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कम खेती, ज्यादा रासायनिक खाद: मध्यप्रदेश में 4.29 लाख टन बढ़ा उपयोग

भोपाल मध्य प्रदेश में खेती का रकबा हर साल घटने के बावजूद रासायनिक खाद की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। जैविक खेती के मामले में देश में पहले स्थान पर होने के बाद भी किसानों की रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि जिस तरह से अधिक उत्पादन के लिए मृदा की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है, वह खतरनाक है। रासायनिक खाद के बढ़ते उपयोग से हर फसल सीजन में खाद की किल्लत की सूचनाएं आम हो चली हैं। वर्ष 2022-23 में 149.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलें बोई गई थीं जो 2025-26 में 146 लाख हेक्टेयर रह गईं। इससे उलट इस अवधि में खाद का उपयोग 29 लाख टन से बढ़कर 33.29 लाख टन (सितंबर प्रथम सप्ताह) पहुंच चुका है। जैविक फसल उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत देश में जैविक खेती के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। कुल जैविक उत्पादन में 40 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश से आता है। देश में 65 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है जिसमें 16 लाख हेक्टेयर मध्य प्रदेश का है फिर भी विरोधाभास यह है कि किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच खरीफ फसल का क्षेत्र साढ़े तीन लाख हेक्टेयर घट गया लेकिन खाद की खपत 4.29 लाख टन बढ़ गई। रासायनिक खाद-कीटनाशकों के नुकसान को देखते हुए वर्ष 2011 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने जैविक खेती को प्रोत्साहित करने विशेष नीति बनाई थी। इसका लाभ यह हुआ कि मध्य प्रदेश जैविक उत्पादन के मामले में नंबर एक पर पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय : दूरगामी परिणाम ठीक नहीं     उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान अधिक खाद का उपयोग करता है। तात्कालिक रूप से भले ही इससे लाभ मिलता है लेकिन दूरगामी परिणाम ठीक नहीं होते। मृदा की उर्वरा शक्ति तो प्रभावित होती ही है, भूजल पर भी असर पड़ता है। जो उपज होती है, उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती। – डॉ. जीएस कौशल, पूर्व कृषि संचालक, मध्य प्रदेश शरीर का हर अंग होता है प्रभावित     रासायनिक खाद के माध्यम से एक सीमा से अधिक रसायन मानव शरीर में पहुंचने पर हर सिस्टम पर असर होता है। सबसे अधिक दुष्प्रभाव पेट पर पड़ता है। पेट संबंधी कई बीमारियों के बाद इसका प्रभाव अन्य अंगों पर भी होने लगता है। पोषक तत्व घटने से शरीर में विटामिन व मिनरल्स की कमी होती है। किडनी पर भी असर होता है। कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। – डॉ. आर.आर. वर्डे, सह प्राध्यापक, मेडिसिन  

इंदौर पुलिस की नई पहल: विजय नगर और लसुड़िया थानों में दो-दो प्रभारी तैनात

इंदौर  शहर में लगातार हो रहीं आपराधिक घटनाओं को देखते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर ने एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की है. इसको लेकर एक आदेश में जारी किया गया है ताकि शहर में आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम लगाई जा सके. इंदौर में कमिश्नर सिस्टम लागू हुए 2 साल से अधिक हो चुके हैं. लेकिन अभी भी शहर में आपराधिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. जिससे एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की गई है. 2 थानों में 2 टीआई की नियुक्ति इंदौर शहर में अपराध के ग्राफ को कम करने के लिए करीब 2 साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया गया था. लेकिन 2 साल बीतने के बाद भी इंदौर में अपराध के ग्राफ में लगातार इजाफा हो रहा है. इसी कड़ी में इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने आपराधिक घटनाओं पर लगाम कसने के लिए इंदौर के 2 स्थानों पर 2 थाना प्रभारी की नियुक्ति की है. काफी बड़ा है इन दोनों थाना क्षेत्र का एरिया इसको लेकर एक आदेश भी जारी किया गया है कि, शहर में अपराध पर रोक लगाने के लिए 2 थाना प्रभारी नियुक्त किए गए हैं. जिसमें इंदौर के लसूडिया और विजयनगर थाने पर 2 थाना प्रभारी को तैनात किया गया है. इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाने का एरिया काफी बड़ा है. इन क्षेत्रों में काफी रहवासी क्षेत्र आते हैं. इसी के चलते दोनों थानों पर सबसे पहले 2 थाना प्रभारी को इंदौर पुलिस कमिश्नर के द्वारा तैनात किया गया है. इन थानों के टीआई बदले गए इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाना के अलावा द्वारकापुरी, आजाद नगर, हीरानगर, छत्रीपुरा, और सराफा समेत कई थानों के टीआई बदले गए हैं. विजयनगर में टीआई चंद्रकांत पटेल की पोस्टिंग है. वहीं, उनकी मदद के लिए मीना बौरासी को भी विजयनगर थाने में नियुक्त किया गया है. वहीं, लसूड़िया थाना में नीतू सिंह की नियुक्ति हुई है. तारेफ सोनी पहले से यहां टीआई हैं. लॉ एंड ऑर्डर पर रखेंगे निगरानी इन दोनों थाने का मूल काम क्षेत्र में लॉ एंड ऑर्डर पर निगरानी रखने और आपराधिक घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से करवाई करना रहेगा. 2 थाना प्रभारी की तैनाती होने के बाद क्षेत्र में अपराध के ग्राफ में कमी आने की पूरी संभावना है. इसके साथ ही इंदौर प्रदेश का ऐसा जिला बन गया है, जहां एक थाने पर 2 थाना प्रभारियों को नियुक्त किया गया है.  

भोपाल मेट्रो सेवा शुरू: पहले 7 दिन फ्री यात्रा, फिर ₹20 से शुरू होगा किराया

भोपाल  अगला स्टेशन है…दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों। इंदौर को मेट्रो की सौगात मिलने के बाद भोपाल के यात्रियों के मन में भी कुछ इस तरह के ख्यालात आ रहे होंगे। लोग पिछले एक साल से मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। अब ऐसे लोगों के लिए अक्टूबर का महीना खुशखबरी लेकर आ सकता है। दरअसल, मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण की मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को पहले 7 दिन तक फ्री में सफर करने का मौका मिलेगा। वहीं, कुछ दिनों तक किराए में डिस्काउंट में टिकट मिलने के बाद 20 रुपये की शुरूआती कीमत में लोग यात्रा कर पाएंगे। सीएमआरएस टीम पहुंची भोपाल मेट्रो ट्रेन शुरू करने से पहले कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे खास होता है। इसकी 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद कमर्शियल रन शुरू होती है। यह टीम डिपो और गाड़ी को जांचेगी। साथ ही ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल तक देखेगी। यह टीम 25 और 26 सितंबर को निरीक्षण करेगी। यह शेड्यूल आने के बाद एमपी मेट्रो के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। इस जांच के बाद एक और केंद्रीय टीम भी आएगी। फाइनल रिपोर्ट के बाद मेट्रों को दौड़ाया जा सकता है। ऐसा रहेगा मेट्रो किराया भोपाल मेट्रो के अफसरों के अनुसार शुरुआती 7 दिन तक यात्री मेट्रो में फ्री सफर कर पाएंगे। इसके बाद 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। यह छूट खत्म होते ही 20 रुपए का टिकट लेकर लोग मेट्रो का सफर कर पाएंगे। भोपाल के सभी चरण प्रारंभ होने के बाद अधिकतम किराया 80 रुपए रखने का विचार है। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। फिलहाल यह बाधा बताया जाता है कि जिस लाइन पर पहले मेट्रो चलेगी उसके एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम अधूरे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट तय किया गया है। पहला चरण ही पूरा हुआ आपको बता दें कि राजधानी भोपाल में पहले चरण के तहत ऑरेंज लाइन में एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी की लाइन बनाई गई है। इसके बाद दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक के लिए कार्य चल रहा है। इसमें करीब 2 से 3 वर्ष लगने का अनुमान है। फिलहाल भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन ट्रैक पर मेट्रो दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। आनलाइन नहीं मिलेगा टिकट भले ही दिल्ली सहित कई शहरों में टिकट प्रणाली आनलाइन हो गई है। लेकिन भोपाल में आपको मैन्युअल टिकट से यात्रा करना पड़ेगा। बता दें कि ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ का टेंडर सरकार ने निरस्त कर दिया है। इसकी वजह है तुर्किए ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन देकर मदद की थी।

मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा, नौरादेही से बांधवगढ़ तक बनेगा टाइगर कॉरिडोर

सागर  वन्यजीव संरक्षण के लिए तरह-तरह के संरक्षित वन स्थापित किए जाते हैं. जिनमें टाइगर रिजर्व, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और नेशनल पार्क जैसे संरक्षित वन क्षेत्र की स्थापना की जाती है. लेकिन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नये आयाम के तौर पर तेजी से उभरा है. वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि वन्य प्राणियों के संतति विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित वन क्षेत्र में न रखा जाए. किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र को लंबे समय तक बांधकर नहीं रखा जा सकता है. क्योंकि इससे कई तरह के नुकसान होते हैं. ऐसे में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का नया कॉन्सेप्ट सामने आया है. इसके तहत संरक्षित वन क्षेत्र को आपस में इस तरह से जोड़ा जाता है कि वन्य प्राणी एक दूसरे संरक्षित वन में आसानी से आ जा सकते हैं. मध्य प्रदेश में पिछले 2 सालों के भीतर 2 नए टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आने से वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनने की संभावना बढ़ी है. दरअसल नौरादेही, रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद 4 टाइगर रिजर्व को जोड़कर वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की संभावना है. जिसमें रातापानी, नौरादेही, पन्ना और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व शामिल हैं. संरक्षित वन क्षेत्र की समस्याएं वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बांध के रखने से उसमें रहने वाले वन्यजीवों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. साथ ही साथ वन्य जीव संरक्षण के उद्देश्य भी फलीभूत नहीं हो पाते हैं. क्योंकि लंबे समय तक एक ही तरह के माहौल और वातावरण में रहने के कारण वन्य जीवों की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. वन्य जीवों के बीच में जेनेटिक फ्लो रुकता है, जिससे वन्य जीव की संतति विकास पर असर पड़ता है. इसके साथ ही वन्य जीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आने के साथ-साथ वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता है.  वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नया आयाम संरक्षित वन क्षेत्र की इन समस्याओं के चलते वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का तेजी से नाम सामने आया है. विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित वन क्षेत्र को इस तरह है आपस में जोड़ा जाए कि उनमें रहने वाले वन्य जीव एक दूसरे संरक्षित वन क्षेत्र में आसानी से विचरण कर सके. एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में जाने से जहां वन्य क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ रही संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा, वहीं वन जीवन की संतति विकास में मदद मिलने के साथ-साथ एक संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों के बीच होने वाले आपकी संघर्ष को रोकने में मदद मिलती है. जानकारों की मानें तो वाइल्ड लाइफ लाइफ कॉरिडोर से इन समस्याओं पर काबू करने में मदद मिलती है. अंतः प्रजनन अवसाद दूर करता है कॉरिडोर  कोई भी जीव लगातार निकट संबंधियों से प्रजनन करके अपनी संतति का विकास करता है तो भावी पीढ़ी पर कई तरह के दुष्परिणाम को देखने मिलते हैं. उनके जीवन जीने की क्षमता पर असर पड़ता है. उनसे जो संतति पैदा होती है, वह कमजोर होती है. इसके अलावा प्रजनन क्षमता भी गिरती है. लेकिन अगर जीव एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में विचरण करते हैं, तो अपने ही तरह के दूसरे अनुवांशिक गुणों वाले जीवों से प्रजनन करके संतति विकास करते हैं. कॉरिडोर जीन प्रवाह में करता है मदद  अनुवांशिकी में जेनेटिक फ्लो यानि जीन प्रवाह का विशेष महत्व है. कोई भी जीव जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है तो भले ही एक ही संतति के जीव हो लेकिन उनकी आनुवंशिकी में अंतर पाया जाता है. ऐसे में जब वन्य जीव दूसरे वन क्षेत्र में जाकर प्रजनन करते हैं, तो उनकी संतति विविधता लिए होती है और नई पीढ़ी अच्छी और तंदुरुस्त नस्ल की होती है. वन्यजीव संघर्ष पर काबू  संरक्षित वन क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आती है और वन्यजीवों के बीच में आपसी संघर्ष बढ़ता है. ऐसी स्थिति में वाइल्डलाइफ कॉरिडोर काफी मददगार साबित होता है. क्योंकि किसी संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती है तो उन्हें दूसरे संरक्षित क्षेत्र में वहां विस्थापित किया जा सकता है. जहां उनके लिए जीवन यापन की पर्याप्त व्यवस्था हो. 'कॉरिडोर बनाने की कोशिश में लगा है वन विभाग' नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए ए अंसारी कहते हैं कि "ये वन्य जीव संरक्षण का नया आयाम है. वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से वन्यजीवों को कई तरह के फायदे हैं और उनके संरक्षण में काफी मदद मिलती है. क्योंकि किसी संरक्षित क्षेत्र को अनंत काल तक बांधकर नहीं रख सकते हैं. जब जानवर एक संरक्षित क्षेत्र से दूसरे संरक्षित क्षेत्र में आसानी से बिना बाधा के आ जा सकते हैं तो पॉपुलेशन मैनेजमेंट में आसानी होती है और जेनेटिक फ्लो में मदद मिलती है. इसके अलावा इनब्रीडिंग डिप्रेशन कम होता है. अच्छे और तंदुरुस्त नस्ल के जानवर हमें मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा ये है कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष कम होता है. यदि हमारे संरक्षित वन क्षेत्र आपस में जुड़े रहेंगे तो जानवर इधर से उधर प्राकृतिक तरीके से आ जा सकेंगे. लेकिन किसी संरक्षित वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बंद रखा जाएगा तो एक समय के बाद डिप्रेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आएगी." उन्होंने आगे कहा, "नौरादेही टाइगर रिजर्व के कारण संभावित कॉरिडोर अस्तित्व में आया है. नौरादेही के एक तरफ रातापानी, दूसरी तरफ पन्ना टाइगर रिजर्व हैं. इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भी कनेक्टिविटी है. वन विभाग इसको आईडेंटिफाई करने में लगा हुआ है. जब यह अस्तित्व में आ जाएगा तो वन्यजीव प्रबंधन आसान हो जाएगा."

मध्यप्रदेश को मिलेगा सड़क विकास का बड़ा तोहफा, 2 लाख करोड़ में सुधरेंगी 35,000 KM सड़कें

भोपाल   प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। राज्य में लगभग 35 हजार किलोमीटर सड़कें हैं। शहर की सड़कें हाइवेज से अलग हैं। उन पर यातायात का काफी दबाव होता है। इसलिए जरूरी है कि नगरीय सड़कों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाया जाए। नगरीय विकास विभाग अगले 5 वर्षों में 2 लाख करोड़ से सड़क विकास के काम कराएगा। यह जानकारी आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे ने  सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आयोजित कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा, इंजीनियर्स सड़क निर्माण तकनीकों को समझें, इसलिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 600 इंजीनियर्स जुड़े सड़क निर्माण तकनीक पर आधारित कार्यशाला में प्रदेशभर की निकायों के 600 इंजीनियर्स जुड़े। इसमें आइआइटी इंदौर और रुड़की के अलावा अन्य रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने सड़क की गुणवत्ता को लेकर नई तकनीकों और सुधार पर जानकारी दी। शहर में बिछेगा नया सीवेज नेटवर्क वहीं बारिश में पूरा भोपाल शहर जल प्लावन ग्रस्त होने के बाद नगर निगम ने शहर में नया सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए 545 करोड रुपए का फंड मंजूर किया है। इससे नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जाएंगे ताकि बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा झील जैसे जल स्रोत में गंदा पानी मिलने से बचाया जा सके। गुरुवार को महापौर परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया है।

पर्यावरण सुरक्षा का संदेश: गांवों में लोगों को दी जा रही प्लास्टिक उपयोग की समझाइश

राज्यमंत्री हिरवार ने किया वृक्षारोपण भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में 2 अक्टूबर 2025 तक ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। अभियान की 17 सितम्बर को शुरूाआत हुई थी। सेवा पखवाड़ा अभियान में मैदानी अधिकारी, कर्मचारी नागरिकों और ग्रामवासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शहडोल जिले में अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ार के गांव गिरवा में ग्रामवासियों को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नही करने की समझाइश दी गई। स्वच्छता का संदेश देने के लिए गांव में जागरूकता रैली भी निकाली गई। जनपद पंचायत के स्वच्छता समन्वयक श्री सचिन श्रीवास्तव ने व्यापारियों को सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के प्रति जागरुक बनाकर इसका उपयोग बंद करने की अपील की। जैतपुर और चरखरी गांवों में स्वच्छता मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। गोहपारू जनपद पंचायत के उप स्वास्थ्य केन्द्र लफदा में ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान के अंतर्गत 8 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाईयां प्रदान की गईं। ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान के तहत शहडोल जिले मे 19 सितम्बर तक 4627 से अधिक महिलाओं एवं बच्चों की हीमोग्लोबिन की जांच की गई है। अनूपपुर के प्रभारी मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के प्रांगण में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने आह्वान कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के नाम एक पेड़ अवश्य रोपे, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ मातृ सम्मान का संदेश समाज में प्रसारित हो सके। जैविक खेती को अपनाएं किसान, हुई एकदिवसीय कार्यशाला अनूपपुर के पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस शासकीय तुलसी महाविद्यालय में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत जैविक खेती पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के सेमीनार हॉल में आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रुप में श्री चन्दन कुमार यादव ने जैविक खेती और इसके प्रशिक्षण कार्य का अपना लंबा अनुभव साझा किया। महाविद्यालय के रसायन विभागाध्यक्ष प्रो. ऋषिकेश चंद्रवंशी ने विद्यार्थियों को जैविक खेती की महत्ता और इसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। छतरपुर में स्वच्छता की शपथ छतरपुर जिले में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत ग्राम एवं निकाय स्तर पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान में स्वच्छता कार्य किए जा रहे हैं। नागरिकों से अपने घरों, दुकानों के आस-पास साफ सफाई बनाए रखने एवं घरों एवं प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को पृथक पृथक गीला एवं सूखा कचरा रखकर कचरा गाड़ी में डालने की अपील के साथ ही उपस्थित नागरिकों को स्वच्छता बनाए रखने और गंदगी न फैलाने की शपथ भी दिलाई गई। गांवों को साफ-सुथरा रखने के लिये श्रमदान नर्मदा पुरम में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान एवं ‘स्वच्छ भारत’ मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले की 49 ग्राम पंचायतों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता के कार्य किये जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के साथ व्यक्ति की आदतों में परिवर्तन करना है, जिससे स्वच्छता स्थायी रूप से बना रहे। अभियान के अंतर्गत नर्मदापुरम जिले के सभी गांवों में प्रचार-प्रसार कर ग्रामवासियों से साफ-सफाई के लिये श्रमदान का आह्वान किया गया। हरदा जिले में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत जिले के ग्राम आमसागर, प्रताप पुरा, जूना पानी, मकड़ई, रिजगांव, अबगाव खुर्द और बाला गांव कई गांवो में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। शिविर में स्वास्थ्य विभाग के दल ने निशुल्क स्वास्थ्य परामर्श दिया, आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी निर्माण और असंचारी रोग स्कैनिंग, एनीमिया और सिकल सेल रोगों समेत विभिन्न रोगों के लिए की गई।। इस अवसर पर रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। बैतूल जिले में स्वछता टीम द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत स्कूलों में नशा मुक्ति अभियान चलाया गया। अभियान में बच्चों को नशा संबंधी सभी चीजों से दूर रहने एवं जागरूक बनाने के लिए रैली निकाली गई।  

राजनीति की तैयारी: MP कांग्रेस जिला अध्यक्षों की बैठक कल से, PCC मुख्यालय में होगी अहम चर्चा

भोपाल  कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्षों की पहली बैठक राजधानी भोपाल कांग्रेस मुख्यालय में रविवार 21 सितंबर से मंगलवार 23 सितम्बर तक आयोजित की जाएगी। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा करेंगे। मध्य प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्षों की पहली बैठक राजधानी भोपाल कांग्रेस मुख्यालय में रविवार 21 सितंबर से मंगलवार 23 सितम्बर तक आयोजित की जाएगी। शुरुआती दौर में  6 संभागों की अलग-अलग समय में बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में पिछले 1 महीने में अध्यक्षों द्वारा किए गए काम का हिसाब मांगा जाएगा। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा करेंगे। नियुक्ति के बाद पहली बार हो रही बैठक  जानकारी के लिए बता दें कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद पहली बार भोपाल में बैठक बुलाई गई है। ब्लॉक अध्यक्ष और जिला कार्यकारिणी को लेकर रिपोर्ट ली जाएगी। कार्यकारिणी और ब्लॉक अध्यक्ष को लेकर एक महीने की जिला अध्यक्षों को डेडलाइन दी गई थी। कामकाज को मजबूत करना उद्देश्य बतादें के एमपी कांग्रेस 2028 में होने वाले चुनाव की अभी से तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच संगठ को मजबूत करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य जिला अध्यक्षों को संगठन सृजन अभियान के तहत अपने कामकाज को मजबूत करने और आगामी चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है।   बैठक की तारीखें और समय – 21 सितंबर: भोपाल संभाग (सुबह 10 बजे), नर्मदापुरम संभाग (दोपहर 3 बजे) और सागर संभाग (दोपहर 12 बजे) – 22 सितंबर: ग्वालियर चंबल संभाग (सुबह 10 बजे) और इंदौर संभाग (दोपहर 3 बजे) – 23 सितंबर: उज्जैन संभाग (सुबह 10 बजे) 

मिशन शक्ति का शुभारंभ: योगी सरकार ने त्योहारों में सुरक्षा कड़ा करने का लिया निर्णय

लखनऊ  सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ के लोकभवन में मिशन शक्ति के पांचवें चरण का शुभारंभ किया। इस मौके पर नवस्थापित मिशन शक्ति केंद्रों का उद्घाटन, मिशन शक्ति केंद्रों से संबंधित SOP की पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सीएम विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद कार्यक्रम में भी शामिल हुए। सीएम योगी ने कहा कि मिशन शक्ति के इस अभियान नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वावलंबन के साथ जोड़ा गया है। आज इसके परिणाम हम सबके सामने हैं। यूपी पुलिस में आजादी के बाद से 2017 तक महिला कार्मिकों की संख्या मात्र 10 हजार थी। 2017 के बाद से अब तक जो भर्ती हुई है उसके चलते यूपी पुलिस में आज 44 हजार से अधिक महिला कार्मिक हैं। हर भर्ती में 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती अनिवार्य रूप से करनी है। उधर, आने वाले दिनों पर पड़ने वाले त्योहारों के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर है। कल यानी शुक्रवार 19 सितम्बर 2025 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक उच्चस्तरीय बैठक में आदेश दिया था कि आगामी पर्व-त्योहार पर लोगों की सुरक्षा, सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए। माहौल खराब करने वाले अराजक तत्वों के साथ पुलिस कठोरता से निपटे। इसके बाद शनिवार को प्रदेश के कई जिलों में त्योहारों को लेकर पुलिस की तैयारी नजर आई। अयोध्या में एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया एएनआई से बातचीत में बताया कि आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए आयोजित किए जाने वाले सभी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। कांस्टेबल से लेकर सभी अधिकारी, सभी जगह का निरीक्षण कर रहे हैं। आयोजन समितियों के साथ विस्तृत बैठकें की गई हैं। त्योहारों को उत्साह के साथ सुरक्षित रूप से मनाने के लिए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

डॉ. यादव ने जताई सरकार की प्रतिबद्धता: जनता के लिए विकास और सुरक्षा सर्वोपरि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की उपस्थिति में सेवा पखवाड़ा के संबंध में हुई बैठक में कहा कि  राज्य सरकार विकास, जनकल्याण और सुराज के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रदेश में सेवा पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश में अब सेवा पखवाड़ा की गतिविधियो ंको सत्ता और संगठन मिलकर तेज गति देंगे। इसको लेकर शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में बैठक हुई।  बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार विकास, जनकल्याण और सुराज के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में 17 सितंबर से सेवा पखवाड़ा आरंभ किया गया है। साथ ही आमजन को जीएसटी  रिफॉर्म्स के लाभ दिलाने तथा आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत जन-जन को स्वदेशी अभियान में शामिल करने के उद्देश्य से भी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान में आमजन की सक्रिय भागीदारी से सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास तथा वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप गतिविधियां जारी हैं।  मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक वार्ड और ग्राम स्तर तक गतिविधियों का प्रभावी व्यवस्थित और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'स्वच्छता ही सेवा अभियान', 'एक बगिया मां के नाम' और 'एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत पौधरोपण, नमो पार्क तथा नमो उपवन विकसित करने, विद्यालय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन, जनसामान्य को स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प सामग्री खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने जैसी गतिविधियां जनभागीदारी से संचालित की जा रही हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में 'विकसित भारत' थीम पर निबंध, वाद-विवाद और चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा संगोष्ठियां भी हो रही हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खण्डेलवाल सहित शिवप्रकाश और हितानंद शर्मा उपस्थित थे।  

कान्हा टाइगर रिजर्व में हुआ इंग्लिश स्पीकिंग प्रशिक्षण

भोपाल कान्हा टाइगर रिजर्व मण्डला में खटिया परिक्षेत्र अंतर्गत ईको सेंटर में कान्हा टाइगर रिजर्व के गाइड्स के लिये 14 दिवसीय इंग्लिश स्पीकिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। प्रशिक्षण में टाइगर रिजर्व के जी-1 श्रेणी के 58 गाइड शामिल हुए। प्रशिक्षण मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल द्वारा कराया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य गाइड्स को अंग्रेजी भाषा में दक्ष बनाना, जिससे आवश्यकता अनुसार गाइड बेहतर प्रकार से पर्यटकों के अनुरूप अंग्रेजी भाषा को समझकर उसी भाषा में जानकारी दे सकें। इससे गाइड्स में आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और पर्यटकों से कुशलतापूर्वक संवाद से वन एवं वन्य-जीव सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य को भी बेहतर किया जा सकेगा। प्रशिक्षण में प्रशिक्षकों द्वारा गाइड्स को अंग्रेजी भाषा में संवाद करने के तरीके, शारीरिक भाषा, वन, वन्य-जीव एवं पर्यावरण से संबंधित शब्दों के अंग्रेजी अर्थ एवं संवाद के लिये आवश्यक व्याकरण तथा शब्द कोष के विषय में प्रस्तुतिकरण एवं प्रेक्टिकल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में क्षेत्र संचालक, उप संचालक कोर, बफर, सहायक संचालक बंजर और परिक्षेत्र अधिकारी खटिया भी उपस्थित रहे।