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राजस्थान में अपराध पर सख्ती, CM ने पुलिस को दी ‘जीरो टॉलरेंस’ की सख्त हिदायत

जयपुर जयपुर में विदेशी महिला और बाइक सवार युवती से सरेआम छेड़छाड़ जैसी घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने गृह विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब पौने पांच घंटे की लंबी मैराथन बैठक की। इस अहम बैठक में एसपी,आईजी और एडीजी स्तर के अधिकारी शामिल हुए, जबकि कई जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में किसी भी प्रकार का अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर पूरी दृढ़ता से काम कर रही है। उन्होंने माना कि पिछले ढाई वर्षों में विभिन्न श्रेणियों के अपराधों में कमी आई है, लेकिन इसे और कम करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपराधियों में कानून का भय और आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा पैदा किया जाए। मुख्यमंत्री ने जिलों के एसपी को नियमित जनसुनवाई करने के निर्देश दिए और आईजी स्तर पर भी जनसुनवाई को अनिवार्य बनाने की बात कही। अधिकारियों को जिलों का प्रभारी बनाकर वहां जाकर अपराधों की समीक्षा करने, अपराध की प्रकृति को समझने और उसे नियंत्रित करने की रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए। विभिन्न श्रेणियों के अपराधों की मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि किस जिले में किस तरह का अपराध बढ़ रहा है या घट रहा है। बैठक में साइबर अपराध, नशा तस्करी और सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सभी अधिकारियों को स्पष्ट लक्ष्य दिए गए हैं और हर स्तर पर निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राजस्थान की जनता को सुरक्षित वातावरण देने का वादा हर हाल में पूरा किया जाएगा।  

अपराधियों पर शिकंजा: 28 वांटेड की सूचना देने वालों को नकद इनाम देगी सरकार

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर सख्त प्रहार करते हुए नई ‘रिवॉर्ड पॉलिसी’ लागू की है। इसके साथ ही राज्य के 28 मोस्ट वांटेड आरोपितों की सूची भी जारी कर दी गई है। इस नीति के तहत अब पुलिस को सही और पुख्ता सूचना देने वाले लोगों को नकद इनाम दिया जाएगा, जबकि उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सरकार की ‘गैंगस्टरां ते वार’ मुहिम के तहत यह फैसला लिया गया है, जिसका मकसद आम लोगों को कानून-व्यवस्था मजबूत करने में भागीदार बनाना है। नई नीति के अनुसार, सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसएसपी) को 1 लाख रुपये तक इनाम स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है। वहीं, कमिश्नर ऑफ पुलिस, रेंज आईजी और डीआईजी 1.5 लाख रुपये तक, जबकि स्पेशल डीजीपी/एडीजीपी स्तर के अधिकारी 2 लाख रुपये तक इनाम मंजूर कर सकेंगे। 2 लाख रुपये से अधिक का इनाम केवल डीजीपी स्तर पर स्वीकृत होगा। पुखता जानकारी पर ही मिलेगा इनाम एडीजीपी एजीटीएफ प्रमोद बान ने बताया कि सूचना देने वालों को इनाम तभी दिया जाएगा जब उनकी जानकारी पूरी तरह सही और जांच में प्रमाणित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर मुखबिर की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। “राज्य सरकार का लक्ष्य है कि गैंगस्टर और अपराधियों के लिए हर रास्ता बंद कर दिया जाए और पंजाब को सुरक्षित बनाया जाए,” उन्होंने कहा- सरकार ने इसके लिए ‘एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन’ नंबर 93946-93946 भी जारी किया है, जिस पर कोई भी व्यक्ति गुमनाम रहकर सूचना दे सकता है। पुलिस के अनुसार, जो सूचना आरोपितों की गिरफ्तारी तक पहुंचाने में मदद करेगी, उसे विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा। इनाम की राशि अपराध की गंभीरता, जोखिम और सूचना की गुणवत्ता के आधार पर तय की जाएगी। पंजाब पुलिस का कहना है कि इस पहल से न केवल पुलिस नेटवर्क को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम लोगों की भागीदारी से अपराध पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी। यह अभियान ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत चल रही ‘गैंगस्टरां ते वार’ मुहिम को और तेज करेगा। 56 हजार से अधिक ठिकानो ंपर पहुंची पुलिस इसी अभियान के तहत पंजाब पुलिस अब तक बड़े स्तर पर कार्रवाई कर चुकी है। राज्यभर में गैंगस्टरों से जुड़े ठिकानों पर 56,487 छापेमारी की गई है। इस दौरान 19,894 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 9,353 के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन लिया गया। इसके अलावा 15,284 लोगों से पूछताछ कर उन्हें सत्यापन के बाद छोड़ दिया गया। पुलिस ने 851 घोषित अपराधियों (पीओ) को भी गिरफ्तार किया है। पंजाब सरकार का मानना है कि इस रिवॉर्ड पॉलिसी से आम जनता और पुलिस के बीच भरोसा बढ़ेगा और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी डर के अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा करें, ताकि राज्य को अपराध मुक्त बनाया जा सके।

अतिक्रमण पर सख्त वार: पार्किंग में गोदाम-दुकान बनाने वालों पर गिरी गाज, कई सील

बिलासपुर. अरपा-पार सरकंडा के 6 जाम पॉइंट का सबसे बड़ा कारण बड़े प्रतिष्ठानों द्वारा पार्किंग का गलत इस्तेमाल है। लोग पार्किंग में वाहन खड़े करने के बजाय इसे गोदाम और सर्विसिंग सेंटर के रूप में चला रहे हैं, जिससे सड़क पर गाड़ियां खड़ी हो रही हैं, और ट्रैफिक जाम बन रहा है। शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के अभियान में नगर निगम ने सख्त कार्रवाई की। डी-मार्ट गेट के पास सड़क की ओर बढ़ाए गए लोहे के अवैध ग्रिल हटाए गए। डी-मार्ट प्रबंधन को निगम ने 48 घंटे के भीतर नक्शे अनुरूप बाउंड्रीवॉल बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले सरकंडा क्षेत्र के तीन बड़े प्रतिष्ठानों ‘मौसाजी स्वीट्स, पुष्पेंद्र साहू की दुकान और रॉयल स्वीट्स’ की पार्किंग को सील कर दिया गया। निगम टीम ने मैदान में जाकर निरीक्षण किया। मौसाजी स्वीट्स की पार्किंग पूरी तरह से सर्विस सेंटर और गोदाम में बदल दी गई थी, यहां शोरूम की नई बाइक खड़ी थीं और सर्विसिंग भी हो रही थी। साइंस कॉलेज के पास पुष्पेन्द्र साहू की बिल्डिंग में बनाए गए पार्किंग स्थल को कोचिंग संस्थान को किराए पर दिया गया था, जिसे सील किया गया है। वहीं वसंत विहार चौक के रॉयल स्वीट्स में भी पार्किंग का दुरुपयोग पाया गया। यहां पार्किंग का गोदाम के रूप में उपयोग रहा था। कार्रवाई में भवन अधिकारी अनुपम तिवारी, आशीष पांडेय, जुगल किशोर, अरुण यादव संतोष वर्मा,शिव बहादुर जायसवाल समेत अन्य शामिल थे। पार्किंग गायब, सड़क बनी पार्किंग जोन बड़े प्रतिष्ठान अपनी पार्किंग में गोदाम या सर्विसिंग सेंटर चला रहे हैं। इससे ग्राहक सड़क पर वाहन खड़े कर रहे हैं और जाम की स्थिति बन रही है। इसका असर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों पर भी पड़ रहा है।

दिनदहाड़े वारदात: CM हाउस के नजदीक डॉक्टर से छीना गया 11 तोला सोना

भोपाल. राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। श्यामला हिल्स इलाके में मुख्यमंत्री निवास के पास स्थित हाई सिक्योरिटी जोन में शुक्रवार सुबह एक वरिष्ठ डॉक्टर से दिनदहाड़े लूट की वारदात हुई। श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र में चिनार पार्क के पास बदमाशों ने टीबी ट्रेनिंग सेंटर के डायरेक्टर डॉ. मनोज वर्मा (62) को निशाना बनाया। बदमाशों ने पहले बाइक से उनकी साइकिल को टक्कर मारकर गिराया, फिर आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर लूटपाट की और फरार हो गए। जानकारी के अनुसार, डॉ. वर्मा रोज की तरह सुबह साइक्लिंग के लिए बोट क्लब क्षेत्र गए थे। करीब 10 बजे घर लौटते समय पीछे से आए बाइक सवार बदमाशों ने साइकिल को टक्कर मारी। संतुलन बिगड़ने से डॉक्टर सड़क पर गिर पड़े। पहले से मौजूद दो बदमाशों ने उन्हें दबोच लिया। आंखों में मिर्च पाउडर डालकर उन्हें असहाय बना दिया। इसके बाद आरोपियों ने चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और 11 तोला सोने का कड़ा, स्मार्ट वॉच, मोबाइल और नकदी लूटकर मौके से फरार हो गए। डॉक्टर के कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर – घटना में गिरने के कारण डॉ. वर्मा के कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टर के अनुसार, “मिर्च पाउडर के कारण मैं कुछ देख नहीं पा रहा था और पूरी तरह असहाय हो गया था।” रेकी कर किया गया हमला – प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बदमाशों को पहले से पता था कि डॉक्टर सोने का कड़ा पहनते हैं। घटना स्थल पर पहले से उनके साथी मौजूद थे। पूरी वारदात सिर्फ 2 मिनट में अंजाम दी गई। यह साफ संकेत देता है कि लूट पूर्व नियोजित (planned) थी। पुलिस जांच जारी – श्यामला हिल्स पुलिस ने तीन अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। संदिग्धों से पूछताछ जारी है।पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने पहले रेकी की थी।

धार भोजशाला पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, हिंदुओं को 24 घंटे पूजा का हक, मस्जिद या मंदिर?

धार  भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भी एक है। राजा भोज ने उज्जैन को अपनी राजधानी बनाया था। उन्होंने यहां कई निर्माण कराए, जिनमें महाकालेश्वर मंदिर स्थित जूना महाकाल मंदिर भी शामिल है। यहां पत्थरों पर जिस लिपि में संस्कृत श्लोक, शिलालेख के रूप में मौजूद हैं, उसी तरह के शिलालेख परमार राजाओं के खरगोन में बनाए मंदिर में भी हैं और भोजशाला के शिलालेखों पर भी मिलते हैं। इससे साबित होता है कि यहां राजा भोज ने मंदिर का निर्माण कराया था। पांचवें दिन सुनवाई में क्या हुआ धार भोजशाला विवाद को लेकर लगातार पांचवें दिन हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका दायर करने वाले कुलदीप तिवारी की ओर से वकील मनीष गुप्ता ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भोजशाला के हिंदू मंदिर होने को लेकर दलीलें रखीं।  याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने मांग की कि भोजशाला में 24 घंटे पूजा का अधिकार दिया जाए और इसके परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रकांड विद्वान राजा भोज ने शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत काम किए। सिर्फ धार की भोजशाला ही नहीं, परमार काल में कई अन्य स्थानों पर शिक्षा के मंदिर बनाए गए थे। इन मंदिरों में मिले पत्थर और भोजशाला में मिले पत्थर एक ही काल के हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि भोजशाला का निर्माण परमार काल में हो चुका था। वाग्देवी की मूर्ति और लिपियों का साक्ष्य राजा भोज द्वारा लिखित पुस्तकों में 'समराड्गण सूत्रधार' और 'सरस्वती कंठाभरण' प्रमुख हैं। समराड्गण सूत्रधार में यहां तक बताया गया है कि देवताओं की मूर्ति कितनी बड़ी होनी चाहिए। भोजशाला में स्थापित रही वाग्देवी की मूर्ति का वर्णन इससे शत-प्रतिशत मिलता है। उज्जैन के जूना महाकालेश्वर मंदिर में लगे पत्थर पर उकेरी गई और भोजशाला के पत्थरों की लिपि समकालीन है। इससे यह सिद्ध होता है कि भोजशाला मंदिर है और इसका निर्माण मस्जिद से बहुत पहले हो चुका था। अब इस मामले में सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। इस दिन भी मनीष गुप्ता की ओर से ही तर्क रखे जाएंगे। डेढ़ घंटे चली बहस डेढ़ घंटे की बहस में उन्होंने पुराने साहित्य के साथ ही दार्शनिकों और भारत भ्रमण पर आए विदेशियों की किताबों का हवाला दिया। अब 15 अप्रेल से दोबारा शुरु होगी सुनवाई 5 दिन चली बहस के बाद अब भोजशाला मामले में 15 अप्रेल से दोबारा सुनवाई शुरू होगी। हिंदुओं को मिले पूजा का अधिकार गुप्ता ने अपनी दलीलों की शुरुआत करते हुए अपनी याचिका में आठ मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख मांग है कि पुरातत्व अधिनियम के तहत यहां पर अन्य लोगों को पूजा का अधिकार खत्म किया जाए। चूंकि ये मंदिर है, इसलिए यहां हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वर्ष 2003 में जो आदेश दिया था, वो गलत है। उसे खत्म किया जाए। उन्होंने कहा कि राजा भोज शिक्षा और शिक्षकों का सम्मान करते थे। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की थी, जिसमें समरांगण सूत्रधार भी है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से वास्तुशास्त्र और शिल्पशास्त्र पर आधारित है। इसमें उन्होंने उस समय की वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला के सिद्धांतों का विवरण दिया है। उनके समय के निर्माणों में इसकी छाप भी मिलती है। भोजशाला में जो वास्तुकला और अन्य बातें मिली हैं, वो भी इसमें दिए गए वर्णन के मुताबिक हैं। राजाभोज की किताब का उल्लेख सरस्वती कंठाभरण की कथाओं में राजा भोज ने भोजशाला का महत्व बताया था, अभिभाषक गुप्ता ने कहा कि राजा भोज ने अपनी किताब में लिखा है कि राजा पर उसके मंत्री अंकुश लगाते हैं, इसी तरह यहां (भोजशाला) में मौजूद 500 पंडित उनके मद पर अंकुश लगाएंगे, इन्हें समय पर ग्रास देने के लिए शासन की ओर से सहायता दी जाएगी। इसी तरह से सरस्वती कंठाभरण जो कि भोजशाला का ही एक नाम है। उसको लेकर राजाभोज की किताब है। ये संस्कृत रचना है। इसमें भोजशाला के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। मुस्लिम लेखक इब्न बतूता की किताब में भी सबूत कोर्ट में मुस्लिम विद्वान और दार्शनिक इब्न बतूता की किताब रिहला का भी उल्लेख किया गया। इसमें जिक्र मिलता है कि खिलजी के मालवा जीतने के बाद मंदिर को तोड़कर उसके सामान का ही उपयोग करते हुए कमाल मौला की मस्जिद बनाई गई थी। जैन दार्शनिक का भी जिक्र वर्ष 1303 में गुजरात से धार आए जैन दार्शनिक के अपनी किताब में भोजशाला के वर्णन की दलीलें भी कोर्ट में रखी गईं। वकील गुप्ता ने ललित सा के शिलालेखों का वर्णन कर उनकी यात्रा के समय यहां दी जाने वाली शिक्षा के बारे में बताया। सर्वे के तथ्यों से मंदिर होने का दावा मनीष गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के सर्वे में जो तथ्य सामने आए हैं, वे भोजशाला को मंदिर सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। वह राजा भोज और अन्य शोधार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों के माध्यम से यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि भोजशाला का निर्माण राजा भोज के समय यानी परमार काल में हुआ था। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि भोजकाल में शिक्षालयों को सरस्वती कंठाभरण, मंदिर को प्रसाद और घर को मंदिर भी कहा जाता था, जिसका उल्लेख पुस्तकों में मिलता है। परमारकालीन बनावट और शिलालेख सर्वे में मिले खंभे और पत्थरों पर संस्कृत में उकेरी बातें सिद्ध कर रही हैं कि भोजशाला के पत्थरों से मस्जिद बनाई गई थी। परमारकालीन अन्य मंदिरों में देवताओं की मूर्तियों की बनावट और मुद्राएं वैसी ही हैं, जैसी भोजशाला के सर्वे में मिली मूर्तियों की हैं। वकील ने जोर देकर कहा कि मंदिर के पत्थरों से ही मस्जिद का निर्माण हुआ था, जो पुरातात्विक साक्ष्यों से स्पष्ट होता है।    

जबलपुर में 5 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन रद्द, 121 क्लीनिक पर भी हुआ कार्रवाई

जबलपुर  जबलपुर शहर के पांच निजी अस्पतालों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। इसी तरह जिले के 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, पंजीयन की आवश्यक औपचारिकता पूर्ण न करने पर कुल 121 क्लीनिकों का संचालन बंद करने का आदेश मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी ने दिए हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग होम शाखा प्रभारी डॉ. आदर्श विश्नोई ने बताया कि नियमानुसार निजी अस्पतालों व क्लीनिकों को पंजीयन तीन साल की अवधि के लिए प्रदान किया जाता है। निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर संबंधित संस्थानों को पंजीयन नवीनीकरण हेतु आवेदन करना अनिवार्य है। इस साल नवीनीकरण की प्रक्रिया पोर्टल के माध्यम से एक जनवरी से 28 फरवरी तक संचालित हुई। इसके बाद मार्च में संबंधित अस्पतालों व क्लीनिकों का निरीक्षण किया गया और आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया। 55 में से पांच बंद, जिसमें दो ने स्वयं अस्पताल में लगाया ताला वर्ष 2025-26 में कुल 55 अस्पतालों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, जिसमें दो अस्पतालों बटालिया आई हास्पिटल, सरकार हास्पिटल ने स्वयं अस्पताल बंद करने आवेदन प्रस्तुत किया। वहीं एक अस्पताल नामदेव नर्सिंग होम ने आवेदन ही नहीं किया। जबकि संकल्प हॉस्पिटल ने दस्तावेज नगर निगम व अन्य विभागों से सत्यापित नहीं कराए। इस तरह एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर में निरीक्षण के दौरान उपयुक्त स्टाफ उपस्थित नहीं था। जिसके बाद अब इनका संचालन नहीं हो सकेगा। 89 क्लीनिक ने आवेदन नहीं किया, 32 के पास दस्तावेज कम जबलपुर जिले में कुल 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण इस बार प्रस्तावित था। जिनमें से 89 क्लीनिकों द्वारा नवीनीकरण के लिए आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया। जबकि 32 क्लीनिक ने नियमानुसार पूरे दस्तावेज ही नवीनीकरण टीम को नहीं सौंपे। जिसके चलते पंजीयन नवीनीकरण नहीं हो सका। पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया को ऐसे समझें स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पताल व क्लीनिकों संचालन के लिए नियमानुसार प्रत्येक तीन साल में एक बार पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया से गुजरना होता है। अस्पताल-क्लीनिकों के पंजीयन का नवीनीकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 126 अस्पतालों की मान्यता खत्म कर दी है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में यह कदम उन अस्पतालों पर उठाया गया है, जिन्होंने NABH सर्टिफिकेट की जानकारी तय समय में नहीं दी। आयुष्मान कार्यालय ने पहले अस्पतालों को नोटिस देकर मौका दिया था, लेकिन इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। रविवार 12 बजे इन अस्पतालों को नोटिस देकर जानकारी दी जाएगी। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान के तहत मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा। 4 शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कुल 398 अस्पताल योजना से जुड़े हैं। इनमें से 126 अस्पताल NABH सर्टिफिकेट की जानकारी नहीं दे सके, जिस कारण उन पर कार्रवाई हुई। इनमें भोपाल के 51, इंदौर-30, ग्वालियर-33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। आयुष्मान CEO बोले- मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा आयुष्मान भारत मध्यप्रदेश के CEO डॉ. योगेश भरसट ने कहा, यह कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके। एनएबीएच सर्टिफिकेट न देने वाले अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता रद्द कर दी गई है। कई नोटिस देने के बावजूद डॉक्यूमेंट नहीं जमा हुए। निजी अस्पतालों का कहना है कि सर्टिफिकेट प्रक्रिया महंगी और लंबी है, इसलिए छोटे अस्पताल समय पर पूरा नहीं कर पाए। डॉ. योगेश भरसट ने कहा, अब इन अस्पतालों के मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जाएगा। नए मरीजों के क्लेम स्वीकार नहीं होंगे। पुराने पेमेंट के बाद भी सर्टिफिकेट जमा होने तक ये अस्पताल इंपैनल्ड सूची में नहीं लौटेंगे।

होजरी कॉम्प्लेक्स में प्रदर्शन, पुलिस और श्रमिकों में झड़प

 नोएडा गुरुग्राम में मानेसर के बाद अब नोएडा के फेज-2 क्षेत्र के होजरी कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को 10 से अधिक फैक्टरियों के श्रमिकों ने वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर छह घंटे तक हंगामा किया। डीएमसी मार्ग पर उनकी पुलिस से नोकझोंक भी हुई। इस बीच कुछ श्रमिकों ने पथराव भी किया। पुलिस ने उनको शांत कराया और फूल मंडी में बैठक कराई। बैठक में उद्यमी संगठनों ने श्रमिकों को जल्द ही सभी मांगों का समाधान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद श्रमिक शांत हुए। हालांकि, कुछ श्रमिक शनिवार को भी प्रदर्शन करने की चेतावनी दे रहे हैं। होजरी कॉम्प्लेक्स में गारमेंट एक्सपोर्ट की काफी इकाइयां हैं। यहां काफी संख्या में श्रमिक काम करते हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह में वेतन वृद्धि कम होने से श्रमिकों में रोष बढ़ गया। श्रमिकों का आरोप है कि महंगाई के समय में 350 रुपये के इंक्रीमेंट का कोई मतबल नहीं। श्रमिकों ने गारमेंट इकाइयों के प्रबंधन से वार्ता की। हरियाणा में बढ़ाए गए वेतन का जिक्र भी किया, परंतु कोई समाधान नहीं निकला। श्रमिकों ने गुरुवार को विरोध दर्ज कराया। इसके बाद कोई उचित निर्णय न होने पर शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे से श्रमिक एकत्रित होने शुरू हो गए। श्रमिकों ने दोपहर करीब 12 बजे होजरी कॉम्प्लेक्स की सड़कों पर हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद डीएससी मार्ग पर पेट्रोल पंप के पास यूटर्न पर श्रमिक विरोध दर्ज कराने बैठ गए। इस बीच कुछ श्रमिकों ने पथराव किया। पुलिस बल ने उनको रोक दिया। पुलिस धीरे-धीरे श्रमिकों को फूल मंडी ले गई। यहां उद्यमी संगठनों से उनकी वार्ता हुई और समाधान का आश्वासन मिला। इसके बाद श्रमिक शांत हो गए। पुलिस ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। जिले के सात थानों के प्रभारी अपनी-अपनी टीमों के साथ मौके पर पहुंचे। अपर पुलिस आयुक्त (सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने कहा कि प्रशासन के अफसरों की कंपनियों के प्रबंधन से वार्ता चल रही है। जल्द ही समाधान होने की उम्मीद है। होजरी कॉम्प्लेक्स में पुलिस बल तैनात किया गया था। कर्मचारियों को समझा-बुझाकर भेज दिया गया। श्रमिकों की मुख्य मांगें ● आठ घंटे के लिए न्यूनतम 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिले। सालाना वेतन वृद्धि 20 से 30 प्रतिशत तक की जाए। ● ओवर टाइम का डबल भुगतान किया जाए। कार्य करने के लिए लक्ष्य नहीं दिया जाए। ● इकाई के वरिष्ठ अधिकारियों का बर्ताव बेहतर हो। महिलाकर्मियों से रात को कार्य नहीं कराया जाए। मानेसर में बवाल के बाद 55 कर्मचारी गिरफ्तार आईएमटी मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि के लिए गुरुवार को हुए बवाल के बाद पुलिस ने 55 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 20 महिलाएं और 35 पुरुष शामिल हैं। अदालत ने शुक्रवार को सभी को जेल भेज दिया। आईएमटी मानेसर के सेक्टर-चार में सैकड़ों कर्मचारियों ने उत्पात मचाया था। इस दौरान पथराव भी किया था।

आस्था कंपनी का बड़ा फ्रॉड, निवेशकों का पैसा लेकर फरार

  गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले से धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 'आस्था' नामक एक निजी कंपनी के संचालकों ने निवेश को दोगुना करने का लालच देकर करीब 256 लोगों से 80 करोड़ रुपये की ठगी की और रातों-रात चंपत हो गए। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद पीड़ित निवेशकों में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में पीड़ितों ने एसपी विनय तिवारी से मुलाकात कर न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की गुहार लगाई। 20 महीने में पैसे डबल करने का दिया था झांसा मिली जानकारी के अनुसार, इस ठगी का खेल साल 2023 में शुरू हुआ था। 'आस्था' कंपनी के कर्मचारियों और प्रबंधकों ने शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में भव्य बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में स्थानीय लोगों को निवेश की लुभावनी योजनाओं की जानकारी दी गई। कंपनी ने दावा किया था कि जो भी व्यक्ति उनके पास पैसा जमा करेगा, उसे मात्र 20 महीने की अवधि में दोगुना रिटर्न दिया जाएगा। ज्यादा मुनाफे के लालच में आकर मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी इस कंपनी में निवेश कर दी। रातों-रात दफ्तर बंद कर फरार हुए कर्मचारी ठगी का खुलासा तब हुआ जब करीब एक सप्ताह पहले कंपनी के गोपालगंज और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित कार्यालयों पर अचानक ताला लटक गया। पीड़ित जब अपने निवेश की स्थिति जानने दफ्तर पहुंचे, तो वहां सन्नाटा पसरा था। मैनेजर और कर्मचारी सभी अपने मोबाइल फोन बंद कर फरार हो चुके थे। काफी तलाश करने के बाद जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो पीड़ितों को एहसास हुआ कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुके हैं। एसपी से मिलकर दर्ज कराई एफआईआर दर्ज शुक्रवार को एसपी विनय तिवारी से मिलने पहुंचे पीड़ितों में सुदामा कुशवाहा, हरेंद्र राय, राजन कुमार, सागर गुप्ता, दिलीप शर्मा, आलोक कुमार बरनवाल और अजय कुमार सहित कई लोग शामिल थे। पीड़ितों ने बताया कि करीब 256 लोगों का पैसा फंसा हुआ है।नगर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रभाकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि ठगी के इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की एक विशेष टीम गठित की जा रही है जो कंपनी के बैंक खातों और फरार कर्मचारियों के लोकेशन की जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और निवेश की गई राशि की बरामदगी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

रांची को मिली विकास की रफ्तार: टनल-ओवरब्रिज प्रोजेक्ट शुरू, हजारों करोड़ से सड़क नेटवर्क मजबूत होगा

रांची/ओरमांझी. झारखंड की राजधानी रांची की विकास यात्रा में शुक्रवार को एक नया अध्याय जुड़ गया, जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से 303 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास किया, जबकि रांची में आयोजित समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रिमोट दबाकर योजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर रामपुर चौक (रांची–जमशेदपुर मार्ग) के पास भूमिगत टनल और इरबा स्थित विकास चौक (रांची–हजारीबाग मार्ग) पर आधुनिक ओवरब्रिज का निर्माण किया जाएगा। 303 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ये परियोजनाएं अगले दो वर्षों में पूरी होंगी। सेठ ने कहा कि इनसे रांची और आसपास के क्षेत्रों में यातायात सुगम होगा, जाम की समस्या कम होगी और सड़क हादसों पर भी अंकुश लगेगा। 15 दिनों के अंदर मिली मंजूरी: संजय सेठ संजय सेठ ने बताया कि उन्होंने बताया कि रामपुर चौक और विकास चौक ऐसे स्थान हैं, जहां अक्सर जाम और दुर्घटनाएं होती थीं। इस समस्या की जानकारी देने के मात्र 15 दिनों के भीतर नितिन गडकरी ने डीपीआर तैयार कराकर परियोजना को मंजूरी दे दी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री गडकरी के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान सेठ ने झारखंड में चल रही और प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1500 किमी से अधिक सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें गोला–ओरमांझी सड़क परियोजना लगभग 90 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, ओरमांझी फ्लाईओवर को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि घोरालिंग, फुलदुंगरी और बहरागोड़ा में तीन अंडरपास बनाए जा रहे हैं। चिल्गु नदी पर पुल का निर्माण 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, इटकी और चांडिल में रेल ओवरब्रिज का निर्माण प्रगति पर है। इसके अलावा चरही और चुटुपालू घाटी में सड़क चौड़ीकरण जल्द शुरू होगा और रांची–महुलिया तथा कोडरमा–मेघातरी सड़क परियोजनाओं पर भी काम जारी है। नई सड़क योजनाओं पर जल्द शुरू होगा काम उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में झारखंड को 17 हजार करोड़ रुपये की नई सड़क परियोजनाएं मिलेंगी, जिनमें 450 किमी सड़क निर्माण शामिल है। वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे का महत्वपूर्ण हिस्सा भी इसमें शामिल होगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को नई दिशा मिलेगी। इसके अलावा रांची में 6000 करोड़ रुपये की लागत से 195 किमी लंबी आउटर रिंग रोड बनाने की योजना है, जिसकी डीपीआर तैयार हो चुकी है। सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में देश में तेजी से सड़क निर्माण हो रहा है। वर्तमान में देश में प्रतिदिन लगभग 34 किमी और सालाना 15 हजार किमी सड़कें बनाई जा रही हैं, जो भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहा है। कार्यक्रम में टोल प्लाजा से जुड़ी समस्याएं भी उठीं। खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने बुंडू, ओरमांझी और तरूप टोल प्लाजा पर नियमों के विपरीत वसूली का मुद्दा उठाया। इस पर संजय सेठ ने एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिया कि 60 किमी के नियम का उल्लंघन होने पर तुरंत टोल प्लाजा को हटाया जाए। साथ ही उन्होंने ओरमांझी शास्त्री चौक पर जाम और दुर्घटनाओं को देखते हुए ओवरब्रिज निर्माण की भी जानकारी दी। विधायक ने जताई नाराजगी विधायक कच्छप ने मंच से यह भी कहा कि सरकारी कार्यक्रमों को राजनीति से दूर रखना चाहिए और सभी जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कुछ सड़कों के शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। वहीं राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से झारखंड का समग्र विकास होगा और पलायन व मानव तस्करी पर भी रोक लगेगी। मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से रांची में आवागमन और अधिक सुगम होगा।

हाईकोर्ट का अहम फैसला: दिव्यांग रेप पीड़िता को गर्भ गिराने की अनुमति, महिला की इच्छा को रखा प्राथमिकता

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में 30 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता विधवा महिला को गर्भपात की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पीड़िता को 19 माह का गर्भ है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला की शारीरिक और मानसिक सेहत सर्वोपरि है। ऐसे मामलों में उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखना उसके अधिकारों का उल्लंघन होगा। अदालत के आदेश के अनुसार गर्भपात की प्रक्रिया 11 अप्रैल को कराई जाएगी। पीड़िता दिव्यांग है और सुनने व बोलने में असमर्थ है, जिससे उसकी स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। मामले में पीड़िता की ओर से उसके भाई ने याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया कि गर्भावस्था यौन शोषण का परिणाम है, जिससे महिला को गंभीर मानसिक आघात और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। कोर्ट के निर्देश, डॉक्टरों की निगरानी में सुरक्षित तरीके से हो प्रक्रिया हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की अनुमति दी। साथ ही मेडिकल कॉलेज के डीन को निर्देश दिया गया कि अनुभवी डॉक्टरों की विशेष टीम गठित की जाए, जिसमें मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ भी शामिल हों, ताकि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अहम कोर्ट के निर्देश पर गजराराजा मेडिकल कॉलेज और कमलाराजा अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच की। रिपोर्ट में गर्भ लगभग 19 सप्ताह का पाया गया और विशेषज्ञों ने उचित चिकित्सा सुविधाओं के साथ सुरक्षित गर्भपात संभव बताया।