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श्रेयस 3000 रन और ईशान 1000 रन के करीब, दूसरे वनडे में कई रिकॉर्ड दांव पर

लखनऊ भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला आज लखनऊ में खेला जाएगा। यह मैच दोपहर 1:30 बजे से इकाना इंटरनेशनल स्टेडियम में शुरू होगा। टीम इंडिया पहला मैच जीतकर 3 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे है और इस मैच को जीतकर सीरीज अपने नाम करना चाहेगी। श्रेयस 3 हजार रन पूरे करने से 11 रन दूर इस मैच में श्रेयस अय्यर अपने 3000 वनडे रन पूरे करने से 11 रन दूर हैं। वहीं रहमानुल्लाह गुरबाज को 2000 रन पूरे करने के लिए 10 रन और ईशान किशन को 1000 वनडे रन पूरे करने के लिए 33 रनों की जरूरत है। भारत-अफगानिस्तान में 5 वनडे, भारत 4 जीता भारत और अफगानिस्तान के बीच अब तक 5 वनडे मैच खेले गए हैं। भारत ने 4 मुकाबले जीते हैं, जबकि 1 मैच टाई रहा है। अफगानिस्तान अभी तक भारत के खिलाफ वनडे में जीत दर्ज नहीं कर सका है। दोनों टीमों के बीच पहला वनडे धर्मशाला में खेला गया था। इसमें भारत को 7 विकेट से जीत मिली थी। गिल ने पहले वनडे में नाबाद 84 रन बनाए जनवरी 2025 के बाद भारत के लिए बल्लेबाजी में रोहित शर्मा और गेंदबाजी में कुलदीप यादव का प्रदर्शन शानदार रहा है। रोहित ने 18 मैचों में 727 रन बनाए हैं, जिसमें 2 शतक और 4 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं, कुलदीप ने 14 मैचों में 22 विकेट झटके हैं। भारत के लिए डेब्यू मैच में गुरनूर बरार और हर्ष दुबे ने 3-3 विकेट लेकर प्रभावित किया। कप्तान शुभमन गिल (84*) और केएल राहुल (39*) अपनी शानदार फॉर्म को जारी रखना चाहेंगे। पिछले मैच में गुरबाज ने शतक लगाया था पिछले साल जनवरी के बाद अफगानिस्तान के लिए इब्राहिम जादरान टॉप स्कोरर हैं। उन्होंने 7 मैचों में 430 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 2 अर्धशतक शामिल हैं। हालांकि जादरान पहले वनडे में 1 रन ही बना सके थे। गेंदबाजी में अजमतुल्लाह उमरजई ने 7 मैचों में 14 विकेट चटकाए हैं। उमरजई को पहले मैच में एक भी विकेट नहीं मिला था। वहीं, टीम के ओपनर रहमानुल्लाह गुरबाज (102) ने शतक लगाया था। लखनऊ के मौसम और पिच का हाल धर्मशाला में हुए पहले वनडे मैच में बारिश ने खलल डाला था, जिसके कारण मैच को घटाकर 25-25 ओवर का करना पड़ा था। हालांकि, लखनऊ में बुधवार को बारिश की कोई संभावना नहीं है। आज यहां दोपहर के समय तापमान लगभग 39 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है, जो रात में गिरकर 33 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है। इकाना स्टेडियम की यह पिच मिक्स्ड-सॉइल (मिश्रित मिट्टी) की होगी, जहां टॉस का कोई खास फायदा नहीं मिलने वाला है। टीम इंडिया में बदलाव की संभावना भारतीय टीम के स्पिन-बॉलिंग कोच साईराज बहुतुले ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिए कि वे बैटिंग ऑर्डर में बदलाव करने के मूड में नहीं हैं। हालांकि, गेंदबाजी विभाग में जरूरत पड़ने पर रिस्टस्पिनर कुलदीप यादव को किसी एक तेज गेंदबाज की जगह प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जा सकता है। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव/हर्ष दुबे, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार। अफगानिस्तान: इब्राहिम जादरान, रहमानुल्लाह गुरबाज, सेदिकुल्लाह अटल, रहमत शाह, हश्मतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), अजमतुल्लाह उमरजई, मोहम्मद नबी, राशिद खान, मोहम्मद सलीम, अल्लाह गजनफर, जिया-उर-रहमान।

निलाक्षिका सिल्वा और कौशानी की दमदार साझेदारी, श्रीलंका ने आखिरी ओवर में जीता रोमांचक मुकाबला

साउथैम्पटन महिला टी20 विश्व कप 2026 में बड़ा उलटफेर हो गया है। डिफेंडिंग चैंपियन न्यूजीलैंड को श्रीलंका के हाथों हार झेलनी पड़ी है। न्यूजीलैंड ने अभी तक खेले दोनों मैचों में हार मिली है। इससे पहले दोनों टीमों के बीच महिला टी20 विश्व कप में 7 मैच हुए थे। सभी में न्यूजीलैंड को जीत मिली थी। पहले बैटिंग करते हुए न्यूजीलैंड ने 6 विकेट पर 150 रन बनाए। श्रीलंका ने आखिरी ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम को 5 विकेट से जीत मिली। न्यूजीलैंड की यह लगातार दूसरी हार है तो श्रीलंका का यह पहला ही मुकाबला था डेथ ओवर में न्यूजीलैंड की बैटिंग नहीं चली पहले बैटिंग करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत खराब रही। सलामी बल्लेबाज इसाबेला गेज पहले ही ओवर में आउट हो गईं। इसके बाद अमेलिया केर और जॉर्जिया प्लेमेर की जोड़ी क्रीज पर टिक गई। दोनों के बीच 49 रनों की साझेदारी हुई। जॉर्जिया 18 रन बनाकर आउट हुईं। कप्तान केर अर्धशतक लगाने से चूक गईं और 45 रन बनाकर वापस लौटीं। उन्होंने 36 गेंदों का सामना किया। इसके बाद न्यूजीलैंड की टीम खुलकर बैटिंग नहीं कर पाई। आखिरी 7 ओवरों में न्यूजीलैंड की टीम सिर्फ 52 रन ही बना सकी। सोफी डिवाइन 18वें ओवर की आखिरी गेंद पर 45 रन बनाकर आउट हुईं। आखिरी दो ओवर में न्यूजीलैंड को श्रीलंका ने एक भी बाउंड्री नहीं लगाने दिया। कविशा दिलहरी ने दो विकेट झटके। 55 रन पर श्रीलंका ने 4 विकेट को दिए थे श्रीलंका को कप्तान चमारी अटापट्टू ने अच्छी शुरुआत दिलाई। पावरप्ले के आखिरी ओवर में वह आउट हुईं तो टीम का स्कोर 45 रन था। 19 गेंदों पर उनके बल्ले से 27 रन निकले। 55 रन तक पहुंचने में श्रीलंका के 4 विकेट गिर गए। इसके बाद क्रीज पर उतरी निलाक्षिका सिल्वा ने एक छोर संभाल लिया। कविशा दिलहरी के साथ 5वें विकेट के लिए उन्होंने 39 गेंदों पर 49 रन जोड़े। 15वें ओवर की आखिरी गेंद पर कविशा 17 रन बनाकर रन आउट हुईं तो टीम का स्कोर 105 रन था। आखिरी 5 ओवर में जीत के लिए श्रीलंका को 45 रन चाहिए थे। नई बल्लेबाज कौशानी नुथ्यांगना के साथ निलाक्षिका ने लगातार स्ट्राइक रोटेट किए और मौका मिलने पर बाउंड्री लगाई। पहले तीन ओवर में 12 रन देने वाली अमेरिका केर के खिलाफ 18वें ओवर में दोनों ने 12 रन बटोर लिए। 19वें ओवर में निलाक्षिका सिल्वा 34 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी की। आखिरी ओवर में जीत के लिए 5 रन चाहिए थे। सोफी डिवाइन के खिलाफ चौखी गेंद पर चौका मारकर कौशानी ने टीम को जीत दिला दी। 14 गेंदों पर कौशानी ने 24 जबकि 37 गेंदों पर निलाक्षिका ने 54 रन बनाए। दोनों ने सिर्फ 28 गेंदों पर 45 रनों की साझेदारी की।  

FIFA World Cup: मेसी का ऐतिहासिक शो, 16वां वर्ल्ड कप गोल और हैट्रिक से अर्जेंटीना की शानदार जीत

कैनसस सिटी फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना ने अपने खिताब बचाने के अभियान की शुरुआत जीत के साथ की, लेकिन इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी एक बार फिर लियोनेल मेसी बने. 38 वर्षीय सुपरस्टार ने अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच और रिकॉर्ड छठे वर्ल्ड कप में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे फुटबॉल प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे।  कैनसस सिटी के GEHA फील्ड एट एरोहेड स्टेडियम में 69,045 दर्शकों के सामने मेसी ने शानदार हैट्रिक जमाकर अर्जेंटीना को अल्जीरिया पर 3-0 की जीत दिलाई. इसके साथ ही उन्होंने वर्ल्ड कप में अपने गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।  यह मेसी के वर्ल्ड कप करियर की पहली हैट्रिक भी रही. साथ ही वह टूर्नामेंट के इतिहास में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए. उन्होंने क्रिस्टियानो रोनाल्डो का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।  शुरुआत में अल्जीरिया ने दी कड़ी टक्कर मैच की शुरुआत अर्जेंटीना के लिए आसान नहीं रही. पांचवें मिनट में मेसी ने गेंद को नेट में पहुंचा दिया था, लेकिन बिल्ड-अप में ऑफसाइड होने के कारण गोल रद्द कर दिया गया. कुछ ही देर बाद अल्जीरिया ने भी जश्न मनाया, जब फार्स चाबी ने गोल किया, मगर VAR ने उसे भी ऑफसाइड करार दिया।  शुरुआती 15 मिनट तक अल्जीरिया ने विश्व चैम्पियन टीम को खुलकर चुनौती दी और गेंद पर अच्छा नियंत्रण बनाए रखा. लेकिन फिर मेसी ने अपनी क्लास दिखा दी।  20 साल बाद फिर 16 जून को मेसी का कमाल 17वें मिनट में रोड्रिगो डी पॉल ने शानदार थ्रू बॉल खेली. मेसी ने डिफेंडरों के दबाव के बावजूद गेंद को शानदार अंदाज में टॉप कॉर्नर में पहुंचा दिया. अल्जीरियाई गोलकीपर लुका जिदान के पास कोई जवाब नहीं था।  यह गोल कई मायनों में खास था. ठीक 20 साल पहले, 16 जून 2006 को मेसी ने सर्बिया और मोंटेनेग्रो के खिलाफ अपना पहला वर्ल्ड कप गोल किया था. अब उसी तारीख पर उन्होंने एक और ऐतिहासिक अध्याय लिख दिया।  इसके साथ ही मेसी पुरुष फुटबॉल में पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप में गोल करने वाले केवल दूसरे खिलाड़ी बने. उनसे पहले यह उपलब्धि सिर्फ क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम थी।  छठा वर्ल्ड कप खेलने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर इस मुकाबले ने मेसी को एक और ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचा दिया. वह वर्ल्ड कप इतिहास में छह संस्करण खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए. इसके अलावा वह दक्षिण अमेरिका के पहले पुरुष फुटबॉलर और दुनिया के केवल तीसरे पुरुष खिलाड़ी बने, जिन्होंने 200 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।  पहले गोल के बाद अर्जेंटीना ने मैच पर पकड़ मजबूत कर ली. हालांकि अल्जीरिया ने हार नहीं मानी और गेंद पर लगभग बराबर कब्जा बनाए रखा, लेकिन उसकी सात कोशिशों में एक भी शॉट टारगेट पर नहीं जा सका।  60वें मिनट में एलेक्सिस मैक एलिस्टर के शॉट को लुका जिदान पूरी तरह नहीं रोक पाए. गेंद उनके हाथों से छिटक गई और मेसी ने रिबाउंड पर गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया।  इसके बाद 76वें मिनट में निकोलस गोंजालेज ने ऊंचे क्षेत्र में गेंद छीनी और मेसी को पास दिया. अर्जेंटीना के कप्तान ने बिना कोई गलती किए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया और गेंद को नेट में पहुंचाकर अपनी पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक पूरी कर ली।  रिकॉर्ड्स की झड़ी इस हैट्रिक के साथ मेसी ने कई और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. – वर्ल्ड कप में अब उनके नाम 16 गोल और 8 असिस्ट यानी कुल 24 गोल योगदान हैं. – उन्होंने ब्राजील के महान खिलाड़ी पेले के 21 गोल योगदान के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. – लगातार पांच वर्ल्ड कप मैचों में गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए. – वर्ल्ड कप में पेनल्टी बॉक्स के बाहर से उनके गोलों की संख्या पांच हो गई, जो पिछले छह दशकों में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा है. – क्लब और देश के लिए उनके करियर का यह 911वां गोल योगदान रहा. अर्जेंटीना ने भी तोड़ा पुराना सिलसिला यह जीत सिर्फ मेसी के रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं रही. तीन बार की विश्व चैम्पियन अर्जेंटीना ने पहली बार बतौर डिफेंडिंग चैम्पियन अपना शुरुआती वर्ल्ड कप मैच जीता. इससे पहले 1982 और 1990 में खिताब जीतने के बाद उसे अपने पहले मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।  ग्रुप J में जीत के साथ अर्जेंटीना ने शानदार शुरुआत कर ली है. अब उसकी नजरें अगले मुकाबलों में ऑस्ट्रिया और जॉर्डन के खिलाफ जीत दर्ज कर नॉकआउट चरण की ओर बढ़ने पर होंगी. लेकिन फिलहाल पूरी दुनिया सिर्फ एक नाम की चर्चा कर रही है- लियोनेल मेसी. जिन्होंने 38 साल की उम्र में भी साबित कर दिया कि महान खिलाड़ी उम्र से नहीं, अपने जादू से पहचाने जाते हैं। 

एक दिन, तीन बड़े मैच! अफगानिस्तान से भिड़ेगी टीम इंडिया, महिला विश्व कप का भी होगा रोमांच

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए 17 जून बेहद व्यस्त और रोमांच से भरपूर रहने वाला है। खास बात यह है कि टीम इंडिया की तीन अलग-अलग टीमें एक ही दिन अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलती नजर आएंगी। सुबह श्रीलंका में भारत A की चुनौती होगी, दोपहर में सीनियर पुरुष टीम अफगानिस्तान से भिड़ेगी और शाम होते-होते महिला टीम टी20 विश्व कप में जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को पूरे दिन टीवी स्क्रीन से नजरें हटाने का मौका शायद ही मिले। भारत A के लिए ‘करो या मरो’ का मुकाबला सबसे पहले एक्शन की शुरुआत श्रीलंका से होगी, जहां तिलक वर्मा की कप्तानी में भारत A टीम त्रिकोणीय सीरीज (Team India) खेल रही है। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की थी, लेकिन इसके बाद अफगानिस्तान A से हार और श्रीलंका A के खिलाफ सुपर ओवर में मिली शिकस्त ने फाइनल की राह मुश्किल बना दी है। अब भारत A के सामने अफगानिस्तान A के खिलाफ जीत दर्ज करना बेहद जरूरी हो गया है। यह मुकाबला दांबुला के रंगीरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा और भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे शुरू होगा। इस मैच का परिणाम तय करेगा कि भारत A फाइनल की दौड़ में बना रहेगा या नहीं। शुभमन गिल की अगुआई में सीरीज जीतने का मौका इसके बाद नजरें लखनऊ के इकाना स्टेडियम पर टिकेंगी, जहां भारत और अफगानिस्तान की सीनियर टीमें तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में आमने-सामने होंगी। पहले वनडे में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त हासिल की थी और अब शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम की कोशिश होगी कि दूसरा मुकाबला जीतकर सीरीज अपने नाम कर ली जाए। यह मुकाबला दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा। चूंकि यह 50 ओवर का मैच है, इसलिए क्रिकेट प्रेमियों को देर शाम तक रोमांच देखने को मिलेगा। महिला विश्व कप में नीदरलैंड्स से होगी भिड़ंत दिन का तीसरा मुकाबला आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में खेला जाएगा। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने अपने पहले मुकाबले में पाकिस्तान को हराकर शानदार शुरुआत की थी। अब अगली चुनौती नीदरलैंड्स की है। इंग्लैंड के हेडिंग्ले मैदान पर होने वाला यह मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा। भारत की कोशिश लगातार दूसरी जीत दर्ज कर सेमीफाइनल की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने की होगी। दिलचस्प बात यह है कि शाम के समय कुछ घंटों के लिए भारतीय पुरुष और महिला टीमों (Team India) के मुकाबले एक साथ चलते दिखाई देंगे। जहां एक ओर सीनियर पुरुष टीम वनडे मैच के अंतिम चरण में होगी, वहीं दूसरी ओर महिला टीम टी20 विश्व कप में अपनी चुनौती पेश कर रही होगी। ऐसे में क्रिकेट फैंस को चैनल बदलने की कड़ी परीक्षा भी देनी पड़ सकती है। 17 जून का पूरा मैच शेड्यूल मुकाबला                                                       टूर्नामेंट                             स्थान                    भारतीय समय भारत A बनाम अफगानिस्तान A           श्रीलंका त्रिकोणीय सीरीज                दांबुला, श्रीलंका           सुबह 10:00 बजे भारत बनाम अफगानिस्तान (दूसरा वनडे)     अफगानिस्तान का भारत दौरा     लखनऊ                      दोपहर 1:30 बजे भारत महिला बनाम नीदरलैंड्स महिला     ICC महिला टी20 विश्व कप 2026     हेडिंग्ले, इंग्लैंड            शाम 7:00 बजे सुबह की शुरुआत युवा खिलाड़ियों के संघर्ष से होगी, दोपहर में सीनियर टीम सीरीज जीतने उतरेगी और रात में महिला टीम विश्व कप अभियान को मजबूती देने की कोशिश करेगी। एक ही दिन तीन भारतीय टीमों का मैदान पर उतरना बेहद दुर्लभ अवसर होता है। ऐसे में 17 जून भारतीय क्रिकेट कैलेंडर के सबसे व्यस्त और रोमांचक दिनों में से एक साबित हो सकता है।  

दूसरे वनडे में कुलदीप-यशस्वी की एंट्री संभव, प्लेइंग इलेवन में बदलाव की तैयारी

नई दिल्ली अफगानिस्तान के खिलाफ जारी वनडे सीरीज में भारत ने धर्मशाला में बारिश से प्रभावित मैच में आसान जीत दर्ज करके तीन मैचों की श्रृंखला में 1-0 से बढ़त बना रखी है। दूसरे मैच में जीत हासिल करने पर उसे अजेय बढ़त मिल जाएगी। हालांकि भारतीय टीम इससे कहीं आगे की सोच रही है। विश्व कप पहले से पहले लगभग दो दर्जन मैच खेलने हैं और टीम प्रबंधन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह विभिन्न संयोजनों को आजमाएगा। अफगानिस्तान के खिलाफ मौजूदा श्रृंखला इस दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। शुभमन गिल ने मैच से पहले दिया बयान भारतीय टीम प्रबंधन अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संयोजनों को आजमाना चाहता है। इस लिहाज से दूसरा वनडे अहम होने वाला है। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने धर्मशाला वनडे से पहले कहा, 'हमारा सारा ध्यान अलग-अलग संयोजन आजमाने और यह देखने पर है कि हमारे लिए वास्तव में क्या कारगर साबित होगा। इस खिलाड़ी की हो सकती है एंट्री अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे मैच में कुलदीप यादव और यशस्वी जायसवाल को खेलने का मौका मिल सकता है। कुलदीप की हाल की फॉर्म अच्छी नहीं रही है लेकिन उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें मौका दिया जा सकता है क्योंकि वह बीच के ओवरों में खेल पर नियंत्रण बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके आने से हर्ष दुबे को अपनी जगह गंवानी पड़ सकती है। इसके साथ ही यशस्वी जायसवाल को भी मौका मिलने की संभावना है। उनके आने से ईशान किशन को बाहर होना पड़ेगा। प्रिंस यादव को करना होगा इंतजार तेज गेंदबाजी विभाग में पदार्पण करने वाले गुरनूर बराड़ ने प्रभावित किया और उन्हें संभवतः एक और मैच खेलने का मौका दिया जाएगा। पहले वनडे में उन्होंने 27 रन देकर 3 विकेट हासिल किए थे। आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रिंस यादव को ऐसे में अपनी बारी के लिए इंतजार करना होगा। जहां तक अफगानिस्तान का सवाल है तो उसके बल्लेबाजों को सामूहिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करना होगा। पहले वनडे में सलामी बल्लेबाज रहमानुल्लाह गुरबाज ने आक्रामक शतक लगाया लेकिन उन्हें दूसरे छोर से खास सहयोग नहीं मिला। टीम इस प्रकार हैं: भारत: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, कुलदीप यादव, नितीश कुमार रेड्डी, प्रसिद्ध कृष्णा, श्रेयस अय्यर, रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे, इशान किशन, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव। अफगानिस्तान: हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), सेदिकुल्लाह अटल, रहमानुल्लाह गुरबाज़ (विकेटकीपर), इकराम अलिखिल (विकेटकीपर), अजमतुल्लाह उमरजई, बिलाल सामी, नांगेयालिया खरोती, फरीद अहमद मलिक, एएम ग़ज़नफ़र, मोहम्मद नबी, राशिद खान, दरविश रसूली, इब्राहिम जादरान, जिया उर रहमान शरीफी।

चोट से उबरकर नीरज चोपड़ा लौटेंगे मैदान में, दोहा डायमंड लीग से करेंगे सीजन की शुरुआत

नई दिल्ली  चोट से उबरने के बाद बाद भारत के भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा 19 जून को दोहा डायमंड लीग से इस सीजन में वापसी करेंगे। सोमवार को नीरज की इस घोषणा से उनके इस सीजन के प्रतियोगी कैलेंडर में लौटने को लेकर हफ्तों से चल रही अटकलों को विराम मिल गया है। दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता 28 वर्षीय नीरज पीठ की चोट से उबर रहे थे। जिसके कारण वह इस साल अब तक किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाए थे। अब उनकी मैनेजमेंट फर्म वेल स्पोर्ट्स ने इंस्टाग्राम पर घोषणा की कि 2026 का पहला थ्रो दोहा में। इससे यह तय हो गया है कि नीरज तीन दिन बाद प्रतियोगी एक्शन में होंगे। चोपड़ा को इस इवेंट में देर से शामिल किया गया है, क्योंकि 12 जून को आयोजकों द्वारा घोषित सूची में उनका नाम नहीं था। वह सीजन की तैयारी के लिए स्विट्जरलैंड के ओलिंपिक सेंटर में ट्रेनिंग कर रहे हैं। लेकिन अब चोपड़ा ने भी इंस्टाग्राम पर लिखा है कि दोहा में मिलते हैं। वहीं पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम का नाम इस प्रतियोगिता की नवीनतम सूची में नहीं है, जबकि 12 जून को उनके इसमें भाग लेने की घोषणा की गई थी। ऐसे में चोपड़ा का सीधा मुकाबला श्रीलंका के स्टार खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे से होगा। पथिरागे हाल ही में चार जून को डायमंड लीग के रोम चरण में 92.62 मीटर के शानदार थ्रो के साथ सीजन के बेस्ट थ्रोअर बने हैं। इसके अलावा, त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशोरन वालकाट और ग्रेनाडा के दो बार के वर्ल्ड चैंपियन एंडरसन पीटर्स से भी नीरज को हमेशा की तरह कड़ी चुनौती मिलेगी। नौ खिलाड़ियों वाले इस इवेंट में अन्य खिलाड़ियों में अमेरिका के विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता कर्टिस थांपसन, केन्या के जूलियस येगो, चेक गणराज्य के जैकब वाडलेच, मिस्र के मोहम्मद हुसैन अहमद सामेह और आर्तुर फेल्फनर शामिल हैं।

पेरिस ओलिंपिक में अनजाने में गोल्ड जीतने वाली मार्गरेट एबॉट की हैरान करने वाली कहानी

 नई दिल्‍ली  खेल जगत में कई विचित्र घटनाएं देखने को मिलती हैं, पर ऐसा भी हुआ है जब कोई महिला दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर गोल्‍ड मेडल जीतती है, लेकिन उसे जीवन भर अपनी इस उपलब्धि के बारे में पता ही न चले? यह अद्भुत कहानी है गोल्फ खिलाड़ी मार्गरेट एबॉट की। 15 जून 1878 को जन्मीं एबॉट दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक चैंपियन तो बनीं, लेकिन अपनी ही जीत के जश्न से हमेशा अनजान रहीं। भारत की मिट्टी से जुड़ी इस गुमनाम चैंपियन की कहानी दिलचस्प है। इसने महिलाओं के लिए खेलों के दरवाजे खोले। मार्गरेट एबॉट     जन्म: 15 जून 1878     मृत्यु: 10 जून 1955 कोलकाता से शुरू हुआ सफर मार्गरेट एबॉट का जन्म भारत के कोलकाता (कलकत्ता) में हुआ था। उनके पिता चार्ल्स पैटरसन एबॉट एक अमेरिकी व्यापारी थे। वह ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में बिजनेस करते थे। पिता के निधन के बाद उनका परिवार वापस अमेरिका लौट गया और शिकागो में बस गया। यहीं पर उनकी मां मैरी ने एक संपादक के रूप में अपनी नई शुरुआत की। शिकागो के इसी माहौल में मार्गरेट ने पहली बार गोल्फ खेलना शुरू किया। अखबार में देखा विज्ञापन 1890 के दशक के अंतिम वर्षों में कला की बारीकियां सीखने के लिए मार्गरेट अपनी मां के साथ पेरिस आ गईं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने गोल्फ खेलना जारी रखा। एक दिन उन्होंने पेरिस के अखबार में 4 अक्टूबर 1900 को होने वाले एक गोल्फ टूर्नामेंट का विज्ञापन देखा। यह प्रतियोगिता पेरिस से कुछ मील दूर स्थित कॉम्पिएन गोल्फ क्लब में होने वाली थी। गोल्फ के शौक के चलते मार्गरेट और उनकी मां मैरी दोनों ने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया। अनजाने में रचा ओलिंपिक का इतिहास 1900 का पेरिस ओलिंपिक आज के भव्य ओलिंपिक खेलों जैसा बिल्कुल नहीं था। इसे पेरिस में चल रहे 'विश्व मेले' के एक हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। इस आयोजन में इतनी अव्यवस्था थी कि अधिकांश खिलाड़ियों को यह मालूम ही नहीं था कि वे ओलिंपिक का हिस्सा बन रहे हैं। मार्गरेट भी इन्हीं खिलाड़ियों में से एक थीं। उन्होंने अपने शानदार खेल के दम पर पहला स्थान हासिल किया वहीं उनकी मां सातवें नंबर पर रहीं। इस तरह वह अनजाने में ही अमेरिका और दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट बन गईं। 70 साल बाद खुला दुनिया की पहली चैंपियन का राज     मार्गरेट ने अपनी पूरी जिंदगी यही सोचकर गुजार दी कि उन्होंने पेरिस में सिर्फ एक सामान्य गोल्फ टूर्नामेंट जीता था।     1955 में उनका निधन हो गया और उनके चैंपियन बनने का रहस्य लगभग 70 सालों तक दफन रहा।     बाद में अमेरिकी ओलिंपिक बोर्ड की अधिकारी पाउला वेल्च की नजर न्यूयॉर्क के ओलिंपिक मुख्यालय में लगी एबॉट की एक पुरानी तस्वीर पर पड़ी।     पाउला ने गहरी छानबीन की, पुराने दस्तावेज खंगाले और तब जाकर यह सच्चाई दुनिया के सामने आई कि वह ओलिंपिक चैंपियन थीं।     1984 में उनके बेटे फिलिप एबॉट ने अपनी मां की इस उपलब्धि पर एक लेख लिखकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।     ऐसे दौर में जब महिलाओं का खेलों में आना वर्जित माना जाता था, मार्गरेट एबॉट की यह अनजानी सफलता आज भी खेल जगत के लिए एक अनमोल प्रेरणा है।  

World Cup 2026 में इतिहास दोहराया गया, 68 साल बाद एक दिन के सभी मैच बेनतीजा रहे

लॉस एंजिल्स  फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन का आखिरी मैच ईरान और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया. लॉस एंजिल्स स्टेडियम में ग्रुप G का ये रोमांचक मैच 2-2 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ. जिससे दोनों टीमों को एक-एक अंक शेयर करना पड़ा।  यह मैच न केवल मैदान पर रोमांचक खेल के लिए यादगार रहेगा, बल्कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन खेले जाने वाले आखिरी मैच के तौर रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज करा दिया, क्योंकि वो दिन का चौथा ड्रा मैच था. जिसके साथ टूर्नामेंट के इतिहास में एक दिन में चार मैच ड्रॉ होने का अनोखा रिकॉर्ड बन गया।  ऐसा फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में केवल दूसरा बार हुआ है. इससे पहले ऐसी घटना 68 साल पहले 1958 में स्वीडन में हुए टूर्नामेंट में देखने को मिला था. जब 15 जून के दिन खेले गए चार मैच ड्रॉ पर समाप्त हुए थे. उन मैच का नतीजा नीचे देख सकते हैं।  फीफा वर्ल्ड कप 1958 (15 जून)     स्वीडन बनाम वेल्स (0-0)     इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया (2-2)     पराग्वे बनाम यूगोस्लाविया (3-3)     वेस्ट जर्मनी बनाम नॉर्दर्न आयरलैंड (2-2) 68 साल बाद फिर हुआ ऐसा अब 68 साल बाद दूसरी बार ऐसा हुआ है जब फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन यानी कि 15 जून को खेले गए वर्ल्ड कप के चार मुकाबले बिना किसी विजेता के समाप्त हुए. दिन के पहले मैच में केप वर्डे ने स्पेन को बिना किसी गोल के ड्रॉ पर रोका. बेल्जियम और मिस्र का मैच 1-1 से ड्रॉ रहा, जबकि सऊदी अरब और उरुग्वे के बीच भी मुकाबला 1-1 से ड्रॉ रहा और दोनों ने अंक बांटे. दिन के आखिरी मैच में ईरान और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा।  फीफा वर्ल्ड कप 2026 (15 जून)     केप वर्डे बनाम स्पेन (0-0)     बेल्जियम बनाम मिस्र (1-1)     सऊदी अरब बनाम उरुग्वे (1-1)     ईरान बनाम न्यूजीलैंड (2-2)

48 टीमों के वर्ल्ड कप में भी भारत बाहर! जानिए भारतीय फुटबॉल आखिर कहां पिछड़ गया

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा और मेक्सिको की सह-मेजबानी में खेला जा रहा है. दुनिया के 48 देश फुटबॉल के इस महाकुंभ में शिरकत कर रहे हैं, मगर अपना भारत वर्ल्ड कप से एक बार फिर गायब है. जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, तो भारत के करोड़ों प्रशंसक उस जुनून से इस टूर्नामेंट को देखते हैं, मानो उनका देश भी इसमें भाग ले रहा हो. सोशल मीडिया पर बहस होती है, घरों में पसंदीदा टीमों के लिए जश्न मनाया जाता है और पूरा देश फुटबॉल के रंग में रंग जाता है. कोई लियोनेल मेसी की टीम को चीयर करता नजर आता है, तो कोई रोनाल्डो के देश पुर्तगाल का समर्थक होता है. लेकिन इस उत्साह के बीच एक सवाल हर बार सामने आ खड़ा होता है- आखिर सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? यह सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि भारत का फुटबॉल से रिश्ता नया नहीं है. देश में लाखों बच्चे फुटबॉल खेलते हैं, करोड़ों लोग इसे देखते हैं और कई राज्यों में यह खेल क्रिकेट जितना ही लोकप्रिय है. इसके बावजूद भारतीय टीम आज तक विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच तक नहीं पहुंच सकी. फीफा के सदस्य देशों की संख्या 211 है, जिसमें भारत भी शामिल है. आपको जानकर ये दुख होगा कि भारत फिलहाल फीफा रैंकिंग में 138वें स्थान पर हैं. केप वर्डे और कुराकाओ जैसे छोटे देश भी फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं. भारत फीफा वर्ल्ड कप तो कभी खेल नहीं पाया, एशिया में भी उसकी स्थिति अच्छी नहीं हैं. भारतीय टीम अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जो किसी शर्मिंदगी से कम नहीं है. वैसे भारत फीफा वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब 1950 में पहुंचा था. ब्राजील में आयोजित उस वर्ल्ड कप के लिए भारत ने बिना कोई क्वालफाइंग मैच खेले ही क्वालिफाई कर लिया था. एशियाई क्वालिफाइंग ग्रुप की टीमें- बर्मा (अब म्यांमार), इंडोनेशिया और फिलीपींस प्रतियोगिता से हट गई थीं, जिससे भारत को तब डायरेक्ट एंट्री मिल गई. स्वीडन, इटली और पराग्वे जैसी टीमों के साथ भारत को ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम ब्राजील पहुंच ही नहीं सकी. लंबे समय तक यह कहानी सुनाई जाती रही कि फीफा ने भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं दी, इसलिए टीम ने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया. हालांकि पूरा सच यह नहीं था. असल वजह आर्थिक और प्रशासनिक थी. आजादी के बाद देश संसाधनों की कमी से जूझ रहा था. टीम को ब्राजील भेजने में काफी ज्यादा खर्च लगता और पर्याप्त तैयारी का समय भी नहीं था. साथ ही उस समय अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ओलंपिक को वर्ल्ड कप से ज्यादा महत्वपूर्ण मानता था. नतीजा यह हुआ कि भारत ने सबसे बड़ा मौका गंवा दिया. 1950 के बाद भारत ने कई बार फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में हिस्सा लिया, लेकिन कभी भी अंतिम स्टेज तक नहीं पहुंच सका. कई बार टीम ने उम्मीद जगाई, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में अनुभव और गुणवत्ता की कमी साफ नजर आई. बाइचुंग भूटिया, सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ियों ने 21वीं सदी में भारतीय फुटबॉल को नई पहचान दी. टीम ने एशियाई स्तर पर कुछ अच्छी जीतें भी दर्ज कीं, लेकिन जापान, साउथ कोरिया, ईरान, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से भारत अब भी काफी पीछे है. एक समय भारतीय टीम कम से कम एशिया में तो अपना दबदबा बनाने में जरूर सफल रही थी. 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स ने भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को 2-1 के अंतर से हराकर गोल्ड मेडल जीता था. चुन्नी गोस्वामी, पीके बनर्जी और तुलसीदास बलराम की तिकड़ी की वजह से ही भारतीय टीम ने ये ऐतिहासिक सफलता अर्जित की थी. फिर बैंकॉक में आयोजित 1970 के एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही. इसके बाद से जो भारतीय फुटबॉल में गिरावट आनी शुरू हुई, वो अब तक जारी है. क्या क्रिकेट जिम्मेदार है? भारत के फुटबॉल वर्ल्ड कप से दूर रहने की बड़ी वजह क्रिकेट को माना जाता है, लेकिन पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है. यह सच है कि क्रिकेट भारतीय स्पोर्ट्स पर लगभग एकाधिकार रखता है. पैसा, प्रायोजक, मीडिया कवरेज और लोकप्रियता- सब कुछ क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमता है. ऐसे में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी फुटबॉल की बजाय क्रिकेट चुन लेते हैं. लेकिन सिर्फ क्रिकेट को दोष देना भी गलत होगा. जापान, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया जैसे देशों में दूसरे खेल भी लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित की है. ऑस्ट्रेलिया तो क्रिकेट में भी हमेशा से एक मजबूत शक्ति रहा है. असली फर्क योजनाओं, निवेश और दीर्घकालिक सोच का है. भारतीय फुटबॉल लंबे समय से प्रशासनिक विवादों से भी जूझता रहा है. एआईएफएफ में नेतृत्व परिवर्तन, कानूनी विवाद और नीतिगत अस्थिरता के कारण कई योजनाएं अधूरी रह गईं. यहां तक इंडियन सुपर लीग (ISL) का 12वां सीजन किसी तरह इस बार आयोजित करवाया जा सका. आखिर कहां पिछड़ गया भारत? भारतीय फुटबॉल में सबसे बड़ी समस्या प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी है. दुनिया की सफल फुटबॉल टीमें खिलाड़ियों को 8-10 साल की उम्र से तैयार करना शुरू कर देती हैं. उनके पास मजबूत स्कूल लीग, स्थानीय टूर्नामेंट, हजारों कोच और आधुनिक एकेडमी होती हैं. बच्चे हर साल दर्जनों प्रतिस्पर्धी मैच खेलते हैं और धीरे-धीरे प्रोफेशनल लेवल तक पहुंचते हैं. भारत में यह ढांचा अभी भी कमजोर है. कई राज्यों में बच्चों को नियमित रूप से प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका तक नहीं मिलता. कोचिंग की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और सीमित सुविधाएं भी बड़ी बाधाएं हैं. बिना स्थिर और पेशेवर प्रशासन के किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना मुश्किल है. वैसे उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है. 2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई. इससे एशियाई देशों के लिए अधिक स्लॉट उपलब्ध हुए हैं. सैद्धांतिक रूप से भारत की संभावनाएं पहले से बेहतर हुई हैं, लेकिन सिर्फ अतिरिक्त स्थान मिल जाने से बात नहीं बनेगी. भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, हजारों नए कोच तैयार … Read more

दांबुला में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सुपर ओवर में भारत-ए की हार, फिर मैदान पर हुआ विवाद

दांबुला इंडिया-ए को ट्राई सीरीज में श्रीलंका-ए के हाथों सुपर ओवर में हार का सामना करना पड़ा. सोमवार (15 जून) को दांबुला के दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में हुए मुकाबले में श्रीलंका-ए ने सुपर ओवर में 16 रन बनाए थे. जवाब में इंडिया-ए 10 रन ही बना सका. इंडिया-ए की ओर से सुपर ओवर में सूर्यांश शेडगे और वैभव सूर्यवंशी बैटिंग करने उतरे थे, लेकिन दोनों मैच फिनिश नहीं कर पाए. श्रीलंका-ए की इंडिया-ए पर जीत के बाद मैदान पर बखेड़ा हो गया. श्रीलंका के खिलाड़ी जश्न मनाने लगे और यहीं से सब कुछ गड़बड़ होने लगा. वैभव सूर्यवंशी किसी बात से नाराज हो गए और उनका एक श्रीलंकाई फील्डर से झगड़ा हो जाता है. शेडगे अपने साथी 'बेबी बॉस' को वापस खींच लाते हैं, लेकिन 15 साल के वैभव मैदान छोड़ने के मूड में नहीं लगे. दोनों टीमें गर्मजोशी से हाथ मिलाती हैं और यहीं मैच खत्म हो जाता है. बता दें कि कुगाथास मथुलन ने श्रीलंका की ओर से सुपर ओवर में गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभाली थी. सुपर ओवर में पहली गेंद पर सूर्यांश शेडगे ने दो रन लिए. जबकि दूसरी बॉल डॉट रही. इसके बाद तीसरी गेंद पर एक रन बना. अब स्ट्राइक पर वैभव सूर्यवंशी थे. वैभव चौथी बॉल पर सिर्फ 2 रन बना सके और प्रेशर पूरी तरह इंडिया-ए पर आ गया. फिर पांचवीं गेंद पर उन्होंने चौका लगाया और आखिरी गेंद पर कोई रन नहीं बना. मुकाबले में इंडिया-ए ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 49.2 ओवरों में 265 रन बनाए थे. इंडिया-ए के लिए सूर्यांश शेडगे ने 72 और विप्रज निगम ने 51 रनों का योगदान दिया. वैभव सूर्यवंशी कुछ खास नहीं कर पाए और 21 रन बनाकर पवेलियन लौटे. श्रीलंका-ए की ओर से विजयकांत व्यासकांत और मोहम्मद शिराज ने तीन-तीन विकेट झटके. जवाब में श्रीलंका-ए ने निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट पर 265 रन बनाए और मुकाबला सुपर ओवर में चला गया. श्रीलंका की ओर से सदीरा समरविक्रमा ने शानदार 93 रन बनाए, लेकिन आखिरी ओवर में उनका आउट होना मेजबान टीम को मुश्किल में डाल गया. श्रीलंका की पारी का आखिरी ओवर अरशद खान ने फेंका, जिसमें उन्होंने केवल 4 रन खर्च किए.