samacharsecretary.com

कतर के LNG प्लांट में मौत का धमाका: 13 की दर्दनाक मौत, भारत-पाकिस्तान के नागरिक भी हादसे का शिकार

रास लाफान.  कतर में रास लाफान औद्योगिक शहर में भीषण विस्फोट में 13 लोगों की जान चली गई। कतर एनर्जी ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि देश के प्रमुख ऊर्जा केंद्र रास लाफान औद्योगिक शहर के बरजान क्षेत्र में रविवार देर रात हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई। कंपनी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि विस्फोट घरेलू गैस आपूर्ति संयंत्र को रखरखाव के बाद दोबारा चालू करने की प्रक्रिया के दौरान हुआ। अचानक हुए विस्फोट के बाद आग भड़क उठी, जिसे स्थानीय अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की टीमों ने तेजी से नियंत्रित कर लिया। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरने वालों में अधिकांश भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। कतर एनर्जी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस हादसे में कुल 66 लोग घायल हुए हैं। घायलों में कतर, भारत, पाकिस्तान, तंजानिया, गिनी, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या और नाइजीरिया के नागरिक शामिल हैं। कंपनी ने आश्वासन दिया कि सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और उनकी चोटें गंभीर नहीं हैं। किसी भी घायल की हालत चिंताजनक नहीं बताई गई है। बता दें कि रास लाफान कतर का सबसे बड़ा औद्योगिक और ऊर्जा हब है, जहां दुनिया के सबसे बड़े द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन संयंत्र और निर्यात सुविधाएं स्थित हैं। यह क्षेत्र कतर की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार है और वैश्विक LNG आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कतर एनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस विस्फोट से LNG उत्पादन, निर्यात कार्यों या रास लाफान बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ा है। संयंत्र और बंदरगाह दोनों पूरी क्षमता के साथ सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। कंपनी ने वैश्विक बाजार को पूरा आश्वासन दिया है कि गैस आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आएगा। कतर एनर्जी ने विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित कर दी है। विशेषज्ञ टीम घटनास्थल पर पहुंचकर सबूतों का जुटा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि फिर से चालू करने की प्रक्रिया के दौरान विस्फोट होने की बात सामने आई है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां आपको बता दें कि मार्च में ईरान की एक मिसाइल ने रास लाफान पर हमला किया था, जिसमें आग लग गई और भारी नुकसान हुआ। इसके बाद से ही कतर ने वहां उत्पादन रोक रखा था। बताया जा रहा है कि उसी को एक बार फिर से चालू करने की कोशिश की जा रही थी, जिस कारण यह हादसा हुआ। फिलहाल सभी घायलों का इलाज चल रहा है।

राफेल, S-400 और Su-30 बेसों को मिलेगा नया बूस्ट, बंगाल सरकार ने एयरबेस के लिए दी अतिरिक्त जमीन

कलकत्ता पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है।  यह जमीन दोनों एयरबेस के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होगी. यह कदम भारत की पूर्वी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत देगा, खासकर चीन की सीमा के करीब।  हसीमारा एयरबेस: राफेल और S-400 का गढ़ हसीमारा एयरबेस अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित है. यह भारतीय वायुसेना का बेहद महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है. यहां राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर भारत की लड़ाकू क्षमता को बहुत बढ़ाती है।  राफेल बेहद आधुनिक मल्टीरोल फाइटर है जो लंबी दूरी तक हमला कर सकता है. दुश्मन के रडार से बच सकता है. हवा से हवा, हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है. सूत्रों के अनुसार इस बेस पर S-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं. सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।  1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1963 में इस बेस को सक्रिय किया गया था. चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है. अतिरिक्त जमीन मिलने से यहां रनवे सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और सैनिकों की आवास व्यवस्था बेहतर होगी. कलाईकुंडा एयरबेस: ट्रेनिंग और ऑपरेशन का प्रमुख केंद्र पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक बड़ा फाइटर और ट्रेनिंग हब है. यहां Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं. यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी प्रसिद्ध है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ हुए कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां हो चुके हैं।  कलाईकुंडा की रनवे लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभाल सकती है. मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी. यह विकास गेम चेंजर साबित होगा क्योंकि शांति और युद्धकाल दोनों में यहां तैनाती बदलती रहती है।  राफेल और S-400 का संयोजन हसीमारा को दुश्मन के लिए बहुत खतरनाक बना देता है. S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. राफेल इस डिफेंस को आक्रामक ताकत देता है।  पूर्वी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इन बेसों का विस्तार जरूरी है. दोनों बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है।  पूर्वी कमान की तैयारियों में तेजी भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है. हसीमारा और कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है. यह विकास न सिर्फ चीन बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा।  पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जमीन आवंटन से रक्षा मंत्रालय और वायुसेना को तेजी से काम करने में आसानी होगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा क्योंकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में स्थानीय कंपनियां और मजदूर शामिल होंगे।  पूर्वी भारत की भौगोलिक स्थिति काफी संवेदनशील है. भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और चीन की सीमाएं यहां करीब हैं. इन बेसों का मजबूत होना न सिर्फ हवाई श्रेष्ठता बल्कि थल सेना और नौसेना के साथ समन्वय में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में एयरबेस सिर्फ विमान उड़ाने के स्थान नहीं रह गए हैं. ये कमांड सेंटर, ड्रोन बेस, लॉजिस्टिक हब और इंटेलिजेंस यूनिट का काम भी करते हैं. अतिरिक्त जमीन इन बहु-उद्देशीय क्षमताओं को विकसित करने में उपयोगी होगी।  पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हसीमारा और कलाईकुंडा एयरबेस के लिए जमीन आवंटित करना पूर्वी भारत की सुरक्षा दृष्टि से एक महत्वपूर्ण फैसला है. राफेल और S-400 जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों के साथ इन बेसों का विस्तार भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मजबूती देगा. आने वाले समय में इन बेसों की क्षमता बढ़ने से वायुसेना की तैयारियां और बेहतर होंगी तथा देश की समग्र रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई मिलेगी। 

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा भूचाल! कीर स्टार्मर का इस्तीफा, कहा- देश पहले, पद बाद में

लंदन  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्‍टार्मर ने अपनी लेबर पार्टी के कई सांसदों के महीनों से चले आ रहे दबाव के बाद अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। नए नेता का चुनाव होने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। अब लेबर पार्टी में एक बार फिर से नए नेता के चुनाव के लिए दौड़ शुरू हो गई है। कीर ने इस्‍तीफा देने के बाद दिए अपने भाषण में कहा कि उनके लिए देश पहले है। पिछले 1 दशक में 7वें नेता अब ब्रिटेन के पीएम बनेंगे। इससे पहले ऋषि सुनक ने अपने पद से इस्‍तीफा दिया था। कीर स्‍टार्मर जब इस्‍तीफा देने के लिए अपने आधिकारिक आवास 10 डाउनिंग स्‍ट्रीट से निकले तो लोगों ने उनका जोरदार स्‍वागत किया। उन्‍होंने पीएम बनने को अपने जीवन लिए सबसे गर्व का क्षण बताया था। कीर ने कहा कि वह करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने के लिए राजनीति में आए थे। उन्‍होंने लेबर पार्टी की साल 2024 की शानदार जीत को अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। कीर स्टार्मर ने क्या ऐलान किया? देश के नाम अपने संबोधन के आखिर में कीर स्टार्मर की आवाज भावुक होकर भर्रा गई. स्टारमर ने कहा, "अब मेरी पार्टी यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं. मैंने इस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं।  फिर कीर स्टार्मर ने कहा है कि वे सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे रहे हैं. स्टार्मर ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में नया लेबर नेता चुने जाने तक वे कार्यवाहक (केयरटेकर) प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रहेंगे।  ब्रिटेन के राजा को दी इस्‍तीफे की जानकारी कीर स्‍टार्मर ने प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के लीडर दोनों ही पद से इस्‍तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका पीएम पद का 2 साल का कार्यकाल खत्‍म हो गया है। उन्‍होंने कहा कि मैंने उन्‍होंने आज सुबह ही राजा से मुलाकात की है और उनको इस इस्‍तीफे के बारे में बताया है। उन्‍होंने कहा कि लेबर पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होगी और 9 जुलाई से नामांकन होने लगेगा। कीर स्‍टार्मर ने कहा कि जो कोई भी अगला पीएम बनेगा, उसे उनका पूरा समर्थन रहेगा। साथ ही वह एक सामान्‍य तरीके से सत्‍ता के हस्‍तातंरण में पूरी मदद करेंगे। कीर ने कहा कि मैंने जो कोई भी फैसला लिया, उसे देश को ध्‍यान में रखकर लिया जिसे मैं प्‍यार करता हूं। उन्‍होंने कहा कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था अब तेजी से विकास कर रही है और मजदूरी भी बढ़ी है। यह महंगाई से ज्‍यादा है। 17 जुलाई तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिलेगा स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी जुलाई के मध्य तक अपना नया नेता चुन लेगी। नए नेता और प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देंगे। स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने सोमवार सुबह ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III को अपने फैसले की जानकारी दे दी। अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव का कार्यक्रम तय करेगी। इसके तहत 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता का चुनाव पूरा करने की कोशिश की जाएगी। ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनती। लोग अपने-अपने क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी के पास संसद में बहुमत होता है, उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है। अभी लेबर पार्टी की सरकार है। इसलिए जो व्यक्ति लेबर पार्टी का नया नेता बनेगा, वही प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा दावेदार होगा। इसके लिए पूरे देश में आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होती। लेबर पार्टी में एंडी बर्नहैम सबसे आगे ब्रिटेन की राजनीति में काफी लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। उन्हें पार्टी के लेफ्ट और सेंट्रिस्ट दोनों गुटों का समर्थन हासिल है। बर्नहैम पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई अहम सरकारी पद संभाल चुके हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर के लिए केंद्र सरकार से खुलकर टक्कर ली थी। उस समय उनकी छवि आम लोगों के हितों के लिए लड़ने वाले नेता की बनी, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी। मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद एंडी बर्नहैम की स्थिति और मजबूत हुई है। कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वह स्टार्मर की जगह लेने के सबसे बड़े दावेदार हैं। हालांकि अभी तक किसी उम्मीदवार ने आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश नहीं की है। पार्टी के दूसरे नेता भी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व का चुनाव मुकाबले वाला भी हो सकता है। लेबर पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं का रुख भी काफी अहम रहेगा। अगर बड़ी संख्या में नेता और सांसद बर्नहैम के समर्थन में आ जाते हैं, तो उन्हें बिना ज्यादा मुकाबले के नेता चुना जा सकता है। कीर स्टार्मर को क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी कीर स्टार्मर पर पिछले कुछ दिनों में लगातार दबाव तेजी से बढ़ गया था कि वे लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दें, ताकि एंडी बर्नहम नए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बन सकें. पिछले हफ्ते उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहम ने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंदी को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी. इस जीत के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा और मजबूत हो गया था. अब उनको ही सत्ताधारी लेबर पार्टी का अगला नेता और ब्रिटेन का नया पीएम माना जा रहा है।  जुलाई 2024 के आम चुनाव में कीर स्टार्मर ने 174 सीटों के बड़े बहुमत के साथ शानदार जीत हासिल की थी. लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल पर कई विवाद छाए रहे हैं. इनमें लेबर पार्टी के सीनियर नेता पीटर मेंडलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाना भी शामिल है, जबकि उनके दोषी यौन अपराधी जेफरी एप्सटीन से संबंधों की जानकारी पहले से थी।  इसके अलावा टैक्स और सामाजिक कल्याण योजनाओं (सोशल बेनिफिट्स) को लेकर सरकार के कुछ फैसलों और बाद में उन्हें बदलने (यू-टर्न लेने) से भी उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है. दूसरी तरफ, एंडी बर्नहम पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. बाद में उन्होंने … Read more

अमेरिका को चीन का झटका, 46 अमेरिकी कंपनियों को सरकारी खरीद सूची से किया बाहर

बीजिंग  चीन ने 46 अमेरिकी कंपनियों से कोई भी उत्पाद खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीनी वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इस आशय की सूची जारी की है। इन कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन कॉरपोरेशन भी शामिल है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लागू कानूनों और नियमों के अनुसार, सरकारी खरीद गतिविधियों के दायरे में 46 अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ प्रासंगिक कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।   चीनी कंपनियों को इन 46 अमेरिकी कंपनियों में बने उत्पादों को खरीदने से रोक दिया गया है, हालांकि चीन में काम कर रहे अमेरिकी निवेश वाले उद्यमों को इससे छूट दी गयी है। चीन ने लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाकर एक तरह से अमेरिका को भी संकेत दिया है कि वह अपने मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगी। गौरतलब है कि लॉकहीड मार्टिन सैन्य विमान और उन्नत तकनीकी हथियारों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है और यह कंपनी अमेरिकी सरकार के जरिए ताइवान को सबसे ज्यादा हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करती है, जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव, मालदा में BSF की कार्रवाई के दौरान हजारों लोगों की भीड़ जुटी

कलकत्ता   पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा पर अचानक स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गयी. सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भारतीय क्षेत्र में अवैध रूप से दाखिल होने की कोशिश कर रहे बांग्लादेशी नागरिकों के एक समूह को पकड़ा और उन्हें वापस खदेड़ने (पुश-बैक) की कोशिश की. तभी सीमा के उस पार से बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और लगभग 5 से 7 हजार बांग्लादेशी नागरिकों की भारी भीड़ ने जीरो लाइन पर आकर इस कदम का कड़ा विरोध किया. हंगामा शुरू कर दिया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी और रेड फ्लैग (लाल झंडा) लगा दिया गया है।  सुखदेवपुर गांव में घुसपैठ की कोशिश, ग्रामीणों ने BSF के साथ मिलकर संभाला मोर्चा स्थानीय निवासियों के अनुसार, उथल-पुथल की शुरुआत तब हुई, जब करीब 15 बांग्लादेशी नागरिकों ने मालदा के सुखदेवपुर गांव में जबरन घुसने का प्रयास किया. गांव के पीयूष मंडल और चपला मंडल ने बताया कि इन घुसपैठियों को देखकर ग्रामीणों ने तुरंत मोर्चा संभाला और बीएसएफ के जवानों के साथ मिलकर उन्हें पीछे धकेल दिया।  ग्रामीणों का आरोप- महिलाओं और बच्चों को प्रताड़ित करते हैं असामाजिक तत्व ग्रामीणों का आरोप है कि सीमा पार से आने वाले ये असामाजिक तत्व अक्सर भारतीय सीमा में घुसकर महिलाओं और बच्चों को प्रताड़ित करते हैं. ग्रामीणों ने भारत सरकार से मांग की है कि सीमा के इस 1200 मीटर लंबे संवेदनशील हिस्से पर तुरंत फेंसिंग (कंटीले तारों की बाड़) लगायी जाये।  भाजपा ने ममता बनर्जी पर बोला तीखा हमला पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद इस घटना से सियासत गरमा गयी है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता कौस्तुभ बागची ने इस घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद जब तृणमूल कांग्रेस के अपने सहयोगियों ने उनसे दूरी बना ली है, तो सीमा पार की विभाजनकारी ताकतों से मदद मांगी जा रही है. बागची ने कड़े शब्दों में कहा कि अब राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार है और घुसपैठ की ऐसी किसी भी कोशिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।   पैनिक न हों, बीएसएफ पर रखें भरोसा : सुकांत मजूमदार केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने सीमावर्ती इलाके के नागरिकों से शांत रहने और किसी भी तरह के भ्रम या पैनिक में न आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं. भारतीय नागरिकों को बीएसएफ की क्षमता पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।  शांतनु ठाकुर बोले- जान-बूझकर बांग्लादेशियों को भारत में धकेला जा रहा केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि बांग्लादेश की तरफ से जान-बूझकर अपने नागरिकों को भारत में धकेलने की साजिश रची जा रही है, जिसे कभी कामयाब नहीं होने दिया जायेगा. बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ‘घुसपैठ मुक्त बंगाल’ का वादा किया था और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में बॉर्डर फेंसिंग के लिए जमीन सौंपने का बड़ा फैसला लिया था। 

बंगाल बजट में कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! DA 20% बढ़ा, सरकार ने किए कई बड़े ऐलान

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने अपना पहला बजट पेश कर दिया. अपने पहले बजट में सरकार ने हर पक्ष को साधने की कोशिश की है. सरकार ने DA (महंगाई भत्ता) में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है. साथ ही रिटायर्ड पत्रकारों को 5000 रुपये पेंशन दी जाएगी. बजट में उन लोगों को विशेष भत्ता में दिया जाएगा जिन्हें झूठे केस में जेल भेजा गया. साथ ही गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को एक बार में 21,000 रुपये दिए जाएंगे. पिंक कार्ड भी शुरू किया जाएगा।  वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार का 2026-27 का बजट पेश किया. वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि AI का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. हम पश्चिम बंगाल के लिए AI इम्पैक्ट प्रोग्राम शुरू कर रहे हैं।  उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की पहल से ऑनलाइन परीक्षा, ऑनलाइन स्क्रूटनी, ऑनलाइन वेरिफिकेशन और ट्रैकिंग की जाएगी. यहां तक की रेत, कोयला और बोल्डर की नीलामी भी ऑनलाइन की जाएगी।  वित्त मंत्री ने बताया कि प्रशासनिक सुधारों और बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए बजट में कई अहम कदम उठाए गए हैं. राज्य के कांथी क्षेत्र को अब एक नया पुलिस जिला बनाया जाएगा. इसके अलावा जनता की सहूलियत के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुछ नई नगरपालिकाएं और नए फायर स्टेशन भी खोले जाएंगे।  तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक पर अपना मुख्य ध्यान केंद्रित करेगा. इसके साथ ही राज्य में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन परीक्षा और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ा मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा।  राज्य की संस्कृति को सहेजने के लिए कोलकाता में एक नया सांस्कृतिक स्कूल स्थापित करने का ऐलान किया गया है. इसके अलावा स्थानीय विकास को गति देने के उद्देश्य से विधायकों को मिलने वाले एमएलए फंड (MLA Fund) को 70 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है।  विधानसभा के पटल पर बजट पेश करने से पहले सीएम और वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की. बताया जा रहा है कि इस बार बजट की फाइलों को सहेजने के लिए बंगाल की परंपरा को ध्यान रखते हुए तैयार की गई हैं. ये फाइलें राज्य की पारंपरिक मैट (चटाई) और जूट से बनाई गई हैं, जो पर्यावरण अनुकूल और किफायती भी हैं।  बीजेपी सरकार ने अपने पहले बजट में खर्च के लिए MLA फंड की राशि में बढ़ोतरी की है. अब इसे 70 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है. जबकि नदी के कटाव के लिए 50 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया। बंगाल बजट में शुभेंदु सरकार का बड़ा ऐलान शुभेंदु सरकार ने राज्य में 1 लाख रिक्त पदों पर भर्ती करने का ऐलान किया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन पदों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।  यह फैसला सीधे तौर पर ममता बनर्जी के लंबे समय से स्थापित "महिला कल्याण और महिला सशक्तिकरण" वाले राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है. यदि नई BJP सरकार 1 लाख सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण महिलाओं को देती है, तो वह कल्याणकारी सहायता से आगे बढ़कर आर्थिक सशक्तिकरण का नैरेटिव बनाना चाहेगी।  कर्मचारियों को 20% DA की सौगात; पत्रकारों के लिए भी बड़ा ऐलान वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा, 'हम भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं' और नई सरकार का लक्ष्य एक विकसित तथा भविष्य के लिए तैयार बंगाल बनाना है।  बजट की सबसे बड़ी घोषणाओं में राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है. इसके बाद कुल DA बढ़कर 38 प्रतिशत हो जाएगा. वित्त मंत्री ने बताया कि यह फैसला 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. सरकार ने राज्य परिवहन निगम के बस कंडक्टरों के पारिश्रमिक में वृद्धि का भी ऐलान किया है. वहीं, सेवानिवृत्त पत्रकारों को हर महीने 5,000 रुपये पेंशन देने की घोषणा ने भी ध्यान खींचा है. इन फैसलों से लाखों कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और पत्रकार समुदाय को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।    5 दिनों के भीतर 7वां वेतन आयोग लागू करने का था वादा भाजपा ने चुनाव से पहले वादा किया था कि सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इसके अलावा कर्मचारियों का बकाया DA देने का भी वादा किया गया था।

गुस्से में बैठक छोड़कर निकली ईरानी टीम, शहबाज और मुनीर को लगा झटका; वेंस की फुसफुसाहट बनी चर्चा का विषय

दोहा   ईरान और US के बीच स्विट्जरलैंड में बातचीत का पहला राउंड मुश्किलों भरा रहा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद ईरान ने वार्ता से वॉकऑउट कर दिया. इस दौरान ईरानी डेलीगेशन ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवाने से भी इनकार कर दिया।  स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई वार्ता में ईरान और अमेरिका के साथ-साथ पाकिस्तान और कतर के अधिकारी भी मौजूद रहे. चारों देश हाल ही में साइन किए गए इस्लामाबाद MoU के तहत बातचीत के पहले राउंड के लिए जमा हुए थे।  इस बीच, ट्रंप के ईरान को लेबनान में हिज्बुल्लाह पर लगाम लगाने और नई अमेरिकी मिलिट्री कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'ईरान को लेबनान में अपने ज्यादा पैसे पाने वाले प्रॉक्सी को परेशानी पैदा करने से तुरंत रोकना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था।  गुस्से में कमरे से बाहर निकला ईरानी डेलीगेशन ट्रंप के इस बयान के बाद ईरानी डेलीगेशन बातचीत की मेज से वॉकआउट कर जाता है. ईरानी अधिकारियों के वार्ता से वॉकआउट करने का एक वीडियो भी सामने आया है. इसमें पहले तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का गले लगाकर स्वागत करते नजर आ रहे हैं. इसके बाद दोनों को धीरे-धीरे बातचीत करते देखा जा सकता है. लेकिन थोड़ी देर बाद ही ईरानी डेलीगेशन गुस्से में कमरे से बाहर चला जाता है।  अराघची समेत ईरानी डेलीगेशन के वॉकआउट करने से शहबाज शरीफ के चेहरे का रंग उतर जाता है. उनके चेहरे पर हैरानी साफ नजर आती है. कुछ देर बाद, वो अपने बगल में खड़े पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तरफ इशारा करते हुए उन्हें कुछ बताते नजर आते हैं।  जेडी वेंस ने भांप ली स्थिति ईरानी डेलीगेशन के वॉकआउट करने के बाद माहौल टेंशन वाला हो जाता है. अमेरीका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की नजर शहबाज-मुनीर पर पड़ती है, जिनके हाव-भाव से परेशानी साफ झलक रही थी. फिर वेंस उन दोनों के पास जाते हैं और शहबाज-मुनीर के कान में कुछ कहते हैं. इसके बाद तीनों काफी देर तक धीरे-धीरे बात करते हुए दिखते हैं।  ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बातचीत शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के बीच हाथ मिलाने और जॉइंट फोटो सेशन का प्लान था. हालांकि, ईरान के चीफ नेगोशिएटर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सेशन में हिस्सा लेने से मना कर दिया और बाहर चले गए।  ट्रंप की धमकियों का जवाब देने की तैयारी में ईरान! तस्नीम न्यूज ने बाद में बताया कि ईरानी डेलीगेशन ट्रंप की धमकियों के विरोध में वार्ता से वॉकआउट कर गया. वहीं, प्रेस टीवी ने भी सूत्रों के हवाले कहा कि ईरानी डेलीगेशन ने अमेरिकी पक्ष के सामने आपत्ति जताई थी. सोर्स ने कहा, 'ईरानी डेलीगेशन ने अमेरिकी साइड के सामने अपनी आपत्तियां उठाई हैं और अभी ट्रंप की ज़ुबानी धमकियों का सही जवाब देने के लिए हालात का अंदाजा लगा रहा है। 

मुंबई में मॉनसून का कहर! अंधेरी सबवे पानी में डूबा, सड़कों पर जलभराव; IMD ने दी चेतावनी

 मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने दस्तक दे दी है. सोमवार सुबह से जारी बारिश के बीच कई इलाकों में जलभराव की खबरें सामने आ रही हैं. अंधेरी सबवे में पानी भर गया है. वहीं, कई सड़कों पर भी पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।  भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 22 जून को शहर में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक, बीते दिन यानी रविवार को शहर के कई इलाकों में सीजन की पहली अच्छी बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग ने आज भी आंधी-बारिश की चेतावनी दी है।    मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में मॉनसून दक्षिण कोंकण तक पहुंच गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मॉनसून सोलापुर के पास रुका हुआ था. महाराष्ट्र में एक बार फिर मॉनसून एक्टिव हुआ है लेकिन रफ्तार अभी धीमी है. बता दें कि मुंबई में हर साल मॉनसून में मूसलाधार बारिश होती है लेकिन इस बार मॉनसून ने अभी तक अच्छी रफ्तार नहीं पकड़ी है।    IMD के अनुसार, मुंबई और आसपास के इलाकों में आज पूरे दिन बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी. कुछ जगहों पर गरज और बिजली चमकने के भी आसार हैं. मौसम विभाग ने मुंबई में आज येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि मौसम खराब रह सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा खतरा नहीं है।  मौसम विभाग के अनुसार, मुंबई के ऊपर कुछ बादल छाए हुए हैं. हालांकि, महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में अभी मॉनसून की अच्छी बारिश नहीं हुई है. मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में ही बारिश की गतिविधियां देखी जा रही हैं।  मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की शुरुआत इस बार थोड़ी देरी से हुई है. लेकिन अब हवाओं में नमी बढ़ने से बारिश शुरू हो गई है. मुंबई के आसमान में सुबह से ही बादल छाए हुए हैं. जबकि कई इलाकों में हल्की बारिश भी हो रही है. वहीं, कुछ जगहों पर तेज हवाएं चल रही हैं।  इस बीच मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अलर्ट है. मॉनसून की बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या से निपटने के लिए पंपिंग मशीनें चेक की जा रही हैं. ट्रैफिक पुलिस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि लोगों को बारिश से होने वाले ट्रैफिक जाम से ना जूझना पड़े।  मॉनसून की बारिश किसानों के लिए अच्छी खबर है. महाराष्ट्र के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो सकेगी. मौसम विभाग ने जानकारी दी कि अगले कुछ दिनों में मॉनसून और मजबूत हो सकता है. पूरे महाराष्ट्र में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। 

लेबनान मुद्दे पर अमेरिका-ईरान में बढ़ा टकराव, 80 मिनट की बैठक के बाद बातचीत पर लगा ब्रेक

वाशिंगटन महीनों से मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है. संघर्ष को समाप्त करने के लिए स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को पहले दौर की बैठक हुई. हालांकि, ये बैठक तनावपूर्ण रहा. लेबनान को लेकर दोनों देश के बीच मतभेद खुलकर दिखे. साथ ही साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान की वजह से बातचीत बिगड़ते हुए नजर आई।  अमेरिका की ओर से बातचीत करने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मौजूद थे. वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए।  स्विट्जरलैंड में आयोजित हुई ये बैठक हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद आयोजित की गई थी. इस बैठक का उद्देश्य साफ था कि दोनों देश सभी मुद्दों पर चर्चा करें और चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें।  बैठक शुरू होने के पहले ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों से अलग-अलग बैठक की. इसके बाद ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका से बातचीत की प्रगति इस बात पर निर्भर करता है कि वह समझौते की शर्तों को ज़मीन पर कितना लागू करता है और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर कितना विराम लगाता है।  ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने अब तक समझौते की पहली शर्त यानि सभी मोर्चों पर सीजफायर लागू करने में सफल नहीं हुआ है. ईरान का कहना है कि इसका प्रमाण लेबनान में देखा जा सकता है. वहां अभी भी इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई जारी है।  अमेरिका और ईरान के बीच क़रीब 80 मिनट तक बैठक चली. जिसमें प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज कराने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।  वार्ता के दौरान तनाव तब बढ़ गया था जब डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए ईरान को धमकी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करे. इससे ईरान भड़क उठा और ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ देर के लिए बैठक छोड़ दी. हालांकि, बाद में ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतने की ज़रूरत है. ईरान की सेना किसी भी स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है।  वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कूटनीतिक प्रक्रिया में ऐसी घटनाएं सामान्य है. कठिन वार्ताओं में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और बातचीत प्रगति करते रहती है।  उन्होंने ये भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को ईरान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए नए दृष्टिकोण से आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं।  इस तनाव का असर साफ देखने को मिला. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित प्रतीकात्मक हैंडशेक और संयुक्त तस्वीर से साफ इनकार कर दिया।  दूसरी ओर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी. नेतन्याहू का कहना है कि इज़रायल अपनी सुरक्षा के लिए जो क्षेत्र बनाया है उसे जरूरत पड़ने तक बनाए रखेगा. इजरायल एक खुद्दार देश है. हर बात पर सहमति होना जरूरी नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप हर कुछ नहीं करते, जो हम चाहते हैं. और न ही मैं हर कुछ करता हूं जो वो चाहते हैं।  ईरान-अमेरिका वार्ता में गतिरोध से कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी हुई है. ब्रेंट क्रूड 81 डॉलर के पार पहुंच गई है. $1 से ज्यादा ब्रेंट क्रूड महंगा हुआ है।   

होर्मुज संकट के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति बदली, वैकल्पिक स्रोतों पर जोर

नई दिल्ली  ईरान और अमेरिका के बीच एमओयू साइन होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने तक भारत ने जून में रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. भारतीय रिफाइनरियों ने खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से पहले अपना 'ऑयल स्टोरेज' सुरक्षित करने की रणनीति अपनाई. मैरीटाइम और कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म क्लेपेर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, जून में 19 तारीख तक भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जबकि मई में यह 19.1 लाख बैरल प्रतिदिन था. इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. संयुक्त अरब अमीरात से आयात जून में 6.36 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो मई के रिकॉर्ड 6.44 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा कम है. वहीं, वेनेजुएला 2.09 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा. सऊदी अरब की आपूर्ति 3.84 लाख बैरल प्रतिदिन रही. भारत ने 60% तक घटाई अमेरिकी तेल खरीद दूसरी ओर, अमेरिका से तेल आयात घटकर केवल 91 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि मई में यह 2.52 लाख बैरल प्रतिदिन था. रूस से रियायती दरों पर मिलने वाला तेल भारत के लिए फायदे का सौदा बना हुआ है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात से बढ़ी खरीद ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अनिश्चितता के बीच आपूर्ति संतुलित करने में मदद की. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और कच्चे तेल, एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG) के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई. होर्मुज दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल खपत के परिवहन का प्रमुख समुद्री मार्ग है और सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों के निर्यात के लिए बेहद अहम माना जाता है. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद पिछले सप्ताह के अंत से होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति धीरे-धीरे बहाल होने लगी है. होर्मुज के खुलने को लेकर अनिश्चितता बरकरार फिर भी, ईरान द्वारा इजरायल पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाने के बाद स्थिति को अब भी नाजुक माना जा रहा है. लेबनान पर इजरायल के ताजा हमलों के बाद ईरानी सेना ने शनिवार को फिर से होर्मुज बंद करने की घोषणा की. इस तरह यह समुद्री मार्ग जहाजों की आवाजाही के लिहाज से अब भी पूरी तरह खुल नहीं सका है. क्लेपेर में मॉडलिंग के सीनियर मैनेजर सुमित रितोलिया ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से भारत को सबसे तेज राहत एलपीजी आपूर्ति में मिलेगी, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों के व्यवधान के दौरान भारत ने तेल और गैस आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों और अन्य समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लिया है. रितोलिया के अनुसार, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का फिर से खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा मील का पत्थर होगा, लेकिन भारत पर इसका असर अलग-अलग ईंधनों पर अलग तरीके से पड़ेगा.' उन्होंने कहा कि एलपीजी सबसे ज्यादा प्रभावित ईंधन रहा, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही. क्योंकि भारत ने रूस, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ा दिया था. भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर सुमित रितोलिया का अनुमान है कि जुलाई की शुरुआत से धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बनने पर सबसे पहले फंसे हुए कार्गो को निकाला जाएगा और शिपिंग गतिविधियां बहाल की जाएंगी. इसके बाद खाड़ी देशों का निर्यात धीरे-धीरे बढ़ेगा. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत नेचुरल गैस और लगभग 65 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. ईरान युद्ध से पहले भारत के लगभग आधे कच्चे तेल, दो-तिहाई एलएनजी और करीब 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति खाड़ी देशों से होती थी. हाल के दिनों में होर्मुज में भारत के लिए स्थिति सामान्य होने के संकेत भी मिले हैं. भारत के झंडे वाले तीन तेल टैंकर, जिनमें 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल था, और एक भारतीय एलएनजी जहाज ने अमेरिका-ईरान समझौते के बाद सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया है. रितोलिया ने कहा कि रूस का कच्चा तेल अब भी भारत की आयात रणनीति का प्रमुख आधार बना हुआ है. जून में रूस से आयात 23.5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहने का अनुमान है और यह नया रिकॉर्ड बना सकता है. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी कीमतों और आपूर्ति सुरक्षा के कारण होर्मुज सामान्य होने के बाद भी रूस भारत के लिए अहम आपूर्तिकर्ता बना रहेगा. भारत ने वेनेजुएला से भी तेल की खरीद बढ़ाई भारतीय रिफाइनरियों ने मार्च के बाद से अटलांटिक बेसिन और वेनेजुएला से भी खरीद बढ़ाई है ताकि खाड़ी क्षेत्र की सीमित आपूर्ति की भरपाई की जा सके. जून में वेनेजुएला से आयात 3 से 4 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों और उत्पादन सीमाओं के कारण दीर्घकालिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. सबसे बड़ा बदलाव एलपीजी क्षेत्र में देखा गया है. खाड़ी आपूर्ति बाधित होने के बाद अमेरिका भारत के लिए बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है. पिछले साल हुए दीर्घकालिक समझौते ने इसमें मदद की, हालांकि लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है. सुमित रितोलिया के अनुसार, होर्मुज सामान्य होने के बाद खाड़ी देशों की बाजार हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ेगी, लेकिन भारत की आयात रणनीति पहले की तुलना में अधिक विविध बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि होर्मुज के फिर से खुलने से माल ढुलाई लागत कम होगी, आपूर्ति जोखिम घटेंगे और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा. हालांकि, शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और व्यापारियों का भरोसा पूरी तरह लौटने में अभी कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं.