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प्रधानमंत्री आवास योजना से रामप्रकाश के पक्के घर का सपना हुआ साकार

प्रधानमंत्री आवास योजना से रामप्रकाश के पक्के घर का सपना हुआ साकार पक्का घर मिलने से बदली जीवन की तस्वीर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन से साकार हो रहे जरूरतमंदों के सपने रायपुर,   अपना घर हर परिवार के जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है। एक ऐसा घर, जिसकी मजबूत दीवारों के बीच परिवार सुरक्षित रहे, बच्चे बेहतर भविष्य के सपने देखें और जीवन सम्मान एवं सुकून के साथ आगे बढ़े। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सपना कई बार सीमित संसाधनों के कारण अधूरा रह जाता है। ऐसे परिवारों के सपनों को साकार करने में प्रधानमंत्री आवास योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। गौरेला के लोहरा झोरकी निवासी रामप्रकाश की कहानी इसी बदलाव और उम्मीद की प्रेरक मिसाल है। रामप्रकाश का वर्षों से सपना था कि उनका भी अपना पक्का घर हो, जहां वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुख-शांति से जीवन व्यतीत कर सकें। आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने के कारण उनके लिए पक्का मकान बनाना आसान नहीं था। सीमित आय और घरेलू जरूरतों के बीच अपने घर के निर्माण के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत प्राप्त सहायता से उनके आवास निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। धीरे-धीरे निर्माण कार्य आगे बढ़ा और वर्षों से देखा जा रहा उनका सपना आखिरकार हकीकत में बदल गया। आज रामप्रकाश का अपना पक्का मकान पूर्ण होकर तैयार है। पक्का घर मिलने के बाद रामप्रकाश और उनके परिवार के जीवन में खुशी और संतोष का नया अध्याय शुरू हुआ है। अब उनका परिवार एक सुरक्षित और मजबूत आवास में रह रहा है। बारिश, गर्मी और अन्य मौसम की चुनौतियों से सुरक्षा के साथ उन्हें अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है। रामप्रकाश के लिए उनका नया घर केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के सपने, संघर्ष और उम्मीदों के पूरा होने का प्रतीक है। वे बताते हैं कि अपने घर का सपना पूरा होना उनके परिवार के लिए बेहद खुशी और भावुकता का क्षण है। पक्का मकान उनके लिए सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने देशभर में अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के पीछे मूल भावना यही है कि प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो तथा वह अपने परिवार के साथ बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सके। रामप्रकाश के जीवन में आया यह बदलाव इसी संकल्प की एक तस्वीर है। जिस पक्के घर का सपना कभी आर्थिक कठिनाइयों के कारण दूर दिखाई देता था, वही सपना आज उनके सामने एक मजबूत आशियाने के रूप में खड़ा है। उनका घर उनके परिवार के लिए वर्तमान की सुरक्षा और भविष्य की उम्मीद दोनों बन गया है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से रामप्रकाश को मिला पक्का घर इसी दिशा में हो रहे कार्यों का उदाहरण है। पक्का आवास मिलने से रामप्रकाश के परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है। अपने स्वयं के घर में परिवार के साथ रहने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती है। यह घर उनके लिए सामाजिक सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व की नई पहचान बन गया है। रामप्रकाश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि सरकार की सहायता से उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है और अब उनका परिवार अपने घर में सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी रहा है। रामप्रकाश की कहानी यह बताती है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचता है, तो सरकारी सहायता केवल एक सुविधा नहीं रहती, बल्कि वह किसी परिवार के जीवन की दिशा बदलने वाली ताकत बन जाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला उनका पक्का घर उनके परिवार के लिए खुशियों का आशियाना, सम्मान की पहचान और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन गया है।

सरकार की ‘बिजली बिल समाधान योजना’

सरकार की 'बिजली बिल समाधान योजना' धमतरी के विशाल परिवार के लिए बनी नई सुबह, बकाया मुक्त जीवन की ओर बढ़ता कदम ​रायपुर ​राज्य शासन की जनकल्याणकारी नीतियां किस प्रकार जमीनी स्तर पर आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल धमतरी जिले में देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सेवा संकल्प अभियान के तहत लागू ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026’ से राज्य भर के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर एवं बकाया बिजली बिल से परेशान परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ते विद्युत बकाया के बोझ से मुक्त कर उन्हें पुनः नियमित भुगतान की मुख्यधारा में जोड़ना है।        ​धमतरी निवासी श्री बी. एस. विशाल के परिवार के लिए भी बढ़ता हुआ बिजली बिल लंबे समय से एक बड़ी मानसिक और आर्थिक चिंता का कारण बना हुआ था। सीमित पारिवारिक आय के कारण समय पर बिल का भुगतान संभव नहीं हो पा रहा था, जिससे बकाया राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। इसी दौरान जब परिवार को राज्य सरकार की इस जनहितकारी समाधान योजना की जानकारी मिली, तो उनके पुत्र श्री डेनियल विशाल ने तत्परता दिखाते हुए आवेदन प्रक्रिया पूरी की। विभागीय सहयोग और सरल व्यवस्था के चलते विशाल परिवार को शीघ्र ही योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिल गया।        ​योजना के तहत परिवार को बकाया मूल राशि में पर्याप्त छूट के साथ-साथ अधिभार यानी सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी मिली। इसके साथ ही शेष राशि को आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलने से विशाल परिवार पर से आर्थिक तनाव का बोझ हमेशा के लिए समाप्त हो गया। अब वे पुनः नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने की स्थिति में आ गए हैं। योजना का लाभ मिलने पर हितग्राही श्री डेनियल विशाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया और इस योजना को आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।          ​धमतरी जिले में भी इस योजना की प्रगति काफी उल्लेखनीय रही है। जिले में अब तक 4,652 पात्र हितग्राहियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 4,115 उपभोक्ता ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं और 537 उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से बकाया मुक्ति का लाभ प्रदान किया जा चुका है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि योजना तेजी से आम जनता तक पहुंच रही है और लोगों को वास्तविक राहत प्रदान कर रही है।          ​इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू तथा कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को विशेष राहत दी जा रही है। जहां गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को बकाया मूल राशि पर 75 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत तक की राहत दी जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी पात्र श्रेणियों के लिए सरचार्ज पूरी तरह माफ किया जा रहा है। उपभोक्ता मात्र 10 प्रतिशत की न्यूनतम राशि जमा कर शेष बकाया को निर्धारित अवधि में आसान किस्तों में चुका सकते हैं।       ​उपभोक्ताओं के व्यापक हित और उत्साह को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने योजना की अवधि को बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दिया है। विद्युत विभाग द्वारा लगातार शिविरों और जागरूकता अभियानों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना न केवल आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि लोगों को एक नई शुरुआत का अवसर देते हुए राज्य सरकार की पारदर्शी, सुगम और संवेदनशील सुशासन की प्रतिबद्धता को पूरी सार्थकता के साथ दर्शा रही है।

अंडा बेचकर महिलाएं कमाएंगी, झारखंड में 6 जिलों को मिले 60 एगकार्ट

रांची  राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति (एनईसीसी) ने झारखंड के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की है। राज्य के छह जिलों में अंडा को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ महिलाओं को इस व्यवसाय से जोड़ा है। इसके लिए एनईसीसी ने किसान उत्पाद संघ या स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एगकार्ट यानी अंडा बेचने का ठेला दिया है। एनईसीसी ने राज्य में प्रदान संस्था की ओर से कार्यरत सीएलएफ (कलस्टर लेवल फेडरेशन) के जरिए महिलाओं का चयन किया है। राज्य के रांची, गुमला, लोहरदगा, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम, गोड्डा जिले में दस-दस एगकार्ट दिया गया है। एनईसीसी के सीओओ ए कुमार ने बताया कि राज्य की महिलाएं काफी मेहनती है और प्रदान के जरिए उन्होंने महिलाओं को रोजगार देने के लिए पहल की है। उनकी संस्था की मंशा है कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाए। इसलिए यह कार्यक्रम झारखंड में किया जा रहा है। पूरे देश में इस साल 2300 एगकार्ट बांटा गया है। जिसके लिए कंपनी ने 11 करोड़ रुपये खर्च किया है। उन्होंने बताया कि झारखंड के प्रत्येक जिलों में 250 एगकार्ट बांटने की योजना है। जिससे लगभग तीन साल में पूरा किया जाए। अगले वित्तीय वर्ष में राज्य के 24 जिलों में 25 एगकार्ट दिए जाने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि जिनको यह एगकार्ट मिला है, वह साल में कुछ पैसे बचाकर अपने समूह को दें, ताकि दूसरी महिलाओं को भी इस तरह का एगकार्ट खरीदने में आसानी हो। ए कुमार ने बोकारो की एक महिला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने करीब छह माह में ठेले की कमाई से जनरल स्टोर भी खोल लिया है और काफी प्रसन्न भी हैं। इस दौरान वेंकेटश्वर हेचरी के एजीएम कालू चरण जेना, एनईसीसी के मार्केटिंग मैनेजर विनोद पांडेय, लाइव स्टाक कोऑर्डिनेटर डॉ. रईस अहमद, प्रदान के टीम कोऑर्डिनेटर सुकांत कर्मकार, प्रदान के जिला लाइवलीहुड एक्पर्ट धीरज घोष और जेएसएलपीएस के वीपीएम मुकेश कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे। सीएलएफ ने किया लाभुकों का चयन प्रदान के कृषि योजना सेल के लीडर सुजीत कुमार दास ने बताया कि लाभुक महिलाओं को चयन सीएलएफ की ओर से किया गया है। इस योजना की जानकारी के बाद ग्रामसभा की बैठक में इसकी जानकारी दी गई। फिर महिलाओं से आवेदन मांगा गया। इस बात की जांच की गई कि लाभुक इस काम को करने में समक्ष है या नहीं। उसके बाद फिर सीएलएफ ने उनके नाम को स्वीकृति प्रदान की। इस पर सीएलएफ की ओर से निगरानी की जाएगी, ताकि अगर किसी लाभुक को एगकार्ट चलाने में कोई समस्या आ रही है, तो उसे मदद की जा सके।

जमुई मामले में SIT गठित, POCSO के तहत केस; स्पीडी ट्रायल की तैयारी

पटना  जमुई में नाबालिग से हुई छेड़खानी के मामले में पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया है। एडीजी विधि व्यवस्था केएस अनुपम ने बताया कि मामले में अब तक तीन नाबालिगों को पुलिस ने निरुद्ध किया है। वहीं, दो अन्य युवकों की पहचान की गई है और उनकी तलाश जारी है। महिला एसडीपीओ के नेतृत्व में SIT गठित एडीजी ने बताया कि मामले की जांच के लिए महिला एसडीपीओ दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। प्रकरण में पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले में स्पीडी ट्रायल की तैयारी पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले का स्पीडी ट्रायल कराया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का फोकस आरोपितों की पहचान, गिरफ्तारी और मामले से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने पर है आपत्तिजनक वीडियो पर भी पुलिस की नजर घटना से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। फेसबुक और एक्स समेत इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से वीडियो को टेकडाउन कराया गया है। पुलिस ने वीडियो के प्रसार को रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। नाबालिग का चेहरा दिखाने वालों पर होगी कार्रवाई एडीजी विधि व्यवस्था के अनुसार, जिन लोगों या वेबसाइटों ने नाबालिग का चेहरा दिखाते हुए आपत्तिजनक वीडियो चलाया या प्रसारित किया है, उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। दो अन्य युवकों की तलाश जारी पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक तीन नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है। इसके अलावा दो और युवकों की पहचान हुई है। उनकी तलाश में पुलिस टीम जुटी हुई है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज है प्राथमिकी नाबालिग से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। SIT घटना से जुड़े साक्ष्यों और उपलब्ध वीडियो समेत अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस मुख्यालय ने मामले में त्वरित कार्रवाई और समयबद्ध जांच पर जोर दिया है।  

मथुरा से अलीगढ़ तक पुलिस इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती, हॉस्टल, बैरक, विवेचना कक्ष और कार्यालय बनेंगे

लखनऊ। योगी सरकार ने प्रदेश में पुलिस विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विभिन्न जिलों में पुलिस के अनावासीय भवनों के निर्माण और जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए 18.41 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत यह पूरी धनराशि संबंधित निर्माण कार्यों पर खर्च की जाएगी। योगी सरकार ने कुल 18 करोड़ 41 लाख 3 हजार रुपये की स्वीकृति दी हैं।  मथुरा में पुलिस लाइन से लेकर चौकी तक काम मथुरा की पुलिस लाइन परिसर में पानी की निकासी के लिए नाला और 50 मीटर बाउंड्रीवाल समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए 2.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं मथुरा के थाना बलदेव के अंतर्गत पुलिस चौकी बरौली के अनावासीय भवनों के निर्माण पर 1.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मथुरा के दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था आवास एवं विकास परिषद व सीएंडडीएस जल निगम निर्धारित की गई है।  बागपत, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर में नए भवन बागपत के थाना छपरौली परिसर में 32 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए 1.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रतापगढ़ में क्षेत्राधिकारी रानीगंज कार्यालय के निर्माण के लिए 89.59 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। सुल्तानपुर के थाना कादीपुर और कोतवाली नगर में 48-48 क्षमता के हॉस्टल/बैरक व एक-एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए क्रमशः 2.89 करोड़ और 2.84 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इन दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम है।  मुरादाबाद, फतेहपुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ को भी बजट मुरादाबाद के थाना कोतवाली नगर में 48 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के लिए 2.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। फतेहपुर की 12वीं वाहिनी पीएसी में 200 जवानों के लिए बहुउद्देशीय हॉल के निर्माण पर 2.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गाजियाबाद की रिजर्व पुलिस लाइन में जर्जर विद्युत तारों को बदलने के लिए 1.04 करोड़ रुपये और अलीगढ़ पुलिस लाइन में जीपी स्टोर के सामान के लिए दो हॉल बनाने के लिए 57.69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम लिमिटेड रहेगी। यह सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरे किए करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक करना होगा।

24 सितंबर को खुलेगा DIG भुल्लर रिश्वत कांड का राज, शिकायतकर्ता पहली बार कोर्ट में आएंगे

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े आठ लाख रुपये रिश्वतकांड का पूरा सच अब 24 सितंबर को सामने आएगा। शिकायतकर्ता मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता पहली बार चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में गवाही देने पहुंचेंगे। अदालत ने बत्ता को समन जारी किया है। रिश्वत मामले में आरोप तय होने के बाद अब शिकायतकर्ता की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी मानी जा रही है। सीबीआई के अनुसार, बत्ता ने शिकायत दी थी कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे आठ लाख रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी। हाईकोर्ट और विशेष सीबीआई अदालत से पहले लग चुका है झटका भुल्लर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 10 अगस्त के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले 10 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। तब अदालत ने उन्हें यह छूट दी थी कि यदि दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो वे दोबारा हाईकोर्ट जा सकते हैं। वहीं, जनवरी में चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने भी भुल्लर को जमानत देने से साफ मना कर दिया था। रोपड़ रेंज में तैनाती और पांच लाख रुपये की रिश्वत का आरोप यह विवाद पिछले साल अक्टूबर में सामने आई एक शिकायत से जुड़ा है। उस समय भुल्लर रोपड़ रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने सरहिंद पुलिस थाने में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में अनुकूल व्यवहार और राहत देने के बदले एक निजी बिचौलिए के जरिए घूस की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज कर पिछले साल 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया। इस कार्रवाई के दौरान एक सह-आरोपी को रिश्वत की तय रकम में से पांच लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया, जिसके चलते उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था।

फर्जी दस्तावेज बनाकर CISF में नौकरी हासिल की, आरोपी राजस्थान से पकड़ा

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर CISF में भर्ती हुआ था। अब पुलिस इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। दरअसल, सिटी कोतवाली पुलिस ने पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र खूंटे (रा.पु.से.) के साथ एसडीओपी दंतेवाड़ा आकांक्षा ठाकुर (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी सत्यम दीक्षित को राजस्थान के देवली से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दंतेवाड़ा जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर उसे CISF भर्ती में इस्तेमाल करने का आरोप है। जानिए कैसे हुआ मामले का खुलासा पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर CISF में भर्ती हुआ था और वर्तमान में राजस्थान के देवली में नौकरी कर रहा था। मामले की विवेचना के दौरान दस्तावेजों को लेकर संदेह सामने आया, जिसके बाद राजस्व अधिकारियों और तहसील कार्यालय से संबंधित प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्रों के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी पाए जाने संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। राजस्थान से पकड़ा गया आरोपी इसके बाद दंतेवाड़ा पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। आरोपी के राजस्थान में देवली में होने की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम वहां पहुंची और सत्यम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अन्य लोगों की भूमिका की जांच में जुटी पुलिस पुलिस अब इस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और प्रमाण पत्र हासिल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आम नागरिकों से पुलिस की अपील दंतेवाड़ा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी अथवा किसी शासकीय लाभ के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग न करें। ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना

‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला ‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना ‘2012 से 2017 तक अपराध बढ़े, तब कहां थे सपा नेता?’… दानिश आजाद अंसारी का सवाल ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’… दानिश आजाद अंसारी का गंभीर आरोप लखनऊ, समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा बौखला गई है, क्योंकि उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी हार साफ और स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सिर्फ झूठ और भ्रम फैलाना आज समाजवादी पार्टी का प्राथमिक एजेंडा बन गया है। ‘2012 से 2017 तक अपराधों के समय कहां थे सपा नेता?’ दानिश आजाद अंसारी ने सपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी पहले इस बात का जवाब दे कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा था और महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे थे, तब उसके नेता कहां थे? उन्होंने कहा कि उस समय अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उत्तर प्रदेश में दिनदहाड़े लूट-खसोट, चोरी और दूसरी आपराधिक घटनाएं हुआ करती थीं। दानिश आजाद ने सवाल किया कि तब समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश की भलाई की याद क्यों नहीं आई? ‘योगी के नेतृत्व में यूपी की इमेज बेहतर हो रही’ मंत्री ने कहा कि आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उत्तर प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही है और प्रदेश की छवि बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी के नेता बौखलाए हुए हैं। दानिश आजाद अंसारी ने सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के नेता रिपोर्टरों का अपमान करने का काम कर रहे हैं। ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’ दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से आम और गरीब लोगों पर जानबूझकर अत्याचार करा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश को बदनाम करने के लिए जानबूझकर आपराधिक घटनाएं बढ़वाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह “चाल-चरित्र” अब नहीं चलेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता समाजवादी पार्टी की असलियत जानती है और उसके किसी भी बहकावे में आने वाली नहीं है।

विवाह प्रोत्साहन योजना: 9 वर्षों में 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ, 2026-27 में अब तक 18 जोड़ों को सहायता

लखनऊ। योगी सरकार दिव्यांगजनों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजना के अंतर्गत 18 दिव्यांग दंपत्तियों को लाभान्वित किया गया है। योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष 4.55 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।  सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके वैवाहिक जीवन को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। ऑनलाइन संचालित योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जा रही है। योजना के तहत न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले दिव्यांग दंपत्तियों को उनकी दिव्यांगता की स्थिति के आधार पर 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत यदि दंपत्ति में युवक दिव्यांग है तो 15 हजार रुपये, युवती दिव्यांग है तो 20 हजार रुपये तथा युवक और युवती दोनों दिव्यांग हैं तो 35 हजार रुपये की धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। योजना का संचालन ऑनलाइन किया जा रहा है और लाभार्थियों को पीएफएमएस के माध्यम से ई-पेमेंट द्वारा सीधे लाभान्वित किया जाता है। अबतक 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ योगी सरकार की इस संवेदनशील पहल का लाभ बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों तक पहुंच रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 805 दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया गया। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है योजना दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने कहा कि शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना दिव्यांगजनों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन के साथ उनके वैवाहिक जीवन में भी आर्थिक संबल उपलब्ध कराना है। डॉ. राय ने कहा कि योजना से बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों को लाभ मिल रहा है।

उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक फोकस, उद्यानिकी विकास पर नीति संवाद

उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक : उद्यानिकी को नई ऊंचाई देने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर नीति संवाद में मंथन भोपाल  मध्यप्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क और निर्यात से जोड़कर मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित करने की दिशा में राज्य नीति आयोग ने व्यापक नीति संवाद आयोजित किया। भोपाल के एमपीटी होटल पलाश रेजीडेंसी स्थित विमर्श सभागार में आयोजित एक दिवसीय “Strengthening Horticulture Value Chains in Madhya Pradesh” संवाद में शासन, कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति विशेषज्ञों, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO), वित्तीय संस्थानों, उद्योग प्रतिनिधियों और तकनीकी संस्थाओं ने किसानों को उत्पादन का बेहतर मूल्य दिलाने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया। कार्यक्रम का आरंभ “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” पर आधारित लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुआ। उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरौचिष सोमवंशी, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित तथा कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने उद्यानिकी क्षेत्र की संभावनाओं और आगामी नीति की प्राथमिकताओं पर विचार रखे। अब लक्ष्य अधिक उत्पादन नहीं, अधिक मूल्य किसानों तक पहुंचाना राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरौचिष सोमवंशी ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्यानिकी का विस्तार उल्लेखनीय स्तर तक पहुंच चुका है। अब अगले चरण में उत्पादन बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उत्पाद से बनने वाले अधिकतम मूल्य का लाभ किसान तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग 13.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 259.86 लाख मीट्रिक टन सब्जियों तथा लगभग 4.80 लाख हेक्टेयर में 102.07 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ। पिछले पांच वर्षों के औसत वार्षिक उत्पादन में केला 23.24 लाख मीट्रिक टन, आम 8.92 लाख मीट्रिक टन और संतरा 22.07 लाख मीट्रिक टन रहा है। उन्होंने कहा कि कृषकों के संगठन, मजबूत शीत श्रृंखला, आधुनिक प्रसंस्करण, ब्रांडिंग तथा विभिन्न योजनाओं और वित्तीय साधनों के बेहतर समन्वय से उद्यानिकी उत्पादों की वास्तविक आर्थिक क्षमता का उपयोग किया जा सकता है। मालवा सहित विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट फसलों को मिले बाजार योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला ने कहा कि उद्यानिकी मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, विशेषकर मालवा क्षेत्र में कई विशिष्ट उद्यानिकी फसलों के लिए प्राकृतिक अनुकूलता उपलब्ध है। आवश्यकता इस बात की है कि इन फसलों को केवल खेत से मंडी तक पहुंचाने के बजाय प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि उत्पादन आधारित व्यवस्था से मूल्य श्रृंखला आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ने से कटाई के बाद तत्काल बिक्री का दबाव कम होगा और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने जिला-स्तरीय आंकड़ों, FPO की क्षमता और फसल समूहों के आधार पर सार्वजनिक एवं निजी निवेश को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय पर जोर प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि खेत से बाजार तक मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सुदृढ़ नीति अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और संस्थागत क्षमता निर्माण जरूरी है। उन्होंने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को साझा मंच पर लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े नौ विशेषज्ञ संस्थानों के साथ सहभागिता स्थापित की है। आगे फसल एवं विषय-विशेष आधारित सत्रों के माध्यम से क्षेत्रीय चुनौतियों और नए अवसरों पर कार्य किया जाएगा। कुल कृषि क्षेत्र का 9 प्रतिशत, राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने कहा कि उद्यानिकी को पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ाकर उच्च मूल्य आधारित कृषि और प्रसंस्करण से जोड़ना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 9 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में मध्यप्रदेश का योगदान लगभग 16 प्रतिशत है। उन्होंने शोध संस्थानों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जिला-वार चुनौतियों की पहचान कर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री, उच्च तकनीक नर्सरी, बीज प्रक्षेत्रों के उन्नयन और समूह आधारित प्रसंस्करण संरचना के विस्तार को महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया। 28.60 लाख हेक्टेयर से 438.05 लाख मीट्रिक टन उद्यानिकी उत्पादन नीति संवाद में बताया गया कि मध्यप्रदेश वर्तमान में कुल उद्यानिकी उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है। प्रदेश में लगभग 28.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 438.05 लाख मीट्रिक टन वार्षिक उद्यानिकी उत्पादन हो रहा है। ऐसे में उत्पादन के बाद की व्यवस्थाओं को मजबूत करना किसानों की आय और बाजार प्रतिस्पर्धा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। चर्चा में शीत भंडारण, पैक हाउस, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण, FPO की क्षमता, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और निर्यात मानकों से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। मंडी स्तर पर ग्रेडिंग से लेकर सौर प्रसंस्करण तक आए सुझाव दिनभर चली चर्चा में छंटाई, ग्रेडिंग और गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण को मंडी स्तर पर बढ़ावा देने, कृषि अवसंरचना कोष से संबंधित प्रकरणों के समाधान के लिए विभागीय समन्वय मजबूत करने तथा उद्यानिकी कार्यालयों और FPO तक डिजिटल सहायता पहुंचाने के सुझाव सामने आए। इसके साथ ही उच्च मूल्य वाली मसाला फसलों के लिए सहायता प्रावधानों की समीक्षा तथा कम लागत वाली शीत परिवहन और सौर आधारित प्रसंस्करण तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। नीति संवाद का उद्देश्य प्राथमिक फसल मूल्य श्रृंखलाओं की पहचान, शासन-FPO-तकनीकी संस्थानों-निजी क्षेत्र की भूमिकाओं को स्पष्ट करना तथा योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की उद्यानिकी नीति और आगामी बजट प्रक्रिया के लिए क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करना रहा। समापन अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की सलाहकार डॉ. आकांक्षा चंद ने दिनभर हुई चर्चा और प्रमुख सुझावों का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संवाद से प्राप्त नीतिगत अनुशंसाओं को राज्य शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नीति निर्माण और बजट संबंधी प्रक्रिया में उनका समुचित उपयोग किया जा … Read more