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PM मोदी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर शक्ति प्रदर्शन, 35 पार्टियों के 75 नेता जुटेंगे, भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के 12 साल पूरे हो गए हैं.देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड पीएम मोदी ने मोदी तोड़ दिया है. यह रिकॉर्ड आजादी के बाद निर्वाचित सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का है. पंडित नेहरू चुनाव जीतकर 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे जबकि नरेंद्र मोदी का बतौर पीएम का 4399वां दिन है।  पीएम मोदी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल का ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा करने पर पूरे देश में जश्न का माहौल है. मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों को बीजेपी लोगों के सामने रख रही है और उपलब्धियों का जश्न भी मना रही है. इस मौके पर दिल्ली में बीजेपी और एनडीए के सभी सहयोगी दल के नेता दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाली बैठक में शिरकत करेंगे।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड बनाने उपलक्ष्य में भारत मंडपम में हो रही बैठक में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित प्रमुख नेता शामिल होंगे. एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा।  35 दल के 75 नेता करेंगे शिरकत पीएम मोदी ने 1952 के आमचुनावों के बाद चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा लिया है जबकि जवाहर लाल नेहरू  4,398 दिन तक पीएम रहे थे. इस तरह से नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।  मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में एक जश्न रखा गया है,  जिसमें बीजेपी और उसके सहयोगी दल के नेता हिस्सा लेंगे. बैठक में एनडीए के 22 शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों के अलावा गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के नेता शिरकत करेंगे।  बैठक में एनडीए के 35 सहयोगी दलों के करीब 75 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. बैठक की अध्यक्षता बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे. इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह,जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान जैसे केंद्रीय मंत्रियों के कार्यक्रम में शामिल होंगे।  वहीं, एनडीएमें शामिल पार्टियों के केंद्रीय मंत्रियों में टीडीपी से के राम मोहन नायडू, जेडीयू से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह,जेडीएस से एचडी कुमारस्वामी और अपना दल-सोनेलाल से अनुप्रिया पटेल इस बैठक में शामिल होंगी. इसके अलावा राज्यों के सहयोगी दल के नेता भी शिरकत करेंगे।  एनडीए की बैठक का एजेंडा क्या होगा एनडीए बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों सहित मोदी सरकार के 12 पूरे होने पर चर्चा होने की संभावना है. एनडीए के नेता और केंद्र और राज्य सरकारों के नेता 'विकसित भारत' के  सपने को साकार करने के लिए और सुधार लाने के तरीकों पर अपने विचार रखेंगे।  मोदी की अगुवाई में होने वाली बैठक में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने पर एनडीए नेता अपनी बात रख सकते हैं. बैठक में राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के मोदी सरकार के विजन की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. बैठक में इस बात पर भी चर्चा होने डंबल इंजन की सरकार चल रही, उन राज्यों में विकास योजनाओं को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए।  पिछले दिनों केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि केंद्रीय मंत्रियों को लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' की दिशा में काम करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन 2026 में भविष्य के लक्ष्यों और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. माना जा रहा है कि इस पर विस्तार के चर्चा हो सकती है।  बैठक में मोदी के लिए आएगा प्रस्ताव एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू एक विशेष प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसका समर्थन नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो करेंगे।  एनडीए के तरफ से लाए जाने वाले विशेष प्रस्ताव में 12 साल तक निर्वाचित रूप से प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए नरेंद्र मोदी को बधाई दी जाएगी और उनके नेतृत्व के लिए एनडीएका आभार जताया जाएगा  प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने से पहले गठबंधन के नेता चर्चा में हिस्सा लें. प्रस्ताव पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक को संबोधित कर सकते हैं।  एनडीए की बैठक को मोदी करेंगे संबोधित  दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली एनडीए बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. बैठक में मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धि पर चर्चा किए जाने के साथ ये बैठक करीब 3 घंटे तकतक चलेगी. मोदी सरकार के कामकाज पर प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पीएम मोदी एनडीए नेताओं को संबोधित करेंगे। 

रूस से कारोबार पड़ा भारी! EU की नई पाबंदियों के निशाने पर भारत-चीन की 50 कंपनियां

लंदन  यूरोपीय यूनियन ने भारत, चीन समेत दुनिया के कई देशों में स्थित 50 कंपनियों को झटका दिया है. ईयू ने यूक्रेन पर हमले के चलते रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की है. इन प्रतिबंधों ने अचानक इन आधा सैकड़ा कंपनियों के सामने संकट खड़ा कर दिया है. EU की ओर से ऐलान किया गया है कि वह भारत और अन्य देशों की उन 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल के उपाय लागू करेगा, जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती हैं।  भारत, चीन, तुर्की समेत यहां असर  यूरोपीय यूनियन के इस ऐलान का असर भारत और चीन के साथ ही किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों पर पड़ेगा और इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाएंगे. ईयू ने ये फैसला रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लिया है, लेकिन इससे सिर्फ रूस ही नहीं, तमाम देश प्रभावित होंगे. नई लिस्ट में ड्रोन निर्माण से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं, जिनपर निर्यात प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  तैयार हो रही सबसे बड़ी लिस्ट प्रस्तावित 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा करते हुए यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने कहा कि ये उपाय यूक्रेन में मॉस्को के सैन्य अभियान को वित्तपोषित करने और बनाए रखने की क्षमता पर लगाम लगाने के लिए किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हम धीरे-धीरे रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ध्वस्त करते जा रहे हैं, अब ब्रुसेल्स दो साल से अधिक समय में रूस पर प्रतिबंधों की सबसे बड़ी लिस्ट तैयार कर रहा है।  90 बैंकों की संपत्ति जब्त होगी! ईयू के प्रस्तावित पैकेज में उन बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों और क्रिप्टो ऑपरेटरों को टारगेट किया गया है. जो तीसरे देशों में स्थित हैं और उन पर रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है. कल्लास के मुताबिक, करीब 90 बैंकों की संपत्ति जब्त की जा सकती है, जबकि रूस और अन्य देशों के 30 से अधिक बैंकों के साथ लेनदेन पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा 11 क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म पर भी ट्रांजैक्शन बैन लगाने की तैयारी है. इस बीच उन्होंने ये भी कहा कि यूरोपीय संघ रूसी एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाले राजस्व को कम करने के लिए रूसी तेल की कीमत सीमा पर अस्थायी रोक लगाने की कोशिश भी कर रहा है।  निशाने पर रूस को समर्थन देने वाली कंपनियां काजा कल्लास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भी इन प्रतिबंधों से जुड़ी जानकारी शेयर की. इसमें उन्होंने कहा कि, 'हम रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र (Military-Industrial Complex) को समर्थन देने वाली तमाम कंपनियों को भी निशाना बना रहे हैं. नई सूची में ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़ी 30 से अधिक संस्थाओं को शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल उपाय लागू किए जाएंगे।  उन्होंने कहा कि हम रूस की उत्पादन क्षमता को और बाधित करने के लिए अतिरिक्त निर्यात प्रतिबंध भी लगाएंगे. इनमें निकेल पाउडर, धातुएं और हाई परफॉर्मेंस मिश्रधातुएं शामिल हैं. इसके अलावा, कुछ नई वस्तुओं के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा, जिनमें ऑटो पार्ट्स, कई कीमती धातुओं के अयस्क (Precious Metals Ores) और रसायन शामिल होंगे।   

एक टिकट और बदल गई जिंदगी! UAE लॉटरी में करोड़ों जीतकर चर्चा में आया सिक्योरिटी गार्ड

दुबई  अबू धाबी के रुवैस इंडस्ट्रियल एरिया में ईद-उल-अजहा की छुट्टी वाली रात 26 साल का नेपाली युवक तैयब खान अपनी नाइट शिफ्ट में तैनात थे. गेट पर आने-जाने वालों की जांच करना और सुरक्षा व्यवस्था संभालना उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारी थी. चार साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में नेपाल से UAE पहुंचे तैयब को अंदाजा भी नहीं था कि एक ईमेल उनकी जिंदगी बदल देगा।  ड्यूटी के दौरान उनके फोन पर एक ईमेल आया. पहले तो उन्हें लगा कि शायद कोई छोटा-मोटा इनाम मिला होगा, लेकिन जैसे ही उन्होंने मेल खोला, उनके होश उड़ गए. गल्फ न्यूज के मुताबिक, UAE Lottery के Lucky Day ड्रा में उनके ग्रुप ने Dh30 मिलियन (करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक) का ग्रैंड जैकपॉट जीत लिया था।  दोस्तों के साथ खरीदा था टिकट तैयब यह रकम अकेले नहीं जीते. उन्होंने अपने चार नेपाली दोस्तों के साथ मिलकर 2024 से नियमित रूप से लॉटरी टिकट खरीदना शुरू किया था. पांचों दोस्तों ने अपने ग्रुप का नाम 'Future Millionaires' रखा था. हर हफ्ते सभी Dh50-50 (करीब 1,100 रुपये) जमा करते और एक टिकट खरीदते थे।  उनकी यह छोटी-सी कोशिश आखिरकार रंग लाई और पांचों दोस्त रातोंरात करोड़पति बन गए. Dh30 मिलियन की रकम पांचों में बराबर बंटी, जिससे तैयब के हिस्से में करीब Dh6 मिलियन (करीब 14-15 करोड़ रुपये) आए।  अब क्या करेंगे तैयब? लॉटरी जीतने के बाद तैयब ने कहा कि वह सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़ने की योजना बना रहे हैं. उनका पहला लक्ष्य नेपाल में अपने परिवार के लिए एक बड़ा घर बनवाना है. इसके अलावा वह लंबे समय से खरीदना चाह रहे महिंद्रा थार और एक रोलेक्स घड़ी भी लेना चाहते हैं.तैयब ने यह भी बताया कि वह दुबई में रियल एस्टेट में निवेश करने और अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे हैं।  आखिर क्या है UAE Lottery? तैयब जिस लॉटरी के जरिए करोड़पति बने, वह UAE की आधिकारिक और लाइसेंस प्राप्त राष्ट्रीय लॉटरी है. इसके सबसे लोकप्रिय गेम Lucky Day में एक एंट्री की कीमत Dh50 होती है. खिलाड़ी कुछ नंबर चुनते हैं और तय तारीख पर ड्रा निकाला जाता है. सभी नंबर मैच होने पर करोड़ों रुपये का जैकपॉट मिलता है।  वर्तमान में Lucky Day का ग्रैंड प्राइज Dh30 मिलियन है. यानी 70 करोड़ रुपये. इसके अलावा छोटे और मध्यम स्तर के कई इनाम भी दिए जाते हैं. UAE में यह लॉटरी सरकारी नियमन के तहत संचालित होती है और हजारों प्रवासी कर्मचारी इसमें भाग लेते हैं।  मेहनत, दोस्ती और किस्मत की कहानी तैयब खान की कहानी सिर्फ एक लॉटरी जीतने की नहीं है. यह उन लाखों प्रवासी कामगारों की कहानी भी है, जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए घर से हजारों किलोमीटर दूर काम करते हैं. चार साल की मेहनत, दोस्तों का साथ और एक छोटे से सपने ने उनकी जिंदगी बदल दी।  तैयब की जीत यह भी दिखाती है कि कभी-कभी साधारण जिंदगी जीने वाले लोगों की किस्मत भी अचानक ऐसा मोड़ ले सकती है, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की होती। 

PAK सेना का सीमा पार हमला, अफगानिस्तान में 11 मासूम बच्चों सहित 13 की जान गई

काबुल  अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है. बीती रात पाकिस्तानी सेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में स्थित आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है।  इस हवाई हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कई नागरिक हताहत हुए हैं. अफगान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, पाकिस्तानी हमलावर सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का खुलेआम उल्लंघन किया।  जबीउल्लाह ने आगे बताया कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के तीन प्रमुख प्रांतों- कुनार, खोस्त और पक्तिका में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया. इन इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के घरों पर अंधाधुंध बमबारी की गई, जिससे कई घर पूरी तरह तबाह हो गए।  हमले में बच्चों-महिलाओं समेत 13 की मौत इस हमले में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. बमबारी में कुल 13 लोग मारे गए हैं, जिन्हें अफगान प्रशासन ने शहीद घोषित किया है. मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या मासूम बच्चों की है. इस हमले में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई. इसके अलावा हमले में 14 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।  घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कइयों की हालत नाजुक बनी हुई है. सोशल मीडिया पर इस हमले के बाद की कुछ दर्दनाक तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें पीड़ित बच्चों की स्थिति देखी जा सकती है।  अफगानिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति इस हमले के बाद अफगान सरकार का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने बयान में इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा, 'हम इस अमानवीय अपराध और हमले की कड़े से कड़े शब्दों में पुरजोर निंदा करते हैं.' अफगानिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और आम नागरिकों के खिलाफ एक क्रूर अपराध बताया है।  अफगानिस्तान के पूर्व प्रेसिडेंट हामिद करजई ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने शहीदों के परिवारों के साथ गहरा दुख और एकजुटता दिखाते हुए, एक बार फिर कहा कि पाकिस्तान इस इलाके में अपनी गलत नीतियों और दुश्मनी भरी कार्रवाइयों के नतीजों से जूझ रहा है. उसे ये समझना चाहिए कि वो उन नीतियों पर कायम रहकर और उन्हें आगे बढ़ाकर अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा।  करजई के मुताबिक पाकिस्तान की भलाई अफगानिस्तान के प्रति युद्ध और तबाही की अपनी नीति को छोड़ने और इसके बजाय अच्छे पड़ोसी और सभ्य रिश्ते चुनने में है। 

SBI रिपोर्ट में खुलासा: पारंपरिक अपराध कम हुए, साइबर अपराधों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली देश में अपराध की तस्वीर बदल रही है. एक तरफ पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अपराधियों के नए तरीके सामने आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल अपराध दर घटी है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में अपराध, अर्थव्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और तकनीक के बीच के रिश्ते पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं।  SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2024 के दौरान 58.86 लाख संज्ञेय (Cognizable) अपराध दर्ज किए गए. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत कम है. देश की कुल अपराध दर भी घटकर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से 418.9 रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक निवेश, डिजिटलीकरण और निगरानी तंत्र में सुधार इसके प्रमुख कारण हैं।  हालांकि कुल अपराध कम हुए हैं, लेकिन साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में साइबर क्राइम के मामले 1 लाख के आंकड़े को पार कर सकते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।  रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भी थोड़ी कमी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में ऐसे 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 4.41 लाख रह गए. यह करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि चुनौती का स्तर अभी भी बहुत बड़ा है और इसे सफलता नहीं माना जा सकता।  एएनआई के मुताबिक, SBI का मानना है कि UPI, FASTag और डिजिटल निगरानी जैसे साधनों ने अपराधियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. डिजिटल ट्रेल की वजह से अपराध करने वालों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना पहले की तुलना में अधिक हो गई है. इससे अपराध करने की लागत और खतरा दोनों बढ़े हैं।  रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन क्षेत्रों में अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वहां अपराध में हल्की गिरावट देखने को मिली है. वर्ष 2022 से 2024 के बीच CCTV कैमरों और अपराध दर के बीच नकारात्मक संबंध (-0.148) दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि निगरानी बढ़ने से अपराध कम होने की संभावना बढ़ती है।  स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के सभी 100 स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) संचालित किए जा रहे हैं. ये सेंटर डेटा, तकनीक, निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़ते हैं. इसका मकसद शहरी प्रबंधन को बेहतर बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।  रिपोर्ट के अनुसार 100 स्मार्ट शहरों में 84,000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 1,884 इमरजेंसी कॉल बॉक्स और लगभग 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं. SBI का कहना है कि ये सुविधाएं लोगों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पकड़े जाने का डर बढ़ाती हैं।  रिपोर्ट में अपराध और आर्थिक विकास के बीच दिलचस्प संबंध का उल्लेख किया गया है. अध्ययन बताते हैं कि अपराध बढ़ने से निवेश प्रभावित होता है, व्यापारिक लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे विकास की गति धीमी हो सकती है और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है।  SBI के अनुसार प्रति लाख आबादी पर IPC/BNS अपराध दर में 1 प्रतिशत की कमी आने पर अल्पकाल में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 0.11 प्रतिशत बढ़ सकती है. यानी अपराध कम होने का फायदा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था और विकास दर को भी मिलता है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध श्रम बाजार में बाधा पैदा करते हैं और महिला कार्यबल की भागीदारी को प्रभावित करते हैं. NCRB 2024 के अनुसार पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,227 मामले और 1,21,166 पीड़ित दर्ज किए गए।  वहीं NFHS-5 के आधार पर अनुमान है कि करीब 27.88 करोड़ विवाहित महिलाओं में से 24 प्रतिशत ने पिछले 12 महीनों में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया. इसका अनुमानित वार्षिक बोझ करीब 6.69 करोड़ महिलाओं तक पहुंचता है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और श्रम नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

कागज नहीं, प्लास्टिक करेंसी! RBI की चर्चा के बीच जानिए कितने टिकाऊ होते हैं ये नोट

 नई दिल्ली भारत में भी अब 'प्लास्टिक' के नोट आने वाले हैं, जैसे कई दूसरे देशों में छापे जाते हैं. खास मैटेरियल से बने ये नोट जल्दी से फटते नहीं हैं और अगर पानी में गिर जाए तो खराब नहीं होते हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बता दिया है कि इस तरह के नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी शुरुआती फेज में है. अभी भले ही इसमें टाइम लगेगा, लेकिन भारत के करेंसी नोट भी अलग मैटेरियल के होंगे. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये नोट प्योर प्लास्टिक से बनाए जाएंगे या फिर कुछ अलग मैटेरियल के होंगे और इस पर कितना काम हो चुका है? अभी आरबीआई का क्या कहना है? हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पॉलिमर से बने नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है. पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसे लेकर आकलन कर रहा है. इस पर जैसे ही कोई निर्णय होता है, उसकी जानकारी दी जाएगी. दरअसल, सरकार इस पर लंबे वक्त से काम कर रही है।  इससे पहले इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षण के लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था. हालांकि, तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था।  किस मैटेरियल के होंगे ये नोट? जिन नोटों की चर्चा हो रही है, उन्हें पॉलिमर नोट कहा जाता है. ये कागज के बजाय एक विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने मुद्रा नोट होते हैं. ये आम कागजी नोटों (जो कपास और लिनन से बनते हैं) की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत होते हैं. ये पानी में भीगने या वॉशिंग मशीन में धुल जाने पर भी खराब नहीं होते हैं. ये नोट थोड़े चिकने होते हैं।  इन नोट्स को बनाने में BOPP यानी पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल किया जाता है. पॉलिमर नोटों में पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) ही वह मुख्य आधार है, जो इन्हें पारंपरिक कागजी नोटों से अलग बनाता है. इन्हें प्लास्टिक का कहा जा सकता है, लेकिन ये पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट नहीं होते हैं जबकि ये उसी मैटेरियल का सबसे अच्छा रूप है. पॉलिमर नोट आम प्लास्टिक (जैसे कैरी बैग या पीवीसी) से काफी अलग होते हैं. इसकी परत आम प्लास्टिक की तरह मोटी या सख्त नहीं, बल्कि कागज जितनी पतली होती है. यह सामान्य प्लास्टिक की तरह जेब की गर्मी या धूप से आसानी से पिघलता या सिकुड़ता नहीं है।  इस प्लास्टिक फिल्म पर स्याही को रोकने के लिए खास तरह की लेयर की कोटिंग की जाती है, इस पर छपाई टिकी रहती है. पॉलिमर नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसके बाद से यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई अन्य देशों ने भी अपनी मुद्रा के लिए पॉलिमर तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है. अब भारत भी इस पर विचार कर रहा है। 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8th Pay Commission से वेतन में हो सकती है बंपर बढ़ोतरी

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग की जा रही है। अगर सरकार सबसे अधिक प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.83 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹68,940 हो सकता है। क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को नए सैलरी स्ट्रक्चर में परिवर्तित किया जाता है। वेतन आयोग की सिफारिशों में यह सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर वेतन, पेंशन, भत्ते और एरियर तय होते हैं। 7वें वेतन आयोग में कितना था फिटमेंट फैक्टर? 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। 8वें वेतन आयोग के लिए क्या हैं मांगें? विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।विशेषज्ञों का फिटमेंट फैक्टर का अनुमान 1.92 है। जबकि, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) का 3.00 और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) का 3.25 है। वहीं, जम्मू-कश्मीर कर्मचारी मंच का अनुमान 3.05 और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी समन्वय समिति का 2.86 से 3.68 है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)ने 3.83 का अनुमान लगाया है। फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कितना हो सकता है वेतन? मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 को आधार मानें तो संभावित वेतन इस प्रकार हो सकता है… 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹34,560 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹46,260 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹51,480 3.00 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹54,000 3.25 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹58,500 3.68 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹66,240 3.83 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹68,940 अगर सरकार 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर ही लागू करती है, तब भी न्यूनतम मूल वेतन ₹46,260 तक पहुंच सकता है। वहीं, कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर मंजूर होने पर वेतन में करीब 283 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। सिर्फ वेतन ही नहीं, भत्ते भी बढ़ेंगे फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का असर केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी होगी। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की समीक्षा होगी और मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में समाहित किया जाएगा। नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू होने के बाद DA की गणना फिर से शुरू होगी। कर्मचारियों की निगाह सरकार के फैसले पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, वेतन और पेंशन में उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है।

मोदी सरकार में बदलाव के संकेत, राज्यसभा चुनाव के बाद कई मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं

नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही एनडीए सरकार में कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अटकलें हैं कि इस बार कई राज्य मंत्रियों को बदला जा सकता है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि किन मंत्रालयों में बड़े स्तर पर बदलाव होंगे, लेकिन कहा जा रहा है कि इसकी संख्या एक दर्जन मंत्रियों तक जा सकती है। खास बात है कि 18 जून को राज्यसभा चुनाव हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी कैबिनेट को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कम से कम 2 कैबिनेट मंत्री और 3 राज्य मंत्रियों परिषद से बाहर हो सकते हैं। अटकलें ये भी हैं कि एक वरिष्ठ मंत्री को दक्षिण भारतीय राज्य में पार्टी की कमान भी सौंपी जा सकती है। दूसरे दलों को भी मिलेंगे पद रिपोर्ट के मुताबिक, सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि मोदी सरकार की नई कैबिनेट में JD(U), TDP, NCP और RLM जैसे सहयोगी दलों (Allies) को जगह मिल सकती है। इसमें भी नीतीश कुमार की JD(U) और चंद्रबाबू नायडू की TDP को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। जबकि, सहयोगी दलों के ज्यादातर नेताओं को राज्य मंत्री का पद मिलने की उम्मीद है। राज्यसभा चुनाव कहा जा रहा है कि राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे कई मंत्रियों को इस साल या 2027 की शुरुआत में संगठन में भेजा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि 70 साल से ज्यादा उम्र के कुछ राज्यसभा सांसदों को बदलने पर विचार किया जा सकता है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि भाजपा मोर्चा नेताओं को कैबिनेट में पहली बार शामिल किया जा सकता है। इन मंत्रालयों में बदलाव के आसार रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे, वित्त, कॉर्पोरेट अफेयर्स, कोयला, टेक्सटाइल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, ग्रामीण विकास, रसायन और उर्वरक, सहकारिता, मत्स्य पालन, जल शक्ति, कृषि और पर्यावरण, कानून और अन्य में बदलाव के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। राज्यसभा चुनाव 18 जून को होने वाले चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीट, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीट, झारखंड की दो सीट तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा। जिन 26 सीटों के लिए चुनाव एवं उपचुनाव हो रहा है उनमें एनडीए के पास 18 सीटें हैं और इनमें भी 12 सीटें भाजपा की हैं।

होम लोन लेने वालों के लिए बड़ा अपडेट! नए CIBIL नियम के बाद बढ़ सकता है ब्याज का बोझ

 नई दिल्ली RBI के ECL नियम लागू होने के बाद बैंकों को ज्यादा प्रावधान करना होगा, कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों के लिए बढ़ सकती हैं ब्याज दरें अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है तो आने वाले समय में होम लोन, ऑटो लोन और एजुकेशन लोन लेना पहले के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए 'ECL Direction-2026' के लागू होने के बाद बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को कर्ज देने में अधिक सतर्कता बरतेंगे. बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को या तो लोन मिलने में दिक्कत होगी या फिर उन्हें ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ेगा।  कई मामलों में बैंक अतिरिक्त गारंटी या कोलेटरल की भी मांग कर सकते हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात है कि देश में करीब 62 फीसदी लोन आवेदकों का CIBIL स्कोर 730 से कम है. ऐसे में अगले साल से बड़ी संख्या में लोगों के लिए होम, ऑटो और एजुकेशन लोन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नए नियम RBI का 'Expected Credit Loss (ECL) Direction-2026' 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. वर्तमान व्यवस्था में बैंक किसी लोन के एनपीए (Non-Performing Asset) बनने के बाद उसके लिए प्रावधान करते हैं. आमतौर पर ये स्थिति तब आती है, जब ग्राहक 90 दिनों तक किश्त नहीं चुकाता.  नई व्यवस्था में बैंकों को संभावित डिफॉल्ट का अनुमान पहले ही लगाना होगा और उसके हिसाब से अलग से रकम रखनी होगी. यानी लोन डूबने का इंतजार नहीं किया जाएगा और संभावित नुकसान के लिए पहले से तैयारी करनी होगी. जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है और कुल मिलाकर करीब 42 हजार करोड़ रुपये तक का असर पड़ सकता है।  प्रीमियम ग्राहकों पर रहेगा ज्यादा फोकस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए नियम लागू होने के बाद बैंक उन ग्राहकों से ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं जिनमें डिफॉल्ट का जोखिम अधिक है. वहीं, बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को ब्याज दरों में रियायत और बेहतर शर्तों पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है. इसी वजह से बैंक 730 या उससे ज्यादा CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों पर ज्यादा फोकस करेंगे. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक देश में करीब 7 करोड़ ऐसे ग्राहक हैं जिनका क्रेडिट स्कोर 730 या उससे ज्यादा है।  बैंक कैसे लगाएंगे भविष्य के जोखिम का अनुमान? ECL फ्रेमवर्क के तहत बैंक मौजूदा भुगतान स्थिति देखने के साथ कई दूसरे इंडिकेटर्स का भी एनालिसिस करेंगे जिनमें शामिल हैं- -ग्राहक का भुगतान रिकॉर्ड -CIBIL स्कोर में बदलाव -आय में कमी या अस्थिरता -नौकरी जाने का जोखिम -लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो  -मौजूदा कर्ज की स्थिति इन आंकड़ों के आधार पर बैंक तय करेंगे कि भविष्य में डिफॉल्ट की आशंका कितनी है.  डिफॉल्ट पर कई गुना बढ़ेगा प्रावधान नए नियमों के तहत बैंकों को डिफॉल्ट की स्थिति में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रकम अलग रखनी होगी. उदाहरण के तौर पर, 25 लाख रुपये के होम लोन पर: – 30 दिन की EMI डिफॉल्ट होने पर अभी करीब 10 हजार रुपये का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 25 हजार रुपये हो जाएगा. – 31 से 60 दिन तक डिफॉल्ट रहने पर ये रकम 10 हजार रुपये से बढ़कर 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. 90 दिन से ज्यादा के डिफॉल्ट की स्थिति में अभी 3.75 लाख रुपये (15%) का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाएगा इससे बैंकों की लागत बढ़ेगी और वे कर्ज देने के दौरान वो ज्यादा सावधानी बरतेंगे.  आम ग्राहकों पर क्या असर होगा? जानकारों का मानना है कि ECL फ्रेमवर्क बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने और जोखिम की पहचान पहले करने की दिशा में बड़ा कदम है. हालांकि इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका क्रेडिट स्कोर कमजोर है. ऐसे ग्राहकों को समय पर EMI भुगतान, क्रेडिट कार्ड बिल की नियमित अदायगी और कम कर्ज देनदारी बनाए रखने पर ध्यान देना होगा. बेहतर CIBIL स्कोर ही भविष्य में सस्ती ब्याज दर और आसान लोन मंजूरी की सबसे बड़ी कुंजी बन सकता है.  1 अप्रैल 2027 से नियम लागू होने के बाद बैंकों की लोन देने की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां फोकस लोन डिस्ट्रीब्यूशन के साथ ही ग्राहक की क्रेडिट क्वालिटी और जोखिम क्षमता पर रहेगा। 

ऊर्जा सुरक्षा पर चीन की बड़ी चाल, ‘समुद्री दैत्य’ से होर्मुज पर निर्भरता घटाने की तैयारी

बीजिंग  होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल-गैस की किल्लत को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग ने दुनिया के कई देशों को आर्थिक मंदी के मुहाने पर ला खड़ा किया है. डर यह जताया जा रहा है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री ट्रेड रूट में शामिल होर्मुज अगर जल्द नहीं खुला तो पेट्रोल,एलपीजी और एनएलजी की किल्लत और गहरा सकती है. इन्हीं चिंताओं के बीच चीन ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा दांव खेला है. चीन की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनी ने समुद्र में दैत्याकार जहाज उतारने की तैयारी शुरू कर दी है. दुनिया के इस सबसे बड़े जहाज से एक ही बार में 2.71 लाख क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस यानी एनएलजी लाई जा सकेगी. यह जहाज न केवल शिपबिल्डिंग उद्योग में नया रिकॉर्ड बनाएगा, बल्कि वैश्विक गैस सप्लाई चेन को भी नई मजबूती देगा।  क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट? हाल के महीनों में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने दुनिया को यह एहसास कराया कि तेल-गैस की सप्लाई कितनी संवेदनशील है. दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा और LNG की महत्वपूर्ण खेपें इसी रास्ते से गुजरती हैं. ऐसे में होर्मुज की नाकेबंदी से एशिया और यूरोप के कई देशों में गैस की कमी पैदा हो गई है।  यही वजह है कि LNG परिवहन क्षमता बढ़ाने को अब ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा माना जा रहा है. चीन का नया जहाज इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो एक बार में पहले की तुलना में कहीं ज्यादा LNG ढो सकेगा।  कितना विशाल है यह जहाज? नया LNG कैरियर 344 मीटर लंबा होगा और इसकी क्षमता 2,71,000 क्यूबिक मीटर LNG होगी. तुलना करें तो आज दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक LNG जहाजों की क्षमता करीब 1,70,000 से 1,80,000 क्यूबिक मीटर होती है. एक आधुनिक गैस कैरियर औसतन करीब 174,000 क्यूबिक मीटर LNG लेकर चलता है।  इस लिहाज से चीन का नया जहाज मौजूदा मानक जहाजों की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत अधिक LNG ढो सकेगा. इसका मतलब है कि एक ही यात्रा में अधिक गैस पहुंचाई जा सकेगी, जिससे परिवहन लागत कम होगी और सप्लाई चेन अधिक प्रभावी बनेगी।  एलएलजी जहाज क्यों कहलाते हैं ‘क्राउन ज्वेल’? LNG कैरियर बनाना आज भी बेहद जटिल है. प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस पर तरल रूप में सुरक्षित रखना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. इसके लिए विशेष टैंक, उन्नत इंसुलेशन सिस्टम और अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों की जरूरत होती है. यही वजह है कि इसे शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री का ‘क्राउन ज्वेल’ यानी सबसे प्रतिष्ठित जहाज माना जाता है।  ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस नए जहाज में NO96 Super+ मेम्ब्रेन कंटेनमेंट सिस्टम लगाया जाएगा, जो गैस को सुरक्षित रखने के साथ-साथ रिसाव और ऊर्जा हानि को भी कम करेगा।  पर्यावरण के लिहाज से भी खास जहाज में डुअल-फ्यूल इंजन सिस्टम होगा, जिससे यह पारंपरिक ईंधन और एलएनजी दोनों पर चल सकेगा. कंपनी का दावा है कि इससे ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों कम होंगे. यह जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के Tier-III पर्यावरण मानकों का भी पालन करेगा।  ऐसे समय में जब दुनिया हरित ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, LNG को कोयले और तेल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है. इसलिए LNG परिवहन क्षमता बढ़ना एनर्जी ट्रांजिशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।  समुद्र में चीन की बढ़ती ताकत एक समय एलएनजी जहाज निर्माण पर दक्षिण कोरिया और कुछ पश्चिमी कंपनियों का लगभग एकाधिकार था. लेकिन अब चीन तेजी से इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एनएलजी शिपबिल्डिंग बाजार में चीन की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।  चीन अखबार के मुताबिक, हुडोंग-झोंगहुआ शिपबिल्डिंग कंपनी के पास फिलहाल लगभग 60 LNG जहाजों के ऑर्डर हैं और उसके शिपयार्ड 2030 तक पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं. इससे साफ है कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में चीन अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहता है।  होर्मुज संकट और एनएलजी का भविष्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है तो LNG परिवहन क्षमता दुनिया के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी. यूरोप, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे बड़े आयातक देशों को ऊर्जा सुरक्षा के लिए अधिक बड़े और अधिक कुशल एलएनजी जहाजों की जरूरत होगी।  ऐसे में चीन का यह मेगा एलएनजी कैरियर सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक ऊर्जा राजनीति और सप्लाई चेन की नई तस्वीर का प्रतीक माना जा रहा है. 2028 में इसकी पहली डिलीवरी होने के बाद यह दुनिया की एलएनजी लॉजिस्टिक्स क्षमता को एक नया आयाम दे सकता है।