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खुफिया विवाद से हड़कंप: अमेरिकी वार्ताकारों पर निगरानी के आरोप, इज़रायल पर सवाल

नई दिल्ली  मिडल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच नई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायली खुफिया एजेंसियां ईरान के साथ शांति समझौते के लिए प्रयासरत अमेरिकी वार्ताकारों पर जासूसी कर रही हैं। इस घटना ने अमेरिकी खुफिया अधिकारियों में इजरायल की जासूसी गतिविधियों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। मीडिया रिपोर्ट र्ट के अनुसार, हालिया अमेरिकी खुफिया आकलनों में इस बात पर चिंता जताई गई है कि जब तेहरान के साथ बातचीत रुकी हुई है, तब इजरायल ने वाशिंगटन की बातचीत की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इजरायली खुफिया सेवाओं ने वार्ता में शामिल वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों की निगरानी बढ़ा दी है। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के नीति प्रमुख एलब्रिज कोल्बी और वरिष्ठ रक्षा अधिकारी माइकल डिमिनो शामिल हैं। खुफिया इकाइयों ने यह चिंता जताई है कि इजरायली एजेंसियां वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौते को हासिल करने के उद्देश्य से विटकॉफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की बातचीत को मॉनिटर करने का प्रयास कर रही थीं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ घनिष्ठ सैन्य सहयोग जारी रखे हुए हैं, लेकिन साथ ही अमेरिका तेहरान के साथ दीर्घकालिक समझौता करने के कूटनीतिक प्रयास भी कर रहा है। क्रिटिकल स्तर पर पहुंचा खतरे का स्तर अमेरिका और इजरायल ऐतिहासिक रूप से यह स्वीकार करते रहे हैं कि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ खुफिया अभियान चलाते हैं, लेकिन कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की हालिया गतिविधियों ने एक स्वीकार्य सीमा को पार कर लिया है। डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी और अन्य सैन्य खुफिया एजेंसियों द्वारा तैयार किए गए एक अलग खुफिया आकलन में हाल के हफ्तों में इजरायल द्वारा उत्पन्न काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे को हाई से बढ़ाकर क्रिटिकल कर दिया गया है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य कर्मियों और सरकारी अधिकारियों पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के इजरायली प्रयासों को रेखांकित किया गया है। जासूसी के लिए फोन टैपिंग रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के अंत से इजरायली खुफिया गतिविधियों के संदिग्ध मामलों में वृद्धि हुई है, जब गाजा में सैन्य अभियानों के संचालन को लेकर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच तनाव पैदा हुआ था। 2025 में भी यह चिंताएं जारी रहीं, जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के संबंध में सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार किया। इन घटनाओं में यह आरोप भी शामिल है कि इजरायल में तैनात अमेरिकी रक्षा कर्मियों ने पाया कि उनके मोबाइल फोन में संचार को इंटरसेप्ट करने में सक्षम सॉफ्टवेयर गुप्त रूप से इंस्टॉल किया गया था। रिपोर्ट में 2021 की पिछले मामलों का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कथित तौर पर इजरायली सैन्य खुफिया अधिकारियों को DIA मुख्यालय में लिसनिंग डिवाइस लगाने का प्रयास करते हुए पकड़ा गया था। एक अन्य मामले में इजरायल की शिन बेट सुरक्षा एजेंसी के सदस्यों द्वारा अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के वाहन के अंदर लिसनिंग डिवाइस लगाने के कथित प्रयास का जिक्र है। ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के अलग-अलग लक्ष्य ये चिंताएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब ईरान को लेकर वाशिंगटन और तेल अवीव के सामरिक उद्देश्यों में स्पष्ट मतभेद दिखाई दे रहे हैं। हालांकि दोनों देश शुरुआत में इस संघर्ष के दौरान एकजुट नजर आ रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ा, उनकी रणनीतिक प्राथमिकताएं अलग होने लगीं रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का ध्यान मुख्य रूप से ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने पर था ताकि बातचीत के जरिए रियायतें हासिल की जा सकें। इसके विपरीत, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के उद्देश्य कहीं अधिक व्यापक थे, जिनमें तेहरान की क्षमताओं को और अधिक नष्ट करना और ईरानी नेतृत्व को पूरी तरह कमजोर करना शामिल था। इन खुलासों से दोनों सहयोगियों के बीच भविष्य के सैन्य समन्वय में गंभीर जटिलताएं आ सकती हैं। जानकारों का मानना है कि यदि पेंटागन इजरायली समकक्षों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का फैसला करता है, तो इसका सीधा असर दोनों देशों के सैन्य संबंधों पर पड़ेगा।

भारत के साथ रिश्तों पर नरम पड़ा नेपाल, सौहार्दपूर्ण समाधान की वकालत

नई दिल्ली सीमा विवाद को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की टिप्पणी के बाद अब नेपाल नरम पड़ता दिख रहा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत की ताकत का लोहा मानते हुए कहा कि भारत एक बड़ी तकनीकी और आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत के जरिए ही सीमा विवाद का हल चाहता है। भारत दौरे पर आए खनाल ने कहा, जब हम सीमा की ओर देखते हैं तो भारत एक आर्थिक महाशक्ति के तौर पर नजर आता है। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर खुद को साबित किया है और अर्थव्यवस्था के मामले में मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि नेपाल की नई सरकार भारत को किसी भी मायने में विरोधी के तौर पर नहीं देखती है। भारत से चाहते हैं अच्छे संबंध खनाल ने कहा कि हम अब अतीत के मामलों के साथ बंधे नहीं रहना चाहते हैं बल्कि भारत के साथ परस्पर लाभकारी संबंध चाहते हैं। उन्होंने कहा, हम भारत के साथ सीमा मुद्दे को 'खुले मन' से और द्विपक्षीय ढांचे के आधार पर हल करना चाहते है। हम 21वीं सदी की भू-राजनीति के विकृत, अति संवेदनशील नजरिए से भारत को नहीं देखते। बता दें कि खनाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच एक दिन पहले ही बातचीत हुई है। खनाल भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए हैं। खनाल ने कहा कि जब हम खुले मन से साथ बैठेंगे तो सब साफ हो जाएगा और कोई भी मुद्दा इतना जटिल नहींहै कि जिसका हल ना निकल सके। उन्होंने कहा कि आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर सारी बातचीत होगी तो हल भी निकल आएगा। लिपुलेख को लेकर विवाद जयशंकर के साथ बैठक के दौरान खनाल ने कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार नयी दिल्ली के साथ ठोस और सार्थ रूप से जुड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था, 'भारत और नेपाल के बीच एक विशेष संबंध है, जो सीमा पार संपर्क और साझा सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं की मजबूत नींव पर आधारित है।' बालेंद्र शाह ने 31 मई को कहा था कि भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर चर्चा के अलावा, काठमांडू चीन और ब्रिटेन के साथ भी संपर्क में है। मामला लिपुलेख का है। नेपाल इस इलाके पर दावा करता है और अपने मैप में भी दिखा चुका है। वहीं आजादी से पहले के समझौते के मुताबिक ही भारत का इस क्षेत्र पर कब्जा है। मानसरोवर-कैलास यात्रा के लिए भी लिपुलेख बहुत महत्वपूर्ण है। भारत ने हालांकि नेपाल के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे के सभी पहलुओं से निपटने के लिए एक स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।

भारतीय-अमेरिकी टेक लीडर श्रीराम कृष्णन व्हाइट हाउस से अलग होंगे

 नई दिल्ली  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन में सबसे चर्चित भारतीय-अमेरिकी टेक्नोलॉजी सलाहकार श्रीराम कृष्णन इस महीने के आखिर में व्हाइट हाउस में अपना पद छोड़ देंगे। उन्होंने पिछले 18 महीनों में प्रशासन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कृष्णन ने कहा कि अमेरिका के सामने एआई से जुड़ी बड़ी चुनौतियों पर काम करने के लिए लौटने से पहले वे कुछ समय का ब्रेक लेंगे। उन्होंने लिखा कि मैं इस महीने के आखिर में व्हाइट हाउस में अपना पद छोड़ दूंगा। ब्रेक के बाद, मैं एआई के मामले में अमेरिका के सामने मौजूद कुछ बड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए काम करूंगा। कृष्णन ने अपनी सरकारी सेवा को जीवन भर का सौभाग्य बताया और कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में काम करना सम्मान की बात थी। उन्होंने कहा, "उनकी लीडरशिप के बिना, हम एआई की दौड़ में इतने आगे नहीं होते। उन्होंने व्हाइट हाउस के एआई और क्रिप्टो सलाहकार डेविड सैक्स का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका की जीत के लिए उनकी लगातार वकालत बहुत अहम रही है और आगे भी रहेगी।" ट्रंप प्रशासन में निभाई अहम भूमिका कृष्णन ने उन कई पहलों का भी जिक्र किया जिन्हें विकसित करने में उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मदद की। इनमें प्रशासन के अमेरिकन एआई एक्शन प्लान का खाका तैयार करना और उसे जारी करना, वैश्विक स्तर पर अमेरिकी एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एआई एक्सेलरेशन साझेदारियों को आगे बढ़ाना, और नेशनल एआई पॉलिसी फ्रेमवर्क से जुड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में योगदान देना शामिल है। उन्होंने एआई समिट और कूटनीतिक मुलाकातों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी एआई हितों को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि दुनिया भर में अपने सहयोगियों के साथ अमेरिकी एआई स्टैक की वकालत करना, जैसे फ्रांस और भारत में एआई समिट, यूनाईटेड किंगडम, मध्य पूर्व और अन्य जगहों की राजकीय यात्राएं हो। भविष्य को देखते हुए, कृष्णन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से विकास नीति और बुनियादी ढांचे से जुड़ी बड़ी चुनौतियां पेश करता है। उन्होंने कहा, "पिछले 18 महीनों में मुझे अमेरिका और हमारे सहयोगियों के सामने मौजूद एआई से जुड़े इस अहम मोड़ को बहुत करीब से देखने का मौका मिला है। चाहे वह ऊर्जा हो, डेटा सेंटर हों या अमेरिकियों के लिए एआई के फायदों का अनुभव करने का स्पष्ट रास्ता हो, कई मुश्किल मुद्दे हैं जिनसे हमें मिलकर निपटना होगा।" उन्होंने बताया कि वे अब ऐसे संस्थान बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहे हैं जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए उन चुनौतियों से निपटने में मदद करें। डेविड सैक्स ने की कृष्णन के काम की तारीफ इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए, डेविड सैक्स ने प्रशासन के एआई एजेंडा में कृष्णन के योगदान की तारीफ़ की और संकेत दिया कि यह भारतीय-अमेरिकी टेक्नोलॉजी लीडर सरकार के बाहर से भी सलाह देना जारी रखेंगे। सैक्स ने लिखा, "प्रशासन में मेरे कार्यकाल के दौरान पिछले 18 महीनों में आपके साथ इतनी करीब से काम करना मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात रही है। एआई में गहरी तकनीकी समझ, नीतिगत मामलों की सटीक परख, बेहतरीन रणनीतिक सोच और सच्चे कूटनीतिक कौशल का दुर्लभ मेल आपकी क्षमताएं सचमुच अनोखी हैं।" सैक्स ने आगे कहा कि कृष्णन ने प्रशासन के एआई एक्शन प्लान को मिलकर तैयार किया, एआई को तेज़ी से आगे बढ़ाने वाली साझेदारियों को बढ़ावा देने में मदद की, नेशनल एआई पॉलिसी फ्रेमवर्क में योगदान दिया और अंतरराष्ट्रीय एआई समिट और राजकीय यात्राओं में अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व किया। सैक्स ने कहा, "यह प्रशासन के लिए एक बड़ा नुकसान होगा, लेकिन मुझे खुशी है कि हम आपके साथ बाहरी सलाहकार के तौर पर काम करना जारी रखेंगे।" सिलिकॉन वैली और वाशिंगटन के बीच अहम कड़ी यह विदाई कृष्णन के लिए एक अहम अध्याय का अंत है, जो ट्रंप के व्हाइट हाउस के भीतर एआई नीति पर सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक बनकर उभरे और सिलिकॉन वैली तथा वाशिंगटन के टेक्नोलॉजी एजेंडा के बीच एक अहम कड़ी बने। एक भारतीय-अमेरिकी उद्यमी और टेक्नोलॉजी एग्जीक्यूटिव के तौर पर, कृष्णन ने पहले माइक्रोसॉफ्ट, एक्स, मेटा और स्नैप जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में सीनियर प्रोडक्ट और लीडरशिप भूमिकाएं निभाई हैं। वे उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक जाने-माने इन्वेस्टर और कमेंटेटर भी रहे हैं। एआई ट्रंप प्रशासन की टेक्नोलॉजी और आर्थिक रणनीति का एक मुख्य आधार बन गया है। अधिकारियों का तर्क है कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका की लीडरशिप बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी इनोवेशन के लिए बहुत जरूरी है। कृष्णन का काम उन्हें इन कोशिशों के केंद्र में ले आया था, क्योंकि वाशिंगटन ग्लोबल एआई पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को आकार देने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस से बचने के लिए कपड़े की दुकान में छिपा नेता, तलाशी के बाद गिरफ्तारी

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता की गिरफ्तारी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. पुलिस से बचने के लिए टीएमसी नेता एक कपड़े की दुकान के स्टोररूम में साड़ियों के ढेर के नीचे छिप गया था, लेकिन वह पुलिस की नजरों से नहीं बच सका. पुलिस ने साड़ियों के बंडल हटाकर नेता को खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया. यह घटना हावड़ा के उदयनारायणपुर थाना क्षेत्र के बिलासपुर इलाके की बताई जा रही है. गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान ब्रह्मानंद चक्रवर्ती के रूप में हुई है, जो तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता बताए जाते हैं. स्थानीय लोगों ने उन पर सरकारी आवास योजना के फंड में कथित तौर पर 'कट मनी' लेने और जबरन वसूली जैसे आरोप लगाए थे. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ब्रह्मानंद की तलाश में पहुंची थी. ब्रह्मानंद चक्रवर्ती गिरफ्तारी से बचने के लिए एक कपड़े की दुकान के भीतर साड़ियों के बड़े ढेर के नीचे छिप गए. पुलिस ने जब तलाशी अभियान चलाया तो उन्हें संदेह हुआ और साड़ियों का ढेर हटाया गया. ब्रह्मानंद चक्रवर्ती साड़ियों के ढेर के नीचे छिपे मिले. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इस पूरी कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक, ब्रह्मानंद चक्रवर्ती पर 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा से जुड़े आरोप भी हैं. पुलिस को इस मामले में भी ब्रह्मानंद चक्रवर्ती की तलाश कर रही थी. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों की शिकायतों के आधार पर ब्रह्मानंद चक्रवर्ती के खिलाफ कट मनी लेने के आरोपों की जांच जारी है. उनके खिलाफ 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा के मामले से जुड़े सभी आरोपों की पड़ताल भी की जा रही है.  

24 अरब डॉलर की संपत्ति पर अटका अमेरिका-ईरान शांति समझौता, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

नई दिल्ली  अमेरिकी प्रशासन ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए ईरानी संपत्तियों को खाड़ी देशों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की लागत का आकलन करने के लिए टीम को निर्देश दिया है। इसके साथ ही वाशिंगटन भविष्य में इस संघर्ष से होने वाले किसी भी विनाश की मरम्मत के लिए भी ईरानी संपत्तियों के उपयोग पर विचार कर रहा है। $24 बिलियन की रिहाई पर अटका शांति समझौता यह घोषणा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजई के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित शांति समझौता अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई 24 बिलियन डॉलर की ईरानी संपत्ति की रिहाई पर निर्भर करता है। शुक्रवार को सीएनएन से बात करते हुए रेजई ने इस राशि की रिहाई को विश्वास की अहम परीक्षा और किसी भी व्यापक समझौते की दिशा में एक जरूरी कदम बताया था। इस नए घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से ही नाजुक संघर्ष विराम प्रयासों के और उलझने का खतरा पैदा कर दिया है। एक अंतरिम समझौते को सुरक्षित करने के चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद वीकेंड में फिर से लड़ाई भड़क उठी है। सैन्य तनाव में वृद्धि और ईरानी ठिकानों पर हमला इस बीच पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, समुद्री यातायात के लिए खतरा बने ड्रोनों को इंटरसेप्ट करने के बाद अमेरिकी बलों ने शनिवार तड़के होर्मुज में गोरुक और केशम द्वीप पर ईरानी तटीय रडार प्रतिष्ठानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक जलमार्ग के पास दो और ईरानी हमलावर ड्रोनों को मार गिराने का भी दावा किया है। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। कुवैती अधिकारियों ने बताया कि सात बैलिस्टिक मिसाइलें रिहायशी इलाकों के ऊपर से गुजरीं, जिससे संपत्ति का नुकसान हुआ लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई। वहीं बहरीन में सायरन बजने के बाद निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि मिसाइलों ने दोनों देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिकी सेना ने कहा कि छह मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया और सातवीं अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रही। क्या है ईरान की मांगें? अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है ताकि एक ऐसा अंतरिम समझौता हो सके जो शत्रुता को रोक दे और परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर भविष्य की बातचीत का रास्ता खोले। हालांकि, अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। तेहरान अपनी तेल आय के अरबों डॉलर तक पहुंच, कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंधों से राहत, बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अधिक नियंत्रण की मांग कर रहा है। इसी बीच मध्यस्थता के प्रयासों के तहत, पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे। ईरानी मीडिया के अनुसार, वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री का अयातुल्ला खामेनेई के लिए एक 'विशेष पत्र' लेकर गए हैं। नकवी की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची सहित कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करने की उम्मीद है। ईरान की क्षमता पर राष्ट्रपति ट्रंप का बयान यह संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ा रहा है, जिन्हें ईंधन की बढ़ती कीमतों और युद्ध के कारण होने वाले व्यापक आर्थिक व्यवधानों पर घरेलू आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। एनबीसी न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी ऑपरेशनों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को काफी हद तक कम कर दिया है, लेकिन उन्होंने माना कि तेहरान के पास अभी भी एक बड़ा शस्त्रागार मौजूद है। ट्रंप ने कहा, "उनके पास कुछ मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं। प्रतिशत के हिसाब से मैं कहूंगा कि शायद उनकी मिसाइलों का 21% से 22% हिस्सा। यह बहुत सारी मिसाइलें हैं, लेकिन जब हमने पहली बार हमला किया था, तब के मुकाबले यह बहुत कम है।" लेबनान में तनाव दक्षिणी लेबनान में एक सैन्य वाहन पर हुए इजरायली हमले में दो सैन्य अधिकारियों और एक सैनिक की मौत हो गई। इजरायली सेना इस घटना की जांच कर रही है। ईरान ने वाशिंगटन के साथ किसी भी व्यापक समझौते को लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के बीच संघर्ष विराम से जोड़ दिया है। हालांकि, इजरायल ने साफ किया है कि उसका सैन्य अभियान जारी रहेगा। यह जटिल क्षेत्रीय विवाद शांति प्रयासों को और उलझा रहा है। बातचीत रुकी हुई है और युद्ध को तीन महीने पूरे हो चुके हैं, ऐसे में किसी स्थायी समझौते की उम्मीदें फिलहाल अनिश्चित बनी हुई हैं।

वेनेजुएला और ईरान पर बयान के बीच ट्रंप बोले—तेल कीमतें जल्द और घटेंगी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के पास तेल, गैस, कोयला और अन्य ऊर्जा संसाधनों की इतनी भारी मात्रा है कि कोई अन्य देश इसकी तुलना नहीं कर सकता। एयर फोर्स वन में प्रेस से बातचीत करते हुए ट्रंप ने बताया कि वेनेजुएला के साथ अच्छे संबंध बनने के कारण अमेरिका की स्थिति और मजबूत हो गई है। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला को मिलाकर अमेरिका के पास लगभग 64 प्रतिशत ऊर्जा संसाधन हैं, जो विश्व के लिए अद्भुत है। ट्रंप ने कहा कि बड़े तेल कंपनियां वहां पहले से ही काम शुरू कर चुकी हैं और लाखों बैरल तेल निकाला जाएगा। उन्होंने गैसोलीन निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के सवाल पर जोर देकर कहा कि उनके पास कई विकल्प उपलब्ध हैं लेकिन अमेरिका की प्राकृतिक संपदा सबसे बड़ी ताकत है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों की उत्पादन क्षमता पर बोलते हुए कहा कि उनके पास सब कुछ है जो जरूरी है। उन्होंने बताया कि दुनिया को उम्मीद थी कि तेल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएंगी, लेकिन वर्तमान में यह 96-97 डॉलर प्रति बैरल पर है। उन्होंने ईरान के साथ सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा और उसकी स्थिति कमजोर है। ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल परिवहन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना की मदद से बहुत सारा तेल लाया जा रहा है, जिसकी वजह से कीमतें नियंत्रण में हैं। ट्रंप बोले- पूरी दुनिया को फायदा होगा अमेरिका के राष्ट्रपति ने आयोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि तीन महीने पहले गैसोलीन की कीमत 1.85 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब और बेहतर हो सकती है। ट्रंप की इस यात्रा के दौरान उन्होंने चिपेवा फॉल्स की ओर जाते हुए मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका की ऊर्जा नीति न सिर्फ खुद को मजबूत बनाएगी बल्कि पूरी दुनिया को फायदा पहुंचाएगी। वेनेजुएला के लोगों को अमेरिका से प्यार है और देश खुशहाल हो रहा है। ट्रंप ने कहा कि जल्द ही पूरा मुद्दा सुलझ जाएगा और तेल की कीमतें और नीचे आएंगी। उन्होंने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का भी जिक्र किया, जिसमें अमेरिकी बलों ने कई हमलों को नाकाम किया। फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ओर आने वाले ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया। ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर मिसाइलें दागीं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ऊर्जा प्रभुसत्ता और सैन्य ताकत दोनों ही मजबूत हैं, जो भविष्य में तेल बाजार को स्थिर रखेगी। ट्रंप का ताजा बयान अमेरिका की ऊर्जा स्वतंत्रता और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

‘रॉकेट वुमन’ नंदिनी की मंगलयान वाली साड़ी अब वाशिंगटन म्यूजियम की शान बनी

 नई दिल्ली भारत की 'रॉकेट वुमन' नंदिनी हरिनाथ की मंगलयान मिशन वाली साड़ी अमेरिकी म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही है। वाशिंगटन डीसी. स्थित स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में इस साड़ी को प्रदर्शित किया गया है। भारत के पहले मंगल मिशन मार्स आर्बिटर मिशन (मंगलयान) की उप संचालन निदेशक रहीं नंदिनी एक दिसंबर 2013 को चमकीले लाल और नीले रंग की इस रेशमी साड़ी पहनकर कार्यालय पहुंची थीं। एक दिसंबर 2013 को मंगलयान ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी उस दिन नंदिनी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अन्य विज्ञानी अंतरिक्षयान को मंगल ग्रह की कक्षा की यात्रा पर भेजने के लिए नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे। एक दिसंबर 2013 को मंगलयान ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी और मंगल की तरफ बढ़ चला था। यह दिन नंदिनी और अन्य विज्ञानियों ने लिए बेहद खास था। नंदिनी ने बीबीसी को इंटरव्यू में बताया था, यह करो या मरो का क्षण था। मिशन की सफलता उस दिन की सफलता पर निर्भर थी। नंदिनी और अन्य महिला अंतरिक्ष विज्ञानी उस दिन पूरी दुनिया में सुर्खियों में आ गईं, जब इसरो में साड़ी पहने विज्ञानियों के जश्न मनाते हुए एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था। स्मिथसोनियन संग्रहालय में क्यूरेटर मैट शिंडेल ने बीबीसी को बताया कि उन्हें यह तस्वीर "बेहद आकर्षक" लगी। उन्होंने कहा, मुझे लगा कि यह शानदार कहानी होगी। 'रॉकेट वुमन' की कहानी जिनकी इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिंडेल ने 2020 में ईमेल के माध्यम से नंदिनी से संपर्क किया और इस बात पर चर्चा की कि कौन सी वस्तु भारत के मंगल मिशन और उसमें उनकी भूमिका का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व कर सकती है शिंडेल ने कहा, मैंने उनसे पूछा कि वह कौन सी वस्तु देने को तैयार होंगी। वह साड़ी देने पर सहमत हुईं, जो उन्होंने मंगलयान के पृथ्वी की कक्षा छोड़ने के दिन पहनी थी। इसके बाद साड़ी और उससे मेल खाती नीली ब्लाउज संग्रहालय पहुंची। मंगलयान को 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचा था गौरतलब है कि मंगलयान को 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचा था। भारत पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला दुनिया का पहला और इकलौता देश बना था। नंदिनी की साड़ी दो बातों को दर्शाती है। पहला, यह भारत के पहले मंगल मिशन और देश के सफल अंतरिक्ष कार्यक्रम में राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। दूसरा, उनकी कहानी प्रेरणादायक है क्योंकि उनकी सफलता महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। साड़ी का चयन इसलिए भी किया गया क्योंकि इसका सांस्कृतिक महत्व है।

होर्मुज संकट का असर, गैस सिलेंडर की सप्लाई लागत बढ़ी, सरकार पर बढ़ा बोझ

नई दिल्ली 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई की लागत बढ़कर 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई है। इससे हर सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है, जिसे सरकार और पब्लिक सेक्टर की मार्केटिंग कंपनियां उठाती हैं। कीमतों में यह बढ़ोतरी इंटरनेशनल बेंचमार्क में हुई तेज वृद्धि के कारण हुई है। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की वजह से फरवरी से सऊदी अरामको की एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में लगभग 46% की बढ़ोतरी हुई है। होर्मुज में सख्ती के बाद बढ़ी कीमत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, रुकावट से पहले फरवरी में प्रोपेन-ब्यूटेन के 50:50 मिक्स के लिए ब्लेंडेड सऊदी CP 542.50 अमेरिकी डॉलर प्रति टन था। होर्मुज में मिडिल ईस्ट गल्फ से होने वाले एक्सपोर्ट पर सख्ती के बाद अप्रैल का कॉन्ट्रैक्ट बढ़कर 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया और जून में यह और बढ़कर 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। इसी दौरान प्रोपेन CP में 39 प्रतिशत और ब्यूटेन में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही इम्पोर्ट किए गए मॉलिक्यूल की लैंडेड कॉस्ट भी बढ़ गई, जिससे घरेलू सिलेंडर की इम्पोर्ट-लिंक्ड सप्लाई कॉस्ट 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई। दुनिया भर से समसे कम कीमत भारत में कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय घरों में खाना पकाने वाली गैस की कीमतें दुनिया भर में सबसे कम हैं। दिल्ली में आम ग्राहक प्रति सिलिंडर 942 रुपये चुकाते हैं, जो बाजार से जुड़ी कीमत से लगभग 700 रुपये कम है। PMUY उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को हर साल पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलिंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलता है, जिससे उन्हें असल में 642 रुपये चुकाने पड़ते हैं। यह उज्ज्वला योजना वाले परिवार की सालाना औसत खपत के बराबर है। 942 रुपये की कीमत पर भी वे अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 45% कम भुगतान करते हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 642 रुपये की प्रभावी कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 60% कम है। एक बार फिर बढ़ीं कीमतें वेस्ट एशिया संकट की वजह से लागत बढ़ने के कारण, रविवार से घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। मंत्रालय ने बताया कि घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) वित्त वर्ष 2025-26 के आखिर तक 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल 41,338 करोड़ रुपये थी। केंद्रीय कैबिनेट ने इस मद में मार्केटिंग कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने कहा कि उज्ज्वला ग्राहकों के लिए 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी इस अंडर-रिकवरी के अलावा है और यह 10.58 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन तक पहुंचती है। होर्मुज में रुकावट के बावजूद सप्लाई सुरक्षित बनी रही। भारत उन कुछ देशों में से एक था जिन्होंने एनर्जी कार्गो की सप्लाई जारी रखी। इम्पोर्ट में कमी की भरपाई के लिए घरेलू LPG प्रोडक्शन को 60% से ज्यादा बढ़ाकर 52 TMT कर दिया गया। सप्लाई के लिए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों को भी शामिल किया गया। साथ ही, सब्सिडी वाली घरेलू LPG की कमर्शियल मार्केट में लीकेज को रोकने के लिए OTP-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन और डायवर्जन-रोधी उपायों को लगभग 90% तक बढ़ाया गया। अन्य देशों में गैस सिलिंडर के दाम नतीजतन, भारत में सिलेंडर की कीमतें पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम हैं। पाकिस्तान 1,046 रुपये, नेपाल 1,207 रुपये, बांग्लादेश 1,225 रुपये, श्रीलंका 1,241 रुपये, अमेरिका 1,755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया 1,765 रुपये, कनाडा 2,411 रुपये। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से सब्सिडी वाले इस संसाधन को बचाने के लिए खाना पकाने के ऐसे तरीकों को अपनाने का आग्रह किया जो ऊर्जा की बचत करते हों।  

63 लाख राशन कार्डधारकों पर लटकी तलवार, SIR में नाम कटते ही शुरू हुई बड़ी जांच

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के खजाने पर बढ़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करने और सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली को रोकने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की खाद्य साथी योजना के तहत मुफ्त और सस्ते अनाज का लाभ ले रहे अपात्र और फर्जी लाभार्थियों को बाहर निकालने का फैसला किया है। गुरुवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक, विशेष गहन समीक्षा 2026 (SIR) के नतीजों के आधार पर उन सभी राशन कार्डों को चिह्नित कर डिलीट किया जाएगा जो नियमों के तहत अयोग्य पाए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से जिन 63 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी पहचान की जाएगी और उनके राशन कार्ड तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने इसमें एक मानवीय और कानूनी पहलू को भी शामिल किया है। आदेश में कहा गया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं, लेकिन उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है या ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील की है उनके राशन कार्ड तब तक एक्टिव रहेंगे जब तक कि उनकी याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कुछ दिनों पहले शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के लिए सरकार ने एक नया आवेदन फॉर्म भी पेश किया है। सरकार को संदेह है कि पिछली सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत लगभग 30 लाख से अधिक अपात्र महिलाएं वित्तीय सहायता ले रही थीं। नई अन्नपूर्णा योजना के तहत राज्य सरकार लगभग दो करोड़ महिलाओं को 3,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देगी। इस योजना पर राज्य सरकार को हर साल करीब 72,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इसके विपरीत, पिछली तृणमूल कांग्रेस की सरकार लक्ष्मी भंडार योजना को चलाने के लिए सालाना लगभग 30,000 करोड़ रुपये खर्च करती थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "राज्य का खजाना इस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है और राजस्व को तुरंत बढ़ाना मुमकिन नहीं है। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को संभालने के लिए फंड के दुरुपयोग और लीकेज को रोकना बेहद जरूरी है।" 15,000 करोड़ की लीकेज रोकने की तैयारी अधिकारियों के मुताबिक, खाद्य साथी योजना के तहत सालाना करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसके जरिए करीब दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाता है और किसानों से सीधे धान की खरीद की जाती है। सरकार को अंदेशा है कि टीएमसी (TMC) शासन के दौरान इन योजनाओं में बड़े पैमाने पर धन का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए सभी राशन कार्ड धारकों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। कैसे होगा सत्यापन? पश्चिम बंगाल के सभी एसडीओ और बीडीओ अपने-अपने क्षेत्रों से हटाए गए मतदाताओं की सूची खाद्य विभाग के स्थानीय निरीक्षकों को सौंपेंगे। खाद्य विभाग के अधिकारी उन सभी लोगों के घरों पर जाकर जांच करेंगे जिनके नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद अपात्रों के राशन कार्ड बंद कर दिए जाएंगे। सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरी प्रक्रिया को 15 जून 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। टीएमसी राज में हुए धान घोटाले की भी होगी जांच भाजपा सरकार केवल राशन कार्डों की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि टीएमसी शासन के दौरान हुई धान खरीद प्रक्रिया की भी गहराई से जांच करेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "कागजों पर राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में औसतन 55 लाख टन से अधिक धान की खरीद दिखाई है। लेकिन शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि धान से चावल निकालने के लिए राइस मिलों में भेजा गया एक बड़ा हिस्सा कभी राज्य के पास वापस ही नहीं आया। अब इसकी जांच की जाएगी कि क्या कागजों पर दिखाया गया धान वास्तव में खरीदा भी गया था या यह सिर्फ एक कागजी घोटाला था।" आपको बता दें कि वर्तमान में केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बंगाल में 6.01 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज देती है। इसके अलावा, राज्य सरकार अपनी तरफ से अतिरिक्त दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देती है। नई सरकार अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दो करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों में से कितने वास्तव में वास्तविक और जरूरतमंद हैं। धान खरीद घोटाले की आधिकारिक जांच भी जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 8वें वेतन आयोग को लेकर नई चर्चाओं ने बढ़ाई उम्मीदें

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने वेतन आयोग के सामने ऐसी मांग रखी है, जिसने लाखों सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ऑल एम्प्लॉइज जॉइंट एसोसिएशन, जम्मू-कश्मीर और ऑल सिख माइनॉरिटी एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने 8वें वेतन आयोग से फिटमेंट फैक्टर 2.86 से 3.68 के बीच तय करने की मांग की है। अगर यह डिमांड स्वीकार हो जाती है, तो वर्तमान में ₹18,000 का न्यूनतम बेसिक वेतन बढ़कर ₹51,480 से ₹66,240 तक पहुंच सकता है। हाल ही में 8वें वेतन आयोग की टीम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर पहुंची थी। इस दौरान कर्मचारी संगठनों ने आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और अन्य अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केवल वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि पेंशन, महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), स्वास्थ्य सुविधाओं और टैक्स राहत से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव भी शामिल किए गए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में महंगाई तेजी से बढ़ी है, जिससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में 7वें वेतन आयोग के तहत लागू 2.57 फिटमेंट फैक्टर अब पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि कम से कम 2.86 और अधिकतम 3.68 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को वास्तविक राहत मिल सके। उदाहरण के तौर पर अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन ₹51,480 हो जाएगा, जबकि 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर ₹66,240 तक पहुंच सकता है। जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने पेंशनर्स के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने सभी पेंशनर्स के लिए पूर्ण पेंशन समानता (Pension Parity) लागू करने, वेतन निर्धारण से पहले महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज करने और कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 12 साल करने की मांग की है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने विशेष सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि जम्मू और श्रीनगर जैसे शहरी क्षेत्रों में मकानों का किराया लगातार बढ़ रहा है। इसलिए कर्मचारियों को बेहतर HRA दिया जाना चाहिए। साथ ही दूरदराज, सीमावर्ती और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए विशेष भत्ते और अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान की जानी चाहिए। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों को देश के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दुर्गम पहाड़ी इलाके, खराब मौसम, ऊंची परिवहन लागत, सीमावर्ती क्षेत्रों में सेवा की जिम्मेदारी और कुछ इलाकों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उनके काम को और कठिन बना देती हैं। इसलिए 8वें वेतन आयोग को इन विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग से राहत देने पर विचार करना चाहिए। हालांकि, अभी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें आना बाकी हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों की ये मांगें चर्चा का बड़ा विषय बन गई हैं। अगर इनमें से कुछ प्रमुख मांगें भी स्वीकार हो जाती हैं, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। अब सभी की नजर आयोग की अंतिम रिपोर्ट और केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।