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मदरसों में बच्चों की स्वच्छता और व्यवस्थाओं में मिली खामियां

मुस्लिम बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग तत्पर मदरसों में बच्चों की स्वच्छता और व्यवस्थाओं में मिली खामियां डॉ. वर्णिका शर्मा के निरीक्षण में मदरसों की अव्यवस्था आई सामने बाल संरक्षण मानकों में मिली कमियां, सुधार के दिए निर्देश रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में रायपुर स्थित दो मदरसों एवं यतीमखानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।  निरीक्षण के दौरान बैजनाथ पारा स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन एवं दारुल यतामा में बच्चों की दिनचर्या अत्यधिक लंबी एवं असंतुलित पाई गई। निरीक्षण में परिसर एवं रसोईघर में गंदगी, स्वच्छ पेयजल की कमी तथा अस्वच्छ भोजन व्यवस्था जैसी गंभीर कमियां सामने आईं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य एवं मानसिक विकास के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मदरसों में बच्चों से सफाई एवं अन्य दैनिक कार्य कराए जा रहे हैं, जिसे बाल अधिकारों के विरुद्ध माना गया। डॉ वर्णिका शर्मा ने संस्था प्रबंध को आदेशित किया है कि बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कार्य नहीं कराया जाए तथा बाल संरक्षण संबंधी सभी मानकों एवं वैधानिक प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। इसके अलावा खेलकूद एवं मनोरंजन की समुचित व्यवस्था नहीं मिलने पर भी चिंता व्यक्त की। बाल आयोग ने संबंधित संस्थानों को तत्काल निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के निराकरण हेतु आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग बच्चों के हितों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी करेगा और आवश्यकता पड़ने पर सख्त कार्यवाही भी की जाएगी।आयोग द्वारा संबंधित अधिकारियों को और  मदरसे को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित अवधि में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

WHO की चेतावनी के बाद रायपुर एयरपोर्ट सतर्क, बाहर से आने वाले हर यात्री की हो रही स्क्रीनिंग

रायपुर   इबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने बाहरी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अनिवार्य जांच शुरू कर दी है. अभी तक भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें एहतियाती तौर पर पूरी तरह सतर्क हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।  रायपुर एयरपोर्ट पर सख्ती, यात्रियों की जांच अनिवार्य इबोला संक्रमण की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर एयरपोर्ट पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य कर दी गई है. इसके लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की जा रही है, जो स्क्रीनिंग, निगरानी और आपातकालीन व्यवस्था का समन्वय करेगा. संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की तुरंत पहचान कर उन्हें आइसोलेशन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।  देशभर में निगरानी तेज, केंद्र सरकार अलर्ट मोड में इबोला के खतरे को लेकर केंद्र सरकार भी सतर्क है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है. देश के सभी एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमावर्ती क्षेत्रों पर स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है. एनसीडीसी, आईसीएमआर और अन्य एजेंसियों को ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस के लिए लगातार तैयार रहने को कहा गया है।  WHO के अलर्ट के बाद बढ़ी सतर्कता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में अफ्रीका के कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' घोषित किया है. इस प्रकोप के बाद दुनिया भर के देशों ने निगरानी बढ़ा दी है. भारत में भी इसी के चलते एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य किया गया है।  SOP और एडवाइजरी जारी, राज्यों को निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन, इलाज, लैब जांच और संक्रमण रोकथाम से जुड़े प्रोटोकॉल शामिल हैं. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में बुखार या अन्य लक्षणों पर विशेष नजर रखने और तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  क्या है इबोला और कितनी है गंभीरता इबोला एक खतरनाक वायरल रोग है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है. यह संक्रमित व्यक्ति या जानवर के खून और शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में रक्तस्राव शामिल हैं. इस बीमारी का ऊष्मायन काल 2 से 21 दिनों तक हो सकता है।  फिलहाल भारत सुरक्षित, लेकिन सतर्कता जरूरी स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है. हालांकि वैश्विक यात्रा और संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. रायपुर समेत देशभर के एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी और सख्ती इसी दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम है, ताकि समय रहते किसी भी खतरे को टाला जा सके। 

समय से पहले आएगा मानसून? 26 मई को केरल पहुंचने के आसार, 10 दिन में बस्तर में एंट्री संभव

रायपुर  रायपुर मौसम केंद्र के मौसम वैज्ञानिक बीके चिंधालोरे ने बताया कि केरल में हर साल 1 या 2 जून को मानसून पहुंचता है लेकिन इस बार दक्षिण पश्चिम मानसून 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा. केरल में मानसून के पहुंचते ही नमीयुक्त हवाएं भी आएंगी, जिससे नौतपा में भी लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।  छत्तीसगढ़ में कब पहुंचेगा मानसून केरल में मानसून पहुंचने के बाद लगभग 10 से 12 दिनों में मानसून छत्तीसगढ़ में पहुंचता है. यानी प्रदेश में मानसून पहुंचने की संभावित तिथि 5 मई से 7 मई के आसपास है।  छत्तीसगढ़ में 25 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. छत्तीसगढ़ में 26 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ इलाकों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा) चलने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में 27 मई से 29 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा) के साथ आंधी आने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों के लिए तापमान का पूर्वानुमान छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिनों में अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है. इसके बाद इसमें 1-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है. साउथ वेस्ट मानसून का अग्रिम आगमन 2026 राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र भारत मौसम विज्ञान विभाग के सुबह 8 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार इस बार मानसून का अग्रिम आगमन हो रहा है. मानसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E, 7°N/70°E, 7°N/75°E, 8°N/80°E, 10°N/85°E, 13.5°N/90°E और 17°N/95°E से होकर गुजर रही है. अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण पश्चिम, दक्षिण पूर्व और पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मानसून आगे बढ़ने के लिए परिस्थतियां अनुकूल है।  पूर्वोत्तर भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई को असम और मेघालय में गरज, बिजली और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 और 26 मई को अरुणाचल प्रदेश में, 25 से 29 मई के दौरान असम और मेघालय में, और 25, 29 और 30 मई को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान अरुणाचल प्रदेश में, असम और मेघालय में अलग अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।  दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत 25 से 28 मई के दौरान केरल, माहे और लक्षद्वीप में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ व्यापक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है. 25 से 28 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और आंतरिक कर्नाटक में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम वर्षा की संभावना है. तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में 25 से 27 मई के दौरान और तेलंगाना में 25 से 30 मई के दौरान भी 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।  25 और 26 मई को उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक के झोंके) की संभावना है. 25 और 26 मई को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में छिटपुट भारी वर्षा की भी संभावना है. केरल और माहे में 25 से 28 मई के दौरान भी यही संभावना है।  पूर्वी भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 और 26 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 से 30 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में और 25 से 28 मई के दौरान बिहार में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश होने की संभावना है. 27 से 29 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में, 26 से 28 मई के दौरान बिहार में और 25 मई को झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक हवाएं) आने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में छिटपुट भारी बारिश होने की संभावना है।  उत्तरपश्चिम भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई और 28-30 मई के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. उत्तराखंड में 25, 29 और 30 मई को भी यही स्थिति रहेगी. 28-30 मई के दौरान पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. 25-29 मई के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 30 मई को राजस्थान में भी यही स्थिति रहेगी. 28 और 29 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 29 और 30 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है। 

रायपुर: आवागमन सुविधा को मिली नई रफ्तार, मंत्री देवांगन ने दी बड़ी सौगात

रायपुर : बहुप्रतीक्षित माँग पूरा होने से कोरबावासियों को मिलेगा बेहतर आवागमन की सुविधा: मंत्री लखनलाल देवांगन उद्योग मंत्री ने ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक, रिसदा से रिसदी, दर्री बैराज से बरमपुर चौक सहित हरदी बाजार-तरदा-इमलीछापर मार्ग के निर्माण का किया भूमिपूजन सुशासन तिहार के बीच जिलेवासियों को मिली बड़ी सौगात रायपुर कोरबा जिले के स्थापना दिवस और सुशासन तिहार के अवसर पर आज जिलेवासियों को बेहतर आवागमन की दिशा में बड़ी सौगात मिली है। उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग मंत्री लखनलाल देवांगन ने दर्री बैराज के मेजर ध्यानचंद चौक में आयोजित कार्यक्रम में 29 करोड़ 42 लाख 96 हजार रुपये की लागत से निर्मित होने वाली ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक (सीमेंट कंक्रीटीकरण, लंबाई 2.84 किमी), रिसदा चौक से रिसदी चौक (लंबाई 2.90 किमी), 83 करोड़ रुपये से अधिक की राशि से दर्री बैराज से बरमपुर चौक (सीमेंट कांक्रीटीकरण, लंबाई 7.96 किमी) तथा 230 करोड़ 31 लाख रुपये से अधिक की लागत से हरदी बाजार -तरदा-सर्वमंगला-इमलीछापर (कुल लंबाई 27.19 किमी, शेष निर्माण 13.74 किमी) सीमेंट कंक्रीट मार्ग निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। सुशासन तिहार के बीच जिलेवासियों को मिली बड़ी सौगात इस अवसर पर मंत्री देवांगन ने कहा कि आज शुभ दिन है कि कोरबा वासियों की बहुप्रतीक्षित सड़कों की माँग पूरी हो रही है। भूमिपूजन के साथ ही सड़क निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होगा और जिले में सड़कों का जाल बिछने के साथ आवागमन बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इन सड़कों के निर्माण का शिलान्यास किया था और आज भूमिपूजन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मंत्री देवांगन ने जिले के विकास और बेहतर आवागमन के लिए सड़कों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन मार्गों के बनने से यातायात का दबाव कम होगा, आवागमन सुगम होगा तथा कई मार्गों की दूरी भी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और नगरीय निकाय मंत्री के सहयोग से जिले के विकास को नई गति मिल रही है। उन्होंने बताया कि डीएमएफ राशि से जिले में अधोसंरचना से जुड़े अनेक कार्यकृसड़क, पुल-पुलिया, आंगनबाड़ी भवन, स्कूल भवन, स्वास्थ्य केंद्र भवनकृस्वीकृत किए गए हैं। साथ ही मानदेय आधारित शिक्षकों की नियुक्ति, स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती, प्रतिभावान विद्यार्थियों को कोचिंग, स्कूली विद्यार्थियों को नाश्ता प्रदान करने जैसी योजनाएँ भी संचालित हैं। शहर में पेयजल समस्या के समाधान के लिए 36 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। मंत्री देवांगन ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री देश को विकास की राह पर आगे बढ़ा रहे हैं। उनके नेतृत्व में देश को आर्थिक मजबूती मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ गरीब कल्याण हेतु अनेक योजनाएँ चल रही हैं। डीएमएफ का अधिकार जिलों को देकर खनन प्रभावित क्षेत्रों को विकास से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए किसानों से सर्वाधिक मूल्य पर धान खरीदी, तेंदूपत्ता प्रति मानक बोरा 5500 रुपये, रामलला दर्शन योजना, तथा प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पक्का मकान उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्री एवं अधिकारी सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं। भीषण गर्मी के बावजूद मुख्यमंत्री लगातार चौपाल लगाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। मंत्री देवांगन ने समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण के निर्देश भी दिए। कार्यक्रम को महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत और सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मंत्री देवांगन कोरबा जिले के सर्वांगीण विकास के लिए न केवल संकल्पित हैं, बल्कि उसे धरातल पर उतार भी रहे हैं। सभी 67 वार्डों में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि जिले की किसी भी सड़क पर कहीं भी गड्ढा न रहे। उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण से जिलेवासियों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी। निगमायुक्त आशुतोष पांडेय ने कहा कि आज जिले के लिए अत्यंत खुशी और सौभाग्य का दिन है। यह केवल सड़क का भूमिपूजन नहीं, बल्कि बेहतर आवागमन एवं मजबूत भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि डीएमएफ की 30 प्रतिशत राशि आवागमन सुधारने में व्यय की जा रही है। कलेक्टर कुणाल दुदावत की भी यह सोच है कि जिले की सभी सड़कें सर्वाेत्तम स्थिति में रहें और यहाँ से बाहर निकलने वाले यात्रियों को भी उत्कृष्ट मार्ग उपलब्ध हों। लोक निर्माण विभाग के ईई जी आर जांगड़े ने स्वीकृत सड़को की जानकारी दी और सभी निर्माण कार्य समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने की बात कही। इस अवसर पर पार्षद अशोक चावलानी, नरेंद्र देवांगन, सीमा कँवर, राधा महंत, कल्याणी यादव, प्रीति शर्मा, अजय चंद्रा, राजकुमार साहू, सम्मत रतन सिंह कँवर,एसडीएम सरोज महिलांगे सहित अन्य जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

रायपुर में खाद दुकानों पर कार्रवाई, लक्ष्मी ट्रेडर्स का लाइसेंस निलंबित; कई विक्रेताओं को नोटिस

रायपुर : एक खाद दुकान का लाइसेंस निलंबित, कई विक्रेताओं को नोटिस मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा खाद की कालाबाजारी का मामला रायपुर धमतरी जिले में किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर एक उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि कई निजी और सहकारी विक्रय केन्द्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि कालाबाजारी, अधिक कीमत व अनियमित बिक्री किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग की टीम लगातार जिलेभर में निरीक्षण कर रही है। उप संचालक कृषि, उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी निरीक्षकों सहित विभागीय अधिकारियों ने धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी विकासखंड के कई सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा में गंभीर अनियमितता सामने आई। यहां निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक बिक्री और भूमिहीन व्यक्ति को उर्वरक बेचने की पुष्टि होने पर दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। वहीं मेसर्स काप केयर एण्ड ट्रेडिंग झिरिया, पारस कृषि केन्द्र सोनामगर, कर्मा ट्रेडर्स सेमरा, कृष्णा फर्टिलाईजर कुरूद और राज कृषि केन्द्र नगरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। कृषि विभाग का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित केन्द्रों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। खरीफ सीजन को देखते हुए जिले में उर्वरक की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करें और उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य पर ही खरीदी कर बिल अवश्य लें। उर्वरकों की गुणवत्ता, कालाबाजारी या अधिक कीमत वसूली की शिकायत नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में तत्काल दर्ज कराने को कहा गया है।

रायपुर के कुटरु समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, तपती धूप में भी दिखा ग्रामीणों का उत्साह

रायपुर : समाधान शिविर कुटरु में उमड़ा जनसैलाब- तपती धूप में भी दिखा शासकीय योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का भारी उत्साह ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’ ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’ रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के अंतर्गत बीजापुर जिले के कुटरु में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए हजारों की संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं के त्वरित निराकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने शिविर पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने संबोधित करते हुए शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और तेंदूपत्ता संग्रहण जैसी जन-हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’            इस वृहद् शिविर में ग्राम पंचायत गुदमा, कोमपल्ली, केतुलनार, सकनापल्ली, अड़ावली, अम्बेली, कुटरु, मंगापेठा, दरभा, उसकापटनम, करकेली, हुर्रागुबाली, फरसेगढ़, रानीबोदली, सागमेटा, पेंकरम, सोमनपल्ली और मण्डेम सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण बड़ी तादाद में सम्मिलित हुए। ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’           मुख्य अतिथि का संदेश बस्तर मुन्ने (बस्तर के बच्चे/आगे) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना हमारा संकल्प है। इसके लिए ग्रामीण अपने आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार रखें और शिविरों में तैनात शासकीय अमले का पूरा सहयोग करें। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में शासन की अधिकांश योजनाओं का लाभ डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिसके लिए बैंक खाता और आधार कार्ड का लिंक होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने आयुष्मान कार्ड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके जरिए पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। ’भावनात्मक और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम’         शिविर में उस समय एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोद भराई और छह माह पूर्ण कर चुके शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया। इस पहल ने प्रशासनिक शिविर को एक पारिवारिक और आत्मीय उत्सव में बदल दिया। ’24 से अधिक विभागों ने दी अपनी सेवाएं’          ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में 24 से अधिक शासकीय विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे, जहाँ पात्र हितग्राहियों को ऑन-द-स्पॉट लाभान्वित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नव-निर्मित पक्के मकानों की चाबियाँ हितग्राहियों को सौंपी गईं। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। कृषि, मत्स्य, राजस्व सहित अन्य प्रमुख विभागों द्वारा कृषि इनपुट और संबंधित सामग्रियों का वितरण किया गया। जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की उपलब्धियों और योजनाओं पर आधारित विभिन्न मार्गदर्शिका, शासकीय प्रकाशनों और सूचना सामग्रियों का निःशुल्क वितरण किया गया। ’जन-समस्याओं के त्वरित निराकरण का भरोसा’         सुशासन तिहार के इस मंच पर ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन भी प्रस्तुत किए। शिविर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी आवेदनों को संवेदनशीलता से दर्ज करते हुए उनके शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निराकरण का ठोस आश्वासन दिया। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्रीमती दशरी कोरसा, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रीति आरकी, जनपद उपाध्यक्ष जितेंद्र लेकाम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, एसडीएम भैरमगढ़, जनपद पंचायत सीईओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सड़क हादसे रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएं: मुख्य सचिव का सख्त निर्देश

रायपुर : सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशन रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।   ब्लैक स्पॉट सुधारने पर विशेष जोर मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।    सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की योजनाओं की समीक्षा बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई।  मुख्य सचिव ने सर्वाेच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।   ईव्ही चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने के निर्देश मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है।  घायलों को मिलेगा कैशलेस इलाज मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा।   बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुआर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता भारतः रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलेगा तरक्की का द्वार गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान रायपुर  भारत आज तीव्र गति से आधुनिक बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और सुदृढ़ आर्थिक नेटवर्क के निर्माण की दिशा में अग्रसर है। सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करते हुए देश को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास निरंतर जारी है। विकास के इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह ष्नए भारत की नई रफ्तारष् का प्रतीक है, जो उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए क्षितिज खोलने जा रहा है। मध्य-पूर्वी समुद्री तट को जोड़ने वाला महामार्ग            रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर देश के मध्य भाग को पूर्वी समुद्री तट से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक मार्ग है। यह छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी (संपर्क) स्थापित करेगा, जिससे सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक नेटवर्क और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस परियोजना को प्रधानमंत्री की “गति शक्ति” और “आत्मनिर्भर भारत” की सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विकास का मूलमंत्र           किसी भी राज्य या देश के विकास का सबसे मजबूत आधार उसका इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। जहां विश्वस्तरीय सड़कें, सुगम परिवहन और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं होती हैं, वहां उद्योगों का तेजी से विस्तार होता है और निवेश आकर्षित होता है। यह कॉरिडोर माल परिवहन को अधिक तीव्र, सुरक्षित और लागत प्रभावी (कम खर्चीला) बनाएगा। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा और तैयार उत्पाद कम से कम समय में बाजार तक पहुंच सकेंगे।           चूंकि विशाखापट्टनम बंदरगाह देश के प्रमुख समुद्री द्वारों में से एक है, इसलिए इस कॉरिडोर के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सीधे पोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य के उद्योगों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित होगी, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी। छत्तीसगढ़ को मिलने वाले प्रमुख लाभ           रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, कृषि और वनोपज से समृद्ध राज्य है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और स्टील उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। पूर्व में बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक नेटवर्क के अभाव के कारण उद्योग अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पाते थे, परंतु यह कॉरिडोर इन चुनौतियों को समूल समाप्त कर देगा। औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन           कॉरिडोर के निर्माण से रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी, कांकेर और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्लस्टर्स विकसित होंगे। स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और एमएसएमई (लघु उद्योगों) को एक नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान इस क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ेगा। रोजगार के नए अवसरों का सृजन        इतनी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के आने से रोजगार के अवसर भी आनुपातिक रूप से बढ़ते हैं। सड़क निर्माण, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क्स, नई औद्योगिक इकाइयों और परिवहन सेवाओं के माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में जीविकोपार्जन के साधन मिलने से पलायन की समस्या पर काफी हद तक रोक लगेगी। बस्तर क्षेत्र का कायाकल्प          यह कॉरिडोर बस्तर संभाग के लिए विशेष रूप से परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कटे क्षेत्रों में बेहतर सड़क और व्यापारिक संपर्क स्थापित होगा। बस्तर के बहुमूल्य वन उत्पाद, अनूठे हस्तशिल्प, कृषि उपज और लघु उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे आदिवासी समुदायों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। कृषि और वनोपज को सही मूल्य               छत्तीसगढ़ देश में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त यहाँ मक्का, दलहन, फल और लघु वनोपज का भी प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से किसानों और वनोपज संग्राहकों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सुगमता होगी। परिवहन लागत घटने से सीधे तौर पर किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। पर्यटन उद्योग को नई उड़ान            चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर और बस्तर के सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होने से राज्य में पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा। इससे होटल, गाइड, स्थानीय परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसायियों की आय दोगुनी होगी। व्यापार और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि            विशाखापट्टनम पोर्ट तक आसान और तेज पहुंच से छत्तीसगढ़ के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (कॉम्पिटिटिवनेस) बढ़ेगी। संक्षेप में कहें तो, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर महज एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया महामार्ग है। यह छत्तीसगढ़ को देश के एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक हब के रूप में स्थापित करने का सामर्थ्य रखता है।            मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही सशक्त अर्थव्यवस्था की नींव होता है, और यही परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। नए भारत की नई रफ्तार का यह कॉरिडोर देश के हर कोने को प्रगति की साझा मुख्यधारा से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है। मुख्यमंत्री का विजनः छत्तीसगढ़ की समृद्धि का महामार्ग          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे छत्तीसगढ़ की आर्थिक रीढ़ बनने जा रहा है। हमारा राज्य खनिज संपदा, कृषि और समृद्ध वनोपज से परिपूर्ण है, लेकिन वैश्विक बाजारों तक सीधी और तीव्र पहुंच न होने से हमारे उद्यमियों और किसानों को अपनी क्षमता का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। यह कॉरिडोर हमारी इस भौगोलिक चुनौती को अवसर में बदल देगा। विशाखापट्टनम बंदरगाह से सीधे जुड़ने के बाद छत्तीसगढ़ का स्टील, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमाएंगे। हमारी सरकार का संकल्प है कि इस मार्ग के किनारे अत्याधुनिक औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जाएं, ताकि स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिले और बस्तर सहित पूरे राज्य में खुशहाली का एक नया … Read more

ग्रीष्मकाल में पानी की किल्लत रोकने सक्रिय हुआ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

ग्रीष्म काल में स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सतर्क  दूरस्थ गांवों तक निर्बाध पेयजल पहुंचाने जुटी पीएचई की टीमें तकनीकी कर्मचारियों और हैंडपंप मैकेनिकों को खराब हैंडपंपों, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं व पेयजल व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के तत्काल निराकरण के निर्देश रायपुर  भीषण गर्मी, उमस और लगातार बढ़ते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में सुचारू पेयजल व्यवस्था बनाए रखने पूरी प्रतिबद्धता के साथ मैदान में डटी हुई है। ग्रीष्म काल में ग्रामीणों तक स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम सतर्कता से काम कर रही है। वनांचलों और दूरस्थ गांवों तक निर्बाध पेयजल पहुंचाने विभाग तत्परता से काम कर रहा है। राज्य शासन ने विभाग के सभी तकनीकी कर्मचारियों और हैंडपंप मैकेनिकों को खराब हैंडपंपों, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं एवं पेयजल व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के तत्काल निराकरण के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभागीय अधिकारी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर पेयजल योजनाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। विभाग की टीम भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों को पानी की समस्या से राहत दिलाने दिन-रात काम कर रही है। विभाग द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। ग्रीष्म काल में भी हर घर तक स्वच्छ, सुरक्षित और नियमित पेयजल की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभागीय टीमें सक्रियता से काम कर रही हैं।   विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं के नियमित संचालन के साथ-साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। लोगों से आवश्यकता न होने पर नल की टोटी बंद रखने, पानी का दुरुपयोग रोकने और जल बचाने की अपील की जा रही है। विभाग द्वारा यह संदेश भी दिया जा रहा है कि पानी केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य संसाधन है, इसलिए इसका संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम भ्रमण के दौरान ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्यों के साथ बैठक कर योजनाओं के सतत संचालन में जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। ग्रामीणों को जल कर के संग्रहण के महत्व से अवगत कराया जा रहा है, ताकि योजनाओं का रखरखाव एवं संचालन लंबे समय तक निर्बाध रूप से जारी रखा जा सके। विभाग द्वारा प्रत्येक घर के नल कनेक्शन के पास सोख्ता गड्ढा के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ स्वच्छता भी सुनिश्चित हो सके।

आदिवासी समाज से दुनिया सीखे प्रकृति के साथ विकास: लाल किला मैदान में बोले CM विष्णुदेव साय

रायपुर  देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में  जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का एक विराट दृश्य देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और पारंपरिक समुदाय एक मंच पर जुटे। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। जल जंगल और जमीन की करते रहे हैं रक्षा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, ऐसे समय में जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जुड़ी हुई है, जहां 42 प्रकार की जनजातियां निवास करती हैं और राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है और भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष और बलिदान का इतिहास रचा। जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने का कर रही है काम वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को संरक्षित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि नया रायपुर में आयोजित ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल कर रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रह सके। साथ ही बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी और मातागुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। धर्मांतरण पर भी बोले सीएम सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि समाज के भीतर यह भावना लगातार प्रबल हो रही है कि जो लोग अपनी मूल जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और धर्म को छोड़ चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किए जाने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, ताकि आरक्षण और सरकारी सुविधाओं का वास्तविक लाभ उन समुदायों तक पहुंचे जो आज भी अपनी मूल पहचान और परंपराओं को संरक्षित किए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की अस्मिता, अधिकारों और सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा की भावना से जुड़ी हुई है। इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में उठाया जा रहा है। जनजातीय कलाकारों ने किया प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान में दिनभर गूंजते मांदर, ढोल और पारंपरिक लोकधुनों के बीच यह समागम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त राष्ट्रीय घोष बनकर सामने आया।