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मिडिल ईस्ट में बढ़ेगी सैन्य ताकत! अमेरिका ने इज़रायल, कतर, कुवैत और UAE को दिया ₹81 हजार करोड़ का हथियार सौदा प्रस्ताव

वाशिंगटन अमेरिका ने इज़रायल, कतर, कुवैत और यूएई को 8.6 बिलियन डॉलर्स (करीब 81 हज़ार करोड़ रूपए) के हथियार बेचने का ऑफर दिया है। इन हथियारों में कई एडवांस वेपन्स, मिसाइलें, एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स शामिल हैं। ये हथियार इन देशों को दुश्मन के हमलों से बचाव और सटीक जवाबी कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस की समीक्षा को दरकिनार करते हुए यह फैसला लिया है। क्षेत्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार इन चारों देशों को हथियार बेचना मिडिल ईस्ट की क्षेत्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी है। अमेरिका का मानना है कि इन देशों के हथियारों स्टॉक की भरपाई और रक्षा क्षमता मजबूत करना ज़रूरी है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। ट्रंप प्रशासन ने इसे आपातकालीन ज़रूरत बताया, क्योंकि सामान्य प्रक्रिया में कांग्रेस को 30 दिन का समय मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह डील अमेरिका की मिडिल ईस्ट (Middle East) नीति को दर्शाता है और अमेरिकी रणनीतिक हितों को मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम है। आलोचना हुई शुरू हालांकि कुछ आलोचक अमेरिका के इस प्रस्ताव को महंगा और अनावश्यक बता रहे हैं, खासकर जब अमेरिका में घरेलू मुद्दे लंबित हैं। गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ युद्ध से अमेरिका के हथियारों का स्टॉक काफी कम हो गया है।

अमेरिका की एक बड़ी कंपनी का अंत, रातोंरात बंद होगी – ट्रंप भी नहीं कर पाए कुछ

वाशिंगटन कम बजट में फ्लाइट की सुविधा देने वाली अमेरिका की एक एयरलाइन कंपनी बंद होने की कगार पर आ गई है. आर्थिक तंगी से जूझ रही अमेरिकी एयरलाइन Spirit, सरकार से आवश्यक वित्तीय सहायता न मिलने के बाद बंद होने के कगार पर पहुंच गई।  राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भी इसे बचाने के प्रयास में विफल रहे हैं. ट्रंप का कहना है कि उनकी सरकार ने बजट एयरलाइन को दिवालिया होने से बचाने के लिए टैक्‍सपेयर्स के पैसे से अधिग्रहण का 'अंतिम प्रस्ताव' दिया था, लेकिन समझौता नहीं हो पाने के कारण एयरलाइन के भविष्य को संदेह में डाल दिया है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कंपनी शटडाउन की तैयारियां की जा रही है. स्पिरिट एयरलाइंस या ट्रंप प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह दो साल में दूसरी बार है, जब एयरलाइन दिवालियापन की कार्यवाई में फंसी है, लेकिन इस बाद ऑपरेशन बंद होने जा रहा है. ट्रंप ने पिछले सप्‍ताह एयरलाइन को फाइनेंशियल मदद देने का विचार किया था, लेकिन अब इस कंपनी आर्थिक मदद नहीं मिली है।  17,000 से ज्‍यादा नौकरियों पर संकट स्पिरिट एयरलाइन के वकील मार्शल ह्यूब्नर ने कहा कि एयरलाइन बंद होने से लगभग 17,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. इस कंपनी की स्थिति कोविड महामारी के बाद से ही खराब चल रही है. ऑपरेशनल कॉस्‍ट और कर्ज में भारी बढ़ोतरी के कारण कंपनी पर बोझ बढ़ता जा रहा है।  2020 से 2.5 अरब डॉलर से ज्‍यादा नुकसान  नवंबर 2024 में दिवालियापन से बचने के लिए चैप्टर 11 के तहत आवेदन करने तक, स्पिरिट को 2020 की शुरुआत से 2.5 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका था. कोर्ट के दस्‍तावेज के अनुसार, बजट एयरलाइन ने अगस्त 2025 में एक बार फिर दिवालियापन से सुरक्षा की मांग की, जब उसने बताया कि उस पर 8.1 बिलियन डॉलर का कर्ज और 8.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति है।  लगातार बढ़ रहीं ईंधन की कीमतें इस एयरलाइंस की आर्थिक तंगी की समस्‍या ऐसे समय में और भी ज्‍यादा हो गई हैं, जब ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. कच्‍चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने के बाद से लगातार ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है. ऐसे में एयरलाइंस कंपनियों को घाटा हो रहा है. कई एयरलाइंस कंपनियों ने तो सरकार से ईंधन की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए गुहार भी लगाई हैं। 

तीन दिन बारिश का कहर: प्री-मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में चेतावनी जारी

नई दिल्ली प्री-मानसून (Pre-Monsoon) ने जब से देश में दस्तक दी है, असर दिखा रहा है। देश के कई राज्यों में बादल बरस रहे हैं और यह सिलसिला बना हुआ है। मानसून (Monsoon) के 2025 सीज़न में देशभर में शानदार बारिश हुई और कई राज्यों में तो पिछले कई सालों से ज़्यादा बारिश हुई। इसी को ध्यान में रखते हुए एक्सपर्ट्स ने पूर्वानुमान लगाया था कि 2026 में भी जोरदार बारिश होगी, लेकिन अल-नीनो के असर की भी संभावना बनी हुई है। इसी बीच अब देश में प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने कई राज्यों में 3, 4 और 5 मई को भारी बारिश का अलर्ट (Heavy Rain Alert) जारी किया है। उत्तरपश्चिम भारत उत्तरपश्चिम भारत में प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई जगह भारी बारिश होगी। साथ ही कई जगह रिमझिम बारिश का भी अलर्ट है। इस दौरान तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है। हवा की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है। दक्षिण भारत दक्षिण भारत में भी मौसम बदल गया है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, माहे, यनम, कराईकल और रायलसीमा में जमकर बादल बरसेंगे। इस दौरान कई जगह 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है। पूर्वी और मध्य भारत पूर्वी और मध्य भारत में भी प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में मौसम विभाग ने 3, 4 और 5 मई को मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में कई जगह भारी बारिश तो कई जगह हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि का भी अलर्ट है। हवा की रफ्तार 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है। उत्तरीपूर्व भारत उत्तरीपूर्व भारत में भी मौसम बदल गया है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में तेज़ बारिश होगी। इस दौरान कई जगह 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है।

मतगणना से पहले EVM कहाँ रहती हैं? जानिए स्ट्रॉन्ग रूम और उसके सख्त प्रोटोकॉल

नई दिल्ली बंगाल, तमिलनाडु सहित 5 राज्यों के चुनाव अब खत्म हो चुके हैं। चुनाव परिणाम सोमवार 04 मई 2026 को जारी किये जाएंगे। इसके बाद तय होगा कि कौन उस राज्य का अगला मुख्यमंत्री होगा। साथ ही चुनाव खत्म होते ही कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि वोटिंग मशीनें आखिर जाती कहां हैं और उन्हें सुरक्षित कैसे रखा जाता है? इसका जवाब है 'स्ट्रॉन्ग रूम'। यह एक ऐसा विशेष सुरक्षित स्थान होता है, जहां EVM और VVPAT मशीनों को मतगणना तक पूरी सुरक्षा में रखा जाता है। आमतौर पर स्ट्रॉन्ग रूम के लिए किसी सरकारी कॉलेज, पॉलिटेक्निक संस्थान या प्रशासनिक गोदाम को चुना जाता है। इन जगहों को पहले से तैयार किया जाता है, ताकि सुरक्षा और निगरानी में कोई कमी न रहे। वोटिंग के तुरंत बाद शुरू होती है प्रक्रिया मतदान समाप्त होते ही पोलिंग बूथ पर ही EVM और VVPAT मशीनों को सील कर दिया जाता है। इसके बाद इन्हें कड़ी पुलिस सुरक्षा में स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों को मौजूद रहने का मौका दिया जाता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। जब मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम में रख दी जाती हैं, तो कमरे को आधिकारिक तौर पर सील कर दिया जाता है। इस दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है, जिससे बाद में किसी तरह का विवाद न हो। सुरक्षा के कई स्तर स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा साधारण नहीं होती। इसके चारों तरफ मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरा बनाया जाता है। इसमें पुलिस और अर्धसैनिक बल 24 घंटे तैनात रहते हैं। हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे लगाए जाते हैं, जिनकी लगातार मॉनिटरिंग होती है। कई जगहों पर उम्मीदवारों को बाहर लगे स्क्रीन के जरिए लाइव निगरानी देखने की सुविधा भी दी जाती है। इससे भरोसा और पारदर्शिता दोनों बने रहते हैं। डबल लॉक और सील की खास व्यवस्था स्ट्रॉन्ग रूम के दरवाजे पर खास तरह की सील लगाई जाती है, जिस पर उम्मीदवारों के हस्ताक्षर होते हैं। इसका मतलब यह होता है कि अगर कोई छेड़छाड़ होगी, तो तुरंत पता चल जाएगा। इसके अलावा, 'डबल लॉक सिस्टम' भी होता है। यानी कमरे को खोलने के लिए दो अलग-अलग चाबियों की जरूरत होती है, जो अलग-अलग अधिकारियों के पास रहती हैं। इससे कोई एक व्यक्ति अकेले कमरे को नहीं खोल सकता। अंदर जाने की सख्त पाबंदी स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर जाने की अनुमति बेहद सीमित होती है। केवल रिटर्निंग ऑफिसर (RO), जिला निर्वाचन अधिकारी और अधिकृत चुनाव कर्मी ही अंदर जा सकते हैं। आम जनता, मीडिया और यहां तक कि उम्मीदवार भी अंदर नहीं जा सकते। हालांकि उनके एजेंट बाहर से निगरानी कर सकते हैं। काउंटिंग वाले दिन क्या होता है? मतगणना के दिन सुबह करीब 7 बजे स्ट्रॉन्ग रूम खोला जाता है। इस दौरान RO, चुनाव पर्यवेक्षक और उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। सबसे पहले सील की जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके बाद मशीनों को काउंटिंग हॉल तक ले जाया जाता है। इस पूरे रास्ते की भी वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। काउंटिंग हॉल में हर टेबल पर उम्मीदवार का एक एजेंट मौजूद रहता है, ताकि पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।

IMD का बड़ा अलर्ट: मई में होगी सामान्य से ज्यादा बारिश, हीटवेव से मिलेगी राहत

नई दिल्ली भारत में इस साल मई का महीना असामान्य रूप से गीला होने वाला है. भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि पूरे देश में मई 2026 में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी. बारिश सामान्य स्तर से 110 फीसदी अधिक हो सकती है।  इसका मतलब है कि जहां आमतौर पर कम बारिश होती है वहां भी इस बार खूब पानी बरसेगा. लेकिन इसके साथ गरज के साथ बादल, बिजली गिरना और तेज हवाएं भी चलेंगी जिनकी रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है. कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का भी खतरा है।  भारतीय मौसम विभाग के पास 1971 से 2020 तक का डेटा है. इस डेटा के अनुसार मई महीने में आमतौर पर उत्तर भारत और पूरे देश में 64.1 मिलीमीटर बारिश होती है. इस साल की पूर्वानुमान यह है कि बारिश इस सामान्य स्तर से 110 फीसदी ज्यादा हो सकती है. यानी करीब 70-71 मिलीमीटर या इससे भी ज्यादा हो सकती है।  ये असामान्य है क्योंकि मई का महीना आमतौर पर गरमी का होता है, बारिश का नहीं. मई में तो लू यानी गर्म हवाएं चलती हैं. लेकिन इस बार ये पैटर्न बदलने वाला है।  बारिश का असर क्या होगा? अच्छी खबर ये है कि इतनी बारिश से तापमान में कमी आएगी. जो भयंकर गर्मी आ रही थी उसमें से थोड़ी राहत मिलेगी. मिट्टी में नमी आएगी जिससे खेतों को फायदा होगा. जल स्रोतों में पानी भर जाएगा। लेकिन बुरी खबर ये है कि बारिश समान रूप से नहीं होगी. कुछ इलाकों में कम बारिश होगी जबकि कुछ इलाकों में बहुत ज्यादा होगी. पूर्व और उत्तरपूर्व भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहेगी।  किन इलाकों में सबसे ज्यादा बारिश? सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम को सबसे ज्यादा बारिश मिलेगी. यहां 5 मई तक बहुत भारी बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज हवाएं चलेंगी. पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी ऐसा ही होगा।  पश्चिमी हिमालय, उत्तर भारत के मैदान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में 3 से 6 मई के बीच अलग-अलग जगहों पर गरज और बिजली आएगी. पूर्वी भारत और पूर्वी तट पर भी ऐसी हालत होगी।  खतरे क्या हैं? अगर कम समय में बहुत सारी बारिश एक साथ हो जाए तो कई शहरों में बाढ़ आ सकती है. खेतों में फसलें खराब हो सकती हैं. तेज हवाएं बिजली के खंभे और पेड़ों को गिरा सकती हैं. बिजली गिरने से लोगों को जान का खतरा हो सकता है।  ये मौसम क्यों अजीब है? मई वसंत और मानसून के बीच का महीना होता है. इस समय कुछ असामान्य मौसम की घटनाएं होती हैं. लेकिन इस बार गरज और बादलों की गतिविधि सामान्य से बहुत ज्यादा होने वाली है।  लोगों को क्या करना चाहिए? मौसम विभाग ने कहा है कि सभी राज्यों के अधिकारियों और लोगों को अपने इलाके की मौसम सूचना पर नजर रखनी चाहिए. विशेषकर उन इलाकों में जहां भारी बारिश और गरज के खतरे हैं. घरों में पानी निकास के रास्ते साफ रखें ताकि बाढ़ न आए. किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए। 

सरकार का नया नियम: LPG कनेक्शन बंद होने से बचने के लिए फटाफट करें ये जरूरी काम

 नई दिल्‍ली वेस्‍ट एशिया में जंग के कारण मिडिल ईस्‍ट से गैस और तेल का आयाता पूरे फ्लो के साथ नहीं आ पा रहा है, जिस कारण भारत में गैस के दाम में उछाल और पैनिंग बाइंग जैसी समस्‍याएं देखने को मिली है. ऐसे में सरकार ने एलपीजी बुकिंग और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन को लेकर कुछ नियमों को सख्‍त किया है, जो एक मई से देशभर में लागू हो रहे हैं।  इसी में से एक नियम डबल गैस कनेक्‍शन को लेकर है. सरकार का कहना है कि अगर आपके पास एलपीजी गैस सिलेंडर का कनेक्‍शन है और आपके घर पर या घर के आसपास पीएनजी पाइपलाइन का भी कनेक्‍शन है, तो आपको अपने LPG सिलेंडर को सरेंडर करना पड़ेगा. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो भी आपको तेल कंपनियों की ओर से गैस की सप्‍लाई नहीं की जाएगी. साथ ही आपको केवाईसी गाइडलाइन का भी पालन करना होगा, बिना केवाईसी के भी सिलेंडर रिफील करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।  इस कारण कई परिवारों के लिए, 1 मई से सब्सिडी वाले खाना पकाने के गैस सिलेंडरों तक पहुंच खत्‍म हो जाएगाी. तेल कंपनियों द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों का उद्देश्य डुप्लिकेट कनेक्शन, सब्सिडी वाले सिलेंडरों के दुरुपयोग और निष्क्रिय खातों पर अंकुश लगाना है।  ई-केवाईसी वेरिफिकेशन अगर आपके पास भी एलपीजी का कनेक्‍शन है तो आपको आधार बेस्‍ड ई-केवाईसी वेरिफिकेशन फटाफट करवा लेना चाहिए. जिन उपभोक्ताओं का आधार कार्ड वेरिफिकेशन अधूरा है, उन्हें वेरिफिकेशन पूरा होने तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं मिल सकती है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन कस्‍टमर्स ने पहले ही अथेंटिफिकेशन पूरा कर लिया है, उन्हें यह प्रक्रिया दोहराने की आवश्यकता नहीं होगी।  इसके अलावा, कई क्षेत्रों में ओटीपी आधारित डिलीवरी अनिवार्य होता जा रहा है. ग्राहकों को उनके रजिस्‍टर्ड मोबाइल नंबर पर एक डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड प्राप्त होगा, और ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद ही सिलेंडर दिया जाएगा. खबरों के मुताबिक, तेल कंपनियां घरेलू सिलेंडरों की जमाखोरी और व्यावसायिक हेराफेरी को कम करने के प्रयास में बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर को भी बढ़ा रही हैं।   जून 2025 से पहले एलपीजी रिफिल करवाने वालों को भी करना होगा वेरिफाई  सबसे बड़ा जोखिम उन उपभोक्ताओं के लिए है जिनके केवाईसी रिकॉर्ड अधूरे या पुराने हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन परिवारों ने जून 2025 से पहले एलपीजी सिलेंडर रिफिल करवाया था, उन्हें संभावित निष्क्रिय उपयोगकर्ता के रूप में माना जाएगा. ऐसे उपभोक्ता ई-केवाईसी वेरिफिकेशन पूरा होने तक नए सिलेंडर ऑर्डर नहीं कर पाएंगे।  अब दो कनेक्‍शन नहीं  जांच के दायरे में आने वाली एक अन्य कैटेगरी में वे घर शामिल हैं, जिनके पास पहले से ही PNG का पाइपलाइन कनेक्शन है. अधिकारी दोहरे ईंधन का उपयोग करने वाले घरों की पहचान करने के लिए एलपीजी और पीएनजी डेटाबेस को रजिस्‍टर्ड कर रहे हैं. कई मामलों में, एक्टिव पीएनजी कनेक्शन वाले यूजर्स सब्सिडी वाले एलपीजी रिफिल या यहां तक ​​कि नए एलपीजी कनेक्शन के लिए भी योग्‍यता खो सकते हैं।  यूजर्स को क्‍या करना चाहिए?      अपने एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर के साथ आधार बेस्‍ड ई-केवाईसी प्रॉसेस पूरा करें.      तय करें कि ओटीपी डिलीवरी के लिए उनका मोबाइल नंबर अपडेट किया गया हो.      सब्सिडी ट्रांसफर के लिए यह जांच लें कि आधार बैंक खातों से ठीक से जुड़ा हुआ है या नहीं.      यह देखें कि इनएक्टिव या डुप्लिकेट कनेक्शन बंद कर दिए गए हैं.      क्‍या आपका एरिया पीएनजी कनेक्‍शन के तहत आता है या नहीं.   

45000 टन गैस के साथ होर्मुज से रवाना हुआ टैंकर, LPG सिलेंडर की कमी अब नहीं होगी

नई दिल्ली ईरान युद्ध और होर्मुज बंद होने की वजह से देश में एलपीजी गैस की किल्लत साफ नजर आ रही है। बीते दिनों सरकार ने 5 किलो के छोटे गैस सिलेंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर पर 1 हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। लोगों को आशंका यह भी है कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। इसी बीच एक राहत की खबर भी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक सुपरटैंकर कम से कम 45000 टन एलपीजी गैस के साथ होर्मुज को क्रॉस कर रहा है। इसके भारत पहुंचने से बड़ी राहत की उम्मीद है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुपरटैंकर होर्मुज को पार कर गया है या नहीं। जानकारी के मुताबिक सर्व शक्ति टैंकर समुद्री रास्ते से उत्तर की ओर बढ़ा है। शनिवार को यह लारक और केसम आइलैंड के पास था। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ओमान की खाड़ी से होकर यह सुपरटैंकर भारत पहुंच सकता है। बता दें कि अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान के होर्मुज को बंद रखने की वजह से इस रास्ते से टैंकर निकल नहीं पा रहे हैं। 13 अप्रैल से ही अमेरिका की नाकेबंदी जारी है। फारस की खाड़ी में भारत के 14 जहाज रिपोर्ट्स के मुताबिक नाकेबंदी की वजह से भारत के कम से कम 14 जहाज फारस की खाड़ी में ही रुके हुए हैं। दो जहाजों ने होर्मुज से निकलने का प्रयास किया था लेकिन उन्हें ईरान की चेतावनी के बाद वापसलौटना पड़ा। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि समुद्र में वैकल्पिक रास्ते से भी टैंकर निकल रहे हैं। ईरान से कनेक्शन वाले कम से कम 34 टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर निकल चुके हैं। IOC है खरीदार ‘बिजनेस स्‍टैंडर्ड’ ने ‘ब्‍लूमबर्ग’ का हवाला देते हुए बताया है कि शिपिंग दस्तावेजों के अनुसार, इस कार्गो का खरीदार सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) है. हालांकि, कंपनी की तरफ से इसपर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यदि ‘सर्व शक्ति’ नाम का यह टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर लेता है, तो यह अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत से जुड़े किसी टैंकर की पहली सफल रवानगी होगी. दरअसल, अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर हालिया नाकेबंदी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. पिछले महीने एक सप्ताहांत के दौरान यह मार्ग थोड़े समय के लिए खुला था, लेकिन ईरानी सैन्य कार्रवाई के कारण इसे फिर बंद कर दिया गया. इस दौरान कई जहाजों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा. भारत (जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है) इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मध्य-पूर्व से आपूर्ति बाधित होने के कारण देश में LPG की भारी कमी हो गई है, जिससे कई जगहों पर लंबी कतारें और रसोई सेवाओं में कटौती देखने को मिली है।  सरकार ने उठाए हैं कई कदम इस संकट की स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं. केंद्र ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि LPG टैंकरों को प्राथमिकता दी जाए. साथ ही घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के अनुसार, देश में LPG उत्पादन को 60% बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जबकि खपत में भी 10,000 टन की कमी आई है. हालांकि, हालात तब और जटिल हो गए जब अप्रैल में ईरान ने पहले मार्ग खोलने का दावा किया, लेकिन बाद में जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं. इस दौरान ‘देश गरिमा’ नामक एक भारतीय टैंकर ने ट्रांसपोंडर बंद कर जोखिम उठाते हुए रास्ता पार किया था।  भारत को मिली है बड़ी सफलता बताया जा रहा है कि भारत ने अब तक कूटनीतिक बातचीत के जरिए आठ LPG टैंकरों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई है और वैकल्पिक मार्गों की भी तलाश जारी है. ‘सर्व शक्ति’ का यह सफर 10 से 14 घंटे में पूरा हो सकता है. हालांकि, क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और सुरक्षा जोखिम अब भी बने हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सर्व शक्ति’ की यह यात्रा न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।  क्या है वैकल्पिक रास्ता नियम के मुताबिक अमेरिका की नौसेना किसी और देश की समुद्री सीमा में किसी जहाज को नहीं रोक सकती है। ऐसे में अगर कोई जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र से होकर चाबहार बंदरगाह पहुंच जाता है और फिर दक्षिण होकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के रास्ते निकलना चाहे तो यह वैकल्पिक रास्ता हो सकता है। इस रास्ते से महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक या फिर केरल के पोर्ट पर पहुंचा जा सकता है। दूसरा रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर गुजरता है।हालांकि इसमें खतरा बहुत है। बढ़ सकते हैं पेट्रोल डीजल के भी दाम वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और चार साल से खुदरा कीमतें स्थिर रहने से बढ़ते घाटे के बीच सरकारी सूत्रों ने निकट भविष्य में पेट्रोल एवं डीजल के दाम बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि बदले हुए हालात में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। हालांकि इसमें हल्की गिरावट आई है, फिर भी कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।

NHAI ने FASTag के गलत इस्तेमाल पर की कार्रवाई, चालाक यूजर्स को ब्लैकलिस्ट और दोगुना टोल

नई दिल्ली नया गंगा एक्सप्रेस-वे हो या फिर अन्य कोई हाइवे, टोल कलेक्शन के लिए FASTag का यूज होता है. अब भारत सरकार के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक पोस्ट करके कुछ लोगों की चालाकी के बारे में बताया है. साथ ही उनको सलाह दी है कि फास्टैग के साथ गलती ना करें।  NHAI ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम) पर एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में अथॉरिटी ने बताया है कि फास्टैग को अगर विंड स्क्रीन पर चिकपाया नहीं जाता है तो इसकी वजह से फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो सकता है. फास्टैग को लेकर अथॉरिटी ने कहा है कि इसको विंड स्क्रीन पर पेस्ट करना चाहिए. साथ ही वह क्लियर दिखना भी चाहिए।  फास्टैग के लिए लगा रहे ट्रांस्पेरेंट पॉकेट  बहुत से कार चालक ऐसा नहीं कर रहे हैं. वे विंड स्क्रीन पर एक ट्रांस्पेरेंट पॉकेट लगा देते हैं. इसके बाद जब वह एक्सप्रेस-वे या हाईवे पर पहुंचते हैं तो उस पॉकेट के अंदर फास्टैग को रख देते हैं, जबकि फास्टैग को विंडस्क्रीन पर चिपकाना चाहिए।  सफर के बाद निकाल लेते हैं  बहुत से लोग जब एक्सप्रेसवे या हाइवे पर नहीं जाते हैं तो उस फास्टैग को निकालकर रख लेते हैं. आशंका है कि एक फास्टैग का यूज दूसरे नंबर की कार में भी हो सकता है. अथॉरिटी ने बताया है कि ऐसा करना सरासर गलत है. इसकी वजह से फासल्टैग ब्लैक लिस्ट भी हो सकता है।  फास्टैग ब्लैक लिस्ट होने की वजह से वह टोल गेट पर काम नहीं करेगा. ऐसे में आपको पेमेंट कैश में करनी पड़ सकती है, जिसके लिए डबल टोल टैक्स तक की पेमेंट करनी पड़ सकती है।  FASTag क्या है?  FASTag, असल में एक इलेक्ट्रोनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है. यह फास्टैग एक वॉलेट अकाउंट से कनेक्ट होता है. जैसे ही कार टोल प्लाजा पर पहुंचती है, सिस्टम विंड स्क्रीन पर लगे फास्टैग को ट्रैक करता है और एक्टिवेट फास्टैग के लिए गेट ओपन कर देता है।  फास्टैग अगर ब्लैक लिस्ट है या फिर उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है तो टोल गेट ओपन नहीं होंगे. ऐसे में आपको दोगुना टोल तक पे करना पड़ सकता है।   

पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए अमेरिका का बड़ा कदम, जारी किया विशाल कॉन्ट्रैक्ट

इस्लामाबाद अमेरिकी वायु सेना ने F-16 फाइटर जेट्स के रडार सिस्टम को लॉन्ग-टर्म तकनीकी और इंजीनियरिंग सपोर्ट देने के लिए 488 मिलियन डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान किया है। खास बात यह है कि अमेरिका की इस बड़ी रक्षा डील के दायरे में पाकिस्तान भी शामिल है। यह अहम कॉन्ट्रैक्ट प्रमुख रक्षा कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्पोरेशन को सौंपा गया है। इस कदम को अमेरिका के सहयोगी देशों की वायु सेना में F-16 की ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने के लिए अमेरिका की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है। डील और अपग्रेड से जुड़ी मुख्य बातें:     रडार सिस्टम की बढ़ेगी क्षमता: आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत मुख्य रूप से F-16 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाले 'APG-66' और 'APG-68' रडार सिस्टम को इंजीनियरिंग सपोर्ट दिया जाएगा।     2036 तक चलेगा काम: फाइटर जेट्स के अपग्रेड और सपोर्ट का यह काम अमेरिका के मैरीलैंड स्थित लिंथिअम हाइट्स में किया जाएगा और इसके 31 मार्च, 2036 तक जारी रहने का कार्यक्रम है।फंडिंग और मंजूरी: यूटाह स्थित अमेरिकी वायु सेना के लाइफसाइकिल मैनेजमेंट सेंटर द्वारा यह कॉन्ट्रैक्ट जारी किया गया है। इसके लिए वित्त वर्ष 2026 के फंड से शुरुआती तौर पर 2.64 मिलियन डॉलर की राशि जारी भी कर दी गई है। पाकिस्तान के अलावा किन-किन देशों को मिलेगा फायदा? यह कॉन्ट्रैक्ट अमेरिका के 'फॉरेन मिलिट्री सेल्स' (FMS) प्रोग्राम के तहत सहयोगी देशों के लिए किया गया है। इस डील में पाकिस्तान के अलावा बहरीन, बेल्जियम, चिली, डेनमार्क, मिस्र, ग्रीस, इंडोनेशिया, इराक, इजरायल, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, मोरक्को, नीदरलैंड, नॉर्वे, ओमान, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, थाइलैंड और तुर्किए शामिल हैं। 2040 तक बढ़ जाएगी पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की उम्र यह नया समर्थन पाकिस्तान को दिए जा रहे अमेरिकी सहयोग की एक कड़ी है। इससे पहले दिसंबर 2025 में अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने अपनी संसद को पाकिस्तान के F-16 बेड़े को अपग्रेड करने के लिए 686 मिलियन डॉलर के एक अलग पैकेज की जानकारी दी थी। इस 686 मिलियन डॉलर के पैकेज में 'लिंक-16' टैक्टिकल डेटा सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड और ट्रेनिंग सपोर्ट शामिल है। इस अपग्रेड योजना में 'आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड-ऑर-फो' सिस्टम, सटीक नेविगेशन टूल और सुरक्षित संचार उपकरणों में बदलाव भी शामिल किए गए हैं। DSCA के अनुसार, इस पैकेज का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के F-16 बेड़े का आधुनिकीकरण करना है ताकि विमानों की सर्विस लाइफ 2040 तक बढ़ाई जा सके। साथ ही इसका मकसद भविष्य में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए अमेरिका और अन्य सहयोगी बलों के साथ पाकिस्तान के तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) को और ज्यादा मजबूत करना है। इस अपग्रेड कार्यक्रम के लिए 'लॉकहीड मार्टिन' को प्रमुख ठेकेदार के रूप में चुना गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया था कि इस काम के लिए अमेरिकी कर्मियों को पाकिस्तान भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पाकिस्तान ने किया अमेरिकी मदद का स्वागत मामले से जुड़े एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने F-16 प्रोग्राम के लिए अमेरिका के लगातार मिल रहे सपोर्ट का स्वागत किया है। सूत्रों का कहना है कि इन अपग्रेड्स से विमानों की उम्र बढ़ेगी और सहयोगी प्रणालियों के साथ तकनीकी अनुकूलता बनी रहेगी। सूत्र ने यह भी बताया कि पाकिस्तानी वायु सेना ने हाल के वर्षों में अपने बेड़े में कई नए विकल्प शामिल किए हैं जिससे किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम हुई है, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मौजूदा F-16 क्षमताओं को बनाए रखने को काफी अहमियत देते हैं।

सुरक्षा के साए में बंगाल री-पोलिंग, 15 बूथों पर रिकॉर्ड 86.90% मतदान

कोलकाता बंगाल के डायमंड हार्बर व मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के 15 बूथों पर शनिवार को कड़ी सुरक्षा में पुनर्मतदान हुआ। डायमंड हार्बर के चार (बूथ नंबर 117, 179, 194 व 243) और मगराहाट पश्चिम के 11 (बूथ नंबर 46, 126, 127, 128, 142, 214, 215, 216, 230, 231 व 232) बूथों पर फिर से वोट पड़े। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शाम पांच बजे तक इन 15 बूथों पर कुल 86.90 प्रतिशत मतदान हुआ। मगराहाट पश्चिम में 86.11 प्रतिशत व डायमंड हार्बर में 87.60 प्रतिशत वोट पड़े। चूंकि मतदान जारी था, इसलिए वोट प्रतिशत बढ़ स्वाभाविक है। इन बूथों पर गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद चुनाव आयोग ने वहां नए सिरे से मतदान कराने का निर्णय लिया था। सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही इन बूथों के सामने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। फलता में फिर से कराया जा सकता है मतदान वहीं फलता विधानसभा क्षेत्र में भी फिर से मतदान कराने का आयोग निर्णय ले सकता है। इसे लेकर जल्द उच्च स्तरीय बैठक की जाएगी। सीईओ सूत्रों के अनुसार पुनर्मतदान का निर्णय लिए जाने पर आगामी चार मई को उक्त विस क्षेत्र के वोटों की गिनती स्थगित की जा सकती है। मालूम हो कि इस विधानसभा क्षेत्र में भी बूथों में गड़बड़ी की आयोग को कई शिकायतें मिली हैं। फलता में फिर तनाव, तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को धमकाने का आरोप इस बीच शनिवार को फलता के कासिमनगर में फिर तनाव फैल गया। तृणमूल पर भाजपा समर्थकों को मारने-पीटने व धमकाने का आरोप लगा है। इसका प्रतिवाद करते हुए भाजपा समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर विरोध-प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ तृणमूल ने इस आरोप को सिरे से नकारा है। आयोग ने इसे लेकर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मालूम हो कि फलता में उत्तर प्रदेश के सख्त मिजाज आइपीएस अधिकारी व बंगाल में चुनाव आयोग के पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा व यहां से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जहांगीर खान के बीच गत मंगलवार को वाकयुद्ध देखने को मिला था। अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को डराने-धमकाने से बाज आने की चेतावनी दी थी, इसपर जहांगीर ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा 'सिंघम' हैं तो वे भी 'पुष्पा' हैं और किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे।