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पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से ज्यादा छापे

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से अधिक छापे योगी सरकार की सख्ती से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई सामान्य एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई सरकार की जनता से पैनिक बाइंग न करने की अपील 14 मार्च के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए कालाबाजारी पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। मुख्य सचिव स्तर से जारी निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रवर्तन कार्रवाई की गई, जिसके तहत 12 मार्च से अब तक 29,607 छापे और निरीक्षण किए गए। इस दौरान एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है। सरकार के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। राज्य के 12,888 पेट्रोल पंपों के माध्यम से लगातार उपभोक्ताओं को ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। 12 से 16 अप्रैल के बीच प्रतिदिन हजारों किलोलीटर पेट्रोल और डीजल की बिक्री दर्ज की गई, जबकि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 82,000 किलोलीटर पेट्रोल और 1.05 लाख किलोलीटर डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक भंडारण (पैनिक बाइंग) से बचें। एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई गई है। प्रदेश के 4,107 गैस वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुसार रिफिल सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों जैसे होटल, ढाबा, उद्योग और सामुदायिक रसोई को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध आवंटन किया जा रहा है। योगी सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार को भी तेजी दी है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध कराए जा सकें। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद विभिन्न विभागों से 117 से अधिक अनुमतियां जारी की जा चुकी हैं। 14 मार्च 2026 के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 16.09 लाख से अधिक हो गई है। सप्लाई व्यवस्था की निगरानी के लिए खाद्य आयुक्त कार्यालय में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, वहीं जिलों में भी नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड में जाकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर आपूर्ति बाधित न हो।

हरियाणा में HCS परीक्षा का बड़ा आयोजन: 337 सेंटर, 93 हजार से ज्यादा उम्मीदवार शामिल

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने 26 अप्रैल को होने वाली हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की प्रारंभिक परीक्षा 2025 के लिए तैयारियों की समीक्षा की। यह परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जाएगी। पहला सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक (सामान्य अध्ययन) तथा दूसरा सत्र दोपहर बाद तीन बजे से शाम पांच बजे तक (सीसैट) होगा। इस परीक्षा के लिए कुल 93 हजार 696 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं, जो राज्य के आठ जिलों में बनाए गए 337 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्र अंबाला (31 केंद्र), फरीदाबाद (80 केंद्र), गुरुग्राम (56 केंद्र), करनाल (48 केंद्र), कुरुक्षेत्र (37 केंद्र), पानीपत (19 केंद्र), यमुनानगर (23 केंद्र) और पंचकूला (43 केंद्र) में बनाए गए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी आठ जिलों के उपायुक्तों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात करने तथा स्ट्रांग रूम और परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, किसी भी चिकित्सा आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय पर एंबुलेंस रखने को कहा गया है। IAS और HCS अधिकारी करेंगे निगरानी प्रत्येक जिले में स्ट्रांग रूम प्रबंधन, प्रश्न पत्र वितरण तथा परीक्षा के बाद सामग्री को हरियाणा लोक सेवा आयोग पंचकूला भेजने की निगरानी के लिए आइएएस और एचसीएस कैडर के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की बात कही गई है। पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को 24 अप्रैल से स्ट्रांग रूम पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने, होटलों, कोचिंग संस्थानों और फोटो स्टेट की दुकानों की जांच करने तथा परीक्षा ड्यूटी में लगे निजी एजेंसियों के कर्मचारियों का सत्यापन करने के सख्त निर्देश दिए हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की की गई व्यवस्था परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की कड़ी तलाशी, सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी और आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गई है। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने तीन मई रविवार को होने वाली नीट परीक्षा की तैयारियों की भी समीक्षा की और सभी उपायुक्तों को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा के लिए भी पुख्ता प्रबन्ध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अपूर्व कुमार सिंह, हरियाणा लोक सेवा आयोग के सचिव एमके आहूजा, उप सचिव सतीश कुमार शामिल हुए।

यूपी की प्रशासनिक दक्षता को मिली मान्यता, मिशन कर्मयोगी में दूसरे स्थान पर रहा राज्य

प्रशासनिक दक्षता में यूपी को बड़ी उपलब्धि, मिशन कर्मयोगी में बड़े राज्यों में यूपी को दूसरा पुरस्कार केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों व यूटी के बीच असाधारण प्रदर्शन किया यूपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से तैयार हुआ कर्मयोगी कार्यबल नई दिल्ली/लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश को सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच असाधारण प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अलावा प्रदेश ने मिशन कर्मयोगी के तहत ‘साधना सप्ताह’ के दौरान 5 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले प्रदेशों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में दूसरा पुरस्कार हासिल किया है। नई दिल्ली में एक प्रतिष्ठित समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के इस शानदार प्रदर्शन के लिए एम. देवराज, प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) उत्तर प्रदेश को सम्मानित किया। यह उपलब्धि सशक्त, कुशल और भविष्य के लिए तैयार उत्तर प्रदेश के निर्माण में मिशन कर्मयोगी की ठोस भूमिका का प्रमाण है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विजन को भी दर्शाती है, जिसके तहत राज्य में नागरिक-केंद्रित, भविष्य के लिए तैयार और डिजिटली सशक्त ‘कर्मयोगी’ कार्यबल तैयार किया गया है। उत्तर प्रदेश को मिली इस सफलता के पैमाने भी ऐतिहासिक हैं। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 21.5 लाख से अधिक कर्मचारियों को जोड़ा गया। इसके साथ ही राज्य में रिकॉर्ड 1.25 करोड़ कोर्स पूरे किए गए, जो सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी योगी सरकार के खाते में जबरदस्त उपलब्धि दर्ज की गई। राज्य ने 10 लाख एआई दक्ष बैज और 16,000 कर्मयोगी उत्कर्ष बैज अर्जित किए, जो यूपी में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल को दर्शाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ने क्षमता निर्माण में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर फ्रंटलाइन कर्मचारियों (समूह सी एवं डी) तक,  शासन में हर स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की।

खेतों में आग से तबाही: पंजाब के चार गांवों में 400 एकड़ फसल जलकर खाक

अबोहर. मलोट के गांव कबरवाला में शुक्रवार सुबह खेतों में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि अबोहर के गांव जोधपुर तक चार गांवों में करीब 400 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। इस दौरान मलोट व अबोहर से पहुंची फायर ब्रिगेड के अलावा किसानों की ओर से कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया गया। जानकारी के अनुसार आग मलोट के गांव कबरवाला में सुबह 11 खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को आग लग गई, जोकि तेज हवा के कारण पक्की टिब्बी और गुरपुसर से फैलते हुए बललूआना क्षेत्र के गांव जोधपुर तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया और किसानों की साल भर की मेहनत मिनटों में राख हो गई। सूचना मिलने पर मलोट और अबोहर से फायर ब्रिगेड की लगभग 4 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया। इसके साथ ही किसानों ने भी हिम्मत दिखाते हुए ट्रैक्टरों से मिट्टी डालकर और खेत जोतकर आग के फैलाव को रोकने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी राजकुमार व किसानों ने बताया कि आग लगने के कारणों का तो पता नहीं चला है, लेकिन अनुमान है कि इस आग से करीब 400 एकड़ के करीब गेहूं की फसल राख हो गई है। उन्होंने बताया कि इनमें कई छोटे किसान भी शामिल है जिनकी पांच से 10 एकड़ तक फसल राख हो गई, व जबकि कई लोगों ने ठेके पर जमीन लेकर भी बिजाई कर रखी थी। इस दौरान सरपंच सतनाम सिंह जोधपुर, साहिब सिंह नंबरदार, सुरजीत सिंह, हरि कृष्ण सिंह, प्रीतम सिंह, दर्शन सिंह और बूटा सिंह ने कहा कि आग के कारण उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है। इसलिए सरकार और प्रशासन से मांग की गई है कि हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने कहा कि अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो आग गांव मलूकपुरा में फैल सकती थी। इसके अलावा गांव राजपुरा में सरकंडी को आग लगने से आग घरों तक फैलने का खतरा पैदा हो गया, जिस पर समय रहते काबू पा लिया गया।

सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में नकल पर पूरी तरह लगेगा ब्रेक, 4 पालियों में होगी परीक्षा

सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में नकल पर पूरी तरह लगेगा ब्रेक, 4 पालियों में होगी परीक्षा 18 व 19 अप्रैल को 4 पालियों में होगी परीक्षा शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने 53 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की समीक्षा की CCTV कैमरों से लैस रहेंगे परीक्षा केंद्र आयोग की अपील- परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचे अभ्यर्थी लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार नकल विहीन एवं पारदर्शी परीक्षा कराने के अपने संकल्प को लेकर प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में 18 और 19 अप्रैल 2026 को चार पालियों में सम्पन्न होने वाली सहायक आचार्य भर्ती की परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली है।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार (पूर्व आईपीएस) ने प्रदेश के 6 प्रमुख जनपद आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर के 53 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान पाया गया कि सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया गया है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी परीक्षा कक्षों और महत्वपूर्ण स्थानों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है, जिन्हें जिला कंट्रोल रूम और आयोग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया है। आयोग स्तर से इनकी कनेक्टिविटी का परीक्षण भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है, जिससे हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। हर जिले में आयोग के एक-एक सदस्य को प्रेक्षक के रूप में तैनात किया गया है, जो मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इसमें गोरखपुर जिले में डा. कृष्ण चन्द्र वर्मा, प्रयागराज में डा. हरेन्द्र कुमार राय, वाराणसी में विमल कुमार विश्वकर्मा, आगरा में कीर्ति गौतम, मेरठ में प्रो. राधाकृष्ण एवं लखनऊ में योगेन्द्र नाथ सिंह प्रेक्षक नामित किया गया हैं।  साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करेंगी। केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। योगी सरकार के निर्देशों के तहत संदिग्ध और असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखी जाएगी। नकल कराने या परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन समेत किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से परीक्षा केंद्र पहुंचें और प्रवेश पत्र में दिए गए निर्देशों का पालन करें। साथ ही किसी भी अफवाह से बचते हुए केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.upessc.up.gov.in एवं 'X' हैण्डल @upesscprayagraj पर सूचनाओं के संबंध में पुष्टि कर लें। आयोग इस परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष तथा शुचितापूर्ण ढंग से कराने के लिए कृत संकल्पित है।

BSP क्वार्टर पर सख्ती: सरकारी अफसरों को हटाने के लिए मंत्रालय ने दिए निर्देश

भिलाई नगर. बीएसपी आवासों में, खासकर बड़े आवासों में केन्द्र और राज्य सरकार के बड़े अफसर लंबे समय से जमे हुए हैं। तत्संबंध में की गई शिकायतों को इस्पात मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी मैनेजमेंट से कहा है कि सरकारी अफसरों से आवास खाली कराने की कार्रवाई करें, कम्पनी आवास आवंटित करने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करें। ज्ञात हो कि सेक्टर 9, सेक्टर 10 सहित अन्य सेक्टरों के बीएसपी आवासों में केन्द्र और खासकर राज्य के सरकारी अफसर बड़ी संख्या में जमे हुए हैं। इनमें आईएएस और आईपीएस सहित अन्य अफसर शामिल हैं। सेक्टर 9 के बड़े आवास तो ज्यादातर सरकारी अफसरों के कब्जे में ही हैं। इनमें से कई अफसर वर्षों पूर्व रिटायर हो चुके हैं या कई का तबादला हो चुका है, बावजूद अपने रुतबे के बल पर आवासों में कब्जा जमाए में हुए हैं। बीएसपी आवासों सरकारी अफसरों के बड़ीसंख्या में कब्जा जमाये रखने की शिकायत केन्द्रीय इस्पात मंत्री, इस्पात सचिव पहुंची तक है। बीएसपी आफिस स एसोसिएशन ने तो बाकायदा उनके खिलाफ मुहिम ही छेड़ रखा है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी अफसरों ने बड़े आवासों में बड़ी संख्या में कब्जा जमा रखा है इसके चलते बीएसपी के अफसरों को बड़े आवास नहीं मिल रहे हैं। इस्पात मंत्रालय के दबाव के बाद बीएसपी मैनेजमेंट अब सरकारी अफसरों द्वारा कब्जा जमाकर रखे गए आवासों को खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है। मैनेजमेंट ऐसे अफसरों की सूची राज्य सरकार को भेजकर भी उनसे आवास खाली कराने का अनुरोध कर सकता है। असल में राज्य के कई बड़े अफसर बीएसपी के बड़े आवासों का इस्तेमाल फार्म हाउस की तरह कर रहे हैं। इन अफसरों के पास राजधानी में भी आवास आवंटित है और वे सप्ताहांत में बीएसपी आवासों में आकर मात्र एक दो दिनों के लिए आते हैं। यह आवास खाली होने पर बीएसपी के बड़े अफसरों को आवंटित किए जा सकेंगे। जरूरी मामलों को सेल बोर्ड में रखें इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी आवासों में सरकारी अफसरों के कब्जा जमाए रखने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। मंत्रालय की ओर से रिव्यू मीटिंग में राज्य और केन्द्र सरकार के अफसरों को कम्पनी आवास आवंटित करने की मौजदा प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करने कहा गया।

सीएम डॉ. मोहन का कांग्रेस पर कड़ा प्रहार: महिला सशक्तिकरण बिल न पास होने पर जनता को मिलेगा जवाब

भोपाल  लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है. इस पूरे घटनाक्रम पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे महिलाओं के अधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दे पर राजनीतिक विरोध अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस बीच, सरकार को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और मामला अब देश की जनता, खासकर महिला मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।  महिला आरक्षण बिल गिरने पर सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर हमला मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल के पारित न होने को लेकर कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कांग्रेस की “महिला विरोधी मानसिकता” एक बार फिर उजागर हो गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में गिरने देना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. डॉ. यादव ने अपने बयान में कहा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों और सम्मान के प्रति विपक्ष की असंवेदनशीलता को दिखाता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे विषय पर राजनीति करना उचित नहीं है।  इस मुद्दे पर राजनीति उचित नहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों व सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर इस तरह की राजनीति उचित नहीं है. उन्होंने लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब अवश्य देगी।  “जनता सब देख रही है” : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी. उनके अनुसार, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर किसी तरह की चालबाजी लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।  लोकसभा में गिरी महिला आरक्षण से जुड़ी संशोधन प्रक्रिया लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं दिला सकी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि मत विभाजन के दौरान बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. संविधान संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत पूरे न होने के कारण यह विधेयक विचार के स्तर पर ही गिर गया. अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन विधेयक के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में हासिल नहीं हो सका।  अन्य विधेयकों पर भी नहीं बढ़ी कार्यवाही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में बताया कि महिला आरक्षण से जुड़े बिल के गिरने के बाद दो अन्य विधेयकों पर भी आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी. विपक्ष के विरोध के बाद संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर मत विभाजन के जरिए मतदान कराया गया, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही।  अमित शाह का विपक्ष पर तीखा वार इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष, खासकर कांग्रेस और इंडिया महागठबंधन पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस ने जो प्रस्ताव रखा, वह एक सुनियोजित जाल है, जिससे महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू न होने दिया जाए।  अमित शाह ने कहा कि अगर विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में वोट नहीं देता है तो यह बिल गिर जाएगा, और देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता और इसके बावजूद इंडिया महागठबंधन तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मुस्लिम आरक्षण की मांग कर रहा है।  सियासी संग्राम तेज, महिलाओं की निगाहें संसद पर महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. जहां सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की साजिश बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर दोष मढ़ रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर महिला सशक्तिकरण को लेकर दलों के रुख और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब यह मुद्दा संसद से बाहर जनता, खासकर देश की महिलाओं के बीच अहम राजनीतिक बहस बनता जा रहा है। 

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों से हटे कब्जे, लैंड बैंक में वृद्धि

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों में हटे कब्जे और लैंड बैंक में निरंतर वृद्धि ग्राम सभा की जमीन से हटे ईदगाह, इमामबाड़ा, मस्जिद-मदरसा संभल  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अभियान को तेज करते हुए संभल जिला प्रशासन ने दो गांवों में बड़ी कार्रवाई की। आरक्षित श्रेणी की ग्राम सभा भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और कहीं भी तनाव की स्थिति नहीं बनने दी गई। बिछौली में आदेश के बाद हटे निर्माण तहसील संभल के ग्राम विछोली में गाटा संख्या 1240 (खाद के गड्ढे हेतु आरक्षित) और गाटा संख्या 1242 (पशुचर भूमि) पर अवैध रूप से इमामबाड़ा और ईदगाह का निर्माण किया गया था। प्रकरण में विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने 31 जनवरी 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया था। आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर अपील न होने पर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर निर्माण हटवा दिया। बिछौली और मुबारकपुर बन्द में  1.1 हैक्टेयर जमीन खाली इसी क्रम में ग्राम मुबारकपुर बन्द में ग्राम सभा की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत पर जांच कराई गई। गाटा संख्या 623 और 630 पर मस्जिद और मदरसे का निर्माण पाया गया। प्रशासन ने पहले संबंधित पक्षों को स्वयं निर्माण हटाने का अवसर दिया, लेकिन संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए मुतवल्ली नुसरत अली व अन्य लोगों ने प्रशासन से मदद मांगी। इसके बाद शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटवाया गया। ‘नियमों के तहत हुई कार्रवाई, अभियान रहेगा जारी’ जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने बताया कि पूरी कार्रवाई धारा 67,राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेश के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा, पशुचर, खेल मैदान, खाद के गड्ढे और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित पक्षों को पूरा अवसर दिया जाता है, इसके बाद ही कार्रवाई होती है। जिले में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और जहां भी अवैध कब्जा मिलेगा, उसे हटाया जाएगा। 3 महीने के टाइम बाउंड पीरियड में पूरी कार्रवाई और 30 दिन के अपील के समय को पूर्ण कर दिया जाता है।

PMGSY फेज-04 का शिलान्यास: एमसीबी जिले को 56 सड़कों की ऐतिहासिक सौगात, गांवों तक पहुंचेगी विकास की रफ्तार

PMGSY फेज-04 का शिलान्यास: एमसीबी जिले को 56 सड़कों की ऐतिहासिक सौगात, गांवों तक पहुंचेगी विकास की रफ्तार मनेन्द्रगढ़/एमसीबी ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया, जब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) 2025-26 के तहत सड़कों के निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं भूमि पूजन किया गया। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय (SAGES) ऑडिटोरियम, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में विकास कार्यों की औपचारिक शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहीं। 2,225 करोड़ की लागत से 774 सड़कों को मंजूरी राज्यभर में कुल 774 सड़कों को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लंबाई 2,426.875 किलोमीटर है। इन परियोजनाओं के लिए 2,225.44 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में आवागमन सुगम होगा और विकास को नई दिशा मिलेगी। एमसीबी जिले को 56 सड़कों का बड़ा तोहफा मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के लिए यह योजना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। जिले में 56 सड़कों के निर्माण को मंजूरी मिली है, जिन पर 23,667.83 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इनकी कुल लंबाई 264.63 किलोमीटर होगी, जिससे सुदूर गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। विकासखंडवार सड़कों का विवरण भरतपुर: 1 सड़क (2.00 किमी) – 180 लाख रुपये मनेन्द्रगढ़: 32 सड़कें (144.57 किमी) – 13,013.88 लाख रुपये खड़गवां: 23 सड़कें (118.06 किमी) – 10,473.95 लाख रुपये गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल नई सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी। साथ ही किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री का संदेश: “सड़क ही गांवों के विकास की रीढ़” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देश के दूरदराज गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “भारत गांवों का देश है और विकास की असली नींव गांवों में ही है। बिना सड़क के विकास की कल्पना अधूरी है।” साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योजना को नई गति मिलने की बात भी कही।

सम्राट चौधरी ने अपनाई योगी की राह, पहले बुलडोजर फिर टोपी, बिहार CM का बड़ा बयान

पटना बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक बार फिर अपने तेवरों को लेकर चर्चा में हैं. वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चल पड़े हैं. पहले उन्होंने प्रदेश में योगी मॉडल की तरह ही बुलडोजर एक्शन शुरू किया था. उसके बाद अब टोपी पहनने से इनकार कर दिया. दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी ने मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया. टोपी पहनाने वाले शख्स को तुरंत रोक दिया. वाक्ये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।  मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद एनडीए के कई नेता सम्राट चौधरी से मिलने पहुंच रहे हैं. हाल ही में जनता दरबार के दौरान कई लोग उनसे मिलने पहुंचे. सम्राट से मुलाकात के दौरान लोगों ने अलग-अलग तरीके से उनका स्वागत किया. किसी ने फूल-माला पहनाई तो किसी ने शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया. इसी बीच मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधि ने उन्हें टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने टोपी पहनने से इनकार करते हुए उसे हाथ में ले लिया और गमछा ओढ़कर सम्मान स्वीकार किया. बाद में उन्होंने टोपी पीछे खड़े गार्ड को दे दी. वीडियो में दिखता है कि व्यक्ति बार-बार टोपी पहनाने की कोशिश करता है, लेकिन सम्राट चौधरी ने उसे नहीं पहना. हालांकि, उन्होंने उसी व्यक्ति का गमछा स्वीकार किया।  टोपी न पहनने में छिपा क्या सियासी संदेश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के टोपी न पहनने पर कई कयास लगाए जा रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सम्राट की पॉलिटिक्स अक्सर हिंदुत्व और अपने लव-कुश (कुशवाहा) वोट बैंक को मजबूत करने पर केंद्रित रहती है. बीजेपी के कई बड़े नेता सार्वजनिक रूप से मुस्लिम टोपी पहनने से बचते दिखते हैं. इसे तुष्टिकरण की राजनीति के विरोध के रूप में देखा जाता है. मालूम हो कि, बीते दिनों नीतीश कुमार ने भी मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार किया था।  सीएम बनते ही एक्शन में सम्राट बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी एक्शन मोड में हैं. वह नीतीश कुमार की तरह ही जनता दरबार के जरिए लोगों से सीधे मुलाकात कर रहे हैं. उनकी समस्याएं भी सुन रहे हैं. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे और कई अहम फाइलों की समीक्षा की थी. उन्होंने प्रशासनिक कामकाज को गति देने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और मुख्य सचिव समेत सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली औपचारिक बैठक की थी।