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पुलिस एवं राजस्व विभाग के तीन अधिकारी तत्काल प्रभाव से निलंबित

भोपाल  देवास जिले की टोंकखुर्द तहसील के ग्राम टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुई विस्फोट एवं आगजनी की घटना के मामले में पुलिस एवं राजस्व विभाग के तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सोनकच्छ, जिला-देवास की अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस)  दीपा मांडे को निलंबित किया गया है। आयुक्त उज्जैन संभाग से प्राप्त प्रतिवेदन और पुलिस महानिदेशक की अनुशंसा के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा शासन स्तर से समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप फैक्ट्री संचालन संबंधी निरीक्षण नहीं किए गए। वरिष्ठ कार्यालय को आवश्यक प्रतिवेदन भी प्रेषित नहीं किए गए। शासन ने इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता माना है। इसी क्रम में संभाग आयुक्तआशीष सिंह द्वारा टोंकखुर्द के एसडीएमसंजीव सक्सेना एवं टप्पा चिडावद के नायब तहसीलदाररवि शर्मा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि विस्फोटक सामग्री से संबंधित प्रकरणों में शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशासनिक निरीक्षण एवं निगरानी नहीं की गई। मामले में गंभीर लापरवाही पाई गई। सभी अधिकारियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान सुश्री दीपा मांडे का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, भोपाल निर्धारित किया गया है।संजीव सक्सेना एवंरवि शर्मा का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय, देवास रहेगा। सभी अधिकारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।               

रिश्वतखोर पटवारी गिरफ्तार: रजिस्ट्री के नाम पर वसूले जा रहे थे 50 हजार रुपये

टोहाना/फतेहाबाद. हरियाणा के फतेहाबाद जिले में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो अंबाला की टीम ने खंड पंचायत एवं विकास अधिकारी कार्यालय में तैनात पंचायती राज पटवारी उमेद सिंह बूरा को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। गांव पारता निवासी कपिल कुमार ने एसीबी को शिकायत दी थी कि पटवारी गांव की शामलात भूमि की रजिस्ट्री करवाने के बदले उससे 50 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा है और बिना पैसे काम करने से मना कर रहा है। इस पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने डीएसपी ओमप्रकाश नैन के नेतृत्व में टीम गठित की। टीम ने शिकायतकर्ता को रिश्वत की तय राशि दे आरोपित के पास भेजा। नोटों के नंबर दर्ज किए व रसायन लगाया गया। जैसे ही पटवारी उमेद ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये लिए, एसीबी टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित के हाथ धुलाए तो पानी लाल हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।

ईंधन संकट की आशंका से रांची में हड़कंप, लोग भरवा रहे टंकियां फुल

रांची पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर फैली अफवाहों के बाद राजधानी रांची के कई पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार को अफरा-तफरी जैसे हालात देखने को मिले। शहर के हरमू स्थित दुलारी पंप, बिरसा चौक, कोकर समेत कई इलाकों में सुबह से ही वाहनों की लंबी कतार लगी रही। लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल खरीदते नजर आए। कई लोग डब्बों में तेल भरवाते दिखे, जबकि कई वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल करवाईं। तीन अंकों में पहुंची कीमत नई दरें लागू होने के बाद रांची में पेट्रोल की कीमत 97.86 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 100.86 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। वहीं डीजल 92.62 रुपये से बढ़कर 95.76 रुपये प्रति लीटर हो गया है। शुक्रवार सुबह से ही नई कीमतों पर बिक्री शुरू कर दी गई। प्रशासन की अपील, अफवाहों पर ध्यान न दें स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लोगों से केवल जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल खरीदने को कहा गया है। मांग और सप्लाई में बड़ा अंतर सूत्रों के मुताबिक रांची में रोजाना मांग और सप्लाई के बीच करीब एक लाख लीटर का अंतर बना हुआ है, जिसके कारण कुछ पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल रहा है। वहीं कई जगहों से निर्धारित दर से अधिक कीमत पर तेल बेचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। आम लोगों की बढ़ी चिंता ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। खासकर रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोग और परिवहन व्यवसाय से जुड़े कारोबारी बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। आगे और बढ़ सकते हैं दाम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लेमरू में मंजू बहन के स्टॉल पर चखा गुपचुप, आत्मीय संवाद में जानी सफलता की कहानी

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के कोरबा जिले के लेमरू प्रवास के दौरान आत्मीयता, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली। मुख्यमंत्रीसाय ने यहां ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी लखपति दीदी श्रीमती मंजू द्वारा संचालित छोटे से स्टॉल पर पहुंचकर उनके हाथों से बने चटपटे गुपचुप का स्वाद लिया और आत्मीय संवाद किया। बातचीत के दौरान श्रीमती मंजू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने छोटे स्तर से अपने व्यवसाय की शुरुआत की थी। गुपचुप स्टॉल से होने वाली बचत और लगातार मेहनत के बल पर आज वे भवन निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली ‘सेंटरिंग प्लेट’ के व्यवसाय से भी जुड़ गई हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसले, परिश्रम और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। मुख्यमंत्रीसाय ने मंजू बहन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना आज महिलाओं के आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक मजबूती का मजबूत आधार बन रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्रीसाय ने श्रीमती मंजू को लखपति दीदी योजना के अंतर्गत 30 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मेहनत को अवसर और हौसले को सहारा मिलता है, तब बदलाव केवल एक व्यक्ति के जीवन तक सीमित नहीं र

स्कूल में 23 आवश्यक कार्यों का डीएमएफ मद से होगा निर्माण,

राजनांदगांव  राजनांदगांव के विद्यालयों में कुल 23 लघु मरम्मत और जीर्णोद्धार विकास के कार्यों को राजनांदगांव विधायक डॉ रमन सिंह के प्रयास से स्वीकृति मिल गई है। जिसमें अतिरिक्त कक्ष निर्माण के कुल 10 कार्य (₹5 लाख प्रति कार्य), सुलभ शौचालय निर्माण के कुल 8 कार्य (₹5 लाख प्रति कार्य), किचन शेड निर्माण के कुल 3 कार्य (₹5 लाख प्रति कार्य) और साइकिल स्टैंड निर्माण के कुल 2 कार्य (₹5 लाख प्रति कार्य) शामिल थे। 1 करोड़ 15 लाख की लागत से पूर्ण होने वाले इन विकास कार्यों में पनेका, बम्हनी, धनगांव, सोमनी, सुरगी, कुम्हालोरी, बैगाटोला, भोथीपार खुर्द, बिरेझर, भर्रेगांव, मोखला, धर्मापुर, बुचीभरदा, लिटिया, बरगाही, खुटेरी और डिलापहरी के स्कूल शामिल हैं। स्कूलों के मरम्मत कार्य पूर्ण होने से शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और विद्यार्थियों के लिए सुविधाजनक वातावरण निर्मित होगा। : राजनांदगांव विधायक, डॉ रमन सिंह विधानसभा अध्यक्ष और राजनांदगांव विधायक डॉ रमन सिंह ने डीएमएफ मद से इन कार्यों की स्वीकृति मिलने पर कहा कि विधानसभा क्षेत्र राजनांदगांव अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों में लघु मरम्मत/ जीर्णोद्धार विकास कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की सुविधा में वृद्धि होगी और इन विद्यालयों में अध्यनरत विद्यार्थी बेहतर परिवेश में शिक्षा अर्जित कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय जी की सरकार में चहूँमुखी विकास हो रहा है और सभी वर्ग मुख्यधारा से जुड़कर निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इन विकास कार्यों की स्वीकृति पर राजनांदगांववासियों ने मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय और विधायक, राजनांदगांव डॉ रमन सिंह का आभार प्रकट किया है।

बिहार सरकार का बड़ा कदम, पटना में बढ़ेगा ई-बस नेटवर्क और घटेगा ट्रैफिक दबाव

पटना बिहार सरकार ने राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सचिवालय कर्मियों के लिए 18 मई 2026 से विशेष इलेक्ट्रिक और पिंक बस सेवा शुरू की जाएगी। सरकारी कर्मियों को मिलेगी सुविधा इस नई पहल के तहत सचिवालय आने-जाने वाले सरकारी कर्मियों को सुरक्षित, सुलभ और समयबद्ध परिवहन सुविधा मिलेगी। सरकार का उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। परिवहन सचिव राज कुमार ने बताया कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी प्रतिदिन निजी कार और बाइक से सचिवालय आते हैं, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव और ईंधन की खपत दोनों बढ़ती है। नई इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने से सरकारी कर्मियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा। 25 इलेक्ट्रिक बसें पहले से चल रहीं बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा फिलहाल पटना शहर में 25 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन किया जा रहा है। अब इन्हीं बसों का उपयोग सचिवालय कर्मियों के नियमित आवागमन के लिए भी किया जाएगा। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि इस पहल से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि लोगों का परिवहन खर्च भी कम होगा। महिला कर्मियों के लिए भी विशेष सुविधा महिला कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शाम 5 बजे छुट्टी के समय विशेष पिंक बस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। इससे महिला कर्मियों को सुरक्षित यात्रा का विकल्प मिलेगा। इन रूटों पर चलेगी विशेष बस सेवा पटना जंक्शन से सचिवालय-  मल्टी मॉडल हब (पटना जंक्शन) से बसें आर ब्लॉक, इनकम टैक्स, विद्युत भवन, पटना हाईकोर्ट और बिहार म्यूजियम होते हुए सचिवालय तक जाएंगी। सुबह 8:30 बजे से सेवा शुरू होगी। दानापुर स्टेशन से सचिवालय- दानापुर स्टेशन से सगुना मोड़, आरपीएस मोड़, गोला रोड, जगदेव पथ, आशियाना नगर, आईजीआईएमएस, शेखपुरा मोड़ और चिड़ियाघर होते हुए बसें सचिवालय पहुंचेंगी। इस रूट पर सुबह 8:15 बजे से सेवा शुरू होगी।  धनुकी मोड़ से विकास भवन- धनुकी मोड़ से शुरू होकर कुम्हरार, भूतनाथ रोड, एनएमसीएच, राजेंद्र नगर टर्मिनल, कंकड़बाग कॉलोनी मोड़ और करबिगहिया स्टेशन होते हुए बसें विकास भवन तक जाएंगी।  कुर्जी से सचिवालय तक पिंक बस- कुर्जी से पी एंड एम मॉल, साईं मंदिर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, एएन कॉलेज, बोरिंग रोड चौराहा और हड़ताली मोड़ होते हुए सचिवालय तक पिंक बस सेवा संचालित होगी।  गांधी मैदान से दानापुर स्टेशन- गांधी मैदान से डाकबंगला चौराहा, इनकम टैक्स, नियोजन भवन, विद्युत भवन, हाईकोर्ट और बिहार म्यूजियम होते हुए विशेष बस सेवा सचिवालय क्षेत्र तक पहुंचेगी। ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग यदि निजी वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल करेंगे तो इससे पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी और प्रदूषण नियंत्रण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल राज्य में ऊर्जा संरक्षण और हरित परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही ‘खेत तालाब योजना

किसानों की समृद्धि का आधार बनी योगी सरकार की योजना, डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही  ‘खेत तालाब योजना योजना के तहत सरकार दे रही ₹52,500 का अनुदान, ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर किसानों का चयन    खेत तालाब से किसान कर रहे मत्स्य पालन, मोती, सिंघाड़ा उत्पादन एवं अन्य जलीय खेती ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिला बढ़ावा, किसानों को मिल रहे सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए महत्वकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें। साथ ही योगी सरकार किसान को खेती तक सीमित नहीं, बल्कि उनको आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और अतिरिक्त आय के स्रोतों से भी जोड़ रही है। इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित ‘खेत तालाब योजना’ का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी सुविधा उपलब्ध कराना है। आज के समय में भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, ऐसे में खेत तालाब योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। खेतों में बनाए जाने वाले तालाब वर्षा के पानी को संरक्षित करते हैं, जिससे सूखे के समय भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है। आधी लागत सरकार वहन कर रही  इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत ₹1,05,000 निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार द्वारा ₹52,500 का अनुदान दिया जाता है। यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के अवसर यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर ₹15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है। आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम- आर.पी. कुशवाहा कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है।  अनुदान दो चरणों में मिलेगाः 1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर। 2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद। 3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की 'फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। 4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी। 5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा।

नवजात शिशुओं की डिस्चार्ज दर 82.3 प्रतिशत पर पहुँची

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त एवं उन्नत बनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही उनकी सतत एवं सशक्त निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार द्वारा आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदेश में नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सतत सुधार दर्ज किया जा रहा है। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों का सशक्त संचालन राज्य में जन्म के समय कम वजन वाले, समय पूर्व जन्मे एवं जन्म के समय गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयाँ (एसएनसीयू) प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन इकाइयों से नवजात शिशुओं को विशेषज्ञ उपचार, आधुनिक चिकित्सा उपकरण एवं प्रशिक्षित चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध कराई जा रही है। उपचार एवं डिस्चार्ज दर में उल्लेखनीय वृद्धि वर्ष 2024-25 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार प्रदान किया गया था, वहीं वर्ष 25-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुँच गई है। साथ ही नवजात शिशुओं की सफलतापूर्वक डिस्चार्ज दर भी अब तक के सर्वोत्तम स्तर 82.3 प्रतिशत पर पहुँच गई है। राज्य में संचालित 62 एसएनसीयू में इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक कुल 15 हजार 54 नवजात शिशुओं को उपचारित किया गया, जिनमें से 12 हजार 818 नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। एसएनसीयू में 85.2 प्रतिशत डिस्चार्ज दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है। इसके साथ ही लामा दर मात्र 2.12 प्रतिशत, रेफरल दर 4.2 प्रतिशत एवं मृत्यु दर 8.29 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। यह उपलब्धि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण नवजात चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी उपचार प्रबंधन को दर्शाती है। बिस्तरों की संख्या में वृद्धि से उपचार क्षमता बढ़ी राज्य शासन द्वारा नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ कुल 1654 बिस्तर उपलब्ध थे, वह अब बढ़कर 1770 हो गए हैं। इससे अधिक संख्या में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। आधुनिक उपकरणों एवं विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता राज्य सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये अत्याधुनिक एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की एसएनसीयू इकाइयों में जटिल एवं गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये वेंटिलेटर, सी-पैप, निर्बाध ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी सहित आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही, फैसिलिटी बेस्ड न्यूबोर्न केयर (एफबीएनसी) में प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स द्वारा वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती नवजात शिशुओं को आवश्यकता अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, सी-पैप, फोटोथेरेपी एवं ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है तथा एंटीबायोटिक के तार्किक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सर्फ़ैक्टेंट एवं कैफीन साइट्रेट जैसी आधुनिक औषधियों के उपयोग से समय पूर्व जन्मे गंभीर नवजात शिशुओं का उपचार कर जीवन संरक्षित किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती लगभग 8 प्रतिशत नवजात शिशुओं को वेंटिलेटर सपोर्ट, 37 प्रतिशत को फोटोथेरेपी, 49 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक ऑक्सीजन तथा 47 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक एंटीबायोटिक उपचार प्रदान किया गया। एनबीएसयू के माध्यम से उप जिला स्तर पर सशक्त नवजात उपचार सेवाएं राज्य में संचालित 200 एनबीएसयू (न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट) के माध्यम से भी नवजात शिशुओं को प्रभावी उपचार एवं स्थिरीकरण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक 2 हजार 241 नवजात शिशुओं को उपचार कर सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया है। एनबीएसयू इकाइयों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं को स्थिरीकरण सेवाओं के साथ-साथ ऑक्सीजन सपोर्ट एवं फोटोथेरेपी जैसी आवश्यक उपचार सुविधाएं उप जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को प्रारंभिक स्तर पर ही समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है, जिससे उनकी जीवन रक्षा एवं बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। एमएनसीयू : “जीरो सेपरेशन” अवधारणा की अभिनव पहल माँ एवं नवजात शिशु को एक साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में एमएनसीयू (मदर एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) की अवधारणा को भी विस्तार दिया जा रहा है। यह व्यवस्था “जीरो सेपरेशन” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें माँ और नवजात शिशु को अलग नहीं किया जाता। इससे स्तनपान, कंगारू मदर केयर तथा नवजात की समुचित देखभाल को बढ़ावा मिलता है। यह पहल विशेष रूप से कम वजन एवं समय पूर्व जन्मे शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है। प्रदेश में 23 एमएनसीयू संचालित प्रदेश में वर्तमान में 23 एमएनसीयू प्रारंभ किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से माताओं एवं नवजात शिशुओं को संवेदनशील, सुरक्षित एवं समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित हो तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके। मातृ दुग्ध इकाई (सीएलएमसी) से नवजात शिशुओं को जीवनदायी पोषण प्रदेश सरकार नवजात शिशु को समय पर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयास कर रही है। कम वजन एवं बीमार नवजात शिशुओं को बेहतर पोषण एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के लिए मातृ दुग्ध इकाई से नवजातों को जीवनदायी पोषण दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में इंदौर एवं भोपाल स्थित 2 क्रियाशील सीएलएमसी (कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर) इकाइयों के माध्यम से 1,031 स्वैच्छिक माताओं द्वारा 241.6 लीटर मातृ दुग्ध दान किया गया। दान किए गए इस मातृ दुग्ध को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रूप से पाश्चुरीकृत कर 1,159 कमज़ोर एवं बीमार भर्ती नवजात शिशुओं को कुल 282.11 लीटर सुरक्षित … Read more

खेत में तालाब बनाकर बढ़ाएं आय, सिंचाई से लेकर मत्स्य पालन तक मिलेगा फायदा

लखनऊ यूपी सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए महत्वकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें। इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सरकार 52500 रुपये का सीधा अनुदान दे रही है। इस योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग करानी होगी। उसी के आधार पर योजना के लिए किसानों का चयन किया जाएगा। इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत ₹1,05,000 निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार द्वारा 52,500 का अनुदान दिया जाता है। यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के अवसर यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर 15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है। आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है। अनुदान दो चरणों में मिलेगा 1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर। 2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद। 3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की 'फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। 4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी। 5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा।

शिक्षा और विकास पर फोकस,हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और नए डिग्री कॉलेज

पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार का गठन हुए एक महीना हो गया है। सम्राट चौधरी ने बीते 15 अप्रैल को उन्होंने लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अपने एक माह के कार्यक्रम में उन्होंने 7 बड़े फैसले लिए हैं। इनमें बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप बनाना भी शामिल है। इन टाउनशिप में पूरे प्लान के साथ कॉलोनियां बसेंगी। इनमें एक तरफ बाजार होंगे तो दूसरी ओर लोगों के रहने के लिए आवास तय होंगे। कॉलोनियों में चौड़ी सड़कों का निर्माण होगा। कॉलोनियों को हरा-भरा रखने के लिए सड़कों के किनारे और पार्कों में बड़ी संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट में एक है। इसमें सासाराम को जोड़ने का प्रस्ताव आया है। इससे शहरी दबाव में कमी आएगी, लोगों को सुविधायुक्त जीवन का लाभ मिल सकेगा। इन स्थानों पर बनेंगी टाउनशिप पटना में पाटलिपुत्र, सोनपुर में हरिहरनाथपुर, गया में मगध, दरभंगा में मिथिला, सहरसा में कोसी, पूर्णिया में पूर्णिया, मुंगेर में अंग, सीतामढ़ी में सीतापुरम, भागलपुर में विक्रमशिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और छपरा में सारण नाम से टाउनशिप बनेगी। हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज सम्राट सरकार ने अपने दूसरी कैबिनेट की बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के चयनित एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित करने की योजना को मंजूरी दी। साथ ही इसके लिए मुख्यमंत्री ₹800 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी, ताकि इस योजना को धरातल पर उतारने में दिक्कत नहीं आए। वहीं, उन्होंने डिग्री कॉलेज रहित 211 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ₹104 करोड़ (₹50 लाख प्रति कॉलेज) भी स्वीकृत किए। इसके लिए 9152 पदों का सृजन होगा। सहयोग पोर्टल और सहयोग शिविर लोगों की समस्याओं के त्वरित निष्पादन और सरकार के उत्तरदायित्व को ध्यान में रखकर सहयोग की त्रिवेणी को शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सहयोग हेल्पलाइन : 1100, सहयोग पोर्टल : sahyog.bihar.gov.in और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाने का निर्णय लिया है। शिविर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगेंगे। शिविर में ब्लॉक, थाना और अंचल की तमाम शिकायतों की सुनवाई होगी। पोर्टल पर सरकारी योजना से जुड़ी शिकायत के निबटारे के लिए 30 दिन का लक्ष्य तय है। 30 में शिकायत का निबटारा नहीं होता है, तोदोषी अधिकारी या कर्मचारी का निलंबन तय है। निजी स्कूलों में मनमानी फीस पर लगाम निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर भी एक बड़ी पहल मुख्यमंत्री ने की। उन्होंने कहा है कि निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। मनमानी फीस बढ़ोतरी और अनावश्यक शुल्क पर रोक रहेगी। छात्रों के परिजनों को किताबें और यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता होगी। इसके लिए स्कूल प्रबंधन किसी को खास दुकान से खरीदने को बाध्य नहीं करेंगे। 50 करोड़ तक के ठेके बिहारियों को मिलेंगे छठे फैसले में 50 करोड़ रुपये तक के सिविल कार्यों में राज्य के ठेकेदारों (संवेदकों) को प्राथमिकता देने के लिए बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन किया गया। अब से 50 करोड़ रुपये तक कार्यों के ठेके बिहारियों को मिलेंगे। इससे राज्य के लोगों को काम के अधिक मौके मिलेंगे। ‘पुलिस दीदी योजना’ की शुरुआत मुख्यमंत्री ने इसी प्रकार ‘पुलिस दीदी योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाना तथा पुलिस और समाज के बीच भरोसे को मजबूत करना है। इसके लिए 1500 स्कूटी महिला पुलिस के लिए खरीदने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज और स्कूल के सामने पुलिस दीदी की तैनाती होगी, ताकि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध पर नकेल कसी जा सके।