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इस्लामी दुनिया में बढ़ी खाई? खामेनेई के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे 3 प्रमुख मुस्लिम देश, चर्चा तेज

तेहरान  यह एक ऐसा दृश्य था, जिसकी ओर पूरी मुस्लिम उम्मा की निगाहें टिकी थीं. ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया भर से प्रतिनिधिमंडल पहुंचे. भारत के केंद्रीय मंत्री पहुंचे. चीन ने अपना विशेष दूत भेजा, रूस की ओर से वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे, तुर्की के उपराष्ट्रपति तेहरान पहुंचे, पाकिस्तान का तो पूरा कुनबा ही वहां था. मध्य एशिया के कई देशों ने भी शिरकत की. लेकिन इस भीड़ में तीन नामों की अनुपस्थिति सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी. ये तीन देश थे- संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत।  ये तीनों देश न केवल मुस्लिम बहुल राष्ट्र हैं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ भी हैं. विशुद्ध इस्लामिक देश होने के बावजूद इन 3 देशों ने आखिर मुस्लिम दुनिया के एक बड़े चेहरे को श्रद्धांजलि देने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा? लेकिन क्यों? वो भी तब जब दुनिया के कई देश तेहरान में मौजूद थे।  ये वो सवाल है जिसमें गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल  (GCC) की राजनीति, खाड़ी में मुस्लिम देशों के बीच की प्रतिद्वंद्विता और आपसी टकराव की कहानी छिपी है।  तीन कट्टर मुस्लिम देशों ने खामेनेई को नहीं दी श्रद्धांजलि GCC की स्थापना 25 मई 1981 को हुई थी. इसके कुल 6 सदस्य देश हैं. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान. इसकी स्थापना का उद्देश्य मुस्लिम उम्मा समेत पूरी दुनिया में ईरान के बढ़ते प्रभाव को कम करना था. यहां यह भी जानना जरूरी है कि  बहरीन को छोड़कर GCC के सभी 5 देश सुन्नी बहुल हैं, जब ईरान शिया बहुल इस्लामिक राष्ट्र् है. इसलिए भी इनके बीच प्रतियोगिता चलती रहती है।  बहरीन की कहानी थोड़ी अलग है. यह देश है तो शिया बहुल लेकिन यहां शासन सुन्नी अल खलीफा परिवार के पास है. इसलिए बहरीन का ईरान से तनाव रहता है. बहरीन की सुन्नी राजशाही लंबे समय से ईरान पर देश के शिया समुदाय को प्रभावित करने का आरोप लगाती रही है।   वहीं UAE और ईरान के बीच अबू मूसा तथा टुंब द्वीपों को लेकर पुराना क्षेत्रीय विवाद मौजूद है. कुवैत के संबंध अपेक्षाकृत संतुलित रहे हैं, लेकिन उसने भी हमेशा ईरान के साथ एक सावधानीपूर्ण दूरी बनाए रखी है।  लंबे समय तक ईरान और GCC के बीच संबंध अविश्वास, प्रतिस्पर्धा और धार्मिक वैचारिक टकराव से प्रभावित रहे. ईरान खुद को क्षेत्रीय शक्ति मानता है, जबकि खाड़ी देशों को अक्सर लगता रहा है कि तेहरान अपनी क्रांतिकारी विचारधारा और क्षेत्रीय नेटवर्क के जरिए अरब दुनिया में प्रभाव बढ़ाना चाहता है।  हाल के ईरान-अमेरिका इजरायल युद्ध के दौरान ईरान ने GCC के इन सभी 6 देशों पर अपने शाहेद ड्रोनों से तबाही मचा दी. तुलनात्मक रूप से ताकतवर माने जाने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर भी ईरान ने हमले किए. ईरान के इन हमलों के दौरान खाड़ी के देश असहाय और मजबूर बने रहे।  सबसे ज्यादा नुकसान UAE, कतर, कुवैत, बहरीन को हुआ. ईरान ने सऊदी में भी बम गिराकर उसकी औकात बता दी. ओमान को सीमित नुकसान हुआ।  UAE, बहरीन और कुवैत क्यों गायब रहे? अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में UAE, बहरीन और कुवैत की अनुपस्थिति महज एक प्रोटोकॉल संबंधी फैसला नहीं थी, बल्कि यह खाड़ी क्षेत्र की जटिल कूटनीति का संकेत भी थी. ऐसा करके UAE, बहरीन, कुवैत ने ईरान के हमले के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है।  जंग में ईरान ने इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाया था. इससे इन देशों की सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गईं. UAE की विदेश नीति अब "सुरक्षा पहले" पर आधारित है. अबू धाबी ईरान को क्षेत्रीय खतरा मानता है और अपनी सुरक्षा के लिए इजरायल, अमेरिका के साथ सैन्य-आर्थिक गठबंधन मजबूत कर रहा है।  बहरीन लंबे समय से ईरान पर अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाता रहा है. बहरीन में अमेरिका का नौसैनिक अड्डा है, इसलिए उसका झुकाव भी अमेरिका की ओर है।  कुवैत के संबंध अपेक्षाकृत संतुलित हैं, लेकिन वह भी ईरान के प्रति सतर्क नीति अपनाता है. इन तीनों देशों के लिए अमेरिका सुरक्षा का प्रमुख साझेदार है, इसलिए तेहरान में उच्च-स्तरीय उपस्थिति एक गलत राजनीतिक संदेश दे सकती थी।  ईरान ने इस अनुपस्थिति को "अमेरिकी दबाव" से जोड़ा. तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिका ने कई अरब देशों पर दबाव डाला. UAE, बहरीन और कुवैत ने इसे खारिज नहीं किया, लेकिन चुप्पी साध ली।  अगर इन हमलों के बावजूद UAE अपना प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजता तो इससे संयुक्त अरब अमीरात की घरेलू राजनीति में गलत संदेश जाता. इससे ऐसा लगता कि UAE ईरान के सामने झुक गया है, इसलिए ईरानी हमले झेलने के बावजूद ईरानी नेता को श्रद्धांजलि देने को विवश है. यहां बात सुन्नी और शिया विचारधाराओं के टकराव की भी बात थी. इसे सुन्नी आबादी की बहुलता वाले UAE को शिया बहुल ईरान के सामने झुकने के तौर पर देखा जाता।  सऊदी अरब, कतर और ओमान ने क्यों भेजे प्रतिनिधि? सऊदी अरब, कतर और ओमान ने ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे में आधिकारिक प्रतिनिधि भेजकर क्षेत्रीय कूटनीति का नया संकेत दिया है.  सऊदी अरब ने उपविदेश मंत्री वलीद अल खुरैजी के नेतृत्व में डेलिगेशन भेजा. सऊदी प्रतिनिधिमंडल की ओर से खामेनेई को श्रद्धांजलि की तस्वीरें पूरी दुनिया में देखी गईं. इसे दुनिया के कट्टर सुन्नी राष्ट्र द्वारा एक शिया देश को बराबरी का मान्यता देने जैसा था. वो भी तब जब ईरान ने इस जंग में सऊदी अरब पर ड्रोन बरसाए।  लेकिन सऊदी द्वारा इस अपमान को भूलाकर तेहरान अपने प्रतिनिधि को भेजना इस बात को दर्शाता है कि रियाद ईरान के साथ तनाव कम करना चाहता है. जनाजा में भागीदारी "संवाद" की नीति को मजबूत करती है, जबकि इजरायल के साथ संबंधों को संतुलित रखती है. ईरान में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजकर सऊदी ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया है और हो सकता है कि ऐसा करते हुए सऊदी ने अमेरिका की नाराजगी भी मोल ली हो।  कतर लंबे समय से ईरान के साथ व्यावहारिक और संतुलित संबंध बनाए हुए है, कतर का रोल इस समय एक मध्यस्थ की तरह है. हालांकि ईरान ने उस पर भी हमले किए थे. बावजूद कतर ने इसे ज्यादा तवज्जो न … Read more

cSupply Boost: मोदी सरकार का बड़ा दांव, रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने को लिया अहम फैसला

नई दिल्ली भारत सरकार अब रसोई गैस (LPG) की सप्लाई को और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की सरकारी तेल कंपनियां अब अमेरिका (US) से एलपीजी की खरीद को मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना करने की तैयारी में हैं। इसका मुख्य उद्देश्य गल्फ देशों (मध्य पूर्व) पर निर्भरता कम करना और भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश में गैस की कमी न होने देना है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। फिलहाल, भारत हर साल अमेरिका से करीब 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) एलपीजी खरीदता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अब इस मात्रा को लगभग दोगुना करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही भारत अल्जीरिया जैसे अन्य देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि गैस सप्लाई के लिए किसी एक क्षेत्र पर अधिक निर्भर न रहना पड़े। दरअसल, इस साल पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़े तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम के दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कई एलपीजी जहाज प्रभावित हुए थे। उस समय भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता रसोई गैस की उपलब्धता थी। ऐसे मुश्किल समय में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वैकल्पिक एलपीजी सप्लायर बनकर सामने आया और उसने लगातार गैस की आपूर्ति जारी रखी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कच्चे तेल (Crude Oil) की उपलब्धता को लेकर उतनी चिंता नहीं थी, लेकिन एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा काफी बड़ा था। दुनिया में गल्फ देशों के अलावा बहुत कम देश बड़े पैमाने पर एलपीजी का उत्पादन करते हैं। ऐसे में अमेरिका से अतिरिक्त सप्लाई मिलने से भारत को काफी राहत मिली। अब सरकार सिर्फ आयात बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 30 दिनों का स्ट्रेटजिक LPG रिजर्व (Strategic Reserve) तैयार करने की योजना पर काम करने को कहा है। इसका मतलब है कि यदि भविष्य में किसी कारण से आयात कुछ समय के लिए रुक भी जाए, तब भी देश में कम से कम 30 दिनों तक रसोई गैस की सप्लाई बिना किसी परेशानी के जारी रखी जा सके। यह नया स्ट्रेटजिक रिजर्व पहले से मौजूद 45 दिनों के सामान्य स्टॉक के अतिरिक्त होगा, जिसे तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की मांग पूरी करने के लिए हमेशा बनाए रखती हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8% से भी कम थी। लेकिन, नवंबर 2025 में हुए एक साल के समझौते के बाद तस्वीर तेजी से बदल गई। जनवरी 2026 में यह हिस्सा बढ़कर 12% हुआ, फरवरी में 13% पहुंचा और पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद मार्च में यह 37% तक पहुंच गया। अप्रैल में अमेरिका की हिस्सेदारी 40% मई में 55% और जून में रिकॉर्ड 65% तक पहुंच गई। इसका मतलब है कि अब भारत की एलपीजी जरूरतों को पूरा करने में अमेरिका की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा भारत ने अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से भी गैस खरीदकर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत किया है। एक्सपर्ट का मानना है कि सप्लाई के सोर्स में विविधता लाने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। अगर भविष्य में फिर से किसी क्षेत्र में युद्ध, राजनीतिक तनाव या समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो देश को रसोई गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ने से भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध भी और मजबूत हो सकते हैं। सरकार का यह कदम सिर्फ गैस खरीद बढ़ाने का फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तैयारी और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।  

NATO समिट से पहले रूस का ताबड़तोड़ अटैक, 68 मिसाइल और 351 ड्रोन बरसाए; यूक्रेन में 14 लोगों की मौत

कीव  यूक्रेन एक बार फिर रूसी से हमले से दहला उठा है। राजधानी कीव पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई। इस घटना में 46 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हं। कीव इलाके के सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रूसी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और 46 लोग घायल हुए हैं, जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं। आपातकालीन सेवाओं ने बताया कि शहर के विभिन्न इलाकों में तीन और लोगों की मौत हुई है। तकाचेंको ने टेलीग्राम पर लिखा कि 20 से अधिक जगहों पर बचाव अभियान चल रहे हैं। वहीं, मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों ने कई इमारतों को क्षतिग्रस्त किया, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में आग लग गई और गोदामों तथा गैरेज वर्कशॉप को नुकसान पहुंचा। सुबह तक तीन बड़ी इमारतें आंशिक रूप से ढह गईं। बचावकर्मी मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हेलीकॉप्टर नदी से पानी लेकर आग बुझाने की कोशिश की जा रही है नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हमला बता दें कि ये हमले तुर्की में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से महज पहले हुए हैं, जहां यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की उम्मीद है। हमलों से कुछ घंटे पहले जेलेंस्की ने चेतावनी दी थी कि गुरुवार के हमले (जिसमें 30 लोग मारे गए) के बाद रूस एक और बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है। रूस ने दागीं 68 मिसाइलें और 351 ड्रोन यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने 23 बैलिस्टिक मिसाइलें, छह सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों सहित कुल 68 मिसाइलें तथा 351 ड्रोन दागे। यूक्रेनी वायु रक्षा ने 37 मिसाइलों और 326 ड्रोनों को नष्ट या निष्क्रिय कर दिया, लेकिन बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों में से कोई भी रोक नहीं पाई। इस हमले के बाद जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों से पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम की और मांग की है, जिसे वे बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ एकमात्र प्रभावी सुरक्षा मानते हैं। क्या बोला रूस? दूसरी ओर रूस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उसने हवा, जमीन और समुद्र से लॉन्च किए गए लंबी दूरी के सटीक हथियारों और ड्रोनों से हमला किया। मॉस्को का दावा है कि उसने कीव समेत यूक्रेन के कई इलाकों में सैन्य, ऊर्जा और रक्षा औद्योगिक सुविधाओं को निशाना बनाया। बता दें कि यह हमला कीव पर हाल ही में हुए सबसे घातक हमले के महज कुछ दिनों बाद हुआ है, जिसमें 31 लोग मारे गए थे। इस सप्ताह तुर्की के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन होना है, जहां ट्रंप जेलेंस्की से मुलाकात के अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत कर सकते हैं। यूक्रेन का जवाबी हमला रात भर यूक्रेन ने भी रूस के अंदर ड्रोन हमले किए। रॉयटर्स के अनुसार, यूक्रेनी ड्रोनों ने बाल्टिक सागर के वायसोटस्क और उस्त-लुगा बंदरगाहों को नुकसान पहुंचाया, जो रूस का प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल है। क्रीमिया के सेवस्तोपोल में अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति ठप हो गई। रूस ने इन हमलों को यूक्रेन के हालिया हमलों का जवाब बताया, जबकि यूक्रेन का आरोप है कि रूस जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है।

EC ने जारी किया कार्यक्रम, WB की 3 राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव; इस्तीफों के बाद खाली हुई थीं सीटें

कोलकाता पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की तीन खाली सीटों के लिए उपचुनाव का ऐलान कर दिया गया है. ये सीटें सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं।  इन तीनों सीटों पर 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक मतदान होगा. ये उपचुनाव राज्यसभा की तीन आकस्मिक सीटों को भरने के लिए कराए जाएंगे।  कब हुआ था इस्तीफा? तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सुखेंदु शेखर रॉय ने सबसे पहले 8 जून को राज्यसभा की सदस्यता और टीएमसी, दोनों से इस्तीफा दिया था. अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी में कथित भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए. उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि विवादों में रहे लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है।  इसके दो दिन बाद, 10 जून को सुष्मिता देव ने भी टीएमसी छोड़ने का ऐलान कर दिया. इस्तीफा देने के तुरंत बाद उन्होंने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि वह बीजेपी का दामन थाम सकती हैं और पार्टी उन्हें असम से राज्यसभा भेज सकती है।  भाजपा की झोली में जा सकती है तीनों सीट तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसदों ने कुछ दिनों पहले ही अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. चुनाव आयोग ने बताया है कि 24 जुलाई को इन तीनों सीटों के लिए चुनाव होंगे और उसी दिन नतीजे भी आ जाएंगे. इस बात की पूरी उम्मीद है कि जिन तीन सांसदों ने इस्तीफा दिया उन्हीं को अब भारतीय जनता पार्टी अपना उम्मीदवार बना सकती है और अपने विधायकों की संख्या के आधार पर उसके तीनों उम्मीदवार आसानी से जीत भी सकते हैं।  तीनों पूर्व सांसदों को उम्मीदवार बनाने की चर्चा इस्तीफा देने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के नाम शामिल हैं. अभी तक ये तीनों नेता बीजेपी में शामिल तो नहीं हुए हैं, लेकिन इस्तीफा देने के तुरंत बाद से ही ये नेता बीजेपी नेताओं से मिलते नजर आए हैं. ये लोग खुलकर बीजेपी की तारीफ भी करने लगे हैं. इनमें से सुखेंदु शेखर रे और प्रकाश चिक बड़ाईक वाली सीटों का कार्यकाल मार्च 2029 और सुष्मिता देव वाली सीट का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक है. इन तीनों ने जून के महीने में अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही टीएमसी का साथ भी छोड़ दिया था।  अकेले दम पर 117 के आंकड़े तक पहुंचेगी बीजेपी  सुष्मिता और प्रकाश दोनों ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. संभावना है कि दोनों को ही बीजेपी अपना कैंडिडेट बनाए. तीन जीतों के बाद बीजेपी की राज्यसभा में संख्या बढ़कर 117 हो जाएगी।  मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है सरकार. पश्चिम बंगाल में तीनों सीटों पर जीत के बाद राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के नजदीक पहुंच जाएगी एनडीए. वहीं, बीजेपी के इतिहास में राज्यसभा में यह सर्वाधिक संख्या होगी. बीजेपी अपने बूते ही राज्य सभा में सामान्य बहुमत के नजदीक पहुंच जाएगी. गौरतलब है कि पिछले चालीस साल में किसी भी दल को राज्यसभा में अपने बूते बहुमत नहीं मिला है. पूर्व पीएम राजीव गांधी के कार्यकाल में कांग्रेस को इससे पहले थी राज्य सभा में सबसे अधिक सीटें थीं।  चुनाव आयोग 7 जुलाई को राज्यसभा उपचुनाव का नोटिफिकेशन जारी करेगा. नामांकन करने की अंतिम तारीख 14 जुलाई होगी. नामांकन पत्रों की जांच 15 जुलाई को होगी. 17 जुलाई तक नामांकन वापस लिया जा सकेगा. 24 जुलाई को वोटिंग होगी. सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी. 25 जुलाई को ही शाम 5 बजे काउंटिंग होगी. 27 जुलाई तक चुनाव की पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 

इंडोनेशिया दौरे पर PM मोदी का शानदार स्वागत, आसमान में फाइटर जेट्स ने दी सलामी

जकार्ता  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे हैं। इस दौरान पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। इंडोनेशियाई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पीएम मोदी के एयरक्राफ्ट को एस्कॉर्ट किया। इसके बाद एयरपोर्ट पहुंचने पर इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने प्रोटोकॉल तोड़ पीएम मोदी का स्वागत किया। इंडोनेशिया में पीएम मोदी का कार्यक्रम जानें प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में 6 से लेकर 8 जुलाई तक रहेंगे। इस दौरान वह दोनों देशों के बूीच कई क्षेत्रों में साझेदारी को गहरा करने पर जोर देंगे। इसके अलावा, भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी के इंडोनेशिया यात्रा के कई उद्देश्य हैं। रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना: पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। यह प्रधानमंत्री का चौथा दौरा होगा और मई 2018 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। भारत-इंडोनेशिया रक्षा संबंध होंगे मजबूत भारत के रक्षा और सुरक्षा सहयोग में उच्च स्तरीय दौरा, नियमित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय एक्सरसाइज और रक्षा उद्योग में गहरे सहयोग (ब्रह्मोस की बिक्री सहित) के जरिए तेजी आई है और इसका दायरा भी बढ़ा है। समुद्री पड़ोसी होने के नाते, दोनों देशों ने 2018 में हिंद-प्रशांत में भारत-इंडोनेशिया समुद्री सहयोग के साझा दृष्टिकोण को अपनाया। आईएफसी-आईओआर में एक इंडोनेशियन लाइजन ऑफिसर की तैनाती से हमारी मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस को और बढ़ावा मिलेगा। भारत एनडीए और डीएसएससी में इंडोनेशियन कैडेट्स और ऑफिसर्स के लिए स्लॉट भी तय करेगा, जिससे रक्षा के क्षेत्र में कैपेसिटी बिल्डिंग बढ़ेगी। व्यापार और निवेश पर भी बनेगी बात इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार और निवेश के जरिए विकास को बढ़ावा देना है। विकसित भारत 2047 और एमास (गोल्डन) इंडोनेशिया 2045 के डेवलपमेंट विजन के बीच मजबूत तालमेल है। इंडोनेशिया, आसियान क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है, जिसका 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 24.78 बिलियन अमेरिकी डॉलर होगा। इंडोनेशिया में अलग-अलग क्षेत्रों में 130 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने निवेश किया है। सांस्कृतिक कार्यक्रम का उठाया लुत्फ हवाई अड्डे पर औपचारिक स्वागत और गॉर्ड ऑफ ऑनर के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां आयोजित एक विशेष पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी अवलोकन किया. इस कार्यक्रम के जरिए इंडोनेशिया की समृद्ध संस्कृति और भारत के साथ उसके सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की झलक पेश की गई।  PM मोदी ने ट्वीट कर क्या कहा? पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ''जकार्ता पहुंच गया हूं। राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के स्नेहपूर्ण व्यवहार से मैं बहुत प्रभावित हुआ। उन्होंने एयरपोर्ट पर पर व्यक्तिगत रूप से मेरा स्वागत किया। 2018 में, हमने दोनों देशों के संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया, जिससे हमारे लोगों को बहुत लाभ हुआ है। इस यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और मैं विभिन्न क्षेत्रों में इस साझेदारी को और गति देने के उद्देश्य से चर्चा करेंगे।' आगे उन्होंने लिखा है, ''राष्ट्रपति प्राबोवो और मैं योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह यात्रा हमारे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और भी मजबूत करेगी। इंडोनेशिया में रहने के दौरान, मैं भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करने के अवसर का भी बेसब्री से इंतजार कर रहा हू।' सबसे बड़े हिंदू मंदिर जाएंगे पीएम मोदी पीएम मोदी इंडोनेशिया में 6 से लेकर 8 जुलाई तक रहेंगे। इस दौरान वह इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। 9वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसके अलावा वह भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी के इंडोनेशिया यात्रा के कई उद्देश्य हैं। पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।  85% मुस्लिम फिर भी नोट पर छपी भगवान गणेश की तस्वीर वहीं, आपको बता दें कि इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन वहां की सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। इंडोनेशिया में रामलीला का मंचन होता है और इस देश की मुद्रा पर भगवान गणेश की तस्वीर भी छप चुकी है। 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर रहेंगे पीएम मोदी राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा रहेंगे. पीएम मोदी ने कहा, ‘‘2018 में मेरी पहली इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया था.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के इस स्तर पर पहुंचने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है और यह जनवरी 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति प्राबोवो की भारत यात्रा के बाद हो रही है।  इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड की यात्रा पर हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर हैं. 11 जुलाई तक तीन देशों की अपनी यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा था- ‘‘पूर्वी और दक्षिणी हिंद महासागर में इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया और उसके बाद न्यूजीलैंड की मेरी यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, ‘महासागर’ दृष्टिकोण और साथ ही स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के प्रति हमारे नजरिए को और मजबूत करेगी। 

अमरनाथ यात्रा के बीच बड़ा अपडेट! बाबा बर्फानी का शिवलिंग घटकर 1 फीट, मौसम का दिखा असर

श्रीनगर  अमरनाथ यात्रा का आज चौथा दिन है। तीर्थ यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है। वहीं, इसके बीच एक चिंता बढ़ाने वाली खबर भी है। कहा जा रहा है कि पवित्र शिवलिंग का आकार पिघलकर 1 फीट रह गया है। खास बात है कि जून के अंत में ऊंचाई करीब 7 फीट देखी गई थी। खास बात है कि यह यात्रा 57 दिनों तक चलती है। तेजी से पिघल रहे बाबा बर्फानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ में शिवलिंग अब पिघलकर करीब 1 फीट बचे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई को ऊंचाई 7 फीट थी, जो 29 जून को 5 फीट पर आ गई थी। अब ताजा तस्वीर में देखा जा रहा है कि शिवलिंग की ऊंचाई घटकर 1 फीट के आसपास रह गई है। खास बात है कि शिवलिंग का निर्माण प्राकृतिक रूप से हर साल होता है, जिसे जियोलॉजी में स्टैलेगमाइट कहा जाता है। कैसे होता है शिवलिंग का निर्माण दरअसल, गुफा के ऊपर चूना पत्थर और जिप्सम दरारों से बर्फ और ग्लेशियर के पिघलने से पानी बहता है। पानी जैसे ही गुफा की जमीन तक पहुंचता है, तो बेहद कम तापमान में यह जमना शुरू कर देता है। ऊपर की ओर जमने के क्रम के बाद एक शिवलिंग का आकार तैयार हो जाता है। श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी अमरनाथ यात्रा के तीसरे दिन रविवार को लगभग 24 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकतिक रूप से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन किए। इसके साथ ही बीते तीन दिन में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 60 हजार के आसपास पहुंच गई है। तीन जुलाई से शुरू अमरनाथ यात्रा 28 अगस्त तक जारी रहेगी। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से 1,211 महिलाओं सहित 5,794 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था सोमवार तड़के अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि पांचवें जत्थे में 21 बच्चे, 599 साधु और 76 साध्वियां शामिल हैं। वे तड़के तीन बजकर 10 मिनट से तीन बजकर 45 मिनट के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में अलग-अलग काफिलों में आधार शिविर से रवाना हुए। इनमें से 139 वाहनों में सवार 3,490 तीर्थयात्री अनंतनाग जिले के पहलगाम में नुनवान आधार शिविर की ओर जा रहे हैं। जबकि 128 वाहनों में 2,304 तीर्थयात्री गांदरबल जिले के बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुए हैं। कठिन यात्रा और हजारों किमी की ऊंचाई तीर्थयात्री अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के छोटे लेकिन खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर के बालटाल मार्ग से एक साथ यात्रा कर रहे हैं। यह गुफा मंदिर दक्षिण हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यात्रा के लिए वैध परमिट है जरूरी उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को अमरनाथ यात्रा पर जाने के इच्छुक सभी तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे अपनी तय तारीख के लिए वैध पंजीकरण परमिट मिलने के बाद ही यात्रा करें। उन्होंने कहा कि सिर्फ पंजीकृत यात्रियों को ही तय तारीख पर पवित्र गुफा मंदिर तक जाने की अनुमति दी जाएगी। यह अपील जम्मू-कश्मीर में बिना सही पंजीकरण के बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के पहुंचने की वजह से की गई है। कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही है यात्रा सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों वाला सुरक्षा घेरा, दोनों रास्तों पर नो-फ्लाई जोन, वॉचटावर, कड़ी निगरानी और तीर्थयात्रियों के काफिले की रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। पुलिस ने सभी रजिस्टर्ड सर्विस प्रोवाइडर्स को क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र जारी किए हैं, ताकि उनके पहचान पत्रों की तुरंत जांच हो सके और उग्रवादियों को सपोर्ट स्टाफ बनकर घुसने से रोका जा सके। इसके अलावा तीर्थयात्रियों, गाड़ियों और सर्विस देने वालों के लिए आरएफआईडी टैग जारी किए गए हैं ताकि उनकी रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सके। साथ ही, सीसीटवी कैमरों का एक बड़ा नेटवर्क दोनों तीर्थ मार्गों पर आवाजाही पर नजर रख रहा है।

मुंबई हुई पानी-पानी! भारी बारिश से जनजीवन ठप, सड़कें जलमग्न, ट्रेनें प्रभावित, स्कूल-कॉलेज बंद

मुंबई  मॉनसून की बारिश ने मायानगरी मुंबई की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने शहर को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है. सड़कें नदियों में तबदील हो गई हैं, घरों और दुकानों में पानी घुस गया है, लोकल ट्रेनें प्रभावित हैं. बारिश की वजह से लोगों की जिंदगी ठप हो गई है।  वसई-विरार, मालाड, अंधेरी, भांडुप, दादर, माटुंगा और नवी मुंबई जैसे इलाकों में कई सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया है. कई जगहों पर गाड़ियां पानी में फंस गई हैं. सड़कों पर सिर्फ कारों की छतें नजर आ रही हैं. इस बीच भारत मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों को बारिश से राहत नहीं मिलने की संभावना जताई है।  वहीं, भांडुप में सड़क का एक हिस्सा धंस गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. तेज हवाओं और बारिश के कारण पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए हैं, जिससे कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुई हैं. कई जगहों पर पेड़ गिरने से तबाही का मंजर सामने आया है. वहीं, मुंबई के उपनगरीय रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से लोकल ट्रेनें प्रभावित हैं. दादर, वडाला और घाटकोपर जैसे स्टेशनों पर रेलवे ट्रैक बारिश के पानी से लबालब हैं।  मुंबई में बीते 5 दिनों से मूसलाधार बारिश का दौर जारी है. पूरा शहर मानों तालाब बन गया है. सड़कों पर पानी जमा है. घरों-दुकानों में पानी भर गया है. गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है. कई जगहों पर तो रेलवे ट्रैक भी पानी में डूब गया है. तेज बारिश के बीच भांडुप इलाके में सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंसने से वहां खड़ी एक गाड़ी गड्ढे में समा गई. हालांकि, गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।  चाहे अंधेरी हो या नालासोपारा, वसई या विरार. हर तरफ मूसलाधार बारिश से हाहाकार मचा है. लगातार हो रही बारिश ने मुंबई के लोगों का जीवन दूभर कर दिया है. तस्वीरें गवाही दे रही हैं कि आखिर मॉनसून की बारिश के बीच मुंबई किस तरह की मुसीबत झेल रही है. गाड़ियां पानी के बीच फंसी हुई हैं. कहीं आना-जाना मुश्किल है. बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. सड़कों पर बढ़ता जलस्तर लोगों का संकट बढ़ा रहा है।  नालासोपारा का रेलवे ट्रैक बारिश के पानी में डूब गया है. जिसका सीधा असर लोकल ट्रेनों की आवाजाही पर पड़ रहा है. वसई इलाके का हाल तो और भी ज्यादा बुरा है. जहां पानी इतना ज्यादा भर गया है कि मानों पूरा इलाका टापू बन गया है. जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. करीब 30 से 40 सोसाइटियां पानी में घिरी हुई हैं. बारिश थम नहीं रही और लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही हैं।  पूरे पालघर में भारी बारिश से हाल बेहाल है. सड़कों पर घुटनों से ऊपर तक पानी है. लोग इसी मॉनसूनी आफत के बीच कहीं आने जाने को मजबूर हैं. मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है.उधर, प्रशासन ने लोगों को बेहद जरूरी यात्रा करने की सलाह दी है ताकि मौसम की मार किसी की जिंदगी पर संकट ना बने. बता दें कि मुंबई में हर साल की यही कहानी है, बारिश हुई और लोगों की जिंदगी आफत के बीच घिर जाती है।  नालासोपारा: स्टेशन परिसर में कमरभर पानी लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नालासोपारा पूर्व रेलवे स्टेशन परिसर में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है. स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क पर कमर तक पानी जमा होने से दफ्तर जाने वाले लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे स्टेशन तक पहुंचना पड़ रहा है.इस बीच, इलाके में एक विशाल होर्डिंग गिरने की घटना भी सामने आई है. गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।  मुंबई के मानखुर्द में भारी बारिश के बीच चार मंजिला चॉल ढही, हादसे में 6 लोगों की मौत मुंबई के मनखुर्द इलाके में भारी बारिश के बीच रविवार रात एक तीन मंजिला चॉल (झोपड़पट्टी जैसी इमारत) ढह गई. इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई है.बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, इस हादसे में चार महिलाओं और 2 पुरुषों की मौत हुई है. वहीं, एक घायल व्यक्ति का इलाज राजावाड़ी अस्पताल में चल रहा है।  स्कूल-कॉलेज बंद, बारिश के कारण परीक्षाएं टलीं भारी बारिश को देखते हुए सोमवार को मुंबई, पुणे, ठाणे और पालघर में सभी सरकारी, निजी और BMC चलित स्कूलों-कॉलेजों को छुट्टी घोषित कर दी गई है. मुंबई में IMD ने 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है तो वहीं पुणे में 'रेड अलर्ट' है. मुंबई विश्वविद्यालय ने 6 जुलाई को होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं. नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल जरूरी काम ने पर ही घर से बाहर निकलें। 

समुद्री सुरक्षा पर संकट गहराया: होदेइदाह के पास जहाज पर हमले से वैश्विक चिंता बढ़ी

नई दिल्ली लाल सागर में एक बार फिर समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिली है। यमन के पश्चिमी तट के निकट एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने रविवार को इस घटना की पुष्टि की। हालांकि अभी तक किसी भी संगठन, समूह या गुट ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई है। UKMTO केंद्र ने एक आधिकारिक सूचना में बताया कि हमला तटीय शहर होदेइदाह के पास हुआ। होदेइदाह ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मजबूत नियंत्रण वाले इलाके में स्थित है। जहाज होदेइदाह से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम दिशा में था, जब अज्ञात सशस्त्र हमलावरों ने उस पर हमला किया। UKMTO ने स्पष्ट किया कि जहाज के चालक दल ने तुरंत हमले की सूचना दी। फिलहाल संबंधित अंतरराष्ट्रीय अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। हूती विद्रोहियों की धमकी बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में लाल सागर और अदन की खाड़ी में गुजरने वाले जहाजों पर हमले दोबारा शुरू करने की खुली धमकी दी थी। हालांकि, उन्होंने अभी तक इन धमकियों को अमली जामा नहीं पहनाया है। हूती प्रवक्ता ने इस घटना पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि हूतियों ने अक्टूबर 2023 से गाजा युद्ध के समर्थन में लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित संकरे बाब अल-मंडाब के आसपास अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया था। उन्होंने ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें और अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए। इन हमलों के कारण वैश्विक जहाजरानी कंपनियों को स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी सिरे (केप ऑफ गुड होप) का लंबा और महंगा रास्ता अपनाना पड़ा। सोमाली समुद्री लुटेरों भी हैं ऐक्टिव लाल सागर संकट के बीच सोमाली समुद्री डाकू भी अदन की खाड़ी और आसपास के दूरवर्ती इलाकों में फिर से सक्रिय हो गए हैं। एक जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित बलहाफ बंदरगाह शहर से 76 समुद्री मील (लगभग 140 किलोमीटर) दक्षिण में एक और घटना हुई थी। UKMTO के अनुसार, चार सशस्त्र व्यक्ति छोटी नाव पर सवार होकर आए और एक जहाज के ब्रिज (नियंत्रण कक्ष) को मामूली नुकसान पहुंचाया। इस घटना को संदिग्ध समुद्री लुटेरों का काम माना जा रहा है। बता दें कि लाल सागर और अदन की खाड़ी विश्व व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यहां से रोजाना लाखों टन तेल, गैस, कंटेनर माल और अन्य सामान गुजरता है। आये दिन हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों के युद्धपोत क्षेत्र में गश्त बढ़ाए हुए हैं, इसके बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं।

सीमा पार संघर्ष तेज: तालिबान ने पाकिस्तान में ISIS नेटवर्क पर कार्रवाई की

नई दिल्ली अफगानिस्तान में ISIS के बढ़ते खतरे ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सेना, ISIS को संरक्षण दे रही हैं। इसी के जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान के भीतर कथित ISIS ठिकानों पर सीमा पार ड्रोन हमले किए हैं। बता दें कि यह भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों की सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। तालिबान सरकार का कहना है कि ISIS उसके शासन और अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। काबुल ने पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पर आरोप लगाया है कि वह ISIS को समर्थन देकर अफगानिस्तान के भीतर आतंकी हमलों को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, पाकिस्तान इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में ड्रोन से किए गए हमले ISIS की बढ़ती गतिविधियों के बीच तालिबान ने इस सप्ताह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सरानान और खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों में सीमा पार कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक, इन अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ऑपरेशन में ISIS और उसके सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें उसने 'बुराई और भ्रष्टाचार के समूहों' का अड्डा बताया। कई आतंकियों के मारे जाने का दावा अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कार्रवाई बेहद सटीक तरीके से की गई, जिसमें कई ISIS लड़ाके मारे गए और उनके ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। मंत्रालय ने दावा किया कि पूरे अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी भी आम नागरिक को नुकसान न पहुंचे। यह कार्रवाई 28 जून को अफगानिस्तान सीमा के पास पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब के रूप में भी देखी जा रही है। चीन की मध्यस्थता भी नहीं कर सकी तनाव कम काबुल और इस्लामाबाद के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस साल यह दोनों देशों के बीच दूसरा बड़ा सैन्य टकराव है। चीन की ओर से दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हो सकी हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवाद और हमलों को बढ़ावा देने के आरोप लगाते रहे हैं। भारत, रूस और मध्य एशिया की बढ़ी चिंता, रक्षा समझौते पर भी नजर विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में ISIS और उसकी कट्टरपंथी विचारधारा का विस्तार भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। आशंका है कि यह संगठन स्थानीय आतंकी समूहों के साथ मिलकर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है। अगले सप्ताह भारत-रूस संयुक्त आतंकवाद कार्य समूह की बैठक में सीमा पार आतंकवाद प्रमुख मुद्दा रहेगा। वहीं, पाकिस्तान भी मॉस्को के साथ काबुल के हालिया रक्षा समझौते के बाद अफगानिस्तान की बढ़ती सैन्य क्षमता को लेकर चिंतित बताया जा रहा है  मई में रूस और तालिबान ने हथियारों के आदान-प्रदान, लाइसेंसिंग, सैन्य तकनीक और संयुक्त विकास परियोजनाओं से जुड़े सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह तालिबान सरकार का किसी भी देश के साथ पहला रक्षा समझौता था, जिसे पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और सैन्य सहयोग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है  

ब्रिटेन-जापान-इटली की साझेदारी तेज: ‘एजविंग’ को मिला एडवांस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट फंड

लंदन  ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) को आगे बढ़ाने वाले ज्वाइंट वेंचर, 'एजविंग' को छठी पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट के डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए 6.1 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह दुनिया के सबसे महत्वकांक्षी अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एविएशन प्रोग्राम में से एक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह कॉन्ट्रैक्ट GCAP एजेंसी ने दिया है, दो UK,जापान और इटली की सरकारों की ओर से इस प्रोग्राम को मैनेज करती है। यह कॉन्ट्रैक्ट फाइटर जेट के डिटेल्ड डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए फंड देगा। उम्मीद है कि यह एयरक्राफ्ट 2035 कर सर्विस में आ जाएगा। ब्रिटेन-इटली और जापान का ज्वॉइंट वेंचर एजविंग, ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स, इटली की लियोनार्डो और जापान एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रियल एन्हांसमेंट कंपनी का एक ज्वॉइंट वेंचर है। यह अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को विकसित करने के लिए तीनों देशों के प्रमुख एयरोस्पेस कंपनियों को एक साथ लाता है। अप्रैल 2026 में हुए शुरुआती £686 मिलियन के समझौते के बाद GCAP एजेंसी द्वारा एजविंग को दिया गया यह दूसरा इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट है। यह नया कॉन्ट्रैक्ट यूके द्वारा अपना डिफेंस इन्वेस्टमेंट प्लान पेश करने के कुछ हफ्ते बाद आया है, जिसमें अगले चार सालों में GCAP प्रोग्राम के लिए अरबों पाउंड का निवेश करने का वादा किया गया है। यह कॉन्ट्रैक्ट तीनों देशों के भरोसे को दर्शाता है- एजविंग एजविंग के सीईओ मार्को जोफ ने कहा, "यह कॉन्ट्रैक्ट तीनों देशों और हमारे GCAP एजेंसी पार्टनर्स द्वारा हम पर दिखाए गए भरोसे को दर्शाता है। यह भरोसा पहले इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट के तरह हुई तेजी से प्रगति से बना है।" उम्मीद है कि इस फंडिंग से डेवलपमेंट में तेजी आएगी, प्रोग्राम को लंबे समय कर फाइनेंशियल निश्चितता मिलेगी और पार्टनर देशों के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूती मिलेगी, क्योंकि एडवांस्ड मिलिट्री एविएशन में कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है। यह समझौता प्रोग्राम के कॉन्सेप्ट फेज से डिटेल्ड इंजीनियरिंग और डिजाइन फेज में जाने का भी संकेत देता है, जिससे यह 2035 में सर्विस में शामिल होने की राह पर बना रहेगा। GCAP छठी पीढ़ी का फाइटर जेट ज्वॉइंट प्रोग्राम GCAP छठी पीढ़ी के फाइटर जेट का एक ज्वॉइंट प्रोग्राम है जिसमें UK, जापान और इटली शामिल हैं। यह ब्रिटेन के 'टेम्पेस्ट' प्रोग्राम और जापान के 'F-X' फाइटर प्रोजेक्ट को मिलाकर एक कॉमन अगली पीढ़ी का कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की कोशिश है। यह विमान रॉयल एयर फोर्स के 'यूरोफाइटर टाइफून' और जापान के 'मित्सुबिशी F-2' की जगह लेगा। F-35 और चीन के J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के उलट, छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट को एक नेटवर्क वाले कॉम्बैट सिस्टम के मुख्य हिस्से के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। 2035 तक छठी पीढ़ी का फाइटर जेट लाने की प्रतिबद्धता GCAP फाइटर में एडवांस्ड स्टील्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मिशन मैनेजमेंट, सेंसर फ्यूजन, लंबी दूरी तक ऑपरेशन, सुरक्षित हाई-स्पीड डेटा शेयरिंग और ऑटोनॉमस लॉयल विंगमैन ड्रोन के साथ मिलकर काम करने की क्षमता जैसी खूबियां होने की उम्मीद है। इसमें ओपन-आर्किटेक्चर डिजाइन भी होगा, जिससे इसके सर्विस के समय के दौरान नए हथियार,सेंसर और सॉफ्टवेयर को तेज से जोड़ा जा सकेगा। 4.6 अरब पाउंड का यह कॉन्ट्रैक्ट GCAP के लिए अब तक के सबसे बड़े डेवलपमेंट माइलस्टोन्स में से एक है। यह 2035 तक छठी पीढ़ी का फाइटर जेट लाने के लिए तीनों पार्टनर देशों की प्रतिबद्धता को दिखाता है, क्योंकि देश अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाने की होड़ में लगे हैं।