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ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती, मंत्री भूरिया ने जताई चिंता

भोपाल विश्व पर्यावरण दिवस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने झाबुआ में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण किया। मंत्री सुश्री भूरिया ने प्रकृति के साथ हो रहे मानवीय हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संपूर्ण विश्व ग्लोबल वार्मिंग, वर्षा की अनियमितता, प्लास्टिक प्रदूषण और जल संकट जैसी विकराल पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है। हमारे पूर्वज हमें एक बेहद समृद्ध प्राकृतिक विरासत सौंपकर गए हैं, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। बेंगलुरु जैसे महानगरों में वर्षों पुराने वृक्ष आज भी वहां के नागरिकों की जागरूकता के कारण सुरक्षित हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शुरू हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आगामी 21 जून तक पूरे झाबुआ जिले में 1 लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि पौधारोपण के साथ पौधों को जीवित रखना और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस पूरे अभियान की पारदर्शिता और मॉनिटरिंग 'मेरी लाइफ' (Meri LiFE) ऐप के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उन्होंने पूर्व के वर्षों में रोपे गए महुआ के पौधों की विशेष देखरेख और मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए।  

पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी, मंत्री टेटवाल ने किया जनभागीदारी का आह्वान

पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है: मंत्री टेटवाल विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्लोबल स्किल्स पार्क में हुआ पौध-रोपण प्रदेश की सभी आईटीआई में 200 पौधों का होगा रोपण भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि मानव जीवन और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक है। वर्षों से हम प्रकृति से जल, वायु, भूमि और अन्य संसाधन प्राप्त करते रहे हैं, लेकिन विकास और सुविधाओं की बढ़ती आवश्यकता के बीच प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भी हुआ है। इसका परिणाम आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जल संकट, तापमान में वृद्धि और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे समय में प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाना आवश्यक हो गया है। पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित पौध-रोपण कार्यक्रम में मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि अब समय केवल प्रकृति से लेने का नहीं, बल्कि उसे लौटाने का है। पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयास किसी एक दिन, सप्ताह या अभियान तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इन्हें हमारे दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार आचरण अपनाए तो बड़े सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए करें सतत प्रयास मंत्री टेटवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं है। प्रदूषण को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण करना, स्वच्छता को बढ़ावा देना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नदियां, तालाब, जलाशय और अन्य जल स्रोत हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। मंत्री टेटवाल ने कहा कि जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए किए जाने वाले प्रयास निरंतर और आजीवन होने चाहिए। वर्तमान पीढ़ी यदि पर्यावरण और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। प्रदेशभर में चलेगा पौधरोपण अभियान मंत्री टेटवाल ने बताया कि विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर निर्माण के उद्देश्य से प्रदेश की प्रत्येक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) में 200-200 पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क परिसर में 1000 पौधे लगाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौध-रोपण भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही लगाए गए पौधों का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री टेटवाल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल औपचारिक गतिविधि न मान कर इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव ही बेहतर भावी जीवन की आधारशिला है। पर्यावरण संरक्षण वर्षभर की जिम्मेदारी संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीश शर्मा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस का उद्देश्य केवल एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है। पर्यावरण संरक्षण वर्ष के सभी 365 दिनों की जिम्मेदारी है। संस्थान द्वारा हरित परिसर निर्माण, पौधरोपण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और व्यवहारगत परिवर्तन ही इस दिशा में स्थायी परिणाम सुनिश्चित कर सकते हैं। कार्यक्रम में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और स्वच्छता के प्रति सामूहिक संकल्प लिया गया। इस अवसर पर संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।  

सड़क और परिवहन नेटवर्क के साथ हरित विकास पर भी फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में सड़क एवं परिवहन नेटवर्क निर्माण के साथ हरित विकास को दिया जा रहा बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सड़क निर्माण में पर्यावरण संरक्षण के लिये 7,871 वृक्षों के स्थान पर 80 हजार पौधों का होगा रोपण अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाये जायेंगे 10 हजार पौधे मुख्यमंत्री के विजन को साकार करेगा अयोध्या बायपास परियोजना का ग्रीन मॉडल मुख्य सचिव जैन ने की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के दिये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को पर्यावर्णीय संवेदनशीलता और दीर्घकालिक सतत विकास की अवधारणा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता आधुनिक सड़क एवं परिवहन नेटवर्क के निर्माण के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अयोध्या बायपास परियोजना इस सोच का उदाहरण है, जहाँ विकास और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगभग 10 हजार पौधे लगाकर इसे एक हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावर्णीय संतुलन को सुदृढ़ करने के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी नया आयाम प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बेहतर सड़क अधोसंरचना का निर्माण करना नहीं है, बल्कि ऐसी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना है जो आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों को भी पूरा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अयोध्या बायपास परियोजना प्रदेश में सतत एवं समावेशी विकास के मॉडल के रूप में स्थापित होगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य शासन द्वारा परियोजना के विभिन्न पहलुओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, उन्नयन एवं विस्तार कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान भोपाल की महत्वपूर्ण अयोध्या बायपास चौड़ीकरण परियोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में अयोध्या बायपास की डिज़ाइन क्षमता लगभग 40 हजार वाहन प्रतिदिन की है, जबकि इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 45 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है। भोपाल के तेजी से हो रहे शहरीकरण और आसपास विकसित हो रहे नए आवासीय क्षेत्रों के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में बायपास का चौड़ीकरण न केवल यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह राजधानी क्षेत्र की भावी आवश्यकताओं को भी पूरा करेगा। विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलित मॉडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन को मूर्त रूप देते हुए अयोध्या बायपास परियोजना के अंतर्गत व्यापक पौधरोपण एवं हरित विकास योजना तैयार की गई है। परियोजना के दौरान 7,871 वृक्षों की कटाई की प्रतिपूर्ति के लिये लगभग 10 गुना अधिक अर्थात 80 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। इनमें से लगभग 10 हजार पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगाए जाएंगे, जिससे यह मार्ग भविष्य में एक आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा। इसके अतिरिक्त झिरनिया एवं झगरिया खुर्द क्षेत्रों में लगभग 70 हजार पौधों के रोपण की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। आगामी मानसून में प्रस्तावित यह व्यापक पौधरोपण अभियान भोपाल क्षेत्र में हरित आवरण के विस्तार और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पौधों के संरक्षण, देखभाल एवं अनुरक्षण की जिम्मेदारी आगामी 15 वर्षों तक एनएचएआई द्वारा वहन की जाएगी। इसके लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक अधोसंरचना निर्माण और पर्यावरणीय दायित्व एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता मुख्य सचिव जैन ने अयोध्या बायपास परियोजना में भोपाल की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने के लिए की जा रही तैयारियों की भी समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन को अवगत कराया गया कि एनएचएआई और भोपाल नगर निगम के बीच निरंतर समन्वय स्थापित कर कार्य योजना तैयार की गई है। इसमें पाइप लाइन शिफ्टिंग सहित सभी तकनीकी कार्य चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। नगर निगम के तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में कार्य संपादित किए जाने से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान नागरिकों को पेयजल आपूर्ति संबंधी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक में बताया गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा एनएचएआई द्वारा प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक गतिविधियों, निवेश, पर्यटन तथा औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन अधोसंरचना के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।  

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित भोपाल  विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसआई) ने 5 जून को भोपाल के गांधी भवन में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मणिपुर, असम, ओड़ीशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और पानी एवं वैश्विक गर्मी जैसे चार सत्रों में इस चर्चा को आयोजित किया गया।   सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में काम से जुड़ी सेहत और सुरक्षा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, लाखों मजदूर उद्योगों, खनन, निर्माण, घरेलू काम और दूसरे अनौपचारिक क्षेत्रों में खतरनाक हालात का सामना करते हुये काम कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने मजदूरों की सेहत की सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों, काम से जुड़ी सुरक्षा के मानकों को बेहतर ढंग से लागू करने और संगठित प्रयास करने की जरूरत पर चर्चा की। सिलिकोसिस से प्रभावित कुछ मजदूरों ने अपनी कहानियां और मदद पाने में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया। ऐसे सम्मेलनों के महत्व को बताते हुए, अमूल्य निधि ने कहा कि हमें अपनी जागरूकता बढ़ानी होगी और पर्यावरण की रक्षा तथा काम से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाव के लिए मिलकर काम करना होगा। व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ जगदीश पटेल ने कहा कि काम से जुड़े स्वास्थ्य खतरों के मामले में हर जगह जोखिम है, और हमें उनकी पहचान करने की जरूरत है। 90 से ज्यादा ऐसे काम हैं जिनसे सिलिकोसिस हो सकता है। 70 से ज्यादा देशों ने एस्बेस्टस पर रोक लगा दी है, भारत ने सिर्फ एस्बेस्टस की माइनिंग पर रोक लगाई है, लेकिन इसके इंपोर्ट की इजाजत है। काम से जुड़े खतरों के बारे में बात करते हुए सुश्री चुन्नी ने कहा कि काम के दौरान मजदूरों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। वे अपने अंग खो देते हैं और कुछ हादसों में उनकी जान भी चली जाती है। हम उन्हें मुआवजा और दूसरी तरह की मदद दिलाने में सहायता करते हैं। दूसरा मुख्य सत्र "पर्यावरण, जलवायु और स्वास्थ्य" पर केंद्रित था, जिसमें खनन और उससे जुड़े उद्योगों में काम से जुड़े खतरों, पर्यावरण को हो रहे नुकसान, सुरक्षित पानी की चुनौतियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के असर पर चर्चा की गई। अरावली बचाने के संघर्ष में शामिल कैलाश मीणा ने कहा कि हमे अपने संसाधनों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हुये उसे संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। अरावली पहाड़ को जिस प्रकार से काटा गया है वो एक संकट पैदा कर रहा है। अपने विचार रखते हुए राजकुमार ने कहा कि हम तेजी से अपने प्राकृतिक संसाधन खो रहे हैं। 50 साल पहले हमारे पास 15 हजार नदियां थी जिसमे से 4500 नदियां खत्म हो चुकी है। भारत में वायु प्रदूषण से लगभग 20 लाख मौतें प्रत्येक वर्ष होती है। हमने हवा, पानी और मिट्टी केपी जहरीला बना दिया जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर होता है। राकेश दीवान ने कहा कि हमें आत्महंता समाज बनते जा रहे है, हमे उनसे सीखना होगा जिंहोने जंगल को आज हैती  बचा कर रखा है हमें उस पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए, जिसने हमारे पर्यावरण की रक्षा की है।  आखिरी सत्र में भविष्य की व्यावसायिक स्वास्थ्य रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिसमें राज्य-स्तर पर किए जाने वाले कामों को मजबूत करना प्रमुख रहा। अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस 10 दिसंबर 2026 को जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में घोषणा पत्र जारी करते हुये आगामी कार्ययोजना कि रूपरेखा भी बताई गई जिसमें व्यावसायिक स्वास्थ्य की स्थितियों का अंकलन रिपोर्ट प्रस्तुत करना,घातक उद्योगों में कार्यरत मजदूरों के लिए बने कानून, नीति एवं सुरक्षा संबंधी प्रभावों का अंकलन रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। देश के 5 राज्यों में विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का स्वास्थ्य सर्वे कर स्थिति रिपोर्ट जारी किया जाएगा। साथी ही स्वास्थ्य सेवाओं और ईएसआई कि स्थिति का सर्वे भी किया जाएगा।   जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा इस वर्ष देश के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में स्वास्थ्य दिवस अभियान चलाया गया था जिसे और मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन में निर्णय लिया गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार कोर्स चलाया जाएगा, जिसका पहला कार्यक्रम श्रीनगर में 1-7 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।    कार्यक्रम को सफल बनाने में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के उत्तरप्रदेश संजीव सिन्हा, ओड़ीशा के गोरांग महापात्रा, छत्तीसगढ़ के चंद्रकांत यादव, पुनिता कुमार, प्रकाश गार्डिया, दिल्ली से इफत राग, जम्मू कश्मीर के रही रियाज, राजस्थान कि हेमलता कंसोटिया, असम के मुकुट लोचन, मणिपुर के ऋषिकान्त आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।    

खूबसूरती और प्रतिभा का जलवा: सागर की बेटी अब कनाडा में करेगी भारत का प्रतिनिधित्व

सागर  शहर की बेटी अपूर्वा दुबे ने हाल ही में इंदौर में हुई मिसेज एशिया पैसिफिक वर्ल्ड प्रतियोगिता जीतकर ना सिर्फ सागर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है. प्रतियोगिता जीतने के बाद सागर अपने मायके पहुंची अपूर्वा का जोरदार स्वागत किया गया. अब अपूर्वा कनाडा में आयोजित होने वाली काॅस्मो वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता में शिरकत करेंगी. जिसकी तैयारियों में वो जुट गयी है. उनका कहना है कि सागर में पढ़ाई के दौरान वो कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रही है, इसलिए स्टेज पर जाने में हिचक नहीं थी और मैंने आत्मविश्वास के साथ अपने आप को पेश किया, जिसके कारण ये खिताब जीत पायी।  इंदौर में हुई प्रतियोगिता सागर शहर की बेटी और अपूर्वा दुबे वैद्य ने मिसेज एशिया पैसेफिक वर्ल्ड खिताब जीतकर शहर के साथ अपने परिवार का नाम रोशन किया है. सागर यूनिवर्सिटी के शिक्षक गिरीश मोहन दुबे की बेटी अपूर्वा ने बताया कि "उन्हें इस प्रतियोगिता की जानकारी एक दोस्त के जरिए मिली थी. उनके पास समय कम था, लेकिन सागर में पढ़ाई के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्टेज एक्टिविटीज में सक्रिय रहने के कारण आत्मविश्वास के चलते प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 22 से 24 मई तक इंदौर के एक होटल में आयोजित प्रतियोगिता में जीत हासिल की।  कई चरणों में हुई प्रतियोगिता अपूर्वा दुबे वैद्य ने बताया कि तीन दिन तक अलग-अलग सेशन में प्रतियोगिता आयोजित की गयी. अलग-अलग 9 चरणों में ग्रूमिंग सेशन, रैंप वॉक ट्रेनिंग, व्यक्तित्व विकास, शिष्टाचार और प्रश्न उत्तर सत्र आयोजित किए गए. प्रतियोगिता में दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, पुणे, रतलाम सहित देश के कई शहरों की महिला प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इन 9 चरणों के प्रदर्शन के आधार पर फिनाले में पहुंची और वहां के प्रदर्शन के आधार पर खिताब जीता।  ट्रेडिशनल लहंगा और मां लक्ष्मी के स्वरूप में मिली जीत अपूर्वा ने बताया कि फिनाले में इंट्रोडक्शन, इंडियन एथेनिक और इंडिया गाॅड्स राउंड हुए. जिसमें उन्होंने इंडियन एथेनिक राउंड में पारंपरिक लहंगा पहना और जबकि इंडियन गॉड्स राउंड में मां लक्ष्मी का स्वरूप प्रस्तुत किया।  इस तरह उन्होंने टॉप 15 में जगह बनायी और इसके बाद सबसे आखिर में क्वश्चन राउंड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मिसेज एशिया पैसिफिक वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पति राहुल वैद्य, पिता डॉ गिरीश मोहन दुबे और माता संध्या दुबे सहित परिवार के सदस्यों को दिया। 

फायर NOC नहीं तो कार्रवाई तय! जबलपुर में सैकड़ों भवनों को भेजा गया नोटिस

जबलपुर   दिल्ली के होटल में लगी आग की वजह से पूरे देश में चिंता है. मध्य प्रदेश सरकार ने भी सभी बड़े नगर निगमों से फायर सेफ्टी से जुड़ी जानकारियां एकत्रित की है. जबलपुर नगर निगम के महापौर का दावा है कि हमने लगभग 350 ऊंची इमारत को फायर सेफ्टी का नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही एक 3 सदस्य टीम रोज जबलपुर की अलग-अलग इमारत का जायजा ले रही है।  अग्नि दुर्घटनाओं से बचने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग दिल्ली के एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद पूरे देश में अग्नि दुर्घटनाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है. जबलपुर नगर निगम के फायर सेफ्टी ऑफिसर कुशाग्र सिंह ने बताया कि "राज्य सरकार की ओर से इस विषय में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रखी गई है. जिसमें अग्नि दुर्घटनाओं से बचने को लेकर सभी से चर्चा की जा रही है।  फायर सेफ्टी की जांच कर रही है टीम जबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह का कहना है कि "जबलपुर में भी कई इमारतें ऐसी हैं, जो अग्नि दुर्घटनाओं को लेकर संवेदनशील हैं. हमने ऐसी लगभग 350 इमारतों के लिए नोटिस जारी किए हैं और जानकारी मांगी है कि आखिर उन्होंने अपनी इमारत में फायर सेफ्टी के इंतजाम क्यों नहीं किए हैं।  जगत बहादुर ने बताया कि "जबलपुर नगर निगम के फायर डिपार्टमेंट की 3 सदस्यों की एक टीम रोज शहर के अलग-अलग हिस्सों में फायर सेफ्टी की जांच कर रही है और जहां भी हमें ऐसा लगता है कि कोई लापरवाही बरती जा रही है, वहां तुरंत नोटिस जारी करके सुविधा बढ़ाने के लिए कहा जाता है।  किन फायर सेफ्टी एनओसी जरूरी? जबलपुर नगर निगम के फायर सेफ्टी ऑफिसर कुशाग्र सिंह का कहना है कि "नियम के अनुसार फायर सेफ्टी का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) या तो उस इमारत को लेना है, जिसका निर्माण 5000 वर्ग फीट से ज्यादा का है या फिर उस इमारत को जिसकी ऊंचाई 15 मीटर से ज्यादा है. बाकी निर्माण कार्य फायर सेफ्टी एनओसी के दायरे में नहीं आते।  अवैध पार्किंग रास्ते हो जाते हैं जाम सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दिल्ली में जो घटना हुई, वह एक घनी बस्ती के भीतर बनी इमारत में लगी आग की वजह से बचाव कार्य नहीं किए जा सका. जबलपुर के फायर सेफ्टी अधिकारी कुशाग्र सिंह का कहना है कि "यह स्थिति जबलपुर में भी है. जबलपुर के कई इलाको में घनी बशाहट है. सड़के तो चौड़ी हैं, लेकिन सड़कों पर अवैध पार्किंग की वजह से जाने आने के रास्ते जाम हो जाते हैं. ऐसी हालत में दिन में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव कठिन हो जाता है।  'घना बस्तियों में आग पर कंट्रोल करना मुश्किल' जबलपुर में 2 माह पहले सतना बिल्डिंग के पीछे इसी तरह की एक इमारत में आग लग गई थी. गनीमत थी कि उस इमारत में कोई रह नहीं रहा था. इस बिल्डिंग में कपड़े का कारखाना था. बिल्डिंग तक पहुंचाने के लिए मात्र 10 फीट की रोड थी और बिल्डिंग में केवल एक ही तरफ से एंट्रेंस था. ऐसे हालात जबलपुर में हर साल बनते हैं और घनी बस्तियों में लगी आग को नियंत्रित कर पाना कठिन हो जाता है।  जबलपुर में कुछ साल पहले एक अस्पताल में भी आग लगी थी और इसमें कुछ बच्चों की जान चली गई थी. इस घटना के बाद से ही शहर में संवेदनशीलता बढ़ गई है और लोगों ने फायर एग्जिट को लेकर अच्छा काम किया है. इसलिए ज्यादातर नई इमारत में अग्नि दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य किया जा रहे हैं। 

तेज रफ्तार बनी काल: रायसेन-भोपाल रोड पर बसों की आमने-सामने भिड़ंत, कई यात्री घायल

रायसेन रायसेन-भोपाल नेशनल हाईवे शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना। सेहतगंज फैक्ट्री के पास पेट्रोल पंप के नजदीक सागर से भोपाल जा रही शक्ति ट्रैवल्स और भोपाल से सागर लौट रही कल्पना ट्रैवल्स की बसें आमने-सामने टकरा गईं। पलभर में हाईवे चीख-पुकार से गूंज उठा। हादसे में एक मासूम समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 35 यात्री घायल हुए हैं। कई की हालत नाजुक होने से मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।    दोनों बसें तेज रफ्तार में थीं। सिंगल लेन सड़क पर ओवरटेक के प्रयास में चालकों का नियंत्रण बिगड़ गया और बसें सीधी भिड़ गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बसों के केबिन पिचक गए। खिड़की के पास बैठे यात्री सबसे ज्यादा चोटिल हुए। बता दें कि पहले पांच लोगों के मौत की सूचना आई थी, पर बाद में तीन मौतों की पुष्टि की गई।  शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला धमाके जैसी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और पेट्रोल पंप कर्मचारी दौड़े। शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही गैरतगंज थाना पुलिस, डायल-100 और 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा और पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता ने खुद मोर्चा संभाला। घायलों को गैरतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। 12 गंभीर घायलों को भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया है। डेढ़ घंटे तक हाईवे जाम कलेक्टर विश्वकर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही सामने आई है। सिंगल लेन पर हैवी ट्रैफिक के बीच बसें 80 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से दौड़ रही थीं। हादसे के बाद करीब डेढ़ घंटे तक हाईवे जाम रहा। क्रेन से क्षतिग्रस्त बसें हटाने के बाद यातायात सामान्य हुआ। एक साल में 17 लोगों की मौत प्रत्यक्षदर्शी रमेश अहिरवार ने कहा, “हम चाय पी रहे थे। अचानक जोर की आवाज आई। देखा तो दोनों बसें एक-दूसरे में घुसी थीं। लोग खिड़की से गिर रहे थे। बच्चे की रोने की आवाज अब भी कानों में गूंज रही है।” हादसे ने एक बार फिर एनएच-146 की बदहाल तस्वीर उजागर कर दी। रायसेन से गैरतगंज तक 40 किमी का हिस्सा अब भी सिंगल लेन है। रोजाना सैकड़ों ट्रक और बसें यहां से गुजरती हैं। पिछले एक साल में इस खंड पर 17 लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने कई बार फोरलेन और डिवाइडर की मांग की, पर निर्माण अधर में है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख और गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता घोषित की है। एसपी आशुतोष गुप्ता ने कहा कि दोनों बस चालकों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। परिवहन विभाग ने सभी बस संचालकों को नोटिस जारी कर स्पीड गवर्नर की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही हाईवे पर इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट सुधारने और क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल घायलों का इलाज जारी है। अस्पताल के बाहर परिजनों की भीड़ और अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।  

MP सरकार का फोकस खेती से आगे: पशुपालन और उद्यानिकी से बढ़ेगी किसानों की कमाई

 भोपाल  मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। प्रदेश के किसान देश के खाद्यान्न भंडार भरने में बड़ी भूमिका निभाते हैं लेकिन उनकी आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। कृषक कल्याण वर्ष में सरकार की मंशा है कि ऐसे उपक्रम किए जाएं जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो। इसके लिए एक साथ कई कदम उठाए जा रहे हैं। परंपरागत कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिन उपज का मूल्य बाजार में समर्थन मूल्य से कम है, उन्हें भावांतर योजना के दायरे में लाकर उचित मूल्य दिलाने और प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था भी लागू की है। प्रदेश में पहली बार सरसों को भावांतर योजना की परिधि में लाया गया, उड़द पर छह सौ रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। किसानों के लिए राजकोष का मुंह भी खोल दिया गया है। भूमि अधिग्रहण पर अब चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। अन्य राज्यों को भी यह मॉडल अपनाने का सुझाव उपज का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि किसान को उपज का उचित मूल्य मिलना ही चाहिए। चूंकि, सभी उपज सरकार खरीद नहीं सकती है इसलिए भावांतर का फार्मूला अपनाया गया। सोयाबीन खरीद में प्रदेश के 6.86 लाख किसानों को 1,492 करोड़ रुपये का भावांतर दिया गया। इससे किसानों जहां समर्थन मूल्य मिला, वहीं सरकार को भंडारण, परिवहन आदि के झंझट से मुक्ति मिली। भारत सरकार ने भी सराहा और अन्य राज्यों को भी यह मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। सिंचाई क्षमता बढ़ाकर उत्पादन बढ़ाया-प्रदेश में अब सभी फसलों का उत्पादन बढ़ गया है। बीते दो वर्ष में 7.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित की गई। 2026 के अंत तक इसे बढ़ाकर 8.44 लाख हेक्टेयर करने और 2030 तक प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल और केन-बेतवा अंतरराज्यीय लिंक परियोजना पर काम प्रारंभ हो गया है। पांच लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वे हो चुका है। इनके क्रियान्वयन से पांच लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। 20 लाख हेक्टेयर में उद्यानिकी फसलें ले रहे किसान- किसान की आय बढ़ाने के लिए परंपरागत खेती के साथ उन्हें उद्यानिकी फसलों के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में इसका असर भी दिखने लगा है। वर्ष 2022-23 में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र 25 लाख 96 हजार 793 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 28 लाख 60 हजार 952 हेक्टेयर तक पहुंच गया। इसी अनुपात में उत्पादन में भी वृद्धि हुई। जैविक खेती में नंबर वन मप्र, अब प्राकृतिक खेती पर भी जोर मध्य प्रदेश जैविक खेती में देश में प्रथम स्थान पर है। 17.71 लाख हेक्टेयर प्रमाणित क्षेत्र है, जो देश में सर्वाधिक है, इसे 20 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। 11 लाख पांच हजार 960 पंजीकृत किसान हैं। उत्पादन का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा निर्यात होता है, जिससे लगभग 3000 करोड रुपये का राजस्व मिल रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड का गठन किया गया है। 97 हजार से अधिक किसानों ने 1,86,000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के लिए पंजीयन कराया है। इसमें देसी गाय के लालन-पालन के लिए नौ सौ रुपये प्रतिमाह अनुदान भी दिया जा रहा है। पशुपालन से आर्थिक समृद्धि का प्रयास देश के कुल दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी 9.12 प्रतिशत है। प्रदेश सरकार ने अब प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध संग्रहण का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन क्षमता मजबूत करने पर जोर है। पिछले एक वर्ष में 895 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया, 15 हजार से अधिक नए दुग्ध उत्पादक किसान इस नेटवर्क से जुड़े हैं। डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना में 25 गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर 10 लाख रुपये तक और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना में दो दुधारू मुर्रा भैंसें खरीदने पर 75 प्रतिशत तक अनुदान का प्रविधान है। वहीं, निजी भागीदारी से गोशालाओं की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में इस समय 6200 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां सक्रिय हैं।

राजधानी के होटलों में आग का खतरा! बिना फायर NOC संचालित हो रहे अधिकांश होटल

भोपाल  दिल्ली के एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद देशभर में अग्नि सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. इधर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जमीनी हकीकत भी बेहद डरावनी और चिंताजनक है. दरअसल शहर में सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर करीब 3200 होटल और रेस्टोरेंट धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से लगभग 99 प्रतिशत संस्थानों के पास वैध फायर एनओसी तक नहीं है. ऐसे में यदि आज किसी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान में आग लग जाए, तो वहां मौजूद सैकड़ों ग्राहकों और कर्मचारियों की जान बचाना मुश्किल होगा।  राजधानी में महज 38 संस्थानों के पास वैधानिकता ​नगर निगम और प्रशासनिक रिकार्ड के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में संचालित करीब 3,200 होटल और रेस्टोरेंट में से सिर्फ 38 संस्थानों के पास ही वैध फायर एनओसी उपलब्ध है. जबकि बाकी के हजारों प्रतिष्ठान बिना किसी ठोस फायर प्लान की स्वीकृति के चल रहे हैं. हालांकि आबकारी विभाग से अनुमति प्राप्त लगभग 75 बारों को जरूर फायर सेफ्टी के दायरे में लाया गया है, लेकिन इसके अलावा एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जो पूरी तरह से रामभरोसे संचालित हो रही है।  ​नियमों की उड़ रहीं धज्जियां, बेसमेंट में धधक रहे किचन ​अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुसार किसी भी बिल्डिंग का बेसमेंट सिर्फ पार्किंग या स्टोरेज के उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है. वहां कमर्शियल किचन चलाने की सख्त मनाही है. इसके बावजूद भोपाल के एमपी नगर, शाहपुरा, पुराने भोपाल, नर्मदापुरम रोड और संत हिरदाराम समेत अन्य इलाकों में अधिकांश होटलों और रेस्टोरेंटों के बेसमेंट में 10 से 50 कर्मचारियों की मौजूदगी में गैस चूल्हे और भारी-भरकम एलपीजी सिलेंडर धधक रहे हैं. सबसे खतरनाक बात यह है कि कई होटलों में एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते तक नहीं हैं. आगजनी की स्थिति में ऐसी जगहों से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता है।  ​स्वतंत्र फायर एक्ट का अभाव, कार्रवाई करने में बंधे हाथ विशेषज्ञ बताते हैं कि ​भोपाल नगर निगम के पास वर्तमान में कोई स्वतंत्र और कड़ा फायर एक्ट लागू नहीं है. इस कानूनी कमजोरी के कारण जिम्मेदार अधिकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले होटल मालिकों पर सीधे सख्त दंडात्मक कार्रवाई या भारी जुर्माना लगाने से कतराते हैं. वहीं जांच के नाम पर केवल नोटिस जारी करने की रस्म अदायगी की जाती है, जिसका फायदा उठाकर रसूखदार संचालक बिना किसी डर के अपना कारोबार जारी रखते हैं।  ​संकरी गलियां और अतिक्रमण, दमकल वाहनों का पहुंचना भी मुश्किल बता दें कि ​भोपाल के पुराने और घने बाजारों जैसे लखेरापुरा, हमीदिया रोड और चौक बाजार इलाके में स्थिति और भी बदतर है. इन क्षेत्रों में संकरी गलियों, बेतरतीब खड़े वाहनों और दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण के कारण आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों का घटना स्थल तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है. हाल ही में हमीदिया रोड स्थित एक होटल के कमरों में शार्ट सर्किट से लगी आग के दौरान तंग रास्तों के कारण दमकल कर्मियों को राहत कार्य में भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।  '​जांच के बाद होगी कार्रवाई' ​इस मामले में नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है, "निगम की टीमें समय-समय पर शहर के व्यावसायिक परिसरों में उपलब्ध फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच करती हैं. जिन होटलों, रेस्टोरेंटों या बेसमेंट संचालकों के पास वैध एनओसी नहीं पाई जाएगी, उन्हें चिह्नित कर नोटिस दिए जा रहे हैं और नियमों का कड़ाई से पालन न करने पर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। 

मध्यप्रदेश में मौसम का प्रहार: देवास में बही कार, झाबुआ में झमाझम बारिश; जानिए कब आएगा मानसून

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री भले ही न हुई हो, लेकिन प्री मानसून जमकर बरस रहा है। झाबुआ में शुक्रवार सुबह जोरदार बारिश हुई। धार, पीथमपुर और रतलाम में भी पानी गिरा। इससे पहले भोपाल में गुरुवार शाम करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार के साथ आंधी चली और बारिश हुई। करीब 80 पेड़ या उनकी टहनियां सड़कों पर गिर गईं। इससे ट्रैफिक जाम के हालात बने। ओले भी गिरे। देवास में बारिश की वजह से एक कार रपटे से बह गई। हादसा मसुरिया-भंडारिया रोड पर हुआ। कार सवार चार लोगों ने कूदकर जान बचाई।मौसम केंद्र के मुताबिक, शुक्रवार को भोपाल-इंदौर समेत करीब 45 जिलों में मौसम बदला रहेगा। 60KM प्रतिघंटा तक की रफ्तार से आंधी चल सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोक नगर, सागर और दमोह में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट है।वहीं, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, पांढुर्णा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज आंधी तो कहीं बारिश वाला मौसम बना रहेगा।  केरल में मानसून की आधिकारिक एंट्री के साथ ही मध्य प्रदेश में मौसम ने पूरी तरह करवट ले ली है. प्रदेश में मानसून भले अभी नहीं पहुंचा हो, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां जोर पकड़ चुकी हैं. पिछले दो दिनों से प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. मौसम विभाग ने 5 जून को प्रदेश के 45 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है. कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है. राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज लोगों को गर्मी से राहत दे रहा है, लेकिन तेज हवाओं और पेड़ गिरने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।  इंदौर में 6.8 डिग्री लुढ़का पारा, कई शहरों में गिरावट मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे के अंदर 20 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। रतलाम में सबसे ज्यादा डेढ़ इंच पानी गिर गया। भोपाल में पौन इंच और इंदौर-श्योपुर में आधा इंच से ज्यादा बारिश हुई। धार, गुना, नर्मदापुरम, शाजापुर, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, छतरपुर, झाबुआ, सीहोर, मैहर समेत कई जिलों में भी बारिश रिकॉर्ड की गई है। आंधी-बारिश की वजह से रात के तापमान में खासी गिरावट आई है। भोपाल में पारा 20.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इंदौर में एक ही रात में 6.8 डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 19 डिग्री पर आ गया। ग्वालियर में 27.5 डिग्री और जबलपुर में 26.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री दर्ज किया गया। धार में 20.3 डिग्री, श्योपुर में 21 डिग्री, रतलाम में 21.2 डिग्री, दमोह में 22.5 डिग्री, शिवपुरी में 23 डिग्री, गुना में 23.5 डिग्री, खंडवा में 24 डिग्री, नर्मदापुरम में 24.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 24.6 डिग्री और रायसेन में 24.8 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर रहा। केरल पहुंचा मानसून, एमपी में 20 जून तक आने की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 5 से 7 दिन लेट हो सकती है। प्रदेश में मानसून के एंटर होने की सामान्य तारीख 15 जून है। दक्षिणी हिस्से से मानसून एमपी में दस्तक देता है। साल 2025 में 1 दिन बाद यानी 16 जून को मानसून एंटर हो गया था, जबकि विदाई 15 अक्टूबर तक हुई थी। सामान्यत: केरल में आने के 15 दिन बाद एमपी में भी मानसून दस्तक दे देता है। इस वजह से इस बार प्रदेश में मानसून आने की तारीख 20 से 22 जून बताई जा रही है। केरल में 4 जून को ही मानसून ने दस्तक दी है। गुरुवार शाम भोपाल में तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया. करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं के कारण शहर में लगभग 80 पेड़ और उनकी टहनियां सड़कों पर गिर गईं. कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी. शाजापुर, सीहोर, इछावर और शुजालपुर में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण तंत्र के कारण अगले चार दिनों तक प्रदेश में मौसम का यही रुख बना रह सकता है. तापमान में भी 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होने की संभावना है।  अगले चार दिन तक बना रहेगा मौसम का असर मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून सिस्टम सक्रिय है। ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शुक्रवार को भी भोपाल, इंदौर सहित करीब 45 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर और दमोह जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। गर्मी से मिली बड़ी राहत लगातार हो रही बारिश और बादलों की आवाजाही के चलते प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया है। भोपाल में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री, इंदौर में 38.4 डिग्री, उज्जैन और जबलपुर में 39 डिग्री तथा ग्वालियर में 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। केवल कुछ शहरों में ही तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा। सबसे अधिक तापमान नौगांव में 42.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कई जिलों में तेज बारिश और तापमान में भारी गिरावट रायसेन जिले के गैरतगंज, देवनगर और सिलवानी क्षेत्र में देर रात तेज आंधी के साथ बारिश हुई। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में रातभर रुक-रुककर बारिश का दौर चला, जिससे तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कई इलाकों में दिन और रात के तापमान में 8 से 10 डिग्री तक की कमी देखने को मिली। मानसून की दस्तक में हो सकती है देरी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में मानसून इस बार सामान्य तिथि से कुछ दिन देर से पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य प्रवेश तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई जा … Read more