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नगर निगम का नया दांव: बजट में बढ़ा मनोरंजन कर, मौज-मस्ती पर अब चुकाना होगा टैक्स

भोपाल  राजधानी में अब फिल्म देखना, म्यूजिक कॉन्सर्ट का आनंद लेना या गेम जोन में वक्त बिताना महंगा होने जा रहा है। नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के बजट में मनोरंजन कर की नई और सख्त दरों का प्रावधान किया है। मध्य प्रदेश नगर पालिका (मनोरंजन एवं आमोद) कर नियम 2018 के तहत जारी इस नए फरमान से अब शहर में होने वाले हर व्यावसायिक मनोरंजन कार्यक्रम पर निगम की नजर होगी। नगर निगम के इस कदम का सीधा असर आम आदमी की जेब और इवेंट आयोजकों के बजट पर पड़ना तय है। अभी तक आयोजक के प्रॉफिट का दस प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन अब प्रति टिकट के हिसाब से टैक्स की गणना होगी। सिनेमा हॉल: महंगी टिकट पर ज्यादा टैक्स अगर आप मल्टीप्लेक्स में 400 रुपए की टिकट खरीदते हैं, तो उस पर अब सीधे तौर पर मनोरंजन कर का बोझ बढ़ेगा। निगम ने सिनेमाघरों के लिए टैक्स की दरों को टिकट की कीमतों से जोड़ा है। सिनेमा ग्राफ एक्ट 1952 के तहत लाइसेंस रखने वाले सिनेमाघरों के लिए प्रस्तावित दरें कुछ इस प्रकार हैं- -99 रुपए तक की टिकट: 5 प्रतिशत कर। -100 से 199 रुपए तक की टिकट: 10 प्रतिशत कर। -200 रुपए से अधिक की टिकट: 15 प्रतिशत कर। म्यूजिक कॉन्सर्ट और ड्रामा: क्षमता के हिसाब से वसूली होटल, रिसॉर्ट या रेस्टोरेंट में होने वाले म्यूजिक बैंड कॉन्सर्ट, नृत्य प्रदर्शन या नाटक अब क्षमता के आधार पर टैक्स देंगे- – 200 व्यक्तियों तक की क्षमता (टिकट 300 रुपए तक): 03 हजार रुपए। – 201 से 500 व्यक्तियों तक (टिकट 301-500 रुपए तक): 10 हजार रुपए। – 501 से 1000 व्यक्तियों तक (टिकट 501-1000 रुपए तक): 37.5 हजार रुपए। – हजार से अधिक क्षमता और एक हजार से महंगी टिकट: सीधे 50 हजार रुपए का कर देय होगा। पब, डिस्को और खेलों पर डेली चार्ज निगम ने डिस्को, पब, क्लब और पूल क्लब के लिए प्रति दिन 10 हजार रुपए का कर प्रस्तावित किया है। यही नहीं, सर्कस, मेलों और सबसे लोकप्रिय गरबा आयोजनों (जिनमें टिकट या पास शुल्क है) पर भी 10 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से टैक्स वसूल किया जाएगा। क्रिकेट, हॉकी जैसे खेलों के व्यावसायिक आयोजनों पर भी यही दर लागू होगी। राहत: नि:शुल्क कार्यक्रमों पर छूट यह कर केवल उन्हीं कार्यक्रमों पर प्रभावी होगा, जहां प्रवेश के लिए टिकट शुल्क, देय शुल्क या अग्रिम पास की सुविधा ली जा रही है। ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रम, जो आम जनता के लिए पूरी तरह नि:शुल्क हैं, उन्हें मनोरंजन कर के दायरे से बाहर रखा गया है। 

एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति-पत्नी के अप्राकृतिक संबंध अपराध नहीं, ग्वालियर बेंच ने दी राहत

ग्वालियर   मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंध के मामले में पति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि पति-पत्नी के बीच अननैचुरल संबंध अपराध नहीं है। इसके साथ ही पति पर दर्ज एफआईआर को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। वहीं, अन्य मामले उसके खिलाफ चलते रहेंगे। पति पर पत्नी ने दहेज, मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया था। महिला ने पति पर दर्ज करवाया था केस दरअसल, भिंड की महिला ने साल 2023 में अपने पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। उसमें महिला ने कहा था कि ससुराल पक्ष के लोग 10 लाख रुपए और बुलेट की मांग कर रहे हैं। शादी के समय परिवार ने भरपुर दहेज दिया था। इसके बावजूद यह मांग की जा रही है। साथ ही शिकायत में कहा गया था कि मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है। पत्नी ने अपने पति अननैचुरल यौन संबंध का भी आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध नहीं इस मामले का ट्रायल हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में चल रहा था। अननैचुरल संबंध के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। साथ ही कहा है कि पति-पत्नी के बीच बने संबंधों को धारा 377 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता है। इस आधार पर दर्ज की गई एफआईआर को आंशिक रूप से निरस्त किया जाता है। वहीं, मारपीट, दहेज और प्रताड़ना के मामले में सुनवाई जारी रहेगी। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 377, 498 ए और 354 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस अन्य मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। कोर्ट में अभी ट्रायल चलता रहेगा। ये था पूरा मामला     पत्नी ने अपने पति पर दर्ज करवाया था केस     दहेज, मारपीट और प्रताड़ना के साथ अप्राकृतिक संबंध के मामले     2023 में ये दर्ज हुआ था केस     हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में चल रही सुनवाई पति भी पहुंचा था हाईकोर्ट गौरतलब है कि इस मामले में सुनवाई के दौरान पति भी कोर्ट में उपस्थित था। इस दौरान पति के वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल के खिलाफ मामले को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है। वहीं, महिला के पूर्व और अभी के बयान मेल नहीं खाते हैं। धारा 377 के तहत केस नहीं चलाया जा सकता है। कोर्ट ने पति, ससुर और सास के खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने से इनकार कर दिया है।  

टीटी नगर में सीमांकन पूरा, 347 लोगों को दिया अंतिम नोटिस, 100 से ज्यादा झुग्गियां हटाने का आदेश

भोपाल   बड़ा तालाब कैचमेंट एरिया साफ करने के लिए बनाई गई टास्क फोर्स एक सप्ताह बाद दोबारा अपनी कार्रवाई शुरू करने जा रही है। नगर निगम, बिल्डिंग परमिशन शाखा के माध्यम से टास्क फोर्स ने 347 ऐसे निर्माणों को अंतिम नोटिस जारी कर दिए हैं, जो कैचमेंट के अंदर बने पाए गए हैं। इसके अलावा फुल टैंक लेवल के अंदर मौजूद सबसे ज्यादा निर्माण को अभी तक हटाया गया है। इनमें से 55 निर्माण पूरी तरह से तोड़े गए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक, नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस की संयुक्त मुहिम अगले सप्ताह से शुरू की जाएगी, जिसमें बाकी बचे निर्माण को हटाया जाना है। टीटी नगर से होगी शुरुआत प्रशासन की पहली कार्रवाई भोपाल के टीटी नगर सीमा से शुरू की गई थी। इस क्षेत्र में भी सीमांकन का काम पूरा कर लिया गया है। एसडीएम अर्चना शर्मा की टीम ने यहां 127 अतिक्रमण चिह्नित कर नोटिस जारी किए हैं। इनमें 59 निजी और 78 सरकारी शामिल हैं। परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा की सास का रो-हाउस भी अतिक्रमण की सूची में शामिल है। तहसीलदार कुणाल राउत के मुताबिक, एक हफ्ते बाद बुलडोजर चलाया जाएगा। सभी चिह्नित अतिक्रमण हटाए जाएंगे। प्रशासन की टीम ने सेवनिया गौंड, प्रेमपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी सीमांकन का काम पूरा कर लिया है। 100 से ज्यादा झुग्गियां भी हटेंगी जांच के दौरान वन विहार के पास जॉक रेस्टोरेंट, लहर रेस्टोरेंट, वड्स एंड वेब, होटल रंजीत लेक व्यू, फूड जोन की 26 दुकानें, गेम जोन, कचरा कैफे, सुलभ कॉ्ह्रश्वलेक्स और लहर जिम सहित अन्य निर्माण शामिल हैं। प्रशासन का कहना है, 100 से अधिक झुग्गी भी हटेंगी। टास्क फोर्स में एसई प्रमोद मालवीय शामिल किए गए हैं।

भोपाल में समर शेड्यूल अपडेट: गोवा की फ्लाइट बंद, नवीं मुंबई के लिए शुरू होंगी उड़ानें

 भोपाल एयरलाइंस कंपनियों का नया समर शेड्यूल 29 मार्च से लागू हो जाएगा। इस सीजन में भोपाल को नए शहरों की कनेक्टिविटी के नाम पर केवल नवीं मुंबई तक एक उड़ान मिलने जा रही है। पैसेंजर फ्रेंडली गोवा उड़ान को बंद किया जा रहा है। माना जा रहा था कि इस बार समर सीजन में एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी लेकिन विंटर के मुकाबले उड़ानों की संख्या कम हो जाएगी। हालांकि समर सीजन के मुकाबले दो उड़ानें बढ़ रही हैं। अब भोपाल से कुल 36 (18 जोड़ी) उड़ानें हो जाएंगी। नई उड़ान के नाम पर हाल ही में शुरू हुए नवीं मुंबई की उड़ान भोपाल को मिलने जा रही है। इस रूट पर इंडिगो एक उड़ान का संचालन करेगा। अहमदाबाद के लिए अब तक दो उड़ानें थीं, लेकिन अब एक हो जाएगी। हैदराबाद तक एक थी अब दो उड़ानें हो जाएंगी। गोवा रूट पर संचालित इंडिगो की उड़ान 29 मार्च से बंद हो जाएगी। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने स्लॉट लेने के बावजूद इस सीजन में एक भी उड़ान की बुकिंग शुरू नहीं की है। दिल्ली तब सर्वाधिक सात उड़ानें नए शेड्यूल में दिल्ली तक सर्वाधिक सात उड़ानें हो जाएंगी, इनमें से एक साप्ताहिक उड़ान है। मुंबई तक चार, बेंगलुरू तक दो, हैदराबाद तक दो, रायपुर, पुणे, अहमदाबाद एवं नवीं मुंबई तक एक उड़ान होगी। सूरत, शिर्डी, देहरादून, कोलकात्ता, अमृतसर एवं लखनऊ जैसे शहरों तक उड़ानें इस बार भी शुरू नहीं होंगी। एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी का कहना है कि समर शेड्यूल 24 अक्टूबर तक लागू होगा। इस अवधि के मध्यम में कुछ नए रूट जुड़ेंगे। इस प्रकार रहेगा 29 मार्च से लागू समर शेड्यूल शहर आगमन समय प्रस्थान समय ऑपरेटर पुणे सुबह 02:30 बजे सुबह 03:10 बजे इंडिगो दिल्ली सुबह 06:30 बजे सुबह 07:00 बजे इंडिगो दिल्ली सुबह 07:55 बजे सुबह 08:25 बजे एयर इंडिया बैंगलोर सुबह 08:10 बजे सुबह 08:40 बजे इंडिगो मुंबई सुबह 09:00 बजे सुबह 09:30 बजे इंडिगो हैदराबाद सुबह 09:15 बजे सुबह 09:40 बजे इंडिगो दिल्ली दोपहर 12:05 बजे दोपहर 12:35 एयर इंडिया हैदराबाद दोपहर 12:30 बजे दोपहर 12:50 बजे इंडिगो मुंबई दोपहर 01:00 बजे दोपहर 01:40 बजे एयर इंडिया दिल्ली शाम 04:20 बजे शाम 04:50 बजे इंडिगो रायपुर शाम 04:25 बजे शाम 05:00 बजे इंडिगो मुंबई शाम 05:25 बजे शाम 06:00 बजे इंडिगो दिल्ली शाम 05:40 बजे शाम 06:15 बजे इंडिगो (बुध) अहमदाबाद शाम 06:35 बजे शाम 06:50 बजे इंडिगो दिल्ली शाम 07:00 बजे शाम 07:50 बजे एयर इंडिया बैंगलोर शाम 07:00 बजे रात्रि 08:00 बजे इंडिगो नवी मुंबई रात्रि 08:10 बजे रात्रि 08:50 बजे इंडिगो दिल्ली रात्रि 08:25 बजे रात्रि 09:00 बजे इंडिगो

2606 लोकेशन पर प्रॉपर्टी गाइडलाइन दर में वृद्धि, प्रॉपर्टी के दाम में होगी भारी बढ़ोतरी

भोपाल  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले की नई कलेक्टर गाइडलाइन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को केंद्रीय मूल्यांकन समिति की भोपाल में हुई बैठक में इंदौर जिले की 2606 लोकेशन पर गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है। अब इसे शासन की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। 90 लोकेशन पर गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति इससे पहले जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में 267 दावे-आपत्तियों का निराकरण किया गया। इनमें से 11 मामले नियमों में बदलाव से जुड़े होने के कारण शासन स्तर पर भेजे गए हैं। आपत्तियों के परीक्षण के बाद 90 लोकेशन पर गाइडलाइन(Property Guideline) दर बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इनमें मुख्य रूप से कृषि भूमि की कीमतों में वृद्धि और विकसित हो रही कॉलोनियों के अनुरूप दर तय करने की मांग शामिल रही। 270 नई कॉलोनियां गाइडलाइन में शामिल इस बार गाइडलाइन में नई कॉलोनियों को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है। पहले 198 कॉलोनियां जोड़ी गई थीं, जबकि दावे-आपत्तियों के बाद 72 और कॉलोनियों को शामिल किया गया। इस तरह 270 नई कॉलोनियां गाइडलाइन में हैं, जिससे इन क्षेत्रों में रजिस्ट्री प्रक्रिया और पारदर्शी होगी। 46 फीसदी क्षेत्रों में गाइडलाइन बढ़ेगी मालूम हो, जिले में वर्तमान में 4840 लोकेशन पर संपत्तियों का पंजीयन होता है। इनमें से 2606 लोकेशन पर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है, यानी करीब 46 फीसदी क्षेत्रों में गाइडलाइन(Property Guideline) बढ़ेगी। प्रस्ताव के अनुसार, दरों में 10 से लेकर 300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इनमें सबसे ज्यादा 1553 लोकेशन पर 21 से 51 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित है। करीब 115 लोकेशन पर गाइडलाइन दरों में 100 प्रतिशत से ज्यादा तो कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि 300 प्रतिशत तक पहुंच सकती है । क्या है कलेक्टर गाइडलाइन ? कलेक्टर गाइडलाइन वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर सरकार जमीन या मकान की कीमत तय करती है। इससे कम कीमत पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती। हर साल क्यों बढ़ती हैं दरें? सरकार बाजार कीमतों के हिसाब से हर साल रिवीजन करती है, ताकि स्टाम्प ड्यूटी का सही मूल्य मिल सके और अंडरवैल्यू रजिस्ट्री रोकी जा सके। इस बार बढ़ोतरी ज्यादा क्यों?     कई इलाकों में लंबे समय से रेट नहीं बढ़े थे     रियल एस्टेट में तेजी और डेवलपमेंट (नई सड़कें, प्रोजेक्ट)     शहरी इलाकों में डिमांड बढ़ना     आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?     जमीन/मकान खरीदना महंगा होगा     स्टाम्प और रजिस्ट्री शुल्क बढ़ जाएगा     पुराने एग्रीमेंट वाले खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।  

MP में बिजली की दरों में बढ़ोतरी: 1 अप्रैल से 150 यूनिट के बाद होगा बिल महंगा

 भोपाल मध्य प्रदेश की जनता को महंगाई का एक और झटका लगने जा रहा है. रसोई गैस और अन्य चीजों की बढ़ती कीमतों के बीच अब बिजली दरों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है. मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ जारी किया है, जिसके तहत बिजली दरों में करीब 4.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. इसका असर प्रदेश के करीब डेढ़ करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।  हालांकि आयोग ने निम्न दाब (एलवी-1) और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए उनकी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके अलावा, 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह रियायत मिलती रहेगी. लेकिन 150 यूनिट से ज्यादा खपत करने वालों पर इस बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।  नई व्यवस्था के तहत 151 यूनिट का स्लैब पार करते ही प्रति यूनिट दर के साथ-साथ फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाएगा. फिक्स्ड चार्ज को 28 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए प्रति 0.1 किलोवॉट कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं का कुल बिल बढ़ना तय है।  अगर अलग-अलग खपत के हिसाब से देखें तो 150 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिजली बिल करीब 1017 रुपए तक पहुंच सकता है, जो लगभग 4.94 प्रतिशत की वृद्धि है. वहीं 200 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिल करीब 1696 रुपए तक हो सकता है, यानी करीब 5.30 प्रतिशत बढ़ोतरी. इसी तरह 250 यूनिट पर बिल लगभग 2183 रुपए (5.10 प्रतिशत वृद्धि), 300 यूनिट पर 2668 रुपए (4.98 प्रतिशत वृद्धि) और 400 यूनिट से अधिक खपत पर बिल करीब 3689 रुपए (4.82 प्रतिशत ज्यादा) तक पहुंच सकता है।  जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर गर्मियों के मौसम में होगा, जब एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है. ऐसे में ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भारी बिल का सामना करना पड़ सकता है।  इसके अलावा, नई दरों में टाइम ऑफ डे (TOD) व्यवस्था को भी प्रभावी किया गया है. इसके तहत शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच बिजली की खपत पर ज्यादा फीस देनी होगी. यानी पीक ऑवर्स में बिजली का इस्तेमाल महंगा पड़ेगा, जबकि दिन के समय बिजली इस्तेमाल करने पर कम खर्च आएगा. अनुमान है कि पीक टाइम में बिल 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।  बिजली कंपनियों ने आयोग के सामने 10.19 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था. कंपनियों का तर्क था कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें करीब 6,044 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए दरें बढ़ाना जरूरी है. हालांकि आयोग ने इस प्रस्ताव को कम करते हुए 4.80 प्रतिशत तक ही वृद्धि को मंजूरी दी. कुल मिलाकर, नई दरों के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को अपने खर्च में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना होगा। 

एमपी में दो बच्चों का नियम खत्म, अब तीन या अधिक संतान वालों को भी मिलेगी सरकारी नौकरी

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़ा करीब 24 साल पुराना दो बच्चों वाला नियम अब खत्म होने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे मुख्यमंत्री से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोगों को सरकारी नौकरी से न तो बाहर किया जाएगा और न ही नौकरी पाने से रोका जाएगा। अभी तक इस नियम के कारण कई कर्मचारी और उम्मीदवार प्रभावित हो रहे थे।  क्या था पुराना नियम? साल 2001 में तत्कालीन सरकार ने सिविल सेवा नियमों में बदलाव कर यह प्रावधान लागू किया था। इसके तहत दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी में नियुक्ति या नौकरी जारी रखने में दिक्कत आती थी। यानी उनको अपात्र माना जाता था।  इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा शिक्षा विभाग को मिलेगा। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे हैं जो इस नियम से प्रभावित थे। नया नियम लागू होने के बाद उनकी नौकरी सुरक्षित हो जाएगी। इसके अलावा स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी हजारों मामले लंबे समय से लंबित हैं, जिन्हें अब सुलझाया जा सकेगा। पुराने मामलों पर भी होगा फैसला सरकार उन कर्मचारियों को भी राहत देने पर विचार कर रही है, जिन्हें तीसरी संतान के कारण नौकरी से हटाया गया था या जिनके मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कैबिनेट इन सभी मामलों पर अंतिम निर्णय ले सकती है। बता दें पिछले कुछ वर्षों में इस नियम को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया और बदलते सामाजिक हालात के हिसाब से इसे पुराना माना गया। इसी बीच जनसंख्या संतुलन को लेकर भी चर्चा तेज हुई, जिसके बाद सरकार ने इस पर पुनर्विचार शुरू किया।  दूसरे राज्यों में पहले ही बदलाव मध्य प्रदेश से पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ इस नियम को खत्म कर चुके हैं। वहां तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोग बिना किसी रोक-टोक के सरकारी सेवा में बने रह सकते हैं। सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट में रख सकती है, जिसके बाद इस नियम को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।

PM Kisan की 23वीं किस्त से पहले किसानों के लिए जरूरी कदम, जानें क्या करें

भोपाल  देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खबर है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जल्द जारी होने वाली है, लेकिन उससे पहले कुछ जरूरी काम पूरे करना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर आपने ये काम समय पर नहीं किए, तो आपके खाते में आने वाले ₹2000 अटक सकते हैं। क्या है योजना? केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों (₹2000-₹2000) में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। 23वीं किस्त से पहले ये काम जरूरी अगर आप अगली किस्त चाहते हैं, तो तुरंत ये काम निपटा लें:  e-KYC पूरा करें – बिना eKYC के भुगतान रोका जा सकता है, आधार-बैंक लिंकिंग – आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए ,भूमि सत्यापन (Land Verification) – जमीन के रिकॉर्ड अपडेट रहें ABPS एक्टिव रखें – आधार आधारित पेमेंट सिस्टम चालू होना जरूरी  कब आएगी 23वीं किस्त? सरकारी पैटर्न के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच 23वीं किस्त जारी होने की संभावना है। अब तक कितना मिला फायदा? 2019 से अब तक 22 किस्तें  जारी, किसानों को ₹4.27 लाख करोड़ से ज्यादा ट्रांसफर ,9 करोड़ किसान हर साल लाभ ले रहे.. किसानों के लिए क्यों जरूरी है ये योजना? यह योजना सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है, बल्कि: बीज और खाद खरीदने में मदद , कर्ज पर निर्भरता कम, खेती में निवेश बढ़ा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत.. नई सुविधा: किसान ई-मित्र सरकार ने किसानों की मदद के लिए AI आधारित ‘किसान ई-मित्र’ चैटबॉट भी शुरू किया है, जो 24×7 सवालों के जवाब देता है। कैसे चेक करें अपना स्टेटस? PM Kisan पोर्टल के “Farmers Corner” में जाएं या नजदीकी CSC सेंटर पर जानकारी लें.. निष्कर्ष अगर आप चाहते हैं कि अगली किस्त बिना रुकावट सीधे आपके खाते में आए, तो अभी से जरूरी अपडेट पूरे कर लें। एक छोटी सी गलती आपके ₹2000 रोक सकती है।

अमृत सरोवर से रिझोरा में लौटी हरियाली और खुशहाली

भोपाल ग्वालियर जिले की ग्राम पंचायत दौलतपुर के ग्राम रिझोरा ने जल संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। कभी पानी की कमी से जूझता ग्वालियर जिले का यह गांव आज “अमृत सरोवर” के कारण समृद्धि और खुशहाली की नई कहानी लिख रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बनकर तैयार हुए इस सरोवर ने न केवल गांव की तस्वीर बदली है, बल्कि भू-जल स्तर में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों के जीवन में नई ऊर्जा भर दी है। ग्राम रिझोरा में पहले जल संचय के लिए कोई प्राकृतिक स्रोत नहीं था, जिससे भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा था। खेती, पेयजल और पशुओं के लिए पानी की समस्या गंभीर होती जा रही थी। इस चुनौती से निपटने के लिए ग्राम सभा ने सामूहिक निर्णय लेकर तालाब निर्माण का संकल्प लिया। ग्रामीणों की दो वर्षों की मेहनत और सरकार की विभिन्न योजनाओं के संयोजन से लगभग 16.77 लाख रुपये की लागत से यह सरोवर बनकर तैयार हुआ है। पिछले साल की अच्छी बारिश में यह सरोवर लबालब भर गया। सरोवर के भरने के साथ ही गांव का भू-जल स्तर तेजी से बढ़ा। जो कुएं सूखने की कगार पर थे, वे फिर से जल से भर गए और बंद पड़े बोरवेल भी पुनः चालू हो गए। इससे सिंचाई के साधन मजबूत हुए और खेती को नई दिशा मिली। रिझोरा का यह अमृत सरोवर साबित करता है कि सामूहिक प्रयास, सही योजना और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है। यह पहल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। खेती में आया बदलाव, बढ़ी किसानों की आय भू-जल स्तर में सुधार के बाद अब किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती भी करने लगे हैं। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। मांगलिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बना सरोवर अमृत सरोवर अब केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक-मांगलिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां पक्के घाट, सीढ़ियां और सुरक्षा के लिए रेलिंग का निर्माण किया गया है, जिससे लोग आसानी से पूजा-पाठ और आयोजन कर पा रहे हैं। सरोवर के किनारे लगने वाला मोरछट का मेला अब आसपास के गांवों के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण शामिल होते हैं।  

जौरा सब स्टेशन में उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित, ऊर्जा मंत्री तोमर का बयान

जौरा सब स्टेशन में उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित : ऊर्जा मंत्री तोमर जौरा सब स्टेशन में उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित, ऊर्जा मंत्री तोमर का बयान जौरा सब स्टेशन में अब उच्च क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर, ऊर्जा मंत्री तोमर ने की पुष्टि भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा मुरैना जिले की विद्युत व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बनाने के लिए 132 केवी जौरा सब स्टेशन की क्षमता में वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि सब स्टेशन में पूर्व स्थापित 20 एमवीए क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर के स्थान पर 50 एमवीए क्षमता का नया पॉवर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया है। इससे मुरैना जिले की पारेषण प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा जौरा क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उचित वोल्टेज पर प्राप्त हो सकेगी। मंत्री तोमर ने इस उपलब्धि पर एमपी ट्रांसको के कार्मिकों को बधाई देते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष लाभ मिलेगा और भविष्य में बढ़ती विद्युत मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा। इन क्षेत्रों को होगा लाभ एमपी ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता राजीव तोतला ने जानकारी दी कि जौरा सब स्टेशन में नए पॉवर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से कुम्हेरी, जौरा, सुमावली, सांकरा, सिटी जौरा, चिनौनी, नवोदय तथा बगचिनी सहित आसपास के क्षेत्रों के लगभग 18 हजार विद्युत उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। इनमें औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू श्रेणी के उपभोक्ता शामिल हैं। जिले की ट्रांसफार्मेशन क्षमता में वृद्धि अधीक्षण अभियंता राजीव ने जानकारी दी कि 20 एमवीए के स्थान पर 50 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित होने से जौरा सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 113 एमवीए हो गई है। एमपी ट्रांसको मुरैना जिले में 220 केवी के 2 सब स्टेशन (मुरैना एवं सबलगढ़) तथा 132 केवी के 7 सब स्टेशन (मुरैना, बामोर, अम्बाह, बड़ागांव डिमनी, कैलारस, जौरा एवं पोरसा) के माध्यम से विद्युत पारेषण कर रही है। इस नए ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 1482 एमवीए हो गई है, जिससे विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता एवं स्थिरता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।