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PF Interest 2026: 8.25% ब्याज कब होगा खाते में क्रेडिट, EPFO सदस्यों के लिए अहम खबर

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के सदस्य अपने पीए खाते में ब्याज का पैसा जमा होने का इंतजार कर रहे हैं. FY2025-26 के लिए पीएफ की ब्याज दर (PF Interest Rate) को यथावत रखा गया है, जो 8.25% है. इसे स्थिर रखने का फैसला लिए गए दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पैसा ईपीएफओ सदस्यों के खाते में जमा नहीं हुआ है. अब इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।  बीते मार्च 2026 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर 8.25% की वार्षिक ब्याज दर की सिफारिश की. श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 2 मार्च को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीटी ने सिफारिश की कि ब्याज को सदस्यों के ईपीएफ खाते में वित्तीय वर्ष के लिए जमा किया जाए।    कब तक PF खाते में जमा होगा पैसा?  EPFO Interest के खाते में जमा करने का इंतजार कर रहे सदस्यों के लिए बता दें कि अभी तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है और न ही कोई संभावित तारीख घोषित की गई है. लेकिन अगर, पीएफ में ब्याज का पैसा आने के पिछले रुझानों पर नजर डालें, तो संकेत मिल रहा है कि ये जून और सितंबर के बीच किसी भी समय डाला जा सकता है।  ब्याज की राशि ईपीएफओ सदस्यों के खातों में तभी जमा की जाती है जब केंद्र सरकार से सिफारिश को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है और इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया जाता है. ऐसे में इस प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं, इसलिए राशि जमा करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।  पिछले वर्ष, कई ग्राहकों को जून और जुलाई में खाते में ब्याज मिला था. हालांकि, इसे लेकर सटीक समय अलग-अलग हो सकता है. सदस्यों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि पीएफ ब्याज की जानकारी सभी ईपीएफ पासबुक में एक साथ दिखाई नहीं देती है, मतलब कुछ सदस्यों को यह अपडेट दूसरों की तुलना में पहले दिखाई दे सकता है और कुछ को बाद में।  क्या देरी से ब्याज पर असर पड़ेगा? इस उत्तर है नहीं, पासबुक अपडेट में देरी होने पर भी, ग्राहकों को उनका पूरा ब्याज मिलता है. EPF Scheme 1952 के अनुच्छेद 60 के तहत पीएफ खाते पर ब्याज की गणना मासिक चालू शेष पर होती है, जिसपर सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाता है. इसलिए, पासबुक में ब्याज दर्शाने में किसी भी प्रशासनिक देरी से सदस्यों को मिलने वाली रकम पर कोई असर नहीं पड़ता है।  PF खाते में आया ब्याज, ऐके करें चेक EPFO द्वारा अपने सदस्यों को कई ऑप्शन दिए गए हैं, जिनके जरिए वे अपने पीएफ खाते में ब्याज की रकम आने पर इसे आसानी से चेक कर सकते हैं. इसके लिए उमंग ऐप (Umang App), ईपीएफओ सदस्य ई-सेवा पोर्टल (EPFO E-Service Portal), मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service) या एसएमएस सुविधाएं (EPFO SMS Service) के जरिए स्टेटस जांच सकते हैं।   

चौंकाने वाले आंकड़े! शादी के बाद पुरुषों की आत्महत्या के मामले ज्यादा, NCRB रिपोर्ट में कई कारण उजागर

नई दिल्ली देश में शादीशुदा पुरुषों की खुदकुशी के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 से अब तक यह आंकड़ा करीब दोगुना हो गया है। 10 साल पहले 2015 में एक साल में 2497 पुरुषों ने शादी से संबंधित मामलों या फिर पत्नी से विवाद को लेकर खुदकुशी की थी। वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 4536 हो गया। इस रेट में 82 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। 2022 में पलट गए आंकड़े रिकॉर्ड के मुताबिक पहले पुरुषों की तुलना में शादी संबंधित मामलों को लेकर महिलाएं ज्यादा खुदकुशी करती थीं। वहीं 2022 में यह आंकड़ा ही पलट गया। 2024 में लगातार ऐसा देखा गया कि शादीशुदा जीवन में कलह को लेकर पुरुष महिलाओँ की तुलना में ज्यादा खुदकुशी कर रहे हैं। 2024 की बात करें तो शादी संबंधित मामलों में कुल 8524 लोगों ने खुदकुशी की। इनमें से 4536 यानी करीब 53 फीसदी पुरुष थे औ 3986 यानी करीब 46 फीसदी महिलाएं थीं। 2015 में खुदकुशी करने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में 61 फीसदी थी। हालांकि 2023 की तुलना में 2024 में शादी से जुड़े विवादों को लेकर खुदकुशी का आंकड़ा कम हुआ है। 2024 में खुदकुसी करने वाली महिलओं में से करीब दो तिहाई 30 साल से कम उम्र की थीं। वहीं पुरुषों की बात करें तो आधे से ज्यादा लोग 30 से ज्यादा की उम्र के थे। 40 फीसदी खुदकुशी करने वाले लोग 30 से 45 की उम्र के थे। कम उम्र में महिलाएं ज्यादा करती हैं खुदकुशी रिपोर्ट के मुताबिक 18 से 30 की उम्र में खुदकुशी करने के मामले में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। वहीं 30 से 40 की उम्र में पुरुष ज्यादा खुदकुशी करते हैं। रोज 24 लोग कर लेते हैं खुदकुशी रिपोर्ट के मुताबिक शादी या फिर पति-पत्नी के बीच विवाद को लेकर रोज करीब 23 लोग खुदकुशी करते हैं। इनमें से 12 पुरुष और 11 महिलाएं होती हैं। रोज होने वाली मौतों के औसत पर गौर करें तो रोज 30 से कम की उम्र के 5 पुरुष और 30 से ज्यादा उम्र वाले 6 पुरुष खुदकुशी करते हैं। 2019 से 2024 तक पांच साल में ऐसे खुदकुशी करने वालों की कुल संख्या 24335 थी। क्यों खुदकुशी करते हैं शादीशुदा लोग शादी या पति-पत्नी के बीच विवाद और खुदकुशी की मुख्य वजहों में दहेज, विवाहेतर संबंध, तलाक जैसे मुद्दे शामिल हैं। 2019 से 2024 तक कुल खुदकुशी के आंकड़ों को देखों तो करीब 18359 पुरुषों और 20485 महिलाओं ने खुदकुशी की है। 2024 में खुदकुशी के 8534 मामलों में से 3052 ऐसे थे जिनमें शादी के बाद सामंजस्य नहीं बन पाया। उत्तर प्रदेश में होती हैं सबसे ज्यादा ऐसी खुदकुशी उत्तर प्रदेश में लोग शादी संबंधित मामलों को लेकर सबसे ज्यादा खुदकुशी करतेहैं। 2024 में उत्तर प्रदेश में शादी के बाद सामंजस्य ना बनने की वजह से कुल 764 लोगों ने खुदकुशी की थी और इनमें से 394 पुरुष और 370 महिलाएं थीं। उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा नंबर महाराष्ट्र का आता है जहां 421 लोगों ने खुदकुशी की थी। विवाहेतर संबंधों को लेकर होने वाली खुदकुशी की दर काफी बढ़ गई है। 2014 में ऐसे मामले को लेकर 1624 लोगों ने खुदकुशी की थी।

क्या आपका भी है इस बैंक में खाता? RBI ने लगाई 6 महीने की रोक, जानें क्या होगा असर

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, आरबीआई ने मोगावीरा सहकारी बैंक, मुंबई की वित्तीय स्थिति में गिरावट को देखते हुए इसपर कई पाबंदियां लगा दी हैं। यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने किसी सहकारी बैंक पर पाबंदियां लगाई हैं। इससे पहले मई में भी एक सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया गया था। मोगावीरा सहकारी बैंक पर क्या एक्शन? मोगावीरा सहकारी बैंक पर लगी पाबंदियों के तहत खाताधारकों के लिए पैसे निकालने की अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। ये पाबंदियां 12 जून को कारोबार बंद होने के बाद से लागू हुईं, जो छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी होंगी। हालांकि, इनकी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। क्या-क्या नहीं कर पाएगा बैंक? आरबीआई ने कहा, ''सहकारी बैंक अब कोई भी लोन और उधार को मंजूर नहीं दे सकेगा और न ही मौजूदा लोन को रिन्यू कर पाएगा। इसके अलावा, बैंक किसी प्रकार का निवेश नहीं कर सकेगा, कोई नई देनदारी नहीं ले सकेगा और उधार लेने, नए जमा स्वीकार करने पर भी रोक रहेगी। बैंक की वर्तमान नकदी स्थिति को देखते हुए उसे निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी जमाकर्ता को उसके बचत, चालू अथवा अन्य किसी खाते से अधिकतम एक लाख रुपये तक की निकासी की अनुमति दे।'' भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक के कामकाज में सुधार के लिए वह लगातार उसके निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ संपर्क में था। हालांकि, बैंक ने निगरानी संबंधी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। इसी कारण ये निर्देश जारी करना जरूर हो गया। आरबीआई ने इस बैंक का किया लाइसेंस रद्द बता दें कि बीते महीने केंद्रीय रिजर्व बैंक ने महाराष्ट्र के फलटन स्थित 'द यशवंत सहकारी बैंक' के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं होने के आधार पर लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह सहकारी बैंक, बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कुछ प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा है और मौजूदा वित्तीय स्थिति में वह अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है। इसके साथ ही आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक से बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया है। आरबीआई ने कहा कि परिसमापन पर बैंक के जमाकर्ताओं को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा राशि मिलेगी। आरबीआई के अनुसार, बैंक के 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि मिलने की पात्रता है।

जुलाई में बढ़ सकती है कर्मचारियों की सैलरी, DA 63% पहुंचने की संभावना; जानिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी बातें

नईदिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. जल्‍द ही इन कर्मचारियों को लेकर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है. इनकी सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है और केंद्रीय कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में जुलाई से बढ़ी हुई सैलरी आ सकती है।  महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट       दरअसल, केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की करीबी नजरें 8वें वेतन आयोग पर लगी हैं. कर्मचारी संघों द्वारा ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर रखने और मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाने को कह रहे हैं. इस बीच, महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट आया है।  किस आधार पर होगा डीए कैलकुलेशन         कहा जा रहा है कि जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ सकता है. जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ने की उम्‍मीद की वजह इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) है. डीए का कैलकुलेशन इसी इंडेक्स के आधार पर किया जाता है. यह इंडेक्स इस साल मार्च में 149.1 था, जो अप्रैल में बढ़कर 149.9 हो गया।  रिटेल महंगाई में इजाफा इंडस्‍ट्रियल वर्कर्स के लिए रिटेल महंगाई दर भी बढ़ा है. यह 4.27 से बढ़कर 4.46 फीसदी हो गया है. अप्रैल 2026 तक उपलब्ध  AICPI-IW डेटा के आधार पर 12 महीने का एवरेज 147.51 है।  3 फीसदी बढ़ सकता है डीए  ऐसे में 2016 की बेस सीरीज को 2001 के बेस में कनवर्ट करने के लिए 2.88 लिंकिंग फैक्टर का यूज करते हैं तो डीए कैलकुलेशन के बाद करीब 62.51 फीसदी हो जाएगा. इसी कारण डीए में 3 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद की जा रही है।  जुलाई की सैलरी में हो सकती है बढ़ोतरी  साल में दो बार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी की जाती है. सरकार ने जनवरी के महंगाई भत्ता को बढ़ा दिया है और अब जुलाई में होने वाले डीए में बढ़ोतरी की उम्‍मीद की जा रही है. अगर जुलाई से ही इसमें बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई महीने की सैलरी के साथ ही बढ़े हुए महंगाई भत्ता भी भेजा जा सकता है।  अभी 60 फीसदी महंगाई भत्ता अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी का महंगाई भत्ता 60 फीसदी है. ऐसे में अगर सरकार जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला करती है तो यह बढ़कर 63 फीसदी तक पहुंच सकता है।  केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब … Read more

चौंकाने वाला खुलासा! हेलमेट-सीटबेल्ट की अनदेखी बनी हजारों मौतों की वजह, रिपोर्ट में बड़ा दावा

 नई दिल्ली  केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट से 2024 में हजारों जानें बचाई जा सकती थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में सड़क हादसों में मारे गए लोगों में से 40 हजार से अधिक जिंदगियों को केवल स्टैंडर्ड हेलमेट और सीटबेल्ट के इस्तेमाल से बचाया जा सकता था। साल 2024 में सड़क हादसों में मारे गए 81,780 टू-व्हीलर सवारों में से 40% से ज्यादा अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनकर बच सकते थे, जबकि सीटबेल्ट कार में सवार लोगों की 21,988 मौतों में से लगभग आधी मौतों को रोक सकती थी। यानी दोपहिया वाहनों पर जान गंवाने वाले 40% से ज्यादा लोग और कार हादसों में मारे गए करीब आधे लोग सुरक्षा उपकरणों के अभाव का शिकार हुए। बाइक सवारों के मरने की संभावना सबसे अधिक संयुक्त राष्ट्र (UN) की मोटरसाइकिल हेलमेट स्टडी के अनुसार, कार चालकों की तुलना में मोटरसाइकिल सवारों के सड़क हादसों में मरने की संभावना 26 गुना ज्यादा होती है, और अच्छी क्वालिटी के हेलमेट पहनने से उनके बचने की संभावना 42% बढ़ जाती है और बाइक सवारों को होने वाली 69% चोटों से बचा जा सकता है।" इसी तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि सीटबेल्ट उन हादसों में मौत को रोकने में लगभग 50% असरदार हैं, जिनमें सीटबेल्ट न होने पर ड्राइवर या यात्री की मौत हो सकती थी। किन-किन राज्यों में हुईं सबसे अधिक मौतें? राज्य पुलिस विभागों से मिले डेटा पर आधारित सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि हेलमेट न पहनने के कारण तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 7,744 मौतें हुईं, इसके बाद महाराष्ट्र (5,946) और मध्य प्रदेश (5,543) का नंबर आता है। सीटबेल्ट न पहनने के कारण हुई मौतों के मामले में, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,816 मौतें हुईं, इसके बाद मध्य प्रदेश (1,929) और महाराष्ट्र (1,427) का स्थान रहा। हालांकि. सेफ्टी गियर न पहनना और तेज रफ्तार या गलत साइड से गाड़ी चलाने जैसे जानलेवा हादसों के अन्य कारण सड़क इस्तेमाल करने वालों के व्यवहार से जुड़े हैं, लेकिन सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट यह भी बताती है कि सड़क बनाने और देखरेख करने वाली एजेंसियों की बढ़ती लापरवाही ने भी कुल मौतों की संख्या बढ़ाई है। उदाहरण के लिए, 2024 में गड्ढों के कारण होने वाली मौतें बढ़कर 2,384 हो गईं, जो 2023 की तुलना में 10.4% ज़्यादा हैं, और निर्माणाधीन साइटों पर मौतों की संख्या 5,389 रही, जो पिछले साल की तुलना में 19.4% ज़्यादा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024 में भारतीय सड़कों पर मारे गए लोगों में से लगभग 67% टू-व्हीलर सवार या पैदल चलने वाले थे। सड़क हादसों में कुल 1.28 लाख दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की जान चली गई। टक्कर रोकने वाली तकनीक के लिए रेडियो स्पेक्ट्रम लाइसेंस-मुक्त केंद्र सरकार ने सड़क हादसों को रोकने और वाहन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और 'व्हीकल-टू-एवरीथिंग' (V2X) कम्युनिकेशन में इस्तेमाल होने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम को पूरी तरह लाइसेंस-मुक्त (Delicensed) कर दिया है। इस कदम से देश में उन्नत सड़क सुरक्षा तकनीकों और टक्कर रोधी प्रणालियों को बड़े पैमाने पर लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने जारी की अधिसूचना इस संबंध में दूरसंचार विभाग (DoT) ने दो महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं जारी की है- 77-81 GHz बैंड- इसे ऑटोमोटिव रडार सिस्टम के लिए लाइसेंस-मुक्त किया गया है। 5.9 GHz बैंड- इसे V2X कम्युनिकेशन के लिए मुक्त किया गया है। V2X (Vehicle-to-Everything) एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से गाड़ियां न सिर्फ आपस में संपर्क साध सकती हैं, बल्कि सड़क के किनारे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैफिक सिग्नल और स्मार्ट पोल्स) के साथ भी डिजिटल संवाद कर सकती हैं। इससे ड्राइवर को संभावित दुर्घटनाओं, ट्रैफिक जाम और सड़क की स्थिति की जानकारी पहले ही मिल जाएगी, जिससे सड़क हादसों में भारी कमी आने की उम्मीद है।  

रेल यात्रियों को बड़ी राहत: वेटिंग टिकट होने पर भी सफर के दौरान मिल सकेगी कन्फर्म सीट

नई दिल्ली ट्रेन में वेटिंग टिकट लेकर सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की ओर से एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अब यात्री चलती ट्रेन में भी अपने लिए कंफर्म बर्थ बुक करा सकेंगे। बता दें कि अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना हो चुकी है, अगर ट्रेन के भीतर कोई सीट खाली है, तो यात्री उसे सफर के दौरान ही तुरंत बुक कर सकेंगे। रेलवे का यह नया नियम आने वाले दिनों में वेटिंग और आरएसी (RAC) के झंझट से जूझने वाले यात्रियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं साबित होने वाला है। CRIS अपग्रेड कर रहा है टीटीई का हैंड हेल्ड टर्मिनल दरअसल, भारतीय रेलवे आने वाले दिनों में टिकट बुकिंग से आरएसी (RAC) की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की एक बहुत बड़ी तैयारी कर रहा है। इसके लिए रेलवे का टेक्निकल विंग यानी रेल सूचना प्रणाली केंद्र टीटीई को दिए गए हैंड हेल्ड टर्मिनल सॉफ्टवेयर को नए फीचर्स के साथ अपग्रेड कर रहा है। इस अपग्रेडेशन के तहत टीटीई के इस डिवाइस में 'कंफर्म बर्थ बुकिंग' का एक नया और सीधा ऑप्शन जोड़ने की तैयारी चल रही है। इस नई और हाईटेक व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए रेलवे प्रशासन ने अपने वाणिज्य विभाग के आला अधिकारियों और कई टीटीई को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दे दिया है, ताकि जमीन पर काम शुरू करने में कोई दिक्कत न आए। यात्री के न आने पर तुरंत वेबसाइट पर दिखने लगेगी सीट इस पूरी व्यवस्था को समझाते हुए एक सीनियर टीटीई ने बताया कि मान लीजिए अगर सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस में कंफर्म टिकट होने के बावजूद कोई यात्री अपनी सीट पर नहीं आता है, तो टीटीई चेकिंग के दौरान उस बर्थ को अपने एचएचटी डिवाइस में तुरंत खाली दिखाएगा। टीटीई द्वारा यह जानकारी भरते ही वह बर्थ सीधे रेलवे के बुकिंग पोर्टल और आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर लाइव दिखने लगेगी। इसके बाद अगर कोई अन्य यात्री बेतिया, नरकटियागंज या रास्ते के किसी भी अन्य स्टेशन से सप्तक्रांति में सीट बुक कराना चाहता है, तो वह आसानी से ऑनलाइन बुकिंग कर सकता है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में ऐसी खाली सीटों को टीटीई केवल ट्रेन के भीतर ही बुक कर पाते हैं और ये वेबसाइट पर नहीं दिखती हैं, लेकिन इस नए बदलाव के बाद पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी।

भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार! इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल रोकने की क्षमता से बढ़ी सैन्य ताकत

 नई दिल्ली भारत की सामरिक सुरक्षा और सैन्य इतिहास में 10 और 11 जून, 2026 की तारीखें सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO ने लगातार तीन ऐतिहासिक फ्लाइट-टेस्ट करके देश की 'नेक्स्ट-जेनरेशन' की रक्षा क्षमताओं का लोहा मनवाया है।  इन सफल परीक्षणों के माध्यम से भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' और समुद्र में मध्यम दूरी की एंटी-शिप मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा 'एलीट' देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी हवा में नष्ट करने की तकनीक मौजूद है।  इसके साथ ही, भारत ने पहली बार अपनी स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला परीक्षण किया है, जो देश की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।  क्या है मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता? मिसाइल डिफेंस की भाषा में 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' का मतलब एक ऐसे अभेद्य सुरक्षा चक्र से है, जो दुश्मन की मिसाइल को आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों पर ही ढूंढकर पूरी तरह नष्ट कर देता है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन देश ने भारत पर कोई लंबी दूरी की घातक मिसाइल दागी है, तो भारत का यह नया डिफेंस सिस्टम उसे दो स्तरों पर निशाना बनाएगा…     एक्सो-एटमॉस्फेरिक: इसके तहत इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष की सीमा पर) ही मार गिराती है।      एंडो-एटमॉस्फेरिक: यदि कोई मिसाइल पहले सुरक्षा चक्र को पार कर जाती है, तो वायुमंडल के भीतर मौजूद दूसरा इंटरसेप्टर उसे धरती पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ा देता है।  DRDO द्वारा 10 और 11 जून को किए गए इन लगातार तीन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों (टारगेट्स) को बेहद सटीकता के साथ एंगेज किया और उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया. ये डिफेंस सिस्टम्स उभरते हुए आधुनिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सबसे लेटेस्ट और स्वदेशी तकनीकों के आधार पर डिजाइन की गई हैं।  ICBM को रोकने वाला 'एलीट क्लब': भारत की बड़ी वैश्विक छलांग इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों को निष्क्रिय करने की तकनीक है. ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक (5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी) मार कर सकती हैं और इनकी स्पीड बहुत तेज होती है।  अब तक ऐसी मिसाइलों को रोकने और हवा में ही मार गिराने की तकनीक केवल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसी महाशक्तियों के पास ही प्रमुख रूप से मानी जाती थी. भारत ने इस परीक्षण के जरिए साबित कर दिया है कि उसका 'बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस'सुरक्षा कवच अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. यह तकनीक आने वाले समय में देश के प्रमुख महानगरों, परमाणु प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों को दुश्मन के किसी भी अचानक होने वाले मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।     नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण इन तीन परीक्षणों की कड़ी में भारत को एक और बड़ी कामयाबी समुद्र में मिली. DRDO ने अपनी अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का 'मेडन फ्लाइट-टेस्ट' यानी पहला आधिकारिक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।    यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तथा हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए तैयार किया गया है. मध्यम दूरी की इस एंटी-शिप मिसाइल का मुख्य काम समुद्र में भारतीय सीमाओं की तरफ बढ़ रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को पलक झपकते ही नष्ट करना है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है।  वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग की साझी कूटनीतिक जीत इन बेहद जटिल और संवेदनशील परीक्षणों की कमान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के हाथों में थी. उन्होंने खुद इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और इसे देश की रक्षा सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़े बदलाव वाला मोड़ बताया।  इन परीक्षणों को भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायुसेना और नौसेना) के शीर्ष अधिकारियों ने भी अपनी आंखों से देखा और इसकी मारक क्षमता को देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी बताया।   भले ही भारत के पड़ोसी देश अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण कर रहे हों, लेकिन DRDO के इस नेक्स्ट-जेन सुरक्षा कवच ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी आसमानी या समुद्री खतरे को सीमा पार ही ढेर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

अगले थल सेना अध्यक्ष की दौड़ में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जानिए उनका सैन्य सफर और उपलब्धियां

नई दिल्ली लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय थल सेना के अगले अध्यक्ष होंगे. सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी है. जनरल के स्थायी रैंक के साथ वो 30 जून को पदभार ग्रहण करेंगे. वो वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का कार्यकाल 31 अगस्त, 2028 तक होगा।  महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित खड़कवासला के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व-छात्र धीरज सेठ दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त हुए थे. लगभग चार दशकों के अपने कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न भू-भागों और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण संचालन अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियान भी शामिल हैं।  लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी बल की कमान संभाली है. लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में काम किया, जहां उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया. सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया और पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का दुर्लभ गौरव हासिल किया।  लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ संचालन अधिकारी, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह और कल्याण के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर काम किया।  क्षमता विकास और आधुनिकीकरण में एक विशिष्ट योगदानकर्ता के रूप में, उन्होंने सामरिक योजना और क्षमता विकास निदेशालयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।  करीब 40 साल का सैन्य अनुभव, कई अहम कमानों का नेतृत्व किया दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन हासिल करने वाले धीरज सेठ को करीब 40 साल का सैन्य अनुभव है। उन्होंने रेगिस्तान, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी मोर्चे सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में कमान संभाली है। धीरज सेठ दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जीओसी-इन-सी भी रह चुके हैं। वे पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन (अंगोला), सेना मुख्यालय और क्षमता विकास से जुड़े कई अहम पदों पर भी काम किया है। जूनियर कमांड कोर्स में टॉपर, कई सम्मान हासिल किए वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला, इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), DSSC वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वे जूनियर कमांड कोर्स में फर्स्ट रैंक और DSSC में बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल हासिल कर चुके हैं। उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया जा चुका है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका-पेरिस में किया कोर्स लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में मोंटेरी स्थित नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स,, पेरिस में मिलिट्री कॉलेज में डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड जनरल स्टाफ कोर्स, महू में हायर कमांड कोर्स और नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ली है। इसके अलावा, उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, विकसित इलाके में एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक काउंटर-इंसरजेंसी फोर्स की कमान भी संभाली है। सेना के आधुनिकीकरण के लिए जाने जाते हैं लेफ्टिनेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ हमेशा एक कुशल सैन्य अधिकारी रहे हैं और पेशेवर सैन्य शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह सेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले जनरल ऑफिसर हैं। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में अहम पदों पर काम किया है। सेना के आधुनिकीकरण की दिशा, क्षमता विकास के रोडमैप और लंबे समय के लिए सेना से जुड़ी पहलों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, जुलाई में वेतन वृद्धि की उम्मीद; 8वें वेतन आयोग पर नजरें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है। आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी। फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा। क्या होता है वेतन आयोग ? केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है। आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

वायुसेना को बड़ा झटका: विमान दुर्घटना में 5 जवानों की मौत, कारणों की जांच शुरू

नईदिल्ली /जोरहाट  असम के जोरहाट एयरबेस के पास भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई, जबकि विमान का सह-पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल अधिकारी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।वायुसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी सैन्यकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे। दुर्घटना में बलिदान होने वालों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम शामिल हैं। भारतीय वायुसेना ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बलिदान जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। वायुसेना ने कहा कि इस कठिन समय में पूरा संगठन शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा है और उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।  इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और  अग्निवीरवायु दानिश आलम शहीद हो गए है। वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारतीय वायुसेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है। दुख की इस घड़ी में पूरी वायुसेना शहीदों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई। जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित की गई है। बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे। दुर्घटना के बाद वायुसेना मुख्यालय ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है, जो हादसे के सभी पहलुओं की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी संभावित समस्या, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन कारणों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। हादसे में जीवित बचे सह-पायलट से भी जांच टीम पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि दुर्घटना से ठीक पहले विमान की स्थिति और कॉकपिट में हुई घटनाओं के बारे में उनकी जानकारी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। वायुसेना की जांच टीम विभिन्न तकनीकी और परिचालन तथ्यों का विश्लेषण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।  जांच के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' के आदेश हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई. जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है. बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे।