेशिया गणराज्य की एकता, निरंतरता और समृद्धि के लिए असाधारण योगदान दिया हो।  पीएम मोदी इंडोनेशिया यात्रा पर हैं यह सम्मान उन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की सूची में एक और नाम है, जो पीएम मोदी को विदेशी सरकारों से मिले हैं. ये पुरस्कार भारत के राजनयिक संबंधों और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने के उनके प्रयासों के लिए दिए गए हैं. पीएम मोदी सोमवार को अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे. इस यात्रा का उद्देश्य भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, ‘महासागर विजन’ और एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करना है।  मोदी बोले- दुनिया में उथल-पुथल, हम शांति के समर्थन में     दुनिया में मची उथल-पुथल के इस दौर में भारत का मानना ​​है कि बातचीत और कूटनीति की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है। फिलिस्तीन के मुद्दे पर, हम 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-देश समाधान) और लंबे समय तक शांति का समर्थन करते हैं।     हमारे दोनों देशों के लिए एक सुनहरा दौर आने वाला है। हमारे इतिहास में एक जैसी संस्कृति, वर्तमान में आपसी भरोसा और भविष्य में साझा समृद्धि है। मुझे पूरा भरोसा है कि हम मिलकर 'इंडोनेशिया एमास' (स्वर्ण इंडोनेशिया) और एक विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे।     लोकतांत्रिक मूल्य और विविधता में एकता, भारत और इंडोनेशिया दोनों की साझा ताकत रही है। हम दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच MoU के जरिए अपने लोकतांत्रिक सहयोग को और मजबूत करने जा रहे हैं।     वैश्विक मुद्दों पर भी भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इंडो-पैसिफिक को लेकर भी हमारे नजरिए में तालमेल है। भारत ने हमेशा आसियान (ASEAN) की केंद्रीय भूमिका को खास अहमियत दी है। पीएम मोदी ने कहा– तकनीक के दौर में सप्लाई चेन मजबूत करना बेहद जरूरी है। भारत और इंडोनेशिया ने क्रिटिकल मिनरल्स और स्टील सेक्टर की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर अहम समझौता किया है। साथ ही स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में दोनों देशों की कंपनियां नई साझेदारी करेंगी। भारत का UPI जल्द ही इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम से जुड़ेगा। इससे दोनों देशों के बीच कारोबार करना और यात्रा करना आसान होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित प्रांबानन मंदिर जाएंगे। एक हजार साल से अधिक पुराना यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मोदी बोले- इंडोनेशिया से सम्मान मिला, यहां की सरकार का शुक्रिया मोदी ने द्विपक्षीय मीटिंग के बाद कहा, आज सुबह मुझे बहुत प्यार और सम्मान के साथ इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान करोड़ों भारतीयों का है। यह इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं और हमारे दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, गहरे संबंधों को दर्शाता है। मैं राष्ट्रपति प्रबोवो, इंडोनेशिया सरकार और यहां के लोगों का दिल से धन्यवाद करता हूं।" हाल के साल में, भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और गहराई आई है। 2018 में शुरू हुई हमारी 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' अब नई ऊंचाइयों को छू रही है। हम विकास, सुरक्षा, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।"  

होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव, दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइल हमला; वैश्विक शिपिंग पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने मंगलवार तड़के होर्मुज के पास दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं. यह जानकारी अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है. इस हमले से अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने की बातचीत पर असर पड़ने की आशंका है।  यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान में लोग पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का शोक मना रहे हैं. खामेनेई की मौत ईरान युद्ध की शुरुआत में हुई थी।  रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर पिछले कुछ समय से इस इलाके में जहाजों को धमकी दे रहा था. यह पैरामिलिट्री फोर्स बातचीत की कोशिशों को कमजोर करने में जुटा है. गार्ड कोर ने जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे उस रास्ते से न गुजरें जिसे अमेरिकी सेना ने ओमान के तट के पास सुरक्षित घोषित किया है।  मंगलवार का हमला इसी चेतावनी के बाद हुआ है और इससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है. इस बीच यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी यूकेएमटीओ ने भी एक घटना की जानकारी दी है।  UKMTO ने बताया है कि टैंकर ओमान के लिमाह के पास दक्षिण की ओर जा रहा था, तभी उसके बाईं ओर (पोर्ट साइड) टक्कर हुई, जिससे तुरंत ही आग लग गई। हालांकि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ और ना ही पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचा है। अधिकारी फिलहाल इस घटना की जांच कर रहे हैं। ईरान ने किया हमला: अमेरिका अमेरिका ने हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार माना है। एक्सियोस अनुसार, दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान की IRGC ने सोमवार रात होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर दो मिसाइलें दागीं। एक ऑयल टैंकर और एक कमर्शियल जहाज इसकी चपेट में आया। दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2024 में यहां से हर दिन तकरीबन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा है। यह जलमार्ग हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से यातायात को नियंत्रित करना शुरू किया था। इसके बाद से यहां तनाव चल रहा है। हालांकि अमेरिका-ईरान के समझौते में होर्मुज को खोलने की बात कही गई है लेकिन इस समुद्री गलियारे में चीजें सामान्य होती नहीं दिख रही हैं। यूकेएमटीओ के मुताबिक ओमान के लीमाह से करीब आठ नॉटिकल मील पूर्व में एक घटना हुई है. एक टैंकर जहाज दक्षिण दिशा में जा रहा था तभी उसे किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने बाईं ओर से टक्कर मारी. इस टक्कर से जहाज में आग लग गई. राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।  यूकेएमटीओ ने सभी जहाजों को सावधानी से यात्रा करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने की सलाह दी है।  इन दोनों घटनाओं ने होर्मुज में सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है. यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल का व्यापार होता है। 

Nirav Modi Extradition: भगोड़े हीरा कारोबारी को बड़ा झटका, आखिरी कानूनी लड़ाई हारने के बाद भारत लाने का रास्ता साफ

नई दिल्ली भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. दस्तावेजों के मुताबिक नीरव मोदी ने अपनी आखिरी कानूनी कोशिश भी हार दी है. उन्होंने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में जो अपील दायर की थी, उससे भी राहत नहीं मिली. सूत्रों के मुताबिक, अब नीरव मोदी के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है. ऐसे में अब ब्रिटेन की सरकार उनके प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर भारत भेज सकती है।  मिल रही जानकारी के मुताबिक नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था. इससे पहले ब्रिटेन की अदालतें उनकी सभी अपीलें खारिज कर चुकी थीं. अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की व्यवस्था और उनके साथ व्यवहार को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं. सूत्रों का कहना है कि अब प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है और ब्रिटेन की एजेंसियों ने नीरव मोदी को भारत के हवाले करने की प्रशासनिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।  आपको बता दें कि नीरव मोदी मार्च, 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद हैं. उन्हें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन और ईडी ने पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत लाने की मांग की है. ऐसे में कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है।  किन-किन मामलों में फंसा है नीरव मोदी? भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी भारत में तीन अलग-अलग मामलों में वांछित है. इनमें पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की सीबीआई जांच, मनी लॉन्ड्रिंग का ईडी मामला और सबूतों- गवाहों से छेड़छाड़ का मामला शामिल है. अप्रैल, 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद नीरव मोदी की सभी जमानत याचिकाएं और कानूनी अपीलें खारिज हो चुकी हैं. मार्च 2026 में उसने भारत भेजे जाने के खिलाफ आखिरी अपील भी हार दी. इसके बाद उसने फ्रांस स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से भी उसे राहत नहीं मिली है और अब उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो चुका है। 

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार की चिंता, ऑनलाइन ठगी का खतरा बताया

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी। सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे। क्या है पूरा मामला?  दरअसल, पूरा बवाल वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर को लेकर है. मेटा का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर यूजरनेम बेस्ट अकाउंट को रोलआउट किया जाना है. इसके लिए कंपनी ने यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया. कंपनी ने बताया कि वह इस साल के अंत तक यूजरनेम फीचर को रोल आउट कर देगी।  क्या है वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने हाल ही में एक नए यूजरनेम फीचर की घोषणा की थी। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना भी दूसरों से बातचीत कर सकेंगे। यह यूजर्स के लिए एक ऑप्शनल यूनिक आइडेंटिफायर (पहचान) की तरह काम करेगा। यह यूजरनेम हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा, जैसे- @Name123। इसका इस्तेमाल करके दूसरे लोग आपको मैसेज या कॉल कर सकेंगे और आपका फोन नंबर पूरी तरह से प्राइवेट रहेगा। यह यूजरनेम आपके प्रोफाइल पर दिखने वाले डिस्प्ले नेम से अलग होगा। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हर अकाउंट के लिए बिल्कुल यूनिक होगा। एप में ऐसे काम करेगा यह नया सिस्टम  वॉट्सएप के लेटेस्ट वर्जन में यूजर्स 'सेटिंग्स' में जाकर, फिर 'अकाउंट' और उसके बाद 'यूजरनेम' पर क्लिक करके अपनी पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं। जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर सेव नहीं है, उन्हें ग्रुप चैट, डायरेक्ट मैसेज या कॉल के दौरान डिफॉल्ट रूप से आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा। मेटा के मुताबिक, अगर आपकी पसंद का यूजरनेम पहले से किसी ने ले रखा है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा। इसके अलावा, कुछ खास यूजरनेम बिजनेस, सरकारों या पब्लिक फिगर्स के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति क्लेम नहीं कर सकता है। मेटा को सरकार ने भेजा है नोटिस  इस फीचर को लेकर सरकार ने बुधवार को मेटा को नोटिस भी भेजा था. साथ ही इसे रोलाउट करने के निर्देश दिए थे. इसके अलावा 3 दिन के भीतर  जवाब देने को कंपनी को कहा गया था. सरकार को आशंका है कि यूजरनेम बेस्ड फीचर को लेकर सरकार ने साइबर ठगी के खतरे की आशंका जाहिर की. यूजरनेम से लोग कन्फ्यूज हो सकते हैं. साथ ही फर्जी नाम का इस्तेमाल कर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं और लोगों को चुना लगा सकते हैं।  मुश्किल हो सकती है यूजर बेस्ड अकाउंट की पहचान यूजरनेम बेस्ड अकाउंट की पहचान मुश्किल हो सकती है. साथ ही मिलते जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर लोग साइबर ठगी कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा फर्जी पहचान होने का खतरा रहेगा. साइबर ठग इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. इसमें असली नकली का भेद मिट जाएगा. ब्रांड और सेलिब्रिटी की नकल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा. स्पैम मैसेज में बढ़ोतरी हो जाएगी. ईडी जैसी जांच एजेंसी के लिए एक चुनौती हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग अटैक का भी खतरा बढ़ेगा।  सरकार को इस फीचर से क्या परेशानी है? मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वॉट्सएप का यह नया फीचर धोखाधड़ी, ऑनलाइन स्कैम और रूप बदलकर ठगी करने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। सरकार का मानना है कि फीचर इनेबल होने के बाद पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को यूजर का फोन नंबर नहीं दिखेगा, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। मंत्रालय ने 1 जुलाई को भेजे अपने नोटिस में साफ कहा है कि इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन हमलों के मामले काफी बढ़ सकते हैं। इससे गलत इरादे रखने वाले अपराधियों को पीड़ितों को ढूंढने और उन्हें मैसेज भेजने में आसानी हो जाएगी। इसके अलावा, इस फीचर से पहचान चुराना भी आसान हो जाएगा। अपराधी आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते यूजरनेम रखकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं। यूजरनेम vs डिस्प्ले नेम डिस्प्ले नेम को बदला जा सकता है और वह कई लोगों का एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हमेशा यूनिक (यूनिवर्सल) होगा। सुरक्षित यूजरनेम सरकार, बिजनेस और वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम को कोई भी आम यूजर बुक नहीं कर पाएगा, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। इधर, मेटा की मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सएप ने कहा है कि सेलिब्रिटी, और पब्लिस स्पेस में पॉपुलर लोगों के यूजरनेम को रिजर्व रखा जाएगा. यह एक ऑप्शनल सर्विस है।   

7 देशों ने मिलाया हाथ, Crude Oil Production पर लिया बड़ा फैसला; पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर?

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई।  Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है।  Crude की कीमतों में गिरावट जारी इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.  खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी। संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है।  इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है।  एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।  OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 'बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा।  क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel?  अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।   हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं।  पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत  मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी।  Hardeep Singh Puri ने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा।   

समंदर में बढ़ी भारत की ताकत! INS Mahendragiri की एंट्री से दुश्मनों की बढ़ेगी मुश्किलें

मुंबई  भारतीय नौसेना 11 जुलाई 2026 को अपनी समुद्री ताकत में एक और बड़ा इजाफा करने जा रही है. इस दिन विशाखापट्टनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही जुलाई के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) वॉरशिप आईएनएस मालवन का भी कमीशनिंग कार्यक्रम प्रस्तावित है. इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक इंडो-पैसिफिक में भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से INS महेंद्रगिरि रडार को धता बताते हुए मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।  INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित छठी स्टील्थ फ्रिगेट है. इस प्रोजेक्‍ट के युद्धपोतों को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है. यह युद्धपोत अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है. करीब 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों से निर्मित महेंद्रगिरि भारत के डिफेंस मैन्‍यूफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमता का भी प्रतीक है. इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्‍टम, पनडुब्बी रोधी हथियार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं. यह वॉर ऑपरेशन के अलावा समुद्री निगरानी, मैरीटाइम सिक्‍योरिटी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) तथा अन्य बहुआयामी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम होगी।  भारतीय नौसेना के अनुसार, महेंद्रगिरि का शामिल होना देश की समुद्री युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगा. साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी माना जा रहा है. इससे रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी. इससे पहले 21 जून 2026 को भारतीय नौसेना ने तीन स्वदेशी युद्धपोतों (आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय) को भी बेड़े में शामिल किया था. लगातार नए स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से स्पष्ट है कि भारतीय नौसेना अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।  डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि महेंद्रगिरि और मालवन जैसे अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना को भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने में अधिक सक्षम बनाएंगे. साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री हितों की सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी. बता दें कि इंडिन नेवी ने पिछले कुछ महीनों में अपने बेड़े में कई वॉरशिप को शामिल कर चुकी है. हिन्‍द महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नकेल कसने के लिहाज से इस कदम को अहम माना जा रहा है। 

मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज, नौकरशाहों को अहम मंत्रालय मिलने की संभावना

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। इस विस्तार में अनुभवी सेवानिवृत्त नौकरशाहों को अहम जिम्मेदारियां मिलने की अटकलें है। सूत्रों का कहना है कि ‘परफॉर्मेंस’ और ‘लॉयल्टी’ के फॉर्मूले पर खरे उतरने वाले अफसरों को पीएम मोदी जल्दी रिटायर नहीं होने देते। ऐसे में कुछ बड़े अधिकारियों के नाम मंत्रिमंडल फेरबदल में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में शक्तिकांत दास और तपन डेका जैसे आला अधिकारियों के नाम हैं। इनके अलावा भी कुछ अधिकारी महत्वपूर्ण स्थानों पर नजर आ सकते हैं। पूर्ववर्ती सरकारों में भी कभी-कभी ऐसे प्रयोग हुए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में यह व्यवस्थागत रूप ले चुकी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार मिलना सामान्य हो गया है और वे विभिन्न मंत्रालयों तथा सरकार संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह मॉडल न केवल प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करता है, बल्कि बड़े सुधारों को गति देने और संकट प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। सरकारों को यह होता है लाभ: दशकों का प्रशासनिक अनुभव, जटिल नीतियों की गहरी समझ, संस्थागत स्मृति का संरक्षण, बड़े सुधारों में निरंतरता, संकट के समय अनुभवी नेतृत्व की उपलब्धता और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन रिटायर लोगों को जिम्मेदारी देने की बड़ी वजह बताई जाती है। मोदी सरकार का जोर अनुभव, निष्ठा और परिणाम पर रहा है। फाइल क्लियरेंस, प्रोजेक्ट डिलीवरी, खर्च प्रबंधन की दक्षता और शिकायत निवारण जैसे पैमानों पर अधिकारियों को स्कोर कार्ड दिए जा रहे हैं। हालांकि, इस मॉडल की आलोचना भी होती है। आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक सेवा विस्तार से नए अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। भारत ही नहीं कई देशों में भी यह प्रयोग यह प्रवृत्ति केवल भारत तक सीमित नहीं है। सिंगापुर में स्थायी सचिव सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कंपनियों और नीति आयोगों का नेतृत्व करते हैं। अमेरिका में जेम्स मैटिस और लॉयड ऑस्टिन (सेवानिवृत्त जनरल) रक्षा मंत्री बने। जेनेट येलेन (पूर्व फेड चेयर) वित्त मंत्री बनीं। जेरोम पॉवेल केंद्रीय बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व अधिकारी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, थिंक टैंक और विशेष दूत के रूप में कार्य करते हैं। ब्रिटेन में सेवानिवृत्त वरिष्ठ सिविल सेवकों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स, सार्वजनिक आयोगों और नियामक संस्थाओं में नियुक्त करना सामान्य है। मार्क सेडविल सेवानिवृत्ति के बाद विभिन्न संस्थानों में रणनीतिक भूमिकाएं निभा चुके हैं। फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों स्वयं उच्च सिविल सेवा से आए। जापान में अमकुदरी (स्वर्ग से अवतरण) परंपरा के तहत वरिष्ठ नौकरशाह सेवानिवृत्ति के बाद निजी कंपनियों में नेतृत्व करते हैं।

E20 Fuel Survey: आधे से ज्यादा कार मालिक असंतुष्ट, 66% बोले- माइलेज पर पड़ा बुरा असर

 नई दिल्ली कहते हैं बदलाव की कीमत चुकानी पड़ती है. लेकिन जब कीमत हर बार आम आदमी की जेब से ही निकले, तो सवाल उठना तय है. सरकार E20 पेट्रोल के फायदे गिना रही है, उधर पुराने पेट्रोल वाहन चलाने वाले लोग घटते माइलेज और बढ़ते रिपेयर बिल का हिसाब लगा रहे हैं. अब एक बड़े सर्वे ने इस बहस को और हवा दे दी है. सर्वे में 53 प्रतिशत लोगों ने E20 लागू करने के तरीके पर नाराजगी जताई, 66 प्रतिशत ने माइलेज गिरने की शिकायत की और 45 प्रतिशत ने कहा कि गाड़ी का मेंटेनेंस पहले से ज्यादा महंगा हो गया है।  लोकल सर्किल्स (LocalCircles) के सर्वे में देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया. सर्वे के अनुसार 53 प्रतिशत लोगों ने सड़क परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय की E20 पेट्रोल लागू करने की प्रक्रिया को या तो "बेहद खराब" या "असरहीन" बताया. इनमें 42 प्रतिशत लोगों ने इसे "बेहद खराब" करार दिया, जबकि सिर्फ 13 प्रतिशत लोगों ने इस पहल को थोड़ी अच्छी रेटिंग दी।  10% घटा माइलेज सर्वे में सबसे बड़ी चिंता 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों को लेकर सामने आई. ऐसे वाहन मालिकों में 66 प्रतिशत लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज 10 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया है. वहीं 45 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनकी गाड़ियों के कंपोनेंट में समस्या बढ़ी है और मरम्मत पर पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।  इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि, लोग इथेनॉल ब्लेंडिंग का पूरी तरह विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चाहिए. 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के करीब 31 प्रतिशत मालिकों ने कहा कि अगर E0 या E10 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए तो वे E20 से महंगा होने पर भी उसे खरीदना पसंद करेंगे. इससे साफ है कि पुराने वाहन मालिक कम इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के लिए रेडी हैं, भले ही इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़े।  सरकार E20 के फायदे गिना रही है दूसरी ओर केंद्र सरकार लगातार इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बचाव कर रही है. सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा, एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. बीते दिनों सरकार ने दिग्गज वाहन निर्माताओं के अधिकारियों का एक पूरा पैनल बठाया था. जिसमें सभी कंपनियों ने एक सुर में इथेनॉल के फायदे गिनाए थे।  सर्वे में कहा गया है कि भारत की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में ऐसी पेट्रोल गाड़ियां चल रही हैं जिन्हें कम इथेनॉल वाले फ्यूल को ध्यान में रखकर बनाया गया था. अप्रैल 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई थीं, जबकि अप्रैल 2025 के बाद बनने वाले नए मॉडल पूरी तरह E20 कम्पलायंट माने जाते हैं. ऐसे में पुराने वाहन मालिकों को माइलेज और मेंटेनेंस से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  अपग्रेड करना भी आसान नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पुरानी गाड़ियों को E20 कम्पलायंट बनाना हो, तो फ्यूल सिस्टम के ऐसे कई पार्ट बदलने पड़ सकते हैं जो ज्यादा इथेनॉल को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते. इससे वाहन मालिकों का खर्च और बढ़ सकता है. हाल ही में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के डायरेक्टर जनरल दीपक बलानी ने आजतक से ख़ास बातचीत में बताया कि, एक ख़ास तरह की फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट की टेस्टिंग की गई है. जिसके नतीजे काफी हद तक पुरानी बीएस4 और बीएस6 कारों के लिए सकारात्मक रहे हैं।  दीपक बलानी ने ये भी बताया कि, इस कन्वर्जन किट की टेस्टिंग रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है. हालांकि इसे इंपोर्ट कर के लाया गया था तो इसकी कीमत 50,000 रुपये है. लेकिन अगर इसे स्थानीय स्तर पर डेवलप किया जाता है तो इसकी कीमत तकरीबन 20,000 रुपये तक हो सकती है. ISMA ने इस किट को मारुति डिजायर कार में टेस्ट किया था।  कैसे किया गया सर्वे लोकलसर्किल्स का यह सर्वे देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों के बीच किया गया. इसमें 69 प्रतिशत पुरुष और 31 प्रतिशत महिलाओं ने हिस्सा लिया. करीब 46 प्रतिशत लोग टियर-1 जिलों से, 32 प्रतिशत टियर-2 जिलों से और बाकी 22 प्रतिशत टियर-3, टियर-4, टियर-5 और ग्रामीण इलाकों से थे. लोकल सर्किल्स के अनुसार सर्वे में शामिल सभी लोग उसके प्लेटफॉर्म के रजिस्टर्ड और सर्टिफाइड यूजर थे। 

Apple Crisis in Himachal: 40% तक घट सकता है सेब उत्पादन, जानें कौन बन रहा ₹5000 करोड़ के कारोबार का सबसे बड़ा ‘खलनायक’

 नई दिल्ली एक कहावत है कि 'रोज एक सेब खाएं और डॉक्टर को दूर भगाएं', लेकिन अब लग रहा है कि डॉक्टर को भगाने के लिए सेब ही नहीं बचेंगे. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से ये डराने वाले अनुमान जाहिर किए जा रहे हैं. सेब के उत्पादन के लिए सबसे बड़ा खलनायक बन रहा है मौसम का मिजाज, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब उत्पादन में 40 फीसदी की बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।  Apple इकोनॉमी खतरे में है बिजनेस टुडे पर छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश की 5,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था (Apple Economy) इस समय अभूतपूर्व जलवायु संकट का सामना कर रही है. मौसम की अनियमितता के चलते इस साल सेब उत्पादन में लगभग 40% की गिरावट आने की आशंका है और ये सेब की फसल पर निर्भर जिससे इस फसल पर निर्भर करीब  25 लाख किसान परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।  अधिकारियों को सता रही चिंता हिमाचल प्रदेश राज्य के बागवानी अधिकारियों ने अनुमान जाहिक करते हुए कहा कि राज्य में सेब का उत्पादन 2025 में 6.99 लाख मीट्रिक टन से घटकर 2026 में लगभग 4.36 लाख मीट्रिक टन (लगभग 2.15 करोड़ बक्से) रह जाएगा, यानी 2.63 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आएगी. इसके साथ ही इसी अनुपात में सेब अर्थव्यवस्था में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।  सेब उत्पादन में इस बड़ी गिरावट को लेकर अधिकारियों ने कारण बताते हुए कहा कि सर्दियों में अपर्याप्त हिमपात, बेमौसम  बारिश, लगातार ओलावृष्टि और तापमान में अनियमित उतार-चढ़ाव से ये हालात पैदा हुए हैं. बागवानों की मानें, तो मौसम ने उत्पादन लागत बढ़ाने और पैदावार घटाने की चुनौतियां पैदा कर दी हैं. दूसरी ओर कीटनाशक दवाओं और मशीनरी समेत अन्य एग्रीकल्चर उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी ने उनका बोझ बढ़ा दिया है।  किसानों ने सरकार से लगाई गुहार राज्य के भारी भरकम 5000 करोड़ रुपये के करीब के सेब कारोबार पर संकट बढ़ता देख, किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है. उन्होंने फसल बीमा योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके।  मौसम का बदलता मिजाज न सिर्फ राज्य की इकोनॉमी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी मुसीबत माना जा रहा है, इसका प्रभाव सिर्फ सेब तक ही सीमित नहीं है. तमाम एक्सपर्ट शेयर बाजार पर भी मौसम के प्रभाव का अनुमान जता रहे हैं।  मौसम बनता जा रहा खलनायक? बीते कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों ने महंगाई का जोखिम बढ़ाया था, लेकिन अब अमेरिका-ईरान में बात बनते ही तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है. बीते दिनों आई एक रिपोर्ट में तेल सस्ता होने के बाद अब एक्सपर्ट भी मानते नजर आए थे कि मौसम इकोनॉमी के लिए खलनायक बनता जा रहा है।  इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा था कि आज देश में महंगाई का सबसे बड़ा जोखिम तेल नहीं, बल्कि मानसून है. कमजोर मानसून अब भारत के लिए कच्चे तेल की तुलना में महंगाई का बड़ा खतरा पैदा कर रहा है, क्योंकि देश में महंगाई की कैलकुलेशन में Fuel Price से कहीं ज्यादा खाद्य पदार्थों का रोल रहता है और भारत की करीब आधी एग्रीकल्चर लैंड बारिश पर निर्भर है, इसमें अनियमितता से अनाज, दालों, सब्जियों, फलों और तिलहन के प्रोडक्शन में कमी आ सकती है, जिससे महंगाई दर में तेज इजाफा हो सकता है और घरेलू बजट गड़बड़ा सकता है। 

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: 300 स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, लाखों श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत

भुवनेश्वर  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ओडिशा के पुरी में 16 जुलाई से शुरू होने वाले भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए 300 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। ओडिशा के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे श्री वैष्णव ने भगवान जगन्नाथ की आगामी रथ यात्रा को लेकर रेलवे की ओर से की गयीं तैयारियों का जायज़ा लिया और अधिकारियों को श्रद्धालुओं की यात्रा को सुखद और आरामदायक बनाने को लेकर निर्देश दिया। गौरतलब है कि भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को 16 जुलाई से शुरू होगी और 24 जुलाई को सम्पन्न होगी। इस दौरान उन्होंने पुरी-कोरापुट एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ट्रेन के परिचालन से ओडिशा के आंतरिक हिस्से में रेल सम्पर्क मजबूत होगा। इसके साथ ही उन्होंने ओडिशा और गुजरात के बीच चलने वाली ब्रह्मपुर-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस (रोज़ाना चलने वाली) को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रेल मंत्री ने बताया कि इस साल रथ यात्रा के लिए 300 से ज़्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है। ये ट्रेनें नियमित रूप से चलने वाली 800 से ज़्यादा ट्रेनों के अलावा होंगी। उन्होंने कहा, " केरल में इस साल ओणम के मौके पर हम 100 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाएंगे। उन्होंने कहा, "इस साल 30 जून को खत्म हुए गर्मी के मौसम के दौरान रिकॉर्ड 15,000 विशेष ट्रेनें चलाई गयीं। जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए 300 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। केरल में ओणम के लिए 100 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। रेलवे, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोशिश है कि हमारे नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिलें।" श्री वैष्णव ने आज नांदेड़-मुंबई और टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा, "आज उत्तराखंड के टनकपुर से हजूर साहिब, नांदेड़ के लिए एक नई ट्रेन सेवा शुरू की गई है। तराई क्षेत्र में रहने वाले हमारे सिख भाई-बहनों की लगातार मांग थी। आज वाशिम और हिंगोली होते हुए नांदेड़ को मुंबई से जोड़ने वाली एक ट्रेन सेवा भी शुरू की गयी है, जिससे विदर्भ और मराठवाड़ा के कई ज़िलों का मुंबई से सम्पर्क बेहतर होगा। पीलीभीत, आगरा और टनकपुर को जोड़ने वाली कुछ ट्रेन सेवाएँ भी शुरू की गयी हैं।"