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क्राइम कंट्रोल के लिए बड़ा प्लान, शिमला में होगी रणनीति; चंडीगढ़ ने पड़ोसी राज्यों से मांगा साथ

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन 19 जून को शिमला में होने वाली उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगा। इसके अलावा बुनियादी ढांचा विकास, ट्रैफिक प्रबंधन और सुखना वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) घोषित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शहर में अपराध करने के बाद कई आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में फरार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों की तलाश और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए समिति के सदस्य राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की जाएगी। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन रिंग रोड परियोजना को शीघ्र पूरा करने का मुद्दा भी बैठक में उठाएगा। इससे अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना बाहरी मार्ग से ही आगे भेजा जा सकेगा। मोहाली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक कम दूरी वाले मार्ग का मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है। बैठक में सुखना वन्यजीव सेंचरी के आसपास ईको-सेंसिटिव जोन घोषित करने का मामला भी उठाया जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन लंबे समय से पंजाब सरकार से इस दिशा में कार्रवाई की मांग करता रहा है। पंजाब ने अभयारण्य की सीमा से 2 से 2.75 किलोमीटर तक के क्षेत्र को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, जबकि पहले केवल 100 मीटर क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया था। दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में 1 से 1.5 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने की मंशा जताई है। बैठक में चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा चंडीगढ़ शामिल हैं। स्थायी समिति की बैठक का उद्देश्य मुख्य परिषद बैठक के लिए एजेंडा तैयार करना है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने केवल चंडीगढ़ क्षेत्र के लिए ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित किया था। चंडीगढ़ प्रशासन लगातार यह मांग करता रहा है कि सुखना वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण के लिए पंजाब और हरियाणा के हिस्सों को भी ईएसजेड के दायरे में लाया जाए। प्रशासन का मानना है कि इससे झील और अभयारण्य के आसपास अनियंत्रित व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।  

OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला करीब? सात साल से लंबित मामले की 24 जून से होगी लगातार सुनवाई

 जबलपुर मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और सात वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद मामले में अब सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ ने मामले की गंभीरता और इससे प्रभावित हजारों अभ्यर्थियों के हितों को देखते हुए 24 जून 2026 से प्रतिदिन सुनवाई (डे-टू-डे हियरिंग) करने का फैसला लिया है। प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की विशेष युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण मामले में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी। इस दौरान ओबीसी आरक्षण विवाद से संबंधित 91 याचिकाएं और संबद्ध प्रकरण सूचीबद्ध थे। सुनवाई के दौरान ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय से मुख्य याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने वैकल्पिक रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश के संदर्भ में अंतरिम आदेशों को निरस्त करने से जुड़े लंबित आवेदनों पर विचार करने की मांग भी रखी। अधिवक्ता ठाकुर ने दलील दी कि आरक्षण विवाद के कारण बड़ी संख्या में शासकीय नियुक्तियां वर्षों से लंबित हैं और हजारों अभ्यर्थी करीब सात साल से अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में मामले का शीघ्र निराकरण आवश्यक है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पहली बार उनके समक्ष सूचीबद्ध हुआ है और सभी पक्षों को विस्तृत सुनवाई का समुचित अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने व्यापक और बहुस्तरीय विवाद का न्यायसंगत समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएं। इसी को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने 24 जून से प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि नियमित सुनवाई से लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है और नियुक्तियों का रास्ता भी साफ हो सकता है।     ओबीसी आरक्षण विवाद से राज्य की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाएं, चयन सूचियां व हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। लिहाजा, अब निगाहें जाहिर तौर पर 24 जून पर टिकी हैं, जब हाई कोर्ट इस बहुप्रतीक्षित मामले की नियमित सुनवाई आरंभ करेगा। उम्मीद की जा रही है कि लगातार सुनवाई से वर्षों से लंबित इस संवेदनशील संवैधानिक विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति हो सकेगी।     -संदीप जैन, अधिवक्ता, मप्र हाई कोर्ट।  

किसानों को बड़ी राहत! CM हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज होते ही 24 घंटे में कार्रवाई

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सराईटीकरा निवासी किसान राजनाथ राजवाड़े की समस्या का समाधान शिकायत दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर कर प्रशासन ने इसकी उपयोगिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार खरीफ फसल के लिए खाद की व्यवस्था को लेकर चिंतित किसान राजनाथ राजवाड़े ने खेत में बैल चराने के दौरान मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के बारे में जानकारी मिलने पर अपनी समस्या दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और करीब दो घंटे के भीतर कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली तथा उनके घर पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू की। जांच में पता चला कि शासकीय व्यवस्था के माध्यम से खाद एवं बीज प्राप्त करने के लिए किसान का सहकारी बैंक में खाता तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) होना आवश्यक है। अधिकारियों ने पहल करते हुए किसान को पूरी प्रक्रिया में सहयोग प्रदान किया। बैंक का समय समाप्त हो जाने के कारण अगले दिन सहकारी बैंक में उनका खाता खुलवाया गया, पासबुक जारी की गई और आवश्यक दस्तावेज जमा कराए गए। इसके बाद अल्प समय में किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया गया। केसीसी मिलने के साथ ही किसान को आवश्यक खाद और बीज उपलब्ध करा दिए गए तथा भविष्य में कृषि कार्यों के लिए ऋण और नकद सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया भी सुगम हो गई। बिना किसी कार्यालय के चक्कर लगाए समस्या का समाधान होने पर किसान ने संतोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के 24 घंटे के भीतर ही पूरा कार्य हो गया और उन्हें खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा। उन्होंने किसानों और आम नागरिकों के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था को उपयोगी बताते हुए मुख्यमंत्री तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

बार चुनाव लड़ना हुआ महंगा! भोपाल में नामांकन शुल्क में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से वकीलों में नाराजगी

भोपाल  राजधानी भोपाल बार संघ चुनाव इस बार प्रत्याशियों के लिए बेहद खर्चीला साबित हो रहा है, क्योंकि विभिन्न पदों की नामांकन फीस में 42% से लेकर रिकार्ड 75% तक की भारी वृद्धि की गई है। इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्धि (75%) सह-सचिव, कोषाध्यक्ष और पुस्तकालयाध्यक्ष के पदों पर देखी गई है, जिनकी फीस सीधे 20 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये कर दी गई है। वहीं सबसे बड़े यानी अध्यक्ष पद के लिए भी दो वर्ष पहले की तुलना में सीधे 42.85% (15,000 रुपये) का इजाफा किया गया है। फीस में की गई यह बेतहाशा बढ़ोतरी इस समय कोर्ट परिसर में उम्मीदवारों और वकीलों के बीच चर्चा और आक्रोश का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती इस बढ़ोतरी पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रियनाथ पाठक ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस प्रकार चुनाव लड़ने के लिए नामांकन शुल्क में 50 से 75 फीसदी तक की वृद्धि की गई है, उससे सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि जो अधिवक्ता आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनके लिए अब चुनाव लड़ना बेहद मुश्किल काम हो गया है। इसके कारण कई योग्य उम्मीदवार चुनाव मैदान से दूर रहने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं, सचिव पद (जिसमें 60% की वृद्धि हुई है) का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी अनुराग दुबे ने भी इस बढ़ी हुई फीस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे उम्मीदवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। नियमों को ताक पर रख उड़ाई जा रही आचार संहिता की धज्जियां चुनाव का प्रचार और जनसंपर्क कोर्ट परिसर में बहुत तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके साथ ही चुनावी आचार संहिता के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक कोर्ट परिसर के भीतर किसी भी तरह के झंडे, बैनर या पोस्टर लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद, सख्त हिदायतों और पाबंदियों को ताक पर रखकर पूरे परिसर को प्रचार सामग्री से पाट दिया गया है। कोर्ट परिसर की दीवारों, खंभों और दरवाजों पर प्रत्याशियों के पोस्टर और झंडे साफ नजर आ रहे हैं, जिससे आचार संहिता का खुला उल्लंघन दिखाई दे रहा है। क्यों बढ़ानी पड़ी फीस? इस बार बारिश के मौसम को देखते हुए वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था करनी होगी, जिसके कारण टेंट का खर्च काफी महंगा होने वाला है। इसके अलावा, समय के साथ स्टेशनरी की लागत भी बढ़ गई है। कुल मिलाकर विगत दो वर्षों में महंगाई में काफी ज्यादा इजाफा हुआ है, इसी व्यावहारिक कारण से इस बार नामांकन फीस में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है।" वासु वासवानी, मुख्य चुनाव अधिकारी, भोपाल बार काउंसिल। विभिन्न पदों के लिए निर्धारित नामांकन फीस की तुलनात्मक तालिका पद का नाम -वर्तमान निर्धारित फीस -दो वर्ष पहले की फीस- सीधे हुई बढ़ोतरी -कुल प्रतिशत वृद्धि (%) अध्यक्ष- 50,000 रुपये -35,000 रुपये- 15,000 रुपये- 42.85% की वृद्धि उपाध्यक्ष- 45,000 रुपये -30,000 रुपये- 15,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि सचिव- 40,000 रुपय -25,000 रुपये- 15,000 रुपये- 60.00% की वृद्धि सह-सचिव- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि कोषाध्यक्ष- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि पुस्तकालयाध्यक्ष-35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-15,000 रुपये- 10,000 रुपये- 5,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-7,500 रुपये- 5,000 रुपये- 2,500 रुपये- 50.00% की वृद्धि। 

मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का डरावना सच, 1.3 लाख घायल; 61% हादसों में युवा शामिल

भोपाल  राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से रोजाना सड़क हादसों की खबरें सामने आती हैं. तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है. अब सड़क दुर्घटनाओं को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में प्रदेश में 1 लाख 3 हजार से ज्यादा लोग सड़क हादसों का शिकार हुए हैं।  प्रदेश भर में हर दिन औसतन 283 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए. सबसे चिंता की बात यह है कि इन हादसों का सबसे बड़ा शिकार युवा वर्ग बन रहा है. करीब 61 प्रतिशत युवा सड़क दुर्घटनाओं के शिकार बन रहे हैं।  सड़क दुर्घटना की भेंट चढ़ रहे एमपी के युवा मध्य प्रदेश में सड़कों पर बढ़ती रफ्तार अब लोगों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि मई 2025 से 2026 तक में 1 लाख 3 हजार 294 सड़क दुर्घटना हुई हैं, जिनमें चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और इनमें शामिल युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है।  हादसों में किस उम्र वर्ग के कितने प्रतिशत लोग     16 से 30 वर्ष आयु – 61 प्रतिशत     31 से 45 वर्ष आयु – 24 प्रतिशत     46 से 60 वर्ष आयु – 9 प्रतिशत     अन्य आयु वर्ग – 6 प्रतिशत 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने कहा, "मेरी टीम हर आपात स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर पहुंचकर लोगों की जान बचाने का प्रयास करती है. हर कॉल मेरे लिए किसी की जिंदगी बचाने का अवसर होती है. टीम का प्रयास रहता है कि कम से कम समय में घटनास्थल पर पहुंचकर मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।  108 सेवा उपयोग करने की अपील उन्होंने आगे लोगों से अपील करते हुए कहा, "किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में निजी वाहन के बजाय 108 एंबुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहता है, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज को आवश्यक उपचार देना शुरू कर देता है।  108 एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रफ्तार की सनक लोगों पर कितनी भारी पड़ रही है. हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले एक साल में एक लाख तीन हजार से अधिक घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन सड़क पर कुछ सेकंड की लापरवाही किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि रफ्तार नहीं, जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जाए. क्योंकि मंजिल तक पहुंचना जरूरी है, लेकिन सुरक्षित पहुंचना उससे भी ज्यादा जरूरी है। 

झारखंड राज्यसभा चुनाव में नथवानी फैक्टर! जीत का रिकॉर्ड बरकरार रहेगा या हेमंत सोरेन की रणनीति पड़ेगी भारी?

 नई दिल्ली झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. इन राज्यसभा दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं, जिसके चलते गुरुवार को वोटिंग होगी. बीजेपी के समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी के उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बन गया है।  कारोबारी और सांसद के रूप में पहचान रखने वाले नथवानी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनके चुनावी जीत का रिकॉर्ड है. नथवानी अब तक तीन चुनाव जीत चुके हैं और कोई चुनाव नहीं हारे हैं. चौथी बार राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे हैं, लेकिन जीत के लिए बीजेपी का समर्थन ही काफी नहीं है।  झारखंड की सियासत में सीएम हेमंत सोरेन के अगुवाई में जेएमएम और कांग्रेस ने दोनों राज्यसभा सीटें जीतने की रणनीति बनाई है. जेएमएम-कांग्रेस के चक्रव्यूह को तोड़कर क्या परिमल नथवानी एक बार फिर इतिहास रच पाएंगे?  झारखंड की दो सीट पर 3 प्रत्याशी झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में है. जेएमएम से बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं तो निर्दलीय तौर पर परिमल नथवानी किस्मत आजमा रहे हैं. नथवानी को बीजेपी का समर्थन है, जिसके चलते मुकाबला रोचक हो गया है. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 28 विधायकों का प्रथम वरीयता के आधार पर वोट चाहिए।  झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और लेफ्ट के दो विधायक हैं. वहीं, एनडीए के पास 24 विधायक है, जिसमें बीजेपी से 21, आजसू 1, जेडीयू 1, एलजेपी के 1 विधायक हैं. इस तरह से परिमल नथवानी को जीत दर्ज करने के लिए 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है।  क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा विधानसभा में नंबर गेम के लिहाज से जेएमएम की जीत तय है, लेकिन कांग्रेस के लिए महागठबंधन को एकजुट रखना होगा. विधानसभा में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन है, जिसके लिहाज से दोनों ही सीटें जीत सकती है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी के उतरने व बीजेपी के समर्थन से मुकाबला रोचक हो गया है. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का खतरा बनता दिख रहा है।  राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए महागठबंधन के पास नंबर पूरे हैं, लेकिन परिमल नथवानी को बीजेपी के समर्थन करने के बाद भी 4 अतरिक्त वोटों की जरूरत है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग का खतरा साफ नजर आ रहा है. नथवानी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है तो कांग्रेस और जेएमएम अपने खेमे को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।  परिमल नथवानी कभी चुनाव नहीं हारे  परिमल नथवानी का झारखंड के साथ पुराना और गहरा नाता है और मंझे हुए सियासी खिलाड़ी हैं. नथवानी मुख्य तर पर कारोबारी हैं और रिलाइंस से जुड़े हुए हैं, लेकिन सियासी पिच पर उतरे तो अपना पहला राज्यसभा चुनाव 2008 में झारखंड से लड़ा. परिमल नथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार को रूप में किस्मत आजमाया था,  लेकिन उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला. उस समय क्रॉस वोटिंग ने उनकी राह आसान की और वे राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. आरजेडी के विधायकों का समर्थन उन्हें मिला था, जिसके दम पर जीतने में सफल रहे।  जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती से जूझ रहा है. नथवानी की उम्मीदवारी को लेकर एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि वे झारखंड की राजनीति में दलगत सीमाओं से ऊपर स्वीकार्यता रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या परिमल नथवानी अपने अजेय चुनावी रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए चौथी बार राज्यसभा पहुंचेंगे, या फिर झारखंड की बदलती राजनीतिक गणित उनके विजय अभियान पर विराम लगाएगी।  2014 में नथवानी ने दूसरी बार झारखंड से राज्यसभा का चुनाव लड़ा. भाजपा और आजसू के समर्थन से उन्होंने नामांकन दाखिल किया और निर्विरोध निर्वाचित हो गए. इस जीत ने उन्हें झारखंड से लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचाने का रिकॉर्ड दिया. वे झारखंड से दूसरी बार राज्यसभा पहुंचने वाले एकलौते निर्दलीय सांसद बने।  परमिल नथवानी का तीसरा बड़ा चुनाव 2020 में हुआ, लेकिन इस बार मैदान झारखंड नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश को चुनाव. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से वे राज्यसभा के लिए चुने गए और संसद के उच्च सदन में अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया. इस तरह लगातार तीसरी बार राज्यसभा सांसद बने।    नथवानी क्या चौथी बार जीत दर्ज करेंगे अब 2026 के राज्यसभा चुनाव में परिमल नथवानी ने झारखंड से लड़ने का फैसला किया. एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी उतरे, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन हासिल है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा की रणनीति केवल सीट जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष में संभावित क्रॉस वोटिंग की संभावना को भी भुनाने की है। 

राष्ट्रपति के स्वागत को तैयार ओंकारेश्वर, कड़ी सुरक्षा के बीच कई मार्ग डायवर्ट; MP दौरे की शुरुआत आज

ओंकारेश्वर  महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश दौरे पर होंगी, जिसमें से 18 और 19 जून को वे ओंकारेश्वर में होंगी।  राष्ट्रपति के दौरे को लेकर तीर्थ नगरी पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील हो गई है. जिला प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है. कार्यक्रम स्थल, मंदिर परिसर, हेलीपेड, वीआईपी मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।  ओंकारेश्वर रहेगा नो-ड्रोन एरिया कलेक्टर ऋषव गुप्ता द्वारा जारी आदेश के अनुसार, '' 17 से 19 जून तक संपूर्ण ओंकारेश्वर क्षेत्र और कोठी हेलीपेड के आसपास दो किलोमीटर का दायरा 'नो-ड्रोन जोन' घोषित किया गया है. इस अवधि में किसी भी प्रकार के ड्रोन या ड्रोन कैमरे के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।  इन वस्तुओं के साथ कार्यक्रम स्थल में प्रवेश प्रतिबंधित सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन, धारदार हथियार, पानी की बोतलें, ज्वलनशील पदार्थ, पटाखे, लाठी-डंडे, छाते, औजार, तंबाकू उत्पाद, बैग, झोले तथा अन्य संदिग्ध सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. सभी आगंतुकों को सुरक्षा जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा।  तीन दिन बदली रहेगी ओंकारेश्वर में यातायात व्यवस्था राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए 17 जून से 19 जून दोपहर 12 बजे तक विशेष यातायात व्यवस्था लागू रहेगी. इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा, जिससे ओंकारेश्वर क्षेत्र में यातायात का दबाव कम रहे और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।  श्रद्धालुओं के लिए विशेष पार्किंग व्यवस्था इंदौर, खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को ट्रेंचिंग ग्राउंड (नया बस स्टैंड) और ताम्रकर (गणेश नगर) पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा. यहां से श्रद्धालुओं को पैदल मंदिर और घाट क्षेत्र तक जाना होगा. वही, बसों की पार्किंग मोरटक्का में रहेगी, जहां से प्रशासन द्वारा विशेष परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।  राष्ट्रपति के काफिले के दौरान रहेगा नो-व्हीकल जोन राष्ट्रपति के काफिले के आवागमन के दौरान सुरक्षा कारणों से निर्धारित मार्गों पर अस्थाई रूप से नो-व्हीकल जोन लागू किया जाएगा. राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात को पुनः सामान्य कर दिया जाएगा।      सिंहस्थ 2028 में AI बताएगा कब आएगा आंधी-तूफान! करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हाईटेक सिक्योरिटी प्लान     जंगल की सुरक्षा में तैनात फायर फाइटर की टाइगर ने ली जान, कान्हा टाइगर रिजर्व में खौफनाक घटना जिला प्रशासन और यातायात पुलिस ने श्रद्धालुओं तथा स्थानीय नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे निर्धारित पार्किंग और डायवर्जन व्यवस्था का पालन करें, प्रतिबंधित सामग्री साथ न लाएं और यात्रा के लिए पर्याप्त समय लेकर निकलें।  भारी वाहनों का रूट बदला गया     इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले भारी मालवाहक वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा।     इंदौर से खंडवा जाने वाले भारी वाहन तेजाजी नगर, महू, मानपुर, धामनोद, खरगोन, भीकनगांव और देशगांव होते हुए खंडवा जाएंगे।     सिमरोल से आने वाले वाहन मंडलेश्वर, कसरावद, खरगोन, भीकनगांव और देशगांव होकर खंडवा पहुंचेंगे।     बड़वाह से आने वाले वाहन मंडलेश्वर, कसरावद, खरगोन और भीकनगांव के रास्ते खंडवा जाएंगे।     खंडवा से इंदौर जाने वाले भारी वाहन भीकनगांव, खरगोन और कसरावद होकर जाएंगे।     मंडलेश्वर से आने वाले वाहन कसरावद और खलघाट के रास्ते इंदौर पहुंच सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था 18 और 19 जून को ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को निर्धारित पार्किंग में खड़ा कराया जाएगा।     इंदौर की ओर से आने वाले छोटे और मध्यम वाहन बड़वाह, मोरटक्का, सनावद और इनपुन होते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड और ताम्रकर पार्किंग तक जाएंगे।     खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले वाहन भी सनावद और इनपुन के रास्ते इन्हीं पार्किंग स्थलों तक पहुंचेंगे     पार्किंग से श्रद्धालुओं को पैदल दर्शन और स्नान के लिए जाना होगा। बसों के लिए व्यवस्था     इंदौर और खंडवा से आने वाली श्रद्धालुओं की बसें मोरटक्का में पार्क की जाएंगी।     वहां से प्रशासन द्वारा लोक परिवहन के जरिए श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर पहुंचाया जाएगा।     नियमित रूट की बसों को सनावद और इनपुन होते हुए पी-01 पार्किंग तक भेजा जाएगा। इसके आगे पैदल जाना होगा।     कुछ समय के लिए रास्ते बंद रह सकते हैं। कुछ मार्ग नो व्हीकल जोन रहेंगे राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ मार्गों को अस्थायी रूप से नो व्हीकल जोन बनाया जाएगा। राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात सामान्य कर दिया जाएगा। प्रशासन की अपील पुलिस और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं एवं आम लोगों से ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था का पालन करने तथा यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने की अपील की है।

विकास के साथ संवेदनशीलता का दिया उदाहरण

भोपाल भोपाल में 10 लेन सड़क निर्माण परियोजना के अंतर्गत नयापुरा सेंट्रल जेल के समीप अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए NHAI, नगर निगम, राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम पहुंची थी। प्रस्तावित कार्रवाई से क्षेत्र में निवासरत अनेक गरीब और श्रमिक परिवार प्रभावित होने वाले थे। जैसे ही इस संबंध में जानकारी क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग को मिली, उन्होंने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के साथ प्रभावित परिवारों को पुनर्वास के लिये प्लॉट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गरीब परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता देने के निर्देश मंत्री  सारंग ने निर्देश दिए कि विकास कार्यों के साथ गरीब परिवारों के हितों और उनकी आजीविका का भी पूरा ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रभावित परिवारों को पहले वैकल्पिक भूमि और आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। मंत्री  सारंग ने कहा कि किसी भी गरीब परिवार को बेघर होने की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा और सरकार उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। शिफ्टिंग में किसी प्रकार की परेशानी न हो मंत्री  सारंग ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों के स्थानांतरण में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार को सम्मानपूर्वक और व्यवस्थित तरीके से नई जगह पर बसाने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मंत्री  सारंग ने यह भी सुनिश्चित कराया कि NHAI द्वारा प्रभावित परिवारों की शिफ्टिंग में हर संभव सहयोग किया जाएगा तथा लोगों को स्थानांतरण की तैयारी के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। निवास के निकट ही उपलब्ध कराई जाएगी भूमि मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित परिवारों को उनके वर्तमान निवास क्षेत्र के निकट ही भूमि उपलब्ध कराई जाए, जिससे बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और दैनिक जीवन प्रभावित नही हो। उन्होंने कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के साथ पूरी की जाए। मंत्री सारंग ने प्रस्तुत किया संवेदनशील विकास का मॉडल मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रदेश के विकास और आधारभूत संरचना निर्माण के कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास की कीमत गरीबों की पीड़ा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी हों। साथ ही प्रभावित परिवारों के सम्मान और अधिकारों की भी रक्षा हो। मंत्री  सारंग के हस्तक्षेप से क्षेत्र के लोगों में राहत का माहौल है। स्थानीय रहवासियों ने मंत्री  सारंग का जताया आभार मंत्री  सारंग के संवेदनशील हस्तक्षेप के बाद क्षेत्र के स्थानीय रहवासियों और प्रभावित परिवारों ने राहत की सांस ली तथा उनके प्रति आभार व्यक्त किया। रहवासियों का कहना है कि यदि तत्काल कार्रवाई होती तो अनेक परिवारों के सामने आवास और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाता। लोगों ने कहा कि मंत्री सारंग ने मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  सारंग के हस्तक्षेप से प्रभावित परिवारों में विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है जिससे विकास के साथ संवेदनशीलता का उदाहरण दिया। उन्होंने सड़क निर्माण के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की बनाई राह।  

गुना के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल महिला को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  गुना जिले के थाना विजयपुर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से मोटर साइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल महिला को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से घायल महिला को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। 16 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना विजयपुर क्षेत्र अंतर्गत लाहौरी ऑटो पार्क के पास एक मोटर साइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, जिसमें एक महिला घायल हो गई है एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही विजयपुर थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक श्री धर्मेंद्र सिंह एवं पायलट श्री राम लखन मीणा ने मौके पर पहुँचकर पाया कि ब्रेकर पर मोटर साइकिल अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिससे एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल महिला को तत्काल एफआरव्ही वाहन की सहायता से शासकीय चिकित्सालय, सांडा पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से घायल महिला को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन की सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

खिलाड़ियों को उत्कृष्ट सुविधाएं देने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, कार्यों में तेजी लाकर 15 दिनों में दें प्रगति रिपोर्ट – अरुण साव

रायपुर  उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने आज बिलासपुर में स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र बहतराई का औचक निरीक्षण कर निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की धीमी प्रगति पर अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निरीक्षण के दौरान कार्यों को जल्दी पूरा करने, सुविधाएं बढ़ाने तथा प्रशिक्षण केंद्र की अधोसरंचना को मजबूत करने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  साव ने निरीक्षण के दौरान मैपलवुड फ्लोरिंग, तीरंदाजी मैदान, हॉकी गैलरी एवं फ्लड लाइट, कबड्डी इण्डोर व आउटडोर मैदान, एच.व्ही.ए.सी. कार्य तथा आउटडोर स्टेडियम के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से हॉस्टल के रखरखाव की जानकारी लेते हुए नाराजगी व्यक्त की कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से राशि उपलब्ध होने के बावजूद आवश्यक मेंटेनेंस कार्य समय पर नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी काम में देरी स्वीकार्य नहीं है। उप मुख्यमंत्री ने कार्यों की धीमी गति पर नाखुशी जाहिर करते हुए अधिकारियों से कहा कि बिलासपुर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा मुख्यालय है। यहां खिलाड़ियों की सुविधा बढ़ाने किए जा रहे कार्यों की गति बहुत धीमी है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता, एसडीओ, कार्यपालन अभियंता एवं अन्य अधिकारियों को बेहतर समन्वय के साथ सभी कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें योजनाबद्ध तरीके से शीघ्र पूर्ण करने को कहा। उन्होंने संयुक्त बैठक कर लंबित कार्यों को जल्दी पूरा करने की कार्ययोजना बनाने तथा 15 दिनों के भीतर सभी निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की वस्तुस्थिति के बारे में उप मुख्यमंत्री कार्यालय आकर प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यपालन अभियंता  बी.बी.एस. गौतम को दिए।  साव ने इण्डोर स्टेडियम में मैपलवुड फ्लोरिंग के लिए वर्ष 2017 में कार्यादेश जारी होने के बावजूद इसके अब तक अधूरे रहने पर लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी तथा उप अभियंता पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए शीघ्र कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक कार्यों का लंबित रहना गंभीर विषय है। सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री  साव ने इण्डोर स्टेडियम में एच.व्ही.ए.सी. कार्य के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को प्राक्कलन तैयार करने के पहले स्थल का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने एच.व्ही.ए.सी. कार्य तेजी से पूर्ण करने तथा डक्टिंग की पूर्ण रूप से सफाई करने को कहा। उन्होंने एस.ई.सी.एल. द्वारा दो करोड़ की लागत से बनाए जा रहे तीरंदाजी मैदान के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा के दौरान इसका निर्माण आगामी जुलाई तक पूर्ण कराने के निर्देश खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक  ए. एक्का को दिए। उन्होंने आउटडोर स्टेडियम में स्थापित हाई मास्ट लाइट के तत्काल मरम्मत के भी निर्देश दिए।   साव ने निर्माणाधीन कबड्डी इण्डोर एवं आउटडोर मैदान की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति के लिए लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता को प्रमुख अभियंता कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर जानकारी प्रस्तुत करने तथा मंत्रालय से समन्वय कर पुनरीक्षित स्वीकृति प्राप्त करने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से स्टेडियम परिसर का निरीक्षण कर अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने हॉकी मैदान में बन रहे पैवेलियन में अधिकारियों के लिए टॉयलेट बनाने के साथ ही दर्शकों के लिए टॉयलेट की संख्या में बढ़ोतरी के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  साव ने निरीक्षण के दौरान कहा कि बहतराई खेल प्रशिक्षण केन्द्र को उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित करने खेल एवं युवा कल्याण विभाग खेल अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को सभी कार्यों में तेजी लाते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा करने को कहा, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं का लाभ यथाशीघ्र मिल सके। विधायक  सुशांत शुक्ला, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, नगर निगम के आयुक्त  प्रकाश कुमार सर्वे और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  संदीप अग्रवाल भी  साव के निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।