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शीतकालीन व बजट सत्र दिल्ली से बाहर करने की मांग तेज, सांसद ने दिए नए विकल्प

नई दिल्ली  बीजू जनता दल के सांसद मानस रंजन मंगराज ने मांग की है कि संसद का सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल बहुत अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में संसद का शीतकालीन सत्र और बजट सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर साल ही हवा खराब हो जाती है और यह आपदा मानव जनित है। शून्य काल के दौरान ओडिशा के सांसद ने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल ही बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए ओडिशा जैसा फॉर्मूला अपनाना चाहिए। मानस मंगराज ने कहा कि ओडिशा में प्राकृतिक आपदाओं से हर साल ही सरकार निपटती है और कभी कोई बड़ा संकट सामने नहीं आता। उन्होंने कहा, 'हम ओडिशा से आते हैं। एक ऐसा राज्य जहां अकसर चक्रवात आते हैं और बाढ़ आती है। इसके अलावा अन्य आपदाएं भी आती हैं। इनसे हम नियमित तौर पर निपटते हैं। इसलिए हम समझते हैं कि दिल्ली में यह कैसा संकट है। लेकिन दिल्ली का संकट हमें परेशान करता है।' उन्होंने कहा कि दिल्ली में सांसदों को पलूशन का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा संसद सदस्यों के साथ लगे कर्मचारियों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इन लोगों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह सामान्य नहीं है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। मानस मंगराज ने कहा कि ऐसे कई शहर हैं, जहां की हवा साफ है। ऐसी स्थिति में वहां पर संसद का सेशन चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर, हैदराबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु, गोवा और देहरादून में सत्र चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि चक्रवात की स्थिति में ओडिशा से कुछ घंटों के अंदर ही लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है तो फिर भारत सरकार भी लोगों की सेहत का ध्यान रखने के लिए सांसदों और अन्य स्टाफ को दूसरी लोकेशन पर ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रस्ताव में किसी तरह की राजनीति नहीं है। यह हमारे जीवन और गरिमा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि संसद से ही यह राह निकलनी चाहिए, जिससे संदेश जाए कि जीवन का अधिकार सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि हर साल ही दिल्ली में सर्दियां ऐसी रहती हैं। इसके लिए कुछ ऐक्शन प्लान बनाना ही होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान: प्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सबसे अधिक, रोजगार और उद्योगों के विकास पर जोर

प्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सर्वाधिक, रोजगार के अवसर और उद्योगों के विकास पर जोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार के सफलतम 2 वर्ष पूर्ण होने पर 13-14 दिसंबर को भोपाल और इंदौर में होंगे विशेष कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के सफलतम 2 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 13 दिसंबर को भोपाल और 14 दिसंबर को इंदौर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रदेश में सरकार बनने के बाद गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कई उल्लेखनीय निर्णय लिए गए। राज्य में कृषि के लिए सिंचाई का रकबा दोगुना करने के उद्देश्य से जल गंगा संवर्धन अभियान और कई बड़ी परियोजनाओं के माध्यम से प्रयास जारी हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। हमारी इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट देश में सबसे अधिक है। 'अच्छे कार्य में साथ, लेकिन कुछ गलत होगा तो बर्दाश्त नहीं' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में सुशासन पर आधारित व्यवस्थाएं संचालित हों, इसके लिए अच्छे कार्य में सदैव साथ हैं और अगर कहीं भी कुछ गलत होगा तो उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। मध्यप्रदेश की धरती से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में विगत दिनों उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश में नक्सलियों का सबसे बड़ा सरेंडर बालाघाट में कराया गया है। भविष्य में नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लिये रवाना होने से पहले इंदौर में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर में आंध्र प्रदेश के सत्य साईं जिले के धर्मावरम में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन पर अटल ज्योति संदेश यात्रा कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।  

छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र

रायपुर : विशेष लेख : सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र रायपुर सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रूप से कुटीर उद्योगों को केंद्रीकृत किया गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं तथा बेरोजगार लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 28 जिलों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित होंगे और आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के प्रयासों से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय – विकास को जन-जन तक पहुँचाने वाले नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी सरलता, सहजता, दृढ़ता और ग्रामीण विकास के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनका यह स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ का वास्तविक सामर्थ्य गाँवों में निहित है, जहाँ परंपरा, कौशल और संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वे मानते हैं कि स्व-रोजगार ही आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि स्व-रोजगार योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे और कुटीर, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जाए। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव -ग्रामोद्योग के पुनर्जागरण के निर्माता गजेंद्र यादव अपने ऊर्जा से भरे कार्यशैली, जमीनी समझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि परंपरागत कौशलों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अधिक अवसर मिल सकें। उनकी पहल से कुटीर उद्योगों में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का वातावरण मजबूत हुआ है। उनके नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने कई अभिनव कदम उठाए हैं, जिससे हजारों लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त हुए हैं। कुटीर उद्योगों को नई ऊर्जा देने वाली दो प्रमुख योजनाएँ मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (CMEGP) यह राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को छोटे उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित करना है, जो अपने कौशल के आधार पर सेवा या विनिर्माण क्षेत्रों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं। सेवा क्षेत्र जैसे साइकिल और मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिक मरम्मत, ब्यूटी पार्लर, फोटोकॉपी, वीडियोग्राफी, टेंट हाउस, च्वाइस सेंटर और होटल जैसी गतिविधियों में उद्यम स्थापित करने हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रूपए निर्धारित है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र जैसे दोना-पत्तल निर्माण, फेब्रिकेशन, डेयरी उत्पाद, साबुन, मसाला, दलिया, पशुचारा, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और नूडल्स निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु 3 लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन दोनों ही श्रेणियों में 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, ताकि प्रारंभिक आर्थिक बोझ कम हो सके। योजना के अंतर्गत हितग्राही को केवल 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान करना होता है। यह योजना विशेषकर ग्रामीण युवाओं को उद्यम स्थापना के लिए प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) यह केंद्र शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य विभिन्न वर्गों-अजा, अजजा, ओबीसी तथा सामान्य वर्ग को उद्यमिता के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना में सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रूपए तक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे मध्यम स्तर के उद्यम भी आसानी से शुरू किए जा सकें। अनुदान की दृष्टि से यह योजना अत्यंत सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों के हितग्राहियों को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है, जिसे च्डम्ळच् पोर्टल के माध्यम से सरलता से भरा जा सकता है। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो बड़े पैमाने पर उद्यम शुरू करने की क्षमता रखते हैं लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझते हैं। आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज आवेदन करने वाले आवेदकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं जिनमें पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर अन्य दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। ये दस्तावेज आवेदक की पात्रता और परियोजना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं। आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम छत्तीसगढ़ में CMEGP और PMEGP जैसी योजनाएँ स्वरोजगार को एक संगठित और सशक्त दिशा प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव की दूरदर्शिता, समर्पण और सतत प्रयासों के कारण आज हजारों युवाओं के सपने साकार हो रहे हैं। राज्य सरकार की ये पहल न केवल रोजगार बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक संरचना को मजबूती प्रदान कर रही हैं। कोईे भी व्यक्ति अपना उद्योग शुरू करना चाहता है, उसके लिए यह अत्यंत उपयुक्त समय है। अधिक जानकारी एवं आवेदन हेतु खादी एवं ग्रामोद्योग शाखा, कार्यालय रायपुर से संपर्क किया जा सकता है।                                                                                                                                    • लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

एमपीएसपी के शताब्दी वर्ष तक हो सौ संस्थाओं का संचालन : योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को लेकर तय किए लक्ष्य, दिए दिशानिर्देश शताब्दी वर्ष में सालभर होगा विविध कार्यक्रमों का आयोजन, अभी से तैयारियों में जुटने के निर्देश गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपीएसपी) के लिए इसके शताब्दी वर्ष 2032 तक सौ संस्थाओं के संचालन और इनमें एक लाख विद्यार्थियों को शिक्षा और कौशल से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने शताब्दी वर्ष में पूरे एक साल विविध कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए अभी से रूपरेखा बनाकर तैयारियों में जुट जाने के भी निर्देश दिए हैं। बुधवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 93वां संस्थापक सप्ताह भव्यता से मनाया गया था। दिन में हुए मुख्य महोत्सव के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री ने देर शाम परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर शताब्दी वर्ष 2032 तक संस्थापक युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत लीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सपनों और इच्छाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में श्री योगी ने कहा कि सभी संस्थाओं को अभी से शिक्षा परिषद के शताब्दी महोत्सव की तैयारियों में जुटना होगा। शताब्दी वर्ष 10 दिसंबर 2031 से 10 दिसंबर 2032 तक, पूरे एक साल मनाया जाएगा। सालभर में क्या क्या आयोजन होंगे, इसकी रुपरेखा अभी से तैयार करनी शुरू कर दी जाए। शताब्दी महोत्सव का पूरा साल यादगार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक शिक्षा, चिकित्सा, योग, सेवा और अन्य प्रकल्पों को मिलाकर परिषद के अंतर्गत सौ संस्थाओं का संचालन करने का लक्ष्य तय कर उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाएं संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाने का कार्य करें। इसके लिए बस्तियों को गोद लेकर वहां शिक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता, सेवा, जागरूकता, रोजगार एवं स्वरोजगार आदि के कार्य किए जाएं। सभी तक जनकल्याण की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि थारू और वनटांगिया बस्तियों में परिषद की संस्थाएं पहले से कार्य करती रही हैं। इन बस्तियों के उत्थान के मानक संतृप्ति के स्तर पर होने चाहिए। वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ें, हर संस्था किसी विशिष्टता से जानी जाए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस दिशा में काफी बेहतर कर कर सकता है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक परिषद की सभी संस्थाओं की पहचान उनकी किसी न किसी विशिष्टता से बने, इसके लिए उन्हें किसी विशिष्ट कार्य से जुड़कर आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक हों एक लाख विद्यार्थी, सबके पास हो स्किल गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष तक संस्थाओं में एक लाख विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का भी लक्ष्य दिया। साथ ही कहा कि उस समय तक हर विद्यार्थी को किसी न किसी एक स्किल से जोड़ा जाए। हर संस्था एक-एक विद्यार्थी को अपने स्तर से स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास करे। खुद मानक बनें संस्थाओं के प्रमुख बैठक में श्री योगी ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी शिक्षक और कर्मचारी परिश्रम और ईमानदारी के मानक बनें। इसके लिए संस्थाओं के प्रमुखों को खुद मानक बनकर शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए रोल मॉडल बनना होगा। आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखे परिसर में गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि अनुशासित परिसर संस्कृति शिक्षा परिषद की संस्थाओं की पहचान है। संस्थाओं में आधुनिक युगानुकूल विचारों के साथ पारंपरिक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों का भी संरक्षण होता रहेगा। इन संस्थाओं ने भारत की परंपरा और प्रगति को दर्शाने के साथ लोक कल्याण का भी मॉडल दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं के परिसर में आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखनी चाहिए। संस्थाओं की कार्यपद्धति में आध्यात्मिकता का पुट होना चाहिए। नशा मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने सभी संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे अपनी अपनी संस्थाओं के परिसर को हर प्रकार के नशा से मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें। नशा चाहे ड्रग का हो या फिर स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रभाव का, ये कुप्रवृत्तियां हैं और विद्यार्थियों को इनसे बचाना ही होगा। विकसित भारत के लक्ष्य से खुद को जोड़ें संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा वे खुद और विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ें। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकार के लक्ष्यों के अनुरूप संस्थाएं भी अपने स्तर पर लक्ष्य तय करें जिससे 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी, मेडिकल, पैरामेडिकल, फार्मेसी, कृषि के विद्यार्थियों का ‘विकसित भारत 2047’ में क्या योगदान होगा, इस पर कार्ययोजना बनाकर काम किया जाए। लोक कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हो फोकस श्री योगी ने कहा कि शिक्षा परिषद की संस्थाओं का फोकस लोक कल्याण पर भी हो। संस्थाओं को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाना होगा। सांस्कृतिक पुर्नजागरण के साथ देश को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान देना होगा। समाज के एक-एक पैसे का हो सदुपयोग बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी संस्थाओं को वित्तीय अनुशासन, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते रहना है। शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ हमें समाज के एक-एक पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित करना होगा। बैठक में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी पदाधिकारी, सदस्य और परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर

विकसित उत्तर प्रदेश 2047: उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीक का अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से उस दिशा में अग्रसर है जहां नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक, विकास के आधार स्तंभ बनेंगे। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे है। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विज़न है कि नया उत्तर प्रदेश ज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के आधार पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,  ब्लॉकचेन, मेडटेक, टेलीकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्व स्तरीय स्टार्टअप खड़े कर सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा केंद्र बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा को संसाधनों के अभाव में पीछे हटना पड़े।  सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसमें पूंजीगत और इनके संचालन पर व्यय के लिए  अनुदान उपलब्ध कराया है। सरकार का मॉडल यह है कि पहले पांच वर्षों तक इन्हें सहायता देकर इनकी नींव को सुदृढ़ किया जाए, बाद में यह स्वयं के नवाचार और साझेदारियों के द्वारा भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। आईटी एवं स्टार्टअप सेक्टर के कंसलटेंट सुनील गुप्ता का कहना है कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है,  बल्कि स्वास्थ्य कृषि, शिक्षा और स्वच्छता जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी तकनीक आधारित समाधान इनके द्वारा विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में ही उपलब्ध हो रही है। क्या है सेंटर आफ एक्सीलेंस… सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है । यह ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब  सुविधाएं,  प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।  उत्तर प्रदेश के सात सेंटर ऑफ़ एक्सिलेंस…    – गौतमबुद्ध नगर में सीओई ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी – लखनऊ में मेडटेक सीओई – कानपुर नगर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)   – गौतमबुद्ध नगर में सीओई-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इनोवेशन ड्रिवेन एंटरप्रेन्योरशिप (एआईआईडीई) – सहारनपुर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)  – कानपुर नगरमें सीओई अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी)/ ड्रोन टेक्नोलॉजी – गाज़ियाबाद में सीओई एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग

हरियाणा को मिला बड़ा विकास पैकेज: शहरी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹1700 करोड़ मंजूर

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को बताया कि हमारी सरकार शहरी विकास को उच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय शहरी अवसंरचना प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है. इस मौके पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी उपस्थित रहे. नायब सिंह सैनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अभिभाषण में बाहरी विकास कार्यों के लिए ईडीसी फंड से 3,000 करोड़ रुपये हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण तथा गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पंचकूला और हिसार के विकास प्राधिकरणों को आवंटित किए जाने की घोषणा की थी. सीएम सैनी ने कहा कि बजट घोषणा को मूर्तरूप देते हुए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने एडीसी फंड के प्रभावी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है. उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्यों में तेजी आएगी. 1500 करोड़ रु. पहले ही जारी मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में ईडीसी फंड से विभिन्न महानगरीय विकास प्राधिकरणों को 1500 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं. इसके अलावा, आज विभिन्न शहरी एस्टेट्स में विकास कार्यों के लिए कुल 1700 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. इनमें हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को 700 करोड़ रुपये, गुरुग्राम महानगरीय विकास प्राधिकरण को 700 करोड़ रुपये, फरीदाबाद महानगरीय विकास प्राधिकरण को 170 करोड़ रुपये, पंचकूला महानगरीय विकास प्राधिकरण को 30 करोड़ रुपये, सोनीपत महानगरीय विकास प्राधिकरण को 80 करोड़ रुपये और हिसार महानगरीय विकास प्राधिकरण को 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. नायब सिंह सैनी ने वित्त वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि विभाग ने विभिन्न शहरी एस्टेट्स में विकास कार्यों के लिए राज्य के महानगरीय विकास प्राधिकरणों को 2188 करोड़ रुपये जारी किए. गणमान्य हस्तियां रहीं मौजूद इस अवसर पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव प्रभजोत सिंह, कृषि विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के निदेशक अमित खत्री, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यश पाल, सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के महानिदेशक पार्थ गुप्ता, अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) वर्षा खांगवाल, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय उपस्थित रहे.  

रायपुर: धान खरीदी केंद्रों में पारदर्शी व्यवस्था, किसान आसानी से बेच रहे हैं अपना धान

रायपुर : धान खरीदी केंद्र में सुगम और पारदर्शी व्यवस्था से किसान आसानी से बेच रहे धान टोकन तुंहर हाथ ऐप से श्री भोलाराम को घर बैठे टोकन की मिली सुविधा रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों का सीधा लाभ इस वर्ष कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। टोकन तुंहर हाथ ऐप ने किसानों को घर बैठे ही सरलता से टोकन प्राप्त करने की सुविधा दी है, जिससे खरीदी केंद्रों में अनावश्यक भीड़, भागदौड़ और प्रतीक्षा जैसी समस्याएँ लगभग समाप्त हो गई हैं। केंद्रों में बारदाना उपलब्धता, तौल, भंडारण और भुगतान की सभी व्यवस्थाएँ इस बार पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और समयबद्ध हैं।       इन्हीं सुविधाओं का लाभ ग्राम छांटा के किसान श्री भोलाराम चंद्रवंशी को मिला है। 5.57 एकड़ भूमि वाले श्री भोलाराम चार एकड़ में धान और शेष में गन्ने की खेती करते हैं। इस सीजन उन्होंने 84.40 क्विंटल धान बेचा और बताते हैं कि पूरे खरीदी प्रक्रिया के दौरान उन्हें एक भी बार किसी प्रकार की समस्या या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। तौल से लेकर भुगतान तक उनका संपूर्ण कार्य निर्धारित समय में और बिना किसी भागदौड़ के पूरा हो गया।      समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलने से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। वे बताते हैं कि उचित मूल्य से मिली यह आय उनके परिवार के सपनों को नई दिशा दे रही है। वर्तमान में वे अपने परिवार के लिए पक्का मकान बना रहे हैं और कहते हैं कि पहले जो सपने दूर लगते थे, वे अब सरकार की पारदर्शी और धान खरीदी व्यवस्था की बदौलत साकार हो रहे हैं। इस वर्ष धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है। किसान की समृद्धि ही प्रदेश की प्रगति का मार्ग है।

निवेश, तकनीक और रोजगार—विदेश दौरे ने पंजाब की इंडस्ट्रियल छलांग को दिया नया आयाम

चंडीगढ़  जापान और दक्षिण कोरिया के निवेश दौरों के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि उन्होंने पंजाब दुनिया में उभरता हुआ औद्योगिक राज्य है. उन्होंने कहा कि इस दौरे का उद्देश्य प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करना और औद्योगिक विकास को गति देकर युवाओं के लिए रोज़गार के अधिक अवसर पैदा करना है. यह ऐतिहासिक दौरा औद्योगिक विकास को तेज़ रफ्तार देने और उसे आवश्यक बल प्रदान करने में सहायक होगा. मुख्यमंत्री मान ने कहा कि एक बैठक के दौरान जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर ओगावा काजूनोरी ने पंजाब के औद्योगिक और स्वच्छ ऊर्जा प्रोजेक्टों की संभावनाओं की खोज में रुचि दिखाई. उन्होंने कहा कि वे जापानी कंपनियों के माध्यम से संभावित वित्तीय अवसरों पर तकनीकी विचार-विमर्श जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं. भगवंत सिंह मान ने कहा कि बैंक ने पंजाब निवेश सम्मेलन के निमंत्रण का भी स्वागत किया है और इसमें भाग लेने की इच्छा जताई. अगले साल प्रोग्रेसिव पंजाब निवेश सम्मेलन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी बताया कि आइसन इंडस्ट्री कंपनी लिमिटेड के सीईओ और ईवीपी टोमोनोरी काई तथा टोरू नकाने ने भविष्य के निर्माण या अनुसंधान एवं विकास अवसरों के लिए पंजाब की संभावनाओं में सकारात्मक रुचि दिखाई. उन्होंने कहा कि यामाहा मोटर कंपनी लिमिटेड के ग्लोबल स्ट्रैटेजी मैनेजर और प्रोडक्ट प्लानिंग ग्रुप तनाका हिरोकी तथा सुजुकी मारी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, अनुसंधान एवं विकास सहयोग और कौशल विकास पहलकदमियों में निवेश पर खुलकर चर्चा की. भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने प्रोग्रेसिव पंजाब निवेश सम्मेलन 2026 के निमंत्रण का भी स्वागत किया और पंजाब के निवेश-अनुकूल माहौल से जुड़े रहने में रुचि दिखाई. मुख्यमंत्री ने कहा कि होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड के साथ बैठक में डिपार्टमेंट मैनेजर तत्सुओ नाकामुरा और आई.टी.ओ. कियोशी ने पंजाब में भारतीय साझेदारों के माध्यम से कंपोनेंट निर्माण की संभावनाएं तलाशने की बात कही. भगवंत सिंह मान ने कंपनी को पूर्ण सुविधा और नीतिगत सहायता का भरोसा दिया तथा उन्हें पंजाब निवेश सम्मेलन 2026 के लिए निमंत्रण दिया. जापान में एनईसी कॉर्पोरेशन के साथ बैठक मुख्यमंत्री ने कहा कि संसदीय उप-मंत्री (अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग) कोमोरी ताकुओ ने जापानी फर्मों को इन्वेस्ट पंजाब से जोड़ने के लिए समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि फुजित्सु लिमिटेड के टेक्नोलॉजी बिज़नेस मैनेजमेंट यूनिट के प्रमुख जूंगो ओकाई ने डिजिटल गवर्नेंस सॉल्यूशंस में रुचि दिखाई और भरोसा दिया कि वे भारत में भविष्य के प्रोजेक्टों के लिए मोहाली का चयन करेंगे. भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी जापान यात्रा के दूसरे दिन की शुरुआत एनईसी कॉर्पोरेशन के साथ बैठक से हुई. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बाद में दिन में 250 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें जापानी उद्योग एवं व्यापारिक संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे, ने टोक्यो रोड शो में भाग लिया. उन्होंने कहा कि डी.जी. जेट्रो इंडिया सुजुकी ताकाशी की मजबूत संस्थागत भागीदारी भारत-जापान आर्थिक संबंधों के लिए उच्च स्तरीय समर्थन को दर्शाती है. भगवंत सिंह मान ने कहा कि हीरो मोटोकॉर्प (सुमितोमो और किरियू कॉर्पोरेशन), वर्धमान स्पेशल स्टील्स (आइची स्टील) और एक्सेल स्काउट द्वारा साझा किए गए अनुभवों ने पंजाब में सफल साझेदारियों की मिसाल पेश की. मुख्यमंत्री ने कहा कि तीसरे दिन आईची स्टील के मुख्यालय में बैठक हुई जिसमें चेयरमैन फुजियोका ताकाहिरो और प्रेसिडेंट इतो तोशिओ ने सम्मेलन के निमंत्रण का स्वागत करते हुए मजबूत रिश्तों और व्यापक निवेश में रुचि व्यक्त की. उन्होंने कहा कि आईची स्टील और वर्धमान स्पेशल स्टील्स ने पंजाब में निवेश गतिविधियों का संयुक्त रूप से अध्ययन करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें 500 करोड़ रुपए के निवेश का मूल्यांकन शामिल है. ओसाका रोड शो में मिले कई दिग्गज निवेशक मुख्यमंत्री ने कहा कि ओसाका रोड शो में ओसाका क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और डीजी जेट्रो, ओसाका प्रीफेक्चरल गवर्नमेंट और एमईटीआई कांसाई से मजबूत संस्थागत साझेदारी में गहरी रुचि दिखाई. उन्होंने कहा कि 80 से अधिक डेलीगेट्स ने रोड शो में हिस्सा लिया, जिससे भविष्य के निवेश की संभावना मजबूत हुई. मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स शेयर पॉलिसी के अनुसार पंजाब में निर्माण यूनिट का मूल्यांकन करना शामिल है. भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने कारोबार करने की सुगमता के बारे में कानूनी फर्मों से भी बैठकें की और गोलमेज में दक्षिण कोरिया की प्रमुख संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 42 से अधिक डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया, जिनमें शीर्ष कानूनी फर्में और उद्योग संघ शामिल थे. उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के उद्योग जगत के नेताओं ने उत्तरी भारत के लिए पंजाब में निर्माण तथा अनुसंधान एवं विकास हब के रूप में संभावनाएं तलाशने में गहरी रुचि दिखाई.  

रायपुर: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 35 श्रमिकों को राज मिस्त्री बनने की ट्रेनिंग, कुशल श्रमिक तैयार

रायपुर : प्रधानमंत्री आवास हेतु कुशल श्रमिक हो रहे तैयार, 35 श्रमिक बनेंगे राज मिस्त्री महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम प्रोजेक्ट उन्नति के तहत दी जा रही रूरल मेशन ट्रेंनिंग रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मुंगेली जिले में प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) की बड़ी संख्या में स्वीकृत आवासों के निर्माण के लिए मिस्त्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रोजेक्ट उन्नति के तहत जिले में 35 पात्र श्रमिकों को रूरल मेशन ट्रेनिंग प्रदान की जा रही है। यह 30 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, कोनी-सेंदरी, बिलासपुर द्वारा आयोजित किया जा रहा है।       प्रशिक्षण में वही श्रमिक शामिल किए गए हैं, जिन्होंने विगत वर्षों में कम से कम 60 मानव दिवस मनरेगा में कार्य पूरा किया है और जिनकी आयु 18 से 45 वर्ष के मध्य है। प्रशिक्षणार्थियों को प्रधानमंत्री आवास निर्माण स्थलों पर व्यावहारिक कार्य के माध्यम से राज मिस्त्री का कौशल सिखाया जा रहा है। संस्था द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क सेफ्टी किट हेलमेट, बेल्ट तथा मिस्त्री उपकरण करनी, शाहुल, टेप, धागा आदि भी उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशिक्षण के संचालन में सहायक परियोजना अधिकारी  विनायक गुप्ता तथा कार्यक्रम अधिकारी  अशोक साहू विशेष सहयोग प्रदान कर रहे हैं।            मनरेगा श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कौशल विकास प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से श्रमिकों को पूर्ण रोजगार, आत्मविश्वास और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। अधिकारियों ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए हैं। गत वर्ष जनपद पंचायत पथरिया के ग्राम कपुवा में भी 35 लाभार्थियों को रूरल मेशन ट्रेनिंग दी गई थी, जिनमें से अधिकांश लाभार्थी वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य निर्माण कार्यों में प्रतिदिन 600-700 रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है बल्कि जिले में आवास निर्माण के लिए कुशल मिस्त्रियों की उपलब्धता भी सुदृढ़ हुई है।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश समेत छह राज्यों में बढ़ी SIR की समयसीमा

भोपाल /नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश  6 राज्यों में मतदाता सूची में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की समय सीमा को बढ़ा दिया है। चुनाव आयोग ने जिन राज्यों में एसआईआर की समय सीमा बढ़ाई है उनमें MP के अलावा गुजरात,उत्तर प्रदेश , छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और अंडमान शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार छह राज्यों/UT के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEOs) से मिली रिक्वेस्ट के आधार पर, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने इन 6 राज्यों/UT में इलेक्टोरल रोल के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के शेड्यूल में बदलाव किया है। किस राज्य में क्या है नई तारीख इसमें 01.01.2026 को क्वालिफाइंग तारीख माना गया है। तमिलनाडु और गुजरात में ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की संशोधित तारीख 19 दिसंबर है। ये पहले 14 दिसंबर थी। वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान निकोबार ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की तारीख को 18 दिसंबर से बढ़ाकर 23 दिसंबर किया गया है। यूपी में ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की नई तारीख 26 दिसंबर की बजाय 31 दिसंबर होगी। केरल में पहले ही बढ़ाई थी तारीख केरल में राज्य चुनाव आयोग ने पहले ही एसआईआर के लिए एक्सटेंशन दे दिया है। राज्य की और समय की रिक्वेस्ट के बाद अब डेडलाइन 11 दिसंबर से बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दी गई है। केरल में सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, TMC, CPI(M) और SP ने आरोप लगाया कि कमीशन ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया और बिना वजह जल्दबाजी में रिवीजन टाइमलाइन के साथ आगे बढ़ा। आयोग के अनुसार, तमिलनाडु और गुजरात में SIR जमा करने की नई अंतिम तिथि अब 14 दिसंबर 2025 (रविवार) होगी, जबकि इससे पहले यह 19 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) थी. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं अंडमान और निकोबार के लिए अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2025 (गुरुवार) से बढ़ाकर 23 दिसंबर 2025 (मंगलवार) कर दी गई है. वहीं, यूपी में SIR की अंतिम तिथि 26 से बढ़कर 31 दिसंबर 2025 (बुधवार) कर दी गई है. चुनाव आयोग (EC) ने छह राज्यों आर केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया है. यह कदम मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए उठाया गया है. उत्तर प्रदेश में फॉर्म जमा करने की अवधि 15 दिनों के लिए बढ़ाई गई है. तमिलनाडु और गुजरात में यह अवधि 3 दिनों के लिए बढ़ाई गई है. वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान निकोबार में 7 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी गई है. इस वृद्धि के साथ ही ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने की अवधि भी बढ़ा दी गई है. आयोग ने यह फैसला सुनिश्चित करने के लिए लिया है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल हों.