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एक दिन में तीन मौसम: पंजाब में बारिश, तेज धूप और धूल भरी आंधी का असर

जालंधर. जालंधर. अप्रैल में मौसम में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिला है। वीरवार को सुबह बूंदाबांदी हुई, लेकिन दोपहर को धूप निकलने से गर्मी बढ़ गई। वहीं शाम को शाम को धूल भरी आंधी चलने से गर्मी से राहत मिली। पहाड़ी इलाकों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव होने की वजह से सीधा असर मैदानी इलाकों पर पड़ सकता है। मौसम विभाग की ओर से शुक्रवार को बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम में बदलाव से गर्मी से भले ही राहत मिली है, परंतु गेहूं की फसल तकरीबन तैयार है और कटाई का काम शुरू हो चुका है। मौसम के मिजाज को लेकर किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। कृषि विभाग से सेवानिवृत्त डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेश गुलाटी का कहना है कि अभी तेज हवा और वर्षा गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इससे खेतों में पानी खड़ा हो सकता है और तना जमीन पर झुकने से दाना खाला हो सकता है। देश के कई राज्यों में प्रचंड लू का दौर जारी है. बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, से लेकर मध्य प्रदेश के कई शहरों में तापमान 40 को छू रहा है और कई शहरों में तो 40 के पार जा रहा है. हालांकि कई जगहों पर दोहरे मौसम का भी अनुभव किया जा रहा है. शुक्रवार को देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में हल्की बूंदाबादी भी हुई जिसने लोगों को गर्मी से राहत दी है. मौसम विभाग (IMD) के नए अलर्ट से भी कई राज्यों में दो से तीन दिनों तक राहत मिलने की उम्मीद है. IMD के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और स्थानीय गर्मी मिलकर ऐसा माहौल बना रही हैं, जिसमें कुछ ही घंटों में तेज धूप से मौसम आंधी-बारिश में बदल सकता है. यही वजह है कि लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. मौसम अब स्थिर नहीं रहा, बल्कि हर दिन नया रूप दिखा रहा है. 13 राज्यों में झमाझम बारिश होने के साथ-साथ बिजली गिरने का भी अलर्ट है. इन राज्यों में धूल भरी आंधी के साथ 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से हवाएं भी चल सकती हैं.

भिलाई स्टील प्लांट में सख्ती: 30 वर्ष पूरे करने वालों पर VRS/CR का दबाव

भिलाई नगर. इस्पात मंत्रालय का सेल के कार्पोरेट आफिस पर मैनपावर कम करने का जबर्दस्त दबाव है। कम्पनी पर ऐसे कार्मिकों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने का दबाव है, जो कम्पनी में 30 वर्ष सेवा कर चुके हैं या फिर जिनकी उम्र 55 वर्ष पूरी हो गई है। दबाव इतना है कि जो लोग वीआर नहीं लेंगे उन्हें सीआर यानी कम्पलसरी रिटायरमेंट दिया जा सकता है। वैसे मैनपावर कम करने का इस्पात मंत्रालय का दबाव तो पहले से ही था लेकिन यह दबाव अचानक बढ़ गया है। सेल का मैनपावर कास्ट 11 प्रतिशत है। जबकि निजी स्टील कंपनियों का मैनपावर कास्ट 2 से लेकर 4 प्रतिशत है। बीएसपी की बात करें तो चार कर्मियों के पीछे एक अफसर है। स्टील सेक्रेटरी संदीप पौड्रिक मैन पावर के मुद्दे पर अब सीधे कम्पनी की यूनिटों के प्रमुखों से बात कर रहे हैं। 16 अप्रैल को उन्होंने बीएसपी में मैनपावर कम करने को लेकर बहुत सख्त लहजे में बात की। इसके बाद यह माना जा रहा है कि इस बार वीआर स्कीम का टार्गेट बड़ा रहेगा। उच्च प्रबंधन स्तर पर चर्चा है कि यह टार्गेट 4000 के आसपास हो सकता है। बीएसपी में इस समय 12552 कार्मिक बीएसपी में इस समय सर्वाधिक मैनपावर है। 01 अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार 2471 एक्जीक्यूटिव और 10081 नान एक्जीक्यूटिव हैं। यानी कुल कार्मिकों की संख्या 12552 है। इनमें कितने कार्मिक 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं और कितने कार्मिकों की उम्र 55 वर्ष पूरी हो गई है, यह आंकड़े मैनेजमेंट के पास हैं। इन आंकड़ों के अनुसार मैनपावर कहां कहां कितनी संख्या में कम किए जा सकते हैं, इस पर प्रबंधन बहुत जल्द वर्क करने वाला है। वर्क्स और नान वर्क्स एरिया दोनों एरिया में मैनपावर कम किया जाना है। जबरिया रिटायर कर दिये जाएंगे कुछ ऐसे कार्मिक जिनसे प्रबंधन मुक्ति चाहता है वे अक्सर वीआर नहीं लेते। ऐसे कार्मिक इस बार मैनेजमेंट के टार्गेट में रहेंगे। अब कम मैनपावर में मैनेजमेंट को प्रोडक्शन टार्गेट पूरा करने का दबाव रहेगा इसलिए वह ऐसे कार्मिकों से मुक्ति पाना चाहेगा जो अक्सर मेडिकल अनफिट रहते हैं, या विकलांग हैं या नेतागीरी कर अटेंडेंड लेते रहते हैं। आने वाले दिनों में कतिपय कर्मियों को ड्यूटी में मिलना बंद हो सकता है। यूनियन या फिर स्थानीय राजनीतिज्ञों के दबाव की मैनेजमेंट परवाह नहीं करेगा। वीआर स्कीम तैयार लांच करने की तैयारी सेल के कार्पोरेट आफिस ने वीआर स्कीम तैयार कर लिया है। उसे लांच करने की तारीख भर अभी तय नहीं हुई है। पहले चर्चा थी कि उसे 5 अप्रैल को लांच कर दिया जाएगा पर नहीं किया गया। इस बीच सेल चेयरमैन की विदाई हो गई है और नए चेयरमैन को कार्यभार संभालने में लगभग तीन माह का समय है। ऐसे में वीआर स्कीम को कब लांच किया जाए इस पर सेल मैनेजमेंट भी मंथन कर रहा है। इसके अलावा वीआर स्कीम एक बड़ी राशि का एकमुश्त भुगतान करना भी सेल के कार्पोरेट आफिस के लिए एक चुनौती है। हालांकि सेल का ही आंकड़ा है कि चालू वित्त वर्ष में 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपया से अधिक का कैश कलेक्शन हो चुका है। मैनेजमेंट के लिए चुनौती इस्पात मंत्रालय के दबाव में सेल मैनेजमेंट वीआर स्कीम तो ला रहा है, लेकिन वर्तमान में ही उसे अपनी कई यूनिटों में अनेक विभागों में मैनपावर की दिक्कत है। ऐसे में वीआर स्कीम के बाद कम मैनपावर में प्रोडक्शन लेना चुनौती भरा होगा। कारण, उसे एक्सपांशन प्रोजेक्ट का टार्गेट दिया जा रहा है। यानी उस पर प्रोडक्शन बढ़ाने का भी दबाव रहेगा।

RAS Result 2024: राजस्थान आरएएस फाइनल रिजल्ट जारी, बाड़मेर के दिनेश विश्नोई ने किया टॉप

जयपुर  राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक परीक्षा, RAS-2024 का परिणाम घोषित कर दिया है। जो कैंडिटे्स 17 अप्रैल 2026 तक आयोजित हुए RPSC RAS Interview में उपस्थित हुए थे, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जाकर अपना सरकारी रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आरपीएससी आरएएस 2024 की परीक्षा में कुल 2,391 उम्मीदवारों को सफल घोषित किए गया है। आरपीएससी ने 18 अप्रैल 2026 को राज. राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (मुख्य) 2024 में सफल उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी है। कंबाइंड मेरिट लिस्ट इंटरव्यू राउंड के बाद जारी की गई है। साथ ही TSP-Non TSP में सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर की pdf लिस्ट ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी की है। टॉप 20 कैंडिडेट्स की लिस्ट रैंक नाम जिला रोल नंबर जेंडर 1 दिनेश विश्नोई बाड़मेर 1010371 पुरुष 2 वीरेंद्र चारण जैसलमेर 1006165 पुरुष 3 नवनीत शर्मा भीलवाड़ा 1007118 पुरुष 4 रविंद्र सिंह ब्यावर 1004694 पुरुष 5 विकास सियाग बीकानेर 1011057 पुरुष 6 ऐश्वर्या कंवर बीकानेर 1003725 महिला 7 दिनेश जोधपुर ग्रामीण 1009388 पुरुष 8 शालू अनूपगढ़ 1004455 महिला 9 भूपेंद्र सिंह बालोतरा 1005670 पुरुष 10 राम सिंह गुर्जर प्रतापगढ़ 1003279 पुरुष 11 यशवंत सांदू जोधपुर 1003525 पुरुष 12 कुलदीप शर्मा जयपुर 1014093 पुरुष 13 कैलाश कुमार बालोतरा 1003098 पुरुष 14 चानन सिंह इंदा जोधपुर 1010427 पुरुष 15 अभय सिंह आंजना प्रतापगढ़ 1007854 पुरुष 16 कैलाश रणवा डीडवाना-कुचामन 1012002 पुरुष 17 हरियश राजपुरोहित अजमेर 1003015 पुरुष 18 उमंग रावल डूंगरपुर 1007916 पुरुष 19 तनीषा यादव जयपुर 1013609 महिला 20 वृंदा शेखावत जयपुर 1018607 महिला         How to Check RPSC RAS Result 2024 PDF : यहां देखें तरीका     सबसे पहले आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर 'News and Events' में 'Combined Merit List (After Intv.) For Raj. State And Sub. Services Comb. Comp. Exam – 2024' लिंक पर क्लिक करें।     स्क्रीन पर सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर और नाम की लिस्ट खुल जाएगी। इसमें CTRL+F टाइप करके अपना रोल नंबर या नाम चेक कर सकते हैं।     आगे के लिए पीडीएफ डाउनलोड करें व प्रिंटआउट लेकर अपने पास रख लें। RPSC RAS 2024 PDF में अभी अपना नाम और रोल नंबर चेक करने के लिए यहां क्लिक करें- आरएएस 2024 की परीक्षा में दिनेश विश्नोई ने 351.50 नंबर (कंबाइंड) लाकर मेरिट लिस्ट में पहला स्थान प्राप्त किया है। विरेंद्र चरण ने 351 नंबर लाकर राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया। यहां देखें टॉप 10 उम्मीदवारों के नाम और मेन्स व इंटरव्यू में प्राप्त अंक।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: राज्यभर में नई न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली कानूनी मंजूरी

योगी सरकार का बड़ा कदम: राज्यभर में नई न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली कानूनी मंजूरी प्रदेश सरकार के निर्णय पर राज्यपाल की मुहर, नोटिफिकेशन जारी नोएडा प्रकरण के बाद सरकार का हस्तक्षेप, तीन श्रेणियों में लागू हुई नई मजदूरी दरें उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर अंतरिम राहत लागू गौतमबुद्धनगर-गाजियाबाद प्रथम श्रेणी में, अन्य जिलों का दो वर्गों में विभाजन 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी नई दरें, महंगाई भत्ते के साथ वेतन का निर्धारण श्रमिकों की मांग और उद्योगों की स्थिति के बीच संतुलन बनाने की पहल लखनऊ/गौतमबुद्धनगर  नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालिया घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का निर्णय लिया। सरकार के निर्णय पर प्रदेश की राज्यपाल ने भी अपनी मुहर लगाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके बाद सरकार द्वारा निर्धारित नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई हैं। अब यह पूरे प्रदेश में बाध्यकारी रूप से लागू होंगी।  उल्लेखनीय है कि घटनाक्रम के बाद श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध खत्म करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी, जिसने अपनी सिफारिश में के तीन श्रेणियां में वेतन की दरें निर्धारित की हैं। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में नई मजदूरी दरें लागू करते हुए प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है, जिससे क्षेत्रीय परिस्थितियों और जीवन-यापन की लागत के अनुसार संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया। प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को रखा गया, जहां जीवन-यापन की लागत अपेक्षाकृत अधिक है। यहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। द्वितीय श्रेणी में नगर निगम वाले अन्य जिलों को शामिल किया गया है, जहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं तृतीय श्रेणी में शेष जिलों को रखा गया है, जहां मजदूरी दरें क्रमशः 12,356 रुपये, 13,590 रुपये और 15,224 रुपये तय की गई हैं। इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) शामिल है। दरअसल, वर्ष 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिसके चलते यह अंतर बढ़ता गया। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित पुनरीक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल श्रमिकों को राहत देने के लिए है, बल्कि औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन चक्र को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई दरें लागू होने के बाद श्रमिकों के हितों में किसी प्रकार की कटौती या अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय उस समय लिया गया जब श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध की स्थिति बनी और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं। श्रमिकों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और किराए के दबाव के कारण जीवनयापन कठिन हो गया है, जबकि नियोक्ताओं ने वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती लागत और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं का हवाला दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार को सौंपी गई। इसमें अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग एवं श्रमायुक्त, उत्तर प्रदेश को क्रमशः सदस्य और सदस्य सचिव के रूप में नामित किया गया। समिति में कर्मकारों के पांच प्रतिनिधि और नियोक्ताओं के तीन प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे। समिति ने मौके पर जाकर श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की और संतुलित समाधान का प्रस्ताव तैयार किया।

दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026: योगी सरकार के विजन से डेयरी सेक्टर को मिली नई रफ्तार

दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026: योगी सरकार के विजन से डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार 50 वर्ष पूरे होने पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य आयोजन, 5,000 करोड़ के मिले निवेश प्रस्ताव महोत्सव में 10 हजार से अधिक पशुपालकों की रही भागीदारी, 139 लाभार्थियों के खाते में गई धनराशि प्रदेश सरकार की योजनाओं, तकनीक और निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती लखनऊ  लखनऊ में दुग्धशाला विकास विभाग के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026’ न केवल उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि योगी आदित्यनाथ सरकार के उस व्यापक विजन का भी प्रदर्शन बना, जिसके केंद्र में डेयरी सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत धुरी बनाना है। दो दिवसीय इस आयोजन में हजारों पशुपालकों, उद्यमियों और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी के बीच जहां 5,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, वहीं योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक के प्रसार और ‘गौ से ग्राहक तक’ की समग्र व्यवस्था को सशक्त करने का स्पष्ट रोडमैप भी सामने आया। महोत्सव में प्रदेशभर से करीब 10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब के माध्यम से देश-विदेश के लाखों गोपालकों और उद्यमियों को भी जोड़ा गया, जहां विशेषज्ञों ने योजनाओं, नवीन तकनीकों, स्वदेशी नस्ल के गो पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। 139 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनीतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कार्यक्रम में विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालकों एवं उद्यमियों को सम्मानित किया। साथ ही वर्ष 2024-25 के नन्द बाबा पुरस्कार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित 139 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित की गई। इस दौरान निजी क्षेत्र के उद्यमियों ने स्टॉल के माध्यम से दुग्ध उत्पादों एवं नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया, जबकि नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 से लाभान्वित पशुपालकों, उत्पादकों और निवेशकों की सफलता की कहानियों पर आधारित संग्रह पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है यूपी कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव पशुपालन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य पालन मुकेश कुमार मेश्राम ने अतिथियों एवं पुरस्कार विजेताओं का स्वागत करते हुए स्वदेशी नस्ल के गोपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बताया और विभागीय योजनाओं के बहुआयामी लाभों से पशुपालकों के जीवन स्तर में आए बदलावों पर प्रकाश डाला। वहीं दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और इसे बनाए रखने के लिए राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य और स्थायी आय उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के माध्यम से ‘गौ से ग्राहक तक’ की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित कर गुणवत्तापरक उत्पादन और वैश्विक स्तर के दुग्ध उत्पाद सुनिश्चित किए जा रहे हैं। अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में उभरकर सामने आया है, जो न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर रहा है, बल्कि राज्य के सकल मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में लगभग 1.72 लाख करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहा है। विभाग द्वारा अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के 796 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनसे 60,000 से अधिक रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के तहत 2,000 करोड़ रुपये की 72 परियोजनाएं शुरू की गईं, जबकि 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 59 नए निवेश प्रस्तावों से 13,000 अतिरिक्त रोजगार की संभावना है। वहीं नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 10,000 से अधिक लाभार्थियों को 84 करोड़ रुपये की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से वितरित की गई है और 4,000 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए करीब 1.5 लाख दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा गया है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रगति दर्ज हुई है। लाभार्थियों ने भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत किए कार्यक्रम में सहकारिता विभाग एवं सीएसए विश्वविद्यालय द्वारा स्वदेशी उन्नत नस्लों के पालन के महत्व पर प्रस्तुति दी गई, जबकि देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों और उद्यमियों ने डेयरी क्षेत्र में अपने अनुभव एवं नवाचार साझा किए। इस दौरान नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के लाभार्थियों ने भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत किए। वहीं मंत्री धर्मपाल सिंह ने दुग्ध स्वर्ण महोत्सव एवं डेयरी एक्सपो में पारस, ज्ञान, नमस्ते इंडिया, अमूल समेत कई प्रमुख निजी डेयरी कंपनियों के स्टॉल का अवलोकन किया, जहां आधुनिक उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। कुछ कंपनियों ने इस अवसर पर नए उत्पाद भी लॉन्च किए, जबकि विभिन्न मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों ने भी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

इंदौर में बाल विवाह पर कार्रवाई: 17 साल की दुल्हन और 13 साल के दूल्हे की शादी रोकी, प्रशासन ने दी दबिश

इंदौर  दौर के अहिल्या पलटन इलाके में शुक्रवार को एक घर में शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी। मंडप सज चुका था। दुल्हन को हल्दी लग रही थी। महिलाएं गीत गा रही थीं, तभी महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम पहुंच गई और नाबालिग बेटी की शादी रुकवा दी। लड़की के पिता ने टीम को बताया कि उनके समाज में 16 साल की उम्र में विवाह की छूट है। जब अधिकारियों ने इस दावे से जुड़ा कोई सरकारी नियम या आदेश दिखाने को कहा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। 18 साल होने में 6 महीने बाकी जांच में सामने आया कि लड़की की उम्र 18 साल होने में करीब 6 महीने बाकी हैं। इसके बाद अधिकारियों ने परिजनों और लड़के पक्ष को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधान, सजा और कम उम्र में शादी के नुकसान समझाए। महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी चित्रा यादव, उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक सदस्य संगीता सिंह चाइल्ड लाइन के फूल सिंह कारपेंटर और टीम के अन्य सदस्यों ने दोनों परिवारों को समझाया। काफी देर तक चली चर्चा के बाद दोनों पक्ष शादी टालने पर राजी हो गए। मेहमानों को भोजन की अनुमति दी गई परिजनों ने बताया कि शादी की तैयारी में खर्च हो चुका है। निमंत्रण भी बंट चुके हैं। ऐसे में मेहमानों को खाली नहीं लौटाया जा सकता। इस पर प्रशासन ने उन्हें केवल भोजन कराने की अनुमति दी। टीम ने साफ किया है कि 19 अप्रैल को शादी के दिन दोनों परिवारों पर नजर रखी जाएगी। शपथ पत्र देने के बावजूद यदि बाल विवाह करने की कोशिश हुई तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले में चल रहा विशेष अभियान जिले में बाल विवाह रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शिकायत मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर उम्र का सत्यापन करती है। जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है। मामले में कलेक्टर ने शुक्रवार को प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किया है। दूसरा मामला: दुल्हन 18 की, दूल्हा 13 साल का इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र के संजय नगर में भी बाल विवाह रुकवाने का मामला सामने आया है। यहां दुल्हन की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी थी, लेकिन दूल्हा सिर्फ 13 वर्ष का था। शिकायत मिलते ही दल मौके पर पहुंचा और दस्तावेजों की जांच के बाद विवाह रुकवाया। पूछताछ में पहले परिजनों ने विवाह से इनकार कर दिया था। मौके पर विवाह की तैयारियां स्पष्ट दिख रही थीं। 19 अप्रैल को विवाह प्रस्तावित था। फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी महेंद्र पाठक ने बताया कि हमें बाल विवाह की सूचना मिली थी। शुक्रवार को हल्दी का कार्यक्रम था। मौके पर पहुंचे और परिजन को समझाया। समझाइश पर वे मान गए, लेकिन उनका कहना था कि शादी के कार्ड बंट चुके हैं। ऐसे में हमने अक्षय तृतीया के दिन मेहमानों को भोजन कराने की अनुमति दी है। साथ ही जब तक लड़की बालिग नहीं हो जाती है, वह हर रोज आंगनबाड़ी में जाकर हाजिरी दर्ज कराएगी। कन्यादान योजना के तहत होगा विवाह जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिंह ने बताया कि जिन बालक-बालिकाओं के विवाह कम उम्र के कारण निरस्त कराए गए हैं, बालिग होने पर परिवार की इच्छा अनुसार शासन की कन्यादान योजना के तहत उनके विवाह कराए जाएंगे। इस योजना में परिवार को आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

यूक्रेन युद्ध में मारा गया अंशु, रूस से ताबूत में वर्दी और जूते के साथ भारत लाया गया

रेवाड़ी गुरुग्राम से सटे हरियाणा के रेवाड़ी के काठुवास गांव में शुक्रवार उस समय मातम छा गया, जब एमबीए की पढ़ाई करने रूस गए 22 वर्षीय अंशु का शव ताबूत में लिपटकर घर पहुंचा। गांव के श्मशान घाट पर कटर मशीन से ताबूत को खोला गया। उसमें में अंशु के शव के साथ-साथ उसकी रूसी सेना की वर्दी और जूते भी साथ भेजे गए। पिता का कहना है कि दलालों ने छात्र को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराकर मौत के मोर्चे (रूस-यूक्रेन युद्ध) पर झोंक दिया। पिता ने अपनी आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने सजाकर जिस बेटे को पढ़ने के लिए विदेश भेजा था, उसकी अर्थी उठते देख पूरे गांव का कलेजा फट गया। अंशु के बड़े भाई मोहित ने नम आंखों से अंशु की चिता को मुखाग्नि दी। लोगों का कहना था कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन दलालों की साजिश का नतीजा है, जिन्होंने शिक्षा के नाम पर एक होनहार छात्र को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराकर मौत के मोर्चे पर झोंक दिया। दलालों ने पढ़ाई छुड़वाकर युद्ध में भेजा परिवहन विभाग में कार्यरत पिता राकेश कुमार ने बताया कि अंशु बीए करने के बाद एमबीए का सपना लेकर 30 अप्रैल 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। कुछ महीने कॉलेज में पढ़ाई भी की, लेकिन फिर दलालों के जाल में फंस गया। दलालों ने बेटे अंशु को जबर्दस्ती सितंबर 2025 में रूसी सेना में भर्ती करा दिया। अंशु ने आखिरी बार 18 अक्टूबर 2025 को घर बात की थी। अंशु ने बताया था कि सितंबर में वह रूस की सेना में भर्ती हुआ है। अब युद्ध के लिए उसे यूक्रेन की फर्स्ट लाइन में जा रहा है और अब कुछ दिनों के बाद ही बातचीत हो पाएगी। सबका लाडला था अंशु काठुवास निवासी राकेश कुमार की पत्नी का देहांत पहले ही हो चुका था। तीन भाई-बहनों में अंशु सबसे छोटा और सबका लाडला था। पिता ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर उसे पढ़ने के लिए रूस भेजा था ताकि वह बड़ा आदमी बन सके, लेकिन घर लौटी तो सिर्फ उसकी यादें और ताबूत। गांव वालों का कहना है कि सरकार को उन दलालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो मासूम युवाओं को पढ़ाई के नाम पर मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। रूस गए हरियाणा के सात बेटे अब भी लापता बताए जा रहे हैं। अनजान रहा परिवार ● जानकारी के अनुसार फोन पर बातचीत के कुछ समय बाद ही अंशु की मौत को हो चुकी थी, लेकिन परिवार छह महीने तक अनजान रहा। 2 अप्रैल को देश के विदेश मंत्री से मुलाकात हुई। ● 4 अप्रैल 2026 को पिता राकेश कुमार के पास रूस के मॉस्को से फोन आया। उन्हें बताया गया कि अंशु की मौत हो चुकी है और उसका शव मिल चुका है और भारत में भेजने में 10 से 15 दिन लगेंगे। ● 16 अप्रैल को सूचना मिली कि शव शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट आ रहा है। शुक्रवार सुबह दिल्ली से शव लेने के बाद परिवार 10 बजे गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से ज्यादा छापे

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से अधिक छापे योगी सरकार की सख्ती से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई सामान्य एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई सरकार की जनता से पैनिक बाइंग न करने की अपील 14 मार्च के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए कालाबाजारी पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। मुख्य सचिव स्तर से जारी निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रवर्तन कार्रवाई की गई, जिसके तहत 12 मार्च से अब तक 29,607 छापे और निरीक्षण किए गए। इस दौरान एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है। सरकार के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। राज्य के 12,888 पेट्रोल पंपों के माध्यम से लगातार उपभोक्ताओं को ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। 12 से 16 अप्रैल के बीच प्रतिदिन हजारों किलोलीटर पेट्रोल और डीजल की बिक्री दर्ज की गई, जबकि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 82,000 किलोलीटर पेट्रोल और 1.05 लाख किलोलीटर डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक भंडारण (पैनिक बाइंग) से बचें। एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई गई है। प्रदेश के 4,107 गैस वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुसार रिफिल सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों जैसे होटल, ढाबा, उद्योग और सामुदायिक रसोई को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध आवंटन किया जा रहा है। योगी सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार को भी तेजी दी है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध कराए जा सकें। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद विभिन्न विभागों से 117 से अधिक अनुमतियां जारी की जा चुकी हैं। 14 मार्च 2026 के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 16.09 लाख से अधिक हो गई है। सप्लाई व्यवस्था की निगरानी के लिए खाद्य आयुक्त कार्यालय में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, वहीं जिलों में भी नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड में जाकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर आपूर्ति बाधित न हो।

हरियाणा में HCS परीक्षा का बड़ा आयोजन: 337 सेंटर, 93 हजार से ज्यादा उम्मीदवार शामिल

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने 26 अप्रैल को होने वाली हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की प्रारंभिक परीक्षा 2025 के लिए तैयारियों की समीक्षा की। यह परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जाएगी। पहला सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक (सामान्य अध्ययन) तथा दूसरा सत्र दोपहर बाद तीन बजे से शाम पांच बजे तक (सीसैट) होगा। इस परीक्षा के लिए कुल 93 हजार 696 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं, जो राज्य के आठ जिलों में बनाए गए 337 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्र अंबाला (31 केंद्र), फरीदाबाद (80 केंद्र), गुरुग्राम (56 केंद्र), करनाल (48 केंद्र), कुरुक्षेत्र (37 केंद्र), पानीपत (19 केंद्र), यमुनानगर (23 केंद्र) और पंचकूला (43 केंद्र) में बनाए गए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी आठ जिलों के उपायुक्तों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात करने तथा स्ट्रांग रूम और परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय पर एंबुलेंस रखने को कहा गया है। IAS और HCS अधिकारी करेंगे निगरानी प्रत्येक जिले में स्ट्रांग रूम प्रबंधन, प्रश्न पत्र वितरण तथा परीक्षा के बाद सामग्री को हरियाणा लोक सेवा आयोग पंचकूला भेजने की निगरानी के लिए आइएएस और एचसीएस कैडर के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की बात कही गई है। पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को 24 अप्रैल से स्ट्रांग रूम पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने, होटलों, कोचिंग संस्थानों और फोटो स्टेट की दुकानों की जांच करने तथा परीक्षा ड्यूटी में लगे निजी एजेंसियों के कर्मचारियों का सत्यापन करने के सख्त निर्देश दिए हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की की गई व्यवस्था परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की कड़ी तलाशी, सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी और आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गई है। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने तीन मई रविवार को होने वाली नीट परीक्षा की तैयारियों की भी समीक्षा की और सभी उपायुक्तों को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा के लिए भी पुख्ता प्रबन्ध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अपूर्व कुमार सिंह, हरियाणा लोक सेवा आयोग के सचिव एमके आहूजा, उप सचिव सतीश कुमार शामिल हुए।

यूपी की प्रशासनिक दक्षता को मिली मान्यता, मिशन कर्मयोगी में दूसरे स्थान पर रहा राज्य

प्रशासनिक दक्षता में यूपी को बड़ी उपलब्धि, मिशन कर्मयोगी में बड़े राज्यों में यूपी को दूसरा पुरस्कार केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों व यूटी के बीच असाधारण प्रदर्शन किया यूपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से तैयार हुआ कर्मयोगी कार्यबल नई दिल्ली/लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश को सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच असाधारण प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अलावा प्रदेश ने मिशन कर्मयोगी के तहत ‘साधना सप्ताह’ के दौरान 5 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले प्रदेशों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में दूसरा पुरस्कार हासिल किया है। नई दिल्ली में एक प्रतिष्ठित समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के इस शानदार प्रदर्शन के लिए एम. देवराज, प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) उत्तर प्रदेश को सम्मानित किया। यह उपलब्धि सशक्त, कुशल और भविष्य के लिए तैयार उत्तर प्रदेश के निर्माण में मिशन कर्मयोगी की ठोस भूमिका का प्रमाण है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विजन को भी दर्शाती है, जिसके तहत राज्य में नागरिक-केंद्रित, भविष्य के लिए तैयार और डिजिटली सशक्त ‘कर्मयोगी’ कार्यबल तैयार किया गया है। उत्तर प्रदेश को मिली इस सफलता के पैमाने भी ऐतिहासिक हैं। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 21.5 लाख से अधिक कर्मचारियों को जोड़ा गया। इसके साथ ही राज्य में रिकॉर्ड 1.25 करोड़ कोर्स पूरे किए गए, जो सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी योगी सरकार के खाते में जबरदस्त उपलब्धि दर्ज की गई। राज्य ने 10 लाख एआई दक्ष बैज और 16,000 कर्मयोगी उत्कर्ष बैज अर्जित किए, जो यूपी में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल को दर्शाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ने क्षमता निर्माण में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर फ्रंटलाइन कर्मचारियों (समूह सी एवं डी) तक,  शासन में हर स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की।