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944 ग्राम सोना और कैश चोरी, सोशल मीडिया वीडियो देखकर वारदात की आशंका; यूट्यूबर के पुराने वीडियो वायरल

चेन्नई तमिलनाडु की एक महिला यूट्यबूर मधुमिता को डेली लाइफ व्लॉग में शो बाजी करना महंगा पड़ गया। यूट्यूबर व्लॉग्स में जमकर गहनों और कैश को दिखाती थी। अब उसके घर से करीब 944 ग्राम सोने और कैश की चोरी हो गई है। पुलिस को संदेह है कि चोरों ने यूट्यूबर के सोशल मीडिया वीडियो देखकर चोरी की योजना बनाई थी। चोरी की घटना के बाद मधुमिता के पुराने वीडियो एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पुलिस के अनुसार, तमिलनाडु के नागरकोइल की रहने वाली मधुमिता यूट्यूब पर डेली लाइफ से जुड़े व्लॉग्स और रील बनाती हैं। हाल ही में उन्होंने कई वीडियो पोस्ट किए थे, जिनमें वह अपने परिवार की संपत्ति और गहनों का प्रदर्शन कर रही थीं। एक वायरल वीडियो में वह अपने छोटे बच्चे पर 500 रुपये के नोट बरसाती नजर आई थीं। इसके अलावा, उन्होंने हर महीने सोने के गहने खरीदने की बात भी कही थी। पुलिस के मुताबिक, मधुमिता अपने परिवार के साथ तिरुनेलवेली की छोटी यात्रा पर गई थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि घर का ताला टूटा हुआ था और अलमारी में रखे सोने के गहने गायब थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साक्ष्य जुटाने के लिए फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों और फॉरेंसिक टीम को मौके पर भेजा गया है। पुलिस आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ ही सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है, ताकि आरोपियों का पता लगाया जा सके। सोशल मीडिया पर जानकारी देना पड़ सकता है भारी सोशल मीडिया पर अपनी निजी जिंदगी, घर, कीमती सामान और आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी साझा करना कई बार भारी पड़ सकता है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो या ऑनलाइन दोस्ती के जरिए अपराधियों को पीड़ितों के बारे में अहम जानकारी मिली। जून 2026 में मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक महिला यूट्यूबर के घर से लाखों रुपये के आभूषण और नकदी चोरी होने का मामला सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो के जरिए चोरों तक घर और वहां मौजूद कीमती सामान से जुड़ी जानकारी पहुंचने की बात सामने आई थी। इससे पहले 2018 में बेंगलुरु में भी सोशल मीडिया पोस्ट के बाद चोरी का मामला सामने आया था। एक महिला द्वारा फेसबुक पर की गई पोस्ट के बाद उसके घर में करीब पांच लाख रुपये के आभूषण और नकदी चोरी हो गई थी।

असम में आशुतोष रांका समेत CJP कार्यकर्ता हिरासत में, अभिजीत दीपके ने जताया विरोध

दिसपुर कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनकी टीम को असम में हिरासत में लिया गया है। उन्होंने खुद इसकी जानकारी दी है। अभिजीत दीपके ने भी इसका विरोध किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘असम पुलिस ने रांका और CJP की टीम को हिरासत में ले लिया है और उन्हें किसी अज्ञात जगह ले जा रही है।’ दीपके का कहना है कि रांका और उनकी टीम असम में वॉलंटियर्स के साथ एक छोटी सी मीटिंग करने जा रहे थे। सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने कहा, “हिमंत बिस्वा सरमा डरे हुए हैं कि अगर हम असम के स्कूलों की असलियत दिखाएंगे तो देश को उनकी हालत के बारे में पता चल जाएगा। हिमंत सरमा इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि काजीरंगा में हमारे लोगों के अधिकार छीने जा रहे हैं और जमीन, जंगल और पानी छीनकर कॉरपोरेट्स को दिए जा रहे हैं।” एक पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘हिमंता मामा डर गए है कि ज्ञानेश की आड़ में कहीं असम चुनाव में हुई धांधली ना पता पड़ जाये। किस तरह से विधानसभा की बाउंड्री बनाई गई, जिससे एक गांव के लोग तीन अलग अलग विधानसभा में बाट दिए गए। किस तरह से SIR के नाम पर असम के नागरिकों को वोटर लिस्ट से हटाया गया।’ हिमंत सरमा पर लगाए कई आरोप एक अन्य पोस्ट में वीडियो शेयर करते हुए आशुतोष रांका ने लिखा, 'जब-जब हिमंत सरमा डरता है, पुलिस को आगे करता है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मीट-अप वाली जगह तक जाने वाली पूरी सड़क को दोनों तरफ से बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है। असम पुलिस आंसू गैस के साथ तैयार है। हमारे वॉलंटियर्स को हिरासत में लिया जा रहा है। किसी को भी मीट-अप वाली जगह तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा है। असम सरकार कॉकरोच से इतनी डरी हुई क्यों है? 2 अक्टूबर से आंदोलन का ऐलान आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी ने शुक्रवार को ऐलान करते हुए कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद को लेकर अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो पार्टी आगामी दो अक्टूबर यानी कि गांधी जयंती से मुंबई से एक देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार कल तक अपना त्यागपत्र नहीं सौंपते हैं, तो पार्टी मुंबई से आंदोलन शुरू कर इसे देश के अन्य शहरों में फैलाएगी और इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लेगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया कितनी मुश्किल? 5 चरणों में समझें पूरा नियम

 नई दिल्ली  भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज में सरकार के सीधे दखल को रोकने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। आजाद भारत के इतिहास में कभी भी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया गया है। हालांकि, इसकी कोशिशें तो हुईं लेकिन ऐसा हो न सका। आइए पीछे के पन्नों को पलटकर देखते हैं… 1992… टीएन शेषन के खिलाफ मांग 1992 में वामपंथी दलों ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह कोशिश किसी औपचारिक प्रस्ताव के रूप में आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि इसे पेश करने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन नहीं मिल पाया। 2006… चुनाव आयुक्त नवीन चावला के खिलाफ एनडीए की याचिका मार्च 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने राष्ट्रपति को याचिका देकर चुनाव आयुर्त नवीन चावला को हटाने की मांग की। 2009… नवीन चावला के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने पक्षपातपूर्ण व्यवहार और राजनीतिक झुकाव के आरोपों का हवाला देते हुए चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की औपचारिक सिफारिश की। बाद में तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार ने इस सिफारिश को खारिज कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया सीईसी को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से उन संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। अनुच्छेद 324(5) संविधान का अनुच्छेद 324(5) यह तय करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अनुच्छेद 124(4) अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि राष्ट्रपति का आदेश न हो। यह आदेश संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही जारी किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी है। साथ ही, यह प्रस्ताव उसी सत्र में राष्ट्रपति को सौंपा जाना चाहिए और यह साबित होना चाहिए कि जज ने दुर्व्यवहार किया है या वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है। सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और उसे पूरा करने के काम में पांच अलग-अलग चरण शामिल हैं। पहला चरण… नोटिस जमा करना मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा के चेयरमैन या लोकसभा के स्पीकर को एक औपचारिक नोटिस दिया जाता है। इस नोटिस को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्य का समर्थन जरूरी है। दूसरा चरण… जांच समिति का गठन अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो पीठासीन अधिकारी हटाने के खास आधारों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक खास समिति बनाता है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज या चीफ जस्टिस, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और पीठासीन अधिकारी की राय में कानून के एक जाने-माने जानकार शामिल होने चाहिए। तीसरा चरण… जांच और रिपोर्टिंग गठित समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी औपचारिक जांच रिपोर्ट चेयरमैन या स्पीकर को सौंपती है। चौथा चरण… संसदीय वोटिंग अगर जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को साबित हो चुके दुर्व्यवहार या अक्षमता का दोषी पाती है तो मामले को वोटिंग के लिए संसद में लाया जाता है। इस प्रस्ताव को पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है- सदन के कुल सदस्यों के बहुमत का समर्थन और दोनों सदनों में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का बहुमत। पांचवां चरण… राष्ट्रपति का आदेश अगर हटाने का बिल या प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं। संसद में मौजूदा संख्या-बल मौजूदा संसदीय समीकरणों के तहत संसद के दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना किसी भी एक विपक्षी गुट के लिए एक ऐसी गणितीय बाधा है जिसे पार करना नामुमकिन है। क्यों है असंभव? लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने के लिए विपक्ष की मौजूदा कुल संख्या से कहीं ज्यादा सीटों की जरूरत है। अगर हम बीजेपी की 240 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 300 सदस्य ही बचते हैं। इसलिए 360 तक पहुंचना मुमकिन नहीं है। इसी तरह राज्यसभा में 162 के आंकड़े तक पहुंचना गणितीय रूप से सीमित है। अगर हम बीजेपी की 116 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 127 गैर-बीजेपी सदस्य बचते हैं। डीएमके (22 लोकसभा, 8 राज्यसभा) को विपक्षी गठबंधन इंडी के बजाय अन्य की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि संख्याबल में कमी के बावजूद विपक्ष हटाने का प्रस्ताव क्यों ला रहा है?

मोबाइल रिचार्ज पर बड़ा बदलाव, डेटा नहीं चाहिए तो मिलेंगे सस्ते Voice-SMS प्लान

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रीपैड मोबाइल यूजर्स को बधाई दी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा लाए गए बदलावों के बारे में बात करते हुए चड्ढा ने कहा कि अब इससे देश के तमाम यूजर्स को लाभ होगा और उन्हें 28 दिन की जगह 30 दिन का रिचार्ज करवाने की सुविधा मिलेगी। इससे उन यूजर्स को भी लाभ होगा, जो केवल इनकमिंग सुविधा के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं। उनके लिए इनकमिंग और मैसेज पैकेज उपलब्ध कराए जाएंगे। भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने फरवरी में ही इस मुद्दे को संसद में उठाया था। इसके बाद अब सरकार ने उनकी बात पर अमल करते हुए यह नियम लाया है। सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर करते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि यह एक सच्चा उदाहरण है कि कैसे एक सांसद ने लोगों की बात को संसद में रखा और सरकार ने उस पर ध्यान देकर फैसला किया। उन्होंने कहा, "11 मार्च 2026 को मैंने प्रीपैड मोबाइल यूजर्स की कुछ समस्याओं को संसद में उठाया था। साथ ही साथ यह भी कहा था कि कुछ लोग डेटा यूज नहीं करते हैं केवल इनकमिंग सुविधाओं को लिए फोन का उपयोग करते हैं। मुझे बताते हुए यह खुशी है कि सरकार ने आपकी उन सभी मांगों को मान लिया है। TRAI ने टेलीकॉम उपभोक्ता संरक्षण (13वां संसोधन) रेग्यूलेशन 2026 को लागू कर दिया है। इसके तहत सबसे पहले अब 28 दिन का रिचार्ज नहीं बल्कि 30 दिन का रिचार्ज मिलेगा।" राघव चड्ढा बोले- अब जितनी सुविधा लेंगे, उतना ही पैसा लगेगा चड्ढा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "जिन उपभोक्ताओं को डेटा वाले रिचार्ज नहीं चाहिए थे। उन्हें अब केवल इनकमिंग और मैसेज वाले रिचार्ज करने के लिए मिलेंगे। यानी कि अब जितनी सुविधा चाहिए, उतना ही पैसा लिया जाएगा। इसके लिए मैं सरकार को इसके लिए बधाई देता हूं। आप सभी को बधाई देता हूं। यह राजनीति का सही उदाहरण है कि कैसे एक सांसद ने संसद में लोगों की मांग को उठाया और सरकार ने उसे पूरा किया।" बता दें, राघव चड्ढा फरवरी 2026 में आम आदमी पार्टी के साथ थे। उस समय उन्होंने जमीन से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। इसके बाद आप के साथ हुए मतभेद के बाद उन्हें पार्टी नेता के पद से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपने साथी सांसदों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया था। क्या है प्रीपैड यूजर्स के लिए सरकार के बदलाव? भारत में लंबे समय से नागरिकों द्वारा प्रीपैड प्लान्स में बदलाव की मांग चली आ रही थी। इसी को ध्यान में रखकर TRAI ने नए नियम जारी कर दिए हैं। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को अब पूरे महीने यानी की 30 दिन की वैलेडिटी वाले प्लान पेश करने होंगे। इसके अलावा जिन ग्राहकों को डेटा इंटरनेट की जरूरत नहीं है। उनके लिए बिना डेटा वाले केवल कॉलिंग और मैसेज के सस्ते स्पेशल टैरिफ वाउचर उपलब्ध कराए जाएंगे।

ट्रंप-शी की मुलाकात के बाद बड़ा ट्रेड डील, 30 अरब डॉलर के सामान पर घटेगा टैरिफ

वाशिंगटन अमेरिका और चीन के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देश आगे की आर्थिक बातचीत के लिए एक ट्रेड काउंसिल भी बनाएंगे। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिन के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद हुआ। शी का यह दौरा 2015 के बाद वाशिंगटन का पहला दौरा था। वाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका से चीन जाने वाले सामान शामिल हैं। इनमें खेती का सामान, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स हैं। चीन के छोटे उपकरण, खिलौने और सजावट के सामान पर भी बेहतर टैरिफ मिलेगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश कुआलालंपुर में हुई पिछली बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और व्यापार पर चर्चा जारी रखेंगे। यह समझौता मौजूदा ट्रेड डील को दो महीने बढ़ाने के बाद आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इससे बड़े समझौते पर काम करने का समय मिलेगा। वाइट हाउस में लंबी मुलाकात और डिनर ट्रंप और शी ने गुरुवार को वाइट हाउस में कई घंटे बात की। इसके बाद दोनों ने सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ डिनर किया। इसमें अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया। शी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के फायदे वाला सहयोग बढ़ाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को सीमा में रखना चाहिए। एआई पर भी बात होगी व्यापार के साथ-साथ दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बातचीत शुरू करने पर राजी हुए। इसमें मौकों और जोखिम दोनों पर चर्चा होगी। नवंबर में एआई पर एक और दौर होने की उम्मीद है। अधिकारी एआई से जुड़ी घटनाओं पर बात करने का एक चैनल भी बनाएंगे। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता इस बैठक में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करने पर सहमत हुए। चीन ने इस शब्द का स्वागत किया और और बातचीत की अपील की। अन्य समझौते भी हुए शी के दौरे में सिर्फ व्यापार और एआई ही नहीं थे। दोनों देश एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग और जी-20 समिट जैसी बड़ी बैठकें आयोजित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे। ट्रंप और शी एक-दूसरे के देश में होने वाली बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी तय किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अलग-अलग देशों या संस्थाओं द्वारा लगाए गए ट्रांजिट टोल नहीं होने चाहिए। क्या है टैरिफ विवाद? अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे व्यापार तनाव से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार घाटा, व्यापार के तरीके और बौद्धिक संपदा के मुद्दों को टैरिफ लगाने की वजह बताया था। अमेरिका ने 2018 में चीनी सामान पर कई टैरिफ लगाना शुरू किया था। इसके बाद चीन ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए। बीजिंग ने अमेरिकी कदमों को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताया। चीन ने कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट पर निर्यात नियंत्रण और कुछ अमेरिकी कंपनियों पर रोक भी लगाई। इसके बाद दोनों तरफ टैरिफ बढ़ाने के कई दौर चले। चीन अमेरिका को आयात से ज्यादा निर्यात करता है, इसलिए उसके पास टैरिफ लगाने के लिए कम सामान थे। इसलिए उसने निर्यात नियंत्रण जैसे अन्य तरीके भी अपनाए। 2025 में भी यह सिलसिला चला। चीन ने अमेरिकी कदमों को धमकी और दबाव बताया था।

पाकिस्तान को राजनाथ सिंह की चेतावनी, आतंकवाद जारी रहा तो हमले के लिए भारत तैयार

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जब-जब पड़ोसी देश आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा, तब-तब भारत आतंकवादियों के खिलाफ हमले करने के लिए तैयार रहेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत शांति चाहता है। भारत न तो युद्ध चाहता है और न ही किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करना चाहता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि शांति की इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। समाचार चैनल एनडीटीवी के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पड़ोसी देश कहकर पाकिस्तान की ओर इशारा किया। जमीन पर जीत ही युद्ध में जीत का एकमात्र पक्का सबूत इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल धीरज सेठ ने कहा है कि टेक्नोलॉजी निश्चित रूप से लड़ाइयों को छोटा कर रही है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह युद्धों को भी छोटा करे। उन्होंने कहा कि जमीन पर जीत ही युद्ध में जीत का एकमात्र पक्का सबूत है। उन्होंने आगे कहा, "आज सोशल मीडिया पर हम दुनिया भर में युद्ध से जुड़ी कई खबरें और बातें देखते हैं। जहां जानकारी और नैरेटिव के जरिए असली लड़ाई की तस्वीर को धुंधला करने की कोशिश की जाती है। इससे अनिश्चितता और भ्रम पैदा होता है।'' उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि इस सब शोर-शराबे के बीच एक सच्चाई कभी नहीं बदलती। सफलता के लिए जमीन हमेशा एकमात्र ठोस और काम की चीज रहेगी। जीत को हमेशा इलाके के आधार पर मापा गया है, मापा जाता है और मापा जाएगा। उस इलाके पर कब्जा करने, उसे सुरक्षित करने और उसकी रक्षा करने का काम सेना ही करेगी।" पाकिस्तान ने बीत कई वर्षों में कई ऐसे आतंकी नेटवर्क को पनाह दी है जिन्होंने भारत में हमले किए हैं। भारत का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि पाकिस्तानी या पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई आतंकी हमले किए हैं। आपको बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के मशहूर टूरिस्ट टाउन पहलगाम पर हमला किया। इस हमले में एक नेपाली नागरिक समेत 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में मुजफ्फराबाद, कोटली, बहावलपुर, रावलकोट, चकस्वारी, भीमबर, नीलम घाटी, झेलम और चकवाल की जगहों को निशाना बनाया गया। राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत बातचीत में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो बातचीत वहीं खत्म हो जाएगी। भारत सहयोग चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय हित की कीमत पर नहीं।"

सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे, PM मोदी बोले- आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति साफ

नई दिल्ली  रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 138वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय सेना द्वारा लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पार की गई 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद का जवाब मजबूत और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक ने दुनिया के सामने भारत की आतंक-रोधी नीति का एक नया उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि देश कल यानी 28 सितंबर को इस स्ट्राइक की दसवीं वर्षगांठ मनाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया यह देखकर हैरान रह गई थी कि आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के लिए किस तरह बहादुर भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण-रेखा पार की थी। 'आतंकवादी हमलों का दिया जाएगा मुंहतोड़ जवाब' उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों के कारण देश लंबे समय से दर्द झेल रहा था और सर्जिकल स्ट्राइक इसी का निर्णायक जवाब था। पिछले दशक में बालाकोट एयरस्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने बार-बार यह संदेश दिया है कि आतंकवादी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले देश में सिलसिलेवार धमाका आम बात थी। 13 सितंबर, 2008 को दिल्ली के सिलसिलेवार धमाकों में कई लोग मारे गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई में 26 नवंबर का हमला हुआ लेकिन अब भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति पर चल रहा है और इसका नतीजा सामने है। जनगणना को लेकर क्या बोले पीएम मोदी? प्रधानमंत्री ने जनगणना के संबंध में कहा कि इसका पहला चरण लगभग सभी राज्यों में पूरा हो गया है और 32 करोड़ से ज़्यादा परिवारों का डेटा दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के दूरदराज के और बर्फीले इलाकों में अभी काम चल रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि इन इलाकों से कई प्रेरणादायक अनुभव सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत चमोली के माणा गांव में 83 साल की पूर्णिमा रावत के साथ हुई। माणा को देश का पहला गांव माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उत्तरकाशी के बागौरी गांव में होमस्टे चलाने वाले हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल तरीके से अपना ब्योरा खुद दर्ज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना सभी की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और लोग अपने मोबाइल से ही अपनी और अपने परिवार की जानकारी 17 भाषाओं में दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने लोगों से ऑनलाइन पोर्टल se.census.gov.in पर जानकारी देने की अपील की और कहा कि पूरी प्रक्रिया में लगभग 20 मिनट लगते हैं और किसी दस्तावेज को अपलोड नहीं करना पड़ता। अब तक 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा लोगों ने मोबाइल से अपना ब्योरा दर्ज कराया है। नागरिकों के बारे में सही जानकारी देश के भविष्य की सटीक तस्वीर बनाने में मदद करती है। पीएम मोदी ने अशोक सिंघल को किया याद प्रधानमंत्री ने कहा कि आज विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल की सौवीं जयंती है। उन्होंने कहा कि सिंघल ने अपना पूरा जीवन संस्कृति, समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया। 27 सितंबर, 1926 को आगरा में जन्मे अशोक सिंघल ने समाज में रहते हुए भी एक तपस्वी जैसा जीवन जिया। राम जन्मभूमि आंदोलन को उन्होंने जो दिशा और ऊर्जा दी, अयोध्या में भव्य मंदिर उसी का परिणाम है। सिंघल ने सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी। सोमनाथ मंदिर को लेकर क्या कहा? प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने इस साल की शुरुआत सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के साथ की। उन्होंने बताया कि महमूद गजनवी ने पहली बार 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था, फिर भी यह मंदिर अपनी पूरी भव्यता के साथ खड़ा है। वर्ष 1026 ईस्वी में जब गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया था, उसी साल गुजरात के मोढेरा में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर को भी हमला कर नष्ट कर दिया गया था जिसे राजा भीमदेव ने 1025 में बनवाया था। पीएम मोदी ने कहा कि मोढेरा सूर्य मंदिर को बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने भी नष्ट कर दिया था। हमारे लिए सूर्य प्रकाश, ऊर्जा, विज्ञान और निरंतरता की प्रेरणा का प्रतीक है, इसीलिए आज मोढेरा न केवल अपने सूर्य मंदिर के लिए जाना जाता है, बल्कि देश का पहला सूर्य ग्राम यानी सोलर विलेज भी बन गया है। मोढेरा में पर्यटकों के लिए कई आकर्षण और सुविधाओं की शुरूआत की गई है। मकर संक्रांति के बाद जनवरी में मोढेरा नृत्य महोत्सव होता है। इसमें सांस्कृतिक और शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। स्वच्छता अभियान की दिलाई याद प्रधानमंत्री ने आगामी 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती की चर्चा करते हुए कहा कि स्वच्छता, बापू के जीवन के मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के युवा एक नदी को साफ करने का काम कर रहे हैं। इसी तरह, आंध्र प्रदेश में युवा पुरानी बावड़ियों और कुओं की सफाई कर रहे हैं, जिससे भारत की प्राचीन विरासत को पुनर्जीवित करने में मदद मिल रही है। मुंबई में कुछ युवा समुद्र तटों को साफ रखने की पहल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दिल्ली में बच्चे और युवा कचरा अलग करने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने ते लिए जागरूकता बढ़ा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में विद्यार्थी स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पिकनिक स्थलों के बाजार-क्षेत्रों की सफाई कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों की शुरुआत एक व्यक्ति से होती है और दूसरे लोगों के जुड़ने से आंदोलन बढ़ता जाता है। यही जन- भागीदारी का सार है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नशा मुक्त युवा अभियान प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा–मुक्त युवा अभियान के तहत देश के लाखों युवाओं ने हाल ही में, नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा की है और इसकी जानकारी दूसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी ली है। यह अभियान सौ सप्ताह चलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ही देश भर में हजारों शपथ और जागरूकता कार्यक्रम हुए हैं। उन्होंने नशा-मुक्ति का संदेश पहल की सराहना की। इसमें युवा अपनी भाषा और अपने तरीके से इस संदेश का प्रसार करते … Read more

आतंकवाद के खिलाफ दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित पाकिस्तान, 2025 में 1,139 मौतें

वशिंगटन जब सांप पालोगे तो एक दिन तुमको डसेगा ही', ये पुरानी कहावत इन दिनों पाकिस्तान पर सटीक बैठ रही है। भारत के खिलाफ जहां पाकिस्तान ने सांप यानी आतंकी पाले अब वहीं उसे डंस रहे हैं। ये बात कोई और कोई नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के लोग कह रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने अपने ही मुल्क की सच्चाई दुनिया के सामने लाई। उन्होंने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बताए जाने पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान अब आतंकी संगठनों को लेकर अपनाई गई अपनी पुरानी नीतियों के नतीजे भुगत रहा है। 'सांप पालोगे तो डसेगा ही…' हुसैन हक्कानी ने एक्स पर ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान की स्थिति वाला एक ग्राफिक शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि जब कोई अपने घर के पीछे सांप पालता है तो एक दिन वही सांप घर के लोगों को भी काट सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने करीब 50 साल पहले चरमपंथी जिहादी संगठनों को हथियार और समर्थन देना शुरू किया था। अब वही पाकिस्तान आतंकवादी हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में सबसे ऊपर है। हक्कानी ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों से कोई सबक सीखने के लिए तैयार है। ये बयान इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की 2026 की रिपोर्ट जारी होने के बाद आई हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान को आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में पहले स्थान पर रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी 1,139 मौतें हुईं और 1,045 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2025 में सबसे ज्यादा रहा। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान नंबर-1 रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में 8.574 अंक हासिल किए और इस मामले में बुर्किना फासो से आगे रहा। पाकिस्तान हर साल इस इंडेक्स में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों में शामिल रहा है। हालांकि, 2025 में पहली बार पाकिस्तान इस सूची में नंबर-1 पर पहुंचा। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह लगातार छठा साल है, जब देश में आतंकवाद से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। हालांकि, आतंकवादी घटनाओं की संख्या में थोड़ी कमी आई। 2024 में पाकिस्तान में 1,098 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2025 में घटकर 1,045 रह गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में किडनैंपिग घटनाओं में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई। 2024 में ऐसी 101 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 655 हो गईं। वहीं, दुनियाभर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में कमी आई है। 2025 में आतंकवाद के कारण 5,582 लोगों की मौत हुई, जो 2024 के मुकाबले 28 फीसदी कम है। इसी तरह आतंकवादी हमलों की संख्या भी करीब 22 फीसदी घटकर 2,944 रह गई। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के मुताबिक, 81 देशों में आतंकवाद की स्थिति में सुधार हुआ, जबकि 19 देशों में हालात पहले से खराब हुए। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हाल बेहाल रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पश्चिमी इलाके आतंकवादी गतिविधियों के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में हुए 74 फीसदी से ज्यादा आतंकवादी हमले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हुए। इन दोनों राज्यों में आतंकवाद से जुड़ी करीब 67 फीसदी मौतें भी हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी और इसके बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़े हमले हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) तथा बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) की बढ़ती हिंसा ने देश के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पाकिस्तान के लिए काल बनी TTP इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों के पीछे सबसे बड़े संगठनों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, टीटीपी लगातार पांचवें साल पाकिस्तान का सबसे घातक आतंकवादी संगठन रहा। 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से हुई 56 फीसदी मौतों के लिए टीटीपी को जिम्मेदार बताया गया। इस दौरान संगठन ने 595 हमले किए, जिनमें 637 लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले करीब 13 फीसदी ज्यादा है। आईईपी ने टीटीपी को 2025 में दुनिया का तीसरा सबसे घातक आतंकवादी संगठन भी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में टीटीपी अकेला ऐसा संगठन था, जिसके कारण होने वाली मौतों में 2025 में बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईईपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया के चार सबसे घातक आतंकवादी संगठनों में इस्लामिक स्टेट, जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (जेएनआईएम), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अल-शबाब शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में संगठन ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें से ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा इलाके में हुए। रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र टीटीपी की आतंकवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पैसेंजर ट्रेन पर BLA के हमले का जिक्र रिपोर्ट में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की बढ़ती गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में हुए सबसे बड़े आतंकवादी हमलों में से एक के पीछे बीएलए का हाथ था। रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादियों ने क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया और इसके बाद एक पैसेंजर ट्रेन पर कब्जा कर लिया। इस दौरान 442 लोगों को बंधक बनाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना में 21 बंधकों, 4 सैन्यकर्मियों और 33 आतंकवादियों की मौत हुई। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के अनुसार, टीटीपी के हमलों में लगातार चार साल से बढ़ोतरी हो रही है। 2025 में टीटीपी ने 595 हमले किए और ये सभी हमले पाकिस्तान में हुए। इनमें ज्यादातर हमले अफगानिस्तान की … Read more

होर्मुज खोलने की ईरान की शर्तें ट्रंप को मंजूर नहीं, 7 दिन के प्रस्ताव पर बढ़ा तनाव

वाशिंगटन ईरान ने जब सात दिन में होर्मुज को खोलने के लिए अपनी शर्तें रखीं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें शिरे से खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज बंद होने से और उसके प्लांट तबाह होने की वजह से ईरान की कमाई बंद हो गई है। ऐसे में ईरान के लोग भूखों मरने लगे हैं। इसीलिए वह होर्मुज खोलने को बेताब हो रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को ऐसे नहीं बख्शेंगे। ईरान ने क्या कहा था ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने के उद्देश्य से पेश किए गए प्रस्ताव के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को ईरान में प्रवेश की अनुमति देने के लिए तैयार है। 'सीबीएस न्यूज' के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' को दिए एक इंटरव्यू में पेज़ेशकियान ने कहा कि अगर अमेरिका रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने और परमाणु वार्ता बहाल करने के ईरान के नए प्रस्ताव पर हामी भरता है, तो ईरान "अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन करेगा।" इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सप्ताह प्रस्ताव दिया था कि व्यापक परमाणु समझौते की दिशा में शुरुआती कदम के रूप में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू होने के सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर घोषित इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अराघची ने अपने टेलीग्राम चैनल पर प्रकाशित ईरानी मीडिया के साथ बातचीत में कहा, "हमने अमेरिकी राष्ट्रपति की शुरुआती प्रतिक्रिया देखी। हालाँकि, मध्यस्थों के ज़रिए हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है।" ईरानी मंत्री ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई विरोधाभासी बयान दिए हैं। ईरानी राजनयिक ने आगे कहा, "हम मध्यस्थों से अंतिम रुख का इंतज़ार कर रहे हैं, और उसी के आधार पर हम अपने फ़ैसले लेंगे।" उन्होंने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की दिशा में कोई भी प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिका ईरान की शर्तों को पूरा करे। जून के मध्य में अमेरिका और ईरान ने शांति समझौता करने की प्रक्रिया शुरू करने के इरादे से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। हालाँकि, तीन हफ़्ते बाद, तनाव का एक नया दौर शुरू हो गया। वाशिंगटन ने तेहरान पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए। फ़िलहाल, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बंद है।

आरक्षण छोड़ने की मांग क्यों कर रहा तमिलनाडु का यह SC समुदाय? जानें देवेंद्रकुला वेल्लालर की पूरी कहानी

चेन्नई तमिलनाडु में एक जाति है देवेंद्रकुला वेल्लालर (Devendra kula Vellalar- DVK), जो कि दलित समुदाय से संबंध रखती है। आज जहां देश में कई जातियां आरक्षण के लाभ के लिए खुद को पिछड़ा घोषित कराने की होड़ में हैं, वहीं अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल यह समुदाय SC सूची से बाहर होने की कोशिश कर रहा है। इनका साफ कहना है कि इन्होंने SC/ST कानून का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय किया है। इडिया टुडे की एक संडे स्पेशल रिपोर्ट में कहा गया है कि आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला पर SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। तमिलनाडु के तेनकासी से भाजपा जिलाध्यक्ष और इसी समुदाय से आने वाले अनंतन अय्यासामी ने प्रोफेसर पर लगे आरोपों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि डीवीके समुदाय ने स्वैच्छिक रूप से यह सिद्धांत अपनाया है कि वे किसी के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज नहीं कराएंगे, क्योंकि उनका मानना है कि इस कानून के दुरुपयोग से सामाजिक कटुता और दुश्मनी बढ़ती है। देवेंद्रकुला वेल्लालर (DKV) कौन हैं? यह समुदाय तमिलनाडु की कुल अनुसूचित जाति आबादी का एक बड़ा हिस्सा है और राज्य की कुल आबादी में इनकी हिस्सेदारी 5% से 9% के बीच है। मुख्य रूप से यह समुदाय दक्षिणी तमिलनाडु और कावेरी डेल्टा क्षेत्रों जैसे कि मदुरै, रामनाथपुरम, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी आदि में रहती है। देवेंद्रकुला का अर्थ भगवान इंद्र के वंशज से है और वेल्लालर का संबंध कृषि-खेती से है। यह मुख्य रूप से एक कृषक और गो-पालक समुदाय है। मार्च 2021 में संसद द्वारा एक विधेयक पारित करके पल्लार सहित सात उप-जातियों को मिलाकर देवेंद्रकुला वेल्लालर नाम से एक पहचान दी गई थी। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह ने भी समुदाय के द्वारा खुद के सामाजिक उत्थान के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की थी। SC सूची से बाहर होने की मांग क्यों? इंडिया टुडे के मुताबिक, इस समुदाय के नेताओं का कहना है कि यह मांग आर्थिक संपन्नता के कारण नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान के लिए है। उनका मानना है कि SC टैग से जुड़ा सामाजिक कलंक समुदाय के समग्र विकास, विशेषकर व्यवसाय और व्यापार में बाधा बनता है। आपको बता दें कि तमिलनाडु में पहले से ही 69% आरक्षण लागू है। इनका मानना है कि SC श्रेणी में होने से इन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा, उल्टा सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है। समुदाय की मांग है कि उन्हें पहले SC से OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में ट्रांसफर किया जाए। 10-15 साल OBC में रहने के बाद अंतिम लक्ष्य सामान्य यानी कि अनारक्षित कैटेगरी में शामिल होना है। | समुदाय के भीतर मतभेद इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा हिंदू परंपराओं से जुड़ा है। वे SC सूची से हटने और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने के पक्ष में हैं। DKV समुदाय के वे लोग जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है, वे इस मांग का विरोध करते हैं। वे आरक्षण मॉडल में विश्वास रखते हैं। आपको बता दें कि तमिलनाडु विधानसभा ने 2023 में एक प्रस्ताव पारित कर धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों को भी SC आरक्षण देने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी आपको बताते चलें कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और अनूठा मामला है। कोई समुदाय आरक्षण के लाभ और सख्त कानूनों का मोह त्यागकर सामाजिक गरिमा और आत्मसम्मान के लिए खुद को इस कैटेगरी से बाहर करने की मांग कर रहा है।