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नरेंद्र मोदी ने किया गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, ₹1500 में तय होगा लंबा सफर

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली कल रात यानी कि गुरुवार 12 बजे से शुरू होने जा रही है. बातचीत के दौरान चीफ इंजीनियर यूपीडा राज चौधरी ने स्पष्ट किया कि इंटरचेंज और टोल प्लाजा पहले से निर्मित हैं. टोल दरें प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय की गई हैं और वाहन की एंट्री व एग्जिट पॉइंट के आधार पर फास्टैग से स्वतः कटौती होगी. टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और ट्रैक्टर के लिए ₹1.28 प्रति किमी, कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहन के लिए ₹2.50 प्रति किमी, लाइट कमर्शियल वाहन, मिनी बस आदि के लिए ₹4.05 प्रति किमी, बस और ट्रक के लिए ₹8.20 प्रति किमी तय किया गया है. वहीं मल्टीएक्सल, भारी मशीनरी और अर्थमूविंग वाहनों के लिए ₹12.60 प्रति किमी व ओवरसाइज वाहनों के लिए ₹16.10 प्रति किमी दर निर्धारित की गई है. प्रयागराज से मेरठ तक कार से यात्रा करने पर करीब ₹1500 टोल लगने का अनुमान है. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि कंसेसियनार चाहे तो शुरुआती दिनों में कुछ छूट भी दी जा सकती है, जैसा पहले अन्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में किया गया था. PM मोदी आज करेंगे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन आज यानी कि बुधवार को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया जाएगा, जो मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा हाईस्पीड कॉरिडोर है. यह परियोजना न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, कृषि विपणन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी गेमचेंजर साबित होगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल से सीधे जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी मजबूती प्रदान करेगा. 12 जिलों को सीधी कनेक्टिविटी, यात्रा समय में बड़ी कमी प्रधानमंत्री सुबह 11.15 पर हरदोई पहुंचेंगे और 12.55 पर यहां से वापस लौटेंगे. इस दौरान पीएम गंगा एक्सप्रेसवे का उदघाटन करने के साथ ही यूपीडा की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और साथ ही पौधरोपण करने के अलावा जनसभा समेत अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री जिस गंगा एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दिखाएंगे वह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है. इस हाई-स्पीड मार्ग के चालू होने से इन क्षेत्रों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी. जहां पहले लंबी दूरी तय करने में कई घंटे लगते थे, अब यह सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा. इसके साथ ही, माल परिवहन की लागत में कमी आने से उद्योगों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी. पीपीपी मॉडल पर आधुनिक निर्माण गंगा एक्सप्रेसवे को पीपीपी (DBFOT) मॉडल पर विकसित किया गया है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसे फिलहाल 6 लेन में तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8 लेन तक विस्तार योग्य बनाया गया है. 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ यह एक्सप्रेसवे तेज और सुगम यातायात सुनिश्चित करेगा. उच्च गुणवत्ता के निर्माण, चौड़े राइट ऑफ वे और मजबूत सेफ्टी फीचर्स इसे देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे में शामिल करते हैं. एयरस्ट्रिप, आईटीएमएस और सुरक्षा की अत्याधुनिक व्यवस्था इस एक्सप्रेसवे की एक खास विशेषता शाहजहांपुर के पास बनाई गई लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप है, जहां आपात स्थिति में वायुसेना के विमान उतर सकते हैं. इसके अलावा, पूरे मार्ग पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है. वाहनों की गति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा. औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विकास का नया केंद्र गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत हैं. इन क्लस्टर्स में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे. सरकार द्वारा दी जा रही कैपिटल सब्सिडी, एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी छूट, पावर इंसेंटिव और पीले टॉप-अप जैसी सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे.

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस के वर्चुअल मीटिंग में पोर्न वीडियो चला, आनन-फानन में रोकनी पड़ी बैठक

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अदालत में आज (बुधवार, 29 अप्रैल को) कुछ ऐसा हुआ, जिसे देखकर सब दंग रह गए। दरअसल, जब चीफ जस्टिस देवेंद्र उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने नियमित मामलों की सुनवाई शुरू की तो वर्चुअली यानी ऑनलाइन तरीके से जुड़े एक अनजान यूजर ने अपनी स्क्रीन पर पोर्न वीडियो चलाना शुरू कर दिया और उसे शेयर कर दिया। इसे देख कोर्ट रूम में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में वर्चुअल मीटिंग (VC) को बंद करना पड़ा। जब कुछ देर बाद दोबारा ऑनलाइन कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई तो फिर से उस शख्स ने पोर्न वीडियो चलाना शुरू कर दिया। ऐसा होता देख कोर्ट के अधिकारियों ने VC को बंद कर दिया गया और फिर उसे ऑन नहीं किया गया। जानकारी के मुताबिक, ये पोर्न वीडियो वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग (VC) सिस्टम के जरिए अमेरिका से ब्रॉडकास्ट किए गए थे। ये कंटेंट श्रीधर सरनोबत और शीतजीत सिंह नाम के यूजर के अकाउंट से चलाए गए। हालांकि, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी है। पीछे से आवाज भी आ रही थी बार एंड बेंच के मुताबिक, पोर्न वीडियो के साथ ही पीछे से आवाज भी आ रही थी, "यह यूनाइटेड स्टेट्स से किया गया एक हैक है। मीटिंग को अभी तुरंत बंद कर दो। इसे दोबारा कभी चालू मत करना। तुम हैक हो चुके हो।" दिल्ली हाई कोर्ट में इस तरह की यह पहली घटना है। ये वाकया दोपहर करीब 12:56 बजे हुई। बता दें कि चीफ जस्टिस की अदालत में बुधवार का दिन जनहित याचिकाओं (PIL) की सुनवाई के लिए तय होता है, और आज बेंच के सामने सुनवाई के लिए लगभग 100 मामले हैं। मामले की जांच जारी है इस घटना के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) इंटरफेस पर संभावित साइबर अटैक की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि पोर्न वीडियो दो बार चलने से कोर्ट रूम में मौजूद जज, वकील, कोर्ट अफसर और अन्य लोग हैरान रह गए। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और जिम्मेदारी तय किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

किसानों को 122.28 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति, वितरण कार्यक्रम 4 मई को

किसानों को मिलेगी 122.28 करोड़ रुपये की फसल क्षतिपूर्ति, वितरण कार्यक्रम 4 मई को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ और रबी सीजन के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार  4 मई को अपराह्न 04 बजे से प्रदेश के समस्त जनपदों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से क्षतिपूर्ति धनराशि का होगा वितरण   योगी सरकार ने फसल नुकसान से किसानों को सुरक्षा देने और आय स्थिर रखने के लिए उठाया बड़ा कदम  लखनऊ  प्रतिकूल मौसम के कारण प्रभावित होने वाली फसलों से किसानों को सुरक्षा प्रदान करने और उनकी आय स्थिर बनाए रखने के उद्देश्य से योगी सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। प्रदेश के समस्त जनपदों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और चयनित 60 जनपदों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का सफल क्रियान्वयन खरीफ 2016 से बीमा कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है। निदेशक कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा सुमिता सिंह ने बताया कि इसी क्रम में 4 मई को अपराह्न 04 बजे से प्रदेश के समस्त जनपदों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से खरीफ 2025 एवं रबी 2025-26 की फसल क्षतिपूर्ति धनराशि का वितरण किया जाएगा। खरीफ 2025 मौसम की कुल देय क्षतिपूर्ति 730.04 करोड़ रुपये में से 624.88 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और शेष 105.16 करोड़ रुपये का भुगतान 4 मई को किया जाएगा। इसी प्रकार रबी 2025-26 मौसम की शेष 17.11 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भी भुगतान किया जाएगा। इस प्रकार 04 मई को कुल 122.28 करोड़ रुपये की राशि लाभान्वित किसानों के खातों में अंतरित की जाएगी। बता दें कि 21 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 'वन-क्लिक' के माध्यम से खरीफ 2025 की 285.00 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति 2.51 लाख किसानों को वितरित की गई थी।  किसानों के लिए प्रीमियम की दरें बेहद किफायती  उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2025-26 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 67.86 लाख किसानों को 5755.68 करोड़ रुपये की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जा चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित है, जिसमें खरीफ की प्रमुख फसलें जैसे धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, सोयाबीन व तिल तथा रबी की फसलों में गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों, अलसी व आलू को कवर किया गया है। किसानों के लिए प्रीमियम की दरें बेहद किफायती रखी गईं हैं, जिसमें खरीफ फसल हेतु बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी हेतु 1.5 प्रतिशत और वार्षिक नकदी फसलों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत की दर निर्धारित है। कृषक अंश के अतिरिक्त शेष प्रीमियम की धनराशि का वहन केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समान रूप से किया जाता है।

Haryana Assembly Row: भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ‘समानांतर सदन’ पर कारण बताओ नोटिस, स्पीकर हरविंदर कल्याण सख्त

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को असंवैधानिक करार देने तथा विधानसभा परिसर में समानांतर सदन चलाने की विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कार्यवाही को स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने विपक्ष के नेता को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। स्पीकर ने विपक्ष के नेता से पूछा कि उन्होंने किस आधार पर विधानसभा के विशेष सत्र को असंवैधानिक बताया और किस अधिकार अथवा नियम के तहत विधानसभा परिसर में विधायकों को इकट्टा करते हुए समानांतर सदन की कार्यवाही का संचालन किया। हरियाणा विधानसभा के स्पीकर की ओर से ऐसी कड़ी कार्रवाई पहली बार की गई है। हालांकि पूर्व में भी विपक्ष द्वारा विधानसभा परिसर के बाहर समानांतर सदन चलाए जाते रहे हैं, लेकिन यह पहला मौका था, जब विधानसभा परिसर के भीतर कांग्रेस विधायकों ने समानांतर सदन चलाया, जिस पर स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने कड़ा रुख अपनाया है। भूपेंद्र हुड्डा ने विधानसभा विशेष सत्र को बताया असंवैधानिक ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को असंवैधानिक करार देते हुए उसके बहिष्कार की घोषणा कर दी थी और विधानसभा परिसर में समानांतर सदन चलाया था। हरविन्द्र कल्याण ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ-साथ हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव से भी इस विषय पर टिप्पणी मांगी है। मुख्य सचिव से टिप्पणी मांगने के पीछे स्पीकर की सोच यह हो सकती है कि बुलाया गया सत्र पूरी तरह से संवैधानिक था। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायकों को विधानसभा परिसर में समानांतर सत्र के लिए इकट्ठा करने का कृत्य न केवल संसदीय परंपराओं के विपरीत है, बल्कि विधानसभा की गरिमा और स्थापित प्रक्रियाओं व नियमों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से पूछा है कि उन्होंने किन नियमों व संसदीय प्रथाओं के तहत इस प्रकार की अवांछित गतिविधि की है। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से लिखे पत्र में यह भी पूछा गया है कि 27 अप्रैल को आयोजित हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र व उसकी कार्यवाही को उनके द्वारा किस संवैधानिक या प्रक्रियात्मक आधार पर असंवैधानिक करार दिया गया। क्या बोले स्पीकर हरविन्द्र कल्याण? इसके अतिरिक्त, सदन में नारी सशक्तीकरण वंदन संशोधन अधिनियम के समर्थन में प्रस्तुत सरकारी प्रस्ताव को ‘असंवैधानिक’ बताने के पीछे क्या ठोस आधार हैं। कल्याण ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही संविधान, नियमों और स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित होती है और किसी भी प्रकार की समानांतर या भ्रामक गतिविधि लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा इनके सदस्यों की गरिमा व प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा जताई है कि वे इस विषय पर शीघ्र और स्पष्ट जवाब देकर स्थिति को स्पष्ट करेंगे, ताकि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।

फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक पर किसानों की ‘1 करोड़ प्रति एकड़’ की मांग, आंदोलन की धमकी

फिरोजपुर फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक प्रोजेक्ट का किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया गया है। जिले के तीन गांवों के किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार जमीन का उचित मुआवजा नहीं देती, तब तक उनके गांव में रेल लाइन बिछाने नहीं दी जाएगी और केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट का धरने लगाकर विरोध किया जाएगा।गांव कुतुबद्दीन वाला, दुला सिंह वाला और कालेके हिटाड़ में 121 एकड़ सात कनाल छह मरले भूमि सरकार द्वारा प्रोजेक्ट के लिए एक्वायर करने की योजना है और इसमें 60 से 65 घर भी प्रभावित होते हैं।  सरकार की ओर से गांव • एक करोड़ प्रति एकड़ मुआवजे की मांग कर रहे किसान • फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक के लिए जमीन का किया जा रहा अधिग्रहण प्रोजेक्ट के लिए होगा 165.69 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण बता दें कि 13 वर्ष से लटकते आ रहे फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार की ओर से नवंबर 2025 में 764 करोड़ की राशि जारी करने की घोषणा की जा चुकी है। प्रोजेक्ट के तहत मल्लांवाला से पट्टी तक 25.72 किलोमीटर का रेल ट्रैक बिछने के बाद फिरोजपुर से अमृतसर की दूरी भी कम होगी। सरकार द्वारा दो जिलों में 165.69 हेक्टेयर भूमि एक्वायर करनी है, जिसमें फिरोजपुर की 70.01 हेक्टेयर और तरनतारन के आठ गांवो की 95.68 हेक्टेयर भूमि शामिल है। कालेके हिटाड़ गांव के किसान मनदीप सिंह ने कहा कि उसके पास छह एकड़ भूमि है। अगर सरकार उनकी भूमि ले लेगी तो घर में काफी दिक्कत आ जाएगी। सरकार जमीन की कीमत कम लगा रही है, जो कि सही नहीं है। 33 से 35 लाख प्रति एकड़ मुआवजा देंगे: एसडीएम जीरा के एसडीएम अरविन्द्रपाल सिंह ने कहा कि किसानों को 33 से 35 लाख प्रति एकड़ के मुताबिक मुआवजा देने का निर्णय हुआ है। प्रशासन की ओर से प्रोजेक्ट पर कार्य किया जा रहा है। रुपये का मुआवजा किसानों को देने के लिए बजट बनाया गया था। भारतीय किसान यूनियन तोतेवाला के प्रांतीय अध्यक्ष सुख गिल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भूमि एक्वायर करने के नाम पर किसानों के साथ सीधे तौर पर धक्का किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रति एकड़ एक करोड़ से सवा करोड़ का मुआवजा दिया जाना चाहिए। अगर उचित मुआवजा न मिला तो रेल ट्रैक बनने नहीं दिया जाएगा। रेलवे स्टेशनों पर धरने दिए जाएंगे। किसान मलूक सिंह, बचित्र सिंह, परमजीत व पाला सिंह ने कहा कि जिन किसानों की भूमि एक्वायर की जानी है, उनका बैंकों का कर्ज माफ करने के अलावा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। दुल्ला सिंह वाला में धुस्सी बांध के इन साइड में 3.80 लाख प्रति एकड़ कलेक्टर रेट 4.98 लाख प्रति एकड़ और धुस्सी बांध के 3.87 लाख प्रति एकड़ रेट निर्धारित किया गया है। तीन वर्ष पहले प्रशासन द्वारा 30 करोड़ 99 लाख।   

रांची: स्नातक शिक्षक नियुक्ति मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई 2 मई को

 रांची  स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति से संबंधित मामले में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की सुनवाई दो मई को होगी। दो मई को दोपहर एक बजे पुराने हाई कोर्ट भवन, डोरंडा में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बैठेगी और सुनवाई की जाएगी। फिलहाल इस सुनवाई में केवल अधिवक्ता ही उपस्थित हो सकते हैं। अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। प्रार्थी के अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के चेयरमैन जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की ओर से इसकी जानकारी दी गई है। बता दें कि इस मामले में 257 याचिकाओं पर हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सेवानिवृत्ति जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का नया चेयरमैन बनाया है। इससे पहले अदालत ने पूर्व में राज्य स्तर पर बने मेरिट लिस्ट की अनियमितता के मामले में इसकी जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। अदालत ने उक्त कमेटी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। प्रार्थियों का दावा था कि राज्य स्तर पर बनी मेरिट लिस्ट में काफी त्रुटियां है। जिन्हें निर्धारित कट आफ से कम नंबर मिले हैं उनका चयन कर लिया गया है, जबकि उनसे ज्यादा नंबर पाने वालों का चयन नहीं हुआ है।

Water Management Initiative: 46 गांवों में ग्रे-वॉटर प्लांट से दूर होगी पानी की किल्लत

बिलासपुर. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायतों में तरल अपशिष्ट (लिक्विड वेस्ट) के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली (DEWATS) को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नालियों, नदियों एवं तालाबों में जाने से रोका जाएगा तथा उसे उपचारित कर पुनः उपयोग के लायक बनाया जाएगा। यह प्रणाली जल स्रोतों (नदियों व तालाबों) को प्रदूषणमुक्त रखने के साथ-साथ ग्रामीण आबादी को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएगी। इस प्रणाली से अपशिष्ट जल के उचित उपचार के साथ ही पर्यावरण व जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली पारंपरिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की तुलना में किफायती एवं प्रकृति-आधारित तकनीक पर आधारित है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया के बजाय सूक्ष्म जीवों एवं पौधों की सहायता से जल का शोधन किया जाता है। इस तकनीक की विशेषता यह है कि अपशिष्ट जल का उपचार उसी स्थान (ऑन-साइट ट्रीटमेंट) पर किया जाता है, जहां वह उत्पन्न होता है। इस उपचारित जल का उपयोग बागवानी, कृषि कार्य एवं शौचालय फ्लशिंग जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इससे भूजल स्तर में सुधार के साथ जल संसाधनों का संरक्षण भी होगा। बिलासपुर जिले में अभी विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली की 46 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 25 के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। शेष 21 कार्य प्रगति पर हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से न केवल जल की बर्बादी को रोका जा रहा है, बल्कि ओडीएफ प्लस (ODF Plus) लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल समाधान साबित होगी।

शंभू ब्लास्ट के बाद रेलवे सुरक्षा पर हाई अलर्ट, संवेदनशील इलाकों में बढ़ी पेट्रोलिंग

 चंडीगढ़  पंजाब में रेलवे ट्रैक आतंकियों के निशाने पर है। सोमवार रात पटियाला के शंभू में डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) के ट्रैक पर हुए ब्लास्ट ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़े पैटर्न के तौर पर देख रही हैं, जिसमें रेलवे नेटवर्क को लगातार निशाना बनाने की कोशिशें सामने आ रही हैं। इससे पहले रेलवे ट्रैक के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरे कैमरे लगाए जाने के मामले सामने आए थे। पांच कैमरे पंजाब में लगे थे। एक पठानकोट व एक कपूरथला में बरामद किया था, लेकिन जालंधर मोगा व पटियाला में लगे तीन कैमरों का पता नहीं। जांच में पता चला था कि इनका इस्तेमाल जासूसी और ट्रैक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। हाल ही में लखनऊ एटीएस (एटीएस) की ओर से भी एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया गया, जो अलग-अलग इलाकों में रेलवे ट्रैक के आसपास आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बड़े हमलों की तैयारी का हिस्सा हो सकती हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान कई घटनाएं आई सामने पंजाब में पिछले दो वर्षों के दौरान भी कई घटनाएं सामने आई हैं। 23 जनवरी 2026 में सरहिंद के पास डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ था, जिसमें करीब 60 फीट पटरी क्षतिग्रस्त हुई थी। वहीं, 2024 और 2025 में कई बार रेलवे ट्रैक पर लोहे की सरिया या अन्य वस्तुएं रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिशें हुईं थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक, खासकर मालगाड़ियों के रूट, देश की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। कोयला, खाद, अनाज और औद्योगिक सामान की ढुलाई इन्हीं रास्तों से होती है। ऐसे में इनको नुकसान पहुंचाने की कोशिश सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ी फिलहाल रेलवे, आरपीएफ और राज्य पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। निगरानी के लिए तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। फिर भी ऐसे षड्यंत्रों को समय रहते नाकाम करना बड़ी चुनौती है। पंजाब में रेलवे ट्रैक को उड़ाने की लगातार धमकियां मिल रही थीं। गत 24 अप्रैल को भी पटियाला, बठिंडा, लुधियाना व अमृतसर में ईमेल पर बम से रेलवे ट्रैक उड़ाने की धमकी मिली थी। तीन दिन बाद शंभू में ब्लास्ट की घटना हो गई।  

Electric Vehicle को बढ़ावा: हरियाणा के नए आवासों में चार्जिंग सुविधा होगी जरूरी

चंडीगढ़. भविष्य में हरियाणा के बड़े शहरों में विकसित होने वाले शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के रखरखाव व चार्जिंग की व्यवस्था करने पर विशेष फोकस होगा। राज्य में आवासीय तथा गैर आवासीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना अनिवार्य किया जाने वाला है। प्रदेश सरकार इसके लिए हरियाणा बिल्डिंग कोड 2017 में बदलाव करेगी। हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने एक नोटिस जारी कर आम नागरिकों से दावे तथा आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्तावित संशोधनों को सरकार से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब इन्हें 30 दिनों के लिए यानी 26 मई तक सार्वजनिक डोमेन में रखा जा रहा है, ताकि संबंधित पक्षों और नागरिकों से इन पर आपत्तियां और सुझाव प्राप्त किए जा सकें। संशोधित नियमों के तहत, सभी नई और मरम्मत की गई गैर-रिहायशी इमारतों जैसे शापिंग कांप्लेक्स, माल, होटल और आफिस स्पेस, जहां कम से कम 10 कारों की पार्किंग की व्यवस्था है, वहां हर तीन पार्किंग स्लाट के लिए कम से कम एक ईवी चार्जिंग स्पाट उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इमारतों को 100 फीसदी ईवी तैयार बनाया जाए इसके अलावा, ऐसी इमारतों को 100 प्रतिशत ईवी-तैयार बनाया जाना चाहिए, जिसके लिए चार्जिंग प्वाइंट तक जाने वाली तारों के लिए पाइप पहले से ही लगाई गई होगी। इसी तरह रिहायशी कांप्लेक्स, जिनमें सहकारी आवास समितियां, ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट और आरडब्ल्यूए द्वारा प्रबंधित रिहायशी ब्लाक शामिल हैं और जहां 10 या उससे अधिक कारों की पार्किंग की जगह है, उन्हें हर पांच पार्किंग स्लाट के लिए एक ईवी चार्जिंग स्पाट उपलब्ध कराना होगा। उन्हें पूरी तरह से ईवी-तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराना होगा। संशोधन में यह स्पष्ट किया गया है कि ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को फ्लोर एरिया रेश्यो गणना से छूट दी जाएगी। इस फैसले से डेवलपर्स और आवास समितियों को नये नियमों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र (बिल्ट-अप-एरिया) से जुड़ी पाबंदियों से मुक्ति मिलेगी। स्पॉट को बेसमेंट और स्टिल्ट फ्लोपर पर भी लगाया जा सके ड्राफ्ट के अनुसार चार्जिंग स्पॉट को बेसमेंट और स्टिल्ट फ्लोर पर भी लगाया जा सकता है, बशर्ते वे निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करते होंगे। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक अमित खत्री ने लोगों और संबंधित पक्षों से ईमेल के माध्यम से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। ये सुझाव और आपत्तियां संशोधनों की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले प्राप्त की जाएंगी।

अंग्रेजी शराब ठेकेदार की मनमानी एमआरपी से ज्यादा वसूली करने का आरोप

राजेंद्र ग्राम /छबिलाल  जिले के पुष्पराजगढ़ में अधिकृत अंग्रेजी शराब ठेकेदार पर मनमानी तरीके से शराब बेचने के गंभीर आरोप लगाया जा रहा हैं की अंग्रेजी शराब ठेकेदार के द्वारा बोतल में लिखी एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं और लाइसेंस दुकान की बजाय पुष्पराजगढ़ के कई गांव में अंग्रेजी शराब दुकान का संचालन कराकर शराब की बिक्री की जा रही है ग्रामीणों ने बताया कि बोतल पर छपी कीमत से ज्यादा 50 रूपए से 100 रूपए तक अधिक लिए जा रहे हैं विरोध करने पर ठेकेदार के कर्मचारी अभद्रता व्यवहार करते हैं एवं गांव – गांव में शराब पहुंचा कर बिक्री की जाती है जैसे करपा, सरई, लीला टोला, बेनिवारी,व तीर्थ नगरी अमरकंटक जैसे स्थान में शराब पहुंचा कर विक्रय की जाती है।और समय की अवहेलना भी करते हुए रात 10:00 के बाद भी बिक्री जारी रहती है जबकि नियमानुसार 10:00 बजे दुकान बंद हो जानी चाहिए शराब ठेकेदार के लोग शाम होते ही गांव में घुस जाते हैं युवा नशे की लत में पड़े रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है की एमआरपी रेट में ही शराब बिक्री किया जाए नहीं तो शराब दुकान ही बंद किया जाए इस तरीके का आरोप लगाते हुए शासन से उचित निष्पक्ष जांच करते हुए अंग्रेजी शराब संचालन करने की मांग की गई है।