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PF Balance बढ़ने वाला है! EPFO जल्द ट्रांसफर करेगा ब्याज, 8 करोड़ सदस्यों को मिलेगा फायदा

 नई दिल्ली 8 करोड़ लोगों के लिए गुड न्यूज आई है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ (EPFO) के सदस्यों के पीएफ खातों में जमा रकम (PF Account Balance) में बढ़ोतरी होने वाली है. दरअसल, ताजा अपडेट की बात करें, तो ईपीएफओ ने संगठन के सदस्यों के खातों में 8.25% ब्याज क्रेडिट करने का आदेश दिया है. क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश जारी किए गए हैं, इसके अलााव नए सिस्टम अपग्रेड के साथ ट्रांसफर प्रोसेस तेजी से होने की संभावना है।  8 करोड़ लोगों को फायदा ईपीएफ के करीब 8 करोड़ सदस्यों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भविष्य निधि अंशदान पर 8.25% ब्याज दर की आधिकारिक घोषणा करने के बाद क्षेत्रीय कार्यालयों को PF Interest Money सदस्य खातों में जमा करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, EPF Scheme के अनुच्छेद 60(1) के तहत केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गई है कि 2025-26 के लिए ईपीएफ योजना के प्रत्येक सदस्य के खाते में इस दर से ब्याज का पैसा जमा किया जाएगा. EPFO के हाल ही में जारी एक सर्कुलर ये सामने आया है।  तेजी से ट्रांसफर होगा PF का पैसा  EPFO से जुड़ा ये बड़ा अपडेट ऐसे समय में सामने आया है, जबकि रिटायरमेंट फंड मैनेजर ने बीते एक सप्ताह में डेटाबेस के एकीकरण और सॉफ्टवेयर अपग्रेड का एक बड़ा काम पूरा कर लिया है. इससे उम्मीद है कि करोड़ों सदस्यों के खातों में पीएफ ब्याज का भुगतान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से ट्रांसफर किया जाएगा. यानी अब यह प्रोसेस पहले की तरह धीमा नहीं होगा, जिसमें सभी सदस्यों के लिए भुगतान पूरा होने में एक या दो महीने का समय लग जाता था।  गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में लिए गए फैसले के बाद से ईपीएफओ सदस्य अपने पीएफ खातों में ब्याज जमा होने का इंतजार कर रहे हैं. EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने इस साल मार्च में 8 करोड़ से अधिक ईपीएफओ ग्राहकों के लिए वित्त वर्ष 2026 के लिए 8.25% की ब्याज दर को मंजूरी दी थी. बता दें कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब इस PF Interest Rate को इस दर को बरकरार रखा गया है. ईपीएफओ द्वारा मंजूरी के बाद, प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा जाता है, जो इसे अनुमोदित करता है, वित्त मंत्रालय ने इस साल जून में ब्याज दर को अपनी मंजूरी दे दी थी।  इन तरीकों से जानें, जमा हुआ ब्याज EPF खाते में जमा राशि को आप कई तरह से चेक कर सकते हैं. अगर आपका UAN और मोबाइल नंबर EPFO के साथ रजिस्टर्ड है, तो आप सिर्फ एक SMS भेजकर अपने खाते की जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा उमंग ऐप (Umang App), ईपीएफओ सदस्य ई-सेवा पोर्टल (EPFO E-Service Portal), मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service) के जरिए स्टेटस जांच सकते हैं।  SMS भेजकर जानें बैलेंस: एसएमएस के जरिए पीएफ खाते का बैलेंस चेक करने के लिए आपको अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के मैसेज बॉक्स में जाकर EPFOHO और UAN फिर भाषा लिखकर मोबाइल नंबर 7738299899 पर SMS करना होगा. इसके तरीके को उदाहरण के तौर पर समझें, तो आप इंग्लिश में अपने EPF की खाते की डिटेल्स पाने के लिए EPFOHO UAN ENG टाइप करेंगे. इसके बाद मैसेज के जरिए आपके पीएफ खाते के बैलेंस की जानकारी आपको मिल जाएगी।  ऑनलाइन बैलेंस चेक: ऑनलाइन पीएफ बैलेंस चेक के लिए https://passbook.epfindia.gov.in/MemberPassBook/Login को अपने मोबाइल या लैपटॉप के ब्राउजर में ओपन करें. इसके बाद अब UAN नंबर और पासवर्ड डाले. फिर कैप्चा कोड भरें. अब आपके सामने एक नया पेज खुलकर आएगा. इस पेज पर ड्रॉप डाउन लिस्ट से अपना पीएफ नंबर सेलेक्ट करें. इसके बाद आपके सामने पीएफ अकाउंट की डिटेल्स खुल जाएगी।  UMANG App में चेक करें: इसके लिए सबसे पहले UMANG App डाउनलोड करना होगा. लॉगइन करके ऑल सर्विस सेक्शन में जाएं. अब EPFO सर्च करके, एम्प्लॉई सेंट्रिक सर्विसेस ऑप्शन चुनें, इसके बाद दिख रहे View Passbook विकल्प पर क्लिक करें, इसके बाद अपना UAN भरें और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP को डालें, फिर बैलेंस सामने दिख जाएगा।  मिस्ड कॉल से PF बैलेंस: अगर मिस्ड कॉल करके भी पीएफ खाते में मौजद रकम के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 नंबर मिलाएं, दो घंटी के बाद ऑटोमटिक कॉल कट हो जाएगी और इस मिस्ड कॉल प्रोसेस के बाद आपके फोन पर SMS के जरिए पीएफ खाते का बैलेंस बता दिया जाएगा। 

होर्मुज के बाद अब मलक्का पर भारत की नजर, सबांग पोर्ट से मजबूत होगी समुद्री रणनीति

 नई दिल्ली 32 किलोमीटर का एक समुद्री पैसेज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की राजनीति और कूटनीति में कैसे उथल-पुथल मचा सकता है. ईरान वॉर के दौरान इसे पूरी दुनिया ने देख लिया. ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर के मुल्कों का ईंधन सप्लाई चोक कर दिया. कच्चे तेल की कीमतें दनादन बढ़ने लगी. आखिर दुनिया की 20 फीसदी इंधन सप्लाई इसी होर्मुज से होती है।  अब भारत और इंडोनेशिया मिलकर हिंद महासागर में अपना 'होर्मुज' बनाएंगे. ये 'होर्मुज' स्ट्रेट ऑफ मलक्का के एंट्री पॉइंट पर स्थित है. यहां से भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित इंदिरा पॉइंट मात्र 100 मील की दूरी पर है. इस कदम के साथ भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर में चीन का सारा गेम प्लान बदल देंगे।  दरअसल हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री रणनीति को नई धार देते हुए भारत और इंडोनेशिया ने सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है.  सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह को विकसित करने पर सहमति बनाई है. इसे आधुनिक रूप दिया जाएगा और इस द्वाप पर भारत का दखल बढ़ेगा।  इंडोनेशिया दौरे पर गए पीएम नरेंद्र मोदी ने वहां के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। सबांग बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश द्वार पर स्थित है.खास बात यह है कि सबांग पोर्ट भारत के महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से लगभग 100 मील की दूरी पर है।  आइए मलक्का स्ट्रेट को थोड़ा विस्तार से समझें और इसकी अहमियत को जानें चन्नई से दक्षिण पूर्व में आगे बढ़ते चले जाएं. एकदम आगे. चेन्नई के तट से समुद्री रास्ते पर आगे बढ़ें, तो जहाज पहले बंगाल की खाड़ी पार करता है, फिर अंडमान सागर की ओर जाता हुआ मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंचता है।  हजारों साल पहले, जब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मसालों की खुशबू समुद्री हवाओं के साथ फैल रही थी, तब नाविकों ने एक संकरे लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ते को पहचानना शुरू किया. यह स्ट्रेट यानी कि जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है।  आज यहां से दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत व्यापार होता है. इसमें तेल, चीनी सामान, कोयला और पाम ऑयल अहम है. सिंगापुर इसके दक्षिणी छोर पर स्थित विश्व का प्रमुख बंदरगाह है।  सबांग पोर्ट मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित है. भारत के लिए इसका महत्व अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक है. भारत का पूर्वी एशिया जैसे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ होने वाला बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. भारत के पेट्रोलियम उत्पादों, कोयले, मशीनरी और कंटेनर व्यापार के लिए यह समुद्री जीवनरेखा जैसा है. साथ ही “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क मजबूत करने में भी इसकी अहम भूमिका है।  वैश्विक स्तर पर यह स्ट्रेट ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धमनियों में गिना जाता है. पश्चिम एशिया से निकलने वाला कच्चा तेल और गैस बड़ी मात्रा में इसी रास्ते से पूर्वी एशियाई देशों तक पहुंचता है।  Strait of Malacca से हर साल करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 2,800 अरब डॉलर का माल हर वर्ष गुजरता है. चीन के लिए क्या अहमियत है? चीन के लिए मलक्का जलडमरूमध्य उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन है. हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक रास्तों में से एक है. चीन के आयातित तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और अफ्रीका से इसी रास्ते होकर चीन पहुंचता है. इसके अलावा चीन के निर्यात-आधारित व्यापार का भी बड़ा हिस्सा मलक्का स्ट्रेट पर निर्भर है।   पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने 2003 में "मलक्का दुविधा" का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि किसी संकट या युद्ध की स्थिति में यह मार्ग बाधित हो जाए, तो चीन की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।  अब समझिए इसी मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर सबांग द्वीप है और इसकी द्वीप को भारत इंडोनेशिया के साथ मिलकर विकसित करेगा।  रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह समझौता केवल एक बंदरगाह विकास परियोजना नहीं, बल्कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री उपस्थिति का संकेत है।  सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में स्थित है और मलक्का जलडमरूमध्य के पश्चिमी मुहाने पर नजर रखता है. यहां से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर निगरानी रखना अपेक्षाकृत आसान है. भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. 2018 में भी भारत और इंडोनेशिया के बीच सबांग पोर्ट को लेकर सहयोग की रूपरेखा बनी थी, लेकिन अब दोनों देशों के संबंधों और इंडो-पैसिफिक की बदलती भू-राजनीति को देखते हुए इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है।  एक और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट दूसरी ओर सबांग बंदरगाह बता दें कि भारत अंडमान निकोबार में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यह भारत की एक महत्वाकांक्षी बहु-आयामी विकास योजना है, इसमें एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, बिजली संयंत्र और आधुनिक टाउनशिप का निर्माण शामिल है, ताकि भारत मलक्का जलडमरूमध्य के पास एक प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब बन सके।   यह परियोजना भारत की व्यापारिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।  अब भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर सबांग पोर्ट को डेवलप करने की योजना बनाई है।  विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाओं का संयुक्त प्रभाव भारत को मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों ओर रणनीतिक पहुंच प्रदान कर सकता है.  ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के अंडमान-निकोबार समूह का सबसे दक्षिणी हिस्सा है और वहां विकसित हो रहा ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं का अहम हिस्सा माना जाता है. दूसरी ओर सबांग पोर्ट में भारत की भागीदारी उसे इंडोनेशिया के साथ मिलकर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर देगी।  चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स को भारत का जवाब इस समझौते का एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू भी है. पिछले एक दशक में चीन ने "बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव" और "स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" रणनीति के … Read more

Microsoft ने फिर की बड़ी छंटनी, 4,800 कर्मचारियों की नौकरी पर गिरी गाज; AI बना बड़ी वजह

 नई दिल्ली Microsoft ने एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की है. कंपनी ने आधिकारिक तौर पर करीब 4,800 कर्मचारियों की नौकरी खत्म करने का ऐलान किया है। यह कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 2.1 प्रतिशत है. सबसे ज्यादा असर कंपनी के कमर्शियल सेल्स और Xbox डिवीजन पर पड़ा है. माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि यह फैसला कंपनी को तेजी से बदल रही AI दुनिया के हिसाब से तैयार करने के लिए लिया गया है।  इस छंटनी के बाद भारतीय मूल की टेक लीडर आशा शर्मा भी चर्चा में हैं. आशा शर्मा फिलहाल Xbox की CEO हैं. उन्होंने कर्मचारियों को भेजे गए एक इंटरनल मैसेज में कहा कि Xbox अपने इतिहास के सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने माना कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन कंपनी को लंबे समय के लिए मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है।  माइक्रोसॉफ्ट की चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन ने कर्मचारियों को भेजे मैसेज में कहा कि टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही है. आर्टिफिशियल इंटेेलिजेंस की वजह से काम करने का तरीका बदल रहा है और इसी के हिसाब से कंपनी को अपने संसाधन, निवेश और टीम की प्रायॉरिटी बदलनी पड़ रही हैं।  कंपनी का कहना है कि यह सिर्फ लागत कम करने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले समय की जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार करने की प्रक्रिया है।  Xbox डिवीजन पर इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पड़ा है. आशा शर्मा ने बताया कि वित्त वर्ष 2027 तक Xbox में करीब 3,200 पद पोस्ट खत्म किए जाएंगे. इनमें से लगभग 1,600 कर्मचारियों की छंटनी अभी की गई है. साथ ही Xbox के चार स्टूडियो नए मैनेजमेंट के तहत काम करेंगे।  कंपनी का कहना है कि उसका मकसद गेमिंग बिजनेस को फिर से मजबूत करना और निवेश को उन प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित करना है जिनसे भविष्य में बेहतर कमाई हो सकती है।  हाल के महीनों में माइक्रोसॉफ्ट ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर का निवेश किया है. कंपनी Copilot और दूसरे AI प्रोडक्ट्स पर तेजी से काम कर रही है. इसी वजह से कंपनी अपने कई पुराने बिजनेस और टीमों की फिर से रिव्यू कर रही है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट निवेश को AI की तरफ शिफ्ट कर रहा है, जबकि कई दूसरे टेक दिग्गज भी इसी तरह की स्ट्रैटिजी अपना रहे हैं।   आशा शर्मा का नाम भारत से भी जुड़ा है. वह भारतीय मूल की टेक एग्जीक्यूटिव हैं और इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट में AI, क्लाउड और प्रोडक्ट से जुड़े कई बड़े पदों पर काम कर चुकी हैं।  हाल ही में उन्हें Xbox की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. अब उनके नेतृत्व में माइक्रोसॉफ्ट का गेमिंग डिविजन Xbox अपने इतिहास के सबसे बड़े बदलाव से गुजर रहा है, इसलिए पूरी टेक इंडस्ट्री की नजर इस फैसले पर है।    बता दें कि ये माइक्रोसॉफ्ट की पहली बड़ी छंटनी नहीं है. पिछले कुछ सालों में भी कंपनी कई बार हजारों कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर चुकी है. हालांकि इस बार कंपनी का साफ कहना है कि उसका फोकस AI, नए  बिजनेस मॉडल और भविष्य की तकनीकों पर निवेश बढ़ाने का है। 

PM मोदी का इंडोनेशिया संसद में संबोधन, ‘भारत का रास्ता विकासवाद का, विस्तारवाद का नहीं’

जाकर्ता  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि इं​डोनेशिया की संसद में आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. मैं यहां मिले भव्य स्वागत से अभिभूत हूं. पीएम मोदी ने कहा, 'मेरे लिए आप सभी के बीच उपस्थित होना बहुत बड़े सौभाग्य की बात है. 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि के रूप में, लोकतंत्र की जननी भारत के एक सौभाग्यशाली नागरिक के रूप में, मैं आप सभी को समस्त भारतवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।  पीएम मोदी ने कहा' 'इंडोनेशिया के लोगों, यहां के प्यारे बच्चों, युवाओं और मातृशक्ति ने आज के इस दिन को मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बना दिया है. आज सुबह इंडोनेशिया के लोगों ने जिस तरह मुझ पर स्नेह और प्रेम बरसाया, जिस आत्मीयता के साथ मेरा स्वागत और अभिनंदन किया, उसे मैं जीवन भर कभी नहीं भूल पाऊंगा।  भारत की नीति विस्तारवाद नहीं विकासवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ अपने प्रगाढ़ संबंधों का जिक्र करते हुए कहा, 'राष्ट्रपति प्रबोवो ने कॉपीराइट की बात की. मैं कहना चाहता हूं कि सम्मान पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता. राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मेरी मित्रता भी किसी कॉपीराइट की सीमाओं में बंधी नहीं है.' उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का वह देश है, जो विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद की नीति में विश्वास रखता है. इसलिए भारत का मंत्र है, 'सबका साथ, सबका विकास है. इसी मंत्र और इसी भावना के साथ मैं आज इंडोनेशिया की संसद के सभी सम्मानित सदस्यों के बीच उपस्थित हुआ हूं।  इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पाना सौभाग्य इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक व सैन्य सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा' से सम्मानित किया. राष्ट्रपति प्रबोवो  ने उन्हें यह सम्मान दिया. पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा, 'आज सुबह मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने का भी सौभाग्य मिला. मैं करोड़ों भारतीयों की ओर से इंडोनेशिया के लोगों के इस स्नेह और सम्मान को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं. यह सम्मान हमारे दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों, हमारी साझा विरासत और भारत-इंडोनेशिया के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों का सम्मान है. मैं आप सभी साथियों, इंडोनेशिया की सरकार और यहां की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।  समुद्र भारत-इंडोनेशिया के बीच सेतु का प्रतीक पीएम मोदी ने कहा कि भले ही हमारी राजधानियों के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी हो, लेकिन समुद्र के रास्ते हमारे बीच की दूरी महज 150 किलोमीटर है. दुनिया के कई देशों में समुद्र, सीमाओं और दूरियों का प्रतीक रहा है, लेकिन भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र कभी दूरी का नहीं, बल्कि एक सेतु का प्रतीक रहा है. यही समुद्र हमारे साझा भविष्य का भी केंद्र है. भारत और इंडोनेशिया केवल समुद्र ही साझा नहीं करते, बल्कि हमारा इतिहास भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है. हमारे रिश्तों की जड़ें रामायण और महाभारत की विरासत में हैं. सदियों पहले नालंदा के ज्ञान से भी हमारा जुड़ाव रहा है. हमारा संबंध वायांग की नृत्य और संगीत परंपरा से भी जुड़ा है. हम बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे भव्य स्मारकों से जुड़े हैं. हम इंडोनेशिया के राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ से जुड़े हैं. हम बाली की यात्राओं और वहां के उत्सवों की उमंग से भी जुड़े हुए हैं।  इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर स्वाद की बात करें, तो यहां केरुपुक है और भारत में पापड़. यह कहना मुश्किल है कि दोनों में ज्यादा कुरकुरापन किसमें है, लेकिन इतना तय है कि भारत के मसाले और इंडोनेशिया के बुम्बु (मसाला मिश्रण) दोनों ही हमारे जीवन में स्वाद घोलते हैं. पिछले दो दशकों में इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है और करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं. आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. पिछले एक दशक में हमारे यहां 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं. जब भारत और इंडोनेशिया साथ खड़े होते हैं, तो दुनिया का यह विश्वास और मजबूत होता है कि लोकतंत्र अवसर देता है, लोकतंत्र विश्वास देता है और लोकतंत्र भविष्य का निर्माण करता है।  भारत और इंडोनेशिया प्रमुख समुद्री शक्तियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और लोकतंत्र की जननी है, जबकि इंडोनेशिया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है. भारत में सैकड़ों भाषाएं और अनेक परंपराएं हैं, ठीक उसी तरह इंडोनेशिया भी सैकड़ों भाषाओं और विविध सांस्कृतिक परंपराओं का देश है. भारत का मंत्र 'वसुधैव कुटुंबकम्' है, जबकि इंडोनेशिया का राष्ट्रीय दर्शन 'भिन्नेका तुंग्गल इका' (विविधता में एकता) है. हम दोनों ने अपनी इस विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत और एकता का आधार बनाया है. हम दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले समाजों में शामिल हैं. हम दोनों प्रमुख समुद्री शक्तियां हैं. हम दोनों ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज हैं. हम प्राचीन सभ्यताएं हैं और भविष्य के लिए स्वाभाविक साझेदार भी हैं।  दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे पीएम मोदी ने बताया कि पिछले वर्ष भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया. आज 100 से अधिक भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया में कार्यरत हैं. हम साथ मिलकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे सामने सहयोग की अभी भी असीम संभावनाएं मौजूद हैं. भारत स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक का प्रबल समर्थक है. भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता का समर्थन करता है. इसके लिए हमने आसियान (ASEAN) को केंद्र में रखा है. हमारी एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) भी आसियान-केंद्रित है. आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत और इंडोनेशिया हमेशा एक साथ खड़े रहे हैं. पिछले वर्ष भारत के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद इंडोनेशिया ने मजबूती से भारत का समर्थन किया. इसके लिए मैं इंडोनेशिया का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं. हमारे दोनों देश संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं।  भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद शुरू करने का प्रस्ताव पिछले वर्ष इंडोनेशिया ब्रिक्स (BRICS) का पूर्ण सदस्य बना और इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. हम दोनों मिलकर ब्रिक्स के इस मंच को और अधिक व्यावहारिक, अधिक … Read more

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी समय से पहले हुए अंतर्ध्यान, 5 दिन में पूरी तरह पिघली हिम शिवलिंग

श्रीनगर  अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा में दर्शन कर चुके हैं। हिमलिंग के इतनी जल्दी पिघलने के बाद अमरनाथ श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।अमरनाथ यात्रियों के लिए दुख वाली खबर सामने आई है. यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा तक पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं. अमरनाथ यात्रा इस बार 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 7 जुलाई को बाबा बर्फानी पूरी तरह से अंतर्ध्यान हो गए. हर वर्ष 57 दिन तक चलने वाली बाबा अमरनाथ यात्रा का रक्षाबंधन के दिन यानी सावन पूर्णिमा पर समापन होता है. लेकिन महज पांच दिन में ही बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने से अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  3 जुलाई से शुरू हुई थी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई तक प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया। जबकि यह यात्रा हर साल 57 दिनों तक चलती है और इस बार इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) के दिन होना है। श्राइन बोर्ड ने क्या कहा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि हिमलिंग का बनना और पिघलना पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने इसे मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी सामान्य घटना बताया है।अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से जब इस बारे में बात कई गई तो उन्होने इस स्थिति को प्राकृतिय प्रकिया का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया. लेकिन कश्मीर के पर्यावरणविदों का मानना है कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति देना इसका सबसे बड़ा कारण है. उनका कहना है कि लाखों भक्तों की गर्म सांस हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है और श्राइन बोर्ड के अधिकारी भी यह मानते हैं लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की. साथ ही हिमलिंग के पिघलने से रोकने के लिए किए गए सभी उपाय भी इनको नाकाफी साबित हुए।  पर्यावरणविदों ने जताई चिंता कश्मीर के कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गुफा के आसपास का तापमान बढ़ता है, जिससे हिमलिंग तेजी से पिघल सकता है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। हालांकि, इस दावे पर सभी विशेषज्ञों की एक जैसी राय नहीं है और हिमलिंग के जल्दी पिघलने के पीछे मौसम और जलवायु भी अहम कारण माने जाते हैं। मौसम और तापमान का भी असर विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग हर साल तापमान, बर्फबारी और मौसम की स्थिति के अनुसार आकार लेता है। ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ता तापमान, कम बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियां इसके बनने और पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।  अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड ने झाड़ा पल्ला अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने इसके पिघलने की प्रक्रिया से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि कश्मीर के पर्यावरणविद इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने की अनुमति देने से ऐसा हुआ है।  भक्तों की गर्म सांसों से पिघल रहा है हिमलिंग! पिछले कई सालों से जिस तेजी से हिमलिंग पिघल रहा है उसे रोकने की खातिर किए जाने वाले उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। दरअसल गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से हिमलिंग को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि लाखों भक्तों की गर्म सांसों को हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है। श्राइन बोर्ड के अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर भक्तों की सांसों की थ्योरी को मानते हैं पर प्रत्यक्ष तौर पर वे इसे कुदरती प्रक्रिया करार देते थे।  पहले भी जल्दी पिघल चुका है हिमलिंग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 मई को हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी। 29 जून तक यह घटकर करीब 5 फीट रह गई और अब इसके पूरी तरह पिघलने की जानकारी सामने आई है। यह पहली बार नहीं है जब हिमलिंग यात्रा के दौरान जल्दी पिघला हो। वर्ष 2016 में यात्रा शुरू होने के करीब 10 दिन बाद ही हिमलिंग पिघल गया था। वहीं, 2013 में भी यात्रा समाप्त होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गया था। 28 अगस्त तक चलेगी अमरनाथ यात्रा इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी वजह से यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है।

कोलकाता में ED की ताबड़तोड़ रेड, TMC फंड केस में 5 ठिकानों पर कार्रवाई; अभिषेक बनर्जी की फ्लाइट पर उठे सवाल

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों और चुनावी चंदे में मचे घमासान के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमें कोलकाता और उसके आसपास सॉल्ट लेक, राजारहाट और राधाबाजार समेत पांच ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। ईडी के अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को साथ लेकर एक चार्टर्ड एविएशन कंपनी के डायरेक्टरों के घर और दफ्तरों को खंगाल रहे हैं। पूरा मामला टीएमसी के खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स जांच के दायरे में मंगलवार की सुबह ईडी की टीम सबसे पहले 'केयरवेल एविएशन' नाम की कंपनी के निदेशकों के घर पहुंची। जांच में यह बात सामने आई है कि इसी कंपनी के प्राइवेट विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी के अन्य बड़े नेता दौरों के लिए करते रहे हैं। सॉल्ट लेक में रहने वाले कंपनी के दो निदेशकों, पवन जाजू और राजेश जाजू के घर पर टीम मौजूद है और उनसे बंद कमरे में पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही राजारहाट और राधाबाजार स्थित केयरवेल एविएशन के दफ्तरों पर भी छापेमारी चल रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या नेताओं के लिए बुक होने वाले इन महंगे चार्टर्ड विमानों का भुगतान टीएमसी के उन्हीं खातों से किया जा रहा था, जिन्हें लेकर शिकायत दर्ज है। पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद की थी बैंक खाते फ्रीज करने की मांग दरअसल, टीएमसी के इन बैंक खातों को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद बैंक अधिकारियों को एक चिट्ठी भेजी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने खुद को पार्टी का अधिकृत कोषाध्यक्ष बताते हुए इन खातों से होने वाले लेन-देन पर रोक लगाने और इन्हें फ्रीज करने का अनुरोध किया था। इसके अलावा साइबर क्राइम ब्रांच में भी वित्तीय गबन को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद से ही ये खाते केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आ गए थे। भाजपा विधायक की शिकायत पर पुलिस ने की थी कार्रवाई इस मामले में राजनीतिक मोड़ तब आया जब जयनगर से भाजपा विधायक ने निजी बैंक के तीन खातों में भारी गड़बड़ी और संदिग्ध लेन-देन का आरोप लगाते हुए बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में साफ कहा गया था कि इन खातों के जरिए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग का खेल चल रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने बैंक को पत्र लिखकर तीनों खातों को तुरंत फ्रीज करवा दिया था, जिसकी कड़ियां जोड़ते हुए अब ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है। "चार्टर्ड फ्लाइट का किराया इसी संदिग्ध पैसे से दिया गया" पार्टी के भीतर और बाहर इस भारी खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रीतब्रत बनर्जी ने इस पूरे विवाद पर तीखा दावा करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स के लिए जो मोटी रकम पानी की तरह बहाई गई, वह इसी फंड से निकली थी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "हमारे लिए अब यह साबित कर पाना नामुमकिन है कि इस खाते में जमा किया गया करोड़ों रुपया किसी घोटाले, डकैती, जबरन वसूली या भ्रष्टाचार की कमाई का हिस्सा नहीं है। साफ दिख रहा है कि वीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स का लाखों-करोड़ों का किराया इसी संदिग्ध पैसे से चुकाया जा रहा था।" फिलहाल ईडी की टीमें दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में टीएमसी के कई बड़े नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  

Pakistan Terror Attack: पुलिस चौकी पर आतंकियों का हमला, 9 सुरक्षाकर्मी मारे गए

इस्लामाबाद आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि जियारत जिले में सोमवार देर रात आतंकवादियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया और ताबड़तोड़ गोलीबारी करने लगे। इस हमले में दो एसएचओ समेत 9 पुलिसकर्मी मारे गए। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों ने पांच जवानों को अगवा भी कर लिया है। वहीं, हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें 15 आतंकवादी मारे गए। घटना की पुष्टि करते हुए जियारत के पुलिस अधीक्षक अब्दुल कुदूस ने बताया कि हमलावरों ने मांगी फेज-तीन क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी को निशाना बनाया। रात भर चली गोलीबारी बेहद भीषण रही, जिसमें दोनों तरफ से भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ। मारे गए पुलिस अधिकारियों में मांगी थाने के एसएचओ मोहम्मद हुसैन, कोवास थाने के एसएचओ सोहबत खान और एंटी-टेररिस्ट फोर्स के इंचार्ज हेड कांस्टेबल सैफुल्लाह शामिल हैं। मारे गए जवानों के शवों को जियारत जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हमले में टीटीपी का हाथ? बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि मांगी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया क्लियरेंस ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है। इस अभियान में फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान पुलिस, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट, स्पेशल ऑपरेशंस विंग और एंटी-टेररिज्म फोर्स ने भाग लिया। शाहिद रिंद ने आगे बताया कि अभियान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 15 आतंकवादी मारे गए। रिंद ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित अभियान और तेज किए जाएंगे। वहीं, अगवा किए गए पांच पुलिसकर्मियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने की घटना की निंदा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शरीफ ने कहा कि हम बलूचिस्तान की शांति को नुकसान पहुंचाने की किसी को इजाजत नहीं देंगे। शांति के दुश्मनों को पूरी तरह समाप्त किए बिना हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कायराना हमले न तो शांति भंग कर सकते हैं और न ही आतंकवाद के खिलाफ देश के दृढ़ संकल्प को कमजोर कर सकते हैं। इलाके में तनाव, सड़कें जाम हमले की खबर फैलते ही जियारत और आसपास के इलाकों में गुस्सा भड़क उठा। स्थानीय कबीलों, ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और मारे गए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया। इस कारण सैकड़ों यात्री बसें और माल ढोने वाले वाहन सड़कों पर फंस गए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने कहा कि लापता जवानों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त सैन्य व पुलिस बल भेजे गए हैं।

18 साल बाद अहमदाबाद ब्लास्ट पीड़ितों को न्याय, 38 दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर

अहमदाबाद साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कायम रखा है. इसके साथ ही दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया. अदालत ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।  यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन किया था. मार्च 2025 से इस मामले की नियमित आधार पर सुनवाई चल रही थी. राज्य सरकार की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि करने की याचिका और दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।  दरअसल, अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे. इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था।  इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह पूरा मामला 26 जुलाई 2008 का है, जब अहमदाबाद में एक के बाद एक करीब 70 मिनट के भीतर कुल 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बम को साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाया गया था।  20 धमाके, 59 लोगों की गई थी जान 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 49 मिनट के अंदर एक के बाद एक 20 धमाके हुए थे। इस सीरियल ब्लास्ट में 59 लोगों की जान चली गई थी। हमलावरों ने नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था। अस्पतालों, बसों, सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में बम लगाए थे। 38 आरोपियों को फांसी, 11 को उम्रकैद इस केस के 14 साल बाद 2022 में सेशन कोर्ट ने 38 आरोपियों को फांसी और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस मामले को सबसे दुर्लभ बताया और कहा कि मौत की सजा देना उचित है। साथ ही, मारे गए और घायल लोगों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह पहला मामला है, जब किसी भी केस में एक साथ 38 आरोपियों को दोषी मानते हुए अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। राज्य सरकार ने भी दायर की थी याचिका इसके बाद, सभी दोषियों ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। वहीं, राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट के समक्ष मौत की सजा के लिए याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट क्यों पहुंचा मामला? कानून के मुताबिक, किसी भी अपराधी को फांसी देने के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी मिलना जरूरी होता है, इसीलिए सजा पाए दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। दोषियों के वकीलों ने पुलिस की जांच, सबूतों और कबूलनामों पर सवाल उठाए। हमलावरों ने शहर की बसों, बाजारों और अस्पताल तक को निशाना बनाया था. धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से भी बम बरामद हुए थे. आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. बताया जाता है कि यह धमाके साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे।  इस मामले में सरकार ने 78 लोगों को आरोपी बनाकर 35 अलग-अलग केस दर्ज किए थे, जिनकी सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई गई थी. करीब 14 साल की लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।  उस समय 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि सबूतों की कमी के चलते 28 लोगों को बरी कर दिया गया था. भारत के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका था जब एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।  इस मामले में स्पेशल कोर्ट में 1150 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे और 8 फरवरी 2022 को 6700 से ज्यादा पन्नों का फैसला सुनाया गया था. स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।     

सिया गोयल पहले से थी शादीशुदा! WhatsApp चैट से हुआ बड़ा खुलासा, जांच में नया मोड़

पुणे पुणे के लोहगढ़ किले से धक्का देकर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस जांच और डिजिटल सबूतों से खुलासा हुआ है कि मामले की मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल ने सह-आरोपी चेतन चौधरी से गुपचुप तरीके से शादी रचा ली थी। पुलिस का मानना है कि यह शादी सगाई से महीनों पहले ही हो चुकी थी। परिवार से छिपाकर की थी 'सीक्रेट मैरिज' न्यूज18 मराठी की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि जांचकर्ताओं का मानना है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने करीब चार महीने पहले अपने-अपने परिवारों को बिना बताए गुपचुप शादी कर ली थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से रिकवर की गई वॉट्सऐप चैट्स को खंगाला। डिजिटल सबूतों से खुली साजिश की पोल जांचकर्ताओं ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों के पिछले 6 से 7 महीने के कॉल रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा, वॉट्सऐप चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की गहन जांच की है। पुलिस का दावा है कि इस डिजिटल एक्टिविटी से साफ होता है कि दोनों ने अपनी शादी की बात परिवारों से छिपाकर रखी थी। पुलिस को संदेह है कि सीक्रेट मैरिज के बाद ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची गई। 14 जून को फेल हो गया था हत्या का पहला प्लान पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश 14 जून को की गई थी, लेकिन वह नाकाम रही। जांचकर्ताओं का दावा है कि सिया ऐन मौके पर डर गई और पीछे हट गई, जिसकी वजह से वह प्लान फेल हो गया था। पुलिस का कहना है कि इसके बाद दोनों आरोपियों के बीच कई मैसेज का आदान-प्रदान हुआ, जिसमें आगे की साजिश पर चर्चा की गई। वॉट्सऐप चैट में लिखा- 'तुम भी आ जाओ, मिलकर धक्का दे देंगे' पुलिस के हाथ एक ऐसी अहम वॉट्सऐप चैट लगी है, जिसने इस हत्याकांड की पूरी कहानी साफ कर दी है। रिकवर किए गए एक मैसेज में कथित तौर पर सिया ने चेतन से कहा कि वह अकेले इस काम को अंजाम देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है, इसलिए उसने चेतन को अपने साथ आने के लिए कहा। पुणे मर्डर केस जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया ने मैसेज में लिखा था: "मुझमें इसे करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आ जाओ- हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से धक्का दे देंगे।" पुलिस का दावा है कि इस खौफनाक बातचीत के बाद 18 जून को कथित तौर पर दोनों ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच लगातार जारी है और यह पूरा केस कोर्ट के विचाराधीन है।

मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था होगी पारदर्शी, पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते अनिवार्य

 हरिद्वार उत्तराखंड के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है. अब मंदिर में सेवा देने वाले सभी पुजारी बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे. इसके साथ ही मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय पर्यवेक्षण समिति का भी गठन किया गया है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना तथा चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।  यह निर्णय हाल के दिनों में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर सामने आए विवाद के बाद लिया गया है. हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को खत्म करने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लागू की जा रही है. नई व्यवस्था के तहत पुजारियों के कुर्तों में किसी प्रकार की जेब नहीं होगी. वहीं, सात सदस्यीय समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और चढ़ावे की नियमित निगरानी करेगी. यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. समिति के सभी सदस्यों को इस जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए शपथ भी दिलाई गई है।  मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने मंदिर परिसर में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है. इसलिए चढ़ावे के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने के लिए यह पहल की गई है।