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उत्तर भारत में भीषण लू का अलर्ट, 22 मई तक गर्मी से नहीं मिलेगी राहत

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में आने वाले दिनों में भीषण गर्मी लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 22 मई तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में लू से लेकर गंभीर लू (सीवियर हीटवेव) की स्थिति बनी रह सकती है। दिल्ली-NCR में 45 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिनों के दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। रविवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। इसके बाद आसमान साफ रहने से गर्मी और बढ़ेगी और तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। रात के समय भी गर्म हवाएं चलने और तापमान अधिक रहने से लोगों को राहत मिलने की संभावना कम है। क्या होती है हीटवेव? मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाए और सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या अधिक ऊपर चला जाए, तो उसे हीटवेव माना जाता है। यदि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाए, तो उसे सीधे लू की स्थिति माना जाता है, चाहे सामान्य तापमान से अंतर कितना भी हो। स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर तेज गर्मी और लू के कारण डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। गर्मी से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय     दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें।     पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।     हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें।     बाहर निकलते समय टोपी, छाता या गमछे का इस्तेमाल करें।     बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। राहत के आसार नहीं मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। लोगों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।  

लखनऊ: एलडीए की एकमुश्त समाधान योजना में आवंटियों को मिली छूट, 11 लोग सम्मानित

लखनऊ राजधानी लखनऊ में एलडीए की एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) आवंटियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। शनिवार को एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने ओटीएस के सफल आवेदकों को पारिजात सभागार में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस योजना का एक बड़ा लाभ सीतापुर रोड के आवंटी शिव प्रताप सिंह को मिला। समय पर भुगतान न होने के कारण चक्र वृद्धि और दंड ब्याज मिलाकर उनका बकाया 2.36 करोड़ रुपये हो गया था। ओटीएस में आवेदन करने पर उन्हें ब्याज माफी के साथ 37 लाख रुपये की सीधी छूट मिली। इसी तरह गोमती नगर की मंजू सोनी को 67 हजार रुपये और बसंत कुंज योजना की चेतना को 58 हजार रुपये की राहत मिली। सकारात्मक सहभागिता के लिए ऐसे 11 आवंटियों को सम्मानित किया गया। यह योजना 18 अप्रैल से शुरू हुई थी और 17 जुलाई तक चलेगी। अब तक 573 आवंटियों ने आवेदन किया है। इसके सापेक्ष 31.18 करोड़ रुपये की डिमांड जनरेट की गई है। वित्त नियंत्रक दीपक सिंह के अनुसार, प्राधिकरण भवन के कमेटी हॉल में विशेष हेल्प डेस्क बनाई गई है।  

बिहार बना 5जी का नया हब, गांव-गांव पहुंचा हाई-स्पीड इंटरनेट

पटना देश में 5जी नेटवर्क सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। खास बात यह है कि जिस बिहार को अक्सर विकास की दौड़ में पीछे बताया जाता है, वह 5जी कवरेज के मामले में देश के टेक हब कर्नाटक और बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी आगे है। बिहार में अब 94.52% आबादी 5जी नेटवर्क की पहुंच में आ चुकी है। जबकि राष्ट्रीय औसत 86.18 प्रतिशत है। देश के आईटी हब कर्नाटक में यह कवरेज सिर्फ 79.92% है, जबकि यूपी में 85.25 % लोग 5जी से जुड़ पाए हैं। बेंगलुरु दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के दफ्तर हैं। फिर भी वहां का ग्रामीण इलाका 5जी की रफ्तार से दूर है। बिहार में ग्रामीण इलाकों में 5जी सेवाओं पर हुआ काम बिहार में 5जी सेवाओं की बेहतर कवरेज की सबसे बड़ी वजह यह है कि टेलीकॉम कंपनियों ने बिहार में ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता दी, जबकि कर्नाटक में शहरी क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया गया। बिहार में कंपनियों और सरकार ने मिलकर गांव-गांव तक 5जी नेटवर्क पहुंचाने में कवायद की है। केन्द्र सरकार के भारत नेट परियोजना के तहत बिहार के लगभग 8,860 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है, जिस पर 812 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। योजना का मकसद हर गांव में तेज इंटरनेट पहुंचाना है। बिहार ने इसे सफलतापूर्वक अमल में लाया। इसका नतीजा है कि आज बिहार के दूरदराज के गांवों में बैठे लोग भी अब 5जी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूरसंचार दिवस का क्या है इतिहास यह दिवस पहली बार 1969 में मनाया गया था, जो 1865 में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में चुना गया। इसका उद्देश्य लोगों को दूरसंचार के महत्व, डिजिटल विभाजन को पाटने और नई तकनीकों के बारे में जागरूक करना है। यह दिन सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से दुनिया को जोड़ने और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का संदेश देता है। राष्ट्रीय राजमार्गों-ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बिहार में भले ही 5जी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। लेकिन नेटवर्क कनेक्विटी अब भी कई जगहों पर ठीक नहीं है। राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1750 किलोमीटर क्षेत्र में 424 स्थान ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल उपलब्ध नहीं है। इन जगहों पर टावरों के बीच की दूरी इतनी अधिक है कि नेटवर्क पहुंच ही नहीं पाता। दूरसंचार के मानक के अनुसार शहरी टावरों के बीच की दूरी 500 से 800 मीटर के बीच होनी चाहिए। लेकिन कई जगहों पर यह 1.5 से 2 किलोमीटर से भी अधिक है। गांवों में 3 से 5 किलोमीटर, जो 7 से 8 किलोमीटर तक भी है। इससे नेटवर्क की समस्या अब भी कई जगहों पर है। बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया ट्राई ने नेटवर्क की स्थिति जानने के लिए जनवरी में इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट कराया। यह टेस्ट समस्तीपुर जिले में किया गया। सबसे बड़ी चिंता बीएसएनएल को लेकर सामने आई। बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया, जबकि 10.04% कॉल ड्राप हो गई। एयरटेल और जियो ने 99% से अधिक कॉल सफलता दी। डाउनलोड स्पीड में भी बड़ा अंतर सामने आया। जियो ने 158 एमबीपीएस, एयरटेल ने 101 एमबीपीएस, जबकि बीएसएनएल का केवल 12 एमबीपीएस स्पीड रहा। ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार सीवान, रोहतास, कैमूर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और सीमावर्ती इलाकों में टावरों के बीच अधिक दूरी है।

रेलवे का हाईटेक प्लान! नए सिस्टम से बुलेट जैसी स्पीड में दौड़ेंगी मध्य प्रदेश की ट्रेनें

ग्वालियर भारतीय रेलवे ने अपनी पारंपरिक कछुआ चाल को अलविदा कहकर डिजिटल और हाईस्पीड युग में कदम रख दिया है। झांसी-हेतमपुर रेलखंड पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम (स्वचालित सिग्नल प्रणाली) के लागू होने से ट्रेनों के संचालन का पूरा गणित ही बदल गया है। लगभग 155 किलोमीटर लंबे इस व्यस्त रूट पर अब ट्रैक के हर एक किलोमीटर पर रेलवे की तीसरी आंख तैनात है। पहले जहां इस दूरी में केवल 34 सिग्नल थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 162 कर दी गई है। इस बदलाव से न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को स्टेशन के बाहर (आउटर पर) बेवजह खड़े रहने की झंझट से भी मुक्ति मिल जाएगी। क्या है नया सिस्टम? एक के पीछे एक दौड़ेंगी ट्रेनें पुरानी व्यवस्था में एक स्टेशन से दूसरी ट्रेन तब तक रवाना नहीं की जाती थी, जब तक कि आगे चल रही ट्रेन अगले स्टेशन तक न पहुंच जाए।  अब क्या बदला: नई तकनीक में ट्रैक को छोटे-छोटे ब्लॉक (करीब 1-1 किमी) में बांट दिया गया है। ■ इलेक्ट्रॉनिक नजर: आधुनिक सेंसर्स और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के जरिए ट्रेन की लोकेशन बदलते ही सिग्नल का रंग अपने आप बदल जाता है। अब एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाकर एक के पीछे दूसरी ट्रेनें आसानी से दौड़ सकेंगी। इससे ट्रैक की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। लोको पायलट को ग्रीन सिग्नल की राहत, आउटर का रेड सिग्नल गायब 1. ड्राइवर्स का बढ़ा भरोसा: अब लोको पायलट को काफी पहले ही आगे के सिग्नल की सटीक स्थिति का पता चल जाता है। खराब मौसम या धुंध में भी ड्राइवर पूरे आत्मविश्वास के साथ ट्रेन की रफ्तार बनाए रख सकेंगे। 2. आउटर पर नो वेटिंग: अक्सर अगले स्टेशन से हरी झंडी न मिलने के कारण ट्रेनों को आउटर पर रोक दिया जाता था। अब ऑटोमेटिक ब्लॉक सिस्टम के कारण ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहेंगी, जिससे स्टेशन मास्टर को भी मैन्युअली सिग्नल ऑपरेट नहीं करना पड़ेगा। ग्वालियर में ट्रैक लोड हर दिन गुजरती हैं 236 ट्रेनें ग्वालियर से गुजरने वाले ट्रैफिक का दबाव इतना ज्यादा है कि यह सिस्टम 'लाइफलाइन' साबित होगा- ■ झांसी-आगरा रूट: 170 ट्रेनें ■ ग्वालियर-गुना रूट: 28 ट्रेनें ■ ग्वालियर-भिंड रूट: 06 ट्रेनें ■ ग्वालियर-कैलारस : 06 ट्रेनें ■ थ्रू (बिना रुके) ट्रेनें: 26 ट्रेनें ■ कुल: 236 ट्रेनें प्रतिदिन हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम रेलवे ट्रैक के हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इससे ट्रैक की कैपेसिटी और ट्रेनों की स्पीड दोनों बढ़ती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रेनों को अब किसी स्टेशन या आउटर पर बेवजह इंतजार नहीं करना पड़ता। झांसी मंडल में यह काम लगभग पूरा हो चुका है। -शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे 

योगी सरकार का डेयरी मास्टर प्लान : 2 से 25 गाय तक लाखों का अनुदान, किसानों को सीधा फायदा

साहीवाल, गिर, गंगातीरी, सिंधी नस्लों के संरक्षण पर फोकस, डेयरी सेक्टर में बड़ा विस्तार उच्च गुणवत्ता एवं उत्पादकता वाली स्वदेशी नस्ल की गाय पालने के लिए मिल रहा प्रोत्साहन 15 फीसदी निवेश, 35 फीसदी ऋण और 50% मिल रही सब्सिडी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में स्वदेशी गायों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा डेयरी मास्टर प्लान तैयार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में चार बड़ी योजनाओं को लागू किया गया है, जिनके जरिए स्वदेशी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा रही है। योगी सरकार की इस रणनीति को ‘ऑपरेशन-4’ के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसके केंद्र में चार प्रमुख योजनाएं हैं। इनमें मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना, नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना शामिल हैं। इन योजनाओं के जरिए 2 गाय से लेकर 25 गाय तक की डेयरी इकाइयों पर लाखों रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। 50 फीसदी तक सब्सिडी, किसानों को बड़ा सहारा पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि योगी सरकार उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायों को पालने के लिए भारी सब्सिडी दे रही है। नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना में डेयरी स्थापना और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 50 फीसदी तक अनुदान दिया जा रहा है। योजनाओं का वित्तीय मॉडल भी खास है। इसमें 15 फीसदी लाभार्थी निवेश, 35 फीसदी बैंक ऋण और 50 फीसदी सरकारी सब्सिडी तक का प्रावधान किया गया है। इससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करना आसान हो रहा है। 2 गाय पर 80 हजार तक अनुदान मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के तहत दो गायों की इकाई पर अधिकतम 80 हजार रुपए तक अनुदान दिया जा रहा है। इससे प्रदेश में बड़े स्तर पर आधुनिक डेयरी नेटवर्क विकसित होगा। मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत उच्च गुणवत्ता एवं अधिक दूध देने वाली स्वदेशी नस्ल की गायों को पालने वाले पशुपालकों को 10 हजार से 15 हजार तक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इससे बेहतर नस्लों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिल रहा है। गिर, साहीवाल और गंगातीरी नस्ल पर विशेष फोकस योगी सरकार का फोकस गिर, साहीवाल और गंगातीरी जैसी उन्नत स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर है। इन योजनाओं से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। महिलाओं और युवाओं को डेयरी सेक्टर से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति पर तेजी से काम हो रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। योजनाओं ने पकड़ी रफ्तार, गांव-गांव बढ़ रहा डेयरी नेटवर्क पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि योगी सरकार की स्वदेशी गो आधारित योजनाओं का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना के तहत डेढ़ हजार से अधिक इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, जबकि प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना में सवा सात हजार से ज्यादा पुरस्कार वितरित किए गए हैं। वहीं नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना में 72 और मिनी नन्दिनी योजना में 245 डेयरी इकाइयों की स्थापना कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा रही है।

योगी सरकार के एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पार्क बदल रहे प्रदेश की आर्थिक तस्वीर

वेयरहाउसिंग, एग्री-लॉजिस्टिक्स और डिजिटल गवर्नेंस से निवेशकों का बढ़ा भरोसा लीड्स 2025 में “एग्जम्पलर” सम्मान के साथ यूपी ने बनाई राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान लखनऊ,  पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तेजी से विकसित हो रहा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अब प्रदेश की नई आर्थिक ताकत बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब, एयरपोर्ट और वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐसा व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसने उत्तर प्रदेश को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब में शामिल कर दिया है। यही वजह है कि प्रतिष्ठित लीड्स 2025 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को “एग्जम्पलर” श्रेणी में स्थान मिला है। अन्य लैंडलॉक राज्यों से बेहतर रहा प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स सेवाओं, रेगुलेटरी वातावरण और डिजिटल सिस्टम जैसे प्रमुख मानकों पर उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत और अन्य लैंडलॉक राज्यों से बेहतर रहा है। सड़क, रेल, एयरपोर्ट, टर्मिनल इंफ्रास्ट्रक्चर और फर्स्ट एवं लास्ट माइल कनेक्टिविटी में हुए सुधारों ने प्रदेश को निवेश और औद्योगिक विकास का नया केंद्र बना दिया है। योगी सरकार द्वारा विकसित पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पूर्वी, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और प्रमुख औद्योगिक शहरों से जोड़ रहे हैं। इससे माल परिवहन तेज हुआ है और उद्योगों को सप्लाई चेन में बड़ी सहूलियत मिल रही है। मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क को मिल रही मजबूती प्रदेश की रणनीतिक स्थिति को ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने और मजबूत किया है। ग्रेटर नोएडा के दादरी में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत से विकसित हो रहा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब उत्तर भारत में कार्गो, कंटेनर मूवमेंट और वेयरहाउसिंग का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। वहीं बोराकी रेलवे स्टेशन पर मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब तथा कानपुर, गोरखपुर और टप्पल-बजना में नए लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जा रहे हैं। यही नहीं, गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के किनारे मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर्स विकसित करने की योजना है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी। एग्री-लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर का भी तेजी से विस्तार प्रदेश में एग्री-लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। मल्टी-कमोडिटी कूलिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स और आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाएं कृषि उत्पादों की स्टोरेज और वितरण व्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। ई-कॉमर्स, रिटेल, फूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों के लिए समर्पित वेयरहाउसिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर भी उत्तर भारत के सबसे बड़े एविएशन और कार्गो गेटवे के रूप में उभर रहा है। एयरपोर्ट की एक्सप्रेसवे और फ्रेट कॉरिडोर से सीधी कनेक्टिविटी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तैयार कर रही है। इसके साथ ही वाराणसी मल्टीमॉडल टर्मिनल और इनलैंड वाटरवे नेटवर्क के जरिए नदी आधारित लॉजिस्टिक्स को भी मजबूत किया जा रहा है, जिससे कम लागत वाले कार्गो परिवहन और मल्टीमॉडल फ्रेट इंटीग्रेशन को बढ़ावा मिलेगा। डिजिटल सिस्टम और निवेश सुधारों से बढ़ा भरोसा प्रदेश सरकार ने लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। ‘निवेश मित्र’ सिंगल विंडो सिस्टम और जीआईएस आधारित डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए अनुमोदन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया गया है। राज्य में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर में हजारों करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं। लीड्स 2025 में मिली यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब केवल एक लैंडलॉक राज्य नहीं, बल्कि भारत की भविष्य की सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

भाजपा के जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र में बोले सीएम योगी

संस्थापकों के मूल्यों और आदर्शों पर देश की एकता-अखंडता के लिए कार्य करता है भाजपा कार्यकर्ता गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज कांग्रेस, सपा, राजद, टीएमसी, डीएमके या ऐसे ही भ्रष्टाचार में डूबे अन्य दलों के आचरण को सम्मान नहीं देता है। भाजपा कार्यकर्ता को समाज में सम्मान इसलिए मिलता है कि इस पार्टी के कार्यकर्ता में राष्ट्रवाद और भारतीयता का आचरण मिलता। भाजपा का कार्यकर्ता पार्टी के संस्थापकों के मूल्यों और आदर्शों पर चलते हुए देश की एकता और अखंडता के लिए शुचिता और पारदर्शिता से आचरण और तदनुरूप कार्य करता है। सीएम योगी रविवार को गोरखपुर के सहजनवा विधानसभा क्षेत्र स्थित तेनुआ टोल प्लाजा के समीप एक रिजॉर्ट में भाजपा के जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2026 के अंतर्गत पार्टी की जिला इकाई की तरफ से आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में शामिल प्रतिभागियों को ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव से अनवरत आगे बढ़ते रहने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा, संस्कृति, सुशासन और समृद्धि को जोड़ने का काम करने वाली भाजपा एकलौती पार्टी है। केंद्र और भाजपा की राज्य सरकारों ने इसी को अपने कार्यक्रमों का आधार बनाया है। भाजपा के लिए राष्ट्र प्रथम, दल द्वितीय ‘भाजपा का इतिहास और विकास’ विषय पर केंद्रित जिला प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्थापना के 50 वर्ष से भी कम समय में भाजपा ने दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में केंद्र और देश के 22 राज्यों में राष्ट्रवाद की विचारधारा को लागू करने के अभियान को आगे बढ़ाया है। भाजपा देश ही नहीं दुनिया का एकमात्र राजनीतिक दल है जिसने हमेशा और मजबूती से यह घोषणा की है कि राष्ट्र प्रथम, दल द्वितीय और व्यक्ति का हित अंतिम होना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्र प्रथम के भाव से पार्टी के संस्थापकों ने जो मूल्य, आदर्श और संस्कार दिए हैं, उन्हीं का अनुसरण करते हुए कार्यकर्ता जब राष्ट्रवाद की बात करते हैं तो देश ही नहीं दुनिया के भारतवंशियों के सामने पार्टी के रूप में सिर्फ भाजपा का ही चेहरा और कमल का फूल चुनाव निशान सामने होता है। संविधान ठीक से लागू भी नहीं हुआ कि कांग्रेस ने शुरू कर दिया तुष्टिकरण का खेल सीएम योगी ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान निर्मित हुआ और 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान अंगीकार किया। देश में संसदीय प्रणाली लागू हुई। पर, अभी पहला आम चुनाव भी नहीं हुआ कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण के जिन कारणों से देश का विभाजन हुआ था, उसे ही फिर से भारत की राजनीति का हिस्सा बनाना प्रारंभ कर दिया। अभी संविधान ठीक ढंग से लागू होना प्रारंभ ही नहीं हुआ कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण का खेल प्रारंभ किया। सीएम योगी ने कहा कि तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लगा कि एक ऐसा दल गठित करना चाहिए जो भारत की राष्ट्रीयता और बेहतर भविष्य के लिए कार्ययोजना बनाने में योगदान दे सके। तब भारत सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा देकर देश के लिए लड़ने वाले, वीर बलिदानी, महान शिक्षाविद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में यह जिम्मेदारी दी गई। डॉ. मुखर्जी ने कांग्रेस के संविधान विरोधी कृत्य के खिलाफ उठाई आवाज मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के न चाहने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने देश से विश्वासघात करते हुए कश्मीर में धारा 370 और परमिट सिस्टम लागू कर दिया। इसके खिलाफ सबसे पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आवाज उठाई। उस समय उन्होंने कहा था कि एक देश मे दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नही चलेंगे। जब सरकार नहीं मानी तो वे इस अनैतिक, भारत विरोधी, संविधान विरोधी कृत्य का विरोध करने कश्मीर गए। कश्मीर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और विश्वासघात कर जेल में उनकी हत्या करवा दी गई। दीनदयाल उपाध्याय ने की अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की वकालत मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानों की यह परंपरा आगे बढ़ती है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के मूल्यों और आदर्शों को आगे बढ़ाने का गुरुतर दायित्व दिया गया। पंडित उपाध्याय एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने अंतिम पायदान पर बैठे हुए व्यक्ति के लिए भी शासन की योजनाओं का लाभ देने की बात कही, उसकी वकालत की। पंडित उपाध्याय ने कहा था कि समृद्धि का आधार ऊंचे पायदान पर बैठा हुआ व्यक्ति नहीं हो सकता। समाज के अंतिम पायदान पर बैठे हुए व्यक्ति के चेहरे पर खुशहाली ही राष्ट्र की समृद्धि का आधार होना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ भी विश्वासघात हुआ और उनकी असमय मृत्यु हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1977 में जब पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ तो उसका श्रेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय को जाता है। सीएम ने कहा कि जनसंघ का प्रवेश जब अटल-आडवाणी युग में होता है तो देश में लोकतंत्र बचाने के लिए इसका विलय जनता पार्टी में कर दिया जाता है। जनता पार्टी सरकार का प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं हो पाया तो उसके अनेक कारण थे। पीएम मोदी के नेतृत्व में साकार हुए पार्टी संस्थापकों के विचार मुख्यमंत्री ने कहा कि 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में होता है। गठन के उपरांत 1985 के संसदीय चुनाव में भाजपा के मात्र दो सांसद जीते थे। आज देश ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में भाजपा का उदय दुनिया के अंदर कहीं और नहीं देखने को मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों ने स्थापना काल में जो कुछ सोचा था, पिछले 11 वर्ष के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वह सब कुछ साकार हुआ है। अध्यक्ष, सीएम और पीएम तक बन सकता है भाजपा कार्यकर्ता सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए। परिवारवाद, क्षेत्रवाद, मत और मजहब से ऊपर उठकर हमें देश के बारे में सोचना चाहिए। भाजपा यही करती है। उन्होंने कहा कि अकेले भाजपा ही ऐसी पार्टी है जिसमें एक बूथ का अध्यक्ष भी एक समय पार्टी का प्रदेश और देश का … Read more

संघर्ष से सफलता तक : बीजापुर की महिलाओं को मिले सपनों के नए पंख

नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई सुबह, पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण से मिल रहा रोजगार का अवसर रायपुर, कभी नक्सल हिंसा की छाया से प्रभावित रहा बीजापुर अब विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। माओवाद के अंत के बाद जिला तेजी से मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों के साहस, शासन की प्रभावी पुनर्वास नीति और प्रशासन की सतत पहल ने बीजापुर को शांति एवं विकास के नए दौर में प्रवेश कराया है। राज्य शासन की पुनर्वास नीति केवल आत्मसमर्पण या पुनर्वास तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुनर्वासित परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बीजापुर जिले की पुनर्वासित महिलाओं को मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में सिलाई प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से बदल रही जिंदगी मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्हें आधुनिक सिलाई तकनीक, मशीन संचालन और परिधान निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को उसी गारमेंट फैक्ट्री में रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल से महिलाओं को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात उन्हें प्रतिमाह लगभग 5 से 8 हजार रुपये तक का पारिश्रमिक दिया जाएगा।  जिससे वे आर्थिक रूप से निरंतर सशक्त बनी रहें। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम पुनर्वासित महिलाओं के चेहरे पर अब भविष्य को लेकर नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। जो महिलाएं कभी हिंसा और असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत कर रही थीं, वे आज रोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए महिलाओं को सम्मानजनक जीवन देने का सशक्त माध्यम बन रही है। बीजापुर बन रहा विकास और विश्वास का प्रतीक बीजापुर में चल रही पुनर्वास एवं कौशल विकास की यह पहल शासन की संवेदनशील सोच और दूरदर्शी नीति का उदाहरण है। जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वासित परिवारों को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नक्सलवाद से मुक्त होकर अब बीजापुर विकास, शांति और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना रहा है। पुनर्वासित महिलाओं की सफलता यह संदेश दे रही है कि अवसर और सहयोग मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।

भोपाल में 18 मई को होगा ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट का शुभारंभ

पीएम सूर्य घर योजना का डिजिटली होगा प्रचार-प्रसार इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में एक साथ होगा प्रचार प्रसार अभियान का शुभारंभ भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का डिजिटली प्रचार-प्रसार करने के लिये एमपीयूवीएनएल एवं काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरनमेंट एंड वॉटर के सहयोग से 18 मई सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सुबह 10 बजे व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो लॉन्च किया जाएगा। व्हाट्सऐप चैटबॉट और प्रचार वीडियो से नागरिकों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी सरल एवं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजना के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ेगी और नागरिकों को आवेदन एवं सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। प्रमुख शहरों में आईईसी अभियान का होगा शुभारंभ मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा प्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर एवं जबलपुर में एक लक्षित सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) एवं जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान उपभोक्ताओं के बीच विश्वास निर्माण, व्यवहारगत परिवर्तन को प्रोत्साहित करने एवं योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। आमजन के बीच लोकप्रिय हो रही है योजना प्रदेश में योजना को लेकर लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक मध्यप्रदेश में 1 लाख 96 हजार 791 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 1 लाख 24 हजार 663 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 467.06 मेगावाट है। भारत सरकार द्वारा अब तक 879.69 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्रदान किया जा चुका है। चैटबॉट और आईईसी शुभारंभ कार्यक्रम में भारत सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर, बैंक प्रतिनिधि, विद्युत वितरण कंपनियों एवं नगर निगम के अधिकारी तथा योजना से जुड़े पंजीकृत वेंडर भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।  

एमपी ट्रांसको ने सुरक्षित दूरी सुनिश्चित कर मानव जीवन को जोखिम से बचाया

220 केवी दमोह-टीकमगढ़ लाइन में ट्रिपिंग की जाँच के लिये विशेष अभियान भोपाल   मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस दमोह संभाग द्वारा 220 केवी दमोह-टीकमगढ़ ट्रांसमिशन लाइन में हुई ट्रिपिंग की जांच के लिए विशेष पेट्रोलिंग अभियान चलाया गया। पेट्रोलिंग में जबलपुर नाका क्षेत्र में यह पाया गया कि श्री हरिकांत उपाध्याय द्वारा मकान की छत पर कराये जा रहे बाउंड्री एवं छज्जे का निर्माण ट्रांसमिशन लाइन के अत्यधिक निकट प्रतिबंधित कारिडोर के भीतर आ गया था, जिसके कारण लाइन में ट्रिपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई थी। कार्यपालन अभियंता श्री एस.के. मुड़ा के मार्गदर्शन में सहायक अभियंता श्री एमए बेग व ट्रांसमिशन लाइन मैंटैनेंस दमोह की टीम ने संबंधित को ट्रांसमिशन लाइन के प्रतिबंधित कारिडोर मे निर्माण से संभावित खतरों एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी दी गई। उनकी सहमति से छत की बाउंड्री एवं छज्जे के उस हिस्से को सुरक्षित तरीके से हटाया गया, जिससे ट्रांसमिशन लाइन को आवश्यक दूरी उपलब्ध हो सके। साथ ही विद्युत ट्रिपिंग की आशंका को टाला जा सके। दमोह में लगभग 15 निर्माण खतरनाक जद में एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री अरविंद शर्मा ने बताया कि दमोह शहर में लगभग 15 ऐसे निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर आते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे स्वयं निर्माण हटाएं, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इन निर्माणों से न केवल रहने वालों की जान जोखिम में है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित हो सकती है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर की अपील ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किसी भी प्रकार का निर्माण न करें और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें। कम से कम 27 मीटर का सुरक्षित कारिडोर आवश्यक एमपी ट्रांसको ने आम नागरिकों से अपील की है कि अति उच्च दाब विद्युत लाइनों के निकट किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पूर्व विद्युत सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखें, जिससे दुर्घटनाओं एवं विद्युत व्यवधानों से बचा जा सके। नियमानुसार 132 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर का क्षेत्र और 220 के वी लाइन में 35 मीटर सुरक्षा कॉरीडोर के रूप में प्रतिबंधित है। इसके भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः वर्जित है। इस क्षेत्र में बने मकान, दुकान या अन्य संरचनाएं इसलिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हैं क्योंकि तेज हवा या अन्य कारणों से तारों के झूलने (स्विंग) की स्थिति में कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित विद्युत धारा घरेलू बिजली की तुलना में लगभग 600 से 950 गुना अधिक घातक होती है। ऐसे में इन लाइनों के पास रहना या निर्माण करना, हर समय एक खतरे के साए में रहने जैसा है।