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लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

छठ हमारी सामाजिक एकता, आध्यात्मिक उन्नयन और प्राचीन विरासत का प्रतीक है- सीएम योगी  लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ का कोई ड्रेनेज या सीवर गोमती में नहीं गिरेगा, पीलीभीत से गाजीपुर तक निर्मल होगी नदी- सीएम योगी  छठ पर्व हमें एक-दूसरे के साथ जोड़ता है और सामाजिक बंधन मजबूत करता है- सीएम योगी – नागरिकों के राष्ट्रीय कर्तव्य से जुड़े बिना राष्ट्र विकसित नहीं हो सकता- सीएम – मुख्यमंत्री ने भोजपुरी में दी शुभकामनाएं, कहा- छठ मईया सबके जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेके आवें – स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक ही आत्मनिर्भर भारत का आधार हैं- सीएम योगी – मुख्यमंत्री ने की अपील- सिंगल यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करें, स्वच्छता ही ईश्वर की सेवा है – तपस्या, आस्था और नारी शक्ति का अद्भुत संगम है छठ, बहनों की साधना लोककल्याण की भावना को सशक्त करती है- मुख्यमंत्री  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का माध्यम है, बल्कि सामाजिक एकता, प्राचीन भारतीय विरासत और प्रकृति से संवाद का प्रतीक भी है। गोमती तट के किनारे लक्ष्मण मेला मैदान में छठ घाट पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने छठ गीतों का आनंद लिया और भोजपुरिया सनेश स्मारिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने भोजपुरी में संबोधन देकर श्रद्धालुओं में उत्साह भर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ का कोई ड्रेनेज या सीवर गोमती में नहीं गिरेगा, पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती निर्मल व अविरल होगी। सीएम योगी ने कहा कि छठ महापर्व विश्वभर में बसे भोजपुरी समाज को आत्मशुद्धि और लोक कल्याण के मार्ग से जोड़ता है। उन्होंने भोजपुरी में शुभकामनाएं देते हुए कहा, "छठ मईया के कृपा सबके ऊपर बनल रहे सभन लोगन के परिवार मे शुख समृद्धि और खुशहाली रहे एकरे खातिन हम छठी माई से आशीर्वाद माँगत आनी जितना लोग व्रत बाटें उहें खातिर हम छठी माई से आशीर्वाद माँगत बानी की सबके भगवती उनके सपने के पूरा करें।"  छठ पर्व परिवार की सुख-समृद्धि के साथ लोकमंगल की कामना से जुड़ा है- सीएम योगी सीएम योगी ने कहा कि यह पर्व भारत की प्राचीन विरासत को दर्शाता है और प्रकृति से संवाद सिखाता है। चार दिनों की कठिन साधना में बहनों की तपस्या को विशेष रूप से सराहते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवार की सुख-समृद्धि के साथ लोकमंगल की कामना से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पौराणिक काल से चली आ रही यह परंपरा अब पूरे भारत में फैल चुकी है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी इलाकों तक लाखों श्रद्धालु जुड़ रहे हैं। उन्होंने गाजियाबाद और नोएडा का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 50 हजार से एक लाख तक भक्त छठ मना रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि कोई मंदिर, सरोवर या तालाब ऐसा नहीं जहां श्रद्धालु न जुड़े हों। यह एकता न केवल सांस्कृतिक है, बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता का भी संदेश देती है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें एक-दूसरे के साथ जोड़ता है और सामाजिक बंधन मजबूत करता है। स्वच्छता सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व- मुख्यमंत्री सीएम योगी ने कहा कि कोई देश तब तक विकसित नहीं हो सकता, जब तक उसके नागरिक राष्ट्रीय कर्तव्य से नहीं जुड़ते। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को छठ से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से चल रहा यह अभियान पर्यावरण संरक्षण का आधार है। सीएम योगी ने सिंगल-यूज प्लास्टिक, पॉलीथिन और कूड़े के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गंदगी के कारकों को हटाएं, उसे नदी-नालों में न फेंकें। अगर हर व्यक्ति इसका पालन करे, तो आधे से अधिक समस्या का समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। नागरिकों के राष्ट्रीय कर्तव्य से जुड़े बिना राष्ट्र विकसित नहीं हो सकता। विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में यह प्रयास मदद करेगा। पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती अविरल और निर्मल बनेगी- सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले दो वर्षों में गोमती में जल स्तर कम होने और बदबू की शिकायतें आईं, लेकिन इस बार प्रशासन, सिंचाई विभाग, नगर निगम और स्वयंसेवी संगठनों की मेहनत से सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले बैठकें हुईं और अखिल भारतीय भोजपुरी समाज ने स्वच्छता अभियान चलाया। परिणामस्वरूप, गोमती का जल शुद्ध और पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि जल का अर्घ्य अगर शुद्ध न हो, तो भगवान कैसे स्वीकार करेंगे? पूजा स्थल की तरह नदी भी साफ-सुथरी होनी चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि एक से डेढ़ वर्ष में लखनऊ का कोई ड्रेनेज या सीवर गोमती में नहीं गिरेगा। पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती अविरल और निर्मल बनेगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि कल प्रातः आयोजन समाप्त होने के बाद स्वच्छता अभियान चलाएं। यह राष्ट्रीय कर्तव्य है, हर लखनऊवासी और प्रदेशवासी की जिम्मेदारी। सीएम योगी ने की अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के पदाधिकारियों की सराहना कार्यक्रम में सीएम ने अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के पदाधिकारियों की सराहना की और कहा कि सम-विषम परिस्थितियों में उन्होंने आयोजन को नई ऊंचाई दी। मुख्यमंत्री ने छठ को घरों से लेकर नदी तट तक मनाने की परंपरा का जिक्र किया और सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छठी मैया से प्रार्थना है कि सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों, परिवार और समाज में सुख-समृद्धि आए। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के अध्यक्ष प्रभुनाथ राय, मॉरिशस प्रधानमंत्री के पूर्व सचिव सुरेश रामबरन समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारीगण मौजूद रहे।

डॉ. यादव का दावा: प्रदेश में बढ़ रही है सामाजिक समरसता और सद्भावना

डॉ. यादव का दावा: प्रदेश में बढ़ रही है सामाजिक समरसता और सद्भावना सरकार के प्रयासों से प्रदेश में बन रहा है सामाजिक सौहार्द का माहौल: मुख्यमंत्री भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष उपस्थिति में सोमवार को इंदौर में विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 5 का सामाजिक समरसता सम्मेलन आयोजित किया गया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जो विकास एवं सामाजिक समरसता का सिलसिला प्रारंभ हुआ था, वह वर्तमान प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का सामाजिक समरसता के क्षेत्र में योगदान अमूल्य है। उनके बताए मार्गों पर चलकर प्रदेश में सामाजिक एकता और समानता का नया वातावरण स्थापित किया जा रहा है। कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, विधायक  महेंद्र हार्डिया,  गोलू शुक्ला, डॉ. निशांत खरे,  सुमित मिश्रा, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर  संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त  दिलीप कुमार यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। महापौर  पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर में विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। शहर में ड्रेनेज, जलप्रदाय लाइन और सड़कों का तेज़ी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आज 600 करोड़ रुपये लागत के विकास कार्यों का भूमि पूजन एवं लोकार्पण किया गया है। विधायक  महेंद्र हार्डिया ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 5 सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां हर समाज और वर्ग के लोग मिलकर विकास में भागीदार बन रहे हैं। कार्यक्रम को  सुमित मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, विभिन्न समाज के वरिष्ठ जन और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे। 

छठ महापर्व का पारंपरिक उल्लास, दिल्ली से पटना तक गूंजे छठ गीत और भक्ति की स्वर लहरियाँ

भोपाल  चार दिन तक चली सूर्य उपासना की परंपरा मंगलवार को सुबह पूरी हो गई। कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर आज छठ महापर्व का आखिरी दिन है। भोपाल के 52 घाटों पर सुबह की पहली किरण के साथ श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को दूध, जल और प्रसाद से अर्घ्य अर्पित किया। इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण हुआ। नगर निगम ने घाटों पर सुरक्षा, रोशनी, पेयजल और सफाई की व्यवस्था की थी। पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी सुबह से मौजूद रहीं। श्रद्धालुओं ने शांति और अनुशासन के साथ पूजा संपन्न की। दरअसल, भोपाल में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का समापन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हुआ। चार दिनों से चल रही सूर्य उपासना की परंपरा भक्ति, अनुशासन और उत्साह के माहौल में पूरी हुई। प्रदेशभर के साथ भोपाल में भी श्रद्धालु सुबह की पहली किरण के साथ घाटों पर पहुंचे और सूर्य देव तथा छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। लोक आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ पूजा देशभर में पूरे उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली से लेकर नोएडा, चंडीगढ़ और मुंबई तक घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. गोरखपुर के गुरु गोरखनाथ घाट, पटना के कंकड़बाग और दीघा घाट, और नोएडा के कालिंदी कुंज तट पर हजारों श्रद्धालु परिवारों सहित पहुंचे. छठ महापर्व के दौरान घाट भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और पारंपरिक गीतों से गुलजार रहे. छठ घाटों पर वेदी को केले से पारंपरिक तौर पर सजाया गया.. इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी बीजेपी नेता संजय मयूख के आवास पर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया. प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए. चार दिन चलने वाला यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के साथ संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर पूरे देश को आस्था और एकता के रंग में रंग दिया. दिल्ली के यमुना नदी के वासुदेव घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छठ पूजा में हिस्सा लेने वाले हैं. उनकी इस यात्रा के मद्देनजर घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी खुद घाटों का दौरा कर पूजा की तैयारियों का जायजा लिया है. बिहार में इस बार छठ का राजनीतिक रंग भी देखने को मिला. विधानसभा चुनाव में कई राजनीतिक दलों के उम्मीदवार घाटों पर पहुंचे और श्रद्धालुओं का आशीर्वाद लिया. राजनेताओं की मौजूदगी ने माहौल को और भी खास बना दिया. छठ का महापर्व फिर से बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है, जहां हर कोई सूर्य देव के प्रति आस्था और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करता नजर आ रहा है. देश के कई प्रमुख क्षेत्रों जैसे पटना, गोपालगंज, मऊ, वाराणसी, नोएडा, और दिल्ली के घाटों पर सुबह और शाम की पूजा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. आस्था का अद्भुत संगम राजधानी के 52 घाटों पर मंगलवार को आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कमला पार्क, वर्धमान पार्क, खटलापुरा घाट, प्रेमपुरा घाट, हथाईखेड़ा डैम, बरखेड़ा और घोड़ा पछाड़ डैम पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। घाटों पर पारंपरिक गीतों की गूंज, दीयों की रोशनी और पूजा की तैयारियों से वातावरण भक्ति से भर गया। 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण जल में पड़ी, व्रती महिलाओं ने दूध और जल से अर्घ्य अर्पित किया। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त हुआ। अर्घ्य के बाद व्रती महिलाओं ने पारण कर व्रत का समापन किया। भोजन में चावल, दाल, साग, सब्जी, पापड़, बड़ी, पकौड़ी और चटनी का पारंपरिक प्रसाद शामिल रहा। पुलिस का अमला रहा तैनात नगर निगम की ओर से सभी घाटों पर सफाई, पेयजल, रोशनी और सुरक्षा की व्यवस्थाएं की गई थीं। पुलिस व प्रशासनिक अमला सुबह से ही तैनात रहा। शीतलदास की बगिया में भी छठ पर्व की रौनक देखने लायक रही। यहां भोपाल दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विधायक भगवान दास सबनानी ने पहुंचकर श्रद्धालुओं को पर्व की शुभकामनाएं दीं। भोजपुरी एकता मंच की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लोकगीतों और भजनों ने समा बांध दिया। इस साल अधिक श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि सोमवार शाम अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालु पूरी रात भजन-कीर्तन में लीन रहे। मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ चार दिन की पूजा संपन्न हुई। इस बार पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे। दीपों की जगमगाहट, फूलों की सजावट और लोकगीतों की मधुर ध्वनि से पूरा भोपाल छठ मैया की भक्ति में डूबा नजर आया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान द्वारा आयोजित छठ महोत्सव में हुए शामिल

अपनों के सुख समृद्धि के लिए कष्ट सहते हुए आनंद के साथ व्रत रखने वाली माता-बहनों को मेरा नमन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान द्वारा आयोजित छठ महोत्सव में हुए शामिल मुख्यमंत्री ने जलाभिषेक कर किया छठ पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी छठ पर्व की शुभकामनाएं इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छठ पूजा में सूर्य उपासना, परिवार के स्वास्थ्य और जीवन के दीर्घायु के संकल्प का प्रतीक है। त्रेता युग से भगवान राम  की लम्बी आयु की कामना से यह छठ पूजा आरम्भ हुई। माताएं-बहनें अपनी आस्था एवं संस्कारों के साथ इस पर्व को मनाती हैं। हमारी मातृशक्ति अपने परिवार के कष्टों को दूर करने और सुख समृद्धि के लिए आनंद के साथ जीवन के कष्टों को सहन करते हुए यह व्रत रखती हैं। मैं इन माता-बहनों को नमन करता हूं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर के मन कामनेश्वर महादेव उद्यान में पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान द्वारा आयोजित छठ महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने जलाभिषेक कर छठ पूजन किया। छठ महोत्सव में एक साथ बड़ी संख्या में माताओं-बहनों ने जलकुंड में उतरकर छठ पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित सभी माता-बहनों, नागरिकों के साथ ही प्रदेशवासियों को छठ पूजन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। छठ महापर्व सूर्य उपासना के साथ समाज में मातृशक्ति की भक्ति और शक्ति का प्रतीक  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छठ पर्व सामाजिक एकता, आस्था और लोक परंपरा का अद्वितीय संगम है। छठ पूजा विशेष रूप से बिहार एवं पूर्वांचल क्षेत्र के लिए यह प्रमुख पर्व है। बिहार से मालवांचल का संबंध लगभग एक हजार साल पुराना है और हमारे रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। अब यह पर्व पूरे देश में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाने लगा है। इंदौर में ही आज लगभग 200 से ज्यादा स्थानों पर छठ पूजन के कार्यक्रम हो रहे हैं। छठ पर्व हमारी सांस्कृतिक विविधता और एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि छठ पर्व आस्था, संयम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सामूहिकता, अनुशासन और सांस्कृतिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी धार्मिक और  सांस्कृतिक आयोजनों के सम्मान और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। छठ महापर्व सूर्य उपासना के साथ समाज में मातृशक्ति की भक्ति और शक्ति का भी प्रतीक है। माता-बहनों की आस्था और सुविधा के लिये प्रदेश में एक नहीं हजार कुण्ड बनाएंगे नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमारे देश में सनातन परम्परा आदिकाल से चली आ रही है। यहां पर हमारी माताएं-बहनें संस्कार और संस्कृति का पालन करते हुए व्रत रखती है और देवी-देवताओं की पूजा करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत ही ऐसा देश है जहां इस तरह की पूजा कर माताएं-बहनें अपने पति की लम्बी आयु और परिवार की सुख समृद्धि के लिये व्रत रखती हैं। यही हमारी भारतीय परम्परा और संस्कार है। उन्होंने कहा कि माता-बहनों की आस्था और सुविधा के लिये प्रदेश में एक नहीं हजार कुण्ड बनाएंगे। मुख्यमंत्री की घोषणा पर इंदौर में बनाये जा रहे हैं तीन जल कुण्ड जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने कहा कि प्रदेश सरकार मातृशक्ति के प्रति समर्पित है। उन्होंने बताया कि पिछली बार जब मुख्यमंत्री इंदौर आये थे तब उन्होंने छठ पूजा के लिये तीन बड़े जल कुण्ड बनाये जाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार इंदौर के अन्नपूर्णा, पिपल्याहाना और छोटा बांगड़दा में कुण्ड बनाने का कार्य चल रहा है और शीघ्र ही बनकर तैयार हो जाएंगे।  इस अवसर पर महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, विधायक  रमेश मेंदोला, डॉ. निशांत खरे,  सुमित मिश्रा, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त  संतोष सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा, पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष ठा. जगदीश सिंह, छठ महोत्सव अध्यक्ष ठा. दीनानाथ सिंह, संस्थान के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष कुं. अरविंद सिंह सहित संस्थान के अन्य  पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में माताएं-बहनें एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

अमृत 2.0, कायाकल्प और नगरीय अधोसंरचना योजनाओं के तहत इंदौर में विकास कार्यों का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में किया अमृत 2.0 योजना,कायाकल्प योजना एवं मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना अंतर्गत करोड़ों के विकास कार्यों का भूमिपूजन इन विकास कार्यों से नगरीय अधोसंरचना का होगा सुदृढ़ीकरण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्र.3 के आईडीए ग्राउंड में आयोजित भूमिपूजन समारोह एवं सामाजिक समरसता सम्मेलन में अमृत 2.0 योजना,कायाकल्प योजना एवं मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना अंतर्गत कुल 50 करोड़ की लागत से सीवर,सड़क एवं रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के विकास कार्यों का वर्चुअल भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि नागरिकों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने और शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में यह विकास कार्य एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे जिससे नगरीय अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी। विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत हुआ इन विकास कार्यों का भूमिपूजन अमृत- 2.0 (अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) योजना अंतर्गत शहर के मध्य क्षेत्र में छावनी चौराहे से चन्द्रभागा ब्रिज तक रू 6.00 करोड़ की लागत से 300 एमएम व्यास से 900 एमएम व्यास की कुल लम्बाई 3.0 किमी. की सीवर लाईन बिछाई जाने का कार्य किया जाएगा। उक्त कार्य से छावनी एवं आस-पास के अन्य क्षेत्रों में मास्टर प्लान की सड़क निर्माण के पूर्व ड्रेनेज लाईन बिछाई जाने से क्षेत्र के रहवासियों को जल निकासी और सीवरेज व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं कान्ह नदी शुद्धीकरण में लाभ मिलेगा। इस परियोजना के तहत शहर के मध्य क्षेत्र में सीवरेज के पुराने नेटवर्क को आधुनिक और अधिक क्षमता वाले नए नेटवर्क से बदला जाएगा। 3.0 कि.मी. लंबी इस सीवर लाइन से घनी आबादी वाले क्षेत्र के निवासियों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएँ सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अद्योसंरचना निर्माण योजना के तहत रामबाग चौराहे से अहिल्या आश्रम तक रिव्हरफ्रंट विकास कार्य का भूमिपूजन किया। इस विकास कार्य की कुल लंबाई 1.13 किलोमीटर एवं लागत ₹19.25 करोड़ है। उक्त कार्य के अंतर्गत नदी के दोनों किनारों पर सौंदर्यीकरण संबंधित कार्य के तहत वाक-वे निर्माण, गेबियन वॉल, पिचिंग, स्ट्रीट लाईट व आकर्षक म्यूरल वाल आर्ट आदि कार्य किये जाना प्रस्तावित है। उक्त विकास कार्य के क्रियान्वयन से न केवल क्षेत्र के अद्योसंरचनात्मक सुधार होंगे,बल्कि यह स्थान एक प्रमुख पर्यटन और नागरिक आकर्षण का केंद्र भी बन सकेगा। सरवटे बस स्टेण्ड जूनी इन्दौर ब्रिज से चन्द्रभागा होते हुए पंढरीनाथ चौराहे तक शेष सड़क कार्य का भूमिपूजन किया। 12 करोड़ रुपये की लागत से वार्ड क्र.56 में पानी की टंकी निर्माण कार्य एवं 5 करोड़ की लागत से खेल स्टेडियम निर्माण करने की सौगात दी। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर सांसद शंकर लालवानी, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलू शुक्ला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव एवं अन्य जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।    

सरकारी कनेक्शनों पर भारी बकाया: 16 जिलों में 73 हजार कनेक्शन और 406 करोड़ का पेंडिंग बिल

भोपाल  मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों पर बिजली कंपनियों का भारी बकाया चढ़ गया है। प्रदेश के 16 विभागों ने अब तक 406 करोड़ 36 लाख रुपये के करीब बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया है। कुल 72,900 बिल बकाया हैं।सबसे बड़ा बकायादार नगरीय विकास एवं आवास विभाग है, जिस पर 125 करोड़ 62 लाख रुपये (12,003 बिल) का बकाया है। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 102 करोड़ 32 लाख रुपये (17,049 बिल) बाकी हैं। वित्त विभाग ने इन विभागों के लिए बजट जारी कर दिया था, लेकिन फिर भी भुगतान नहीं किया गया। बिजली कंपनियों ने बार-बार नोटिस भेजे हैं, वहीं एसीएस ऊर्जा और पीएस ने भी सभी विभागों को तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए, मगर कोई असर नहीं दिखा। अन्य प्रमुख बकायेदार विभागों में महिला एवं बाल विकास (34.45 करोड़, 9,965 बिल), स्कूल शिक्षा (29.64 करोड़, 18,539 बिल), स्वास्थ्य (21.07 करोड़), जलसंसाधन (13.97 करोड़), गृह विभाग (10.49 करोड़) और पीएचई विभाग (11.35 करोड़) शामिल हैं। बिजली कंपनियों ने अब एसीएस और पीएस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द भुगतान नहीं किया गया तो सरकारी दफ्तरों के बिजली कनेक्शन काटे जा सकते हैं, जिससे कई विभागों का कामकाज ठप पड़ सकता है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के शासकीय कनेक्शनों की प्रदेश के ग्वालियर, चंबल और भोपाल संभागों में कुल संख्या 72 हजार 900 है। इसमें सबसे अधिक 16049 कनेक्शन पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के हैं, जिन पर 102.32 करोड़ का बिजली बिल बाकी बताया गया है। मंत्री प्रहलाद पटेल के विभाग पर बकाया राशि के भुगतान के लिए संबंधित विभागाध्यक्षों को पत्र लिखे गए हैं। इसी तरह नगरीय विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विभाग के 12034 कनेक्शन हैं, जिन पर 125.62 करोड़ का बिल बाकी है। इसके अलावा जिन मंत्रियों के विभागों से संबंधित बिजली कनेक्शनों पर बकाया राशि अधिक है, उसमें महिला और बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल के नाम शामिल हैं। इन सभी विभागों को भी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी क्षितिज सिंघल ने पत्र लिखा है और बिल जमा कराने को कहा है। यह बकाया राशि अगस्त 2025 की स्थिति में है जबकि अभी अक्टूबर महीने का अंतिम सप्ताह चल रहा है। ऐसे में यह राशि पांच सौ करोड़ से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इन सरकारी विभागों पर बकाया है इतनी राशि (करोड़ रुपए) क्र. विभाग का नाम संख्या बकाया राशि 1 नगरीय विकास, आवास 12034 125.62 2 पंचायत, ग्रामीण विकास 17049 102.32 3 पीएचई 445 11.35 4 नर्मदा घाटी विकास 4 0.086 5 गृह विभाग 2070 10.49 6 स्कूल शिक्षा 18539 29.64 7 किसान कल्याण, कृषि 381 2.39 8 वन 766 4.30 9 स्वास्थ्य 1910 21.07 10 ट्राइबल 2805 6.87 11 राजस्व 485 3.76 12 लोक निर्माण 541 4.29 13 उच्च शिक्षा 331 1.56 14 जल संसाधन 497 13.97 15 महिला, बाल विकास 9965 34.45 16 अन्य विभाग 5078 34.21 17 कुल 72900 406.36

जमीन विवादों पर अब तहसीलदार का फैसला अंतिम, रिकॉर्ड अपडेट से खत्म होगी फाइलों की पेंडेंसी

भोपाल  एसएलआर को अब तहसीलदार लिखा जाएगा। शासन की ओर से इसके आदेश जारी होने के बाद जिले में राजस्व प्रकरण फास्ट ट्रैक पर आ गए हैं। अब जिले में भू प्रबंधन और राजस्व प्रकरण निपटान अफसर एक ही होगा। यानी तहसीलदार ही अब जमीन से जुड़े रेकॉर्ड को अपडेट करेंगे और जमीन से जुड़े मामलों की सुनवाई का फैसला भी वहीं देंगे। जिले में इस समय जमीन से जुड़े करीब एक हजार प्रकरण है, इनके फास्ट ट्रैक में निपटने की स्थिति बन रही है। ऐसे समझें लाभ राजस्व सेवाएं फास्ट ट्रैक होगी। यहां बड़ी संख्या में नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के आवेदन आते हैं। एकीकरण से काम में लगने वाला समय कम होगा, क्योंकि अब एक ही अधिकारी रेकॉर्ड की जांच और अंतिम आदेश जारी करेगा। इससे नागरिक सेवाओं की डिलीवरी तेज होगी। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत जमीन से जुड़े मामले जैसे सीमांकन, नामांतरण की जटिलता घटेगी। भू-अभिलेखों का प्रबंधन बहुत तेज और त्रुटिरहित हो जाएगा। एक एकीकृत कैडर को मास्टर प्लान के अनुसार भूमि उपयोग की बेहतर समझ होगी, जिससे अतिक्रमण हटाने और राजस्व भूमि के संरक्षण में अधिक सती आ सकेगी। जिले में मेट्रो समेत अन्य बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण भूमि रेकॉर्ड की सटीकता और तेजी से होंगे। शासन की ओर से एसएलआर को तहसीलदार का पदनाम देने के आदेश हुए हैं। इसके अनुसार व्यवस्था की जा रही है। आमजन को इससे लाभ मिलेगा।- कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

विंटर शेड्यूल के तहत राजाभोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गोवा डायरेक्ट फ्लाइट सेवा शुरू होगी 28 अक्टूबर से

भोपाल  राजाभोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से विंटर शेड्यूल के अंतर्गत 28 अक्टूबर से गोवा के लिए डायरेक्ट फ्लाइट शुरू होने जा रही है। इसी के साथ दिल्ली और हैदराबाद के लिए अतिरिक्त उड़ान सेवा की सुविधा भी यात्रियों को मिलेगी। एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने बताया कि विंटर शेड्यूल जारी कर दिया गया है। गोवा के अलावा कई अन्य शहरों के लिए अतिरिक्त उड़ान सेवा विंटर सीजन में संचालित की जाएंगी। फिलहाल इंडिगो एयरलाइंस द्वारा इंटरनेशनल लाइट कनेक्टिविटी के लिए दुबई की घोषणा नहीं की गई है। उल्लेखनीय है की इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट से इंडिगो एयरलाइंस दुबई के लिए डायरेक्ट फ्लाइट संचालित करती है। इसे भोपाल से कनेक्टिविटी देने की लंबे समय से मांग की जा रही है। ये सुविधाएं मिलेंगी गोवा से इंडिगो की डायरेक्ट फ्लाइट 28 अक्टूबर से दोपहर बाद 2.40 पर भोपाल आएगी और 3.20 बजे वापस गोवा के लिए रवाना होगी। हैदराबाद उड़ान संख्या 6 ई-7594 हैदराबाद से शाम 6.55 बजे रवाना होगी और रात 9 बजे भोपाल पहुंचेगी। वहीं 6ई-7595 भोपाल से रात 9:20 बजे रवाना होगी और रात 11.30 बजे भोपाल पहुंचेगी। इसके शुरू होने से हैदराबाद भोपाल के लिए दो फ्लाइट्स की सुविधा हो जाएगी।

मध्य प्रदेश में मोंथा साइक्लोन का कहर, कई जिलों में बारिश और ठंड का अलर्ट जारी

भोपाल दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी में बना डीप डिप्रेशन धीरे-धीरे और मजबूत हो रहा है.  मंगलवार के बीच यह डीप डिप्रेशन घातक समुद्री तूफान में बदलने की संभावना है. इससे मौसम में हवा की रफ्तार बढ़ जाएगी और तटीय इलाकों में रेड अलर्ट की चेतावनी दी गई है. वहीं इससे मध्य प्रदेश में भी अगले 4 दिनों में भारी बारिश होने का अनुमान है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तूफान मोंथा मंगलवार को आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकराएगा, जिससे बारिश की रफ्तार और बढ़ेगी. दिन के तापमान में 5 से 8 डिग्री की गिरावट अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने वेदर सिस्टम की वजह से प्रदेश के ज्यादातर शहरों में पिछले 36 घंटे से बारिश का दौर जारी है. इस सिस्टम का असर 30 अक्टूबर तक रहेगा. पिछले 24 घंटे में प्रदेश के 70 से अधिक स्थानों पर बारिश दर्ज की गई है. जिससे मध्य प्रदेश के शहरों में दिन के तापमान में 5 से 8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है. तापमान में गिरावट होने से दिन भी अब रात की तरह ठंडे हो गए. मध्य प्रदेश में नौगांव रहा सबसे ठंडा मध्य प्रदेश में अधिकतर शहरों का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया. दिन में सबसे अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस खजुराहो में दर्ज किया गया. जबकि दिन का सबसे न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस धार में दर्ज हुआ. सोमवार की दरमियानी रात न्यूनतम तापमान नौगांव में 16.6 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस खजुराहो में दर्ज किया गया. मौसम में नमी से जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम वैज्ञानिक दिव्या ई सुरेंद्रन ने बताया कि "बंगाल की दक्षिणपूर्व खाड़ी के ऊपर बना डीप डिप्रेशन मजबूत होकर पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है. 12 से 24 घंटे में दक्षिण-पश्चिम व उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान मोंथा में बदलने की संभावना है. यह 28 अक्टूबर की शाम या रात के दौरान आंध्र प्रदेश तट के मछलीपट्टनम और कालींगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के आसपास, लगभग 90-100 किमी प्रति घंटे की अधिकतम स्थायी हवा की गति और 110 किमी प्रति घंटे तक की झोंकों के साथ एक भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में परिवर्तित होने की संभावना है. वहीं एक ट्रफ अरब सागर के पूर्व-मध्य भाग के ऊपर बने डिप्रेशन से जुड़े ऊपरी वायु चक्रवातीय परिसंचरण से लेकर पश्चिम मध्य प्रदेश तक बनी हुई है. इस प्रणाली से प्रदेश में नमी और अस्थिरता बढ़ रही है. इससे बारिश का दौर जारी है. आज 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर और भिंड में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. यहां 4.5 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना है. इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और बिजली चमकने की संभावना भी है. इनके साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की गई है. 28 को हल्की बारिश, 29 को 6 जिलों में अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार 28 अक्टूबर को कहीं भी भारी बारिश की चेतावनी नहीं दी गई है. हालांकि इस दौरान प्रदेश में कहीं-कहीं हल्की बारिश के साथ गरज चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है. वहीं 29 अक्टूबर को सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है. 30 को 17 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी 30 अक्टूबर को बारिश का सिस्टम एक बार फिर स्ट्रांग होगा और प्रदेश के आधे हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को भिंड, मुरैना, दतिया, ग्वालियर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली और मउगंज जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चलेंगी.

खंडवा-खरगोन-बुरहानपुर इंदौर संभाग से अलग हो सकते हैं, भोपाल में हर विधानसभा में तहसील, मैहर-रीवा के गांवों पर टकराव

इंदौर  मध्य प्रदेश का प्रशासनिक और भौगोलिक नक्शा बदलने वाला है। प्रदेश में तीन नए जिले और एक नया संभाग बनाने की तैयारी है, जिससे कई जिलों की सीमाएं नए सिरे से खींची जाएंगी। इस पुनर्गठन का सबसे बड़ा असर राजधानी भोपाल, रीवा और हाल ही में गठित मैहर जिले पर पड़ेगा असर।  भोपाल में हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक तहसील बनाने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे जिले में तहसीलों की संख्या आठ हो जाएगी। वहीं, मैहर के छह गांवों को रीवा जिले में शामिल करने के प्रस्ताव ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। यह पूरी कवायद पिछले साल सितंबर में गठित प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग की देखरेख में हो रही है। आयोग का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक मैदानी काम पूरा करने का है, क्योंकि जनगणना महानिदेशालय ने प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं को फ्रीज करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद जनगणना का काम पूरा होने तक कोई नई प्रशासनिक इकाई नहीं बनाई जा सकेगी। आयोग ने सितंबर तक 25 जिलों में अपना मैदानी काम पूरा कर लिया है और अगले तीन महीनों में बाकी जिलों में भी यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है। सीमांकन के लिए ली जाएगी IIPA की मदद संभाग, जिला, तहसील और विकासखंडों की सीमाओं को वैज्ञानिक और सटीक तरीके से तय करने के लिए आयोग, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (IIPA) की तकनीकी मदद लेगा। सरकार से सहमति मिलने के बाद आयोग ने IIPA को पत्र भेज दिया है। IIPA सीमा निर्धारण के लिए ड्रोन की मदद से सैटेलाइट इमेजरी तैयार करेगा। आधुनिक माध्यमों से सर्वे कर एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सौंपेगा। हालांकि, अंतिम निर्णय केवल तकनीकी रिपोर्ट पर आधारित नहीं होगा। आयोग इस रिपोर्ट का मिलान नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से मिले सुझावों के साथ करेगा। प्रशासनिक इकाइयों की वास्तविक जरूरतों और जनभावनाओं को परखने के बाद ही सरकार के सामने एक संयुक्त रिपोर्ट पेश की जाएगी। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 25 जिलों में बैठकों का दौर पूरा हो चुका है और पोर्टल के माध्यम से भी सुझाव मांगे जा रहे हैं। भोपाल में होंगी अब 8 तहसील पुनर्गठन का सबसे बड़ा असर राजधानी भोपाल में देखने को मिलेगा। वर्तमान में भोपाल जिले में केवल तीन तहसील हैं- हुजूर, कोलार और बैरसिया। हुजूर तहसील का कार्यक्षेत्र बहुत बड़ा है, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र आते हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए शहर के पांच प्रमुख नजूल सर्किल कार्यालयों को तहसील का दर्जा दिया जाएगा। इनमें शहर (पुराना भोपाल), संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़), गोविंदपुरा, टीटी नगर और एमपी नगर शामिल हैं। इन पांच नई तहसीलों और पुरानी तीन तहसीलों को मिलाकर भोपाल जिले में कुल आठ तहसील हो जाएंगी। इन तहसीलों का सीमांकन विधानसभा क्षेत्रों को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक और राजनीतिक इकाइयों में तालमेल स्थापित हो सके। रीवा-मैहर सीमा पर खिंची तलवारें, मुकुंदपुर बना केंद्र बिंदु पुनर्गठन की इस कवायद के बीच रीवा और मैहर जिले की सीमा पर तनाव की स्थिति बन गई है। आयोग ने मैहर जिले की अमरपाटन तहसील के छह गांवों- मुकुंदपुर, धौबाहट, अमीन, परसिया, आनंदगढ़ और पापरा को रीवा जिले में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव का मुख्य कारण मुकुंदपुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध 'महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी' है। भौगोलिक रूप से मुकुंदपुर रीवा से महज 20 किलोमीटर दूर है, जबकि मैहर से इसकी दूरी 65 किलोमीटर और पूर्व जिला मुख्यालय सतना से 50 किलोमीटर है। स्थानीय लोग लंबे समय से प्रशासनिक सुगमता के लिए इन गांवों को रीवा में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। आयोग के पत्र के बाद मैहर जिला प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है। सांसद ने सीएम को पत्र लिखा अमरपाटन के राजस्व अधिकारियों को सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से राय लेकर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। मैहर के अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी) ने भी इस प्रस्ताव पर जनसुनवाई करने को कहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध भी शुरू हो गया है। सतना सांसद गणेश सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इन गांवों को रीवा में शामिल करने का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि इससे मैहर जिले का भौगोलिक और सांस्कृतिक संतुलन बिगड़ेगा। उन्होंने पत्र में लिखा कि यह किसी बड़ी साजिश के तहत हो रहा है। मुकुंदपुर की वाइट टाइगर सफारी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मैहर जिले की यह एक पहचान है। इसे लेकर सतना-मैहर के नेता डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ लामबंद हो गए थे। हालांकि, डिप्टी सीएम शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर स्थिति साफ करने की कोशिश की। सीहोरा को जिला बनाने की मांग ने फिर पकड़ा जोर जबलपुर जिले की सीहोरा तहसील के लोग पिछले 22 साल से इसे जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। पहली बार 2002 में ये मांग उठी थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सहमति दी थी। इसके बाद चुनाव आचार संहिता लागू हो गई और प्रदेश में बीजेपी की सरकार काबिज हो गई। इसके बाद भी लगातार मांग की जा रही है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। एक बार अपनी इस मांग को लेकर सीहोरा के लोगों ने दिवाली से एक दिन पहले सीहोरा आंदोलन समिति के आह्वान पर अपने खून से दीपक जलाए। सीहोरावासियों का कहना है कि जब तक हमारी मांग मानी नहीं जाती, तब तक इसी तरह से प्रदर्शन चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि इन दीयों में केवल तेल और बाती नहीं, बल्कि सिहोरा की पीड़ा और वर्षों की अनदेखी की आग जल रही है। अब जानिए, कौन से नए जिले बन सकते हैं… नर्मदापुरम से अलग होकर पिपरिया बन सकता है नया जिला पिपरिया नर्मदापुरम जिले में आता है। जिला मुख्यालय से पिपरिया की दूरी करीब 70 किमी है। पहाड़ी इलाका होने से आने-जाने में करीब 2 घंटे का समय लगता है। पिपरिया को जिला बनाने की मांग कई साल से की जा रही है। पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान पिपरिया को जिला बनाने की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और हड़ताल भी की गई थी। पिपरिया को … Read more