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CM मान का दावा: पंजाब में आया ₹1.89 लाख करोड़ निवेश

चंडीगढ़. पंजाब तेज़ी से एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र और निवेश के पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले चार वर्षों के दौरान 1.89 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश आकर्षित किया है, जिससे 6.31 लाख युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं और पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों से बाहर भी औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला है। नए निवेश प्रस्तावों के मामले में मोहाली 9,478 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अग्रणी रहा, जबकि लुधियाना 4,968 करोड़ रुपये के निवेश के साथ दूसरे स्थान पर है। निवेश के बढ़ते दायरे से निवेशकों के बढ़ते विश्वास का पता चलता है और साथ ही पूरे पंजाब में रोजगार, उद्यमिता तथा अधिक आय के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं। उद्योग विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह ऐतिहासिक निवेश घरेलू और वैश्विक निवेशकों के पंजाब के औद्योगिक इकोसिस्टम पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। सरकार ने बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी शासन और आसान प्रशासनिक स्वीकृतियों के जरिए एक निवेशक-अनुकूल माहौल तैयार किया है। मोहाली और लुधियाना सबसे आगे कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से मिले नए निवेश प्रस्तावों में मोहाली 9,478 करोड़ रुपये के साथ पहले स्थान पर है, जबकि लुधियाना 4,968 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा पटियाला में 2,590 करोड़ और होशियारपुर में 2,003 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं। फतेहगढ़ साहिब, बठिंडा, कपूरथला और जालंधर जैसे अन्य जिले भी इस विकास यात्रा में अहम योगदान दे रहे हैं। टाटा, जेएसडब्ल्यू और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, ऐची स्टील्स, वर्धमान, नेस्ले, हिंदुस्तान लीवर, कारगिल, डी हेउस, एचएमईएल, संथान टेक्सटाइल और फ्रायडेंबर्ग जैसी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश या अपने कारोबार का विस्तार किया है। एमएसएमई और क्लस्टर विकास पर फोकस सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य के प्रमुख केंद्रों में विशेष औद्योगिक क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। जैसे कि मोहाली में हाई-टेक मेटल क्लस्टर, लुधियाना में ऑयल एक्सपेलर व पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग, गारमेंट्स और हनी प्रोसेसिंग क्लस्टर, पटियाला कटिंग टूल क्लस्टर है। मुख्यमंत्री मान ने अंत में कहा कि सरकार का असली उद्देश्य केवल निवेश के आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि इस निवेश को पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और बेहतर आय के अवसरों में बदलना है। पंजाब निवेशकों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मुंगेली में पेंशन मामले पर बड़ा एक्शन, 6 निलंबित

मुंगेली. लोक शिक्षण संचालनालय ने मुंगेली जिले में दिवंगत शिक्षक के पेंशन प्रकरण मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के 6 अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. मामला लोरमी विकासखंड का है. जहां पेंशन प्रकरण में नियम प्रक्रिया को ताक पर रखकर गड़बड़ी पाये जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है जिससे हड़कंप मचा हुआ है. आने वाले दिनों में कुछ और जांच में लंबित मामले में कार्रवाई के कयास लगाये जा रहे हैं. लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश में बताया किया कि हाईस्कूल लाखासार में पदस्थ विज्ञान शिक्षक अंजनी त्रिपाठी का 25 सितंबर 2022 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था. जिसके बाद परिवार पेंशन, मृत्यु सह सेवानिवृत्ति उपादान के प्रकरण की प्रक्रिया में 2018 में शिक्षक एलबी के संविलियन के बाद किए गए वेतन निर्धारण की सक्षम प्राधिकारी से जांच एवं अनुमोदन नहीं कराया गया. विलंब से अनुमोदन के कारण अधिक भुगतान एवं वसूली की स्थिति निर्मित हुई साथ ही लंबित पेंशन के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय को अंधेरे में रखकर गलत और भ्रामक जानकारी भेजी गई. मामले में तत्कालीन प्राचार्य राघवेन्द्र कुमार सोनी, प्रभारी प्राचार्य रघुनंदन राजपूत, लिपिक मोतीराम यादव, त्रिवेणी ध्रुव, अशोक ध्रुव, डीईओ ऑफिस के पेशन कक्ष प्रभारी कनिष्ठ लेखा परीक्षक शत्रुहन कुलमित्र को निलंबित किया गया है. सभी छह कर्मचारियों द्वारा अपने काम में नियम विरूद्ध कार्य, गंभीर लापरवाही, शासकीय कार्य में लेट लतीफ जैसी कई गलतियां पाई गई. सभी निलंबित लोगों का बिलासपुर संयुक्त संचालक कार्यालय निलंबन अवधि में निर्धारित किया गया है.

गंभीर हृदय रोग से जूझते नवजात को एयर एंबुलेंस से गुजरात भेजा

उज्जैन  देवास में जन्मे नवजात को गंभीर हृदय रोग होने की खबर मिलते ही मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने जो तत्परता दिखाई, वह एक मिसाल बन गई. उज्जैन में भर्ती नवजात मासूम को तत्काल विशेषज्ञ उपचार की जरूरत थी. नवजात को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तेजी से कदम उठाया और पहले उसे सड़क मार्ग से इंदौर पहुंचाया गया. यहां से पीएम श्री एयर एंबुलेंस के जरिए करीब 2 घंटे में अहमदाबाद के एक अस्पताल में पहुंचाया गया. जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।  एयर एंबुलेंस अहमदाबाद पहुंचाया देवास के गांव जमुणी निवासी धीरज का 1 दिन का बेटा गंभीर हृदय बीमारी जूझ रहा है. जिसके बाद बच्चे को उज्जैन के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए चिकित्सा केंद्र ले जाने की सलाह दी. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अशोक कुमार पटेल सीएमएचओ को दी।  2 घंटे की यात्रा के बाद उपचार जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉक्टर अशोक कुमार पटेल और पीएम श्री एयर एंबुलेंस के नोडल अधिकारी डॉक्टर आदित्य माथुर ने तत्काल समन्वय शुरू किया. बिना समय गवाएं नवजात को एंबुलेंस से उज्जैन से इंदौर ले जाया गया और इसके बाद यहां से पीएम श्री एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद के लिए उड़ान भरी. करीब 2 घंटे की यात्रा के बाद नवजात को गुजरात के एक अस्पताल में पहुंचाया गया. जहां उसके गंभीर हृदय रोग के उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई. इतनी कम उम्र और गंभीर स्थिति को देखते हुए उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचना बेहद कठिन था।  आयुष्मान कार्ड से बच्चे का उपचार परिजन के पास आयुष्मान कार्ड होने के कारण पात्रता अनुसार नवजात के उपचार और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ निशुल्क मिल रहा है. पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य भी गंभीर मरीजों को जरूरत के मुताबिक उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध करवाना है. सीएमएचओ डॉक्टर अशोक कुमार पटेल ने कहा, "नवजात को बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद भेजा गया है. परिजन के पास आयुष्मान कार्ड से बच्चे का उपचार हो रहा है। 

मध्य प्रदेश में 940 KM सड़कें होंगी 4-लेन, ₹43 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट

भोपाल   मप्र में 43 हजार करोड़ की सड़कें बनेंगी। 940 किमी 2-लेन सड़कों को 4-लेन में बदला जाएगा। 41 हजार करोड़ रुपए खर्च आएगा। जबकि 50 जिलों की 200 किमी पुरानी हो चुकी सिंगल व डबल लेन खस्ताहाल सड़कों को सीसी रोड में बदला जाएगा।इस काम पर 4200 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन दोनों कामों से प्रदेश के करीब 2 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इनमें कई सड़कें ऐसी भी हैं, जो 25 से 30 साल से खस्ताहाल है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने अनंत चतुर्दशी पर मप्र को ये सौगात दी। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि मप्र की 940 किमी सड़कों के प्रस्ताव को वे 18 सितंबर को ही स्वीकृति कर चुके हैं। यह काम एनएचएआइ को सौंपा है। कम समय में अच्छी गुणवत्ता वाला काम हो, यह पहली प्राथमिकता है। सीएम आवास पर की प्रोजेक्ट की समीक्षा असल में केंद्रीय मंत्री गडकरी लोक परिवहन सेवा की बसों का शुभारंभ करने शुक्रवार को भोपाल आए थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनके निवास पर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्टों की समीक्षा की। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह मौजूद रहे। जबकि एमपीआरडीसी के एमडी भरत यादव ने आगामी कार्य योजना का प्रजेंटेशन भी दिया। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह भी कहा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का बटेश्वर (यूपी) से विशेष संबंध रहा है। अटल एक्सप्रेस-वे का निर्माण बटेश्वर तक करेंगे। सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत उज्जैन को जोड़ने वाले सभी मार्गों को तेजी से पूरा करें। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की सड़क कनेक्टिविटी नागपुर जबलपुर और रायपुर से बढ़ाने के लिए कार्य योजना बनाए। बालाघाट जिले में बेहतर रोड नेटवर्क के लिए कार्य योजना बनाएं। पीडब्ल्यूडी को मिलेंगी 200 किमी सड़कें असल में एनएचएआइ ने बीते 25 से 30 सालों में नए व पुराने सड़क मागर्गों का विस्तार किया है। शहरों व ग्रामीण आबादी को राहत देने के लिए बायपास बनाए हैं लेकिन मुख्य शहरों व ग्रामीण आबादी के अंदर से गुजरने वाले पुराने मार्गों का नए सिरे से निर्माण नहीं कराया, जो कि आज भी बायपास तक पहुंचने पहुंचने का का मुख्य जरिया है। जबकि ये मार्ग अभी भी एनएचएआइ के पास ही है। मप्र के करीब 50 जिलों को मिला लें तो इनकी लंबाई करीब 200 किमी के आसपास है और जिन्हें बनाने में 4200 करोड़ का खर्च आ रहा है। मप्र पहले ही केंद्र को प्रस्ताव भेज चुका है। ये बन जाए तो बड़ी राहत मिलेगी। गडकरी ने उक्त प्रस्ताव को मंजूर करने का भरोसा दिया। साथ में यह भी कहा कि इन्हें सीसी रोड बनाकर पीडब्ल्यूडी को दे देंगे। बता दें कि शहरों के अंदर व आसपास के क्षेत्रों में वर्षों पहले 2-लेन बनाए थे। ट्रैफिक के दयाव व जाम के चलते अब उन पर आरओबी बना दिए है इसके कारण इन सड़कों का विस्तार नहीं हो पाया. जो कि समय की जरुरत है। जबलपुर के पास टोल वसूली रोकने के निर्देश केंद्रीय मंत्री गडकरी ने जबलपुर के पास खस्ताहाल शहपुरा आरओबी के ठीक होने तक टोल वसूली बंद करने के निर्देश दिए हैं। उक्त आरओबी की एप्रोच रोड खराब है, जिसके कारण मार्ग डायवर्ट किया है। इस तरह राहगीर उक्त मार्ग पर बहुत कम चलते हैं, तब भी उनसे टोल वसूला जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से यह बात केंद्रीय मंत्री के सामने रखी गई। जिस पर उन्होंने तत्काल निर्णय लिया और अफसरों को निर्देश दिए।

डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ

डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ रायपुर  डीजी, जेल  हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की पहली महिला खुली जेल (वीमेन ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन -ओ.सी.आई.) का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर  योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक), श्रीमती खुशबू मिश्रा (महिला ओपन जेल प्रभारी) एवं जेल विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।        छत्तीसगढ़ राज्य में पहली बार इस प्रकार की महिला ओपन जेल प्रारंभ की गई है। रायपुर जेल में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए ओपन जेल खोला गया है।इस ओपन जेल में 25 महिला बंदिनियाँ रहेंगीl ये महिला बंदिनी सुबह विभिन्न कार्य करने के लिए जेल के बाहर निकलेंगी तथा शाम को कार्य पूर्ण कर लॉकअप होने के पूर्व जेल में वापस आ जाएंगी।          महिला बंदिनियों को जेल की ऊंची दीवारों के बाहर मंदिर के पास स्थित परिसर में सिलाई सेन्टर, ब्यूटी पार्लर एवं जेल उत्पादों के बिक्री केंद्र में रोजगार दिया जाएगा। उनके लिए रोजगार के अन्य वैकल्पिक साधन भी उपलब्ध रहेंगे।

UPITS की कहानी: योगी के प्रयासों से बदलती उत्तर प्रदेश की तस्वीर

यूपीआईटीएस: एक योगी के तप की गाथा –    नम्रता नारायण, उद्यमी, प्रबंध निदेशक, मैत्रेयी माइक्रो प्रोडक्ट्स, नोएडा नोएडा बशीर बद्र साहब का एक मशहूर शेर है- “ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं, तुम ने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा!” मेगा सिटी बनने की राह पर दौड़ते ग्रेटर नोएडा के विशालकाय एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (यूपीआईटीएस) की चमक-दमक आपको भयावह अंधेरे से लड़ाई की कहानी नहीं बताएगी। वैश्विक प्रतिनिधियों से आंख मिलाते ओडीओपी स्टाल्स यहां तक पहुंचने का संघर्ष बयान नहीं करते। पूरे आत्मविश्वास के साथ एक्सपोर्ट ऑर्डर लेते हस्तशिल्पी व कारीगर आपको उन जख्मों के निशान नहीं दिखाएंगे, जो एक दशक पहले तक रिस रहे थे। लेकिन, हकीकत यही है। यूपी में मरणासन्न स्थिति में आ चुके एमएसएमई सेक्टर के पुनर्जीवित होकर करीब चार करोड़ लोगों की जीवन-रेखा बनने तक का सफर ऐसी तमाम अनकही कहानियों से भरा है। यह एक योगी के तप की गाथा है, जिसने हालात से समझौता करने के बजाय हालात बदलने का फैसला किया। एमएसएमई बना आर्थिक क्रांति का केंद्र एक समय देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक पिछड़ेपन की पहचान माने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में विकास की एक नई और अभूतपूर्व कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दूरदर्शी सोच, नीतिगत स्पष्टता और कुशल नियोजन से राज्य की विशाल औद्योगिक क्षमता को एक तप की तरह धरातल पर उतारा है। इस आर्थिक क्रांति के केंद्र में रहा है प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, जिसे 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के जरिए न केवल नया जीवन मिला, बल्कि 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' (यूपीआईटीएस) जैसे वैश्विक मंच के माध्यम से विश्व व्यापार के पटल पर प्रमुख 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित भी किया गया।  ओडीओपी से मिली संजीवनी उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जिला अपनी किसी न किसी पारंपरिक कला, शिल्प या विशिष्ट उत्पाद के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहा है। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही की कालीन, वाराणसी की बनारसी साड़ी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे उद्योग राज्य की औद्योगिक रीढ़ हुआ करते थे। लेकिन, एक दशक पहले तक बदहाल कानून-व्यवस्था, मार्केटिंग व वित्तीय संसाधनों का अभाव, पुरानी तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन की कमी के कारण ये पारंपरिक उद्योग लगभग दम तोड़ चुके थे। स्थानीय हस्तशिल्पी, कारीगर और बुनकर आजीविका की तलाश में राज्य से पलायन करने के लिए मजबूर थे। वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी की प्रेरणा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के इस पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पहचानते हुए 'ओडीओपी' योजना की शुरुआत की। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों को चिह्नित कर उनका संरक्षण करना, उन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था।  योजना का बहुआयामी कार्यान्वयन ओडीओपी योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे धरातल पर लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति बनाई। सबसे पहले वित्तीय सहायता और ऋण सुलभता पर ध्यान दिया गया। उद्यमियों और दस्तकारों को आसान शर्तों पर पूंजी उपलब्ध कराने के लिए मुद्रा योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना जैसी पहलों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। इससे स्थानीय इकाइयों का विस्तार और आधुनिकीकरण संभव हुआ। अगले चरण में तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता सुधार पर फोकस रहा। पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और नई पैकेजिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही जीआई टैगिंग के जरिए उत्पादों की प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया गया। तीसरे चरण में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके छोटे ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को सीधे डिजिटल मार्केट-प्लेस से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता दी गई। एमएसएमई सेक्टर का पुनरुद्धार और आर्थिक प्रभाव ओडीओपी योजना के रणनीतिक क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में नए प्राण फूंक दिए। राज्य में लाखों एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए, जिससे युवाओं का पलायन रुका। एमएसएमई सेक्टर के इस कायाकल्प का सीधा असर प्रदेश के निर्यात आंकड़ों पर दिखाई देने लगा, जो आज दो लाख करोड़ के पार जा चुका है। राज्य के पारंपरिक उत्पाद जो कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हुए विश्व के अलग-अलग देशों में निर्यात होने लगे। ओडीओपी ने उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' की ओर ले जाने वाले सबसे प्रमुख इंजन का रूप ले लिया।   यूपीआईटीएस बना वैश्विक शोकेस स्थानीय स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के बाद, अगला बड़ा कदम इन उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना था। इसी सोच के साथ सीएम योगी ने 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' की नींव रखी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह व्यापार मेला महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यूपी के आर्थिक रूपांतरण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ है। यूपीआईटीएस ने दुनिया भर के आयातकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया। इस मेले में विभिन्न देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का पंजीकरण राज्य के उत्पादों में विश्व के गहरे विश्वास को दर्शाता है। इस साल ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे अग्रणी राष्ट्रों की पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागिता राज्य के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी। यह मेला न केवल आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ेगा, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदे हासिल करने का सीधा अवसर प्रदान करेगी।   ज्ञान के आदान-प्रदान का भी मंच यूपीआईटीएस केवल बिक्री का जरिया नहीं बनता, बल्कि यह स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक व्यापार की बारीकियों से अवगत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेले के दौरान आयोजित विशेष सत्रों में 'ई-कॉमर्स व डिजिटल मार्केट एक्सेस', 'ब्रांड निर्माण', 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के लाभ' और 'न्यू टेक्नोलॉजी का उपयोग' जैसे विषयों पर विशेषज्ञ उद्यमियों का मार्गदर्शन करते हैं। इस बहुआयामी दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित हुआ कि राज्य की एमएसएमई इकाइयां न केवल पारंपरिक विनिर्माण में आगे रहें, बल्कि आधुनिक तकनीक, सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड मानकों को अपना कर खुद को भविष्य के अनुकूल … Read more

राजस्थान के आसमान में गरजेंगे राफेल-एफ16, 3,000 जवानों के साथ शुरू हुआ ‘तरंगशक्ति’

जयपुर भारतीय वायुसेना (IAF) के इतिहास के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति:2026' का आधिकारिक आगाज आज यानी शनिवार से वायुसेना स्टेशन जोधपुर में हो रहा है। आगामी 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेगा मिलिट्री इवेंट में दुनिया भर के 8 ताकतवर देश अपने अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट एसेट्स के साथ हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 32 अन्य देश इस ऐतिहासिक युद्धाभ्यास को देखने के लिए ऑब्जर्वर के तौर पर जोधपुर में मौजूद रहेंगे। युद्धाभ्यास के शुरू होने से एक दिन पहले ही यानी शुक्रवार से ही विभिन्न मित्र देशों के विशालकाय ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जोधपुर एयरबेस पर उतरने शुरू हो गए थे, जिससे पूरे पश्चिमी राजस्थान में रक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है। शुक्रवार को जोधपुर एयरबेस पर उतरे विमानों में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स का सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस, अमरीका वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर, बांग्लादेश का सी-130 जे और फ्रांस की वायुसेना 'आर्मा द लेयर' का ए330 एमआरटीटी शामिल रहे। इन मालवाहक विमानों के जरिए विदेशी सेनाओं के सैनिक दल, तकनीकी स्टाफ और अन्य जरूरी साजो-सामान जोधपुर पहुंच चुके हैं, जबकि विभिन्न देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का पहुंचना आज से शुरू हो रहा है। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास के जरिए भारत अपनी सामरिक ताकत, लॉजिस्टिक्स क्षमताओं और रक्षा कूटनीति का पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शन कर रहा है, जिसका केंद्र इस बार मरुधरा की धरती यानी जोधपुर बना है 100 से अधिक लड़ाकू विमान, 3000 सैनिक ले रहे हिस्सा 'तरंगशक्ति' का यह दूसरा संस्करण है, जिसे अब तक का सबसे व्यापक और बड़ा वायु अभ्यास माना जा रहा है। इससे पहले इसका पहला संस्करण वर्ष 2024 में तमिलनाडु के सुलूर और जोधपुर में आयोजित किया गया था, लेकिन इस बार इसका दायरा और अधिक विस्तृत किया गया है। भाग लेने वाले देश: इस युद्धाभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया कुल 8 देश अपने लड़ाकू विमानों के साथ मैदान में उतर रहे हैं। ऑब्जर्वर देश: दुनिया भर के 32 देश इस पूरी सैन्य गतिविधि का जायजा लेने के लिए बतौर ऑब्जर्वर जोधपुर में शिरकत कर रहे हैं। फाइटर जेट्स और जवान: इस पूरे मेगा इवेंट में कुल मिलाकर 100 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान आसमान में अपनी ताकत दिखाएंगे, और करीब 3,000 सैन्य जवान व पायलट इस ऑपरेशन का हिस्सा बनेंगे। एयरबेस का दायरा: मिशन की जटिलता और विशालता को देखते हुए इस अभ्यास के संचालन के लिए 4 से 5 प्रमुख एयरबेसों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें जोधपुर एयरबेस मुख्य कमांड सेंटर के रूप में कार्य कर रहा है। भीषण गर्मी बनेगी विदेशी पायलटों के लिए चुनौती! जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में अक्टूबर महीने की शुरुआत में मौसम अपने तीखे तेवर दिखा रहा है। मानसून की विदाई के बाद जोधपुर में दिन का अधिकतम तापमान अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही दिन के समय हवा में नमी करीब 25 प्रतिशत के आसपास रहने के कारण मारवाड़ में भीषण लू जैसे हालात बने हुए हैं। विदेशी वायुसेना के पायलटों और तकनीकी दलों के लिए रेगिस्तान की इस प्रचंड गर्मी और तापमान से निपटना इस युद्धाभ्यास की सबसे बड़ी और शुरुआती चुनौती साबित होने वाली है। रक्षा जानकारों का कहना है कि भारतीय वायुसेना के साथ पूर्व में हुए 'वीर गार्जियन' जैसे अभ्यासों के दौरान भी जापान और अन्य पश्चिमी देशों के सैनिकों को राजस्थान की इस विशेष भौगोलिक गर्मी से तालमेल बिठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। विदेशी एयरक्रू को यहां के शुष्क और गर्म मौसम में ऑपरेशनल रूटीन बनाए रखने के लिए विशेष एयर कंडीशनिंग और हाइड्रेशन प्रोटोकॉल फॉलो करने पड़ रहे हैं। भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित यह युद्धाभ्यास केवल दो देशों के बीच की सैन्य ड्रिल नहीं है, बल्कि यह एक 'मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज' है। इसका मुख्य उद्देश्य मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा युद्ध रणनीतियों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और कंबाइंड ऑपरेशंस की क्षमताओं को परखना और मजबूत करना है। आज के दौर में जब वैश्विक सुरक्षा के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, तब भारत की धरती पर दुनिया की शीर्ष वायुसेनाओं का एक साथ आना भारत की बढ़ती रणनीतिक साख और तकनीकी दक्षता को रेखांकित करता है। जोधपुर एयरबेस पर अगले कई दिनों तक सुखोई, राफेल, एफ-16 और अन्य आधुनिक फाइटर जेट्स की गर्जना से मरुधरा का आसमान गूंजता रहेगा। 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के दौरान विभिन्न जटिल सामरिक परिदृश्यों का अभ्यास किया जाएगा, जिससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना की तैयारी और अधिक पुख्ता होगी।

चलती बस गैंगरेप मामले पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा बयान, बोलीं- ‘गलती हुई थी’

नई दिल्ली  हाल में ही राजधानी दिल्ली में गैंगरेप, महिलाओं से छेड़छाड़ समेत कई गंभीर आपराधिक मामले सामने आए हैं। सिलसिलेवार हुई इन घटनाओं के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासन की कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन घटनाओं से सबक ले रही है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। टाइम्स नाउ के पॉडकास्ट में टाइम्स ग्रुप की एडिटर-इन-चीफ नविका कुमार से बातचीत के दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने 16 वर्षीय लड़की से चलती बस में गैंगरेप के मामले पर प्रशासन की गलती को स्वीकार किया है। सीएम रेखा गुप्ता से जब पूछा गया किय 2012 में हुए गैंगरेप के मामले से क्या उन्होंने सबक नहीं लिया और 47 किलोमीटर तक चलने वाली बस को कई चेकपॉइंट से गुजरने के बावजूद एक बार भी क्यों नहीं रोका गया। गैंगरेप की घटना पर मानी गलती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जवाब में कहा, 'निश्चित रूप से, एक गलती हुई थी। बस की जांच नहीं की गई थी। इस घटना के बाद, सभी एजेंसियों को एहसास हुआ कि किसी भी बस को नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हां, 11 चालान काटे गए थे। मैंने यह भी कहा है कि किसी भी बस के ड्राइवर या कंडक्टर का भले ही वह प्राइवेट एजेंसी का हो पूरा पुलिस रिकॉर्ड चेक किया जाना चाहिए। किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसका क्रिमिनल रिकॉर्ड हो, चाहे वह स्कूल बस चला रहा हो, प्राइवेट बस या सरकारी बस, उसे अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सभी का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है। इन चीजों को सख्ती से लागू किया जाएगा।' 'हर घटना हम सभी के लिए दर्दनाक' सीएम रेखा गुप्ता ने आगे कहा, 'ऐसा नहीं है कि हमने कुछ सीखा नहीं है। मैं कह सकती हूं कि इस शहर में होने वाली हर घटना हम सभी के लिए दुखद होती है। उन्होंने कहा, अगर मैं अपनी बात करूं, एक मां, एक महिला, एक मुख्यमंत्री और समाज के एक हिस्से के तौर पर तो ऐसी घटना होने पर हमें भी उतना ही दुख होता है। रेखा गुप्ता ने कहा, हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि ऐसी कोई घटना न हो। हम 100 प्रतिशत नतीजे चाहते हैं। हम इसी उम्मीद में काम करते हैं कि हमें 100 प्रतिशत नतीजे मिलें। पुलिस बल दिन-रात काम करते हैं। पूरा प्रशासन और सिस्टम इसमें शामिल होता है। लेकिन अगर एक भी घटना होती है, तो वह हम सभी के लिए दुखद होती है।' आस्था कुंज गैंगरेप के बाद डार्क स्पॉट पर जोर दक्षिण दिल्ली के कालकाजी में आस्था कुंज पार्क में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर रेखा गुप्ता ने कहा, 'किसी बेटी या महिला के साथ होने वाली हर घटना के बारे में मैं तुरंत पता लगाने की कोशिश करता हूं कि यह कैसे हुई, क्या हुआ, और किन चीजों को ठीक करने की जरूरत है या सरकार को क्या काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सभी एजेंसियों को ऐसे डार्क स्पॉट तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। ये सेंसर से जुड़ी हैं और खराब होने पर कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट मिलता है, जिसके बाद संबंधित एजेंसी उसे ठीक करने पहुंचती है। सत्य निकेतन हादसे पर बोलीं- जिम्मेदारी से इनकार नहीं सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने इसके लिए पिछली सरकारों पर भी दोष मढ़ा। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगी कि कोई जिम्मेदारी नहीं है। जिम्मेदारी तो जरूर है। दिल्ली एक दिन में नहीं बनी। यह कई सालों में बनी। तब कौन सी सरकारें थीं? नगर निगम में कौन था? दिल्ली सरकार में कौन था?' पुरानी सरकारों पर खड़े किए सवाल पीजी के रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई अब शुरू होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'मुझे CM बने डेढ़ साल हो गए हैं। क्या हमसे पहले कोई सरकार नहीं थी? अब तक ऐसा क्यों नहीं किया गया? क्या इससे पहले दिल्ली में कोई घटना नहीं हुई थी? क्या आग नहीं लगी या इमारतें नहीं गिरीं? सरकारें अब तक सो क्यों रही थीं? क्या वे रेखा गुप्ता के आने और कुछ करने का इंतजार कर रही थीं? कम से कम रेखा गुप्ता घटना वाली जगह पर जाती हैं और वहां तीन घंटे तक खड़ी रहती हैं। और वह दर्द को समझती और महसूस करती हैं। वह प्रशासन पर नजर भी रखती हैं, ताकि मशीनरी पहुंचने में कोई देरी न हो।' उन्होंने कहा, 'मैंने वह किया जो दूसरी सरकारों ने नहीं किया। दिल्ली में SDRF नहीं था। जब आपको कहीं से तुरंत राहत की जरूरत होती है, तो आपको ऐसी फोर्स चाहिए होती है जो उस स्थिति को संभाल सके। दिल्ली के पास ऐसा काम करने के लिए कोई फोर्स नहीं थी। उस घटना के बाद, दिल्ली के पास अपना SDRF है। मैं भी पूछ सकती हूं कि पिछली सरकारों ने ऐसा क्यों नहीं किया? जब पहले ऐसी घटनाएं होती थीं, तो CM कितनी बार वहां जाकर खड़े हुए और बात की?'

पानीपत के सिवाह गांव में जमीन का मुआवजा बढ़ा, हाई कोर्ट ने तय किया ₹78 लाख

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में पानीपत के सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित अवधि के वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हों तो पुराने अवॉर्ड को महज उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। जमीन की कीमत तय करते समय उसी क्षेत्र की तुलनीय बिक्री, जमीन की स्थिति, आकार और लेन-देन की वास्तविकता को ध्यान में रखना जरूरी है। हरियाणा सरकार की अपील खारिज हाई कोर्ट ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।जस्टिस जगमोहन बंसल ने राज्य सरकार और जमीन मालिकों से जुड़ी कई अपीलों पर साझा फैसला सुनाया। मामला पानीपत जिले के सीवाह गांव में 25 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा था 28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी हुई थी, जबकि 16 अप्रैल 2013 को धारा छह की अधिसूचना जारी की गई। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 26 सितंबर 2013 को मुआवजा तय करते हुए बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था। इसके बाद जमीन मालिकों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और जमीन मालिक दोनों हाई कोर्ट पहुंचे थे। हाई कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई बिक्री विलेख पेश किए थे। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक सामने आई। बिक्री विलेखों की कीमत 35 से 40 लाख रुपये वहीं राज्य सरकार द्वारा पेश बिक्री विलेखों में कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ थी। कोर्ट ने माना कि जमीन के अधिक करीब स्थित बिक्री विलेख और वास्तविक बाजार मूल्य बताने वाले लेन-देन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2007 के अधिग्रहण से संबंधित पुराने अवॉर्ड को सीधे आधार बनाना उचित नहीं था, क्योंकि वर्ष 2010-14 के तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध थे। कोर्ट ने संबंधित बिक्री विलेखों का विश्लेषण करते हुए वृद्धि और कमी के सिद्धांत लागू किए। इसके बाद जमीन का उचित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया। कोर्ट ने कहा कि भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण के लिए कोई कठोर और एकमात्र फार्मूला नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित अनुमान लगाया जा सकता है।

पंचायत चुनाव टलने की अफवाहों पर विराम, निर्वाचन आयोग ने किया साफ

जयपुर राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या राज्य में होने वाले आगामी पंचायती राज चुनाव एक बार फिर टल सकते हैं? दरअसल, सोशल मीडिया और विभिन्न अन्य माध्यमों से कुछ असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि आगामी महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों की अड़चन के चलते चुनाव की मियाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस तरह की अफवाहों के कारण पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों के बीच असमंजस और ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई थी। ग्रामीण मतदाताओं के मन में भी संशय बनने लगा था कि क्या तय समय पर चुनाव हो पाएंगे या नहीं। स्थितियों को स्पष्ट करते हुए और जनता के बीच भ्रम को दूर करने के लिए खुद राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने इस मामले में कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए एक आधिकारिक संदेश जारी किया गया है, जिसमें सभी प्रकार की अफवाहों का खंडन किया गया है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव अपनी निर्धारित समयावधि के भीतर ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाएंगे। इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद चुनाव तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है, वहीं प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अफवाहों से सावधान रहने की अपील, समय पर होगी पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और मंचों के माध्यम से प्रदेश की जनता, पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों से विशेष रूप से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। अपने संदेश में उन्होंने जनता को सचेत करते हुए लिखा कि इस तरह की भ्रामक सूचनाएं केवल माहौल खराब करने के लिए फैलाई जाती हैं, इसलिए ऐसे लोगों से पूरी तरह सावधान रहने की जरूरत है। निर्वाचन आयुक्त ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया को हर हाल में 15 नवंबर 2026 से पूर्व सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया जाना है। चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन की प्रशासनिक तैयारियों में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है, और आयोग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। लॉटरी प्रक्रिया और त्योहारों के बीच तालमेल बैठा रहा है निर्वाचन आयोग संभावित चुनाव कार्यक्रमों की रूपरेखा और प्रशासनिक अड़चनों पर प्रकाश डालते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि पंचायती राज विभाग द्वारा हाल ही में संपन्न कराई गई आरक्षण और वार्डों की लॉटरी से जुड़ी संकलित सूचनाएं अब राज्य निर्वाचन आयोग को प्राप्त हो रही हैं। इन तमाम आंकड़ों के आधार पर एक व्यवस्थित और चरणबद्ध चुनावी कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। आयोग संबंधित प्रशासनिक विभागों और सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रहा है। चूंकि इस दौरान कई महत्वपूर्ण पर्व और त्योहार भी आ रहे हैं, इसलिए पर्वों की तिथियों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही मतदान की तारीखों का ऐसा खाका खींचा जा रहा है जिससे आम नागरिकों या त्योहारों को कोई असुविधा न हो। जल्द होगी आधिकारिक चुनाव घोषणा, उम्मीदवारों ने तेज की तैयारियां राज्य निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि राजस्थान में पंचायती राज चुनाव तय समय सीमा के भीतर ही आयोजित होंगे। निर्वाचन आयोग द्वारा बहुत जल्द औपचारिक चुनाव तिथियों और आचार संहिता की घोषणा किए जाने की संभावना है। इस घोषणा के बाद से ही राजस्थान के गांवों, ढाणियों और जिला मुख्यालयों की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवारों ने अपने जनसंपर्क अभियानों को गति दे दी है और राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ग्रामीण जनता अब अपने क्षेत्र के विकास के लिए नए जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर पूरी तरह उत्साहित नजर आ रही है।