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बिजली ट्रांसफर हुआ आसान, MP बिजली विभाग ने लॉन्च किया ऑनलाइन आवेदन सिस्टम

भोपाल  मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कर्मचारियों को बड़ी डिजिटल सौगात दी है। अब स्थानांतरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और पेपरलेस बनाते हुए कंपनी ने 'एम्प्लाई ट्रांसफर माड्यूल' लॉन्च किया है। प्रमुख जानकारी: अंतिम तिथि: आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 मई निर्धारित की गई है। पात्रता: ऐसे कर्मचारी जिनका वर्तमान पदस्थापना स्थान पर 1 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। आवेदन का आधार: व्यक्तिगत कारण, गंभीर बीमारी, पति-पत्नी का अन्य शासकीय सेवा में होना या आपसी स्थानांतरण (Mutual Transfer) के आधार पर आवेदन किए जा सकेंगे। हालांकि, जिन कर्मचारियों की एक ही स्थान पर पदस्थापना अवधि एक वर्ष से कम है, उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन व प्रशासन) राकेश शर्मा ने बताया कि इस नई व्यवस्था से कर्मचारियों को सुविधा और पारदर्शिता दोनों मिलेगी। आनलाइन आवेदन में दिए गए विकल्पों के आधार पर कर्मचारी अपनी पसंद के स्थान पर स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होंगे।

ट्रैफिक सुधार के तहत भोपाल-इंदौर बसें चलेंगी नए रूट पर, 8 मई से बदलाव

 सागर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। भोपाल और इंदौर जाने वाली बसों के रूट में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है, जो 8 मई से प्रभावी होगी। नए रूट के तहत बसें अब शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से नहीं गुजरेंगी, जिससे मोतीनगर और आसपास के इलाकों में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। क्या हुआ बदलाव? नई व्यवस्था के अनुसार, भोपाल और इंदौर जाने वाली बसें अब राहतगढ़ बस स्टैंड नहीं जाएंगी। ये बसें पुराने मुख्य बस स्टैंड से रवाना होकर मोतीनगर चौराहे पहुंचेंगी और वहां से सीधे लेहदरा नाका स्थित नए बस स्टैंड होते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगी। जाम से मिलेगी राहत: वर्तमान में ये बसें रेलवे पुल के नीचे और राहतगढ़ बस स्टैंड तक जाकर वापस मुड़ती थीं, जिससे मोतीनगर थाना, बड़ी माता मंदिर और विजय टाकीज क्षेत्र में भारी जाम की स्थिति बनती थी। नए रूट से शहर के अंदरूनी इलाकों में यातायात का दबाव कम होगा और बसों का अनावश्यक घुमाव खत्म होने से यात्रा के समय में भी बचत होगी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जनसुविधा: उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के बाहर लेहदरा नाका और मेनपानी में करीब 20 करोड़ की लागत से नए बस स्टैंड बनाए गए थे। यात्रियों और बस ऑपरेटर्स की असुविधा को देखते हुए प्रशासन ने शहर के भीतर ट्रैफिक सुधार और नए बस स्टैंडों के उपयोग के बीच यह संतुलित रास्ता निकाला है।

सरकार देगी मुफ्त ट्रेनिंग, भोजन और आवास के साथ स्टाइपेंड भी: राज्यमंत्री गौर

फ्री ट्रेनिंग में रहना-खाना मुफ्त, स्टाइपेंड भी देगी सरकार : राज्यमंत्री गौर सुरक्षाबलों में भर्ती के लिए 11 मई तक करें ऑफलाइन आवेदन, भोपाल मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को सेना, पुलिस, होमगार्ड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए निशुल्क ट्रेनिंग देने जा रही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' में उन्हें 45 दिन का निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस योजना से प्रदेश के 4000 ओबीसी युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का लाभ लेने के लिए 11 मई की शाम 6 बजे तक आवेदन किए जा सकते हैं। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेश के ओबीसी वर्ग के युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी संकल्प को साकार करते हुए सैन्य बलों में भर्ती की निःशुल्क कोचिंग के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026' युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक सौगात है। उन्होंने प्रदेश के ओबीसी वर्ग के प्रतिभावान युवक-युवतियों से इस योजना में बढ़-चढ़कर आवेदन करने की अपील की है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन और निःशुल्क रखी गई है। उम्मीदवार, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट  ( www.bcwelfare.mp.gov.in)  से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, 20 चयनित जिलों में स्थित पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के 'सहायक संचालक कार्यालयों' से भी निःशुल्क आवेदन फॉर्म प्राप्त किए जा सकते हैं। इन फॉर्म को सही तरीके से भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ 11 मई या उससे पहले इन्हीं कार्यालयों में जमा करना होगा। योजना के लिए कौन पात्र होगा? आवेदन करने के लिए युवा का मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना और अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमीलेयर) श्रेणी में आना अनिवार्य है। आवेदक का न्यूनतम 12वीं कक्षा पास होना जरूरी है। शारीरिक मापदंड के तहत पुरुषों की न्यूनतम ऊंचाई 168 सेंटीमीटर और महिलाओं की 155 सेंटी मीटर होनी चाहिए। साथ ही, आवेदक के पैरों के तलवे चपटे (फ्लैट फुट) नहीं होने चाहिए और 'सावधान' की मुद्रा में खड़े होने पर दोनों घुटने आपस में टकराने (नॉक नीज़) नहीं चाहिए। आवेदन यदि 4000 से अधिक प्राप्त होते हैं, तो चयन 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों (मेरिट) के आधार पर किया जाएगा। अंक समान होने की स्थिति में अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रेनिंग के दौरान मिलेंगी कई सुविधाएं चयनित युवाओं को ट्रेनिंग के दौरान कई शानदार सुविधाएं निशुल्क दी जाएंगी। प्रशिक्षणार्थियों को 45 दिन के आवासीय प्रशिक्षण में नाश्ता, दोनों समय का भोजन और अध्ययन सामग्री विभाग की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण अवधि में जेब खर्च के लिए पुरुष अभ्यर्थियों को 1,000 रुपए प्रतिमाह और महिला अभ्यर्थियों को 1,100 रुपए प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी सीधे उनके बैंक खातों में दिया जाएगा। योजना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कुल 4000 सीटों में से 35 प्रतिशत सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। ट्रेनिंग प्रोग्राम को रिजल्ट ओरिएंटेड बनाया गया है। इसमें युवाओं को हर दिन लगभग 4 घंटे सैद्धांतिक विषयों की तैयारी कराई जाएगी। इसके अलावा, सुबह और शाम मिलाकर प्रतिदिन 3 घंटे दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद और गोला फेंक जैसी शारीरिक ट्रेनिंग दी जाएगी। शुरुआत में यह ट्रेनिंग प्रदेश के 20 जिलों (भोपाल, रायसेन, इंदौर, खंडवा, उज्जैन, मंदसौर, सागर, टीकमगढ़, जबलपुर, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, गुना, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सतना, नर्मदापुरम, बैतूल, मुरैना और भिंड) के 40 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इन केंद्रों में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी।

एम्स भोपाल का प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री शुक्ल से मिला, प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट को मजबूत बनाने पर विमर्श

उप मुख्यमंत्री शुक्ल से एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के सुदृढ़ीकरण पर हुआ विमर्श भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मंत्रालय में एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार सतत प्रयास कर रही है। ऑर्गन डोनर्स को "गार्ड ऑफ ऑनर" प्रदान कर तथा उनके परिजनों को 26 जनवरी एवं 15 अगस्त के अवसर पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑर्गन डोनेशन से हम कई जिंदगियों में आशा का नया प्रकाश ला सकते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आमजन में ऑर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान, कार्यशालाएँ एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें। राज्य सरकार ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में एम्स के तकनीकी सहयोग एवं सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने एम्स द्वारा अब तक किए गए ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं एवं जागरूकता गतिविधियों की सराहना भी की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर सहित समस्त प्रतिनिधिमंडल को सम्मानित किया। बैठक में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज में वृद्धि करने और हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट को शामिल करने के विषय पर चर्चा हुई। साथ ही प्रत्यारोपण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। अंग प्राप्ति प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए संभावित ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान एवं त्वरित रेफरल प्रणाली को मजबूत करने पर तकनीकी सहयोग के विषयों पर विमर्श किया गया। इस दिशा में प्रदेश के शासकीय अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिये एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव भी रखा गया, जिससे अंग प्राप्ति एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने एवं जागरूकता गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्राप्त सुझावों पर शीघ्र यथोचित कार्यवाही की जाएगी। बैठक में प्रत्यारोपण सर्जरी में आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से रोबोटिक सर्जरी के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जिससे उपचार की गुणवत्ता और सफलता दर में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। एम्स की टीम ने हार्ट ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट में अब तक की गई प्रगति, लंग ट्रांसप्लांट सेवाओं के विस्तार तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्रस्तुत की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने राज्य सरकार की ओर से इन सेवाओं के विस्तार हेतु पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। बैठक में एम्स के निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर डिप्टी डायरेक्टर संदेश कुंअर जैन, चिकित्सा अधीक्षक डॉ विकास गुप्ता सहित ऑर्गन ट्रांसप्लांट टीम के सदस्य उपस्थित थे।  

चुनावी जादू: सीएम मोहन ने 7 सीटों पर किया प्रचार, 6 पर मिली जीत; 5 नेताओं को मिली थी जिम्मेदारी

भोपाल  राजनीति में कई बार नारे नहीं, आंकड़े ज्यादा जोर से बोलते हैं. बंगाल चुनाव नतीजों के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर ऐसा ही एक आंकड़ा खास दिलचस्पी से चर्चा में है 7 में से 6. ये वो स्ट्राइक रेट है, जो पश्चिम बंगाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चुनावी अभियान से जोड़ा जा रहा है. बंगाल जैसे राज्य में, जहां भाजपा ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है, डॉ. यादव के प्रचार वाले इलाकों का हिसाब-किताब अब पार्टी के भीतर राजनीतिक महत्व रखता है।  डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल में कुल सात विधानसभा सीटों पर प्रचार किया. इनमें से भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की. यानी बंगाल में उनका स्ट्राइक रेट करीब 86 प्रतिशत रहा. इस गणित का सबसे मजबूत हिस्सा बांकुरा जिले से सामने आया. डॉ. यादव ने यहां पांच विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था और भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराने के दौरान भी मौजूद रहे थे. नतीजा यह रहा कि भाजपा ने इन पांचों सीटों पर जीत हासिल की।  बांकुरा में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट का गणित सलतोरा सीट पर भाजपा की चंदना बाउरी ने टीएमसी उम्मीदवार को 32 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. छातना में सत्यप्रकाश मुखोपाध्याय ने 47 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. बांकुरा सीट पर नीलाद्रि शेखर दाना ने टीएमसी उम्मीदवार को 54 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित किया. बरजोरा में बिलेश्वर सिन्हा ने 40 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की, जबकि ओंदा सीट पर अमरनाथ शाखा भी विजयी रहे. यानी बांकुरा में आंकड़ा साफ रहा 5 सीटें, 5 जीत, यहां डॉ. मोहन यादव का स्ट्राइक रेट 100 प्रतिशत रहा।  बांकुरा से शुरू किया चुनावी अभियान, जिले की सभी सीटें जीती बीजेपी डॉ. मोहन यादव का बंगाल चुनाव अभियान 2 अप्रैल को बांकुरा जिले से शुरू हुआ। सीएम ने बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन में हिस्सा लिया और संयुक्त जनसभा को संबोधित किया। यही क्लस्टर आगे चलकर भाजपा के लिए सबसे मजबूत साबित हुआ। मेदिनीपुरी में जीते, कमरहाटी में हारे 18 अप्रैल को सीएम ने कोलकाता और मेदिनीपुर में प्रचार किया। सीएम ने कमरहाटी में बीजेपी उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। मेदिनीपुरी में तो बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष 30 हजार के बडे़ अंतर से टीएमसी केंडिडेट को हराकर जीत गए। लेकिन, कमरहाटी में अरुप चौधरी टीएमसी उम्मीदवार से चुनाव हार गए। बीजेपी ने चुनिंदा नेताओं को भेजा बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में चुनिंदा नेताओं को ही भेजा था। सीएम डॉ मोहन यादव के अलावा केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधायक रामेश्वर शर्मा, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, राज्यसभा सांसद डॉ उमेश नाथ महाराज को भी भेजा था। तीखे प्रहार और धर्मयुद्ध का आह्वान प्रचार के दौरान डॉ. यादव ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने कहा था, “ममता दीदी बंगालियों का हक बांग्लादेश को देने पर तुली हैं. इसलिए यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि धर्मयुद्ध है. इस वातावरण में श्रीराम का मंत्र हम सबको शक्ति दे रहा है।  गढ़ में सेंध और खड़गपुर की बड़ी जीत 18 अप्रैल को डॉ. यादव ने कोलकाता जिले की कमरहाटी विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष के समर्थन में भी प्रचार किया था. कमरहाटी सीट को लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. यहां शुरुआती रुझानों में भाजपा उम्मीदवार की बढ़त ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी, हालांकि करीबी मुकाबले में अरूप चौधरी करीब 5 हजार वोटों से हार गए. लेकिन खड़गपुर सदर में भाजपा नेता दिलीप घोष ने जीत दर्ज की और टीएमसी उम्मीदवार को 30 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया. इस तरह बंगाल का चुनावी समीकरण कुछ यूं रहा बांकुरा में 5 में 5, खड़गपुर सदर में 1 में 1 और कमरहाटी में 1 हार . कुल मिलाकर 7 में 6 सीटें भाजपा के खाते में गईं।  बिहार और हरियाणा में भी चला मोहन यादव का सिक्का प्रतिशत में देखें तो यह आंकड़ा करीब 85.7 प्रतिशत बैठता है. यह लगभग वैसा ही है जैसा बिहार चुनाव में डॉ. यादव के प्रचार वाले क्षेत्रों में देखा गया था. बिहार में उन्होंने 25 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया था, जिनमें से भाजपा ने 21 सीटें जीतीं. वहां उनका स्ट्राइक रेट 84 प्रतिशत रहा था. हरियाणा चुनाव में भी डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने स्टार प्रचारक के रूप में भिवानी, दादरी, तोशाम, झज्जर और बवानी खेड़ा जैसे क्षेत्रों में उतारा था, जहां पार्टी को चार सीटों पर सफलता मिली।  बंगाल नतीजों के बाद बातचीत में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनता ने अन्याय, अत्याचार और कुशासन से मुक्ति के लिए वोट दिया है और एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अब भाजपा के लिए “मास्कॉट” बनते जा रहे हैं, तो उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. उन्होंने कहा, “हमारे केवल एक ही मास्कॉट हैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. अब 17 राज्यों में हमारे मुख्यमंत्री होंगे. स्वतंत्रता के बाद के दौर में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।  विपक्ष पर प्रहार और जीत का उत्सव उन्होंने विपक्ष पर भी तीखा निशाना साधा. डॉ. यादव ने कहा, “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे. ममता दीदी ने हमारी बहनों का मजाक उड़ाया, सोनिया जी ने भी उनका उपहास किया. पांच पीढ़ियों ने महिलाओं के साथ अन्याय किया, अब जनता ने उस अन्याय का बदला लिया है. बताइए, अगर बंगाल में ‘जय श्रीराम' का नारा नहीं लगेगा, तो फिर कहां लगेगा? अपने अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की खुशी अब “माउंट एवरेस्ट से भी ऊपर” पहुंच गई है. उन्होंने कहा, “यहां मिठाई से जश्न मनाने की परंपरा है. हम झालमुड़ी भी खाएंगे, कलाकंद भी खाएंगे और मिठाइयां भी खाएंगे। 

अनुकंपा नियुक्ति में नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन संपत्ति का हक नहीं: हाईकोर्ट

इंदौर  अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति संपत्ति का अधिकार नहीं, बल्कि संकटग्रस्त परिवार को तात्कालिक राहत देने की योजना है। कोर्ट ने पिता की नौकरी पर दावा करने वाली बेटी की याचिका खारिज कर दी। रतलाम जिला अस्पताल में पदस्थ ड्राइवर रमेशवान गोस्वामी का 22 जून 2020 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद पुत्र रितेश वान ने दिसंबर 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इसी पद पर रितेश की बहन और रमेशवान की बेटी अनीता वान ने भी दावा प्रस्तुत किया। दोनों के दावे सामने आने पर विभाग ने 23 जनवरी 2024 और 6 फरवरी 2024 को पत्र जारी कर सक्सेशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने को कहा। इसे चुनौती देते हुए भाई-बहन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों पक्षों ने रखे तर्क रितेश की ओर से दलील दी गई कि उनका नाम पिता ने सेवा के दौरान नामिनी के तौर पर शामिल किया था। पूरा परिवार पिता की आय पर निर्भर था और उनकी बहन शादीशुदा होने के कारण अलग रहती है। अनीता हलफनामा देकर उन्हें नियुक्ति की सहमति दे चुकी है। अनीता ने खुद को वैध वारिस बताते हुए सेवा लाभों में बराबरी का अधिकार जताया और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट को फर्जी बताया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का हवाला भी दिया, जिसमें कहा है कि नामिनी संरक्षक होता है, मालिक नहीं। सरकार की ओर से दलील दी थी कि दोनों के दावे होने के कारण सही वारिस तय करने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगा गया। नीति में सबकुछ स्पष्ट हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अनुकंपा नियुक्ति में सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती। यह नियुक्ति राहतकारी नीति है। विभाग द्वारा सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगना मनमाना और कानून के विपरीत है। हाईकोर्ट ने कहा कि 2014 में अनुकंपा नियुक्ति नीति बनी थी। कर्मचारी की मृत्यु 2020 में हुई थी, इसलिए उस समय की नीति ही लागू होगी। 2023 में नीति में हुआ बदलाव इस पर लागू नहीं होगा। 2014 की नीति में अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्राथमिकता क्रम तय है। इसमें पति/पत्नी, फिर पुत्र या अविवाहित पुत्री, उसके बाद विधवा-तलाकशुदा पुत्री और अंत में कोर्ट ने निर्देश दिया कि नियुक्ति से पहले रितेश को हलफनामा देना होगा कि वे अपनी मां और अन्य आश्रितों का भरण-पोषण करेंगे। यदि वे ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उनकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की कचरा खंती में लगी आग पर कलेक्टरों को दिए सख्त आदेश, जुर्माना लगाया जा सकता है

भोपाल  आदमपुर छावनी डंप साइट पर आग लगने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कचरा मैनेजमेंट के लिए कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई के पावर दे दिए हैं. अब खुले में कचरा जलाने या गंदगी फैलाने पर ऑन द स्पॉट जुर्माना लगाया जाएगा. कोर्ट ने देश के सभी राज्यों से कचरा प्रबंधन के लिए रोडमैप मांगा है, जो भोपाल की आदमपुर डंप साइट पर बार-बार लगने वाली आग के संदर्भ में हुआ है. आदमपुर कचरा खंती में पिछले सप्ताह भी आग लग गई थी।  सुप्रीम कोर्ट ने कलेक्टरों को दिए पावर सुप्रीम कोर्ट में भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लग रही आग की सुनवाई ने देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि कचरा प्रबंधन के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और मोबाइल कोर्ट चलाने का प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि मौके पर ही कार्रवाई और जुर्माना हो सके. कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि 22 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक कलेक्टरों को पावर देने का रोडमैप, कचरा छंटाई, प्रोसेसिंग की योजना और पेनाल्टी और मोबाइल कोर्ट की व्यवस्था पर ठोस रिपोर्ट पेश करें।  दरअसल, भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी. इस पर 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया. जुर्माने के खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 16 मई 2025 से सुनवाई चल रही है. इस केस में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।  सुनवाई में देशभर के चीफ सेक्रेटरी को बुलाया डॉ. सुभाष सी. पांडे ने बताया कि "सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये केस भोपाल या इंदौर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की समस्या है. इस सुनवाई में देश के विभिन्न मुख्य सचिवों को बुलाया गया था. कोर्ट ने साफ कहा है कि नियमों का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है. ऐसे में स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह से लागू नहीं हो सकेगा. कुछ सीएस ने अपनी समस्याएं भी बताईं. कर्नाटक, एमपी, बिहार समेत अन्य मुख्य सचिवों से बात भी की. उन्होंने कहा कि नया प्लान बना रहे हैं।  सभी चीफ सेक्रेटरी ने भरी हामी डॉ. पांडे ने बताया, कोर्ट ने कहा कि 1 साल के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन 1986 की धारा 5 का अधिकार कलेक्टर को दे रहे हैं. यानी, सभी अधिकारों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और निगम से लेकर कलेक्टरों को पावर देंगे. सभी चीफ सेक्रेटरी ने भी हामी भरी है. डॉ. पांडे ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 लागू हो जाएंगे. नए नियम देश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या की पहचान करने और उसे हल करने के तरीके में पूरी तरह से शामिल हैं।  देश में हर दिन 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट इस नियम के मकसद को पूरा करने के लिए ऐसे निर्देश जारी करना सही समझते हैं, जो न सिर्फ भोपाल नगर निगम पर बल्कि पूरे देश पर लागू हों. इसका कारण यह है कि लोकल बॉडीज द्वारा SWM रूल्स, 2016 के हिसाब से पालन की स्थिति कुछ हद तक या तो पालन कर रही हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा था कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना रिपोर्ट 2021-2022 बताती है कि देश में घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और सहायक कामों से हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट पैदा होता है।  भोपाल और इंदौर जैसे कई शहरों में कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अभी भी एक बड़ी रुकावट बनी हुई है. जो कचरा बिना प्रोसेस किया जाता है, वह अक्सर बिना साइंटिफिक लैंडफिल या पुराने डंपसाइट में चला जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आज की पीढ़ी ज्यादा कानूनी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती. पुराने कचरे के जमा होने, ग्राउंडवाटर और हवा के कंटैमिनेशन के लिए 1 अप्रैल से लागू मौजूदा आदेशों का तुरंत पालन करने की जरूरत है।  जिम्मेदार प्रतिनिधि, समय की जरूरतों के हिसाब से जवाब देने वाले प्रतिनिधि भी होते हैं. नियम आसान हैं और इन्हें लोकल बॉडीज के एडमिनिस्ट्रेशन के साथ पार्षद, महापौर, उनके चेयरपर्सन और वार्ड सदस्यों को थोड़ी भागीदारी से सीखने और लागू करने की जरूरत है. पिछली सुनवाई के आखिरी में भोपाल निगम से जुड़े केस को लेकर कहा था कि आदमपुर छावनी डंप साइट के मामले में पुराने कचरे के लिए कुछ और पेपरवर्क पूरा करने की जरूरत है. टेंडर को फाइनल करने में कुछ और समय लगेगा. इसलिए वह इस मामले में टेंडर को फाइनल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगती हैं. उन्हें यह समय दिया जाता है। 

उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने लॉन्च की मप्र वित्त सेवा अधिकारी संघ की वेबसाइट, डिजिटल प्लेटफॉर्म से आएगी सुधार

डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता -उपमुख्यमंत्री देवड़ा म.प्र. वित्त सेवा अधिकारी संघ की वेबसाइट लॉन्च भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को मंत्रालय में म.प्र. वित्त सेवा अधिकारी संघ की वेबसाइट लांच की। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने वेबसाइट को राज्य के वित्त सेवा अधिकारियों एवं अन्य विभागों के अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने इस पहल को नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वित्त सेवा अधिकारी संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह चौहान ने जानकारी दी कि देश में पहली बार किसी अधिकारी/कर्मचारी संघ द्वारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। इस व्यवस्था मेंप्रदेश में कहीं भी पदस्थ वित्त सेवा अधिकारी अपने संघ के चुनाव के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, नाम वापस ले सकेंगे तथा ऑनलाइन मतपत्र के माध्यम से मतदान भी कर सकेंगे। इस प्रकार संघ के पदाधिकारियों का चुनाव पूर्णतः ऑनलाइन संपन्न होगा। उन्होंने बताया किhttps://mpfinanceservicehttps://mpfinanceserviceassociation.com/association.com/ वेबसाइट पर एक क्लिक में महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें राज्य के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए उपयोगी ‘वित्त व्यवस्था’ पुस्तक, कार्यरत एवं सेवानिवृत्त वित्त सेवा अधिकारियों की जानकारी, अन्य राज्यों के वित्त सेवा संघों का विवरण, संघ द्वारा शासन को प्रस्तुत मांगें तथा शासन द्वारा जारी वित्त सेवा संबंधी निर्देश शामिल हैं। अध्यक्ष चौहान ने बताया कि आगामी कार्यकारिणी के चुनाव जून 2026 में इसी ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे।  

भोजशाला :98 दिन की खुदाई और अध्ययन के बाद ASI ने खोले इतिहास के पन्ने: तांबे के सिक्के और शिलालेख मिले

धार  मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहे विवाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है। इंदौर हाईकोर्ट की बेंच के सामने ASI ने साफ शब्दों में कहा है कि वर्तमान ढांचा परमार काल के हिंदू मंदिरों के अवशेषों, खंभों और मूर्तियों के टुकड़ों से बनाया गया है। तीन हिस्सों में बंटा है इतिहास ASI की टीम ने खुदाई और सर्वे के दौरान पाया कि यह जगह तीन अलग-अलग दौर से गुजरी है। सबसे पुराना हिस्सा 10वीं-11वीं शताब्दी का है, जहां मिट्टी पर ईंटों का ढांचा खड़ा किया गया था। दूसरे दौर में विशाल पत्थरों का इस्तेमाल कर इसे भव्य रूप दिया गया और यहां 'शारदा सदन' जैसे महान ग्रंथों के शिलालेख लगाए गए। एएसआई ने बताया कि पहले केवल तीन अधिकारियों द्वारा सीमित स्तर पर सर्वे किया गया था, जबकि इस बार सात विशेषज्ञ अधिकारियों, पुरातत्वविदों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में प्रतिदिन सुबह से शाम तक काम किया। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि हर गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला परिसर का निर्माण 14वीं शताब्दी से भी पहले का है। वहीं, परिसर के पश्चिमी हिस्से में बनी मेहराब बाद में अलग से निर्मित प्रतीत होती है। एएसआई ने यह भी बताया कि वर्ष 1902 की रिपोर्ट में भोजशाला को मंदिर के रूप में वर्णित किया गया था, जबकि 2024 में हाई कोर्ट के निर्देश पर दोबारा सर्वे कराया गया। एएसआई की 10 वॉल्यूम में तैयार रिपोर्ट कुल 2189 पृष्ठों की है। इसमें सर्वे के दौरान मिले कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक परिसर और आसपास की खुदाई में तांबे के सिक्के, शेर मुख, कीर्ति मुख, “ॐ नमः शिवाय” से जुड़े चिह्न और शिलालेख मिले हैं। साथ ही परिसर में मौजूद 106 स्तंभों पर देवी-देवताओं की मुखाकृतियां और प्राकृत व संस्कृत भाषा में कथाओं का वर्णन उकेरा गया है। नक्काशी की शैली के आधार पर इसके ऐतिहासिक कालखंड का भी उल्लेख किया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच कर रही है। अगली सुनवाई 6 मई को होगी, जिसमें सलेक चंद जैन की ओर से एडवोकेट दिनेश राजभर और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह अपनी दलीलें पेश करेंगे।  

मध्य प्रदेश में तेज आंधी-बारिश का खतरा, 28 जिलों में अलर्ट; ग्वालियर-जबलपुर प्रभावित

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस समय आंधी और बारिश के एक साथ दो सिस्टम एक्टिव हैं। यही कारण है कि, मई में भीषण गर्मी के बजाए कई जिलों में रुक-रुककर आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। जबकि, कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि होने की भी खबर है। वहीं, मौसम विभाग ने बुधवार को लेकर भी अपडेट जारी किया है। बताया जा रहा है कि, सूबे के अधिकतर इलाकों में दिनभर जहां गर्मी का अहसास होगा तो वहीं दूसरी तरफ शाम होते ही आंधी और बारिश का दौर शुरु होने की संभावना है। मौसम विभाग ने सूबे के 28 जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस समय मौसम के दो सिस्टम एक्टिव हैं, जिसका प्रभाव सूबे के 28 जिलों में देखने को मिलेगा। इसी के चलते संबंधित क्षेत्रों में आंधी और बारिश होने की संभावना जताई गई है। जबकि, कई इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी आशंका जताई जा रही है। कई जिलों में मौसम बदलेगा।भोपाल समेत कई शहरों में दिन में गर्मी, शाम को बारिश के आसार हैं। आमतौर पर मई के महीने को हीटवेव का महीना कहा जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने अचानक करवट ली है। हिमालयी पश्चिमी विक्षोभ और मध्य भारत पर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के संयुक्त असर से प्रदेश में असामान्य बदलाव दर्ज किया गया है। इन जिलों में दिन में तेज गर्मी पड़ेगी मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर में दिन में गर्मी का असर बना रहेगा। लगातार पांचवें दिन भी बारिश प्रदेश में मंगलवार को लगातार पांचवें दिन भी आंधी-बारिश का दौर बना रहा। ग्वालियर, छतरपुर, धार, बड़वानी, डिंडौरी, बालाघाट समेत कई जिलों में सुबह से ही आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। रात में भी भोपाल समेत कई जिलों में तेज आंधी चली। मंगलवार को दिन के तापमान में भी गिरावट हुई है। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 37.2 डिग्री, इंदौर में 37.6 डिग्री, ग्वालियर में 34.7 डिग्री, उज्जैन में 38 डिग्री और जबलपुर में पारा 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, खरगोन सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री, खंडवा में 41.5 डिग्री और नरसिंहपुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नौगांव में सबसे कम 33.5 डिग्री रहा। सीधी में 34 डिग्री, टीकमगढ़ में 34.5 डिग्री, रीवा में 34.6 डिग्री, सतना-दतिया में 34.8 डिग्री, मलाजखंड में 35 डिग्री, उमरिया में 35.4 डिग्री और गुना में पारा 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 10 मई से एक्टिव हो रहा नया सिस्टम प्रदेश में लगातार पांचवें दिन भी आंधी और बारिश का दौर जारी रहेगा। 10 मई से नया सिस्टम एक्टिव होगा, गर्मी-बारिश का ट्रेंड बरकरार रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार 6 मई तक यह सिस्टम सक्रिय रहेगा और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इसका असर देखने को मिलेगा। मई आमतौर पर हीटवेव का महीना माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम ने अचानक करवट ली है। हिमालयी पश्चिमी विक्षोभ और मध्य भारत पर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के संयुक्त असर से प्रदेश में असामान्य बदलाव दर्ज किया गया है। 28 जिले येलो से ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने 39 जिलों में अलर्ट जारी किया है। 28 जिले येलो से ऑरेंज अलर्ट प्रभावी हैं। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री से गिरकर 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। जबलपुर में तापमान 38 डिग्री दर्ज किया गया। हालांकि कुछ जिले जैसे खरगोन में 43 डिग्री और रायसेन में 44 डिग्री तापमान बना हुआ है। लेकिन शाम के समय मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।